व्यापार
क्रूड ऑयल 100 डॉलर पार, विश्वभर के शेयर बाजारों पर दबाव
13 Mar, 2026 01:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान के साथ जारी युद्ध को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है। कच्चे तेल की कीमत बढ़कर लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि दुनिया भर के शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी शेयर बाजारों में भी तेज गिरावट देखी गई। एसएंडपी 500 सूचकांक 1.5 प्रतिशत गिर गया और कुछ दिनों की अपेक्षाकृत शांति के बाद बाजार में फिर से बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिले।डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 1.6 प्रतिशत नीचे आ गया, जबकि नैस्डैक कंपोजिट में 1.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इस बीच तेल बाजार में हलचल सबसे अधिक रही। ब्रेंट क्रूड की कीमत एक समय 101.59 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। बॉन्ड बाजार में भी असर देखने को मिला। ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि निवेशकों को महंगाई बढ़ने और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती कम होने की आशंका है।
आज सर्राफा बाजार में मिला-जुला रुख, सोना-चांदी के भाव अपडेट
13 Mar, 2026 12:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैश्विक तनाव का असर सोने-चांदी की कीमतों में देखने को मिल रहा है। चांदी की कीमत 880 रुपये गिरकर 2.67 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। वहीं सोने का भाव 30 रुपये गिरकर 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
घरेलू बाजार में सोने-चांदी की कीमत
ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार गुरुवार को सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में अलग-अलग रुझान देखने को मिला। सफेद धातु यानी चांदी की कीमत में तेजी दर्ज की गई, जबकि सोने के दाम में गिरावट आई।आंकड़ों के मुताबिक, चांदी की कीमत 1,500 रुपये या 0.54 प्रतिशत बढ़कर 2,76,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) पर पहुंच गई। इसके विपरीत, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 400 रुपये गिरकर 1,65,200 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) रह गई।
डॉलर की मजबूती का असर
विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से सोने की कीमतों पर दबाव पड़ा है। जब डॉलर मजबूत होता है तो वैश्विक बाजार में सोना महंगा हो जाता है, जिससे निवेशकों की मांग घटती है और कीमतों में गिरावट देखने को मिलती है।
महंगाई के आंकड़ों से बढ़ी अनिश्चितता
अमेरिका में जारी ताजा महंगाई के आंकड़ों ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। इन आंकड़ों के बाद यह संभावना बढ़ गई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करने में जल्दबाजी नहीं करेगा। ऊंची ब्याज दरें सोने जैसी ऐसी संपत्तियों के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं, जिन पर ब्याज नहीं मिलता।
मुनाफावसूली से बढ़ा बिकवाली का दबाव
विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ समय में सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं। ऐसे में बड़े निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी है, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ा और सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। वहीं औद्योगिक मांग और निवेशक रुचि के चलते चांदी की कीमतों में तेजी बनी हुई है।
ग्लोबल संकेतों के बीच भारतीय बाजार में तेज गिरावट
13 Mar, 2026 12:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और तेल की बढ़ती कीमतों से निवेशकों का मनोबल लगातार गिर रहा है। इसके चलते शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार के बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक बाजारों में भारी बिकवाली, विदेशी निधियों की लगातार निकासी और रुपये की कमजोरी ने भी मंदी के रुझान को और बल दिया।कारोबार के दौरान सेंसेक्स 934 अंक गिरकर 75,100.34 अंक पर आ गया। वहीं निफ्टी 322 अंक गिरकर 23,316.85 अंक पर आ गया।शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 708.38 अंक या 0.93 प्रतिशत गिरकर 75,326.04 पर आ गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 222.05 अंक या 0.93 प्रतिशत गिरकर 23,417.10 पर पहुंच गया।
सेंसेक्स की कंपनियों का हाल
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से लार्सन एंड टुब्रो, टाटा स्टील, इंटरग्लोब एविएशन, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचडीएफसी बैंक और टेक महिंद्रा सबसे बड़े पिछड़ने वालों में शामिल थीं। पावर ग्रिड, हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईटीसी और बजाज फिनसर्व लाभ कमाने वाली कंपनियों में शामिल थीं।
एशियाई बाजारों में दिखी गिरावट
एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क कोस्पी, जापान का निक्केई 225 सूचकांक, शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। गुरुवार को अमेरिकी बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। नैस्डैक कंपोजिट 1.78 प्रतिशत, डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 1.56 प्रतिशत और एसएंडपी 500 1.52 प्रतिशत गिर गया।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि पश्चिम एशियाई संघर्ष को लेकर जारी अनिश्चितता के चलते वैश्विक बाजार कमजोर और अनिश्चित स्थिति में हैं। अमेरिकी बाजारों में कमजोरी इस बात का संकेत देती है कि बाजार में सुधार आने में अभी कुछ समय लगेगा। ब्रेंट क्रूड का भाव लगभग 100 अमेरिकी डॉलर के आसपास होने से तेजी का रुख बना हुआ है। उन्होंने कहा कि एफआईआई द्वारा अपनी निरंतर बिकवाली रणनीति को जारी रखने के कारण, यहां तक कि लार्ज-कैप ब्लू-चिप्स भी दबाव में हैं।
ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 100.05 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.07 प्रतिशत बढ़कर 100.5 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने गुरुवार को 7,049.87 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 7,449.77 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। गुरुवार को सेंसेक्स 829.29 अंक या 1.08 प्रतिशत गिरकर 76,034.42 पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी 227.70 अंक या 0.95 प्रतिशत गिरकर 23,639.15 पर बंद हुआ।
पश्चिम एशिया संकट का असर, कमजोर हुआ भारतीय रुपया
13 Mar, 2026 12:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बनी मजबूती और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण रुपये पर दबाव बढ़ा है।इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 92.33 प्रति डॉलर पर खुला और थोड़ी ही देर में फिसलकर 92.37 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड इंट्रा-डे निचले स्तर तक पहुंच गया। यह पिछले बंद स्तर के मुकाबले 12 पैसे की गिरावट को दर्शाता है। गुरुवार को रुपया 92.36 के नए अंतर-दिवसीय निचले स्तर पर पहुंच गया और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 24 पैसे गिरकर अपने सबसे निचले स्तर 92.25 पर बंद हुआ।
बिकवाली का दिखा असर
फॉरेक्स ट्रेडर्स के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर मजबूत अमेरिकी डॉलर, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली और घरेलू शेयर बाजारों में कमजोर रुझान ने भी रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाला है।
वैश्विक तनाव से तेल की कीमतों में तेजी
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि ईरान द्वारा संकट के समाधान तक होर्मुज जलडमरूमध्य को स्थायी रूप से बंद करने की घोषणा के बाद तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं। डॉलर सूचकांक में भी वृद्धि हुई, जबकि यूरोपीय और एशियाई मुद्राओं में डॉलर के मुकाबले गिरावट आई। उन्होंने आगे कहा कि रुपया कमजोर बना हुआ है और आरबीआई की अनुपस्थिति में यह 93.00 के स्तर तक पहुंच सकता था।डॉलर सूचकांक, जो छह मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है, 0.04 प्रतिशत बढ़कर 99.77 पर कारोबार कर रहा था।वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 4.99 प्रतिशत बढ़कर 96.57 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।घरेलू शेयर बाजार की बात करें तो सेंसेक्स 560.06 अंक या 0.74 प्रतिशत गिरकर 75,474.36 पर आ गया, जबकि निफ्टी 184.45 अंक या 0.78 प्रतिशत गिरकर 23,454.70 पर आ गया।एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने गुरुवार को शुद्ध आधार पर 7,049.87 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
इस बीच, गुरुवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खुदरा मुद्रास्फीति फरवरी में बढ़कर 3.21 प्रतिशत हो गई, जबकि पिछले महीने यह 2.74 प्रतिशत थी। इसका मुख्य कारण खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि थी।
लंबे कार्यकाल का अंत: एडोब के सीईओ पद से हटने जा रहे शांतनु नारायण
13 Mar, 2026 12:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी एडोब के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) शांतनु नारायण ने अपने पद से हटने का फैसला किया है। कंपनी ने बताया कि नए सीईओ की नियुक्ति होने के बाद नारायण पद छोड़ देंगे, हालांकि वे कंपनी के बोर्ड के चेयरमैन के रूप में अपनी भूमिका जारी रखेंगे।
कंपनी ने यह घोषणा कब की?
यह घोषणा कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही (27 फरवरी 2026 को समाप्त) के वित्तीय परिणामों के दौरान की। इस घोषणा के बाद नैस्डैक कंपोजिट पर सूचीबद्ध एडोब के शेयर आफ्टर-आवर्स ट्रेडिंग में लगभग सात प्रतिशत तक गिर गए।
18 वर्षों से रहे कंपनी के सीईओ
कंपनी की ओर से नैस्डैक को दी गई एक्सचेंज फाइलिंग में कहा गया कि नरायेन, जो पिछले 18 वर्षों से एडोब के सीईओ हैं, ने बोर्ड द्वारा उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति के बाद अपने पद से हटने का निर्णय लिया है।शांतनु नरायाण ने 18 वर्षों तक एडोब के सीईओ के रूप में सेवा दी है। उन्होंने उत्तराधिकारी नियुक्त होने के बाद सीईओ पद से संक्रमण करने का निर्णय लिया है। वे कंपनी के बोर्ड के चेयर के रूप में बने रहेंगे।
कैसा रहा नारायण का कार्यकाल?
नारायण ने 1988 में एडोब जॉइन किया था, जहां वे वाइस प्रेसिडेंट और जनरल मैनेजर के रूप में जुड़े थे। इसके बाद 2007 में उन्हें कंपनी का सीईओ नियुक्त किया गया। उनके नेतृत्व में एडोब ने अपने पारंपरिक सॉफ्टवेयर लाइसेंस मॉडल से हटकर सब्सक्रिप्शन आधारित मॉडल अपनाया और क्रिएटिव क्लाउड प्लेटफॉर्म के जरिए अपने बिजनेस को बड़े पैमाने पर विस्तार दिया।उनके कार्यकाल में कंपनी ने डिजिटल क्रिएटिव टूल्स और सॉल्यूशंस के क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाई और अब कंपनी जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में नए अवसरों पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।
कंपनी ने शुरू की नए सीईओ की तलाश
कंपनी ने यह भी बताया कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने नए सीईओ की तलाश की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए एक विशेष समिति गठित की गई है, जो संभावित उम्मीदवारों के चयन की निगरानी करेगी।बोर्ड ने एडोब के लीड इंडिपेंडेंट डायरेक्टर फ्रैंक काल्डेरोनी को इस विशेष समिति का चेयर नियुक्त किया है। यह समिति आंतरिक और बाहरी दोनों प्रकार के उम्मीदवारों पर विचार करेगी।
सत्य नडेला ने की नारायण की सराहना
नारायण के कार्यकाल की सराहना करते हुए सत्य नडेला ने सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई दी। नडेला ने कहा कि एडोब में शानदार और ऐतिहासिक कार्यकाल के लिए बधाई शांतनु। आपने दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर कंपनियों में से एक का निर्माण किया है और क्रिएटर्स, उद्यमियों और ब्रांड्स के लिए नई संभावनाएं खोली हैं। उन्होंने आगे कहा कि नरायेन के नेतृत्व और क्रिएटिव इकोसिस्टम के प्रति उनके दृष्टिकोण ने पूरी टेक इंडस्ट्री पर स्थायी प्रभाव डाला है।एडोब ने कहा कि कंपनी के नए सीईओ के चयन की प्रक्रिया जारी रहने के दौरान नरायेन बोर्ड के चेयर के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे।
सोना हुआ सस्ता, चांदी में भारी गिरावट; सर्राफा बाजार में आज फिसले दाम
12 Mar, 2026 12:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैश्विक तनाव का असर सोने-चांदी की कीमतों में देखने को मिल रहा है। चांदी की कीमत 2410 रुपये गिरकर 2.67 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। वहीं सोने का भाव 530 रुपये गिरकर 1.62 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
वैश्विक बाजारों में सोने-चांदी का भाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। मजबूत अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण निवेशकों की सतर्कता बढ़ गई, जिससे कीमती धातुओं पर दबाव पड़ा।स्पॉट गोल्ड की कीमत 0.2% गिरकर 5,165.73 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। वहीं अप्रैल डिलीवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी 0.2% की गिरावट के साथ 5,171.40 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। चांदी की कीमत में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ और स्पॉट सिल्वर 85.82 डॉलर प्रति औंस पर लगभग स्थिर रहा।इस बीच अमेरिकी डॉलर करीब 0.2% मजबूत हुआ। डॉलर के मजबूत होने से सोना-चांदी जैसी डॉलर में कीमत वाली कमोडिटी अन्य मुद्राओं के निवेशकों के लिए महंगी हो जाती हैं, जिससे मांग पर असर पड़ता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, मेलबर्न स्थित वैंटेज मार्केट्स की विश्लेषक हेबे चेन का मानना है कि सोने में आई यह गिरावट कमजोरी नहीं बल्कि बाजार में अस्थायी ठहराव का संकेत है। उनके अनुसार, महंगाई बढ़ने की आशंका ने डॉलर को मजबूत कर दिया है और इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा जल्द ब्याज दर घटाने की उम्मीदें फिलहाल टल गई हैं। इसी वजह से निवेशकों ने कुछ समय के लिए सोने से दूरी बना ली है, क्योंकि बाजार में आमतौर पर एक समय में एक ही सुरक्षित निवेश को प्राथमिकता मिलती है।
क्या बदलेगा 52 साल पुराना कानून? अमेरिका में टैरिफ नियमों पर मंथन तेज
12 Mar, 2026 12:43 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व टैरिफ व्यवस्था को रद्द किए जाने के बाद ट्रंप प्रशासन ने विदेशी मैन्युफैक्चरिंग पर नई व्यापार जांच शुरू कर दी है। इस कदम को उन अरबों डॉलर के राजस्व की भरपाई की कोशिश माना जा रहा है जो अदालत के फैसले के बाद सरकार को खोना पड़ा।अमेरिकी प्रशासन ने बुधवार को ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 301 के तहत यह जांच शुरू की है। इस प्रक्रिया के तहत विदेशी कंपनियों और देशों की औद्योगिक नीतियों की जांच की जाएगी, जिसके बाद उन पर नए आयात शुल्क (टैरिफ) लगाए जा सकते हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार की नीति में बदलाव नहीं हुआ है, केवल इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण बदल सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी उद्योग और नौकरियों की सुरक्षा करना है।
कई देशों की नीतियों की होगी जांच
नई जांच के दायरे में कई बड़े व्यापारिक साझेदार देश शामिल हैं। इनमें भारत, चीन, यूरोपीय संघ, बांग्लादेश, जापान, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, इंडोनेशिया, मलेशिया, कंबोडिया, थाईलैंड, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, मेक्सिको और ताइवान जैसे देश शामिल हैं। अमेरिकी सरकार इन देशों की उन नीतियों की जांच करेगी जिनसे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान हो सकता है। इसमें औद्योगिक सब्सिडी, मजदूरी दमन और अमेरिकी बाजार में लगातार व्यापार अधिशेष जैसे मुद्दों को देखा जाएगा।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में फिर बढ़ सकती है हलचल
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस जांच के बाद नए टैरिफ लागू होते हैं तो वैश्विक व्यापार में फिर तनाव बढ़ सकता है। इससे पहले लगाए गए टैरिफ के कारण अमेरिका और उसके कई व्यापारिक साझेदारों के बीच तीखी आर्थिक खींचतान देखने को मिली थी। हालांकि ग्रीर ने कहा कि पिछले साल घोषित व्यापार ढांचे अपने आप में अलग हैं और नई जांच उनसे सीधे जुड़ी नहीं है। फिर भी इन समझौतों को ध्यान में रखते हुए आगे का निर्णय लिया जा सकता है।
जबरन श्रम से बने उत्पादों पर भी कार्रवाई
ट्रंप प्रशासन ने सेक्शन 301 के तहत एक और जांच शुरू करने की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य जबरन श्रम से बनाए गए उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाने की संभावनाओं का आकलन करना है। इसके अलावा डिजिटल सेवा कर, दवाओं की कीमत और समुद्री प्रदूषण जैसे मुद्दों पर भी भविष्य में नई जांच शुरू हो सकती है।
समय सीमा का भी दबाव
अभी अमेरिका ने सेक्शन 122 के तहत विदेशी उत्पादों पर 10% का अस्थायी टैरिफ लगाया हुआ है, जिसकी अवधि 150 दिनों के बाद 24 जुलाई को समाप्त हो जाएगी। ट्रंप पहले इस आयात शुल्क को 15% तक बढ़ाने की बात कह चुके हैं, लेकिन अभी तक ऐसा लागू नहीं किया गया है। ग्रीर के अनुसार प्रशासन जल्द से जल्द जांच पूरी कर राष्ट्रपति को संभावित विकल्प देना चाहता है, ताकि नई व्यापार नीति तय की जा सके।
संभावित LPG संकट पर सरकार की तैयारी, सुरेश गोपी ने बताया सप्लाई बढ़ाने का प्लान
12 Mar, 2026 12:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैश्विक आपूर्ति बाधित होने के कारण उत्पन्न एलपीजी संकट को लेकर केंद्र सरकार ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने गुरुवार को कहा कि भारत के लिए अतिरिक्त एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करने के नए रास्ते खुल रहे हैं और संकट को नियंत्रित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
आपूर्ति संबंधी मुद्दों के खुलासे पर क्या बोले मंत्री?
मंत्री ने बताया कि केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को संसद में एलपीजी संकट से जुड़े सवालों का जवाब दिया था। उन्होंने कहा कि कुछ आपूर्ति संबंधी मुद्दों का खुलासा कूटनीतिक संवेदनशीलताओं के कारण सार्वजनिक रूप से नहीं किया जा सकता, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े मामलों पर।गोपि ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न देशों से बातचीत कर यह मुद्दा उठाया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े संकट का आम लोगों के जीवन पर असर पड़ रहा है और भारत के लिए कुछ राहत या छूट देने का अनुरोध किया गया है। उन्होंने कहा कि सटीक आंकड़े साझा नहीं किए जा सकते, लेकिन भारत को अतिरिक्त एलपीजी उपलब्ध कराने के रास्ते बन रहे हैं।
मौजूदा स्थिति में किसे दी जा रही प्राथमिकता?
मंत्री के अनुसार मौजूदा स्थिति में गैस की आपूर्ति में प्राथमिकता आपात सेवाओं को दी जा रही है। अस्पतालों और श्मशान घाट जैसी आवश्यक सेवाओं को पहले गैस उपलब्ध कराई जा रही है ताकि जरूरी कामकाज प्रभावित न हो।उन्होंने कहा कि मंत्रालय के आकलन के अनुसार स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले कई तकनीकी और आपूर्ति से जुड़े पहलुओं पर भारत का सीधा नियंत्रण नहीं है। गोपि ने यह भी कहा कि एलपीजी संकट का असर केवल भारत में ही नहीं, बल्कि कई अन्य देशों में भी रोजमर्रा के जीवन पर पड़ रहा है।
गैस की कीमतों पर क्या बोले मंत्री?
गैस की कीमतों के सवाल पर मंत्री ने कहा कि कीमतों को नियंत्रित करने के लिए एक नियामक व्यवस्था मौजूद है और उसी के अनुसार कदम उठाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत तय करने का अधिकार सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को दिया गया है।उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इस मुद्दे पर भारत किसी देश के साथ युद्ध नहीं कर सकता। गोपि ने कहा कि वे स्वयं और देश के अधिकांश लोग युद्ध के पक्ष में नहीं हैं।रेस्तरां और अन्य व्यवसायों के गैस की कमी के कारण बंद होने की खबरों पर उन्होंने कहा कि सरकार समाधान तलाशने की कोशिश कर रही है और इन्हें जल्द दोबारा खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संकट की स्थिति में लोगों को संयम बरतने की आवश्यकता है, जैसा कि कोविड-19 महामारी के दौरान देखा गया था।
होर्मुज संकट के बीच भारत को राहत, जयशंकर–अराघची वार्ता के बाद निकला समाधान
12 Mar, 2026 12:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और ईरान-इस्राइल-अमेरिका जंग के बीच भारत को एक बड़ी कूटनीतिक सफलता हाथ लगी है। ईरान ने भारतीय झंडे वाले तेल टैंकरों को रणनीतिक रूप से अहम 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। यह घटनाक्रम भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास आराघची के बीच हुई उच्च-स्तरीय वार्ता के बाद सामने आया है।
इन दो टैंकरों को मिली अनुमति
इसके बाद कम से कम दो भारतीय टैंकर पुष्पक और परिमल सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे हैं। यह वही समुद्री मार्ग है, जहां बढ़ते तनाव के कारण कई अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। यह अनुमति भारत के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि वर्तमान में इस क्षेत्र से गुजरने वाले अमेरिका, यूरोप और इस्राइल के जहाजों को प्रतिबंधों और हमलों के गंभीर जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।
युद्ध का असर
अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ संघर्ष अब 12वें दिन में पहुंच गया है। लगातार बढ़ते तनाव के कारण क्षेत्र में समुद्री यातायात लगभग ठप हो गया है और वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है।ईरान ने भी इस दौरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। तेहरान का कहना है कि केवल वे जहाज सुरक्षित रूप से गुजर सकते हैं जो अमेरिका और इस्राइल के हितों से जुड़े नहीं हैं।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच लगभग 55 किलोमीटर चौड़ा समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है।सामान्य परिस्थितियों में यहां से प्रतिदिन करीब 1.3करोड़ बैरल तेल गुजरता है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 31 प्रतिशत है।इस मार्ग में बाधा आने से इराक, कुवैत, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के निर्यात पर सीधा असर पड़ता है।दुनिया के तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का भी बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।इसलिए यहां तनाव बढ़ने पर वैश्विक बाजार, सप्लाई चेन और ऊर्जा कीमतों पर तुरंत असर देखने को मिलता है।रक्षा विश्लेषकों के मुताबिक ईरान के पास ऐसे एंटी-शिप मिसाइल, ड्रोन, तेज हमला करने वाली नौकाएं और समुद्री बारूदी सुरंगें हैं, जिनकी मदद से वह पूरे होर्मुज क्षेत्र में जहाजों को निशाना बना सकता है। यही वजह है कि इस समुद्री मार्ग पर बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।
भारत के लिए इसके मायने
ईरान द्वारा विदेशी जहाजों को निशाना बनाए जाने के बीच केवल भारतीय टैंकरों को सुरक्षित मार्ग मिलना भारत की स्वतंत्र कूटनीति का परिणाम माना जा रहा है। इस कदम से युद्ध और नाकेबंदी के मौजूदा हालात में भी भारत की ऊर्जा आपूर्ति शृंखला के सुचारू रूप से चलते रहने में मदद मिलेगी।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर, Brent Crude की कीमतों में तेज उछाल
12 Mar, 2026 12:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं।
ब्रेंट क्रूड की कीमत में नौ प्रतिशत का उछाल
अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत नौ प्रतिशत से अधिक बढ़कर 100.76 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि अमेरिकी मानक डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 9 प्रतिशत उछलकर लगभग 95 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
आईईए ने क्या फैसला लिया?
तेल की कीमतों में यह तेजी ऐसे समय पर आई है जब कीमतों को काबू में रखने के लिए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) ने आपातकालीन भंडार से कच्चा तेल जारी करने का फैसला किया है। बुधवार को आईईए के 32 सदस्य देशों ने मिलकर इमरजेंसी रिजर्व से 400 मिलियन बैरल कच्चा तेल बाजार में जारी करने की घोषणा की, जो एजेंसी के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा रिलीज माना जा रहा है।
अमेरिकी ऊर्जा विभाग का एलान
इसके अलावा अमेरिका के ऊर्जा विभाग ने भी रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व से 172 मिलियन बैरल तेल जारी करने का एलान किया है। अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट के मुताबिक, तेल की आपूर्ति अगले सप्ताह से शुरू हो सकती है और इसे पूरी तरह जारी होने में लगभग 120 दिन लगेंगे।इससे पहले पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के कारण कच्चे तेल की कीमत 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, हालांकि बाद में यह गिरकर करीब 80 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई थी।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा तेजी की प्रमुख वजह होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ता तनाव और जहाजों की आवाजाही में कथित बाधा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।होर्मुज जलडमरूमध्य पश्चिम एशिया का एक संकरा लेकिन बेहद अहम समुद्री मार्ग है, जिसके जरिए दुनिया के कुल कच्चे तेल व्यापार का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार और कीमतों पर पड़ता है।
Iran के फैसले से बदला खेल, भारतीय जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति
12 Mar, 2026 12:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम एशिया में भड़के युद्ध के बीच पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई लाइन खतरे में है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पश्चिमी देशों के विदेशी जहाजों के लिए लगभग 'नो-गो जोन' बन चुका है। लेकिन इस वैश्विक हाहाकार के बीच भारत ने एक बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल की है। पूरी दुनिया की नजर इस पर बनी हुई है। निश्चित तौर पर भारत की इस सफलता का देश में ऊर्जा संकट की संभावित आशंका को दूर करने में मदद मिलेगी।देश के लिए यह महत्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की एक कॉल ने वह कर दिखाया है जो पश्चिमी देशों के जंगी बेड़े नहीं कर सके। ईरान ने सिर्फ भारतीय झंडे वाले तेल टैंकरों को इस खतरनाक जलमार्ग से सुरक्षित गुजरने की विशेष अनुमति दे दी है। आइए आसान सवाल-जवाब से समझते हैं भारत की इस बड़ी कूटनीतिक जीत के मायने:
सवाल: अचानक होर्मुज में क्या हुआ और भारत को यह कूटनीतिक कामयाबी कैसे मिली?
जवाब: ईरान और इस्राइल के बीच चल रहे भीषण युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव चरम पर है। विदेशी जहाजों पर लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले हो रहे हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसी बीच, भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास आराघची के बीच एक उच्च-स्तरीय कूटनीतिक वार्ता हुई। इस बातचीत का सीधा और त्वरित असर यह हुआ कि ईरान ने 'भारत के झंडे वाले' टैंकरों को इस क्षेत्र से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी।
सवाल: इस कूटनीतिक समझौते का जमीनी असर क्या देखने को मिला?
जवाब: कूटनीतिक सहमति बनते ही इसके नतीजे समुद्र में दिखने लगे। समझौते के तुरंत बाद दो भारतीय तेल टैंकर, 'पुष्पक' और 'परिमल', इस संवेदनशील जलडमरूमध्य से बिल्कुल सुरक्षित गुजरते हुए देखे गए। यह ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका, यूरोप और इस्राइल के जहाज अब भी प्रतिबंधों और हमलों के गंभीर खतरे का सामना कर रहे हैं।
सवाल: ईरान की रणनीति क्या है और वह दूसरे देशों के जहाजों को क्यों रोक रहा है?
जवाब: ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को एक रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। ईरान ने खुली चेतावनी दी है कि वह 'अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए एक लीटर तेल भी यहां से नहीं गुजरने देगा'। उसका मुख्य मकसद इस महत्वपूर्ण चोकपॉइंट को नियंत्रित करके दुनिया की ऊर्जा व्यवस्था को झकझोरना और पश्चिमी देशों पर दबाव बनाना है।
सवाल: भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए इस कामयाबी के क्या मायने हैं?
जवाब: होर्मुज का रास्ता कच्चे तेल की सप्लाई के लिए दुनिया की जीवनरेखा है। युद्ध के कारण आपूर्ति बाधित होने के डर से तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ऐसे में, जब दुनिया भर के टैंकर निशाने पर हैं, केवल भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिलने से देश की ऊर्जा आपूर्ति शृंखला मजबूत बनी रहेगी। इससे भारत में तेल की किल्लत और महंगाई का खतरा काफी हद तक कम हो गया है।यह घटना साबित करती है कि युद्ध के चरम दौर में भी भारत की स्वतंत्र कूटनीति कितनी प्रभावी है। जहां एक ओर पश्चिम एशिया में स्थिति लगातार बिगड़ रही है, वहीं भारत ने बिना किसी टकराव के, सिर्फ बातचीत से अपने आर्थिक हितों और ऊर्जा सप्लाई को सुरक्षित कर लिया है।
ग्लोबल तनाव और FII बिकवाली से रुपया कमजोर, डॉलर के सामने दम निकला
11 Mar, 2026 12:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण भारतीय मुद्रा पर दबाव बना हुआ है. बुधवार सुबह के कारोबार में Indian Rupee अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4 पैसे कमजोर होकर 91.89 के स्तर पर पहुंच गया. हालांकि विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि डॉलर की कमजोरी और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने रुपये की तेज गिरावट को कुछ हद तक सीमित कर दिया|
रुपये में क्यों गिरावट?
Finrex Treasury Advisors LLP के हेड ऑफ ट्रेजरी और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर Anil Kumar Bhansali के अनुसार मंगलवार को रुपया गिरकर 92.12 के स्तर तक पहुंच गया था. हालांकि State Bank of India के बॉन्ड जारी होने और Reserve Bank of India की ओर से 92 के स्तर के आसपास डॉलर की बिक्री के कारण रुपये में फिर से मजबूती देखने को मिली. उन्होंने कहा कि रुपये की लगातार गिरावट से आरबीआई असहज था और वह नहीं चाहता था कि रुपया 92.00 के स्तर से और नीचे जाए|अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (Interbank Forex Market) में रुपया 91.92 प्रति डॉलर पर खुला और बाद में 91.89 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले बंद स्तर से 4 पैसे की गिरावट को दिखाता है. इससे पहले मंगलवार को रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर से उबरते हुए United States Dollar के मुकाबले 36 पैसे मजबूत होकर 91.85 पर बंद हुआ था|
तेल की कीमतों में गिरावट से राहत
इस बीच छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला US Dollar Index 0.04 प्रतिशत गिरकर 98.78 पर रहा. घरेलू शेयर बाजार में भी हल्की कमजोरी देखी गई. शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 96.12 अंक गिरकर 78,109.86 पर आ गया, जबकि Nifty 50 22.95 अंक फिसलकर 24,238.65 के स्तर पर पहुंच गया.वैश्विक बाजार में Brent Crude की कीमत 0.38 प्रतिशत गिरकर 87.47 डॉलर प्रति बैरल रही, जिससे कुछ राहत मिली. वहीं शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मंगलवार को 4,672.64 करोड़ रुपये के शेयर बेचे|
पश्चिम एशिया संकट से निवेशकों में घबराहट, सेंसेक्स में 900+ अंकों की गिरावट
11 Mar, 2026 12:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और विदेशी निधियों की निरंतर निकासी के बीच एक दिन की राहत के बाद बुधवार को शुरुआती कारोबार में बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई। ब्लू-चिप बैंक शेयरों में बिकवाली के कारण भी बाजार में गिरावट आई। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4 पैसे गिरकर 91.89 पर आ गया। सेंसेक्स 11:50 तक 975.74 अंक या 1.25% टूटकर 77,230.24 अंक पर आ गया। वहीं निफ्टी 267.75 अंक या 1.10% गिरकर 23,993.85 अंक पर आ गया।शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 96.12 अंक गिरकर 78,109.86 पर आ गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 22.95 अंक गिरकर 24,238.65 पर पहुंच गया।
सेंसेक्स की कंपनियों का हाल
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से कोटक महिंद्रा बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर और बजाज फिनसर्व प्रमुख पिछड़ने वाली कंपनियों में शामिल थीं। इंटरग्लोब एविएशन, अदानी पोर्ट्स, टाटा स्टील और एनटीपीसी लाभ कमाने वाली कंपनियों में शामिल थीं।
बाजार में सतर्कता बनी हुई है
ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि हालांकि मंगलवार को शेयर बाजारों में तकनीकी रूप से सुधार देखने को मिला, लेकिन अंतर्निहित भावना सतर्कता बनी हुई है क्योंकि पश्चिम एशिया में गहराता संकट ऊर्जा की बढ़ती कीमतों, प्रमुख शिपिंग मार्गों में व्यवधान और निवेशकों की जोखिम लेने की प्रवृत्ति में बदलाव के माध्यम से वैश्विक वित्तीय बाजारों को प्रभावित करना शुरू कर रहा है।उन्होंने आगे कहा कि इक्विटी बाजार के दृष्टिकोण से, इस तरह की भू-राजनीतिक उथल-पुथल से अस्थिरता के तीव्र दौर उत्पन्न होते हैं क्योंकि वैश्विक निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख करते हैं और जोखिम-संवेदनशील बाजारों में अपना जोखिम कम करते हैं।लिवेलॉन्ग वेल्थ के रिसर्च एनालिस्ट और संस्थापक हरिप्रसाद के ने कहा कि वैश्विक संकेत मिले-जुले बने हुए हैं क्योंकि निवेशक पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों और कच्चे तेल की कीमतों में हो रहे तीव्र उतार-चढ़ाव पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।
एशियाई बाजारों में दिखी तेजी
एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 3 प्रतिशत से अधिक चढ़ गया, जबकि जापान का निक्केई 225 सूचकांक 2.5 प्रतिशत ऊपर कारोबार कर रहा था। शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक भी सकारात्मक दायरे में थे। अमेरिकी बाजार मंगलवार को स्थिर रुख के साथ बंद हुआ।
ब्रंट क्रूड का भाव गिरकर 87.46 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड में 0.39 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 87.46 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मंगलवार को 4,672.64 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 6,333.26 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। मंगलवार को सेंसेक्स 639.82 अंक या 0.82 प्रतिशत बढ़कर 78,205.98 पर बंद हुआ। निफ्टी 233.55 अंक या 0.97 प्रतिशत चढ़कर 24,261.60 पर समाप्त हुआ।
होर्मुज में बढ़ा तनाव, फंसे जहाजों को निकालने के लिए भारत की बड़ी तैयारी
11 Mar, 2026 11:19 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर सतर्क हो गया है। सूत्रों के अनुसार भारत सरकार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले भारतीय जहाजों को सुरक्षा देने के लिए नौसेना के युद्धपोत तैनात करने पर विचार कर रही है।न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट अनुसार यह कदम भारतीय जहाज मालिकों के अनुरोध के बाद विचाराधीन है, क्योंकि पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण यह समुद्री मार्ग अब उच्च जोखिम वाले क्षेत्र में बदल गया है।
जहाज मालिकों ने मांगी नौसेना सुरक्षा
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक भारत के समुद्री प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी कैप्टन पी.सी. मीणा ने कहा कि भारतीय जहाज मालिकों ने अपने जहाजों के लिए नौसेना एस्कॉर्ट की मांग की है। इसी के बाद सरकार इस विकल्प पर विचार कर रही है कि जरूरत पड़ने पर भारतीय युद्धपोत भेजे जाएं, ताकि भारतीय व्यापारी जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर सकें।दरअसल हाल के दिनों में ईरान, अमेरिका और इस्राइल से जुड़े हमलों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास समुद्री गतिविधियों में खतरा बढ़ गया है। इस कारण बड़ी संख्या में जहाज दोनों ओर फंसे होने की खबरें भी सामने आई हैं।
पाकिस्तान ने भी भेजे युद्धपोत
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान नौसेना ने भी अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए युद्धपोत पश्चिम एशिया भेजने की घोषणा की है। पाकिस्तान की राष्ट्रीय शिपिंग कंपनी के दो जहाज पहले ही नौसेना की निगरानी में आ चुके हैं। हालांकि पाकिस्तान ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उसके टैंकर किस समुद्री मार्ग से वापस लाए जा रहे हैं।पाकिस्तान अपनी अधिकांश प्राकृतिक गैस कतर से और कच्चा तेल सऊदी अरब व संयुक्त अरब अमीरात से आयात करता है, इसलिए उसके लिए भी यह समुद्री मार्ग बेहद अहम है।
ऊर्जा आपूर्ति पर सरकार की नजर
इस बीच भारत में ईंधन आपूर्ति और कीमतों को लेकर भी सरकार सतर्क है। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के साथ बैठक कर देश की ऊर्जा स्थिति की समीक्षा की।प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को निर्देश दिए हैं कि पश्चिम एशिया संकट का असर भारतीय उपभोक्ताओं तक कम से कम पहुंचे और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति निर्बाध बनी रहे।
अन्य देशों से ऊर्जा खरीद बढ़ाने की तैयारी
भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आयात स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में भी कदम उठा रहा है। सूत्रों के मुताबिक देश अब अमेरिका, रूस, वेनेजुएला, ऑस्ट्रेलिया और अन्य महासागरीय देशों से भी ऊर्जा संसाधनों की खरीद बढ़ाने पर काम कर रहा है।साथ ही सरकार ने घरेलू आपूर्ति बनाए रखने के लिए एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और प्राकृतिक गैस के उपयोग में प्राथमिकता तय करने का फैसला लिया है। इसके तहत घरेलू रसोई गैस और परिवहन क्षेत्र के लिए गैस आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है।
होटल-रेस्तरां उद्योग पर संकट
इधर एलपीजी सिलेंडर की कमी का असर होटल और रेस्तरां उद्योग पर भी दिखने लगा है। नेशनल रेस्तरां एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के अध्यक्ष सागर दरयानी ने कहा कि कई शहरों में रेस्तरां के पास केवल एक-दो दिन का गैस स्टॉक बचा है।उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द आपूर्ति नहीं बढ़ाई गई तो मुंबई, बंगलूरू और पुणे जैसे शहरों में कई होटल और रेस्तरां अगले दो दिनों में बंद करने की नौबत आ सकती है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार दोनों पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे में भारत अपने व्यापारिक जहाजों और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए लगातार रणनीतिक कदमों पर विचार कर रहा है।
गोल्ड-सिल्वर मार्केट में दबाव, सर्राफा बाजार में कीमतें फिसलीं
11 Mar, 2026 10:57 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और अमेरिकी अधिकारियों के हालिया बयानों के बाद बुधवार को सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट के साथ कारोबार शुरू हुआ। ऊर्जा बाजार में बढ़ती अस्थिरता का असर कीमती धातुओं पर भी दिखाई दे रहा है। चांदी की कीमत 1560 रुपये गिरकर 2.75 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। वहीं सोने का भाव 560 रुपये गिरकर 1.63 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
घरेलू बाजार में सोने-चांदी का भाव
राजधानी दिल्ली में आज सोने की कीमतों में हल्की बढ़त दर्ज की गई है। 24 कैरेट सोना प्रति 10 ग्राम ₹10 महंगा हो गया है, जबकि 22 कैरेट सोना भी प्रति 10 ग्राम ₹10 बढ़ा है।पिछले दो दिनों के रुझान पर नजर डालें तो सोने में तेज उछाल देखने को मिला है। 24 कैरेट सोना दो दिनों में कुल ₹710 प्रति 10 ग्राम महंगा हो चुका है, वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत में भी दो दिनों में ₹660 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।चांदी की कीमतों में भी लगातार तेजी बनी हुई है। राजधानी में एक किलो चांदी लगातार दूसरे दिन महंगी हुई है। एक दिन की गिरावट के बाद पिछले दो दिनों में चांदी की कीमत ₹10,100 प्रति किलो तक बढ़ गई है, जिससे बाजार में फिर से मजबूती का संकेत मिल रहा है।
वैश्विक बाजारों में सोने-चांदी का भाव
एशियाई ट्रेडिंग घंटों के दौरान स्पॉट गोल्ड की कीमत हल्की गिरावट के साथ 0.34% नीचे आकर 5224 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी, हालांकि यह अब भी 5200 डॉलर के स्तर से ऊपर बनी हुई है। वहीं स्पॉट सिल्वर की कीमत भी 0.32% गिरकर 89.35 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
लिपुलेख दर्रा खुलने से सीमा व्यापार में लौटेगी रौनक, स्थानीय कारोबारियों में उत्साह
