व्यापार
India-US Trade Deal: 'रूस के साथ रिश्ते पर नहीं होगा असर' अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर बोले रक्षा सचिव
1 Mar, 2026 12:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा कि अमेरिका के साथ हुए अंतरिम व्यापार समझौते का भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी सामरिक जरूरतों के आधार पर बहु-स्रोत रक्षा खरीद की नीति जारी रखेगा और साथ ही स्वदेशी रक्षा उत्पादन को और गति देगा। एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में सिंह ने कहा, अमेरिका के साथ व्यापार समझौता हमारे रूस के साथ रक्षा संबंधों में बाधा नहीं है।उन्होंने कहा कि भारत अपनी परिचालन आवश्यकताओं के अनुसार रूस से खरीद जारी रखेगा और जरूरत पड़ने पर फ्रांस, अमेरिका सहित अन्य देशों से भी रक्षा उपकरण लेगा। उनके अनुसार, भारत की नीति संतुलित और व्यावहारिक है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत कर रही सरकार- सिंह
सिंह ने जोर देकर कहा कि सरकार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को और मजबूत करना चाहती है। हम स्वदेशीकरण पर दोगुना जोर देंगे। उन्होंने कहा, हाल के वर्षों में भारत ने घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आयात पर निर्भरता घटाने के लिए कई पहल की हैं। उल्लेखनीय है कि भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के तहत दोनों देशों ने शुल्क बाधाओं को कम करने पर सहमति जताई है।
अमेरिका से भारत अगले पांच साल में 500 अरब डॉलर का सामान खरीदेगा
इसके अलावा, भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर तक की ऊर्जा, विमान, प्रौद्योगिकी और कोकिंग कोयले की खरीद की मंशा जताई है। अमेरिका ने मसाले, चाय, कॉफी, आम, अंगूर और काजू जैसे भारतीय कृषि उत्पादों को शुल्क मुक्त पहुंच देने पर भी सहमति दी है। इससे भारतीय कृषि निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है। रक्षा सचिव के बयान से संकेत मिलता है कि भारत रणनीतिक रूप से संतुलित विदेश और रक्षा नीति को बनाए रखते हुए अपने आर्थिक और सुरक्षा हितों को साथ लेकर आगे बढ़ेगा।
Report: क्या ग्रीन स्टील का इस्तेमाल होने से कार्बन उत्सर्जन हो रहा कम? जानें रिपोर्ट का दावा
28 Feb, 2026 03:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सरकारी परियोजनाओं में 26 प्रतिशत ग्रीन स्टील का इस्तेमाल अनिवार्य होने से साल 2030 तक 20.9 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन कम किया जा सकता है। अगर ग्रीन स्टील की हिस्सेदारी 37 प्रतिशत हो जाए तो इसके बाद 29.7 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन से बचा जा सकता है। यह हर वर्ष लगभ 90 लाख कारों को सड़कों से हटाने के बराबर है। यह जानकारी कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री यानी सीआईआई व क्लाइमेट कैटालिस्ट की ओर से गुरुवार को जारी आकलन रिपोर्ट में आए हैं।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
सीआईआई के कार्यकारी निदेशक और ग्लोबल इकोलेबलिंग नेटवर्क बोर्ड के अध्यक्ष के. एस. वेंकटगिरी ने कहा कि 'ग्रीन पब्लिक प्रोक्योरमेंट भारत के इस्पात क्षेत्र को कम कार्बन उत्पादन की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।क्लाइमेट कैटालिस्ट की निदेशक साक्षी बलानी ने कहा, ग्रीन स्टील को लेकर एक मजबूत आदेश भारत के इस्पात क्षेत्र को किसी भी सब्सिडी या तकनीकी प्रोत्साहन से तेज गति से बदल सकता है। ग्रीन पब्लिक प्रोक्योरमेंट ही कार्बन उत्सर्जन घटा सकता है, बड़े पैमाने पर निवेश खोल सकता है।
इससे जुड़ी खास बातें
अगर इस्पात मंत्रालय साल 2028 में 26 प्रतिशत खरीद अनिवार्य कर दे तो 93 प्रतिशत इस्पात कंपनियां प्रमाणित ग्रीन स्टील के लिए तैयार है।
अभी सार्वजनिक खरीद पर प्रतिवर्ष लगभग 45-50 लाख करोड़ रुपये खर्च कर लगभग 3.16 करोड़ टन स्टील की खपत होती है।
प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0, मेट्रो रेल परियोजनाएं और रेल परियोजनाओं में ग्रीन स्टील के उपयोग से परियोजना लागत केवल 0.2 प्रतिशत से 1.2 प्रतिशत तक बढ़ती है।ग्रीन पब्लिक प्रोक्योरमेंट इस दशक में भारत के इस्पात क्षेत्र की जलवायु महत्वाकांक्षाओं को ठोस और मापने योग्य कार्रवाई में बदलने का सबसे प्रभावी साधन है।
सेबी का नया सर्कुलर: क्या म्यूचुअल फंड योजनाओं की संरचना, नामकरण और पारदर्शिता में होगा बड़ा बदलाव? आइए समझें
28 Feb, 2026 03:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड (सेबी) ने 26 फरवरी को एक नया परिपत्र जारी कर म्यूचुअल फंड योजनाओं के वर्गीकरण और संरचना में व्यापक बदलाव किए हैं। सेबी की ओर से किए गए इन बदलावों में नई कैटेगरी भी जोड़ी गईं, जिसमें कॉन्ट्रा फंड, सेक्टोरल डेट फंड और लक्ष्य आधारित लाइफ साइकिल फंड के साथ ही योजना के नामकरण, पोर्टफोलियो ओवरलैप और परिसंपत्ति आवंटन के लिए भी दिशानिर्देश निर्धारित किए गए हैं।
क्या है इसका उद्देश्य?
इसका मुख्य उद्देश्य निवेशकों के लिए स्पष्टता और पारदर्शिता को बढ़ाने के साथ कई योजनाओं में दोहराव के जोखिम को कम करना भी है।परिसंपत्ति प्रबंधक कंपनियों (एएमसी) को परिपत्र जारी होने की तिथि से छह महीने के भीतर सभी मौजूदा योजनाओं में ये बदलाव लागू करने होंगे।मूल्य और कॉन्ट्रा फंड सेबी ने यह निर्धारित किया है म्यूचुअल फंड, वैल्यू फंड और कॉन्ट्रा फंड दोनों की पेश कर सकते हैं, लेकिन शर्त यह है कि दोनों के पोर्टफोलियो में 50 प्रतिशत से अधिक का ओवरलैप नही होना चाहिए। सेक्टोरल और थीमेटिक इक्विटी योजनाओं के लिए समान कैटेगरी की अन्य इक्विटी योजनाओं और अन्य इक्विटी श्रेणियों (इसमें लार्ज कैप योजनाओं को शामिल नहीं किया गया है) के साथ ओवरलैप 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता।
योजनाओं के नामकरण को लेकर क्या किए गए बदलाव?
सेबी के परिपत्र में योजनाओं के नाम को लेकर भी स्पष्टता लाई गई है, इसमें योजना का नाम उसकी श्रेणी के अनुरूपर होना जरूरी है।नियामक ने योजना के नाम में केवल लाभ पर जोर देने वाले शब्दों या वाक्यों के प्रयोग पर रोक लगा दी है, जिसमें सभी योजनाएं अपने नाम के अनुरूप बनी रहे ।सेबी ने स्पष्ट किया है कि केवल नामकरण मानदंडों को पूरा करने के लिए किए गए बदलावों को मूलभूत विशेषता परिवर्तन नहीं माना जाएगा।परिसंपत्ति प्रबंधकों को परिपत्र जारी होने की तिथि से छह महीने के अंदर सभी मौजूदा योजनाओं में ये बदलाव लागू करने का आदेश है।
परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी के लिए क्या है नए नियम?
सेबी ने निवेशकों के लिए और अधिक पारदर्शिता बढ़ाने के लिए म्यूचुअल फंड्स को अब अपनी परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी (एएमसी) को वेबसाइट्स पर कैटेगरीवाइज पोर्टफोलियो ओवलैप (जैसे इक्विटी योजनाओं और अन्य इक्विटी पेशकशों के बीच डेट योजनाओं और हाइब्रिड योजनाओं के बीच) खुलासा करना अनिर्वाय किया है। इन खुलासों को मासिक रूप से अपेडेट करना होगा, जिससे पोर्टफोलियो की समानताओं के सही तरह से समझने में आसानी होगी और निवेशकों को सही दिशा में निवेश करने में मदद मिलेगी।
लाइफ साइकिल फंड के तहत कैसी शुरुआती की गई?
सेबी के नए नियमों के तहत एक प्रमुख लाइफ साइकिल फंड्स की शुरुआत की गई है।यह ओपन एंडेड फंड लक्ष्य आधारित निवेश के लिए बनाया गया है।इसमें इक्विटी, डेट, इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) एक्सचेंज-ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव्स (ETCDs) और गोल्ड एंड सिल्वर ईटीएफ में निर्धारित परिपक्वता अवधि और ग्लाइड पाथ सुविधा होती है।लाइफ साइकिल फंड्स को 5 से 30 वर्षों के लिए पांच के गुणाकों में पेश किया जा सकता है और एसेट मैनेजर किसी भी समय सदस्यता के लिए अधिकतम छह सक्रिय फंड रख सकते हैं।अगर किसी फंड की परिपक्वता अवधि एक साल से कम है, तो यूनिटहोल्डर की सहमति के इसे जल्द ही परिपक्वता वाले लाइफ साइकिल फंड में विलय करना होगा।
क्या है निकासी शुल्क संरचना?
लाइफ साइकिल फंड्स में निवेश करने वालों निवेशकों में वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देने के लिए सेबी ने एक निकासी शुल्क संरचना शुरू की है, जिसमें पहले साल निकासी पर 3 प्रतिशत का शुल्क, दूसरे साल 2 प्रतिशत और निवेश के तीसरे साल में 1 प्रतिशत शुल्क लागू होगा। यह फंड मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स के लिए निर्धारित बेंचमार्क ढांचे का पालन करेंगे और योजनाओं के नाम पर उनकी परिपक्वता अवधि शामिल होगी, जैसे कि 'लाइफ साइकिल फंड 2045'। पांच साल से कम परिपक्वता वाली अवधि के लिए लाइफ साइकिल फंड्स 50 प्रतिशत तक इक्विटी आर्बिट्रेज एक्सपोजर ले सकते है, लेकिन इक्विटी निवेश 65 से 75 प्रतिशत के भीतर होना आवश्यक है। अलग-अलग फंड कैटेगरी के लिए खास एसेट एलोकेशन लिमिट बदले हुए नियम के तहत अलग-अलग फंड कैटेगरी के लिए खास एसेट एलोकेशन लिमिट बताई गई है ।इक्विटी फंड में, स्कीम के फंड का बचा हुआ हिस्सा, जो उसकी मुख्य क्लास में इन्वेस्ट नहीं किया जाता है, उसे मौजूदा रेगुलेटरी लिमिट के तहत इक्विटी, मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट, सोना और चांदी और परमिटेड इन्वेस्टमेंट (इनवेंटेड इन-हाउस इन्वेस्टमेंट) में एलोकेट किया जा सकता है।लोन स्कीम के लिए, बचा हुआ हिस्सा ओवरनाइट, लिक्विड, अल्ट्रा-शॉर्ट, लो ड्यूरेशन और मनी मार्केट फंड को छोड़कर इनवेंटेड इन-हाउस इन्वेस्टमेंट में इन्वेस्ट किया जा सकता है।हाइब्रिड फंड में, बचा हुआ हिस्सा एसेट क्लास लिमिट के अंदर इनवेंटेड इन-हाउस इन्वेस्टमेंट (आर्बिट्रेज फंड को छोड़कर) सोना और चांदी ईटीएफ में एलोकेट किया जा सकता है।
क्षेत्रीय ऋण निधि के लिए क्या?
नए परिपकत्र में क्षेत्रीय ऋण निधियों का उल्लेख किया गया है, जिन्हे म्यूचुअल फंड तभी जारी कर सकते हैं जब लक्षित क्षेत्र में निवेश योग्य ऋणों की पर्याप्त उपलब्धता हो। मध्य और लंबी अवधि के ऋण निधियों के लिए निधि प्रबंधक ब्याज दरों में प्रतिकूल उतार चढाव की आशंका से पोर्टफोलियो की अवधि को एक साल से कम कर सकते है, लेकिन इसके लिए सेबी का निरीक्षण कम से कम तीन और चार साल की न्यूनमत पोर्टफोलियों की समय सीमा से नीचे नहीं हो और जरूरी दस्तावेजों और औचित्य भी सिद्ध करना जरूरी होगा।
सिम से लेकर UPI पेमेंट तक बदलने वाले हैं ये नियम, 1 मार्च से बदल रहे ये रूल, आपकी जेब पर होगा असर
28 Feb, 2026 10:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर बार की तरह इस महीने भी 1 मार्च से कई नियमों में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। महीने की पहली तारीख अक्सर नीतिगत और प्रशासनिक परिवर्तनों के लिए अहम मानी जाती है, जिनका सीधा असर आम लोगों की दिनचर्या और जेब पर पड़ता है। आइए विस्तार से जानते हैं।
सिम बाइंडिंग नियम लागू
मोबाइल यूजर्स के लिए नया नियम लागू होगा जिसके तहत व्हाट्सएप और अन्य मैसेजिंग ऐप्स को उसी फोन के सक्रिय सिम से लिंक करना जरूरी होगा जिसमें एप चल रहा है। यानी जिस डिवाइस पर एप इस्तेमाल कर रहे हैं, उसमें संबंधित सिम का होना अनिवार्य होगा। साथ ही वेब या डेस्कटॉप लॉगिन के लिए छह घंटे का ऑटो लॉग-आउट नियम लागू किया जाएगा। यानी कि 6 घंटे के बाद अब से वेब या डेस्कटॉप अपने आप लॉगआउट हो जाएगा। इसका उद्देश्य फर्जी नंबरों और साइबर अपराधों पर रोक लगाना है।
रेलवे का पुराना ऐप बंद
1 मार्च से रेलवे अपना पुराना UTS एप बंद कर रहा है। इसके बाद यात्री इसका इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। अनारक्षित और प्लेटफॉर्म टिकट बुक करने के लिए अब यात्रियों को नए Railone एप का उपयोग करना होगा। इससे यात्रियों को नई प्रणाली अपनानी होगी। शुरुआत में तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं, लेकिन रेलवे का कहना है कि नया सिस्टम अधिक तेज, सुरक्षित और उपयोगकर्ता-अनुकूल होगा। इस नए एप में टिकट बुक करने पर आपको काफी छूट भी मिलेगी।
एलपीजी की कीमतों में हो सकता है बदलाव
हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडर की नई कीमतें जारी होती हैं। होली के त्योहार को देखते हुए लोगों को उम्मीद है कि इस बार कीमतों में राहत मिल सकती है, हालांकि अंतिम फैसला सरकार की घोषणा के बाद ही साफ होगा।
न्यूनतम बैलेंस नियम में राहत
बैंकिंग से जुड़ा एक संभावित राहत भरा बदलाव भी सामने आ सकता है। कुछ सरकारी बैंक मिनिमम बैलेंस की गणना के तरीके में बदलाव कर सकते हैं। पहले किसी एक दिन बैलेंस कम होने पर पेनल्टी लग जाती थी, लेकिन अब एवरेज मंथली बैलेंस (AMB) के आधार पर शुल्क तय किया जा सकता है। यानी पूरे महीने का औसत बैलेंस महत्वपूर्ण होगा, जिससे ग्राहकों को पेनल्टी से बचने में आसानी हो सकती है।
यूपीआई पेमेंट में बढ़ेगी सुरक्षा
डिजिटल भुगतान को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए 1 मार्च से बड़े ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर सिर्फ यूपीआई पिन पर्याप्त नहीं होगा। बैंक उच्च राशि के लेनदेन के लिए अतिरिक्त सुरक्षा जैसे बायोमेट्रिक या मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर सकते हैं। बड़े अमाउंट के ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त वेरिफिकेशन लागू किया जा सकता है। यानी केवल यूपीआई पिन के बजाय बायोमेट्रिक या अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन की जरूरत पड़ सकती है। इसका मकसद ऑनलाइन फ्रॉड को कम करना और यूजर्स की सुरक्षा बढ़ाना है।
किराये को लेकर बदल सकते हैं नियम
किराये के नियमों में भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। नए या रिन्यू होने वाले रेंट एग्रीमेंट के लिए डिजिटल रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य किया जा सकता है। साथ ही सिक्योरिटी डिपॉजिट को अधिकतम दो महीने के किराए तक सीमित करने और मकान मालिक के प्रवेश से पहले पूर्व सूचना जैसे प्रावधानों पर जोर दिया जा रहा है, ताकि किरायेदार और मकान मालिक के बीच विवाद कम हों।
Biz Updates: GST मामले में फिनो बैंक के एमडी गिरफ्तार, निजी अस्पतालों का राजस्व 15% तक बढ़ने का अनुमान
28 Feb, 2026 07:34 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फिनो पेमेंट बैंक के प्रबंध निदेशक (एमडी) और सीईओ ऋषि गुप्ता को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया गया। जीएसटी खुफिया महानिदेशालय ने सीजीएसटी एवं एसजीएसटी एक्ट के प्रावधानों के तहत गुप्ता की गिरफ्तारी की है। बैंक ने बाजार नियामक सेबी को बताया कि मामला बैंक के कारोबारी साझेदार से जुड़ा है, सीधे तौर पर बैंक के दायित्वों से जुड़ा नहीं है। मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) केतन मर्चेंट फिलहाल बैंक का कामकाज संभालेंगे।
15% तक बढ़ेगा निजी अस्पतालों का राजस्व
निजी अस्पतालों का राजस्व अगले वित्त वर्ष में 14-15 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है। क्रिसिल रेटिंग्स ने कहा, अच्छी ऑक्यूपेंसी, लगातार बढ़ते बेड और नई सुविधा में तेज वृद्धि से राजस्व को समर्थन मिलेगा। यह लगातार पांचवां साल होगा, जब निजी अस्पतालों के राजस्व में दहाई अंकों में वृद्धि देखने को मिलेगी। 2024-25 में राजस्व 78,500 करोड़ था।
कर्नाटक सरकार को सौंपी गई पंचम राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट
कर्नाटक के पंचम राज्य वित्त आयोग ने 2026-2030 की अवधि के लिए ग्रेटर बंगलूरू प्राधिकरण क्षेत्र की सिटी कॉर्पोरेशनों से संबंधित अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, गुरुवार को यह रिपोर्ट राज्यपाल थावरचंद गहलोत और मुख्यमंत्री सिद्दारमय्या को प्रस्तुत की गई। शुक्रवार को इसे उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को भी सौंपा गया।रिपोर्ट सौंपने का नेतृत्व वित्त आयोग के अध्यक्ष सी. नारायणस्वामी ने किया, जिनके साथ सदस्य मोहम्मद सनाउल्ला, आर.एस. फोंडे और सचिव वसीरेड्डी विजय ज्योत्स्ना भी मौजूद थे। रिपोर्ट में शहरों के वित्तीय प्रबंधन, आय और व्यय के सुधार, और स्थानीय प्रशासन को सशक्त बनाने के सुझाव शामिल हैं। यह कदम कर्नाटक में नगरीय प्रशासन और विकास को और प्रभावी बनाने की दिशा में माना जा रहा है।
हरित बॉन्ड से 10,000 करोड़ जुटाएगा बैंक ऑफ बड़ौदा
बैंक ऑफ बड़ौदा हरित इन्फ्रा बॉन्ड जारी कर 10,000 करोड़ रुपये तक जुटाने की योजना बना रहा है। सूत्रों ने बताया कि आधार निर्गम आकार 5,000 करोड़ है। इसमें अधिक बोली आने पर 5,000 करोड़ तक के ग्रीन शू का विकल्प शामिल होगा, जिससे कुल निर्गम आकार 10,000 करोड़ पहुंच जाएगा। बोली चार मार्च को 11 बजे से दोपहर 12:00 बजे के बीच एनएसई के इलेक्ट्रॉनिक बुक प्रोवाइडर मंच पर आयोजित होगी।
आईआईएफएल होम को एडीबी से मिला कर्ज
आईआईएफएल होम फाइनेंस ने एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के साथ 30 करोड़ डॉलर (2,700 करोड़ रुपये) के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। कंपनी के एमडी-सीईओ गिरीश कौसगी ने शुक्रवार को कहा, यह ऋण आईआईएफएल होम फाइनेंस का पहला बाह्य वाणिज्यिक उधारी है। एडीबी का वित्तपोषण किफायती आवास को लगभग सभी बाजारों तक पहुंचाने में मदद करेगा।
Growth: प्रति व्यक्ति आय में इजाफा, राष्ट्रीय आय में भी हुई 10.2% की वृद्धि; विदेशी निवेश में 18 फीसदी उछाल
28 Feb, 2026 07:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देश में प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय वर्तमान में 1,92,774 रुपये आंकी गई है। शुद्ध राष्ट्रीय आय 271.44 लाख करोड़ रुपये है। यही नहीं, बचत के मोर्चे पर मजबूती दिखी है। इस कारण निवेश और पूंजी निर्माण के लिए घरेलू संसाधन आधार मजबूत हुआ है। आने वाले वक्त में कई देशों के साथ हुए व्यापार समझौते व घरेलू मांग के कारण निर्माण में बढ़ोतरी होगी। उपभोग व निर्यात में भी उछाल आने के आसार हैं। जीडीपी के नवीनतम संशोधित आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान मूल्यों पर प्रति व्यक्ति निजी अंतिम उपभोग व्यय (पीएफसीई) वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के लिए क्रमशः 1,07,910 रुपये 1,17,356 रुपये और 1,27,627 रुपये आंका गया। वर्ष 2024-25 में वर्तमान मूल्यों पर शुद्ध राष्ट्रीय आय 271.44 लाख करोड़ है। यह 2023-24 के 246.25 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 10.2% की वृद्धि दर्शाती है। जबकि 2023-24 में यह वृद्धि दर 11.6% थी। देश में प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय वर्ष 2022-23, 2023-24 के लिए क्रमशः 1,59,557 रुपये व 1,76,465 रुपये है। जहां तक बचत की बात है, तो वर्ष 2024-25 में सकल बचत 111.13 लाख करोड़ रुपये थी। 2024-25 में सकल बचत में प्रमुख हिस्सेदारी घरेलू क्षेत्र की 62.1% तथा गैर-वित्तीय निगमों की 28.9% है। वर्ष 2024-25 में वास्तविक सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में वृद्धि मुख्यतः विनिर्माण, खनन, निर्माण, वित्तीय सेवाएं तथा रियल एस्टेट, आवास स्वामित्व एवं व्यावसायिक सेवाओं में वृद्धि के कारण हुई। वर्तमान कीमतों पर सरकारी अंतिम उपभोग व्यय (जीएफसीई) का अनुमान 2024-25 के लिए 33.95 लाख करोड़ रुपये है, जबकि वर्ष 2023-24 में यह 30.74 लाख करोड़ रुपये था।
वास्तविक जीडीपी 322.58 लाख करोड़ का अनुमान
वास्तविक जीडीपी या स्थिर कीमतों पर जीडीपी का स्तर वित्त वर्ष 2025-26 में 322.58 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। वर्ष 2024-25 के लिए जीडीपी का प्रथम संशोधित अनुमान (एफआरई) 299.89 लाख करोड़ रुपये था।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 18 फीसदी उछाल
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच चालू वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-दिसंबर अवधि में देश में 18 फीसदी अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया। एफडीआई प्रवाह का यह आंकड़ा बताता है कि वैशि्वक बाजार में चुनौतियों और कई देशों में तनाव के बीच विदेशी निवेशकों में भारत को लेकर भरोसा कामय है। सरकार की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-दिसंबर, 2025 में देश में 47.87 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी आया, जो सालाना आधार पर 18 फीसदी की वृद्धि को दर्शाता है। वित्त वर्ष 2024-25 की समान अवधि में देश में 40.67 अरब डॉलर का एफडीआई आया था। 2025-26 के पहले नौ महीनों में देश कुल 73.31 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेश आया, जिसमें पुनर्निवेश आय भी शामिल है। अप्रैल-दिसंबर अवधि के दौरान सिंगापुर से सबसे ज्यादा एफडीआई आया, जबकि अमेरिका इस मामले में दूसरे स्थान पर रहा। उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्तूबर-दिसंबर) में देश में 12.69 अरब डॉलर का एफडीआई आया, जो सालाना आधार पर 16.6 फीसदी अधिक है। एक साल पहले की समान अवधि में यह आंकड़ा 10.88 अरब डॉलर था।
Report: तीन लाख करोड़ रुपये का होगा उपभोक्ता बाजार, जानें खरीदारी करने के तरीके में कैसे आया बदलाव
27 Feb, 2026 03:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत का उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं का बाजार तेजी से विस्तार के दौर में है। वर्ष 2029 तक इसके 11 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर (CAGR) से बढ़कर करीब तीन लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। जीआई ग्रुप होल्डिंग की रिपोर्ट में यह आकलन किया गया है।
वेतनभोगियों में किस वर्ग की रहेगी अमह भूमिका?
रिपोर्ट के मुताबिक, इस बाजार की वृद्धि में वेतनभोगी वर्ग, खासतौर पर युवा पेशेवरों की अहम भूमिका रहेगी।वर्तमान में तेजी से बिकने वाले कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की बिक्री में युवा पेशेवरों की हिस्सेदारी करीब 37 प्रतिशत है।वहीं लगभग 45 प्रतिशत खरीद फाइनेंस, यानी कर्ज या ईएमआई के माध्यम से की जा रही है।
खरीदारी के पैटर्न में कैसे आया बदलाव?
करीब 74 प्रतिशत जेन जेड उपभोक्ता ईएमआई या ‘बाय नाउ, पे लेटर’ जैसे विकल्पों का उपयोग करते हैं।वहीं, 68 प्रतिशत खरीदारों के लिए उत्पाद की विशेषताएं सबसे बड़ा निर्णयकारी कारक हैं।इसके बाद 61 प्रतिशत के लिए रिव्यू, 59 प्रतिशत के लिए कीमत और 55 प्रतिशत के लिए वारंटी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
वैल्यू फॉर मनी उत्पादों को दी जा रही प्राथमिकता
रिपोर्ट में बताया गया कि 73 प्रतिशत उपभोक्ता अभी भी ‘वैल्यू फॉर मनी’ उत्पादों को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन बेहतर प्रदर्शन मिलने पर लगभग 70 प्रतिशत लोग मिड-टियर या प्रीमियम उत्पादों में निवेश करने के लिए तैयार हैं।
अपग्रेड का ट्रेंड कैसे हो रहा मजबूत?
महिलाओं की भूमिका भी इस अपग्रेड ट्रेंड में तेजी से बढ़ रही है, जहां 61 प्रतिशत महिलाओं ने अधिक महत्वाकांक्षी खरीदारी की इच्छा जताई है।करीब 46 प्रतिशत उपभोक्ता हर 2-3 साल में अपने ड्यूरेबल उत्पाद बदल रहे हैं और 63 प्रतिशत लोग अपग्रेड के दौरान अक्सर ब्रांड भी बदल लेते हैं।ऐसे में खरीद का अनुभव, बिक्री के बाद सेवा और भरोसेमंद सपोर्ट बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त के अहम कारक बनते जा रहे हैं।
स्मार्ट लिविंग की बढ़ रही मांग
रिपोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि अगली बड़ी मांग ‘स्मार्ट लिविंग’ से जुड़ी होगी। लगभग 42 प्रतिशत उपभोक्ताओं के पास पहले से कम से कम एक स्मार्ट डिवाइस है, जबकि 67 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनकी अगली खरीद स्मार्ट फीचर वाले उत्पाद की होगी।
कंपनियों को उपभोक्ता रुझाने के अनुरूप खुद को ढालना होगा
जीआई ग्रुप होल्डिंग की कंट्री मैनेजर सोनल अरोड़ा ने कहा कि बदलती मांग को देखते हुए कर्मचारियों का प्रशिक्षण, बेहतर रिटेल अनुभव, मजबूत आफ्टर-सेल्स सर्विस और पीएलआई योजनाओं के जरिए विस्तार बेहद जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि जो कंपनियां इन उपभोक्ता रुझानों के अनुरूप खुद को ढालेंगी, वे भारत के तेजी से बढ़ते मध्यम वर्ग की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर पाएंगी।
Budget 2026: 'हर सुधार और आवंटन विकसित भारत 2047 की दिशा में कदम', पोस्ट-बजट वेबिनार में बोले पीएम मोदी
27 Feb, 2026 12:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पोस्ट-बजट के पहले वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार का हर सुधार और हर बजटीय आवंटन ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसलिए, बजट के बाद हर साल होने वाले ये वेबिनार बहुत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि नीतिगत फैसलों का मकसद दीर्घकालिक विकास को गति देना और देश को विकसित अर्थव्यवस्था की ओर ले जाना है।
पीछले एक दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था में क्या-क्या बदलाव हुए?
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था ने अभूतपूर्व मजबूती और लचीला रुख दिखाया है। उनके अनुसार, इस अवधि में सरकार ने दृढ़ संकल्प के साथ कई संरचनात्मक और नीतिगत सुधार लागू किए, जिससे आर्थिक ढांचे को मजबूती मिली।
नीति-निर्माण नहीं, बल्कि बेहतर क्रियान्वयन भी उतना ही जरूरी
‘टेक्नोलॉजी, रिफॉर्म्स एंड फाइनेंस फॉर विकसित भारत’ को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सुधारों की रफ्तार बनाए रखने के लिए सिर्फ नीति-निर्माण नहीं, बल्कि बेहतर क्रियान्वयन पर भी उतना ही ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि सुधारों का मूल्यांकन केवल उनके जमीनी प्रभाव के आधार पर होना चाहिए।
रिफॉर्म एक्सप्रेस को लेकर क्या बोले पीएम?
पीएम मोदी ने कहा कि रिफॉर्म एक्सप्रेस को बनाए रखने के लिए केवल नीतियों के इरादे पर नहीं, बल्कि बेहतर क्रियान्वयन पर भी उतना ही ध्यान देना होगा। सुधारों का आकलन उनके जमीनी प्रभाव के आधार पर होना चाहिए और पारदर्शिता, गति व जवाबदेही बढ़ाने के लिए एआई, ब्लॉकचेन और डेटा एनालिटिक्स के साथ शिकायत निवारण प्रणाली का उपयोग जरूरी है।
निवेशकों के लिए पीएम ने क्या है?
मोदी ने कहा कि सरकार की कोशिश व्यवस्था को अधिक पूर्वानुमानित और निवेशकों के अनुकूल बनाने की है। उन्होंने कहा कि बॉन्ड मार्केट सुधारों को दीर्घकालिक आर्थिक सुधारों के सक्षम साधन के रूप में देखा जाना चाहिए।
पूंजीगत व्यय में हुए बड़े बदलाव- पीएम
प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में बड़े बदलाव की ओर इशारा करते हुए कहा कि 11 वर्ष पहले जहां यह करीब 2 लाख करोड़ रुपये था, वहीं मौजूदा बजट में यह बढ़कर लगभग 12 लाख करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का इतना बड़ा निवेश निजी क्षेत्र के लिए स्पष्ट संदेश है कि अब उद्योग और वित्तीय संस्थान नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ें।उन्होंने उभरते क्षेत्रों में वित्तपोषण के नए मॉडल और मजबूत सहयोग की जरूरत पर बल दिया व परियोजनाओं में देरी और लागत बढ़ोतरी रोकने के लिए परियोजना स्वीकृति प्रक्रिया और मूल्यांकन की गुणवत्ता मजबूत करने की सलाह दी।
क्या है रिफॉर्म पार्टनरशिप चार्टर?
साथ ही, पीएम मोदी ने सरकार, उद्योग, वित्तीय संस्थानों और शिक्षाविदों के बीच एक स्पष्ट रिफॉर्म पार्टनरशिप चार्टर बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि बजट पर चर्चा से अधिक जरूरी उसका तेज और सरल क्रियान्वयन है, ताकि सभी हितधारकों को इसका लाभ मिल सके और अर्थव्यवस्था को नई गति मिले।
'ब्लॉकचेन से बदलेगा लेन-देन का भविष्य', निवेशकों को ब्लॉकचेन विशेषज्ञ की अहम सलाह
27 Feb, 2026 12:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैश्विक वित्तीय प्रणाली एक शांत लेकिन निर्णायक परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। जो लेन-देन पहले कई स्तरों के मध्यस्थों, कागजी प्रक्रियाओं और संस्थागत भरोसे पर निर्भर होते थे, वे अब तेजी से कोड, एल्गोरिद्म और विकेंद्रीकृत नेटवर्क्स के माध्यम से संचालित हो रहे हैं। ब्लॉकचेन और डिजिटल एसेट्स अब सीमित या हाशिये की तकनीक नहीं रहे, बल्कि मुख्यधारा की वित्तीय चर्चाओं का हिस्सा बनते जा रहे हैं। इसी तेज स्वीकार्यता के बीच, ब्लॉकचेन विशेषज्ञ और वित्तीय निवेशक बृजमोहन सिंह एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं जो आशावाद के साथ सावधानी को भी समान महत्व देता है।सिंह के अनुसार, ब्लॉकचेन-आधारित वित्तीय लेन-देन का उभार किसी अस्थायी ट्रेंड से अधिक, एक संरचनात्मक बदलाव है। तेज सेटलमेंट, सीमा-पार लेन-देन और पारदर्शी लेजर ने दुनिया भर में मूल्य के प्रवाह के तरीके को नया रूप दिया है। सीमा-पार रेमिटेंस से लेकर संस्थागत स्तर की डिजिटल एसेट कस्टडी तक, वित्तीय लेन-देन की दुनिया स्पष्ट रूप से विकसित हो रही है। हालांकि, वे इस बात पर ज़ोर देते हैं कि तकनीकी प्रगति को सुनिश्चित मुनाफे की गारंटी समझना एक बड़ी भूल हो सकती है।
“निवेश से पहले दो बार सोचिए,” सिंह उद्योग से जुड़ी चर्चाओं में अक्सर दोहराते हैं। यह संदेश ब्लॉकचेन या क्रिप्टो का विरोध नहीं, बल्कि वित्तीय परिपक्वता की अपील है। इतिहास गवाह है कि हर बड़े वित्तीय नवाचार चाहे वह शेयर बाजार हो या डेरिवेटिव्स में शुरुआती उत्साह अक्सर समझ से पहले सट्टेबाजी को जन्म देता है। सिंह के अनुसार, ब्लॉकचेन भी इससे अलग नहीं है।वर्तमान अपनाने के चरण की एक विशेषता यह है कि अब वैश्विक व्यापारिक नेता और बड़े संस्थान इसमें सक्रिय रूप से शामिल हो रहे हैं। बड़े एसेट मैनेजर्स टोकनाइज्ड एसेट्स की संभावनाएं तलाश रहे हैं, बहुराष्ट्रीय कंपनियां ब्लॉकचेन-आधारित सप्लाई चेन पर प्रयोग कर रही हैं, और भुगतान कंपनियां तेज काम के लिए डिजिटल एसेट रेल्स को एकीकृत कर रही हैं। यहां तक कि पारंपरिक बैंक, जो कभी संशय में थे, अब ब्लॉकचेन रिसर्च और इन्फ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश कर रहे हैं। यह संस्थागत भागीदारी तकनीक में विश्वास को दर्शाती है, लेकिन यह व्यक्तिगत निवेशकों के लिए जोखिम को समाप्त नहीं करती।
सिंह बताते हैं कि अनुभवी कारोबारी नेता ब्लॉकचेन को रणनीतिक दृष्टि से अपनाते हैं, भावनात्मक निर्णयों के आधार पर नहीं। उनकी भागीदारी आमतौर पर दीर्घकालिक विज़न, नियामकीय अनुपालन और गहन शोध पर आधारित होती है। इसके विपरीत, खुदरा निवेशक अक्सर सुर्खियों, अल्पकालिक मूल्य उतार-चढ़ाव या सोशल मीडिया नैरेटिव्स से प्रभावित होकर बाज़ार में प्रवेश करते हैं। यही दृष्टिकोण का अंतर वित्तीय असुरक्षा को जन्म देता है।
सिंह के विश्लेषण के अनुसार, नई वित्तीय लेन-देन दुनिया में तेजी से अधिक धैर्य और समझ को पुरस्कृत किया जाता है। ब्लॉकचेन का वास्तविक मूल्य घर्षण कम करने, भरोसा बढ़ाने और कुशल प्रणालियां बनाने में है न कि रातों-रात अमीर बनने में। वे ज़ोर देते हैं कि निवेश से पहले मूलभूत पहलुओं, वास्तविक उपयोग मामलों, गवर्नेंस संरचनाओं और नियामकीय स्पष्टता का मूल्यांकन आवश्यक है।
साथ ही, सिंह यह भी स्वीकार करते हैं कि दुनिया इस परिवर्तन को स्पष्ट रूप से स्वीकार कर रही है। देश डिजिटल एसेट्स के लिए नियामकीय ढाँचे विकसित कर रहे हैं, केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं पर काम कर रहे हैं, और उद्यम अपने मुख्य संचालन में ब्लॉकचेन को शामिल कर रहे हैं। यह स्वीकृति दर्शाती है कि वित्तीय क्रांति न केवल शुरू हो चुकी है, बल्कि अपरिवर्तनीय भी है।
इसलिए असली चुनौती संतुलन की है। सिंह का मानना है कि ब्लॉकचेन दुनिया के लेन-देन के तरीकों, एसेट्स के मूल्यांकन और आर्थिक भागीदारी को नए सिरे से परिभाषित करेगा। लेकिन वे उतनी ही दृढ़ता से यह भी कहते हैं कि निवेशकों, व्यवसायों और नीति-निर्माताओं द्वारा जिम्मेदार अपनाने से ही यह तय होगा कि यह परिवर्तन सतत विकास की ओर ले जाएगा या बार-बार अस्थिरता के चक्र पैदा करेगा। नई वित्तीय लेन-देन दुनिया में अवसर वास्तविक हैं, लेकिन ज़िम्मेदारी भी उतनी ही वास्तविक है। जैसा कि बृजमोहन सिंह निष्कर्ष निकालते हैं, “नवाचार जिज्ञासा को आमंत्रित करना चाहिए, अंधविश्वास को नहीं और भविष्य उन्हीं का होगा जो निवेश से पहले प्रणाली को समझते हैं।”
Adani Foundation: 'विकसित भारत 2047 की यात्रा में महिलाएं केंद्रीय सूत्रधार', बोलीं डॉ प्रीति अदाणी
27 Feb, 2026 11:14 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अदाणी फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. प्रीति अदाणी ने भारत के विकसित भारत 2047 की यात्रा में महिलाओं को केंद्रीय सूत्रधार बनाने का आह्वान किया है। उन्होंने 'सशक्त नारी, विकसित भारत' सम्मेलन में कहा कि महिलाओं की आर्थिक क्षमता विकसित भारत की परिकल्पना का केंद्रबिंदु है। यह सम्मेलन नई दिल्ली में चिंतन रिसर्च फाउंडेशन द्वारा 26 फरवरी 2026 को आयोजित किया गया था।डॉ. अदाणी ने महिला व बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी का स्वागत करते हुए महिला नेतृत्व वाले विकास के पीछे की नीतिगत गति को स्वीकार किया। उन्होंने संकल्पना से आगे बढ़कर सतत आर्थिक भागीदारी की ओर बढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने जोर दिया कि सशक्तिकरण की शुरुआत पहुंच से होती है। अदाणी समूह की सामाजिक कल्याण शाखा, फाउंडेशन की आरे से समर्थित पहलों के माध्यम से कृषि, डेयरी, स्वास्थ्य और उद्यम के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर परिणाम प्राप्त हुए हैं।ग्रामीण समुदायों में महिला किसानों को सरल कृषि मोबाइल एप्लिकेशन से परिचित कराया गया है, जिससे उन्हें सिंचाई, उर्वरक उपयोग और मंडी मूल्य ट्रैकिंग में मार्गदर्शन मिलता है। इससे उच्च उत्पादकता और मजबूत आय प्राप्त हुई है। दुग्ध उत्पादन क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 3,500 से अधिक महिलाएं प्रतिवर्ष 75 लाख लीटर से अधिक दूध का संग्रहण करती हैं। पारदर्शी मूल्य निर्धारण और संगठित खरीद से उनकी आय स्थिरता बढ़ी है।
स्वास्थ्य और आजीविका पहल
फाउंडेशन की प्रमुख मातृ व महिला स्वास्थ्य पहल, सुपोषण के तहत प्रशिक्षित स्थानीय महिला स्वयंसेवकों ने 32 लाख से अधिक महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार में सहयोग किया है। इसके अतिरिक्त, स्वाभिमान कार्यक्रम ने 300 उद्यम स्वयं सहायता समूहों में 4,500 से अधिक महिलाओं को स्थायी आजीविका प्राप्त करने में सक्षम बनाया है। डॉ. अदाणी ने कहा कि सशक्तिकरण का अर्थ दान देना नहीं है, बल्कि कौशल, वित्त, बाजार और नेतृत्व के अवसरों तक पहुंच बढ़ाना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जमीनी स्तर पर ऐसे कार्यक्रम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हैं।
नीतिगत समर्थन और भविष्य की दिशा
उन्होंने हाल ही में पारित केंद्रीय बजट की स्वयं सहायता उद्यमी पहल का जिक्र किया। डॉ. अदाणी ने इसे महिलाओं को सूक्ष्म ऋण लेने वाली संस्थाओं से उद्यम मालिकों के रूप में विकास पूंजी तक पहुंच प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम बताया। उन्होंने जोर दिया कि भारत की दीर्घकालिक समृद्धि के लिए महिलाओं की आर्थिक भागीदारी अत्यावश्यक है। अपने संबोधन के समापन में, डॉ. अदाणी ने संस्थानों से संरचनात्मक बाधाओं को दूर करने और अवसरों तक पहुंच को व्यापक बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "उसे मौका दो। और वह कर दिखाएगी।"
तीसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 8.3% रहने का अनुमान, महंगाई में कमी और मांग बढ़ने से अर्थव्यवस्था मजबूत
27 Feb, 2026 10:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चालू वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में भारत की आर्थिक वृद्धि दर मजबूत रहने की संभावना है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रतिकूल बेस इफेक्ट के बावजूद देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर लगभग 8.3 प्रतिशत रह सकती है।
किन कारकों ने जीडीपी को सहारा दिया?
रिपोर्ट में कहा गया है कि जीएसटी दर में कटौती के बाद मांग और आर्थिक गतिविधियों में आई तेजी ने ग्रोथ को सहारा दिया है। अनुमान के अनुसार, तीसरी तिमाही का जीडीपी ग्रोथ 8.3 प्रतिशत रह सकता है, जो पिछले साल की समान तिमाही के 6.4 प्रतिशत की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक है।सकल मूल्य वर्धन (GVA) वृद्धि दर में भी सुधार के संकेत हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, तीसरी तिमाही में जीवीए ग्रोथ बढ़कर करीब 8.0 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 6.5 प्रतिशत से अधिक है। हालांकि यह दूसरी तिमाही के 8.1 प्रतिशत के मुकाबले मामूली रूप से कम रह सकती है।
नाममात्र जीडीपी वृद्धि दर को लेकर क्या है संकेत?
रिपोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि नाममात्र जीडीपी वृद्धि दर में कुछ नरमी आ सकती है। दूसरी तिमाही में 8.7 प्रतिशत रहने के बाद तीसरी तिमाही में यह घटकर लगभग 8.5 प्रतिशत रहने की संभावना है, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 10.3 प्रतिशत थी। नाममात्र वृद्धि में यह कमी मुख्य रूप से घटती महंगाई के कारण जीडीपी डिफ्लेटर में आई गिरावट से जुड़ी मानी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 के लिए समग्र विकास परिदृश्य अभी भी लचीला और मजबूत बना हुआ है। साथ ही, शुरुआती संकेत बताते हैं कि वित्त वर्ष 2027 में भी आर्थिक गति जारी रह सकती है। हालांकि, अंतिम वार्षिक अनुमानों पर स्पष्टता सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा प्रस्तावित GDP बेस ईयर संशोधन के बाद ही आएगी। गौरतलब है कि MoSPI आज संशोधित बेस ईयर 2022-23 के साथ GDP के आधिकारिक आंकड़े जारी करने वाला है। इससे ग्रोथ ट्रेंड और बेस ईयर बदलाव के समग्र प्रभाव को लेकर अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
Block Layoffs: मुनाफे के बावजूद जैक डॉर्सी की कंपनी ने 4,000 कर्मचारियों को निकाला, कैसे एआई बना फैसले का कारण
27 Feb, 2026 09:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक इंटेलिजेंस टूल्स के बढ़ते प्रभाव ने ग्लोबल टेक इंडस्ट्री में काम करने के तरीकों को पूरी तरह से बदल दिया है। इसी बदलाव का हवाला देते हुए, ट्विटर (अब एक्स) के सह-संस्थापक जैक डॉर्सी के नेतृत्व वाली वित्तीय तकनीकी कंपनी 'ब्लॉक' ने अपने लगभग आधे कर्मचारियों की छंटनी करने का बड़ा फैसला लिया है। कंपनी के इस कदम से 4,000 से अधिक कर्मचारियों की नौकरी जाएगी। डॉर्सी ने इसे कंपनी के इतिहास के सबसे कठिन फैसलों में से एक बताया है।
मुनाफे के बावजूद छंटनी का फैसला क्यों?
इस छंटनी की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि कंपनी किसी वित्तीय संकट से नहीं गुजर रही है। जैक डॉर्सी ने साफ किया है कि कंपनी का व्यवसाय मजबूत है, सकल लाभ लगातार बढ़ रहा है और मुनाफे में भी सुधार हो रहा है। दरअसल, कंपनी द्वारा बनाए और इस्तेमाल किए जा रहे 'इंटेलिजेंस टूल्स' ने काम करने के तरीके को बदल दिया है। इन टूल्स की मदद से छोटी टीमें अधिक कुशलता और बेहतर तरीके से काम कर पा रही हैं। डॉर्सी का मानना है कि इस बदलाव को अपनाने में ब्लॉक ने कोई जल्दबाजी नहीं की है, बल्कि 'ज्यादातर कंपनियां इस मामले में पिछड़ गई हैं'। इस कटौती के बाद, कंपनी का आकार 10,000 से अधिक कर्मचारियों से घटकर 6,000 से भी कम रह जाएगा।
कंपनी ने छंटनी का एलान करते हुए क्या-क्या कहा?
बार-बार होने वाली छंटनी से कर्मचारियों के मनोबल और ग्राहकों के भरोसे को नुकसान पहुंचता है, इसलिए कंपनी ने एकमुश्त छंटनी का विकल्प चुना। निकाले गए कर्मचारियों को वित्तीय सहायता देने के लिए कंपनी ने एक मजबूत सेवरेंस पैकेज का ऐलान किया है:
प्रभावित कर्मचारियों को 20 सप्ताह का वेतन और सेवा के प्रत्येक वर्ष के लिए एक अतिरिक्त सप्ताह का वेतन दिया जाएगा।
मई के अंत तक की वेस्टेड इक्विटी और छह महीने की स्वास्थ्य सुविधाएं दी जाएंगी।
कर्मचारी अपने कॉरपोरेट डिवाइस अपने पास रख सकेंगे और ट्रांजिशन में मदद के लिए 5,000 डॉलर की अतिरिक्त राशि मिलेगी।
अमेरिका के बाहर काम करने वाले कर्मचारियों को भी स्थानीय नियमों के अनुसार समान सहायता प्रदान की जाएगी।
अक्सर छंटनी के दौरान कंपनियों द्वारा कर्मचारियों का सिस्टम एक्सेस तुरंत ब्लॉक कर दिया जाता है, लेकिन ब्लॉक ने कर्मचारियों को ठीक से विदाई लेने का मौका देने के लिए गुरुवार शाम (पैसिफिक समय) तक स्लैक और ईमेल खुले रखने का फैसला किया है। इसके अलावा, डॉर्सी एक लाइव वीडियो सेशन के जरिए कर्मचारियों को धन्यवाद भी देंगे। उनका मानना है कि कुशल और ठंडे रवैये की तुलना में यह अजीब लेकिन मानवीय तरीका अपनाना बेहतर है।
अब आगे क्या?
वर्ष 2009 में स्क्वायर के रूप में शुरू हुई इस कंपनी ने 2021 में अपना नाम बदलकर ब्लॉक कर लिया था। इस पुनर्गठन प्रक्रिया में कंपनी को लगभग 450 मिलियन से 500 मिलियन डॉलर का खर्च आने का अनुमान है। जो कर्मचारी कंपनी में रुक रहे हैं, उन्हें अब एक नई रणनीति पर काम करना होगा। डॉर्सी के अनुसार, भविष्य में कंपनी के हर काम और निर्माण के केंद्र में इंटेलिजेंस होगा, जिससे ग्राहक खुद कंपनी की क्षमताओं का उपयोग कर सीधे अपने लिए नए फीचर्स विकसित कर सकेंगे। यह कदम इस बात का स्पष्ट संकेत है कि एआई के युग में टेक कंपनियां अपने कारोबारी मॉडल को किस तरह रीशेप कर रही हैं।
कॉपी है नानी के ‘आया शेर’ गाने का हुक स्टेप, राजस्थान के इस मशहूर डांसर का दावा; चार साल पहले हो चुका वायरल
26 Feb, 2026 10:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
साउथ के नेचुरल सुपरस्टार कहे जाने वाले अभिनेता नानी की आगामी फिल्म ‘द पैराडाइज’ अपनी घोषणा के बाद से ही लगातार चर्चाओं में बनी हुई है। अभी हाल ही में फिल्म का पहला गाना ‘आया शेर’ रिलीज किया गया। अनिरुद्ध रविचंद्रन के संगीत से सजे इस गाने में नानी जबरदस्त डांस करते नजर आ रहे हैं। लेकिन गाने का जो हुक स्टेप है, उसको लेकर अब डांसर बाबा जैक्सन ने सवाल उठाया है। बाबा जैक्सन ने इसे उनके डांस स्टेप्स से कॉपी किए जाने का दावा किया है।
कॉपी है नानी का डांस स्टेप
नानी के गाने ‘आया शेर’ के हुक स्टेप में नानी बैठ कर एक पैर को आगे बढ़ाते हुए आगे बढ़ते जाते हैं। इस दौरान वो मुंह में सिगरेट लगाए भी नजर आते हैं। इस गाने के सामने आने के बाद से ही बाबा जैक्सन का ऐसा दावा है कि ये स्टेप उनके डांस स्टेप से कॉपी किया गया है। गाना सामने आने के बाद बाबा जैक्सन ने अपने इंस्टाग्राम पर कई वीडियोज डाले हैं, जिनमें एक तरफ वो इस डांस स्टेप को करते नजर आ रहे हैं, जिसे उन्होंने ओरिजिनल करार दिया है। जबकि दूसरी ओर नानी के इस स्टेप को उन्होंने कॉपी बताया है। यही नहीं बाब जैक्सन ने अपने मोबाइल पर एक वीडियो दिखाया, जिसमें वो ये ही स्टेप कर रहे हैं और ये वीडियो साल 2021 का है। यानी नानी ने बाबा जैक्सन के चार साल पुराने डांस स्टेप को कॉपी किया है। इसके बाद बाबा जैक्सन ने दिखाया, कैसे उन्होंने साल दर साल इस डांस स्टेप को करते हुए वीडियो बनाए हैं।
कौन है बाबा जैक्सन
बाबा जैक्सन के नाम से मशहूर डांसर का असली नाम युवराज सिंह है। बाबा जैक्सन खुद को माइकल जैक्सन का बहुत बड़ा फैन बताते हैं। साथ ही माइकल जैक्सन से उनके डांस स्टेप्स की तुलना किए जाने पर खुद को भाग्यशाली मानते हैं। बाबा जैक्सन एक डांसर हैं, जो कई रियलिटी शोज में भी बतौर कंटेस्टेंट नजर आ चुके हैं। बाबा जैक्सन टिकटॉक और इंस्टाग्राम रील्स के जरिए लोगों की नजरों में आए और उसके बाद देखते-देखते सोशल मीडिया सेंसेशन बन गए। यही नहीं ऋतिक रोशन से लेकर प्रभु देवा और वरुण धवन जैसे कई दिग्गज डांसर और एक्टर्स भी बाबा जैक्सन की खुलकर तारीफ कर चुके हैं। राजस्थान के रहने वाले बाबा जैक्सन ने यूट्यूब से मून वॉक सीखा और उसके बाद धीरे-धीरे माइकल जैक्सन के डांस स्टेप्स देख-देखकर उन्होंने डांस सीखा है।
फैंस को पसंद आया ‘आया शेर’
श्रीकांत ओडेला द्वारा निर्देशित ‘द पैराडाइज’ साल 2026 की बहुप्रतीक्षित फिल्मों में से एक है। फिल्म 21 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। ‘आया शेर’ गाने की बात करें तो इस गाने में अनिरुद्ध रविचंद्रन का संगीत है। जबकि गाने की कोरियोग्राफी सुधन मास्टर ने की है। गाने की बीट्स और नानी के डांस स्टेप्स की वजह से गाना रिलीज के बाद से ही चर्चा में बना हुआ है। इस गाने में अर्जुन चंडी और अद्दुला जंगीरेड्डी ने अपनी आवाज दी है। गाने को काफी पसंद किया जा रहा है और ये 22 मिलियन से भी ज्यादा व्यूज हासिल कर चुका है।
ED Action: फेमा जांच के बीच उद्योगपति अनिल अंबानी ईडी के दिल्ली दफ्तर पहुंचे, जनिए क्या अपडेट
26 Feb, 2026 10:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत चल रही जांच के सिलसिले में ईडी ने अनिल अंबानी को आज दिल्ली स्थित मुख्यालय में पेश होने के लिए समन जारी किया है। अधिकारियों के अनुसार, यह समन मामले से जुड़े वित्तीय लेन-देन और कथित विदेशी मुद्रा उल्लंघनों की जांच के तहत भेजा गया है।
Biz Updates: पर्यटन को विकास का इंजन बनाने की तैयारी, जीडीपी में हिस्सेदारी बढ़ाकर 10 फीसदी करने का लक्ष्य
26 Feb, 2026 09:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि पर्यटन अब राष्ट्रीय विकास का एक अहम स्तंभ बन चुका है। उन्होंने सरकार के उस विजन को रेखांकित किया, जिसके तहत पर्यटन क्षेत्र का जीडीपी में योगदान मौजूदा 6% से बढ़ाकर 10% तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। शेखावत ने यह बात नई दिल्ली के द्वारका स्थित यशोभूमि में आयोजित साउथ एशिया ट्रैवल एंड टूरिज्म एक्सचेंज (SATTE) के 33वें संस्करण में कही। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए शेखावत ने कहा कि पर्यटन न केवल आर्थिक वृद्धि को गति देता है, बल्कि रोजगार सृजन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षेत्रीय विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने उद्योग से जुड़े सभी हितधारकों के साथ मिलकर इस क्षेत्र को और मजबूत करने पर जोर दिया। इस अवसर पर लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता भी मौजूद रहे। उद्घाटन समारोह में देश-विदेश से आए पर्यटन और यात्रा उद्योग के प्रतिनिधियों, नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों ने भाग लिया।
