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8th Pay Commission: मिनिमम बेसिक पे 68,000 पार, फिटमेंट फैक्टर से मिल सकती है बढ़त
22 May, 2026 01:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की निगाहें इन दिनों आगामी 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि आयोग की विस्तृत रिपोर्ट अगले साल तक सामने आ सकती है। हालांकि, इस बीच 'फिटमेंट फैक्टर' को लेकर चर्चाओं का बाजार अभी से गर्म हो गया है। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन व भत्तों में होने वाली कुल बढ़ोतरी इसी फिटमेंट फैक्टर के गणित पर निर्भर करती है। इसके लागू होने से देश के एक करोड़ से अधिक परिवारों की आर्थिक स्थिति पर सीधा और सकारात्मक असर पड़ेगा।
एक करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा लाभ
8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद केंद्र सरकार के करीब 49 लाख सेवारत कर्मचारियों और लगभग 65 लाख पेंशनभोगियों के मूल वेतन (बेसिक पे) तथा पेंशन में बड़ा संशोधन किया जाएगा। यदि वेतन आयोग इस बार उच्च फिटमेंट फैक्टर की अनुशंसा करता है, तो टेक-होम सैलरी में बंपर इजाफा देखने को मिलेगा। इसके विपरीत, यदि पिछले यानी 7वें वेतन आयोग की बात करें, तो सरकार ने इसे 2.57 गुना तय किया था, जिसके कारण तत्कालीन न्यूनतम मूल वेतन 7,000 रुपये से बढ़कर सीधे 18,000 रुपये प्रति माह हो गया था।
3.83 गुना फिटमेंट फैक्टर की मांग, ₹18,000 से बढ़कर ₹69,000 हो सकती है बेसिक पे
वर्तमान में इस बात को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बार का फिटमेंट फैक्टर कितना तय होगा। कर्मचारी यूनियनों की शीर्ष संस्था 'नेशनल काउंसिल ऑफ द ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी' (NC-JCM) ने सरकार के समक्ष 3.833 गुना फिटमेंट फैक्टर रखने की जोरदार मांग उठाई है। यदि कर्मचारी संगठनों की इस मांग को हुबहू स्वीकार कर लिया जाता है, तो केंद्रीय कर्मचारियों का मौजूदा न्यूनतम बेसिक पे 18,000 रुपये से बढ़कर सीधे 69,000 रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच जाएगा।
आर्थिक विश्लेषकों का अनुमान: ₹30,000 से ₹52,000 के बीच रह सकता है न्यूनतम वेतन
दूसरी ओर, वित्तीय मामलों के जानकारों और एक्सपर्ट्स का गणित कर्मचारी संगठनों की मांग से थोड़ा अलग है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई के मौजूदा आंकड़ों (जनरल इनफ्लेशन) को आधार बनाने पर फिटमेंट फैक्टर 2.28 निर्धारित किया जा सकता है, जिससे न्यूनतम मूल वेतन 41,000 रुपये हो जाएगा। वहीं, कुछ अन्य विश्लेषकों का अनुमान है कि यह आंकड़ा 1.83 से 2.46 के दायरे में रह सकता है। इस परिस्थिति में न्यूनतम बेसिक सैलरी 30,000 रुपये से लेकर 52,000 रुपये के बीच तय होने की उम्मीद है।
वैश्विक अनिश्चितता और देश के खजाने की स्थिति देखकर कैबिनेट लेगी अंतिम फैसला
फिटमेंट फैक्टर की गणना का तरीका बेहद सीधा है—कर्मचारी के वर्तमान मूल वेतन को तय किए गए फिटमेंट फैक्टर से गुणा किया जाता है, जिससे नया संशोधित बेसिक पे निकल आता है। इसी आधार पर कर्मचारियों के अन्य भत्ते, इंक्रीमेंट और अंतिम पेंशन का निर्धारण होता है। बहरहाल, वेतन आयोग अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने के बाद केंद्रीय कैबिनेट के पाले में गेंद डालेगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर मध्य-पूर्व के भू-राजनीतिक तनावों के कारण पैदा हुए वित्तीय दबावों को देखते हुए केंद्र सरकार अपने राजकोषीय घाटे और खजाने की सेहत का पूरा आकलन करने के बाद ही इस पर अंतिम मुहर लगाएगी।
Defense Stock Alert: सूर्यास्त्र रॉकेट टेस्ट ने शेयर को दिया जोरदार बूस्ट
22 May, 2026 12:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुणे। रक्षा क्षेत्र (डिफेंस) के कलपुर्जे बनाने वाली प्रमुख घरेलू कंपनी नाइबे (Nibe) के शेयरों में शुक्रवार को शुरुआती कारोबार के दौरान जबरदस्त तेजी देखी गई। कंपनी के स्टॉक आज इंट्राडे में करीब 11 प्रतिशत तक मजबूत हो गए। इस बूम के पीछे की मुख्य वजह ओडिशा के तट पर कंपनी द्वारा किए गए 'सूर्यास्त्र' रॉकेटों के सफल परीक्षण को माना जा रहा है। कंपनी ने शेयर बाजार को सूचित किया है कि उसने 18 और 19 मई को दो अलग-अलग मारक क्षमता वाले रॉकेटों का सफलतापूर्वक परीक्षण पूरा कर लिया है, जिसके बाद से पिछले तीन सत्रों में यह शेयर लगभग 27 फीसदी चढ़ चुका है।
ओडिशा के चांदीपुर में हुआ परीक्षण, 300 किमी तक सटीक निशाना
कंपनी से प्राप्त विवरण के अनुसार, 'सूर्यास्त्र' सीरीज के तहत 'एक्सट्रा' (EXTRA) और 'प्रिडेटर हॉक' रॉकेटों का फायरिंग टेस्ट ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) में आयोजित किया गया। इन रॉकेटों की मारक क्षमता क्रमशः 150 किलोमीटर और 300 किलोमीटर तक की है। परीक्षण के दौरान दोनों ही मिसाइल प्रणालियों ने समुद्र तट पर स्थित अपने निर्धारित लक्ष्यों को बेहद सटीकता के साथ ध्वस्त किया। इस कामयाबी ने सूर्यास्त्र प्रणाली की लंबी दूरी तक अचूक प्रहार करने की ताकत को दुनिया के सामने साबित कर दिया है।
दुनिया के सबसे सटीक आर्टिलरी सिस्टम में शुमार हुआ 'सूर्यास्त्र'
इस परीक्षण की सबसे बड़ी खासियत इसकी सटीकता रही। रॉकेटों ने केवल 1.5 मीटर और 2 मीटर का 'सर्कुलर एरर प्रोबेबल' (CEP) दर्ज किया है। रक्षा विज्ञान में CEP किसी भी मिसाइल या रॉकेट की मारक सटीकता को मापने का सबसे विश्वसनीय पैमाना माना जाता है। 300 किलोमीटर जैसी लंबी दूरी पर महज 2 मीटर से कम का डिफ़्लेक्शन (विचलन) होना 'सूर्यास्त्र' को दुनिया के सबसे बेहतरीन और बेहद सटीक लंबी दूरी के रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम की कतार में खड़ा करता है। इसके जरिए सेना न्यूनतम नुकसान के साथ दुश्मन के रणनीतिक ठिकानों को तबाह कर सकेगी।
पूरी तरह मेड इन इंडिया: डीप-स्ट्राइक ऑपरेशन्स के लिए विशेष डिजाइन
'सूर्यास्त्र' को भारत के पहले पूर्णतः स्वदेशी, यूनिवर्सल और मल्टी-कैलिबर रॉकेट लॉन्चर सिस्टम के तौर पर विकसित किया गया है। इसे विशेष रूप से जमीन से जमीन पर मार करने और दुश्मन के इलाके में काफी अंदर तक घुसकर हमला करने (Deep-Strike Operations) के लिए तैयार किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह आधुनिक प्रणाली हमारी पारंपरिक फील्ड आर्टिलरी और भारी भरकम बैलिस्टिक मिसाइल प्लेटफॉर्म्स के बीच के अंतर को पाटने का काम करेगी, जिससे भारतीय सशस्त्र बलों को एक गतिशील, तीव्र और घातक विकल्प मिलेगा।
NSE पर लिस्टेड है कंपनी, जनवरी में सेना से मिला था बड़ा कॉन्ट्रैक्ट
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर लिस्टेड Nibe कंपनी का भारतीय सेना के साथ व्यावसायिक तालमेल लगातार मजबूत हो रहा है। इससे पहले, इसी साल जनवरी महीने में रक्षा मंत्रालय की आपातकालीन खरीद प्रक्रिया के तहत कंपनी को भारतीय सेना की ओर से 'सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर' और संबंधित रॉकेटों की आपूर्ति के लिए एक बड़ा परचेज ऑर्डर मिला था। सेना से मिले इसी भरोसे और अब परीक्षणों की सफलता के कारण निवेशक इस डिफेंस स्टॉक पर जमकर दांव लगा रहे हैं।
बाजार में रैली, सेंसेक्स 540 अंक तक उछला; निवेशकों को मिले 5 अहम संकेत
22 May, 2026 11:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। घरेलू शेयर बाजार में पिछले सत्र की मंदी के बाद शुक्रवार (22 मई) को शानदार रिकवरी देखने को मिली है। शुरुआती कारोबार में ही चौतरफा खरीदारी के चलते बंबई स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स करीब 540 अंकों की छलांग लगाकर 75,723.31 के उच्च स्तर पर पहुंच गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 145 अंकों की बढ़त दर्ज करते हुए 23,800.15 के स्तर को पार कर गया। बाजार के जानकारों के मुताबिक, वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों, विदेशी निवेशकों की वापसी और रुपये में आई मजबूती ने घरेलू बाजार को बूस्ट देने का काम किया है।
ग्लोबल मार्केट में तेजी और कूटनीतिक मोर्चे से राहत के संकेत
भारतीय शेयर बाजार में आई इस तेजी के पीछे वैश्विक परिस्थितियां बेहद अनुकूल रही हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के एक बयान से निवेशकों को बड़ी राहत मिली है, जिसमें उन्होंने संकेत दिया है कि ईरान से जुड़ी भू-राजनीतिक चिंताओं को दूर करने के लिए कूटनीतिक बातचीत सही दिशा में बढ़ रही है। इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता कम हुई है। अमेरिकी बाजारों की मजबूती को देखते हुए एशियाई बाजारों में भी बूम है; जहां जापान का निक्केई 2.6% और ताइवान का सूचकांक 1.7% की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया हुआ मजबूत
घरेलू मुद्रा (रुपये) में आ रहा सुधार भी शेयर बाजार के लिए टॉनिक साबित हुआ है। शुक्रवार को शुरुआती कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया 18 पैसे मजबूत होकर 96.18 के स्तर पर आ गया। मध्य-पूर्व (मिडल-ईस्ट) के तनाव में कमी आने की उम्मीदों और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा मुद्रा बाजार को संभालने के लिए उठाए जा रहे कदमों की खबरों से रुपये को लगातार दूसरे दिन सपोर्ट मिला है। इससे पिछले सत्र (गुरुवार) को भी रुपया 50 पैसे सुधरकर 96.36 पर बंद हुआ था।
बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में जमकर हुई लिवाली
गुरुवार को बाजार में आई मामूली गिरावट (सेंसेक्स 135 अंक और निफ्टी 4 अंक टूटकर बंद हुए थे) के बाद शुक्रवार को बैंकिंग सेक्टर के शेयरों ने बाजार की कमान संभाल ली। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में 1.4 प्रतिशत की जोरदार तेजी देखी जा रही है, जबकि सरकारी बैंकों के इंडेक्स (पीएसयू बैंक) में भी 0.30 प्रतिशत का सुधार दर्ज किया गया है। प्रमुख हैवीवेट बैंकिंग शेयरों में आई इस खरीदारी ने इंडेक्स को ऊपर ले जाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई।
विदेशी निवेशकों (FIIs) की बाजार में वापसी
भारतीय बाजारों के प्रति विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का भरोसा एक बार फिर लौटता हुआ दिख रहा है। शेयर बाजार से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले कारोबारी सत्र (गुरुवार) को विदेशी निवेशक शुद्ध खरीदार (नेट बायर्स) रहे। उन्होंने भारतीय शेयर बाजार में 1,891.21 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की। विदेशी फंड्स के इस सकारात्मक रुख ने स्थानीय निवेशकों के हौसले को और मजबूत कर दिया है।
ब्याज दर बढ़ाने की योजना फिलहाल नहीं, RBI की जून मीट से पहले रिपोर्ट
22 May, 2026 11:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और मध्य-पूर्व (मिडल-ईस्ट) के भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारतीय मुद्रा (रुपये) पर लगातार दबाव बना हुआ है। इसके बावजूद, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) नीतिगत ब्याज दरों में समय से पहले या अचानक (ऑफ-साइकिल) बढ़ोतरी करने पर कोई विचार नहीं कर रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय बैंक रुपये की गिरावट को थामने के लिए ब्याज दरों को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के पक्ष में नहीं है। आरबीआई का पूरा ध्यान इस समय देश की आर्थिक वृद्धि (ग्रोथ) और महंगाई के बीच एक बेहतर संतुलन बनाने पर केंद्रित है।
महंगाई और आर्थिक विकास में संतुलन बनाने की नीति पर कायम
आरबीआई के आंतरिक सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय बैंक के भीतर फिलहाल ऐसा कोई माहौल या संकेत नहीं हैं जो यह दर्शाए कि वह मुद्रा बाजार की अस्थिरता को रोकने के लिए अपनी मौद्रिक नीतियों में अचानक कोई कड़ा बदलाव करेगा। रिजर्व बैंक अपने 'लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढांचे' (फ्लेक्सिबल इन्फ्लेशन-टारगेटिंग फ्रेमवर्क) पर मजबूती से कायम है। इस नीति के तहत कोई भी फैसला लेते समय रिटेल महंगाई को काबू में रखने के साथ-साथ देश की आर्थिक तरक्की की रफ्तार को बनाए रखने पर समान रूप से जोर दिया जाता है।
नियंत्रण के भीतर है खुदरा महंगाई दर
राहत की बात यह है कि देश की खुदरा (रिटेल) महंगाई दर अभी भी रिजर्व बैंक द्वारा तय की गई सुरक्षित सीमा के भीतर बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल महीने में खुदरा महंगाई दर 3.48 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इसके अलावा, वित्तीय वर्ष 2027 के लिए आरबीआई ने महंगाई का जो 4.6 प्रतिशत का अनुमान लगाया है, वह भी तय दायरे के भीतर ही आता है। ऐसे में केंद्रीय बैंक को ब्याज दरों में आपातकालीन बदलाव करने की कोई जल्दबाजी नहीं है।
कच्चा तेल $95 प्रति बैरल होने पर भी 6.7% की रफ्तार से बढ़ेगी इकोनॉमी
सूत्रों ने केंद्रीय बैंक की मॉनीटरी पॉलिसी रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि आने वाले वित्तीय वर्ष 2028 में अनुकूल आधार प्रभाव (बेस इफेक्ट) के चलते खुदरा महंगाई में और कमी देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट के अनुमानों के मुताबिक, यदि आने वाले समय में कच्चे तेल की औसत कीमत बढ़कर 95 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच जाती है, तब भी देश की औसत खुदरा महंगाई 5 प्रतिशत के आसपास ही रहेगी। वहीं, भारत की आर्थिक विकास दर (ग्रोथ रेट) के 6.7 प्रतिशत के मजबूत स्तर पर बने रहने की पूरी संभावना है।
5 जून को होने वाली नीतिगत समीक्षा पर टिकीं बाजार की निगाहें
हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी स्पष्ट किया था कि केंद्रीय बैंक अपनी नीतियां तैयार करते समय आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई साइड) में आने वाले अस्थायी व्यवधानों के शुरुआती असर को नजरअंदाज करेगा। हालांकि, इससे पहले कुछ विदेशी रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि आरबीआई रुपये को संभालने के लिए ब्याज दर बढ़ाने और डॉलर जुटाने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है, लेकिन वर्तमान रुख इन दावों के विपरीत है। अब सभी की नजरें 5 जून को होने वाली आरबीआई की अगली मौद्रिक नीति समीक्षा पर टिकी हैं। ज्ञात हो कि आरबीआई ने आखिरी बार मई 2022 में तय समय से हटकर (ऑफ-साइकिल) ब्याज दरें बढ़ाई थीं।
ITR फाइलिंग की डेडलाइन: 31 जुलाई या मिलेगा अतिरिक्त समय?
21 May, 2026 02:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने का सिलसिला शुरू हो चुका है। आयकर विभाग ने ITR-1 और ITR-4 फॉर्म्स को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में जारी कर दिया है। अब नौकरीपेशा लोग, पेंशनर्स, फ्रीलांसर्स और छोटे व्यापारी ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर अपना रिटर्न आसानी से दाखिल कर सकते हैं। भारी जुर्माने से बचने के लिए समय पर रिटर्न भरना जरूरी है, हालांकि अलग-अलग कैटेगरी के टैक्सपेयर्स के लिए आखिरी तारीखें अलग-अलग तय की गई हैं।
1. 31 जुलाई 2026: नौकरीपेशा और छोटे कारोबारियों के लिए आखिरी मौका
अगर आप सैलरीड कर्मचारी हैं, पेंशनर हैं या फिर हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली (HUF) के अंतर्गत आते हैं और आपके खातों का ऑडिट जरूरी नहीं है, तो आपके लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई, 2026 है।
इसके अलावा, 'एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स' (AOPs), 'बॉडी ऑफ इंडिविजुअल्स' (BOIs) और प्रिज्म्प्टिव टैक्सेशन स्कीम (सेक्शन 44AD, 44ADA या 44AE) का लाभ लेने वाले फ्रीलांसरों व छोटे व्यापारियों को भी इसी तारीख तक अपना आईटीआर जमा करना होगा।
2. 31 अक्टूबर और 30 नवंबर: ऑडिट व कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण तारीखें
31 अक्टूबर 2026: यह डेडलाइन उन कंपनियों, फर्म्स और बिजनेसेज के लिए है, जिनके खातों का आयकर अधिनियम के तहत ऑडिट (Audit) होना अनिवार्य है।
30 नवंबर 2026: वैसी कॉर्पोरेट कंपनियां या एंटिटीज, जिन्हें घरेलू या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष लेन-देन के लिए ट्रांसफर प्राइसिंग रिपोर्ट जमा करनी होती है, वे 30 नवंबर तक अपना रिटर्न फाइल कर सकती हैं।
3. डेडलाइन चूकने पर लगेगा ₹5,000 तक का जुर्माना और ब्याज
अगर आप तय समय सीमा के भीतर रिटर्न नहीं भर पाते हैं, तो सेक्शन 234F के तहत लेट फीस देनी होगी।
₹5 लाख से अधिक आय पर: अधिकतम ₹5,000 का जुर्माना।
₹5 लाख से कम आय पर: अधिकतम ₹1,000 की लेट फीस।
अतिरिक्त नुकसान: लेट फीस के साथ-साथ धारा 234A के तहत बकाया टैक्स पर 1% प्रति महीना की दर से ब्याज भी लगेगा। साथ ही, देरी से फाइल करने पर टैक्स रिफंड अटक सकता है और आप अपने कुछ बिजनेस घाटों (Losses) को अगले साल के लिए कैरी फॉरवर्ड (आगे ट्रांसफर) नहीं कर पाएंगे।
4. क्या होते हैं बिलेटेड (Belated) और अपडेटेड (U-ITR) रिटर्न?
बिलेटेड और रिवाइज्ड रिटर्न: यदि आप 31 जुलाई की डेडलाइन चूक जाते हैं, तो असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए 31 मार्च, 2027 तक बिलेटेड (देरी से) या रिवाइज्ड (संशोधित) रिटर्न भर सकते हैं।
अपडेटेड आईटीआर (U-ITR): अगर रिटर्न में कोई बड़ी गलती रह गई हो या किसी कमाई की जानकारी छूट गई हो, तो उसे सुधारने के लिए अपडेटेड रिटर्न भरा जाता है। नियम के अनुसार, टैक्सपेयर्स संबंधित असेसमेंट ईयर के खत्म होने के बाद 48 महीनों के भीतर अतिरिक्त टैक्स और धारा 139(8A) की शर्तों के साथ U-ITR दाखिल कर सकते हैं।
Sansera Engineering का शेयर उड़ा, Q4 में मुनाफा दोगुना से अधिक
21 May, 2026 01:57 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। ऑटो कंपोनेंट्स और इक्विपमेंट बनाने वाली दिग्गज कंपनी संसेरा इंजीनियरिंग लिमिटेड के निवेशकों के लिए आज गुरुवार (21 मई) का दिन बेहद मुनाफेमंद साबित हो रहा है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर कंपनी के शेयर की कीमत पिछले बंद भाव के मुकाबले 15.68 प्रतिशत की भारी बढ़त के साथ 2,875 रुपये के स्तर पर पहुंच गई। यह शेयर का बीएसई पर 52 सप्ताह का नया उच्चतम स्तर (All-Time High) भी है। दरअसल, कंपनी द्वारा घोषित किए गए चौथी तिमाही के धमाकेदार वित्तीय नतीजों के चलते बाजार में इस स्टॉक को लेकर भारी खरीदारी देखी जा रही है।
चौथी तिमाही में दोगुना हुआ मुनाफा, रेवेन्यू भी 998 करोड़ के पार
जनवरी-मार्च 2026 तिमाही के दौरान संसेरा इंजीनियरिंग ने वित्तीय मोर्चे पर शानदार प्रदर्शन किया है। इस अवधि में कंपनी का एकीकृत शुद्ध मुनाफा (Consolidated Net Profit) करीब 105 फीसदी की छलांग लगाकर 121.41 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 59.27 करोड़ रुपये था। वहीं, कंपनी का परिचालन राजस्व (Revenue from Operations) भी लगभग 28 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी के साथ 998.74 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो मार्च 2025 तिमाही में 781.65 करोड़ रुपये था। पूरे वित्त वर्ष 2026 की बात करें तो कंपनी ने 3,24.08 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा और 3,497.91 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल किया है।
शेयरधारकों की मौज; कंपनी देगी ₹4 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड
बेहतरीन सालाना नतीजों से उत्साहित संसेरा इंजीनियरिंग के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने अपने निवेशकों को लाभांश का तोहफा देने का ऐलान किया है। बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 4 रुपये प्रति इक्विटी शेयर के फाइनल डिविडेंड (लाभांश) की सिफारिश की है। इस घोषणा पर आगामी वार्षिक आम बैठक (AGM) में शेयरधारकों की अंतिम मंजूरी ली जाएगी। गौरतलब है कि कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष (FY25) में अपने निवेशकों को 3.25 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड दिया था, जिसके मुकाबले इस बार ज्यादा मुनाफे का फायदा सीधे निवेशकों को ट्रांसफर किया गया है।
मार्केट कैप 17,300 करोड़ के पार; 3 साल में निवेशकों का पैसा किया ढाई गुना
शानदार तेजी के बदौलत संसेरा इंजीनियरिंग का कुल बाजार पूंजीकरण (Market Cap) बढ़कर अब 17,300 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। 2 रुपये की फेस वैल्यू वाले इस शेयर ने लंबी और छोटी दोनों अवधियों में निवेशकों को मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले 6 महीनों में यह स्टॉक 74 प्रतिशत मजबूत हुआ है, जबकि पिछले एक साल में इसने 127 प्रतिशत की दमदार ग्रोथ दिखाई है। वहीं, जिन निवेशकों ने इस शेयर को 3 साल से अपने पोर्टफोलियो में बनाए रखा है, उन्हें 260 प्रतिशत का बंपर रिटर्न मिला है।
प्रमोटर होल्डिंग और इंडेक्स प्रोफाइल
मार्च 2026 के अंत तक के आधिकारिक शेयरहोल्डिंग पैटर्न के अनुसार, संसेरा इंजीनियरिंग में प्रमोटर्स के पास 30.10 प्रतिशत की हिस्सेदारी सुरक्षित है। वर्तमान में यह शेयर बीएसई 1000 (BSE 1000) इंडेक्स का एक मजबूत हिस्सा बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ऑटो सेक्टर में आ रही तेजी और कंपनी के शानदार मार्जिन को देखते हुए आने वाले दिनों में भी इस स्टॉक में सकारात्मक हलचल बनी रह सकती है।
Ola Electric: शेयर 6% नीचे, निवेशकों में चिंता बढ़ी
21 May, 2026 01:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। देश की दिग्गज इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर निर्माता कंपनी ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड के शेयरों में आज गुरुवार (21 मई) को भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर कंपनी का स्टॉक शुरुआती कारोबार में करीब 6 प्रतिशत टूटकर 34.83 रुपये के निचले स्तर पर आ गया। दरअसल, कंपनी ने एक दिन पहले ही अपने चौथी तिमाही के वित्तीय नतीजे घोषित किए थे, जिसमें सालाना आधार पर घाटे में तो बड़ी कमी आई है, लेकिन परिचालन राजस्व (Revenue) में आई भारी गिरावट के चलते बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया है।
चौथी तिमाही में घाटा घटकर हुआ 500 करोड़, मगर रेवेन्यू 91% लुढ़का
जनवरी-मार्च 2026 तिमाही के दौरान ओला इलेक्ट्रिक के वित्तीय संकेतकों में मिला-जुला असर देखने को मिला। कंपनी का शुद्ध समेकित घाटा (Consolidated Net Profit) सालाना आधार पर 42.5 फीसदी कम होकर 500 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल की समान अवधि में 870 करोड़ रुपये था। हालांकि, इस दौरान ऑपरेशंस से मिलने वाला कंसोलिडेटेड रेवेन्यू लगभग 91 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ महज 56.6 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो मार्च 2025 तिमाही में 611 करोड़ रुपये था। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कंपनी का कुल शुद्ध घाटा 1,833 करोड़ रुपये और रेवेन्यू 2,253 करोड़ रुपये रहा है।
सालाना 1.73 लाख से अधिक ई-स्कूटर्स की डिलीवरी, अगली तिमाही में बाउंस बैक की उम्मीद
वाहन डिलीवरी के मोर्चे पर कंपनी ने मजबूत पकड़ बनाए रखी है। ओला इलेक्ट्रिक ने जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में कुल 20,256 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स ग्राहकों को सौंपे। वहीं, पूरे वित्त वर्ष 2026 में कंपनी ने रिकॉर्ड 1,73,794 यूनिट्स की डिलीवरी पूरी की। भविष्य के अनुमानों को लेकर कंपनी काफी सकारात्मक है; मैनेजमेंट को उम्मीद है कि आगामी अप्रैल-जून 2026 तिमाही में उसका कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सुधरकर 500-550 करोड़ रुपये के बीच पहुंच जाएगा और इस दौरान करीब 40,000 से 45,000 यूनिट्स के नए ऑर्डर्स मिलने की संभावना है।
3 महीने में 33% रिटर्न देने वाले स्टॉक पर ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म्स ने जताई चिंता
अगस्त 2024 में 6,145.56 करोड़ रुपये के भारी-भरकम आईपीओ (IPO) के साथ लिस्ट होने वाली ओला इलेक्ट्रिक का मार्केट कैप फिलहाल 15,500 करोड़ रुपये से अधिक है। पिछले 3 महीनों में इस शेयर ने निवेशकों को 33 फीसदी का दमदार रिटर्न दिया है, लेकिन ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस इसके भविष्य को लेकर अभी भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं:
Citi की 'सेल' रेटिंग: ब्रोकरेज फर्म 'सिटी' ने टारगेट प्राइस को 22 रुपये से बढ़ाकर 26 रुपये तो किया है, लेकिन इस पर अपनी "सेल" (बेचने की) रेटिंग बरकरार रखी है। उनका मानना है कि कंपनी के मार्जिन में सुधार तो है, पर मुनाफे के लिए जरूरी वॉल्यूम ग्रोथ की अब भी कमी है।
HSBC का रुख: एचएसबीसी ने इस स्टॉक का टारगेट प्राइस घटाकर 33 रुपये प्रति शेयर कर दिया है और अपनी रेटिंग 'रिड्यूस' (हिस्सेदारी घटाने) की रखी है।
Emkay Global: एमके ग्लोबल ने शेयर के लिए अपना टारगेट प्राइस 20 रुपये से बढ़ाकर 25 रुपये प्रति शेयर तय किया है।
प्रमोटर होल्डिंग और 52 हफ्तों का उतार-चढ़ाव
मार्च 2026 के अंत तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ओला इलेक्ट्रिक में प्रमोटर्स के पास 34.59 प्रतिशत की हिस्सेदारी बनी हुई है। बीएसई 500 इंडेक्स का हिस्सा बन चुके इस शेयर का 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई लेवल 71.24 रुपये रहा है, जबकि इसका एडजस्टेड लो लेवल 21.21 रुपये प्रति शेयर है। बाजार के जानकारों का मानना है कि अगली तिमाही के रेवेन्यू और ऑर्डर बुक के वास्तविक आंकड़ों के बाद ही इस शेयर की अगली दिशा तय होगी।
Q4 नतीजों के असर से Jubilant Foodworks के शेयर में 8% की गिरावट
21 May, 2026 12:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। डोमिनोज पिज्जा और डंकिन डोनट्स जैसी दिग्गज फूड चेन्स का संचालन करने वाली कंपनी जुबिलेंट फूडवर्क्स लिमिटेड के शेयरों में आज गुरुवार (21 मई) को शुरुआती कारोबार के दौरान भारी गिरावट देखी गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर कंपनी का स्टॉक करीब 8 प्रतिशत लुढ़ककर 434.65 रुपये के निचले स्तर पर आ गया। दरअसल, कंपनी द्वारा चौथी तिमाही के वित्तीय परिणाम घोषित किए जाने के बाद वैश्विक ब्रोकरेज फर्म एचएसबीसी (HSBC) और जेफरीज (Jefferies) द्वारा इसकी रेटिंग और टारगेट प्राइस में की गई कटौती के चलते निवेशकों ने बिकवाली का रुख अपना लिया है।
मुनाफे में 66% का बंपर उछाल, रेवेन्यू भी 2,499 करोड़ के पार
अगर वित्तीय मोर्चे पर बात करें तो जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में जुबिलेंट फूडवर्क्स का प्रदर्शन शानदार रहा है। कंपनी का एकीकृत शुद्ध मुनाफा (Consolidated Net Profit) सालाना आधार पर 66.2 फीसदी बढ़कर 79.79 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 48 करोड़ रुपये था। वहीं, इस अवधि में परिचालन राजस्व (Revenue from Operations) भी मार्च 2025 के 2,095.02 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,499.46 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। पूरे वित्त वर्ष 2026 की बात करें तो कंपनी का कुल मुनाफा 444.24 करोड़ रुपये और रेवेन्यू 9,512.51 करोड़ रुपये रहा है।
शेयरधारकों के लिए ₹1.2 प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान
शानदार सालाना नतीजों के बीच जुबिलेंट फूडवर्क्स के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने अपने निवेशकों को राहत देते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1.2 रुपये प्रति इक्विटी शेयर के लाभांश (Dividend) की सिफारिश की है। इस घोषणा पर आगामी वार्षिक आम बैठक (AGM) में शेयरधारकों की अंतिम मंजूरी ली जाएगी, जिसके बाद अगले 30 दिनों के भीतर पात्र निवेशकों को इसका भुगतान कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि पिछले वित्त वर्ष (FY25) में भी कंपनी ने इतना ही डिविडेंड दिया था।
ब्रोकरेज फर्म्स ने क्यों घटाया टारगेट? ग्रोथ बनाम मार्जिन की जंग
बाजार के जानकारों और दिग्गज ब्रोकरेज हाउसेज ने कंपनी के भविष्य और मार्जिन को लेकर कुछ चिंताएं जताई हैं:
HSBC की 'होल्ड' रेटिंग: एचएसबीसी ने स्टॉक को "बाय" से डाउनग्रेड कर "होल्ड" कैटेगरी में डाल दिया है और टारगेट प्राइस 630 रुपये से घटाकर 530 रुपये कर दिया है। उनका मानना है कि समान-स्टोर (Like-for-Like) बिक्री में मामूली सुधार तो है, लेकिन यह मुख्य रूप से प्रमोशनल ऑफर्स के कारण है। बढ़ती महंगाई के चलते कंपनी के सामने ग्रोथ और मार्जिन में से किसी एक को चुनने की चुनौती है।
Jefferies ने 30% घटाया टारगेट: जेफरीज ने हालांकि "बाय" रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन टारगेट प्राइस को 850 रुपये से सीधे घटाकर 600 रुपये कर दिया है। उनका कहना है कि मैनेजमेंट की सतर्क टिप्पणी दर्शाती है कि पूर्ण रिकवरी में अभी थोड़ा वक्त लगेगा।
JPMorgan का रुख: जेपीमॉर्गन ने स्टॉक को 474 रुपये के लक्ष्य के साथ "न्यूट्रल" रेटिंग दी है।
एनालिस्ट्स की राय में बंटा बाजार
वर्तमान में जुबिलेंट फूडवर्क्स के स्टॉक को कवर करने वाले कुल 30 बाजार विश्लेषकों (Analysts) में से 20 विशेषज्ञ अब भी इस शेयर में खरीदारी (Buy) की सलाह दे रहे हैं। वहीं, 6 विशेषज्ञों ने इसे होल्ड (बनाए रखने) करने और 4 ने इसे तुरंत बेचने (Sell) की राय दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशियाई देशों (भारत, नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश) में क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) सेगमेंट में मजबूत पकड़ होने के बावजूद, अल्पावधि में बढ़ती लागत कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन की असली परीक्षा लेगी।
खपत की धीमी रफ्तार, FMCG मांग सुस्त होने से निवेशकों में चिंता
21 May, 2026 11:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी मजबूती इसके कारखाने या औद्योगिक उत्पादन नहीं, बल्कि इसका विशाल घरेलू बाजार है। ग्रामीण इलाकों की छोटी किराना दुकानों से लेकर महानगरों के बड़े शॉपिंग मॉल्स तक आम जनता द्वारा किया जाने वाला खर्च ही देश की आर्थिक प्रगति की असली धड़कन है। यही कारण है कि देश के भीतर खरीदारी (उपभोग) में आने वाली मामूली सुस्ती भी अर्थव्यवस्था की रफ्तार को धीमा कर सकती है। वर्तमान में भारत पश्चिम एशिया के संकट, महंगे कच्चे तेल, विदेशी निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार पैसे निकालने, डॉलर के मुकाबले रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिरने और बढ़ते आयात बिल जैसी कई वैश्विक चुनौतियों से मुकाबला कर रहा है।
जीडीपी में निजी खर्च की हिस्सेदारी 57% से ज्यादा, उपभोग ही असली इंजन
भारत की आर्थिक वृद्धि का सबसे बड़ा सहारा देश के नागरिकों का घरेलू खर्च है। भारत की कुल जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में निजी उपभोग की हिस्सेदारी लगभग 57 प्रतिशत है। सरल शब्दों में कहें तो आम जनता की जेब, उनकी खरीदारी की क्षमता और बाजार पर उनका भरोसा ही देश के विकास का पहिया चलाता है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2025 की तिमाही के दौरान निजी उपभोग का यह आंकड़ा बढ़कर जीडीपी के 57.5 फीसदी के स्तर तक पहुंच गया है।
वैश्विक और घरेलू रेटिंग एजेंसियों ने घटाया भारत की ग्रोथ का अनुमान
बाजार में मांग सुस्त होने की आशंका के बीच कई प्रमुख वैश्विक संस्थाओं ने भारत की आगामी विकास दर (Growth Rate) के अनुमानों में कटौती की है, जिसने नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है:
संयुक्त राष्ट्र (UN): साल 2026 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान को 6.6% से घटाकर 6.4% कर दिया है।
मूडीज रेटिंग्स (Moody's): इसने साल 2026 के लिए भारत की वृद्धि दर का अनुमान 6.8% से सीधे कम करके 6.0% कर दिया है।
इंडिया रेटिंग्स: पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव और अल-नीनो के खतरे को देखते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर 6.7% रहने का अनुमान लगाया है। हालांकि, इन झटकों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
एफएमसीजी सेक्टर में सुस्ती के संकेत, ग्राहकों ने बदला खरीदारी का तरीका
रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजें जैसे साबुन, तेल, बिस्कुट, शैंपू और पैकेज्ड फूड (FMCG) देश में उपभोग की रफ्तार का सबसे सटीक पैमाना हैं। 'वर्ल्डपैनल बाय न्यूमरेटर' की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी-मार्च तिमाही में एफएमसीजी की वैल्यू ग्रोथ 13.1% और वॉल्यूम ग्रोथ (बिक्री की मात्रा) 5.4% रही। अनुमान है कि यदि मानसून सामान्य रहा और कच्चा तेल स्थिर रहा, तो साल 2026 में वॉल्यूम ग्रोथ 5% के आसपास रहेगी, अन्यथा यह सिमटकर 3-4% तक आ सकती है। महंगाई के इस दौर में ग्राहक गैर-जरूरी खर्चों को टाल रहे हैं और महंगे ब्रांड्स को छोड़कर सस्ते विकल्पों या बड़े डिस्काउंट वाले 'वैल्यू पैक' की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं।
कमजोर मानसून और महंगा क्रूड ऑयल अर्थव्यवस्था के लिए दोहरी चुनौती
आने वाले समय में भारतीय बाजार की असल परीक्षा मौसम और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर टिकी है। अमेरिकी मौसम एजेंसी (NOAA) के अनुसार, मई-जुलाई 2026 में 'अल नीनो' के उभरने की 82% आशंका है, जो सर्दियों तक बढ़कर 96% हो सकती है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के शुरुआती अनुमान भी कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून की ओर इशारा कर रहे हैं। कम बारिश से कृषि उत्पादन, ग्रामीण मजदूरी और ग्रामीण मांग सीधे प्रभावित होगी। दूसरी तरफ, महंगा कच्चा तेल माल ढुलाई (ट्रांसपोर्ट) और पैकेजिंग की लागत बढ़ाकर महंगाई को और भड़काएगा। यदि उपभोग की यह रफ्तार थमी, तो इसका असर केवल एफएमसीजी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऑटोमोबाइल, सीमेंट, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, जीएसटी कलेक्शन और रोजगार सृजन पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा।
Sensex में 600 प्वाइंट्स की तेजी, Nifty ने पार किया 23850
21 May, 2026 10:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों के चलते आज भारतीय शेयर बाजार ने शानदार रफ्तार पकड़ी है। अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने की सकारात्मक खबरों ने दुनिया भर के निवेशकों में नया जोश भर दिया है। ग्लोबल मार्केट से मिले मजबूत संकेतों के दम पर घरेलू बाजार में चौतरफा लिवाली (खरीदारी) देखी जा रही है, जिससे प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी रिकॉर्ड मजबूती के साथ कारोबार कर रहे हैं। शुरुआती मिनटों में ही सेंसेक्स जहां 600 से अधिक अंक चढ़ गया, वहीं निफ्टी ने भी 23,850 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया।
सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार उछाल, मिडकैप और स्मॉलकैप भी चमके
बाजार के मुख्य सूचकांकों की बात करें तो सुबह 09:56 बजे सेंसेक्स 359.82 अंक (0.48%) की बढ़त के साथ 75,678.21 पर और निफ्टी 50 भी 137.65 अंक (0.58%) की तेजी के साथ 23,796.65 पर ट्रेंड कर रहा था। इससे पहले इंट्रा-डे कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 75,945.79 का उच्च स्तर और निफ्टी ने 23,859.90 का स्तर छुआ। बड़े शेयरों के साथ-साथ ब्रॉडर मार्केट में भी रौनक है; निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स आधा फीसदी से ज्यादा की मजबूती दिखा रहे हैं। रियल्टी सेक्टर को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं।
ग्लोबल संकेतों ने बदला मूड: क्रूड सप्लाई की चिंता हुई दूर
बाजार में आई इस तेजी के पीछे दो मुख्य वैश्विक कारण माने जा रहे हैं:
ट्रंप का बयान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के जवाब के लिए कुछ दिनों का इंतजार करने की बात कहे जाने के बाद दोनों देशों के बीच बातचीत के रास्ते खुलते दिख रहे हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से राहत: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल टैंकरों के सुरक्षित निकलने की खबरों के बाद कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने का डर खत्म हो गया है। इस वजह से दुनिया भर के निवेशकों का सेंटिमेंट काफी मजबूत हुआ है।
एशियाई बाजारों में उत्सव का माहौल, अमेरिकी बाजार भी मजबूत
बीती रात अमेरिकी बाजारों में नास्डैक (Nasdaq) 1.5% और एसएंडपी 500 (S&P 500) 1% से अधिक की बढ़त के साथ बंद हुए। यूरोपीय बाजारों (जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन) में भी तेजी का रुख रहा। इसी राह पर चलते हुए आज एशियाई बाजारों में जबरदस्त खरीदारी देखी जा रही है। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (KOSPI) 7% से ज्यादा के ऐतिहासिक उछाल पर है, जबकि जापान का निक्केई और ताइवान का इंडेक्स 3.5-3.5% से ज्यादा की बढ़त बना चुके हैं। हालांकि, इंडोनेशिया का बाजार इस तेजी के विपरीत ढाई फीसदी की गिरावट पर है।
रुपये में शानदार रिकवरी और इंडिया विक्स (India VIX) के गिरने से बढ़ी राहत
घरेलू बाजार के लिए दो और मोर्चों से बेहद अच्छी खबरें आईं, जिसने निवेशकों का भरोसा बढ़ा दिया:
मजबूत होता रुपया: बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹96.82 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद होने के बाद, आज भारतीय रुपया शानदार वापसी करते हुए ₹96.30 पर खुला।
बाजार का डर हुआ कम: बाजार में उतार-चढ़ाव और घबराहट को दर्शाने वाला 'इंडिया विक्स' (India VIX) 3% फिसलकर 18 के स्तर से नीचे (17.89 पर) आ गया है। विक्स का नीचे आना इस बात का संकेत है कि बाजार में अब अस्थिरता का खतरा कम हो रहा है और खरीदार सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
सोने-चांदी की बाजार खबर: चांदी के दामों में बड़ा बदलाव
21 May, 2026 09:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच गहराते भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव का सीधा असर अब सराफा बाजार पर दिखने लगा है। वैश्विक उथल-पुथल के बीच कीमती धातुओं के बाजारों में अस्थिरता का माहौल है, जिसके चलते आज कारोबारी सत्र की शुरुआत होते ही चांदी के दामों में भारी गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का वायदा भाव करीब 0.5% तक लुढ़क गया, जिससे यह 1,380 रुपये की कमजोरी के साथ 2,72,885 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। इससे पिछले सत्र में बाजार 2,74,265 रुपये पर बंद हुआ था।
ऑल-टाइम हाई से अब भी काफी नीचे चल रहे हैं दाम
भले ही आज चांदी में मंदी देखी जा रही है, लेकिन अगर लंबी अवधि के चार्ट को देखें तो यह अब भी ऊंचे स्तरों के आसपास बनी हुई है। गौरतलब है कि इसी साल 29 जनवरी को घरेलू बाजार में चांदी ने अपना सर्वकालिक रिकॉर्ड बनाते हुए 4,20,048 रुपये प्रति किलो का ऐतिहासिक स्तर छुआ था। वहीं आज दिल्ली के हाजिर सराफा बाजार में चांदी की कीमत में ₹5,000 की बड़ी कटौती देखी गई, जिसके बाद सभी करों (Taxes) को मिलाकर इसका दाम 2,66,000 रुपये प्रति किलो रह गया है। इसके विपरीत, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी मजबूती के साथ 75.42 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेंड कर रही थी।
अलग-अलग सूचकांकों पर चांदी का ताजा रुख
गुडरिटर्न्स के आंकड़ों के अनुसार, बाजार में चांदी का भाव फिलहाल 2,80,000 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बना हुआ है। दूसरी ओर, इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी किए गए रेट्स के मुताबिक, गुरुवार सुबह चांदी की कीमत 2,67,302 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई। बाजार एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप शादी-ब्याह या निवेश के लिए चांदी के आभूषण, ईंट या सिक्के खरीदने का मन बना रहे हैं, तो अपने स्थानीय बाजार से भाव जरूर पता कर लें क्योंकि टैक्स और मेकिंग चार्ज के कारण राज्यों में रेट अलग हो सकते हैं।
देश के प्रमुख शहरों में चांदी की रिटेल कीमतें
आज भारत के बड़े शहरों में चांदी के खुदरा भाव कुछ इस प्रकार ट्रेंड कर रहे हैं:
शहर
10 ग्राम चांदी का भाव
100 ग्राम चांदी का भाव
1 किलो चांदी का भाव
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता
₹2,800
₹28,000
₹2,80,000
चेन्नई, हैदराबाद, केरल
₹2,850
₹28,500
₹2,85,000
नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद
₹2,800
₹28,000
₹2,80,000
जयपुर, इंदौर, अहमदाबाद
₹2,800
₹28,000
₹2,80,000
लखनऊ, पटना, कानपुर
₹2,800
₹28,000
₹2,80,000
पुणे, बैंगलोर, चंडीगढ़
₹2,800
₹28,000
₹2,80,000
भुवनेश्वर, कटक
₹2,850
₹28,500
₹2,85,000
खरीदारों के लिए क्या है सलाह?
सराफा विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता के कारण आने वाले दिनों में सराफा बाजार में उतार-चढ़ाव का यह दौर जारी रह सकता है। खुदरा ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तरह की बड़ी खरीदारी करने से पहले अपने शहर के ज्वैलर्स से हॉलमार्क और शुद्धता के साथ-साथ उस समय के लाइव रेट की पुष्टि जरूर कर लें।
लोअर टेन्योर बनाम हाई टेन्योर: किसमें बचत ज्यादा?
20 May, 2026 05:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: हम में से अधिकांश लोगों को लगता है कि बैंक से होम लोन की मंजूरी मिलते ही और नए आशियाने की चाबियां हाथ में आते ही हमने जीवन की एक बहुत बड़ी जंग जीत ली है। इस पल को हम अपनी अंतिम मंजिल मान लेते हैं, लेकिन असलियत इसके बिल्कुल उलट है। सच तो यह है कि घर खरीदना किसी वित्तीय रेस का अंत नहीं, बल्कि एक लंबी और चुनौतीपूर्ण दौड़ की महज शुरुआत है।
शुरुआत का उत्साह और जमीन पर बदलती हकीकत
लोन के शुरुआती दौर में सब कुछ बहुत सुहावना और आसान लगता है। हर महीने एक तय ईएमआई (EMI) चुकाना और अपने खुद के घर में रहने का अहसास हमें सुरक्षा की भावना देता है। लेकिन यह उत्साह ज्यादा दिनों तक नहीं टिकता। कुछ ही महीनों के भीतर जब रिजर्व बैंक की नीतियों या बाजार के उतार-चढ़ाव के कारण बैंक ब्याज दरें (Interest Rates) बढ़ाना शुरू करते हैं, तब जेब पर अतिरिक्त दबाव महसूस होने लगता है।
कागजी हिसाब और जेब के खर्चों का अंतर्विरोध
लोन लेते समय जो वित्तीय गुणा-भाग कागजों पर बहुत सरल और व्यावहारिक नजर आ रहा था, वह वास्तविक जीवन के घरेलू खर्चों के बीच आकर भारी लगने लगता है। बच्चों की पढ़ाई, मेडिकल इमरजेंसी, रोजमर्रा की महंगाई और उसके ऊपर से बढ़ती ईएमआई का बोझ मिलकर मध्यमवर्गीय परिवार के मासिक बजट को पूरी तरह बिगाड़ देता है। कागजों का आसान सा दिखने वाला यह कर्ज धीरे-धीरे मानसिक और आर्थिक तनाव का बड़ा कारण बन जाता है।
सबसे बड़ी चूक: लोन लेकर निश्चिंत हो जाना
घर खरीदारों से सबसे बड़ी चूक यहीं पर होती है। हम अक्सर लोन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे एक 'सेट-एंड-फॉरगेट' (यानी लोन लेकर भूल जाना) सौदा मान लेते हैं। हम यह मान लेते हैं कि अगले 20 या 25 साल तक बस चुपचाप ईएमआई कटती रहेगी। जबकि वित्तीय समझदारी यह कहती है कि लोन को कभी भी लावारिस नहीं छोड़ना चाहिए।
समय-समय पर वित्तीय समीक्षा है जरूरी
लोन की अवधि के दौरान आपको समय-समय पर अपने कर्ज की समीक्षा करनी चाहिए। बाजार में जब भी ब्याज दरें कम हों, तो आपको अपने मौजूदा बैंक से दरें घटाने की बात करनी चाहिए या फिर किसी दूसरे बैंक में लोन ट्रांसफर (Home Loan Balance Transfer) करने के विकल्प पर विचार करना चाहिए। इसके अलावा, बोनस या अतिरिक्त आय होने पर लोन का कुछ हिस्सा समय से पहले चुकाना (Pre-payment) भी इस लंबे और थका देने वाले सफर को छोटा और आसान बना सकता है।
कृष्णा-गोदावरी गैस केस: लंबी कानूनी लड़ाई से बचने की कोशिश
20 May, 2026 04:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट कानूनी लड़ाइयों में से एक, कृष्णा-गोदावरी (KG) बेसिन गैस माइग्रेशन विवाद में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एक नया मोड़ आया। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और उसके विदेशी सहयोगियों ने केंद्र सरकार के साथ चल रहे इस बड़े विवाद को आपसी मध्यस्थता (Arbitration) के जरिए सुलझाने का प्रस्ताव रखा है। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ कर रही है।
रिलायंस की मध्यस्थता की पेशकश पर केंद्र का रुख
अदालती कार्यवाही के दौरान रिलायंस और उसके पार्टनर ग्रुप के वकीलों ने पीठ को सूचित किया कि वे बुधवार को ही केंद्र सरकार को औपचारिक पत्र भेजकर मध्यस्थता प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने की अपील करेंगे। कंपनियों ने कोर्ट से गुहार लगाई कि जब तक आपसी बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल जाता, तब तक इस मामले की अदालती सुनवाई को स्थगित रखा जाए। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर वेंकटारमानी ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि कोर्ट की कार्यवाही जारी रहनी चाहिए। उन्होंने भरोसा दिया कि यदि मध्यस्थता में कोई सकारात्मक प्रगति होती है, तो सरकार कोर्ट को सूचित कर देगी।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई रोकने से किया इनकार
दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने फिलहाल सुनवाई पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने इस कदम का स्वागत करते हुए टिप्पणी की, "अगर दोनों पक्ष आपसी सहमति से कोई सफल समाधान निकाल लेते हैं, तो यह बेहद अच्छी बात होगी। ऐसी स्थिति में हम इस मामले का अंतिम निपटारा कर देंगे।" गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट 19 मई से इस मामले पर अंतिम सुनवाई कर रहा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, बीपी (BP) एक्सप्लोरेशन और निको लिमिटेड ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जो उनके खिलाफ गया था।
दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील
यह कानूनी लड़ाई तब सुप्रीम कोर्ट पहुंची जब दिल्ली हाई कोर्ट ने 14 फरवरी 2025 को अपने एक आदेश में रिलायंस के पक्ष में आए अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल के फैसले को पलट दिया था। इससे पहले हाई कोर्ट के ही एक सिंगल जज बेंच ने अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल के फैसले को सही ठहराया था, लेकिन बाद में बड़ी बेंच ने सरकार की अपील पर सिंगल जज के फैसले को खारिज कर दिया, जिसके खिलाफ अब रिलायंस और उसकी सहयोगी कंपनियां देश की शीर्ष अदालत में अपील कर रही हैं।
क्या है अरबों डॉलर का यह पूरा विवाद?
इस विवाद की जड़ें कृष्णा-गोदावरी बेसिन से जुड़ी हैं, जहाँ केंद्र सरकार ने रिलायंस और उसके पार्टनर्स पर आरोप लगाया था कि उन्होंने तय सीमा से बाहर जाकर दूसरे ब्लॉक के गैस भंडारों से प्राकृतिक गैस निकाली, जिसका उन्हें कानूनी अधिकार नहीं था। इस कथित नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने कंपनियों पर 1.55 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 12,000 करोड़ रुपये से अधिक) का जुर्माना ठोका था। हालांकि, जुलाई 2018 में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता ट्रिब्यूनल ने बहुमत से सरकार के इस दावे को खारिज कर दिया था और उल्टा सरकार को आदेश दिया था कि वह रिलायंस व अन्य कंपनियों को मुआवजे के तौर पर 8.3 मिलियन डॉलर का भुगतान करे।
बांग्लादेशी टका के मुकाबले रुपये की मौजूदा स्थिति
20 May, 2026 04:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: वैश्विक बाजारों के दबाव और घरेलू कारणों से भारतीय रुपये में गिरावट का सिलसिला 20 मई को भी थमता नजर नहीं आया। रुपया न केवल अमेरिकी डॉलर बल्कि अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के सामने भी लगातार पस्त हो रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले एक साल में डॉलर के मुकाबले रुपये में 13.2 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जबकि इस साल अब तक यह करीब 8 फीसदी टूट चुका है। जानकारों का मानना है कि यदि गिरावट की यही रफ्तार रही, तो रुपया जल्द ही प्रति डॉलर 100 के मनोवैज्ञानिक स्तर को छू सकता है।
फॉरेक्स मार्केट में 20 मई को शुरुआती कारोबार के दौरान ही रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर 96.90 पर आ गया। तुलनात्मक रूप से देखें तो साल 2026 की शुरुआत में रुपया 89.89 के स्तर पर था, जबकि पिछले साल आज ही के दिन (20 मई को) यह 85.50 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
पड़ोसी देशों की करेंसी के सामने भी फीका पड़ा रुपया
भारतीय रुपया सिर्फ डॉलर के मुकाबले ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देशों की मुद्राओं के सामने भी कमजोर हुआ है। 'इकोनॉमिक टाइम्स' की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक साल पहले एक भारतीय रुपये की कीमत 1.42 बांग्लादेशी टका थी, जो अब घटकर महज 1.28 टका रह गई है। यानी टका के मुकाबले रुपये में करीब 10 फीसदी की कमजोरी आई है। इसका सीधा असर यह होगा कि एक साल पहले बांग्लादेश में जो सामान आप 10 रुपये (14 टका मूल्य) में खरीद सकते थे, उसके लिए अब आपको ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे। इसी तरह, 'द वायर' की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी रुपये के मुकाबले भी भारतीय रुपया इस साल कमजोर हुआ है; बीते 15 मई से अब तक इसमें 11.86 फीसदी की गिरावट आ चुकी है।
क्या रुपये की कमजोरी खराब अर्थव्यवस्था का संकेत है?
इस सवाल पर विशेषज्ञों का जवाब बेहद स्पष्ट है—'नहीं'। किसी देश की मुद्रा का घटना या बढ़ना सीधे तौर पर उसकी अर्थव्यवस्था की सेहत नहीं दर्शाता। करेंसी की वैल्यू इस बात से तय होती है कि देश में डॉलर का प्रवाह (Inflow) कितना है, क्योंकि वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा डॉलर में ही होता है। चूंकि भारत अपनी बड़ी आबादी के लिए कच्चे तेल (क्रूड ऑयल), दालों और खाद्य तेलों का भारी मात्रा में आयात करता है, इसलिए देश को हमेशा बड़ी मात्रा में डॉलर की जरूरत बनी रहती है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली और डॉलर की बढ़ती मांग
पिछले लगभग दो वर्षों से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) भारतीय शेयर बाजार में लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिससे रुपये पर दबाव बहुत बढ़ गया है। नियम सीधा है: जब विदेशी फंड भारत में निवेश करते हैं, तो वे डॉलर लाकर उसे रुपये में बदलते हैं, जिससे रुपया मजबूत होता है। इसके विपरीत, जब वे शेयर बेचकर बाजार से बाहर निकलते हैं, तो वे रुपये को डॉलर में बदलते हैं। इस बिकवाली के कारण बाजार में डॉलर की मांग अचानक बढ़ जाती है और रुपया कमजोर होने लगता है।
मिडिल ईस्ट संकट और कच्चे तेल की कीमतों का असर
बीते 28 फरवरी से मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में शुरू हुए भू-राजनीतिक तनाव के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 फीसदी क्रूड ऑयल बाहर से खरीदता है। तेल के महंगे होने के कारण भारत को भुगतान के लिए बहुत ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया गिरावट की सबसे बड़ी वजह क्रूड ऑयल का महंगा होना ही है। हालांकि, यह एक अस्थायी समस्या है और जैसे ही वैश्विक स्थितियां सुधरेंगी, रुपये पर बना यह दबाव कम हो जाएगा।
Trent के बाहर होने से बाजार में हलचल, क्या करना चाहिए निवेशकों को?
20 May, 2026 01:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। घरेलू शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स 'बीएसई सेंसेक्स-30' (BSE Sensex 30) में जल्द ही एक बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है। वित्तीय विश्लेषक फर्म नुवामा अल्टरनेटिव एंड क्वांटिटेटिव रिसर्च की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, आगामी जून 2026 के इंडेक्स रिव्यू (रीजिग) में टाटा समूह की दिग्गज कंपनी 'ट्रेंट' (Trent) को सेंसेक्स से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। यह अनुमान ट्रेंट के शेयरों में आई हालिया भारी गिरावट और उसके फ्री-फ्लोट मार्केट कैप में कमी के आधार पर लगाया गया है।
ट्रेंट को लगेगा झटका, $25.7 करोड़ की पूंजी बाहर निकलने की आशंका
शेयर बाजार में पिछले कुछ समय से ट्रेंट के शेयरों का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा है। अक्टूबर 2024 में ₹8,345 के अपने ऑल-टाइम हाई स्तर को छूने के बाद से कंपनी का शेयर 50% से अधिक टूट चुका है। शेयरों में इस भारी बिकवाली के कारण ट्रेंट का मार्केट कैपिटलाइजेशन (बाजार पूंजीकरण) भी ₹2 लाख करोड़ के स्तर से नीचे फिसलकर ₹1.4 लाख करोड़ पर आ गया है। जानकारों का मानना है कि यदि ट्रेंट सेंसेक्स से बाहर होता है, तो इससे कंपनी से लगभग $25.7 करोड़ (करीब 2,100 करोड़ रुपये) का पैसिव आउटफ्लो (पूंजी की निकासी) हो सकता है।
सेंसेक्स में एंट्री के लिए हिंडालको और श्रीराम फाइनेंस के बीच मुकाबला
इंडेक्स से ट्रेंट की विदाई के बाद उसकी जगह लेने के लिए आदित्य बिड़ला ग्रुप की 'हिंडालको इंडस्ट्रीज' (Hindalco Industries) और 'श्रीराम फाइनेंस' (Shriram Finance) प्रमुख दावेदार बनकर उभरी हैं। हालांकि फ्री-मार्केट कैप के लिहाज से रेस में श्रीराम फाइनेंस थोड़ा आगे चल रही है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि हिंडालको इंडस्ट्रीज की एंट्री की संभावना अधिक है। ऐसा इसलिए क्योंकि इंडेक्स कमेटी हमेशा विभिन्न सेक्टर्स के व्यापक प्रतिनिधित्व (Broader Sectoral Representation) को प्राथमिकता देती है। अगर हिंडालको शामिल होती है तो उसमें $36.6 करोड़ और श्रीराम फाइनेंस के आने पर $44.5 करोड़ का पैसिव इनफ्लो (नया निवेश) आ सकता है।
ट्रेंट के शेयरों में एक साल के दौरान रिकॉर्ड गिरावट
अगर बीते एक साल में कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो टाटा ग्रुप के ट्रेंट के लिए यह समय काफी निराशाजनक रहा है। पिछले साल 30 जून 2025 को बीएसई पर ट्रेंट का शेयर ₹6,259.00 के एक साल के उच्च स्तर पर कारोबार कर रहा था। लेकिन महज 9 महीनों के भीतर इसमें करीब 47.66% की भारी गिरावट दर्ज की गई और 30 मार्च 2026 तक यह टूटकर अपने एक साल के निचले स्तर ₹3,276.10 पर पहुंच गया।
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