व्यापार
घरेलू गैस (14.2 किलोग्राम) की कीमत दिल्ली में करीब ₹913, मुंबई में ₹912.50 के आसपास
24 Mar, 2026 11:08 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देशभर में घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में मंगलवार को कोई बदलाव नहीं किया गया। हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ते संकट के चलते गैस सप्लाई को लेकर चिंता गहराने लगी है।
ऊर्जा सप्लाई पर युद्ध का असर, भारत पर दबाव
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब ऊर्जा आपूर्ति पर साफ दिखाई दे रहा है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का करीब 60 फीसदी सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट के जरिए करता है। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव भारत के लिए जोखिम बढ़ा रहा है। हालांकि सरकार ने भरोसा दिलाया है कि देश में फिलहाल पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और आम उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है।
घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता
स्थिति को देखते हुए सरकार ने एलपीजी को आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के दायरे में रखा है। इसके तहत घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि कमर्शियल उपभोक्ताओं की सप्लाई को उनकी जरूरत के लगभग एक-पांचवें हिस्से तक सीमित किया गया है, ताकि आम लोगों की रसोई प्रभावित न हो।
मार्च की शुरुआत में बढ़े थे दाम
इससे पहले 7 मार्च को एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी की गई थी। घरेलू सिलेंडर (14.2 किलोग्राम) ₹60 महंगा हुआ था, जबकि कमर्शियल सिलेंडर (19 किलोग्राम) ₹115 तक बढ़ा था। इसके बाद से अब तक कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।
बड़े शहरों में आज के रेट
नई दिल्ली: घरेलू ₹913 | कमर्शियल ₹1,884.50
मुंबई: घरेलू ₹912.50 | कमर्शियल ₹1,836
कोलकाता: घरेलू ₹939 | कमर्शियल ₹1,988.50
चेन्नई: घरेलू ₹928.50 | कमर्शियल ₹2,043.50
हैदराबाद: घरेलू ₹965 | कमर्शियल ₹2,105.50
लखनऊ: घरेलू ₹950.50 | कमर्शियल ₹2,007
बेंगलुरु: घरेलू ₹915.50 | कमर्शियल ₹1,958
पटना: घरेलू ₹1,002.50 | कमर्शियल ₹2,133.50
सरकार के कदम और आगे की रणनीति
सरकार गैस सप्लाई को मजबूत करने के लिए शहरी गैस परियोजनाओं (CGD) को तेजी से मंजूरी दे रही है और PNG (पाइप्ड गैस) को बढ़ावा दे रही है। साथ ही, कमर्शियल सेक्टर में एलपीजी पर निर्भरता कम करने की योजना है। मौजूदा समय में तेल कंपनियां केवल दो से तीन दिन का स्टॉक रखती हैं, जो संकट की स्थिति में चुनौती बन सकता है। ऐसे में सरकार अब दीर्घकालिक भंडारण (कैवर्न स्टोरेज) बढ़ाने पर भी काम कर रही है।
आयात के नए विकल्प तलाश रहा भारत
एलपीजी सप्लाई को सुरक्षित करने के लिए भारत अब अमेरिका और कनाडा जैसे देशों से आयात बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने अमेरिका से एलपीजी आयात के लिए समझौता किया है, जो कुल आयात का लगभग 10% कवर करेगा।
बहरीन में असर, पश्चिम एशिया तनाव पर Amazon की ड्रोन चिंता
24 Mar, 2026 09:58 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब टेक्नोलॉजी सेक्टर पर भी दिखने लगा है। ई-कॉमर्स दिग्गज अमेजन ने कहा है कि उसके अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) का बहरीन रीजन मौजूदा हालात के बीच बाधित हो गया है। कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि यह व्यवधान इलाके में ड्रोन गतिविधियों के कारण हुआ है। यह जानकारी रॉयटर्स की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में दी गई।
कंपनी ने क्या बताया?
हालांकि, कंपनी ने नुकसान की सीमा या सेवाएं पूरी तरह बहाल होने में लगने वाले समय को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। कंपनी ने अपने बयान में कहा कि हालात लगातार बदल रहे हैं और प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे यूजर्स को अन्य लोकेशंस में शिफ्ट होते रहने की सलाह दी गई है। एडब्ल्यूएस, अमेजन की क्लाउड कंप्यूटिंग यूनिट है, जो कई बड़ी वेबसाइट्स और सरकारी सेवाओं के संचालन के लिए बेहद अहम है। कंपनी के मुनाफे का बड़ा हिस्सा भी इसी से आता है।
दूसरी बार हुआ एडब्ल्यूएस रीजन पर हमला
गौरतलब है कि अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष की शुरुआत के बाद यह दूसरी बार है जब बहरीन स्थित एडब्ल्यूएस रीजन ड्रोन हमले से प्रभावित हुआ है। इससे पहले इसी महीने बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात में एडब्ल्यूएस की सुविधाएं पावर आउटेज के कारण प्रभावित हुई थीं, जिन्हें बहाल करने की प्रक्रिया जारी थी। इन हमलों के दौरान आग लगने और इमरजेंसी सप्रेशन सिस्टम सक्रिय होने से पानी से भी नुकसान हुआ, जिसके चलते सेवाएं अस्थिर हुईं और कई जगह अस्थायी आउटेज देखने को मिला था। अमेजन ने उस समय चेतावनी दी थी कि भौतिक नुकसान के कारण सेवाओं को पूरी तरह बहाल करने में समय लग सकता है और ग्राहकों को डेटा बैकअप लेने व वर्कलोड अन्य रीजन में शिफ्ट करने की सलाह दी गई थी।
डेटा सेंटर अब बने रणनीतिक निशाना
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब मध्य पूर्व में संघर्ष तेजी से बढ़ रहा है। अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान पर हमलों के बाद, तेहरान ने जवाबी कार्रवाई में ड्रोन और मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं, जिनका निशाना अमेरिकी ठिकानों और सहयोगी देशों जैसे यूएई, सऊदी अरब और बहरीन को बनाया जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अब टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर भी सीधे निशाने पर आ रहा है। एडब्ल्यूएस, जो दुनिया का सबसे बड़ा क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर है, लाखों एप्लिकेशन होस्ट करता है और कंपनियों व सरकारों का अहम डेटा संभालता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे डेटा सेंटर अब रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हो चुके हैं, इसलिए वे संभावित हमलों के लिए ज्यादा संवेदनशील भी बन गए हैं। इसका असर केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कई उद्योगों और डिजिटल सेवाओं पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।
पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत के बावजूद गिरावट नहीं
24 Mar, 2026 09:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। मंगलवार सुबह 8:50 बजे के आसपास अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 4% की बढ़त के साथ 104 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता नजर आया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड में भी मजबूती देखी गई, जिसमें करीब 4.39% की तेजी दर्ज की गई।
ट्रंप ने दिए नरमी के संकेत
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए घोषणा की है कि ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दोबारा खोलने के लिए दी गई समयसीमा बढ़ा दी गई है। साथ ही उन्होंने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर प्रस्तावित हमलों को पांच दिनों के लिए टालने का फैसला किया है। यह कदम ऐसे समय पर आया है जब फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित यह अहम समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद संवेदनशील बना हुआ है।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बना है। लाइवलोंग वेल्थ के संस्थापक और रिसर्च एनालिस्ट हरिप्रसाद के ने कहा कि हालिया तेजी की वजह पश्चिम एशिया में जारी तनाव में संभावित नरमी के संकेत हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की खबरों और ऊर्जा ढांचे पर हमलों को अस्थायी रूप से रोकने के ऐलान से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। इससे यह उम्मीद जगी है कि यह संघर्ष, जिसने कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ाया और वैश्विक मंदी की आशंकाओं को जन्म दिया था, अब धीरे-धीरे कम हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है और आने वाले दिनों में घटनाक्रम के आधार पर बाजार की दिशा तय होगी।
शेयर बाजार में तेजी, BSE Sensex और Nifty 50 दोनों में उछाल
24 Mar, 2026 09:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को हरे निशान पर खुला। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1516 अंक बढ़कर 74,212.47 अंक पर आ गया। वहीं 50 शेयरों वाला निफ्टी 386.95 अंक बढ़कर 22,899.60 अंक पर आ गया। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 पैसे गिरकर 93.73 पर आ गया।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि रिकवरी के बावजूद निवेशकों का भरोसा पूरी तरह नहीं लौटा है। बैंकिंग और बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा ने कहा कि वैश्विक हालात अभी भी अनिश्चित हैं और बाजार में भारी अस्थिरता देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर आ रही खबरें और फिर उनके खंडन से बाजार तेजी से प्रभावित हो रहा है, जिससे कुछ निवेशक पहले से पोजिशन लेकर मुनाफा कमा रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि वैश्विक संकेतक भी मिश्रित हैं। एशियाई बाजारों में शुरुआती बढ़त कम हो गई है, कच्चे तेल की कीमतों में हल्की तेजी है, अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है, जबकि सोना-चांदी में पिछले 25 दिनों से गिरावट जारी है। वहीं, अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स करीब 0.4% की गिरावट में कारोबार कर रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी में भी रात की तुलना में बढ़त कम होकर करीब 350 अंकों तक सिमट गई है। इस बीच, सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर प्रस्तावित सैन्य हमलों को पांच दिनों के लिए टालने का ऐलान किया, यह कहते हुए कि गुप्त बातचीत में प्रगति हो रही है। हालांकि, ईरान ने इन दावों को फेक न्यूज बताते हुए किसी भी प्रत्यक्ष बातचीत से इनकार किया है। तनाव में अस्थायी नरमी के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक चिंता का केंद्र बना हुआ है, जिससे बाजार की दिशा पर अनिश्चितता का साया बना रह सकता है।
एशियाई बाजारों में दिखी तेजी
अन्य एशियाई बाजारों में सकारात्मक रुझान देखा गया। जापान का निक्केई 225 सूचकांक 0.75 प्रतिशत बढ़कर 51920 पर पहुंच गया, सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स सूचकांक 0.13 प्रतिशत बढ़कर 4849 पर पहुंच गया, हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक 1.75 प्रतिशत बढ़कर 24797 पर पहुंच गया, ताइवान का भारित सूचकांक 32697 पर स्थिर रहा और दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 2 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 5522 पर पहुंच गया। सोमवार को अमेरिकी बाजार भी बढ़त के साथ बंद हुए। डाउ जोन्स 1.38 प्रतिशत बढ़कर 46208 पर बंद हुआ, एसएंडपी 500 1.15 प्रतिशत बढ़कर 6581 पर और नैस्डैक 1.38 प्रतिशत बढ़कर 21946 पर पहुंच गया।
ब्रेंट क्रूड का भाव गिरकर 104 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा
कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, ब्रेंट क्रूड सोमवार को संक्षेप में 99 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिरने के बाद 104 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। कमोडिटी सेगमेंट में, सोने की कीमतों में गिरावट जारी रही और 24 कैरेट सोने का भाव 137370 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। चांदी की कीमतों में भी 3 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट आई और यह 217823 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।
चांदी की कीमत में करीब ₹9050 तक की तेज गिरावट
24 Mar, 2026 08:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच मंगलवार को बुलियन पर सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। चांदी की कीमत 9050 रुपये गिरकर 2.16 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। वहीं सोने का भाव 2360 रुपये गिरकर 1.37 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमत
वहीं सोमवार को कॉमेक्स पर सोने की कीमत करीब 3% गिरकर 4,462 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। यही नहीं, साल 1983 के बाद यह सोने का सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन रहा, जिसमें लगभग 11% की गिरावट दर्ज की गई है। चांदी की कीमतों में भी कमजोरी देखने को मिली। एशियाई कारोबार के दौरान कॉमेक्स पर चांदी करीब 3% टूटकर 67.5 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। ईरान से जुड़े संघर्ष के चौथे सप्ताह में प्रवेश करते ही कीमती धातुओं पर दबाव और बढ़ गया है। 28 फरवरी से तनाव बढ़ने के बाद स्पॉट गोल्ड अब तक करीब 15% गिर चुका है और जनवरी में बने अपने रिकॉर्ड स्तर से लगभग 22% नीचे आ गया है।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
विशेषज्ञों का कहना है कि आमतौर पर सोना महंगाई के खिलाफ एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार बढ़ती ब्याज दरों की आशंका इसके लिए नकारात्मक साबित हो रही है। ऊंची ऊर्जा कीमतों के चलते महंगाई बढ़ने की संभावना है, जिससे केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकते हैं। चूंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता, इसलिए निवेशक इससे दूरी बना रहे हैं। विश्लेषकों के मुताबिक, निकट भविष्य में सोने की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, क्योंकि निवेशक जोखिम कम करने की रणनीति अपना रहे हैं। ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव ने महंगाई की चिंताओं को बढ़ाया है, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को कमजोर किया है और वैश्विक आर्थिक वृद्धि पर भी दबाव डाला है।
सोना गिरकर 4,098 डॉलर प्रति औंस तक फिसला
सोमवार के शुरुआती कारोबार में सोना चार महीने के निचले स्तर 4,098 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया था। इस गिरावट के पीछे चीन के शेयर बाजार में आई बड़ी कमजोरी भी एक कारण रही, जहां एक साल की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि बाद में कुछ रिकवरी आई और स्पॉट गोल्ड 2.5% की गिरावट के साथ 4,377 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। बाजार में थोड़ी राहत तब देखने को मिली जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर संभावित हमलों को फिलहाल टालने का संकेत दिया।
होर्मुज संकट से बढ़ेगा महंगाई का दबाव, क्रूड की कीमतों का अनुमान बढ़ा
23 Mar, 2026 12:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। वैश्विक तेल बाजार में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स ने 2026 के लिए कच्चे तेल की कीमतों का अनुमान काफी बढ़ा दिया है। बैंक ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति में भारी बाधा वैश्विक क्रूड बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा सप्लाई शॉक बन सकती है। गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, 2026 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत अब 85 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है, जो पहले के 77 डॉलर के अनुमान से 10.38% ज्यादा है। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) का अनुमान भी बढ़ाकर 79 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है, जो पहले 72 डॉलर था। यह जानकारी बैंक के विश्लेषक डान स्ट्रुवेन ने अपनी रिपोर्ट में दी।
होर्मुज में भारी बाधा का असर
रिपोर्ट के अनुसार, यह संशोधित अनुमान इस आधार पर लगाया गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति छह हफ्तों तक सामान्य क्षमता के केवल 5% पर रह सकती है। इसके बाद अगले एक महीने में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने की उम्मीद है।
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ा जोखिम
तेल बाजार इस समय अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष से प्रभावित है, जो अब चौथे सप्ताह में पहुंच चुका है और इसके खत्म होने के संकेत नहीं हैं। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को दो दिन का अल्टीमेटम दिया है कि वह इस अहम समुद्री मार्ग को फिर से खोले, नहीं तो उसके ऊर्जा ढांचे पर हमले हो सकते हैं। इसके जवाब में ईरान ने भी कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है।
आपूर्ति में भारी गिरावट की आशंका
गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि पश्चिम एशिया में कच्चे तेल के उत्पादन में नुकसान मौजूदा 1.1 करोड़ बैरल प्रतिदिन से बढ़कर 1.7 करोड़ बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकता है। यदि आपूर्ति बहाल होने में चार हफ्ते लगते हैं, तो कुल नुकसान 800 मिलियन बैरल से अधिक हो सकता है।
वैश्विक सप्लाई पर उठे सवाल
बैंक के अनुसार, यह अभूतपूर्व संकट नीति निर्माताओं और निवेशकों को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की संरचनात्मक कमजोरियों पर फिर से सोचने के लिए मजबूर कर सकता है, खासकर पश्चिम एशिया पर अत्यधिक निर्भरता को लेकर। हालांकि एशिया में आपूर्ति सख्त हो रही है, लेकिन अमेरिका और यूरोप के ओईसीडी देशों में कच्चे तेल का भंडार लगातार बढ़ रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि संघर्ष से पहले वैश्विक आपूर्ति मांग से ज्यादा थी।
बाजार में कहां तक पहुंच गए भाव?
तनाव के बीच सोमवार को तेल की कीमतों में उछाल देखा गया।
ब्रेंट क्रूड 0.73% बढ़कर 113.01 डॉलर प्रति बैरल के इंट्राडे हाई तक पहुंच गया।
WTI क्रूड 3.32% चढ़कर 101.50 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
कॉरपोरेट कानूनों में बड़ा बदलाव, Nirmala Sitharaman लाएंगी नया बिल
23 Mar, 2026 10:23 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्र सरकार कारोबारियों के लिए माहौल को और सरल बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज लोकसभा में कॉरपोरेट लॉज (संशोधन) बिल, 2026 पेश करेंगी। इस बिल का मकसद छोटे कारोबारियों, स्टार्टअप्स और किसानों की उत्पादक कंपनियों के लिए नियमों को आसान बनाना और गैर-जरूरी कानूनी जटिलताओं को कम करना है। लोकसभा के एजेंडा के अनुसार, यह विधेयक सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 और कंपनी अधिनियम, 2013 में संशोधन करने के लिए लाया जा रहा है। गौरतलब है कि केंद्रीय कैबिनेट ने इस बिल को 10 मार्च को मंजूरी दे दी थी।
क्या हैं बिल के मुख्य प्रावधान?
इस प्रस्तावित कानून का मुख्य फोकस है:
छोटे-मोटे अपराधों को डी-क्रिमिनलाइज (अपराध की श्रेणी से बाहर) करना है।
कुछ आपराधिक प्रावधानों की जगह सिविल पेनल्टी (जुर्माना) लागू करना है।
छोटे व्यवसायों, स्टार्टअप्स और किसान उत्पादक कंपनियों के लिए कंप्लायंस बोझ कम करना है।
कंपनियों के लिए व्यापार करने में आसानी के साथ जीवन की सुगमता को बढ़ावा देना है।
क्यों जरूरी हैं ये बदलाव?
सरकार का मानना है कि कई मामलों में मामूली प्रक्रियात्मक चूक को आपराधिक अपराध मानना व्यवसायों के लिए अनावश्यक दबाव पैदा करता है। ऐसे प्रावधानों को हटाकर या सरल बनाकर कंपनियों को अधिक लचीलापन दिया जाएगा।
पहले भी हो चुके हैं बदलाव
कंपनी अधिनियम, 2013 में 2015 के बाद से अब तक चार बार संशोधन किए जा चुके हैं, ताकि नियमों को सरल बनाया जा सके। एलएलपी अधिनियम, 2008 में भी 2021 में इसी दिशा में बदलाव किए गए थे।
रुपया टूटा, 41 पैसे की गिरावट के साथ 93.94 पर पहुंचा
23 Mar, 2026 09:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया लगातार दबाव में रहा और 41 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.94 के अपने नए ऑल-टाइम लो पर पहुंच गया। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मजबूत डॉलर ने रुपये को कमजोर कर दिया है। इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया 93.84 पर खुला और जल्द ही गिरकर 93.94 के स्तर तक पहुंच गया, जो पिछले बंद स्तर 93.53 के मुकाबले 41 पैसे की गिरावट दर्शाता है। इससे पहले शुक्रवार को भी रुपया पहली बार 93 के पार गया था और 64 पैसे की बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ था।
तेल और डॉलर का दोहरा दबाव
फॉरेक्स ट्रेडर्स के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने रुपये पर अतिरिक्त दबाव बनाया है। भारत खाड़ी देशों से आयात होने वाले तेल पर अब प्रति बैरल करीब 50 डॉलर अधिक चुका रहा है, जिससे आयात बिल बढ़ा है और डॉलर की मांग तेज हुई है। फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी हेड और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल कुमार भंसाली के अनुसार, बाजार में डॉलर की भारी मांग के चलते रुपया तेजी से गिरा है। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अलग-अलग स्तरों पर मौजूद रहा, लेकिन उसने रुपये को गिरने दिया क्योंकि डॉलर की डिमांड काफी ज्यादा थी।
एफपीआई आउटफ्लो और शेयर बाजार की कमजोरी
घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट और विदेशी निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली ने भी रुपये को कमजोर किया है। जोखिम से बचने की प्रवृत्ति के चलते निवेशक भारतीय बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर जा रहे हैं।
RBI के हस्तक्षेप की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रुपये में गिरावट जारी रहती है, तो RBI हस्तक्षेप कर सकता है। हालांकि, तेल कंपनियों और विदेशी निवेशकों की डॉलर मांग निकट भविष्य में ऊंची बनी रह सकती है, जिससे रुपये पर दबाव जारी रहने की आशंका है। इस बीच, डॉलर इंडेक्स भी 0.02% बढ़कर 99.66 पर बना हुआ है, जो वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती को दर्शाता है।
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 0.60 प्रतिशत गिरकर 112.90 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को शुद्ध आधार पर 5,518.39 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
इस बीच, आरबीआई ने शुक्रवार को बताया कि 13 मार्च को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 7.052 अरब अमेरिकी डॉलर घटकर 709.759 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।
सेंसेक्स में भारी बिकवाली, रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर
23 Mar, 2026 08:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार सोमवार को बड़ी गिरावट के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,555.62 अंक या 2 प्रतिशत गिरकर 72,977.34 पर आ गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 479.95 अंक या 2 प्रतिशत गिरकर 22,634.55 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 41 पैसे गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 93.94 पर आ गया।
सेंसेक्स की कंपनियों का हाल
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से टाटा स्टील, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बजाज फाइनेंस, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, टाइटन और अदानी पोर्ट्स सबसे पिछड़ने वाली कंपनियों में शामिल थीं। एचसीएल टेक एकमात्र विजेता के रूप में उभरी।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
बैंकिंग और मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा के मुताबिक, हालात तेजी से एस्केलेशन की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे निवेशकों में घबराहट साफ दिख रही है। अजय बग्गा ने कहा कि हफ्ते की शुरुआत बेहद अस्थिर माहौल में हुई है और निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से पैसा निकालकर डॉलर जैसी सुरक्षित जगहों की ओर जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिकी मनी मार्केट फंड्स का एयूएम 8 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है, जो इस सेफ्टी फ्लाइट को दर्शाता है।
48 घंटे का अल्टीमेटम बना ट्रिगर
बग्गा के अनुसार, बाजार में घबराहट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ईरान को दिया गया 48 घंटे का अल्टीमेटम है। इसमें कहा गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोला जाए, जो फिलहाल युद्ध से पहले की क्षमता के सिर्फ 5% पर चल रहा है, वरना ईरान के पावर ग्रिड को निशाना बनाया जा सकता है।
तेल बाजार में उथल-पुथल
कमोडिटी बाजार में भी भारी अस्थिरता बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड करीब 112 डॉलर प्रति बैरल और WTI 98.50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहा। सप्लाई बाधित होने की आशंका और वैश्विक मांग में गिरावट के डर के बीच कीमतें लगातार उतार-चढ़ाव में हैं।
तनाव के बावजूद सोने में क्यों दिखी गिरावट?
आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव में सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार उल्टा रुझान देखने को मिला। सोना करीब 2% गिरकर 4,408 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। विश्लेषकों का कहना है कि मार्जिन कॉल के चलते निवेशक अपने मुनाफे वाले गोल्ड पोजिशन बेचकर इक्विटी में हुए नुकसान की भरपाई कर रहे हैं।
एशियाई बाजारों में बड़ी गिरावट
वैश्विक संकेत बेहद कमजोर रहे और एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली देखी गई। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 4% से ज्यादा गिरकर 51,280 पर आ गया। सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स 2.20% गिरकर 4,839 पर, हांगकांग का हैंगसेंग 3.41% टूटकर 24,415 पर बंद हुआ। ताइवान का वेटेड इंडेक्स 2.65% गिरा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 6% से ज्यादा लुढ़क गया।
अमेरिकी बाजार भी दबाव में
शुक्रवार को अमेरिकी बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुए थे। डाउ जोन्स 0.96% गिरकर 45,577 पर बंद हुआ, S&P 500 में 1.51% की गिरावट रही और नैस्डैक 2% टूटकर 21,647 पर आ गया। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, तब तक वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और दबाव बना रह सकता है।
ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 112.9 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.62 प्रतिशत बढ़कर 112.9 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को 5,518.39 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 5,706.23 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। विदेशी निवेशकों ने इस महीने अब तक भारतीय शेयर बाजार से 88,180 करोड़ रुपये (लगभग 9.6 अरब अमेरिकी डॉलर) निकाल लिए हैं।शुक्रवार को सेंसेक्स 325.72 अंक या 0.44 प्रतिशत बढ़कर 74,532.96 पर बंद हुआ। निफ्टी 112.35 अंक या 0.49 प्रतिशत बढ़कर 23,114.50 पर समाप्त हुआ।
गोल्ड में ऐतिहासिक गिरावट, 40 साल का रिकॉर्ड टूटा, चांदी भी फिसली
23 Mar, 2026 07:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच सोमवार को एमसीक्स पर सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। चांदी की कीमत 20400 रुपये गिरकर 2.06 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। वहीं सोने का भाव 9759 रुपये गिरकर 1.34 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी का भाव
वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में बीते एक हफ्ते में तेज गिरावट दर्ज की गई है, जो पिछले 40 वर्षों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट मानी जा रही है। कीमतें 5,200 डॉलर से गिरकर 4,354 डॉलर प्रति औंस तक आ गई हैं। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत डॉलर के दबाव में दोनों कीमती धातुओं में बिकवाली देखी गई। कॉमेक्स पर सोने की कीमत करीब 3% गिरकर 4,462 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। गौरतलब है कि इससे पहले पिछले सप्ताह सोना लगभग 11% टूट चुका है, जो 1983 के बाद इसकी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट मानी जा रही है। वहीं, एशियाई कारोबार के दौरान चांदी की कीमत भी करीब 3% गिरकर 67.5 डॉलर प्रति औंस तक आ गई।
क्यों गिर रहे हैं सोना-चांदी के दाम?
विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने महंगाई की चिंताओं को बढ़ा दिया है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व समेत अन्य केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीद कमजोर हुई है। चूंकि सोना एक नॉन-यील्डिंग एसेट है, ऐसे माहौल में इसकी मांग घटती है और कीमतों पर दबाव आता है। इसके अलावा, डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती भी सोने-चांदी के लिए नकारात्मक साबित हो रही है। मजबूत डॉलर के कारण अन्य मुद्राओं में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग घटती है।
पश्चिम एशिया तनाव ने बढ़ाई अनिश्चितता
तेल बाजार में उतार-चढ़ाव तब और बढ़ गया जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को दो दिन के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा नहीं करने पर ईरान के पावर प्लांट्स पर संभावित हमले हो सकते हैं। इसके जवाब में ईरान ने चेताया कि अगर उसके ठिकानों पर हमला हुआ तो वह इस अहम समुद्री मार्ग को पूरी तरह बंद कर सकता है और ऊर्जा, आईटी तथा जल आपूर्ति ढांचे को निशाना बना सकता है।
सैन्य गतिविधियों से बाजार में घबराहट
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका पश्चिम एशिया में हजारों अतिरिक्त मरीन और नौसैनिक भेज रहा है। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है, जिसका असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल बाजार में अनिश्चितता और जोखिम बढ़ा हुआ है। ऐसे में निवेशकों का रुझान सुरक्षित लेकिन यील्ड देने वाले विकल्पों की ओर शिफ्ट हो रहा है, जिससे सोना और चांदी दबाव में बने रह सकते हैं।
मशीन पर भरोसा या समझदारी? निवेश में AI की सीमाएं समझिए
23 Mar, 2026 06:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। दुनिया बदल गई है। मशीनी दिमाग यानी AI का जमाना है, जो पलक झपकते ही दुनिया भर के आंकड़े खंगाल देता है। लोग अब अपनी जीवन भर की जमापूंजी यानी म्यूचुअल फंड निवेश के लिए भी इन्हीं मशीनों से सलाह ले रहे हैं। देखने में लुभावना लगता है, एक ऐसा सहायक जो 24 घंटे हाजिर है, जिसे बाजार के हर उतार-चढ़ाव की खबर है और जो मुफ्त में सलाह दे रहा है।
सवाल है क्या यह मशीनी दिमाग आपके सपनों और आपकी जरूरतों को समझ सकता है? सीधा जवाब है, बिल्कुल नहीं!
मशीन क्यों नहीं बन सकती आपकी मार्गदर्शक? एक ऐसा आहार विशेषज्ञ जो सेहत, बीमारियों या आपकी पसंद-नापसंद के बारे में पूछे बिना ही एक जैसा पर्चा थमा दे। क्या वह आपकी सेहत सुधार पाएगा? निवेश भी बिल्कुल वैसा ही है। हर इन्सान की जरूरत, उम्र और पारिवारिक जिम्मेदारी अलग होती है। मशीनी सलाहकारों के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि वे 'एक ही लाठी से सबको हांकते' हैं। क्यों ये मशीनी औजार एक तजुर्बेकार सलाहकार की जगह कभी नहीं ले सकते?
व्यक्तिगत जानकारी का अभाव
मशीन पुराने आंकड़ों और रुझानों का विश्लेषण करती है। मशीन यह नहीं जानती कि आपके पास निवेश के लिए कितना समय है या कितना घाटा सह सकते हैं। एक अच्छा सलाहकार आपसे बात करता है, आपके भविष्य के लक्ष्यों को समझता है और फिर आपके लिए एक विशेष योजना तैयार करता है।
संवेदना और समझ की कमी
जब बाजार गिरता है और पोर्टफोलियो लाल निशान में होता है, तो अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं। उस वक्त एक मशीनी चैटबॉट आपको वह ढांढस नहीं बंधा सकता जो एक इन्सान दे सकता है। बाजार की गिरावट में जब आप घबराकर अपना निवेश बेचने की सोचेंगे, तब एक सलाहकार ही आपको सही और गलत का फर्क समझा कर अनुशासन में रख पाएगा।
पुराने आंकड़ों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा
मशीनी दिमाग पूरी तरह से इतिहास पर निर्भर है। बाजार में कल क्या होगा, यह हमेशा बीते हुए कल जैसा नहीं होता। अचानक आए वैश्विक बदलाव, युद्ध या नई सरकारी नीतियां मशीनों के गणित को फेल कर सकती हैं। एक अनुभवी इन्सान इन बदलावों को भांप सकता है और तुरंत अपनी रणनीति बदल सकता है।
मशीनी पक्षपात का खतरा
आर्टिफिशियल मशीन वैसी ही सलाह देगी जैसा उसे सिखाया गया है। अगर उसे सिखाने वाले आंकड़ों में कोई कमी रह गई, तो उसकी सलाह भी पक्षपाती हो सकती है। वह किसी खास तरह की स्कीम की तरफ झुकी हो सकती है, जो शायद आपके लिए सही न हो।
सलाहकार का सही चुनाव जरूरी
यह जरूरी नहीं है कि हर इन्सान सही सलाह दे। बाजार में ऐसे भी लोग हैं, जो सिर्फ अपना कमीशन बनाने के लिए गलत फंड बेच देते हैं। इसलिए, यह बहुत जरूरी है कि आप केवल सेबी पंजीकृत निवेश सलाहकारों के पास ही जाएं। ये वे लोग हैं जो सरकार के कड़े नियमों और पारदर्शिता के दायरे में रहकर काम करते हैं। इनका उद्देश्य उत्पाद बेचना नहीं, बल्कि आपके लक्ष्यों को पूरा करना होता है।
AI को बनाएं अपना 'को-पायलट'
मशीनी दिमाग यानी AI आपके ज्ञान को बढ़ाने, जानकारी जुटाने और तुलना करने के लिए एक बेहतरीन औजार हो सकता है।
इसे एक 'को-पायलट' की तरह इस्तेमाल कीजिए, लेकिन अपनी गाड़ी की स्टीयरिंग इसके हाथ में मत दीजिए।
दोनों फ्लैगशिप फोन में कौन है ज्यादा पावरफुल, जानें तुलना।
21 Mar, 2026 12:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Samsung Galaxy S26 Ultra Vs Xiaomi 17 Ultra:आज के अल्ट्रा-प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट में Samsung Galaxy S26 Ultra और Xiaomi 17 Ultra दोनों ही दमदार विकल्प हैं। दोनों में Qualcomm Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर दिया गया है, जो फिलहाल सबसे पावरफुल मोबाइल चिपसेट माना जाता है। Samsung में 12GB और 16GB RAM के विकल्प मिलते हैं, जबकि Xiaomi 17 Ultra आमतौर पर 16GB RAM और ज्यादा स्टोरेज के साथ आता है। रोजमर्रा के इस्तेमाल, भारी गेमिंग, मल्टीटास्किंग और AI फीचर्स में दोनों ही फोन बेहद स्मूद परफॉर्मेंस देते हैं।
डिस्प्ले क्वालिटी
Samsung Galaxy S26 Ultra में 6.9-इंच का Dynamic AMOLED डिस्प्ले मिलता है, जिसमें 120Hz रिफ्रेश रेट और नई Privacy Display तकनीक दी गई है। यह फीचर साइड से देखने पर स्क्रीन की जानकारी छिपाने में मदद करता है। वहीं Xiaomi 17 Ultra में भी 6.9-इंच का AMOLED डिस्प्ले है, जो ज्यादा ब्राइटनेस और सिनेमैटिक कलर्स पर फोकस करता है। कुल मिलाकर Samsung बेहतर कलर बैलेंस और आउटडोर विजिबिलिटी देता है, जबकि Xiaomi ज्यादा ब्राइट और थिएटर जैसा अनुभव देता है।
कैमरा सेटअप
Samsung Galaxy S26 Ultra में 200MP का मुख्य कैमरा, अल्ट्रा-वाइड और टेलीफोटो लेंस के साथ 5x ऑप्टिकल जूम मिलता है, साथ ही एडवांस जूम फीचर्स भी दिए गए हैं। दूसरी ओर Xiaomi 17 Ultra का कैमरा Leica के साथ मिलकर तैयार किया गया है, जिसमें 1-इंच का बड़ा सेंसर और 200MP टेलीफोटो कैमरा मिलता है। लंबी दूरी की फोटोग्राफी और डिटेल कैप्चर के लिए Xiaomi का कैमरा ज्यादा आकर्षक साबित हो सकता है।
बैटरी और चार्जिंग
Xiaomi 17 Ultra में 6000mAh की बड़ी बैटरी और 90W फास्ट चार्जिंग दी गई है। वहीं Samsung Galaxy S26 Ultra में 5000mAh बैटरी और 65W चार्जिंग सपोर्ट मिलता है। हालांकि, Samsung का बेहतर सॉफ्टवेयर ऑप्टिमाइजेशन बैटरी बैकअप को संतुलित बनाए रखता है।
सॉफ्टवेयर और इकोसिस्टम
Samsung Galaxy S26 Ultra Android 16 पर आधारित One UI 8.5 के साथ आता है और कंपनी 7 साल तक अपडेट देने का वादा करती है। Xiaomi का HyperOS पहले से बेहतर हुआ है, लेकिन सॉफ्टवेयर स्थिरता और लंबे अपडेट के मामले में Samsung अभी भी आगे है। इसके अलावा S Pen सपोर्ट और Galaxy इकोसिस्टम Samsung को खास बनाते हैं।
सरकार ने गैस वितरण कंपनियों को कनेक्शन विस्तार के लिए कहा।
21 Mar, 2026 11:57 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम एशिया में संकट बढ़ने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के प्रभावित होने के मद्देनजर सरकार ने शहरी गैस वितरण (सीजीडी) संस्थाओं को होटलों, रेस्तरां और कैंटीन जैसे वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए पीएनजी कनेक्शन को प्राथमिकता देने की सलाह दी है। आईजीएल, एमजीएल, गेल और बीपीसीएल सहित सीजीडी कंपनियां वर्तमान में प्रोत्साहन राशि की पेशकश कर रही हैं। पीएनजीआरबी ने इन्हें आवेदन जमा करने और उपभोक्ताओं के घरों तक गैस आपूर्ति शुरू होने के बीच की समय सीमा को कम करने और जनजागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया है। सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से सीजीडी विस्तार के लिए अनुमोदन प्रक्रिया में तेजी लाने का भी अनुरोध किया है। इस बीच, केंद्र सरकार ने सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को वाणिज्यिक एलपीजी का अतिरिक्त 10 प्रतिशत आवंटन देने की पेशकश की है लेकिन अगर वे एलपीजी से पीएनजी में लंबे वक्त तक सहायता कर सकें। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, अब राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की जिम्मेदारी है कि वे इस सुधार को आगे बढ़ाएं और सीजीडी नेटवर्क का विस्तार सुनिश्चित करें और अपने क्षेत्रों में घरेलू और वाणिज्यिक/औद्योगिक पीएनजी उपभोक्ताओं को कनेक्शन जारी करने में तेजी लाएं। इस बीच, हाल के दिनों में 13,700 से अधिक नए पीएनजी कनेक्शन जारी किए गए हैं और 7,300 से अधिक उपभोक्ता एलपीजी से पीएनजी में स्थानांतरित हो गए हैं, जिससे एलपीजी की मांग पर दबाव कम करने में मदद मिली है। हालांकि मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति को देखते हुए एलपीजी की आपूर्ति अभी भी चिंता का विषय है लेकिन वितरकों के यहां आपूर्ति में कोई कमी नहीं आई है। खास बात यह है कि घबराहट में की गई बुकिंग में काफी गिरावट आई है। 13 मार्च को 89 लाख से घटकर 20 मार्च को लगभग 55 लाख रह गई है जबकि घरेलू एलपीजी की आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है।दक्षिण-एशियाई संगीत लगभग 18 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने गैर घरेलू एलपीजी के आवंटन के आदेश जारी किए हैं और सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में आपूर्ति उपलब्ध कराई जा रही है। शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिन्हें वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन का लगभग 50 प्रतिशत प्राप्त हो रहा है। सरकार ने बताया कि पिछले सप्ताह लगभग 11,360 मीट्रिक टन वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति की गई है। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को सुरक्षित आपूर्ति मिलती रहेगी जिसमें घरेलू एलपीजी और सीएनजी परिवहन को 100 प्रतिशत आपूर्ति शामिल है
उत्पादन में तीसरा, वैल्यू में 11वां स्थान हासिल किया भारत ने।
21 Mar, 2026 10:53 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत की फार्मास्यूटिकल (दवा) इंडस्ट्री अब वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान बना चुकी है, जो उत्पादन (वॉल्यूम) के हिसाब से दुनिया में तीसरे स्थान पर और मूल्य (वैल्यू) के हिसाब से 11वें स्थान पर है, जिसमें 3,000 से ज्यादा कंपनियां और 10,500 से अधिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स शामिल हैं। भारत का घरेलू दवा बाजार फिलहाल 60 अरब डॉलर का है और अनुमान है कि यह 2030 तक बढ़कर 130 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। आर्थिक सर्वे 2025-26 के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में इस सेक्टर का कुल कारोबार 4.72 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। पिछले 10 वर्षों में दवा निर्यात में सालाना औसतन 7 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी हुई है। भारत दुनिया में जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा सप्लायर है, और वैश्विक सप्लाई में इसकी हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत है। देश में 60 अलग-अलग चिकित्सा श्रेणियों में लगभग 60,000 जेनेरिक दवाएं बनाई जाती हैं। मजबूत मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, बढ़ते निर्यात, विदेशी निवेश और सरकार की योजनाओं ने मिलकर देश में उत्पादन को बढ़ाया है, आयात पर निर्भरता कम की है और भारत की वैश्विक बाजार में पकड़ मजबूत की है। साथ ही, सस्ती दवाओं की उपलब्धता, इनोवेशन, गुणवत्ता नियंत्रण और सख्त नियमों के कारण देश की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है और दुनिया में भारत की विश्वसनीयता बढ़ी है। यूरोपीय संघ, यूनाइटेड किंगडम और न्यूजीलैंड के साथ प्रस्तावित और हाल ही में हुए व्यापार समझौते भी इस सेक्टर को और मजबूती देंगे। इससे नए बाजार खुलेंगे और निवेश व रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। गौरतलब है कि भारत में अमेरिका के बाहर सबसे ज्यादा ऐसे मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं जिन्हें अमेरिकी संयुक्त राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन (यूएसएफडीए) की मंजूरी मिली है, जो भारतीय दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा पर वैश्विक भरोसा दिखाता है।
देश में करीब 500 सक्रिय दवा कच्चा माल (एपीआई) बनाने वाली कंपनियां हैं, जो वैश्विक एपीआई इंडस्ट्री का लगभग 8 प्रतिशत हिस्सा रखती हैं। भारत डिप्थीरिया, टिटनेस और काली खांसी (डीपीटी), बीसीजी और खसरा जैसी वैक्सीन सप्लाई में भी दुनिया में अग्रणी है। भारत की कंपनियां संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय बाल आपातकालीन कोष (यूनिसेफ) को करीब 60 प्रतिशत वैक्सीन सप्लाई करती हैं, जबकि डीपीटी और बीसीजी वैक्सीन की वैश्विक मांग का 40-70 प्रतिशत और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की खसरा वैक्सीन की मांग का 90 प्रतिशत भारत पूरा करता है। यह दिखाता है कि भारत का फार्मा निर्यात कितना मजबूत है और वह वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुका है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का दवा निर्यात 30.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो 2000-01 के 1.9 अरब डॉलर के मुकाबले लगभग 16 गुना ज्यादा है।
आयुर्वेदिक उत्पादों की बढ़ती मांग से निर्यात को मिला बढ़ावा।
21 Mar, 2026 06:57 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शिकागो। वैश्विक बाजार भू-राजनीतिक तनावों के कारण भारी उथल-पुथल का सामना कर रहे हैं। इस अस्थिरता के बीच भारत वैश्विक व्यापार के केंद्र में मजबूती से उभरा है। हाल ही में यूरोप के साथ हुआ अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक समझौता, जिसे मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स कहा जा रहा है, मुक्त व्यापार के नए रास्ते खोल रहा है। इसके साथ ही, अमेरिका-भारत के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते ने टैरिफ संबंधी बाधाओं को कम कर दिया है, जिससे अमेरिकी उत्पादों की भारत में पहुंच आसान होगी। हालांकि, 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कुछ टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया, लेकिन यह स्पष्ट है कि मुक्त व्यापार का दौर करवट ले रहा है और दुनिया के कई देश अब भारत जैसे भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार तलाश रहे हैं।
भारत-चीन पर दुनिया की बढ़ती निर्भरता
पश्चिमी देशों के न्यूट्रास्यूटिकल्स (पोषण और स्वास्थ्य उत्पाद) बाजार के लिए भारत और चीन रीढ़ की तरह हैं, क्योंकि इन देशों में 80% से ज्यादा कच्चे माल की सप्लाई एशिया से ही होती है। जड़ी-बूटियों, मसालों और वनस्पतियों के अर्क इन सप्लीमेंट्स के अनिवार्य हिस्से हैं। सप्लाई चेन में आए हालिया उतार-चढ़ाव ने बाजार को काफी प्रभावित किया है। व्यापारिक पाबंदियों और भारी टैक्स से बचने के लिए अब कई एशियाई सप्लायर वियतनाम और श्रीलंका जैसे देशों में अपना विस्तार कर रहे हैं।
बाजार के दिग्गज
भारत के हेल्थ सप्लीमेंट्स बाजार में कई दिग्गज कंपनियां हैं। 2024 में, वैश्विक कंपनी नेस्ले और भारत की डॉ. रेड्डीज लैब ने हाथ मिलाया ताकि नेस्ले के बड़े ब्रांड्स को डॉ. रेड्डीज के मजबूत ढांचे और नेटवर्क के जरिये घर-घर पहुंचाया जा सके। रेकिट जैसी कंपनी तो पिछले 90 वर्षों से बच्चों और शिशुओं के पोषण उत्पादों की प्रमुख सप्लायर है। हिमालय वेलनेस, एबॉट इंडिया और सन फार्मा जैसे नाम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े खिलाड़ी हैं।
पश्चिमी चलन-भारतीय मध्य एवं उच्च वर्ग
भारत के मध्य और उच्च वर्ग की खरीदारी की आदतें काफी हद तक उत्तरी अमेरिका और यूरोप के बाजारों से प्रभावित हैं। अंदरूनी निखार से लेकर तनाव कम करने, महिला स्वास्थ्य और उम्र बढ़ने के बावजूद सक्रिय रहने की चाहत ने नए चलन पैदा किए हैं। इसी वजह से मैग्नीशियम, ओमेगा-3, कोलेजन, प्लांट-प्रोटीन जैसी चीजें तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं।
आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान का संगम
भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद अब वैश्विक न्यूट्रा बाजार की पहली पसंद बन रही है। आधुनिक विज्ञान की मुहर लगने से सदियों पुराने हमारे ज्ञान को मजबूत आधार मिल रहा है। अश्वगंधा (तनाव दूर करने), हल्दी (सूजन कम करने) और आंवला जैसी जड़ी-बूटियों की मांग दुनियाभर में बढ़ी है।
वैज्ञानिक ढांचा और निवेश की नई सोच
दो दशक पहले दवा उद्योग में जो निवेश की सोच दिखी थी, वही अब क्लीनिकल रिसर्च और टैबलेट एवं कैप्सूल जैसे दवा देने के अन्य फॉर्मेट बनाने में दिखाई दे रही है। उत्पादन से घरेलू और निर्यात जरूरतें भी पूरी हो रही हैं।
लिपुलेख दर्रा खुलने से सीमा व्यापार में लौटेगी रौनक, स्थानीय कारोबारियों में उत्साह
CM शुभेंदु अधिकारी ने महिलाओं को दिया बड़ा तोहफा, मुफ्त बस सेवा शुरू
