व्यापार
कच्चे तेल की कीमतों पर वैश्विक हालात का असर बढ़ने के संकेत।
21 Mar, 2026 06:53 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत के तेल आयात में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। फरवरी महीने में रूस को पीछे छोड़ते हुए इराक भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च में रूस फिर से पहले स्थान पर आ सकता है। फरवरी में रूस से तेल आयात में 32 फीसद की गिरावट आई। आयात घटकर करीब 10 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। वहीं इराक से आयात बढ़कर 11.8 लाख बैरल प्रति दिन पहुंच गया। सऊदी अरब से भी आयात बढ़कर करीब 9.98 लाख बैरल प्रति दिन हो गया। इस दौरान भारत के कुल तेल आयात में मध्य पूर्व की हिस्सेदारी बढ़कर 59 फीसद हो गई। फरवरी में ब्राजील भारत का चौथा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बनकर उभरा। वैश्विक तनाव और सप्लाई में बदलाव के बीच भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग देशों से तेल खरीदने की रणनीति अपना रहा है। इसमें रूस की भूमिका फिर से मजबूत होती दिख रही है।
क्यों बढ़ रहा है रूसी तेल का आयात
पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलसंधि में बाधा के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके बाद भारत फिर से रूस से ज्यादा तेल खरीदने लगा है। मार्च में रूस से तेल आयात बढ़कर 18 से 22 लाख बैरल प्रति दिन तक पहुंच सकता है। इसके पीछे अमेरिकी फैसले की भी अहम भूमिका है। अमेरिका ने 6 मार्च को भारत के लिए रूसी तेल पर कुछ प्रतिबंधों में छूट दी। इससे आयात बढ़ने में मदद मिली। विशेषज्ञों का कहना है कि सस्ती कीमत और स्थिर सप्लाई के कारण रूस भारत की तेल आयात रणनीति में अब भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।
180 डॉलर के पार पहुंच सकता है क्रूड
सऊदी अरब के अधिकारियों का अनुमान है कि अगर ईरान युद्ध और उससे पैदा हुई ऊर्जा संकट की स्थिति अप्रैल के अंत तक जारी रहती है, तो कच्चे तेल की कीमत 180 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती है। यह जानकारी द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध की वजह से तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। खासतौर पर मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। सऊदी अरब के ये अनुमान रियाद में बढ़ती चिंता को उजागर करते हैं।
एक फीसदी टूटा तेल
शुक्रवार को तेल की कीमतें एक फीसद से ज्यादा गिर गईं, क्योंकि अमेरिका ने तेल सप्लाई संकट को संभालने के लिए कदम उठाए। प्रमुख यूरोपीय देशों, जापान और कनाडा ने होर्मुज जलसंधि से जहाज़ों के सुरक्षित गुजरने को सुनिश्चित करने के प्रयासों में शामिल होने की पेशकश की। इसके बाद मई के लिए ब्रेंट क्रूड वायदा 1.58 डॉलर या 1.45 फीसदी गिरकर 107.07 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया।
युद्ध जारी रहा तो क्या होगा?
ईरान, इस्राइल और अमेरिका से जुड़े इस संघर्ष ने खाड़ी क्षेत्र में प्रमुख ऊर्जा बुनियादी ढांचे को पहले ही बाधित कर दिया है। अगर पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है। पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हालात जल्द नहीं सुधरे तो इसका असर सिर्फ तेल बाजार तक सीमित ही नहीं रहेगा, बल्कि महंगाई और आर्थिक विकास पर भी पड़ेगा।
टैक्स संरचना में बदलाव से बाइक मार्केट में आया बड़ा परिवर्तन।
21 Mar, 2026 06:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत के मिड-कैपेसिटी मोटरसाइकिल सेगमेंट में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सितंबर में हुए GST (जीएसटी) बदलाव के बाद कंपनियां अपनी रणनीति बदल रही हैं और अब 400cc से 350cc सेगमेंट की ओर शिफ्ट हो रही हैं।
इस बदलाव ने कीमत, मांग और पूरे मार्केट की दिशा को प्रभावित किया है।
GST नियमों में क्या बदलाव हुआ
सरकार ने इंजन क्षमता के आधार पर टैक्स स्ट्रक्चर में बड़ा अंतर बना दिया है:
350cc तक की बाइक्स: जीएसटी 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत
350cc से ऊपर की बाइक्स: टैक्स बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत
इससे दोनों सेगमेंट के बीच कीमतों का अंतर काफी बढ़ गया है।
किन कंपनियों को सबसे ज्यादा फायदा हुआ?
जीएसटी कटौती का सबसे बड़ा फायदा 350cc सेगमेंट की कंपनियों को मिला है।
Royal Enfield
कीमतों में लगभग 22,000 रुपये तक की कटौती
350cc मॉडल्स से 87 प्रतिशत बिक्री
हर महीने करीब 1 लाख यूनिट्स की बिक्री
Classic Legends (Jawa, Yezdi)
सभी मॉडल 350cc के अंदर
हर महीने करीब 4,000 यूनिट्स की बिक्री
400cc बाइक्स पर क्या असर पड़ा?
400cc सेगमेंट की कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है।
Bajaj और Triumph जैसी कंपनियां टैक्स का बोझ खुद उठा रही हैं
कीमत बढ़ाने से मांग कम होने का खतरा
अगर पूरा टैक्स ग्राहकों पर डाला जाता, तो कीमत का अंतर 50,000 रुपये तक बढ़ सकता था, जिससे बिक्री प्रभावित होती।
क्या कंपनियां अब 350cc बाइक्स पर फोकस कर रही हैं?
हां, अब कंपनियां तेजी से 350cc सेगमेंट की ओर शिफ्ट हो रही हैं।
Bajaj और Triumph नई 350cc बाइक्स लाने की तैयारी में
ये इंजन मौजूदा 400cc प्लेटफॉर्म से ही विकसित होंगे
इससे कंपनियां:
लागत कम कर पाएंगी
कीमत प्रतिस्पर्धी रख सकेंगी
क्या परफॉर्मेंस पर असर पड़ेगा?
नई 350cc बाइक्स में पावर थोड़ा कम होगा, लेकिन फर्क बहुत ज्यादा नहीं होगा।
400cc: लगभग 40 hp
350cc: लगभग 35 hp
विशेषज्ञों के अनुसार:
मामूली पावर कम होने से राइडिंग अनुभव पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा
लेकिन कीमत और माइलेज में फायदा मिलेगा
क्या इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी?
इस बदलाव से प्रतिस्पर्धा और तेज होने वाली है।
Royal Enfield के Classic 350, Hunter 350 और Meteor 350 को सीधी टक्कर
Bajaj, Triumph और अन्य कंपनियां नए मॉडल लॉन्च करेंगी
साथ ही:
Hero और Harley-Davidson की साझेदारी को भी रणनीति बदलनी पड़ सकती है
TVS भी अपने 400cc योजनाओं पर पुनर्विचार कर सकती है
क्या 400cc सेगमेंट खत्म हो जाएगा?
नहीं, 400cc बाइक्स पूरी तरह खत्म नहीं होंगी।
ये सेगमेंट निर्यात मार्केट (जैसे यूरोप) के लिए बना रहेगा
लेकिन भारत में ध्यान अब 350cc पर स्थानांतरित हो रहा है
नया स्वीट स्पॉट!
जीएसटी बदलाव ने भारत के बाइक मार्केट को नई दिशा दे दी है।
अब सिर्फ परफॉर्मेंस ही नहीं, बल्कि टैक्स और कीमत भी उतने ही महत्वपूर्ण हो गए हैं।
350cc सेगमेंट तेजी से "नया स्वीट स्पॉट" बन रहा है, जहां कंपनियां और ग्राहक दोनों संतुलन पा रहे हैं।
औद्योगिक डीजल बढ़ा 22 रुपये, सामान्य डीजल-पेट्रोल में कोई बदलाव नहीं
20 Mar, 2026 02:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेल विपणन कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल की कीमत में दो रुपये प्रति लीटर का इजाफा कर दिया है। औद्योगिक उपयोग वाले थोक डीजल की दरें भी करीब 22 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गईं। तेल विपणन कंपनियों ने कीमतों में यह इजाफा पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक तेल कीमतों में उछाल के बाद किया है।
हालांकि, सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में प्रीमियम 95-ऑक्टेन पेट्रोल की कीमत 99.89 रुपये से बढ़कर 101.89 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इसी तरह, दिल्ली में थोक औद्योगिक डीजल की कीमतें 87.67 रुपये से बढ़कर 109.59 रुपये प्रति लीटर हो गईं। अंतर्राष्ट्रीय तेल कीमतें गुरुवार, 19 मार्च 2026 को 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, बाद में ये लगभग 108 डॉलर प्रति बैरल पर वापस आ गईं।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि सामान्य पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि प्रीमियम श्रेणी कुल पेट्रोल बिक्री का केवल दो से चार फीसदी है। सरकार आम आदमी पर कोई मूल्य वृद्धि का बोझ नहीं डालना चाहती है। तेल कंपनियां स्वतंत्र रूप से मूल्य निर्धारण का निर्णय लेती हैं। सरकार पेट्रोल और डीजल की कीमतों को विनियमित नहीं करती है।
पेट्रोल और डीजल का मूल्य निर्धारण क्रमशः 2010 और 2014 में विनियमित किया गया था। तब से तेल विपणन कंपनियां कीमतें तय करती हैं। सरकार वैश्विक तेल बाजारों की बारीकी से निगरानी कर रही है। फिलहाल खुदरा ईंधन कीमतें बढ़ाने की कोई तत्काल योजना नहीं है। तेल विपणन कंपनियों से मौजूदा लागत दबाव को अवशोषित करने की उम्मीद है।
कंपनियों का मुनाफा और आयात पर असर?
खुदरा पेट्रोल और डीजल की कीमतें अप्रैल 2022 से स्थिर हैं। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड जैसी कंपनियों ने नुकसान उठाया। जब कच्चे तेल की कीमतें अधिक थीं, तब उन्होंने नुकसान झेला और कम होने पर लाभ कमाया। वित्त वर्ष 2024 में इन कंपनियों ने रिकॉर्ड 81,000 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 88 फीसदी आयात करता है।
किन ब्रांड्स पर पड़ा है असर?
डीलरों के माध्यम से प्राप्त जानकारी में कहा गया है, इस ताजा मूल्य वृद्धि का सीधा असर प्रमुख तेल कंपनियों के ब्रांडेड ईंधनों पर देखने को मिला है। इनमें हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचसीएल) का 'पावर पेट्रोल' और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) का 'एक्सपी95' शामिल हैं, जिनकी खुदरा कीमतों में तत्काल प्रभाव से संशोधन किया गया है। उल्लेखनीय है कि प्रीमियम पेट्रोल का उपयोग मुख्य रूप से वाहनों में बेहतर इंजन परफॉरमेंस और अधिक माइलेज प्राप्त करने के उद्देश्य से किया जाता है।
पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक संकट और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ रहा असर?
भारत में प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में हुई यह बढ़ोतरी वैश्विक स्तर पर बन रहे युद्ध के हालातों का सीधा परिणाम है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध और तनाव के कारण तेजी से ऊपर जा रही हैं। वैश्विक ईंधन बाजार इस समय भारी अस्थिरता का सामना कर रहा है, जिसका दबाव अब घरेलू बाजार में भी दिखने लगा है।
इसके अतिरिक्त, वैश्विक स्तर पर ईरान संघर्ष को लेकर भी कई घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। एक तरफ ब्रिटेन के प्रधानमंत्री स्टार्मर ने ईरान के साथ संघर्ष को खारिज करते हुए 53 मिलियन पाउंड की सहायता योजना की घोषणा की है, वहीं दूसरी ओर जर्मनी ने भी ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए डोनाल्ड ट्रंप के दबाव को अस्वीकार कर दिया है। इन सभी अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों ने कच्चे तेल की कीमतों को अस्थिर कर दिया है।
कीमतों में वृद्धि: प्रीमियम पेट्रोल के दाम में दो रुपये से 2.3 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया गया है।
प्रभावित ब्रांड: एचपीसीएल के पावर पेट्रोल और आईओसीएल के एक्सपी95 की कीमतों में वृद्धि हुई है।
उपभोक्ताओं को राहत: रेगुलर पेट्रोल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, वे पहले की तरह ही स्थिर हैं।
लागू होने की तिथि: नई दरें 20 मार्च 2026 से प्रभावी हो गई हैं।
मुख्य कारण: मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ रही हैं।
संक्षेप में कहा जाए तो, मध्य पूर्व में अमेरिका,इस्राइल और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल ने वैश्विक तेल आपूर्ति शृंखला और कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है। इससे भारत में तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को प्रीमियम पेट्रोल के दाम बढ़ाने का कदम उठाना पड़ा है।
₹2929 करोड़ बैंक धोखाधड़ी केस में अनिल अंबानी से लगातार पूछताछ
20 Mar, 2026 01:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। उद्योगपति अनिल अंबानी शुक्रवार को ₹2,929.05 करोड़ के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में लगातार दूसरे दिन पूछताछ के लिए सीबीआई मुख्यालय पहुंचे। इससे एक दिन पहले गुरुवार को भी वह जांच अधिकारी के सामने पेश हुए थे, जहां उनसे करीब 8 घंटे तक पूछताछ की गई थी। यह मामला रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCOM) और अनिल अंबानी समेत अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। यह एफआईआर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी, जो 11 बैंकों के कंसोर्टियम का लीड बैंक है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायत के मुताबिक, 2013 से 2017 के बीच लोन की रकम का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग और हेरफेर किया गया। फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट में आरोप है कि समूह की विभिन्न कंपनियों के बीच जटिल और आपस में जुड़े लेन-देन के जरिए फंड डायवर्ट किए गए, जिससे एसबीआई को ₹2,929.05 करोड़ का नुकसान हुआ। कुल मिलाकर 17 सरकारी बैंकों का एक्सपोजर ₹19,694.33 करोड़ बताया गया है।
किन-किन बैंकों ने की शिकायत?
सीबीआई के अनुसार, इस मामले में बाद में पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, आईडीबीआई बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र सहित कई बैंकों से भी अलग-अलग शिकायतें मिली हैं।
इसके अलावा:
25 फरवरी को बैंक ऑफ बड़ौदा (जिसमें देना बैंक और विजया बैंक का एक्सपोजर शामिल है) की शिकायत पर एक और केस दर्ज हुआ।
5 मार्च को पंजाब नेशनल बैंक (जिसमें यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का एक्सपोजर शामिल है) की शिकायत के आधार पर एक अन्य मामला दर्ज किया गया।
सीबीआई की कार्रवाई
सीबीआई ने मुंबई की विशेष अदालत से सर्च वारंट लेकर 23 अगस्त 2025 को रिलायंस कम्युनिकेशंस के दो दफ्तरों और अनिल अंबानी के आवास पर छापेमारी की थी। इस दौरान कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए थे, जिन्हें जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ग्लोबल तनाव से तेल बाजार में आग, कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर
20 Mar, 2026 12:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज में अनिश्चितता के बीच भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। 19 मार्च 2026 को भारतीय कच्चे तेल के बास्केट का भाव 156.29 डॉलर प्रति बैरल रहा। यह बास्केट भारतीय रिफाइनरियों में संसाधित कच्चे तेल का प्रतिनिधित्व करती है। इसमें खट्टे ग्रेड (ओमान और दुबई औसत) और मीठे ग्रेड (ब्रेंट दिनांकित) के कच्चे तेल शामिल हैं। इन दोनों का अनुपात क्रमशः 78.71 फीसदी और 21.29 फीसदी है। कच्चे तेल की कीमतें संबंधित महीने की दैनिक कीमतों का औसत होती हैं। वर्तमान महीने का औसत अब तक की कीमतों पर आधारित है। यह टोकरी भारत की ऊर्जा जरूरतों का महत्वपूर्ण संकेतक है। वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव का इस पर सीधा असर पड़ता है।
स्वीट क्रूड और सॉर क्रूड का क्या मतलब है?
स्वीट क्रूड में सल्फर का स्तर बहुत कम होता है, 1% से भी कम। जबकि सॉर क्रूड में सल्फर की मात्रा 1-2% तक होती है । मध्यधारा की कंपनियां और रिफाइनर जो सॉर ऑयल का परिवहन, भंडारण और प्रसंस्करण करते हैं, वे जानते हैं कि सल्फर को हटाने और उत्पाद को स्वीट करने के लिए उन्हें अतिरिक्त उपचार क्षमताओं की आवश्यकता होती है।
इंडियन बास्केट क्रूड ऑयल से आप क्या समझते हैं?
इंडियन बास्केट क्रूड ऑयल का मतलब है, भारत द्वारा आयात किए जाने वाले अलग-अलग कच्चे तेलों की औसत कीमत। दरअसल भारत एक ही तरह का तेल नहीं खरीदता, बल्कि कई देशों (जैसे पश्चिम एशिया, अफ्रीका आदि) से अलग-अलग ग्रेड का कच्चा तेल खरीदता है। इन सभी तेलों की कीमतों को मिलाकर जो औसत मूल्य निकलता है, उसे ही इंडियन बास्केट कहा जाता है।
इसकी कीमतों में उछाल से क्या असर पड़ेगा?
इंडियन बास्केट क्रूड ऑयल महंगा होने का मतलब है कि भारत को कच्चा तेल खरीदने के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है। इससे पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों पर दबाव बढ़ता है, जिससे आम लोगों की लागत बढ़ सकती है। साथ ही ट्रांसपोर्ट और उत्पादन महंगे होने से महंगाई बढ़ती है। तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल भी बढ़ता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव पड़ता है और रुपये की कमजोरी की आशंका रहती है। कुल मिलाकर, इसका असर सीधे आम जनता से लेकर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
ऑल-टाइम लो पर रुपया, 19 पैसे टूटकर 93.08 तक लुढ़का
20 Mar, 2026 12:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय रुपया शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में कमजोर होकर अपने रिकॉर्ड इंट्रा-डे निचले स्तर पर पहुंच गया। डॉलर के मुकाबले रुपया 19 पैसे टूटकर पहली बार 93 के स्तर को पार करते हुए 93.08 पर कारोबार करता दिखा। इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया 92.92 प्रति डॉलर पर खुला और जल्द ही गिरकर 93.08 तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। यह गिरावट पिछले बंद स्तर की तुलना में 19 पैसे की कमजोरी को दर्शाती है। बुधवार को रुपया 49 पैसे गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 92.89 पर बंद हुआ।
क्या है गिरावट के कारण?
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली के चलते रुपये पर दबाव बना हुआ है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि गुड़ी पड़वा के कारण गुरुवार को विदेशी मुद्रा बाजार बंद रहे। रुपये की कीमत कमजोर दिख रही है क्योंकि आरबीआई ही डॉलर बेचकर इसे और गिरने से बचा रहा है। उन्होंने कहा कि गुरुवार को एफपीआई बिकवाली कर रहे थे जब सेंसेक्स और निफ्टी 21 महीने के निचले स्तर पर गिर गए।
इस बीच, डॉलर सूचकांक, जो छह मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है, 0.17 प्रतिशत बढ़कर 100.25 पर कारोबार कर रहा था।
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 1.64 प्रतिशत गिरकर 106.9 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
घरेलू शेयर बाजार की बात करें तो, सेंसेक्स गुरुवार की गिरावट से उबरते हुए 960.67 अंक या 1.29 प्रतिशत बढ़कर 75,167.91 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 311.50 अंक या 1.35 प्रतिशत बढ़कर 23,313.65 पर पहुंच गया।
एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने गुरुवार को शुद्ध आधार पर 7,558.19 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
गैस सप्लाई पर संकट: कतर के LNG प्लांट नुकसान से भारत अलर्ट
20 Mar, 2026 11:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर 18 और 19 मार्च 2026 को हुए मिसाइल हमलों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है। कतर की सरकारी ऊर्जा कंपनी कतर एनर्जी ने आधिकारिक बयान में बताया कि इन हमलों से देश की तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) निर्यात क्षमता में करीब 17 प्रतिशत की कमी आई है।
कितने का हुआ नुकसान?
कंपनी के अनुसार, हमलों में प्रमुख उत्पादन सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे सालाना लगभग 20 अरब डॉलर के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है। मरम्मत कार्य में तीन से पांच साल तक का समय लग सकता है। इस स्थिति को देखते हुए कंपनी को कुछ दीर्घकालिक एलएनजी अनुबंधों पर फोर्स मेज्योर घोषित करना पड़ सकता है। ऊर्जा मामलों के राज्य मंत्री और कतर एनर्जी के अध्यक्ष व सीईओ साद शेरिडा अल-काबी ने बताया कि हमलों में एलएनजी उत्पादन की दो अहम यूनिट ट्रेन 4 और ट्रेन 6 को नुकसान पहुंचा है। इन दोनों की संयुक्त उत्पादन क्षमता 12.8 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) है, जो कतर के कुल निर्यात का लगभग 17 प्रतिशत है। ट्रेन 4 में कतर एनर्जी की 66 प्रतिशत और एक्सॉनमोबिल की 34 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि ट्रेन 6 में कतर एनर्जी की 70 प्रतिशत और एक्सॉनमोबिल की 30 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
हालात सुधरने में लग सकते हैं पांच साल
अल-काबी ने कहा कि इन सुविधाओं को पूरी तरह ठीक करने में तीन से पांच साल लग सकते हैं और इस दौरान कुछ दीर्घकालिक एलएनजी आपूर्ति अनुबंधों पर पांच साल तक के लिए फोर्स मेज्योर लागू करना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस आपूर्ति व्यवधान का असर चीन, दक्षिण कोरिया, इटली और बेल्जियम जैसे देशों पर भी पड़ेगा। हमलों में पर्ल GTL (गैस-टू-लिक्विड्स) परियोजना भी प्रभावित हुई है, जिसे शेल संचालित करता है। यह संयंत्र प्राकृतिक गैस को उच्च गुणवत्ता वाले स्वच्छ ईंधन, बेस ऑयल, पैराफिन और वैक्स में बदलता है। इस परियोजना की दो यूनिट्स में से एक को नुकसान पहुंचा है और इसके कम से कम एक साल तक बंद रहने की आशंका है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
इस घटनाक्रम ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) और वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत अपनी एलएनजी जरूरतों के लिए कतर पर काफी निर्भर है। वर्ष 2024 में भारत ने कुल 27.8 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी आयात किया, जिसमें से 11.30 मिलियन टन (करीब 47 प्रतिशत) कतर से आया, जिसकी कीमत 6.40 अरब डॉलर थी। 2025-26 के आधिकारिक आंकड़े भी पुष्टि करते हैं कि कतर भारत का सबसे बड़ा गैस आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। ऐसे में कतर से आपूर्ति में आई कमी भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए जोखिम बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे घरेलू बाजार में गैस की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है और कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, खासकर तब जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव पहले से ही बढ़े हुए हैं।
वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया: कतर पर हमले के बीच भारत-नॉर्वे सहयोग मजबूत
20 Mar, 2026 09:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत नॉर्वे के साथ अपनी साझेदारी को अहम मानता है और दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, बदलते भू-राजनीतिक हालात का सामना करने और विश्व व्यापार संगठन (WTO) में सार्थक सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। गोयल ने गुरुवार को नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ आइडे के साथ वर्चुअल बातचीत की। बातचीत के बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि यह चर्चा रचनात्मक रही और वह WTO की आगामी मंत्रीस्तरीय बैठक को सफल बनाने के लिए साथ मिलकर काम करने को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने लिखा कि भारत नॉर्वे के साथ अपनी साझेदारी को महत्व देता है। हम द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य से निपटने और WTO में सार्थक सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वहीं, नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ आइडे ने भी बातचीत को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि WTO सुधारों के लिए बतौर फसिलिटेटर वह प्रमुख सदस्य देशों से लगातार चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अगले सप्ताह कैमरून में होने वाले 14वें मंत्रीस्तरीय सम्मेलन से पहले यह संवाद अहम है।
कतर पर मिसाइल हमलों से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई प्रभावित
कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर हुए मिसाइल हमलों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बड़ा झटका दिया है। इन हमलों के कारण कतर की तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) निर्यात क्षमता में 17 प्रतिशत की कमी आई है, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों की चिंता बढ़ गई है। कतरएनर्जी ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि 18 मार्च और 19 मार्च 2026 की शुरुआती घंटों में हुए हमलों से प्रमुख उत्पादन सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। कंपनी के अनुसार, इस घटना से सालाना करीब 20 अरब डॉलर के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है। ऊर्जा मामलों के राज्यमंत्री और कतरएनर्जी के अध्यक्ष व सीईओ साद शेरिदा अल-काबी ने कहा कि मिसाइल हमलों के चलते कतर की LNG निर्यात क्षमता में 17 प्रतिशत की कमी आई है और लगभग 20 अरब डॉलर के वार्षिक राजस्व का नुकसान हुआ है। उत्पादन सुविधाओं को हुए व्यापक नुकसान की मरम्मत में पांच साल तक का समय लग सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस स्थिति के चलते कंपनी को कुछ LNG अनुबंधों पर दीर्घकालिक फोर्स मेज्योर घोषित करना पड़ेगा।
एस्सार समूह की कंपनी मेसाबी मेटालिक्स को 10 अरब डॉलर तक का समर्थन
अमेरिका ने मिनेसोटा में एक बड़े खनिज और मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट के लिए एस्सार समूह की कंपनी मेसाबी मेटालिक्स को 10 अरब डॉलर तक की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है। यह ऐलान यूएस एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक (EXIM) ने टोक्यो में आयोजित इंडो-पैसिफिक एनर्जी सिक्योरिटी मिनिस्ट्रियल और बिजनेस फोरम के दौरान किया। EXIM के मुताबिक, यह फंडिंग करीब 30 अरब डॉलर के रणनीतिक सौदों का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य इंडो-पैसिफिक सहयोगियों के साथ मिलकर अमेरिका की सप्लाई चेन को मजबूत करना है। फोरम में EXIM के प्रेसिडेंट और चेयरमैन जॉन जोवानोविक के साथ इंटीरियर सेक्रेटरी डग बर्गम और पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) के एडमिनिस्ट्रेटर ली जेल्डिन समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मेसाबी मेटालिक्स मिनेसोटा में एक इंटीग्रेटेड आयरन ओर माइनिंग और प्रोसेसिंग सुविधा विकसित कर रही है, जो सालाना करीब 70 लाख टन हाई-ग्रेड डायरेक्ट-रिडक्शन आयरन ओर पेलेट्स का उत्पादन करेगी। ये आधुनिक स्टील निर्माण के लिए अहम कच्चा माल हैं। इस परियोजना से अमेरिका में सैकड़ों रोजगार भी सृजित होने की उम्मीद है।
निवेशकों की हुई चांदी, सेंसेक्स में जबरदस्त उछाल
20 Mar, 2026 08:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को बढ़त के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 976.77 अंक बढ़कर 75,184.01 पर पहुंचा; निफ्टी 301.7 अंक बढ़कर 23,303.85 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 19 पैसे गिरकर अपने रिकॉर्ड अंतर्देशीय निचले स्तर 93.08 पर पहुंच गया
क्या है विशेषज्ञों की राय?
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार ने कहा कि पिछले चार दिनों से बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि निफ्टी ने पहले तीन दिनों में जो बढ़त हासिल की थी, वह गुरुवार को 775 अंकों की गिरावट के साथ पूरी तरह खत्म हो गई। उनके अनुसार, यह आशा और डर का चक्र आने वाले समय में भी जारी रह सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बाजार में सुधार की संभावनाएं बनी हुई हैं। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद ने निवेशकों को कुछ राहत दी है। इस्राइल के प्रधानमंत्री के हालिया बयान के बाद यह संकेत मिला है कि ईरान के तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर आगे हमले नहीं होंगे। इससे ब्रेंट क्रूड की कीमतें अपने हालिया उच्च स्तर 118 डॉलर प्रति बैरल से घटकर करीब 106 डॉलर तक आ गई हैं। रिपोर्ट लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड 106.87 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
सेंसेक्स की कंपनियों का हाल
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से टाटा स्टील, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, टेक महिंद्रा, लार्सन एंड टुब्रो, पावर ग्रिड और एनटीपीसी प्रमुख लाभ कमाने वाली कंपनियों में शामिल थीं।
एचडीएफसी के शेयरों में आई गिरावट
वहीं, निजी क्षेत्र के दिग्गज बैंक HDFC बैंक के शेयरों पर दबाव बना रहा। बैंक के पूर्व नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे के बाद शेयर में कमजोरी देखी गई। शुरुआती कारोबार में HDFC बैंक का शेयर 0.85 फीसदी गिरकर 791 रुपये पर आ गया।
एशियाई बाजारों में रहा मिला-जुला हाल
एशियाई बाजारों में शुक्रवार के शुरुआती सत्र में मिश्रित रुझान देखने को मिला। जापान का निक्केई 225 सूचकांक 3 प्रतिशत से अधिक गिरकर 53372 के स्तर पर आ गया, सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स सूचकांक 0.26 प्रतिशत गिरकर 4954 के स्तर पर और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक 0.56 प्रतिशत गिरकर 25358 के स्तर पर आ गया। वहीं, ताइवान का भारित सूचकांक 0.21 प्रतिशत बढ़कर 33759 के स्तर पर और दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 0.55 प्रतिशत बढ़कर 5795 के स्तर पर पहुंच गया।
गुरुवार को अमेरिकी बाजारों में बिकवाली का दबाव जारी रहा। डॉव जोन्स 0.44 प्रतिशत गिरकर 46021 के स्तर पर, एसएंडपी 500 0.27 प्रतिशत गिरकर 6606 के स्तर पर और नैस्डैक 0.28 प्रतिशत गिरकर 22090 के स्तर पर आ गया।
ब्रेंट क्रूड का भाव गिरकर 106.9 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड में 1.63 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 106.9 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने गुरुवार को 7,558.19 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 3,863.96 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। गुरुवार को सेंसेक्स 2,496.89 अंक या 3.26 प्रतिशत गिरकर 74,207.24 पर बंद हुआ। जून 2024 के बाद यह एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट थी। वहीं निफ्टी 775.65 अंक या 3.26 प्रतिशत गिरकर 23,002.15 पर समाप्त हुआ।
बाजार में हाहाकार! Sensex धड़ाम, Nifty 23100 के नीचे फिसला
19 Mar, 2026 03:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन यानी गुरुवार को शेयर बाजार बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। बेंचमार्क सूचकांक और निफ्टी में तीन प्रतिशत की ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 2496.89 अंक या 3.26 प्रतिशत गिरकर 74,207.24 पर बंद हुआ। 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 775.65 अंक या 3.26 प्रतिशत गिरकर 23,002.15 पर बंद हुआ।
जंग ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ाई
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ऊर्जा ढांचे पर हमलों ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। ईरान के प्रमुख गैस उत्पादन क्षेत्र पर हमले और कतर स्थित दुनिया की सबसे बड़ी एलएनजी उत्पादन सुविधा को निशाना बनाए जाने से ऊर्जा आपूर्ति पर असर की आशंका गहरा गई है। बैंकिंग और मार्केट विशेषज्ञ अजय बग्गा ने एएनआई से बातचीत में कहा कि इन घटनाओं ने खाड़ी क्षेत्र के तनाव को बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचा दिया है। उनके अनुसार, इससे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई में बाधा की आशंका बढ़ी है, जिसका असर महंगाई और बाजारों पर साफ दिख सकता है।
फेड ने ब्याज दरों को रखा स्थिर
इस बीच, अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को स्थिर रखा है। फेड चेयर जेरोम पॉवेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में “अनिश्चितता” शब्द का कई बार उल्लेख करते हुए संकेत दिया कि टैरिफ और ऊर्जा संकट से महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। उनका रुख अपेक्षाकृत सख्त (हॉकिश) माना जा रहा है।
LPG सप्लाई बढ़ाने पर सरकार की घोषणा, राज्यों को मिलेगा 10% अतिरिक्त कोटा
19 Mar, 2026 03:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत सरकार ने पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) तंत्र के विस्तार में सहयोग करने वाली राज्य सरकारों को 10 फीसदी अतिरिक्त वाणिज्यिक एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) देने की घोषणा की है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक अंतर मंत्रालयी प्रेसवार्ता में बताया कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। यह कदम स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। सुजाता शर्मा ने कहा कि इस पहल से राज्य सरकारों को पीएनजी बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी लाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। अतिरिक्त वाणिज्यिक एलपीजी का आवंटन उन राज्यों को किया जाएगा जो पीएनजी कनेक्शनों की संख्या बढ़ाने और वितरण तंत्र को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। उन्होंने बताया कि पिछले दो सप्ताह में देशभर में सवा लाख नए घरेलू और वाणिज्यिक एलपीजी कनेक्शन जारी किए गए हैं। यह आंकड़ा ऊर्जा क्षेत्र में उपभोक्ताओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। इसके साथ ही, पिछले तीन दिनों के भीतर पांच हजार से अधिक ग्राहकों ने एलपीजी से पीएनजी में सफलतापूर्वक स्थानांतरण किया है। यह बदलाव पर्यावरण के अनुकूल ईंधन विकल्पों की ओर बढ़ते रुझान को इंगित करता है। मंत्रालय का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक उपभोक्ता पीएनजी को अपनाएं, जो एलपीजी की तुलना में अधिक सुविधाजनक और किफायती है। पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक अस्थिरता वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर दबाव बनाए हुए है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए सतर्कता आवश्यक है। यह कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने और आयात पर निर्भरता कम करने में भी सहायक होगा।
पश्चिम एशिया तनाव के बीच फेड का बड़ा फैसला—दरें स्थिर
19 Mar, 2026 12:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने बुधवार को अपनी प्रमुख ब्याज दर को 3.5% से 3.75% के दायरे में यथावत रखने का फैसला किया। फेड ने कहा कि उपलब्ध संकेतक बताते हैं कि आर्थिक गतिविधियां मजबूत गति से बढ़ रही हैं, हालांकि महंगाई अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।
फेड ने क्या टिप्पणी की?
जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, रोजगार में वृद्धि सीमित रही है और बेरोजगारी दर में हाल के महीनों में बहुत अधिक बदलाव नहीं देखा गया है। फेड ने अपने दोहरे लक्ष्य अधिकतम रोजगार और दीर्घकाल में 2% महंगाई को दोहराते हुए कहा कि आर्थिक परिदृश्य को लेकर अनिश्चितता अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। फेड ने पश्चिम एशिया में चल रहे घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि इनका अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। समिति ने कहा कि वह अपने दोनों लक्ष्यों रोजगार और महंगाई से जुड़े जोखिमों पर बारीकी से नजर बनाए हुए है।
भविष्य के फैसले को लेकर क्या संकेत?
केंद्रीय बैंक ने संकेत दिया कि भविष्य में ब्याज दरों में किसी भी बदलाव का फैसला आने वाले आर्थिक आंकड़ों, बदलते वैश्विक परिदृश्य और जोखिमों के संतुलन को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। फेड ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि उसके लक्ष्यों में बाधा डालने वाले जोखिम सामने आते हैं, तो वह मौद्रिक नीति के रुख में उचित बदलाव करने के लिए तैयार है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के अधिकांश सदस्यों ने इस फैसले का समर्थन किया, जिसमें चेयरमैन जेरोम एच पॉवेल और वाइस चेयर जॉन सी. विलियम्स शामिल रहे। वहीं, सदस्य स्टीफन आई. मिरान ने इस फैसले का विरोध करते हुए 0.25 प्रतिशत की दर कटौती का समर्थन किया।
बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स-निफ्टी लुढ़के, निवेशकों के उड़े होश
19 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मिडिल ईस्ट के तनाव का भरपूर असर भारतीय शेयर बाजार में देखने को मिल रहा है. ईरान ने अपने ऊपर हुए हमले को लेकर जवाबी कार्रवाई करते हुए कतर के गैस और तेल इंस्फास्ट्रक्चर पर हमला कर दिया. जिसका असर सिर्फ भारतीय बाजार ही नहीं, बल्कि ग्लोबल मार्केट पर भी दिखने लगा है. मिडिल ईस्ट की जंग ने शेयर बाजार को ताश के पत्तों की तरह ढहा दिया है. आज गुरुवार को बाजार खुलते ही निफ्टी और सेंसेक्स में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
भरभराकर गिरा शेयर बाजार
भारतीय शेयर बाजार बुधवार को तेजी के साथ बंद हुआ. निवेशकों के चेहरे पर काफी दिनों बाद खुशी देखने को मिली, लेकिन यह ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई. गुरुवार को बाजार खुलते ही भरभराकर शेयर बाजार नीचे गिर गया. सेंसेक्स करीब 1700 अंकों से ज्यादा और निफ्टी में 500 अंकों से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है. इतने बड़े भूचाल से कुछ ही मिनटों के अंदर निवेशकों के लाखों करोड़ रुपए डूब गए।
क्यों गिरा शेयर बाजार?
शेयर बाजार गिरने की मुख्य वजह मिडिल ईस्ट तनाव है. क्योंकि अभी तक इजरायल-अमेरिका और ईरान सिर्फ सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहे थे, लेकिन अब ऊर्जा के बुनियादी ढ़ांचों पर हमला करने लगे हैं, जिसका असर दुनियाभर में दिखने लगा है. कच्चे तेल की सप्लाई पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है. ईरान ने कतर के ऊर्जा ठिकानों पर हमला कर दिया, जिसकी वजह से तुरंत ही निर्यात पर रोक लगा दी गई. दुनियाभर के देशों को अब कच्चे तेल और गैस की कीमत बढ़ने की चिंता सता रही है. जिसका असर आज शेयर बाजार में भी देखने को मिला है।
एशियाई बाजार भी धड़ाम
मिडिल ईस्ट के देशों की जंग का असर सिर्फ भारतीय शेयर बाजार पर ही नहीं दिखाई दे रहा है, बल्कि दुनियाभर के देशों में देखने को मिल रहा है. एशियाई बाजारों की भी स्थिति काफी खराब रही है. जापान से लेकर हॉन्गकॉन्ग तक के बाजारों में गिरावट दर्ज की गई है. निवेशकों में जंग की वजह से डर का माहौल बना हुआ है. ऐसे में यह कह पाना मुश्किल होगा कि शेयर बाजार में तेजी कब तक लौटने की संभावना है. लेकिन अगर यह जंग और दिनों तक चला, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ सकता है।
एचडीएफसी बैंक में भूचाल: इस्तीफे के बाद शेयरों में बड़ी गिरावट
19 Mar, 2026 10:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। एचडीएफसी बैंक के अध्यक्ष अतनु चक्रवर्ती के नैतिक चिंताओं का हवाला देते हुए पद छोड़ने के बाद गुरुवार सुबह बैंक के शेयर करीब नौ फीसदी गिर गए। इस इस्तीफे के कारण देश के दूसरे सबसे बड़े ऋणदाता बैंक के बाजार पूंजीकरण में 65,176.48 करोड़ रुपये की भारी कमी आई। बैंक के शेयर अपने 52-सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गए, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई। मुंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर ब्लू-चिप स्टॉक 8.41 फीसदी गिरकर 772 रुपये पर आ गया, जो इसका 52-सप्ताह का निचला स्तर है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर भी शेयर 8.66 फीसदी लुढ़ककर 770 रुपये के 52-सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया। इस गिरावट के साथ कंपनी का बाजार पूंजीकरण 12,31,666.45 करोड़ रुपये रह गया। यह शेयर बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला रहा। सुबह के कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1740.34 अंक गिरकर 74,949.92 पर कारोबार कर रहा था, जबकि 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 514.85 अंक गिरकर 23,262.95 पर आ गया। यह पहली बार है कि एचडीएफसी बैंक के अंशकालिक अध्यक्ष ने कार्यकाल के बीच में पद छोड़ा है, जिससे बैंक के कामकाज को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। बैंक ने देर शाम एक फाइलिंग में बताया कि चक्रवर्ती ने 18 मार्च, 2026 को बैंक के अंशकालिक अध्यक्ष और स्वतंत्र निदेशक के पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। बैंक ने यह भी कहा कि चक्रवर्ती का इस्तीफा पत्र 17 मार्च, 2026 का था, लेकिन बैंक को यह 18 मार्च, 2026 को दोपहर 3:17 बजे (भारतीय मानक समय) प्राप्त हुआ।
क्या है इस्तीफे का कारण?
अतनु चक्रवर्ती ने अपने 17 मार्च के इस्तीफे पत्र में नैतिक चिंताओं का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा, "बैंक के भीतर पिछले दो वर्षों में मैंने कुछ ऐसी घटनाएं और प्रथाएं देखी हैं, जो मेरे व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं हैं। यही मेरे उपरोक्त निर्णय का आधार है।" शासन, नामांकन, पारिश्रमिक समिति के अध्यक्ष एच के भानवाला को संबोधित पत्र में चक्रवर्ती ने यह भी स्पष्ट किया। उन्होंने लिखा, "मेरे इस्तीफे के उपरोक्त कारणों के अलावा कोई अन्य महत्वपूर्ण कारण नहीं हैं।"
अंतरिम अध्यक्षता किन्हें सौंपी गई?
बैंक द्वारा किए गए एक आवेदन के आधार पर, भारतीय रिजर्व बैंक ने 18 मार्च, 2026 को केकी मिस्त्री को अंतरिम अंशकालिक अध्यक्ष नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। यह नियुक्ति 19 मार्च, 2026 से तीन महीने की अवधि के लिए प्रभावी होगी। मिस्त्री अब बैंक के कामकाज की देखरेख करेंगे। यह कदम बैंक में नेतृत्व की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
मिडिल ईस्ट टेंशन का असर: तेल की कीमतों में उछाल, फेड ने ब्याज दरें नहीं बदलीं
19 Mar, 2026 09:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम एशिया। में बढ़ते तनाव के बीच गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया। ब्रेंट क्रूड 4% से अधिक बढ़कर 112.17 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता गहरा गई है। तेल की कीमतों में यह तेजी इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बाद आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्राइल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड को निशाना बनाया, जिसके जवाब में ईरान ने कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर हमला किया। रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) उत्पादन केंद्रों में से एक है। कतर के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस पर ईरान की ओर से बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया, जिससे भारी नुकसान हुआ। पिछले 12 घंटों में इस अहम ऊर्जा केंद्र पर यह दूसरा हमला है।
फेड ने दूसरी बार ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने बुधवार को अपनी प्रमुख ब्याज दर को 3.5% से 3.75% के दायरे में यथावत रखने का फैसला किया। फेड ने कहा कि आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं, हालांकि महंगाई अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है और वैश्विक परिस्थितियों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। फेड की ओर से जारी बयान में कहा गया कि रोजगार वृद्धि सीमित रही है, जबकि बेरोजगारी दर में हाल के महीनों में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है। केंद्रीय बैंक ने अपने दोहरे लक्ष्य अधिकतम रोजगार और दीर्घकाल में 2% महंगाई को दोहराते हुए कहा कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए वह प्रतिबद्ध है।
लिपुलेख दर्रा खुलने से सीमा व्यापार में लौटेगी रौनक, स्थानीय कारोबारियों में उत्साह
