व्यापार
वित्त वर्ष 25 में जीडीपी वृद्धि धीमी होकर 6.4 फीसदी रहने का अनुमान
15 Jan, 2025 02:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई । भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि वित्त वर्ष 2024-25 में तेजी से धीमी होकर 6.4 फीसदी रहने का अनुमान है, जो पिछले वित्त वर्ष 2023-24 में 8.2 फीसदी की वृद्धि से काफी कम है। यह वृद्धि दर चार साल का सबसे कम स्तर है और आरबीआई के 6.6 फीसदी अनुमान से भी नीचे है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में चिंता बढ़ रही है। इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स के एक अर्थशास्त्री के अनुसार भारतीय जीडीपी में 6.4 फीसदी की वृद्धि होने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 24 में 7.2 फीसदी थी। यह महामारी के बाद से सबसे धीमी वृद्धि दर है और प्रमुख क्षेत्रों में मंथन को दर्शाता है। कृषि क्षेत्र में 3.8 फीसदी की वृद्धि, जबकि विनिर्माण, खनन, निर्माण और बिजली क्षेत्र में धीमी वृद्धि का अनुमान है। विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि 5.3 फीसदी रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 9.9 फीसदी से कम है, जबकि खनन क्षेत्र में 2.9 फीसदी और निर्माण क्षेत्र में 8.6 फीसदी की वृद्धि का अनुमान है। इसका असर खासकर विनिर्माण क्षेत्र में देखा जा सकता है, जो धीमी अर्थव्यवस्था से प्रभावित हो सकता है। आगे चलकर विदेशी संस्थागत निवेशक का रुख भी प्रभावित हो सकता है, क्योंकि मंदी का डर और कंपनियों के मुनाफे में गिरावट का असर बाजार पर पड़ेगा।
चालू वित्त वर्ष में देश के प्रत्यक्ष कर संग्रह में अच्छी बढ़ोतरी
15 Jan, 2025 02:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष में देश के प्रत्यक्ष कर संग्रह में अच्छी बढ़ोतरी देखी गई है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के आंकड़ों के मुताबिक 12 जनवरी 2025 तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 15.88 फीसदी बढ़कर लगभग 16.90 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। इसमें व्यक्तिगत आयकर से जुड़ा गैर-कंपनी कर संग्रह 8.74 लाख करोड़ रुपए से अधिक रहा। इसके साथ ही शुद्ध कॉरपोरेट कर संग्रह लगभग 7.68 लाख करोड़ रुपए और प्रतिभूति लेनदेन कर संग्रह 44,538 करोड़ रुपए दर्ज किया गया। इस अवधि के दौरान 3.74 लाख करोड़ रुपए से अधिक के रिफंड जारी किए गए। यह एक साल पहले इसी अवधि की तुलना में 42.49 प्रतिशत अधिक है। एक अप्रैल से 12 जनवरी के बीच सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 20 प्रतिशत बढ़कर 20.64 लाख करोड़ रुपए से अधिक रहा है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में प्रत्यक्ष करों से 22.07 लाख करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा है। इसमें 10.20 लाख करोड़ रुपए का कॉरपोरेट कर संग्रह, 11.87 लाख करोड़ रुपए का व्यक्तिगत आयकर और अन्य कर शामिल हैं। नॉन-कॉरपोरेट टैक्स में तेजी देखी गई है। इसमें पर्सनल इनकम टैक्स भी शामिल है। कुल संग्रह बढ़कर 10.45 लाख करोड़ रुपए रहा जो पिछले साल समान अवधि में 8.58 लाख करोड़ रुपए था। इस सेगमेंट में नेट कलेक्शन में 15.88 फीसदी तेजी के साथ 8.74 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया जो पिछले साल 7.19 लाख करोड़ रुपए था। डायरेक्ट टैक्स में कॉरपोरेट टैक्स, पर्सनल इनकम टैक्स, सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स, इक्विलाइजेशन लेवी, फ्रिंज बेनिफिट्स टैक्स, वेल्थ टैक्स, बैंकिंग कैश ट्रांजैक्शन टैक्स, होटल रिसीट टैक्स, इंटरेस्ट टैक्स, एक्सपेंडीचर टैक्स, एस्टेट ड्यूटी और गिफ्ट टैक्स आते हैं।
दिसंबर 2024 में थोक मुद्रास्फीति बढ़कर हुई 2.37 प्रतिशत
15 Jan, 2025 02:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । विनिर्मित उत्पादों के महंगे होने की वजह से थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति दिसंबर 2024 में बढ़कर 2.37 प्रतिशत हो गई। हालांकि, खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट देखी गई है। मंगलवार को सरकारी आंकड़ें जारी किए गए हैं जिनसे यह जानकारी मिली है। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति नवंबर 2024 में 1.89 प्रतिशत थी। दिसंबर 2023 में यह 0.86 प्रतिशत रही थी। आंकड़ों के अनुसार खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति दिसंबर 2024 में कम होकर 8.47 प्रतिशत रह गई, जबकि नवंबर में यह 8.63 प्रतिशत थी। सब्जियों की मुद्रास्फीति नवंबर में 28.57 प्रतिशत के मुकाबले दिसंबर में 28.65 प्रतिशत रही। आलू की मुद्रास्फीति 93.20 प्रतिशत के उच्च स्तर पर बनी रही और प्याज की मुद्रास्फीति दिसंबर में बढ़कर 16.81 प्रतिशत हो गई। खाद्य पदार्थों में अनाज, दालें, गेहूं की मुद्रास्फीति दिसंबर में कम हुई। ईंधन और बिजली के मामले में बात की जाए तो दिसंबर में मुद्रास्फीति घटकर 3.79 प्रतिशत हो गई जो नवंबर में 5.83 प्रतिशत थी। विनिर्मित वस्तुओं में मुद्रास्फीति 2.14 प्रतिशत रही, जबकि नवंबर में यह दो प्रतिशत थी। खुदरा मुद्रास्फीति के सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार खाद्य कीमतों में कमी के कारण उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति दिसंबर 2024 में चार महीने के निचले स्तर 5.22 प्रतिशत पर आ गई।
कच्चा तेल 80 डॉलर के पार, पेट्रोल-डीजल स्थिर
15 Jan, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। इसी आधार पर देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमत तय की जाती है। हालांकि लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। मंगलवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई फेरबदल देखने को नहीं मिला है। हालांकि, राज्य स्तर पर कीमतों में मामूली बदलाव देखा गया है। वैश्विक बाजार में कच्चा तेल 80 डॉलर के पार है। ब्रेंट क्रूड 80.75 डॉलर प्रति बैरल है, जबकि डब्ल्यूटीआई :क्रूड 78.63 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। वहीं सरकारी तेल कंपनियों ने मंगलवार को भी सभी महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर ही रखी हैं।
क्वाड्रेंट फ्यूचर का शेयर 29 फीसदी तेजी के साथ सूचीबद्ध
15 Jan, 2025 11:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। क्वाड्रेंट फ्यूचर टेक लिमिटेड का शेयर अपने निर्गम मूल्य 290 से 29 फीसदी की तेजी के साथ मंगलवार को बाजार में सूचीबद्ध हुआ। बीएसई पर शेयर 28.96 प्रतिशत चढ़कर 374 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ और बाद में 54.74 प्रतिशत की बढ़त के साथ 448.75 रुपये पर पहुंच गया। एनएसई पर इसने 27.58 प्रतिशत की बढ़त के साथ 370 रुपये पर शुरुआत की। कंपनी का बाजार पूंजीकरण 1,795 करोड़ रुपये रहा। क्वाड्रेंट फ्यूचर टेक लिमिटेड के 290 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) कि पिछले गुरुवार को बोली के अंतिम दिन 185.82 गुना अभिदान मिला था। कंपनी ने आईपीओ के लिए 275-290 रुपये प्रति शेयर का मूल्य दायरा तय किया था। आईपीओ पूर्णतः 290 करोड़ रुपये तक के नए शेयर का निर्गम था जिसमें कोई बिक्री पेशकश (ओएफएस) नहीं थी। क्वाड्रेंट एक शोध कंपनी है, जो भारतीय रेलवे की ‘कवच’ परियोजना के तहत नई पीढ़ी के ट्रेन नियंत्रक तथा ‘सिग्नलिंग सिस्टम’ विकसित करती है।
भारत वित्तीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र विश्व में तीसरे स्थान पर: रिपोर्ट
14 Jan, 2025 04:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । भारतीय वित्तीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने 2024 में मंदी का सामना करते हुए भी वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर अपनी प्रतिष्ठा कायम रखी है। इस क्षेत्र में हालात में 33 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिससे वित्त पोषण में 1.9 अरब डॉलर की कमी आई है। एक मार्केट इंटेलिजेंस कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार, भू-राजनीतिक प्रतिकूलताओं और व्यापक मंदी के कारण इस क्षेत्र में वित्त पोषण में कमी आई है। इसके बावजूद, भारतीय वित्तीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने 2024 में सिर्फ अमेरिका और ब्रिटेन के पीछे रहकर तीसरी पोजीशन बनाए रखी है। कंपनी की सह-संस्थापक ने कहा कि भारत का वित्तीय प्रौद्योगिकी परिदृश्य मजबूत है और मंदी के बावजूद यह क्षेत्र भले ही कठिनाइयों का सामना कर रहा हो, लेकिन उसकी फलने-फूलने की क्षमता को रेखांकित करता है। वित्तीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र में 2024 में दो नए ‘यूनिकॉर्न’ कंपनियाँ उभरी हैं, जिनका मूल्यांकन अरब डॉलर के ऊपर है, आठ आईपीओ आए जो 2023 के दो आईपीओ की तुलना में 300 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अगस्त में फिनटेक एसोसिएशन फॉर कंज्यूमर एम्पावरमेंट (एफएसीई) को स्व-नियामक संगठन (सेल्फ-रेगुलेटरी ऑर्गनाइजेशन) का दर्जा दिया, जो देश में डिजिटल लोन देने वाले लगभग 80 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करने वाली बॉडी है।
2024 में ब्रिकी बढ़ने से ग्लोबल स्मार्टफोन मार्केट ने जबरदस्त वापसी
14 Jan, 2025 04:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई । ग्लोबल स्मार्टफोन मार्केट में 2024 में बिक्री को लेकर सालाना आधार पर 4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ एक जबरदस्त वापसी हुई। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। पिछले वर्षों की तुलना में ग्राहकों का रुझान बेहतर रहा। रिसर्च के अनुसार, इसके पहले 2023 में स्मार्टफोन की बिक्री एक दशक में सबसे कम रही। रिसर्च डायरेक्टर ने कहा, स्मार्टफोन एक जरूरी प्रोडक्ट है, जो लोगों के रोजाना की जिंदगी का एक अहम हिस्सा है। जैसे-जैसे मैक्रोइकोनॉमिक दबाव कम हुआ, बाजार ने 2023 की चौथी तिमाही से रिकवरी की हैं और अब लगातार पांच तिमाहियों से बढ़ रहा है। यूरोप, चीन और लैटिन अमेरिका के नेतृत्व में लगभग सभी मार्केट में वृद्धि देखी गई।
सैमसंग ने 2024 में बाजार का नेतृत्व करना जारी रखा। कंपनी की एस24 सीरीज और ए-सीरीज प्रोडक्ट लाइनों की मजबूत मांग रही। रिपोर्ट के अनुसार, एस24 सीरीज एआई डिवाइस के रूप में पेश किया गया पहला फोन है, इस फोन ने अपने पिछले सभी मॉडल से बेहतर प्रदर्शन किया। पश्चिमी यूरोप और अमेरिका में फोन को खास तौर पर अच्छी प्रतिक्रिया मिली। 18 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ एप्पल ने दूसरा स्थान मिला। एप्पल की आईफोन 16 सीरीज को मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली, जिसका कारण लांच के समय एप्पल इंटेलिजेंस की उपलब्धता की कमी थी। हालांकि, एप्पल ने लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और एशिया-प्रशांत-अन्य जैसे अपने गैर-प्रमुख बाजारों में मजबूती से विकास जारी रखा। शाओमी ने 2024 में शीर्ष पांच ब्रांडों में सबसे तेजी से विकास किया।
रिपोर्ट में बताया गया है, ओप्पो सालाना गिरावट के साथ चौथे स्थान पर आया, लेकिन ओप्पो ने साल का अंत मजबूत के साथ किया। भारत और चीन में मजबूत प्रदर्शन के कारण वीवो टॉप पांच में शामिल हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, जबकि जेनएआई-इनेबल्ड स्मार्टफोन अभी प्रीमियम सेगमेंट तक ही सीमित हैं, हम उम्मीद करते हैं कि जेनएआई मिड-रेंज डिवाइस के लिए भी एक मानक बन जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2028 तक, हमें उम्मीद है कि 250 डॉलर से ज्यादा कीमत वाले 10 में से नौ स्मार्टफोन जेनएआई-इनेबल्ड हो सकते है। अल्ट्रा-प्रीमियम स्मार्टफोन ( जिनकी कीमत 1000 डॉलर से ज्यादा) की बिक्री 2024 में सबसे तेजी से बढ़ी, क्योंकि कंज्यूमर ने अपने अगले स्मार्टफोन पर ज्यादा खर्च करने को प्राथमिकता दी। रिपोर्ट में कहा गया, 2025 में, हमें उम्मीद है कि राजस्व वृद्धि वॉल्यूम वृद्धि से आगे निकल जाएगी, जिसमें राजस्व में सालाना आधार पर 8 प्रतिशत की ग्रोथ दिखेगी।
मेले में ब्रांडिंग का जोर- मार्केटिंग के महाकुंभ में डुबकी लगा रही हैं कंपनियां
14 Jan, 2025 04:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। महाकुंभ में लगभग 40 करोड़ तीर्थयात्रियों के आने की उम्मीद जताई जा रही है। 12 साल में एक बार आयोजित होने वाले इस विशाल धार्मिक समागम का फायदा भारतीय कंपनियां अपनी ब्रांडिंग और प्रचार के लिए पूरी तरह से उठाना चाहती हैं। महाकुंभ की ब्रांडिंग में प्रमुख कंपनियों ने अपने बजट का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा शाही स्नानों के इर्द-गिर्द केंद्रित किया है।
कोका-कोला इंडिया के ग्रीष्म सिंह ने कहा कि वे अपने बेवरेज पोर्टफोलियो को स्थानीय स्वादों और खाद्य पदार्थों के साथ जोड़ने की योजना बना रहे हैं। इन विज्ञापनों के माध्यम से कंपनियां न केवल स्थानीय उपभोक्ताओं को आकर्षित करना चाहती हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं को भी अपनी ब्रांडिंग से जोड़ने का अवसर प्राप्त करना चाहती हैं। महाकुंभ जैसे बड़े आयोजनों में ब्रांड्स के लिए यह एक अवसर होता है, जहां वे सीधे उपभोक्ताओं से जुड़ सकते हैं और उनके साथ अपने रिश्ते को मजबूत कर सकते हैं।
क्रेयॉन्स एडवरटाइजिंग के चेयरमैन कुणाल ललानी ने कहा कि ब्रांड्स का मुख्य उद्देश्य छह शाही स्नानों के दौरान अधिकतम विजिबिलिटी हासिल करना है। इस दौरान महाकुंभ में सोशल मीडिया और इनफ्लूएंसर्स का इस्तेमाल भी किया जाएगा, ताकि कंपनियां अपनी पहुँच और प्रभाव बढ़ा सकें।
इस बार के महाकुंभ में आईटीसी, कोका-कोला, अडानी ग्रुप, हिंदुस्तान यूनिलीवर, डाबर, बिसलेरी, पार्क, इमामी, रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, बैंक ऑफ बड़ौदा, और स्पाइसजेट जैसी प्रमुख कंपनियों ने ब्रांडिंग अधिकार खरीदे हैं। इन कंपनियों ने कुंभ के दौरान अपने उत्पादों की मौजूदगी को बढ़ाने के लिए विभिन्न रणनीतियों को अपनाया है, जिसमें नावों, होर्डिंग्स, यूनिपोल्स और लग्जरी टेंट्स पर ब्रांडिंग के अवसर शामिल हैं। आईटीसी के माचिस और अगरबत्ती डिवीजन के डिवीजनल चीफ एग्जीक्यूटिव गौरव तयाल ने बताया कि कंपनी सोशल मीडिया और इनफ्लूएंसर्स के जरिए अपनी ब्रांड विजिबिलिटी बढ़ाने की योजना बना रही है। ब्रांडिंग के लिए 2019 के कुंभ की तुलना में दरें 50-60% तक बढ़ चुकी हैं। इसके अलावा, डाबर ने अपने ब्रांड के लिए श्रद्धालुओं के स्नान क्षेत्र में चेंजिंग रूम और हेयर ड्रायर जैसी सुविधाएं प्रदान की हैं, जबकि अडानी ग्रुप ने यूनिपोल्स और गोल्फ कार्ट्स पर ब्रांडिंग की है।
हर महीने 3 लाख से यूनिट्स बिकती हैं हीरो स्पलैंडर प्लस की
14 Jan, 2025 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । हीरो स्पलैंडर प्लस बाइक न केवल भारतीय बाजार में बल्कि बाइकिंग समुदाय में भी एक लोकप्रिय विकल्प बन चुकी है। हर महीने हीरो स्पलैंडर प्लस बाइक की 3 लाख से अधिक यूनिट्स बिकती हैं।
हालांकि, अब हीरो ने इस बाइक की कीमत में बढ़ोतरी की है, जो उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है। पहले हीरो स्पलैंडर प्लस की एक्स-शोरूम कीमत रुपए 75,441 थी, जिसे अब रुपए 1,735 बढ़ाकर रुपए 77,176 कर दिया गया है। यह बढ़ोतरी विभिन्न कारणों से हुई है, जिसमें उत्पादन लागत में वृद्धि और अन्य कारकों का योगदान हो सकता है। हालांकि, यह कीमत राज्य और स्थानीय टैक्स के हिसाब से थोड़ा अलग हो सकती है। इसके बावजूद, हीरो स्पलैंडर प्लस के ग्राहक अभी भी इसे एक किफायती और मजबूत विकल्प मानते हैं। हीरो स्पलैंडर प्लस में 100सीसी का एयर-कूल्ड, 4-स्ट्रोक, सिंगल-सिलेंडर ओएचसी इंजन है, जो 5.9 केडब्ल्यू की पावर और 8.05 एनएम का टॉर्क उत्पन्न करता है। इसके साथ ही इसमें 4-स्पीड गियरबॉक्स मिलता है, जो इसे एक स्लीक और किफायती राइड बनाता है। इसमें प्रोग्राम्ड फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम भी है, जो बाइक की माइलेज को बेहतर बनाता है।
यह बाइक एक लीटर पेट्रोल में लगभग 70 किलोमीटर तक चल सकती है, जो इसे भारत के अधिकतर राइडर्स के लिए एक आदर्श विकल्प बनाता है। इसकी बढ़ी हुई कीमत के बावजूद, हीरो स्पलैंडर प्लस की लोकप्रियता में कोई कमी आने की संभावना नहीं है, क्योंकि यह भारतीय बाइक बाजार में अपनी विश्वसनीयता और किफायती राइडिंग अनुभव के लिए प्रसिद्ध है। बता दें कि भारत की सबसे ज्यादा बिकने वाली बाइक्स में हीरो स्पलैंडर प्लस का नाम हमेशा शीर्ष पर आता है। इसकी सफलता का मुख्य कारण इसका सिंपल डिजाइन, बेहतरीन माइलेज और भरोसेमंद इंजन है।
इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में नॉर्वे सबसे आगे
14 Jan, 2025 03:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री के मामले में नॉर्वे सबसे आगे निकल गया है, वहीं भारत को इस क्षेत्र में अभी काफी मेहनत करने की जरुरत है। नार्वेजियन रोड फेडरेशन (ओएफवी) के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में नॉर्वे में कुल 1,28,691 नई गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन हुआ, जिनमें से 1,14,400 गाड़ियां इलेक्ट्रिक थीं।
यह संख्या देश में 89प्रतिशत नई गाड़ियों की इलेक्ट्रिक बिक्री को दर्शाती है। यह उपलब्धि नॉर्वे के 2025 तक सभी नई गाड़ियों को “जीरो उत्सर्जन” बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के करीब पहुंचने का संकेत देती है। गौरतलब है कि नॉर्वे, जो कि एक प्रमुख ऊर्जा उत्पादक और तेल निर्यातक देश है, ने पिछले 12 वर्षों में ईवी क्षेत्र में जबरदस्त प्रगति की है। 2012 में नॉर्वे में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की हिस्सेदारी केवल 2.8 प्रतिशत थी। लेकिन, सरकार द्वारा टैक्स छूट, टोल माफी, मुफ्त पार्किंग, और सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट लेन के उपयोग जैसे प्रोत्साहन देने से यह आंकड़ा तेजी से बढ़ा। हालांकि, हाल के वर्षों में कुछ प्रोत्साहनों को हटाया गया है, लेकिन इलेक्ट्रिक गाड़ियां नॉर्वे की जीवनशैली का हिस्सा बन चुकी हैं। 2024 में नॉर्वे के ईवी बाजार में टेस्ला ने 19प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। इसके बाद फोक्सवागन, टोयोटा, वॉल्वो और बीएमडब्ल्यू जैसी कंपनियां रहीं। दिलचस्प बात यह है कि चीनी ब्रांड्स भी नॉर्वे के ईवी बाजार में प्रवेश कर रहे हैं, और 2025 में यह देखना रोचक होगा कि वे खरीदारों को कितना आकर्षित कर पाते हैं।
वहीं, भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की स्थिति नॉर्वे से बिल्कुल अलग है। इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन के अनुसार, 2024 में भारत में बिकने वाली कुल गाड़ियों में से केवल 2प्रतिशत गाड़ियां इलेक्ट्रिक थीं। भारत में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और उच्च लागत ईवी की लोकप्रियता में बड़ी बाधा है। हालांकि, टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर सेगमेंट में इलेक्ट्रिक वाहनों का अच्छा प्रदर्शन देखा गया। 2024 में बिकने वाले थ्री-व्हीलरों में 50प्रतिशत और टू-व्हीलरों में 5 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की थी। भारतीय बाजार में टाटा, महिंद्रा, हुंडई, और एमजी जैसी कंपनियां प्रमुख हैं।
रुपया 2 साल में सबसे ज्यादा गिरा, 1 डॉलर की कीमत ₹86.61 हुई, जानिए क्यों कमजोर हुई भारतीय मुद्रा की हालत?
13 Jan, 2025 07:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शेयर बाजार और भारतीय रुपये में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। आज अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये में करीब 2 साल की सबसे बड़ी गिरावट आई। रुपया 57 पैसे टूटकर 86.61 (अनंतिम) प्रति डॉलर के नए सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ। जेफरीज का अनुमान है कि मध्यावधि में रुपया 88 तक गिर सकता है। आखिर क्या वजह है कि डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है? रुपये के गिरने से आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा? आइए जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब।
करेंसी की कीमत में तेजी और गिरावट का गणित समझें
विदेशी मुद्रा बाजार में किसी भी करेंसी की कीमत उस करेंसी की मांग और उसकी आपूर्ति के आधार पर तय होती है। यह उसी तरह है जैसे बाजार में किसी अन्य उत्पाद की कीमत तय होती है। जब किसी उत्पाद की मांग बढ़ती है जबकि उसकी आपूर्ति स्थिर रहती है, तो इससे उत्पाद की कीमत बढ़ जाती है जिससे उपलब्ध आपूर्ति सीमित हो जाती है। दूसरी ओर, जब किसी उत्पाद की मांग गिरती है जबकि उसकी आपूर्ति स्थिर रहती है, तो यह विक्रेताओं को पर्याप्त खरीदारों को आकर्षित करने के लिए उत्पाद की कीमत कम करने के लिए मजबूर करता है। कमोडिटी बाजार और विदेशी मुद्रा बाजार के बीच एकमात्र अंतर यह है कि विदेशी मुद्रा बाजार में वस्तुओं के बजाय अन्य मुद्राओं के साथ मुद्राओं का आदान-प्रदान किया जाता है।
रुपये में गिरावट के पीछे क्या कारण है?
रुपये में गिरावट का मौजूदा दौर मुख्य रूप से विदेशी निवेशकों द्वारा भारत से पैसा निकालने के कारण है, जिससे रुपये पर दबाव पड़ा है। वैश्विक निवेशक अपने निवेश को अलग-अलग देशों में ले जा रहे हैं, क्योंकि केंद्रीय बैंक अलग-अलग स्तरों पर अपनी मौद्रिक नीतियों का पुनर्गठन कर रहे हैं। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर इंडेक्स लगातार मजबूत हो रहा है। छह मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापने वाला डॉलर इंडेक्स 109.01 पर पहुंच गया है। 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड पर यील्ड भी बढ़कर अप्रैल 2024 के 4.69 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई। इसका असर भारतीय रुपये पर भी देखने को मिल रहा है। इसके चलते रुपया लगातार कमजोर हो रहा है।
रुपये के गिरने का क्या होगा असर?
रुपये के गिरने का असर भारतीय अर्थव्यवस्था, आम जनता और व्यापार जगत पर पड़ेगा। रुपये के कमजोर होने से विदेश से आयात करना महंगा हो जाएगा। इससे जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं। यानी आप पर महंगाई का बोझ बढ़ेगा। उदाहरण के लिए, अक्टूबर में आयातक को 1 डॉलर के लिए 83 रुपये चुकाने पड़ते थे, लेकिन अब उसे 86.61 रुपये खर्च करने होंगे। भारत बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। डॉलर के मजबूत होने से कच्चे तेल का आयात महंगा हो जाएगा। इससे व्यापार घाटा बढ़ेगा। रुपये के कमजोर होने से विदेशी निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकाल लेते हैं। इसका असर अभी दिख रहा है। रुपये के कमजोर होने से विदेश यात्रा या विदेश में पढ़ाई के लिए बजट बढ़ जाएगा। वहीं, रुपये के कमजोर होने से भारतीय निर्यातकों को फायदा होता है, क्योंकि विदेशी बाजार में उनके उत्पाद सस्ते हो जाते हैं।
सोने के आभूषणों का निर्यात 12 प्रतिशत बढ़ा: जीजेईपीसी
13 Jan, 2025 11:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता । रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) ने कहा कि वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में सोने के आभूषणों का निर्यात 12 प्रतिशत बढ़ गया है, जबकि हीरे के निर्यात में 10 प्रतिशत की गिरावट हुई है। इसमें अमेरिका को हीरे के निर्यात में सुधार की उम्मीद जताई गई है। चीन की सुस्त मांग की वजह से हीरे के निर्यात में चिंता बनी हुई है, लेकिन अमेरिका में त्योहार के दौरान मांग में वृद्धि की संकेत मिल रही है। जीजेईपीसी के अधिकारियों ने इस संदर्भ में उम्मीद जताते हुए कहा कि उनका मानना है कि अब बुरा समय निकल गया है और आगामी वर्षों में मद्देनजर 10-15 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद की जा रही है। इसके साथ ही जीजेईपीसी ने वैश्विक जेनेरिक प्रोत्साहन पर भी 150 करोड़ रुपये का निवेश किया है। आभूषण उद्योग के विकास और अमेरिका की मांग में सुधार की उम्मीद को ध्यान में रखते हुए जीजेईपीसी ने पश्चिम बंगाल के सिंगूर को एक वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने की योजना बताई है। यह योजना स्थानीय कारीगरी विरासत को बढ़ाने और कई रोजगार के अवसर प्रदान करने का उद्देश्य रखती है। सिंगूर के विकास में हुगली जिले के सुव्यवस्थित स्थान का भी अहम योगदान है, जो राष्ट्रीय राजमार्ग-2 और कोलकाता हवाई अड्डे के निकट है। इस विकास योजना से अधिक लोगों को रोजगार का अवसर मिलने की उम्मीद है और स्थानीय उद्योगों को भी बढ़ावा प्राप्त होगा।
आगामी बजट में बायोगैस उत्पादन पर कॉरपोरेट कर की छूट चाहता है आईबीए
13 Jan, 2025 10:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । भारतीय बायोगैस एसोसिएशन (आईबीए) ने वित्त मंत्रालय से आगामी बजट में कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) उत्पादन के लिए पूरी तरह कॉरपोरेट कर की छूट देने की मांग की है। इससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को प्रोत्साहित करेगा। आईबीए ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक पत्र लिखकर इस मांग को मुख्य किया है। उद्योग निकाय ने कहा है कि सीबीजी उत्पादकों को पूर्ण कर राहत दी जानी चाहिए। आईबीए के अनुसार देश में कुल 100 सीबीजी संयंत्र चालू हैं और कुल सीबीजी की बिक्री लगभग 1,200 करोड़ रुपये तक पहुंची है। इसके बाद भी कर माफ करने के बाद सरकार को करीब 100 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। इस मामले में कर छूट से सीबीजी उत्पादकों को अपने उत्पादों को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर बेचने में मदद मिलेगी। आईबीए ने बताया कि इस कदम से भारत अपने नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य को हासिल कर सकेगा और निजी निवेश प्राप्त करने के साथ-साथ रोजगार के अवसरों का सृजन होगा। इसके अलावा, बायोगैस के उत्पादन में कृषि अवशेषों का उपयोग बढ़ाएगा और प्रदूषण कम करने में मदद करेगा।
एफपीआई ने जनवरी में अब तक शेयर बाजार से 22,194 करोड़ निकाले
13 Jan, 2025 08:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने इस महीने भारतीय शेयर बाजारों से 22,194 करोड़ रुपये की निकासी की है। यह निकासी दिसंबर माह के 15,446 करोड़ रुपये के निवेश के बाद आई है। विदेशी निवेशकों का एफपीआई बिकवाली के पीछे कुछ कारकों का इसमें जिम्मेदार माना जा रहा है। कंपनियों के तिमाही नतीजे कमजोर रहने, डॉलर में मजबूती, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन में शुल्क युद्ध तेज होने और साथ ही भारतीय बाजारों में असमंजस के कारण इस बिकवाली का मुख्य कारण भी माना जा रहा है। भारतीय रुपये के निचले स्तर अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल और भारतीय शेयर बाजार के ऊंचे मूल्यांकन के कारण भी विदेशी निवेशकों ने अपना निवेश घटाया है। अनुसंचारित आंकड़ों के अनुसार इस महीने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयरों से 22,194 करोड़ रुपये निकाले हैं। बाजार के जानकारों ने कहा कि डॉलर इंडेक्स में बढ़ोतरी, 10 साल के बॉन्ड पर प्रतिफल और अन्य कारकों के कारण निवेशक उभरते बाजारों से निकासी कर रहे हैं। बीते साल उन्होंने भारतीय शेयरों में सिर्फ 427 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया था। वहीं 2023 में उन्होंने 1.71 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया था।
इस वर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था में थोड़ी कमजोरी संभावित: आईएमएफ
12 Jan, 2025 07:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई । अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने स्वीकार किया कि भले ही दुनियाभर में वैश्विक वृद्धि स्थिर रहेगी, लेकिन 2025 में भारतीय अर्थव्यवस्था में थोड़ी कमजोरी संभावित है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी रहेगी, खासकर अमेरिका की व्यापार नीति के चलते। जॉर्जीवा ने उम्मीद जताई है कि भारतीय अर्थव्यवस्था 2025 में थोड़ी कमजोर रहेगी। उन्होंने बताया कि भारत के अलावा चीन में मुद्रास्फीति और मांग की चुनौतियों का सामना करना भी आईएमएफ के लिए मुश्किल हो सकता है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीन, कनाडा और मैक्सिको पर शुल्क लगाने की योजना की घोषणा का माध्यम उचित नहीं माना, कारण रखते हुए कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को और अधिक अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है। जॉर्जीवा ने आगे कहा कि अमेरिका के नीतिगत कदम, खासकर शुल्क और कर वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण हैं और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। उनके अनुसार यह अनिश्चितता चुनौतियों को बढ़ा सकती है, खासकर उन देशों और क्षेत्रों के लिए जो एकीकृत आपूर्ति शृंखलाओं में हैं, जैसे कि एशिया। इस सबके बावजूद जॉर्जीवा ने स्पष्ट किया कि समाधान और उपाय ढूंढने का समय है, ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता और विकास को सुनिश्चित किया जा सके। आईएमएफ अपेक्षा रखती है कि इस अनिश्चितता को झेलने के लिए सपनों और उम्मीदों का सहारा न ले कर सजीव और सुरक्षित उपचारों से सामना किया जाए।
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