व्यापार
जल्दी फाइल करेंगे तो नोटिस का खतरा, ITR की आखिरी तारीख 15 जून
20 May, 2026 11:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। ज्यादातर टैक्सपेयर्स का मानना होता है कि अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) जितनी जल्दी हो सके फाइल कर देना चाहिए। लेकिन वित्तीय मामलों के विशेषज्ञों (एक्सपर्ट्स) के मुताबिक, बहुत ज्यादा जल्दबाजी करना कुछ मामलों में घाटे का सौदा साबित हो सकता है और आयकर विभाग का नोटिस भी आ सकता है। यह सावधानी विशेष रूप से नौकरीपेशा (सैलरीड) कर्मचारियों को बरतनी चाहिए। विशेषज्ञों की सलाह है कि वेतनभोगी वर्ग को 15 जून के बाद ही अपना आईटीआर फाइल करना चाहिए, हालांकि जुर्माने से बचने के लिए इसे अंतिम तारीख 31 जुलाई से पहले जरूर जमा कर दें।
सैलरीड क्लास के लिए 15 जून तक इंतजार करना क्यों है जरूरी?
नौकरीपेशा टैक्सपेयर्स को टैक्स फाइलिंग के दौरान फॉर्म 16, फॉर्म 16ए, फॉर्म 26एएस और एआईएस (AIS) जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जरूरत होती है। इन दस्तावेजों में आपके टीडीएस (TDS), वित्तीय लेनदेन, बैंक ब्याज, म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार के ट्रांजैक्शंस का पूरा ब्योरा होता है। बैंकों, कंपनियों और ब्रोकर्स जैसी संस्थाओं के लिए इन जानकारियों को अपडेट करने की आखिरी तारीख 31 मई होती है, जिसके बाद इसे एआईएस पोर्टल पर दिखने में 7 से 10 दिन का समय और लगता है। ऐसे में अगर आप 15 जून से पहले रिटर्न दाखिल करते हैं, तो डेटा मिसमैच (आंकड़ों में अंतर) होने के कारण टैक्स डिपार्टमेंट से नोटिस मिलने का खतरा बढ़ जाता है।
आयकर विभाग ने जारी किए सभी नए ITR फॉर्म
आयकर विभाग ने पिछले वित्त वर्ष 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) के लिए ITR-1 से लेकर ITR-7 तक के सभी फॉर्म और अपडेटेड रिटर्न फॉर्म (ITR-U) को नोटिफाई कर दिया है। इसके साथ ही ITR-1 और ITR-4 के लिए एक्सेल यूटिलिटी भी लाइव कर दी गई है। इसकी मदद से टैक्सपेयर्स ऑफलाइन माध्यम से अपना रिटर्न तैयार कर सकते हैं और बाद में उसे सीधे आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड कर सकते हैं। तकनीकी दिक्कतों और आखिरी समय की हड़बड़ी से बचने के लिए डेडलाइन से एक हफ्ता पहले ही रिटर्न फाइल कर लेना समझदारी है।
15 जून से पहले कौन फाइल कर सकता है अपना रिटर्न?
ऐसा नहीं है कि हर किसी को 15 जून तक रुकना होगा। ऐसे गैर-सैलरीड (नॉन-सैलरीड) टैक्सपेयर्स जिन्हें फॉर्म 16 की आवश्यकता नहीं होती और जिनकी कमाई का जरिया सिर्फ फिक्स्ड इनकम (जैसे घर का किराया या अन्य निश्चित आय) है, वे अपनी फाइलिंग पहले भी कर सकते हैं। बशर्ते उनकी इस आय पर कोई टीडीएस या टीसीएस न कटा हो। इसके अलावा जिन लोगों की ब्याज से आय है या सिर्फ कैपिटल गेन्स है और उन्हें किसी ऐसी संपत्ति की बिक्री से मुनाफा नहीं हुआ है जिसे एआईएस में अपडेट होना बाकी हो, वे भी 15 जून से पहले अपना आईटीआर आराम से फाइल कर सकते हैं।
33% उछाल की संभावना, नोमुरा ने सरकारी कंपनी का शेयर करने को कहा खरीद
20 May, 2026 10:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और गिरावट के माहौल में भी निवेशक तगड़ा मुनाफा कमा सकते हैं। दिग्गज विदेशी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने भारतीय शेयर बाजार के लिए अपनी 'टॉप पिक' (पसंदीदा शेयर) की घोषणा की है। अपनी ताजा रिपोर्ट में नोमुरा ने ऑयल मार्केटिंग सेक्टर की दिग्गज सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) को अपनी पहली पसंद बताया है और निवेशकों को इसमें खरीदारी की बड़ी सलाह दी है।
IOC के शेयरों पर 180 रुपये का टारगेट, 33% रिटर्न की उम्मीद
नोमुरा ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के मार्च तिमाही के नतीजों की समीक्षा करने के बाद अपनी 'बाय' (Buy) रेटिंग को बरकरार रखा है। ब्रोकरेज फर्म ने इस शेयर के लिए 180 रुपये का टारगेट प्राइस (लक्ष्य) तय किया है। इसका सीधा मतलब यह है कि यह शेयर अपनी मौजूदा कीमतों से करीब 33 फीसदी तक ऊपर चढ़ सकता है। बाजार की चौतरफा गिरावट के बीच भी आईओसी के शेयरों में मजबूती देखी गई और यह करीब आधा फीसदी से ज्यादा की बढ़त के साथ 135.78 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
उत्पादन क्षमता बढ़ाने और कच्चे तेल की कीमतों का मिलेगा फायदा
रिपोर्ट के मुताबिक, आईओसी को अपनी उत्पादन क्षमता (कपैसिटी) बढ़ाने का सीधा फायदा मिलने वाला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की बढ़ती कीमतों के बीच आईओसी अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के मुकाबले कहीं बेहतर स्थिति में नजर आ रही है। पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की मार्केटिंग करने वाली इस दिग्गज सरकारी कंपनी को मार्च तिमाही के दौरान इनवेंट्री का बड़ा लाभ मिला, जिसके चलते इसका EBITDA अनुमान से कहीं बेहतर रहा है।
ग्लोबल संकट के बीच दूसरे देशों से तेल-गैस सप्लाई पर फोकस
पूंजी बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच आईओसी का क्षमता विस्तार करना कंपनी के लिए बेहद सही समय पर लिया गया फैसला है। हालांकि, पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव के कारण हाइड्रोकार्बन सप्लाई चेन में अनिश्चितता जरूर बनी हुई है। इस चुनौती से निपटने के लिए आईओसी के मैनेजमेंट ने साफ किया है कि कंपनी ने कच्चे तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अब दुनिया के अन्य वैकल्पिक देशों पर अपना फोकस काफी बढ़ा दिया है।
ज्यादातर बाजार विश्लेषक शेयर पर बुलिश, मिली 'बाय' रेटिंग
आईओसी के प्रदर्शन पर नजर रखने वाले कुल 34 बाजार विश्लेषकों (एनालिस्ट्स) में से 20 ने इस शेयर को तुरंत खरीदने की सलाह दी है। वहीं, 7 एनालिस्ट्स ने इसे होल्ड करने और 7 ने बेचने की राय दी है। गौरतलब है कि कच्चे तेल की लागत में बढ़ोतरी को देखते हुए सरकारी तेल कंपनियों ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में दो बार संशोधन भी किया है, जिससे कंपनियों के मार्जिन में सुधार की उम्मीद है।
हाइब्रिड कारों में Toyota का जलवा, भारतीय बाजार में 3 लाख बिक्री
19 May, 2026 03:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। मशहूर वाहन निर्माता कंपनी टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में एक नया और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है। कंपनी द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, भारत में टोयोटा की हाइब्रिड (ईंधन और बिजली दोनों से चलने वाली) कारों की संचयी बिक्री का आंकड़ा 3 लाख यूनिट को पार कर गया है। यह शानदार रिकॉर्ड देश में कम प्रदूषण फैलाने वाले और अत्यधिक ईंधन-कुशल (फ्यूल एफिशिएंट) वाहनों की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता को साफ दर्शाता है। कंपनी ने इस सफलता पर भारतीय उपभोक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ब्रांड की विश्वसनीयता और आधुनिक हाइब्रिड तकनीक पर ग्राहकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है।
इनोवा हाईक्रॉस से लेकर कैमरी तक, इन मॉडलों ने बाजार में मचाया धमाल
भारतीय बाजार में टोयोटा वर्तमान में पर्यावरण-अनुकूल कारों की एक विस्तृत श्रृंखला पेश कर रही है, जो ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। इनमें प्रमुख रूप से टोयोटा अर्बन क्रूजर हाईराइडर ($Urban\ Cruiser\ Hyryder$), बेहद लोकप्रिय इनोवा हाईक्रॉस ($Innova\ HyCross$), प्रीमियम सेडान कैमरी हाइब्रिड ($Camry\ Hybrid$) और आलीशान टोयोटा वेलफायर ($Vellfire$) शामिल हैं। इन सभी वाहनों को बेहतरीन माइलेज, न्यूनतम कार्बन उत्सर्जन और प्रीमियम ड्राइविंग अनुभव के लिए जाना जाता है, जो आज के दौर में पारंपरिक ईंधन कारों का एक बेहतरीन विकल्प साबित हो रहे हैं।
कार्बन मुक्त भविष्य के लिए टोयोटा का ग्लोबल प्लान; घट रहा प्रदूषण
टोयोटा ने स्पष्ट किया कि यह बड़ी सफलता कंपनी की उस दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत वह दुनिया को कार्बन न्यूट्रल (प्रदूषण मुक्त) बनाने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी केवल हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल ($HEV$) तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह भविष्य की तकनीक जैसे प्लग-इन इलेक्ट्रिक व्हीकल ($PHEV$), पूरी तरह से बिजली से चलने वाली गाड़ियां ($BEV$) और हाइड्रोजन आधारित फ्यूल-सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल ($FCEV$) के विकास पर भी तेजी से ध्यान केंद्रित कर रही है। आपको बता दें कि पिछले तीन दशकों में टोयोटा वैश्विक स्तर पर 3.8 करोड़ से अधिक इलेक्ट्रिफाइड वाहन बेच चुकी है, जिससे दुनिया भर में लगभग 19.7 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) उत्सर्जन को कम करने में मदद मिली है।
जानिए कैसे काम करती है टोयोटा की 'सेल्फ-चार्जिंग' हाइब्रिड तकनीक
टोयोटा की गाड़ियों की सबसे बड़ी खासियत इसकी अनूठी सेल्फ-चार्जिंग हाइब्रिड तकनीक है। इस सिस्टम में एक कुशल पेट्रोल इंजन और एक शक्तिशाली इलेक्ट्रिक मोटर मिलकर काम करते हैं। कार चलाते समय यह तकनीक सड़क और रफ्तार की जरूरत के हिसाब से खुद-ब-खुद पेट्रोल इंजन और बैटरी पावर के बीच स्विच होती रहती है। सबसे खास बात यह है कि इन कारों को चार्ज करने के लिए किसी बाहरी चार्जिंग स्टेशन या प्लग की आवश्यकता नहीं होती। गाड़ी में लगी हाइब्रिड बैटरी 'रीजेनरेटिव ब्रेकिंग' (ब्रेक लगाने से पैदा होने वाली ऊर्जा) और चलते हुए इंजन की पावर से अपने आप ही चार्ज हो जाती है।
व्यावहारिक और भरोसेमंद सफर हमारी प्राथमिकता: मैनेजमेंट
टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट सबारी मनोहर ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर कंपनी का दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने कहा कि हमारी व्यापक इलेक्ट्रिफिकेशन रणनीति का मुख्य उद्देश्य आम उपभोक्ताओं को उनकी दैनिक जरूरतों के अनुसार व्यावहारिक, सुलभ और अत्यधिक भरोसेमंद सफर के साधन उपलब्ध कराना है। उन्होंने आगे कहा कि हाइब्रिड तकनीक पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ मोबिलिटी की ओर बढ़ता हुआ एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि इसके जरिए ग्राहक बिना किसी अतिरिक्त चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की असुविधा के पर्यावरण के अनुकूल परिवहन प्रणाली को अपना पा रहे हैं।
Astral स्टॉक में 6% की गिरावट, Q4 नतीजों के बाद निवेशकों की नजरें
19 May, 2026 03:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। घरेलू शेयर बाजार में आज प्लास्टिक पाइप और एडहेसिव (गोंद) बनाने वाली दिग्गज कंपनी एस्ट्रल लिमिटेड ($Astral$) का शेयर निवेशकों के लिए निराशाजनक साबित हुआ। बाजार को कंपनी द्वारा जारी किए गए हालिया तिमाही वित्तीय परिणाम बिल्कुल रास नहीं आए, जिसके चलते आज के कारोबार में इस स्टॉक को 'एक्सीडेंट ऑफ द डे' के रूप में देखा जा रहा है। बिकवाली के भारी दबाव के कारण कंपनी का शेयर करीब 6 प्रतिशत यानी 92.80 रुपये की बड़ी कमजोरी के साथ 1,453 रुपये के आसपास ट्रेंड कर रहा है। आज बाजार खुलते ही यह शेयर 1,545.70 रुपये के उच्च स्तर (डे हाई) पर गया था, लेकिन नतीजों के बाद मुनाफावसूली हावी होने से यह 1,440.50 रुपये के निचले स्तर (डे लो) तक लुढ़क गया।
अनुमान से कमजोर रहे चौथी तिमाही के आंकड़े, मार्जिन पर दिखा दबाव
31 मार्च 2026 को समाप्त हुई चौथी तिमाही ($Q4$) के वित्तीय परिणामों पर नजर डालें तो कंपनी का प्रदर्शन बाजार विश्लेषकों के अनुमानों से काफी पीछे रहा है। हालांकि, सालाना आधार पर कंपनी का शुद्ध मुनाफा 178 करोड़ रुपये से 20 फीसदी बढ़कर 213 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। लेकिन राजस्व (रेवेन्यू) के मोर्चे पर जहां बाजार को 30% की ग्रोथ (वृद्धि) की उम्मीद थी, वहीं कंपनी केवल 24% की बढ़त ही हासिल कर सकी। इसी तरह, कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन 18% से मामूली बढ़कर 18.3% रहा, जबकि इसके 19.2% रहने का अनुमान लगाया गया था। प्लंबिंग (पाइप) बिजनेस में वित्त वर्ष 2026 ($FY26$) के दौरान कुल वॉल्यूम सालाना आधार पर 15.8% की बढ़त के साथ 2,63,026 मीट्रिक टन ($MT$) पर पहुंच गया है।
मैनेजमेंट को बेहतर भविष्य की उम्मीद, पॉलिमर की कीमतें बढ़ने के संकेत
तिमाही नतीजों के बाद एस्ट्रल के प्रबंधन (मैनेजमेंट कमेंट्री) की ओर से सकारात्मक रुख दिखाने का प्रयास किया गया। मैनेजमेंट का कहना है कि इस उद्योग में ओवरऑल ग्रोथ काफी मजबूत है और संगठित (ऑर्गेनाइज्ड) कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी (मार्केट शेयर) लगातार बढ़ रही है। चौथी तिमाही में मांग अच्छी रही है और वित्त वर्ष 2027 ($FY27$) में वैल्यू और वॉल्यूम दोनों में 15% की विकास दर देखी गई है। कंपनी ने बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाला है। इसके साथ ही प्रबंधन ने चेतावनी दी है कि मौजूदा स्तरों से आने वाले समय में पॉलिमर की कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं।
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म CLSA और जेफरीज ने दी 'Hold' की रेटिंग
नतीजों के बाद बड़े ब्रोकरेज घरानों ने एस्ट्रल के शेयर पर अपनी नई समीक्षा रिपोर्ट जारी की है:
CLSA का नजरिया: वैश्विक ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए ($CLSA$) ने एस्ट्रल के स्टॉक पर 'Hold' (बनाए रखने) की रेटिंग देते हुए प्रति शेयर 1,475 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। ब्रोकरेज के अनुसार, विदेशी मुद्रा लागत (फॉरेक्स कॉस्ट) बढ़ने और टैक्स के कारण मुनाफा प्रभावित हुआ है। हालांकि, पाइप सेगमेंट में मुनाफा मजबूत है, लेकिन एडहेसिव (Adhesive) बिजनेस के कारण कंसोलिडेटेड मार्जिन पर दबाव देखा गया।
जेफरीज की राय: दूसरी बड़ी ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ($Jefferies$) ने भी इस शेयर को 'Hold' श्रेणी में रखते हुए 1,570 रुपये का लक्ष्य दिया है। जेफरीज का कहना है कि कंपनी का प्लंबिंग वॉल्यूम तो 24 फीसदी की दर से ठीक रहा, लेकिन एडहेसिव मार्जिन में आई तेज गिरावट ने निवेशकों को थोड़ा निराश किया है। बाजार की नजरें अब कंपनी की आगामी एनालिस्ट मीटिंग पर टिकी हैं, जहां नए प्रोडक्ट्स और विदेशी एडहेसिव बिजनेस प्लान को लेकर स्थिति और साफ होगी।
Coforge स्टॉक पर जोर, 6% से ऊपर की बढ़त के साथ CLSA की राय जानें
19 May, 2026 01:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में आई तूफानी तेजी के दम पर घरेलू शेयर बाजार में आज शानदार रौनक देखने को मिल रही है। प्रमुख सूचकांक निफ्टी लगभग 85 अंकों की बढ़त दर्ज करते हुए 23,700 के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार निकलकर कारोबार कर रहा है। हालांकि, आज बैंकिंग इंडेक्स (बैंक निफ्टी) में सुस्ती है और यह सपाट नजर आ रहा है, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में निवेशकों द्वारा की जा रही चौतरफा खरीदारी से बाजार को पूरा सपोर्ट मिल रहा है। इस तेजी के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव को दर्शाने वाला वोलैटिलिटी इंडेक्स 'इंडिया विक्स' ($INDIA\ VIX$) करीब 6 फीसदी तक लुढ़क गया है, जिससे बाजार के तेजड़ियों (बुल्स) ने बड़ी राहत की सांस ली है।
आईटी इंडेक्स में 4% की दौड़, वायदा बाजार के टॉप गेनर्स में टेक कंपनियां
आज के कारोबार में टेक शेयरों का दबदबा साफ नजर आ रहा है। निफ्टी का आईटी इंडेक्स करीब 4 प्रतिशत तक उछल गया है। दिग्गज आईटी कंपनियों में शुमार इंफोसिस, परसिस्टेंट और कोफोर्ज के शेयरों में 6 फीसदी से भी ज्यादा की शानदार तेजी देखी जा रही है। बाजार के जानकारों के मुताबिक, वायदा बाजार (F&O) के आज के टॉप-5 गेनर्स की सूची में सभी पांचों नाम आईटी क्षेत्र की कंपनियों के ही शामिल हैं, जो इस सेक्टर में आई जबरदस्त बाइंग को दर्शाते हैं।
कोफोर्ज के शेयर में भारी लिवाली, ब्रोकरेज फर्म CLSA ने दिया बड़ा टारगेट
आईटी सेक्टर की इस रफ्तार में कोफोर्ज लिमिटेड के शेयर का बड़ा योगदान रहा है। दोपहर के कारोबार के दौरान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर यह शेयर करीब 6.57 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,437 रुपये के आसपास ट्रेंड कर रहा था। आज के कारोबार में इसने 1,447 रुपये का उच्च स्तर (डे हाई) छुआ।
इस बीच वैश्विक ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए ($CLSA$) ने कोफोर्ज के शेयर पर भरोसा जताते हुए इसे 'हाई कन्विक्शन आउटपरफॉर्म' रेटिंग दी है और प्रति शेयर 2,075 रुपये का बड़ा टारगेट (लक्ष्य) तय किया है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी के मैनेजमेंट का बेहतर कामकाज आगे भी जारी रहेगा और कम मार्जिन वाले सरकारी प्रोजेक्ट्स से बाहर निकलने का फैसला कंपनी के हक में जाएगा। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ($AI$) वर्टिकल और मजबूत ऑर्डर बुक से कंपनी को आने वाले समय में बड़ा मुनाफा होने की उम्मीद है।
जेनरेटिव AI के दौर में आईटी स्टॉक्स की चाल और चुनौतियां
यदि शेयर की हालिया चाल पर नजर डालें तो कोफोर्ज ने पिछले एक हफ्ते में करीब 8.14 प्रतिशत और एक महीने में 8.46 फीसदी का सकारात्मक रिटर्न दिया है। हालांकि, लंबी अवधि में इस सेक्टर को चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा है। चालू वर्ष में जनवरी से लेकर अब तक आईटी इंडेक्स में 22% से अधिक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, एंथ्रोपिक के 'क्लॉड कोड' ($Claude\ Code$) और ओपनएआई ($OpenAI$) द्वारा लगातार लॉन्च किए जा रहे नए एडवांस्ड एआई टूल्स के कारण टेक इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव (डिस्रप्शन) आ रहा है। निवेशकों के मन में यह आशंका बनी हुई है कि जेनरेटिव एआई की यह तेज प्रगति ट्रेडिशनल आईटी और प्रोफेशनल सर्विसेज की मांग को सीमित कर सकती है। इसके बावजूद, पिछले कुछ सत्रों से तकनीकी शेयरों में आ रही यह रिकवरी निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
अदाणी ग्रुप के शेयरों में तेजी, अमेरिका ने आरोप वापस लिए
19 May, 2026 12:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। मंगलवार सुबह शेयर बाजार के खुलते ही अदाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में शानदार उछाल दर्ज किया गया। इसकी मुख्य वजह यह है कि अमेरिकी न्याय विभाग ने उद्योगपति गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक आरोपों को स्थायी रूप से वापस ले लिया है। अमेरिकी न्याय विभाग के इस बड़े फैसले के साथ ही न्यूयॉर्क की अदालत में चल रहा हाई-प्रोफाइल सिक्योरिटीज और वायर फ्रॉड का मामला पूरी तरह समाप्त हो गया है। अमेरिकी सरकारी वकीलों (प्रॉसिक्यूटर्स) का मानना है कि गौतम अदाणी और सागर अदाणी पर लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं।
क्लीन चिट मिलते ही शेयर बाजार में अदाणी कंपनियों का दबदबा
अमेरिका से मिली इस बड़ी राहत की खबर आते ही भारतीय शेयर बाजार में अदाणी ग्रुप के शेयरों में 3% तक की तेजी देखी गई। शुरुआती कारोबार में 'अदाणी ग्रीन एनर्जी' का शेयर 3 प्रतिशत की मजबूती के साथ 1,410.10 रुपये पर पहुंच गया। वहीं, ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी 'अदाणी एंटरप्राइजेज' नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर 2.26 प्रतिशत चढ़कर 2,750.60 रुपये पर कारोबार कर रही थी। इसके अलावा 'अदाणी टोटल गैस' में 2.06 प्रतिशत की बढ़त के साथ भाव 622.65 रुपये और 'अदाणी पावर' में मामूली तेजी के साथ 219.90 रुपये पर ट्रेंड देखा गया। 'अडानी पोर्ट्स' भी हरी बत्ती के साथ 1,792.30 रुपये पर कारोबार करता नजर आया।
6 करोड़ डॉलर के भुगतान के साथ सुलझा सोलर प्रोजेक्ट विवाद
आपराधिक मामले हटने से पहले पिछले कुछ दिनों में अदाणी समूह से जुड़े अमेरिका के कई अन्य बड़े कानूनी और रेगुलेटरी मामले भी खत्म हो चुके हैं। पिछले सप्ताह ही, यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन ($SEC$) ने भारत में सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स से जुड़े निवेशकों को गलत जानकारी देने (इन्वेस्टर डिस्क्लोज़र) के सिविल आरोपों का निपटारा किया था। कोर्ट के दस्तावेजों के अनुसार, इस मामले को रफा-दफा करने के लिए गौतम अदाणी ने 6 करोड़ डॉलर और सागर अदाणी ने 1.2 करोड़ डॉलर की राशि देने पर रजामंदी जताई थी। हालांकि, दोनों ने इन आरोपों को न तो स्वीकार किया है और न ही इनसे इनकार किया है।
ईरान प्रतिबंधों के उल्लंघन का मामला भी हुआ रफा-दफा
इसी सिलसिले में 'ऑफिस ऑफ फॉरेन असेट्स कंट्रोल' ($OFAC$) ने भी उस जांच को बंद कर दिया है, जिसमें आरोप था कि अदाणी ग्रुप ने एलपीजी ($LPG$) के आयात के जरिए ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन किया था। इस मामले के शांतिपूर्ण निपटारे के लिए अदाणी ग्रुप ने 27.5 करोड़ डॉलर का हर्जाना देने की बात मानी। बताया जा रहा है कि ग्रुप ने इस पूरी जांच के दौरान अमेरिकी अधिकारियों को खुद सारी जानकारियां देकर पूरा सहयोग किया था।
अदाणी समूह के लिए राहत भरा हफ्ता, कानूनी संकटों से मिली मुक्ति
ताजा घटनाक्रम के तहत न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट के यूनाइटेड स्टेट्स अटॉर्नी कार्यालय के संघीय अभियोजकों द्वारा सभी आपराधिक आरोपों को पूरी तरह ड्रॉप (खारिज) कर दिए जाने के बाद, अब अदाणी परिवार और उनके बिजनेस साम्राज्य पर मंडरा रहे सभी अंतरराष्ट्रीय कानूनी संकट खत्म हो गए हैं। कॉरपोरेट जगत और निवेशकों ने इस फैसले का स्वागत किया है, जिसका सीधा असर आज सुबह से बाजार के सकारात्मक रुख में दिखाई दे रहा है।
एक हफ्ते में दूसरी बार पेट्रोल-डीजल महँगा, जनता पर असर
19 May, 2026 10:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश में आम आदमी की जेब पर एक बार फिर ईंधन की बढ़ती कीमतों का भारी बोझ पड़ा है। तेल विपणन कंपनियों ने मंगलवार को पेट्रोल और डीजल के दामों में लगभग 90 पैसे प्रति लीटर की नई बढ़ोतरी कर दी है। आम जनता के लिए सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि मात्र एक हफ्ते के भीतर यह दूसरा मौका है जब तेल के दामों में इस तरह की वृद्धि की गई है।
सिर्फ तीन दिन पहले ही बढ़े थे ₹3 प्रति लीटर दाम
मंगलवार को हुई इस बढ़ोतरी से ठीक तीन दिन पहले यानी शुक्रवार को ही केंद्र सरकार ने देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपये प्रति लीटर का बड़ा इजाफा किया था। उस बढ़ोतरी के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल का रेट 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये से बढ़कर 90.67 रुपये हुआ था। अब नई बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे और महंगा होकर 98.64 रुपये और डीजल 91 पैसे बढ़कर 91.58 रुपये प्रति लीटर पर पहुँच गया है।
देश के अन्य चार बड़े महानगरों का हाल
दिल्ली के अलावा देश के अन्य प्रमुख महानगरों में भी ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं। मुंबई, कोलकाता और चेन्नई के नए आंकड़े इस प्रकार हैं:
शहर
पेट्रोल में बढ़ोतरी
नया दाम (पेट्रोल)
डीजल में बढ़ोतरी
नया दाम (डीजल)
दिल्ली
87 पैसे
₹98.64
91 पैसे
₹91.58
मुंबई
91 पैसे
₹107.59
94 पैसे
₹94.08
कोलकाता
96 पैसे
₹109.70
94 पैसे
₹96.07
चेन्नई
82 पैसे
₹104.49
86 पैसे
₹96.11
वैश्विक तनाव और ईरान युद्ध बना कीमतों में तेजी की वजह
घरेलू बाजार में तेल महंगा होने के पीछे अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियां मुख्य वजह हैं। पश्चिमी एशिया में चल रहे युद्ध और तनाव के कारण दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहरा गया है। इस विवाद के चलते समुद्री व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में रुकावट आई है। अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे इस संघर्ष के कारण ब्रेंट क्रूड (कच्चा तेल) अंतर्राष्ट्रीय बाजार में 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है, हालांकि इस क्षेत्र में युद्धविराम के लिए कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं।
दाम बढ़ने से तेल कंपनियों के घाटे में आई कमी
ईंधन की कीमतों में की गई इस बढ़ोतरी से सरकारी तेल कंपनियों को थोड़ा सहारा मिला है। पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, कीमतों में सुधार के बाद कंपनियों का रोजाना का घाटा लगभग 25% कम होकर 750 करोड़ रुपये रह गया है, जो पहले 1,000 करोड़ रुपये तक पहुँच चुका था। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, इस घाटे की भरपाई के लिए तेल कंपनियों को किसी भी तरह की सरकारी सब्सिडी या राहत पैकेज देने की कोई योजना नहीं है।
मेटा की योजना: छंटनी के साथ AI विभाग में बड़ा रीऑर्गनाइजेशन
19 May, 2026 08:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैलिफोर्निया। सोशल मीडिया दिग्गज फेसबुक की पेरेंट कंपनी 'मेटा' ने इस हफ्ते होने वाली अपनी छंटनी और रीस्ट्रक्चरिंग (पुनर्गठन) योजना का पूरा खाका तैयार कर लिया है। सोमवार को कर्मचारियों को भेजे गए एक आंतरिक मेमो में कंपनी ने साफ किया कि वैश्विक स्तर पर वर्कफोर्स को कम करने के साथ-साथ सांगठनिक बदलाव किए जा रहे हैं। इन भारी बदलावों का मुख्य उद्देश्य कंपनी के कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीकों को बढ़ावा देना है।
बुधवार को होगी 10 फीसदी कर्मचारियों की छंटनी
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा इसी बुधवार को अपने कुल वर्कफोर्स में से 10 प्रतिशत कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की योजना बना रही है। इतना ही नहीं, यह भी आशंका जताई गई है कि इस साल के अंत तक कंपनी बड़े पैमाने पर और भी कर्मचारियों की कटौती कर सकती है। मार्च 2026 तक मेटा में लगभग 77,986 कर्मचारी काम कर रहे थे, लेकिन अब कई ओपन जॉब पोस्ट्स को भी फ्रीज कर दिया गया है।
7,000 कर्मियों का ट्रांसफर और छोटी टीमों का गठन
मेटा की चीफ पीपल ऑफिसर जेनेल गैल द्वारा जारी मेमो के अनुसार, करीब 7,000 कर्मचारियों को कंपनी से निकालने के बजाय एआई (AI) से जुड़ी नई परियोजनाओं और टीमों में ट्रांसफर किया जाएगा। कंपनी अब मैनेजरों के कई पदों को खत्म कर रही है ताकि मैनेजमेंट का ढांचा छोटा और सीधा (समतल) हो सके। अब कंपनी छोटी-छोटी 'पॉड' और 'कोहोर्ट' टीमों के जरिए काम करेगी, जिससे फैसले तेजी से लिए जा सकें।
माउस-ट्रैकिंग और एआई को लेकर कर्मचारियों में भारी गुस्सा
मेटा के इस फैसले के बाद कर्मचारियों के बीच भारी असंतोष और नाराजगी देखी जा रही है। दफ्तरों में विरोध प्रदर्शन के पोस्टर लगाए गए हैं और कंपनी के आंतरिक प्लेटफॉर्म 'वर्कप्लेस' पर भी कर्मचारी खुलकर विरोध कर रहे हैं। 1,000 से अधिक कर्मचारियों ने एक विरोध पत्र (याचिका) पर दस्तखत किए हैं। उनका आरोप है कि कंपनी 'माउस-ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर' के जरिए उनके काम करने के तरीकों की निगरानी कर रही है, ताकि इंसानी व्यवहार को एआई मॉडल्स को सिखाया जा सके।
पूरी टेक इंडस्ट्री में एआई के कारण नौकरियों पर संकट
नौकरी से निकाले जाने और ट्रांसफर की इस पूरी प्रक्रिया का असर मेटा के करीब 20 प्रतिशत कर्मचारियों पर पड़ने वाला है। गौरतलब है कि तकनीकी क्षेत्र में केवल मेटा ही ऐसी कंपनी नहीं है जो यह कदम उठा रही है। इस साल कई दिग्गज अमेरिकी टेक कंपनियों ने इंसानी कामकाज की जगह एआई ऑटोमेशन को शामिल किया है, जिसके कारण पूरी टेक इंडस्ट्री में लगातार छंटनी का दौर चल रहा है।
SBI समेत बैंकों से फंडिंग, Vodafone Idea को मिलेगा 35,000 करोड़ का कर्ज
18 May, 2026 05:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। एजीआर (AGR) मामले में बड़ी राहत मिलने के बाद देश की प्रमुख टेलीकॉम ऑपरेटर कंपनी वोडाफोन आइडिया (Vodafone Idea) अब अपने कारोबार के विस्तार के लिए बड़े पैमाने पर फंडिंग जुटाने की तैयारी में है। कंपनी अपने ₹35,000 करोड़ के भारी-भरकम लोन पैकेज के लिए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की अगुवाई वाले बैंकों के एक बड़े कंसोर्टियम (लेंडर ग्रुप) के साथ लगातार संपर्क में है। इस बैंकिंग समूह में देश के सरकारी व निजी बैंकों के साथ-साथ कई विदेशी वित्तीय संस्थान भी शामिल हैं। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अभिजीत किशोर ने सोमवार को चौथी तिमाही के वित्तीय नतीजों की घोषणा के दौरान यह अहम जानकारी साझा की। उन्होंने भरोसा जताया कि लोन की यह प्रक्रिया बेहद कम समय में पूरी कर ली जाएगी।
लोन एग्रीमेंट की प्रक्रिया बहुत जल्द होगी पूरी
कंपनी के सीईओ अभिजीत किशोर के अनुसार, बैंकों के समूह के साथ लोन को लेकर चल रही बातचीत अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। टेलीकॉम ऑपरेटर को पूरी उम्मीद है कि इस कर्ज की औपचारिकताएं बहुत जल्द अंतिम रूप ले लेंगी, जिससे कंपनी को बाजार में अपनी रणनीतियों को तेजी से लागू करने के लिए जरूरी पूंजी मिल सकेगी।
मार्केट में आक्रामक निवेश के साथ ब्रांड इमेज चमकाने की योजना
शीर्ष अधिकारी ने स्पष्ट किया कि एजीआर बकाया और लंबे समय से चले आ रहे वित्तीय संकट के कारण कंपनी को काफी अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ा था। लेकिन अब स्थितियां बदलने के बाद, वोडाफोन आइडिया बाजार में अपनी खोई हुई साख और ब्रांड छवि को दोबारा मजबूती से स्थापित करने के लिए तैयार है। इसके लिए कंपनी आने वाले दिनों में और अधिक आक्रामक तरीके से पूंजी निवेश (इन्वेस्टमेंट) करने का बड़ा प्लान बना रही है।
अगले 3 सालों के वित्तीय दायित्वों को पूरा करने का रोडमैप तैयार
अभिजीत किशोर ने आगामी तीन वर्षों के लिए कंपनी के वित्तीय रोडमैप को लेकर भी गहरा विश्वास जताया है। उन्होंने कहा कि वोडाफोन आइडिया अपने सभी आगामी वित्तीय दायित्वों और देनदारियों को समय पर पूरा करेगी। इसके लिए कंपनी ने एक बहु-आयामी रणनीति तैयार की है, जिसके तहत बेहतर एबिटडा (EBITDA), नई फंडिंग, प्रमोटरों द्वारा अतिरिक्त निवेश और मिलने वाले टैक्स रिफंड के सही तालमेल का उपयोग किया जाएगा।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद एक्जिम बैंक FY2027 में 10% ऋण वृद्धि पर केंद्रित
18 May, 2026 01:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे गंभीर भू-राजनीतिक संकट और उथल-पुथल के बावजूद, भारतीय निर्यात-आयात बैंक (एक्ज़िम बैंक) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए एक मजबूत कदम उठाया है। बैंक ने नए वित्तीय वर्ष में अपनी लोन बुक (ऋण पुस्तिका) को स्थिर मुद्रा के आधार पर 10 फीसदी तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। बैंक की प्रबंध निदेशक (MD) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) हर्षा बंगारी ने स्पष्ट किया है कि वैश्विक चुनौतियों के बाद भी भारतीय निर्यातकों की मदद करने और उन्हें वित्तीय संबल देने के लिए बैंक यह क्रेडिट ग्रोथ हासिल करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
विदेशी मुद्रा का गणित और कर्ज का बदलता ट्रेंड
एक्ज़िम बैंक ने पिछले वित्तीय वर्ष (2025-26) के दौरान अपने लोन डिस्ट्रीब्यूशन में 12 प्रतिशत की शानदार बढ़त दर्ज की थी। हालांकि, इस बड़ी उछाल के पीछे विदेशी करेंसी के उतार-चढ़ाव की मुख्य भूमिका थी, जिसका बैंक के कुल आंकड़ों पर करीब 5 फीसदी तक का सीधा असर पड़ा था। सीईओ हर्षा बंगारी ने बताया कि बैंक की कुल लोन बुक का 58 प्रतिशत हिस्सा विदेशी मुद्रा में है, जबकि बाकी का हिस्सा भारतीय रुपये में दिया गया है। आने वाले समय में देश के निर्यातकों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि रुपये में लोन लेने का चलन और तेजी से बढ़ेगा।
मिडिल ईस्ट संकट का फिलहाल मामूली असर, लंबी अवधि के प्रोजेक्ट सुरक्षित
चूंकि एक्ज़िम बैंक द्वारा दिए जाने वाले ज्यादातर लोन मध्यम से लंबी अवधि (लॉन्ग टर्म) के लिए होते हैं, इसलिए पश्चिम एशिया के मौजूदा तनाव का इस पर तुरंत कोई बड़ा नुकसान नहीं दिख रहा है। इस अशांत क्षेत्र में बैंक का निवेश बहुत सीमित है, जिससे कर्ज की रिकवरी पर कोई आंच नहीं आई है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो सप्लाई चेन प्रभावित होने से भारतीय निर्यातकों के मुनाफे पर दबाव आ सकता है। ऐसी स्थिति में निर्यातक विदेशी बाजारों की बजाय घरेलू मार्केट का रुख कर सकते हैं, जिससे बैंक की नई क्रेडिट ग्रोथ की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है।
लैटिन अमेरिका बना नया ठिकाना, ब्राजील में खुला नया दफ्तर
भारतीय व्यापारिक कंपनियों में वैश्विक आर्थिक झटकों को झेलने का लंबा अनुभव है। इससे पहले भी अमेरिकी टैरिफ विवाद के समय भारतीय कारोबारियों ने नए देशों में अपने पैर पसारकर खुद को सुरक्षित कर लिया था। इसी रणनीति के तहत अब भारतीय निर्यातकों का मुख्य फोकस लैटिन अमेरिकी देशों पर है। इन नए और उभरते हुए बाजारों में भारतीय कारोबारियों को हर संभव मदद देने के लिए एक्ज़िम बैंक ने ब्राजील के प्रमुख शहर साओ पाउलो में अपना नया दफ्तर खोलकर कामकाज शुरू कर दिया है।
निर्यातकों की मदद के लिए बाजार से जुटाए जाएंगे 99,500 करोड़ रुपये
व्यापारियों को कर्ज की कमी न हो, इसके लिए एक्ज़िम बैंक ने पूंजी जुटाने का एक बेहद आक्रामक और बड़ा प्लान तैयार किया है। बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान बाजार से कुल 99,500 करोड़ रुपये का फंड जुटाने की घोषणा की है, जो पिछले साल के 86,000 करोड़ रुपये के उधारी लक्ष्य से काफी ज्यादा है। इस महा-योजना के तहत विदेशी बाजारों से भी बांड जारी करके लगभग 3.5 अरब डॉलर जुटाने की तैयारी है, जिसकी रूपरेखा को जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा। वैश्विक संकटों के बीच बैंक का यह कदम भारतीय निर्यात क्षेत्र को नई ऊर्जा देने वाला साबित होगा।
कच्चा तेल 110 डॉलर के पार, सेंसेक्स में गिरावट जारी, आज का मार्केट अपडेट
18 May, 2026 11:55 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शेयर बाजार में हाहाकार और प्रमुख सूचकांकों का गोता
नई दिल्ली:वैश्विक अनिश्चितता का सीधा असर दलाल स्ट्रीट पर दिखाई दिया, जहां सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही प्रमुख सूचकांक भारी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। सेंसेक्स में 550 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है, जिसके चलते यह 74,700 के स्तर के आसपास आ गया है। इसी तरह निफ्टी भी लगभग 200 अंक टूटकर 23,450 के स्तर के बेहद करीब पहुंच चुका है। बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह बैंकिंग क्षेत्र, विशेषकर सरकारी बैंकों के शेयरों में देखी जा रही भारी बिकवाली है। जानकारों का मानना है कि बाजार इस समय बेहद संभलकर चलने की कोशिश कर रहा है। निफ्टी के लिए ऊपर की तरफ 24,000 और 24,250 का स्तर एक बड़ी रुकावट बना हुआ है, जबकि नीचे की तरफ 23,250 और 23,000 के स्तरों पर इसे सहारा मिलने की उम्मीद है। यदि बाजार 23,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को तोड़ता है, तो बिकवाली का दबाव और अधिक गहरा सकता है, इसलिए ट्रेडर्स को इस उतार-चढ़ाव भरे माहौल में सख्त स्टॉप-लॉस का पालन करने की सलाह दी जा रही है।
कच्चे तेल में उबाल और अमेरिकी चेतावनी से बढ़ा तनाव
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उछाल आया है और क्रूड ऑयल दो प्रतिशत की बढ़त के साथ 111 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। कीमतों में आई इस ताजा तेजी के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का वह कड़ा बयान है, जिसमें उन्होंने ईरान को शांति समझौते के लिए खुली चेतावनी दी है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखते हुए कहा कि ईरान के लिए समय तेजी से निकल रहा है और यदि उसने जल्द ही कदम नहीं उठाए तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं। दरअसल, पिछले हफ्ते अमेरिका द्वारा रखे गए शांति प्रस्ताव को ईरान ने ठुकरा दिया था, जिसके बाद दोनों देशों के बीच परमाणु हथियारों की क्षमता को लेकर चल रहा विवाद और गहरा गया है। पिछले बारह हफ्तों से जारी इस तनाव के कारण कमोडिटी बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, जिससे ऊर्जा संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है।
ऐतिहासिक निचले स्तर पर रुपया और विदेशी निवेशकों का पलायन
वैश्विक परिस्थितियों के दबाव में भारतीय मुद्रा में भी रिकॉर्ड कमजोरी देखने को मिल रही है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया आज शुरुआती कारोबार में ही 20 पैसे कमजोर होकर 96.18 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। पिछले कुछ दिनों से डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार गिरावट का दौर जारी है। इस मुद्रा संकट को बढ़ावा देने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भूमिका भी अहम रही है, जिन्होंने पिछले तीस दिनों के भीतर भारतीय बाजार से लगभग 55 हजार करोड़ रुपये के शेयर बेचकर अपनी पूंजी बाहर निकाल ली है। हालांकि, इस दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाजार को संभालने के लिए खरीदारी जरूर की है, लेकिन वैश्विक बाजारों से मिल रहे नकारात्मक संकेतों और एशियाई बाजारों, जैसे जापान के निक्केई और हॉन्गकॉन्ग के हैंगसेंग में आई गिरावट के चलते घरेलू बाजार पर दबाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
आज का सोना-चांदी रेट: सोना हरे निशान में, चांदी गिरावट पर
18 May, 2026 11:49 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। वैश्विक और घरेलू बाजार के मिले-जुले संकेतों के बीच सोमवार को सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की वायदा कीमतों में गिरावट का रुख देखने को मिला। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय वायदा बाजार में दोनों ही बहुमूल्य धातुओं ने कमजोरी के साथ अपने सफर की शुरुआत की। हालांकि बाजार खुलने के कुछ समय बाद जहां सोने ने अपनी शुरुआती सुस्ती को पीछे छोड़ते हुए मामूली रिकवरी दिखाई, वहीं चांदी पर बिकवाली का दबाव लगातार हावी रहा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर शुरुआती कारोबार के दौरान सोना करीब शून्य दशमलव शून्य छह प्रतिशत की हल्की बढ़त के साथ एक लाख अट्ठावन हजार पांच सौ त्रेपन रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर पर पहुंच गया, जबकि चांदी की कीमतों में आठ सौ पचपन रुपये की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह दो लाख इकहत्तर हजार इकतीस रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार करती नजर आई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार के कमजोर संकेतों से घरेलू कीमतों पर बढ़ा दबाव
घरेलू बाजार में आई इस सुस्ती की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिलने वाले कमजोर संकेत माने जा रहे हैं। वैश्विक कमोडिटी बाजार यानी कॉमैक्स पर हफ्ते के पहले दिन से ही कीमती धातुओं पर चौतरफा दबाव साफ दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट का रुख रहा और यह चार हजार पांच सौ सैंतालीस दशमलव साठ डॉलर प्रति औंस के स्तर पर खुला, जबकि इससे पिछले कारोबारी सत्र में यह चार हजार पांच सौ इकसठ दशमलव नब्बे डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ था। इस दौरान बिकवाली के दबाव के चलते सोने में करीब सत्ताइस डॉलर की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद यह चार हजार पांच सौ चौंतीस दशमलव पचास डॉलर प्रति औंस के आस-पास ट्रेड करता देखा गया।
वैश्विक बाजार में चांदी की चमक भी पड़ी फीकी
सोने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चांदी की कीमतों में भी सोमवार को अच्छी-खासी कमजोरी देखने को मिली। कॉमैक्स पर चांदी का कारोबार छिहत्तर दशमलव बीस डॉलर प्रति औंस के स्तर पर शुरू हुआ, जो कि इसके पिछले बंद भाव सतहत्तर दशमलव चौवन डॉलर के मुकाबले काफी कम था। बाजार में कारोबार आगे बढ़ने के साथ ही चांदी की कीमतों में करीब ढाई डॉलर की गिरावट आ गई, जिसके बाद यह पचहत्तर दशमलव शून्य पांच डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गई। गौरतलब है कि चालू वर्ष में चांदी ने अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर एक सौ इक्कीस दशमलव नवासी डॉलर प्रति औंस का अब तक का सबसे उच्चतम स्तर भी छुआ था, जिसके मुकाबले अब इसमें मुनाफावसूली देखी जा रही है।
निवेशकों और खरीदारों के लिए बाजार विशेषज्ञों की राय
सर्राफा बाजार में आए इस उतार-चढ़ाव को देखते हुए कमोडिटी विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और डॉलर इंडेक्स में आ रहे बदलावों का सीधा असर इन कीमती धातुओं पर पड़ रहा है। सोने में आई मामूली रिकवरी जहां निचले स्तरों पर खरीदारों के आकर्षण को दर्शाती है, वहीं चांदी में आई गिरावट औद्योगिक मांग में अस्थाई कमी या निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली का संकेत हो सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में शादी-ब्याह के सीजन और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों को देखते हुए बाजार में और ज्यादा उतार-चढ़ाव आने की संभावना जताई जा रही है, जिससे निवेशकों को फूंक-फूंक कर कदम रखने की जरूरत है।
डर और लालच पर काबू पाएँ, AI के साथ निवेश करें क्वांट फंड में
18 May, 2026 08:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: निवेश की दुनिया में इंसानी सूझबूझ बनाम कंप्यूटर का बेजोड़ गणित
साल 1997 का वह दौर भला कौन भूल सकता है जब शतरंज के बेताज बादशाह गैरी कास्पारोव को आईबीएम के 'डीप ब्लू' सुपर कंप्यूटर ने शिकस्त दी थी। उस ऐतिहासिक पल ने पूरी दुनिया को यह अहसास कराया कि जहां मानव मस्तिष्क की सीमा समाप्त होती है, वहां से एल्गोरिदम और डेटा का एक नया युग प्रारंभ होता है। वर्तमान समय में ठीक इसी तरह का एक बड़ा बदलाव निवेश के क्षेत्र में भी देखने को मिल रहा है। अब आपके गाढ़े पसीने की कमाई को बढ़ाने का जिम्मा किसी फंड मैनेजर के व्यक्तिगत फैसलों या उसकी अंतरात्मा की आवाज पर निर्भर नहीं है, बल्कि इसकी बागडोर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांट फंड के सटीक गणितीय समीकरणों के हाथों में जा चुकी है।
आमतौर पर शेयर बाजार में पैसा डूबने की सबसे बड़ी वजह डर और लालच जैसी मानवीय भावनाएं होती हैं। बाजार के आसमान छूने पर लोग लालच में आकर महंगी खरीदारी कर लेते हैं और गिरावट आने पर डर के मारे सस्ते में शेयर बेचकर बाहर निकल जाते हैं। इसी मानवीय कमजोरी को दूर करने के लिए क्वांट फंड की शुरुआत हुई है, जो पूरे खेल को ही बदल देते हैं। इस आधुनिक निवेश प्रणाली में किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत पसंद-नापसंद का कोई महत्व नहीं होता, बल्कि पूरी तरह कंप्यूटर और एआई ही यह तय करते हैं कि किस समय बाजार में दांव लगाना है और कब कदम पीछे खींचने हैं।
मशीन और गणित के तालमेल से चलने वाली निवेश की नई व्यवस्था
क्वांट फंड की पूरी कार्यप्रणाली जटिल गणितीय मॉडलों और आंकड़ों के गहरे विश्लेषण पर टिकी होती है। इसमें शेयर का चुनाव करने के लिए कुछ कड़े नियम पहले से निर्धारित कर दिए जाते हैं, जिनमें कंपनी की वैल्यू, उसकी परफॉर्मेंस की क्वालिटी, बाजार की रफ्तार और उतार-चढ़ाव जैसे महत्वपूर्ण मानकों को शामिल किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया की सबसे बेहतरीन बात यह है कि इसमें इंसानी जज्बात कहीं भी आड़े नहीं आते। फंड मैनेजर का काम केवल सटीक आंकड़े जुटाना और कंप्यूटर के लिए एक मजबूत मॉडल तैयार करना होता है, जिसके बाद का पूरा काम मशीनें खुद-ब-खुद संभाल लेती हैं। पुराने और नए आंकड़ों के मेल से तैयार होने वाले इन मॉडलों को एआई की मदद से समय-समय पर अपडेट भी किया जाता रहता है।
हालांकि भारतीय शेयर बाजार के परिदृश्य को देखा जाए, तो अभी भी यहां क्वांट फंड का दायरा काफी सीमित है और आम रिटेल निवेशकों के बीच इसे लेकर बहुत ज्यादा उत्साह नहीं देखा गया है। वर्तमान में एसबीआई, निप्पॉन और आईसीआईसीआई जैसी गिने-चुने फंड हाउस ही इस रणनीति पर आधारित कुछ म्यूचुअल फंड योजनाएं चला रहे हैं, जो फ्लेक्सी कैप, मल्टी कैप या विशिष्ट थीम्स पर काम करती हैं। शुरुआत में तो इन फंडों ने बेहतरीन रिटर्न देकर सबको चौंकाया था, लेकिन हाल के दिनों में बदलते बाजार के मिजाज के कारण इन्हें प्रदर्शन के मोर्चे पर थोड़ा संघर्ष भी करना पड़ा है।
बाजार के अप्रत्याशित संकट और इस रणनीति की अपनी सीमाएं
यह समझना बेहद जरूरी है कि क्वांट फंड का पूरा ताना-बाना पुराने इतिहास और बीते आंकड़ों पर बुना जाता है, लेकिन शेयर बाजार का यह नियम है कि वहां हमेशा इतिहास दोहराया जाए, ऐसा मुमकिन नहीं है। जब भी दुनिया में युद्ध, महामारी या किसी बड़ी भू-राजनीतिक उथल-पुथल जैसी अचानक घटनाएं होती हैं, तो कंप्यूटर के मॉडल इन अप्रत्याशित हालातों को भांपने में नाकाम साबित होते हैं। ऐसे में एल्गोरिदम को नए सिरे से स्थिति समझने और खुद को ढालने में थोड़ा समय लग जाता है, जिसका सीधा असर निवेशकों के मुनाफे पर पड़ता है और उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके अलावा, मशीनी सिस्टम द्वारा लगातार शेयरों की खरीद-बिक्री करने से टैक्स और ब्रोकरेज का खर्च भी काफी बढ़ जाता है, जो अंततः आपके शुद्ध रिटर्न को कम करता है।
प्रमुख क्वांट फंड्स का पिछले तीन वर्षों का सालाना रिटर्न:
फंड स्कीम का नाम
सालाना रिटर्न (प्रतिशत में)
360 One Quant Fund
21.10%
Nippon India Quant Fund
17.14%
ICICI Pru Quant Fund
14.34%
Tata Quant Fund
14.04%
Axis Quant Fund
11.59%
ऊपर दिए गए आंकड़ों से स्पष्ट है कि 360 वन क्वांट फंड ने 21.10 प्रतिशत के शानदार आंकड़े के साथ बाजी मारी है, जबकि निप्पॉन और आईसीआईसीआई के फंड भी इसके बाद बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रहे हैं। यह साबित करता है कि मशीनी दिमाग भी बाजार से एक तगड़ा रिटर्न निकालने की क्षमता रखता है।
देश के बड़े क्वांट फंड्स का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM):
टॉप फंड का नाम
एयूएम (करोड़ रुपये में)
SBI Quant Fund
3051
ABSL Quant Fund
2026
UTI Quant Fund
1611
Axis Quant Fund
864
Kotak Quant Fund
505
एयूएम के आंकड़ों पर नजर डालें तो एसबीआई क्वांट फंड पर निवेशकों ने सबसे ज्यादा भरोसा जताया है, जहां 3051 करोड़ रुपये की बड़ी रकम लगी हुई है। इसके बाद आदित्य बिड़ला और यूटीआई का स्थान आता है, जिससे यह साफ होता है कि निवेशक अब बड़े और स्थापित फंड हाउस के जरिए इस नई तकनीक पर अपना दांव लगाने के लिए आगे आ रहे हैं।
आम निवेशकों के लिए समझदारी भरा फैसला और सही रणनीति
यदि आपके मन में भी यह सवाल उठ रहा है कि क्या आपको इस माध्यम में पैसा लगाना चाहिए, तो इसका जवाब आपके निवेश के नजरिए में छिपा है। जो अनुभवी निवेशक बाजार में पहले से मौजूद हैं और अपने पोर्टफोलियो में कुछ नयापन और विविधता लाना चाहते हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन जरिया हो सकता है। मगर यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह हर किसी के लिए अनुकूल नहीं है; एक साधारण निवेशक के लिए कंप्यूटर की इस पेचीदा गणितीय प्रणाली को समझना काफी मुश्किल काम है। जो लोग सुरक्षित निवेश चाहते हैं या जिनका नजरिया कम समय का है, उन्हें इससे दूरी बनाकर रखनी चाहिए। इसमें केवल वही लोग कदम बढ़ाएं जो जोखिम लेने का हौसला रखते हैं और कम से कम 5 से 7 साल तक अपने पैसे को रोकने के लिए तैयार हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो क्वांट फंड्स को कभी भी अपने मुख्य निवेश का आधार नहीं बनाना चाहिए। इसे हमेशा एक सपोर्टिंग एसेट या पोर्टफोलियो में केवल डायवर्सिफिकेशन लाने के एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल करना ही समझदारी है। बेहतर यही होगा कि आप अपने कुल इक्विटी निवेश का केवल 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा ही इन फंडों को अलॉट करें। भारत में अभी यह तकनीक अपने शुरुआती चरण में है और भविष्य में एआई के विस्तार के साथ इसकी लोकप्रियता और बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन निवेश की शुरुआत करने से पहले खुद की जोखिम क्षमता को जरूर तौल लें।
पैसे बचाने का सही तरीका: सस्ता नहीं, पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा लें
18 May, 2026 07:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: बढ़ती मेडिकल महंगाई और टैक्स राहत के बीच बड़े हेल्थ कवर की ओर बढ़ते भारतीय कदम
आज के इस बदलते परिवेश में केवल औपचारिकता के लिए स्वास्थ्य बीमा लेना समझदारी नहीं रह गया है। चिकित्सा जगत में हो रहे बदलावों और गंभीर बीमारियों के बढ़ते खतरों के बीच अब एक ऐसी पुख्ता पॉलिसी की आवश्यकता है, जो अस्पताल में भर्ती होने पर आपकी जमा-पूंजी को पूरी तरह सुरक्षित रखे। वह दौर अब अतीत की बात हो चुका है, जब पूरे कुनबे के लिए तीन या पांच लाख रुपये की पॉलिसी को पर्याप्त मान लिया जाता था। वर्तमान समय में स्वास्थ्य सेवाएं इतनी महंगी हो चुकी हैं कि पच्चीस लाख रुपये से कम का बीमा कवर भी बेहद छोटा नजर आने लगा है। असल में स्वास्थ्य बीमा की किस्त महंगी नहीं होती, बल्कि बिना किसी तैयारी के अस्पताल पहुंचना जेब पर भारी पड़ता है। यही वजह है कि अब बजट फ्रेंडली पॉलिसी ढूंढने के बजाय परिवार की वास्तविक आवश्यकताओं को देखते हुए एक बड़ा और मजबूत सुरक्षा कवच चुनना समय की मांग बन गया है।
चिकित्सा क्षेत्र में बढ़ती लागत का सीधा असर यह हुआ है कि लोगों को अब अपने पुराने और सीमित दायरे वाले इंश्योरेंस को अपग्रेड करना पड़ रहा है। आज के दौर में यदि कोई व्यक्ति किसी कॉर्पोरेट अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में दो-तीन दिन भी गुजारता है, तो पांच लाख रुपये की पूरी पॉलिसी का पैसा चुटकियों में खत्म हो जाता है। इस बीच सरकार द्वारा व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर लगने वाले अठारह प्रतिशत के वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को पूरी तरह समाप्त कर शून्य करने के फैसले ने पूरे परिदृश्य को बदल दिया है। टैक्स हटने से प्रीमियम की राशि में भारी कमी आई है, जिसके चलते देश का आम नागरिक अब छोटी पॉलिसियों को अलविदा कहकर सीधे पचास लाख से लेकर एक करोड़ रुपये तक के सुपर टॉप-अप प्लान को तरजीह दे रहा है।
चिकित्सा लागत में बेतहाशा वृद्धि और छोटे बीमा कवर का सिमटता दायरा
देश के भीतर इलाज के खर्च में सालाना चौदह प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिसका सीधा मतलब है कि जो चिकित्सा सेवा पिछले वर्ष एक लाख रुपये में उपलब्ध थी, उसके लिए अब एक लाख चौदह हजार रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। यदि बात कैंसर, हृदय रोग या गुर्दे की गंभीर बीमारियों से जुड़ी सर्जरीज की हो, तो महानगरों के नामी अस्पतालों में यह खर्च बहुत ही आसानी से पंद्रह से पच्चीस लाख रुपये के आंकड़े को पार कर जाता है। ऐसी परिस्थितियों में बड़े शहरों में रहने वाले परिवारों के लिए पच्चीस लाख से पचास लाख रुपये तक का बेस कवर रखना कोई विलासिता नहीं, बल्कि एक अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है।
बीमा बाजार के हालिया रुझान भी इसी बदलाव की तस्दीक करते हैं। स्वास्थ्य बीमा से टैक्स का बोझ हटते ही भारतीय उपभोक्ताओं ने कम वैल्यू वाली पॉलिसियों से दूरी बनाना शुरू कर दिया है, जिसे पॉलिसीबाजार के पिछले आठ महीनों के आंकड़ों में साफ देखा जा सकता है।
बीमा बाजार में कवरेज की बदलती स्थिति:
कवरेज की सीमा
टैक्स हटने से पहले का हिस्सा
वर्तमान हिस्सेदारी
बाजार की मौजूदा हलचल
10 लाख रुपये से कम
26%
10%
इस वर्ग की मांग में भारी गिरावट आई है
10 से 20 लाख रुपये
61%
62%
इस दायरे में स्थिति लगभग स्थिर बनी हुई है
20 लाख से 1 करोड़ रुपये
11%
16%
इस सेगमेंट में लगातार मजबूती देखी जा रही है
1 करोड़ रुपये से अधिक
2%
12%
इस उच्च वर्ग की मांग में छह गुना का उछाल आया है
उपरोक्त आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट है कि उपभोक्ता अब दूरदर्शी सोच के साथ बड़े रिस्क कवर को अपना रहे हैं, ताकि भविष्य की अनिश्चितताओं से निपटा जा सके।
बड़े रिस्क कवर की बढ़ती लोकप्रियता के मुख्य कारण और नियमों में नरमी
बाजार में इस बड़े बदलाव के पीछे मुख्य रूप से तीन वजहें काम कर रही हैं। सबसे पहला कारण टैक्स में मिली पूरी छूट है, जिसने महंगे प्रीमियम को आम आदमी के बजट में ला खड़ा किया है। दूसरी वजह यह है कि भारत में इलाज का सामान्य खर्च हर पांच से सात साल में दोगुना हो जाता है, और सरकारी रिपोर्टों के मुताबिक आज भी स्वास्थ्य पर होने वाले कुल खर्च का एक बड़ा हिस्सा लोगों को कर्ज लेकर या अपनी जेब से देना पड़ता है। तीसरा कारण यह है कि अधिकांश कॉर्पोरेट कंपनियां अपने कर्मचारियों को जो ग्रुप इंश्योरेंस देती हैं, उसकी सीमा बेहद सीमित होती है, जिसके कारण लोग व्यक्तिगत तौर पर बड़ा कवर लेना सुरक्षित समझ रहे हैं।
इसके साथ ही नियामक संस्थाओं और बीमा कंपनियों ने भी नियमों को पहले से कहीं अधिक उपभोक्ता अनुकूल बना दिया है। अब नए नियम के तहत पॉलिसी खरीदने के लिए उम्र की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं है, जिससे पैंसठ वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग भी आसानी से नई पॉलिसी ले सकते हैं। इसके अलावा पुरानी बीमारियों के लिए दी जाने वाली प्रतीक्षा अवधि (वेटिंग पीरियड) को भी चार साल से घटाकर तीन साल कर दिया गया है। आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों जैसे रोबोटिक सर्जरी, स्टेम सेल थेरेपी और ओपीडी के खर्चों को भी अब नई पॉलिसियों के दायरे में शामिल किया जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को चौतरफा सुरक्षा मिल रही है।
पॉलिसी नवीनीकरण के समय ध्यान देने योग्य बातें और आदर्श पोर्टफोलियो
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आप अभी भी किसी पुरानी और छोटी पॉलिसी के भरोसे बैठे हैं, तो टैक्स में मिली रियायत का लाभ उठाते हुए उसे तुरंत अपग्रेड करने का यह सबसे बेहतरीन मौका है। इसके लिए आपको अपना बेस प्लान बदलने की भी जरूरत नहीं है, बल्कि एक किफायती सुपर टॉप-अप प्लान जोड़कर आप अपने कुल कवर को एक करोड़ रुपये तक आसानी से पहुंचा सकते हैं। पॉलिसी का नवीनीकरण (रिन्यूअल) करते समय हमेशा नियमों को बारीकी से पढ़ना चाहिए क्योंकि कंपनियां अक्सर शर्तों में बदलाव करती रहती हैं। आपको विशेष रूप से यह देखना चाहिए कि रूम रेंट पर कोई 'सब-लिमिट' तो नहीं लगी है, और अस्पताल के बिल में शामिल होने वाले दस्ताने, मास्क और पीपीई किट जैसे 'कंज्यूमेबल्स' के खर्चों के लिए अलग से राइडर मौजूद है या नहीं। साथ ही, 'अनलिमिटेड रीस्टोर' की सुविधा लेना भी फायदेमंद रहता है ताकि एक ही साल में परिवार के कई सदस्यों के बीमार होने पर भी फंड कम न पड़े।
निवेश और सुरक्षा का यह गणित पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस शहर में रहते हैं और आपके परिवार की संरचना कैसी है। इसे एक व्यवस्थित योजना के तहत समझा जा सकता है।
शहरी परिवेश और परिवार के अनुसार आवश्यक बीमा राशि:
परिवार का ढांचा
निवास स्थान का प्रकार
न्यूनतम अनुशंसित कवर
युवा एवं अविवाहित
टियर 2 या टियर 3 शहर
15 लाख से 20 लाख रुपये
पूर्ण परिवार (पति-पत्नी और दो बच्चे)
मेट्रो शहर (जैसे दिल्ली या मुंबई)
25 लाख से 50 लाख रुपये
वरिष्ठ नागरिक (बुजुर्ग दंपत्ति)
देश का कोई भी क्षेत्र
25 लाख बेस कवर + 50 लाख का सुपर टॉप-अप
इस वर्गीकरण से साफ है कि छोटे शहरों में रहने वाले युवाओं के लिए भले ही बीस लाख तक का कवर काम कर जाए, लेकिन महानगरों के परिवारों और स्वास्थ्य के मोर्चे पर संवेदनशील बुजुर्गों के लिए एक बड़ा बेस कवर और उसके साथ सुपर टॉप-अप का सुरक्षा तंत्र होना बेहद जरूरी है। अंततः समझदारी इसी में है कि अपनी कुल इक्विटी या वित्तीय योजनाओं के साथ-साथ एक मजबूत हेल्थ पोर्टफोलियो तैयार किया जाए, जो संकट के समय आपकी संचित पूंजी को बिखरने से बचा सके।
ईंधन की बढ़ती कीमतें सीधे उपभोक्ताओं पर: आटा-दाल और जरूरी चीजों की बढ़ी हुई दर
16 May, 2026 04:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। आने वाले दिनों में आम जनता की रसोई का बजट और घरेलू खर्चों का बोझ काफी बढ़ सकता है। आटा, दाल, पैकेट बंद खाद्य पदार्थ और रोजमर्रा के इस्तेमाल की अन्य जरूरी चीजों की कीमतों में भारी उछाल आने की पूरी आशंका बन गई है। पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल और ईंधन के दामों में हो रही बढ़ोतरी ने देश की दिग्गज एफएमसीजी कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है, जिससे उनकी माल ढुलाई और उत्पादन लागत में भारी इजाफा हुआ है और इसका सीधा असर अब उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने जा रहा है।
लागत का बढ़ता बोझ और वजन कम करने की कॉर्पोरेट रणनीति
ईंधन की कीमतों में संशोधन के बाद से कंपनियों के मुनाफे और मार्जिन पर नया दबाव देखने को मिल रहा है। बाजार के सूत्रों और कॉर्पोरेट अधिकारियों के मुताबिक, कच्चे माल और परिवहन के बढ़ते खर्च की भरपाई करने के लिए कंपनियां अब दोतरफा रणनीति पर काम कर रही हैं। इसके तहत या तो चुनिंदा उत्पादों के खुदरा दामों में सीधे तौर पर बढ़ोतरी की जाएगी या फिर पैकेट की कीमतों को स्थिर रखते हुए उनके भीतर मिलने वाले सामान का वजन यानी ग्रामेज कम कर दिया जाएगा, ताकि आम ग्राहकों को सीधे तौर पर झटका न लगे।
दिग्गज एफएमसीजी कंपनियों की तैयारी और मूल्य वृद्धि का खाका
देश की बड़ी एफएमसीजी कंपनियों ने बदलती परिस्थितियों के बीच अपनी अर्निंग कॉल में इस बात के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि यदि महंगाई का यह दबाव इसी तरह बना रहा, तो वे कीमतों में बदलाव करने से पीछे नहीं हटेंगी। डाबर इंडिया के ग्लोबल सीईओ मोहित मल्होत्रा के अनुसार, कंपनी ने अपने विभिन्न उत्पादों के दामों में पहले ही चार प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी है और आने वाले समय में वे एक और दौर की मूल्य वृद्धि पर विचार कर रहे हैं। इसी तरह पार्ले प्रोडक्ट्स के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर मयंक शाह, हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल), ब्रिटानिया और नेस्ले जैसी कंपनियों के शीर्ष प्रबंधन ने भी स्वीकार किया है कि कच्चे तेल की कीमतों में आ रही अस्थिरता उनके लिए बड़ी चिंता का विषय है और माल ढुलाई के खर्चों की बारीकी से निगरानी करने के बाद कीमतों को बढ़ाना ही उनका अंतिम विकल्प होगा।
मांग में सुधार पर संकट और ग्रामीण बाजारों पर संभावित असर
यह पूरा घटनाक्रम एक ऐसे नाजुक समय पर सामने आया है, जब पिछले साल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में हुई कटौती के बाद बाजार में ग्राहकों की मांग और खरीदारी के ढर्रे में सुधार होना शुरू ही हुआ था। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईंधन की कीमतें कई तिमाहियों तक इसी तरह ऊंचे स्तर पर बनी रहीं, तो लगातार होने वाली इस मूल्य वृद्धि का सबसे बुरा असर देश के ग्रामीण बाजारों पर पड़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ता कीमतों में मामूली बदलाव को लेकर भी बेहद संवेदनशील होते हैं, ऐसे में पैकेट का आकार घटने या दाम बढ़ने से वहां उपभोग की रफ्तार सुस्त पड़ सकती है, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था की विकास दर प्रभावित होने का खतरा पैदा हो जाएगा।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
