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Global Tension के बीच भारत की ग्रोथ बरकरार, RBI ने दी सावधानी की सलाह
2 May, 2026 12:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
RBI गवर्नर की चेतावनी: वैश्विक कर्ज और रक्षा खर्च बन सकते हैं चुनौती, पर भारत की नींव मजबूत
एम्स्टर्डम। रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि मजबूत घरेलू खपत और सरकारी निवेश के कारण भारत की आर्थिक स्थिति स्थिर बनी हुई है। हालांकि, उन्होंने बढ़ते रक्षा बजट और देशों पर बढ़ते कर्ज को लेकर दुनिया को आगाह भी किया है।
भारत की मजबूती के पीछे के कारण
गवर्नर के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था को दो मुख्य स्तंभों से सहारा मिल रहा है:
सार्वजनिक निवेश: सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर किए जा रहे खर्च (Capex) ने निजी निवेश को नई गति दी है।
घरेलू मांग: देश के भीतर वस्तुओं और सेवाओं की बढ़ती खपत ने उत्पादन क्षमता को विस्तार दिया है।
कॉरपोरेट सेहत: कंपनियों की बैलेंस शीट पहले से बेहतर हुई है और पूंजी बाजारों से फंड जुटाने की प्रक्रिया में तेजी आई है।
गवर्नर मल्होत्रा ने किन खतरों की ओर किया इशारा?
वैश्विक परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कुछ प्रमुख जोखिमों का जिक्र किया:
राजकोषीय दबाव: रक्षा खर्च में हो रही बढ़ोतरी और वित्तीय विस्तार के कारण कई देशों की राजकोषीय स्थिति बिगड़ सकती है।
ऊंचा मूल्यांकन: तकनीकी क्षेत्र सहित कुछ विशेष परिसंपत्तियों (Assets) की कीमतों का वास्तविकता से अधिक होना बाजार के लिए खतरा बन सकता है।
महंगाई का चक्र: सप्लाई चेन में बाधा और ऊर्जा (ईंधन) की बढ़ती कीमतें 'सेकेंड-ऑर्डर महंगाई' को जन्म दे सकती हैं।
समझिए क्या है 'सेकेंड-ऑर्डर महंगाई'?
यह महंगाई का वह चक्र है जो एक क्षेत्र से शुरू होकर पूरी अर्थव्यवस्था को अपनी चपेट में ले लेता है।
शुरुआत: मान लीजिए कच्चे तेल या कच्चे माल की कीमतें बढ़ती हैं।
असर: इससे परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ जाती है।
परिणाम: कंपनियां घाटे से बचने के लिए अपने उत्पादों के दाम बढ़ा देती हैं। इसके बाद कर्मचारी भी अपना घर चलाने के लिए ज्यादा वेतन की मांग करते हैं, जिससे लागत और बढ़ती है और महंगाई का एक कभी न खत्म होने वाला लूप बन जाता है।
विकास दर का अनुमान
आरबीआई गवर्नर ने भारत की विकास दर (GDP Growth) के आंकड़े भी साझा किए:
2021-25: औसत वृद्धि दर 8.2% रही।
2025-26: अनुमानित विकास दर 7.6%।
2026-27: अनुमानित विकास दर 6.9%।
छोटे व्यवसाय हुए मजबूत: डिजिटल प्लेटफॉर्म से बढ़ी कमाई और पहुंच
2 May, 2026 09:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डिजिटल गवर्नेंस का कमाल: छोटे उद्योगों की उत्पादकता में भारी उछाल, IMF की रिपोर्ट में खुलासा
भारत में प्रशासनिक प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण ने सूक्ष्म और लघु उद्योगों (Micro Enterprises) की तस्वीर बदल दी है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के हालिया अध्ययन के अनुसार, जिन राज्यों ने सरकारी कामकाज को तेजी से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट किया, वहां के छोटे कारोबारों की कार्यक्षमता में न केवल सुधार हुआ है, बल्कि बाजार में प्रतिस्पर्धा भी अधिक संतुलित हुई है।
डिजिटल सुधारों का जमीनी प्रभाव
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु दर्शाते हैं कि डिजिटल सुधारों को अपनाने वाले राज्यों में:
उत्पादकता में वृद्धि: व्यवसायों की काम करने की क्षमता तेजी से बढ़ी है।
समान अवसर: बड़ी और छोटी कंपनियों के बीच का उत्पादकता अंतर (Productivity Gap) कम हुआ है, जिससे छोटे व्यवसायों को भी आगे बढ़ने का मौका मिला है।
संतुलित प्रतिस्पर्धा: अब छोटे स्टार्टअप और पारंपरिक बड़े उद्योग एक ही स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर पा रहे हैं।
98-पॉइंट एक्शन प्लान: सुधारों का रोडमैप
वर्ष 2014 में राज्यों द्वारा अपनाया गया '98-पॉइंट एक्शन प्लान' इस बदलाव की धुरी रहा है। इसका प्राथमिक उद्देश्य व्यापारिक नियमों को सरल बनाना और प्रक्रियाओं को डिजिटल करना था।
इस योजना के तहत 6 प्रमुख क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव किए गए:
कर प्रणाली (Tax System): ऑनलाइन फाइलिंग और पारदर्शिता।
निर्माण अनुमति (Construction Permits): अनुमति प्रक्रियाओं का सरलीकरण।
पर्यावरण और श्रम नियम: नियमों के पालन में सुगमता।
निरीक्षण (Inspection): पारदर्शी और डिजिटल जांच प्रणाली।
व्यावसायिक विवाद: विवादों का त्वरित समाधान।
सिंगल-विंडो क्लीयरेंस: एक ही जगह से सभी जरूरी मंजूरियां।
छोटे कारोबारियों के लिए 'गेम चेंजर'
डिजिटल सिस्टम ने सूक्ष्म उद्यमियों के लिए बाधाओं को कम किया है:
समय और धन की बचत: सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत कम हुई।
पारदर्शिता: ऑटोमेटेड मंजूरी ने भ्रष्टाचार और रिश्वत जैसे अनौपचारिक खर्चों पर लगाम लगाई है।
प्रभावी संसाधन: कंपनियां अब अपनी पूंजी और श्रम (Labour) का बेहतर इस्तेमाल कर पा रही हैं।
एक रोचक तथ्य: रिपोर्ट में पाया गया कि इन सुधारों का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी लाभ शुरुआती दौर में देखा गया। शुरुआती प्रशासनिक बदलावों ने छोटे उद्योगों को सबसे ज्यादा मजबूती प्रदान की।
MSME: भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार स्तंभ
भारत का सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र देश की आर्थिक मजबूती के लिए अपरिहार्य है:
उत्पादन: कुल मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन में 35% का योगदान।
रोजगार: लगभग 11 करोड़ लोगों को आजीविका प्रदान करता है।
संवेदनशीलता: ये व्यवसाय सरकारी नियमों और लागत में होने वाले बदलावों से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, इसलिए डिजिटल गवर्नेंस इनके लिए सुरक्षा कवच की तरह है।
पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ने की चेतावनी, संकट गहराया
2 May, 2026 06:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेल की बढ़ती कीमतें और सब्सिडी का बोझ: सरकार के सामने बड़ी आर्थिक चुनौती
व्यावसायिक गैस सिलिंडर (Commercial Cylinder) की कीमतों में 993 रुपये की भारी वृद्धि ने बाजार में खलबली मचा दी है। हालांकि, राहत की बात यह है कि घरेलू रसोई गैस (LPG) और पेट्रोल-डीजल के दाम फिलहाल स्थिर रखे गए हैं। लेकिन यह 'राहत' केवल ऊपरी है; पर्दे के पीछे तेल कंपनियों पर बढ़ती लागत और घाटे का दबाव एक बड़े आर्थिक संकट की ओर इशारा कर रहा है।
लागत और बिक्री के बीच बढ़ता अंतर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की लागत काफी बढ़ चुकी है। रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) के विश्लेषण के अनुसार:
यदि कच्चा तेल 120-125 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहता है, तो तेल कंपनियों को पेट्रोल पर 14 रुपये और डीजल पर 18 रुपये प्रति लीटर का नुकसान (निगेटिव मार्केटिंग मार्जिन) उठाना पड़ रहा है।
घरेलू एलपीजी की स्थिति और भी गंभीर है। अनुमान है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो वित्त वर्ष 2026-27 में तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी (लागत से कम वसूली) 80,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
बजट और सब्सिडी का गणित
सरकार के लिए सबसे बड़ी मुश्किल बजट प्रावधानों और वास्तविक घाटे के बीच का अंतर है।
बजट 2026-27 में एलपीजी सब्सिडी के लिए केवल 11,085 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
इसमें से 9,200 करोड़ रुपये गरीब परिवारों के कनेक्शन और 1,500 करोड़ रुपये 'पहल' (DBT) योजना के लिए हैं।
यदि घाटा 80,000 करोड़ रुपये तक जाता है, तो यह बजट में तय राशि से लगभग सात गुना अधिक होगा।
पिछला अनुभव: अगस्त 2025 में भी सरकार ने तेल कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) के नुकसान की भरपाई के लिए 30,000 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया था।
चौतरफा दबाव: केवल तेल ही नहीं, खाद भी महंगी
ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का असर केवल तेल तक सीमित नहीं है। इक्रा का अनुमान है कि उर्वरक (Fertilizer) सब्सिडी भी बजट में आवंटित 1.71 लाख करोड़ से बढ़कर 2.05 - 2.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। इसका सीधा मतलब है कि सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ेगा, जिसका असर अंततः अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
सरकार के पास मौजूद तीन कठिन विकल्प
अप्रैल 2022 से पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर हैं, जबकि कच्चा तेल हाल ही में 126 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू चुका है। इस कठिन परिस्थिति में सरकार के पास केवल तीन रास्ते बचते हैं:
विकल्प
संभावित परिणाम
कंपनियों पर बोझ छोड़ना
तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति (Balance Sheet) खराब होगी और निवेश घटेगा।
बजट से भरपाई करना
राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) बढ़ेगा, जिससे अन्य विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
कीमतों में क्रमिक वृद्धि
आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ेगा और मध्यम वर्ग की जेब ढीली होगी।
उड़ान भरना होगा महंगा: ATF कीमतों में 5% उछाल, एयरफेयर पर असर
1 May, 2026 01:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
विमानन ईंधन अपडेट: अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ATF की कीमतों में 5% की बढ़ोतरी, घरेलू दरों में बदलाव नहीं
नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का असर अब विमानन क्षेत्र पर दिखने लगा है। तेल कंपनियों ने शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के लिए विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) की दरों में 5 फीसदी का इजाफा किया है। यह लगातार दूसरा महीना है जब ईंधन की कीमतों में उछाल दर्ज किया गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि घरेलू एयरलाइंस के लिए कीमतों को स्थिर रखा गया है।
घरेलू यात्रियों को राहत, किराया बढ़ने की आशंका कम
सरकार और सरकारी तेल कंपनियों ने एक संतुलित रुख अपनाते हुए घरेलू एयरलाइंस के लिए जेट फ्यूल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। इस फैसले से अनुमान लगाया जा रहा है कि फिलहाल घरेलू हवाई यात्रा के किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी, जिससे आम यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
एक महीने में दूसरी बार बढ़ीं कीमतें
एक मई से लागू हुए नए फैसले के बाद दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एटीएफ की कीमत 76.55 डॉलर प्रति किलोलीटर (5.33%) बढ़कर 1511.86 डॉलर प्रति किलोलीटर हो गई है। इससे पहले एक अप्रैल को भी कीमतों में वृद्धि की गई थी।
पश्चिम एशिया संकट का असर
विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों में भारी अस्थिरता देखी जा रही है। इसी के मद्देनजर तेल कंपनियों ने यह समायोजन किया है। जहां विदेशी एयरलाइंस को अब नई बाजार दरों के अनुसार भुगतान करना होगा, वहीं घरेलू बाजार को फिलहाल कीमतों के मामले में नियंत्रित रखा गया है।
मुख्य बातें:
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए जेट ईंधन 5% महंगा हुआ।
घरेलू हवाई ईंधन की कीमतों में कोई परिवर्तन नहीं।
दिल्ली में नई दर 1511.86 अमेरिकी डॉलर प्रति किलोलीटर।
कीमतों में लगातार दूसरे महीने देखी गई वृद्धि।
सरकार की कोटा नीति के बावजूद निर्यात लक्ष्य अधूरा रहने की आशंका
1 May, 2026 12:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चीनी निर्यात पर संकट: वैश्विक कीमतों में गिरावट से भारत का लक्ष्य प्रभावित, कोटे से आधा ही हो पाएगा एक्सपोर्ट
नई दिल्ली: चालू विपणन सत्र 2025-26 (अक्टूबर-सितंबर) में भारत का चीनी निर्यात उम्मीद से काफी कम रहने का अनुमान है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, वैश्विक बाजार में कीमतों की प्रतिकूल स्थिति के कारण इस सीजन में केवल 7.5 से 8 लाख टन चीनी का ही निर्यात हो पाने की संभावना है।
कोटा ज्यादा, निर्यात कम
दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश भारत में निर्यात पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में होता है। सरकार मिलों के लिए कोटा निर्धारित करती है। इस सीजन की शुरुआत में खाद्य मंत्रालय ने 15 लाख टन निर्यात की अनुमति दी थी, जिसे बाद में 5 लाख टन अतिरिक्त कोटे के साथ बढ़ाया गया। हालांकि, इस अतिरिक्त कोटे में से अब तक केवल 87,587 टन को ही मंजूरी मिल सकी है।
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि, "फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें उतनी आकर्षक नहीं हैं कि मिलें निर्यात को प्राथमिकता दें। इस पूरे सीजन में वास्तविक भौतिक शिपमेंट 8 लाख टन के आंकड़े तक ही सिमट सकता है।"
खपत के पैटर्न में बदलाव और बढ़ता स्टॉक
रिपोर्ट के अनुसार, 3 मार्च तक भारत लगभग 5 लाख टन चीनी का निर्यात कर चुका है। दिलचस्प बात यह है कि देश में चीनी की खपत का पैटर्न बदल रहा है। मांग में वृद्धि अब स्थिर हो गई है, जिससे घरेलू स्तर पर चीनी का अधिक अधिशेष (Surplus) बच रहा है।
उत्पादन में सुधार
पिछले साल की तुलना में इस बार चीनी उत्पादन में भी मामूली बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है:
मौजूदा सीजन उत्पादन: अब तक 27.5 मिलियन टन चीनी का उत्पादन हो चुका है।
कुल अनुमान: सीजन के अंत तक उत्पादन 28.2 मिलियन टन रहने की उम्मीद है।
पिछला रिकॉर्ड: साल 2024-25 में उत्पादन 26.1 मिलियन टन रहा था।
Maharashtra Day के चलते बाजार में छुट्टी, सेंसेक्स-निफ्टी रहेंगे बंद
1 May, 2026 11:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शेयर बाजार अपडेट: महाराष्ट्र दिवस और मजदूर दिवस पर आज कारोबार बंद, सोमवार को खुलेंगे बाजार
मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में आज यानी 1 मई को अवकाश रहेगा। महाराष्ट्र दिवस और अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के उपलक्ष्य में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में कोई कामकाज नहीं होगा।
ट्रेडिंग के लिए जरूरी जानकारी
इक्विटी और डेरिवेटिव्स: इक्विटी, डेरिवेटिव्स और एसएलबी (SLB) सेगमेंट पूरी तरह बंद रहेंगे। अब नियमित कारोबार सोमवार, 4 मई को शुरू होगा।
कमोडिटी मार्केट: मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में सुबह के सत्र (9:00 AM से 5:00 PM) में छुट्टी रहेगी, लेकिन शाम के सत्र में रात 11:55 बजे तक ट्रेडिंग सामान्य रूप से जारी रहेगी।
NCDEX: कृषि-वस्तु बाजार (एनसीडीईएक्स) सुबह और शाम दोनों सत्रों के लिए बंद रहेगा।
वैश्विक बाजारों की स्थिति
मजदूर दिवस के कारण केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई प्रमुख बाजारों में आज छुट्टी है। एशिया में चीन, हांगकांग, सिंगापुर और पाकिस्तान सहित कई देशों के बाजार बंद हैं। वहीं यूरोप में भी फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे देशों में व्यापारिक अवकाश रहेगा।
बीते सत्र का हाल: गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार
छुट्टी से ठीक पहले, गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार भारी दबाव में नजर आया। अंतरराष्ट्रीय तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण बाजार लाल निशान पर बंद हुआ:
सेंसेक्स: 582.86 अंक (0.75%) फिसलकर 76,913.50 पर आ गया।
निफ्टी: 180.10 अंक (0.74%) की कमजोरी के साथ 23,997.55 के स्तर पर बंद हुआ।
तेज आर्थिक वृद्धि का असर: FDI 90 अरब डॉलर के पार पहुंचने की उम्मीद
1 May, 2026 10:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत में विदेशी निवेश की रफ्तार तेज: वित्त वर्ष 2025-26 में 90 अरब डॉलर के पार पहुँचने का अनुमान
नई दिल्ली: भारत में विदेशी निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का आँकड़ा 90 अरब डॉलर के ऐतिहासिक स्तर को पार कर सकता है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने बताया कि अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच ही देश में 88 अरब डॉलर से अधिक का निवेश आ चुका है।
विदेशी निवेशकों का बढ़ा भरोसा
सचिव भाटिया के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष (2024-25) में कुल एफडीआई 80.61 अरब डॉलर रहा था, जिसकी तुलना में इस बार की वृद्धि बेहद उत्साहजनक है। भारत के वैश्विक निवेश का केंद्र बनने के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
सरकार द्वारा किए गए निरंतर नीतिगत सुधार।
विभिन्न देशों के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौते (FTAs)।
भारत की तेज आर्थिक विकास दर।
इन्वेस्ट इंडिया की अहम भूमिका
राष्ट्रीय निवेश प्रोत्साहन एजेंसी 'इन्वेस्ट इंडिया' ने इस वित्त वर्ष में अब तक 6.1 अरब डॉलर के 60 प्रोजेक्ट्स को धरातल पर उतारने में मदद की है।
रोजगार: इन परियोजनाओं से देश के 14 राज्यों में 31,000 से अधिक नौकरियों के सृजन की उम्मीद है।
प्रमुख स्रोत: कुल निवेश का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा यूरोपीय देशों से आया है। इसके अलावा अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया से भी भारी निवेश प्राप्त हुआ है।
FDI नियमों में ढील: जल्द जारी होगी अधिसूचना
सरकार विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत उन नियमों को जल्द ही अधिसूचित करने वाली है, जिनसे विदेशी कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी।
नया बदलाव: ऐसी विदेशी कंपनियाँ जिनमें चीनी निवेशकों की हिस्सेदारी 10 फीसदी तक है, उनके लिए निवेश के नियमों में ढील दी जाएगी।
अपवाद: हालांकि, यह छूट उन कंपनियों के लिए नहीं होगी जो चीन, हांगकांग या भारत की जमीनी सीमाओं से सटे देशों में पंजीकृत (Registered) हैं। सरकार ने इस संबंध में मार्च में प्रेस नोट-3 (2020) में संशोधन को मंजूरी दी थी।
गैस सिलेंडर के दाम बढ़े, महंगाई ने फिर तोड़ी कमर
1 May, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: 1 मई 2026 से नए महीने के आगाज के साथ ही आम आदमी और व्यापारियों पर महंगाई की भारी मार पड़ी है। विधानसभा चुनावों के समापन के तुरंत बाद सरकारी तेल कंपनियों ने एलपीजी (LPG) सिलेंडर की नई दरें जारी कर दी हैं, जिसमें कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में लगभग ₹1000 की ऐतिहासिक वृद्धि की गई है। इस बड़े इजाफे के बाद देश के लगभग सभी महानगरों में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹3000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई है। वैश्विक बाजार में ईंधन की बढ़ती कीमतों और हालिया चुनावों के बाद इसे अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी माना जा रहा है।
महानगरों का नया रेट कार्ड: कोलकाता और चेन्नई में कीमतें सबसे अधिक
इंडियन ऑयल द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, राजधानी दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹993 बढ़कर ₹3071.50 हो गई है। वहीं, कोलकाता में यह वृद्धि सबसे अधिक रही, जहाँ अब एक सिलेंडर के लिए ₹3355 चुकाने होंगे। मुंबई में भी कीमतें ₹2031 से उछलकर ₹3046.50 पर पहुँच गई हैं, जबकि चेन्नई में यह आंकड़ा ₹3259.50 दर्ज किया गया है। रेस्टोरेंट, ढाबा संचालकों और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि इससे खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी बढ़ोतरी की संभावना बढ़ गई है।
घरेलू उपभोक्ताओं को राहत: 14.2 किलो वाले सिलेंडर के दाम स्थिर
महंगाई के इस दौर में राहत की एकमात्र खबर घरेलू रसोई गैस का इस्तेमाल करने वाले परिवारों के लिए आई है। तेल कंपनियों ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। मिडिल क्लास और आम उपभोक्ताओं के लिए यह बड़ी तसल्ली की बात है कि उनके किचन का बजट फिलहाल पुराने दामों पर ही टिका हुआ है। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर अभी भी अपने पुराने रेट (लगभग ₹913) पर उपलब्ध है। हालांकि, कमर्शियल गैस की बढ़ती कीमतों का असर परोक्ष रूप से बाहर मिलने वाले खाने-पीने की चीजों पर पड़ना तय माना जा रहा है।
KPMG में बड़े पैमाने पर layoffs, advisory बिजनेस में सुस्ती का असर
1 May, 2026 09:24 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिग्गज कंपनी KPMG में बड़ी छंटनी: एडवाइजरी विभाग के 400 कर्मचारियों की जाएगी नौकरी
वॉशिंगटन: दुनिया की प्रतिष्ठित वित्तीय सेवा और बिजनेस एडवाइजरी कंपनी केपीएमजी (KPMG) ने अपने कर्मचारियों की संख्या में कटौती करने का बड़ा फैसला लिया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह छंटनी मुख्य रूप से उसके एडवाइजरी (परामर्श) डिवीजन में की जाएगी।
कार्यबल में 4 फीसदी की कटौती
'वाल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के मुताबिक, केपीएमजी अपने एडवाइजरी विभाग से लगभग 400 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाएगी। यह संख्या कंपनी के कुल कार्यबल का लगभग 4 प्रतिशत है। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर निम्नलिखित विभागों पर पड़ेगा:
रेगुलेटरी रिस्क एडवाइजरी
कस्टमर ऑपरेशंस
फाइनेंशियल सर्विसेज कंसल्टेंट
रणनीतिक बदलाव है मुख्य वजह
कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में इस छंटनी को 'रणनीतिक पुनर्गठन' का हिस्सा बताया है। कंपनी का कहना है कि वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके कर्मचारियों का कौशल और क्षमताएं भविष्य में बाजार की मांग के अनुरूप हों। कंपनी समय-समय पर अपने कार्यबल के आकार और स्वरूप का मूल्यांकन करती रहेगी।
क्यों लेनी पड़ी यह नौबत?
जानकारों का मानना है कि इस कटौती के पीछे कई प्रमुख कारण हैं:
मांग में गिरावट: एडवाइजरी क्षेत्र में सेवाओं की मांग में कमी आई है।
अत्यधिक भर्तियां: कोरोना महामारी के दौरान कंपनी ने बहुत आक्रामक तरीके से नियुक्तियां की थीं, जिसका दबाव अब आर्थिक रूप से महसूस किया जा रहा है।
राजस्व वृद्धि में सुस्ती: परामर्श क्षेत्र की बड़ी कंपनियों के राजस्व में गिरावट देखी जा रही है, जिसके कारण कई फर्म अपने कार्यबल को समायोजित (Adjust) कर रही हैं।
ऑडिट विभाग पर भी मंडरा रहा खतरा
एडवाइजरी के अलावा, केपीएमजी अपने अमेरिकी ऑडिट कारोबार में भी छंटनी पर विचार कर रही है। चर्चा है कि इस विभाग के लगभग 10 प्रतिशत कर्मचारियों की भी छुट्टी की जा सकती है। हालांकि, कंपनी ने साथ ही यह भी कहा है कि वे रणनीति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी उभरती हुई सेवाओं में निवेश और विस्तार करना जारी रखेंगे।
जंग धीमी फिर भी असर तेज, कच्चा तेल पहुंचा रिकॉर्ड ऊंचाई पर
1 May, 2026 06:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कच्चे तेल में भारी उबाल: ब्रेंट क्रूड 126 डॉलर के पार, 4 साल का रिकॉर्ड टूटा
नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों ने एक बार फिर दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। ईरान के साथ जारी तनाव और आपूर्ति में भारी कमी के चलते ब्रेंट क्रूड उछलकर 126.41 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। यह मार्च 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। हालांकि, बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव के बीच कीमतें बाद में गिरकर 113.89 डॉलर पर भी आईं।
ट्रंप की रणनीति और बाजार की घबराहट
कच्चे तेल की कीमतों में इस अचानक तेजी के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संभावित सैन्य योजना को मुख्य कारण माना जा रहा है।
सैन्य योजना: रिपोर्टों के अनुसार, ईरान को परमाणु समझौते के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से अमेरिका सैन्य हमलों की श्रृंखला पर विचार कर रहा है।
अनिश्चितता: ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के इस कड़े रुख से खाड़ी देशों में संघर्ष और लंबा खिंच सकता है, जिससे तेल की वैश्विक आपूर्ति में बड़ी बाधा आएगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य: संकट की असली जड़
तेल बाजार में मची खलबली की सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली आपूर्ति में गिरावट है:
निर्यात में कमी: युद्ध से पहले यहाँ से प्रतिदिन 2 करोड़ बैरल से अधिक तेल और गैस का परिवहन होता था, जो अप्रैल में घटकर महज 38 लाख बैरल रह गया है।
कुल नुकसान: वैकल्पिक रास्तों के इस्तेमाल के बावजूद, बाजार को अभी भी प्रतिदिन लगभग 1.3 करोड़ बैरल तेल की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
भंडार में आई भारी कमी
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ युद्ध का डर ही नहीं, बल्कि जमीन पर तेल की उपलब्धता भी कम हुई है:
मार्च के दौरान वैश्विक तेल भंडार में 8.5 करोड़ बैरल की कमी आई है।
समुद्र के रास्ते होने वाला तेल परिवहन (Oil on Water) भी 10.7 करोड़ बैरल घट गया है।
शेयर बाजार में भारी गिरावट, बिकवाली का दबाव बढ़ा
30 Apr, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 580 अंक टूटा, निफ्टी 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसला
मुंबई|भारतीय शेयर बाजार में आज बिकवाली का जबरदस्त दबाव देखा गया। गुरुवार को बाजार बंद होते समय बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 580 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर को बरकरार नहीं रख सका और इसके नीचे बंद हुआ। इस गिरावट से निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब गए और बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया।
बैंकिंग और मेटल सेक्टर ने बढ़ाई चिंता
बाजार की गिरावट में सबसे बड़ी भूमिका मेटल और बैंकिंग सेक्टर ने निभाई। मेटल इंडेक्स में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU Banks), ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर में भी लगातार बिकवाली का दौर चला। रियल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयरों ने भी बाजार को निराश किया, जिससे रिकवरी की सारी उम्मीदें धुंधली पड़ गईं।
कच्चे तेल की कीमतों का असर: ऑयल एंड गैस स्टॉक्स गिरे
कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतों में कमी आने से तेल और गैस क्षेत्र की कंपनियों के मुनाफे पर संकट मंडराने लगा है। रिलायंस को छोड़कर इस सेक्टर की लगभग सभी दिग्गज कंपनियां लाल निशान में रहीं।
ऑयल एंड गैस सेक्टर का प्रदर्शन (इंट्रा-डे):
कंपनी
वर्तमान भाव (₹)
बदलाव (%)
अडानी टोटल गैस
635.05
-3.34%
हिंदुस्तान पेट्रोलियम
374.65
-1.60%
गेल (GAIL)
163.15
-1.54%
आईओसी (IOC)
142.35
-1.32%
रिलायंस
1,431.30
+0.36%
IT सेक्टर बना ढाल
चौतरफा बिकवाली के बीच सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र ने बाजार को संभालने की कोशिश की। इंफोसिस और टेक महिंद्रा जैसे शेयरों में लिवाली देखी गई, जिससे इंडेक्स की गिरावट कुछ हद तक नियंत्रित रही। आज के टॉप गेनर्स में बजाज ऑटो और सन फार्मा जैसे नाम शामिल रहे, जबकि टाटा मोटर्स और हिंडाल्को को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
मिडकैप और स्मॉलकैप में भी गिरावट
बाजार में छाई इस कमजोरी का असर केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा। निफ्टी मिडकैप में करीब 1 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में आधा प्रतिशत की गिरावट आई। बाजार में घबराहट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 'इंडिया विक्स' (India VIX), जो बाजार की अस्थिरता को दर्शाता है, उसमें 6 प्रतिशत से ज्यादा का उछाल देखा गया।
1 मई से लागू होंगे नए नियम, गैस सिलेंडर और क्रेडिट कार्ड यूजर्स को झटका
30 Apr, 2026 11:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मई महीने की शुरुआत के साथ ही आम आदमी की जेब और बैंकिंग से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव होने जा रहे हैं। 1 मई 2026 से लागू होने वाले ये परिवर्तन रसोई बजट से लेकर क्रेडिट कार्ड के उपयोग और ऑनलाइन मनोरंजन तक को प्रभावित करेंगे। यहाँ इन प्रमुख बदलावों का विस्तृत विवरण दिया गया है:
ईंधन की कीमतों में संभावित संशोधन
हर महीने की पहली तारीख को तेल विपणन कंपनियाँ (OMCs) रसोई गैस (LPG), सीएनजी और पीएनजी की नई दरों की समीक्षा करती हैं। 1 मई को घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में बदलाव की उम्मीद है, जिसका सीधा असर घर के बजट और रेस्तरां के खाने पर पड़ेगा। इसके अलावा, हवाई ईंधन (ATF) की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव संभव है, जिससे हवाई यात्रा के टिकटों के दाम प्रभावित हो सकते हैं।
सुरक्षित गैस डिलीवरी और ओटीपी सिस्टम
गैस वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए डिलीवरी नियमों में सख्ती की जा रही है। अब सिलेंडर की डिलीवरी के समय ग्राहकों को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर प्राप्त 'वन टाइम पासवर्ड' (OTP) साझा करना अनिवार्य होगा। यह कदम ब्लैक मार्केटिंग और गलत डिलीवरी को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।
एसबीआई क्रेडिट कार्ड के सख्त नियम
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपने क्रेडिट कार्ड धारकों के लिए शुल्क संरचना में बदलाव किया है। 1 मई से विलंब शुल्क (Late Payment Fee) बकाये की राशि के आधार पर अलग-अलग स्लैब में वसूला जाएगा। साथ ही, 'BPCL SBI' क्रेडिट कार्ड के ग्राहकों को अब अपनी वार्षिक फीस माफ कराने के लिए सालाना 1 लाख रुपये खर्च करने होंगे, जबकि पहले यह सीमा केवल 50,000 रुपये थी।
ऑनलाइन गेमिंग पर सरकारी शिकंजा
ऑनलाइन गेमिंग उद्योग को विनियमित करने के लिए सरकार नए दिशा-निर्देश लागू कर रही है। अब सट्टा या पैसे वाले गेम्स, सोशल गेम्स और ई-स्पोर्ट्स के लिए अलग-अलग श्रेणियां होंगी।
पंजीकरण अनिवार्य: वित्तीय लेन-देन वाले गेमिंग प्लेटफॉर्म्स को अब सरकारी संस्था के पास पंजीकरण कराना होगा।
निगरानी: यूजर्स के पैसों के लेन-देन पर सख्त नजर रखी जाएगी ताकि धोखाधड़ी और लत को नियंत्रित किया जा सके।
मई 2026 में बैंक अवकाश और छुट्टियाँ
मई के महीने में बैंक कई दिनों तक बंद रहेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सूची के अनुसार, मई में रविवार और दूसरे/चौथे शनिवार के अलावा निम्नलिखित प्रमुख अवकाश रहेंगे:
1 मई: मजदूर दिवस (महाराष्ट्र दिवस)।
9 मई: गुरु रवींद्रनाथ टैगोर जयंती।
मई के अंत में: ईद-उल-अजहा (चांद के अनुसार)।
ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे बैंक से जुड़े कार्यों के लिए अवकाश सूची देख लें, हालांकि यूपीआई और नेट बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाएं निर्बाध रूप से चालू रहेंगी।
ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल, निवेशक सतर्क
30 Apr, 2026 10:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैश्विक ऊर्जा संकट: $120 के पार पहुँचा कच्चा तेल, अमेरिका-ईरान तनाव से बिगड़े हालात
नई दिल्ली/न्यूयॉर्क: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई यह भारी तेजी मुख्य रूप से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य और कूटनीतिक गतिरोध का परिणाम है। ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली आपूर्ति रुकने की खबरों ने निवेशकों को डरा दिया है।
ट्रंप का कड़ा रुख और चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है जिसमें जलमार्ग को फिर से खोलने की बात कही गई थी। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि जब तक कोई ठोस परमाणु समझौता नहीं होता, प्रतिबंध जारी रहेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक विवादित एआई-जनरेटेड तस्वीर के साथ ईरान को चेतावनी देते हुए "नो मोर मिस्टर नाइस गाय" का संदेश साझा किया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा संकट का रूप ले सकती है।
बाजार के ताजा आंकड़े
तेल की कीमतों में लगातार नौवें दिन बढ़त देखी गई है:
ब्रेंट क्रूड: 1.62% की वृद्धि के साथ 119.94 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया।
WTI क्रूड: 0.59% की तेजी के साथ 107.51 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।
इन बढ़ती कीमतों का सीधा प्रभाव मुंबई, दिल्ली और चेन्नई जैसे भारतीय महानगरों में परिवहन लागत और कॉरपोरेट मुनाफे पर पड़ने की आशंका है।
आपूर्ति की चुनौतियां और यूएई का बड़ा कदम
आपूर्ति के मोर्चे पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 1 मई से ओपेक (OPEC) गठबंधन से अलग होने का निर्णय लिया है। इस कदम से तेल उत्पादन और कीमतों पर नियंत्रण रखने की ओपेक की शक्ति कमजोर हो सकती है। वहीं, 28 फरवरी से जारी सैन्य संघर्ष के बाद से खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पर गंभीर प्रतिबंध लगे हुए हैं।
भारत पर प्रभाव और भविष्य का अनुमान
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे औद्योगिक केंद्रों में उत्पादन लागत बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका की नाकेबंदी जारी रही और होर्मुज़ जलमार्ग बंद रहा, तो आपूर्ति का संकट और गहराएगा। फिलहाल बाजार में स्थिरता की उम्मीद कम है और आने वाले दिनों में कीमतों में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
भारतीय एयरलाइंस ने शेड्यूल जारी, यात्रियों को मिली राहत
30 Apr, 2026 10:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हवाई यात्रियों के लिए राहत: 1 मई से भारत और दोहा के बीच फिर शुरू होंगी नियमित उड़ानें
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष के कारण पिछले दो महीनों से प्रभावित हवाई सेवाओं को अब फिर से पटरी पर लाने की तैयारी कर ली गई है। 28 फरवरी से शुरू हुए सैन्य अभियान के बाद यह पहली बार है जब वाणिज्यिक उड़ानें पूरी क्षमता के साथ संचालित होंगी।
तीन प्रमुख एयरलाइंस भरेंगी उड़ान
भारत की तीन बड़ी एयरलाइंस—एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस और इंडिगो—1 मई से दोहा के लिए अपनी सेवाएं फिर से शुरू करेंगी। इससे दिल्ली, मुंबई, कोच्चि, हैदराबाद और लखनऊ जैसे प्रमुख भारतीय शहरों का सीधा संपर्क कतर की राजधानी से फिर बहाल हो जाएगा।
दोहा स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के जरिए इस जानकारी की पुष्टि की है। दूतावास ने बताया कि परिचालन का विस्तार वैश्विक विमानन प्राधिकरणों के समन्वय के साथ किया जा रहा है ताकि हवाई सेवाओं को स्थिर किया जा सके।
दूतावास ने जारी की सतर्कता सलाह
हालांकि उड़ानें शुरू हो रही हैं, लेकिन भारतीय दूतावास ने यात्रियों को आगाह भी किया है। सुरक्षा स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए उड़ान कार्यक्रम में अंतिम समय पर बदलाव संभव है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे टर्मिनल और बुकिंग की ताजा जानकारी के लिए मुंबई, चेन्नई या बेंगलुरु स्थित अपनी एयरलाइंस के दफ्तरों या आधिकारिक वेबसाइटों से संपर्क बनाए रखें।
दो महीने बाद कतर के हवाई क्षेत्र में हलचल
पश्चिम एशिया संकट के दौरान कतर का हवाई क्षेत्र लगभग दो महीनों तक सामान्य उड़ानों के लिए बंद रहा। मार्च के बाद से वहां केवल आपातकालीन और निकासी विमानों को ही अनुमति दी जा रही थी। अप्रैल के मध्य में हुए युद्धविराम के बाद अब स्थिति में सुधार हुआ है, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की वापसी का रास्ता साफ हुआ है। दोहा, दुबई और मस्कट जैसे क्षेत्रों में अब धीरे-धीरे सामान्य स्थिति लौटने की उम्मीद जताई जा रही है।
Nifty 50 24,000 के नीचे, निवेशकों को झटका
30 Apr, 2026 09:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 950 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी भी 24,000 के नीचे फिसला
मुंबई: सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बेहद खराब रही। कच्चे तेल के $125 प्रति बैरल के करीब पहुँचने और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण निवेशकों ने भारी बिकवाली की। मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे वित्तीय केंद्रों में ट्रेडर्स के बीच घबराहट का माहौल देखा गया।
बाजार के प्रमुख आंकड़े
सेंसेक्स: शुरुआती सत्र में ही 959.22 अंक (-1.23%) गिरकर 76,537.14 के स्तर पर आ गया।
निफ्टी: 285.66 अंक (-1.18%) की कमजोरी के साथ 23,892.00 पर कारोबार करता दिखा।
इंडिया VIX: बाजार में अस्थिरता मापने वाला यह इंडेक्स 4.90% उछलकर 18.29 पर पहुँच गया, जो बढ़ते जोखिम का संकेत है।
विदेशी निवेशकों का पलायन
एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने पिछले कारोबारी सत्र में 2,468.42 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचकर बाजार से हाथ खींच लिए। कोलकाता, चेन्नई और हैदराबाद के विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय इक्विटी और डेट बाजार से पैसा निकालकर डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं।
दिग्गज कंपनियों की स्थिति
सेंसेक्स की प्रमुख 30 कंपनियों में से महिंद्रा एंड महिंद्रा, एक्सिस बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट और अदाणी पोर्ट्स जैसे शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बजाज फाइनेंस, टेक महिंद्रा और इंफोसिस जैसी कंपनियों के शेयरों में मामूली बढ़त देखी गई। अहमदाबाद और पुणे के निवेशक भी आईटी सेक्टर की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।
वैश्विक बाजारों का हाल
एशियाई बाजार: जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।
अमेरिकी बाजार: फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बदलाव न करने और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण अमेरिकी बाजार भी पिछले सत्र में दबाव में बंद हुए थे।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
