व्यापार
शेयर बाजार में गिरावट का दौर, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में बंद
8 May, 2026 09:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव और बिकवाली का माहौल देखने को मिल रहा है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और बैंकिंग शेयरों में आई गिरावट के चलते घरेलू बेंचमार्क सूचकांक लाल निशान पर कारोबार कर रहे हैं। शुक्रवार सुबह बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई है।
बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट, रुपया भी रिकॉर्ड निचले स्तर पर
घरेलू शेयर बाजार पर चौतरफा दबाव दिख रहा है। पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी संघर्ष और विदेशी निवेशकों द्वारा पूंजी निकालने (FII Outflow) के चलते बाजार का मनोबल टूटा है।
प्रमुख सूचकांकों का ताजा हाल
शुरुआती सत्र में बाजार की स्थिति कुछ इस प्रकार रही:
बीएसई सेंसेक्स: लगभग 353.50 अंक टूटकर 77,491.02 के स्तर पर आ गया।
एनएसई निफ्टी: 109.25 अंक की गिरावट के साथ 24,225.20 पर पहुंच गया।
मुद्रा बाजार: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी 36 पैसे कमजोर होकर 94.58 के स्तर पर पहुंच गया है।
इन कारणों ने बिगाड़ा बाजार का मूड
भू-राजनीतिक तनाव: अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के पास हुई सैन्य हलचल ने अनिश्चितता बढ़ा दी है। निवेशकों को डर है कि यह टकराव वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
कच्चे तेल में उछाल: ब्रेंट क्रूड की कीमतें 1.19% बढ़कर 101.3 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई हैं, जो भारत जैसे आयात निर्भर देश के लिए चिंता का विषय है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली: एक्सचेंज डेटा के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने गुरुवार को 340.89 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों की बिक्री की।
दिग्गज शेयरों की स्थिति
बाजार में गिरावट का नेतृत्व प्रमुख बैंकिंग और ऑटोमोबाइल शेयरों ने किया:
दबाव वाले शेयर: महिंद्रा एंड महिंद्रा, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, बजाज फाइनेंस और टाटा स्टील के शेयरों में गिरावट देखी गई।
बढ़त वाले शेयर: भारी बिकवाली के बावजूद एशियन पेंट्स, टेक महिंद्रा, अदाणी पोर्ट्स और एचसीएल टेक जैसे शेयरों में मामूली खरीदारी देखी गई।
वैश्विक बाजारों का संकेत
केवल भारतीय बाजार ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी मंदी का साया है। अमेरिकी बाजारों के गिरावट के साथ बंद होने के बाद एशियाई बाजारों (जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंग सेंग और शंघाई कंपोजिट) में भी कमजोरी बनी हुई है।
RBI की पहल से निजी बैंकों की भूमिका और मजबूत, कारोबार में आएगी पारदर्शिता
8 May, 2026 07:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। भारतीय बैंकिंग सेक्टर में एक बड़े रणनीतिक बदलाव की शुरुआत हो गई है। अब निजी क्षेत्र के दिग्गज बैंक केवल बाजार हिस्सेदारी और मुनाफे की रेस तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एक-दूसरे के पूंजी ढांचे को मजबूती देने के लिए निवेश के नए रास्ते भी खोल रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा हाल ही में दी गई मंजूरियां इसी नई दिशा की ओर संकेत कर रही हैं।
बैंकिंग दिग्गजों का रणनीतिक निवेश: RBI ने दी हिस्सेदारी बढ़ाने की हरी झंडी
रिजर्व बैंक ने देश के दो प्रमुख बैंकिंग समूहों, HDFC बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक, को अन्य बैंकों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की विशेष अनुमति दे दी है। यह कदम बैंकिंग सेक्टर में आपसी सहयोग और वित्तीय स्थिरता को नई मजबूती प्रदान करेगा।
HDFC बैंक की ICICI और कोटक में भागीदारी
HDFC बैंक अपने समूह की विभिन्न कंपनियों (जैसे HDFC म्यूचुअल फंड, लाइफ, एर्गो, पेंशन फंड और सिक्योरिटीज) के साथ मिलकर अब ICICI बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक में 9.95% तक की हिस्सेदारी रख सकेगा।
कोटक महिंद्रा बैंक का विस्तार
इसी तर्ज पर, कोटक महिंद्रा बैंक को भी एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक और फेडरल बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 9.99% तक ले जाने की मंजूरी मिली है।
महत्वपूर्ण बिंदु: विशेषज्ञों का मानना है कि यह कोई अधिग्रहण की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि एक 'रणनीतिक निवेश' है। इससे मजबूत बैंकिंग समूहों को अपने ही क्षेत्र की बेहतरीन कंपनियों में निवेश का मौका मिलेगा और मध्यम स्तर के बैंकों को भविष्य के लिए अतिरिक्त सुरक्षा कवच प्राप्त होगा।
बाजार और निवेशकों पर प्रभाव
पिछले कुछ समय से बैंकिंग सेक्टर जमा वृद्धि (Deposit Growth) और मार्जिन के दबाव से जूझ रहा था। इस नई मंजूरी के बाद बाजार में सकारात्मक माहौल बनने की उम्मीद है:
भरोसे की वापसी: बड़े समूहों का निवेश इस बात का प्रमाण है कि बैंकिंग सेक्टर में अभी भी काफी 'वैल्यू' बची है।
मजबूत बैलेंस शीट: इसका लाभ मुख्य रूप से उन बैंकों को मिलेगा जिनकी एसेट क्वालिटी और वित्तीय स्थिति पहले से बेहतर है।
फिच रेटिंग्स की रिपोर्ट: नए नियमों से नहीं बढ़ेगा बैंकों पर बोझ
इसी बीच वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच (Fitch) ने भारतीय बैंकों की मजबूती पर मुहर लगाई है। फिच के अनुसार:
भारतीय बैंक RBI के नए अनुमानित क्रेडिट लॉस (ECL) प्रावधान ढांचे को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
पिछले कुछ वर्षों में बैंकों ने अपनी बैलेंस शीट में सुधार किया है और प्रोविजन कवरेज को बढ़ाया है।
1 अप्रैल 2027 से लागू होने वाले इन नियमों से बैंकिंग सेक्टर पर किसी बड़े वित्तीय संकट या दबाव की आशंका नहीं है।
बिजली मांग बढ़ने की उम्मीद, पावर कंपनियों के शेयरों पर नजर
8 May, 2026 07:34 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। साल 2026 में शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच बिजली क्षेत्र (Power Sector) के शेयरों ने निवेशकों के लिए मुनाफे की नई उम्मीद जगाई है। जहां शेयर बाजार के अन्य सेक्टर दबाव का सामना कर रहे हैं, वहीं पावर स्टॉक्स ने पिछले कुछ हफ्तों में असाधारण प्रदर्शन किया है। आंकड़ों के अनुसार, बीएसई पावर इंडेक्स ने पिछले एक महीने में लगभग 21% और बीते छह महीनों में 24% तक की शानदार बढ़त दर्ज की है।
पावर स्टॉक्स में तेजी: रिकॉर्ड मांग और भविष्य की ऊर्जा नीति का असर
बिजली क्षेत्र में आई इस तेजी का मुख्य कारण देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताएं हैं। अप्रैल 2026 में भारत ने 256.1 गीगावॉट की रिकॉर्ड बिजली मांग दर्ज की, जो अब तक का सबसे उच्च स्तर है। इससे पहले यह रिकॉर्ड मई 2024 (250 गीगावॉट) के नाम था।
किन कंपनियों पर है बाजार की नजर?
बाजार के जानकारों का मानना है कि बिजली और न्यूक्लियर वैल्यू चेन से जुड़ी कंपनियों में भविष्य की बड़ी संभावनाएं छिपी हैं:
एलएंडटी (L&T): न्यूक्लियर ईपीसी (EPC) क्षेत्र में प्रमुख खिलाड़ी।
भेल (BHEL): टरबाइन और बॉयलर जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों की आपूर्ति के लिए।
एनटीपीसी और एनएचपीसी: स्वच्छ ऊर्जा और परमाणु विस्तार परियोजनाओं के लिए।
टाटा पावर, अदाणी एनर्जी, एबीबी इंडिया और सीमेंस: ग्रिड ऑटोमेशन, ट्रांसमिशन और क्लीन एनर्जी सेक्टर के दिग्गज।
बिजली की बढ़ती खपत के 3 मुख्य आधार
मौसम का मिजाज: भीषण गर्मी और कम बारिश की आशंका के चलते एसी, कूलर और कृषि क्षेत्र में बिजली की खपत बढ़ी है।
नए औद्योगिक क्षेत्र: डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से बिजली की नई मांग पैदा हो रही है।
शहरीकरण: लगातार बढ़ता शहरीकरण और औद्योगिक गतिविधियों में सुधार से बेस डिमांड में इजाफा हुआ है।
विशेषज्ञों की राय: निवेश में बरतें सावधानी
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अगले पांच वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत वृद्धि की संभावना है, लेकिन सभी कंपनियां एक जैसा रिटर्न नहीं देंगी। निवेशकों को उन कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए जिनकी:
बैलेंस शीट मजबूत है।
प्रोजेक्ट पूरा करने की क्षमता बेहतर है।
जो एनर्जी स्टोरेज और हाइब्रिड समाधानों पर काम कर रही हैं।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए न्यूक्लियर एनर्जी की ओर झुकाव
परमाणु ऊर्जा अब ऊर्जा सुरक्षा का एक अनिवार्य हिस्सा बनती जा रही है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसकी स्थिरता है, क्योंकि यह सौर या पवन ऊर्जा की तरह मौसम पर निर्भर नहीं है।
ऊर्जा स्रोतों की तुलना (1 गीगावॉट क्षमता के आधार पर):
ऊर्जा स्रोत
क्षमता गुणांक (Capacity Factor)
सालाना उत्पादन (प्रति घंटा)
सौर ऊर्जा
18–22%
1,650 गीगावॉट
कोयला
50–65%
4,500 गीगावॉट
न्यूक्लियर
80–92%
7,500 गीगावॉट
सरकारी स्कूलों में घटती संख्या ने बढ़ाई चिंता, आखिर कहां हो रही कमी?
7 May, 2026 03:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट ने भारत के स्कूली शिक्षा ढांचे में आ रहे व्यापक बदलावों की ओर इशारा करते हुए एक गंभीर बहस छेड़ दी है। पिछले दो दशकों के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय माता-पिता का भरोसा अब सरकारी व्यवस्था के बजाय निजी शिक्षण संस्थानों पर तेजी से बढ़ रहा है, जिसके परिणामस्वरूप सरकारी स्कूलों में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या में भारी गिरावट आई है। यह बदलाव न केवल शिक्षा की गुणवत्ता और समानता पर सवाल खड़ा करता है बल्कि भविष्य की आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों की ओर भी संकेत करता है, जिससे निपटने के लिए नीतिगत स्तर पर बड़े सुधारों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
सरकारी स्कूलों के प्रति घटता रुझान और निजी संस्थानों का विस्तार
आंकड़ों की दृष्टि से देखें तो पिछले बीस वर्षों में शिक्षा के परिदृश्य में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है जहां साल 2005 में लगभग इकहत्तर प्रतिशत बच्चे सरकारी विद्यालयों का हिस्सा थे वहीं वर्तमान शैक्षणिक सत्र तक यह आंकड़ा सिमटकर आधे से भी कम यानी लगभग उनचास प्रतिशत रह गया है। अभिभावकों के बीच यह धारणा प्रबल हो रही है कि निजी स्कूल अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा, बेहतर अनुशासन और भविष्य में रोजगार के अधिक अवसर प्रदान करते हैं, इसी सोच के कारण मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवार भी अपनी गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा निजी संस्थानों पर खर्च कर रहे हैं। हालांकि रिपोर्ट इस बात पर भी प्रकाश डालती है कि कई निजी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अभाव है, जिससे अभिभावकों की उम्मीदें और वास्तविक परिणाम मेल नहीं खा रहे हैं।
शिक्षकों की कमी और बुनियादी ढांचे की जर्जर स्थिति
देश भर के लाखों स्कूलों में करोड़ों शिक्षकों की मौजूदगी के बावजूद ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है क्योंकि वहां शिक्षकों की भारी कमी और उनके नौकरी छोड़ने की दर बहुत अधिक है। सबसे बड़ी समस्या उन स्कूलों की है जो केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं, जिनकी संख्या कुल स्कूलों का सात प्रतिशत से भी अधिक है और ऐसी स्थिति में छात्रों को सीखने के सही अवसर नहीं मिल पाते हैं। इसके अतिरिक्त शिक्षकों पर प्रशासनिक कार्यों का बढ़ता बोझ, विषय विशेषज्ञता का अभाव और संसाधनों की कमी जैसे कारकों ने शिक्षा की नींव को कमजोर किया है, जिससे विशेषकर कम फीस वाले निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का शैक्षणिक स्तर अपेक्षा के अनुरूप नहीं पाया गया है।
भविष्य की तकनीकी शिक्षा और क्रियान्वयन की चुनौतियां
आधुनिक दौर की जरूरतों को देखते हुए शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक स्तर से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटेशनल थिंकिंग जैसे विषयों को अनिवार्य कौशल के रूप में शामिल करने का निर्णय लिया है। सीबीएसई और एनसीईआरटी इस नए पाठ्यक्रम को तैयार करने में जुटे हैं ताकि कक्षा तीन से ही बच्चों को भविष्य की तकनीक के लिए तैयार किया जा सके, लेकिन रिपोर्ट इसे लागू करने की राह में आने वाली बाधाओं के प्रति भी सचेत करती है। स्कूलों में बिजली, इंटरनेट और प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी इन तकनीकी विषयों के प्रभावी क्रियान्वयन में एक बड़ा रोड़ा साबित हो सकती है, जिसके लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
टाटा संस IPO पर अलग-अलग राय, ट्रस्टियों के बीच खींचतान तेज
7 May, 2026 01:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी 'टाटा संस' को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने के विषय पर समूह के शीर्ष नेतृत्व के भीतर मतभेद गहरे होते जा रहे हैं। टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा इस लिस्टिंग के पक्ष में नहीं हैं, जबकि ट्रस्ट के अन्य महत्वपूर्ण सदस्य भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कड़े नियमों का हवाला देते हुए सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाने पर जोर दे रहे हैं। 1 जुलाई 2026 की समय सीमा नजदीक आने के कारण यह विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है।
टाटा ट्रस्ट में आंतरिक मतभेद और भविष्य की रणनीति
टाटा संस के भविष्य को लेकर ट्रस्ट के भीतर दो स्पष्ट विचारधाराएं उभरकर सामने आई हैं। एक ओर वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह जैसे ट्रस्टी हैं जो कंपनी में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए लिस्टिंग को अनिवार्य मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नोएल टाटा का मानना है कि कंपनी को निजी (क्लोजली हेल्ड) रखना ही समूह के हितों के लिए बेहतर है। इस विवाद के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
नियंत्रण खोने का डर: नोएल टाटा को अंदेशा है कि शेयर बाजार में लिस्ट होने से टाटा संस पर टाटा ट्रस्ट की पकड़ कमजोर पड़ सकती है।
गारंटी पर विवाद: रिपोर्ट के अनुसार, नोएल टाटा ने चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन से लिस्टिंग न होने का आश्वासन मांगा था, जिसे चंद्रशेखरन ने नियामक मजबूरी बताते हुए देने से इनकार कर दिया।
वोटिंग में देरी: इसी खींचतान के कारण एन. चंद्रशेखरन के अगले कार्यकाल की नियुक्ति पर होने वाली आधिकारिक वोटिंग को भी फिलहाल टालना पड़ा है।
आरबीआई के कड़े नियम और नियामक चुनौतियां
टाटा समूह के लिए सबसे बड़ी चुनौती बैंकिंग नियामक आरबीआई के वे नियम हैं जो बड़े शैडो बैंकों (NBFC) पर लागू होते हैं। इन नियमों के कारण टाटा संस के पास अब विकल्प सीमित रह गए हैं:
अनिवार्य लिस्टिंग: नए नियमों के तहत 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति वाली एनबीएफसी को 'सिस्टमैटिकली इम्पोर्टेन्ट' माना जाता है और उन्हें शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना ही पड़ता है।
समय सीमा: आरबीआई ने टाटा संस को लिस्ट होने के लिए जुलाई 2026 तक का समय दिया है और सूत्रों की मानें तो नियामक किसी भी प्रकार की विशेष छूट देने के पक्ष में नहीं है।
पिछला अनुभव: साल 2022 में भी समूह ने ऋण पुनर्गठन के जरिए लिस्टिंग से बचने की कोशिश की थी, लेकिन अब नियामक ने ऐसे सभी तकनीकी रास्तों को बंद कर दिया है।
शापूरजी पालोनजी ग्रुप और बाजार पर संभावित असर
यदि टाटा संस का आईपीओ बाजार में आता है, तो यह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक होगी। इसका सबसे अधिक प्रभाव मिस्त्री परिवार के मालिकाना हक वाले शापूरजी पालोनजी (SP) ग्रुप पर पड़ेगा:
हिस्सेदारी का मूल्य: टाटा संस में मिस्त्री परिवार की 18.4% हिस्सेदारी है, जिसका मूल्य लिस्टिंग के बाद स्पष्ट रूप से सामने आ जाएगा।
कर्ज से मुक्ति: भारी कर्ज में डूबे एसपी ग्रुप के लिए यह लिस्टिंग 'गेम चेंजर' साबित हो सकती है, क्योंकि इससे उनकी फंसी हुई संपत्ति की वैल्यू अनलॉक होगी।
बोर्ड मीटिंग पर नजर: आगामी 8 मई को होने वाली टाटा ट्रस्ट्स की बैठक में नए ट्रस्टी नॉमिनी और लिस्टिंग के प्रस्ताव पर चर्चा होने की उम्मीद है, जिससे आगे की राह साफ होगी।
चांदी में जोरदार उछाल, इस साल अब तक ₹21 हजार महंगी हुई
7 May, 2026 01:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारतीय सर्राफा बाजार में आज यानी 7 मई को बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला है। सोने के भाव में प्रति दस ग्राम 377 रुपए की तेजी दर्ज की गई है, जिसके बाद 24 कैरेट शुद्ध सोने की कीमत 1.51 लाख रुपए के स्तर को पार कर गई है। चांदी के बाजार में भी जबरदस्त तेजी का रुख रहा और यह 2318 रुपए प्रति किलोग्राम महंगी होकर 2.51 लाख रुपए के ऐतिहासिक आंकड़े पर पहुंच गई है। वैश्विक आर्थिक संकेतों और घरेलू मांग में आए उछाल को इन बढ़ती कीमतों की मुख्य वजह माना जा रहा है।
साल 2026 में कीमती धातुओं का रिकॉर्ड प्रदर्शन
वर्तमान वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में ही कीमती धातुओं ने निवेशकों को मालामाल कर दिया है। साल 2026 में अब तक सोने की कीमतों में लगभग 18 हजार रुपए की भारी बढ़ोत्तरी हुई है, जबकि पिछले साल के अंत में यह 1.33 लाख रुपए के स्तर पर था। इसी प्रकार चांदी ने भी इस साल निवेशकों को चौंकाते हुए 21 हजार रुपए प्रति किलो तक की छलांग लगाई है। दिसंबर 2025 में 2.30 लाख रुपए पर बिकने वाली चांदी अब ढाई लाख रुपए के पार निकल चुकी है, जो बाजार में धातुओं की बढ़ती मजबूती को दर्शाता है।
आभूषणों की खरीदारी में सावधानी और हॉलमार्क का महत्व
महंगे रत्नों और धातुओं की खरीद के समय ग्राहकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है ताकि वे धोखाधड़ी का शिकार न हों। खरीदारी करते समय हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड द्वारा प्रमाणित हॉलमार्क वाले आभूषणों को ही प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि यह सोने की शुद्धता की आधिकारिक गारंटी होती है। इसके अतिरिक्त, खरीदारी वाले दिन की सटीक कीमत की पुष्टि इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन जैसे विश्वसनीय स्रोतों से अवश्य करनी चाहिए, क्योंकि सोने के भाव उसकी शुद्धता यानी 24, 22 या 18 कैरेट के आधार पर भिन्न-भिन्न होते हैं।
घरेलू स्तर पर असली चांदी की पहचान के सरल उपाय
चांदी की शुद्धता जांचने के लिए विशेषज्ञ कुछ आसान घरेलू तरीकों के उपयोग का सुझाव देते हैं। असली चांदी की सबसे बड़ी पहचान यह है कि वह चुंबकीय गुणों से मुक्त होती है और चुंबक के संपर्क में आने पर आकर्षित नहीं होती। इसके अलावा, चांदी की ऊष्मीय चालकता बहुत अधिक होती है, इसलिए इस पर बर्फ रखने से वह सामान्य की तुलना में कहीं अधिक तेजी से पिघलने लगती है। असली चांदी पूरी तरह गंधहीन होती है और यदि इसे किसी सफेद सूती कपड़े से रगड़ा जाए, तो उस पर काला निशान उभर आता है, जो धातु की प्रामाणिकता की पुष्टि करता है।
एपल ने भारत में बढ़ाया निवेश, रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं को मिलेगा बढ़ावा
7 May, 2026 11:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु: वैश्विक प्रौद्योगिकी दिग्गज एपल ने भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी पहल करते हुए 100 करोड़ रुपये के निवेश की महत्वपूर्ण घोषणा की है। कंपनी का यह कदम उसके वैश्विक स्थिरता लक्ष्यों और साल 2030 तक पूरी आपूर्ति शृंखला को कार्बन मुक्त बनाने की दिशा में एक रणनीतिक प्रयास है। इस निवेश के माध्यम से भारत में पर्यावरण संरक्षण और हरित बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की योजना बनाई गई है, जो देश की स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी को भी रेखांकित करता है। यह पहल न केवल कार्बन पदचिह्नों को कम करने में सहायक होगी, बल्कि भारत की ग्रीन सप्लाई चेन को भी एक नई दिशा प्रदान करेगी।
क्लीनमैक्स के साथ साझेदारी और ऊर्जा उत्पादन का विस्तार
एपल ने भारत के प्रमुख ऊर्जा डेवलपर 'क्लीनमैक्स' के साथ हाथ मिलाकर देशभर में 150 मेगावाट से अधिक क्षमता के नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस परियोजना से उत्पादित होने वाली स्वच्छ ऊर्जा की मात्रा इतनी विशाल होगी कि इससे प्रतिवर्ष लगभग डेढ़ लाख भारतीय परिवारों की बिजली संबंधी जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सकेगा। यह पहली बार नहीं है जब दोनों कंपनियों ने साथ काम किया हो, क्योंकि इससे पहले भी एपल ने अपने भारतीय कार्यालयों और रिटेल आउटलेट्स को सौर ऊर्जा से संचालित करने के लिए इसी प्रकार के प्रोजेक्ट्स पर काम किया था। भविष्य में इस उत्पादन क्षमता को और अधिक विस्तार देने की भी योजना है, जिससे औद्योगिक परिचालन में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को न्यूनतम किया जा सके।
कार्बन तटस्थता का लक्ष्य और पर्यावरण के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता
कंपनी का प्राथमिक उद्देश्य अपनी पूरी विनिर्माण और आपूर्ति शृंखला को 100 प्रतिशत कार्बन न्यूट्रल बनाना है, जिसके लिए भारत एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है। एपल की नेतृत्व टीम का मानना है कि पर्यावरण की रक्षा करना केवल एक कॉर्पोरेट जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह नवाचार के लिए एक बड़ी प्रेरक शक्ति भी है। भारत के प्राकृतिक संसाधनों को सहेजने और यहां की स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कंपनी लगातार नए निवेश कर रही है। यह प्रतिबद्धता वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों का एक अभिन्न हिस्सा है, जो अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए भी एक उदाहरण पेश करती है।
प्लास्टिक मुक्त भविष्य और हरित उद्यमिता को प्रोत्साहन
ऊर्जा क्षेत्र के अलावा एपल ने भारत में प्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित करने और पारिस्थितिक तंत्र में सुधार के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया जैसी संस्थाओं के साथ भी महत्वपूर्ण करार किए हैं। इस सहयोग के जरिए अपशिष्ट प्रबंधन और सामग्रियों के पुनर्चक्रण की प्रणालियों को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा ताकि पर्यावरण में प्लास्टिक के रिसाव को रोका जा सके। साथ ही, कंपनी ने 'एक्यूमेन' के साथ मिलकर नए और छोटे ग्रीन स्टार्टअप्स को मेंटरशिप और वित्तीय सहायता प्रदान करने की योजना बनाई है, जो पुनर्योजी कृषि और सर्कुलर इकॉनमी जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। ये सभी प्रयास सामूहिक रूप से भारत में एक सशक्त और टिकाऊ पर्यावरण अनुकूल व्यापारिक वातावरण तैयार करने में सहायक सिद्ध होंगे।
सेंसेक्स और निफ्टी में हल्की हलचल, बैंकिंग और आईटी शेयरों में मिला-जुला रुख
7 May, 2026 10:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत काफी उतार-चढ़ाव भरी रही, जहां शुरुआती मामूली बढ़त के बाद बिकवाली के दबाव ने बाजार की चमक फीकी कर दी। सुबह के समय सेंसेक्स में सौ अंकों से ज्यादा की तेजी देखी गई और निफ्टी भी 24,350 के स्तर को पार कर गया, लेकिन जल्द ही निवेशकों के सतर्क रुख और मुनाफावसूली के कारण सूचकांक लाल निशान में आ गए। सेंसेक्स करीब 160 अंकों की गिरावट के साथ 77,798 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, वहीं निफ्टी में भी तीस अंकों की सुस्ती दर्ज की गई। बाजार की इस अस्थिरता के बीच घरेलू मुद्रा में भी बड़ी कमजोरी देखी गई और रुपया डॉलर के मुकाबले फिसलकर 94.77 के स्तर पर पहुंच गया, जिसका मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले संभावित समझौतों की खबरों के बीच उपजा नाटकीय बदलाव रहा।
विदेशी निवेश की निकासी और वैश्विक तनाव का दोहरा दबाव
घरेलू शेयर बाजार पर इस समय वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार जारी बिकवाली का गहरा साया बना हुआ है। एक्सचेंज के आंकड़ों से पता चलता है कि विदेशी फंडों ने हाल ही में हजारों करोड़ रुपये के शेयरों की बिक्री की है, जिससे बाजार की रिकवरी में बाधा आ रही है। पश्चिम एशिया के संकट और ईरान से जुड़ी खबरों ने निवेशकों को बेहद सावधान कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप बाजार में निश्चित दिशा का अभाव दिख रहा है। बुधवार को बाजार में जो शानदार तेजी देखी गई थी, वह गुरुवार की सुबह बरकरार नहीं रह सकी क्योंकि विदेशी पूंजी का बाहर जाना बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और प्रमुख शेयरों की बदलती चाल
वैश्विक तेल बाजार में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतें 102 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू रही हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार पर दबाव बढ़ा है। इस अनिश्चितता के माहौल में शेयरों के प्रदर्शन में भी काफी भिन्नता देखी जा रही है। जहां एक ओर महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा स्टील और आईसीआईसीआई बैंक जैसे शेयर बाजार को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आईटी और फार्मा सेक्टर की दिग्गज कंपनियों जैसे टीसीएस और सन फार्मा के शेयरों में कमजोरी का रुख बना हुआ है। एशियाई और अमेरिकी बाजारों से मिलने वाले सकारात्मक संकेतों के बावजूद कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें घरेलू बाजार के सेंटिमेंट को प्रभावित कर रही हैं।
विशेषज्ञों का दृष्टिकोण और भविष्य की आर्थिक दिशा
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय बाजार वर्तमान में उम्मीद और आशंका के बीच झूल रहा है, जहां हर छोटी वैश्विक हलचल का असर कीमतों पर दिख रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया के राजनीतिक घटनाक्रम और तेल की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव आने वाले दिनों में बाजार की चाल तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। हालांकि सकारात्मक वैश्विक संकेतों और कुछ क्षेत्रों में दिख रही मजबूती से अल्पकालिक राहत मिल सकती है, लेकिन लंबी अवधि में स्थिरता तभी आएगी जब भू-राजनीतिक तनाव कम होगा और विदेशी निवेशकों का भरोसा फिर से कायम होगा। फिलहाल निवेशकों की नजरें ईरान की प्रतिक्रिया और ऊर्जा क्षेत्र की कीमतों पर टिकी हुई हैं।
लखनऊ से कानपुर तक, जानिए यूपी के सबसे रईस शहरों की पूरी तस्वीर
7 May, 2026 09:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नोएडा: उत्तर प्रदेश की राजनीतिक अहमियत से तो हर कोई वाकिफ है, लेकिन अब यह राज्य आर्थिक मोर्चे पर भी नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2025 के ताजा आंकड़ों ने यूपी के औद्योगिक परिदृश्य की एक बेहद दिलचस्प तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में कुल 41 ऐसे अमीर व्यक्तित्व हैं जिन्हें अरबपतियों की श्रेणी में रखा गया है। ये रईस राज्य के 11 विभिन्न शहरों से ताल्लुक रखते हैं, जो यूपी की बदलती आर्थिक ताकत का प्रमाण है।
उत्तर प्रदेश में अरबपतियों का नया केंद्र
जब भी अमीरी की बात होती है, तो अक्सर कानपुर का नाम ज़हन में आता है, लेकिन वर्तमान आंकड़ों ने नोएडा को उत्तर प्रदेश का असली 'अरबपतियों का गढ़' घोषित कर दिया है। गौतमबुद्ध नगर जिले का यह हिस्सा 15 अरबपतियों के साथ सूची में शीर्ष पर काबिज है। इसके बाद औद्योगिक नगरी कानपुर 8 अरबपतियों के साथ दूसरे स्थान पर है। इस सूची में सबसे चौंकाने वाला नाम ताजनगरी आगरा का है, जो 5 अरबपतियों के साथ तीसरे स्थान पर मौजूद है, जो शहर की मजबूत व्यापारिक जड़ों को दर्शाता है।
क्षेत्रीय वितरण और उभरते हुए शहर
राज्य के अन्य प्रमुख शहरों में भी धनकुबेरों की मौजूदगी दर्ज की गई है। राजधानी में 4 अरबपति निवास करते हैं, जबकि गाजियाबाद में इनकी संख्या 3 है। इनके अलावा प्रयागराज, फैजाबाद, बुलंदशहर, ग्रेटर नोएडा, अलीगढ़ और गोरखपुर जैसे शहरों से भी एक-एक अरबपति ने इस प्रतिष्ठित सूची में अपनी जगह बनाई है। यह विविधता स्पष्ट करती है कि अब प्रदेश का विकास केवल एक या दो केंद्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों से भी बड़े कारोबारी साम्राज्य खड़े हो रहे हैं।
प्रदेश के सबसे धनवान चेहरे और उनकी संपत्ति
संपत्ति के मामले में नोएडा के आदित्य खेमका उत्तर प्रदेश के सबसे अमीर व्यक्ति बनकर उभरे हैं। आदित्य इन्फोटेक के संस्थापक खेमका की कुल नेट वर्थ 35,140 करोड़ रुपये आंकी गई है। वहीं, शिक्षा जगत में क्रांति लाने वाले 'फिजिक्स वाला' के संस्थापक अलख पांडे राज्य के दूसरे सबसे अमीर शख्स हैं। प्रयागराज से संबंध रखने वाले अलख पांडे की कुल संपत्ति 14,520 करोड़ रुपये दर्ज की गई है। ये आंकड़े बताते हैं कि तकनीक और शिक्षा जैसे नए क्षेत्रों ने भी यूपी में बड़े पैमाने पर संपदा सृजन में योगदान दिया है।
न्यूनतम सैलरी ₹65,000 की मांग से 8वें वेतन आयोग पर चर्चा तेज
6 May, 2026 02:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुणे: 8वें वेतन आयोग के समक्ष केंद्रीय कर्मचारियों की बड़ी मांग, न्यूनतम वेतन 65 हजार और फिटमेंट फैक्टर 3.8 करने का प्रस्ताव
केंद्रीय कर्मचारियों के भविष्य और उनके वेतन ढांचे को लेकर महाराष्ट्र के पुणे में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई है। इस बैठक में महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गेनाइजेशन के प्रतिनिधियों ने 8वें वेतन आयोग की अध्यक्ष रंजना प्रकाश देसाई और आयोग के अन्य वरिष्ठ सदस्यों से मुलाकात कर कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए दूरगामी प्रस्ताव सौंपे। संगठन की ओर से प्रमुखता से यह मांग रखी गई है कि वर्तमान न्यूनतम मूल वेतन को बढ़ाकर 65,000 रुपये किया जाए और फिटमेंट फैक्टर को 3.8 के स्तर पर लाया जाए। लगभग आधे घंटे तक चली इस चर्चा में कर्मचारियों के वेतन, भत्तों, पेंशन और कार्यस्थल की परिस्थितियों से जुड़े विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से मंथन किया गया ताकि बढ़ती महंगाई के दौर में सरकारी सेवकों को उचित राहत मिल सके।
परिवार की नई परिभाषा और न्यूनतम वेतन में भारी बढ़ोतरी का आधार
संगठन ने आयोग के समक्ष तर्क दिया है कि वर्तमान में न्यूनतम वेतन के निर्धारण के लिए परिवार के सदस्यों की जो संख्या मानी जाती है, उसे बदला जाना चाहिए। अब कर्मचारी, जीवनसाथी, दो बच्चे और माता-पिता को मिलाकर परिवार की गणना तीन के बजाय पांच सदस्यों के आधार पर करने का सुझाव दिया गया है। इसी यथार्थवादी आकलन और एक्रोयड फॉर्मूले को आधार बनाकर एंट्री-लेवल वेतन को 18,000 रुपये से बढ़ाकर 65,000 रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। प्रतिनिधियों का मानना है कि राजकोषीय संतुलन को बनाए रखते हुए यदि फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.8 कर दिया जाता है, तो इससे कर्मचारियों के जीवन स्तर में सार्थक सुधार होगा और वे अपनी बुनियादी जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर सकेंगे।
भत्तों में संशोधन और करियर प्रोग्रेशन स्कीम पर विशेष जोर
वेतन वृद्धि के साथ-साथ भत्तों की संरचना में भी बड़े बदलावों की मांग की गई है, जिसमें महंगाई भत्ते के 50 प्रतिशत तक पहुँचने पर उसे स्वतः मूल वेतन में शामिल करने का प्रस्ताव शामिल है। मकान किराया भत्ते को शहरों की श्रेणी के आधार पर पुनर्गठित करने और यात्रा भत्ते को ढाई गुना तक बढ़ाने का आग्रह किया गया है ताकि परिवहन लागत में हुई वृद्धि की भरपाई हो सके। इसके अतिरिक्त, आदिवासी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों के लिए विशेष भत्तों में बढ़ोतरी और शिक्षकों के लिए नई करियर प्रोग्रेशन स्कीम लागू करने की बात कही गई है। संगठन ने वार्षिक वेतन वृद्धि की दर को भी 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने का सुझाव दिया है ताकि कर्मचारियों की आर्थिक प्रगति सुनिश्चित हो सके।
पुरानी पेंशन योजना की बहाली और सेवानिवृत्ति लाभों में सुधार की मांग
इस बैठक का एक सबसे बड़ा केंद्र बिंदु पेंशन सुधार रहा है, जिसमें देश भर के लाखों कर्मचारियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू करने की पुरजोर वकालत की गई है। संगठन ने सुझाव दिया है कि यदि एनपीएस जारी रहता है, तो उसमें कम से कम 10 प्रतिशत रिटर्न की गारंटी और नियोक्ता का अंशदान बढ़ाकर साढ़े अठारह प्रतिशत किया जाना चाहिए। साथ ही, वरिष्ठ पेंशनभोगियों को मिलने वाली अतिरिक्त पेंशन की आयु सीमा को 80 वर्ष से घटाकर 75 वर्ष करने का प्रस्ताव भी दिया गया है। इन मांगों के माध्यम से कर्मचारियों की बदलती चिकित्सा आवश्यकताओं और मुद्रास्फीति के प्रभावों को संतुलित करने का प्रयास किया गया है, जिसकी परिणति अब आयोग की अंतिम रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।
रुपये में बड़े सुधार की उम्मीद फिलहाल कम, 95 के करीब रह सकता है डॉलर
6 May, 2026 12:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारतीय रुपये पर दबाव जारी, साल के अंत तक 95 के स्तर पर रहने का अनुमान
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था में छाई अस्थिरता का सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ता दिखाई दे रहा है। फिच समूह की प्रमुख कंपनी बीएमआई की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 के अंत तक भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 95 रुपये के दायरे में स्थिर रह सकता है। वर्तमान में रुपया 95.20 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है, जो इसकी कमजोरी को दर्शाता है। विशेष रूप से मार्च और अप्रैल के दौरान भारतीय मुद्रा के मूल्य में चार प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता संघर्ष और ऊर्जा कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव माना जा रहा है। भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इसलिए वैश्विक संघर्षों का असर रुपये की मजबूती पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।
रिजर्व बैंक का हस्तक्षेप और गिरावट को नियंत्रित करने की रणनीति
यद्यपि रुपये पर दबाव बना हुआ है, लेकिन बीएमआई की रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि भारतीय रिजर्व बैंक इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएगा। बाजार के जानकारों का मानना है कि विदेशी निवेशकों द्वारा की जा रही मुनाफे की निकासी और पूंजी के बहिर्वाह को रोकने के लिए केंद्रीय बैंक मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है। हालांकि पिछले 12 महीनों में रुपये में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो साल 2022 के दौर की याद दिलाती है, लेकिन वर्तमान में रिजर्व बैंक के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है। यह भंडार करीब सात महीने के आयात खर्च को कवर करने में सक्षम है, जिसका उपयोग आने वाले समय में बाजार की घबराहट को कम करने और रुपये की विनिमय दर को स्थिर रखने के लिए प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
ऊर्जा आयात और खाड़ी देशों से आने वाले धन पर संकट के बादल
भारत की अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा आयात पर निर्भरता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, क्योंकि कुल आयात का लगभग 22 प्रतिशत हिस्सा केवल ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ा है। रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि यदि खाड़ी देशों में युद्ध की स्थिति लंबी खिंचती है, तो वहां काम कर रहे भारतीयों द्वारा भेजे जाने वाले धन यानी रेमिटेंस में भी बड़ी कमी आ सकती है। भारत को मिलने वाले कुल रेमिटेंस का करीब 38 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों से ही आता है, जो देश की जीडीपी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि वहां रहने वाले भारतीयों की आय प्रभावित होती है, तो इससे भारत का चालू खाता घाटा बढ़ सकता है, जिससे रुपये की स्थिति और अधिक नाजुक होने की संभावना बनी रहेगी।
जीडीपी वृद्धि के सकारात्मक अनुमान और विदेशी निवेशकों का रुख
आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत की विकास दर को लेकर सकारात्मक संकेत भी मिले हैं। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रह सकती है, जबकि महंगाई दर के 3.4 प्रतिशत के आसपास रहने की संभावना है। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितता के कारण निवेशकों के बीच 'जोखिम से बचने' की प्रवृत्ति बढ़ी है, जिसके चलते मार्च 2026 में भारत से 13.4 अरब डॉलर की भारी पूंजी निकासी देखी गई। यह महामारी के बाद का सबसे बड़ा मासिक आउटफ्लो है, जो यह दर्शाता है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा फिलहाल डगमगाया हुआ है। आने वाले महीनों में भारतीय बाजार की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि वैश्विक राजनीति किस दिशा में मुड़ती है और घरेलू स्तर पर रिजर्व बैंक इन बाहरी झटकों से निपटने के लिए क्या कदम उठाता है।
सोने की कीमतों में तेजी, जानिए आज का ताजा भाव
6 May, 2026 11:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे भाव
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में आज पीली धातु और चांदी की कीमतों में जबरदस्त मजबूती देखने को मिली है, जिससे सर्राफा बाजार में हलचल तेज हो गई है। वैश्विक बाजार से मिल रहे सकारात्मक संकेतों और घरेलू मांग में आई स्थिरता के चलते सोने के भाव 2,047 रुपये की बड़ी बढ़त के साथ 1,51,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गए हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सुबह के कारोबारी सत्र से ही निवेशकों का रुझान सोने की खरीद की तरफ बना रहा, जिसका असर 24 कैरेट से लेकर 18 कैरेट तक की सभी श्रेणियों पर पड़ा है। इस तेजी के बीच 22 कैरेट सोने की कीमत अब 13,870 रुपये प्रति ग्राम हो गई है, जबकि 18 कैरेट सोने का भाव 11,348 रुपये प्रति ग्राम दर्ज किया गया है।
चांदी की कीमतों में भी आई भारी तेजी और औद्योगिक मांग का असर
सोने के साथ-साथ चांदी के बाजार में भी आज निवेशकों और औद्योगिक खरीदारों की सक्रियता के कारण बड़ी रैली देखी गई। चांदी की कीमतों में 6,134 रुपये प्रति किलो का भारी उछाल आया है, जिससे इसके दाम अब 2,50,450 रुपये प्रति किलो के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर औद्योगिक मांग में सुधार और सुरक्षित निवेश के रूप में चांदी की बढ़ती लोकप्रियता ने इसे जबरदस्त सपोर्ट प्रदान किया है। बाजार की इस तेजी ने न केवल बड़े निवेशकों बल्कि आम खरीदारों को भी चौंका दिया है क्योंकि दोनों कीमती धातुओं के भाव अपने पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ रहे हैं।
देश के महानगरों में सोने के दामों की स्थिति और क्षेत्रीय रुझान
देश के प्रमुख शहरों में भी सोने की कीमतों में क्षेत्रीय करों और मांग के अनुसार बदलाव देखा गया है, जिसमें दिल्ली और लखनऊ जैसे शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव 1,51,444 रुपये रहा, जबकि चेन्नई में यह आंकड़ा सबसे अधिक 1,53,280 रुपये के करीब पहुंच गया। मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में कीमतें लगभग समान स्तर पर बनी रहीं, जहां 22 कैरेट सोना 13,870 रुपये के आसपास कारोबार करता नजर आया। पटना और अन्य शहरों में भी आभूषणों की मांग में तेजी बनी हुई है, जिससे स्थानीय सर्राफा बाजारों में ग्राहकों की भीड़ देखी जा रही है और कीमतों में निरंतर उतार-चढ़ाव का दौर जारी है।
वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता ने बढ़ाया कीमती धातुओं का आकर्षण
बाजार विश्लेषकों का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को शेयर बाजार के बजाय सोने की ओर आकर्षित किया है। आर्थिक अनिश्चितता और बढ़ती महंगाई के डर से सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग में वैश्विक स्तर पर इजाफा हुआ है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजारों पर दिख रहा है। इसके साथ ही भारत में शादी-ब्याह के आगामी सीजन ने भी आभूषणों की घरेलू मांग को पंख लगा दिए हैं, जिससे बाजार में आपूर्ति और मांग का संतुलन कीमतों को ऊपर की ओर धकेल रहा है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह माना जा रहा है कि सोने और चांदी का यह सकारात्मक रुख आने वाले कुछ और दिनों तक बरकरार रह सकता है।
₹1681 करोड़ की मेगा परियोजना, चीन सीमा पर बनेगी रणनीतिक सुरंग
6 May, 2026 11:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारत रचेगा इतिहास, शिंकुन ला दर्रे के नीचे बन रही दुनिया की सबसे ऊंची सुरंग अगस्त 2028 तक होगी तैयार
हिमाचल प्रदेश और लद्दाख की दुर्गम पहाड़ियों के बीच भारत एक ऐसा इंजीनियरिंग चमत्कार तैयार कर रहा है, जो पूरी दुनिया को हैरान कर देगा। शिंकुन ला सुरंग का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, जो पूर्ण होने के बाद विश्व की सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित मोटर मार्ग सुरंग बन जाएगी। 15,800 फीट की गगनचुंबी ऊंचाई पर बन रही यह सुरंग न केवल तकनीकी कौशल का प्रतीक है, बल्कि सामरिक दृष्टिकोण से भी भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सीमा सड़क संगठन द्वारा 'प्रोजेक्ट योजक' के तहत इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारा जा रहा है, जिसकी शुरुआत जुलाई 2024 में हुई थी और इसके अगस्त 2028 तक पूरी तरह से संचालित होने की संभावना है।
लाहौल और जंस्कार घाटी के बीच हर मौसम में सुगम होगा सफर
इस सुरंग का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि यह हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी को लद्दाख की जंस्कार घाटी से सीधे जोड़ देगी, जिससे साल भर आवाजाही संभव हो सकेगी। वर्तमान में भारी बर्फबारी के कारण यह मार्ग सर्दियों में महीनों तक बंद रहता है, लेकिन 4.1 किलोमीटर लंबी यह ट्विन-ट्यूब सुरंग निमू-पदम-दारचा सड़क मार्ग पर बारहमासी संपर्क सुनिश्चित करेगी। केंद्र सरकार ने इस विशाल परियोजना के लिए 1681 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है, जो क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को एक नई दिशा प्रदान करेगा। यह सुरंग बन जाने के बाद दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए आपातकालीन सेवाएं और रसद पहुंचना काफी आसान हो जाएगा।
सुरक्षा के आधुनिक मानक और आपातकालीन निकास की विशेष व्यवस्था
तकनीकी विशिष्टताओं की बात करें तो शिंकुन ला सुरंग में यात्रियों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है और इसमें हर 500 मीटर की दूरी पर क्रॉस-पैसेज बनाए जा रहे हैं। ये क्रॉस-पैसेज दो समानांतर सुरंगों को जोड़ने वाली संकरी गलियां होती हैं, जिनका उपयोग किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी या सुरंग के रखरखाव के कार्यों के लिए किया जाता है। आधुनिक वेंटिलेशन और सुरक्षा प्रणालियों से लैस यह सुरंग अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाई जा रही है ताकि ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में ऑक्सीजन और दबाव की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
सीमा पर सैन्य मजबूती और लद्दाख के सामाजिक विकास को मिलेगी नई गति
सामरिक महत्व के लिहाज से यह सुरंग भारतीय सशस्त्र बलों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी क्योंकि इसके माध्यम से चीन सीमा के करीब सैनिकों और भारी सैन्य उपकरणों की आवाजाही पहले के मुकाबले कहीं अधिक तेज और गोपनीय तरीके से हो सकेगी। युद्ध जैसी स्थितियों में यह मार्ग रसद आपूर्ति की जीवनरेखा बनेगा। इसके साथ ही, बेहतर कनेक्टिविटी के चलते लद्दाख के सुदूर क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंच मिलेगी, जिससे इस केंद्र शासित प्रदेश में आर्थिक और सामाजिक समृद्धि के नए द्वार खुलेंगे। यह सुरंग न केवल लद्दाख के पिछड़े इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ेगी, बल्कि वहां के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी।
निवेशकों के लिए बड़ा मौका, आज नहीं खरीदा तो नहीं मिलेगा फायदा
6 May, 2026 10:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु: ऑरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज के निवेशकों के लिए बड़ा दिन, 270 रुपये के भारी-भरकम डिविडेंड का लाभ उठाने का अंतिम अवसर
आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ऑरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज सॉफ्टवेयर के शेयरों में बुधवार को जबरदस्त हलचल देखी जा रही है क्योंकि निवेशकों के पास कंपनी द्वारा घोषित आकर्षक डिविडेंड का लाभ उठाने के लिए आज आखिरी मौका है। कंपनी ने अपने शेयरधारकों के लिए प्रति शेयर 270 रुपये के अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है, जिसके लिए 7 मई की रिकॉर्ड डेट निर्धारित की गई है। मौजूदा शेयर बाजार के नियमों के अनुसार, डिविडेंड का हकदार बनने के लिए निवेशकों को रिकॉर्ड तिथि से पहले शेयर खरीदना अनिवार्य होता है, यही कारण है कि आज बाजार खुलते ही इस स्टॉक पर निवेशकों की पैनी नजर बनी हुई है। कंपनी की योजना है कि इस लाभांश का भुगतान पात्र शेयरधारकों के खातों में 21 मई तक सुनिश्चित कर दिया जाए।
रिकॉर्ड तिथि और पात्रता को लेकर बाजार में सक्रियता
शेयर बाजार में प्रचलित टी+1 सेटलमेंट प्रणाली के चलते जो निवेशक बुधवार को इस कंपनी के शेयर खरीदेंगे, वे ही इस भारी-भरकम लाभांश को पाने के पात्र माने जाएंगे। यदि कोई निवेशक 7 मई या उसके बाद खरीदारी करता है, तो वे रिकॉर्ड तिथि तक कंपनी के रजिस्टर में दर्ज नहीं हो पाएंगे और इस लाभ से वंचित रह जाएंगे। 5 रुपये की फेस वैल्यू वाले इस शेयर पर मिलने वाला यह डिविडेंड निवेशकों के लिए एक बड़े वित्तीय प्रोत्साहन के रूप में देखा जा रहा है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि मौजूदा बाजार मूल्य पर कंपनी की डिविडेंड यील्ड चार प्रतिशत से भी अधिक है, जो बैंकिंग और आईटी सेक्टर के अन्य शेयरों की तुलना में काफी प्रतिस्पर्धी मानी जा रही है।
शानदार तिमाही नतीजे और लाभ में जबरदस्त उछाल
कंपनी की इस उदार डिविडेंड नीति के पीछे उसके मजबूत वित्तीय परिणाम एक मुख्य आधार रहे हैं, जहाँ पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले शुद्ध लाभ में 31 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की गई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, कंपनी का मुनाफा 644 करोड़ रुपये से बढ़कर 842 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुँच गया है, जबकि कुल राजस्व में भी 20 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी देखी गई है। विशेष रूप से कंपनी के प्रोडक्ट और सर्विसेज सेगमेंट ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है, जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ है। राजस्व का एक बड़ा हिस्सा प्रोडक्ट सेगमेंट से प्राप्त हुआ है, जिसने वार्षिक आधार पर 21 प्रतिशत की वृद्धि के साथ कंपनी की वित्तीय स्थिति को और सुदृढ़ किया है।
शेयर बाजार में प्रदर्शन और भविष्य के प्रति निवेशकों का रुझान
ऑरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज के स्टॉक ने न केवल लाभांश के मामले में बल्कि शेयर की कीमतों में वृद्धि के लिहाज से भी निवेशकों को मालामाल किया है। पिछले एक महीने के भीतर इस शेयर ने करीब 38 प्रतिशत की तूफानी तेजी दिखाई है, जबकि बीते तीन वर्षों का ट्रैक रिकॉर्ड देखें तो इसने निवेशकों के निवेश को दोगुने से भी अधिक बढ़ाते हुए 165 प्रतिशत का बम्पर रिटर्न दिया है। साल 2002 से अब तक कंपनी ने 18 बार अपने शेयरधारकों को डिविडेंड का तोहफा दिया है, जो इसके स्थिर प्रबंधन और लाभ साझा करने की स्वस्थ परंपरा को दर्शाता है। बाजार विश्लेषक अब इस बात पर नजर रख रहे हैं कि रिकॉर्ड डेट निकलने के बाद स्टॉक की कीमतों में किस तरह का सुधार या स्थिरता देखने को मिलती है।
वैश्विक संकेतों से घरेलू बाजार में दिखी मजबूती
6 May, 2026 09:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: वैश्विक संकेतों और नेतृत्व परिवर्तन से शेयर बाजार में उत्साह, सेंसेक्स और निफ्टी की ऊंची छलांग
घरेलू शेयर बाजार के लिए बुधवार का सवेरा निवेशकों के लिए बड़ी खुशखबरी लेकर आया, जहाँ वैश्विक परिस्थितियों में सुधार और कच्चे तेल की घटती कीमतों ने बाजार को जबरदस्त सहारा दिया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के शांतिपूर्ण समाधान की बढ़ती उम्मीदों ने निवेशकों के आत्मविश्वास को बढ़ाने का काम किया है। इसी सकारात्मक माहौल के चलते कारोबारी सत्र के शुरू होते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी आधे प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ हरे निशान पर कारोबार करते देखे गए। बाजार की इस हरियाली के बीच भारतीय रुपया भी अपने सबसे निचले स्तर से उबरने में सफल रहा और डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ 94.99 के स्तर पर पहुँच गया।
सेंसेक्स और निफ्टी के आंकड़ों में जोरदार बढ़त
बाजार खुलते ही चौतरफा खरीदारी का दौर शुरू हो गया जिससे सेंसेक्स ने 600 अंकों से अधिक की छलांग लगाते हुए 77,675 का आंकड़ा छू लिया, जबकि निफ्टी भी 200 से अधिक अंकों की मजबूती के साथ 24,250 के पार निकल गया। निवेशकों ने प्रमुख सूचकांकों में आई इस तेजी को हाथों-हाथ लिया और शुरुआती कारोबार में ही बाजार की पूंजी में बड़ा इजाफा देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत का संकेत है, जिससे मुद्रास्फीति का दबाव कम होने की उम्मीद में बाजार ने इस शानदार रैली को बरकरार रखा।
वोडाफोन आइडिया के नेतृत्व में बड़ा बदलाव और शेयरों में तेजी
शेयर बाजार की इस व्यापक तेजी के बीच दूरसंचार क्षेत्र की दिग्गज कंपनी वोडाफोन आइडिया ने निवेशकों का विशेष ध्यान खींचा क्योंकि कंपनी के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ है। दिग्गज उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला की लगभग पांच वर्षों के अंतराल के बाद गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में वापसी हुई है, जिसे बाजार ने एक मजबूत संकेत के रूप में स्वीकार किया। उनके दोबारा कमान संभालने की खबर से कंपनी के शेयरों में 3.2 प्रतिशत तक का उछाल दर्ज किया गया और शेयर 11.15 रुपये के स्तर तक पहुँच गए। बिड़ला ने पूर्व में कंपनी के वित्तीय संकट के समय पद से इस्तीफा दिया था, लेकिन अब उनकी घर वापसी से कंपनी के भविष्य को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं।
बाजार के भविष्य और वैश्विक परिस्थितियों का विश्लेषण
भू-राजनीतिक मोर्चे पर आ रही सकारात्मक खबरों और कच्चे तेल के नरम होते तेवरों ने भारतीय बाजारों को एक नई और टिकाऊ दिशा प्रदान की है। कॉर्पोरेट जगत में हो रहे इन बड़े बदलावों और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के बीच बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक स्थितियां इसी तरह अनुकूल रहीं, तो यह सकारात्मक रुझान लंबे समय तक जारी रह सकता है। वर्तमान में बाजार की पूरी नजरें अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और कच्चे तेल की आपूर्ति से जुड़ी खबरों पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में ट्रेडिंग की दिशा तय करेंगी।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
