व्यापार
हरे निशान पर खुला भारतीय शेयर बाजार; सेंसेक्स 550 अंक चढ़ा, निफ्टी 24600 के पार
5 Mar, 2026 10:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिमी एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में भारी नुकसान झेलने के बाद, वैश्विक शेयर बाजारों में आए उछाल के चलते गुरुवार को शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार के बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी आई।शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 550.27 अंक बढ़कर 79,666.46 पर पहुंच गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 171.45 अंक चढ़कर 24,651.95 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया अपने सबसे निचले स्तर से उबरते हुए अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 48 पैसे बढ़कर 91.57 पर कारोबार कर रहा है।
सेंसेक्स की कंपनियों का हाल
सेंसेक्स पैक में, अदानी पोर्ट्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एनटीपीसी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, टाटा स्टील और लार्सन एंड टुब्रो प्रमुख लाभ कमाने वालों में शामिल थे।एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, आईसीआईसीआई बैंक और एशियन पेंट्स पिछड़ने वाली कंपनियों में शामिल थीं।
एशियाई बाजारों में दिखी बढ़त
एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक तेजी से बढ़ा और 10 प्रतिशत उछल गया। जापान का निक्केई 225, शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक भी उच्च स्तर पर कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजार बुधवार को सकारात्मक स्तर पर बंद हुआ।ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर, अमेरिकी बाजारों ने पिछले सत्र का समापन मजबूती के साथ किया, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 10 प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ तेजी से ऊपर कारोबार कर रहा है, जो कुछ सहायक बाहरी संकेत प्रदान करता है।ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 83.73 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड में 2.86 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 83.73 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बुधवार को 8,752.65 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 12,068.17 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।बुधवार को सेंसेक्स 1,122.66 अंक या 1.40 प्रतिशत गिरकर 79,116.19 पर बंद हुआ, लगातार चौथे सत्र में गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी 385.20 अंक या 1.55 प्रतिशत गिरकर 24,480.50 पर बंद हुआ, लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई।
चांदी की कीमतों में 4500 रुपये का उछाल, सोना 1.62 लाख रुपये पर पहुंचा, जानें आज का अपडेट
5 Mar, 2026 10:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सुरक्षित निवेश की मांग में तेज उछाल देखने को मिला है। चांदी की कीमत 4560 रुपये बढ़कर 2.70 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। वहीं सोने का भाव 830 रुपये बढ़कर 1.62 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
वैश्विक बाजारों में सोने-चांदी का हाल
एशियाई कारोबार के दौरान स्पॉट गोल्ड करीब 1% बढ़कर 5,187 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया, जबकि स्पॉट सिल्वर में करीब 2.5% की तेजी आई और इसकी कीमत 85.12 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई।
सुरक्षित संपत्तियों की मांग क्यों बढ़ रही?
कीमती धातुओं में यह तेजी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर लगातार हवाई हमले किए जा रहे हैं और ईरान भी क्षेत्र के कई हिस्सों में मिसाइल हमलों से जवाब दे रहा है। बढ़ते संघर्ष के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति मार्गों में बाधा उत्पन्न हुई है। इससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है और निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पर भरोसा जताया है। वहीं रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी सेना ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरान के एक युद्धपोत को डुबो दिया। हालांकि ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उसकी खुफिया एजेंसी ने युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका से बातचीत की पहल नहीं की है।दूसरी ओर, अमेरिका के सेवा क्षेत्र के मजबूत आंकड़ों ने कुछ हद तक महंगाई की चिंताओं को कम किया है। आंकड़ों के मुताबिक ऑर्डर और कारोबारी गतिविधियों में तेजी के कारण अमेरिकी सेवा क्षेत्र ने 2022 के मध्य के बाद सबसे तेज वृद्धि दर्ज की है। इसी बीच अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 98 के स्तर तक फिसल गया, जिससे डॉलर में कीमत तय होने वाली कमोडिटी विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक हो गईं।हालांकि बाजार अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली ब्याज दर कटौती को जुलाई की बजाय सितंबर में होने की संभावना मान रहे हैं। इसके बावजूद निवेशक इस साल दो बार 25-25 आधार अंक की दर कटौती की उम्मीद बनाए हुए हैं।
निवेशकों को राहत: युद्ध की छाया में भी अमेरिकी शेयर बाजार ने दिखाई ताकत, इतने फीसदी मजबूत हुआ एसएंडपी 500
5 Mar, 2026 10:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुनियाभर की अर्थव्यवस्था युद्ध की छाया में थम सी गई थी, लेकिन अमेरिकी शेयर बाजार ने बुधवार को एक मजबूत वापसी दिखाकर निवेशकों को राहत दी। दो दिन की हड़कंप जैसी गिरावट के बाद एसएंडपी 500 इंडेक्स 1% बढ़ा और युद्ध के बाद हुए नुकसान को लगभग खत्म कर दिया। वहीं डॉव जोन्स औसत 319 अंक ऊपर गया, जबकि नैस्डैक कंपोजिट 1.5% मजबूत हुआ। शुरुआत में दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 12.1% गिर गया, जो उसकी इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट थी।बता दें कि बाजार में अनिश्चितता का मुख्य कारण ईरान के साथ अमेरिका और इस्राइल का जारी युद्ध और फिर तेल की बढ़ती कीमतें रही। हालांकि बुधवाह को तेल की कीमतें भी स्थिर हुईं। ब्रेंट क्रूड का भाव 84 डॉलर से घटकर 81.40 डॉलर प्रति बैरल हो गया और अमेरिकी क्रूड का भाव 74.66 डॉलर पर रहा।
बाजार को मिला अमेरिकी अर्थव्यवस्था से आए अच्छे संकेत का साथ
देखा जाए तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था से आए अच्छे संकेतों ने भी बाजार को सहारा दिया। रिपोर्ट में बताया गया कि रियल एस्टेट, वित्त और अन्य सेवाओं में व्यापार की वृद्धि पिछले साल की तुलना में सबसे तेज गति से हुई। साथ ही कीमतों में बढ़ोतरी भी धीरे-धीरे हो रही थी, जो महंगाई के लिए सकारात्मक संकेत है।इतना ही नहीं नौकरी के क्षेत्र में भी सुधार दिखा। गैर-सरकारी रोजगार में तेजी आई, जो शुक्रवार को आने वाली व्यापक रोजगार रिपोर्ट के लिए अच्छे संकेत हैं। हालांकि कुछ निवेशक इस बीच सतर्क हैं। वेंचरस्मार्ट एशिया के सीईओ फ्रांसिस लुन ने कहा कि ईरान का मामला नियंत्रण से बाहर हो रहा है और ट्रंप ने गलत अनुमान लगाया।
ये कंपनियां रही बढ़ोतरी में प्रमुख
गौरतलब है कि बाजार में बढ़ोतरी में क्रिप्टो कंपनियां, रिटेल और ट्रैवल कंपनियां, और बड़ी टेक कंपनियां प्रमुख रही। कॉइनबेस 15.3% और रोबिनहुड 8.3% बढ़ा। रॉस स्टोर्स 7% और एक्सपीडिया 3.1% मजबूत हुई। एनवीडिया 2% और अमेजन 4% ऊपर गया। दूसरी ओर एशिया में हांगकांग और जापान के शेयर गिरावट में थे, जबकि यूरोप में फ्रांस का CAC 40 0.8% और जर्मनी का DAX 1.7% ऊपर गया।इसके साथ ही बॉन्ड मार्केट में 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 4.08% हो गया। ऐसे में फेडरल रिजर्व के लिए यह अच्छी खबर है, क्योंकि उसका काम अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत रखना और महंगाई को नियंत्रित करना है। युद्ध और तेल की बढ़ती कीमतें फेड के लिए चुनौती बनी हुई हैं।
भारतीय नाविकों की मौत के बाद डीजी शिपिंग ने जारी की एडवाइजरी, सतर्कता बरतने के दिए निर्देश
3 Mar, 2026 12:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच समुद्री सुरक्षा को लेकर भारत के जहाजरानी महानिदेशालय ने समुद्री क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। महानिदेशालय ने कहा है कि वह फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य, ओमान की खाड़ी और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में तेजी से बदलती सुरक्षा स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।एडवाइजरी में जहाज संचालकों, प्रबंधन कंपनियों और कप्तानों को उच्च स्तर की सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सभी ऑपरेटरों से कहा गया है कि वे हर यात्रा से पहले मार्ग-विशेष जोखिम आकलन करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित प्राधिकरण को दें।महानिदेशालय ने यह भी बताया कि अब तक चार ऐसी घटनाओं की सूचना मिली है, जिनमें भारतीय नाविक प्रभावित हुए हैं। ये सभी घटनाएं विदेशी ध्वज वाले जहाजों पर हुईं। इन घटनाओं में तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई है, जबकि एक घायल हुआ है। डीजी शिपिंग ने स्पष्ट किया है कि स्थिति संवेदनशील बनी हुई है और समुद्री सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाना आवश्यक है।
पश्चिम एशिया में तनाव का असर भारत पर: खाद्य तेल-उर्वरक आयात होंगे महंगे, शिपिंग कंपनियां लगा रहीं युद्ध अधिभार
3 Mar, 2026 10:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उद्योग संगठनों ने सोमवार को कहा कि अमेरिका-ईरान सैन्य संघर्ष के बढ़ने से भारत के खाद्य योग्य सूरजमुखी तेल और जरूरी उर्वरकों के आयात में रुकावट आ सकती है, जबकि पश्चिम एशिया और यूरोप को कृषि जिंसों का निर्यात भी प्रभावित हो सकता है। पोत परिवहन कंपनियों ने पश्चिम एशिया से गुजरने वाले मालवाहक पोतों (कार्गो) पर आपात संघर्ष अधिभार लगाना शुरू कर दिया है। इसमें फ्रांस की कंटेनर क्षेत्र की बड़ी कंपनी सीएमए सीजीएम प्रति कंटेनर 2,000 डॉलर से 4,000 डॉलर के बीच अधिभार लगा रही है, जिससे आयात की लागत बढ़ रही है।घुलनशील उर्वरक उद्योग संघ (एसएफआईए) के अध्यक्ष राजीब चक्रवर्ती ने कहा, पश्चिम एशिया को निर्यात अभी ठप पड़ा हुआ है। युद्ध जारी रहने के साथ जोखिम भी बढ़ेगा और शिपिंग कंपनियां बीमा अधिभार लगा सकती हैं, जिससे आयात महंगा हो जाएगा।
राजीब चक्रवर्ती ने जताई चिंता
चक्रवर्ती ने जून में शुरू होने वाले घरेलू खरीफ बुवाई सत्र से पहले डीएपी और एसएसपी उर्वरक बनाने के लिए जरूरी माल की आपूर्ति पर चिंता जताई। साथ ही कहा, इतने सारे बंदरगाह बंद होने से जाम लगेगा और कंटेनर की कमी हो जाएगी। कतर, सयुक्त अरब अमीरात और ओमान मिलकर भारत के गंधक (सल्फर) आयात का 76 फीसदी हिस्सा बनाते हैं। भारत हर साल 1.6 करोड़ टन खाद्य तेल आयात करता है, जिसमें सूरजमुखी तेल का हिस्सा करीब 20 फीसदी है, जो मुख्य रूप से रूस, यूक्रेन और अर्जेंटीना से आता है।
आपूर्ति में रुकावट आई तो निर्यात के लिए अपनाना होगा दूसरा रास्ता
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के कार्यकारी निदेशक, बीवी मेहता ने कहा, अभी तक कोई असर नहीं पड़ा है। लेकिन, युद्ध जारी रहा, तो तो सूरजमुखी तेल की आपूर्ति में रुकावट आ सकती है, क्योंकि निर्यात खेप को दूसरा रास्ता अपनाना होगा। ऊर्जा की लागत, लॉजिस्टिक्स और वैश्विक जैव ईंधन बाजार के बीच संबंध को देखते हुए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें दबाव बढ़ा सकती हैं। भारतीय वनस्पति तेल उत्पादक संघ (आईवीपीए) ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-ईरान के बीच किसी भी तरह की तनातनी का सीधा असर भारत के कच्चे तेल और खाद्य तेल के बाजारों पर पड़ेगा।
आंकड़ा: गर्मी की फसलों का कुल रकबा घटा, पर दलहन व तिलहन का बुवाई रकबा बढ़ा; 0.31 लाख हेक्टेयर में बोया बाजरा
3 Mar, 2026 10:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
समय से पहले खत्म हुई सर्दी गर्मी की फसलों की बुवाई पर विपरीत प्रभाव डाल रही। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने बुवाई के आंकड़े जारी किए हैं। इनमें 27 फरवरी तक पिछले साल के मुकाबले 0.89 लाख हेक्टेयर में कम बुवाई हुई है। देश में कुल 26.53 लाख हेक्टेयर पर गर्मी की फसलों की बुवाई हुई है। इसमें चौंकाने वाले तथ्य है कि फसलों की बुवाई 2025 में इसी समय अवधि में 27.42 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल पर थी।इसमें दलहन की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन धान की बुवाई घटी है। आंकड़ों को देखें तो अब तक 21.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल पर धान की बुवाई हो चुकी है, जबकि गर्मी सीजन 2025 में यह इसी समय अवधि में 23.45 लाख हेक्टेयर में हुई थी।
दालों के कुल क्षेत्रफल में बढ़ोतरी
दालों के कुल क्षेत्रफल में बढ़ोतरी हुई है। इसमें 27 फरवरी 2026 तक 1.15 लाख हेक्टेयर में दालों की बुवाई हो चुकी है, जबकि पिछले सीजन में इसी समय अवधि में यह 1.03 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल था। इस तरह से दलहनों के रकबे में कुल मिलाकर 0.12 लाख हेक्टेयर में बढ़ोतरी हुई है। हरे चने की बुवाई में भी इस बार तेजी दिखी है।अब तक 0.73 लाख हेक्टेयर में चना बोया जा चुका है। पिछले सीजन में यह 0.70 लाख हेक्टेयर ही था। काला चना की बुवाई में भी तेजी है। अब तक 0.31 लाख हेक्टेयर में बाजरा बोया जा चुका है, जबकि पिछले समय इसी समय अवधि में यह 0.21 लाख हेक्टेयर था। इसमें 0.10 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है। रागी की बुवाई भी काफी तेज है। इसमें अब तक 0.17 लाख हेक्टेयर में रागी की बुवाई हो चुकी है।
चीनी उत्पादन 12.43 फीसदी बढ़ा; आईआईएम मुंबई का रुतबा बढ़ा, घरेलू पैकेज सालाना 71.4 लाख तक पहुंचा
3 Mar, 2026 10:34 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चीनी उत्पादन अक्तूबर में शुरू हुए चालू विपणन सूत्र में फरवरी/तक 12.43 फीसदी बढ़कर 2.47 करोड़ पहुंच गया। महाराष्ट्र और कर्नाटक से अधिक उत्पादन से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विपणन वर्ष 2024-25 की सेसान अवधि में यह 2.2 करोड़ टन रहा थोर "भारतीय चीनी एवं जैव-ईंधन विनिमौष्य संघ (इस्मा) ने कहा, देश के फ्रीर्ष चीनी उत्पादक राज्य महोष्ट्र में उत्पादन चालू विपण वर्ष में फरवरी तक 75 लाख टेम से बढ़कर 95.3 लाख टन हो गया। दूसरे सबसे बड़े उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में उत्पादन 73 लाख टन से मामूली बढ़कर74.8 लाख टन हो गया। कर्नाटक का उत्पादन 38.2 लाख टन से बढ़कर 44.5 लाख टन हो गया। मौजूदा समय में कुल 305 कारखाने चालू हैं, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 330 मिलें चल रही थीं। इस्मा ने कहा, दक्षिण कर्नाटक में कुछ मिलों के जून/जुलाई से सितंबर, 2026 तक विशेष सत्र के दौरान परिचालन फिर से शुरू करने की उम्मीद है। उद्योग न्यूनतम बिक्री मूल्य में जल्द बढ़ोतरी का इंतजार कर रहा है। महाराष्ट्र में 15 फरवरी तक बकाया 4,601 करोड़ रुपये था, जो पिछले साल की समान अवधि के 2,744 करोड़ रुपये से अधिक है।
आईआईएम मुंबई का रुतबा बढ़ा, घरेलू पैकेज सालाना 71.4 लाख तक पहुंचा
भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) मुंबई ने अपने 2024-2026 बैच के प्लेसमेंट के परिणामों की घोषणा कर दी है। इसमें अधिकतम घरेलू वेतन पैकेज सालाना 71.4 लाख रुपये तक पहुंच गया। वहीं, बीएफएसआई क्षेत्र में पिछले वर्ष की तुलना में नियुक्तियों में 33 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जो इस सत्र की सबसे अधिक क्षेत्रीय वृद्धि है। संस्थान के मुताबिक, बैच के शीर्ष 10 फीसदी छात्रों को औसतन 47.5 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिला, जबकि शीर्ष 20 फीसदी के लिए यह औसत 41.4 लाख रुपये और शीर्ष 50% के लिए 34.5 लाख रुपये रहा।स्नातकों को बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा (बीएफएसआई), परामर्श, एफएमसीजी, सामान्य प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, परिचालन, लॉजिस्टिक, दवा और स्वास्थ्य सेवा तथा उत्पाद प्रबंधन जैसे विविध क्षेत्रों में नियुक्तियां मिली हैं। परामर्श क्षेत्र सबसे बड़े भर्ती क्षेत्र के रूप में उभरा, जिसमें 123 प्रस्ताव दिए गए। बीएफएसआई क्षेत्र में पिछले वर्ष की तुलना में जहां नियुक्तियों में 33 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई वहीं, उपभोक्ता वस्तुओं (एफएमसीजी) के क्षेत्र में 24 फीसदी नौकरियां बढ़ी हैं। साथ ही, लॉजिस्टिक क्षेत्र में भी वृद्धि हुई है, जो आपूर्ति शृंखला और परिचालन रणनीति में संस्थान की विशेषज्ञता को पुष्ट करती है। आईआईएम मुंबई के निदेशक प्रो मनोज कुमार तिवारी ने कहा कि हम प्रबंधन प्रतिभा के प्रति उद्योग के दृष्टिकोण में एक निर्णायक बदलाव देख रहे हैं।
आज शेयर बाजार में ट्रेडिंग क्यों नहीं?: देश में कल रंगों का त्योहार, तो जानें किस वजह से नहीं हो रहा कारोबार
3 Mar, 2026 10:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हफ्ते के पहले कारोबारी दिन यानी सोमवार 2 मार्च को आई तेज गिरावट के बाद घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार 3 मार्च को ट्रेडिंग नहीं होगी। होली के अवसर पर देश के दोनों प्रमुख एक्सचेंज बीएसई और एनएसई बंद रहेंगे। वार्षिक अवकाश कैलेंडर के अनुसार इस दिन इक्विटी, डेरिवेटिव और अन्य सेगमेंट में कोई कारोबार नहीं होगा।कमोडिटी बाजार में हालांकि आंशिक गतिविधि रहेगी। एमसीक्स में सुबह का सत्र बंद रहेगा, लेकिन शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक ट्रेडिंग दोबारा शुरू होगी।
2 मार्च को बाजार में बड़ी गिरावट
सप्ताह की शुरुआत निवेशकों के लिए झटके भरी रही। वैश्विक तनाव, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते बाजार पर दबाव बना। दिनभर बिकवाली का माहौल रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,048 अंक यानी 1.29 प्रतिशत गिरकर 80,238.85 पर बंद हुआ। हालांकि अंतिम घंटे में कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन सूचकांक एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ ही बंद हुआ।विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिसका सीधा असर आयात-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है। इससे महंगाई, चालू खाते के घाटे और कॉरपोरेट मार्जिन को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं, जो शेयर बाजार में अस्थिरता को जन्म देती हैं।
मार्च में कितने ट्रेडिंग हॉलिडे?
मार्च महीने में कुल तीन प्रमुख ट्रेडिंग अवकाश रहेंगे।
3 मार्च - होली
26 मार्च - श्री राम नवमी
31 मार्च - महावीर जयंती
इनके अलावा सामान्य शनिवार और रविवार को बाजार बंद रहेगा।
पूरे साल में कितने ट्रेडिंग हॉलिडे?
साल 2026 में कुल 16 ट्रेडिंग हॉलिडे तय किए गए हैं। जनवरी में दो छुट्टियां पहले ही हो चुकी हैं। अप्रैल और मई में दो-दो अवकाश रहेंगे, जून में एक छुट्टी होगी। जुलाई और अगस्त में कोई ट्रेडिंग हॉलिडे निर्धारित नहीं है। सितंबर और दिसंबर में एक-एक दिन बाजार बंद रहेगा, जबकि अक्टूबर और नवंबर में भी निर्धारित अवकाश रहेंगे।
वैश्विक कारकों पर टिकी नजर
इस समय घरेलू बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर है। अमेरिका-ईरान तनाव और मध्य पूर्व में संघर्ष की स्थिति से ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों की रणनीति आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की चाल तय करेगी।
West Asia Crisis: एयरस्पेस बंद, उड़ानें ठप; भारतीय दूतावास हुआ सक्रिय, स्पाइसजेट-इंडिगो की विशेष सेवाएं शुरू
3 Mar, 2026 10:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में अस्थायी रूप से हवाई क्षेत्र बंद किए जाने के कारण खाड़ी क्षेत्र में उड़ान संचालन व्यापक रूप से प्रभावित हुआ है। इस स्थिति में बड़ी संख्या में यात्री विभिन्न देशों में फंस गए हैं। भारतीय राजनयिक मिशनों ने प्रभावित नागरिकों की सहायता के लिए सक्रिय पहल शुरू की है, जबकि कई एयरलाइनों ने विशेष राहत उड़ानों की घोषणा की है।
कुवैत में भारतीय दूतावास पूरी तरह सक्रिय
कुवैत स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि वह हवाई क्षेत्र के अस्थायी बंद होने के कारण फंसे भारतीय यात्रियों की सहायता के लिए पूरी तरह सक्रिय है। दूतावास अधिकारियों ने बताया कि वे लगातार यात्रियों के संपर्क में हैं और कुवैती प्रशासन, संबंधित होटलों तथा एयरलाइनों के साथ समन्वय कर रहे हैं ताकि आवश्यक सहायता सुनिश्चित की जा सके।
एतिहाद एयरवेज ने उड़ानें रोकीं
अबू धाबी स्थित एतिहाद एयरवेज ने परिचालन अपडेट जारी करते हुए बताया कि अबू धाबी से आने-जाने वाली उसकी सभी निर्धारित वाणिज्यिक उड़ानें 4 मार्च को दोपहर 2 बजे (यूएई समय) तक निलंबित रहेंगी। एयरलाइन ने कहा कि कुछ री-पोजिशनिंग, कार्गो और प्रत्यावर्तन (रिपैट्रिएशन) उड़ानें यूएई अधिकारियों के समन्वय और कड़ी सुरक्षा मंजूरी के अधीन संचालित की जा सकती हैं।एयरलाइन ने यात्रियों से अपील की है कि जब तक उनसे सीधे संपर्क न किया जाए, वे हवाई अड्डे न पहुंचें। साथ ही यात्रा से पहले वेबसाइट पर उड़ान की स्थिति जांचने और बुकिंग में संपर्क विवरण अद्यतन रखने की सलाह दी गई है। 28 फरवरी तक जारी टिकटों पर 7 मार्च तक की यात्रा वाले यात्रियों को 18 मार्च तक मुफ्त रीबुकिंग या रिफंड की सुविधा प्रदान की जा रही है।
स्पाइसजेट की विशेष उड़ानें
भारतीय एयरलाइन स्पाइसजेट ने बताया कि हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण यूएई से उसकी कई उड़ानें रद्द हुई हैं। कंपनी ने मंगलवार को घोषणा की कि वह यूएई के फुजैराह से दिल्ली, मुंबई और कोच्चि के लिए चार विशेष उड़ानें संचालित करेगी, जिनमें से दो उड़ानें मुंबई के लिए होंगी।एयरलाइन ने कहा कि यात्रियों की मांग और नियामकीय मंजूरी के आधार पर अतिरिक्त विशेष उड़ानों की संभावना भी तलाशी जा रही है। साथ ही 4 मार्च से फुजैराह-दिल्ली और फुजैराह-मुंबई की नियमित निर्धारित सेवाएं बहाल कर दी जाएंगी।
अकासा एयर की सीमित बहाली
अकासा एयर ने व्यापक सुरक्षा समीक्षा के बाद 3 और 4 मार्च को जेद्दा से मुंबई व अहमदाबाद के लिए चुनिंदा उड़ानें संचालित करने की घोषणा की है। हालांकि अबू धाबी, दोहा, कुवैत और रियाद के लिए उसकी उड़ानें 4 मार्च तक निलंबित रहेंगी। एयरलाइन ने स्पष्ट किया कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी संचालन मौजूदा परिस्थितियों पर निर्भर करेंगे।
जेद्दा से इंडिगो की विशेष उड़ानें
सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास ने जानकारी दी कि इंडिगो जेद्दा से भारत के लिए विशेष उड़ानें संचालित करेगा, जिससे फंसे हुए यात्रियों को राहत मिल सके। खाड़ी क्षेत्र में विकसित होती स्थिति पर संबंधित देश और एयरलाइंस लगातार नजर रखे हुए हैं। सुरक्षा आकलन के आधार पर चरणबद्ध तरीके से उड़ान संचालन बहाल करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं, जबकि भारतीय मिशन जरूरतमंद नागरिकों की सहायता में जुटे हैं।
चेक बाउंस: न डरें, न हल्के में लें; जानिए जेल का डर कितना सच और धारा 138 में क्या है सजा और कब होती है सख्ती?
2 Mar, 2026 11:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेक बाउंस होना नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत एक अर्ध-आपराधिक अपराध है। यानी मामला तो पैसों के लेनदेन का है, लेकिन इसे अपराध की श्रेणी में इसलिए रखा गया है ताकि लोग चेक देने में अनुशासन बरतें। चेक बाउंस होने पर जेल जाना बहुत दुर्लभ है। अदालतों का प्राथमिक उद्देश्य आपको जेल भेजना नहीं, बल्कि जिसका पैसा है उसे उसका हक दिलाना है। अगर आप आदतन डिफॉल्टर हैं, जानबूझकर भुगतान से बच रहे हैं या स्टॉप पेमेंट जैसे हथकंडे अपना रहे हैं तो कोर्ट सख्त हो सकता है। वैसे तो दो साल तक की जेल और चेक की राशि से दोगुना जुर्माना हो सकता है, लेकिन ज्यादातर मामले आपसी समझौते पर खत्म हो जाते हैं। चेक बाउंस होने के बाद जब आपको कानूनी नोटिस मिलता है, तो वहां से 15 दिनों की समय सीमा शुरू होती है।
चूक न करें : कई लोग इसे सिर्फ डराने का तरीका मानते हैं और चुप बैठ जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह आपकी सबसे बड़ी गलती है।
व्हाट्सएप भी है गवाह : व्हाट्सएप पर की गई बातें भी कोर्ट में आपके खिलाफ सबूत बन सकती हैं। अगर इन 15 दिनों में पेमेंट हो गया, तो केस फाइल ही नहीं होगा।
CIBIL पर पड़ेगा असर
चेक बाउंस का सबसे पहला असर आपकी क्रेडिट रेटिंग पर पड़ता है। अगर बाउंस हुआ चेक किसी लोन की EMI का है, तो आपका सिबिल स्कोर तुरंत गिर जाएगा। भविष्य में लोन मिलना पहाड़ चढ़ने जैसा मुश्किल होगा। बैंक हर बाउंस पर 500 से 1,000 रुपये तक की पेनल्टी लगाते हैं और बार-बार ऐसा होने पर आपकी चेक बुक सुविधा भी छीनी जा सकती है।
ये तीन बातें बांध लें गांठ
यह गलतफहमी पालना छोड़ दें कि 'सिक्योरिटी' के नाम पर दिया गया चेक कानूनी नहीं है। अगर आपकी देनदारी बनती है, तो सिक्योरिटी चेक भी बाउंस होने पर केस चल सकता है।
तारीख आने पर पोस्ट-डेटेड चेक की कानूनी हैसियत सामान्य चेक जैसी ही हो जाती है।
नोटिस मिलते ही सामने वाले से संवाद करें। लिखित समझौता हमेशा कोर्ट-कचहरी के चक्करों से सस्ता और बेहतर होता है।
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शेयर बाजार में दशहत क्यों?: पश्चिम एशिया में घमासान के बाद निवेशकों के आठ लाख करोड़ डूबे, जानें पांच बड़े कारण
2 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम एशिया में अचानक गहराए भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के हालात ने सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली का माहौल बना दिया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक भारी गिरावट के साथ खुले, जिससे चंद मिनटों में निवेशकों के 7.8 लाख करोड़ रुपये से अधिक डूब गए। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 2,743 अंक टूटकर 78,543 पर और निफ्टी 519 अंक गिरकर 24,659 पर खुला, जिससे 25,000 का अहम सपोर्ट लेवल टूट गया। सुबह 10 बजकर 39 मिनट पर सेंसेक्स 1,059.41 (1.30%) अंकों की गिरावट के साथ 80,227.78 के साथ कारोबार करता दिखा। वहीं, 50 शेयरों वाला निफ्टी में 322.11 (1.28%) अंकों की गिरावट के साथ 24,856.55 पर कारोबार होता दिखा।
पश्चिम एशिया में जारी लड़ाई से निवेशकों के बीच दहशत
बाजार में क्रैश का सबसे मुख्य कारण पश्चिम एशिया में युद्ध का भड़कना है। सप्ताहांत में अमेरिका और इस्राइल की ओर से किए गए कथित मिसाइल हमलों में ईरान के 86 वर्षीय सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और उनके परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई। इस बड़े घटनाक्रम ने वैश्विक बाजारों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
ईरान की ओर से किए गए जवाबी हमलों से बढ़ा डर
अयातुल्लाह खामेनेई की मौत के बाद ईरान की ओर से पश्चिम एशिया के प्रमुख क्षेत्रों में किए गए जवाबी हमले बाजार गिरने का दूसरा बड़ा कारण हैं। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार का कहना है कि पश्चिम एशिया में युद्ध से जुड़ी अनिश्चितता निकट भविष्य में बाजार पर छाई रहेगी। वहीं, वेल्थ मिल्स सिक्योरिटीज के क्रांति बाथिनी के अनुसार, तनाव का यूएई तक फैलना अप्रत्याशित था, जिसका वित्तीय बाजारों पर शॉर्ट-से-मीडियम टर्म में नकारात्मक असर पड़ेगा।
बाजार में बिकवाली का कच्चे तेल से भी संबंध
कच्चे तेल की कीमतों में आया जबरदस्त उछाल बाजार के लिए तीसरी सबसे बड़ी चिंता है। ब्रेंट क्रूड वायदा की कीमतें बढ़कर 82.37 डॉलर हो गईं, जो जनवरी 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत में 7.60 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 78.41 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड वायदा में 7.19 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 71.86 डॉलर पर पहुंच गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले नौवहन को बंद कर दिया है, जिसके चलते सरकारों और तेल शोधकों को तेल भंडार का आकलन करने के लिए प्रेरित किया गया है। इस बीच, ईरान पर अमेरिका और इस्राइल के हमलों के मद्देनजर, ओपेक ने अगले महीने तेल उत्पादन में वृद्धि फिर से शुरू करने पर सहमति जताई है। सऊदी अरब और रूस के नेतृत्व में प्रमुख सदस्य देश प्रतिदिन 206,000 बैरल तेल का उत्पादन बढ़ाएंगे। कच्चे तेल की यह तेजी अर्थव्यवस्था और महंगाई दर के लिए गंभीर खतरा है। तेल बाजार में घबराहट का कारण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' में सप्लाई चेन बाधित होने का डर है। दुनिया का 20% से अधिक तेल इसी रास्ते से गुजरता है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। इस क्षेत्र के आसपास हो रहे भारी मिसाइल हमलों ने तेल आपूर्ति में रुकावट की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी का बाजार के सेंटिमेंट पर असर
ब्रिटेन के दूसरे सबसे बड़े बैंक 'बार्कलेज' द्वारा जारी चेतावनी ने बाजार का डर और बढ़ा दिया। बैंक ने शनिवार को जारी अपनी रिपोर्ट में अनुमान जताया है कि मिडिल ईस्ट की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू सकता है।
सेक्टोरल आउटलुक
सूचकांक का हाल: सेंसेक्स 2,743 अंक टूटकर 78,543 पर और निफ्टी 519 अंक गिरकर 24,659 पर खुला, जिससे 25,000 का अहम सपोर्ट लेवल टूट गया।
संपत्ति का नुकसान: बाजार खुलते ही बीएसई पर लिस्टेड सभी कंपनियों के कुल मार्केट कैप में से 7.8 लाख करोड़ रुपये से अधिक साफ हो गए।
प्रमुख लूजर्स: सेंसेक्स पर इंडिगो, लार्सन एंड टुब्रो, इटरनल, अदानी पोर्ट्स और एशियन पेंट्स के शेयरों में 2-4% तक की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टोरल मोर्चे पर निफ्टी रियल्टी इंडेक्स सबसे ज्यादा (करीब 2%) गिरा, जबकि ऑटो, आईटी, पीएसयू बैंक और ऑयल एंड गैस इंडेक्स 1% से ज्यादा टूटे।
डिफेंस में तेजी: बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण रक्षा शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी, जिससे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (बीईएल) के शेयर 1% से अधिक की बढ़त के साथ हरे निशान में रहे।
वैश्विक बाजार का हाल
पश्चिम एशिया के इस संकट ने वैश्विक में तेज वोलैटिलिटी (उतार-चढ़ाव) और इन्फ्लेशन रिस्क को बढ़ा दिया है। जहां इक्विटी बाजारों में भारी बिकवाली देखी जा रही है, वहीं सुरक्षित निवेश की ओर भागते निवेशकों के कारण सोने में 6,000 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी में 10,400 रुपये प्रति किलो का भारी उछाल आया है। मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए निवेशकों को बाजार में सतर्क रुख अपनाने की आवश्यकता है।
सूचकांक वर्तमान मूल्य बदलाव प्रतिशत बदलाव
HSI (हांगकांग) 26,165.88 -464.66 -1.74
NIFTY 50 (भारत) 25,178.65
NZX 50 (न्यूजीलैंड) 13,617.45 -105.52 -0.77
MALAYSIA (मलेशिया) 1,698.48 -18.13 -1.06
TAIWAN (ताइवान) 35,255.76 -158.73 -0.45
NIKKEI (जापान) 57,947.22 -903.05 -1.53
ASX 200 (ऑस्ट्रेलिया) 9,173.80 -24.8 -0.27
SHANGHAI (चीन) 4,163.01 0.127
SHENZHEN (चीन) 14,386.05 -109.04 -0.75
KOSPI (दक्षिण कोरिया) 6,244.13 -63.14 -1
SETI (थाईलैंड) 1,496.78 -31.48 -2.06
STI (सिंगापुर) 4,905.59 -89.48 -1.79
SGX-CNBC CHINA GROWTH 1,746.80 -24.07 -1.36
The Bonus Market Update: पश्चिम एशिया की जंग से दहला शेयर बाजार, 1072 अंक गिरा सेंसेक्स; डूबे आठ लाख करोड़
2 Mar, 2026 09:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, विदेशी पूंजी की निकासी और कमजोर कॉरपोरेट नतीजों के बीच सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में सुबह के कारोबार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती सत्र में निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता घटने से बाजार पर भारी दबाव बना रहा। प्री-ट्रेडिंग के दौरान सेंसेक्स 2,743.46 अंक गिरकर 78,543.73 पर आ गया; निफ्टी 533.55 अंक गिरकर 24,645.10 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 24 पैसे गिरकर 91.32 पर आ गया। हालांकि बाजार खुलते ही 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1072.86 अंक या 1.32% गिरकर 80,214.33 अंक पर आ गया। वहीं 50 शेयरों वाला निफ्टी 333.90 अंक या 1.33% गिरकर 24,844.75 अंक पर आ गया।
निवेशकों के डूबे आठ लाख करोड़ रुपये
तेज गिरावट के चलते बाजार पूंजीकरण में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। कारोबार शुरू होने के शुरुआती कुछ ही मिनटों में निवेशकों की संपत्ति में ₹8 लाख करोड़ से अधिक की कमी आ गई, क्योंकि बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप पिछले सत्र के ₹463.50 लाख करोड़ से घटकर करीब ₹455 लाख करोड़ पर आ गया।
प्री-ओपन में सेंसेक्स 6,000 अंक तक गिरा
क्या है विशेषज्ञों की राय?
मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा ने वैश्विक अनिश्चितता के बीच बाजारों की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि निवेशक बेहद अस्थिर माहौल में स्थिरता की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने एएनआई से बातचीत में कहा, “आज की गहराई से अनिश्चित दुनिया में बाजार किसी ठोस सहारे की तलाश कर रहे हैं। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री के इस बयान कि ईरान होरमुज जलडमरूमध्य को बंद नहीं करेगा और नई ईरानी नेतृत्व अमेरिका के साथ वार्ता फिर से शुरू करना चाहता है, इन खबरों से एशियाई बाजारों में शुरुआती भारी गिरावट के बाद जोखिम वाले एसेट्स में हल्की रिकवरी देखने को मिली है।”
अजय बग्गा के अनुसार, ईरान-अमेरिका तनाव का भारतीय बाजार पर तीन प्रमुख प्रभाव पड़ सकता है।
पहला और सबसे बड़ा जोखिम कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है, क्योंकि होरमुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की बाधा वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है। भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देश के लिए यह महंगाई, चालू खाता घाटा और कॉरपोरेट लागत बढ़ने का कारण बन सकता है, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनेगा। दूसरा बड़ा प्रभाव भारत के खाड़ी क्षेत्र में स्थित प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर पड़ सकता है। यदि शिपिंग रूट और सप्लाई चेन बाधित होती हैं, तो भारतीय निर्यातकों को नुकसान झेलना पड़ सकता है, खासकर उन सेक्टरों को जो मध्य पूर्व पर निर्भर हैं। तीसरा जोखिम मध्य पूर्व में काम कर रहे लगभग 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा और रोजगार से जुड़ा है। क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर श्रम बाजार, रेमिटेंस फ्लो और भारतीय अर्थव्यवस्था पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।
सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी
ईरान के खिलाफ अमेरिका-इस्राइल की सैन्य कार्रवाई की आशंकाओं ने वैश्विक बाजारों में रिस्क-ऑफ माहौल को तेज कर दिया है, जिसका असर इस सप्ताह की शुरुआत में इक्विटी बाजारों पर साफ दिख सकता है। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते निवेशक जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बनाकर सोना, डॉलर और अन्य सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे शेयर बाजारों पर दबाव बढ़ने की संभावना है। कमोडिटी बाजारों में, सोने की कीमतें 3 प्रतिशत बढ़कर 1,67,329 रुपये प्रति 10 ग्राम (24 कैरेट) हो गईं, जबकि चांदी की कीमतें 3.89 प्रतिशत बढ़कर 2,85,700 रुपये प्रति किलोग्राम हो गईं।
एशियाई बाजारों में दिखी गिरावट
अन्य एशियाई बाजारों में भी बिकवाली का दबाव देखा गया। जापान का निक्केई 225 सूचकांक 1.55 प्रतिशत गिरकर 57,930 के स्तर पर आ गया, सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स सूचकांक 1.86 प्रतिशत गिरकर 4,903 के स्तर पर आ गया, हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक 2 प्रतिशत से अधिक गिरकर 26,113 पर आ गया और ताइवान का भारित सूचकांक 0.33 प्रतिशत गिरकर 35,297 के स्तर पर पहुंच गया। अमेरिकी बाजारों में, डॉव जोन्स फ्यूचर्स 0.77 प्रतिशत गिरकर 48,593 पर आ गया, जो बिकवाली के दबाव का संकेत देता है। शुक्रवार को, एसएंडपी 500 सूचकांक 0.43 प्रतिशत गिरकर 6,878 पर आ गया, जबकि नैस्डैक 0.94 प्रतिशत गिरकर 22,663 के स्तर पर पहुंच गया।
ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 82.37 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा
ब्रेंट क्रूड वायदा की कीमतें बढ़कर 82.37 डॉलर हो गईं, जो जनवरी 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत में 7.60 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 78.41 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड वायदा में 7.19 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 71.86 डॉलर पर पहुंच गई।
Investment: अनुशासित निवेश के लिए SIP का ढेर नहीं, संतुलित पोर्टफोलियो बनाना जरूरी
2 Mar, 2026 09:08 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नोएडा के रहने वाले आशीष ने नई नौकरी लगते ही म्यूचुअल फंड में निवेश शुरू कर दिया। आशीष ने एक या दो नहीं, बल्कि `2,000 की 12 अलग-अलग म्यूचुअल फंड SIP शुरू कर दीं। उन्हें लगा कि उन्होंने एक बड़ा पोर्टफोलियो बना लिया है और उन्होंने सोचा कि जितने ज्यादा फंड होंगे, उतना ही ज्यादा विविधीकरण होगा और उतना ही ज्यादा पैसा बनेगा। आशीष जैसे कई लोग SIP के जरिये म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के अनुसार, 2025 की शुरुआत में SIP के माध्यम से मासिक निवेश 26,400 करोड़ रुपये था, जो जनवरी 2026 तक 31,002 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। हालांकि, हकीकत यह है कि आशीष का पोर्टफोलियो संतुलित नहीं है, बल्कि यह पोर्टफोलियो ओवरलैपिंग का शिकार है। आशीष के 12 फंडों में से 10 ने रिलायंस, एचडीएफसी बैंक और इंफोसिस के शेयर खरीद रखे हैं। यह निवेश नहीं है, इसे ओवर-डाइवर्सिफिकेशन कहा जाता है। अगर रिलायंस का शेयर गिरता है, तो आशीष के सभी 12 फंड एक साथ नीचे आएंगे।
सिर्फ रिटर्न नहीं, जोखिम मैनेज करना सीखें
जब 2025 में बाजार में उतार-चढ़ाव आया तो उन लोगों के पोर्टफोलियो सबसे ज्यादा गिरे जिन्होंने केवल स्मॉल-कैप में निवेश किया था। जब बाजार चढ़ता है, तो हर कोई विजेता दिखता है, लेकिन असली निवेशक वही है जिसका पोर्टफोलियो गिरावट के दौरान कम गिरे।
SIP निवेश में लगातार हो रही है बढ़ोतरी
पिछले एक साल में SIP इनफ्लो में लगातार बढ़ोतरी निवेशकों की बदलती सोच को दर्शाती है। साल भर में लगभग 17% की कुल वृद्धि के साथ, यह स्पष्ट है कि अधिक लोग शॉर्ट-टर्म मार्केट टाइमिंग के बजाय अनुशासित, लॉन्ग-टर्म निवेश को चुन रहे हैं। यह रुझान बढ़ती जागरूकता, वित्तीय आत्मविश्वास और संपत्ति बनाने के एक भरोसेमंद उपकरण के रूप में SIP पर भरोसे को उजागर करता है। निवेशक महसूस कर रहे हैं कि मार्केट टाइमिंग से ज्यादा निरंतरता मायने रखती है। जैसे-जैसे भागीदारी बढ़ रही है, धैर्य, अनुशासन और कंपाउंडिंग की ताकत से लैस SIP, वित्तीय लक्ष्यों को पाने का पसंदीदा रास्ता बनते जा रहे हैं।
Gold-Silver Price: चांदी की कीमतों में 10400 रुपये का उछाल, सोना 1.67 लाख रुपये पर पहुंचा, जानें आज का अपडेट
2 Mar, 2026 09:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सुरक्षित निवेश की मांग में तेज उछाल देखने को मिला है। इसके चलते सोना और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी दर्ज की गई। चांदी की कीमत 10460 रुपये बढ़कर 2.92 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। वहीं सोने का भाव 5260 रुपये बढ़कर 1.67 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
एमसीक्स पर सोने-चांदी में दिखी तेजी
एमसीएक्स गोल्ड अप्रैल वायदा में दिन के दौरान 3.12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 1,67,155 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं, एमसीएक्स सिल्वर मार्च वायदा में 3.04 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 2,91,249 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने-चांदी का हाल
वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ने से निवेशकों ने तेजी से कीमती धातुओं की ओर रुख किया, जिससे कॉमेक्स पर सोना 5,400 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया और इंट्राडे में 2.5% से अधिक की बढ़त दर्ज की। वहीं, चांदी की कीमत भी तेज उछाल के साथ खुली और शुरुआती कारोबार में 96.93 डॉलर प्रति औंस के इंट्राडे हाई तक पहुंच गई, जो करीब 2% की तेजी को दर्शाता है।
पश्चिम एशिया में क्या है स्थिति?
रिपोर्ट के मुताबिक, वाशिंगटन और तेहरान के बीच वार्ता अगले सप्ताह भी जारी रहेगी। मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे ओमान ने बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति का संकेत दिया है, हालांकि सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि अमेरिकी अधिकारी प्रगति की गति से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। इस बीच अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है। इसका सीधा असर सोने-चांदी की कीमतों पर दिख रहा है।
सोने-चांदी की कीमतों को लेकर विशेषज्ञों का क्या अनुमान?
विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ने की स्थिति में कीमती धातुओं में और तेजी आ सकती है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के कमोडिटी रिसर्च हेड हरीश वी के अनुसार, चरम परिस्थितियों में वैश्विक स्तर पर सोना 6,000 डॉलर प्रति औंस और भारत में 2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक भी पहुंच सकता है, हालांकि यह पूरी तरह संघर्ष की दिशा पर निर्भर करेगा। वहीं, विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में चांदी के 100 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार करने की संभावना भी बन रही है।
इस वर्ष सोने की कीमतों में हुआ 20% का उछाल
उल्लेखनीय है कि इस वर्ष अब तक सोने की कीमतों में 20% से अधिक की बढ़ोतरी हो चुकी है और यह फिर से 5,000 डॉलर प्रति औंस के ऊपर स्थिर हुआ है। जनवरी के अंत में रिकॉर्ड ऊंचाई से गिरावट के बाद भी सोने ने लगातार सातवें महीने बढ़त दर्ज की है, जो 1973 के बाद सबसे लंबी तेजी मानी जा रही है। भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार अनिश्चितता, डॉलर के अवमूल्यन की चिंताएं और फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को लेकर आशंकाएं इस बहुवर्षीय तेजी के प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।
Crude Oil Prices Hike: पश्चिम एशिया में हमलों के बाद तेल कीमतों में तेज उछाल, वैश्विक आपूर्ति पर संकट गहराया
2 Mar, 2026 07:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया है। अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर हमलों तथा उसके जवाबी हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया। बाजार खुलते ही ट्रेडर्स ने आशंका जताई कि क्षेत्र से तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे कीमतों में और तेजी आ सकती है।
8 प्रतिशत तक चढ़ा अमेरिकी कच्चा तेल
अमेरिका में उत्पादित हल्का और मीठा कच्चा तेल वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) लगभग 72 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो शुक्रवार के 67 डॉलर के स्तर से करीब 8 प्रतिशत अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़े तो यह उछाल जारी रह सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा जोखिम
पश्चिम एशिया के तनाव का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर दिख रहा है। यह संकरा समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी का प्रवेश द्वार है, जहां से प्रतिदिन लगभग 1.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरता है। यह वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा है। इस मार्ग से सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान का तेल और गैस विश्व बाजार तक पहुंचता है। हाल ही में इस मार्ग से गुजर रहे दो जहाजों पर हमले की खबर ने चिंता और बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस जलमार्ग में आवाजाही सीमित होती है तो कई देशों की निर्यात क्षमता प्रभावित होगी, जिससे वैश्विक स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि तय मानी जा रही है।
OPEC+ ने उत्पादन बढ़ाने का किया ऐलान
तनाव के बीच राहत देने की कोशिश में OPEC+ समूह के आठ देशों ने कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने की घोषणा की है। अप्रैल से 2,06,000 बैरल प्रतिदिन अतिरिक्त उत्पादन किया जाएगा। उत्पादन बढ़ाने वाले देशों में सऊदी अरब, रूस, इराक, यूएई, कुवैत, कजाखस्तान, अल्जीरिया और ओमान शामिल हैं। हालांकि ऊर्जा विश्लेषकों का कहना है कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, जब तक निर्यात मार्ग पूरी तरह सुरक्षित न हो जाएं।
ईरान के निर्यात पर भी संकट
ईरान प्रतिदिन करीब 16 लाख बैरल तेल निर्यात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा चीन को जाता है। यदि निर्यात बाधित होता है तो चीन जैसे बड़े आयातक देशों को वैकल्पिक स्रोत तलाशने पड़ सकते हैं, जिससे वैश्विक मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ सकता है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस पश्चिम एशिया तेल आपूर्ति संकट का असर केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, महंगाई दर और शेयर बाजार पर भी दिखाई दे सकता है।
