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₹6361 करोड़ की सैलरी! सुंदर पिचाई की कमाई ने सबको चौंकाया
7 Mar, 2026 05:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टेक जगत से एक बड़ी खबर सामने आई है और इस खबर ने तकनीक की दुनिया में हलचल मचा दी है। गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट ने अपने सीईओ सुंदर पिचाई के लिए अगले तीन वर्षों का संभावित वेतन बढ़ाकर 69.2 करोड़ डॉलर यानी भारतीय रुपयों में करीब 6361 करोड़ रुपये कर दिया है। इस डील के साथ ही पिचाई दुनिया के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) में शुमार हो गए हैं। आखिर टेक दिग्गज गूगल ने अपने भारतीय मूल के सीईओ पर इतना बड़ा दांव क्यों लगाया है? आइए इस ऐतिहासिक पे-पैकेज की बारीकियों और इसके पीछे की ठोस वजहों को समझते हैं।
सुंदर पिचाई का यह नया वेतन पैकेज असल में कितना बड़ा है और इसका ढांचा क्या है?
गूगल ने अगले तीन वर्षों के लिए पिचाई का कुल अधिकतम संभावित पे-पैकेज 69.2 करोड़ डॉलर (करीब 6361 करोड़ रुपये) तय किया है। इसमें उनकी सालाना बेसिक सैलरी 20 लाख डॉलर (करीब 18.38 करोड़ रुपये) रखी गई है, जबकि पैकेज का सबसे बड़ा हिस्सा शेयरों के रूप में मिलेगा। अगर वह कंपनी के लक्ष्य को पूरी तरह हासिल नहीं कर पाते हैं, तो भी उन्हें वेतन और स्टॉक के रूप में तीन वर्षों में 39.1 करोड़ डॉलर की बेसलाइन अमाउंट की राशि मिलनी तय है।
क्या यह पूरी रकम फिक्स है या प्रदर्शन पर निर्भर है?
इस पैकेज का एक बड़ा हिस्सा परफॉरमेंस स्टॉक यूनिट्स (पीएसयू) पर आधारित है, जिसकी टारगेट वैल्यू 12.6 करोड डॉलर (लगभग 1158 करोड़ रुपये) है। इन शेयरों का मूल्य एसएंडपी 100 की अन्य कंपनियों के मुकाबले अल्फाबेट के शेयरधारकों को मिलने वाले रिटर्न के आधार पर तय होगा। अगर कंपनी शानदार प्रदर्शन करती है, तो यह रकम दोगुनी (25.2 करोड़ डॉलर यानी 2316 करोड़ रुपये) हो सकती है, और अगर पिछड़ती है तो यह शून्य भी हो सकती है। इसके अलावा, अगले तीन वर्षों में उन्हें 84 मिलियन डॉलर (करीब 772 करोड़ रुपये) के प्रतिबंधित शेयर भी मिलेंगे, जो हर महीने भुनाए जा सकेंगे।
क्या इस पैकेज में बिजनेस से जुड़ा कोई नया इसेंटिव भी जोड़ा गया है?
हां, इस डील की एक बड़ी खासियत इसके नए इंसेंटिव्स हैं। गूगल ने अपनी सेल्फ-ड्राइविंग टैक्सी शाखा 'वेमो' और ड्रोन डिलीवरी स्टार्ट-अप 'विंग' की ग्रोथ से जुड़े 35 करोड़ डॉलर (लगभग 3217 करोड़ रुपये) तक के स्टॉक इंसेंटिव्स पहली बार जोड़े हैं। इसमें वेमो के लिए 13 करोड़ डॉलर (लगभग 1195 करोड़ रुपये) और विंग एविएशन के लिए 4.5 करोड़ डॉलर (लगभग 413 करोड़ रुपये) की टारगेट वैल्यू के शेयर रखे गए हैं, जो तीन साल बाद उनके 'फेयर वैल्यू' के आधार पर तय होंगे और शानदार प्रदर्शन पर 200 प्रतिशत तक का भुगतान कर सकते हैं।
पिचाई को इतना भारी-भरकम पैकेज क्यों दिया जा रहा है? उनकी उपलब्धियां क्या हैं?
भारतीय मूल के 53 वर्षीय पिचाई ने 2004 में कंपनी में शामिल होने के बाद क्रोम ब्राउज़र विकसित करने और एंड्रॉइड डिवीजन का नेतृत्व करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अल्फाबेट के बोर्ड का मानना है कि पिचाई की अगुवाई में वेमो और विंग ऑटोनॉमस ड्राइविंग व डिलीवरी के क्षेत्र में मजबूत प्रगति कर रहे हैं। इसके अलावा, अगस्त 2015 में जब पिचाई ने सीईओ का पद संभाला था, तब गूगल का मार्केट कैप 535 बिलियन डॉलर था, जो उनके नेतृत्व में सात गुना बढ़कर लगभग 3.6 ट्रिलियन डॉलर हो गया (जनवरी में यह 4 ट्रिलियन डॉलर को भी पार कर गया था)। हालांकि शुरुआत में चैटजीपीटी के लॉन्च के समय उन पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में धीमी गति का आरोप लगा था, लेकिन उन्होंने दमदार वापसी करते हुए गूगल के सर्च इंजन में कटिंग-एज एआई मॉडल्स सफलतापूर्वक इंटीग्रेट किए। साथ ही, उन्होंने कंपनी को बड़े एंटीट्रस्ट (एकाधिकार) मुकदमों के सबसे बुरे परिणामों से भी बचाकर बाहर निकालने में सफलता हासिल की। पिचाई ने गूगल के खोज और एप स्टोर कारोबार के खिलाफ लाए गए अविश्वास मामलों को भी सफलतापूर्वक संभाला है।
दुनिया के अन्य दिग्गज टेक सीईओ के मुकाबले पिचाई का यह पैकेज कैसा है?
पिचाई का यह 69.2 करोड़ डॉलर (तीन साल का अधिकतम) का पैकेज उनके प्रतिद्वंद्वियों से कहीं बड़ा है। उनकी तुलना में, माइक्रोसॉफ्ट के प्रमुख सत्या नडेला ने वित्त वर्ष 2025 में कुल 9.65 करोड़ डॉलर (जिसमें 8.4 करोड़ डॉलर स्टॉक था) की कमाई की, जबकि एपल के बॉस टिम कुक की 2025 की कमाई 7.43 करोड़ डॉलर रही।
पिचाई की व्यक्तिगत संपत्ति और कंपनी में संस्थापकों के नियंत्रण का क्या समीकरण है?
ब्लूमबर्ग बिलियनेयर इंडेक्स के अनुसार, 53 वर्षीय पिचाई सीईओ बनने के बाद से अब तक लगभग 65 करोड़ डॉलर के शेयर बेच चुके हैं (हाल ही में उन्होंने 9.8 मिलियन डॉलर के शेयर बेचे)। फिलहाल, उनके और उनकी पत्नी अंजलि के पास कुल 1.67 मिलियन गूगल शेयर हैं, जिनकी कीमत शुक्रवार के भाव पर 49.8 करोड़ डॉलर है। इसके बावजूद, कंपनी पर असली नियंत्रण आज भी इसके संस्थापक लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन का है, जिनके पास सुपर-वोटिंग क्लास बी शेयरों के चलते 56 प्रतिशत निर्णायक शक्ति मौजूद है। सुंदर पिचाई का यह विशालकाय वेतन पैकेज बताता है कि अल्फाबेट का बोर्ड उनके नेतृत्व पर पूरा भरोसा कर रहा है। यह डील न केवल पिछले एक दशक में कंपनी की मार्केट वैल्यू में हुए सात गुना इजाफे का इनाम है, बल्कि इस बात का भी संकेत है कि भविष्य के ग्रोथ इंजन- खासकर एआई, सेल्फ-ड्राइविंग टैक्सी और ऑटोनॉमस डिलीवरी- पर कंपनी कितनी आक्रामक रूप से दांव लगा रही है।
योजना का उद्देश्य महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और रोजगार के अवसर बढ़ाना है।
7 Mar, 2026 04:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। बैंक ने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से 500 मिलियन डॉलर (लगभग 4,500 करोड़ रुपये) की सिंडिकेटेड सोशल टर्म लोन सुविधा की शुरुआत की है। इसे वैश्विक स्तर पर अपनी तरह का सबसे बड़ा जेंडर-थीम वाला लोन माना जा रहा है।
एसबीआई के इस लोन की खासियत क्या है?
इस 500 मिलियन डॉलर के सिंडिकेटेड लोन में 'ग्रीनशू ऑप्शन' भी शामिल किया गया है। यह पहल विशेष रूप से महिलाओं के लिए अवसर पैदा करने और सामाजिक प्रभाव को तेज करने पर केंद्रित है। इस बड़े वित्तीय लेनदेन के लिए मित्सुबिशी यूएफजे फाइनेंशियल ग्रुप को ओरिजिनल मैंडेटेड लीड अरेंजर, अंडरराइटर, बुकरनर और एकमात्र सोशल लोन को-ऑर्डिनेटर नियुक्त किया गया है।
इस स्कीम से कैसे मिलेगा फायदा?
यह फाइनेंसिंग दुनिया भर में पर्यावरण, सामाजिक और शासन सिद्धांतों के प्रति एसबीआई के मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है। बैंक के अनुसार, यह कदम समाज में जेंडर गैप (लैंगिक असमानता) को कम करने में मदद करेगा। इसके साथ ही, यह पहल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) 5 - 'लैंगिक समानता हासिल करने और सभी महिलाओं व लड़कियों को सशक्त बनाने' में भी सार्थक योगदान देगी।
एसबीआई के चेयरमैन क्या बोले?
इस खास मौके पर एसबीआई के चेयरमैन सीएस सेट्टी ने कहा कि एक जिम्मेदार संगठन के रूप में बैंक सतत विकास की आधारशिला के तौर पर महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए गहराई से प्रतिबद्ध है। महिला दिवस के अवसर पर उन्होंने कहा, "हमारा मानना है कि सच्ची प्रगति न केवल आर्थिक विकास पर निर्भर करती है, बल्कि सकारात्मक सामाजिक बदलाव लाने, महिलाओं को सशक्त बनाने और सभी हितधारकों के लिए एक समावेशी समाज के निर्माण की हमारी क्षमता पर भी निर्भर करती है"।
एसबीआई की वित्तीय स्थिति कैसी?
इस तरह के बड़े वैश्विक इनिशिएटिव को बैंक की बेहद मजबूत वित्तीय स्थिति का भी समर्थन प्राप्त है। दिसंबर 2025 तक एसबीआई के प्रमुख आंकड़े इस प्रकार रहे हैं:
बैंक का कुल डिपॉजिट बेस (जमा आधार) 57 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
बैंक का कासा अनुपात 39.13 प्रतिशत के मजबूत स्तर पर है।
बैंक का कुल एडवांस (ऋण वितरण) 46.8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा है।
एसबीआई की ओर से उठाया गया यह कदम भारतीय वित्तीय संस्थानों द्वारा सस्टेनेबल फाइनेंस (टिकाऊ वित्त) के क्षेत्र में एक मील का पत्थर है। यह बड़ा निवेश न केवल समावेशी आर्थिक विकास को गति देगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर महिलाओं की वित्तीय भागीदारी और सशक्तिकरण के प्रयासों को एक ठोस दिशा भी प्रदान करेगा।
मिडिल ईस्ट तनाव से भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव, रिपोर्ट ने बताई बड़ी वजहें
7 Mar, 2026 03:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का भारत की अर्थव्यवस्था पर कई तरह का प्रभाव पड़ सकता है। एसबीआई रिसर्च की एक नई रिपोर्ट के अनुसार बढ़ती भू-राजनीतिक तनाव की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, ऊर्जा आपूर्ति मार्गों में बाधा, व्यापार और खाड़ी देशों से आने वाले प्रेषण पर असर पड़ने की आशंका है।
अगर तनाव लंबा समय तक जारी रहा तो?
रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल महंगाई पर तत्काल असर सीमित रह सकता है, लेकिन अगर तनाव लंबे समय तक जारी रहता है और सप्लाई चेन बाधित होती है तो वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर असर पड़ सकता है।
तेल आपूर्ति को लेकर क्या है संकट?
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर है। भारत अपनी लगभग 90 प्रतिशत तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है।
कुल 5.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन आयात में से करीब 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है।
अगर इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात बाधित होता है तो भारत के लिए आपूर्ति संकट और आयात लागत बढ़ने का जोखिम पैदा हो सकता है।
दरअसल, दुनिया के कुल कच्चे तेल का करीब 20 प्रतिशत इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है, जिससे यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम केंद्र बन जाता है।
वैश्विक बाजारों कैसे दिख रहा असर?
वैश्विक बाजारों में भी तनाव का असर दिखाई देने लगा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत दिसंबर 2025 में करीब 58.92 डॉलर प्रति बैरल और फरवरी 2026 के अंत में 70.75 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर मार्च की शुरुआत में लगभग 85.40 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है और भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ने के साथ यह 89 डॉलर प्रति बैरल के पार भी चली गई।
महंगाई को लेकर क्या है संभावना?
रिपोर्ट के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत का चालू खाता घाटा (CAD) करीब 36 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ सकता है। साथ ही लागत आधारित महंगाई बढ़ने से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) महंगाई दर में भी लगभग 35-40 बेसिस प्वाइंट तक इजाफा हो सकता है।
तेल की कीमतों में वृद्धि से क्या हो सकता है?
तेल कीमतों में लगातार वृद्धि आर्थिक वृद्धि को भी प्रभावित कर सकती है। अनुमान है कि हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत की GDP वृद्धि दर में लगभग 20-25 बेसिस प्वाइंट की कमी आ सकती है। अगर कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती हैं तो वित्त वर्ष 2027 में भारत की GDP वृद्धि दर अनुमानित 7 प्रतिशत के बजाय करीब 6 प्रतिशत तक सीमित रह सकती है। रिपोर्ट में खाड़ी देशों से आने वाले प्रेषण (यानी भेजे जाने वाले पैसे) पर भी जोखिम जताया गया है। भारत को वित्त वर्ष 2025 में लगभग 138 अरब डॉलर का व्यक्तिगत प्रेषण प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2024 के 119 अरब डॉलर से अधिक है। इनमें से करीब 38 प्रतिशत राशि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों से आती है, इसलिए क्षेत्र की आर्थिक स्थिति का इस पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया के साथ व्यापार हो सकता है प्रभावित
इसके अलावा भारत का पश्चिम एशिया के साथ व्यापार भी प्रभावित हो सकता है। GCC देश भारत के कुल निर्यात का 13 प्रतिशत से अधिक और आयात का 16 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रखते हैं। वहीं अन्य पश्चिम एशियाई देशों का निर्यात में करीब 2 प्रतिशत और आयात में लगभग 4 प्रतिशत हिस्सा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय बैंकों और निजी कंपनियों का भी इस क्षेत्र में निवेश और कारोबार है, जिससे तनाव बढ़ने की स्थिति में वित्तीय जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने ऊर्जा आपूर्ति के जोखिम को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। देश अब 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है और 2022 के बाद रूस से आयात में भी बढ़ोतरी हुई है। साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप और ओपन मार्केट ऑपरेशंस जैसे कदमों से रुपये में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने और वित्तीय बाजारों को स्थिर बनाए रखने में मदद मिली है।
नौकरी पाने के डर से महिलाएं इंटरव्यू में छिपाती हैं शादी-मातृत्व की योजना
7 Mar, 2026 02:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कार्यस्थल में महिलाओं के लिए चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। लगभग 50 प्रतिशत महिलाओं ने बताया कि वे नौकरी के इंटरव्यू के दौरान शादी या मातृत्व से जुड़ी अपनी निजी योजनाओं को छिपाती हैं, क्योंकि उन्हें पक्षपात का डर होता है। अनुभव के साथ यह झिझक और बढ़ जाती है। जहां फ्रेशर्स में यह आंकड़ा 29 प्रतिशत है, वहीं 10 से 15 साल के अनुभव वाली महिलाओं में यह 40 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। यह जानकारी पोर्टल Naukri.com की ओर से जारी रिपोर्ट 'व्हाट वुमन प्रोफेशनल्स वांट' में सामने आई है। यह रिपोर्ट देश के 50 से अधिक उद्योगों में काम कर रही करीब 50,000 महिलाओं पर किए गए सर्वे के आधार पर तैयार की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यस्थल पर भर्ती और प्रमोशन में पक्षपात विविध पृष्ठभूमि की महिलाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। करीब 42 प्रतिशत महिलाओं ने इसे प्रमुख समस्या बताया। चेन्नई (44 प्रतिशत) और दिल्ली-एनसीआर (43 प्रतिशत) जैसे महानगरों में भी यही रुझान देखने को मिला। इन चुनौतियों के बावजूद, सर्वे में शामिल 83 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि उन्हें नेतृत्व की भूमिकाओं में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिलता है, जो पिछले साल के 66 प्रतिशत के मुकाबले काफी अधिक है।
कार्यस्थलों में वेतन को लेकर क्या है स्थिति?
वहीं देश में विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही 67 प्रतिशत महिलाओं का मानना है कि उनके कार्यस्थलों पर वेतन समानता मौजूद है।
रिपोर्ट के अनुसार, रियल एस्टेट सेक्टर में सबसे अधिक महिलाओं (42 प्रतिशत) ने माना कि उनके कार्यस्थल पर वेतन समानता है।
इसके बाद एफएमसीजी (38 प्रतिशत), फार्मास्यूटिकल और लाइफ साइंसेज (38 प्रतिशत) व ऑटोमोबाइल सेक्टर (37 प्रतिशत) का स्थान रहा।
इसके अलावा रिटेल (35 प्रतिशत), होटल और रेस्टोरेंट (35 प्रतिशत), आईटी सर्विसेज और कंसल्टिंग (34 प्रतिशत), टेलीकॉम/आईएसपी (34 प्रतिशत), मेडिकल सर्विसेज/अस्पताल (33 प्रतिशत) और ऑयल एंड गैस (33 प्रतिशत) क्षेत्रों की महिलाओं ने भी कार्यस्थलों पर वेतन समानता होने की बात कही।
वेतन ऑडिट और मेंस्ट्रुअल लीव को लेकर क्या है मांग?
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि समान वेतन ऑडिट और मेंस्ट्रुअल लीव की मांग बढ़ रही है। इस तरह की मांग पिछले साल के 19 प्रतिशत से बढ़कर 27 प्रतिशत तक पहुंच गई है। खास तौर पर अधिक वेतन पाने वाली महिलाओं (48 प्रतिशत) के बीच यह मांग सबसे ज्यादा देखी गई। इंफो एज इंडिया ग्रुप के ग्रुप सीएमओ सुमीत सिंह ने कहा कि इस रिपोर्ट का हर आंकड़ा एक महत्वाकांक्षी महिला की कहानी बताता है। उन्होंने कहा कि जहां 83 प्रतिशत महिलाओं का नेतृत्व के लिए प्रोत्साहित होना सकारात्मक संकेत है, वहीं इंटरव्यू में आधी महिलाओं का शादी या मातृत्व की योजनाएं छिपाना यह दर्शाता है कि अभी भी काफी काम बाकी है।
एमिरेट्स ने अचानक निलंबित की फ्लाइट सेवाएं, एयरपोर्ट न आने की अपील
7 Mar, 2026 01:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुबई स्थित अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन एमिरेट्स ने शनिवार को घोषणा की कि दुबई से आने-जाने वाली उसकी सभी उड़ानों को अगली सूचना तक निलंबित कर दिया गया है। एयरलाइन ने यात्रियों से अपील की है कि जब तक संचालन दोबारा शुरू होने की आधिकारिक जानकारी नहीं दी जाती, तब तक वे एयरपोर्ट की ओर यात्रा न करें।
एयरलाइन ने क्या बताया?
एयरलाइन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि स्थिति सामान्य होने और अधिक जानकारी उपलब्ध होने पर आगे के अपडेट साझा किए जाएंगे। कंपनी ने स्पष्ट किया कि यात्रियों और क्रू सदस्यों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। साथ ही एयरलाइन ने इस असुविधा के दौरान यात्रियों से धैर्य और सहयोग बनाए रखने के लिए धन्यवाद भी दिया।
यात्रियों के लिए क्या विकल्प?
एमिरेट्स ने बताया कि 28 फरवरी से 31 मार्च के बीच जिन यात्रियों की बुकिंग है, उन्हें लचीले यात्रा विकल्प दिए जाएंगे।
ऐसे यात्री 30 अप्रैल तक अपनी यात्रा के लिए किसी वैकल्पिक उड़ान में बिना अतिरिक्त शुल्क के दोबारा बुकिंग करा सकते हैं।
वहीं जिन यात्रियों ने टिकट ट्रैवल एजेंट के माध्यम से बुक किए हैं, उन्हें अपने एजेंट से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
सीधे एयरलाइन से टिकट बुक करने वाले यात्री एमिरेट्स के सपोर्ट चैनलों के जरिए मदद ले सकते हैं।
अगर यात्री चाहें तो वे रिफंड फॉर्म भरकर टिकट की राशि वापस लेने का विकल्प भी चुन सकते हैं।
एयरलाइन के सभी चेक-इन काउंटर फिलहाल अस्थायी रूप से बंद
एयरलाइन ने यह भी जानकारी दी कि दुबई में उसके सभी सिटी चेक-इन काउंटर फिलहाल अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। यात्रियों से कहा गया है कि वे अपनी बुकिंग प्रोफाइल में संपर्क विवरण अपडेट रखें, ताकि संचालन से जुड़ी ताजा जानकारी उन्हें समय-समय पर मिलती रहे। एमिरेट्स ने कहा कि जैसे-जैसे स्थिति विकसित होगी, वह अपने आधिकारिक चैनलों के माध्यम से आगे की जानकारी साझा करता रहेगा।
दुबई एयरपोर्ट के ऊपर धमाके की आवाज
दरअसल दुबई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के ऊपर एक जोरदार धमाके की आवाज सुनी गई, जिसके बाद आसमान में धुएं का गुबार दिखाई दिया। यह घटना ऐसे समय हुई है जब ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र में हमलों का दबाव बढ़ा हुआ है।
RBI की बड़ी योजना, सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी से जुटाए जाएंगे 45,960 करोड़ रुपये
7 Mar, 2026 01:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय रिजर्व बैंक ने घोषणा की है कि कई राज्य सरकारें 10 मार्च 2026 को होने वाली नीलामी के जरिए कुल 45,960 करोड़ रुपये जुटाएंगी। यह राशि राज्य सरकारी प्रतिभूतियों (SGS) की नीलामी के माध्यम से जुटाई जाएगी। इसे आरबीआई के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म पर आयोजित किया जाएगा।आरबीआई के अनुसार इस नीलामी में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अलग-अलग अवधि की प्रतिभूतियां जारी की जाएंगी। इनमें नई प्रतिभूतियों के साथ-साथ पहले जारी किए गए बॉन्ड की री-इश्यू भी शामिल होगी।
कौन-कौन से राज्य हो रहें शामिल?
आंध्र प्रदेश 13, 15 और 17 वर्षों की अवधि वाली तीन प्रतिभूतियों के माध्यम से 3,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रहा है।
अरुणाचल प्रदेश 20 वर्षों की अवधि के साथ 190 करोड़ रुपये जुटाएगा।
असम 15 वर्षों की प्रतिभूति के माध्यम से 900 करोड़ रुपये उधार लेगा।
दिल्ली 10 वर्षों की प्रतिभूति के माध्यम से 1,000 करोड़ रुपये जुटाएगा।
गुजरात सात साल छह महीने और ग्यारह साल की अवधि के दो प्रतिभूतियों के माध्यम से 2,000 करोड़ रुपये जुटाने का इरादा रखता है, जिसमें प्रत्येक के लिए 500 करोड़ रुपये के अतिरिक्त उधार का विकल्प भी शामिल है।
हरियाणा चार, बारह और अठारह साल की अवधि में 3,000 करोड़ रुपये मूल्य की प्रतिभूतियां जारी करेगा।
जम्मू और कश्मीर पंद्रह साल की अवधि के लिए 900 करोड़ रुपये उधार लेगा।
यह राज्य बना सबसे बड़ा उधारकर्ता
कर्नाटक इस नीलामी में सबसे बड़ा उधारकर्ता होगा, जो नए शेयरों और मौजूदा शेयरों के पुनर्निर्धारण के माध्यम से 10,000 करोड़ रुपये जुटाएगा। इनमें 7.31 प्रतिशत ब्याज दर वाले कर्नाटक एसजीएस 2033, 7.38 प्रतिशत ब्याज दर वाले कर्नाटक एसजीएस 2034 और 7.48 प्रतिशत ब्याज दर वाले कर्नाटक एसजीएस 2037 के पुनर्निर्धारण के साथ-साथ 10 वर्ष छह महीने और 14 वर्ष की अवधि वाले अन्य शेयर शामिल हैं।
केरल, जो 23 साल की अवधि के लिए प्रतिभूति के माध्यम से 1,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रहा है।
मध्य प्रदेश, जो 10, 14 और 21 साल की अवधि की प्रतिभूतियों के माध्यम से 5,800 करोड़ रुपये उधार लेगा।
छोटे निर्गमों में मिजोरम द्वारा 15 साल की अवधि के लिए 120 करोड़ रुपये और सिक्किम द्वारा 10 साल की अवधि के लिए 250 करोड़ रुपये शामिल हैं।
पंजाब नवंबर 2022 में जारी किए गए 7.62 प्रतिशत पंजाब एसजीएस 2032 के पुन: निर्गमन के माध्यम से 2,000 करोड़ रुपये जुटाएगा।
तमिलनाडु ने नए निर्गमन और पुन: निर्गमन प्रतिभूतियों के संयोजन के माध्यम से 8,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई है, जिसमें 7.23 प्रतिशत तमिलनाडु एसजीएस 2033 और 7.63 प्रतिशत तमिलनाडु एसजीएस 2056 शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, त्रिपुरा 15 साल की अवधि के लिए प्रतिभूति जारी करके 800 करोड़ रुपये जुटाएगा।
उत्तर प्रदेश 2037, 2041 और 2046 में परिपक्व होने वाली प्रतिभूतियों को पुनः जारी करके 3,500 करोड़ रुपये जुटाएगा।
पश्चिम बंगाल 18 और 22 साल की अवधि वाली प्रतिभूतियों के माध्यम से 3,500 करोड़ रुपये उधार लेने की योजना बना रहा है।
यहां जानें पूरी समय सारणी
आरबीआई ने बताया कि नीलामी के लिए प्रतिस्पर्धी और गैर-प्रतिस्पर्धी दोनों तरह की बोलियां 10 मार्च को सुबह 10:30 से 11:30 बजे के बीच ई-कुबेर प्रणाली पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से जमा की जाएंगी। गैर-प्रतिस्पर्धी बोलियों के लिए समय 10:30 से 11:00 बजे तक होगा।
नीलामी के नतीजे 10 मार्च को घोषित किए जाएंगे, जबकि सफल बोलीदाताओं को भुगतान 11 मार्च 2026 को बैंकिंग समय के दौरान करना होगा। आरबीआई के अनुसार प्रत्येक प्रतिभूति की कुल राशि का 10 प्रतिशत हिस्सा गैर-प्रतिस्पर्धी बोलीदाताओं के लिए आरक्षित रहेगा और खुदरा निवेशक आरबीआई रिटेल डायरेक्ट पोर्टल के माध्यम से भी इसमें भाग ले सकते हैं।
निर्यातकों को राहत देने के लिए सरकार अपनाएगी सभी नीतिगत विकल्प: पीयूष गोयल
6 Mar, 2026 04:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच भारत सरकार घरेलू निर्यातकों को राहत देने के लिए सभी नीतिगत उपाय और समर्थन तंत्र का इस्तेमाल करेगी। उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को यह भरोसा दिलाया।उन्होंने बताया कि निर्यात से जुड़ी समस्याओं की रोजाना समीक्षा के लिए सरकार ने एक अंतर-मंत्रालयी समूह बनाया है। यह समूह निर्यातकों से नियमित रूप से बातचीत कर उनकी समस्याओं और फीडबैक को समझ रहा है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव को लेकर क्या बोले गोयल?
मंत्री ने कहा कि सरकार जल्द ही ऐसे उपायों को औपचारिक रूप देगी, जिससे निर्यातकों को राहत और भरोसा मिल सके। पश्चिम एशिया में हालिया घटनाओं और अमेरिका व इस्राइल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमले के बाद उस क्षेत्र में माल भेजने में निर्यातकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।गोयल ने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय इस मुद्दे पर शिपिंग मंत्रालय और शिपिंग कंपनियों के साथ भी लगातार बातचीत कर रहा है, ताकि निर्यातकों की समस्याओं का समाधान निकाला जा सके। बढ़ते फ्रेट चार्ज के मुद्दे पर भी सरकार विकल्प तलाश रही है, जिससे निर्यातकों पर पड़ने वाला बोझ कम किया जा सके।
फ्रेट चार्ज क्या है?
दरअसल फ्रेट चार्ज वह शुल्क होता है, जो माल या सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए लिया जाता है। यह भुगतान परिवहन सेवा देने वाली कंपनी जैसे शिपिंग कंपनी, ट्रक ऑपरेटर, रेल या एयर कार्गो को किया जाता है।उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत अपने विदेशी खरीदारों के साथ किए गए सभी वादों को पूरा करता रहेगा। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान भी भारत ने अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को निभाया था, जिससे देश की पहचान एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में बनी।
इनविजिबल क्रिएटर्स के लिए फ्रेंड्स स्टूडियोज के किफायती पैकेज लॉन्च
6 Mar, 2026 03:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Friends Media PR की वीडियो प्रोडक्शन ब्रांच Friends Studios ने “इनविज़िबल क्रिएटर्स” को एम्पावर करने के लिए स्पेशल और किफायती पैकेज लॉन्च किए हैं। यह स्टूडियो नोएडा के प्रीमियम लोकेशन Wave One Building की 25वीं मंज़िल पर स्थित है, जो इसकी सबसे बड़ी यूएसपी मानी जा रही है।100 से अधिक नेशनल और रीजनल न्यूज़ चैनलों के साथ पार्टनरशिप रखने वाली फ्रेंड्स मीडिया ने अपने मल्टीमीडिया विंग को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से इस स्टूडियो की शुरुआत की है।
“हम सब में एक कंटेंट क्रिएटर है”
एजेंसी के को-फाउंडर और जर्नलिस्ट अमन द्विवेदी कहते हैं: “आज हर कोई कंटेंट क्रिएटर है — मैं, आप, कोई स्टार्टअप फाउंडर या एक नॉर्मल ऑफिस गोअर। व्लॉगिंग अब लाइफस्टाइल बन चुकी है। हम वीडियो और कंटेंट क्रिएशन को इंटेलिजेंट इंडियन के जीवन का एक अहम हिस्सा मानते हैं। हमने प्राइसिंग बहुत ही किफायती रखी है ताकि बिज़नेस लीडर्स, चेंजमेकर्स और पॉलिसी मेकर्स जैसे सोचने-समझने वाले लोग हमारे साथ जुड़ सकें। हमारा फोकस सिर्फ वायरलिटी के पीछे भागने वाले टिपिकल क्रिएटर्स पर नहीं है। हम उस ‘इनविज़िबल क्रिएटर’ को ढूंढ रहे हैं जिसके पास बिना फिल्टर के बहुत कुछ कहने को है।”
10 स्लॉट्स के लिए ₹25,000
फ्रेंड्स मीडिया के मल्टीमीडिया विंग के हेड प्रशांत सिंह के अनुसार: “हमने 10 स्लॉट्स के लिए ₹25,000 का सपोर्ट अमाउंट रखा है। 10 स्लॉट्स इसलिए ताकि मेंबरशिप लेने वाले लोग अपनी कमिटमेंट दिखाएं। हमारे लिए पैसे से ज़्यादा आइडिया मायने रखते हैं। हम चाहते हैं कि बुद्धिजीवी लोग हमारे पास आएं, बैठें, कॉफी पिएं, सोचें और खुद को एक्सप्रेस करें।” उनके मुताबिक, पॉडकास्ट करना, कैमरे के सामने आना और अपने विचार शेयर करना पर्सनैलिटी डेवलपमेंट में मदद करता है। यह जिम जाने जैसा है — दिमाग और विचारों को रिफ्रेश करने का तरीका। जब आप 10 एपिसोड शूट करेंगे, तो आपको खुद फर्क महसूस होगा। लोग आपको नए नजरिए से देखने लगेंगे।”
“बहुत मज़ा आ रहा है”
फ्रेंड्स मीडिया की बिज़नेस हेड अनुष्का शर्मा कहती हैं: “पूरा स्टूडियो इनिशिएटिव बहुत एक्साइटिंग रहा है। हमें अंदाजा नहीं था कि लोग व्लॉगिंग को इतना एंजॉय करते हैं। ज़्यादातर लोग सिर्फ अपने दिल की बात कहकर ही फुलफिल्ड महसूस करते हैं। इसका एक इंडायरेक्ट आरओआई भी है। यह पूरा प्रोसेस लोगों के पर्सनल और प्रोफेशनल प्रोफाइल को मजबूत बनाता है। कई लोग वायरल भी हो रहे हैं। लेकिन असली आरओआई है — खुद से बात करना, दुनिया से पहले।”
क्वालिटी बनाए रखने के लिए लिमिटेड ऑनबोर्डिंग
एवीपी, बिज़नेस डेवलपमेंट, एवांशा गोयल के अनुसार: “हमने क्वालिटी को प्राथमिकता देने के लिए सिर्फ 100 क्रिएटर्स को ऑनबोर्ड करने का फैसला किया है। हमारी टीम की बैंडविड्थ फिलहाल उतनी ही है। हम लाइटिंग, एडिटिंग, साउंड और पोस्ट-प्रोडक्शन एक्सपीरियंस जैसी छोटी-छोटी चीज़ों पर खास ध्यान देते हैं। हमारा पीआर विंग वर्ड ऑफ माउथ से ग्रो हुआ क्योंकि हमने सही प्राइस पर बेस्ट वैल्यू दी। हम वही मॉडल यहां भी फॉलो करना चाहते हैं।”
अनिल अंबानी से जुड़े धन शोधन मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, मुंबई-हैदराबाद में छापेमारी, जानें पूरा मामला
6 Mar, 2026 12:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रवर्तन निदेशालय ने शुक्रवार को उद्योगपति अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस पावर लिमिटेड से जुड़े धन शोधन मामले में मुंबई और हैदराबाद में कई ठिकानों पर छापेमारी की। अधिकारियों के मुताबिक एजेंसी की करीब 15 टीमें इस कार्रवाई में लगी हैं और कंपनी व उसके अधिकारियों से जुड़े लगभग 10 से 12 स्थानों की तलाशी ली जा रही है।
किस मामले को लेकर हो रही है जांच?
ईडी की यह जांच उद्योगपति अनिल अंबानी से जुड़ी कई कंपनियों के खिलाफ कथित बैंक लोन फ्रॉड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर चल रही है। सूत्रों के मुताबिक, 66 वर्षीय अनिल अंबानी से इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून के तहत पहले भी दो बार पूछताछ की जा चुकी है।
इस मामले की जांच के लिए ईडी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। एजेंसी ने शीर्ष अदालत को दी जानकारी में बताया है कि अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG) से जुड़े बैंक लोन फ्रॉड और अन्य वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए अब तक तीन मनी लॉन्ड्रिंग मामले दर्ज किए गए हैं।
'कृषि क्षेत्र के निर्यात को बढ़ाना जरूरी', पीएम मोदी ने किसान योजना का किया जिक्र
6 Mar, 2026 12:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीसरे पोस्ट बजट वेबिनार में कहा कि कृषि भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा का एक रणनीतिक स्तंभ है। इसे अधिक प्रतिस्पर्धी व निर्यात उन्मुख बनाने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार ने पीएम किसान योजना के तहत अब तक किसानों को 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की है। उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं ने किसानों के जोखिम को कम किया है और उन्हें बुनियादी आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। मोदी ने कहा कि भारत की विविध जलवायु का लाभ उठाते हुए कृषि क्षेत्र को निर्यात उन्मुख बनाना जरूरी है। इसके साथ ही उच्च मूल्य वाली कृषि को बढ़ावा देने, कृषि उत्पादों की गुणवत्ता, ब्रांडिंग और मानकों को मजबूत करने पर भी जोर दिया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने रासायनिक मुक्त और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी खेती को मजबूत करते हुए कृषि निर्यात को बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
Iran युद्ध के बीच राहत: United States ने India को Russia से तेल खरीदने की 30 दिन की अनुमति दी
6 Mar, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल के युद्ध छेड़ने के बाद भारत समेत दुनिया भर में ईंधन और ऊर्जा की सप्लाई पर प्रभाव पड़ने की संभावना है. इस बीच, अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि अमेरिका ने 30 दिन की अस्थायी छूट जारी की है, जिससे भारतीय तेल रिफाइनर अभी समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल को खरीद सकें. उन्होंने इस कदम को मिडिल ईस्ट संघर्ष से जुड़ी रुकावटों के बीच ग्लोबल तेल सप्लाई को चालू रखने के लिए एक शॉर्ट-टर्म उपाय बताया.
बेसेंट ने एक्स पोस्ट में साझा किए गए एक बयान में कहा, "ग्लोबल मार्केट में तेल का प्रवाह जारी रखने के लिए, वित्त विभाग भारतीय रिफाइनर कंपनियों को रूसी तेल खरीदने की इजाजत देने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट जारी कर रहा है. जानबूझकर उठाए गए इस अल्पकालीन उपाय से रूसी सरकार को कोई खास वित्तीय फायदा नहीं होगा क्योंकि यह सिर्फ उन तेल से जुड़े ट्रांजैक्शन को ही मंजूरी देता है जो पहले से समुद्र में फंसे हुए हैं.
बेसेंट ने इस छूट को एक कामचलाऊ कदम बताया और इशारा किया कि अमेरिका उम्मीद करता है कि भारत और अधिक अमेरिकी कच्चा तेल खरीदेगा. उन्होंने कहा, "भारत अमेरिका का एक अहम पार्टनर है, और हमें पूरी उम्मीद है कि नई दिल्ली अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगा. यह कामचलाऊ कदम ईरान की ग्लोबल एनर्जी को बंधक बनाने की कोशिश से पैदा हुए दबाव को कम करेगा."
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रिफाइनर कंपनियों ने मिडिल ईस्ट में संकट के बीच दूसरी सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए जल्दी डिलीवरी के लिए लाखों बैरल रूसी कच्चा तेल खरीदना शुरू कर दिया है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि भारत की सरकारी रिफाइनर कंपनियां मार्च और अप्रैल की शुरुआत में भारतीय पोर्ट पर आने वाले रूसी कार्गो के लिए ट्रेडर्स से बातचीत कर रही हैं. सूत्रों ने बताया कि भारतीय रिफाइनर कंपनियां पहले ही ट्रेडर्स से लगभग 20 मिलियन बैरल रूसी तेल खरीद चुकी हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेडर्स अभी भारतीय खरीदारों को रूस का यूराल्स क्रूड ऑयल (Urals Crude) डिलीवर होने पर ब्रेंट क्रूड के मुकाबले $4–$5 प्रति बैरल प्रीमियम पर दे रहे हैं, जो कम उपलब्धता को दिखाता है. ट्रेडर्स ने बताया कि यह फरवरी से एक बड़ा बदलाव है, जब इसी तरह के कार्गो लगभग $13 प्रति बैरल के डिस्काउंट पर ट्रेड हो रहे थे. 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने से पहले, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने उस डिस्काउंटेड कीमत पर दो कार्गो खरीदे थे.
भारत को रूसी तेल बेचने वाले एक ट्रेडर ने रॉयटर्स को बताया, "भारतीय रिफाइनर कंपनियां मार्केट में वापस आ गए हैं... आजकल कीमतों से ज्यादा, तेल की उपलब्धता एक मुद्दा है."
शहबाज सरकार के तेल भंडार पर बड़े-बड़े दावों की खुली पोल, डीलर्स बोले- बचा सिर्फ 14 दिनों का स्टॉक
6 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान में पेट्रोलियम उत्पादों के भंडार को लेकर नया विवाद सामने आया है। पाकिस्तान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (PPDA) ने ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (OGRA) के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि देश में पेट्रोलियम भंडार को लेकर जनता को गुमराह किया जा रहा है।
कितने दिनों का बचा है स्टॉक?
पीपीडीए के चेयरमैन अब्दुल सामी खान ने कहा कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक केवल 14 दिनों के लिए ही पर्याप्त है, जो ओजीआरए के दावों से बिल्कुल अलग है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आपूर्ति में बाधा जारी रही तो देशभर के पेट्रोल पंपों पर स्थिति और गंभीर हो सकती है।
डीलर्स एसोशिएशन ने क्या बताया?
डीलर्स एसोसिएशन ने यह भी कहा कि अगर हालात में सुधार नहीं हुआ तो पूरे पाकिस्तान में पेट्रोल पंप बंद करने की नौबत आ सकती है। अब्दुल सामी खान के मुताबिक ईरान से पेट्रोल और डीजल के आयात पर रोक लगने से तेल विपणन कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। इसके साथ ही पेट्रोलियम उत्पादों के वितरण के लिए लागू कोटा प्रणाली ने भी आपूर्ति संबंधी समस्याओं को और बढ़ा दिया है। हालांकि OGRA ने लोगों से घबराने से बचने की अपील की है। प्राधिकरण का कहना है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार मौजूद है और लोगों को अनावश्यक रूप से ईंधन की खरीदारी नहीं करनी चाहिए।
पेट्रोलियम डीलरों ने सुरक्षा उपलब्ध करना की मांग की
संभावित संकट को देखते हुए पेट्रोलियम डीलरों ने सिंध के पुलिस महानिरीक्षक (IG) से पेट्रोल पंपों को सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था से बचा जा सके और संचालन सामान्य बना रहे।
ओएमएपी ने किस बात की आशंका जताई?
इसी बीच ऑयल मार्केटिंग एसोसिएशन ऑफ पाकिस्तान (OMAP) ने भी देशभर में ईंधन आपूर्ति बाधित होने की आशंका जताई है। लाहौर से जारी एक पत्र में OMAP ने कहा कि स्थानीय रिफाइनरियां पहले से तय आपूर्ति प्रतिबद्धताओं से पीछे हट रही हैं। एसोसिएशन के अनुसार, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने अपनी आपूर्ति योजना इस भरोसे पर बनाई थी कि घरेलू रिफाइनरियां प्रोडक्ट रिव्यू बैठक में तय मात्रा के अनुसार पेट्रोलियम उत्पाद उपलब्ध कराएंगी। लेकिन रिफाइनरियों ने उस प्रतिबद्धता के अनुसार आपूर्ति नहीं की।
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने खोली पोल
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के समूह के चेयरमैन तारिक वजीर अली ने कहा कि कई कंपनियों ने आयातित कार्गो की व्यवस्था नहीं की, क्योंकि उन्हें भरोसा दिया गया था कि स्थानीय रिफाइनरियां मांग पूरी कर देंगी। हालांकि बाद में रिफाइनरियों ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों से बिना समन्वय किए पेट्रोलियम उत्पादों के वितरण की नई व्यवस्था लागू कर दी। नई प्रणाली के तहत कंपनियों को अपेक्षा से काफी कम मात्रा में पेट्रोलियम उत्पाद मिल रहे हैं। OMAP ने चेतावनी दी है कि फिलहाल वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत भी आसानी से उपलब्ध नहीं हैं, जिससे बाजार में ईंधन की स्थिर उपलब्धता बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
एसबीआई का मेगा भर्ती अभियान, चेयरमैन बोले- हर साल 16000 नए कर्मचारियों को जोड़ने का लक्ष्य
5 Mar, 2026 01:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने देशभर में अपनी ब्रांच बैंकिंग सेवाओं और ग्राहक अनुभव को मजबूत करने के लिए एक बड़े भर्ती अभियान की घोषणा की है। बैंक ने हाल ही में 5,783 जूनियर एसोसिएट्स की नियुक्ति की है। यह रणनीतिक कदम बैंक के उस बड़े विजन का हिस्सा है, जिसके तहत अगले पांच से छह वर्षों में कुल कारोबार को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं।
एसबीआई ने हाल ही में कितने कर्मचारियों की नियुक्ति की है?
एसबीआई ने देशभर के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 5,783 जूनियर एसोसिएट्स की नियुक्ति की है। अगर चालू वित्त वर्ष के समग्र आंकड़ों की बात करें, तो बैंक ने विभिन्न भूमिकाओं और ग्रेड में 18,000 से अधिक नए कर्मचारियों को अपने साथ जोड़ा है, जो हाल के वर्षों में बैंक के सबसे बड़े और व्यापक टैलेंट इंडक्शन ड्राइव (प्रतिभा चयन अभियान) में से एक है।
इस भर्ती प्रक्रिया में कितनी प्रतिस्पर्धा थी और चयन कैसे हुआ?
इस भर्ती के लिए उम्मीदवारों के बीच भारी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। कुल 9,00,771 उम्मीदवारों ने इन पदों के लिए आवेदन किया था। चयन प्रक्रिया के तहत, सितंबर 2025 में हुई प्रारंभिक परीक्षा के आधार पर 1,20,006 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया, जिन्होंने नवंबर 2025 में आयोजित मुख्य परीक्षा में हिस्सा लिया था।
भविष्य में रोजगार सृजन को लेकर बैंक की क्या योजनाएं हैं?
एसबीआई के चेयरमैन चल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी ने स्पष्ट किया है कि बैंक अपनी विकास यात्रा को शक्ति प्रदान करने के लिए हर साल लगभग 16,000 कर्मचारियों को नियुक्त करने का इरादा रखता है। इसका मुख्य उद्देश्य एक 'भविष्य के लिए तैयार' और डिजिटल रूप से कुशल कार्यबल का निर्माण करना है।
इन नई नियुक्तियों के पीछे बैंक का मुख्य व्यावसायिक उद्देश्य क्या है?
इस बड़े पैमाने की भर्ती का मुख्य फोकस बैंक की फ्रंटलाइन क्षमताओं को मजबूत करना और राष्ट्रव्यापी स्तर पर ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाना है। चेयरमैन के अनुसार, नई प्रतिभाओं को शामिल करने की यह पहल बैंक की उस निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत ग्राहकों को तकनीक-आधारित, भरोसेमंद और सुसंगत बैंकिंग अनुभव प्रदान किया जाना है।
कारोबार विस्तार के लिहाज से एसबीआई का अगला वित्तीय लक्ष्य क्या है?
जवाब: एसबीआई अपने कारोबार का विस्तार करने के लिए एक स्पष्ट और आक्रामक रणनीति पर काम कर रहा है। बैंक का लक्ष्य अगले पांच से छह वर्षों के भीतर अपने कुल कारोबार को दोगुना करके 200 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। इसी महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए बैंक नियमित रूप से बड़े पैमाने पर कार्यबल का विस्तार कर रहा है।कुल मिलाकर, एसबीआई का यह बड़े पैमाने पर भर्ती अभियान केवल नए रोजगार पैदा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बैंक की दूरगामी रणनीतिक और विस्तार योजना का एक अहम हिस्सा है। अपने व्यापक शाखा नेटवर्क के माध्यम से ग्राहकों को उच्च स्तरीय सेवाएं देने और अगली पीढ़ी के बैंकिंग पेशेवरों को तैयार करने के लिए एसबीआई लगातार अपने कार्यबल को मजबूत कर रहा है। यह कदम भारतीय बैंकिंग सेक्टर की मजबूती और रोजगार बाजार, दोनों के लिए एक बेहद सकारात्मक संकेत है।
पश्चिम एशिया संघर्ष लंबा खिंचा तो क्या होगा? इस रिपोर्ट ने जताई ऐसी आशंका
5 Mar, 2026 12:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम एशिया में जारी तनाव का वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों पर असर पड़ सकता है। मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार अगर यह संघर्ष कई सप्ताह तक जारी रहता है तो आर्थिक और बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है।
संघर्ष की अवधि क्यों महत्वपूर्ण है?
रिपोर्ट में कहा गया है कि संघर्ष की अवधि इसका सबसे महत्वपूर्ण कारक होगी। अगर टकराव सीमित और कम समय का रहता है तो आर्थिक असर सीमित रह सकता है, लेकिन लंबा खिंचने पर तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, महंगाई और वित्तीय अनिश्चितता का दबाव बढ़ सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यह सैन्य कार्रवाई चार से पांच सप्ताह तक चल सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक तेल की कीमतें महंगाई के रुझान तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
आपूर्ति झटके के कारण अगर तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है तो अगले तीन महीनों में अमेरिका में उपभोक्ता महंगाई दर लगभग 0.35 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
ऊर्जा कीमतें जितनी अधिक समय तक ऊंची रहेंगी, महंगाई का दबाव उतना ही बढ़ सकता है।
निवेशक इस समय किस ओर रुख कर रहे?
भू-राजनैतिक तनाव के समय निवेशक अक्सर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हो सकता है और इससे महंगाई के कुछ दबाव को कम किया जा सकता है। हालांकि तेल महंगा होने से उपभोक्ता खर्च पर भी असर पड़ सकता है क्योंकि लोगों को पेट्रोल-डीजल पर अधिक खर्च करना पड़ेगा।
अमेरिकी की घरेलू राजनीति पर कैसे पड़ेगा असर?
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह संघर्ष अमेरिका की घरेलू राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है, खासकर आगामी मध्यावधि चुनावों से पहले जब महंगाई और जीवनयापन की लागत बड़ा मुद्दा बनी हुई है। अगर संघर्ष लंबा चलता है तो बढ़ती कीमतें राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बन सकती हैं।
ट्रंप ने रक्षा बजट का प्रस्ताव कितना रखा?
मॉर्गन स्टेनली के अनुसार अमेरिका की बढ़ती सैन्य भागीदारी से रक्षा खर्च में भी बढ़ोतरी हो सकती है। राष्ट्रपति ट्रंप ने करीब 1.5 ट्रिलियन डॉलर के रक्षा बजट का प्रस्ताव रखा है, जो मौजूदा बजट से लगभग 50 प्रतिशत अधिक है और कोरियाई युद्ध के बाद का सबसे बड़ा स्तर होगा। इससे पहले से ऊंचे सरकारी कर्ज और बजट घाटे पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
पिछले युद्धों में कैसा रहा है बाजार का हाल?
इतिहास बताता है कि युद्ध के दौरान भी बाजार कभी-कभी बढ़त दर्ज करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक खाड़ी युद्धों के बाद तीन से छह महीनों में शेयर बाजारों में दो अंकों की बढ़त देखी गई थी, जिसमें रक्षा क्षेत्र की कंपनियों के शेयर प्रमुख रहे। हालांकि अगर ईरान पर दबाव बना रहता है तो तेल की कीमतें ऊंची रह सकती हैं।रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भू-राजनीतिक जोखिम अब वैश्विक बाजारों के लिए अस्थायी झटका नहीं बल्कि स्थायी कारक बनता जा रहा है। ऐसे में निवेशकों को निवेश रणनीति बनाते समय क्षेत्रीय संघर्षों और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखना होगा।
इस संघर्ष का भारत पर क्या असर?
इस तनाव का असर भारत पर भी दिखाई दे रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण भारतीय शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। बुधवार को बीएसई सेंसेक्स 1.4 प्रतिशत यानी 1,123 अंक गिरकर 79,116 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 1.6 प्रतिशत यानी 385 अंक गिरकर 24,480 पर आ गया।रिपोर्ट के अनुसार 2026 में निवेशकों के लिए रक्षा, सुरक्षा, एयरोस्पेस और औद्योगिक मजबूती से जुड़े क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने के अवसर बन सकते हैं, क्योंकि सरकारों का खर्च इन क्षेत्रों में दीर्घकालिक मांग को बढ़ा सकता है।
चीन ने अपना रक्षा बजट क्यों बढ़ाया? पड़ोसी देशों के लिए बढ़ रही चुनौती, जानिए सबकुछ
5 Mar, 2026 11:24 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चीन ने अपने राष्ट्रीय रक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि करते हुए इसे 275 अरब डॉलर तक पहुंचा दिया है। यह वृद्धि पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 25 अरब अमेरिकी डॉलर अधिक है, जो देश की सशस्त्र सेनाओं के आधुनिकीकरण की गति को दर्शाता है। चीनी प्रीमियर ली कियांग ने राष्ट्रीय जन कांग्रेस (एनपीसी) में प्रस्तुत अपनी कार्य रिपोर्ट में इस आवंटन की घोषणा की।
रक्षा खर्च बढ़ाने के बावजूद सीमित क्यों दिखाता है चीन?
रिपोर्ट के अनुसार, चीन का रक्षा खर्च कई प्रमुख मानकों के मुकाबले अभी भी अपेक्षाकृत सीमित माना जाता है। इसमें सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में रक्षा बजट की हिस्सेदारी, प्रति व्यक्ति रक्षा व्यय और प्रति सैनिक होने वाला रक्षा खर्च जैसे अहम संकेतक शामिल हैं, जिनके आधार पर चीन का सैन्य खर्च अन्य बड़े देशों की तुलना में अपेक्षाकृत कम दिखता है।
रक्षा खर्च में चीन ने पिछले वर्षों में कितनी वृद्धि की?
यह लगातार चौथा वर्ष है जब चीन ने अपने रक्षा बजट में वृद्धि की है। पिछले वर्ष, 2025 के लिए राष्ट्रीय रक्षा बजट में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी, जो 2024 की तुलना में 17 अरब अमेरिकी डॉलर की वृद्धि के साथ 249 अरब अमेरिकी डॉलर था। 2024 में, चीन ने अपने रक्षा बजट में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि कर इसे लगभग 232 अरब अमेरिकी डॉलर (1.67 ट्रिलियन युआन) तक बढ़ाया था, जो भारत के रक्षा बजट से तीन गुना से अधिक है।
भारत और पड़ोसी देशों पर क्या बढ़ रहा दबाव?
चीन का रक्षा व्यय, जो अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है, वर्षों से लगातार बढ़ रहा है। यह वृद्धि भारत और अन्य पड़ोसी देशों पर आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अपने रक्षा बजट को बढ़ाने का भारी दबाव डाल रही है। चीन की सैन्य आधुनिकीकरण की तेज गति, जिसमें विमानवाहक पोतों का निर्माण, उन्नत नौसैनिक जहाजों का तेजी से निर्माण और आधुनिक स्टील्थ विमानों का विकास शामिल है, पर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। इस बड़े पैमाने पर सैन्य आधुनिकीकरण को देखते हुए, चीन के रक्षा बजट के आंकड़ों पर संदेह व्यक्त किया जाता है।
चीन ने अपनी जीडीपी वृद्धि में बदलाव क्यों किया?
साथ ही चीन ने इस वर्ष के लिए अपने आर्थिक वृद्धि (GDP) का लक्ष्य घटाकर 4.5 से 5 प्रतिशत के बीच कर दिया है। यह फैसला अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापार शुल्क विवाद, अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद गहराते वैश्विक संकट और घरेलू अर्थव्यवस्था में आ रही चुनौतियों को देखते हुए लिया गया है।पिछले तीन वर्षों से चीन अपनी जीडीपी वृद्धि का लक्ष्य लगभग 5 प्रतिशत तय करता रहा है, लेकिन घरेलू आर्थिक दबाव जैसे रियल एस्टेट बाजार में गिरावट और बढ़ती बेरोजगारी के कारण इस बार पहली बार इसे घटाकर 4.5 से 5 प्रतिशत के दायरे में रखा गया है।
लिपुलेख दर्रा खुलने से सीमा व्यापार में लौटेगी रौनक, स्थानीय कारोबारियों में उत्साह
