व्यापार
तेल इंडस्ट्री का ट्रंप को संदेश, संकट जारी रहा तो बढ़ेगा असर
16 Mar, 2026 01:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी व्यवधान को लेकर अमेरिका की दिग्गज तेल कंपनियों ने ट्रंप प्रशासन को गंभीर चेतावनी दी है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, उद्योग जगत के शीर्ष अधिकारियों ने साफ कहा है कि अगर इस अहम समुद्री मार्ग में बाधा बनी रही, तो वैश्विक ईंधन संकट और गहरा सकता है।
कंपनियों ने किन-किन कारकों को लेकर जताई चिंता?
रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस में बुधवार को हुई बैठकों और ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट व आंतरिक मंत्री डग बर्गम के साथ हालिया बातचीत में एक्सॉन मोबिल, शेवरॉन और कोनोकोफिलिप्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में बढ़ती अस्थिरता पर चिंता जताई। कंपनियों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट का असर केवल कच्चे तेल की आपूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रिफाइंड प्रोडक्ट्स की उपलब्धता पर भी दबाव बढ़ सकता है।रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सॉन के सीईओ डैरेन वुड्स ने अधिकारियों से कहा कि अगर सट्टेबाजों ने अचानक कीमतों को और ऊपर धकेला, तो तेल की कीमतें मौजूदा ऊंचे स्तर से भी आगे जा सकती हैं। उन्होंने यह भी आगाह किया कि बाजार में रिफाइंड उत्पादों की कमी की स्थिति बन सकती है। वहीं, शेवरॉन के सीईओ माइक वर्थ और कोनोकोफिलिप्स के सीईओ रयान लांस ने भी व्यवधान की गंभीरता को लेकर चिंता जाहिर की।
अमेरिका में घरेलू उत्पादन बढ़ाने की गुंजाइश सीमित
तेल उद्योग के अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका में घरेलू उत्पादन बढ़ाने की गुंजाइश सीमित है और इससे हॉर्मुज के पीछे फंसी करीब 90 लाख से एक करोड़ बैरल प्रतिदिन तेल आपूर्ति की भरपाई नहीं हो सकेगी। इस बीच अमेरिकी तेल कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं। बुधवार को 87 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर रहने वाला अमेरिकी तेल शुक्रवार तक बढ़कर 99 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।
ट्रंप ने सात देशों से क्यों मांगी मदद?
इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने करीब सात देशों से युद्धपोत तैनात कर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रखने में मदद करने का अनुरोध किया है। रविवार को एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने संकेत दिया कि वह इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षा देने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाना चाहते हैं।ट्रंप ने कहा कि हम देशों से बात कर रहे हैं कि वे जलडमरूमध्य की निगरानी करें, क्योंकि वही देश पश्चिम एशिया के तेल पर ज्यादा निर्भर हैं। हम बहुत कम, लगभग एक प्रतिशत तेल लेते हैं। उदाहरण के तौर पर चीन को अपना करीब 90 प्रतिशत तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से मिलता है। उन्होंने यह भी कहा कि मैं इन देशों से कह रहा हूं कि वे आगे आएं और अपने हितों की रक्षा करें, क्योंकि यह उनके लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है। हालांकि, अब तक किसी भी देश ने इस मिशन में शामिल होने को लेकर स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई है।
होर्मुज क्यों है इतना अहम?
होर्मुज जलडमरूमध्य, जो ईरान और ओमान के बीच स्थित एक बेहद संकरा लेकिन रणनीतिक समुद्री मार्ग है, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की धुरी माना जाता है। हर दिन दो करोड़ बैरल से ज्यादा कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। यह मात्रा दुनिया की कुल तेल खपत का करीब पांचवां हिस्सा और समुद्री मार्ग से होने वाले तेल व्यापार का लगभग चौथाई हिस्सा है। दुनिया की बड़ी मात्रा में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की ढुलाई भी इसी रास्ते से होती है।ऐसे में अगर इस मार्ग में थोड़ी देर के लिए भी बाधा आती है, तो उसका असर केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वित्तीय बाजारों, वैश्विक सप्लाई चेन और आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट तक महसूस किया जाता है। यही वजह है कि होर्मुज में मौजूदा संकट को लेकर दुनिया भर की निगाहें अमेरिका, ईरान और ऊर्जा बाजारों पर टिकी हुई हैं।
खाद्य और मैन्युफैक्चरिंग वस्तुओं की कीमत बढ़ने से थोक महंगाई में उछाल
16 Mar, 2026 01:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देश में थोक महंगाई दर फरवरी 2026 में बढ़कर 2.13 प्रतिशत हो गई है। यह लगातार चौथा महीना है जब थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई में इजाफा दर्ज किया गया है। इससे पहले जनवरी में यह दर 1.81 प्रतिशत थी, जबकि फरवरी 2025 में यह 2.45 प्रतिशत रही थी। सरकार द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, खाद्य और गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी इसका प्रमुख कारण रही।
महंगाई बढ़ने की वजह
उद्योग मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि फरवरी 2026 में महंगाई की सकारात्मक दर मुख्य रूप से अन्य विनिर्माण, बेसिक मेटल, गैर-खाद्य वस्तुओं, खाद्य वस्तुओं और वस्त्रों की कीमतों में वृद्धि की वजह से रही। यानी थोक बाजार में कई जरूरी श्रेणियों में कीमतों का दबाव बना रहा, जिससे महंगाई दर ऊपर गई।
क्या कहते हैं आंकड़े?
आंकड़ों के मुताबिक, खाद्य वस्तुओं में महंगाई जनवरी के 1.55 प्रतिशत से बढ़कर फरवरी में 2.19 प्रतिशत हो गई। हालांकि सब्जियों की महंगाई में कुछ राहत देखने को मिली। फरवरी में सब्जियों की महंगाई 4.73 प्रतिशत रही, जो जनवरी में 6.78 प्रतिशत थी। इसके बावजूद दाल, आलू और अंडा, मांस व मछली जैसी वस्तुओं की कीमतों में पिछले महीने के मुकाबले अधिक तेजी दर्ज की गई।विनिर्मित उत्पादों के मोर्चे पर भी महंगाई में हल्की बढ़ोतरी हुई। फरवरी में इस श्रेणी की थोक महंगाई 2.92 प्रतिशत रही, जो जनवरी में 2.86 प्रतिशत थी। वहीं गैर-खाद्य वस्तुओं की महंगाई 7.58 प्रतिशत से बढ़कर 8.80 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो इस बात का संकेत है कि कच्चे माल और अन्य जरूरी औद्योगिक वस्तुओं की कीमतों में दबाव बना हुआ है।दूसरी ओर, ईंधन और बिजली श्रेणी में गिरावट यानी डिफ्लेशन का दौर जारी रहा। फरवरी में इस श्रेणी में महंगाई दर माइनस 3.78 प्रतिशत रही, जबकि जनवरी में यह माइनस 4.01 प्रतिशत थी। इसका मतलब है कि इस क्षेत्र में कीमतें अभी भी पिछले साल के मुकाबले नीचे बनी हुई हैं, हालांकि गिरावट की रफ्तार थोड़ी कम हुई है।
खुदरा महंगाई भी बढ़कर 3.2% हुई
इस बीच, खुदरा महंगाई भी फरवरी में बढ़कर 3.2 प्रतिशत हो गई, जो जनवरी में 2.75 प्रतिशत थी। खुदरा महंगाई के ये आंकड़े पिछले सप्ताह जारी किए गए थे। भारतीय रिजर्व बैंक ब्याज दरों पर फैसला लेते समय मुख्य रूप से खुदरा महंगाई को आधार मानता है। चालू वित्त वर्ष में महंगाई के अपेक्षाकृत निचले स्तर पर बने रहने के बीच RBI अब तक 1.25 प्रतिशत अंक की कटौती कर चुका है।थोक महंगाई में लगातार चौथे महीने आई तेजी यह संकेत देती है कि बाजार में कीमतों का दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हालांकि सब्जियों में राहत मिली है, लेकिन खाद्य और गैर-खाद्य दोनों श्रेणियों में बढ़ती कीमतें आने वाले समय में महंगाई के रुख पर असर डाल सकती हैं।
ईरान संकट के बीच ट्रंप का दावा, कम होंगी वैश्विक तेल कीमतें
16 Mar, 2026 01:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान संघर्ष समाप्त होते ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आ सकती है। उनका कहना है कि मौजूदा उछाल युद्ध और सप्लाई बाधाओं से जुड़ा है, और जैसे ही हालात सामान्य होंगे, बाजार में राहत दिखेगी।
ट्रंप ने सात देशों से मांगी मदद
इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने करीब सात देशों से युद्धपोत भेजकर होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने की मांग की है। हालांकि अब तक किसी भी देश ने इस पर स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई है। ट्रंप ने एयरफोर्स वन विमान से वाशिंगटन लौटते समय पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह समुद्री मार्ग उन देशों के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है जो पश्चिम एशिया से तेल आयात करते हैं। उन्होंने कहा कि मैं उन देशों से कह रहा हूं कि वे खुद अपने क्षेत्र की सुरक्षा करें, क्योंकि यह उनके लिए ज्यादा जरूरी है।बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। आमतौर पर दुनिया के कुल कारोबार वाले तेल का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। युद्ध के कारण इस रास्ते की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है और तेल की कीमतें भी तेजी से ऊपर जा रही हैं।
अमेरिकी तेल कंपनियों ने दी चेतावनी
ईरान युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी व्यवधान को लेकर अमेरिका की दिग्गज तेल कंपनियों ने ट्रंप प्रशासन को गंभीर चेतावनी दी है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, उद्योग जगत के शीर्ष अधिकारियों ने साफ कहा है कि अगर इस अहम समुद्री मार्ग में बाधा बनी रही, तो वैश्विक ईंधन संकट और गहरा सकता है।
अमेरिका में घरेलू उत्पादन बढ़ाने की गुंजाइश सीमित
तेल उद्योग के अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका में घरेलू उत्पादन बढ़ाने की गुंजाइश सीमित है और इससे हॉर्मुज के पीछे फंसी करीब 90 लाख से एक करोड़ बैरल प्रतिदिन तेल आपूर्ति की भरपाई नहीं हो सकेगी। इस बीच अमेरिकी तेल कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं। बुधवार को 87 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर रहने वाला अमेरिकी तेल शुक्रवार तक बढ़कर 99 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।
ईरान युद्ध से फूड डिलीवरी, कॉस्मेटिक्स और कपड़ा उद्योग सेक्टर भी हो सकता है प्रभावित
15 Mar, 2026 08:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब शेयर बाजारों पर भी देखने लगा है। ईरान से जुड़े युद्ध की आशंका और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। पहले जहां चिंता केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित मानी जा रही थी, वहीं अब इसके प्रभाव का दायरा बढ़ रहा है। फूड डिलीवरी कंपनियों से लेकर कॉस्मेटिक्स और कपड़ा उद्योग तक कई सेक्टर संभावित सप्लाई बाधाओं और बढ़ती लागत के दबाव में आ सकते हैं।
दरअसल, युद्ध शुरू होने के बाद से वैश्विक शेयर बाजारों में करीब 5.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट 2022 के बाद किसी एक महीने में सबसे बड़ी मानी जा रही है। एशियाई बाजारों पर इसका असर सबसे ज्यादा देखा गया है। निवेशकों को डर है कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई फिर से बढ़ सकती है और युद्ध पर होने वाला खर्च कई देशों के बजट घाटे को भी बढ़ा सकता है। बाजार में बढ़ती अनिश्चितता से ट्रेडर्स ने अब अमेरिका के केंद्रीय बैंक यानी फ्रेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद को भी आगे खिसका दिया है। अब अनुमान लगाया जा रहा है कि अगली बड़ी दर कटौती संभवतः 2027 के बीच तक ही हो पाएगी। इस बदलाव ने भी वैश्विक निवेशकों की रणनीति को प्रभावित किया है।
युद्ध के कारण सबसे पहले असर एयरलाइंस और शिपिंग कंपनियों पर पड़ा है। तेल की कीमतें बढ़ने से विमानन कंपनियों की ईंधन लागत बढ़ जाती है, जिससे उनके मुनाफे पर दबाव आता है। इसी तरह समुद्री परिवहन कंपनियों के लिए भी ऑपरेशन महंगे हो जाते हैं और व्यापारिक मार्गों में जोखिम बढ़ जाता है। इसके विपरीत रक्षा और ऊर्जा कंपनियों के शेयरों में तेजी देखी जा रही है। युद्ध और तनाव के दौर में रक्षा उपकरणों की मांग बढ़ने की संभावना रहती है, जिससे रक्षा कंपनियों के शेयरों को फायदा मिलता है। वहीं तेल और गैस कंपनियां भी ऊंची कीमतों का लाभ उठा सकती हैं।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब अमेरिका ने उस खर्ग द्वीप पर बड़ा हमला किया, जहां से ईरान के कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा निर्यात होता है। इस घटना के बाद मध्य पूर्व क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो वैश्विक तेल और गैस बाजार में आपूर्ति और मांग के बीच असंतुलन पैदा हो सकता है। इसी वजह से निवेशकों की नजर अब उन सेक्टरों पर भी जा रही है जिन्हें पहले इस संकट से ज्यादा प्रभावित नहीं माना जा रहा था। सेमीकंडक्टर कंपनियां और कपड़ा उद्योग भी जोखिम में आ सकते हैं। हीलियम जैसी गैसों की कमी से चिप निर्माण प्रभावित हो सकता है, जबकि कच्चे माल की कीमत बढ़ने से कपड़ा कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।
गोदरेज प्रॉपर्टीज ने कोयम्बटूर में खरीदी 44 एकड़ जमीन, आवासीय प्रोजेक्ट की तैयारी
15 Mar, 2026 07:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। रियल एस्टेट क्षेत्र की बड़ी कंपनी गोदरेज प्रॉपर्टीज ने तमिलनाडु के कोयम्बटूर में 44 एकड़ जमीन खरीदकर एक नए प्रीमियम आवासीय प्रोजेक्ट की तैयारी शुरू कर दी है। कंपनी के मुताबिक इस परियोजना से करीब 450 करोड़ रुपए तक की आय हो सकती है। यह प्रोजेक्ट प्लॉटेड डेवलपमेंट के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें आधुनिक सुविधाओं के साथ एक योजनाबद्ध आवासीय समुदाय तैयार किया जाएगा। इस परियोजना के साथ कंपनी पहली बार कोयंबटूर के बाजार में प्रवेश कर रही है।
कंपनी ने यह जमीन सीधे खरीदी है। करीब 44 एकड़ क्षेत्र में बनने वाले इस प्रोजेक्ट में करीब 1.1 मिलियन वर्गफुट का डेवलपमेंट होना है। कंपनी का कहना है कि यह प्रोजेक्ट प्रीमियम प्लॉटेड रेजिडेंशियल कम्युनिटी के रूप में तैयार किया जाएगा। हालांकि कंपनी ने जमीन खरीद की कीमत नहीं बताई है, लेकिन परियोजना से करीब 450 करोड़ रुपए के राजस्व की उम्मीद जताई गई है। इस प्रोजेक्ट के जरिए कंपनी दक्षिण भारत में अपने विस्तार को और मजबूत करना चाहती है।
यह परियोजना साउथ कोयंबटूर के उस इलाके में विकसित की जाएगी जो कोयम्बटूर गोल्फ क्लब के पास स्थित है। यह इलाका तेजी से विकसित हो रहा है और यहां बेहतर कनेक्टिविटी के साथ शांत और हरित वातावरण उपलब्ध है। कंपनी के मुताबिक प्रोजेक्ट में अच्छी सड़कों वाला लेआउट, लैंडस्केप्ड ओपन स्पेस, और सामुदायिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे यह प्रोजेक्ट प्रीमियम आवासीय विकल्प के रूप में उभर सकता है।
कंपनी के आला अधिकारियों का कहना है कि कोयंबटूर में प्रवेश कंपनी की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह तेजी से बढ़ते और संभावनाओं से भरे शहरों में अपने प्रोजेक्ट शुरू कर रही है। कोयंबटूर की मजबूत आर्थिक स्थिति, बढ़ती आबादी और स्थिर आवासीय मांग इसे एक आकर्षक बाजार बनाती है। कंपनी यहां एक उच्च गुणवत्ता वाली प्लॉटेड कम्युनिटी विकसित करने की योजना बना रही है, जिससे दक्षिण भारत में उसकी मौजूदगी और मजबूत होगी।
कोयंबटूर तेजी से एक विविध आर्थिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। यहां मैन्युफैक्चरिंग, आईटी-आईटीईएस, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और छोटे-मझोले उद्योगों का मजबूत आधार है। शहर में नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, बढ़ती आय और आर्थिक गतिविधियों के कारण आवास की मांग लगातार बढ़ रही है। गोदरेज प्रॉपर्टीज देश की प्रमुख रियल एस्टेट कंपनियों में शामिल है और मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, पुणे, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में कई हाउसिंग प्रोजेक्ट विकसित कर रही है। हाल ही में कंपनी ने कोलकाता में 5 एकड़ जमीन की ई-नीलामी भी जीती, जिससे करीब 1,650 करोड़ रुपए की संभावित आय का अनुमान है। इसके अलावा हरियाणा के गुरुग्राम में भी 11.36 एकड़ जमीन खरीदी गई है। इन दोनों प्रोजेक्ट्स से मिलाकर कंपनी को करीब 6,150 करोड़ रुपए तक की संभावित आय होने का अनुमान है। इस तरह कोयंबटूर में नया प्रोजेक्ट शुरू करके गोदरेज प्रॉपर्टीज देश के तेजी से विकसित हो रहे शहरों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ा रही है।
बाजार में उथल-पुथल से निवेशवक घबराएं नहीं, लंबी अवधि के नजरिए से सोचें
15 Mar, 2026 04:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। शेयर बाजार में इन दिनों तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। वैश्विक स्तर पर जियो-पॉलिटिकल टेंशन के कारण बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। ऐसे में सेबी के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने छोटे निवेशकों को धैर्य रखने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि बाजार में यह उथल-पुथल लंबे समय तक नहीं रहती और वैश्विक स्तर पर स्थिरता लाने के प्रयास चल रहे हैं। छोटे निवेशकों को घबराकर फैसले नहीं लेने चाहिए, बल्कि शांत रहकर लंबी अवधि के नजरिए से सोचना चाहिए।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सेबी चेयरमैन ने हाल ही में एक कार्यक्रम में इस बारे में जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पिछले दस साल में भारत के कैपिटल मार्केट बहुत बड़े और मजबूत हुए हैं। अब ये बाजार वैश्विक घटनाओं से ज्यादा जुड़े हुए हैं। कोई भी बड़ी खबर या घटना तुरंत बाजार पर असर डाल देती है। जियो-पॉलिटिकल टेंशन, जैसे युद्ध या तनाव, बाजार को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं, लेकिन तुहिन कांता पांडे ने जोर दिया कि बाजार की असली परीक्षा तब होती है जब अस्थिरता आती है और सिस्टम सही रूप से चलता रहता है।
उन्होंने कहा कि बाजार में अत्यधिक अस्थिरता के दौर आमतौर पर ज्यादा दिन नहीं टिकते। वैश्विक प्रयासों से बाजार जल्दी स्थिर हो जाते हैं। भारत के बाजार पिछले दशक में काफी विस्तारित हुए हैं, जिससे वे वैश्विक घटनाओं के प्रति संवेदनशील हो गए हैं। जानकारी और राय तेजी से फैलती है, जिससे प्रतिक्रिया होती है, लेकिन यह सामान्य प्रक्रिया है। छोटे निवेशकों के लिए मुख्य संदेश यह है कि घबराहट में शेयर बेचना या जल्दबाजी में फैसला न लें। पांडे ने कहा कि बाजार की कुशलता सिर्फ नियमों से नहीं बनती, बल्कि यह सबकी जिम्मेदारी है। निवेशक, ब्रोकर, रेगुलेटर और सरकार सब मिलकर इसे बनाते हैं। उन्होंने बाजार की मजबूती पर भरोसा जताया और कहा कि भारत के आर्थिक आधार मजबूत हैं, जो लंबे समय में बाजार को सपोर्ट करेंगे।
यह सलाह ऐसे समय में आई है जब वैश्विक बाजारों में तनाव के कारण भारतीय शेयर बाजार भी प्रभावित हो रहे हैं। कई निवेशक एसआईपी रोकने या पैसा निकालने की सोच रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि के निवेश में ऐसे उतार-चढ़ाव सामान्य हैं। बाजार ऐतिहासिक रूप से बड़े संकटों के बाद रिकवर करता आया है। सेबी चेयरमैन ने बाजार की कार्यक्षमता पर फोकस किया। उन्होंने कहा कि अस्थिरता के समय भी अगर ट्रेडिंग, सेटलमेंट और अन्य प्रक्रियाएं सही चलती रहें, तो बाजार मजबूत माना जाता है। भारत में पिछले साल कई सुधार हुए हैं, जैसे मार्केट एक्सेस को आसान बनाने के नियम, जो बाजार को और बेहतर बना रहे हैं।
सेबी चेयरमैन की सलाह है कि निवेशक धैर्य रखें, पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई रखें और लंबी अवधि के लक्ष्यों पर फोकस करें। घबराहट में फैसले लेने से नुकसान होता है। बाजार में उतार-चढ़ाव आते-जाते रहते हैं, लेकिन मजबूत कंपनियां और अच्छी अर्थव्यवस्था लंबे समय में रिटर्न देती हैं। वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत का बाजार मजबूत होने की कोशिश कर रहा है। अगर आप लंबे समय के लिए निवेश कर रहे हैं, तो इस अस्थिरता को अवसर के रूप में देखें। सही जानकारी और धैर्य से ही निवेश सुरक्षित और फायदेमंद रह सकता है।
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की कोई कमी नहीं, रिफाइनरियां पूरी क्षमता से कर रही काम
15 Mar, 2026 02:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश में एलपीजी की किल्लत को लेकर फैली अफवाहों और भारी पैनिक बुकिंग के बीच केंद्र सरकार ने कहा है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की कोई कमी नहीं है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि देश के पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार है और सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। हालांकि, खाड़ी देशों में जारी युद्ध और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में पैदा हुए गतिरोध की वजह से सप्लाई चेन पर दबाव जरूर पड़ा है, लेकिन सरकार ने घरेलू सप्लाई को प्राथमिकता पर रखा है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सुजाता ने कहा कि युद्ध की खबरों के बीच आम जनता में इस बात का डर है कि आने वाले दिनों में सिलेंडर नहीं मिलेंगे। इसी घबराहट में लोग जरूरत न होने पर भी सिलेंडर बुक करा रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक युद्ध से पहले रोज करीब 55 लाख सिलेंडर बुक होते थे और करीब 50 लाख की डिलीवरी होती थी, लेकिन यह आंकड़ा बढ़कर 75 लाख हो गया और अब 88 लाख तक पहुंच गया है। अधिकारियों ने इसे पूरी तरह ‘पैनिक बुकिंग’ करार दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने साफ किया है कि बुकिंग पर कुछ नियम लागू हैं ताकि स्टॉक का प्रबंधन सही से हो सके। शहरी क्षेत्रों में एक सिलेंडर मिलने के बाद अगली बुकिंग के लिए कम से कम 25 दिन का अंतर होना अनिवार्य है। वहीं ग्रामीण इलाकों में यह समय सीमा 45 दिन तय की गई है। इस तय समय से पहले सिस्टम बुकिंग नहीं लेगा, इसलिए उपभोक्ताओं को बार-बार प्रयास करने या परेशान होने की जरूरत नहीं है।
सप्लाई के दबाव का फायदा उठाकर कुछ लोग सिलेंडर की जमाखोरी और ब्लैक-मार्केटिंग में जुट गए हैं। इसे रोकने के लिए सरकार ने देशभर में सख्त अभियान छेड़ा है। पेट्रोलियम मंत्रालय के निर्देश पर राज्य सरकारों और जिला प्रशासनों ने तेल कंपनियों के साथ मिलकर छापेमारी शुरू कर दी है। अकेले यूपी में प्रशासन ने 1400 से ज्यादा ठिकानों का निरीक्षण किया है, जिसमें 20 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 19 लोगों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की गई है।
महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, बिहार, ओडिशा और कर्नाटक जैसे राज्यों में भी संयुक्त टीमें लगातार डिस्ट्रीब्यूटरों और रिटेल आउटलेट्स की जांच कर रही हैं। एक ही दिन में तेल कंपनियों की टीमों ने देशभर में करीब 1300 जगहों पर चेकिंग की। सरकार का लक्ष्य यह तय करना है कि जो स्टॉक उपलब्ध है, वह सीधे जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक पहुंचे न कि बिचौलियों के गोदामों में। चूंकि भारत अपनी एलपीजी जरूरत का 60फीसदी और कच्चे तेल का 88फीसदी आयात करता है, इसलिए मौजूदा भू-राजनीतिक हालात ने सप्लाई को प्रभावित किया है। इस कमी को पूरा करने के लिए घरेलू उत्पादन में भारी बढ़ोतरी की गई है। सरकार ने पिछले कुछ दिनों में घरेलू उत्पादन को 31फीसदी तक पहुंचा दिया है।
बासमती चावल कंपनी अमीर चंद जगदीश कुमार एक्सपोर्ट्स लाएगी 440 करोड़ का आईपीओ
15 Mar, 2026 01:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। ‘एरोप्लेन’ ब्रांड के नाम से बासमती चावल बेचने वाली कंपनी अमीर चंद जगदीश कुमार एक्सपोर्ट्स जल्द ही शेयर बाजार में कदम रखने जा रही है। कंपनी ने 440 करोड़ रुपये का प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने की घोषणा की है। यह आईपीओ 24 मार्च को खुलेगा और निवेशक 27 मार्च तक इसमें बोली लगा सकेंगे।
कंपनी के मुताबिक, एंकर निवेशकों के लिए 23 मार्च को एक दिन पहले निवेश का अवसर उपलब्ध कराया जाएगा। इस आईपीओ की सबसे खास बात यह है कि इसमें कोई भी मौजूदा निवेशक या प्रमोटर अपनी हिस्सेदारी नहीं बेच रहा है। पूरा इश्यू केवल फ्रेश शेयरों के जरिए जारी किया जाएगा, जिससे यह संकेत मिलता है कि प्रमोटर्स को कंपनी की भविष्य की संभावनाओं पर भरोसा है।
आईपीओ प्रक्रिया के तहत निवेशकों को शेयरों का आवंटन 30 मार्च तक किया जा सकता है, जबकि कंपनी के शेयरों की संभावित लिस्टिंग 2 अप्रैल को होने की उम्मीद है। जानकारी के अनुसार, कंपनी ने पहले 550 करोड़ रुपये का आईपीओ लाने की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में इसे घटाकर 440 करोड़ रुपये कर दिया गया। वर्तमान में कंपनी की 99 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी प्रमोटर्स के पास है। इसके प्रमुख प्रमोटर्स जगदीश कुमार सूरी, राहुल सूरी और रमणिका सूरी हैं।
कंपनी ने बताया कि आईपीओ से जुटाई गई राशि में से लगभग 400 करोड़ रुपये कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) की जरूरतों को पूरा करने में इस्तेमाल किए जाएंगे। शेष राशि का उपयोग सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। इससे पहले कंपनी प्री-आईपीओ राउंड में करीब 13 करोड़ रुपये जुटा चुकी है। यह निवेश 172 रुपये प्रति शेयर के मूल्य पर किया गया था, जिसके आधार पर कंपनी का मूल्यांकन लगभग 1,877 करोड़ रुपये आंका गया है।
हरियाणा स्थित यह कंपनी मुख्य रूप से बासमती चावल की प्रोसेसिंग और निर्यात का कारोबार करती है। इसकी स्थापना वर्ष 2003 में हुई थी और यह अपने उत्पाद ‘एरोप्लेन’ ब्रांड के तहत बेचती है। कंपनी की कुल आय का करीब 99 प्रतिशत हिस्सा इसी कारोबार से आता है। हाल के वर्षों में कंपनी ने एफएमसीजी क्षेत्र में भी विस्तार करते हुए आटा, मैदा, सूजी, बेसन, नमक और चीनी जैसे किचन उत्पादों की बिक्री शुरू की है। कंपनी के पास भारत में लगभग 70 ट्रेडमार्क पंजीकृत हैं, जबकि यूरोप, एशिया और अफ्रीका के 26 देशों में भी इसके करीब 30 ट्रेडमार्क दर्ज हैं।
वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में मजबूत वृद्धि दर्ज की है। मार्च 2025 को समाप्त वित्तीय वर्ष में कंपनी का शुद्ध मुनाफा बढ़कर 60.8 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष 30.4 करोड़ रुपये था। इसी अवधि में कंपनी का राजस्व 29.2 प्रतिशत बढ़कर 2,001.6 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं सितंबर 2025 को समाप्त चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में कंपनी ने 1,021.2 करोड़ रुपये के राजस्व पर 48.6 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है।
जंग शुरू होते ही क्रूड ऑयल में बड़ी तेजी, निवेशकों की नजर अगले संकेतों पर
14 Mar, 2026 01:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बीते 15 दिनों के भीतर 40 फीसदी से अधिक की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के चलते पश्चिम एशिया में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार, विशेषकर एशियाई देशों पर दबाव बढ़ा है।
क्या कहते हैं आंकड़े?
युद्ध शुरू होने से पहले 27 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल करीब 73 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। वहीं शनिवार तक इसकी कीमत बढ़कर लगभग 103 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। इस तरह महज 15 दिनों में तेल की कीमत में 30 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी हुई, जो करीब 41.1 फीसदी के उछाल के बराबर है।
28 फरवरी से जारी तनाव
बताया जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा सैन्य टकराव 28 फरवरी से तेज हुआ, जब अमेरिकी और इस्राइलों बलों ने ईरान के सैन्य ठिकानों और शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाते हुए व्यापक हमले किए। इस संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बाजारों की चिंता और बढ़ा दी है।
बाजार को लेकर क्या है विशेषज्ञों की राय?
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर आने वाले दिनों में भी वैश्विक बाजारों पर साफ दिखाई देगा। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि आने वाला सप्ताह बेहद उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है, क्योंकि निवेशकों की नजरें पूरी तरह इस संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम पर टिकी रहेंगी।उन्होंने कहा कि आने वाले सप्ताह में बाजार की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। निवेशक इस बात पर करीबी नजर रखेंगे कि संबंधित देशों के सरकारी अधिकारी और वैश्विक पक्षकार तनाव बढ़ाने या कूटनीतिक समाधान की दिशा में क्या संकेत देते हैं।पोनमुडी आर के मुताबिक, इस संघर्ष का असर केवल कच्चे तेल की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक बॉन्ड यील्ड, मुद्रा बाजार और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर विशेष फोकस बना रहेगा, क्योंकि इसे दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा आपूर्ति मार्गों में गिना जाता है।विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस की आवाजाही लंबे समय तक बाधित रहती है, तो इससे वैश्विक तेल आपूर्ति और सख्त हो सकती है। इसका असर एशिया में महंगाई की उम्मीदों पर पड़ेगा और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता व दबाव का माहौल बना रह सकता है।
शिवालिक के बाद नंदा देवी की सुरक्षित वापसी, खाड़ी क्षेत्र की स्थिति क्या है?
14 Mar, 2026 01:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान की ओर से भारतीय ध्वज वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग देने के फैसले के बाद भारतीय एलपीजी टैंकर शिवालिक ने इस अहम समुद्री मार्ग को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। वहीं दूसरा एलपीजी पोत नंदा देवी भी इस संवेदनशील तेल मार्ग से सुरक्षित बाहर निकल गया है।
शिवालिक को लेकर क्या है स्थिति?
सरकारी सूत्रों ने शनिवार को बताया कि शिवालिक इस समय भारतीय नौसेना की निगरानी और सुरक्षा में आगे बढ़ रहा है। जहाज खुले समुद्र में पहुंच चुका है और अगले दो दिनों में भारत के किसी बंदरगाह पर पहुंचने की संभावना है। इसके मुंबई या कांडला बंदरगाह पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।
क्या कूटनीतिक संवाद से भारत को मिली राहत?
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच वस्तुओं और ऊर्जा आपूर्ति के सुचारु प्रवाह को लेकर उच्चस्तरीय चर्चा हुई थी। माना जा रहा है कि इसी कूटनीतिक संवाद के बाद भारतीय जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग का रास्ता साफ हुआ।इससे पहले शुक्रवार को भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने संकेत दिया था कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय जहाजों को जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रास्ता मिल सकता है। उन्होंने कहा था कि भारत ईरान का मित्र देश है और दोनों देशों के इस क्षेत्र में साझा हित हैं। फथाली ने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में भारत सरकार ने युद्ध के बाद विभिन्न क्षेत्रों में ईरान की मदद की है।राजदूत का यह बयान ईरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त-रवांची के उस बयान के एक दिन बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि तेहरान ने कुछ देशों के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है अहम?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल और गैस निर्यात का करीब 20 फीसदी हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह की रुकावट का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ता है।
होर्मुज में फंसे भारत के कितने जहाज?
उधर, पोर्ट्स एंड शिपिंग मंत्रालय ने गुरुवार को कहा था कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में संचालित भारतीय ध्वज वाले जहाजों की संख्या 28 बनी हुई है और सभी भारतीय जहाजों व चालक दल की सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जा रही है। इनमें से 24 भारतीय जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में मौजूद थे, जिन पर 677 भारतीय नाविक सवार थे। वहीं चार जहाज जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्से में थे, जिन पर 101 भारतीय नाविक मौजूद थे।
निवेशकों के लिए अलर्ट: इन शेयरों में 21% तक गिरावट की चेतावनी
14 Mar, 2026 12:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण पैदा हुई अनिश्चितता से वैश्विक समेत घरेलू बाजार में भी हलचल देखने को मिल रही है. भारतीय शेयर मार्केट में लगातार 3 दिनों से गिरावट देखने को मिली. शुक्रवार के कारोबारी दिन भी दोनों प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स लाल निशान पर ट्रेड करते हुए बंद हुए. सेंसेक्स 1470.50 अंक या 1.93 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,563.92 अंक तो वहीं, एनएसई निफ्टी 50 488.05 अंक या 2.06 प्रतिशत फिसलकर 23,151.10 के लेवल पर बंद हुए थे. बाजार के इस माहौल से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है. वहीं, ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने कुछ कंपनियों को अपनी अंडरपरफॉर्म लिस्ट में शामिल किया है. आइए जानते है, इस बारे में...विप्रो को लेकर ब्रोकरेज हाउस जेफरीज ने सावधानी बरतने की सलाह दी है. फर्म के मुताबिक कंपनी का शेयर मौजूदा स्तर से गिरकर करीब 180 रुपये तक आ सकता है. जो बीएसई पर इसके पिछले बंद भाव 202.51 रुपये से लगभग 21 प्रतिशत कम है.ब्रोकरेज का कहना है कि वित्त वर्ष 2026 में कंपनी के मुख्य रेवेन्यू में लगातार दूसरे साल गिरावट देखने को मिल सकती है, क्योंकि परामर्श सेवाओं वाले सेगमेंट में मांग कमजोर बनी हुई है. सिप्ला को लेकर ब्रोकरेज हाउस जेफरीज ने सतर्क रुख अपनाया है. उनके मुताबिक आने वाले समय में कंपनी की अमेरिका से होने वाली कमाई पर दबाव बढ़ सकता है. वजह यह है कि कंपनी की तीन प्रमुख दवाओं में से दो को कड़े प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है. वहीं एक अहम दवा लैंरेओटाइड की सप्लाई सहयोगी मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर से जुड़ी दिक्कतों के कारण प्रभावित हो रही है.इन चुनौतियों के चलते ब्रोकरेज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स सालाना आधार पर करीब 15 प्रतिशत तक घट सकता है. इसी कारण फर्म ने इस शेयर पर “अंडरपरफॉर्म” रेटिंग बरकरार रखी है |
हुंडई मोटर इंडिया
हुंडई मोटर इंडिया को लेकर ब्रोकरेज हाउस जेफरीज का मानना है कि कंपनी शेयरों में तेजी की गुंजाइश कम है. ब्रोकरेज ने इसका टारगेट प्राइस करीब 1,900 रुपये रखा है, जो पिछले बंद भाव के लगभग बराबर है.हालांकि उनका कहना है कि जीएसटी में संभावित कटौती, बाजार में लिक्विडिटी की बेहतर स्थिति और सरकारी वेतन बढ़ोतरी जैसे कारणों से भारत में पैसेंजर व्हीकल की मांग मजबूत रह सकती है, लेकिन ऑटो सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा कंपनी के लिए चुनौती बनी हुई है |
जंग के माहौल में गोल्ड की कीमतें क्यों फिसलीं? एक्सपर्ट्स ने बताया कारण
14 Mar, 2026 12:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान पर अमेरिका और इजरायल की ओर से लगातार हमले किए जा रहे हैं. इसके जवाब में ईरान भी ड्रोन हमलों के जरिए अपनी ताकत दिखा रहा है. युद्ध शुरू हुए करीब 12 दिन हो चुके हैं. लेकिन इस बार एक दिलचस्प बात देखने को मिल रही है. ऐसे संकट के समय आमतौर पर सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल आता है, लेकिन ईरान युद्ध के दौरान ऐसा नहीं हो रहा है.आमतौर पर जब भी कोई बड़ा युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में सोना खरीदते हैं, जिससे इसकी कीमत बढ़ जाती है. लेकिन फिलहाल सोना-चांदी की कीमतों में उल्टा गिरावट देखने को मिल रही है |
क्यों नहीं चमक रहे सोना-चांदी
ईरान के साथ 28 फरवरी को जब युद्ध शुरू हुआ, उस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 5416 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रहा था. लेकिन मिडिल ईस्ट में भारी तनाव के बावजूद इसकी कीमत गिरकर करीब 5108 डॉलर प्रति औंस पर आ गई.अगर भारत में कीमतों की बात करें तो Multi Commodity Exchange of India (एमसीएक्स) पर 28 फरवरी को सोना करीब 1.67 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास था, जो अब घटकर करीब 1.59 लाख रुपये रह गया है.इसी तरह चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखी गई है. 28 फरवरी को एमसीएक्स पर चांदी करीब 2.89 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर थी, जो 13 मार्च तक गिरकर लगभग 2.62 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गई |
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक युद्ध के बावजूद सोना-चांदी की कीमतों में सुस्ती की सबसे बड़ी वजह U.S. Dollar Index में मजबूती है. जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर मजबूत होता है, तो सोना खरीदना महंगा पड़ता है. इससे अस्थायी रूप से सोने और चांदी की मांग कम हो जाती है.यानी साफ तौर पर कहा जा सकता है कि युद्ध के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों और मजबूत अमेरिकी डॉलर ने फिलहाल सोना-चांदी की चमक को थाम कर रखा है |
तनाव के कारण उड़ानों के रूट और खर्च पर बढ़ा दबाव
14 Mar, 2026 11:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारतीय विमानन कंपनियों की लागत बढ़ने लगी है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो और एअर इंडिया ने केंद्र सरकार से ईंधन कर में कटौती और निजी हवाई अड्डों पर लगने वाले शुल्क कम कराने की मांग की है। सूत्रों के अनुसार, ईरान से जुड़े तनाव के कारण पश्चिम एशिया के कई हवाई मार्गों का उपयोग करना कठिन हो गया है। वहीं भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव के चलते भारतीय एयरलाइनों को पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की भी अनुमति नहीं है। ऐसे में कंपनियों को लंबा मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे परिचालन लागत बढ़ रही है। बताया गया है कि इंडिगो ब्रिटेन के लिए उड़ानों में अफ्रीका के रास्ते जा रही है, जबकि एअर इंडिया को उत्तर अमेरिका जाने वाली उड़ानों में बीच में ठहराव जोड़ना पड़ रहा है। इससे ईंधन और परिचालन खर्च बढ़ रहा है।
टिकटॉक के अमेरिकी कारोबार में बड़ा बदलाव
14 Mar, 2026 11:14 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका की ट्रंप सरकार को टिकटॉक के सौदे से बड़ा फायदा होने जा रहा है। दरअसल इस सौदे के तहत अमेरिका को निवेशकों से करीब 10 अरब डॉलर की फीस मिलेगी। साथ ही सौदे के तहत अमेरिकी यूजर्स का डेटा भी सुरक्षित होगा। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट में ये दावा किया गया है।
अमेरिकी सरकार को सौदे से हुआ बड़ा फायदा
टिकटॉक की मूल कंपनी चीनी कंपनी बाइट डांस है, लेकिन जनवरी में अमेरिकी सरकार के दबाव के बाद बाइट डांस ने अमेरिकी कंपनी के साथ संयुक्त रूप से टिकटॉक चलाने का सौदा किया था।इस सौदे के तहत अमेरिका के यूजर्स का डेटा सुरक्षित होगा। अमेरिका में टिकटॉक के करीब 20 करोड़ यूजर्स हैं। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बीते सितंबर में बताया था कि चीनी कंपनी के साथ संयुक्त उपक्रम वाली अमेरिकी कंपनी का मूल्य करीब 14 अरब डॉलर होगा।
सौदे के तहत अमेरिकी निवेशक ट्रंप प्रशासन को फीस के तौर पर 10 अरब डॉलर का भुगतान करेंगे। अमेरिकी निवेशकों में ओरेकल, सिल्वर लेक हैं।ट्रंप सरकार के अधिकारियों का कहना है कि यह शुल्क जायज है क्योंकि टिकटॉक के अधिग्रहण में चीन के साथ बातचीत में ट्रंप की अहम भूमिका थी।
रिटर्न के मामले में कमाल, 1 लाख के बना दिए 1 करोड़
13 Mar, 2026 01:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय शेयर बाजार में कुछ कंपनियां ऐसी भी होती हैं जो ज्यादा चर्चा में नहीं रहतीं, लेकिन लंबे समय में निवेशकों को शानदार रिटर्न देती हैं. जिससे निवेशकों को तगड़ा मुनाफा कमाने का मौका मिलता है. लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी ऐसा ही एक स्टॉक बनकर उभरा है. पिछले कुछ वर्षों में कंपनी के शेयर ने लगातार मजबूती दिखाई है और कीमत नए स्तरों तक पहुंची है. जिससे यह बाजार के बड़े वेल्थ क्रिएटर शेयरों में गिना जाने लगा है. आइए जानते हैं, इसके बारे में....
5 साल में 1 लाख बना करीब 1 करोड़
लंबी अवधि में लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी के शेयर ने निवेशकों को चौंकाने वाला रिटर्न दिया है. मार्च 2021 में इसका भाव करीब 11 रुपये के आसपास था, जो अब बढ़कर लगभग 1,205 रुपये तक पहुंच गया है. इस तरह करीब पांच साल में शेयर ने लगभग 10,854 प्रतिशत का जबरदस्त रिटर्न दिया |आंकड़ों की बात करें तो, इसी तेजी की वजह से अगर किसी निवेशक ने उस समय कंपनी शेयरों में 1 लाख रुपये लगाए होते और अपने निवेश को बनाए रखा होता तो आज उसकी वैल्यू करीब 1 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच सकती थी |
2021 के बाद आई जोरदार तेजी
कंपनी के शेयर में असली उछाल 2021 के बाद देखने को मिली, जब इसमें निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ने लगी. खासतौर पर मई 2024 से जुलाई 2025 के बीच शेयर ने तेज रफ्तार पकड़ी. इस अवधि में स्टॉक ने करीब 120 प्रतिशत का रिटर्न दिया. इसी दौरान यह 1,613.40 रुपये के अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर तक भी पहुंचा था |
रिटेल निवेशकों की भी बड़ी हिस्सेदारी
महाराष्ट्र की प्रमुख आयरन ओर माइनिंग कंपनियों में शामिल इस कंपनी में आम निवेशकों की भी अच्छी-खासी भागीदारी है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कंपनी में करीब 32.5 प्रतिशत हिस्सेदारी रिटेल निवेशकों के पास है. इसका मतलब यह है कि इस शेयर में आई तेजी का फायदा केवल बड़े निवेशकों को ही नहीं, बल्कि छोटे निवेशकों को भी मिला है |
शेयर बाजार में कंपनी का प्रदर्शन
बीएसई पर गुरुवार, 12 मार्च के कारोबारी दिन तेजी दर्ज की गई थी. दिन की समाप्ति पर कंपनी शेयर 1.64 प्रतिशत या 19.45 रुपये की तेजी के साथ 1205.60 रुपये पर ट्रेड करते हुए बंद हुए थे. दिन का इंट्रा डे हाई 1213.40 रुपये था. कंपनी के मार्केट कैप की बात करें तो, यह 65,627.93 करोड़ रुपये है |
लिपुलेख दर्रा खुलने से सीमा व्यापार में लौटेगी रौनक, स्थानीय कारोबारियों में उत्साह
