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अमेरिका का नया ऑफर, अवैध प्रवासियों को मुफ्त टिकट और कैश बोनस
18 Mar, 2026 03:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिका का यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS)अवैध प्रवासियों के लिए एक नई सेल्फ-डिपोर्टेशन योजना का जोर-शोर से प्रचार कर रहा है। इस अभियान के पोस्टरों में भारत के ताज महल की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया है। इसके जरिए भारत लौटने के लिए मुफ्त हवाई टिकट और 2,600 डॉलर (लगभग ₹2.4 लाख) की प्रोत्साहन राशि की पेशकश की जा रही है। यह कदम ट्रंप प्रशासन की सख्त आव्रजन नीति का हिस्सा माना जा रहा है। प्रशासन एक ओर अवैध प्रवासियों पर कार्रवाई तेज कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कानूनी प्रवासियों के लिए भी नियम कड़े किए जा रहे हैं।
डीएचएस ने बताई पूरी प्रक्रिया
डीएचएस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि जो लोग स्वेच्छा से अमेरिका छोड़ना चाहते हैं, वे सीबीपी होम एप के जरिए रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। इस एप के माध्यम से आवेदक अपनी जानकारी दर्ज कर यात्रा सहायता और आर्थिक प्रोत्साहन से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकते हैं।
क्या है प्रोजेक्ट होमकमिंग?
यह योजना प्रोजेक्ट होमकमिंग के तहत लाई गई है, जिसे डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 2025 में शुरू किया था। डीएचएस के मुताबिक, यह कार्यक्रम उन लोगों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी का रास्ता है, जिनके पास अमेरिका में रहने का वैध आधार नहीं है। योजना के तहत पात्र लोगों को सरकारी खर्च पर टिकट और देश छोड़ने के बाद नकद बोनस दिया जाता है।
इन देशों को भी किया गया शामिल
अभियान में भारत के अलावा चीन और कोलंबिया की झलकियां भी दिखाई गई हैं, क्योंकि इन देशों से बड़ी संख्या में अवैध प्रवासी अमेरिका में रहते हैं। पोस्ट में संदेश दिया गया कि आप घर लौटकर नई शुरुआत कर सकते हैं, मुफ्त फ्लाइट और 2,600 डॉलर का एग्जिट बोनस पाएं।
अभियान को लेकर हो रही आलोचना
हालांकि, इस अभियान को लेकर आलोचना भी हो रही है। ताज महल जैसे प्रेम और विरासत के प्रतीक को प्रवासन-विरोधी अभियान से जोड़ने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। साथ ही, अमेरिका में सख्त प्रवासन नीतियों के बीच भारतीय पेशेवरों, खासकर H-1Bवीजा धारकों और ग्रीन कार्ड होल्डर्स के खिलाफ बढ़ती नकारात्मक घटनाओं को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। डीएचएस की पूर्व प्रमुख क्रिस्टी नोएम ने नवंबर 2025 में दावा किया था कि ट्रंप के कार्यकाल शुरू होने के बाद से 16 लाख से अधिक लोग स्वेच्छा से देश छोड़ चुके हैं, जो इस नीति के प्रभाव को दर्शाता है।
तंगहाली से जूझता पाकिस्तान, कमजोर सिस्टम ने बढ़ाई मुश्किलें
18 Mar, 2026 03:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पाकिस्तान एक गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है, जहां सरकारी आंकड़ों के अनुसार गरीबी की समस्या लगातार गहराती जा रही है। नवीनतम रिपोर्टों से यह स्पष्ट होता है कि देश केवल मौद्रिक गरीबी का सामना नहीं कर रहा है, बल्कि 'संस्थागत गरीबी' की गिरफ्त में भी आ गया है। यह एक ऐसी स्थिति है जहां मजबूत, अनुमानित और लचीले संस्थानों का अभाव है, जो आय की सुरक्षा कर सकें, अवसरों को सक्षम बना सकें और झटकों को अवशोषित कर सकें।
मौद्रिक गरीबी में वृद्धि
पाकिस्तान के योजना आयोग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, मौद्रिक गरीबी का प्रतिशत 2018-19 में 21.9 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 28.9 प्रतिशत हो गया है। इसका अर्थ है कि देश की एक बड़ी आबादी जीवन की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रही है। मौद्रिक गरीबी आय या व्यय की उस कमी को कहते हैं, जहां कोई व्यक्ति या परिवार जीवन की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक न्यूनतम आय स्तर (गरीबी रेखा) से नीचे रहता है।
ग्रामीण और शहरी गरीबी का विभाजन
गरीबी का यह संकट देश के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी 36 प्रतिशत से अधिक है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 17 प्रतिशत को पार कर गई है। राष्ट्रीय गिनी सूचकांक, जो आय असमानता को मापता है, 28.4 से बढ़कर 32.7 हो गया है, जो विशेष रूप से सिंध जैसे कुछ प्रांतों में स्थिति के और बिगड़ने का संकेत देता है।
आय असमानता और आर्थिक अस्थिरता
योजना आयोग की रिपोर्टों से पता चलता है कि हालांकि नाममात्र की आय में वृद्धि हुई है, लेकिन मुद्रास्फीति के आय से अधिक होने के कारण वास्तविक आय में गिरावट आई है। इससे प्रांतों के बीच असमानता बढ़ी है और देश व्यापक आर्थिक अस्थिरता व जलवायु झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील हो गया है। यह कमजोर नीति-कल्याण संचरण तंत्र का संकेत देता है।
संस्थागत गरीबी के आयाम
संस्थागत गरीबी कई रूपों में प्रकट होती है, जिनमें शामिल हैं:
नीति अस्थिरता: बार-बार नीतियों में बदलाव से अनिश्चितता का माहौल बनता है।
कमजोर श्रम औपचारिकता: अधिकांश श्रमिक अनौपचारिक क्षेत्र में हैं, बिना अनुबंध, बीमा या उत्पादकता वृद्धि के अवसरों के।
नाजुक स्थानीय शासन: जिला-स्तरीय संस्थान, जहां सेवाएं प्रदान की जाती हैं, प्रशासनिक रूप से कमजोर और वित्तीय रूप से निर्भर हैं।
सामाजिक सुरक्षा में स्वचालित स्थिरीकरण का अभाव: संकट के समय में लोगों को सहारा देने वाली प्रणालियाँ प्रभावी नहीं हैं।
जवाबदेही के बिना योजना: योजनाओं का निर्माण तो होता है, लेकिन उनके कार्यान्वयन और परिणामों के लिए कोई जवाबदेही तय नहीं की जाती।
सुधार के लिए सुझाव
रिपोर्टों में संस्थागत गरीबी से निपटने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं:
ऊर्जा टैरिफ सुधार: निम्न आय वर्ग के लिए पूर्व-निर्धारित क्षतिपूर्ति तंत्र शामिल किया जाना चाहिए।
कृषि बीमा का संस्थागतकरण: यह दाता-निर्भरता के बजाय एक स्थायी प्रणाली के रूप में स्थापित होना चाहिए।
लचीलापन फ्रेमवर्क: पंचवर्षीय योजनाओं को, या कम से कम उनके पूरक के रूप में, ऐसे लचीलापन फ्रेमवर्क द्वारा प्रतिस्थापित किया जाना चाहिए जो व्यापक आर्थिक स्थिरता, श्रम बाजार, जलवायु अनुकूलन और असमानता की निगरानी को एकीकृत करें।
आर्थिक जाल और भविष्य की चुनौतियां
एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने उत्पादक विकास पर अल्पकालिक प्रवासी प्रेषण और विदेशी सहायता को प्राथमिकता देकर खुद को एक खतरनाक आर्थिक जाल में फंसा लिया है। प्रवासी प्रेषण अब सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा हैं और निर्यात आय के बराबर हैं। यह प्रणाली की विफलताओं को छुपाता है, जैसे कि निष्क्रिय कारखाने, उच्च बेरोजगारी और उत्पादक कार्यबल का अल्प-उपयोग।
व्यापार संतुलन में सुधार से अर्थव्यवस्था को मिली मजबूती
18 Mar, 2026 01:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। जापान ने फरवरी महीने में 57.3 अरब येन (करीब 36 करोड़ डॉलर) का व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) दर्ज किया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह पिछले महीने के घाटे के बाद एक महत्वपूर्ण सुधार है। वित्त मंत्रालय के मौसमी समायोजित प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी में जापान का निर्यात उम्मीद से बेहतर 4.2 प्रतिशत बढ़कर 9.57 ट्रिलियन येन पर पहुंच गया। वहीं, आयात में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह सालाना आधार पर 10.2 प्रतिशत बढ़कर 9.51 ट्रिलियन येन रहा। जनवरी में आयात 2.5 प्रतिशत घटा था और उस महीने जापान को 1.15 ट्रिलियन येन का व्यापार घाटा झेलना पड़ा था। हालांकि, आने वाले महीनों में जापान पर आयात लागत का दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़े युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हुई है। जापान अपनी तेल जरूरतों के लिए लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर है। इसी बीच, अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत हाल के हफ्तों में बढ़कर करीब 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जिससे ऊर्जा आयात बिल और बढ़ सकता है।
एआई और इलेक्ट्रॉनिक्स बूम से भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2035 तक 300 अरब डॉलर के पार
भारत का सेमीकंडक्टर बाजार आने वाले वर्षों में तेज रफ्तार से बढ़ने जा रहा है। डेलॉइट की रिपोर्ट के अनुसार, यह बाजार 2030 तक करीब तीन गुना बढ़कर 120 अरब डॉलर और 2035 तक 300 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का सेमीकंडक्टर बाजार लगभग 45-50 अरब डॉलर का है और पिछले तीन वर्षों में यह करीब 20 प्रतिशत की सालाना दर (CAGR) से बढ़ा है। इस तेज वृद्धि के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमोबाइल सेक्टर, डेटा सेंटर विस्तार और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की बढ़ती मांग प्रमुख कारण हैं। वर्तमान में भारत अपनी 90 प्रतिशत से अधिक सेमीकंडक्टर जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। हालांकि, रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि 2035 तक देश में स्थानीय उत्पादन इतना बढ़ जाएगा कि यह घरेलू मांग का 60 प्रतिशत से अधिक पूरा कर सकेगा।
इंडोनेशिया के निकेल और खनिज भंडार से बढ़ेगी रणनीतिक अहमियत
18 Mar, 2026 01:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिका और इंडोनेशिया के बीच हुआ नया व्यापार समझौता दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देता है, जिसमें ऊर्जा, खनिज संसाधन और रणनीतिक सहयोग केंद्र में हैं। इस डील के तहत इंडोनेशिया ने अपने महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र खासकर निकेल और रेयर अर्थ में अमेरिकी निवेश के लिए दरवाजे खोलने पर सहमति दी है। वहीं अमेरिका ने इंडोनेशियाई उत्पादों पर प्रस्तावित 32% टैरिफ घटाकर 19% कर दिया है और कई प्रमुख वस्तुओं को शून्य-शुल्क पहुंच भी दी है।
खनिज और सप्लाई चेन पर फोकस
इंडोनेशिया, जो दुनिया का सबसे बड़ा निकेल उत्पादक है, इलेक्ट्रिक वाहन और क्लीन एनर्जी के लिए जरूरी संसाधनों का बड़ा स्रोत है। समझौते के तहत अमेरिका को खनन से लेकर प्रोसेसिंग और निर्यात तक व्यापक निवेश अवसर मिलेंगे। इससे अमेरिका की कोशिश है कि वह चीन पर निर्भरता कम कर सके, जो अभी इंडोनेशिया के खनिज सेक्टर में प्रमुख भूमिका निभा रहा है।
डील के तहत क्या होगा?
डील के तहत इंडोनेशिया करीब 15 अरब डॉलर के अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद जैसे कच्चा तेल, एलपीजी और गैसोलीन खरीदेगा। साथ ही, अमेरिकी कोयले के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए वेस्ट कोस्ट से एक्सपोर्ट कॉरिडोर विकसित करने में भी निवेश करेगा। दोनों देश छोटे मॉड्यूलर न्यूक्लियर रिएक्टर (SMR) परियोजनाओं पर भी सहयोग करेंगे।
इंडोनेशिया किन देशों के बीच संतुलन साधने को कोशिश कर रहा?
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह समझौता इंडोनेशिया की उस रणनीति को दिखाता है, जिसमें वह अमेरिका और चीन दोनों के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है। चीन पहले से ही इंडोनेशिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और खनिज व कोयला क्षेत्र में उसकी मजबूत पकड़ है।
ऊर्जा ट्रांजिशन पर असर
डील से इंडोनेशिया की ऊर्जा नीति में बदलाव के संकेत मिलते हैं। जहां पहले स्वच्छ ऊर्जा और उत्सर्जन में कमी पर जोर था, अब फोकस फिर से जीवाश्म ईंधन की ओर झुकता दिख रहा है। 2023 में इंडोनेशिया की ऊर्जा खपत का करीब 78% हिस्सा कोयला, तेल और गैस से आया था, जबकि सौर ऊर्जा का विकास अपेक्षाकृत धीमा रहा है।
टैरिफ विवाद से अनिश्चितता
हालांकि, इस समझौते के भविष्य पर अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप प्रशासन के टैरिफ फैसलों को चुनौती दिए जाने के बाद इसके लागू होने पर सवाल उठे हैं। साथ ही, इंडोनेशिया की संसद में भी इस पर मंजूरी आसान नहीं मानी जा रही, खासकर कुछ विवादित प्रावधानों को लेकर।
अब 60% सीटें यात्री बिना अतिरिक्त शुल्क के चुन सकेंगे
18 Mar, 2026 09:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत में हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने सभी एयरलाइनों को निर्देश दिया है कि हर उड़ान में कम से कम 60 प्रतिशत सीटें बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध कराई जाएं। इसका उद्देश्य यात्रियों को निष्पक्ष और सस्ती सीट चयन सुविधा देना है। मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, अब तक केवल सीमित सीटें ही मुफ्त में दी जाती थीं, जबकि बाकी सीटों के लिए यात्रियों से अतिरिक्त शुल्क लिया जाता था। नए निर्देश के लागू होने के बाद अधिकतर यात्रियों को बिना अतिरिक्त खर्च के सीट चुनने का विकल्प मिलेगा।
सस्ती दरों पर भोजन और मुफ्त किताबों की सुविधा
सरकार ने यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए अन्य कई पहल भी शुरू की हैं। इनमें उड़ान यात्री कैफे (UDAN Yatri Café) के जरिए सस्ती दरों पर भोजन उपलब्ध कराना, फ्लाइब्ररी (Flybrary) के तहत मुफ्त किताबें पढ़ने की सुविधा देना और देशभर के हवाई अड्डों पर मुफ्त वाई-फाई की व्यवस्था शामिल है।
एक ही PNR पर यात्रा करने वालों को साथ बैठाने का निर्देश
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर यात्रियों ने एक ही PNR (Passenger Name Record) के तहत टिकट बुक किया है, तो उन्हें साथ बैठाया जाएगा। मंत्रालय ने कहा है कि ऐसे यात्रियों को पास-पास सीट देना प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि परिवार या समूह को अलग-अलग बैठने की समस्या न हो।
एयरलाइनों के लिए नए नियम भी लागू
सरकार ने यात्रियों की सुविधा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कुछ और अहम निर्देश जारी किए हैं-
खेल उपकरण और संगीत वाद्ययंत्र ले जाने के लिए स्पष्ट और यात्री-अनुकूल नियम बनाए जाएं।
पालतू जानवरों को ले जाने की नीति सार्वजनिक और साफ हो।
उड़ानों में देरी, रद्दीकरण या बोर्डिंग से इनकार की स्थिति में यात्री अधिकारों का सख्ती से पालन हो।
एयरलाइन की वेबसाइट, मोबाइल ऐप और एयरपोर्ट काउंटर पर यात्री अधिकार स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किए जाएं।
क्षेत्रीय भाषाओं में भी यात्रियों को उनके अधिकारों की जानकारी दी जाए।
सरकार का कहना है कि इन कदमों से हवाई यात्रा को अधिक पारदर्शी, सुविधाजनक और यात्रियों के अनुकूल बनाया जा सकेगा।
बैंकिंग और आईटी शेयरों में खरीदारी से बाजार को मिला सपोर्ट
18 Mar, 2026 08:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और वैश्विक बाजारों में मजबूती के रुझान के बीच, बुधवार को शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार के बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में पिछले दो कारोबारी सत्रों की बढ़त को बरकरार रखते हुए तेजी देखी गई। आईटी शेयरों में आई तेज उछाल ने घरेलू बाजारों में भी सकारात्मक रुझान को जन्म दिया। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 518.84 अंक बढ़कर 76,589.68 पर पहुंच गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 157.75 अंक बढ़कर 23,738.90 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 3 पैसे गिरकर 92.43 पर आ गया।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा के अनुसार, बाजार ने अत्यधिक गिरावट और निराशा के स्तर से उभरते हुए रिकवरी दर्ज की है। उन्होंने बताया कि मार्च में विदेशी निवेशकों (FPI) द्वारा कैश इक्विटी से 70,000 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाजार को संभाला है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि बाजार की आगे की दिशा काफी हद तक तेल और गैस आपूर्ति में व्यवधान की तीव्रता और अवधि पर निर्भर करेगी। उनके मुताबिक, यह एक बड़ा अनिश्चित कारक है, जिसे बाजार अभी पूरी तरह से कीमतों में शामिल नहीं कर रहा है। अजय बग्गा ने कहा कि इस सप्ताह का सबसे अहम वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक है। बाजार को उम्मीद है कि फेड फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और 2026 के अंत तक एक संभावित दर कटौती हो सकती है। वहीं, जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि युद्ध से जुड़ी अनिश्चितता और भ्रम का असर बाजार पर साफ दिख रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति में अनुभवी विशेषज्ञ भी निवेशकों को स्पष्ट रणनीति देने में हिचक रहे हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य से आई LPG खेप से मिलेगी राहत
17 Mar, 2026 01:57 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। जामनगर के वडीनार (कांडला) पोर्ट पर मंगलवार सुबह एक बड़ा एलपीजी कार्गो लेकर जहाज एमटी नंदा देवी पहुंचा। दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (DPA) के चेयरमैन सुशील कुमार सिंह के अनुसार, जहाज सुबह करीब 2:30 बजे पोर्ट के एंकरिज क्षेत्र में पहुंचा।
एसटीएस प्रक्रिया आज से शुरू
उन्होंने बताया कि नंदा देवी जहाज 46,500 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आया है, जिसका ट्रांसफर गहरे समुद्र में शिप-टू-शिप (STS) प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा। इस कार्गो को एमटी BW Birch जहाज में स्थानांतरित किया जाएगा और यह प्रक्रिया आज से शुरू हो रही है। चेयरमैन सुशील कुमार सिंह ने जहाज के कैप्टन और क्रू से मुलाकात कर इस महत्वपूर्ण कार्गो को सुरक्षित पहुंचाने के लिए उनका आभार जताया। साथ ही उन्होंने ट्रांसफर प्रक्रिया के दौरान हर संभव सहयोग का भरोसा भी दिलाया।
भारत पहुंचने वाला नंदा देवी दूसरा जहाज
एमटी नंदा देवी हाल के दिनों में दूसरा भारतीय एलपीजी जहाज है, जिसने सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पार कर भारतीय तट तक पहुंच बनाई है। इससे ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के प्रयासों को मजबूती मिली है। इससे एक दिन पहले ही एलपीजी कैरियर शिवालिक करीब 40,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर मुंद्रा पोर्ट पहुंचा था। अधिकारियों के मुताबिक, इस कार्गो का एक हिस्सा मुंद्रा में उतारा जाएगा, जबकि बाकी एलपीजी को मैंगलोर भेजा जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में भारतीय जहाजों की आवाजाही पर कड़ी नजर रखी जा रही है, ताकि जहाजों और उनके क्रू की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। मौजूदा हालात में यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
जहाज से हमारे-आपके घर तक एलपीजी गैस पहुंच कैसे पहुंचती है?
जहाज से निकलकर एलपीजी का आपके किचन तक पहुंचने का सफर काफी दिलचस्प और व्यवस्थित होता है। इसे हम पोर्ट से चूल्हे तक का सफर कह सकते हैं। ज्यादातर एलपीजी बड़े समुद्री जहाजों के जरिए विदेशों से आती है। जहाज बंदरगाह पर रुकते हैं और बड़े पाइपों के जरिए गैस को किनारे पर बने विशाल 'इंपोर्ट टर्मिनल्स' में भेजा जाता है। यहां गैस को बहुत बड़े गोलाकार या बेलनाकार टैंकों में रखा जाता है। इन्हें एलपीजी टर्मिनल कहते हैं।
टर्मिनल से गैस को देश के अलग-अलग हिस्सों में बने 'बोटलिंग प्लांट' तक पहुंचाया जाता है। इसके दो मुख्य तरीके हैं।
एक पाइपलाइन- इसके जरिए जमीन के अंदर बिछी बड़ी पाइपलाइनों के जरिए गैस को सैकड़ों किलोमीटर दूर भेजा जाता है।
दूसरा रोड टैंकर- इसके तहत सफेद रंग के बड़े बुलेट नुमा ट्रक गैस को सड़क मार्ग से प्लांट तक ले जाते हैं।
इसके बाद गैस बोटलिंग प्लांट तक पहुंचते हैं, जहां सिलिंडर भरे जाते हैं।
यह इस सफर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। बोटलिंग प्लांट में गैस को लोहे के सिलिंडरों में भरा जाता है।
सफाई और जांच: खाली सिलिंडरों की बारीकी से जांच की जाती है कि कहीं कोई लीक या डेंट तो नहीं है।
फिलिंग: ऑटोमैटिक मशीनों के जरिए तय वजन (जैसे 14.2 किलो) के अनुसार गैस भरी जाती है।
सीलिंग: गैस भरने के बाद वाल्व पर सुरक्षा कैप लगाई जाती है और उसे सील कर दिया जाता है। इसके बाद डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए एलपीजी गैस सिलिंडर उपभोक्ताओं यानी हमारे आपके घरों तक पहुंचती है।
कीमती धातुओं में तेजी, निवेशकों की नजर फेड के फैसलों पर
17 Mar, 2026 01:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोना और चांदी की कीमतों में मंगलवार को तेजी देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने और पश्चिम एशिया के हालात को लेकर बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने फिर से बुलियन में खरीदारी बढ़ाई। चांदी की कीमत 3000 रुपये बढ़कर 2.59 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। वहीं सोने का भाव 860 रुपये बढ़कर 1.57 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
एमसीएक्स पर सोने-चांदी में दिखी तेजी
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सुबह 9:41 पर 2 अप्रैल 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में सोने 1,061 रुपए या 0.68 प्रतिशत बढ़कर 1,56,797 रुपए प्रति 10 ग्राम पर है। अब तक के कारोबार में सोने ने 1,56,649 का न्यूनतम स्तर और 1,56,996 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है, जो दिखाता है कि सोना तेजी के साथ, लेकिन एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। दूसरी तरफ, 5 मई 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में चांदी 3,353 रुपए या 1.31 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,59,885 रुपए पर कारोबार कर रही थी। अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,58,338 रुपए का न्यूनतम स्तर और 2,61,457 रुपए का उच्चतम स्तर छूआ।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी का भाव
एशियाई कारोबार के दौरान स्पॉट गोल्ड की कीमत मामूली बढ़त के साथ करीब 5,008 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। वहीं स्पॉट सिल्वर की कीमत 0.21% गिरकर लगभग 80.5 डॉलर प्रति औंस पर रही। विशेषज्ञों के मुताबिक, सोमवार को गिरावट के बाद तेल कीमतों में फिर हल्की बढ़त देखने को मिली। निवेशक एक ओर आपातकालीन तेल भंडार जारी करने की संभावनाओं पर नजर रख रहे हैं, तो दूसरी ओर ऊर्जा ढांचे पर बढ़ते हमलों के जोखिम का भी आकलन कर रहे हैं। इसी बीच अमेरिकी डॉलर इंडेक्स करीब 0.6% कमजोर हुआ, जिससे सोने को कुछ सहारा मिला।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव
इस बीच अमेरिका, इस्राइल और ईरान से जुड़े संघर्ष को अब तीन सप्ताह हो चुके हैं। सोमवार को ईरान ने फारस की खाड़ी क्षेत्र में कई जगह हमले किए, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात का एक प्रमुख तेल केंद्र और एक बड़ा गैस फील्ड भी शामिल था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए अन्य देशों से सहयोग की अपील की है, जहां से गुजरने वाली तेल आपूर्ति लगभग ठहर गई है। साथ ही ट्रंप ने ईरान के खार्ग द्वीप स्थित अहम तेल बुनियादी ढांचे पर हमले बढ़ाने की चेतावनी भी दी है।
फेड के फैसलों पर निवेशकों की नजर
अमेरिकी फेड की ब्याज दरों को लेकर दो दिवसीय बैठक 17 मार्च से शुरू हो रही है और इसके फैसलों का एलान 18 मार्च को किया जाएगा। मौजूदा समय में युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतों के चलते इस बार की फेड बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। बता दें, बीते कुछ महीनों में सोने और चांदी में आई तेजी की एक बड़ी वजह ब्याज दरों में कटौती होना था। अगर इस बैठक में फेड ब्याज दरों को स्थिर रखता है या कच्चे तेल में तेजी के कारण महंगाई बढ़ने के संकेत देता है तो यह सोने और चांदी के लिए नकारात्मक हो सकता है। ऐसे में इस बैठक से पहले निवेश सर्तक बने हुए हैं।
घरेलू बाजार में तेजी लौटी, सेंसेक्स और निफ्टी चढ़े, वहीं रुपये में 14 पैसे की गिरावट
17 Mar, 2026 01:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को हरे निशान पर खुला। शुरुआती कारोबार में निफ्टी 50 84.40 अंक या 0.36 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,493.20 पर खुला, जबकि बीएसई सेंसेक्स 321.32 अंक या 0.43 प्रतिशत की बढ़त के साथ 75,824.17 पर खुला। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 14 पैसे गिरकर 92.42 पर आ गया।
सेंसेक्स की कंपनियों का हाल
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से, इटरनल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति, टाटा स्टील, इंटरग्लोब एविएशन और भारती एयरटेल प्रमुख लाभ कमाने वाली कंपनियों में शामिल थीं। इंफोसिस, एचसीएल टेक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टेक महिंद्रा और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सबसे पिछड़ने वाली कंपनियों में शामिल थीं।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
बैंकिंग और मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा के मुताबिक, कैश इक्विटी सेगमेंट में एफपीआई ने 9,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली की। इसके बावजूद दिन के अंत में आई तेजी ने बाजार की दिशा बदल दी। वैश्विक संकेत भी सकारात्मक रहे। अमेरिका के बाजार मजबूती के साथ बंद हुए, जहां टेक्नोलॉजी शेयरों को एनविडिया के मजबूत गाइडेंस से सहारा मिला। इसके असर से एशियाई बाजारों की शुरुआत भी बढ़त के साथ हुई। वहीं, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) ने उम्मीद के मुताबिक 25 बेसिस प्वाइंट की दर वृद्धि की। हालांकि, अजय बग्गा ने चेतावनी दी कि कच्चे तेल की स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है। ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित होने से कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी की आपूर्ति बाधित हो रही है। उनका कहना है कि ईरान-अमेरिका संघर्ष खत्म होने के बाद भी तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं, जो वैश्विक आर्थिक वृद्धि पर दबाव डालेंगी।
एशियाई बाजारों में दिखी तेजी
इस रिपोर्ट के लिखे जाने के समय अन्य एशियाई बाजारों में अधिकांश प्रमुख सूचकांक हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। जापान का निक्केई 225 0.29 प्रतिशत बढ़कर 53908 के स्तर पर, हांगकांग का हैंग सेंग 0.94 प्रतिशत बढ़कर 26078 के स्तर पर, ताइवान का भारित सूचकांक 1.57 प्रतिशत बढ़कर 33865 के स्तर पर और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 2.63 प्रतिशत बढ़कर 5695 के स्तर पर पहुंच गया। सोमवार को अमेरिकी बाजारों में सभी प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। डाउ जोन्स 0.83 प्रतिशत बढ़कर 46946 के स्तर पर बंद हुआ, एसएंडपी 500 1 प्रतिशत बढ़कर 6,699.38 के स्तर पर पहुंच गया और नैस्डैक भी 1.22 प्रतिशत बढ़कर 22374 के स्तर पर पहुंच गया।
ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 103 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगातार वृद्धि जारी रही और यह 2.82 प्रतिशत बढ़कर 103 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई।
सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई और पिछले सप्ताह की तुलना में 24 कैरेट सोने की कीमत घटकर 156653 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। चांदी की कीमतों में भी गिरावट आई और वर्तमान में यह 259160 रुपये प्रति किलोग्राम है।
संस्थागत निवेश के मोर्चे पर, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 9366 करोड़ रुपये की शुद्ध बिक्री दर्ज की। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 12593 करोड़ रुपये के शुद्ध निवेश के साथ समर्थन प्रदान किया।
भारत-यूरोपीय संघ संबंधों को मिलेगा नया आयाम
17 Mar, 2026 12:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ब्रुसेल्स दौरे के दौरान यूरोपीय संघ (EU) के शीर्ष नेताओं और विदेश मंत्रियों के साथ व्यापक बातचीत की। इस दौरान हाल ही में अंतिम रूप दिए गए भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को द्विपक्षीय संबंधों में टर्निंग पॉइंट बताया गया। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने ईयू फॉरेन अफेयर्स काउंसिल के सदस्यों से मुलाकात की, साथ ही यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और ईयू की विदेश व सुरक्षा नीति प्रमुख काजा कैलास के साथ भी चर्चा की। इसके अलावा कई देशों के समकक्ष मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी हुईं। उन्होंने कहा कि एफटीए से भारत और ईयू के बीच विशाल आर्थिक संभावनाओं के द्वार खुलेंगे और यह साझेदारी को नई रणनीतिक दिशा देगा। जयशंकर ने जोर दिया कि इस समझौते के वास्तविक लाभ जमीन पर उतारने के लिए दोनों पक्षों को व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय सहयोग करना होगा।
जहाज के पहुंचने पर पूरी होंगी जरूरी औपचारिकताएं
17 Mar, 2026 11:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद भारत के लिए एलपीजी और कच्चा तेल लेकर आए भारतीय ध्वज वाले टैंकर सुरक्षित रूप से गुजरात के बंदरगाहों तक पहुंच रहे हैं। इससे ऊर्जा आपूर्ति को लेकर तत्काल राहत मिली है।
नंदा देवी आज पहुंचेगा कांडला पोर्ट
कतर के रास लाफान पोर्ट से 46,000 टन एलपीजी लेकर चला टैंकर शिवालिक नौ दिन की यात्रा के बाद सोमवार को मुंद्रा पोर्ट पहुंच गया। इसी तरह लगभग 46,000 टन एलपीजी लेकर आ रहा नंदा देवी टैंकर मंगलवार सुबह कांडला पोर्ट पहुंचने वाला है। दोनों जहाज सरकारी कंपनी शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के स्वामित्व में हैं।
जग लाडकी के आज मुंद्रा पोर्ट पहुंचने की उम्मीद
वहीं, यूएई के फुजैरा पोर्ट से शनिवार को रवाना हुआ क्रूड ऑयल टैंकर जग लाडकी मंगलवार दोपहर मुंद्रा पहुंचने की उम्मीद है। यह जहाज करीब 81,000 टन मुरबन क्रूड लेकर आ रहा है। खास बात यह है कि जहाज उसी दिन रवाना हुआ था, जब फुजैरा के तेल टर्मिनल पर हमला हुआ था। शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में काम कर रहे सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। सूत्रों के अनुसार, शिवालिक से आए एलपीजी में से 20,000 टन मुंद्रा में उतारा जाएगा, जबकि बाकी 26,000 टन न्यू मैंगलोर पोर्ट भेजा जाएगा। वहीं नंदा देवी के एलपीजी को कांडला पोर्ट के पास वडिनार में समुद्र में ही छोटे जहाजों में ट्रांसफर किया जाएगा, जिससे अलग-अलग स्थानों तक सप्लाई की जा सके। अधिकारियों ने बताया कि मुंद्रा पोर्ट पर विशेष स्टोरेज सुविधा मौजूद है, जहां से गैस पाइपलाइन के जरिए गांधिधाम के मिथी रोहर होते हुए गेल को भेजी जाती है और फिर राष्ट्रीय गैस ग्रिड के जरिए देशभर में सप्लाई होती है।
सरकार ने क्या दिए निर्देश?
सरकार ने प्रमुख बंदरगाहों को जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने और कार्गो ऑपरेशन में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत एंकरिज, बर्थ हायर और स्टोरेज शुल्क में रियायत दी जा रही है, साथ ही जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी में अस्थायी ट्रांसशिपमेंट की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इधर, एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश के बाद एचपीसीएल मित्तल एनर्जी (बठिंडा) और रिलायंस रिफाइनरी (जामनगर) ने रेल रेक्स की अतिरिक्त मांग रखी है, ताकि गैस की आपूर्ति देशभर में तेजी से पहुंचाई जा सके।
शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण में योगदान के लिए सम्मानित
17 Mar, 2026 06:34 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रिलायंस फाउंडेशन की फाउंडर और अध्यक्ष नीता अंबानी को कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (KISS) के मेंबर में KISS ह्यूमैनिटेरियन अवॉर्ड 2025 से सम्मानित किया गया। यह अवॉर्ड उन्हें उनके सामाजिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण बदलाव, महिला सशक्तिकरण और खेल को बढ़ावा देने के योगदान के लिए दिया गया। पुरस्कार श्रीलंका के नोबेल पुरस्कार विजेता मोहन मुनासिंघे ने प्रदान किया और कार्यक्रम में KIIT, KISS और KIMS के संस्थापक अच्युत सामंत, वरिष्ठ अधिकारी, छात्र एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। पुरस्कार स्वीकारते हुए नीता अंबानी ने कहा कि KIIT और KISS दो आधुनिक शिक्षा मंदिर हैं, जिन पर देश को गर्व है। उन्होंने 40,000 छात्रों को संबोधित करते हुए कहा आपकी दी गई प्रेम और स्नेह को मैं कभी नहीं भूलूंगी। यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि पूरी रिलायंस फाउंडेशन टीम का है।
उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा-
लड़कों और लड़कियों में कोई अंतर नहीं है, जो लड़के कर सकते हैं, वह लड़कियां भी कर सकती हैं।
यह सिर्फ शुरुआत है, अंतिम लक्ष्य नहीं। बड़े सपने देखें और उन्हें हासिल करने के लिए मेहनत और समर्पण से काम करें।
धर्म और नैतिकता के रास्ते को कभी मत छोड़िए। मुझे KISS में बच्चों को देखकर भारत का भविष्य उज्जवल दिखाई देता है।
गौरतलब है कि 2008 में शुरू किया गया यह पुरस्कार विश्वभर के उन व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित करता है, जो मानवता के क्षेत्र में योगदान देते हैं। पुरस्कार में सिटेशन स्क्रॉल और गोल्ड-प्लेटेड ट्रॉफी शामिल है। ट्रॉफी मानवता के स्वर्णिम हृदय का प्रतीक है और यह दर्शाती है कि समर्पित प्रयास कैसे वंचितों के जीवन को बदल सकते हैं।
KIIT यूनिवर्सिटी ने नीता अंबानी को मानद डॉक्टरेट (D.Litt. Honoris Causa) से भी सम्मानित किया। यह उनके सामाजिक और परिवर्तनकारी कार्यों के लिए दिया गया। समारोह में KIIT के उपकुलपति सरबजीत सिंह और संस्थापक अच्युत सामंत उपस्थित थे।
ईरान-इजरायल टकराव के बीच भारत ने बनाई नई योजना
16 Mar, 2026 02:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और देश में गैस की किल्लत के बीच नई दिल्ली की तरफ से लगातार कदम उठाए जा रहे हैं. आर्थिक संकट की आशंका के बीच Narendra Modi ईरान के साथ बातचीत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारत United States के साथ भी अपने संबंध बेहतर बनाए रखना चाहता है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण है दो भारतीय एलपीजी टैंकरों का Strait of Hormuz से होकर गुजरना.ईरान पर Israel और United States के संयुक्त हवाई हमलों के बाद स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज को पिछले करीब दो हफ्तों से पूरी तरह बंद कर दिया गया है. हालांकि जहां से युद्ध शुरू हुआ है, वहां से फिलहाल India, China और Russia को ही इस ट्रांजिट मार्ग से गुजरने की अनुमति मिली है|
भारत की जबरदस्त कूटनीति
ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद भारत ने शुरुआत में जरूर चुप्पी साधी थी, लेकिन युद्ध के ऊर्जा और वित्तीय बाजारों पर बढ़ते असर को देखते हुए नई दिल्ली ने कूटनीतिक पहल तेज कर दी है. भारत दुनिया में एलपीजी का सबसे बड़ा आयातक देशों में से एक है और युद्ध के बीच इसकी भारी किल्लत महसूस की जा रही है|एलपीजी का इस्तेमाल एक तरफ जहां रसोई गैस के रूप में होता है, वहीं दूसरी ओर औद्योगिक कार्यों में भी इसका उपयोग किया जाता है. दूसरी तरफ भारत अपनी जरूरतों का करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने के बाद महंगाई बढ़ने का दबाव बढ़ गया है. इसके साथ ही भारतीय मुद्रा भी अपने सर्वकालिक निचले स्तर के करीब पहुंच गई है|
दोहरी चुनौती को साधते भारत
एक तरफ जहां भारत ने ईरान से संपर्क साधा है, वहीं दूसरी ओर युद्ध के बीच अपने करीबी रणनीतिक और आर्थिक साझेदार United States के साथ संबंध भी मजबूत बनाए रखना चाहता है.इस महीने की शुरुआत में अमेरिका ने Russia से तेल खरीदने को लेकर भारत को राहत देते हुए अपने पुराने रुख से अलग रुख अपनाया. इससे पहले Donald Trump प्रशासन ने रूस से सस्ता तेल खरीदने के कारण भारत पर जुर्माने के तौर पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया हुआ था. अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट भी है और हाल में हुई एक डील के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर लगाए गए कुछ टैरिफ में कटौती का ऐलान किया था.अंतरराष्ट्रीय जानकारों की मानें तो India इस समय संतुलित एप्रोच के साथ आगे बढ़ रहा है. Takshashila Institution (बेंगलुरु स्थित थिंक टैंक) के फाउंडर Nitin Pai के मुताबिक Strait of Hormuz से भारतीय एलपीजी टैंकरों का गुजरना इस बात का सीधा संकेत है कि नई दिल्ली की कूटनीति काम कर रही है|
चांदी में भारी गिरावट, ₹4000 तक टूटी; सोना भी ₹1450 सस्ता
16 Mar, 2026 02:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम एशिया में जारी तनाव तीसरे हफ्ते में प्रवेश करने के बीच सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। चांदी की कीमत 4000 रुपये गिरकर 2.55 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। वहीं सोने का भाव 1450 रुपये गिरकर 1.57 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी का भाव
शुरुआती एशियाई कारोबार में स्पॉट गोल्ड में एक फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई और यह 5,000 डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गया। कारोबार के दौरान सोना 4,971.30 डॉलर के इंट्राडे लो तक पहुंच गया। वहीं, स्पॉट सिल्वर भी 2.23 फीसदी टूटकर 79.5 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।
क्या है गिरावट के कारण?
कीमती धातुओं में यह दबाव ऐसे समय देखने को मिल रहा है जब पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण ऊर्जा कीमतों में तेजी और महंगाई को लेकर चिंताओं ने वैश्विक बाजार का रुख प्रभावित किया है। बढ़ती महंगाई की आशंका के चलते यह उम्मीद कमजोर पड़ी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व और अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंक जल्द ब्याज दरों में कटौती शुरू करेंगे।दरअसल, अमेरिका द्वारा ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र को निशाना बनाकर किए गए हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। इसके जवाब में तेहरान ने कई अरब देशों के ऊर्जा ढांचे पर जवाबी हमले किए, जिससे बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई।युद्ध कितने समय तक चलेगा, इसको लेकर भी स्पष्टता नहीं है। इसी कारण वित्तीय बाजारों और व्यापक अर्थव्यवस्था पर इसके असर का आकलन करना मुश्किल हो रहा है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप के एक सहयोगी ने संकेत दिया है कि यह संघर्ष चार से छह हफ्ते तक खिंच सकता है। हालांकि, दोनों पक्षों की ओर से मिले-जुले संकेत मिल रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान समझौते में रुचि रखता है, लेकिन अमेरिका बेहतर शर्तें चाहता है। दूसरी ओर, तेहरान ने कहा है कि उसने न तो किसी वार्ता का अनुरोध किया है और न ही युद्धविराम की मांग की है।इस बीच, ब्याज दरों में कटौती को लेकर उम्मीदें और कमजोर हुई हैं। शुक्रवार को जारी अमेरिकी उपभोक्ता खर्च के आंकड़ों में जनवरी में केवल मामूली बढ़त दर्ज की गई, जो युद्ध शुरू होने से पहले ही सुस्त आर्थिक वृद्धि का संकेत दे रही थी। वहीं, पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के कारण अमेरिकी उपभोक्ता भावना भी तीन महीने के निचले स्तर पर आ गई।
शेयर बाजार खुलते ही दिखी सुस्ती, सेंसेक्स-निफ्टी में मामूली हलचल
16 Mar, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
एचडीएफसी बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया जैसे ब्लू-चिप शेयरों में मूल्य-खरीदारी के बीच तीन दिन की गिरावट के बाद सोमवार को इक्विटी बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में उछाल आया। शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 13 पैसे गिरकर 92.43 पर आ गया।शुरुआती कारोबार में, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 179.31 अंक गिरकर 74,384.61 पर आ गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 53.1 अंक गिरकर 23,098 पर पहुंच गया।हालांकि, बाद में दोनों बेंचमार्क सूचकांकों में तेजी आई। बीएसई का बेंचमार्क सूचकांक 342.02 अंक बढ़कर 74,899.76 पर और निफ्टी सूचकांक 88.55 अंक बढ़कर 23,240.95 पर कारोबार कर रहा था।
सेंसेक्स की कंपनियों का हाल
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से अल्ट्राटेक सीमेंट, टाटा स्टील, इंटरग्लोब एविएशन, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक और आईटीसी सबसे बड़े लाभ कमाने वालों में शामिल थीं। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंफोसिस, ट्रेंट और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज प्रमुख पिछड़ने वाली कंपनियों में शामिल थीं।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
भारत जटिल कूटनीतिक और आर्थिक दबावों के बीच आगे बढ़ रहा है। बैंकिंग और मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा ने कहा कि एक ओर भारत ने अमेरिकी प्रशासन और तेहरान, दोनों से संवाद बनाए रखते हुए अपने हितों को संतुलित किया है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक मैक्रोइकॉनॉमिक दबाव घरेलू बाजार पर भारी पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ देशों के लिए जलडमरूमध्य बंद होने जैसी स्थिति के बीच तीन भारतीय टैंकरों, जिनमें एलपीजी कैरियर भी शामिल हैं, को सुरक्षित मार्ग मिलना भारत की खास कूटनीतिक स्थिति को दर्शाता है।अजय बग्गा के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। मार्च में अब तक एफपीआई 54,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि एफपीआई सिर्फ शेयर बेच नहीं रहे, बल्कि इंडेक्स फ्यूचर्स में भारी नेट शॉर्ट पोजिशन लेकर बाजार में और गिरावट की आशंका पर दांव भी लगा रहे हैं। ऐसे में भारतीय शेयर बाजारों के लिए 23,240 के आसपास का स्तर अहम बना हुआ है और केंद्रीय बैंकों की टिप्पणियों से पहले बाजार में खरीदारी का मजबूत रुझान दिखना मुश्किल है।
एशियाई बाजारों में रहा मिला-जुला हाल
एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क कोस्पी, जापान का निक्केई 225 सूचकांक और शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक उच्च स्तर पर कारोबार कर रहा था। अमेरिकी बाजार शुक्रवार को गिरावट के साथ बंद हुआ।
ब्रेंट क्रूड का भाव 104 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचा
इस बीच, वैश्विक कमोडिटी कीमतों में भी तेजी बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 104 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है, जो पिछले सप्ताह के बंद स्तर से ऊपर है।कीमती धातुओं में सोमवार की शुरुआती ट्रेडिंग में सोने की कीमतों में हल्की नरमी जरूर दिखी, लेकिन 24 कैरेट सोना अब भी 1,58,400 रुपये प्रति 10 ग्राम के ऊंचे स्तर पर बना हुआ है।वहीं चांदी की कीमतों में 3.24 फीसदी की तेज गिरावट दर्ज की गई और यह 2,59,279 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई।मार्च महीने में एफपीआई की बिकवाली लगातार जारी है। अब तक मार्च के हर कारोबारी दिन विदेशी निवेशक शुद्ध बिकवाल रहे हैं।13 मार्च तक एक्सचेंजों के जरिए एफपीआई की कुल शुद्ध बिकवाली 54,455 करोड़ रुपये दर्ज की गई है।
लिपुलेख दर्रा खुलने से सीमा व्यापार में लौटेगी रौनक, स्थानीय कारोबारियों में उत्साह
