व्यापार
चंद्रशेखरन बोले, एआई से कारोबार को नया आयाम मिलेगा
16 May, 2026 02:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। वैश्विक कारोबारी जगत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब महज एक अतिरिक्त तकनीकी साधन नहीं, बल्कि बड़े उद्योगों के संचालन का मुख्य आधार बनता जा रहा है। देश की अग्रणी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में शेयरधारकों को संबोधित करते हुए इस रणनीतिक बदलाव को रेखांकित किया है, जहां एआई के बढ़ते प्रभाव से न केवल कंपनी का मुनाफा बढ़ा है बल्कि आईटी क्षेत्र में नई नौकरियों की भी वापसी हुई है।
एआई मॉडल से अरबों की कमाई और प्रयोगात्मक दौर का समापन
टीसीएस ने अपने विशेष 'ह्यूमन+एआई' ऑपरेटिंग मॉडल के जरिए तकनीकी बाजार में एक बड़ी छलांग लगाई है, जिसके दम पर कंपनी ने एआई सेवाओं से 2.3 अरब डॉलर और क्लाउड व साइबर सुरक्षा जैसी आधुनिक सेवाओं से 11.5 अरब डॉलर का सालाना राजस्व अर्जित किया है। चेयरमैन के अनुसार, जेनरेटिव और एजेंटिक एआई अब शुरुआती परीक्षणों के दौर से बाहर निकलकर विकास के एक नए चरण में पहुंच चुके हैं, जहां दुनिया भर के बड़े कॉर्पोरेट ग्राहक अब इसे अपने रोजमर्रा के मुख्य कामकाज का एक स्थायी और अनिवार्य हिस्सा बना रहे हैं।
भारत में देश का पहला अत्याधुनिक एआई डेटा सेंटर और वैश्विक रणनीति
भविष्य की जरूरतों को भांपते हुए टीसीएस भारत में एक सुरक्षित और संप्रभु एआई बुनियादी ढांचा तैयार करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है, जिसके तहत देश का पहला एआई-केंद्रित डेटा सेंटर स्थापित किया जाएगा जो 160 किलोवाट से अधिक की उच्च रैक डेंसिटी क्षमता से लैस होगा। बिजली और कंप्यूटिंग क्षमता की वैश्विक किल्लत के बीच कंपनी उद्योगों के लिए एक विशेष 'एआई ऑपरेटिंग सिस्टम' भी विकसित कर रही है, जिससे भारत आने वाले समय में दुनिया भर के एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक बेहद मजबूत और रणनीतिक विकल्प बनकर उभरेगा।
रिकॉर्ड मुनाफा, नए सौदे और आईटी क्षेत्र में नौकरियों की शानदार वापसी
कंपनी ने इस वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में 12.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ 13,718 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया है, जिससे पूरे वित्त वर्ष का कुल लाभ बढ़कर 49,210 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इस शानदार वित्तीय प्रदर्शन के साथ ही टीसीएस ने मार्च तिमाही में 12 अरब डॉलर के नए व्यापारिक सौदे हासिल किए हैं और लगातार दो तिमाहियों से जारी मंदी को पीछे छोड़ते हुए अंतिम तिमाही में 2,356 नए कर्मचारियों की भर्ती की है, जिससे कंपनी के कुल कार्यबल की संख्या पांच लाख चौरासी हजार से अधिक हो गई है।
चांदी का इंपोर्ट भी पिछले समय के मुकाबले 157% उछला
16 May, 2026 10:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक संकट के बीच देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए सरकार लगातार बड़े कदम उठा रही है। इस आर्थिक रणनीति का मुख्य उद्देश्य चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में रुपये की गिरती कीमत को संभालना है। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आम जनता से आगामी एक वर्ष तक सोने की खरीदारी को टालने की भावुक अपील के बावजूद, अप्रैल महीने में घरेलू बाजार में पीली धातु के आयात में ऐतिहासिक उछाल देखा गया। ऊंची कीमतों के दौर में भी देश का स्वर्ण आयात एकाएक बयासी फीसदी के करीब बढ़कर 5.62 अरब डॉलर के पार पहुंच गया, जिसने आर्थिक नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है।
आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी और भविष्य में गिरावट की उम्मीद
इस बेकाबू होते आयात पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने एक बड़ा वित्तीय फैसला लेते हुए सोने और चांदी पर लगने वाली बेसिक इंपोर्ट ड्यूटी को छह प्रतिशत से सीधे बढ़ाकर पंद्रह प्रतिशत कर दिया है। वाणिज्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इस टैक्स बढ़ोतरी का सीधा असर आने वाले महीनों में देखने को मिलेगा, जिससे घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की मांग और उपभोग दोनों में भारी कमी आने की संभावना है। सरकार को पूरी उम्मीद है कि इस कड़े कदम से भविष्य में आयात के आंकड़ों को नीचे लाने में मदद मिलेगी।
चांदी के आयात में रिकॉर्ड उछाल और व्यापार घाटे पर बढ़ता दबाव
वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक केवल सोने में ही नहीं, बल्कि चांदी के आयात में भी अप्रैल के दौरान एक सौ सत्तावन प्रतिशत से अधिक की भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जो बढ़कर 41.1 करोड़ डॉलर के स्तर पर पहुंच गई। सोने और चांदी के इस संयुक्त आयात विस्फोट के कारण देश का व्यापार घाटा पिछले तीन महीनों के उच्चतम स्तर यानी 28.38 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि चांदी का उपयोग औद्योगिक कार्यों में अधिक होने के कारण इस पर टैक्स वृद्धि का प्रभाव सोने की तुलना में थोड़ा कम रह सकता है।
वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी और भारतीय उपभोक्ताओं का दबदबा
अगर वैश्विक स्तर पर भारत के स्वर्ण व्यापार के समीकरणों को देखा जाए, तो देश की कुल सोने की जरूरतों का लगभग चालीस प्रतिशत हिस्सा अकेले स्विट्जरलैंड से पूरा होता है, जबकि इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और दक्षिण अफ्रीका का स्थान आता है। पिछले वित्त वर्ष के दौरान यूएई से होने वाले आयात में मूल्य और मात्रा दोनों के लिहाज से कमी दर्ज की गई है, जिससे भारत के कुल स्वर्ण व्यापार में उसकी हिस्सेदारी थोड़ी घटी है। चीन के बाद दुनिया के दूसरे सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ता के रूप में भारत में होने वाला यह अधिकांश आयात मुख्य रूप से हमारे विशाल आभूषण उद्योग की मांग को पूरा करने के लिए किया जाता है।
तकनीक और निवेश में उनके लगातार बढ़ते लाभ का योगदान
16 May, 2026 10:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। दुनिया के सबसे अमीर इंसान एलन मस्क बहुत जल्द इतिहास रचते हुए पहले 'ट्रिलियनेयर' (महा-अरबपति) बनने की दहलीज पर खड़े हैं। उनकी मशहूर रॉकेट और सैटेलाइट निर्माता कंपनी स्पेसएक्स अगले महीने अपना महा-आईपीओ बाजार में उतारने की पूरी तैयारी कर चुकी है। कंपनी का लक्ष्य दो ट्रिलियन डॉलर के विशाल बाजार मूल्यांकन को छूना है, जिसके लिए वह पचहत्तर अरब डॉलर का सार्वजनिक निर्गम लेकर आ रही है। इस कंपनी में एलन मस्क की हिस्सेदारी लगभग चालीस से बयालीस फीसदी है, जिसका सीधा मतलब यह है कि इस लिस्टिंग के सफल होते ही मस्क की कुल संपत्ति में एक झटके में आठ सौ अरब डॉलर का भारी-भरकम इजाफा हो जाएगा और उनका नाम दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर के रूप में दर्ज हो जाएगा।
जून के शुरुआती हफ्तों में बाजार में दस्तक देने की तैयारी
वैश्विक वित्तीय बाजारों से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, स्पेसएक्स आगामी ग्यारह जून को शेयर बाजार में अपनी इस ऐतिहासिक लिस्टिंग को अमलीजामा पहनाने के लिए बेहद तेजी से कदम आगे बढ़ा रही है। इसके लिए अमेरिकी शेयर बाजार नैसडैक को लिस्टिंग स्थल के रूप में चुना गया है। कंपनी की प्रशासनिक प्रक्रियाएं इतनी तेज गति से चल रही हैं कि आने वाले बुधवार तक इसका प्रॉसपेक्टस आम जनता के सामने आ सकता है। योजना के मुताबिक, चार जून से इसके लिए रोडशो की शुरुआत होगी और बारह जून को कंपनी आधिकारिक तौर पर बाजार में अपना डेब्यू करेगी, जबकि इससे पहले इसे जून के आखिरी दिनों में मस्क के जन्मदिन के आसपास बाजार में लाने पर विचार किया जा रहा था।
सऊदी अरामको का रिकॉर्ड तोड़कर बनेगा इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ
यह सार्वजनिक निर्गम वित्तीय इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ साबित होने जा रहा है, जो सऊदी अरामको द्वारा साल 2019 में जुटाए गए उनतीस अरब डॉलर के पिछले वैश्विक रिकॉर्ड को काफी पीछे छोड़ देगा। स्पेसएक्स की इस वित्तीय मजबूती के पीछे उसकी स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा का सबसे बड़ा हाथ है, जिसने पिछले साल कंपनी के सोलह अरब डॉलर के कुल राजस्व में आठ अरब डॉलर का शुद्ध मुनाफा कमा कर दिया था। इसके साथ ही कंपनी के पास डायरेक्ट-टू-मोबाइल तकनीक की असीम संभावनाएं मौजूद हैं, जो आने वाले समय में इसके बिजनेस को एक नई ऊंचाई पर ले जाएंगी।
मस्क की भविष्य की योजनाएं और अंतरिक्ष आधारित डेटा सेंटर
वर्तमान में एलन मस्क की कुल संपत्ति लगभग छह सौ अस्सी अरब डॉलर आंकी गई है, जिसमें अकेले इस साल ही साठ अरब डॉलर से अधिक की बढ़ोतरी देखी गई है। स्पेसएक्स की दो ट्रिलियन डॉलर की नई वैल्यूएशन न केवल मस्क को ट्रिलियनेयर की लीग में सबसे आगे खड़ा करेगी, बल्कि कंपनी को अपने दूरगामी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए बड़ी पूंजी भी देगी। कंपनी इस आईपीओ से मिलने वाली रकम के एक हिस्से का इस्तेमाल अंतरिक्ष-आधारित अत्याधुनिक डेटा सेंटर विकसित करने में करने वाली है, जो उनके चांद और मंगल ग्रह पर इंसानों की बस्ती बसाने के लिए तैयार किए जा रहे स्टारशिप रॉकेट मिशन को भी नई रफ्तार देगा।
टाटा ट्रस्ट्स की अहम मीटिंग टली, चैरिटी कमिशर के निर्देश को लेकर विवाद
16 May, 2026 10:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित कारोबारी घरानों में से एक टाटा समूह से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां सर रतन टाटा ट्रस्ट (एसआरटीटी) के ट्रस्टी बोर्ड की शनिवार यानी सोलह मई को होने वाली बेहद महत्वपूर्ण बैठक को अचानक टालना पड़ा है। महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर ने इस प्रस्तावित बैठक को स्थगित करने का एक सख्त निर्देश जारी किया था, जिसके पीछे मुख्य वजह ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे और बोर्ड स्ट्रक्चर में नियमों के कथित उल्लंघन की चल रही जांच को बताया गया है। इस औचक फैसले पर टाटा ट्रस्ट्स की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई है, जिसमें मैनेजमेंट ने चैरिटी कमिश्नर के इस कदम को पूरी तरह से एकतरफा करार देते हुए कहा है कि इस मामले में सर रतन टाटा ट्रस्ट को अपनी दलीलें और पक्ष रखने का कोई उचित अवसर प्रदान नहीं किया गया।
देर रात मिले सरकारी आदेश से मची खलबली और नियमों के उल्लंघन का आरोप
टाटा ट्रस्ट्स द्वारा आधिकारिक रूप से साझा किए गए एक बयान के मुताबिक, शुक्रवार की देर शाम उन्हें एक आधिकारिक ईमेल प्राप्त हुआ, जिसमें चैरिटी कमिश्नर ने कात्यायनी अग्रवाल नामक एक शिकायतकर्ता की अर्जी, वेणु श्रीनिवासन के एक प्रतिवेदन और बॉम्बे हाई कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए बैठक पर रोक लगाने का आदेश दिया था। इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ कात्यायनी अग्रवाल की वह शिकायत है जिसमें आरोप लगाया गया है कि सर रतन टाटा ट्रस्ट के कुल छह सदस्यों में से तीन सदस्य स्थायी यानी आजीवन ट्रस्टी के तौर पर काम कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट की वैधानिक सीमाओं का खुला उल्लंघन है।
नए कानूनी संशोधनों और बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले का दिया गया हवाला
इस गंभीर आरोप पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए टाटा ट्रस्ट्स ने कहा है कि संबंधित सार्वजनिक ट्रस्ट अधिनियम में जो भी बदलाव या संशोधन किए गए हैं, वे एक सितंबर दो हजार पच्चीस से प्रभावी हुए हैं, जबकि ट्रस्ट के भीतर इन स्थायी सदस्यों की नियुक्तियां इस नई कानूनी तारीख से बहुत पहले ही पूरी की जा चुकी थीं। इसके साथ ही ट्रस्ट ने कानून का हवाला देते हुए यह भी दलील दी है कि इसी शिकायत के आधार पर बोर्ड मीटिंग को रोकने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में जो याचिका दायर की गई थी, उसे अदालत ने विगत तेरह मई को ही वापस ली गई मानते हुए पूरी तरह से निस्तारित कर दिया था, ऐसे में चैरिटी कमिश्नर द्वारा बिना कोई पूर्व नोटिस दिए ऐसा एकतरफा आदेश पारित करना न्यायसंगत नहीं है।
बोर्ड की बैठकों पर रोक के पीछे कानूनी अड़चनों और जांच रिपोर्ट का इंतजार
दूसरी तरफ इस प्रशासनिक कार्रवाई पर अपना रुख साफ करते हुए चैरिटी कमिश्नर मोघ एस कलोटी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि ट्रस्ट के इस आंतरिक मामले की जांच के लिए एक विशेष निरीक्षक को नियुक्त किया जा चुका है और वर्तमान में उनकी विस्तृत रिपोर्ट आना अभी बाकी है। कमिश्नर कार्यालय का मानना है कि जब तक यह आधिकारिक जांच पूरी तरह से मुकम्मल नहीं हो जाती, तब तक बोर्ड की कोई भी बैठक आयोजित करना पूरी तरह से अनुचित होगा। विभाग के अनुसार यदि इस संवेदनशील अवधि के दौरान ट्रस्ट के भीतर कोई भी बड़ा या महत्वपूर्ण नीतिगत फैसला लिया जाता है, तो इससे भविष्य में गंभीर कानूनी पेचीदगियां पैदा हो सकती हैं और चल रही न्यायिक कार्यवाही में भी बेवजह की देरी होगी।
आजीवन ट्रस्टी की संख्या को लेकर छिड़ी जंग और अरबों के साम्राज्य पर असर
वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था के तहत सर रतन टाटा ट्रस्ट के बोर्ड में कुल छह अहम ट्रस्टी शामिल हैं, जिनमें से जिमी नेवल टाटा, जहांगीर एचसी जहांगीर और नोएल नवल टाटा आजीवन ट्रस्टी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यह संख्या मौजूदा बोर्ड की कुल क्षमता के पचास प्रतिशत के बराबर बैठती है, जबकि नए सरकारी नियमों के अनुसार यह वैधानिक सीमा अधिकतम पच्चीस प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए, जिसके कारण इस पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है। गौरतलब है कि सर रतन टाटा ट्रस्ट की पूरे टाटा ग्रुप की मुख्य होल्डिंग कंपनी टाटा संस में लगभग तेईस दशमलव छह प्रतिशत की एक बहुत बड़ी हिस्सेदारी है, जिससे इस आंतरिक बोर्ड विवाद और जांच के नतीजों का असर आने वाले समय में देश के कॉर्पोरेट जगत पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर लेकिन चिंताजनक बनी
16 May, 2026 07:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश के रोजगार परिदृश्य को लेकर एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है, जिसके मुताबिक पंद्रह वर्ष और उससे अधिक उम्र के नागरिकों के बीच बेरोजगारी का ग्राफ लगातार ऊपर चढ़ रहा है। अप्रैल महीने में राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी की दर बढ़कर 5.2 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई है, जो कि बीते छह महीनों के भीतर दर्ज किया गया सबसे उच्चतम स्तर है। मार्च के महीने में यह आंकड़ा 5.1 फीसदी पर दर्ज किया गया था, जबकि इससे पहले पिछले साल अक्टूबर के दौरान भी बेरोजगारी इसी तरह 5.2 फीसदी के ऊंचे स्तर पर देखी गई थी।
व्यापक सरकारी सर्वेक्षण में सामने आए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बदलते हालात
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा देश के पौने चार लाख से भी अधिक नागरिकों के बीच किए गए व्यापक आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण से यह साफ हुआ है कि इस बार ग्रामीण और शहरी बाजारों में रोजगार की स्थिति अलग-अलग रही है। जहां एक तरफ देश के शहरी इलाकों में थोड़ी राहत देखने को मिली है और वहां बेरोजगारी दर मार्च के 6.8 फीसदी से कम होकर अप्रैल में 6.6 फीसदी पर आ गई, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण अंचलों में स्थिति थोड़ी बिगड़ी है। गांवों में काम की कमी के कारण बेरोजगारी का आंकड़ा 4.3 फीसदी से छलांग लगाकर 4.6 फीसदी पर पहुंच गया है।
पुरुष और महिला वर्ग के बीच रोजगार के मोर्चे पर बढ़ता अंतर
श्रम बाजार के इस नए ब्योरे में लैंगिक आधार पर भी उतार-चढ़ाव साफ तौर पर नजर आ रहा है, जिसके तहत पुरुषों के बीच कुल बेरोजगारी मामूली बढ़त के साथ 5.1 फीसदी दर्ज की गई है। गांवों में रहने वाले पुरुषों के लिए रोजगार के अवसर कम हुए हैं, जिससे उनकी बेरोजगारी दर बढ़कर 4.7 फीसदी हो गई, जबकि शहरों में यह सुधरकर 5.9 फीसदी रह गई है। इसके उलट महिलाओं के मोर्चे पर भी चुनौतियां बढ़ी हैं और उनकी कुल बेरोजगारी दर बढ़कर 5.4 फीसदी के स्तर को छू गई है, जिसमें ग्रामीण महिलाओं की बेरोजगारी में विशेष रूप से इजाफा देखा गया है।
श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी और कार्यरत आबादी के अनुपात में गिरावट
ताजा आर्थिक आंकड़ों के विश्लेषण से यह बात भी उजागर हुई है कि अप्रैल के दौरान देश की श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) में गिरावट आई है और यह कम होकर पचपन फीसदी पर आ गई है। इसमें सबसे ज्यादा असर पंद्रह वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं की भागीदारी पर पड़ा है, जो मार्च के मुकाबले घटकर 33.9 फीसदी रह गई है। इसके साथ ही देश की कुल कार्यरत आबादी का अनुपात (डब्ल्यूपीआर) भी प्रभावित हुआ है, जो गांवों में कामगारों की संख्या घटने की वजह से राष्ट्रीय स्तर पर कम होकर 52.2 फीसदी दर्ज किया गया है।
दामों में बढ़ोतरी का खतरा, ऑयल कंपनियों ने जताई नाराजगी
15 May, 2026 02:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: देश में आम जनता पर महंगाई का एक और बड़ा बोझ बढ़ गया है क्योंकि पंद्रह मई से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सीधे तीन रुपये प्रति लीटर का तगड़ा इजाफा कर दिया गया है। आम उपभोक्ताओं की जेब ढीली करने वाली इस मूल्य वृद्धि के बाद भी तेल संकट के और गहराने तथा कीमतों में आगामी दिनों में और अधिक बढ़ोतरी होने की प्रबल आशंका बनी हुई है। देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियां इस ताजा बढ़ोतरी से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं और उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के दबाव को देखते हुए यह कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया था।
वैश्विक बाजार के दबाव और बढ़ती लागत के बीच मामूली राहत
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के निदेशक अरविंद कुमार ने इस मूल्य वृद्धि पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और रिफाइनिंग लागत को देखते हुए तीन रुपये की यह बढ़ोतरी बेहद मामूली है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की जो वास्तविक लागत बढ़ी है, उसकी पूरी भरपाई करने के लिए कीमतों में इससे कहीं ज्यादा इजाफा करने की आवश्यकता थी। वर्तमान में की गई यह वृद्धि बढ़ी हुई लागत का महज दस प्रतिशत यानी केवल दसवां हिस्सा ही है, जिसका सीधा मतलब है कि तेल कंपनियों ने अभी भी घाटे का एक बड़ा हिस्सा खुद वहन करते हुए जनता पर न्यूनतम बोझ डाला है।
ईंधन की निर्बाध आपूर्ति के लिए रिफाइनरियों पर भारी दबाव
घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की किल्लत न हो और सभी पेट्रोल पंपों पर ईंधन की निर्बाध सप्लाई लगातार बनी रहे, इसके लिए देश की तेल रिफाइनरियां इस समय अपनी तय सीमा से कहीं ज्यादा दबाव में काम कर रही हैं। रिफाइनिंग क्षेत्र के उच्चाधिकारियों के अनुसार देश में ईंधन की मांग और आपूर्ति का संतुलन बनाए रखने के लिए सभी रिफाइनिंग इकाइयां अपनी शत-प्रतिशत क्षमता से भी अधिक पर संचालित की जा रही हैं। कंपनियां भारी आर्थिक दबाव और कच्चे तेल के ऊंचे दामों के बावजूद देश की ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रही हैं।
भविष्य में और अधिक मूल्य वृद्धि की मंडराती आशंका
अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे बेतहाशा उछाल के कारण घरेलू तेल कंपनियों के मुनाफे और कार्यशील पूंजी पर विपरीत असर पड़ रहा है। बाजार विशेषज्ञों और न्यूज एजेंसी की रिपोर्टों के अनुसार यदि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव या अन्य कारणों से कच्चे तेल के दाम इसी तरह ऊंचे बने रहे, तो आने वाले समय में तेल विपणन कंपनियां अपने वित्तीय नुकसान को कम करने के लिए खुदरा कीमतों में एक बार फिर बड़ा बदलाव कर सकती हैं। इस स्थिति को देखते हुए यह माना जा रहा है कि वर्तमान में दी गई तीन रुपये की राहत अस्थाई साबित हो सकती है और आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को ईंधन के लिए और अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
मुनाफावसूली हावी, सोना-चांदी के दाम गिरे, कैरेट अनुसार रेट देखें
15 May, 2026 01:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: कारोबारी सप्ताह के अंतिम दिन शुक्रवार को सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। बाजार में निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली किए जाने के कारण घरेलू वायदा और हाजिर दोनों ही बाजारों में बहुमूल्य धातुओं के दाम लाल निशान पर आ गए हैं। राष्ट्रीय राजधानी में शुद्धता के विभिन्न पैमानों पर सोने के भाव में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे शादियों के इस सीजन में खरीदारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक संकेतों और स्थानीय स्तर पर मांग में आए बदलाव के कारण बाजार में यह उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
घरेलू हाजिर बाजार और बड़े ब्रांड्स के शोरूम में नरमी
दिल्ली के हाजिर बाजार में शुद्ध चौबीस कैरेट सोने के दाम में दो हजार रुपये से अधिक की बड़ी कटौती दर्ज की गई है, जिसके बाद इसके भाव घटकर एक लाख साठ हजार रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर के आस-पास आ गए हैं। इसी तरह बाईस कैरेट और अठारह कैरेट जेवराती सोने की कीमतों में भी भारी मंदी का रुख बना हुआ है। देश के प्रतिष्ठित आभूषण ब्रांड्स जैसे तनिष्क और कल्याण ज्वैलर्स के दिल्ली स्थित आउटलेट्स पर भी इस गिरावट का सीधा असर देखा जा रहा है, जहाँ ग्राहकों के लिए नई दरें लागू कर दी गई हैं और विभिन्न श्रेणियों के सोने के गहनों पर प्रति दस ग्राम हजारों रुपये की बचत हो रही है।
चांदी के दामों में ऐतिहासिक मंदी और वायदा बाजार का हाल
सोने की तर्ज पर ही औद्योगिक मांग कमजोर होने और बिकवाली के दबाव के कारण चांदी की कीमतों को भी बड़ा झटका लगा है। स्थानीय बाजार में चांदी का भाव सीधे दस हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक लुढ़क गया है, जिससे इसका दाम दो लाख नब्बे हजार रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर भी दोपहर के सत्र में सोने और चांदी के वायदा अनुबंधों में भारी बिकवाली देखी गई, जहाँ दोनों ही कीमती धातुएं अपने पिछले बंद स्तर से कई प्रतिशत नीचे कारोबार करती नजर आईं।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सुस्ती और वैश्विक दरों का दबाव
घरेलू बाजार में आई इस गिरावट के पीछे मुख्य वजह वैश्विक स्तर पर धातुओं के दाम टूटना माना जा रहा है। अमेरिकी कमोडिटी एक्सचेंज कॉमेक्स पर सोने का वायदा और हाजिर भाव दो फीसदी से अधिक की कमजोरी के साथ साढ़े चार हजार डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गया है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतों में भी सात प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर भारतीय सर्राफा बाजार के सेंटिमेंट पर पड़ा है और स्थानीय स्तर पर भी दोनों धातुओं के भाव धड़ाम हो गए हैं।
ITR फाइलिंग की घड़ी आई, जानें ITR-1 और ITR-4 के बारे में
15 May, 2026 11:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: आयकर दाताओं के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है क्योंकि आयकर विभाग ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया का औपचारिक रूप से शुभारंभ कर दिया है। विभाग ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आईटीआर-1 और आईटीआर-4 फॉर्म की एक्सेल यूटिलिटीज पोर्टल पर उपलब्ध करा दी हैं, जिससे पात्र नागरिक अब अपनी आय का विवरण साझा करना शुरू कर सकते हैं। समय से पहले इन सुविधाओं के उपलब्ध होने से करदाताओं को अपनी कर गणना और फाइलिंग प्रक्रिया को बिना किसी जल्दबाजी के पूरा करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा, जिससे अंतिम समय में होने वाली तकनीकी समस्याओं का जोखिम भी न्यूनतम हो जाएगा।
सुगम फाइलिंग के लिए ऑफलाइन यूटिलिटीज की उपलब्धता
आयकर विभाग द्वारा जारी की गई नई एक्सेल यूटिलिटीज करदाताओं को एक प्रभावी ऑफलाइन विकल्प प्रदान करती हैं, जिससे वे बिना इंटरनेट के अपनी आय और कटौतियों का विस्तृत विवरण दर्ज कर सकते हैं। करदाता ई-फाइलिंग पोर्टल से इन यूटिलिटीज को डाउनलोड कर अपनी कर देनदारी की सटीक गणना कर सकते हैं और अंत में एक फाइल तैयार कर उसे वेबसाइट पर अपलोड कर सकते हैं। इस पहल का प्राथमिक उद्देश्य वेतनभोगी कर्मचारियों और छोटे व्यवसायियों को एक ऐसा मंच देना है जहाँ वे अपनी फाइलिंग को सरल और त्रुटिहीन तरीके से अंजाम दे सकें।
आईटीआर-1 फॉर्म की पात्रता और दायरे का विस्तार
आईटीआर-1 फॉर्म विशेष रूप से उन निवासी व्यक्तियों के लिए बनाया गया है जिनकी कुल वार्षिक आय 50 लाख रुपये की सीमा तक है और उनके पास वेतन, पेंशन या गृह संपत्ति जैसे नियमित आय के स्रोत हैं। इस श्रेणी के अंतर्गत बैंक ब्याज और पांच हजार रुपये तक की कृषि आय रखने वाले नागरिकों को भी शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त विभाग ने उन करदाताओं को भी इस फॉर्म के उपयोग की अनुमति दी है जिन्हें विशिष्ट धाराओं के तहत सवा लाख रुपये तक का दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ प्राप्त हुआ है, जिससे मध्यम वर्ग के एक बड़े हिस्से को रिटर्न भरने में आसानी होगी।
पेशेवरों और उद्यमियों के लिए आईटीआर-4 के लाभ
छोटे उद्यमियों और पेशेवरों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आईटीआर-4 फॉर्म को प्रकल्पित कराधान योजनाओं के अनुरूप तैयार किया गया है, जो मुख्य रूप से उन फर्मों और व्यक्तियों पर लागू होता है जिनकी आय 50 लाख रुपये तक है। यह फॉर्म उन लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी है जो अपनी व्यावसायिक आय की गणना एक निश्चित अनुमानित आधार पर करना चाहते हैं। आईटीआर-1 की ही तरह इसमें भी पूंजीगत लाभ से जुड़ी विशेष छूटों का प्रावधान रखा गया है ताकि छोटे व्यवसायी बिना किसी जटिल दस्तावेजी प्रक्रिया के अपना कर दायित्व पूरा कर सकें।
समय पूर्व अनुपालन और अंतिम तिथि का महत्व
आयकर विभाग ने करदाताओं को सलाह दी है कि वे 31 जुलाई की सामान्य समय सीमा का इंतजार किए बिना अपनी फाइलिंग प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी कर लें। जल्दी रिटर्न दाखिल करने से न केवल सिस्टम पर पड़ने वाले दबाव में कमी आती है, बल्कि करदाताओं को भी अपने रिफंड आदि की प्रक्रिया समय पर शुरू होने का लाभ मिलता है। विभाग के इस सक्रिय कदम से यह सुनिश्चित होगा कि देश का कर ढांचा अधिक सुदृढ़ हो और नागरिकों को कर अनुपालन की दिशा में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
सेंसेक्स और निफ्टी में मजबूती, शेयरों की कीमतों में उछाल
15 May, 2026 10:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को एक बार फिर रौनक लौट आई और प्रमुख सूचकांकों ने तेज रफ्तार के साथ कारोबार की शुरुआत की। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों में हुई भारी लिवाली और अमेरिकी बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने घरेलू निवेशकों के उत्साह को दोगुना कर दिया। शुरुआती सत्र के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 451 अंकों से अधिक की छलांग लगाकर 75,850 के स्तर को पार कर गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी ने भी 143 अंकों की बढ़त के साथ 23,832 के स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत कर ली।
आईटी शेयरों की चमक और बाजार का उतार-चढ़ाव
सेंसेक्स की इस तेजी में इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसी आईटी कंपनियों ने अग्रणी भूमिका निभाई, जिससे बाजार को ऊपरी स्तरों पर टिके रहने में मदद मिली। इसके साथ ही निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंकों और वाहन निर्माता कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों ने खासी दिलचस्पी दिखाई, जिससे बाजार का सेंटिमेंट सकारात्मक बना रहा। हालांकि इस तेजी के बीच कुछ बड़े नाम जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारतीय स्टेट बैंक के शेयरों में दबाव देखा गया, जिसके कारण ऊपरी स्तरों पर मामूली मुनाफावसूली भी देखने को मिली।
ईंधन की कीमतों में वृद्धि और विपणन कंपनियों पर दबाव
बाजार की इस हलचल के बीच तेल क्षेत्र से जुड़ी एक बड़ी खबर ने निवेशकों का ध्यान खींचा, जहां पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर तीन रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। चार वर्षों से अधिक समय के बाद हुई इस वृद्धि का सीधा असर तेल विपणन कंपनियों के शेयरों पर पड़ा और उनमें दो प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण कंपनियों को हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था, ताकि लागत आधारित महंगाई को नियंत्रित रखा जा सके।
वैश्विक परिस्थितियों का प्रभाव और निवेशकों की सक्रियता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के दाम 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने और एशियाई बाजारों में मिश्रित रुझान के बावजूद भारतीय बाजार अपनी मजबूती बनाए रखने में सफल रहे। विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार की जा रही खरीदारी ने बाजार को निचले स्तरों पर अच्छा सहारा प्रदान किया है। पिछले सत्र की भारी तेजी को बरकरार रखते हुए बाजार ने लगातार दूसरे दिन बढ़त का सिलसिला जारी रखा है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति निवेशकों के बढ़ते भरोसे और वैश्विक बाजार के सकारात्मक तालमेल को दर्शाता है।
समुद्री उत्पादों का निर्यात आसान, यूरोप में नई मांग
15 May, 2026 10:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारतीय समुद्री खाद्य उद्योग के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है क्योंकि यूरोपीय संघ ने अपनी संशोधित और नई मसौदा सूची में भारत को आधिकारिक तौर पर स्थान दे दिया है। इस महत्वपूर्ण फैसले के बाद अब भारतीय मछुआरों और निर्यातकों के लिए यूरोपीय देशों में समुद्री उत्पादों का व्यापार बिना किसी रुकावट के जारी रहेगा। लंबे समय से इस बात की आशंका बनी हुई थी कि कड़े नियमों के कारण भारत इस सूची से बाहर हो सकता है, परंतु सरकार के निरंतर कूटनीतिक प्रयासों और मानकों में सुधार के चलते भारत ने वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ और भी मजबूत कर ली है।
कड़े स्वास्थ्य मानकों पर भारत की जीत और निर्यात सुरक्षा
यूरोपीय संघ अपनी खाद्य सुरक्षा नीतियों और पशु मूल के उत्पादों के लिए विश्वभर में सबसे सख्त नियम लागू करने के लिए जाना जाता है। सितंबर 2026 से लागू होने वाले नए प्रावधानों के तहत भारत का इस सूची में होना अनिवार्य था, अन्यथा भारतीय सीफूड के लिए यूरोप के दरवाजे पूरी तरह बंद हो सकते थे। भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह सिद्ध कर दिया है कि उसके समुद्री उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनमें ऐसी किसी भी रोगाणुरोधी औषधि या मानव चिकित्सा के लिए प्रतिबंधित दवाओं का उपयोग नहीं किया गया है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती हैं। इसी भरोसे और वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर यूरोपीय संघ ने भारतीय उत्पादों को हरी झंडी दिखाई है।
आर्थिक मजबूती के लिए यूरोपीय बाजार की अहम भूमिका
भारतीय समुद्री खाद्य क्षेत्र के लिए यूरोपीय संघ दुनिया के तीसरे सबसे बड़े बाजार के रूप में एक स्तंभ की तरह कार्य करता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों को देखें तो भारत ने यूरोपीय देशों को लगभग 1.593 अरब डॉलर मूल्य के उत्पादों का निर्यात किया है, जो देश के कुल समुद्री निर्यात का तकरीबन 18.94 प्रतिशत हिस्सा है। यदि यह बाजार हाथ से निकल जाता तो मत्स्य पालन क्षेत्र से जुड़े लाखों लोगों की आजीविका पर संकट खड़ा हो सकता था, लेकिन अब इस मार्ग के प्रशस्त होने से न केवल राजस्व में वृद्धि होगी बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को भी वैश्विक स्तर पर एक नई गति प्राप्त होगी।
वैश्विक साख में वृद्धि और भविष्य की उज्ज्वल राह
यूरोपीय संघ की इस मंजूरी का प्रभाव केवल यूरोप तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इससे पूरी दुनिया में भारतीय समुद्री उत्पादों की गुणवत्ता की धाक जमेगी। संशोधित सूची में जगह मिलना इस बात का प्रमाण है कि भारत ने खाद्य उत्पादन में रोगाणुरोधी दवाओं के प्रतिबंध को बेहद प्रभावी ढंग से लागू किया है। इस उपलब्धि के बाद विकसित देशों के अन्य बाजारों में भी भारतीय सीफूड की मांग में भारी उछाल आने की उम्मीद है, जिससे भविष्य में निर्यात के नए कीर्तिमान स्थापित होंगे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत एक भरोसेमंद खाद्य आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी पहचान और सुदृढ़ करेगा।
DGFT के नए नियम: सोने के व्यापारियों को अब मिलेगी सीमित मंजूरी
15 May, 2026 08:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: देश के बढ़ते आयात खर्च और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ते बोझ को देखते हुए सरकार ने सोने के शुल्क-मुक्त आयात से जुड़े नियमों को पहले से कहीं अधिक कड़ा कर दिया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय ने ज्वेलरी एक्सपोर्टर्स के लिए पांच नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं जिन्हें तुरंत लागू कर दिया गया है। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य सोने के व्यापार में पारदर्शिता लाना और अनावश्यक आयात पर लगाम लगाना है।
आयात की सीमा और पात्रता के कड़े मानक
नए प्रावधानों के अंतर्गत अब अग्रिम प्राधिकार योजना के तहत एक लाइसेंस पर अधिकतम 100 किलो सोना ही बिना शुल्क के मंगाया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे पहली बार आवेदन करने वाले व्यापारियों के कार्यस्थलों का अनिवार्य रूप से निरीक्षण करें। सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी कारोबारी को दूसरा आयात लाइसेंस केवल तभी प्रदान किया जाएगा जब उसने अपने पिछले लाइसेंस से जुड़े निर्यात लक्ष्य का कम से कम आधा हिस्सा सफलतापूर्वक पूरा कर लिया हो।
निगरानी और रिपोर्टिंग की द्वि-साप्ताहिक व्यवस्था
पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए अब लाइसेंस धारकों को अपने हर लेन-देन का पूरा विवरण प्रत्येक 15 दिनों में साझा करना होगा जिसे एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट से प्रमाणित कराना अनिवार्य है। केवल व्यापारियों पर ही नहीं बल्कि क्षेत्रीय कार्यालयों पर भी जिम्मेदारी तय की गई है कि वे हर महीने अपने सभी लाइसेंसों और गतिविधियों की रिपोर्ट मुख्यालय को भेजें। इस त्रिस्तरीय निगरानी तंत्र के माध्यम से सरकार सोने के अवैध इस्तेमाल को रोकने और रिकॉर्ड को दुरुस्त रखने की योजना बना रही है।
उद्योग की आशंकाएं और बढ़ता व्यापार घाटा
सरकार द्वारा आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने के तुरंत बाद लिए गए इस फैसले ने रत्न एवं आभूषण जगत में हलचल पैदा कर दी है। कारोबारियों का मानना है कि करों में वृद्धि और सख्त नियमों के कारण बाजार में तस्करी और ग्रे-मार्केट की गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। यह चिंताजनक स्थिति ऐसे समय में बनी है जब भारत का स्वर्ण आयात पिछले वित्त वर्ष में 24 प्रतिशत की भारी उछाल के साथ लगभग 72 अरब डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुका है।
2000 किमी लंबी समुद्री गैस पाइपलाइन, भारत का सबसे बड़ा ऊर्जा प्रोजेक्ट
14 May, 2026 04:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़े संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहरा गया है, जिससे निपटने के लिए भारत ने अब अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु एक अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू कर दिया है।
वैश्विक संघर्ष और कच्चे तेल की आपूर्ति पर संकट
बीते फरवरी माह के अंत में मध्य पूर्व में शुरू हुए युद्ध ने दुनिया भर में तेल और गैस के व्यापार को हिलाकर रख दिया है, विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण मार्ग के बाधित होने से भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए चिंताएं बढ़ गई हैं। दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक चौथाई हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है, लेकिन वर्तमान नाकाबंदी और तनावपूर्ण हालातों के कारण आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह चरमरा गई है। भारत अपनी आवश्यकता का लगभग आधा कच्चा तेल और भारी मात्रा में एलपीजी इसी रास्ते से मंगवाता है, जिसके कारण देश के भीतर ऊर्जा की कमी और कीमतों में अस्थिरता का खतरा मंडराने लगा है।
भारत का मेगा प्लान और समुद्री पाइपलाइन की तैयारी
इस अभूतपूर्व संकट का स्थायी समाधान खोजने के लिए भारत सरकार ने समुद्र के भीतर एक विशाल गैस पाइपलाइन बिछाने की योजना तैयार की है, जो भविष्य में किसी भी भू-राजनीतिक तनाव से बेअसर रहेगी। यह मेगा प्रोजेक्ट भारत को सीधे खाड़ी देशों से जोड़ने का काम करेगा, जिससे तेल और गैस के आयात के लिए समुद्री जहाजों और विवादित जलमार्गों पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी। इस तकनीक के माध्यम से सुरक्षित और निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना ही इस योजना का मुख्य लक्ष्य है, ताकि देश की विकास दर और घरेलू जरूरतों पर वैश्विक संघर्षों का असर न्यूनतम किया जा सके।
होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी और बढ़ता दबाव
होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रही नाकाबंदी ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में न केवल कच्चे तेल की कमी पैदा की है, बल्कि लॉजिस्टिक और बीमा लागतों में भी भारी वृद्धि कर दी है। चूंकि भारत का 80 प्रतिशत से अधिक एलपीजी आयात इसी संवेदनशील मार्ग पर टिका है, इसलिए वैकल्पिक रास्तों और पाइपलाइन नेटवर्क का विकास करना अब एक रणनीतिक अनिवार्यता बन गया है। इस समय यह मार्ग बाधित होने से ऊर्जा क्षेत्र में जो अस्थिरता आई है, उसने नीति निर्माताओं को परंपरागत आयात मार्गों के स्थान पर अधिक सुरक्षित और आधुनिक बुनियादी ढांचे में निवेश करने के लिए प्रेरित किया है।
आत्मनिर्भरता की ओर कदम और भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा
भारत का यह नया कदम न केवल वर्तमान संकट से उबरने का एक रास्ता है, बल्कि यह लंबी अवधि में देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक क्रांतिकारी पहल मानी जा रही है। समुद्र के नीचे बिछाई जाने वाली यह पाइपलाइन तकनीक और इंजीनियरिंग का एक अनूठा उदाहरण होगी, जो चुनौतीपूर्ण समुद्री परिस्थितियों के बावजूद ईंधन के निर्बाध प्रवाह को बनाए रखेगी। इस प्रोजेक्ट के सफल होने से भविष्य में मध्य पूर्व के युद्ध जैसे हालात भारत की ऊर्जा आपूर्ति में बाधा नहीं डाल पाएंगे और देश को अधिक स्थिर और सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था प्राप्त हो सकेगी।
BRICS में सबसे रईस कौन? जानें नंबर-1 का ताज किसके सिर!
14 May, 2026 03:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारत की राजधानी में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों का महत्वपूर्ण दो-दिवसीय शिखर सम्मेलन शुरू हो गया है, जिसकी कमान भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर संभाल रहे हैं।
वैश्विक मंच पर भारत की अध्यक्षता और विजन
इस वर्ष भारत की मेजबानी में आयोजित हो रहे इस सम्मेलन का मुख्य केंद्र लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित है। बैठक के दौरान सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ गहन चर्चा की जा रही है ताकि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए एक मजबूत और टिकाऊ ढांचा तैयार किया जा सके। डॉ. जयशंकर की अध्यक्षता में हो रहा यह आयोजन न केवल राजनयिक संबंधों को प्रगाढ़ कर रहा है, बल्कि विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक पटल पर मजबूती से रखने का कार्य भी कर रहा है।
आर्थिक शक्ति और ब्रिक्स का बढ़ता दायरा
मौजूदा समय में ब्रिक्स समूह अपनी सदस्य संख्या विस्तार के बाद विश्व की एक बड़ी आर्थिक शक्ति बनकर उभरा है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ अब मिस्र, ईरान और सऊदी अरब जैसे प्रभावशाली देश भी शामिल हैं। क्रय शक्ति समता के आधार पर देखा जाए तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में इस समूह की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से भी अधिक हो चुकी है, जो विश्व मंच पर इसके बढ़ते प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। हालिया आंकड़ों के अनुसार इस समूह की कुल जीडीपी 31.7 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच गई है, जो वैश्विक उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा है।
प्रति व्यक्ति आय के मामले में सदस्य देशों की स्थिति
समूह के भीतर आर्थिक संपन्नता का विश्लेषण करने पर यह तथ्य सामने आता है कि संयुक्त अरब अमीरात प्रति व्यक्ति आय के मामले में सबसे शीर्ष पायदान पर काबिज है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार यूएई की प्रति व्यक्ति आय 50,000 डॉलर के पार है, जबकि सऊदी अरब और रूस भी इस सूची में अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए हैं। हालांकि भारत और इथियोपिया जैसे देश इस सूची में निचले क्रम पर हैं, लेकिन उनकी बढ़ती आर्थिक विकास दर और विशाल बाजार उन्हें इस समूह का अनिवार्य हिस्सा बनाते हैं।
भविष्य की रणनीतियां और नए साझेदार देशों का आगमन
ब्रिक्स समूह अपनी पहुंच को और व्यापक बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, जिसके तहत बेलारूस, मलेशिया और वियतनाम जैसे 10 नए पार्टनर देशों को भी इस गठबंधन से जोड़ा गया है। इन नए सहयोगियों के आने से न केवल इस ब्लॉक की भौगोलिक विविधता बढ़ी है, बल्कि व्यापार और तकनीकी साझाकरण के नए रास्ते भी खुले हैं। आगामी सत्रों में इन सहयोगी देशों के साथ मिलकर वैश्विक व्यापार नीतियों और साझा सुरक्षा हितों पर ठोस रणनीतियां बनाने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की नींव और मजबूत होगी।
Gold Silver Today: सोने की कीमतों में उछाल, चांदी में मामूली गिरावट
14 May, 2026 01:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: सराफा बाजार में आज सोने और चांदी की कीमतों में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है, जहां सोने की चमक बढ़ी है वहीं चांदी के भाव में गिरावट दर्ज की गई है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने की बढ़त
बाजार खुलने के साथ ही एमसीएक्स पर सोने की कीमतों में तेजी का दौर शुरू हो गया और सुबह लगभग साढ़े दस बजे के करीब 10 ग्राम सोने का भाव 1,62,758 रुपये के स्तर पर पहुंच गया। आज के कारोबार के दौरान सोने ने निचले स्तर पर 1,61,027 रुपये और ऊपरी स्तर पर 1,63,055 रुपये प्रति 10 ग्राम की सीमाओं को छुआ है, जिससे निवेशकों के बीच पीली धातु की मांग स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।
चांदी की कीमतों में दर्ज हुई गिरावट
सोने के विपरीत चांदी के बाजार में आज नरमी का माहौल बना हुआ है और सुबह सवा दस बजे के आसपास प्रति किलो चांदी की कीमत में 1738 रुपये तक की कमी देखी गई। वर्तमान में चांदी का व्यापार 2,98,500 रुपये प्रति किलो के दायरे में हो रहा है, हालांकि उतार-चढ़ाव के बीच चांदी ने दिन का अधिकतम स्तर 2,99,000 रुपये भी छुआ है लेकिन शुरुआती बढ़त को बरकरार रखने में नाकाम रही।
अलग-अलग शहरों में भाव का अंतर
देश के प्रमुख शहरों में स्थानीय मांग और करों के कारण कीमतों में विभिन्नता नजर आ रही है। पटना और रायपुर जैसे शहरों में सोने की कीमतें तुलनात्मक रूप से कम हैं जहाँ भाव 1,62,970 रुपये के आसपास बना हुआ है, जबकि मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों भोपाल और इंदौर में सोने के दाम सबसे ऊंचे स्तर 1,63,210 रुपये पर पहुंच गए हैं।
सस्ते और महंगे बाजार की स्थिति
चांदी की खरीदारी के लिहाज से आज रायपुर का बाजार सबसे किफायती साबित हो रहा है क्योंकि वहां कीमतें 2,97,420 रुपये प्रति किलो के स्तर पर हैं। इसके उलट यदि भोपाल और इंदौर की बात करें तो वहां चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 2,97,850 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं, जो देश के अन्य प्रमुख केंद्रों के मुकाबले अधिक है।
Sugar Stocks में गिरावट, निर्यात रोक का असर दिखा
14 May, 2026 12:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा घरेलू बाजार में मिठास बनाए रखने और बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने के उद्देश्य से चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से पाबंदी लागू कर दी गई है। वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने एक अधिसूचना जारी कर चीनी की निर्यात नीति को 'प्रतिबंधित' श्रेणी से हटाकर पूरी तरह से 'निषिद्ध' श्रेणी में डाल दिया है, जो आगामी 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। सरकार के इस कड़े कदम का सीधा असर शेयर बाजार पर देखने को मिला, जहाँ खबर सार्वजनिक होते ही चीनी उत्पादक क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली का दौर शुरू हो गया।
चीनी कंपनियों के शेयरों में मची खलबली
सरकार के इस फैसले से चीनी मिलों के निवेशकों में घबराहट फैल गई, जिसके कारण प्रमुख चीनी स्टॉक्स औंधे मुंह गिर पड़े। बलरामपुर चीनी मिल्स के शेयरों में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि धामपुर शुगर मिल्स के शेयर सबसे अधिक चार प्रतिशत से ज्यादा टूटकर निचले स्तर पर आ गए। इसी प्रकार त्रिवेणी इंजीनियरिंग, श्री रेणुका शुगर्स, डालमिया भारत शुगर और ईआईडी पैरी जैसी स्थापित कंपनियों के शेयर भी बिकवाली के दबाव से अछूते नहीं रहे और लाल निशान पर कारोबार करते देखे गए। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात बंद होने से कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
निर्यात पाबंदी के दायरे और विशेष छूट की स्थिति
सरकार ने हालांकि इस प्रतिबंध में कुछ विशेष परिस्थितियों और देशों को रियायत प्रदान की है, जिसके तहत यूरोपीय संघ और अमेरिका को टैरिफ रेट कोटा योजना के अंतर्गत होने वाला चीनी का निर्यात निर्बाध रूप से जारी रहेगा। इसके साथ ही उन खेपों को भी राहत दी गई है जिनकी लोडिंग प्रक्रिया अधिसूचना जारी होने से पहले ही प्रारंभ हो चुकी थी या जिनके शिपिंग बिल पहले ही दाखिल किए जा चुके थे। जिन जहाजों ने भारतीय बंदरगाहों पर एंकर कर लिया था या जो खेप सीमा शुल्क अधिकारियों को सौंपी जा चुकी थीं, उन्हें तकनीकी जांच के उपरांत गंतव्य तक जाने की अनुमति दी जाएगी।
खाद्य सुरक्षा और वैश्विक अनुरोध पर लचीला रुख
निर्यात पर लंबी अवधि की इस रोक के बावजूद सरकार ने अन्य देशों के प्रति मानवीय और कूटनीतिक दृष्टिकोण खुला रखा है। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई देश अपनी खाद्य सुरक्षा की जरूरतों के आधार पर औपचारिक रूप से भारत सरकार से अनुरोध करता है, तो विशेष अनुमति के तहत चीनी निर्यात पर विचार किया जा सकता है। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य देश के भीतर चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करना और आम उपभोक्ताओं के लिए कीमतों को स्थिर रखना है, ताकि वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं का प्रभाव घरेलू अर्थव्यवस्था पर न पड़े।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
