व्यापार
विदेशी मुद्रा बाजार में भारी गिरावट, निवेशक चिंतित
30 Apr, 2026 09:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ऐतिहासिक गिरावट: रुपया 95.20 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँचा, कच्चे तेल और डॉलर की मजबूती ने बिगाड़ा खेल
मुंबई: विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार को कारोबार की शुरुआत होते ही भारतीय रुपये में 32 पैसे की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। रुपया 95.20 के सर्वकालिक निचले स्तर पर जा गिरा है। मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे आर्थिक केंद्रों के विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तनाव और डॉलर की बढ़ती मांग ने रुपये की स्थिति नाजुक कर दी है।
डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व का रुख
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.01 पर खुलने के बाद संभल नहीं पाया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती न करने के संकेत और सुरक्षित निवेश के लिए डॉलर की ओर निवेशकों के झुकाव से डॉलर इंडेक्स 98.96 पर पहुँच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते कूटनीतिक विवाद ने वैश्विक निवेशकों में घबराहट पैदा कर दी है।
कच्चे तेल का संकट और आपूर्ति की चिंता
कच्चे तेल की कीमतें 122 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँच गई हैं, जिसका सीधा असर भारत की आयात लागत पर पड़ रहा है। चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद जैसे शहरों के उद्योग जगत में इस बात को लेकर चिंता है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति बाधित रहती है, तो आने वाले दिनों में ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।
शेयर बाजार में हाहाकार और निवेशकों का पलायन
रुपये की गिरावट का सीधा असर घरेलू शेयर बाजार पर भी देखने को मिला:
सेंसेक्स: शुरुआती सत्र में 821.79 अंक टूटकर 76,674.57 के स्तर पर आ गया।
निफ्टी: 287.3 अंक फिसलकर 23,890.35 पर कारोबार करता दिखा।
FII की निकासी: विदेशी निवेशकों ने पिछले सत्र में करीब 2,468 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जिससे अहमदाबाद, पुणे और गुरुग्राम के ट्रेडिंग सेंटर्स में बिकवाली का दबाव बढ़ गया है।
आर्थिक प्रभाव और भविष्य की चुनौतियां
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, रुपये में अभी और गिरावट की संभावना बनी हुई है। कच्चे तेल के बढ़ते दाम न केवल मुद्रास्फीति (महंगाई) को बढ़ावा देंगे, बल्कि देश के चालू खाता घाटे (CAD) पर भी बुरा असर डालेंगे। इंदौर, भोपाल और लखनऊ जैसे शहरों के बाजारों में भी इस वैश्विक उथल-पुथल का असर महंगाई के रूप में महसूस किया जा सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
मजदूरों और असंगठित क्षेत्र को मिलेगा बड़ा सहारा
30 Apr, 2026 07:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
एनपीएस संचय' से संवरेगा असंगठित क्षेत्र के कामगारों का भविष्य: PFRDA की नई पहल
नई दिल्ली: देश की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए PFRDA 'एनपीएस संचय' योजना को व्यापक स्तर पर लॉन्च करने जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य उन दिहाड़ी मजदूरों, छोटे दुकानदारों और घरेलू कामगारों को पेंशन के दायरे में लाना है, जो अब तक रिटायरमेंट के बाद नियमित आय की सुविधा से वंचित थे।
पायलट प्रोजेक्ट के बाद देशभर में दस्तक
PFRDA के चेयरमैन एस. रमन के अनुसार, इस योजना का प्रायोगिक परीक्षण (पायलट प्रोजेक्ट) शुरू हो चुका है और जल्द ही इसे मुंबई, दिल्ली, भोपाल, लखनऊ और अहमदाबाद जैसे बड़े केंद्रों सहित पूरे भारत में लागू किया जाएगा। इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका सरल निवेश मॉडल है। इसमें निवेशकों को इक्विटी या बॉन्ड्स के बीच चुनाव करने की जटिलता से नहीं जूझना होगा; सिस्टम खुद फंड का प्रबंधन करेगा।
50 करोड़ श्रमिकों को मिलेगा लाभ
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में करीब 50 करोड़ लोग असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं। ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत करीब 31.63 करोड़ श्रमिक, जो पीएफ (PF) या ईएसआई (ESI) जैसी सुविधाओं से बाहर हैं, इस योजना के प्राथमिक लाभार्थी होंगे। रायपुर, पटना, इंदौर और जयपुर जैसे शहरों में सक्रिय रिक्शा चालक, कृषि श्रमिक और छोटे कारीगरों के लिए यह योजना बुढ़ापे की लाठी बनेगी। विशेष बात यह है कि इन कामगारों में 54 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं।
सरकारी मॉडल जैसी सुरक्षा
'एनपीएस संचय' को सरकारी कर्मचारियों के एनपीएस मॉडल की तर्ज पर डिजाइन किया गया है। इसमें फंड का आवंटन पहले से निर्धारित अनुपात में होगा, जिससे निवेश का जोखिम कम रहेगा और एक सुरक्षित रिटायरमेंट कॉर्पस तैयार हो सकेगा। पुणे, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे औद्योगिक शहरों के प्रवासी मजदूरों के लिए भी यह बचत का एक बेहतरीन माध्यम साबित होगा।
सामाजिक सुरक्षा की दिशा में क्रांतिकारी कदम
यह योजना केवल एक निवेश विकल्प नहीं, बल्कि एक सामाजिक बदलाव की ओर संकेत है। वाराणसी, कानपुर और मेरठ जैसे व्यापारिक केंद्रों में काम करने वाले दिहाड़ी मजदूरों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में इसे एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
‘E-PRAAPTI’ पोर्टल से बंद पड़े पीएफ खातों की तलाश होगी सरल
29 Apr, 2026 06:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के करोड़ों सदस्यों के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। यदि आपका कोई पुराना पीएफ खाता सालों से बंद पड़ा है या आप उसकी जानकारी भूल चुके हैं, तो अब उसे खोजना और सक्रिय करना बहुत आसान होने वाला है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने बुधवार को जानकारी दी कि ईपीएफओ जल्द ही 'E-PRAAPTI' नामक एक नया वेब पोर्टल शुरू करने जा रहा है। यह पोर्टल विशेष रूप से उन कर्मचारियों के लिए वरदान साबित होगा जिनके खाते 2014 से पहले के हैं, यानी उस समय के जब यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) की सुविधा शुरू नहीं हुई थी।
क्या है 'E-PRAAPTI' और इसके फायदे?
इसका पूरा नाम 'एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड आधार-बेस्ड एक्सेस पोर्टल फॉर ट्रैकिंग इनऑपरेटिव अकाउंट्स' (E-PRAAPTI) है।
आधार से जुड़ाव: यह पोर्टल पूरी तरह आधार प्रमाणीकरण पर आधारित होगा। इसके जरिए सदस्य अपने पुराने खातों को ट्रैक कर सकेंगे, भले ही उनमें यूएएन लिंक न हो।
लिंकिंग की सुविधा: पुराने खाते को ढूंढने के बाद सदस्य उसे अपने वर्तमान सक्रिय यूएएन से जोड़ सकेंगे और अपनी प्रोफाइल अपडेट कर पाएंगे।
कम कागजी कार्रवाई: इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का उद्देश्य मानवीय दखल और दस्तावेजों की जरूरत को कम करना है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और तेज होगी।
दावा निपटान में बनाया नया रिकॉर्ड
ईपीएफओ ने सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में लंबी छलांग लगाई है, जिसका असर हालिया आंकड़ों में दिख रहा है:
रिकॉर्ड निपटान: वित्त वर्ष 2025-26 में ईपीएफओ ने कुल 8.31 करोड़ दावों का निपटान किया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 6.01 करोड़ के मुकाबले काफी ज्यादा है।
ऑटो-मोड की रफ्तार: लगभग 71 प्रतिशत एडवांस दावों को 'ऑटो मोड' के जरिए महज 3 दिनों के भीतर निपटाया गया।
बिना नियोक्ता के काम: करीब 1.59 करोड़ सदस्यों ने अपने बैंक खातों को बिना एम्प्लॉयर की मंजूरी के खुद ही सीड (लिंक) किया, जिससे प्रक्रिया काफी सरल हो गई है।
ट्रांसफर क्लेम: 70 लाख से ज्यादा ट्रांसफर क्लेम बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के ऑटो-प्रोसेस किए गए।
एविएशन सेक्टर में ‘हब-एंड-स्पोक’ क्रांति, एअर इंडिया ने सराहा सरकारी फैसला
29 Apr, 2026 05:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय विमानन क्षेत्र में एक युगांतरकारी बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। भारत को वैश्विक ट्रांजिट हब बनाने की दिशा में सरकार द्वारा प्रस्तावित 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल का एअर इंडिया ने जोरदार स्वागत किया है। इस रणनीति के तहत एअर इंडिया ने वाराणसी से अपनी अंतरराष्ट्रीय सेवाएं शुरू कर विमानन क्षेत्र में नए अध्याय का आगाज किया है।
विदेशी हब पर निर्भरता कम करने की चुनौती
नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, भारत के लगभग 35 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय यात्री वर्तमान में दुबई, लंदन और सिंगापुर जैसे विदेशी हवाई अड्डों के माध्यम से यात्रा करते हैं। सरकार की नई रणनीति का लक्ष्य दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे प्रमुख हवाई अड्डों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी केंद्रों के रूप में विकसित कर इस निर्भरता को खत्म करना है।
एअर इंडिया का दृष्टिकोण: एक 'क्रांतिकारी' कदम
एअर इंडिया के सीईओ और प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन ने इस पहल को विमानन पारिस्थितिकी तंत्र (Aviation Ecosystem) के लिए 'परिवर्तनकारी' बताया है। उनके अनुसार:
इससे न केवल क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी, बल्कि देश के एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का अधिकतम उपयोग भी सुनिश्चित होगा।
यह मॉडल भारतीय विमानन कंपनियों को वैश्विक स्तर पर बड़ी पहचान दिलाने में सहायक होगा।
छोटे शहरों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय पंख
'हब-एंड-स्पोक' मॉडल के लागू होने से भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों की किस्मत बदलने वाली है:
उड़ान योजना से जुड़ाव: यह मॉडल 'उड़ान' योजना के तहत विकसित छोटे हवाई अड्डों को सीधे अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों से जोड़ेगा।
महानगरों से आगे विस्तार: एअर इंडिया के अनुसार, विमानन सेवाओं को अब केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि वाराणसी जैसे शहरों से सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें पूर्वी भारत के यात्रियों के लिए यात्रा सुलभ बनाएंगी।
क्या है 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल?
यह मॉडल एक साइकिल के पहिये की तरह काम करता है, जो परिवहन दक्षता बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है:
हब (धुरी): एक बड़ा और प्रमुख हवाई अड्डा (जैसे दिल्ली या मुंबई) मुख्य केंद्र के रूप में कार्य करता है।
स्पोक (तीलियां): छोटे क्षेत्रीय हवाई अड्डों को 'स्पोक' कहा जाता है।
कार्यप्रणाली: छोटे शहरों से यात्रियों को पहले 'हब' पर लाया जाता है। वहां से उन्हें उनकी मंजिल के अनुसार बड़ी अंतरराष्ट्रीय या अन्य घरेलू उड़ानों में स्थानांतरित कर अंतिम गंतव्य तक पहुंचाया जाता है।
EY की चेतावनी: कच्चा तेल $120 हुआ तो भारत की रफ्तार धीमी पड़ सकती है
29 Apr, 2026 02:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का भारतीय अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है। प्रमुख कंसल्टेंसी फर्म EY इंडिया की नवीनतम 'इकोनॉमी वॉच' रिपोर्ट के अनुसार, यदि वित्त वर्ष 2027 में कच्चे तेल की कीमतें (भारतीय बास्केट) औसतन 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँचती हैं, तो भारत की विकास दर और महंगाई दर के मोर्चे पर मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
जीडीपी और महंगाई पर संभावित प्रभाव
ईवाई इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में एक 'प्रतिकूल परिदृश्य' (Adverse Scenario) पेश किया है, जिसके अनुसार:
जीडीपी ग्रोथ: भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर गिरकर 6 प्रतिशत के स्तर पर आ सकती है।
महंगाई (Inflation): खुदरा मुद्रास्फीति उछलकर आरबीआई के अधिकतम सहनशीलता स्तर 6 प्रतिशत तक पहुँच सकती है।
वैश्विक स्थिति: हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में भी भारत की विकास दर दुनिया की औसत वृद्धि दर से दोगुनी बनी रहेगी।
नीतिगत सुझाव और चुनौतियां
ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डीके श्रीवास्तव ने रिपोर्ट में नीति निर्माताओं के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:
रेपो दर में बदलाव: तेल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए रेपो रेट में बढ़ोतरी पर विचार करना पड़ सकता है।
आपूर्ति के नए स्रोत: भारत को कच्चे तेल के लिए आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में तेजी से काम करना होगा।
राजकोषीय बोझ: राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए बढ़ी हुई कीमतों का भार खुदरा विक्रेताओं पर डालने का सुझाव दिया गया है।
संकट के लंबा खिंचने की आशंका
रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशियाई संकट उम्मीद से अधिक समय तक चल सकता है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (US EIA) ने भी अनुमान लगाया है कि ब्रेंट क्रूड की कीमतें साल 2026 की दूसरी तिमाही में 115 डॉलर प्रति बैरल के शिखर तक पहुँच सकती हैं। श्रीवास्तव का मानना है कि यदि संघर्ष सुलझ भी जाता है, तब भी वैश्विक तेल आपूर्ति को सामान्य होने में लंबा समय लगेगा।
विभिन्न संस्थानों के अनुमानों की तुलना (वित्त वर्ष 2027)
रिपोर्ट में ईवाई के अनुमानों की तुलना अन्य वैश्विक और घरेलू संस्थानों के डेटा से भी की गई है:
संस्थान
जीडीपी ग्रोथ (अनुमान)
महंगाई दर (अनुमान)
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)
6.9%
4.6%
एशियाई विकास बैंक (ADB)
6.9%
-
विश्व बैंक (World Bank)
6.6%
-
आईएमएफ (IMF)
6.5%
-
EY इंडिया (प्रतिकूल स्थिति)
6.0%
6.0%
सोने की चमक बरकरार, जनवरी-मार्च में वैश्विक मांग में इजाफा
29 Apr, 2026 12:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में वैश्विक स्तर पर सोने की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। भू-राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षित निवेश के प्रति बढ़ते रुझान ने पीली धातु की चमक को और बढ़ा दिया है।
मांग और कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी
वैश्विक मांग: साल 2026 की पहली तिमाही में सोने की कुल मांग सालाना आधार पर 2 प्रतिशत बढ़कर 1,231 टन पर पहुंच गई है।
ऐतिहासिक कीमतें: मात्रा के मुकाबले मूल्य में भारी उछाल देखा गया। सोने की मांग का कुल मूल्य 74 प्रतिशत बढ़कर 193 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर आ गया है।
औसत मूल्य: इस अवधि में सोने की औसत कीमत 4,873 डॉलर प्रति औंस रही, जबकि पिछले साल इसी समय यह 2,860 डॉलर थी। जनवरी में तो इसकी कीमतें 5,400 डॉलर के उच्चतम स्तर को भी पार कर गई थीं।
निवेश का बदलता स्वरूप
ऊंची कीमतों के कारण उपभोक्ताओं के व्यवहार में बड़ा बदलाव आया है:
सिक्के और बार: सुरक्षित निवेश की चाह में सोने के सिक्कों और छड़ों (Bar) की मांग में 42 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल आया है। चीन में इसमें 67 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई।
आभूषण बाजार: भारी कीमतों के चलते गहनों की मांग में 23 प्रतिशत की गिरावट आई है। भारत में आभूषणों की खपत 19 प्रतिशत और चीन में 32 प्रतिशत तक कम हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि लोग अब आभूषणों के बजाय निवेश के विकल्प के रूप में सिक्कों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
केंद्रीय बैंकों की भूमिका
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने भंडार को मजबूत करने में जुटे हैं:
वैश्विक खरीदारी: केंद्रीय बैंकों ने कुल 244 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा है।
आरबीआई का योगदान: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी इस तिमाही के दौरान 300 किलोग्राम सोने की अतिरिक्त खरीदारी की है।
आपूर्ति: खदानों से उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर रहा और पुराने सोने की रिसाइकलिंग में भी 5 प्रतिशत का इजाफा हुआ, जिससे कुल वैश्विक आपूर्ति 1,231 टन तक पहुंच गई।
शेयर बाजार हरा, लेकिन रुपये पर दबाव—सेंसेक्स 358 अंक ऊपर
29 Apr, 2026 09:14 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त रौनक देखने को मिली। पश्चिम एशिया से आए सकारात्मक कूटनीतिक संकेतों ने निवेशकों के उत्साह को बढ़ा दिया, जिससे प्रमुख सूचकांकों ने लंबी छलांग लगाई। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और रुपये की कमजोरी ने थोड़ी चिंता भी पैदा की है।
शुरुआती बढ़त और सूचकांकों का हाल
ग्लोबल मार्केट से मिले अच्छे संकेतों के कारण घरेलू बाजार में जोरदार खरीदारी रही:
सेंसेक्स और निफ्टी: कारोबार की शुरुआत में ही सेंसेक्स 358 अंक चढ़कर 77,245 के करीब पहुंच गया, जो बाद में 500 अंकों की तेजी के साथ 77,413 के स्तर को छू गया। वहीं, निफ्टी भी 150 अंकों से अधिक की बढ़त लेकर 24,150 के पार निकल गया।
मिडकैप व स्मॉलकैप: छोटी और मझोली कंपनियों के शेयरों में भी तेजी का रुख रहा। निफ्टी स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स में 0.6 से 0.7 प्रतिशत का सुधार देखा गया।
दिग्गज कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन
बढ़त वाले शेयर: बेहतर तिमाही परिणामों के कारण जोमैटो और उसकी पैरेंट कंपनी 'इटरनल' के शेयरों में 4% की उछाल रही। इसके साथ ही मारुति सुजुकी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, अदाणी पोर्ट्स और इन्फोसिस के शेयर भी हरे निशान में कारोबार करते दिखे।
गिरावट वाले शेयर: एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक जैसी कंपनियों के शेयरों में हल्का दबाव महसूस किया गया।
तेजी के पीछे का मुख्य कारण
ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य गतिविधियां रोकने के प्रस्ताव की खबर ने बाजार में संजीवनी का काम किया है। पश्चिम एशिया में युद्ध की आशंकाएं कम होने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान संबंधी दावों और कूटनीतिक हलचलों ने भी बाजार को गति दी है।
चुनौतियां: कच्चा तेल और कमजोर रुपया
बाजार की बढ़त के बीच कुछ मोर्चों पर चुनौतियां बरकरार हैं:
कच्चा तेल: ब्रेंट क्रूड ऑयल 111 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल का ऊंचे स्तर पर रहना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मुद्रास्फीति (महंगाई) का खतरा बढ़ा सकता है।
विदेशी निवेशक (FII): विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने बाजार से 2,104 करोड़ रुपये की पूंजी निकाली।
रुपया: डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा 11 पैसे गिरकर 94.79 के स्तर पर पहुंच गई है। आयातकों की ओर से डॉलर की भारी मांग को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है।
डिजिटल इंडिया को बढ़ावा: UPI के जरिए अब तुरंत खुलेगा NPS अकाउंट
29 Apr, 2026 06:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत में डिजिटल क्रांति का दायरा अब तेजी से बढ़ रहा है। अब यूपीआई (UPI) सिर्फ रोजमर्रा के लेन-देन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके जरिए भविष्य को सुरक्षित करना भी आसान हो जाएगा। जल्द ही आप 'भीम' (BHIM) इंटरफेस के माध्यम से महज एक क्लिक में अपना नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) खाता खोल सकेंगे।
पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने एनपीसीआई (NPCI) के साथ मिलकर इस सुलभ डिजिटल पहल की तैयारी कर ली है। इस बदलाव की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
चुटकियों में खुलेगा खाता
अभी तक एनपीएस खाता खोलने के लिए लंबी कागजी प्रक्रिया, दस्तावेजों के सत्यापन और समय की आवश्यकता होती थी। अब यूपीआई आधारित इस नई व्यवस्था से यह काम कुछ ही सेकंड में पूरा हो जाएगा।
प्रक्रिया: भीम ऐप पर लॉग-इन करने के बाद आपको एनपीएस विकल्प चुनना होगा।
विवरण: केवल पैन कार्ड, मोबाइल नंबर और जन्म तिथि जैसी बुनियादी जानकारी दर्ज करते ही केवाईसी (KYC) प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
पहुंच: यह सुविधा शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण भारत के लिए भी एक बड़ा बदलाव (Gamechanger) साबित होगी।
अगले महीने से मिलेगी सुविधा
PFRDA के चेयरमैन एस रमन के अनुसार, जिस तरह फिनटेक ऐप्स ने म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेश को आसान बनाया है, उसी तरह एनपीएस को भी हर आम आदमी की पहुंच में लाने का लक्ष्य है। अगले एक महीने के भीतर यह सर्विस शुरू होने की उम्मीद है, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी बिना किसी परेशानी के अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग कर सकेंगे।
वित्तीय समावेशन और नए करार
इस पहल का उद्देश्य वित्तीय समावेशन को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है, ताकि हर नागरिक आत्मनिर्भर होकर अपने भविष्य की योजना बना सके। इसके अलावा:
बीएसई स्टार (BSE StAR) से समझौता: पीएफआरडीए ने एनपीएस के वितरण को और व्यापक बनाने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म 'बीएसई स्टार' के साथ भी हाथ मिलाया है। इससे वितरकों और निवेशकों के लिए एनपीएस से जुड़े ट्रांजेक्शन करना और भी सहज हो जाएगा।
विनिर्माण क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन का रहा बड़ा योगदान
28 Apr, 2026 04:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सुखद संकेत: मार्च में औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार बढ़कर 4.1% हुई
नई दिल्ली। वित्त वर्ष के समापन पर भारत के औद्योगिक क्षेत्र ने मजबूती और स्थिरता के संकेत दिए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 4.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले वर्ष की समान अवधि (मार्च 2025) में यह विकास दर 3.9 प्रतिशत रही थी। यह क्रमिक बढ़त भारतीय अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ दृष्टिकोण को दर्शाती है।
प्रमुख क्षेत्रों का प्रदर्शन: मैन्युफैक्चरिंग और माइनिंग में उछाल
औद्योगिक गतिविधियों में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले क्षेत्रों के प्रदर्शन का विवरण नीचे दिया गया है:
मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण): इस क्षेत्र ने 4.3 प्रतिशत की सराहनीय वृद्धि हासिल की है। कुल 23 उद्योग समूहों में से 14 में सकारात्मक रुख देखा गया। विशेष रूप से मोटर वाहन, बुनियादी धातुओं और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में निवेश की स्थिति मजबूत बनी हुई है।
माइनिंग (खनन): खनन क्षेत्र में सबसे अधिक 5.5 प्रतिशत का विस्तार देखा गया, जो उत्पादन की गति को बढ़ाने में सहायक रहा।
इलेक्ट्रिसिटी (बिजली): अन्य क्षेत्रों की तुलना में बिजली उत्पादन में कुछ सुस्ती रही और यहाँ केवल 0.8 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की गई।
निवेश और बाजार की मांग के रुझान
उपयोग-आधारित वर्गीकरण (Use-based classification) के अनुसार, देश में निवेश की स्थिति काफी उत्साहजनक है:
कैपिटल गुड्स (पूंजीगत वस्तुएं): इस क्षेत्र में 14.6 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़ा औद्योगिक क्षमता विस्तार और भविष्य के प्रति निवेशकों के भरोसे का स्पष्ट प्रमाण है।
इंफ्रास्ट्रक्चर: बुनियादी ढांचे और निर्माण सामग्री के उत्पादन में 6.7 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
कंज्यूमर गुड्स: उपभोक्ता मांग के मामले में मिला-जुला असर रहा। जहाँ 'कंज्यूमर ड्यूरेबल्स' (जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण) में 5.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं 'नॉन-ड्यूरेबल्स' (दैनिक उपभोग की वस्तुएं) में मात्र 1.1 प्रतिशत की बढ़त देखी गई।
वन्यजीव संरक्षण को लेकर उठाया मानवीय कदम
28 Apr, 2026 03:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रिलायंस इंडस्ट्रीज के कार्यकारी निदेशक और 'वनतारा' के संस्थापक अनंत अंबानी ने कोलंबिया सरकार से एक भावुक और मानवीय अपील की है। उन्होंने कोलंबिया में 80 दरियाई घोड़ों (हिप्पोपोटामस) को मारने की योजना को रोकने का आग्रह करते हुए उन्हें भारत लाने का प्रस्ताव रखा है। अंबानी ने इन जानवरों को गुजरात के जामनगर स्थित अपने वन्यजीव संरक्षण केंद्र 'वनतारा' में शरण देने और इस पूरे मिशन का खर्च उठाने की पेशकश की है।
संकट में दरियाई घोड़े: 'आक्रामक प्रजाति' का ठप्पा
कोलंबिया की मैग्डेलेना नदी में इन दरियाई घोड़ों की संख्या 1980 के दशक के बाद से तेजी से बढ़कर लगभग 200 हो गई है। स्थानीय प्रशासन ने इन्हें पर्यावरण और समुदायों के लिए खतरा मानते हुए 'आक्रामक प्रजाति' घोषित किया है। हाल ही में अधिकारियों ने इनकी बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए 80 दरियाई घोड़ों को मारने (Culling) की अनुमति दी थी, जिसे लेकर दुनिया भर के पशु प्रेमियों में चिंता थी।
अनंत अंबानी का 'वनतारा' मॉडल: वैज्ञानिक पुनर्वास
कोलंबिया की पर्यावरण मंत्री आइरीन वेलेज़ टोरेस को लिखे पत्र में अनंत अंबानी ने एक ठोस वैज्ञानिक योजना पेश की है। उनके प्रस्ताव की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
आजीवन देखभाल: इन 80 जानवरों को जामनगर के 'वनतारा' केंद्र में रखा जाएगा, जहाँ उनके प्राकृतिक आवास जैसा ही वातावरण तैयार किया गया है।
विशेषज्ञता और लॉजिस्टिक्स: 'वनतारा' टीम इन विशाल जानवरों को पकड़ने, सुरक्षित ट्रांसपोर्ट करने और उनके स्वास्थ्य की देखभाल के लिए पूरी तरह सक्षम है।
जैव सुरक्षा: स्थानांतरण के दौरान अंतरराष्ट्रीय जैव सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
"जीवित प्राणियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी"
इस पहल के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए अनंत अंबानी ने कहा, "इन अस्सी दरियाई घोड़ों ने खुद यह नहीं चुना कि वे कहाँ पैदा हों। वे संवेदनशील प्राणी हैं। यदि हमारे पास उन्हें बचाने का कोई मानवीय तरीका है, तो उन्हें सुरक्षा देना हमारा नैतिक कर्तव्य है।"
कानूनी और अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया
अंबानी ने कोलंबियाई सरकार से अनुरोध किया है कि जब तक इस पुनर्वास योजना की समीक्षा पूरी नहीं होती, तब तक जानवरों को मारने के फैसले पर रोक लगा दी जाए।
मंजूरी की आवश्यकता: इस बड़े मिशन के लिए भारत और कोलंबिया की सरकारों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय निकायों (CITES आदि) से आवश्यक अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
भविष्य की योजना: 'वनतारा' प्रशासन एक विस्तृत ऑपरेशनल प्लान तैयार करने के लिए कोलंबियाई अधिकारियों के साथ निरंतर संवाद के लिए तैयार है।
शुद्ध मुनाफे में गिरावट दर्ज, लागत बनी मुख्य वजह
28 Apr, 2026 03:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत की दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) के वित्तीय परिणाम जारी कर दिए हैं। कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार, जहां एक ओर राजस्व (Revenue) में जबरदस्त उछाल देखा गया है, वहीं दूसरी ओर शुद्ध मुनाफे में मामूली गिरावट दर्ज की गई है।
राजस्व में 28% की बड़ी छलांग
मारुति सुजुकी के वाहनों की मांग बाजार में मजबूत बनी हुई है, जिसका असर कंपनी की आय पर साफ नजर आ रहा है:
आय का आंकड़ा: इस तिमाही में कंपनी का परिचालन राजस्व 52,462.5 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
तुलनात्मक वृद्धि: पिछले साल की समान अवधि (40,920.1 करोड़ रुपये) के मुकाबले इसमें 28.2 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी हुई है।
मुनाफे पर 'मार्क-टू-मार्केट' का असर
राजस्व बढ़ने के बावजूद, कंपनी के शुद्ध मुनाफे (Net Profit) में कमी आई है, जिसका मुख्य कारण 'मार्क-टू-मार्केट' प्रभाव और बढ़ते खर्चों को माना जा रहा है:
मुनाफे में कमी: चौथी तिमाही में समेकित शुद्ध मुनाफा 6.45 प्रतिशत घटकर 3,659 करोड़ रुपये रह गया। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह 3,911.1 करोड़ रुपये था।
बढ़ता खर्च: परिचालन लागत और अन्य व्यय में भी वृद्धि देखी गई है। इस तिमाही में कंपनी का कुल खर्च 48,125.3 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक है।
बाजार की स्थिति और भविष्य के संकेत
मारुति सुजुकी के आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि कंपनी का मुख्य व्यवसाय (Core Business) और बिक्री का प्रदर्शन बहुत ही ठोस है। राजस्व में 28 प्रतिशत का उछाल यह दर्शाता है कि उपभोक्ता अब भी मारुति की कारों पर भरोसा जता रहे हैं।
निष्कर्ष: हालांकि मुनाफे के आंकड़ों में थोड़ी गिरावट आई है, लेकिन विशेषज्ञ इसे बाजार की अस्थिरता और लागत वृद्धि का अस्थायी प्रभाव मान रहे हैं। आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी अपने बढ़ते खर्चों को कैसे नियंत्रित करती है और नए मॉडल्स के जरिए बाजार में अपनी हिस्सेदारी को कितना और बढ़ा पाती है।
ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम
28 Apr, 2026 11:26 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय ऊर्जा क्षेत्र की बड़ी कामयाबी: लीबिया में मिला तेल और गैस का भंडार, 'ऑयल इंडिया' और 'IOC' को मिली सफलता
भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। लीबिया में भारतीय कंपनियों के एक समूह (कंसोर्टियम) ने प्राकृतिक गैस और तेल (कंडेनसेट) के नए स्रोतों की खोज की है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर इस महत्वपूर्ण खोज की पुष्टि की है।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए संबंधित कंपनियों को बधाई दी और इसे देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक मील का पत्थर बताया।
खोज का तकनीकी विवरण: गदामेस बेसिन
यह खोज लीबिया के प्रसिद्ध गदामेस बेसिन (कॉन्ट्रैक्ट एरिया 95/96) में की गई है। इस परियोजना की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
साझेदार: इस परियोजना में ऑयल इंडिया लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) भारतीय समूह का हिस्सा हैं। परियोजना का संचालन (ऑपरेटर) अल्जीरियाई कंपनी SIPX द्वारा किया जा रहा है।
उत्पादन क्षमता: लगभग 8,440 फीट की गहराई तक की गई खुदाई के बाद सफल परीक्षण हुआ। यहां से प्रतिदिन:
13 मिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस।
327 बैरल कंडेनसेट (तरल हाइड्रोकार्बन) का उत्पादन प्राप्त हुआ है।
फॉर्मेशन: यह भंडार अविनात वानिन और अविन काजा फॉर्मेशन में पाया गया है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर प्रभाव
मंत्रालय के अनुसार, यह खोज भारतीय ऊर्जा कंपनियों के बढ़ते वैश्विक पदचिह्नों और अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक साझेदारी की मजबूती को दर्शाती है।
विदेशी संपत्तियों में निवेश: भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विदेशों में तेल और गैस क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
आयात पर निर्भरता कम करना: सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक घरेलू कच्चे तेल के उत्पादन को वर्तमान के 29 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़ाकर 35 मिलियन मीट्रिक टन तक ले जाया जाए।
नीतिगत सुधार: इस लक्ष्य को पाने के लिए केंद्र सरकार 'डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड पॉलिसी' और HELP (हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी) जैसे सुधारों के जरिए अन्वेषण कार्यों में तेजी ला रही है।
वैश्विक संकेतों का असर भारतीय बाजार पर साफ नजर आया
28 Apr, 2026 09:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शेयर बाजार समाचार: वैश्विक तनाव और तेल की कीमतों में उछाल से बाजार में हलचल, सेंसेक्स-निफ्टी में उतार-चढ़ाव
सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सुस्ती के साथ हुई। वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू बैंकों के शेयरों में बिकवाली के कारण शुरुआती सत्र में बाजार दबाव में नजर आया।
बाजार का शुरुआती हाल
सेंसेक्स और निफ्टी: कारोबार के शुरुआती दौर में सेंसेक्स 208.84 अंक लुढ़ककर 77,094.79 के स्तर पर आ गया, वहीं निफ्टी में भी 42.8 अंक की गिरावट देखी गई और यह 24,049.90 पर कारोबार करता दिखा।
रिकवरी के संकेत: शुरुआती गिरावट के बाद बाजार ने संभलने की कोशिश की। सुबह 9:48 बजे तक सेंसेक्स 57 अंक की रिकवरी के साथ 77,360.95 पर पहुंच गया।
रुपये में गिरावट: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी कमजोर हुआ और 24 पैसे की गिरावट के साथ 94.39 के स्तर पर आ गया।
गिरावट के मुख्य कारण
बाजार में आई इस अस्थिरता के पीछे तीन प्रमुख वैश्विक और आर्थिक कारक रहे:
कच्चे तेल की कीमतों में आग: अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल होने की आशंकाओं के बीच ब्रेंट क्रूड 1% से ज्यादा उछलकर 109 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है।
भू-राजनीतिक तनाव: ऐसी खबरें हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के शांति प्रस्ताव को ठुकरा सकते हैं, जिससे मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का भारतीय बाजार से पैसा निकालना जारी है। सोमवार को ही विदेशी निवेशकों ने करीब 1,151 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
शेयरों का प्रदर्शन: कौन गिरा, कौन संभला?
बड़े शेयरों (लार्जकैप) में सुस्ती के बावजूद छोटे और मझोले शेयरों में थोड़ी मजबूती दिखी।
पछड़ने वाले शेयर: बैंकिंग सेक्टर, खासकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU Banks) में सबसे ज्यादा मार पड़ी। SBI, एक्सिस बैंक, सन फार्मा और इंडिगो के शेयरों में लगभग 1% तक की गिरावट रही।
चमकने वाले शेयर: विपरीत परिस्थितियों में भी अदाणी पोर्ट्स, TCS, लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर हरे निशान में कारोबार करते नजर आए।
स्मॉलकैप और मिडकैप: निफ्टी स्मॉलकैप 100 और मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.3% की बढ़त दर्ज की गई।
एनपीए मानने के नियमों में स्पष्टता, बैंकों को मिले नए निर्देश
28 Apr, 2026 06:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आरबीआई का बड़ा फैसला: बैंकिंग व्यवस्था में ईसीएल (ECL) फ्रेमवर्क लागू, बदलेंगे कर्ज के नियम
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और भविष्य के जोखिमों को कम करने के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव करने जा रहा है। 1 अप्रैल, 2027 से बैंकों के लिए 'अपेक्षित ऋण हानि' (Expected Credit Loss - ECL) आधारित ढांचा अनिवार्य हो जाएगा।
क्या है मुख्य बदलाव?
अब तक बैंक किसी कर्ज के डूबने (NPA होने) के बाद उसके लिए प्रावधान (पैसा अलग रखना) करते थे। लेकिन नए नियमों के तहत:
भविष्य का आकलन: यदि बैंक को लगता है कि किसी कर्ज में भविष्य में नुकसान की संभावना है, तो उसे पहले ही रकम सुरक्षित रखनी होगी।
समय सीमा: आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि बैंकों को अपनी आंतरिक प्रणालियों को सुधारने के लिए पर्याप्त समय दिया जा चुका है, इसलिए कार्यान्वयन की तारीख आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।
कर्ज खातों का नया वर्गीकरण (Three-Stage Model)
आरबीआई ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे अपने सभी लोन खातों को जोखिम के आधार पर तीन श्रेणियों में विभाजित करें:
श्रेणी
स्थिति
प्रावधान (Provisioning)
स्टेज 1
सामान्य खाते
अगले 12 महीनों के संभावित नुकसान का आकलन।
स्टेज 2
जोखिम वाले खाते (भुगतान में देरी)
पूरे लोन पीरियड (Lifetime) के संभावित नुकसान का प्रावधान।
स्टेज 3
तनावग्रस्त/NPA खाते
लाइफटाइम नुकसान का पूर्ण प्रावधान।
महत्वपूर्ण नए प्रावधान
1. दो महत्वपूर्ण समय-सीमाएं
30 दिन का विलंब: इसे खतरे का शुरुआती संकेत माना जाएगा और बैंक को तुरंत सतर्क होना होगा।
90 दिन का विलंब: 90 दिनों से अधिक बकाया रहने पर कर्ज को आधिकारिक तौर पर NPA (खराब कर्ज) घोषित कर दिया जाएगा।
2. बॉरोअर लेवल क्लासिफिकेशन (एक खाता डूबा, तो सब पर असर)
अब ग्राहक अपने खातों को अलग-अलग नहीं छिपा पाएंगे। यदि किसी ग्राहक का एक बड़ा लोन NPA बनता है, तो बैंक को उसके अन्य सभी सक्रिय लोन खातों को भी 'जोखिम की श्रेणी' में डालकर समीक्षा करनी होगी। यह कदम एनपीए को छिपाने की प्रथा को रोकने के लिए उठाया गया है।
3. व्यक्तिगत ऋण (Personal Loan) की सीमा में वृद्धि
आरबीआई ने पूंजी शुल्क नियमों में ढील देते हुए व्यक्तिगत ऋण जोखिम (Individual Loan Exposure) की सीमा 7.5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दी है। इसका लाभ यह होगा कि 10 करोड़ तक के व्यक्तिगत कर्ज अब कम जोखिम भार (Low Risk Weight) की श्रेणी में आएंगे, जिससे बैंकों के लिए कर्ज देना आसान होगा।
FTA पर मुहर: भारत से न्यूज़ीलैंड जाने वाला सामान पूरी तरह टैक्स-फ्री
27 Apr, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुआ यह मुक्त व्यापार समझौता (FTA) न केवल व्यापारिक दृष्टि से ऐतिहासिक है, बल्कि यह प्रधानमंत्री मोदी के 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की ओर एक बड़ा रणनीतिक कदम भी है। 27 अप्रैल, 2026 (सोमवार) को आधिकारिक रूप से संपन्न हुआ यह समझौता वैश्विक व्यापार के मानचित्र पर भारत की बढ़ती साख को दर्शाता है।
इस समझौते के प्रमुख पहलुओं का विश्लेषण यहाँ दिया गया है:
1. भारतीय निर्यातकों के लिए 'गोल्डन अवसर'
इस समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धि भारत को मिलने वाली 100% शुल्क-मुक्त पहुंच है।
तत्काल लाभ: भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले सभी उत्पादों पर अब कोई सीमा शुल्क (Tariff) नहीं लगेगा।
प्रमुख क्षेत्र: टेक्सटाइल (कपड़ा), चमड़ा उद्योग, कालीन, वाहन के पुर्जे और चीनी मिट्टी के बर्तनों के निर्यात में भारी उछाल आने की उम्मीद है। अभी तक इन पर लगभग 10% शुल्क लगता था, जो अब शून्य हो जाएगा।
2. घरेलू उद्योग और किसानों की सुरक्षा
भारत ने अपनी आर्थिक कूटनीति में चतुराई दिखाते हुए संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखा है:
डेयरी सेक्टर: भारतीय डेयरी उद्योग की चिंताओं को देखते हुए दूध, पनीर, दही और क्रीम जैसे उत्पादों को एफटीए से बाहर रखा गया है। इससे न्यूजीलैंड के सस्ते डेयरी उत्पादों से भारतीय किसानों को खतरा नहीं होगा।
कृषि क्षेत्र: स्थानीय कृषि बाजार के हितों की रक्षा के लिए अन्य संवेदनशील खाद्य उत्पादों पर भी आयात छूट नहीं दी गई है।
4. छात्रों के लिए 'गेम-चेंजर' प्रावधान
न्यूजीलैंड ने पहली बार किसी देश के साथ पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा को लेकर ऐसा अनुबंध किया है:
भारतीय छात्रों को अब पढ़ाई के साथ प्रति सप्ताह 20 घंटे काम करने की कानूनी अनुमति होगी।
पढ़ाई पूरी होने के बाद मिलने वाले 'वर्क वीजा' की अवधि को बढ़ाया गया है, जिससे छात्रों को वहां करियर बनाने के बेहतर अवसर मिलेंगे।
5. पीयूष गोयल की 'हैट्रिक' और भविष्य की राह
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में यह साढ़े तीन वर्षों में 7वां सफल मुक्त व्यापार समझौता है।
रिकॉर्ड समय: सामान्यतः ऐसे समझौतों में वर्षों लग जाते हैं, लेकिन इसे मात्र 9 महीनों में पूरा करना दोनों देशों के आपसी विश्वास को दर्शाता है।
अगला लक्ष्य: मंत्री ने संकेत दिया है कि अगले कुछ महीनों में यूरोपीय संघ (EU) और अमेरिका के साथ भी महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौते हो सकते हैं।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
