व्यापार
निवेशकों को झटका! सेंसेक्स में 400 अंकों की गिरावट, निफ्टी ने गंवाया अहम स्तर
11 Jun, 2026 01:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार के कारोबारी सत्र के दौरान चौतरफा बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे शुरुआती दौर में ही प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बीएसई का सेंसेक्स करीब 400 अंकों तक गोता लगा गया, जबकि एनएसई का निफ्टी फिसलकर 23,100 के मनोवैज्ञानिक स्तर के बेहद करीब पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में एचसीएल टेक और एशियन पेंट्स जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में दो-दो प्रतिशत की भारी कमजोरी देखी गई, वहीं अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी 35 पैसे की बड़ी गिरावट के साथ 95.60 के स्तर पर आ गया। बाजार में इस उथल-पुथल की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में दोबारा उपजा भू-राजनीतिक संकट और अमेरिका में उम्मीद से अधिक आए महंगाई के आंकड़े हैं, जिसने वैश्विक वित्तीय बाजारों को हिलाकर रख दिया है।
पश्चिम एशिया संकट और अमेरिकी महंगाई से बिगड़ा सेंटिमेंट
वैश्विक स्तर पर फैली इस घबराहट के पीछे मुख्य रूप से मध्य पूर्व में बढ़ता सैन्य तनाव है। अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हालिया हमलों और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापारिक मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक जोरदार तेजी आ गई है। तेल की इस तपन और महंगे आयात की आशंका ने भारतीय निवेशकों को डरा दिया है, जिसके चलते वे बाजारों से तेजी से अपना मुनाफावसूली कर पैसा निकाल रहे हैं। इसके साथ ही, अमेरिका में जारी मजबूत मुद्रास्फीति (महंगाई) के आंकड़ों ने 'वॉल स्ट्रीट' (अमेरिकी शेयर बाजार) में भारी बिकवाली को जन्म दिया, जिसका सीधा नकारात्मक असर गुरुवार को भारतीय सहित तमाम एशियाई बाजारों की सेहत पर देखने को मिला।
वैश्विक बाजारों में मंदी का दौर, एशियाई सूचकांक धड़ाम
अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे आंकड़े भी निवेशकों को हतोत्साहित करने वाले रहे। जापान को छोड़ दिया जाए तो एमएससीआई का एशिया-प्रशांत सूचकांक 0.9 प्रतिशत तक टूट गया, जिसमें सबसे करारा झटका दक्षिण कोरिया के 'कोस्पी' इंडेक्स को लगा जो सीधे 3 प्रतिशत तक धड़ाम हो गया। अन्य बाजारों की बात करें तो जापान का निक्केई 225 और टॉपिक्स दोनों सूचकांक 1.2 प्रतिशत लुढ़क गए, जबकि ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 इंडेक्स 0.4 प्रतिशत नीचे आया। इसके अलावा, हांगकांग का हैंग सेंग 0.1 प्रतिशत, शंघाई कंपोजिट 0.2 प्रतिशत, यूरोपीय बाजार का प्रतिनिधित्व करने वाला यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स 0.5 प्रतिशत और अमेरिकी एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 0.3 प्रतिशत की गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार करते दिखे।
इथेनॉल पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क शून्य, सरकार का बड़ा फैसला
बाजार की इस उठापटक के बीच केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय ने देश की अर्थव्यवस्था और ईंधन निर्भरता को संतुलित करने के लिए एक बड़ी अधिसूचना जारी की है। इसके तहत सरकार ने उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल के विभिन्न वेरिएंट्स पर लगने वाले उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) को पूरी तरह से माफ कर दिया है। अब देश में बिकने वाले E22, E25, E27 और E30 यानी क्रमशः 22, 25, 27 और 30 प्रतिशत इथेनॉल मिले पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क को घटाकर 'शून्य' कर दिया गया है। सरकार के इस दूरगामी फैसले का मुख्य उद्देश्य देश के वाहन स्वामियों को पर्यावरण अनुकूल इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि कच्चे तेल के आयात पर देश का भारी खर्च कम किया जा सके।
क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों के बीच राहत, इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को मिला टैक्स फायदा
11 Jun, 2026 01:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक संकट के बीच भारत सरकार ने एक युगांतकारी नीतिगत निर्णय लिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक नई अधिसूचना के अनुसार, देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और पर्यावरण अनुकूल 'हरित ईंधन' को बढ़ावा देने के लिए उच्च इथेनॉल मिश्रण (22 से 30 प्रतिशत) वाले पेट्रोल पर लगने वाले केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। सरकार का यह रणनीतिक कदम ऐसे समय में आया है जब देश कच्चे तेल के महंगे आयात बिल को कम करने और जैव ईंधन (बायोफ्यूल) कार्यक्रम को गति देने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है।
बायोफ्यूल कार्यक्रम को वित्तीय प्रोत्साहन और गुणवत्ता मानक
इस ऐतिहासिक घोषणा के तहत E22, E25, E27 और E30 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल पर अब उत्पाद शुल्क शून्य होगा, जो कि E20 (20% इथेनॉल) से ऊपर के ईंधन सेगमेंट के लिए पहला बड़ा आर्थिक प्रोत्साहन है। इस निर्णय की टाइमिंग बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि हाल ही में 15 मई 2026 से भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने इन उच्च इथेनॉल मिश्रणों के लिए नए गुणवत्ता और सुरक्षा मानक (IS 19850:2026) लागू किए हैं। मानकों के निर्धारण के तुरंत बाद टैक्स में इतनी बड़ी राहत देना देश में वैकल्पिक ऊर्जा के सुनियोजित विस्तार को दर्शाता है। इससे पहले, सरकार ने वैश्विक महंगाई से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए करों में कटौती करके भारी राजस्व का नुकसान भी उठाया था।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती और आयात पर निर्भरता में कमी
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का लगभग 87 फीसदी जीवाश्म ईंधन विदेशों से आयात करता है। सरकार के इस नवीनतम फैसले से जहां एक ओर विदेशी तेल पर निर्भरता कम होगी और बहुमूल्य विदेशी मुद्रा भंडार की बचत होगी, वहीं दूसरी ओर ईंधन पर खर्च होने वाला पैसा देश के भीतर ही रहेगा। यह सीधे तौर पर हमारे गन्ना उत्पादक किसानों, कृषि क्षेत्र और ग्रामीण युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगा। पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी यह एक अत्यंत लाभकारी कदम है क्योंकि इथेनॉल एक स्वच्छ ईंधन है, जिसके बढ़ते उपयोग से कार्बन उत्सर्जन और वायु प्रदूषण के स्तर में भारी कमी दर्ज की जाएगी।
उपभोक्ताओं को किफायती विकल्प और तय लक्ष्य से आगे बढ़ता भारत
पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में टैक्स और परिवहन सहित इथेनॉल की खरीद लागत करीब 71.32 रुपये प्रति लीटर है, जो रिफाइंड पेट्रोल से थोड़ी अधिक है। ऐसे में खुदरा कीमतों में तत्काल बड़ी गिरावट तेल कंपनियों के लिए एक चुनौती जरूर है, लेकिन सरकार ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए 85% इथेनॉल युक्त 'E85' ईंधन पहले ही जारी कर दिया है, जो चुनिंदा पंपों पर सादे पेट्रोल की तुलना में 20 रुपये प्रति लीटर तक सस्ता मिल रहा है। वाहन निर्माता संगठन (SIAM) ने भी आश्वस्त किया है कि इस ईंधन से पुरानी गाड़ियों की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं है। भारत का इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम तय समय से काफी आगे चल रहा है; वर्ष 2025-26 तक 20% मिश्रण का जो लक्ष्य था, देश फरवरी 2025 तक ही 17.98% का आंकड़ा छू चुका है, और यह नई टैक्स छूट भविष्य में भारत को पूर्णतः ऊर्जा-आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ठोस रोडमैप है।
26 साल बाद बदला समीकरण, MSCI इंडेक्स में भारतीय कंपनियों की चमक क्यों हुई फीकी?
11 Jun, 2026 11:26 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। वैश्विक शेयर बाजारों में आए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के अभूतपूर्व उछाल ने दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित 'एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स' का पूरा परिदृश्य ही बदल कर रख दिया है। इस बड़े बदलाव के कारण सूचकांक के शीर्ष-10 और शीर्ष-100 सबसे मूल्यवान शेयरों की सूची से सभी भारतीय कंपनियां बाहर हो गई हैं। वर्तमान में 100 अरब डॉलर से अधिक के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) वाले विशिष्ट क्लब में भारत की केवल तीन कंपनियां (रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक और भारती एयरटेल) ही अपनी जगह बचा पाई हैं, जिनकी तादाद पहले छह हुआ करती थी। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट की वजह भारत की कोई आर्थिक कमजोरी नहीं है, बल्कि दुनिया भर में चली एआई की तीव्र लहर है, जिसका असर अब भारतीय शेयर बाजार पर दिखने लगा है।
वैश्विक निवेशकों के लिए बेंचमार्क है एमएससीआई इंडेक्स
यह सूचकांक दुनिया भर के बड़े विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के लिए एक मार्गदर्शक की तरह काम करता है। वैश्विक स्तर पर करीब 700 अरब डॉलर का पैसिव फंड सीधे तौर पर इस इंडेक्स की गतिविधियों पर नजर रखता है और इसी के भारांश (वेटेज) के आधार पर विभिन्न विकासशील देशों के बाजारों में पूंजी का निवेश करता है। सरल शब्दों में, जब इस सूचकांक में किसी देश का प्रतिनिधित्व बढ़ता है, तो विदेशी निवेश खुद-ब-खुद उस देश के बाजारों की ओर आकर्षित होता है, और वेटेज घटने पर विदेशी निवेशक अपनी पूंजी वापस निकालने लगते हैं। मौजूदा दौर में इस इंडेक्स के भीतर भारत की पकड़ और स्थिति लगातार कमजोर होती दिख रही है।
रैंकिंग और वेटेज में भारी गिरावट का दौर
कुछ समय पहले यानी मार्च तक इस सूचकांक के शीर्ष-10 दिग्गजों में भारत के दो बड़े कॉर्पोरेट घराने एचडीएफसी बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज क्रमशः सातवें और आठवें पायदान पर मजबूती से जमे हुए थे। मगर हालिया आंकड़ों के अनुसार, एचडीएफसी बैंक फिसलकर 11वें और रिलायंस इंडस्ट्रीज 12वें स्थान पर आ गई है। इस बदलाव से न केवल भारतीय कंपनियों की रैंकिंग पर असर पड़ा है, बल्कि एमएससीआई इंडेक्स में भारत का कुल वेटेज भी गिरकर पिछले छह वर्षों के न्यूनतम स्तर यानी 10.87 प्रतिशत पर आ गया है, जो साल 2024 के अपने उच्चतम रिकॉर्ड स्तर से लगभग आधा रह गया है।
एआई और सेमीकंडक्टर की रेस में ताइवान और दक्षिण कोरिया आगे
बाजार में आए इस बड़े उलटफेर के पीछे वैश्विक निवेशकों की एआई और सेमीकंडक्टर (चिप निर्माता) कंपनियों के प्रति बढ़ती दीवानगी है। ताइवान की टीएसएमसी, दक्षिण कोरिया की सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स जैसी तकनीकी कंपनियों के शेयरों में 48 से लेकर 194 प्रतिशत तक की भारी तेजी दर्ज की गई है। चूंकि सेमीकंडक्टर का मुख्य ढांचा ताइवान, दक्षिण कोरिया और चीन में केंद्रित है, इसलिए इन देशों की कंपनियों के मूल्यांकन में भारी उछाल आया और उन्होंने भारतीय दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया। इसके विपरीत, भारतीय आईटी कंपनियां पारंपरिक सॉफ्टवेयर सेवाओं तक ही सीमित रहीं, जिसके कारण विदेशी निवेशकों ने भारतीय आईटी शेयरों में लगी अपनी 81 अरब डॉलर की पूंजी को घटाकर महज 40 अरब डॉलर कर दिया है। परिणामस्वरूप, इस इंडेक्स के लगभग 70 फीसदी हिस्से पर अब ताइवान, दक्षिण कोरिया और चीन का पूर्ण नियंत्रण हो गया है।
केंद्र सरकार की कैबिनेट बैठक में विकास पर जोर, सात प्रमुख प्रस्तावों को मंजूरी
10 Jun, 2026 04:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश के शहरी विकास को आधुनिक बनाने और बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) को नई रफ्तार देने की दिशा में कई बड़े और दूरगामी निर्णय लिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय कैबिनेट की हालिया बैठक में कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं को नीतिगत मंजूरी दी गई है। इन फैसलों में आंध्र प्रदेश की नई राजधानी अमरावती के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने से लेकर गुजरात के अहमदाबाद शहर में मेट्रो रेल नेटवर्क के व्यापक विस्तार की योजनाएं शामिल हैं। इन ऐतिहासिक फैसलों के साथ ही देश के राजनीतिक पटल पर एक नया कीर्तिमान भी स्थापित हुआ है, जो सरकार के सुदृढ़ नेतृत्व को दर्शाता है।
कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव पारित, पीएम मोदी के नाम दर्ज हुआ ऐतिहासिक कीर्तिमान
केंद्रीय कैबिनेट के निर्णयों की आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सबसे लंबी अवधि तक देश सेवा करने का एक नया और अभूतपूर्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। इस गौरवशाली और ऐतिहासिक उपलब्धि को रेखांकित करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में विशेष रूप से एक बधाई प्रस्ताव भी सर्वसम्मति से पारित किया गया। मंत्रियों का मानना है कि यह कीर्तिमान प्रधानमंत्री के प्रति देश की जनता के अटूट विश्वास और उनके निरंतर कुशल नेतृत्व का परिचायक है।
अमरावती में बनेंगे केंद्रीय कार्यालय व आवास और अहमदाबाद में दौड़ेगी मेट्रो
आंध्र प्रदेश के नए शहर अमरावती को एक आधुनिक प्रशासनिक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार ने दो बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाई है। इसके तहत अमरावती में केंद्रीय सरकारी जनरल पूल कार्यालय आवास (CGGPOA) और जनरल पूल आवासीय आवास (GPRA) का निर्माण किया जाएगा, जिससे वहां केंद्रीय विभागों के कामकाज और अधिकारियों के रहने की उत्तम व्यवस्था सुनिश्चित होगी। इसके साथ ही, गुजरात में शहरी यातायात को सुगम बनाने के लिए कैबिनेट ने 'अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना के चरण 2ए' (Phase 2A) को भी अपनी स्वीकृति दे दी है। इस नए चरण के तहत 6.032 किलोमीटर लंबा एक नया कॉरिडोर तैयार किया जाएगा, जिसमें पांच आधुनिक मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे। इस विस्तार के बाद अहमदाबाद और गांधीनगर के बीच कुल 77.63 किलोमीटर लंबा एक विशाल और सक्रिय मेट्रो रेल नेटवर्क आम जनता की यात्रा को बेहद सुगम बना देगा।
भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए पीएम मोदी के 'सात संकल्प'
केंद्रीय मंत्री ने देश की आर्थिक उन्नति का रोडमैप साझा करते हुए बताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर अग्रणी और भविष्य के लिए तैयार करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री ने 'सात संकल्प' देश के सामने रखे हैं। इन संकल्पों के अंतर्गत देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने, स्टार्टअप इंडिया अभियान को नई ऊंचाइयों पर ले जाने, नवाचार (इनोवेशन) और उद्यमिता को हर स्तर पर प्रोत्साहित करने पर विशेष बल दिया गया है। इन सात संकल्पों में युवाओं के कौशल विकास (स्किल्स) को प्राथमिकता देने के साथ-साथ देश भर में खेल और फिटनेस के विशेष कार्यक्रम चलाने का आह्वान भी किया गया है। सरकार का मानना है कि यह दूरगामी पहल भारतीय कॉर्पोरेट जगत और एमएसएमई (MSME) सेक्टर के लिए एक अत्यंत कुशल, ऊर्जावान और स्वस्थ कार्यबल तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगी।
अनिल अंबानी मामले में कोर्ट का हस्तक्षेप, ब्लैक मनी एक्ट की कार्रवाई पर रोक
10 Jun, 2026 04:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। रिलायंस समूह के प्रमुख और जाने-माने उद्योगपति अनिल अंबानी को बॉम्बे उच्च न्यायालय से एक बड़ी और महत्वपूर्ण कानूनी राहत मिली है। माननीय अदालत ने काला धन अधिनियम (ब्लैक मनी एक्ट) के अंतर्गत उनके खिलाफ किसी भी प्रकार का मुकदमा चलाने, गिरफ्तारी या भारी जुर्माना लगाने जैसी दंडात्मक कार्रवाइयों पर अंतरिम रोक लगा दी है। उद्योगपति अनिल अंबानी ने अपनी कानूनी अर्जी में इस कड़े कानून की कुछ विशेष धाराओं की संवैधानिक वैधता को ही सीधे अदालत में चुनौती दी है, जिसे उच्च न्यायालय ने विस्तृत सुनवाई के लिए मंजूर कर लिया है।
डबल बेंच ने केंद्र से मांगा जवाब, अपील प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति
बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.पी. कोलाबावाला और न्यायमूर्ति फिरदौस पूनीवाला की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए मंगलवार को यह आदेश पारित किया। पीठ ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि इस कानून की विभिन्न धाराओं के खिलाफ पहले भी कुछ अन्य याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं, जिन्हें इस अर्जी के साथ संलग्न किया जा रहा है। उच्च न्यायालय ने इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के लिए विस्तृत हलफनामा (एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि चूंकि आयकर विभाग द्वारा अंबानी के खिलाफ असेसमेंट ऑर्डर पहले ही जारी किया जा चुका है और उन्होंने इसके खिलाफ आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष अपनी चुनौती दे रखी है, इसलिए वह अपील प्रक्रिया सामान्य रूप से आगे बढ़ सकती है। हालांकि, जब तक इस मुख्य याचिका का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता, तब तक उनके खिलाफ कोई भी कठोर दंडात्मक कदम नहीं उठाया जा सकेगा।
दो स्विस बैंक खातों और ₹814 करोड़ के गुप्त धन का आरोप
आयकर विभाग ने 8 अगस्त 2022 को अनिल अंबानी को एक कारण बताओ नोटिस थमाया था, जिसमें उन पर दो स्विस बैंक खातों में जमा करीब 814 करोड़ रुपये से अधिक की अघोषित विदेशी संपत्ति पर 420 करोड़ रुपये की भारी टैक्स चोरी करने का संगीन आरोप लगाया गया है। विभाग के आधिकारिक नोटिस के मुताबिक, अंबानी ने जानबूझकर अपने विदेशी बैंक खातों और वित्तीय हितों की जानकारी भारत में रिटर्न दाखिल करते समय छिपाई थी, जिसके लिए उन पर काला धन अधिनियम की धारा 50 और 51 के तहत मुकदमा चलाया जाना चाहिए। कानून के इन प्रावधानों के तहत कसूरवार पाए जाने पर अधिकतम 10 वर्ष के सश्रम कारावास और भारी जुर्माने की सजा मुकर्रर है। टैक्स अधिकारियों के अनुसार, इन दोनों गुप्त विदेशी खातों में मौजूद अघोषित राशि का कुल मूल्यांकन $8,14,27,95,784$ रुपये आंका गया है, जिस पर शुद्ध रूप से $4,20,29,04,040$ रुपये का टैक्स बकाया है।
पिछली तारीख से कानून लागू करने पर आपत्ति और विदेशी ट्रस्टों का कनेक्शन
अनिल अंबानी के कानूनी सलाहकारों ने अदालत में दलील दी है कि केंद्र सरकार का काला धन अधिनियम वर्ष 2015 में प्रभावी हुआ था, जबकि जिन संदिग्ध लेन-देन और बैंक खातों को लेकर विभाग ने आरोप लगाए हैं, वे काफी पुराने यानी वित्तीय वर्ष 2006-2007 और 2010-2011 के हैं। अंबानी का मुख्य तर्क है कि इस दंडात्मक कानून को पिछली तारीख से यानी पूर्वव्यापी (रेट्रोस्पेक्टिव) प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता, और ऐसा करना भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों के सर्वथा खिलाफ है। दूसरी ओर, आयकर विभाग के दस्तावेजों में दावा किया गया है कि अनिल अंबानी बहामास में पंजीकृत 'डायमंड ट्रस्ट' नामक एक संस्था के मुख्य आर्थिक लाभार्थी थे, और इसके साथ ही ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स की 'नदर्न अटलांटिक ट्रेडिंग अनलिमिटेड (NATU)' नामक कंपनी से भी उनके सीधे वित्तीय हित जुड़े हुए थे, जिन्हें उन्होंने अपने आयकर रिटर्न (आईटीआर) में कभी उजागर नहीं किया था।
एयर ट्रैवल हो सकता है महंगा, ATF दरों में इजाफे का असर किराए पर पड़ने के आसार
10 Jun, 2026 04:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में जारी भारी उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने घरेलू विमानन कंपनियों के लिए हवाई ईंधन (एटीएफ) से संबंधित एक अभूतपूर्व और नई नीति की घोषणा की है। इस नई व्यवस्था के अंतर्गत सरकार ने मंगलवार को विमान ईंधन की दरों में तात्कालिक रूप से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। हालांकि, इस मूल्य वृद्धि के साथ ही नागरिक उड्डयन क्षेत्र को भविष्य के जोखिमों से बचाने के लिए सरकार ने एयरलाइंस कंपनियों के सामने अगले तीन वर्षों तक ईंधन की कीमतों को पूरी तरह से स्थिर (लॉक्ड) रखने का एक बेहद आकर्षक विकल्प भी प्रस्तुत किया है, जिससे विमानन उद्योग को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
अब 115 रुपये प्रति लीटर की दर से मिलेगा हवाई ईंधन
इस ताजा बढ़ोतरी के लागू होने के बाद देश में एटीएफ की कीमत 104.927 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर अब 115 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच जाएगी। सरकार द्वारा पेश की गई नई सुरक्षात्मक योजना को अपनाने वाली तमाम घरेलू विमानन कंपनियों को अगले तीन साल तक इसी निर्धारित दर पर ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। दूसरी ओर, जो भी एयरलाइंस इस सरकारी नीति को स्वीकार करने से इनकार करेंगी, उन्हें विदेशी विमानन कंपनियों की तरह ही वैश्विक बाजार की दैनिक दरों पर तेल खरीदना होगा। गौरतलब है कि वर्तमान में एटीएफ की अंतरराष्ट्रीय बाजार दर करीब 142 रुपये प्रति लीटर चल रही है, जो कि इस योजना की तय दर से काफी अधिक है।
वैश्विक उतार-चढ़ाव से मिलेगी मुक्ति, कंपनियों को बजट बनाने में होगी आसानी
कीमतों में तात्कालिक वृद्धि के झटके के बीच सरकार द्वारा दिया गया तीन साल का 'फिक्स रेट' (स्थिर दर) का विकल्प घरेलू एयरलाइंस के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच साबित हो सकता है। इस विकल्प को चुनने के बाद विमानन कंपनियों को वैश्विक बाजार में होने वाली भू-राजनीतिक उथल-पुथल और कच्चे तेल की कीमतों में आने वाले रोज-रोज के उछाल से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी। वे अगले 36 महीनों तक बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय दबाव के 115 रुपये की निश्चित दर पर ईंधन प्राप्त कर सकेंगी। इस नीति का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि विमानन कंपनियों को अपने परिचालन खर्च (ऑपरेटिंग कॉस्ट) का दीर्घकालिक और सटीक वित्तीय बजट तैयार करने में बहुत सहूलियत होगी।
पूरी तरह ऐच्छिक है नई नीति, बाहर रहने वाली कंपनियों पर रहेगा बाजार का जोखिम
मंत्रालय के वरिष्ठ सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सरकार की ओर से पेश की गई यह दीर्घकालिक ईंधन योजना पूरी तरह से स्वैच्छिक यानी ऐच्छिक रखी गई है। किसी भी विमानन कंपनी पर इसे अपनाने का कोई प्रशासनिक दबाव नहीं होगा। जो कंपनियां इस योजना के दायरे से बाहर रहने का फैसला करेंगी, उन्हें बाजार के उतार-चढ़ाव का सीधा जोखिम खुद उठाना होगा। यदि आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गिरती हैं, तो बाहर रहने वाली कंपनियों को लाभ हो सकता है, लेकिन यदि कीमतें और ऊपर जाती हैं, तो उन्हें बाजार की महंगी दरों पर ही ईंधन खरीदना पड़ेगा। विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना घरेलू हवाई किराए को भी एक निश्चित दायरे में बनाए रखने में मददगार साबित हो सकती है।
सब्सिडी वाले LPG सिलिंडरों की संख्या में कमी पर सरकार ने रखा पक्ष
10 Jun, 2026 03:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के अंतर्गत सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की सालाना संख्या को नौ से घटाकर चार करने का कदम उठाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कटौती के पीछे कुछ लाभार्थियों द्वारा योजना का गलत इस्तेमाल किए जाने की प्रामाणिक रिपोर्टें थीं। सरकार के पास उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार, एक बड़े वर्ग को साल भर में चार से अधिक सिलेंडरों की वास्तविक आवश्यकता नहीं थी, और अतिरिक्त कोटे का उपयोग घरेलू रसोई के बजाय व्यावसायिक गतिविधियों में किया जा रहा था। मंत्री ने सवाल उठाया कि जब जमीनी सर्वे में यह बात साफ हो चुकी है कि अधिकांश परिवारों के लिए चार रिफिल पर्याप्त हैं, तो उससे अधिक सब्सिडी वाले सिलेंडर जारी रखने का कोई तार्किक आधार नहीं रह जाता है।
सब्सिडी के दुरुपयोग पर लगी लगाम और मोदी सरकार के विकास मॉडल की सराहना
इस निर्णय की पृष्ठभूमि साझा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार को लगातार विश्वसनीय इनपुट मिल रहे थे कि कई लोग ₹300 की रियायती दर पर मिलने वाले इन सिलेंडरों को लेकर बाजार में ऊंचे दामों पर बेच रहे थे। इस प्रकार की कालाबाजारी और व्यावसायिक उपयोग को रोकने के लिए ही यह प्रशासनिक सुधार किया गया है। इसके साथ ही, हरदीप सिंह पुरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुशासन और नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि विपक्ष को इस विकास-केंद्रित दृष्टिकोण का अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि देश के मतदाता लगातार भाजपा और मौजूदा सरकार पर इसलिए भरोसा जता रहे हैं क्योंकि कल्याणकारी योजनाएं बिना किसी बिचौलिये के सीधे जरूरतमंदों तक पहुंच रही हैं और धरातल पर उनका शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है।
फ्लेक्स फ्यूल ई85 की लॉन्चिंग और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में भारत की ऐतिहासिक प्रगति
ऊर्जा क्षेत्र में पर्यावरण अनुकूल विकल्पों पर बात करते हुए पेट्रोलियम मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के लिए विशेष 'ई85 ईंधन' को सफलतापूर्वक बाजार में उतार दिया है। अब ऑटोमोबाइल उद्योग और 'सियाम' जैसे प्रमुख संगठनों के साथ मिलकर भविष्य में एथेनॉल आधारित ईंधनों के व्यापक विस्तार पर उच्च स्तरीय चर्चाएं चल रही हैं। भारत ने जैव ईंधन (बायोफ्यूल) के मिश्रण में तय समय-सीमा से काफी पहले ही अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर इतिहास रचा है। वर्ष 2014 में जहां पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा मात्र 1.5 प्रतिशत थी, वहीं नवंबर 2022 तक यह बढ़कर 10 प्रतिशत हो गई थी। सरकार ने वर्ष 2030 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का जो महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया था, उसे अपनी कुशल नीतियों के बल पर वर्ष 2024 में ही समय से पहले हासिल कर लिया गया है।
घरेलू ऊर्जा उत्पादन के लिए ₹90,000 करोड़ का आवंटन और टैक्स कटौती से राहत
देश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की व्यापक रणनीति का उल्लेख करते हुए हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत घरेलू स्तर पर तेल व गैस की खोज, बायोफ्यूल ब्लेंडिंग और नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) के विस्तार पर तेजी से काम कर रहा है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 'समुद्र मंथन' परियोजना के तहत नए तेल कुओं की खुदाई और घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए ₹90,000 करोड़ का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है। ईंधन की कीमतों पर देशव्यापी चर्चा का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा नवंबर 2021, मई 2022 और हाल के दिनों में उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में की गई कई कटौतियों तथा भाजपा शासित राज्यों द्वारा वैट (VAT) कम किए जाने के चलते, आज दिल्ली जैसे शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें विगत चार वर्षों की तुलना में काफी नियंत्रित और कम स्तर पर बनी हुई हैं।
7 फीसदी तक ब्याज का लाभ! जानिए क्या है डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा और कैसे करें निवेश
10 Jun, 2026 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने देश में विदेशी मुद्रा के प्रवाह को बढ़ाने और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये को मजबूती प्रदान करने के लिए वाणिज्यिक बैंकों के लिए एक विशेष 'डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा' की शुरुआत की है। यह नई व्यवस्था प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) द्वारा बैंकों में सावधि जमा के रूप में रखी जाने वाली नई फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट यानी एफसीएनआर (बी) जमा राशियों पर लागू होगी। इस योजना के अंतर्गत जब भी कोई एनआरआई किसी भारतीय बैंक में विदेशी मुद्रा जमा कराएगा, तो संबंधित बैंक उस धनराशि को डॉलर में परिवर्तित कर केंद्रीय बैंक (आरबीआई) के पास जमा कर देगा। इसके साथ ही दोनों संस्थाओं के बीच एक अग्रिम अनुबंध होगा, जिसके तहत जमा अवधि पूरी होने पर आरबीआई उसी पुरानी विनिमय दर (एक्सचेंज रेट) पर बैंकों को डॉलर वापस लौटा देगा। इस हेजिंग व्यवस्था से बैंकों को विदेशी मुद्रा बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव के वित्तीय जोखिम से पूरी सुरक्षा मिलेगी।
केंद्रीय बैंक से मिलेगी सब्सिडी और बढ़ेंगी ब्याज दरें
आरबीआई इस विशेष फॉरेक्स स्वैप सुविधा के माध्यम से बैंकों और सार्वजनिक उपक्रमों को बिना किसी भारी हेजिंग लागत के विदेशी पूंजी जुटाने का अवसर दे रहा है। इस प्रक्रिया में लगने वाली स्वैप लागत पर केंद्रीय बैंक की ओर से सालाना 1.5 प्रतिशत की आकर्षक सब्सिडी भी दी जाएगी। वित्तीय विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस रियायत के बाद बैंक एनआरआई जमाकर्ताओं को आकर्षित करने के लिए एफसीएनआर (बी) खातों पर अपनी ब्याज दरों को बढ़ाकर 6 से 6.5 फीसदी तक कर सकते हैं। इसके अलावा, बैंकिंग क्षेत्र में जमा राशि जुटाने की आपसी प्रतिस्पर्धा के चलते कुछ विशेष चुनिंदा अवधियों के लिए यह ब्याज दर अधिकतम 7 प्रतिशत के स्तर को भी छू सकती है।
स्वैप विंडो के संचालन के लिए कड़े नियम और शर्तें तय
इस नई योजना को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए रिजर्व बैंक ने कुछ कड़े नीतिगत दिशानिर्देश और सीमाएं तय की हैं। इसके तहत बैंक आरबीआई के साथ न्यूनतम 10 लाख अमेरिकी डॉलर या इसके गुणक (मल्टीपल) में ही स्वैप सौदा कर सकेंगे। यह रियायती सुविधा केवल उन्हीं जमाओं पर देय होगी जो न्यूनतम तीन वर्ष और अधिकतम पांच वर्ष की परिपक्वता अवधि (मैच्योरिटी) के लिए लॉक होंगी। इसके अतिरिक्त, एनआरआई जमाकर्ता भले ही पाउंड, यूरो या अन्य किसी प्रमुख विदेशी मुद्रा में निवेश करें, लेकिन वाणिज्यिक बैंकों और आरबीआई के बीच अंतिम लेनदेन अनिवार्य रूप से केवल अमेरिकी डॉलर में ही निष्पादित किया जाएगा। इस योजना में निवेशकों के लिए एक साल का अनिवार्य लॉक-इन पीरियड होगा, जिससे पहले रकम की निकासी नहीं हो सकेगी और बैंकों के लिए एक बार किया गया स्वैप सौदा बीच में रद्द करने योग्य नहीं होगा।
वर्तमान में मिल रहे ब्याज के मुकाबले ज्यादा फायदेमंद होगी योजना
यदि मौजूदा बैंकिंग परिदृश्य पर नजर डालें, तो वर्तमान समय में देश के प्रमुख सरकारी और निजी बैंकों में अमेरिकी डॉलर पर आधारित एफसीएनआर (बी) जमा पर ब्याज दरें काफी कम यानी 3.85 प्रतिशत से लेकर 5 फीसदी के दायरे में ही सिमटी हुई हैं। वर्तमान में बैंक ऑफ बड़ौदा एक से दो साल की अल्पावधि जमा पर सबसे अधिक 5 प्रतिशत का ब्याज दे रहा है। वहीं, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) और कोटक महिंद्रा बैंक की दरें लगभग 4.40 फीसदी के आसपास हैं। इसके अलावा एक्सिस बैंक 4 प्रतिशत, एचडीएफसी बैंक 3.95 प्रतिशत और आईसीआईसीआई बैंक सबसे कम 3.85 फीसदी तक का ब्याज ऑफर कर रहे हैं। ऐसे में आरबीआई की यह नई स्वैप नीति प्रवासी भारतीयों को भारतीय बैंकों में सुरक्षित और अधिक रिटर्न वाले निवेश का एक बेहतरीन विकल्प प्रदान करेगी।
निवेशकों की हुई चांदी, सेंसेक्स में 300+ अंकों की बढ़त; निफ्टी ने पार किया 23330 स्तर
10 Jun, 2026 11:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। घरेलू शेयर बाजार में बुधवार को शुरुआती कारोबारी सत्र के दौरान जोरदार तेजी देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांक रिकॉर्ड ऊंचाइयों की तरफ बढ़ते नजर आए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का मुख्य सूचकांक सेंसेक्स 303.73 अंकों की छलांग लगाकर 74,222.49 के स्तर पर जा पहुंचा। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 85.40 अंकों की बढ़त दर्ज करते हुए 23,327.50 के अंक पर कारोबार करता दिखा। बाजार को रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईसीआईसीआई बैंक जैसे दिग्गज और मजबूत ब्लू-चिप शेयरों में हुई चौतरफा लिवाली से बड़ा सहारा मिला। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने भी भारतीय शेयर बाजार के सेंटिमेंट को मजबूत करने में सकारात्मक भूमिका निभाई। इससे पिछले कारोबारी दिन यानी मंगलवार को भी शेयर बाजार हरे निशान पर बंद हुआ था, जहां सेंसेक्स 394.50 अंक मजबूत होकर 73,918.76 पर और निफ्टी 119.10 अंक चढ़कर 23,242.10 के स्तर पर बंद होने में कामयाब रहा था।
दिग्गज कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव का दौर
शेयर बाजार में आए इस उछाल के बीच कंपनियों के नफे-नुकसान की बात करें, तो सेंसेक्स की शीर्ष 30 कंपनियों में से अधिकांश मुनाफे के साथ कारोबार कर रही थीं। इनमें हिंदुस्तान यूनिलीवर, रिलायंस इंडस्ट्रीज, कोटक महिंद्रा बैंक, एशियन पेंट्स, ट्रेंट और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में निवेशकों ने जमकर खरीदारी की, जिससे ये आज के टॉप गेनर्स (मुनाफा कमाने वाले) की सूची में शामिल रहे। इसके विपरीत, कुछ प्रमुख कंपनियों को बाजार की इस तेजी के बावजूद बिकवाली का सामना करना पड़ा, जिनमें मुख्य रूप से टाटा स्टील, इटरनल लिमिटेड, अदानी पोर्ट्स और टेक महिंद्रा के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। बाजार के जानकारों का कहना है कि बड़े शेयरों में आई इस चयनात्मक खरीदारी से सूचकांक को ऊपर बनाए रखने में काफी मदद मिल रही है, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की ओर से मंगलवार को 4,566.03 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की गई थी।
कच्चे तेल में गिरावट से भारतीय बाजार को बड़ी राहत
वैश्विक कमोडिटी बाजार में अंतरराष्ट्रीय तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड बुधवार को मामूली गिरावट के साथ 91.90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेंड कर रहा है, जो कि इसके पिछले 93 डॉलर के उच्चतम स्तर से काफी नीचे है। बाजार विश्लेषकों और वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि इक्विटी मार्केट फिलहाल पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक संकट को नजरअंदाज करते हुए आगे बढ़ रहा है और कच्चे तेल के दामों में आई यह कमी इसी बात का संकेत है। शोध विश्लेषकों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों का घटना भारत जैसे बड़ी तेल आयातक अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद शुभ संकेत है। इससे देश के चालू खाता घाटे (कैड) पर होने वाला अतिरिक्त वित्तीय बोझ कम होगा और साथ ही घरेलू बाजार में महंगाई की चिंताओं को दूर करने में भी बड़ी मदद मिलेगी, जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ है।
वैश्विक तनाव के चलते अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर
एक तरफ जहां शेयर बाजार में रौनक रही, वहीं दूसरी तरफ विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार से भारतीय करेंसी के लिए अच्छी खबर नहीं आई। बुधवार को शुरुआती कारोबार के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 15 पैसे की कमजोरी के साथ 95.56 के स्तर पर फिसल गया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले 95.52 पर खुला था, लेकिन विदेशी बाजारों के दबाव के कारण यह टूटकर 95.56 तक चला गया, जबकि मंगलवार को रुपया 25 पैसे सुधरकर 95.41 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। कारोबारियों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिका और ईरान के बीच जारी जवाबी हमलों तथा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों के कारण विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर के प्रति आकर्षण बढ़ा है। इस वजह से दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.03 प्रतिशत बढ़कर 99.94 पर पहुंच गया है, जिसका सीधा और प्रतिकूल असर भारतीय रुपये की सेहत पर पड़ रहा है।
तीन साल में बड़ा बदलाव! TCS में इंसानों के बराबर हो सकते हैं AI कर्मचारी, जानें वजह
9 Jun, 2026 03:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते प्रसार के बीच रोजगार छिनने की चिंताओं और व्यापारिक संभावनाओं को लेकर देश की सबसे बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सेवा प्रदाता कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने भविष्य का एक बेहद स्पष्ट रोडमैप साझा किया है। टीसीएस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने सोमवार को एक युगांतकारी घोषणा करते हुए कहा कि आगामी तीन वर्षों के भीतर कंपनी के मानव संसाधनों (कर्मचारियों) की संख्या के ठीक बराबर ही 'एआई एजेंट' या 'डिजिटल वर्कर' भी कार्यबल का हिस्सा बन जाएंगे। इस बयान से यह पूरी तरह साफ हो गया है कि एआई अब महज कोई तकनीकी शोध या प्रयोग नहीं है, बल्कि कॉरपोरेट जगत की भावी प्रगति का मुख्य आधार स्तंभ बन चुका है।
सालाना एआई रेवेन्यू 2.5 अरब डॉलर के पार और निवेश में भारी तेजी
कंपनी की 31वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) को संबोधित करते हुए चेयरमैन चंद्रशेखरन ने बताया कि टीसीएस अपने आंतरिक प्रणालियों, समाधानों के ढांचे और वैश्विक क्लाइंट्स से जुड़े कार्यों में एआई एजेंट्स को तैनात करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। उन्होंने शेयरधारकों के सामने दावा किया कि वह समय बहुत नजदीक है जब कंपनी में जितने हाड़-मांस के कर्मचारी होंगे, उतने ही रोबोटिक एआई एजेंट भी काम संभाल रहे होंगे। यदि वित्तीय मोर्चे की बात करें तो पिछले चार क्वार्टर (तिमाहियों) से कंपनी की एआई आधारित कमाई में लगातार 22 फीसदी से अधिक की त्रैमासिक बढ़ोतरी दर्ज हो रही है और वित्त वर्ष 2026 की समाप्ति तक कंपनी का सालाना एआई राजस्व उछलकर 2.5 अरब डॉलर के बड़े आंकड़े को पार कर गया है।
आईटी क्षेत्र के लिए खतरा नहीं बल्कि सबसे बड़ा अवसर है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
चेयरमैन चंद्रशेखरन ने एआई के कारण आईटी उद्योग के वजूद पर मंडराने वाले संकट की थ्योरी को पूरी तरह से एक 'भ्रम' और गलतफहमी करार दिया है। उन्होंने निवेशकों को आश्वस्त किया कि यह तकनीक उद्यमों के लिए कोई खतरा नहीं, बल्कि वैश्विक आईटी सेक्टर्स के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा और अनूठा अवसर है। उन्होंने एआई युग में विकास के पांच प्रमुख क्षेत्रों को रेखांकित किया, जिनमें पुरानी प्रणालियों और बिखरे डेटा का आधुनिकीकरण करना, सप्लाई चेन व कस्टमर जर्नी जैसे मुख्य बिजनेस प्रोसेस को पूरी तरह एआई-संचालित बनाना, एआई गवर्नेंस व डेटा सुरक्षा का प्रबंधन करना, सॉवरेन एआई के तहत सरकारों के डेटा पर पूर्ण नियंत्रण की मांग को पूरा करना (जिसके लिए भारत और यूरोप में विशेष प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं) और कारखानों में 'फिजिकल एआई' यानी रोबोटिक्स को बढ़ावा देना शामिल है। उदाहरण के तौर पर एक वैश्विक कृषि कंपनी के गोदामों में जोखिम भरे कार्यों की निगरानी के लिए चार पैरों वाले उन्नत रोबोट का सफल संचालन किया जा रहा है।
मुनाफा बढ़कर 52,820 करोड़ रुपये पर पहुंचा और नए सौदों की पाइपलाइन मजबूत
बाजार की तमाम आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद टीसीएस का व्यावसायिक प्रदर्शन और वित्तीय स्थिति अत्यंत सुदृढ़ बनी हुई है। कंपनी के चेयरमैन के मुताबिक, टीसीएस का ऑपरेटिंग मार्जिन पूरी तरह सुरक्षित है, कुल आय बढ़ रही है और नए प्रोजेक्ट्स हासिल करने की पाइपलाइन पहले से कहीं अधिक मजबूत स्थिति में है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का समेकित राजस्व (कंसोलिडेटेड रेवेन्यू) 4.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2.67 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जबकि कंपनी का शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) 8.8 प्रतिशत की शानदार बढ़त के साथ 52,820 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इस पूरे वित्तीय वर्ष के दौरान कंपनी की कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (TCV) 40.7 अरब डॉलर से अधिक रही। उन्होंने अंत में कहा कि जैसे-जैसे इंटेलिजेंस की लागत घटेगी, दुनिया की 75 फीसदी कंपनियां अगले दो सालों में अपना एआई बजट बढ़ाएंगी, जहां मॉडल से ज्यादा 'भरोसा और संदर्भ' मायने रखेगा, और टीसीएस अपने पुराने ग्राहक संबंधों के दम पर इस एआई क्रांति का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत चमकेगा, World Bank ने जताया मजबूत विश्वास
9 Jun, 2026 03:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल और आर्थिक सुस्ती के थपेड़ों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था एक अभेद्य दीवार की तरह मजबूती से टिकी हुई है। विश्व बैंक ने भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद की सराहना करते हुए स्पष्ट किया है कि आने वाले समय में भी देश की जीडीपी वृद्धि दर की रफ्तार सबसे तेज बनी रहेगी। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान के इस दृढ़ भरोसे के पीछे भारत का सुधरा हुआ कारोबारी माहौल, दुनिया भर के देशों के साथ तेजी से होते द्विपक्षीय व्यापारिक समझौते और देश के प्रमुख विनिर्माण क्षेत्रों, विशेष रूप से खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) उद्योग की एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका है।
मजबूत आंतरिक बुनियादी ढांचे और व्यापार समझौतों से मिला आर्थिक संबल
विश्व बैंक के भारत में ऑपरेशंस मैनेजर और कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी ने भारतीय अर्थव्यवस्था की इस कामयाबी पर अपने विचार साझा किए हैं। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय और विश्व बैंक के साझा तत्वावधान में आयोजित 'सैपलिंग हाई-लेवल पॉलिसी डायलॉग' के दौरान उन्होंने कहा कि भारत के पास स्वयं का एक विशाल घरेलू बाजार है और इसकी बेसलाइन ग्रोथ अत्यधिक टिकाऊ है। उनके विश्लेषण के मुताबिक, भारत सरकार द्वारा लगातार अपने मानव संसाधन के कौशल विकास और व्यापारिक लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर में किया जा रहा भारी निवेश ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। इसके अलावा, विभिन्न विकसित देशों के साथ किए जा रहे मुक्त व्यापार समझौते (FTA) भारतीय बाजार को बाहरी झटकों और वैश्विक मंदी के खतरों से सुरक्षित रख रहे हैं।
वैश्विक निवेशकों के लिए भारत बना पसंदीदा गंतव्य और विशाल बाजार
पॉल प्रोसी ने भारत की भौगोलिक और आर्थिक व्यापकता को देखते हुए इसकी तुलना एक पूरे 'महाद्वीप' से की। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत सरकार ने एक ऐसा पारदर्शी और सुगम कॉर्पोरेट इकोसिस्टम तैयार किया है, जहां घरेलू और विदेशी दोनों तरह का पूंजी निवेश सीधे निजी क्षेत्र (प्राइवेट सेक्टर) को बढ़ावा दे रहा है। भारत का तेजी से समृद्ध होता मध्यमवर्ग और उसकी विशाल क्रय शक्ति (कंज्यूमर बेस) दुनिया भर के बड़े निवेशकों को भारी मुनाफे की गारंटी दे रहे हैं। इसी कारण से दुनिया के अन्य उभरते बाजारों की तुलना में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के लिए भारत आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहली पसंद बनकर उभरा है।
फूड प्रोसेसिंग सेक्टर बनेगा देश का नया ग्रोथ इंजन और बदलेगी गांवों की तस्वीर
विश्व बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने अपने संबोधन में 'फूड प्रोसेसिंग' को देश के आर्थिक विकास का अगला सबसे बड़ा संवाहक (ग्रोथ इंजन) करार दिया है। वर्तमान में भी यह सेक्टर भारत के मुख्य विनिर्माण और निर्यात का एक मजबूत स्तंभ है, जिसे और अधिक आधुनिक बनाने के लिए विश्व बैंक व भारत सरकार मिलकर काम कर रहे हैं। इस पहल के तहत किसानों के लिए कोल्ड चेन, मजबूत सप्लाई चेन और प्रत्यक्ष बाजार संपर्क (मार्केट लिंकेज) को दुरुस्त किया जा रहा है। चूंकि भारत की लगभग 60 प्रतिशत आबादी आज भी ग्रामीण अंचलों में निवास करती है, इसलिए इस कृषि-आधारित उद्योग के विस्तार से न केवल काश्तकारों की आय दोगुनी होगी, बल्कि ग्रामीण भारत में बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई गति मिलेगी।
'SEBI खातों की एंट्री समझने में चूक गया', Rajesh Exports चेयरमैन का बड़ा बयान
9 Jun, 2026 03:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु। राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन राजेश मेहता ने मंगलवार को अपनी सहायक कंपनी एसीसी एनर्जी और प्रमोटर-नियंत्रित कंपनी एलेस्ट लिमिटेड के बीच पैसों की किसी भी तरह की हेराफेरी (डायवर्जन) के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने कंपनी के खातों में दर्ज अकाउंटिंग प्रविष्टियों को समझने में गंभीर भूल की है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कंपनी सरकार की 18,100 करोड़ रुपये की उन्नत रसायन सेल (ACC) प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना से बाहर होने के कगार पर पहुंच गई है। चेयरमैन ने स्पष्ट किया कि फंड का कोई गलत इस्तेमाल नहीं हुआ है और कंपनी जांच एजेंसियों के सामने पूरा ब्योरा देने के लिए तैयार है।
सेबी ने लगाया 15 लाख करोड़ के टर्नओवर में हेरफेर का गंभीर आरोप
बाजार नियामक सेबी ने 3 जून को जारी अपने अंतरिम आदेश में राजेश मेहता के नियंत्रण वाली इन दोनों कंपनियों के बीच हुए वित्तीय सौदों पर कड़े सवाल उठाए थे। सेबी का आरोप है कि वित्तीय वर्ष 2021 से 2025 के दौरान कंपनी ने अपनी सहायक इकाई के जरिए करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये का राजस्व (टर्नओवर) गलत और भ्रामक तरीके से बहीखातों में दिखाया, जो कुल घोषित राजस्व का 99.8 फीसदी हिस्सा है। नियामक ने इस संदिग्ध क्रॉस-होल्डिंग व्यवस्था के चलते राजेश मेहता पर अपनी ही मूल कंपनी के शेयरों में ट्रेडिंग करने पर अंतरिम रोक लगा दी है और खातों के फोरेंसिक ऑडिट का आदेश जारी किया है। सेबी के अनुसार, जनवरी 2025 में एलेस्ट ने बिना किसी मूल्यांकन (वैल्यूएशन) रिपोर्ट के एसीसी एनर्जी में भारी निवेश किया और होल्डिंग पैटर्न बदलकर निवेशकों को गुमराह किया, जिससे कंपनी के एमडी और सीएफओ भी पूरी तरह अनजान थे।
18,100 करोड़ रुपये की सरकारी पीएलआई योजना पर मंडराया संकट
इन गंभीर आरोपों और सेबी की सख्ती के बाद भारी उद्योग मंत्रालय भी पूरी तरह एक्शन में आ गया है। मंत्रालय इस बात की गहन समीक्षा कर रहा है कि क्या राजेश एक्सपोर्ट्स को देश के इस महत्वाकांक्षी बैटरी विनिर्माण कार्यक्रम से अयोग्य घोषित कर दिया जाए। यह योजना भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसमें यह कंपनी एक मुख्य भागीदार है। इस विवाद के बीच चेयरमैन ने कहा कि परियोजना के क्रियान्वयन में उचित प्रगति हुई है, लेकिन तकनीकी अनुसंधान और विकास (R&D) में कुछ अतिरिक्त समय लग रहा है। इसी देरी का हवाला देते हुए कंपनी ने सरकार से परियोजना को पूरा करने के लिए एक वर्ष का अतिरिक्त समय (एक्स्टेंशन) देने की आधिकारिक मांग की है।
कर्नाटक के हुबली में 65 फीसदी पूरा हुआ देश का पहला स्वदेशी बैटरी प्लांट
कंपनी के चेयरमैन राजेश मेहता ने परियोजना की वर्तमान स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि वे दुनिया की सबसे आधुनिक और 100 प्रतिशत स्वदेशी तकनीक पर आधारित बैटरी सेल विकसित करने पर काम कर रहे हैं। इस नए आविष्कार की जटिलता के कारण ही समय सीमा में थोड़ा बदलाव हुआ है। उन्होंने बताया कि कर्नाटक के हुबली में स्थापित किया जा रहा एसीसी बैटरी संयंत्र का निर्माण कार्य लगभग 60 से 65 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। हालांकि कंपनी इस प्रोजेक्ट को तय समय सीमा यानी 2025 के अंत तक शत-प्रतिशत पूरा नहीं कर पाई है, लेकिन प्रोग्रेस पूरी तरह संतोषजनक है और इस संबंध में भारी उद्योग मंत्रालय को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए लिखित स्पष्टीकरण सौंप दिया गया है।
बैंक खाते में नकद जमा करने से पहले जान लें ये नियम, वरना आ सकता है आयकर नोटिस
9 Jun, 2026 12:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। बैंक खातों में बड़ी मात्रा में नकदी जमा होते ही आयकर विभाग (Income Tax Department) की सक्रियता बढ़ जाती है। विशेष रूप से नोटबंदी के दौर के बाद से नकद जमा, कैश सेल्स और व्यावसायिक लेन-देन पर टैक्स अधिकारियों की पैनी नजर है। हालांकि, आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT) के हालिया फैसलों ने यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि बैंक खाते में सिर्फ नकद जमा करना कोई कानूनन अपराध नहीं है। मुख्य बात यह है कि उस नकदी का वास्तविक स्रोत (सोर्स) क्या है और क्या करदाता उसके पुख्ता प्रमाण पेश करने में सक्षम है।
कारोबार के पुराने रिकॉर्ड और बहीखाते सही होने पर टैक्सपेयर को राहत
आयकर विभाग ने नोटबंदी के समय जमा की गई भारी नकदी को बेनामी संपत्ति या अघोषित आय मानते हुए कई करदाताओं पर भारी टैक्स और पेनाल्टी थोप दी थी। ऐसे ही एक मामले में एक स्क्रैप कारोबारी के खाते में 1.28 करोड़ रुपये नकद जमा पाए गए थे, जिसे विभाग ने संदिग्ध माना। करदाता ने दलील दी कि यह राशि उसके दैनिक व्यापार की नकद बिक्री से आई थी और विभाग पूर्व के वर्षों में भी उसके ऐसे ही टर्नओवर को मंजूरी दे चुका था। इस पर सुनवाई करते हुए आईटीएटी ने फैसला सुनाया कि यदि करदाता का पुराना व्यावसायिक इतिहास, अकाउंट बुक्स और बिक्री का तरीका नकद जमा की पुष्टि करते हैं, तो केवल बैंक में पैसा जमा होने के आधार पर उसे अघोषित कमाई नहीं ठहराया जा सकता।
कागजी विसंगतियों और पुख्ता सबूत न होने पर करदाता हारा केस
इसके विपरीत, दिल्ली आईटीएटी के समक्ष आए एक दूसरे मामले में 1.34 करोड़ रुपये की नकद जमा को लेकर करदाता को कोई राहत नहीं मिल सकी। इस मामले में भी करदाता ने जमा रकम को नकद बिक्री का हिस्सा बताया था, लेकिन जब सरकारी स्तर पर दस्तावेजों की स्क्रूटनी की गई, तो खरीद-बिक्री के दावों में भारी विसंगतियां और हेरफेर पकड़ी गई। जांच में माल की खरीद वास्तविक नहीं पाई गई और बहीखातों के आंकड़े बिक्री की कहानी को साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहे। अपीलीय अधिकरण ने माना कि यदि व्यापारिक गतिविधियां केवल कागजों पर बुनी गई प्रतीत हों और उनका कोई ठोस आधार न हो, तो खाते में जमा कैश को अघोषित आय ही माना जाएगा।
करेंसी जमा करने पर भारी टैक्स से बचने के लिए ये दस्तावेज हैं बेहद जरूरी
इन न्यायिक फैसलों से यह साफ संदेश मिलता है कि आयकर विभाग केवल जमा की गई रकम को नहीं, बल्कि उसके पीछे के पूरे वित्तीय घटनाक्रम और प्रमाणों को देखता है। यदि अचानक खाते में मोटी रकम जमा होती है और टैक्स रिटर्न (ITR) में दिखाई गई आय उससे मेल नहीं खाती, तो भारी टैक्स देनदारी तय होना निश्चित है। अगर यह जमा राशि अघोषित आय साबित होती है, तो आयकर अधिनियम की धारा 69ए और 115बीबीई के तहत 60 प्रतिशत से अधिक की दर से भारी टैक्स और जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। इस कानूनी पेंच से बचने के लिए हर कारोबारी के पास खरीद-बिक्री के वैध बिल, स्टॉक रजिस्टर, कैश बुक, बैंक स्टेटमेंट, जीएसटी रिटर्न और ग्राहकों व सप्लायर्स के प्रामाणिक रिकॉर्ड होने अनिवार्य हैं।
Zepto को बड़ा झटका! ED के रडार पर फाउंडर्स, IPO से पहले बढ़ी चिंता
9 Jun, 2026 12:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। भारत में महज 10 मिनट में सामान पहुंचाने का दावा करने वाली क्विक कॉमर्स क्षेत्र की दिग्गज कंपनी 'जेप्टो' (Zepto) बहुत जल्द घरेलू शेयर बाजार में अपना आईपीओ (IPO) लाने की तैयारी में है। हालांकि, इस बहुप्रतीक्षित 10 हजार करोड़ रुपये के पब्लिक इश्यू के लॉन्च होने से ठीक पहले एक बेहद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। बाजार नियामक सेबी (SEBI) के पास जमा किए गए कंपनी के संशोधित दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ है कि केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के कथित उल्लंघन के मामले में कंपनी के प्रमोटर्स को पूछताछ के लिए तलब किया था।
सेबी के पास जमा नए ड्राफ्ट में हुआ ईडी के समन का खुलासा
सोमवार को सेबी के समक्ष दाखिल किए गए अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (UDRHP) के 'जोखिम कारक' (Risk Factors) वाले खंड में इस कानूनी पेंच का जिक्र किया गया है। आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, अप्रैल 2026 में प्रवर्तन निदेशालय ने जेप्टो के दोनों सह-संस्थापकों—आदित पालिचा और कैवल्य वोहरा को समन जारी किया था। यह खबर ऐसे नाजुक मोड़ पर आई है जब कंपनी अगले कुछ महीनों के भीतर दलाल स्ट्रीट पर कदम रखने की पूरी योजना बना चुकी है। 8 अप्रैल 2026 को भेजे गए समन के जरिए ईडी ने दोनों प्रमोटर्स से विदेशी पूंजी निवेश, वित्तीय वर्ष 2021 के बाद के ऑडिटेड वित्तीय रिकॉर्ड, शेयर होल्डिंग का ढांचा, टैक्स रिटर्न, बैंक खातों और कंपनी के संपूर्ण बिजनेस मॉडल की बारीकी से जानकारी मांगी थी।
जांच एजेंसी के सामने पेश हुए दोनों फाउंडर्स और सौंपे दस्तावेज
दस्तावेजों में दी गई जानकारी के अनुसार, दोनों युवा संस्थापकों ने इस मामले में जांच एजेंसी का पूरा सहयोग किया है और तय तारीखों पर पेश होकर अपनी बात रखी है। सह-संस्थापक कैवल्य वोहरा क्रमशः 17 और 22 अप्रैल को ईडी के समक्ष हाजिर हुए, जबकि मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) आदित पालिचा ने 20 अप्रैल और 15 मई को जांच टीम के सामने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। पूछताछ के दौरान अधिकारियों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब देने के साथ ही दोनों ने मांग के अनुसार सभी जरूरी वित्तीय कागजात, इनवॉइस और सहायक दस्तावेज (फॉलो-अप डिटेल्स) केंद्रीय एजेंसी को सौंप दिए हैं।
10,000 करोड़ रुपये के आईपीओ का ढांचा और फंड का इस्तेमाल
मई महीने में सेबी की तरफ से जेप्टो को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के लिए हरी झंडी मिल चुकी है, जिसके बाद यह सार्वजनिक होने वाली देश की पहली क्विक कॉमर्स कंपनी बन जाएगी। इस विशाल आईपीओ के जरिए कंपनी बाजार से लगभग 10,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य लेकर चल रही है, जिसमें 8,010 करोड़ रुपये के बिल्कुल नए शेयर (फ्रेश इश्यू) जारी किए जाएंगे। इसके अलावा कंपनी के मौजूदा प्रमोटर्स और निवेशक ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से 11.34 करोड़ से अधिक इक्विटी शेयरों की बिक्री करेंगे। नए शेयरों से मिलने वाली 8,010 करोड़ रुपये की पूंजी का उपयोग जेप्टो देश भर में अपने 'डार्क स्टोर्स' के नेटवर्क का विस्तार करने, किराए के भुगतान, तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और ब्रांडिंग व मार्केटिंग गतिविधियों को तेज करने के लिए करेगी।
GDP ग्रोथ अनुमान में कटौती, महंगाई से लेकर रोजगार तक आम आदमी पर पड़ सकता है असर
9 Jun, 2026 11:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच भड़के सैन्य टकराव का सीधा असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर दिखने लगा है। वैश्विक रेटिंग एजेंसी 'फिच' ने भारत के आर्थिक विकास दर (जीडीपी ग्रोथ रेट) के अनुमान में कटौती कर एक नई चिंता पैदा कर दी है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर जारी इस भू-राजनीतिक तनाव और तनातनी का सीधा प्रभाव आम आदमी की जेब, घरेलू बजट और बैंकों से लिए गए लोन की ईएमआई (EMI) पर पड़ने की आशंका गहरा गई है।
वैश्विक एजेंसी फिच ने घटाई भारत की अनुमानित आर्थिक विकास दर
ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच ने मौजूदा वित्त वर्ष (2026-27) के लिए भारत की जीडीपी विकास दर का अनुमान 6.7 प्रतिशत से घटाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया है। एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष में दर्ज की गई 7.4 फीसदी की बेहतरीन वृद्धि के बाद अब देश की आर्थिक गतिविधियों में थोड़ी नरमी का दौर देखा जाएगा। इस गिरावट का मुख्य असर चालू वित्त वर्ष की दूसरी और तीसरी तिमाहियों के दौरान सबसे ज्यादा महसूस होने की उम्मीद है। ध्यान रहे कि पिछले दिनों भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी देश की विकास दर के अनुमान को संशोधित कर 6.6 प्रतिशत कर दिया था।
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से उपजा गहरा तेल संकट
आर्थिक मोर्चे पर आ रही इस सुस्ती की सबसे मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा युद्ध और इसके कारण दुनिया भर में पैदा हुआ कच्चे तेल का संकट है। वैश्विक व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' बीते 14 हफ्तों से पूरी तरह बंद पड़ा है और आगामी जुलाई महीने तक इसके खुलने के कोई आसार नहीं नजर आ रहे हैं। इस वजह से हालिया हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में चार से पांच प्रतिशत की तेजी आई है। फिच का मानना है कि कच्चे तेल के बढ़ते दामों के चलते आम उपभोक्ताओं की वास्तविक आय प्रभावित हो रही है, जिससे बाजार में उनकी खरीदारी और खर्च करने की क्षमता कम होगी।
महंगाई दर बढ़ने का खतरा और लोन की किस्तें महंगी होने के आसार
फिच की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में भले ही इस वक्त थोक और खुदरा महंगाई नियंत्रण में दिख रही हो, लेकिन ईंधन की आसमान छूती कीमतों के चलते साल के अंत तक खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.3 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच सकती है। इसके साथ ही देश के कई राज्यों में पड़ रही प्रचंड गर्मी और अल नीनो के कारण कमजोर मानसून की आशंका ने खाद्यान्न संकट का जोखिम बढ़ा दिया है। इस संभावित महंगाई को नियंत्रित करने के लिए रिजर्व बैंक इस साल अपनी नीतिगत ब्याज दरों (रेपो रेट) को 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत कर सकता है, जिसका सीधा मतलब यह होगा कि आम जनता के होम, कार और पर्सनल लोन की किस्तें (EMI) और अधिक महंगी हो जाएंगी। हालांकि, लंबे समय के परिप्रेक्ष्य में फिच ने उम्मीद जताई है कि आगामी वित्त वर्ष 2027-28 तक ऊर्जा संकट का प्रभाव कम होने के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था दोबारा 6.7 प्रतिशत की दर से छलांग लगाएगी।
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