व्यापार
बाजार में बुल्स का दबदबा, सेंसेक्स-निफ्टी ने पकड़ी रफ्तार
25 May, 2026 10:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत जबरदस्त तेजी और हरे निशान के साथ हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले बेहतर संकेतों और कच्चे तेल के दामों में आई भारी कमी के कारण निवेशकों का उत्साह चरम पर दिखा। शुरुआती कारोबार में ही बैंकिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टर्स में जमकर हुई खरीदारी के दम पर दोनों बेंचमार्क सूचकांकों ने लंबी छलांग लगाई। बाजार की इस मजबूती के बीच अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी 25 पैसे सुधरकर 95.35 के स्तर पर पहुंच गया।
सेंसेक्स और निफ्टी ने भरी ऊंची उड़ान
सोमवार को बाजार खुलते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला सूचकांक सेंसेक्स 863.23 अंक (1.14%) की बढ़त के साथ 76,278.58 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 256.25 अंक (1.08%) की बढ़त लेकर 23,975.55 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। इससे पहले बीते शुक्रवार को भी बाजार मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ था, हालांकि उस दिन विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बाजार से 4,440.47 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट बनी बाजार के लिए 'बूस्टर'
भारतीय शेयर बाजार में आई इस हालिया तेजी की सबसे बड़ी वजह वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड (कच्चे तेल) की कीमतों में दर्ज की गई 5.58 प्रतिशत की भारी गिरावट है। तेल का भाव 100-105 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर से गिरकर अब 97.76 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, ऐसे में कच्चे तेल का सस्ता होना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। इससे देश का आयात खर्च घटेगा, महंगाई पर लगाम लगेगी और कंपनियों का मुनाफा बढ़ेगा।
इन कंपनियों के शेयरों में रही रौनक, यहाँ दिखी सुस्ती
शुरुआती कारोबार के दौरान बाजार में चौतरफा खरीदारी का माहौल रहा:
मुनाफा कमाने वाले शेयर्स: महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), एचडीएफसी बैंक, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखी गई।
गिरावट वाले शेयर्स: दूसरी तरफ आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और फार्मा सेक्टर की सन फार्मा के शेयरों में मामूली बिकवाली और सुस्ती का रुख रहा।
ट्रंप के बयान और अंतरराष्ट्रीय बाजारों का असर
वैश्विक स्तर पर निवेशकों का सेंटिमेंट सुधरने के पीछे भू-राजनीतिक मोर्चे से आई अच्छी खबरें हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ बातचीत आगे बढ़ने और तनाव कम होने की संभावना जताए जाने के बाद एशियाई बाजारों में तेजी का रुख रहा। जापान का निक्केई सूचकांक 3.1 प्रतिशत चढ़कर 65,321.56 पर पहुंच गया, जबकि ऑस्ट्रेलिया और शंघाई के बाजारों में भी बढ़त रही। हालांकि, बुद्ध जयंती के कारण हांगकांग और दक्षिण कोरिया के बाजार बंद रहे, वहीं मेमोरियल डे के चलते सोमवार को अमेरिकी बाजारों में भी छुट्टी है।
तेल कंपनियों ने फिर बढ़ाई कीमतें, 10 दिन में चौथी बढ़ोतरी
25 May, 2026 08:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: देशभर में आम जनता को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने सोमवार को ईंधन की कीमतों में एक बार फिर तगड़ी बढ़ोतरी कर दी है। इस बार पेट्रोल के दामों में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया गया है। पिछले महज 10 दिनों के भीतर यह चौथी बार है जब पेट्रोल-डीजल महंगे हुए हैं, जिससे मध्यम वर्ग और वाहन चालकों का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।
आखिर क्यों लग रहा है महंगाई का झटका?
बाजार जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में आई तेजी, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और बढ़ती आयात लागत के कारण तेल कंपनियों पर दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। रिफाइनिंग मार्जिन में उतार-चढ़ाव भी इसका एक बड़ा कारण है। लंबे समय तक कीमतों को काबू में रखने के बाद अब तेल कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ धीरे-धीरे जनता पर डाल रही हैं। यही वजह है कि बीते 10 दिनों में ही ईंधन करीब 5 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है।
प्रमुख महानगरों में ईंधन के नए दाम
ताजा बढ़ोतरी के बाद देश के मुख्य शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं:
दिल्ली: पेट्रोल की कीमत 2.61 रुपये बढ़कर 102.12 रुपये और डीजल 2.71 रुपये बढ़कर 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गया है।
मुंबई: पेट्रोल का भाव 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है।
कोलकाता: यहाँ पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है।
चेन्नई: पेट्रोल की कीमत बढ़कर 107.77 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है।
माल ढुलाई महंगी होने से चौतरफा बढ़ेगी महंगाई
ईंधन की कीमतों में हुए इस बड़े इजाफे का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। डीजल के दाम बढ़ने से सबसे ज्यादा प्रभाव ट्रांसपोर्टेशन और माल ढुलाई पर पड़ता है। आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में फल, सब्जियां, दूध और राशन जैसी रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। इसके साथ ही खेती-किसानी और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
बढ़ते दामों पर शुरू हुई राजनीतिक बयानबाजी
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही इस बढ़ोतरी को लेकर अब सियासत भी गरमा गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने सोशल मीडिया पर सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि पिछले 10 दिनों में ईंधन के दाम लगातार बढ़ाकर जनता पर आर्थिक बोझ लादा जा रहा है, जिससे दिल्ली सहित पूरे देश में लोग बेहाल हैं।
सोना खरीदने का बदला ट्रेंड, जानें निवेश के नए और स्मार्ट तरीके
25 May, 2026 07:57 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय समाज में सोना केवल एक आभूषण नहीं है, बल्कि यह हर परिवार के लिए संकट का साथी और सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार माना जाता है। शादियों से लेकर विपरीत परिस्थितियों तक, देश के कोने-कोने में इसे सबसे सुरक्षित निवेश का जरिया माना गया है। हालांकि, मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए अब सोने को सिर्फ परंपरा के चश्मे से नहीं देखा जा सकता। बढ़ते आयात खर्च, डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच सोने की अनियंत्रित खरीद देश की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन रही है। ऐसे में आर्थिक जानकारों का मानना है कि सोना खरीदना गलत नहीं है, लेकिन इसके तरीकों में बदलाव लाना अब वक्त की मांग है।
क्यों चिंता का विषय बन रहा है सोने का अंधाधुंध आयात?
भारत वैश्विक स्तर पर सोने के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है। आंकड़ों के अनुसार, भारतीय घरों में लगभग 34,600 टन सोना जमा है, जिसका बाजार मूल्य 5 लाख करोड़ डॉलर से भी अधिक है। बड़ी बात यह है कि देश अपनी जरूरत का अधिकांश सोना विदेशों से आयात (इंपोर्ट) करता है। इससे देश के चालू खाता घाटे (CAD) पर सीधा असर पड़ता है और रुपये की स्थिति कमजोर होती है। यही वजह है कि देश के शीर्ष नेतृत्व की ओर से भी समय-समय पर लोगों से बिना वजह सोने की खरीदारी में थोड़ी कमी लाने का आग्रह किया जाता रहा है।
गहने और शुद्ध निवेश के अंतर को समझना बेहद जरूरी
वित्तीय विशेषज्ञों के मुताबिक, आम लोग अक्सर व्यक्तिगत उपयोग के लिए खरीदे जाने वाले गहनों और शुद्ध निवेश के बीच का अंतर नहीं समझ पाते। शादी-ब्याह के लिए आभूषण खरीदना एक सामाजिक जरूरत है, लेकिन केवल बचत या मुनाफे के लिए फिजिकल ज्वेलरी खरीदना घाटे का सौदा हो सकता है। पारंपरिक आभूषणों की खरीद में भारी मेकिंग चार्ज, जीएसटी और रिटेलर मार्जिन जुड़ा होता है, जिसके कारण ग्राहक को सोने की वास्तविक कीमत से काफी ज्यादा भुगतान करना पड़ता है।
डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ईटीएफ बन रहे हैं पहली पसंद
बदलते दौर में अब शहरी निवेशकों का रुझान भौतिक सोने (फिजिकल गोल्ड) के बजाय डिजिटल विकल्पों की तरफ तेजी से बढ़ा है। साल 2025 में गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) में तकरीबन 43 हजार करोड़ रुपये का बड़ा निवेश दर्ज किया गया। इसके अलावा, आजकल 'गोल्ड वॉल्ट' जैसे आधुनिक विकल्प भी लोकप्रिय हो रहे हैं। इसके तहत निवेशक कमोडिटी मार्केट (MCX) के लाइव रेट पर सोना-चांदी खरीद सकते हैं, जो सुरक्षित वॉल्ट में जमा रहता है और जरूरत पड़ने पर इसकी फिजिकल डिलीवरी भी ली जा सकती है। इसमें शुद्धता की पूरी गारंटी और पारदर्शिता मिलती है।
लंबी अवधि की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था का संतुलन
एक्सपर्ट्स की सलाह है कि सोने को रातों-रात अमीर बनने या त्वरित मुनाफे का जरिया नहीं मानना चाहिए। इसे अपने कुल निवेश पोर्टफोलियो का एक संतुलित हिस्सा (लगभग 10 से 15 फीसदी) बनाना ही समझदारी है। वैश्विक तनाव और महंगाई के दौर में सोना एक बेहतरीन सुरक्षा कवच जरूर है, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत रखने के लिए भी यह जरूरी है कि हम आभूषणों के रूप में लॉकर में सोना डंप करने के बजाय डिजिटल और पारदर्शी माध्यमों को अपनाएं।
पेट्रो उत्पाद फिर हुए महंगे, पटना के लोगों पर बढ़ा बोझ
25 May, 2026 07:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार की जनता पर सोमवार को महंगाई का दोहरा बोझ पड़ा है। तेल कंपनियों ने पिछले 12 दिनों के भीतर चौथी बार ईंधन की कीमतों में इजाफा किया है, जिसके तहत पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की गई है। इस ताजा वृद्धि के बाद राजधानी पटना में पेट्रोल की कीमत 112.70 रुपये और डीजल 99.87 रुपये प्रति लीटर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। इस लगातार बढ़ती महंगाई ने आम आदमी के बजट को पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया है।
12 दिनों में ₹5 तक महंगे हुए पेट्रो उत्पाद, यह है बढ़ोतरी का ग्राफ
ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से उपभोक्ता त्रस्त हैं। आज से पहले 23 मई को पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा हुआ था। वहीं, 19 मई को दोनों में 90 पैसे और 15 मई को एकमुश्त 3 रुपये प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की गई थी। इस तरह देखें तो पिछले महज 12 दिनों के भीतर ही पेट्रोल और डीजल की कीमतें करीब 5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुकी हैं, जिससे मालभाड़ा और आवागमन काफी महंगा हो गया है।
जानिए क्यों लगातार बढ़ रही हैं ईंधन की कीमतें?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में आई तेजी, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होता रुपया और आयात लागत में बढ़ोतरी होना इसके मुख्य कारण हैं। इसके साथ ही रिफाइनिंग मार्जिन में हुए बदलाव का असर भी कीमतों पर दिख रहा है। लंबे समय तक दाम स्थिर रखने के बाद अब सरकारी तेल कंपनियां अपनी बढ़ी हुई लागत का बोझ धीरे-धीरे उपभोक्ताओं की जेब पर डाल रही हैं।
दूध और डेयरी उत्पादों पर भी चली महंगाई की कैंची
ईंधन के साथ-साथ अब आम लोगों की रसोई का बजट भी बिगड़ गया है। बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (कॉम्फेड) ने आज से पूरे राज्य में सुधा ब्रांड के दूध और उससे बने उत्पादों की कीमतों में 2 से 3 रुपये प्रति लीटर/किलो तक की बढ़ोतरी कर दी है। सुधा डेयरी प्रबंधन के मुताबिक, हाल के दिनों में पशुपालकों से खरीदे जाने वाले कच्चे दूध की लागत में 2 रुपये से लेकर 3.13 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि हुई है, जिसके कारण यह फैसला लेना पड़ा।
पनीर, पेड़ा और मिठाइयां भी हुईं महंगी
सुधा ब्रांड का दूध महंगा होने के साथ-साथ इससे तैयार होने वाले अन्य डेयरी उत्पादों के दाम भी बढ़ा दिए गए हैं। अब ग्राहकों को सुधा का पनीर, पेड़ा, मक्खन, गुलाबजामुन और रसगुल्ला खरीदने के लिए भी पहले से अधिक कीमत चुकानी होगी। पेट्रोल-डीजल और दूध के दाम एक साथ बढ़ने से आम और मध्यमवर्गीय परिवारों में भारी निराशा है, क्योंकि इसका सीधा असर उनकी रोजमर्रा की थाली और जेब पर पड़ रहा है।
एसबीआई की बैंकिंग सेवाएं 25-26 मई को सामान्य रहेंगी
24 May, 2026 02:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के कर्मचारियों की 25 और 26 मई को प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल को टाल दिया गया है। बैंक प्रबंधन और कर्मचारी संघों के प्रतिनिधियों के बीच हाल ही में हुई सकारात्मक बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया। इससे एसबीआई के 52 करोड़ ग्राहकों को बड़ी राहत मिली है और अब बैंक की सभी शाखाएं सामान्य रूप से खुली रहेंगी। अखिल भारतीय एसबीआई कर्मचारी महासंघ (एआईएसबीआईएसएफ) ने पर्याप्त कर्मचारियों की भर्ती, आउटसोर्सिंग रोकने, करियर प्रगति और चिकित्सा प्रतिपूर्ति में सुधार सहित 16 सूत्री विभिन्न मांगों को लेकर यह हड़ताल बुलाई थी। महासंघ के महासचिव एल चंद्रशेखर ने बताया कि प्रबंधन के साथ मुंबई में हुई बैठक काफी सकारात्मक रही, जिसमें उनकी कई प्रमुख मांगों पर प्रगति हुई है। इस फैसले से करोड़ों ग्राहकों को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि हड़ताल होने पर चौथा शनिवार, रविवार और ईद अल-अजहा की छुट्टी के कारण लगातार पांच दिनों तक बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होतीं। बैंक ने पुष्टि की है कि 25 और 26 मई को सभी बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी।
दवा और आभूषण क्षेत्र को मिली आईपीओ की सौगात, सेबी ने दी मंजूरी
24 May, 2026 01:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने दवा क्षेत्र की कोटेक हेल्थकेयर और आभूषण क्षेत्र की दीपा ज्वेलर्स को आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने की मंजूरी दे दी है, जिससे दोनों कंपनियों के लिए पूंजी जुटाने का रास्ता साफ हो गया है। इन कंपनियों ने पहले ही अपने मसौदा दस्तावेज (डीआरएचपी) सेबी के पास दाखिल किए थे और हाल ही में नियामक से आवश्यक टिप्पणियां प्राप्त कीं, जिसे आईपीओ लाने की अनुमति माना जाता है। कोटेक हेल्थकेयर का आईपीओ 295 करोड़ रुपये तक के नए शेयर निर्गम के साथ-साथ 60 लाख शेयरों की बिक्री पेशकश (ओएफएस) का प्रस्ताव है। कंपनी इस पूंजी का उपयोग नई परियोजनाएं स्थापित करने, मौजूदा उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए उत्पाद बनाने में करेगी, जिसके लिए 226.25 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। शेष राशि सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए खर्च होगी। वहीं दीपा ज्वेलर्स का आईपीओ 250 करोड़ रुपये के नए निर्गम और 1,18,48,340 शेयरों की बिक्री पेशकश (ओएफएस) का संयोजन है। इस ओएफएस में प्रर्वतक अशोक अग्रवाल और सीमा अग्रवाल अपने शेयर बेचेंगे। यह मंजूरी इन कंपनियों को बाजार से पूंजी जुटाने और अपनी विस्तार योजनाओं को गति देने का अवसर प्रदान करेगी।
दालों का आयात 34 फीसदी घटा, बढ़ेंगे दाम
24 May, 2026 12:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । देश में दालों की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में दालों का आयात 34 प्रतिशत घटकर 3.63 अरब डॉलर रह गया है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 5.54 अरब डॉलर था। आयात में कमी के कारण आने वाले महीनों में दालों की कीमतों में तेजी आने की आशंका जताई जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार मसूर और पीली मटर के आयात में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है। मसूर दाल के आयात में करीब 6 प्रतिशत और पीली मटर में 47 प्रतिशत तक कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घरेलू उत्पादन में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं हुई तो बाजार में दालों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
इस बार मानसून और फसल उत्पादन को लेकर भी चिंता बनी हुई है। यदि उत्पादन कमजोर रहा तो सरकार पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है। हालांकि सरकार के पास फिलहाल बफर स्टॉक मौजूद है, लेकिन लगातार घटते आयात के चलते खुदरा बाजार में दाम बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
ग्रामीण युवाओं के लिए खुशखबरी, VB-G RAM G कानून के मसौदे पर सरकार का बड़ा कदम।
23 May, 2026 04:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025' (VB-G-RAM-G) के मसौदा नियमों को आधिकारिक तौर पर प्रकाशित कर दिया है। सरकार ने इन नियमों को आम जनता और संबंधित पक्षों के सुझावों व परामर्श के लिए सार्वजनिक किया है। इस नए कानून को आगामी 1 जुलाई से देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, इन नियमों का मुख्य उद्देश्य इस महत्वाकांक्षी कानून को जमीन पर प्रभावी ढंग से उतारने के लिए एक मजबूत और पारदर्शी ढांचा तैयार करना है।
1. मनरेगा की जगह लेगा नया कानून, काम और अधिकार रहेंगे सुरक्षित
यह नया अधिनियम मौजूदा ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम 'मनरेगा' (MGNREGA) का स्थान लेगा। सरकार द्वारा जारी मसौदा नियमों में मनरेगा से 'वीबी-ग्राम जी' में बदलाव की पूरी रूपरेखा तय की गई है। इस संक्रमण काल (Transition Period) के दौरान यह विशेष ध्यान रखा गया है कि गांवों में चल रहे मौजूदा काम प्रभावित न हों। इसके तहत पुरानी देनदारियों का निपटान, रिकॉर्ड का ट्रांसफर और ई-केवाईसी (e-KYC) सत्यापित जॉब कार्ड की वैधता को बरकरार रखा गया है, ताकि नई योजना के पूरी तरह लागू होने तक श्रमिकों के अधिकार सुरक्षित रहें।
2. शिकायत निवारण और बेरोजगारी भत्ते के लिए बनेगा मजबूत ढांचा
यह मसौदा नियम अधिनियम की धारा 33 और अन्य प्रमुख प्रावधानों के तहत तैयार किए गए हैं। नियमों के दायरे में प्रशासनिक खर्चों का प्रबंधन, श्रमिकों की शिकायतों के निवारण के लिए एक मजबूत तंत्र की स्थापना, और समय पर मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करना शामिल है। इसके अलावा, यदि समय पर काम नहीं मिलता है, तो बेरोजगारी भत्ते के भुगतान के नियम और सामान्य आवंटन से अधिक होने वाले खर्चों के मैनेजमेंट को भी इसमें बेहद स्पष्ट किया गया है।
3. राष्ट्रीय संचालन समिति और केंद्रीय परिषद संभालेंगी कमान
देशभर में इस योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक विस्तृत प्रशासनिक और वित्तीय ढांचा तैयार किया जा रहा है। इन नियमों के तहत एक राष्ट्रीय स्तर की संचालन समिति और 'केंद्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद' का गठन किया जाएगा, जो इसके कार्यों और जिम्मेदारियों की निगरानी करेगी। इसमें बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनिक व वित्तीय खर्चों के प्रबंधन के लिए भी विशेष प्रावधान जोड़े गए हैं।
4. सहभागी शासन पर जोर: जनता और विशेषज्ञों से मांगे सुझाव
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इन नियमों को अंतिम रूप देने से पहले एक व्यापक परामर्श प्रक्रिया अपनाई जा रही है। सरकार का उद्देश्य सहभागी शासन को बढ़ावा देना है। इसके लिए सभी राज्य सरकारों, विषय विशेषज्ञों, संस्थानों, नागरिक समाज संगठनों (NGOs) और आम जनता से रचनात्मक प्रतिक्रिया और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं, ताकि इस कानून को अधिक प्रभावी और समावेशी बनाया जा सके।
पेट्रोल-डीजल की खपत को लेकर अफवाहों पर Indian Oil का जवाब
23 May, 2026 01:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: पश्चिम एशिया में गहराते अमेरिका-ईरान सैन्य गतिरोध ने पूरी दुनिया को बड़े ऊर्जा संकट में डाल दिया है। 28 फरवरी 2026 से भड़की इस जंग के चलते रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'होर्मुज स्ट्रेट' जलमार्ग से कच्चे तेल और गैस का परिवहन लगभग रुक गया है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ा है, जहां क्रूड ऑयल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल की सीमा को पार कर गए हैं। वैश्विक स्तर पर मची इस खलबली के बीच भारत में ईंधन की उपलब्धता को लेकर देश की दिग्गज सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने स्थिति स्पष्ट की है। कंपनी का कहना है कि देश में पेट्रोल-डीजल की कोई किल्लत नहीं है। कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर दिखी अस्थाई कमी केवल स्थानीय स्तर पर सप्लाई चेन में आए बदलावों की वजह से है।
इन कारणों से सरकारी फ्यूल स्टेशनों पर उमड़ी उपभोक्ताओं की भीड़
इंडियन ऑयल ने कुछ चुनिंदा आउटलेट्स पर मांग में आई अचानक तेजी की वजहों का खुलासा किया है। कंपनी के अनुसार, वर्तमान में फसलों की कटाई का सीजन होने के कारण ग्रामीण इलाकों में डीजल की मौसमी मांग काफी बढ़ गई है। इसके अलावा, प्राइवेट रिटेलर्स के पंपों पर तेल की कीमतें ज्यादा होने की वजह से भारी वाहन और आम उपभोक्ता बड़ी संख्या में सरकारी पेट्रोल पंपों का रुख कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर थोक ईंधन की ऊंची कीमतों का असर इस पूरे बदलाव में साफ देखा जा रहा है।
चालू महीने में ईंधन की मांग ने बनाए नए रिकॉर्ड
सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 से 22 मई के बीच देश में पेट्रोल की खपत में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 14 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, डीजल की मांग में भी करीब 18 प्रतिशत का असाधारण उछाल आया है। ईंधन की इस रिकॉर्ड मांग के बाद भी तेल कंपनियां देश के हर हिस्से में आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए पूरी ताकत से जुटी हुई हैं।
सरकारी तेल कंपनियों के पास सुरक्षित है पर्याप्त बैकअप
उपभोक्ताओं को भरोसा दिलाते हुए IOC ने कहा कि देश भर में फैले उसके 42,000 से अधिक पेट्रोल पंपों में से अधिकांश पर ईंधन का स्टॉक पूरी तरह सामान्य है। सप्लाई में रुकावट की शिकायतें केवल कुछ गिने-चुने पंपों से ही आई हैं। सभी प्रमुख सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां देश में ईंधन का पर्याप्त रिजर्व बनाए हुए हैं और जहां भी स्थानीय स्तर पर दिक्कतें आ रही हैं, उन्हें तुरंत ठीक किया जा रहा है।
अनावश्यक भीड़ लगाने से बचें, अफवाहों पर न करें भरोसा
इंडियन ऑयल ने आम जनता से पैनिक बाइंग (घबराहट में जरूरत से ज्यादा तेल खरीदने) न करने की पुरजोर अपील की है। कंपनी ने आश्वस्त किया है कि वह जमीनी हालात पर लगातार नजर रख रही है। उपभोक्ताओं तक बिना किसी बाधा के ईंधन पहुंचाने के लिए सभी उचित कदम उठाए जा चुके हैं, इसलिए किसी भी तरह की भ्रामक खबरों में आकर पेट्रोल पंपों पर कतारें न लगाएं।
ITR में इनकम मिसमैच होने पर क्या करें, आसान उपाय जानें
23 May, 2026 12:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख जैसे-जैसे पास आ रही है, टैक्सपेयर्स की धड़कनें बढ़ने लगी हैं। इस बार रिटर्न दाखिल करते समय आपको एक्स्ट्रा सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि एक छोटी सी चूक भी आपके लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है। पिछले साल जिन रिटर्न में कमियां पाई गई थीं, उनकी प्रोसेसिंग में काफी लंबा वक्त लगा था। इनमें सबसे ज्यादा मामले कमाई की सही जानकारी न देने (इनकम मिसमैच) के थे, जिसके चलते लाखों लोगों का रिफंड अटक गया था और कईयों को टैक्स विभाग के नोटिस का सामना करना पड़ा था।
टैक्स विभाग का एडवांस एआई सिस्टम पकड़ रहा है गलतियां
टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का डेटा-मैचिंग सिस्टम पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो चुका है। विभाग अब गड़बड़ियों को पकड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित रिस्क एसेसमेंट और सिस्टम-बेस्ड वेरिफिकेशन का इस्तेमाल कर रहा है। ऐसे में अगर आपके द्वारा दिखाई गई कमाई और टैक्स विभाग के पास मौजूद आपके डेटा में थोड़ा भी अंतर मिलता है, तो आपका फॉर्म रिजेक्ट हो सकता है और जांच शुरू हो सकती है।
एआईएस (AIS) को बनाएं अपना मददगार
इस तरह की परेशानियों से बचने के लिए जानकारों का कहना है कि टैक्सपेयर्स को एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) की मदद लेनी चाहिए। टैक्स विभाग के पास हर टैक्सपेयर का पूरा वित्तीय लेखा-जोखा इस स्टेटमेंट में मौजूद रहता है। राहत की बात यह है कि आप इसे इनकम टैक्स की आधिकारिक वेबसाइट से आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं। रिटर्न भरने से पहले इसके जरिए अपनी इनकम को क्रॉस-चेक करना सबसे सुरक्षित तरीका है।
आपके हर बड़े-छोटे लेन-देन पर है पैनी नजर
AIS में आपके पूरे फाइनेंशियल ईयर की हर छोटी-बड़ी गतिविधि दर्ज होती है। इसमें आपकी सैलरी, बैंक से मिलने वाला ब्याज, डिविडेंड, शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में किया गया निवेश, टीडीएस (TDS), टीसीएस (TCS), विदेश भेजा गया पैसा और प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री जैसी तमाम जानकारियां शामिल होती हैं। ये सारा डेटा टैक्स विभाग के पास बैंकों, म्यूचुअल फंड हाउसेज और अन्य वित्तीय संस्थानों के जरिए पहुंचता है।
इन जरूरी दस्तावेजों से जरूर करें मिलान
टैक्स कंसल्टेंट्स का मानना है कि केवल AIS देखना ही काफी नहीं है, बल्कि इसमें दी गई जानकारियों का मिलान अपने बैंक अकाउंट स्टेटमेंट, फॉर्म 26AS और फॉर्म 16 से भी कर लें। खासतौर पर नौकरीपेशा लोगों के लिए यह बेहद जरूरी है कि उनके फॉर्म 16 में दर्ज सैलरी और AIS में दिख रही सैलरी का अमाउंट एक समान हो। अगर इसमें कोई गलती नजर आती है, तो उसे समय रहते ठीक कराया जा सकता है।
मिसमैच होने पर आ सकता है कानूनी नोटिस
अगर आपकी प्रॉपर्टी की डील, म्यूचुअल फंड निवेश, क्रेडिट कार्ड के बड़े पेमेंट्स या विदेशी लेन-देन की जानकारी आपके टैक्स रिटर्न से मेल नहीं खाती है, तो ऑटोमैटिक सिस्टम इसे तुरंत पकड़ लेगा। ऐसी स्थिति में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपसे स्पष्टीकरण मांग सकता है और असंतोषजनक जवाब होने पर कानूनी नोटिस भी जारी कर सकता है। इसलिए समझदारी इसी में है कि पूरा समय लेकर, सही आंकड़ों के साथ ही अपना रिटर्न फाइल करें।
F&O सेगमेंट से बाहर हुए एक्साइड और नुवामा, NSE ने किया ऐलान
23 May, 2026 11:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने वायदा एवं विकल्प (F&O) सेगमेंट से दो प्रमुख कंपनियों को बाहर करने का बड़ा फैसला लिया है। एनएसई ने अधिसूचना जारी कर बताया कि एक्साइड इंडस्ट्रीज (Exide Industries) और नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट (Nuvama Wealth Management) को डेरिवेटिव्स सेगमेंट से हटाया जा रहा है। दिए गए समाचार को बिना किसी बाहरी मीडिया संदर्भ के, नए शब्दों और सबहेडिंग्स के साथ नीचे व्यवस्थित किया गया है:
29 जुलाई के बाद दोनों शेयरों में नहीं होगी F&O ट्रेडिंग
एक्सचेंज द्वारा जारी बयान के मुताबिक, वर्तमान में चल रहे मई, जून और जुलाई 2026 के कॉन्ट्रैक्ट्स अपनी तय एक्सपायरी तारीख तक सामान्य रूप से ट्रेड के लिए उपलब्ध रहेंगे। इस दौरान नियमों के तहत नई स्ट्राइक प्राइस भी पेश की जा सकती हैं। हालांकि, इन मौजूदा सीरीज की समाप्ति के बाद दोनों कंपनियों के लिए कोई भी नया मंथली कॉन्ट्रैक्ट जारी नहीं किया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि 29 जुलाई, 2026 के बाद से इन दोनों सिक्योरिटीज में वायदा कारोबार पूरी तरह बंद हो जाएगा।
सेबी (SEBI) के कड़े नियमों के तहत लिया गया एक्शन
NSE का यह कदम बाजार नियामक सेबी (SEBI) द्वारा अगस्त 2024 में जारी किए गए नए एलिजिबिलिटी फ्रेमवर्क पर आधारित है। सेबी ने मार्केट में होने वाले हेरफेर (Manipulation) को रोकने और सुरक्षा बढ़ाने के लिए एफएंडओ सेगमेंट के नियमों को काफी सख्त कर दिया था। नए मानकों के अनुसार, किसी भी स्टॉक को डेरिवेटिव सेगमेंट में बने रहने या शामिल होने के लिए पिछले 6 महीनों के दौरान मार्केट कैपिटलाइजेशन और ट्रेडेड वैल्यू के मामले में देश के टॉप 500 शेयरों में शुमार होना अनिवार्य है।
क्या हैं F&O की शर्तें और कब हो सकती है दोबारा एंट्री?
बाजार के नियमों के तहत एफएंडओ लिस्ट में बने रहने के लिए कंपनियों को कुछ बेहद जरूरी पैमानों को पूरा करना होता है, जिनमें शामिल हैं:
MQSOS: मीडियन क्वार्टर-सिग्मा ऑर्डर साइज न्यूनतम ₹75 लाख होना चाहिए।
MWPL: मार्केट-वाइड पोजीशन लिमिट कम से कम ₹1,500 करोड़ की होनी जरूरी है।
ADDV: एवरेज डेली डिलीवरी वैल्यू का ₹35 करोड़ होना अनिवार्य है।
जो भी शेयर इन मानकों पर खरे नहीं उतरते, उन्हें इस सेगमेंट से बाहर का रास्ता देखना पड़ता है। नियम के अनुसार, एक बार बाहर होने के बाद इन स्टॉक्स को कम से कम एक साल के लिए दोबारा शामिल नहीं किया जा सकता। एक साल की अवधि बीतने के बाद, यदि ये स्टॉक्स लगातार छह महीनों तक इन सभी शर्तों को पूरा करते हैं, तभी इनकी वापसी पर विचार किया जा सकता है।
बाजार का हाल: रिकॉर्ड तेजी के साथ हरे निशान में बंद हुए सूचकांक
इस बड़ी खबर के बीच, 22 मई को भारतीय शेयर बाजार मजबूती के साथ बंद होने में कामयाब रहे। सेंसेक्स 0.31 फीसदी (231 अंक) की बढ़त दर्ज करते हुए 75,415 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 0.27 फीसदी (64 अंक) चढ़कर 23,719 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। बैंकिंग सेक्टर में अच्छी रौनक रही और बैंक निफ्टी 1.15 फीसदी उछलकर बंद हुआ। अन्य शेयरों की बात करें तो वरुण बेवरेजेज में 3.77 फीसदी की तेजी देखी गई, जबकि मैक्स हेल्थकेयर का शेयर 6 फीसदी से ज्यादा टूटकर बंद हुआ।
Wipro Share Buyback: रिकॉर्ड डेट 5 जून, निवेशकों के लिए बड़ा मौका
23 May, 2026 10:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु: दिग्गज आईटी कंपनी विप्रो (Wipro) ने अपने शेयरहोल्डर्स के लिए बड़े बायबैक प्रोग्राम का एलान किया है। कंपनी बाजार से ₹15,000 करोड़ मूल्य के शेयर वापस खरीदने जा रही है। इस खबर में मनीकंट्रोल या किसी अन्य अनपेक्षित संदर्भ को हटाकर, पूरे समाचार को नए स्वरूप और सबहेडिंग्स के साथ नीचे प्रस्तुत किया गया है:
विप्रो का ₹15,000 करोड़ का मेगा बायबैक प्लान, ₹250 तय की कीमत
विप्रो लिमिटेड अपने शेयरधारकों से करीब 60 करोड़ इक्विटी शेयरों की वापस खरीदारी (बायबैक) करेगी। कंपनी बोर्ड ने इस ₹15,000 करोड़ के प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी दे दी थी, जिसमें प्रमोटर ग्रुप भी अपनी हिस्सेदारी बेचने में रुचि दिखा रहा है। इस बायबैक के लिए 5 जून को रिकॉर्ड डेट तय किया गया है, यानी इस तारीख तक जिन निवेशकों के पास विप्रो के शेयर होंगे, केवल वही इस बायबैक का लाभ उठा सकेंगे। कंपनी ने बायबैक के लिए ₹250 प्रति शेयर का भाव तय किया है। गौरतलब है कि विप्रो करीब 3 साल के अंतराल के बाद यह कदम उठा रही है। इससे पहले कंपनी ने जून 2023 में ₹445 प्रति शेयर के भाव पर ₹12,000 करोड़ का बायबैक किया था।
शेयर बाजार में प्रदर्शन और 2026 में 24% की गिरावट
विप्रो का शेयर शुक्रवार, 22 मई को BSE पर ₹203.10 के स्तर पर बंद हुआ, जिससे कंपनी का कुल मार्केट कैप ₹2.13 लाख करोड़ बैठता है। साल 2026 में अब तक विप्रो के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई है और यह लगभग 24% तक टूट चुका है। BSE 100 इंडेक्स का हिस्सा रहने वाले इस शेयर का 52 हफ्तों का उच्चतम स्तर ₹273.15 और निचला स्तर ₹186.50 रहा है। हिस्सेदारी की बात करें तो मार्च 2026 के अंत तक कंपनी में प्रमोटर्स के पास 72.62% का बड़ा हिस्सा था।
मार्च तिमाही के नतीजे: मुनाफे में मामूली कमी, रेवेन्यू बढ़ा
जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही के दौरान विप्रो का समेकित शुद्ध मुनाफा (Consolidated Net Profit) सालाना आधार पर 1.89% गिरकर ₹3,501.8 करोड़ रहा, जो पिछले साल समान अवधि में ₹3,569.6 करोड़ था। हालांकि, तिमाही आधार पर मुनाफे में 12.2% का सुधार देखा गया है। मार्च तिमाही में कंपनी की कुल आय 7.6% बढ़कर ₹24,236.3 करोड़ रही। अगर पूरे वित्तीय वर्ष 2025-26 की बात करें, तो कंपनी का सालाना शुद्ध मुनाफा 0.47% की मामूली बढ़त के साथ ₹13,197.4 करोड़ और कुल रेवेन्यू 3.96% बढ़कर ₹92,624 करोड़ पर पहुंच गया है।
विप्रो के स्टॉक पर दिग्गज ब्रोकरेज फर्म्स की मिली-जुली राय
कंपनी को ट्रैक करने वाले 45 मार्केट एनालिस्ट्स में से 11 ने इसे खरीदने ('Buy') की सलाह दी है, जबकि 19 ने 'Hold' और 15 ने 'Sell' रेटिंग दी है। तिमाही नतीजों और कमजोर गाइडेंस के बाद प्रमुख ब्रोकरेज हाउसेज का नजरिया इस प्रकार है:
नोमुरा: ₹250 के टारगेट के साथ 'Buy' रेटिंग दी।
मोतीलाल ओसवाल व HSBC: क्रमशः ₹215 और ₹210 के टारगेट के साथ 'Hold' रेटिंग बनाए रखी। विशेषज्ञों का मानना है कि बायबैक से शॉर्ट-टर्म में शेयर को सपोर्ट मिलेगा, लेकिन लॉन्ग-टर्म रिकवरी अभी भी धीमी है।
जेपी मॉर्गन व आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज: दोनों ने ₹200 के टारगेट के साथ 'Neutral/Hold' की सलाह दी।
मॉर्गन स्टेनली व कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज: क्रमशः ₹194 और ₹190 के प्राइस टारगेट के साथ 'Underweight/Sell' रेटिंग दी है।
CNG के बढ़ते दामों ने बढ़ाई लोगों की चिंता, देखें नया प्राइस लिस्ट
23 May, 2026 08:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी (CNG) गाड़ियों से सफर करने वाले आम लोगों को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने कंप्रेस्ड नेचुरल गैस की कीमतों में ₹1 प्रति किलोग्राम का इजाफा कर दिया है। पिछले महज 10 दिनों के भीतर यह तीसरी बार है जब सीएनजी के दाम बढ़ाए गए हैं। इस खबर को बिना किसी बाहरी मीडिया संदर्भ के, नए शब्दों और सबहेडिंग्स के साथ नीचे प्रस्तुत किया गया है:
दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी के नए रेट लागू, 10 दिनों में तीसरी बढ़ोतरी
आज सुबह से प्रभावी हुई नई दरों के बाद देश की राजधानी दिल्ली में सीएनजी की कीमत बढ़कर ₹81.09 प्रति किलोग्राम हो गई है। वहीं, नोएडा, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में अब ग्राहकों को प्रति किलो सीएनजी के लिए ₹89.70 का भुगतान करना होगा। इससे पहले तेल कंपनियों ने 15 मई को ₹2 और फिर 18 मई को ₹1 की बढ़ोतरी की थी।
विभिन्न शहरों में सीएनजी की नई दरें (रुपये/किग्रा) इस प्रकार हैं:
अंतरराष्ट्रीय संकट और सप्लाई रूट बाधित होना बनी मुख्य वजह
लगातार बढ़ रही कीमतों के पीछे मुख्य कारण वैश्विक मोर्चे पर उपजा तनाव है। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी गंभीर संकट की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एनर्जी कॉस्ट काफी बढ़ गई है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' रूट के बंद होने से सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस वैश्विक दबाव के चलते सरकारी तेल कंपनियों के लिए घरेलू बाजार में पुरानी कीमतों को बरकरार रखना मुमकिन नहीं रह गया था।
कंपनियों का दैनिक घाटा ₹1600 करोड़ पार, इसलिए टुकड़ों में बढ़ रहे दाम
इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) को अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगे दामों पर कच्चा तेल और गैस खरीदना पड़ रहा है। घरेलू बाजार में उस अनुपात में कीमतें न बढ़ने के कारण इन कंपनियों को रोजाना करीब ₹1,600 करोड़ का भारी नुकसान झेलना पड़ रहा था। हालांकि, देश में खुदरा महंगाई को बेलगाम होने से रोकने के लिए सरकार ने कंपनियों को एक साथ बड़ी बढ़ोतरी करने की इजाजत नहीं दी है, यही वजह है कि कंपनियां ₹1 या ₹2 करके टुकड़ों में दाम बढ़ा रही हैं।
आम जनता की जेब पर सीधा असर और पीएम मोदी की 'वर्क फ्रॉम होम' की अपील
सीएनजी के महंगे होने का सीधा असर आम आदमी के मासिक बजट और परिवहन लागत पर पड़ेगा। दिल्ली-एनसीआर में ऑटो, कैब (ओला/उबर), बसें और माल ढुलाई करने वाले वाहन मुख्य रूप से सीएनजी पर ही निर्भर हैं। ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्टर्स पर दबाव बढ़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में यात्रा और माल भाड़ा महंगा होना तय है।
इसी बढ़ते ऊर्जा संकट और देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों से ईंधन बचाने का आग्रह किया था। पीएम ने कंपनियों से अपील की थी कि वे अधिकतम 'वर्क फ्रॉम होम' (घर से काम) को बढ़ावा दें, ताकि सड़कों पर वाहनों की संख्या कम हो और कच्चे तेल की घरेलू मांग को घटाया जा सके।
निफ्टी का प्रमुख रेजिस्टेंस 23800-23900, तोड़ने पर 24000-24200 की ओर उछाल
22 May, 2026 03:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। घरेलू शेयर बाजार में 22 मई को दोपहर के कारोबारी सत्र के दौरान जबरदस्त हलचल देखी गई। शुरुआती कारोबार में करीब 0.75 प्रतिशत की शानदार बढ़त बनाने के बाद बेंचमार्क सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी ने ऊपरी स्तरों से अपनी कुछ बढ़त गंवा दी। दोपहर 2:38 बजे के करीब, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स लगभग 267 अंकों की मजबूती के साथ 75,450.63 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी करीब 72 अंकों की बढ़त लेकर 23,727.40 पर बना हुआ था। बाजार के इस रुख के बीच करीब 2,058 शेयरों में खरीदारी और 1,726 शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया।
बैंकिंग और एनबीएफसी सेक्टर चमके; ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में भी आई तेजी
आज के कारोबार की सबसे बड़ी विशेषता बैंकिंग और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के शेयरों में आई जोरदार तेजी रही। एनबीएफसी इंडेक्स में 1.5 फीसदी से ज्यादा का उछाल दर्ज किया गया, जिसमें एमएफएसएल, आईसीआईसीआई प्रू और श्रीराम फाइनेंस जैसे बड़े शेयर दो से तीन प्रतिशत तक मजबूत हुए। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) सेगमेंट में भी बेहतरीन रौनक रही, जहां डिक्सन टेक्नोलॉजीज का शेयर 4 फीसदी तक उछल गया। ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में भी आज अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जबकि आईटी और फार्मा कंपनियों पर हल्का दबाव बना रहा।
कमजोर नतीजों से मैक्स हेल्थ और ऑरो फार्मा टूटे; अच्छे रिज़ल्ट से आरसीएफ उछला
कॉर्पोरेट नतीजों का सीधा असर आज के बाजार पर साफ दिखाई दिया। उम्मीद से कमजोर तिमाही नतीजे पेश करने के कारण मैक्स हेल्थकेयर और ऑरोबिंदो फार्मा के शेयर 5 फीसदी से ज्यादा टूटकर वायदा बाजार (F&O) के टॉप लूजर्स की कतार में शामिल हो गए। इसके साथ ही वेल्सपन कॉर्प, सन टीवी और इंजीनियर्स इंडिया के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत, शानदार तिमाही नतीजों के दम पर राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स (RCF) के शेयर में लगभग 5 फीसदी की शानदार बढ़त देखी गई।
आरबीआई डिविडेंड और शॉर्ट कवरिंग ने बाजार को दी बड़ी संजीवनी
बाजार के जानकारों और विश्लेषकों के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार इस समय एक बड़ी 'होप रैली' (उम्मीदों की दौड़) के दौर से गुजर रहा है। वीकेंड से ठीक पहले शॉर्ट कवरिंग (बिकवाली के सौदों को वापस खरीदना) होने की वजह से बाजार को निचला सपोर्ट मिला। इसके अलावा, आज होने वाली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अहम बोर्ड बैठक से रिकॉर्ड लाभांश (डिविडेंड) मिलने की उम्मीद ने भी सरकारी और निजी बैंकों के शेयरों में जान फूंक दी। बाजार के पंडितों का मानना है कि लार्ज कैप (बड़ी कंपनियों के) शेयरों पर निवेशकों का भरोसा आज ज्यादा मजबूत रहा।
निफ्टी के लिए 23,900 की बड़ी दीवार; बैंक निफ्टी में 55,000 का लक्ष्य संभव
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, आने वाले दिनों में बाजार की चाल तय करने के लिए कुछ तकनीकी स्तर बेहद महत्वपूर्ण होंगे:
निफ्टी के लिए रणनीति: निफ्टी के लिए फिलहाल 23,600 से 23,650 का स्तर एक मजबूत आधार (बेस) का काम करेगा। ऊपरी स्तर पर 23,800 से 23,900 के बीच एक मजबूत प्रतिरोध (दीवार) है। यदि निफ्टी इस सीमा को पार करने में सफल रहता है, तो यह बहुत जल्द 24,000 से 24,200 के नए स्तरों को छू सकता है।
बैंक निफ्टी का आउटलुक: बैंकिंग इंडेक्स ने 52,800 के स्तर पर एक मजबूत डबल बॉटम (सुधार का संकेत) बनाया है। अब बैंक निफ्टी के लिए 54,200 के ऊपर बने रहना बेहद जरूरी है। यदि यह इसके ऊपर टिकने में कामयाब रहा, तो इसमें 55,000 के स्तर तक की रैली आसानी से देखी जा सकती है।
LG Electronics India में बिकवाली का दबाव, Q4 परिणाम के बाद शेयर 4% गिरा
22 May, 2026 02:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। घरेलू उपकरण (होम अप्लायंसेज) और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया लिमिटेड (LG Electronics India) के शेयरों में 22 मई को भारी बिकवाली का दबाव देखा गया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर कारोबार के दौरान कंपनी का स्टॉक 4.4 प्रतिशत तक लुढ़क कर 1462.65 रुपये के निचले स्तर पर पहुंच गया। शेयरों में आई इस गिरावट की मुख्य वजह जनवरी-मार्च 2026 तिमाही के नतीजों में कंपनी के शुद्ध मुनाफे (नेट प्रॉफिट) का घटना माना जा रहा है।
तिमाही मुनाफे में 8% से अधिक की गिरावट, खर्चों ने बढ़ाया दबाव
मार्च 2026 को समाप्त हुई चौथी तिमाही के दौरान एलजी इंडिया का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 8.19 प्रतिशत घटकर 692.7 करोड़ रुपये रह गया, जो इससे पिछले वर्ष की समान तिमाही में 754.54 करोड़ रुपये था। मुनाफे में आई इस कमी का बड़ा कारण इनपुट लागत (कच्चे माल की कीमत) में बढ़ोतरी और विदेशी मुद्रा (करेंसी) में आई कमजोरी को माना जा रहा है। इसके चलते कंपनी के कुल खर्च सालाना आधार पर 11 प्रतिशत बढ़कर 7,223.6 करोड़ रुपये पर पहुंच गए और कामकाजी मार्जिन (EBITDA मार्जिन) भी 230 बेसिस पॉइंट गिरकर 11.7 प्रतिशत रह गया।
रेवेन्यू में 8% की बढ़ोतरी; होम अप्लायंस और बड़े टीवी की मांग में उछाल
मुनाफे में गिरावट के बावजूद, कंपनी के परिचालन राजस्व (रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस) में सुधार दर्ज किया गया है। मार्च 2026 तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 8.12 प्रतिशत की बढ़त के साथ 8,053.55 करोड़ रुपये रहा, जो मार्च 2025 तिमाही में 7,448.42 करोड़ रुपये था। सभी सेगमेंट में मांग बढ़ने से राजस्व को सहारा मिला, जिसमें होम अप्लायंस बिजनेस में 6 फीसदी और बड़े स्क्रीन वाले टेलीविजन की शानदार मांग के चलते होम एंटरटेनमेंट बिजनेस में साल-दर-साल आधार पर 20 फीसदी की बेहतरीन ग्रोथ देखी गई। हालांकि, पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें, तो सालाना शुद्ध मुनाफा 23.52 प्रतिशत घटकर 1,685.09 करोड़ रुपये रह गया है।
धमाकेदार रहा था IPO का सफर, प्रमोटर्स के पास 85% हिस्सेदारी
एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया (जो दक्षिण कोरियाई मूल की एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स की भारतीय इकाई है) पिछले साल 14 अक्टूबर को घरेलू शेयर बाजार में लिस्ट हुई थी। कंपनी का 11,607 करोड़ रुपये का आईपीओ देश का अब तक का सबसे बड़ा बोली पाने वाला आईपीओ साबित हुआ था, जिसे 4.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के सब्सक्रिप्शन मिले थे और यह 54.02 गुना भरकर बंद हुआ था। हालांकि, 1140 रुपये के आईपीओ प्राइस के मुकाबले शेयर अभी ऊपर है, लेकिन पिछले एक महीने में इसमें 8 फीसदी की गिरावट आई है। मार्च 2026 के अंत तक कंपनी में 85 प्रतिशत हिस्सेदारी प्रमोटर्स के पास सुरक्षित थी।
बाय, सेल या होल्ड: विश्लेषकों और ब्रोकरेज फर्म्स का क्या है अनुमान?
बाजार के जानकारों के अनुसार, हालिया गिरावट के बावजूद बाजार के विशेषज्ञ इस स्टॉक को लेकर काफी सकारात्मक हैं। इस शेयर पर नजर रखने वाले 30 मार्केट एनालिस्ट्स में से 29 ने इसे खरीदने ('Buy') की सलाह दी है, जबकि केवल एक विश्लेषक ने इसे बेचने ('Sell') की राय दी है। ब्रोकरेज फर्म्स के टारगेट प्राइस की बात करें तो:
ब्रोकरेज फर्म
रेटिंग/सलाह
टारगेट प्राइस (प्रति शेयर)
Way2Wealth Brokers
बुलिश (सर्वोच्च लक्ष्य)
₹1,950
HDFC Securities
कशियस (न्यूनतम लक्ष्य)
₹1,485
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
