व्यापार
विभागों का बंटवारा बदला, RBI ने प्रशासनिक ढांचा किया मजबूत
5 May, 2026 03:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी प्रशासनिक संरचना में बड़ा बदलाव करते हुए डिप्टी गवर्नरों के बीच विभागों के कार्यभार का नया आवंटन किया है। इस संगठनात्मक पुनर्गठन के तहत नवनियुक्त डिप्टी गवर्नर रोहित जैन को दस महत्वपूर्ण विभागों की कमान सौंपी गई है, जबकि वरिष्ठ डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जानकीरमन को ग्यारह विभागों का दायित्व मिला है। केंद्रीय बैंक का यह कदम आगामी चुनौतियों और बैंकिंग संचालन को अधिक सुव्यवस्थित तथा प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक फैसला माना जा रहा है, जिससे भविष्य की नीतिगत योजनाओं को नई गति मिलेगी।
वरिष्ठ अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का विभाजन
रिजर्व बैंक द्वारा जारी की गई नई व्यवस्था के अनुसार स्वामीनाथन जानकीरमन अब पर्यवेक्षण, विधि, निरीक्षण और जमा बीमा एवं ऋण गारंटी निगम जैसे अत्यंत संवेदनशील विभागों का नेतृत्व करेंगे, साथ ही उन पर विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने का भी जिम्मा होगा। दूसरी ओर पूनम गुप्ता को मौद्रिक नीति विभाग सहित छह प्रमुख कार्यक्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई है, जो देश की आर्थिक दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं। इसी क्रम में शिरीष चंद्र मुर्मू को विनियमन और प्रवर्तन से जुड़े पांच महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार सौंपा गया है, जिससे बैंक के विनियामक ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
रोहित जैन का व्यापक अनुभव और नई भूमिका
टी. रबी शंकर का कार्यकाल पूर्ण होने के बाद रोहित जैन को तीन वर्षों के लिए डिप्टी गवर्नर के पद पर नियुक्त किया गया है, जो इससे पहले कार्यकारी निदेशक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। केंद्रीय बैंक में चौंतीस वर्षों से अधिक का लंबा अनुभव रखने वाले जैन ने अपने करियर के दौरान विदेशी मुद्रा प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय बाजार विनियमन और जोखिम निगरानी जैसे विविध क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है। उनकी इस विशेषज्ञता को देखते हुए ही उन्हें दस प्रमुख विभागों का प्रभार दिया गया है, ताकि उनके प्रशासनिक कौशल का लाभ रिजर्व बैंक के जटिल ऑपरेशंस को बेहतर बनाने में लिया जा सके।
प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने की दिशा में केंद्रीय बैंक का बड़ा कदम
गुजरात विश्वविद्यालय से एमबीए और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से एम.कॉम की शिक्षा प्राप्त करने वाले रोहित जैन ने वर्ष 1991 में अपने करियर की शुरुआत की थी और वे पर्यवेक्षण विभाग में मुख्य महाप्रबंधक जैसे ऊंचे पदों पर भी रह चुके हैं। आरबीआई अधिनियम के तहत निर्धारित चार डिप्टी गवर्नरों की इस टीम के बीच विभागों का यह नया बंटवारा केंद्रीय बैंक की कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाने के उद्देश्य से किया गया है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई टीम के पास अनुभव और नवाचार का बेहतरीन संतुलन है, जो भारतीय बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता और विकास को सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होगा।
निवेशकों में सतर्कता बढ़ी, कीमती धातुओं में स्थिरता बनी रही
5 May, 2026 02:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय सराफा बाजार में मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में सुस्ती देखी जा रही है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर दोनों कीमती धातुएं एक सीमित दायरे में कारोबार करती नजर आईं और शुरुआती सत्र में लाल निशान के साथ हल्की गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में जहां एक तरफ सैन्य टकराव की खबरें बाजार को प्रभावित कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर घरेलू स्तर पर डॉलर के मुकाबले रुपए की ऐतिहासिक कमजोरी ने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों का उतार-चढ़ाव
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने के जून अनुबंध में मामूली गिरावट देखी गई, जहां कीमतें एक लाख उनचास हजार तीन सौ पच्चीस रुपए के स्तर पर बनी रहीं। कारोबार के दौरान सोने ने एक लाख उनचास हजार नौ सौ पचास रुपए का उच्चतम स्तर भी छुआ, लेकिन मांग में कमी के चलते यह ऊंचे स्तर पर टिक नहीं सका। वहीं चांदी के जुलाई अनुबंध में भी गिरावट का रुख रहा और यह दो लाख तैंतालीस हजार दो सौ बाईस रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार करती देखी गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी मिलाजुला रुझान देखने को मिल रहा है, जहां कॉमेक्स पर सोना हल्की बढ़त के साथ साढ़े चार हजार डॉलर के पार बना हुआ है, जबकि चांदी के भाव में गिरावट दर्ज की गई है।
मध्य पूर्व में सैन्य तनाव और ईरान-अमेरिका टकराव
वैश्विक बाजारों में इस अस्थिरता का मुख्य कारण मध्य पूर्व में पैदा हुआ नया सैन्य संकट माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया दावे ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है, जिसमें उन्होंने ईरानी जहाजों को निशाना बनाने की बात कही है। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई थी। हालांकि ईरान ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन इस सामरिक क्षेत्र पर नियंत्रण को लेकर जारी खींचतान ने वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के साथ-साथ धातु बाजार में भी अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।
रुपए में रिकॉर्ड गिरावट और आर्थिक संकेतकों का प्रभाव
अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के बीच भारतीय मुद्रा पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है और डॉलर के मुकाबले रुपया एक बार फिर कमजोर होकर बंद हुआ। इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, रुपया सुबह कमजोरी के साथ खुलने के बाद संभल नहीं सका और अंततः पच्चीस पैसे से अधिक की गिरावट के साथ पिंचानवे दशमलव तैंतीस के स्तर पर पहुंच गया। रुपए के इस अवमूल्यन ने आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ा दी है, जिससे घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों को एक तरफ समर्थन मिल रहा है, तो दूसरी तरफ वैश्विक मंदी की आशंका निवेशकों को सतर्क रहने पर मजबूर कर रही है।
पांचवें दिन भी कर्मचारियों की हड़ताल नहीं रुकी
5 May, 2026 02:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सियोल: सैमसंग ग्रुप की प्रसिद्ध बायोटेक इकाई 'सैमसंग बायोलॉजिक्स' में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर जारी कर्मचारियों का आंदोलन अब और तीव्र हो गया है। मंगलवार को कर्मचारियों की पहली आम हड़ताल लगातार पांचवें दिन भी जारी रही, जिसने कंपनी के परिचालन और उत्पादन पर बड़ा प्रभाव डाला है। यूनियन से जुड़े हजारों कर्मचारी अपने वेतन ढांचे में सुधार और प्रदर्शन के आधार पर मिलने वाले प्रोत्साहन में बड़ी बढ़ोतरी की जिद पर अड़े हुए हैं, जबकि प्रबंधन के साथ चल रही बातचीत फिलहाल बेनतीजा साबित हो रही है।
वेतन वृद्धि और बोनस की मांगों पर अड़ा श्रमिक संघ
कंपनी की स्थापना के बाद से पहली बार हुई इस हड़ताल में यूनियन के लगभग अट्ठाईस सौ सदस्यों ने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई है। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों की मुख्य मांग है कि उनके मूल वेतन और परफॉर्मेंस आधारित भुगतान में चौदह प्रतिशत का इजाफा किया जाए। इसके अतिरिक्त, यूनियन ने प्रत्येक श्रमिक के लिए लगभग बीस हजार अमेरिकी डॉलर के एकमुश्त नकद प्रोत्साहन और कंपनी के वार्षिक परिचालन लाभ के बीस प्रतिशत हिस्से को बोनस के रूप में देने की शर्त रखी है। हालांकि, कंपनी प्रबंधन ने अब तक केवल छह दशमलव दो प्रतिशत की कुल बढ़ोतरी का ही प्रस्ताव दिया है, जिसे यूनियन ने सिरे से खारिज कर दिया है।
हड़ताल से करोड़ों के आर्थिक नुकसान की आशंका
प्रबंधन और यूनियन के बीच जारी इस गतिरोध का सीधा असर कंपनी की वित्तीय स्थिति पर पड़ता दिखाई दे रहा है। कंपनी के सूत्रों के अनुसार, पिछले महीने हुई तीन दिनों की आंशिक हड़ताल से ही लगभग डेढ़ सौ अरब वॉन का भारी नुकसान हुआ था, और अब इस पूर्ण हड़ताल से यह आंकड़ा साढ़े छह सौ अरब वॉन तक पहुँचने की आशंका है। यह विशाल राशि कंपनी की पहली तिमाही की कुल बिक्री के लगभग आधे हिस्से के बराबर है, जो वैश्विक बाजार में सैमसंग बायोलॉजिक्स की साख और आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है।
मध्यस्थता के प्रयास और भविष्य की रणनीति
श्रम मंत्रालय के हस्तक्षेप और मध्यस्थता के अनुरोध के बावजूद दोनों पक्षों के बीच सहमति का कोई रास्ता नहीं निकल पाया है। कंपनी प्रबंधन ने यूनियन की मांगों को अतार्किक बताते हुए उन्हें सामूहिक कार्रवाई रोककर पुनः काम पर लौटने का आग्रह किया है, जबकि यूनियन ने बुधवार से 'वर्क-टू-रूल' अभियान शुरू करने की चेतावनी दे दी है। इस सप्ताह के अंत में दो और दौर की बैठकों की योजना बनाई गई है, जिसमें मतभेदों को कम करने और किसी ठोस समझौते पर पहुंचने की कोशिश की जाएगी, ताकि विश्व स्तरीय बायोटेक उत्पादन प्रक्रिया को फिर से पटरी पर लाया जा सके।
भारत की आर्थिक मजबूती पर मूडीज की बड़ी टिप्पणी
5 May, 2026 02:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर पिछले कुछ वर्षों में आए भीषण आर्थिक संकटों और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद भारत दुनिया की सबसे मजबूत और टिकाऊ उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल रहा है। प्रतिष्ठित क्रेडिट रेटिंग एजेंसी 'मूडीज रेटिंग्स' द्वारा मंगलवार को जारी की गई एक विशेष रिपोर्ट में भारत की आर्थिक स्थिरता की जमकर सराहना की गई है। रिपोर्ट के अनुसार भारत का विशाल विदेशी मुद्रा भंडार और स्पष्ट आर्थिक नीतियां वैश्विक अनिश्चितता के दौर में निवेशकों के भरोसे को बनाए रखने में सबसे बड़ी ताकत साबित हुई हैं, जिससे देश किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय झटके का सामना करने के लिए अन्य उभरते बाजारों की तुलना में कहीं अधिक सक्षम नजर आता है।
मजबूत आर्थिक नीतियां और विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा
मूडीज की विश्लेषण रिपोर्ट इस बात को रेखांकित करती है कि भारत का मौद्रिक नीति ढांचा अत्यंत पारदर्शी है, जो देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी दबावों से बचाने के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में मुद्रास्फीति की दरें नियंत्रण में हैं और विनिमय दरों को जरूरत के हिसाब से ढालने की क्षमता ने इसे वैश्विक मंदी के दौर में भी लचीला बनाए रखा है। घरेलू फंडिंग के लिए गहरे स्थानीय बाजारों पर निर्भरता और विदेशी भंडार के विशाल बफर ने भारत को उन देशों की श्रेणी में खड़ा कर दिया है जो किसी भी वित्तीय तनाव की स्थिति में भी अपनी स्थिरता बनाए रखने का माद्दा रखते हैं।
वैश्विक संकटों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था का सफल परीक्षण
पिछले पांच वर्षों में दुनिया ने कोविड-19 महामारी, ब्याज दरों में बेतहाशा वृद्धि, बैंकिंग क्षेत्र का तनाव और वर्ष 2025 में उत्पन्न हुए नए टैरिफ विवादों जैसे चार बड़े झटकों का सामना किया है, लेकिन भारत इन सभी चुनौतियों से बिना किसी बड़े नुकसान के बाहर निकलने में कामयाब रहा है। मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में भारत सहित दुनिया के दस बड़े उभरते बाजारों के प्रदर्शन की तुलना की है, जिसमें यह पाया गया कि भारत ने जोखिमों के बावजूद अपनी बाजार पहुंच को कभी कम नहीं होने दिया। अनुकूल बाहरी परिस्थितियों और समय रहते लिए गए कड़े नीतिगत फैसलों ने भारतीय बाजार को वैश्विक झटकों को सहन करने की एक नई शक्ति प्रदान की है।
भविष्य की चुनौतियां और कर्ज के बोझ पर सतर्क रहने की सलाह
सकारात्मक पहलुओं के साथ-साथ रेटिंग एजेंसी ने भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष मौजूद कुछ महत्वपूर्ण जोखिमों की ओर भी संकेत किया है, जिसमें बढ़ता हुआ सार्वजनिक ऋण और राजकोषीय घाटा प्रमुख चिंता के विषय हैं। मूडीज ने आगाह किया है कि कर्ज का उच्च स्तर सरकार के लिए भविष्य के अचानक आने वाले झटकों पर त्वरित वित्तीय प्रतिक्रिया देने की क्षमता को सीमित कर सकता है। निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि जहां भारत के पास मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और स्पष्ट नीतियां हैं, वहीं राजकोषीय असंतुलन जैसी चुनौतियों का प्रबंधन करना भविष्य में देश की आर्थिक सेहत को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए अनिवार्य होगा।
सरकार का बड़ा फैसला, अब बढ़ेगी कर्मचारियों की जेब
5 May, 2026 01:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: बैंकिंग क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ते में संशोधन की घोषणा की है, जिससे उनके मासिक वेतन में आंशिक वृद्धि देखने को मिलेगी। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मई से जुलाई 2026 की तिमाही के लिए महंगाई भत्ते को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 25.70 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि, भत्ते में हुई इस 0.70 प्रतिशत की मामूली वृद्धि को लेकर बैंक यूनियनों और कर्मचारियों के बीच असंतोष का भाव देखा जा रहा है, क्योंकि उनका मानना है कि वर्तमान महंगाई दर के मुकाबले यह इजाफा बेहद कम है।
वेतनमान के अनुसार मामूली आर्थिक लाभ
महंगाई भत्ते में की गई इस हालिया बढ़ोतरी का सीधा असर बैंक कर्मियों की जेब पर पड़ेगा, लेकिन इसकी राशि बहुत अधिक नहीं होगी। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि विभिन्न वेतन श्रेणियों के आधार पर कर्मचारियों के मासिक वेतन में 435 रुपये से लेकर 1,050 रुपये तक की ही वृद्धि संभव हो पाएगी। उदाहरण के तौर पर, जिन कर्मियों का मूल वेतन 48,480 रुपये है, उन्हें हर महीने मात्र 435 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे, जबकि 1,08,260 रुपये की अधिकतम बेसिक सैलरी पाने वाले वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन में केवल 965 रुपये का इजाफा दर्ज किया जाएगा।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर गणना
इंडियन बैंक्स एसोसिएशन द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, इस नए भत्ते का निर्धारण मार्च 2026 को समाप्त हुई तिमाही के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों के आधार पर किया गया है। सूचकांक के उतार-चढ़ाव पर नजर डालें तो जनवरी में यह 148.6 पर था, जो फरवरी में मामूली गिरकर 148.5 हुआ और मार्च में बढ़कर 149.1 के स्तर पर पहुंच गया। इन तीन महीनों के औसत के आधार पर जब 2016 के आधार सूचकांक से तुलना की गई, तो कुल अंतर 25.70 अंक निकलकर आया, जिसके चलते आगामी तिमाही के लिए भत्ते में 0.70 अंकों की बढ़ोतरी तय की गई है।
महंगाई के दौर में कर्मचारियों की प्रतिक्रिया
बैंकिंग सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यद्यपि यह बढ़ोतरी तकनीकी गणना के अनुसार सटीक है, लेकिन व्यावहारिक धरातल पर यह कर्मचारियों को बड़ी राहत देने में विफल रही है। भत्ते में वृद्धि का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों की क्रय शक्ति को महंगाई के साथ तालमेल बिठाने में मदद करना होता है, परंतु न्यूनतम 435 रुपये की वृद्धि को बैंक कर्मी ऊंट के मुंह में जीरा समान मान रहे हैं। विभाग का तर्क है कि यह संशोधन सुनिश्चित करता है कि सरकारी नीतियों के तहत समय-समय पर मिलने वाले लाभ निरंतर जारी रहें, भले ही उनकी मात्रा वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार कम प्रतीत हो रही हो।
लाल निशान में बंद हुआ बाजार, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट
5 May, 2026 09:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय शेयर और मुद्रा बाजार में आज भारी उथल-पुथल का माहौल देखा जा रहा है। बिकवाली के दबाव के कारण जहां शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट आई है, वहीं भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
बाजार में हावी रही मुनाफावसूली: सेंसेक्स और निफ्टी लुढ़के, रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया
मुंबई: सप्ताह के कारोबारी सत्र में आज घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही। निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर की गई मुनाफावसूली और वैश्विक संकेतों के कारण बाजार में गिरावट का रुख बना हुआ है।
शेयर बाजार का लेखा-जोखा
शुरुआती सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लाल निशान में कारोबार करते दिखे:
सेंसेक्स: बीएसई का सेंसेक्स 361.62 अंक टूटकर 76,907.78 के स्तर पर आ गया।
निफ्टी: एनएसई का निफ्टी 134.90 अंकों की गिरावट के साथ 23,980.60 पर पहुंच गया।
सेक्टोरल अपडेट: बाजार में सबसे ज्यादा मार बैंकिंग, रियल एस्टेट, मेटल और वित्तीय क्षेत्रों पर पड़ी है। हालांकि, आईटी और मीडिया सेक्टर में कुछ खरीदारी देखी गई, जिससे इन्हें थोड़ी राहत मिली। वहीं, फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर में सुस्ती छाई रही।
रुपये में ऐतिहासिक गिरावट
शेयर बाजार के साथ-साथ मुद्रा बाजार से भी नकारात्मक खबरें आ रही हैं। डॉलर की मजबूती और विदेशी फंडों की निकासी के बीच भारतीय रुपया 17 पैसे कमजोर होकर 95.40 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर जा गिरा है। रुपये की इस कमजोरी ने आयातकों और अर्थव्यवस्था के लिए चिंता बढ़ा दी है।
वैश्विक बाजारों का दबाव
भारतीय बाजारों पर अंतरराष्ट्रीय संकेतों का भी गहरा असर पड़ रहा है। एशियाई बाजारों में हांगकांग का 'हैंग सेंग' 1.4% और ऑस्ट्रेलिया का 'एसएंडपी/एएसएक्स 200' 0.8% तक नीचे गिर गया है। यूरोपीय वायदा बाजारों में भी कमजोरी के संकेत मिल रहे हैं।
गिरावट के प्रमुख कारण: विशेषज्ञों का विश्लेषण
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रणनीतिकारों के अनुसार, बाजार पर इस समय कई प्रतिकूल कारक एक साथ दबाव बना रहे हैं:
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें: होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 113 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जो भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए बड़ा झटका है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड: अमेरिका में 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.44% हो गई है। इसके चलते विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय बाजार से हाथ खींच रहे हैं।
चुनावी उत्साह का अंत: विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया चुनावी नतीजों से मिला मनोवैज्ञानिक लाभ अब समाप्त हो चुका है और बाजार अब वास्तविक आर्थिक आंकड़ों पर ध्यान दे रहा है।
पांच राज्यों के रिजल्ट से पहले शेयर बाजार में रौनक, निफ्टी 24240 पार
4 May, 2026 12:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त रौनक देखने को मिली। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने घरेलू बाजार के लिए 'बूस्टर डोज़' का काम किया, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही हरे निशान के साथ खुले।
बाजार का ताजा हाल: सेंसेक्स और निफ्टी में उछाल
सोमवार की सुबह निवेशकों के लिए खुशियां लेकर आई। शुरुआती कारोबार में ही बाजार ने लंबी छलांग लगाई:
सेंसेक्स: करीब 800 अंकों की भारी तेजी के साथ 77,716.85 के स्तर पर पहुंच गया।
निफ्टी: 245 अंकों से ज्यादा की बढ़त लेकर 24,243.35 के पार निकल गया।
रुपया: हालांकि, शेयर बाजार की तेजी के उलट डॉलर के मुकाबले रुपया 9 पैसे कमजोर होकर 94.93 पर ट्रेड करता दिखा।
चुनावी नतीजों और स्थिरता पर टिकी नजरें
बाजार की इस तेजी के पीछे पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। निवेशकों को उम्मीद है कि नतीजों के बाद आने वाली राजनीतिक मजबूती आर्थिक सुधारों को गति देगी।
विशेषज्ञों का विश्लेषण:
विशेषज्ञों का मानना है कि असम और पश्चिम बंगाल जैसे सीमावर्ती राज्यों में राजनीतिक स्थिरता से न केवल सुरक्षा चुनौतियां कम होंगी, बल्कि औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
आंतरिक स्थिरता: पड़ोसी देशों से जुड़ी चुनौतियों के बीच देश के भीतर एक मजबूत राजनीतिक ढांचा निवेशकों के भरोसे को बढ़ाता है।
निवेशकों का उत्साह: एग्जिट पोल के सकारात्मक रुझानों ने भी बाजार की धारणा को मजबूत किया है। विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि यह तेजी जारी रही, तो निफ्टी जल्द ही 25,000 के ऐतिहासिक स्तर को छू सकता है।
प. एशिया तनाव बेअसर, भारत का मैन्युफैक्चरिंग PMI अप्रैल में 54.7
4 May, 2026 12:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत के विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र के लिए अप्रैल का महीना उत्साहजनक रहा। सोमवार को जारी एचएसबीसी (HSBC) फ्लैश इंडिया पीएमआई के आंकड़ों के मुताबिक, नए ऑर्डर और रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी की वजह से मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई मार्च के 53.9 से बढ़कर अप्रैल में 54.7 पर पहुंच गया है।
निर्यात और नए व्यापार में मजबूती
आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारतीय कारखानों में गतिविधियां तेज बनी हुई हैं। नए बिजनेस और ऑर्डर्स में लगातार सुधार हो रहा है। विशेष रूप से निर्यात (Export) के मोर्चे पर अच्छी खबर है; पिछले साल सितंबर के बाद से निर्यात की वृद्धि दर अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर दर्ज की गई है।
महंगाई और वैश्विक तनाव का साया
सकारात्मक आंकड़ों के बीच पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी संघर्ष ने चिंताएं भी बढ़ाई हैं। युद्ध की वजह से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिसका असर उत्पादन लागत पर दिख रहा है।
लागत में वृद्धि: कच्चे माल की कीमतों में पिछले 44 महीनों की सबसे तेज बढ़ोतरी देखी गई है।
बिक्री मूल्य: उत्पादन महंगा होने के कारण कंपनियों ने उत्पादों की कीमतें भी पिछले छह महीनों की तुलना में सबसे तेजी से बढ़ाई हैं।
अर्थशास्त्री की राय
एचएसबीसी की मुख्य अर्थशास्त्री (भारत) प्रांजुल भंडारी के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट का असर अब महंगाई के रूप में साफ नजर आने लगा है। अगस्त 2022 के बाद से उत्पादन की लागत अब अपने उच्चतम स्तर पर है।
क्या है विनिर्माण पीएमआई (Manufacturing PMI)?
पीएमआई एक ऐसा सूचकांक है जो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की सेहत बताता है। यह मुख्य रूप से पांच कारकों पर आधारित होता है:
नए ऑर्डर
उत्पादन (Output)
रोजगार की स्थिति
आपूर्तिकर्ताओं द्वारा सामान पहुंचाने का समय
खरीद स्टॉक
भविष्य को लेकर भारतीय कंपनियों का नजरिया
सर्वेक्षण में शामिल कंपनियों का मानना है कि बेहतर विज्ञापन और मांग में स्थिरता की वजह से बिक्री और उत्पादन को मजबूती मिल रही है। हालांकि, कुछ चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं:
बाजार में प्रतिस्पर्धा: घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ा मुकाबला।
वैश्विक युद्ध: पश्चिम एशिया के तनाव के कारण अनिश्चितता।
धीमी मंजूरी: कुछ ग्राहकों द्वारा कोटेशन को अंतिम रूप देने में देरी।
इन सबके बावजूद, भारतीय निर्माता भविष्य के विकास को लेकर काफी आशावादी हैं। हालांकि सकारात्मकता का स्तर मार्च के मुकाबले थोड़ा कम हुआ है, लेकिन यह नवंबर 2024 के बाद का दूसरा सबसे मजबूत स्तर है।
भारत-जमैका संबंध मजबूत, जयशंकर ने पीएम होलनेस से की मुलाकात
4 May, 2026 12:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत की विदेश नीति को कैरेबियाई देशों के साथ और अधिक प्रगाढ़ बनाने के उद्देश्य से विदेश मंत्री एस जयशंकर वर्तमान में तीन देशों की आधिकारिक यात्रा पर हैं। 2 से 10 मई 2026 तक चलने वाले इस विदेश दौरे के दौरान वे जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद व टोबैगो के साथ द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देंगे। इस यात्रा की शुरुआत जमैका से हुई, जहाँ कूटनीति के साथ-साथ खेलों के प्रति साझा प्रेम की झलक भी देखने को मिली।
क्रिकेट और कूटनीति का मेल
जमैका की राजधानी किंग्स्टन में विदेश मंत्री जयशंकर ने प्रधानमंत्री एंड्रयू होलनेस से मुलाकात की। इस दौरान भारत की ओर से जमैका के ऐतिहासिक क्रिकेट मैदान सबीना पार्क को एक आधुनिक 'इलेक्ट्रॉनिक स्कोरबोर्ड' उपहार स्वरूप भेंट किया गया।
मैत्री का प्रतीक: सोशल मीडिया पर साझा किए संदेश में जयशंकर ने कहा कि भारत और जमैका के रिश्तों की नींव 'रनों, सम्मान और गहरी दोस्ती' पर टिकी है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह स्कोरबोर्ड दोनों देशों की अटूट मित्रता और यादगार क्रिकेट पारियों का गवाह बनेगा।
भारतीय समुदाय के साथ संवाद
जमैका में प्रवास कर रहे भारतीय मूल के लोगों से बातचीत करते हुए विदेश मंत्री ने उनके योगदान को सराहा। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच संबंधों ने एक नई रफ्तार पकड़ी है।
नया भारत: जयशंकर ने भारतीय समुदाय को भारत में हो रहे बड़े बदलावों से अवगत कराया। उन्होंने विशेष रूप से तकनीक आधारित शासन (Tech-based Governance), मजबूत बुनियादी ढांचे और उद्यमिता के क्षेत्र में भारत की प्रगति का उल्लेख किया।
ऐतिहासिक विरासत को नमन
विदेश मंत्री ने ओल्ड हार्बर का दौरा किया, जो भारतीय प्रवासियों के इतिहास में एक विशेष स्थान रखता है।
180 साल पुराना इतिहास: करीब 180 साल पहले भारतीय इसी तट पर पहुँचे थे। यहाँ जयशंकर ने भारतीय मूल के लोगों की सांस्कृतिक जड़ों और उनकी परंपराओं के प्रति निष्ठा की प्रशंसा की।
उन्होंने जमैका के पर्यटन मंत्री एडमंड बार्टलेट और संस्कृति मंत्री ओलिविया ग्रेंज का शानदार आतिथ्य के लिए आभार भी व्यक्त किया।
कैरेबियाई देशों के साथ रणनीतिक जुड़ाव
इस दौरे का उद्देश्य केवल व्यापारिक संबंध नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूत करना है।
साझा विरासत: जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद व टोबैगो जैसे देशों में गिरमिटिया समुदाय की बड़ी आबादी रहती है, जो भारत के साथ एक गहरा भावनात्मक और ऐतिहासिक जुड़ाव महसूस करती है।
भारत इस क्षेत्र में अपने विकास मॉडल और साझेदारी के नए अवसरों को साझा कर वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका को और विस्तार दे रहा है।
गोल्ड इन्वेस्टमेंट पर बड़ा सवाल: क्या अब भी है फायदे का सौदा?
4 May, 2026 11:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कानपुर। कानपुर के किदवई नगर के रहने वाले मनोहर पाल इन दिनों अपनी जमा-पूंजी को लेकर थोड़े चिंतित हैं। जनवरी की शुरुआत में जब सोने की कीमतें अपने चरम पर थीं, तब उन्होंने एक बड़ा निवेश किया था। उन्हें उम्मीद थी कि यह एक सुरक्षित कदम होगा, लेकिन बाजार के हालिया रुख ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
जो सोना 29 जनवरी 2026 को एमसीएक्स पर 1,80,779 रुपये प्रति दस ग्राम के ऐतिहासिक शिखर पर था, वह 28 अप्रैल 2026 तक करीब 18% गिरकर 1,49,502 रुपये पर आ गया है। अब मनोहर जैसे कई निवेशक इस कशमकश में हैं कि क्या वे इस निवेश से बाहर निकल जाएं या और गिरावट का इंतजार करें।
सोने में निवेश: डरें नहीं, भविष्य अभी भी सुनहरा है
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों में आई यह गिरावट एक अस्थायी सुधार (Correction) है। लॉन्ग-टर्म में सोने की चमक बरकरार रहने के कई कारण हैं:
वैश्विक केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: दुनिया भर के बैंक अपने भंडार में लगातार सोना बढ़ा रहे हैं।
भू-राजनीतिक अस्थिरता: अमेरिका-ईरान जैसे वैश्विक तनाव और अनिश्चितता के दौर में सोना सबसे सुरक्षित ठिकाना माना जाता है।
डॉलर का दबाव: दुनिया भर में डॉलर पर निर्भरता कम करने (De-dollarization) की कोशिशें सोने को मजबूती दे रही हैं।
महंगाई से बचाव: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई को जन्म देती हैं, और सोना इस महंगाई के खिलाफ एक मजबूत ढाल का काम करता है।
सफल निवेश के लिए अपनाएं ये रणनीतियां
एकमुश्त के बजाय SIP: उतार-चढ़ाव वाले बाजार में सारा पैसा एक साथ लगाने के बजाय Gold ETF या डिजिटल गोल्ड में मासिक निवेश (SIP) का रास्ता चुनें।
पोर्टफोलियो का संतुलन: अपने कुल निवेश का केवल 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा ही सोने में रखें। यह आपके शेयर बाजार के पोर्टफोलियो में होने वाले नुकसान को संतुलित करने में मदद करेगा।
लंबी अवधि का नजरिया: सोने को कम समय में मुनाफा कमाने का जरिया न समझें। बेहतर रिटर्न (Double Digit CAGR) के लिए कम से कम 5 से 10 साल का लक्ष्य रखें।
विशेषज्ञों की राय: क्या है अगला लक्ष्य?
"मनोहर जैसे निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है। रुपये की कमजोरी भारतीय बाजार में कीमतों को सहारा देगी। 2027 के अंत तक सोना 1,95,000 रुपये के स्तर को पार कर सकता है।" — अंकित कपूर, हेड रिसर्च, कमोडिटी समाचार सिक्योरिटीज
"सोने ने ऐतिहासिक रूप से 15% की दर से रिटर्न दिया है। मौजूदा गिरावट बुल मार्केट का एक हिस्सा मात्र है। हमारा 2,40,000 रुपये का लक्ष्य अभी भी कायम है।" — मनोज जैन, डायरेक्टर, पृथ्वी फिनमार्ट
"सोना फिलहाल एक सीमित दायरे में है। इस गिरावट को खरीदारी के एक बेहतरीन अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।"
क्या लोन जल्दी चुकाने पर देना होगा चार्ज? जानें RBI के नियम
4 May, 2026 10:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्री-पेमेंट या फोरक्लोजर चार्ज: क्या है यह?
जब कोई कर्जदार अपने लोन को उसकी निर्धारित अवधि (Tenure) पूरी होने से पहले ही आंशिक (Partial) या पूर्ण (Full) रूप से चुका देता है, तो बैंक उस पर एक शुल्क लगाते हैं, जिसे प्री-पेमेंट चार्ज कहते हैं। चूँकि कर्ज जल्दी चुकाने से बैंकों को भविष्य में मिलने वाले ब्याज का नुकसान होता है, वे इसकी भरपाई इस शुल्क के जरिए करते हैं।
RBI के नियम: कब देना होगा शुल्क और कब नहीं?
1. फ्लोटिंग रेट लोन (पूरी तरह निशुल्क)
आरबीआई के निर्देशों के अनुसार, यदि आपने फ्लोटिंग ब्याज दर (बदलती दरों) पर होम लोन या व्यक्तिगत उद्देश्यों के लिए कोई ऋण लिया है, तो बैंक आपसे कोई भी प्री-पेमेंट पेनाल्टी नहीं वसूल सकते। आप जब चाहें, बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अपना लोन बंद कर सकते हैं।
2. फिक्स्ड रेट लोन (पारदर्शिता का नियम)
स्थिर ब्याज दर (Fixed Rate) वाले लोन पर बैंक शुल्क ले सकते हैं, लेकिन इसके लिए शर्तें हैं:
लोन समझौते (Agreement) में इस शुल्क का पहले से उल्लेख होना अनिवार्य है।
बैंक अपनी मर्जी से बाद में अचानक इस शुल्क को बढ़ा नहीं सकते।
नए नियम और राहत (1 जनवरी 2026 से प्रभावी)
आरबीआई ने कर्जदारों के हितों की रक्षा के लिए नियमों को और सख्त और पारदर्शी बनाया है:
व्यावसायिक ऋण: व्यक्तियों और MSME को दिए गए फ्लोटिंग रेट बिजनेस लोन पर अब कोई प्री-पेमेंट शुल्क नहीं लगेगा।
स्मॉल फाइनेंस और ग्रामीण बैंक: 50 लाख रुपये तक के कर्ज पर प्री-पेमेंट पेनाल्टी लगाने पर रोक रहेगी।
लोन क्लोजर प्रक्रिया: अब और भी आसान
दस्तावेजों की वापसी: लोन पूरी तरह चुकता होने के 30 दिनों के भीतर बैंक को आपके सभी ओरिजिनल पेपर (जैसे रजिस्ट्री आदि) वापस करने होंगे।
विलंब पर जुर्माना: यदि बैंक 30 दिनों में दस्तावेज नहीं लौटाता, तो उसे ग्राहक को 5,000 रुपये प्रतिदिन का हर्जाना देना होगा।
स्पष्टता: लोन देते समय ही बैंक को सभी 'छिपे हुए शुल्कों' (Hidden Charges) की जानकारी लिखित में देनी होगी।
नई नौकरी, नई जिम्मेदारी: भविष्य सुरक्षित करने के लिए अपनाएं ये निवेश टिप्स
4 May, 2026 06:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पहली नौकरी और बड़े सपने: 24 वर्षीय अभिषेक की अनुशासित वित्तीय यात्रा
पहली नौकरी मिलते ही अक्सर युवा अपनी इच्छाओं पर पैसा खर्च करना शुरू कर देते हैं, लेकिन मुंबई में एक सरकारी बैंक में अधिकारी के रूप में तैनात 24 साल के अभिषेक सिंह ने एक अलग रास्ता चुना है। उनके कंधों पर छोटी बहन की शिक्षा और विवाह जैसी पारिवारिक जिम्मेदारियां हैं, साथ ही दिल्ली-एनसीआर में अपना घर और एक कार खरीदने का सपना भी।
मुंबई जैसे महानगर में रहते हुए बचत और निवेश का सही संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन एक लक्ष्य-आधारित निवेश रणनीति (Goal-Based Investment Strategy) के माध्यम से वह अपने सभी सपनों को हकीकत में बदल सकते हैं।
अभिषेक का मास्टर प्लान: निवेश और लक्ष्य
1. सुरक्षा कवच: इमरजेंसी फंड
किसी भी निवेश की शुरुआत से पहले एक सुरक्षा कोष होना अनिवार्य है।
लक्ष्य: कम से कम 6 महीने के खर्च के बराबर राशि।
रणनीति: 5,000 रुपये प्रति माह की SIP लिक्विड म्यूचुअल फंड में शुरू करें। यह पैसा नौकरी में बदलाव या किसी मेडिकल इमरजेंसी के समय काम आएगा।
2. बहन की उच्च शिक्षा (समय: 2 वर्ष)
अभिषेक की बहन अभी 12वीं में है और उसे आगे की पढ़ाई के लिए करीब 5 लाख रुपये की आवश्यकता होगी।
रणनीति: समय कम होने के कारण जोखिम न लें। 10,000 रुपये प्रति माह शॉर्ट ड्यूरेशन डेट फंड या बैंक FD में निवेश करें। किसी भी अतिरिक्त बोनस या एरियर को इसी मद में डालें।
3. बहन की शादी का प्रबंध (समय: 6 वर्ष)
भविष्य की महंगाई को देखते हुए शादी का बजट करीब 20 लाख रुपये तक जा सकता है।
रणनीति: 20,000 रुपये की SIP इक्विटी म्यूचुअल फंड में शुरू करें। इसमें हर साल 10% की बढ़ोतरी (Step-up) करना फायदेमंद रहेगा।
4. नई कार और डाउन पेमेंट (समय: 6 वर्ष)
अभिषेक 10 लाख रुपये की कार लेना चाहते हैं।
रणनीति: 4,000 रुपये प्रतिमाह लार्ज-कैप या फ्लेक्सी-कैप फंड में जमा करें। 2 साल बाद जब बहन की शिक्षा वाली SIP पूरी हो जाए, तो वह राशि भी इसी लक्ष्य में जोड़ दें।
5. स्वयं की शादी और घर का सपना (समय: 8-10 वर्ष)
अभिषेक दिल्ली-एनसीआर में अपना घर चाहते हैं, जिसके लिए उन्हें करीब 23 लाख रुपये डाउन पेमेंट के लिए चाहिए होंगे।
रणनीति: स्वयं की शादी के लिए 18,000 रुपये की SIP शुरू करें। साथ ही घर के लिए शुरुआती तौर पर 10,000 रुपये का निवेश इक्विटी फंड्स में करें।
अभिषेक के लिए विशेष वित्तीय परामर्श
SIP स्टेप-अप: जैसे-जैसे सरकारी वेतन में वृद्धि या DA (महंगाई भत्ता) बढ़े, अपने निवेश को भी हर साल कम से कम 10% बढ़ाएं।
बीमा (Insurance): सरकारी कर्मचारी होने के नाते स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ तो मिलेगा ही, लेकिन परिवार की सुरक्षा के लिए 1 करोड़ रुपये का टर्म इंश्योरेंस तुरंत लें।
सरकारी योजनाओं का लाभ: अपना घर खरीदने के लिए बैंक कर्मचारियों को मिलने वाली रियायती ब्याज दरों और प्रधानमंत्री आवास योजना का फायदा उठाना न भूलें।
ईरान और अमेरिका के तनाव के बीच समुद्री सुरक्षा पर सवाल
2 May, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
समुद्री संकट के बीच भारत की बड़ी कोशिश: 45 हजार टन गैस लेकर होर्मुज की ओर बढ़ा टैंकर 'सर्व शक्ति', भारत की रसोई पर टिकीं नजरें
नई दिल्ली|मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़े जहाजों पर बढ़ती सख्ती के बीच, भारत के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। लगभग ठप पड़े 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के रास्ते भारत से जुड़ा एक विशाल एलपीजी टैंकर ‘सर्व शक्ति’ अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहा है। यह सफर केवल एक व्यापारिक यात्रा नहीं है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
क्यों खास है 'सर्व शक्ति' का यह सफर?
मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाले इस टैंकर पर करीब 45,000 टन एलपीजी लदी हुई है। शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह टैंकर ईरान के लारक और केश्म द्वीपों के पास से होते हुए ओमान की खाड़ी की ओर बढ़ता देखा गया है।
भारतीय क्रू: जहाज पर भारतीय चालक दल मौजूद है, जिन्होंने संकेत दिया है कि वे सीधे भारत की ओर आ रहे हैं।
रणनीतिक महत्व: यदि यह टैंकर सुरक्षित निकल जाता है, तो हालिया तनाव के बाद इस खतरनाक रास्ते से गुजरने वाला यह भारत का पहला बड़ा टैंकर होगा।
भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा का सवाल
दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक देश भारत के लिए एलपीजी की आपूर्ति में जरा सी भी देरी गंभीर संकट पैदा कर सकती है।
सप्लाई चेन पर असर: हाल के दिनों में सप्लाई बाधित होने के कारण देश के कई हिस्सों में गैस की कमी और लंबी कतारें देखी गई थीं।
मजबूरी और मांग: भारत में रोजाना करीब 80,000 टन एलपीजी की खपत होती है, जबकि घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर फिलहाल 54,000 टन किया गया है। शेष आपूर्ति के लिए भारत पूरी तरह से समुद्री रास्तों पर निर्भर है।
सरकार की रणनीति और जोखिम
भारत सरकार इस संकट को टालने के लिए बहुआयामी रणनीति अपना रही है:
प्राथमिकता: बंदरगाहों पर एलपीजी टैंकरों के लिए विशेष 'प्रायोरिटी क्लीयरेंस' की व्यवस्था की गई है।
राजनयिक प्रयास: ईरान के साथ लगातार बातचीत कर सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।
बढ़ा हुआ उत्पादन: घरेलू एलपीजी उत्पादन में 60% की वृद्धि की गई है ताकि बाहरी निर्भरता कम हो सके।
खतरा अभी टला नहीं
अप्रैल में मार्ग के एक बार खुलने के बाद फिर से हुई फायरिंग की घटनाओं ने सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि कुछ जहाज अपनी लोकेशन (AIS) छिपाकर इस क्षेत्र को पार करने की कोशिश कर रहे हैं।
एविएशन सेक्टर में बड़ा झटका, स्पिरिट एयरलाइंस का ऑपरेशन बंद
2 May, 2026 05:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
विमानन क्षेत्र में बड़ा संकट: अमेरिका की स्पिरिट एयरलाइन ने 34 साल बाद बंद किया परिचालन, सभी उड़ानें रद्द
वॉशिंगटन। अमेरिका की सबसे लोकप्रिय अल्ट्रा-लो-कॉस्ट एयरलाइन 'स्पिरिट एयरलाइन' का सफर अब खत्म हो गया है। कंपनी ने शनिवार को घोषणा की कि वह अपनी सभी सेवाओं को तत्काल प्रभाव से बंद कर रही है। इस फैसले के बाद हजारों यात्री फंस गए हैं और विमानन बाजार में हड़कंप मच गया है।
यात्रियों के लिए क्या है व्यवस्था?
एयरलाइन के अचानक बंद होने से उन यात्रियों के सामने बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है जिन्होंने पहले से टिकट बुक करा रखे थे:
रिफंड का वादा: कंपनी ने कहा है कि प्रभावित यात्रियों को उनके टिकट का पैसा वापस (Refund) दिया जाएगा।
नहीं मिलेगी वैकल्पिक उड़ान: एयरलाइन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह यात्रियों के लिए किसी अन्य विमान या वैकल्पिक यात्रा की व्यवस्था नहीं करेगी। यात्रियों को खुद ही अन्य एयरलाइंस में अपनी बुकिंग करानी होगी।
सेवाएं ठप: कंपनी की ग्राहक सेवा (Customer Support) को भी पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
क्यों बंद हुई कंपनी? (संकट के मुख्य कारण)
स्पिरिट एयरलाइन पिछले काफी समय से आर्थिक तंगहाली के दौर से गुजर रही थी। इस बंदी के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं:
वित्तीय संकट और दिवालियापन: कंपनी पहले ही दिवालिया होने की कगार पर थी और उस पर भारी कर्ज का बोझ था।
ईंधन की बढ़ती कीमतें: वैश्विक स्तर पर विमानन ईंधन (ATF) के दामों में उछाल ने कंपनी की कमर तोड़ दी।
युद्ध का वैश्विक असर: ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न हुए भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन में बाधा ने एयरलाइन के खर्चों को अनियंत्रित कर दिया।
सरकारी मदद की विफलता: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अंतिम प्रस्ताव दिए जाने के बावजूद, कंपनी को बचाने के लिए जरूरी सरकारी वित्तीय सहायता (Bailout) नहीं मिल सकी।
अर्थव्यवस्था और नौकरियों पर असर
इस एयरलाइन के बंद होने का प्रभाव केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा:
17,000 नौकरियों पर खतरा: कंपनी के इस फैसले से करीब 17,000 कर्मचारियों के भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
प्रतिस्पर्धा में कमी: विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि स्पिरिट जैसी बड़ी बजट एयरलाइन के हटने से बाजार में प्रतिस्पर्धा घटेगी, जिससे भविष्य में हवाई किराए में बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
Financial Fraud Case: कमलेश पारेख प्रत्यर्पण, CBI की बड़ी कार्रवाई
2 May, 2026 03:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
CBI की बड़ी स्ट्राइक: बैंक घोटाले का आरोपी कमलेश पारेख और फर्जी पासपोर्ट गिरोह का सरगना यशपाल यूएई से प्रत्यर्पित
नई दिल्ली। इंटरपोल और अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग से भारत ने 1 मई को दो बड़े वांछित अपराधियों को अपनी हिरासत में ले लिया है। दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुँचते ही सीबीआई की टीम ने इन्हें अपनी गिरफ्त में ले लिया।
1. कमलेश पारेख: करोड़ों के बैंकिंग घोटाले का मास्टरमाइंड
लंबे समय से विदेश में छिपे कमलेश पारेख के खिलाफ सीबीआई ने इंटरपोल के जरिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाया था।
बैंकों से धोखाधड़ी: पारेख पर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के नेतृत्व वाले कई बैंकों के समूह के साथ सैकड़ों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है।
फंड की हेराफेरी: जांच में खुलासा हुआ कि उसने अन्य प्रमोटरों के साथ मिलकर बैंकों से मिली राशि को विदेशी कंपनियों में डायवर्ट किया। इसके लिए फर्जी निर्यात और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का सहारा लिया गया।
अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क: आरोपी ने यूएई समेत कई देशों में फैले अपने व्यापारिक संपर्कों का इस्तेमाल कर इस घोटाले को अंजाम दिया था।
2. आलोक कुमार उर्फ यशपाल सिंह: फर्जी पासपोर्ट रैकेट का मुखिया
CBI ने यूएई से ही एक अन्य वांछित आरोपी आलोक कुमार उर्फ यशपाल सिंह को भी भारत लाया है।
संगठित अपराध: हरियाणा पुलिस द्वारा दर्ज मामले के अनुसार, आलोक एक ऐसे गिरोह का संचालन करता था जो जाली दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट बनवाता था।
अपराधियों की मदद: आरोप है कि उसने फर्जी नाम और पते का इस्तेमाल कर कई आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को देश से बाहर भागने के लिए अवैध रूप से पासपोर्ट उपलब्ध कराए।
कैसे सफल हुआ यह मिशन?
यह पूरी कार्रवाई विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का परिणाम है:
भारतपोल प्लेटफॉर्म: सीबीआई, जो भारत में इंटरपोल के लिए नोडल एजेंसी है, अपने 'भारतपोल' प्लेटफॉर्म के जरिए वैश्विक स्तर पर अपराधियों को ट्रैक कर रही है।
रिकॉर्ड प्रत्यर्पण: पिछले कुछ वर्षों में भारत इस समन्वय के जरिए अब तक 150 से अधिक वांछित अपराधियों को वापस लाने में सफल रहा है।
अगली कार्रवाई
सीबीआई अब दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ करेगी। कमलेश पारेख से बैंक घोटाले की डूबी हुई रकम की रिकवरी और इस नेटवर्क में शामिल अन्य सफेदपोशों के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। वहीं, आलोक कुमार से फर्जी पासपोर्ट गिरोह के अन्य सदस्यों और उन अपराधियों के बारे में पूछताछ होगी जिन्होंने इस गिरोह की मदद ली थी।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
