व्यापार
LPG और तेल पर भारत-UAE की बातचीत से उम्मीदें बढ़ीं
14 May, 2026 10:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल यानी 15 मई को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण यात्रा पर रहेंगे। मध्य पूर्व में व्याप्त मौजूदा भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री का यह दौरा भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक हितों के दृष्टिकोण से मील का पत्थर साबित हो सकता है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के मध्य होने वाली उच्च स्तरीय वार्ता में एलपीजी आपूर्ति और सामरिक तेल भंडार को लेकर दो निर्णायक समझौतों पर मुहर लगने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।
ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति पर विशेष विमर्श
प्रधानमंत्री की इस संक्षिप्त लेकिन प्रभावी यात्रा के दौरान ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव पर भी विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है। भारत इस संवेदनशील क्षेत्र में स्थिरता और शांति बनाए रखने का पुरजोर समर्थन करता है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में किसी भी प्रकार के सैन्य संघर्ष का सीधा प्रभाव कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों पर पड़ेगा। तेल की कीमतों में होने वाली संभावित बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती पेश कर सकती है, इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी इस मुलाकात के दौरान कूटनीतिक समाधान और आपसी सहयोग के माध्यम से आर्थिक हितों की रक्षा पर बल देंगे।
सामरिक तेल भंडार और ओपेक के नए समीकरण
ईरान और अमेरिका के मध्य संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों पर बढ़ते खतरे ने भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के प्रति अधिक सतर्क कर दिया है। चूंकि भारत अपनी पेट्रोलियम आवश्यकताओं के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर है, इसलिए यूएई के साथ होने वाले नए समझौते भारत के आपातकालीन तेल भंडार को और अधिक सुदृढ़ बनाएंगे। यह दौरा इस लिहाज से भी ऐतिहासिक है क्योंकि हाल ही में यूएई द्वारा 'ओपेक' संगठन से अलग होने की घोषणा के बाद भारत के पास सीधे तौर पर अधिक अनुकूल और किफायती व्यापारिक शर्तें तय करने का एक बड़ा अवसर पैदा हो गया है।
व्यापक द्विपक्षीय एजेंडा और आर्थिक साझेदारी
भारत के तीसरे सबसे बड़े व्यापारिक भागीदार के रूप में यूएई के साथ संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक ठोस रूपरेखा तैयार की गई है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस संवाद में न केवल ऊर्जा, बल्कि रक्षा सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे भविष्योन्मुखी विषयों पर भी चर्चा की जाएगी। भारत का लक्ष्य अपनी वैश्विक व्यापारिक उपस्थिति को मजबूत करना है, जिसमें खाड़ी देशों के साथ-साथ यूरोपीय भागीदारों के साथ भी समन्वय बिठाने की रणनीति शामिल है ताकि विभिन्न क्षेत्रों में निवेश और तकनीक के प्रवाह को सुनिश्चित किया जा सके।
चार देशों की महत्वपूर्ण यूरोपीय यात्रा का आगाज
यूएई में अपना संक्षिप्त प्रवास पूर्ण करने के पश्चात प्रधानमंत्री मोदी पांच दिवसीय यूरोप दौरे के लिए प्रस्थान करेंगे, जहाँ वे नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली जैसे प्रमुख देशों का दौरा करेंगे। नीदरलैंड में किंग विलेम-अलेक्जेंडर और पीएम रोब जेटन के साथ निवेश पर चर्चा के बाद प्रधानमंत्री स्वीडन जाएंगे जहाँ रक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर विशेष फोकस रहेगा। इसके बाद वे 43 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री के रूप में नॉर्वे की धरती पर कदम रखेंगे और 'भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन' में भाग लेंगे। इस कूटनीतिक यात्रा का समापन इटली में जॉर्जिया मेलोनी के साथ होने वाली द्विपक्षीय वार्ता से होगा, जो भारत और यूरोप के संबंधों को एक नई दिशा प्रदान करेगी।
निफ्टी 23500 के करीब, बाजार में मेटल-फार्मा शेयरों की बढ़त
14 May, 2026 10:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में पिछले कई सत्रों से जारी गिरावट और बिकवाली के दौर के बाद गुरुवार को कारोबार की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ हुई। सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान तब लौटी जब शुरुआती मिनटों में ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों ने अच्छी बढ़त के साथ हरे निशान पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सुबह सवा नौ बजे के आसपास बाजार में जबरदस्त उत्साह देखा गया और सेंसेक्स करीब साढ़े चार सौ अंकों की छलांग लगाकर 75,057 के पार निकल गया, जबकि निफ्टी ने भी 23,550 के मनोवैज्ञानिक स्तर को छूने का प्रयास किया।
बाजार की चाल और उतार-चढ़ाव का दौर
कारोबार की शुरुआत जितनी धमाकेदार रही, समय बीतने के साथ बाजार की चाल में उतनी ही अस्थिरता भी देखने को मिली। शुरुआती तेजी के बाद मुनाफावसूली का दबाव बढ़ा, जिसके कारण सूचकांक अपनी बढ़त को पूरी तरह बरकरार नहीं रख पाए और बढ़त का ग्राफ थोड़ा नीचे आया। सुबह दस बजे के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली बढ़त ही रह गई, जो इस बात का संकेत है कि निवेशक अभी भी ऊंचे स्तरों पर सावधानी बरत रहे हैं और बाजार में खरीदारों व बिकवालों के बीच कड़ी टक्कर जारी है।
दिग्गज शेयरों का प्रदर्शन और क्षेत्रीय स्थिति
सेंसेक्स की शीर्ष तीस कंपनियों में से अधिकांश शेयर मजबूती के साथ कारोबार कर रहे हैं, जिनमें विशेष रूप से अदाणी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स और ट्रेंट जैसे शेयरों ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया। इसके विपरीत, तकनीकी क्षेत्र यानी आईटी शेयरों में सुस्ती का माहौल बना हुआ है जहाँ टीसीएस और इंफोसिस जैसी दिग्गज कंपनियाँ लाल निशान में कारोबार करती दिखीं। इसी बीच मुद्रा बाजार में कमजोरी दर्ज की गई और रुपया डॉलर के मुकाबले थोड़ा फिसलकर अपने नए स्तरों पर पहुँच गया, जिससे निर्यात आधारित कंपनियों पर असर दिखने की संभावना है।
वैश्विक कूटनीति और निवेशकों का भरोसा
बाजार में आई इस हरियाली के पीछे अमेरिका और चीन के बीच होने वाली उच्च स्तरीय शिखर वार्ता को एक बड़ा कारण माना जा रहा है। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार और तकनीक को लेकर होने वाली चर्चा से वैश्विक बाजारों को स्थिरता मिलने की उम्मीद जगी है। साथ ही, घरेलू संस्थागत निवेशकों द्वारा की जा रही लगातार खरीदारी ने विदेशी निवेशकों की बिकवाली के प्रभाव को कम करने में मदद की है। विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय संकेतों और अमेरिकी बाजारों में तकनीकी शेयरों में आई तेजी ने भारतीय निवेशकों के मनोबल को बढ़ाने का काम किया है।
तकनीकी दृष्टिकोण और भविष्य की राह
बाजार के जानकारों का कहना है कि वर्तमान तेजी वैश्विक इक्विटी में सुधार और घरेलू स्तर पर मजबूत बुनियादी ढांचों के कारण बनी हुई है। वॉल स्ट्रीट से मिल रहे सकारात्मक रुझानों ने स्थानीय बाजार को सहारा दिया है, भले ही मुद्रास्फीति के कुछ आंकड़ों ने चिंता पैदा की हो। आने वाले समय में बाजार की दिशा काफी हद तक विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। फिलहाल बाजार एक सीमित दायरे में रहकर अपनी मजबूती साबित करने की कोशिश कर रहा है जिससे लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर बन रहे हैं।
मुंबई में फिर बढ़ी CNG कीमत, अब ₹84 प्रति किलो पहुंची गैस
14 May, 2026 08:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में सफर करने वाले आम लोगों के लिए आज की सुबह महंगाई का नया झटका लेकर आई है। महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने सीएनजी की कीमतों में 2 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी का ऐलान किया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। इस वृद्धि के बाद मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई जैसे प्रमुख इलाकों में सीएनजी के दाम 82 रुपये से बढ़कर अब 84 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गए हैं। ईंधन की कीमतों में अचानक हुए इस इजाफे ने न केवल निजी वाहन मालिकों बल्कि सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर रहने वाली एक बड़ी आबादी की चिंता बढ़ा दी है।
किराया बढ़ाने की तैयारी में जुटे ऑटो-टैक्सी यूनियन
सीएनजी के दाम बढ़ते ही मुंबई की लाइफलाइन कहे जाने वाले ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने भी तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। परिवहन यूनियनों का तर्क है कि ईंधन की कीमतों के साथ-साथ वाहनों के स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस लागत में भी भारी वृद्धि हुई है, जिससे पुराने किराए पर गाड़ी चलाना अब घाटे का सौदा साबित हो रहा है। ऑटो चालकों ने प्रशासन से मांग की है कि न्यूनतम किराए में कम से कम 1 रुपये की वृद्धि की जाए। यूनियनों का कहना है कि यदि सरकार जल्द ही किराए में संशोधन नहीं करती है, तो उनके लिए अपनी आजीविका चलाना मुश्किल हो जाएगा।
महंगाई की दोहरी मार से यात्री बेहाल
दूसरी ओर, इस संभावित किराया वृद्धि की खबर ने रोजाना यात्रा करने वाले नौकरीपेशा और मध्यम वर्गीय परिवारों के माथे पर बल ला दिए हैं। यात्रियों का कहना है कि पहले से ही खाद्य वस्तुओं और बिजली के दामों ने घर का बजट बिगाड़ रखा है, और अब परिवहन के महंगे होने से उनकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। लोगों को डर है कि ऑटो और टैक्सी के न्यूनतम किराए में बढ़ोतरी का असर उनकी मासिक बचत पर पड़ेगा। विशेषकर उन इलाकों में जहां बस कनेक्टिविटी कम है और लोग पूरी तरह ऑटो पर निर्भर हैं, वहां यात्रियों को ज्यादा आर्थिक बोझ झेलना पड़ सकता है।
प्रशासन के फैसले पर टिकी सबकी नजरें
हालांकि, सीएनजी की कीमतों में बदलाव के बावजूद परिवहन किराए में कोई भी आधिकारिक बढ़ोतरी तब तक नहीं होगी, जब तक परिवहन विभाग और संबंधित प्राधिकरण इसे अपनी मंजूरी नहीं दे देते। प्रशासन फिलहाल स्थिति का आकलन कर रहा है और यूनियनों की मांगों पर विचार करने की बात कह रहा है। लेकिन जानकारों का मानना है कि सीएनजी की बढ़ी हुई दरों को देखते हुए आने वाले दिनों में किराए में मामूली वृद्धि को टालना मुश्किल होगा। फिलहाल, मुंबई और आसपास के शहरों में बढ़ती परिवहन लागत ने महंगाई के मुद्दे पर एक नई बहस छेड़ दी है।
HPCL के शानदार Q4, निवेशकों के लिए 5 साल का सबसे बड़ा डिविडेंड
13 May, 2026 03:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल दिग्गज हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) के निवेशकों के लिए आज का दिन खुशियां लेकर आया है। कंपनी द्वारा मार्च 2026 तिमाही के शानदार वित्तीय नतीजे पेश करने और पिछले पांच वर्षों के सबसे बड़े लाभांश की घोषणा के बाद इसके शेयरों में जबरदस्त लिवाली देखी गई। बाजार खुलते ही कंपनी के शेयरों ने रफ्तार पकड़ी और एक समय यह 5 प्रतिशत से भी ज्यादा की छलांग लगाने में सफल रहा। हालांकि ऊपरी स्तरों पर कुछ निवेशकों ने मुनाफावसूली का रास्ता चुना जिससे कीमतों में हल्की गिरावट जरूर आई लेकिन मजबूत बुनियादी आधार के कारण स्टॉक अब भी ठोस बढ़त के साथ हरे निशान में बना हुआ है।
तिमाही मुनाफे में जोरदार उछाल और बेहतर मार्जिन
मार्च 2026 को समाप्त हुई चौथी तिमाही के दौरान हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने अपने शुद्ध मुनाफे में तिमाही आधार पर 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है जो अब बढ़कर 4,901 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। राजस्व के मोर्चे पर कंपनी ने 1.15 लाख करोड़ रुपये का कारोबार किया है जो पिछली तिमाही के लगभग बराबर ही रहा लेकिन परिचालन स्तर पर कंपनी का प्रदर्शन बेहद सराहनीय रहा है। परिचालन लाभ में 28 प्रतिशत की शानदार बढ़त देखने को मिली है और मार्जिन में भी 170 बेसिस प्वाइंट्स का सुधार हुआ है जो यह दर्शाता है कि कंपनी अपनी लागत और कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में सफल रही है।
पांच वर्षों का सबसे बड़ा डिविडेंड और सरकार को बड़ा लाभ
शानदार कारोबारी नतीजों के साथ-साथ कंपनी ने अपने शेयरधारकों के लिए 19 रुपये प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की घोषणा कर उन्हें बड़ा तोहफा दिया है। यह पिछले पांच वर्षों में घोषित किया गया सबसे तगड़ा लाभांश है जिसने निवेशकों के उत्साह को और बढ़ा दिया है। इस घोषणा का सबसे बड़ा फायदा भारत सरकार को मिलेगा जिसकी कंपनी में करीब 55 प्रतिशत की हिस्सेदारी है और इस नाते सरकारी खजाने में लाभांश के रूप में 2,219 करोड़ रुपये की बड़ी राशि जमा होगी। इससे पहले के वर्षों में कंपनी ने अलग-अलग समय पर लाभांश दिए थे लेकिन वर्तमान घोषणा ने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार और शेयरों की भविष्य की चाल
वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी के ग्रास रिफाइनिंग मार्जिन में भी बड़ी बढ़त देखी गई है जो प्रति बैरल 8.79 डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा काफी कम था। कच्चे तेल को फिनिश्ड उत्पादों में बदलने से होने वाले इस मुनाफे ने कंपनी की बैलेंस शीट को काफी मजबूती प्रदान की है। हालांकि पिछले एक साल के दौरान शेयरों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है जहां जनवरी 2026 में शेयर अपने शिखर पर थे और मार्च आते-आते रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गए थे लेकिन वर्तमान रिकवरी ने निवेशकों को एक बार फिर लंबी अवधि के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं।
MSCI इंडेक्स रिविजन: निवेशकों को तैयार रहना होगा नए वेटेज के साथ
13 May, 2026 01:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। वैश्विक स्तर पर शेयर बाजारों के लिए बेंचमार्क तैयार करने वाली संस्था एमएससीआई (मॉर्गन स्टैनले कैपिटल इंटरनेशनल) ने अपने आगामी ग्लोबल स्टैंडर्ड इंडेक्स में बड़े बदलावों की घोषणा की है। इस पुनर्गठन के तहत भारतीय शेयर बाजार की कई दिग्गज कंपनियों के स्थान में फेरबदल किया गया है, जिसका सीधा असर विदेशी पोर्टफोलियो निवेश पर पड़ेगा। नए बदलावों के अनुसार फेडरल बैंक, एमसीएक्स, नालको और इंडियन बैंक जैसे महत्वपूर्ण शेयरों को ग्लोबल स्टैंडर्ड इंडेक्स में प्रवेश मिला है, जबकि हुंडई मोटर और जुबिलैंट फूडवर्क्स सहित चार अन्य कंपनियों को इस प्रतिष्ठित सूची से बाहर कर दिया गया है। भारत का सूचकांक में कुल भार 12.3 प्रतिशत पर स्थिर रहेगा और ये सभी संशोधन 29 मई 2026 से प्रभावी माने जाएंगे।
नए प्रवेश और भारी विदेशी निवेश की संभावना
इंडेक्स में शामिल किए गए चार नए शेयरों के कारण भारतीय बाजार में बड़े पैमाने पर विदेशी पूंजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। वित्तीय विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार, फेडरल बैंक में लगभग 49.1 करोड़ डॉलर का सबसे बड़ा निवेश आ सकता है, जबकि एमसीएक्स और नालको में भी क्रमशः 37.3 करोड़ और 30.8 करोड़ डॉलर तक के प्रवाह की संभावना है। दूसरी ओर, इंडेक्स से बाहर किए गए हुंडई मोटर इंडिया, जुबिलैंट फूडवर्क्स, कल्याण ज्वैलर्स और आरवीएनएल जैसी कंपनियों से कुल मिलाकर भारी मात्रा में पूंजी निकासी हो सकती है, जिससे इन शेयरों पर अल्पावधि में दबाव देखने को मिल सकता है।
प्रमुख शेयरों के वेटेज में संशोधन और पूंजी का प्रवाह
इंडेक्स में केवल एंट्री और एग्जिट ही नहीं, बल्कि मौजूदा कंपनियों के वेटेज यानी उनके भार में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अदाणी पावर, बीपीसीएल, नायका और ट्रेंट जैसी कंपनियों के वेटेज में बढ़ोतरी की गई है, जिससे इन शेयरों में अतिरिक्त निवेश आने का रास्ता साफ हुआ है। इसके विपरीत, टीसीएस, इंफोसिस, बजाज फाइनेंस और एचयूएल सहित करीब 75 बड़ी कंपनियों के वेटेज में कटौती का निर्णय लिया गया है। इस कटौती के परिणामस्वरूप इन दिग्गज कंपनियों से करोड़ों डॉलर की निकासी होने का अनुमान है, जिसमें सबसे अधिक प्रभाव हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयरों पर पड़ने की आशंका है।
स्मॉलकैप इंडेक्स का पुनर्गठन और नए स्टार्टअप्स की एंट्री
एमएससीआई के स्मॉलकैप इंडेक्स में भी व्यापक फेरबदल देखा गया है, जिसमें एडटेक दिग्गज फिजिक्सवाला और फिनटेक कंपनी पाइन लैब्स जैसे नए जमाने के स्टार्टअप्स को जगह दी गई है। स्टैंडर्ड इंडेक्स से बाहर हुए जुबिलैंट फूडवर्क्स और कल्याण ज्वैलर्स को अब स्मॉलकैप श्रेणी में शामिल किया गया है, जिससे इन स्टॉक्स में फिर से निवेश आने की उम्मीद है। हालांकि, इस पुनर्गठन के दौरान जीएचसीएल और वीआईपी इंडस्ट्रीज समेत 18 अन्य शेयरों को सूची से हटाया गया है, जिसके चलते स्मॉलकैप इंडेक्स में कुल कंपनियों की संख्या 474 से घटकर 459 रह गई है।
भारतीय बाजार की स्थिति और तकनीकी सुधार
इन वैश्विक बदलावों के बीच भारतीय शेयर बाजार की स्थिति तकनीकी रूप से स्थिर बनी हुई है क्योंकि इंडेक्स में कुल कंपनियों की संख्या 165 पर बरकरार है। बाजार के जानकारों का मानना है कि इन एडजस्टमेंट्स से बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा और विदेशी संस्थागत निवेशक नए शामिल हुए स्टॉक्स में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाएंगे। हालांकि, जिन बड़ी कंपनियों के वेटेज कम हुए हैं, उनके कारण बाजार में अस्थिरता का एक छोटा दौर देखा जा सकता है, लेकिन कुल मिलाकर भारत का विदेशी निवेश आकर्षण वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूती बनाए रखने में सफल रहा है।
Berger Paints के शेयर 9% बढ़े, ग्रास मार्जिन पर जश्न का माहौल
13 May, 2026 12:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। देश की प्रमुख पेंट निर्माता कंपनी बर्जर पेंट्स के लिए आज का कारोबारी सत्र खुशियों की सौगात लेकर आया है। पिछले वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही के दौरान कंपनी ने वॉल्यूम ग्रोथ और मार्जिन में जो जबरदस्त सुधार दिखाया है, उससे निवेशकों का उत्साह सातवें आसमान पर पहुंच गया। इस शानदार वित्तीय प्रदर्शन के दम पर 'डुलक्स' ब्रांड के स्वामित्व वाली इस कंपनी के शेयरों में आज 9 प्रतिशत से अधिक की तूफानी तेजी दर्ज की गई। हालांकि, ऊंचे स्तरों पर कुछ निवेशकों ने मुनाफावसूली का रुख अपनाया, जिससे भाव में हल्की नरमी आई, लेकिन निचले स्तरों पर खरीदारों की सक्रियता ने स्टॉक को अब भी मजबूती के साथ हरे निशान में बनाए रखा है।
मजबूत मुनाफे और राजस्व वृद्धि से मिली बाजार को दिशा
मार्च 2026 में समाप्त हुई तिमाही के वित्तीय आंकड़े कंपनी की मजबूत कारोबारी सेहत की गवाही दे रहे हैं, जहां वार्षिक आधार पर राजस्व में 6 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। शुद्ध मुनाफे के मामले में कंपनी ने लंबी छलांग लगाते हुए 28 प्रतिशत की बढ़त हासिल की है, जो अब बढ़कर 335 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि कंपनी का ग्रास मार्जिन पिछले 12 तिमाहियों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कच्चे माल की लागत और परिचालन कुशलता के मोर्चे पर बर्जर पेंट्स ने उत्कृष्ट प्रबंधन का परिचय दिया है।
बाजार हिस्सेदारी और विभिन्न सेगमेंट में शानदार पकड़
भारतीय पेंट बाजार में अपनी करीब 20 प्रतिशत की हिस्सेदारी को मजबूती से बरकरार रखते हुए कंपनी ने कंस्ट्रक्शन केमिकल्स और वाटरप्रूफिंग जैसे क्षेत्रों में भी अपनी पैठ गहरी की है। ऑटोमोटिव कोटिंग्स और प्रोटेक्टिव कोटिंग्स जैसे विशिष्ट सेगमेंट में भी वॉल्यूम के मामले में दोहरे अंकों की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की गई है। कंपनी के डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का विस्तार भी तेजी से हुआ है, जिसके तहत अब खुदरा स्टोर्स की संख्या 1,900 के करीब पहुंच गई है, जो भविष्य में बाजार पहुंच को और अधिक सुदृढ़ बनाने का संकेत दे रही है।
आगामी वित्त वर्ष के लिए रणनीतिक तैयारी और सतर्कता
भविष्य की संभावनाओं को लेकर कंपनी प्रबंधन का मानना है कि हाल ही में की गई कीमतों में बढ़ोतरी से आगामी तिमाहियों में मार्जिन को और अधिक सहारा मिलेगा। हालांकि, बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए कंपनी ने निवेशकों को आगाह भी किया है कि वे मांग के रुझानों पर निरंतर नजर बनाए रखेंगे। पेंट क्षेत्र में बढ़ती प्रतिद्वंद्विता के बीच बर्जर पेंट्स अपनी नई मशीनों और विस्तारित नेटवर्क के जरिए अपनी बढ़त को कायम रखने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रही है, जिससे लॉन्ग टर्म निवेशकों में सकारात्मक संदेश गया है।
शेयरों के ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव और सुधार के संकेत
पिछले एक साल के दौरान बर्जर पेंट्स के शेयरों ने निवेशकों को काफी उतार-चढ़ाव दिखाए हैं, जहां जुलाई 2025 में यह अपने शिखर पर था और मार्च 2026 तक आते-आते इसमें बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। रिकॉर्ड निचले स्तरों को छूने के बाद अब जिस तरह से शेयरों ने वापसी की है, वह तकनीकी रूप से एक मजबूत रिकवरी का संकेत दे रही है। आज की इस बड़ी तेजी ने उन निवेशकों को राहत दी है जो लंबे समय से स्टॉक में स्थिरता की उम्मीद कर रहे थे, और अब बाजार की नजरें कंपनी की भविष्य की विस्तार योजनाओं पर टिकी हुई हैं।
बिड़ला का हाथ, वीआई शेयर ने किया 52 हफ्तों का रिकॉर्ड
13 May, 2026 11:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। टेलीकॉम सेक्टर की दिग्गज कंपनी वोडाफोन आइडिया के शेयरों में आज जबरदस्त तेजी का रुख देखने को मिल रहा है। कारोबारी सत्र की शुरुआत सामान्य बढ़त के साथ हुई थी, लेकिन जैसे ही बाजार में प्रमोटरों द्वारा कंपनी में नई पूंजी निवेश करने की खबर आई, निवेशकों ने जमकर खरीदारी शुरू कर दी। सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आ रही है कि कंपनी के नॉन-एग्जिक्यूटिव चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला स्वयं इस संकटग्रस्त टेलीकॉम कंपनी में ताजी पूंजी डालने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे कंपनी के भविष्य को लेकर निवेशकों का भरोसा एक बार फिर लौट आया है।
पूंजी निवेश की खबर से शेयर बाजार में भारी उछाल
वोडाफोन आइडिया के शेयरों ने आज बाजार में नई ऊंचाइयों को छुआ है और शुरुआती सुस्ती के बाद इसमें करीब 7 प्रतिशत की बड़ी बढ़त दर्ज की गई है। सुबह के समय शेयर मामूली बढ़त के साथ खुला था, परंतु बिड़ला समूह द्वारा फंड डाले जाने की सूचना मिलते ही भाव 12.72 रुपये के स्तर तक जा पहुंचे। पिछले एक महीने के प्रदर्शन पर नजर डालें तो कंपनी का स्टॉक लगभग 38 फीसदी तक चढ़ चुका है, जिससे उन निवेशकों को बड़ी राहत मिली है जो लंबे समय से निचले स्तरों पर निवेश कर फंसे हुए थे।
वित्तीय संकट के बीच परिचालन सुधारने की कवायद
कंपनी को वर्तमान में अपने दैनिक परिचालन को सुचारू रखने और तकनीक को उन्नत करने के लिए बड़े पैमाने पर फंड की आवश्यकता है। नए उपकरणों की खरीद और 5G विस्तार जैसे लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कंपनी पहले से ही भारतीय स्टेट बैंक की अगुवाई वाले बैंकिंग कंसोर्शियम के साथ ऋण के लिए बातचीत कर रही है। प्रमोटरों द्वारा खुद पूंजी लगाने का फैसला बैंकों के सामने भी एक सकारात्मक संदेश भेजेगा, क्योंकि बैंक ऋण देने के लिए कंपनी के सामने प्रमोटरों की प्रतिबद्धता जैसी कुछ कड़ी शर्तें रख रहे थे।
कुमार मंगलम बिड़ला की सक्रियता से लौटा आत्मविश्वास
एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू यानी एजीआर के मामले में मिली राहत के बाद कुमार मंगलम बिड़ला की नॉन-एग्जिक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर वापसी ने कंपनी के भीतर और बाहर आत्मविश्वास को नई ऊर्जा दी है। पिछले सप्ताह रवींदर टक्कर के स्थान पर उनकी नियुक्ति को बाजार ने एक टर्निंग पॉइंट के रूप में लिया है। अब बिड़ला के स्वयं निवेश करने की संभावनाओं ने बैंकों की दिलचस्पी भी वोडाफोन आइडिया को लोन देने में बढ़ा दी है, जिससे कंपनी के लिए फंड जुटाने की राह अब पहले से कहीं अधिक आसान नजर आ रही है।
भविष्य की चुनौतियां और बाजार की उम्मीदें
हालांकि कंपनी को अभी भी एक लंबी दूरी तय करनी है, लेकिन वर्तमान घटनाक्रम ने उसे एक मजबूत आधार प्रदान किया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि प्रमोटरों का समर्थन और एजीआर जैसे कानूनी मामलों में सुधरती स्थिति कंपनी को अपनी बाजार हिस्सेदारी बचाने और नई तकनीक को अपनाने में मदद करेगी। फिलहाल निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रमोटरों द्वारा निवेश की जाने वाली राशि कितनी होगी और आगामी तिमाहियों में कंपनी अपने तकनीकी अपग्रेडेशन के जरिए ग्राहकों को कैसे जोड़ पाती है।
Sensex की बड़ी गिरावट, निवेशकों में बढ़ी बेचैनी
13 May, 2026 10:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। घरेलू शेयर बाजार में आज के कारोबारी सत्र की शुरुआत सकारात्मक संकेतों के साथ हुई, लेकिन ऊपरी स्तरों पर टिकने में नाकाम रहने के कारण बाजार में अचानक उतार-चढ़ाव का दौर शुरू हो गया। शुरुआती घंटों में एशियाई बाजारों की मजबूती का सहारा लेते हुए सेंसेक्स और निफ्टी ने क्रमशः 74,950 और 23,500 के महत्वपूर्ण स्तरों को पार किया, परंतु कुछ ही समय में निवेशकों द्वारा की गई चौतरफा मुनाफावसूली ने इस बढ़त को पूरी तरह धो दिया। वर्तमान स्थिति में दोनों ही प्रमुख सूचकांक लाल निशान के साथ कारोबार कर रहे हैं, जिससे निवेशकों में बेचैनी बढ़ गई है।
कच्चे तेल की कीमतों और इंडिया विक्स का अनिश्चित प्रभाव
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई मामूली गिरावट ने सुबह के समय भारतीय शेयर बाजार को कुछ राहत प्रदान की थी, लेकिन ब्रेंट क्रूड का अभी भी 107 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बने रहना अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इसके साथ ही बाजार की अस्थिरता को मापने वाला 'इंडिया विक्स' शुरुआती नरमी के बाद अचानक उछलकर 19 के स्तर को पार कर गया है, जिसने निवेशकों के आत्मविश्वास को हिलाकर रख दिया है। डर के इस सूचकांक में आई बढ़त के कारण लोग जोखिम लेने से बच रहे हैं और बाजार से अपनी पूंजी सुरक्षित बाहर निकालने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
सोने-चांदी पर आयात शुल्क का बाजार की धारणा पर असर
केंद्र सरकार द्वारा सोने और चांदी पर आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने के फैसले ने भी बाजार की रौनक कम करने में बड़ी भूमिका निभाई है। इस अप्रत्याशित कदम से न केवल आभूषण क्षेत्र की कंपनियों पर दबाव बढ़ा है, बल्कि इसने बाजार की समग्र धारणा को भी प्रभावित किया है। आयात शुल्क में इस ढाई गुना बढ़ोतरी को वित्तीय विशेषज्ञ बाजार के लिए एक नकारात्मक संकेत मान रहे हैं, जिससे कीमती धातुओं से जुड़ी ट्रेडिंग और संबंधित शेयरों में बिकवाली का दबाव गहरा गया है।
मुनाफावसूली की होड़ और बैंकिंग शेयरों में भारी गिरावट
बाजार में आई शुरुआती तेजी को भुनाने के उद्देश्य से निवेशकों ने ऊंचे भावों पर जमकर मुनाफावसूली की, जिसके चलते सेंसेक्स अपने दिन के उच्चतम स्तर से करीब 850 अंक नीचे गिर गया। सबसे ज्यादा नुकसान सरकारी बैंकों के शेयरों में देखा जा रहा है, जहां निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में एक प्रतिशत से भी अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। ऑटो सेक्टर के शेयरों में भी कमजोरी का रुख बना हुआ है, जिससे स्पष्ट हो रहा है कि छोटे और मझोले शेयरों के साथ-साथ दिग्गज कंपनियों में भी बिकवाली हावी है।
बाजार में भविष्य की दिशा और तकनीकी चुनौतियां
सूचकांकों के अपने सर्वोच्च स्तरों से फिसलने के बाद तकनीकी रूप से बाजार अब एक नाजुक मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निफ्टी और सेंसेक्स अपने मौजूदा निचले स्तरों को संभालने में नाकाम रहते हैं, तो गिरावट का यह सिलसिला और भी बढ़ सकता है। फिलहाल ट्रेडर्स की नजरें वैश्विक संकेतों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की अगली चाल पर टिकी हैं क्योंकि ब्रॉडर मार्केट में स्मॉलकैप और मिडकैप सेगमेंट में भी वैसी ही बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है जो फ्रंटलाइन इंडेक्स में मौजूद है।
सोने-चांदी की इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ी, निवेशकों में हलचल
13 May, 2026 10:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती देने और कीमती धातुओं के बेलगाम आयात पर नियंत्रण कसने के उद्देश्य से सोना-चांदी खरीदने वालों को बड़ा झटका दिया है। सरकार ने इन बहुमूल्य धातुओं पर लगने वाले आयात शुल्क में भारी वृद्धि करते हुए इसे 6 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधा 15 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले के तहत मूल सीमा शुल्क को 10 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर को 5 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है। सरकार के इस सख्त कदम का असर घरेलू बाजार पर तुरंत देखने को मिला है, जहां एमसीएक्स पर सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ उछाल दर्ज किया गया है।
घरेलू बाजार में कीमतों का ऐतिहासिक उछाल और निवेशकों की हलचल
आयात शुल्क में वृद्धि की खबर फैलते ही भारतीय बाजारों में कीमती धातुओं की कीमतों ने आसमान छूना शुरू कर दिया है। एमसीएक्स पर सोने का वायदा भाव करीब 6 प्रतिशत की बढ़त के साथ एक लाख बासठ हजार रुपए के पार पहुंच गया है, वहीं चांदी में भी 6 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखी गई जो लगभग दो लाख छियानवे हजार रुपए के स्तर पर कारोबार कर रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सोने की कीमतें प्रति दस ग्राम 1.70 लाख रुपए और चांदी प्रति किलोग्राम 3 लाख रुपए के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर सकती हैं, जिससे आम खरीदारों की जेब पर सीधा बोझ बढ़ना तय है।
अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और अमेरिकी मुद्रास्फीति का प्रभाव
घरेलू बाजार में तेजी के विपरीत वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पश्चिम एशिया के तनाव और अमेरिका में उम्मीद से ज्यादा महंगाई के आंकड़ों ने ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं को कम कर दिया है, जिसके चलते वहां स्पॉट गोल्ड की कीमतों में नरमी देखी जा रही है। भारतीय बाजार में छाई यह तेजी पूरी तरह से सरकार द्वारा ड्यूटी बढ़ाए जाने का परिणाम है, जो अंतरराष्ट्रीय कीमतों के उतार-चढ़ाव को भी बेअसर कर रही है और घरेलू निवेशकों के लिए नए समीकरण पैदा कर रही है।
शेयर बाजार में गिरावट और बढ़ती महंगाई का खतरा
कीमती धातुओं पर टैक्स बढ़ाए जाने का नकारात्मक असर ज्वैलरी क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर भी पड़ा है, जहां कल्याण ज्वैलर्स जैसे बड़े स्टॉक्स में भारी गिरावट दर्ज की गई है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि सरकार का यह कदम केवल सोने-चांदी तक सीमित नहीं है, बल्कि बाजार अब पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में संभावित बड़ी वृद्धि को लेकर भी आशंकित है। विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि सरकार ने तेल कंपनियों के घाटे को कम करने के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए, तो देश में महंगाई का एक बड़ा जोखिम पैदा हो सकता है जो शेयर बाजार के लिए आने वाले दिनों में बड़ी चुनौती बनेगा।
ब्रोकर्स की बढ़ती मुश्किलें और कमोडिटी बाजार के नए अवसर
आयात शुल्क में अचानक हुई इस बढ़ोतरी ने कमोडिटी ब्रोकर्स और उनके क्लाइंट्स के सामने मार्जिन को लेकर बड़ी समस्या खड़ी कर दी है क्योंकि कीमतों में अचानक आए उछाल के कारण अतिरिक्त मार्जिन की तत्काल व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। हालांकि, इस अनिश्चितता के बीच भी बाजार विशेषज्ञ सोने और चांदी में गिरावट आने पर खरीदारी की सलाह दे रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि तेजी का यह रुख लंबी अवधि तक बना रह सकता है। दूसरी ओर, बेस मेटल्स जैसे कॉपर और नैचुरल गैस में भी हल्की बढ़त देखी जा रही है, जबकि क्रूड ऑयल की कीमतों में कुछ नरमी के संकेत मिल रहे हैं।
UPL Q4 नतीजों के बाद शेयर में दबाव, एक्सपर्ट से समझें क्या करना चाहिए
12 May, 2026 03:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को एग्रोकेमिकल क्षेत्र की दिग्गज कंपनी यूपीएल (UPL) के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर कंपनी का स्टॉक लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹629.50 के स्तर पर आ गया। हैरानी की बात यह है कि शेयरों में यह गिरावट तब देखी गई जब कंपनी ने मार्च 2026 की तिमाही में मुनाफे के मोर्चे पर शानदार प्रदर्शन किया है।
मुनाफे में 18 फीसदी का दमदार उछाल
यूपीएल द्वारा जारी तिमाही नतीजों के अनुसार, मार्च 2026 की तिमाही में कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ (Consolidated Net Profit) ₹1,061 करोड़ रहा। यह पिछले साल की इसी तिमाही के ₹896 करोड़ के मुकाबले 18 प्रतिशत अधिक है। यदि पिछली तिमाही (दिसंबर 2025) से तुलना करें, तो कंपनी के मुनाफे में 168 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़त दर्ज की गई है, जो कंपनी की मजबूत रिकवरी को दर्शाता है।
मार्जिन और एबिटडा में गिरावट से निवेशक चिंतित
मुनाफा बढ़ने के बावजूद ऑपरेशनल मोर्चे पर कंपनी को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। कंपनी की ब्याज, टैक्स और डेप्रिसिएशन से पहले की कमाई (Ebitda) 13 प्रतिशत घटकर ₹3,646 करोड़ रह गई। इसके साथ ही एबिटडा मार्जिन में भी 90 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आई है, जो अब 19.9 प्रतिशत पर सिमट गया है। जानकारों का मानना है कि मार्जिन में आई इसी कमी के कारण निवेशकों ने बिकवाली का रुख अपनाया।
शेयरधारकों के लिए डिविडेंड की सिफारिश
बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच कंपनी के बोर्ड ने अपने शेयरधारकों को राहत देते हुए ₹6 प्रति इक्विटी शेयर के डिविडेंड (लाभांश) की सिफारिश की है। ₹2 की फेस वैल्यू वाले प्रत्येक शेयर पर यह 300 प्रतिशत का रिटर्न होगा। हालांकि, इस लाभांश के भुगतान के लिए आगामी वार्षिक आम बैठक (AGM) में सदस्यों की औपचारिक मंजूरी मिलना अनिवार्य है।
बाजार की तुलना में स्टॉक का प्रदर्शन
बीते एक साल के आंकड़ों को देखें तो यूपीएल का शेयर निवेशकों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। सालाना आधार पर स्टॉक में करीब 15.8 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि इसी अवधि के दौरान निफ्टी-50 (Nifty50) में केवल 8.85 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। दोपहर के कारोबार में स्टॉक अपने पिछले क्लोजिंग ₹669 से टूटकर ₹629.50 पर संघर्ष करता नजर आया।
एआई पर जोर, खर्च में रिकॉर्ड, मेटा ने 8000 कर्मचारियों को किया बाहर
12 May, 2026 01:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और तकनीकी बदलावों के बीच टेक दिग्गज कंपनी 'मेटा' एक बार फिर बड़े बदलाव की तैयारी में है। फेसबुक की पेरेंट कंपनी 20 मई को अपने 8,000 कर्मचारियों की छंटनी करने जा रही है। सीईओ मार्क जुकरबर्ग अब कंपनी को पूरी तरह से एआई (AI) पर केंद्रित कर रहे हैं, जिससे टेक जगत में हलचल मच गई है। जुकरबर्ग का स्पष्ट मानना है कि भविष्य में केवल वही कर्मचारी टिक पाएंगे जो एआई टूल्स की मदद से बड़े प्रोजेक्ट्स को अकेले संभालने का दम रखते हैं।
एआई के चलते बदला कंपनी का ढांचा
मेटा अब 'अल्ट्राफ्लैट' वर्किंग कल्चर की ओर बढ़ रही है, जहां 50 इंजीनियरों की टीम पर केवल एक मैनेजर होगा। जुकरबर्ग के अनुसार, जो काम पहले दर्जनों इंजीनियर महीनों में करते थे, अब उसे एक-दो लोग एआई की मदद से कुछ ही दिनों में पूरा कर रहे हैं। इसी कार्यकुशलता को देखते हुए कंपनी अपनी टीमों को छोटा और अधिक उत्पादक बना रही है। यह फैसला केवल खर्चे घटाने के लिए नहीं, बल्कि मेटा को भविष्य के लिए तैयार करने का एक रणनीतिक कदम है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश और बाजार की चिंता
मेटा इस साल अपने डेटा सेंटर, कस्टम चिप्स और एआई मॉडल ट्रेनिंग पर 125 से 145 अरब डॉलर खर्च करने की योजना बना रही है। कंपनी की मुख्य वित्तीय अधिकारी सुसान ली के मुताबिक, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च पिछले साल की तुलना में दोगुना हो गया है। इसी भारी खर्च और कर्मचारियों के वेतन के बीच संतुलन बनाने के लिए छंटनी का यह कड़ा फैसला लिया गया है। हालांकि, इस अनिश्चितता के कारण निवेशकों में घबराहट देखी गई और मेटा के शेयरों में 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
कर्मचारियों की निगरानी और गिरता मनोबल
कंपनी के भीतर का माहौल काफी तनावपूर्ण है क्योंकि मेटा ने कर्मचारियों की निगरानी के लिए 'मॉडल कैपेबिलिटी इनिशिएटिव' जैसे सख्त टूल लागू किए हैं। यह टूल कर्मचारियों के कीस्ट्रोक्स और माउस मूवमेंट तक को ट्रैक कर रहा है ताकि एआई एजेंटों को प्रशिक्षित किया जा सके। जुकरबर्ग भले ही इसे क्षमता बढ़ाने वाला बदलाव कह रहे हों, लेकिन इन सख्त नियमों और नौकरियों पर मंडराते खतरे के कारण कर्मचारियों का मनोबल अपने निचले स्तर पर पहुंच गया है।
तकनीकी क्षेत्र में भविष्य की नई दिशा
मेटा की यह नई रणनीति तकनीकी क्षेत्र में काम करने के पारंपरिक तरीके को पूरी तरह से बदल रही है। कंपनी का साफ संदेश है कि भविष्य उन्हीं का है जो एआई उपकरणों के साथ तालमेल बिठाकर तेजी से काम कर सकते हैं। विशेषज्ञ अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि बुनियादी ढांचे पर किया जा रहा यह अरबों डॉलर का निवेश और टीमों का यह नया स्वरूप भविष्य में कंपनी को कितना आर्थिक लाभ पहुंचा पाता है।
चांदी में उछाल, डॉलर कमजोर होने से निवेशकों को मिला भरोसा
12 May, 2026 12:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी मुद्रा (डॉलर) में आई गिरावट के चलते भारतीय बाजारों में आज चांदी और सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अस्थिरता और मिडिल ईस्ट के बिगड़ते हालातों ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश के लिए कीमती धातुओं की ओर आकर्षित किया है। मंगलवार को भारतीय बाजार (MCX) पर चांदी की कीमतें 1.5% की बढ़त के साथ ₹2,82,463 प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गईं, जबकि सोना भी 0.3% चढ़कर ₹1,54,150 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है।
1. वैश्विक संघर्ष और कच्चे तेल की सप्लाई का असर
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल शिपिंग मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी जुबानी जंग और शांति प्रस्तावों पर असहमति के कारण ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है। इसके चलते कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं, जिससे भविष्य में महंगाई और तेज होने की आशंका है। इसी अनिश्चितता के माहौल में ट्रेडर्स अब डॉलर के मुकाबले सोने और चांदी को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।
2. कमजोर डॉलर और बॉन्ड यील्ड में गिरावट से मिला सहारा
अमेरिकी डॉलर की मजबूती में कमी और बॉन्ड यील्ड के गिरने से बुलियन मार्केट (सोना-चांदी) को अतिरिक्त मजबूती मिली है। आमतौर पर जब डॉलर कमजोर होता है, तो विदेशी खरीदारों के लिए सोना-चांदी खरीदना सस्ता हो जाता है, जिससे इनकी मांग बढ़ जाती है। साथ ही, निवेशक अब अमेरिकी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जिससे फेडरल रिजर्व के भविष्य के ब्याज दरों की दिशा तय होगी।
3. भविष्य का अनुमान: क्या जारी रहेगी यह तेजी?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में आई यह तेजी फिलहाल एक सीमित दायरे में रह सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी वर्तमान में अपनी ऊपरी सीमा को छू चुकी है और जल्द ही इसमें कुछ सुधार (Correction) देखा जा सकता है। सोने के लिए भी यही अनुमान लगाया जा रहा है कि पिछले हफ्ते के उच्चतम स्तर को छूने के बाद अब बाजार में मुनाफावसूली (Profit-booking) हावी हो सकती है, जिससे कीमतें वापस निचले स्तरों की ओर आ सकती हैं। इसके अलावा, ट्रंप और शी जिनपिंग की आगामी बैठक के नतीजों पर भी बाजार की पैनी नजर रहेगी।
दलाल स्ट्रीट पर मायूसी: सेंसेक्स 500 अंक फिसला, निफ्टी भी टूटा
12 May, 2026 11:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन मंदी का माहौल
मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है और मंगलवार को भी प्रमुख सूचकांकों में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। शुरुआती सत्र में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 525.44 अंकों की कमजोरी के साथ 75,489.84 के स्तर पर आ गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 164.5 अंक फिसलकर 23,651.35 पर पहुंच गया। सोमवार की बड़ी गिरावट के बाद मंगलवार को भी निवेशकों में घबराहट का माहौल बना रहा, जिसका सबसे ज्यादा असर आईटी सेक्टर पर पड़ा, जहाँ इंफोसिस और एशियन पेंट्स जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
वैश्विक तनाव और कच्चे तेल में उछाल ने बिगाड़ा गणित
बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे पश्चिम एशिया में गहराता युद्ध का संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें मुख्य वजह मानी जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 105.2 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जिससे भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ गया है और रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर 95.63 पर आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज करने और युद्धविराम की उम्मीदें धूमिल होने के बयानों ने वैश्विक निवेशकों के भरोसे को चोट पहुंचाई है, जिसके चलते विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बाजार से भारी मात्रा में अपनी पूंजी निकालनी शुरू कर दी है।
सेक्टरवार नुकसान और अंतरराष्ट्रीय बाजारों का मिला-जुला रुख
बाजार की इस उठापटक में तकनीकी और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है, जिनमें टीसीएस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक जैसी कंपनियां शामिल हैं। हालांकि, इस भारी बिकवाली के बीच भारती एयरटेल और एनटीपीसी जैसे शेयरों ने मजबूती दिखाते हुए निवेशकों को कुछ राहत दी। वैश्विक स्तर पर एशियाई बाजारों में स्थिति मिली-जुली रही, जहाँ एक ओर चीन और दक्षिण कोरिया के बाजार गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे, वहीं जापान और हांगकांग के बाजारों में मामूली बढ़त देखी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक खाड़ी देशों में संघर्ष की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी।
बचत से विकास तक: खर्चों में कटौती से देश को मिलेगा 5.6 लाख करोड़ का फायदा
12 May, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आयात बोझ कम करने के लिए व्यवहारिक बदलाव की जरूरत
नई दिल्ली। ईरान संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे उछाल ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इस संकट से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल के संयमित उपयोग, सोने की खरीद टालने और विदेश यात्राओं में कटौती करने का आग्रह किया है। आर्थिक विश्लेषणों के अनुसार, यदि देश इन अपीलों पर गंभीरता से अमल करता है, तो भारत एक वर्ष के भीतर लगभग 59.2 अरब डॉलर यानी करीब 5.6 लाख करोड़ रुपये की विशाल विदेशी मुद्रा बचाने में सक्षम हो सकता है। यह अनुमान वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कच्चा तेल, सोना, उर्वरक और खाद्य तेल के आयात पर हुए भारी खर्च के आंकड़ों पर आधारित है।
ईंधन और स्वर्ण आयात में कटौती से मिलेगी बड़ी राहत भारत सरकार का प्राथमिक लक्ष्य ईंधन की खपत में कम से कम 20 प्रतिशत तक की कमी लाना है, जिससे सालाना 27 अरब डॉलर की सीधी बचत संभव है। कच्चे तेल के आयात पर भारत ने बीते वित्त वर्ष में 135 अरब डॉलर खर्च किए हैं, जो अर्थव्यवस्था पर बड़ा बोझ है। इसी तरह सोने के प्रति भारतीयों के गहरे लगाव के कारण बीते वर्ष 72 अरब डॉलर का सोना आयात किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोने की मांग में मात्र 10 प्रतिशत की भी गिरावट आती है, तो देश को 7.2 अरब डॉलर की अतिरिक्त बचत होगी। हालांकि, सांस्कृतिक और निवेश संबंधी कारणों से सोने की मांग को कम करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, लेकिन वर्तमान आर्थिक स्थितियों को देखते हुए इसमें संयम आवश्यक हो गया है।
बढ़ता व्यापार घाटा और भविष्य की आर्थिक रणनीति आंकड़े बताते हैं कि भारत का स्वर्ण आयात बिल पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है, जो वित्त वर्ष 2022-23 के 35 अरब डॉलर से बढ़कर अब 72 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इस बेतहाशा वृद्धि ने व्यापार घाटे को 333.2 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंचा दिया है, जिससे चालू खाता घाटा भी प्रभावित हो रहा है। सरकार की योजना केवल तेल और सोने तक सीमित नहीं है, बल्कि खाद्य तेल में 10 प्रतिशत और उर्वरक आयात में 50 प्रतिशत की कटौती कर क्रमशः 1.95 अरब डॉलर और 7.3 अरब डॉलर बचाने की भी है। इसके अतिरिक्त, विदेशी यात्राओं पर खर्च होने वाले 15.8 अरब डॉलर को रोककर विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती प्रदान की जा सकती है ताकि वैश्विक अस्थिरता के समय रुपया और देश की अर्थव्यवस्था सुरक्षित रहे।
डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपया बना चुनौती, $5 ट्रिलियन इकॉनमी लक्ष्य पर संकट
12 May, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आर्थिक विकास की रफ्तार और मुद्रा अवमूल्यन का प्रभाव
मुंबई: ईरान संकट के चलते वैश्विक स्तर पर पैदा हुई अस्थिरता का सीधा असर अब भारतीय मुद्रा पर दिखने लगा है, जहाँ रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर 95 के स्तर से नीचे चला गया है। एसबीआई रिसर्च की होलिया रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है कि यदि रुपये की स्थिति इसी स्तर पर बनी रहती है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था का कुल आकार सिमटकर 4.04 लाख करोड़ डॉलर रह जाएगा। ऐसी स्थिति में भारत के 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य साल 2029-30 से पहले पूरा होना बेहद कठिन नजर आ रहा है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि बाहरी कारकों और बाजार में अनियंत्रित सट्टेबाजी ने रुपये की सेहत बिगाड़ी है, जिससे निपटने के लिए अब भुगतान संतुलन के मोर्चे पर ठोस संरचनात्मक बदलाव करने की तत्काल आवश्यकता है।
भुगतान संतुलन सुधारने के लिए नीतिगत उपायों की दरकार
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने और परिवहन व बीमा लागत में हुई भारी बढ़ोतरी ने देश के आर्थिक संतुलन को बिगाड़ दिया है। इस गंभीर समस्या से उबरने के लिए विशेषज्ञों ने एक व्यापक नीतिगत पैकेज लागू करने का सुझाव दिया है, जिसमें विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए विशेष बॉन्ड जारी करना एक प्रभावी विकल्प हो सकता है। यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री द्वारा हाल ही में की गई उस अपील के बाद आई है जिसमें उन्होंने नागरिकों से विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग, सोने की खरीद पर लगाम लगाने और विदेश यात्राओं को कुछ समय के लिए टालने का आग्रह किया था ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके और निर्यात की प्रतिस्पर्धी क्षमता को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान की जा सके।
जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान और भविष्य की संभावनाएँ
अर्थव्यवस्था के भविष्य के आकलन को लेकर एसबीआई रिसर्च ने अनुमान जताया है कि चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत के आसपास बनी रह सकती है। हालांकि, अगले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर की रफ्तार थोड़ी धीमी होकर 6.6 प्रतिशत रहने की संभावना है, जबकि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए यह आंकड़ा 7.5 प्रतिशत के स्तर को छू सकता है। आगामी 29 मई को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी होने वाले वार्षिक जीडीपी के अस्थायी अनुमानों पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं, क्योंकि यही आंकड़े तय करेंगे कि आने वाले समय में भारतीय बाजार और विकास दर वैश्विक चुनौतियों का सामना किस मजबूती के साथ कर पाएंगे।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
