व्यापार
पोर्ट संचालन में पारदर्शिता पर जोर, DG Shipping का आदेश जारी
9 Apr, 2026 12:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के महानिदेशालय शिपिंग ने देश के सभी बंदरगाहों को निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में फंसे निर्यातकों को दी जाने वाली रियायतों का पूरा लाभ पारदर्शी तरीके से पहुंचाया जाए। जारी सर्कुलर में कहा गया है कि कई मामलों में पोर्ट अथॉरिटीज की ओर से दी गई रियायतें जैसे डिटेंशन चार्ज, ग्राउंड रेंट और रीफर प्लग-इन शुल्क निर्यातकों तक समान रूप से नहीं पहुंच रही हैं। ऐसे में अब इन रियायतों को सीधे और पारदर्शी तरीके से संबंधित हितधारकों, जैसे फ्रेट फॉरवर्डर्स और NVOCCs के माध्यम से निर्यातकों तक पहुंचाना अनिवार्य किया गया है।
पोर्ट अथॉरिटीज को क्या जिम्मेदारी दी गई?
डीजी शिपिंग ने पोर्ट अथॉरिटीज को यह भी जिम्मेदारी दी है कि वे टर्मिनल स्तर पर इसकी निगरानी करें, ताकि किसी भी तरह की देरी या गड़बड़ी न हो और लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक समय पर पहुंचे।
क्यों उठाया गया यह कदम?
यह कदम 497 करोड़ रुपये की निर्यात सुविधा हेतु लचीलापन और लॉजिस्टिक्स हस्तक्षेप (RELIEF) योजना के तहत निर्यातकों को राहत सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है, ताकि संकट के बीच व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित न हों।
शिपिंग लाइनों को क्या दिए गए निर्देश?
साथ ही, शिपिंग लाइनों को निर्देश दिया गया है कि वे शुल्क निर्धारण में पूरी पारदर्शिता और ऑडिट की सुविधा सुनिश्चित करें। डीजी शिपिंग ने यह भी कहा कि कार्गो पर लगाए जा रहे वार रिस्क प्रीमियम में बदलाव हुए हैं, जो पहले जारी निर्देशों के अनुरूप नहीं हो सकते। इस मुद्दे को बीमा कंपनियों के साथ उठाया जा रहा है। इसी बीच, ईरान के आसपास के समुद्री क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नाविकों के लिए भी सुरक्षा सलाह जारी की गई है। सलाह में कहा गया है कि तट पर मौजूद नाविक घर के भीतर रहें, संवेदनशील इलाकों से दूर रहें और भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें। जहाजों पर तैनात कर्मियों को अनावश्यक रूप से किनारे पर जाने से बचने और सतर्क रहने की हिदायत दी गई है। डीजी शिपिंग ने सभी कर्मियों से आधिकारिक निर्देशों का पालन करने और लगातार संपर्क में रहने को कहा है।
विक्रम मिस्री अमेरिका रवाना, अहम मुद्दों पर होगी उच्चस्तरीय वार्ता
9 Apr, 2026 12:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका अपने कई क्षेत्रों में व्यपार को बढ़ाने के लिए बातचीत कर रहा है। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने अपने तीन दिवसीय अमेरिकी दौरे के दौरान कई उच्चस्तरीय बैठकें की। दोनों देशों ने व्यापार, रक्षा और जरूरी तकनीक के मामले में बातचीत बढ़ाई है। यह बातचीत पेंटागन और भारत के वाणिज्य विभाग के बीच हुई। इसके साथ ही व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए एक नए डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से आम लोगों तक पहुंचने वाली पहल पर भी चर्चा की गई।
व्यापार फैसिलिटेशन पोर्टल लॉन्च
भारत के विदेश सचिव मिस्री और अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने मिलकर भारत-अमेरिकी व्यापार फैसिलिटेशन पोर्टल लॉन्च किया। अमेरिका में भारतीय दूतावास ने इसे भारत और अमेरिका के बीच व्यापार की पूरी क्षमता को खोलने की दिशा में एक और कदम बताया। इस पोर्टल का मकसद मिशन 500 का समर्थन करना है, जिसमें एक्सपोर्टर्स के लिए रजिस्ट्रेशन अब खुले हैं। अधिकारियों ने कहा कि इस पहल का मकसद बाजार तक पहुंच को आसान बनाना और वाणिज्यिक जुड़ाव को गहरा करना है। पेंटागन में, मिस्री अमेरिकी युद्ध विभाग में अधिग्रहण और सस्टेनमेंट के अवर सचिव माइक डफी के साथ बातचीत की। भारतीय दूतावास ने कहा, दोनों पक्षों ने पिछले साल हस्ताक्षर किए गए द्विपक्षीय मेजर डिफेंस पार्टनरशिप के फ्रेमवर्क में तय बड़े लक्ष्यों के हिसाब से, भारत और अमेरिका के बीच रक्षा उद्योग, तकनीक और सप्लाई चेन जुड़ाव को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की।
रक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए बातचीत
रक्षा संबधित बातचीत में दोनों देशों के बीच ओद्योगिक सहयोग, तकनीकी आदान-प्रदान और सप्लाई चेन इंटीग्रेशन पर बढ़ते फोकस पर जोर दिया गया।
वाणिज्य विभाग में मिस्री ने कमर्शियल और जरूरी तकनीक में सहयोग बढ़ाने के लिए अवर सचिव जेफरी केसलर और विलियम किमिट से मुलाकात की।
विक्रम मिस्री का यह दौरा फरवरी में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के वॉशिंगटन दौरे के बाद हो रहा है। यह दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय बातचीत की लगातार रफ्तार का हिस्सा है।
बातचीत दोनों देशों की मजबूती के लिए जरूरी
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों के पूरे स्पेक्ट्रम की समीक्षा करने और व्यापार, रक्षा, विज्ञान और टेक्नोलॉजी, साथ ही आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक विकास सहित प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने का मौका देता है। भारत और अमेरिका ने हाल के वर्षों में एक व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के तहत सहयोग बढ़ाया है। इसमें रक्षा, तकनीक और सप्लाई चेन प्रमुख स्तंभों के रूप में उभरे हैं। द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ी है और दोनों पक्ष इसे और बढ़ाने का लक्ष्य बना रहे हैं। नए ट्रेड पोर्टल जैसी पहलों से एक्सपोर्ट को मदद मिलने और आर्थिक एकीकरण को गहरा करने की उम्मीद है।
IMF रिपोर्ट: भारत के बढ़ते रक्षा खर्च से घरेलू उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
9 Apr, 2026 11:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत के रक्षा क्षेत्र में बढ़ते स्वदेशी उत्पादन को देश की आर्थिक वृद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण सकारात्मक कदम बताया है। आईएमएफ के एक हालिया विश्लेषण के अनुसार, जब सैन्य खर्च स्थानीय उद्योगों को समर्थन देता है, तो यह न केवल उत्पादन में बढ़ोतरी करता है बल्कि समग्र अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करता है। आईएमएफ के वैश्विक रक्षा रुझानों पर आधारित इस विश्लेषण में कहा गया है कि रक्षा क्षेत्र में होने वाली वृद्धि अल्पावधि में आर्थिक गतिविधियों को तेज कर सकती है। इससे उपभोग और निवेश दोनों में वृद्धि देखी जा सकती है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक शुभ संकेत है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनावों के बढ़ते माहौल के बीच रक्षा खर्च में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हाल के वर्षों में करीब आधे देशों ने अपने रक्षा बजट में वृद्धि की है, जिसने शीत युद्ध के बाद देखी गई गिरावट को पलट दिया है।
घरेलू उत्पादन पर जोर, फायदे अनेक
भारत के संदर्भ में आईएमएफ के निष्कर्ष स्पष्ट रूप से आर्थिक बढ़त की ओर इशारा करते हैं। आईएमएफ का मानना है कि जब रक्षा खर्च आयात पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू उत्पादन पर आधारित होता है, तो इसके फायदे और भी अधिक हो जाते हैं। आईएमएफ ने कहा है कि रक्षा खर्च का मल्टीप्लायर औसतन 1 के करीब होता है, जिसका अर्थ है कि खर्च में की गई हर बढ़ोतरी मोटे तौर पर आर्थिक उत्पादन में वैसी ही बढ़ोतरी में बदल जाती है। हालांकि, यह प्रभाव देशों के बीच अलग-अलग होता है। जिन देशों की हथियारों के आयात पर निर्भरता अधिक होती है, उनमें रक्षा खर्च मल्टीप्लायर छोटे होते हैं, क्योंकि मांग का एक हिस्सा विदेशों में चला जाता है। यह अंतर भारत के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है। भारत ने विदेशी हथियारों पर अपनी निर्भरता कम करने और एक मजबूत घरेलू रक्षा आधार स्थापित करने के प्रयासों को तेज किया है। रक्षा खर्च का एक बड़ा हिस्सा अब स्थानीय विनिर्माण, निजी कंपनियों और संयुक्त उद्यमों की ओर निर्देशित किया जा रहा है।
आर्थिक संतुलन और रोजगार सृजन
आईएमएफ ने यह भी बताया है कि आयात पर अधिक खर्च बाहरी संतुलन को कमजोर कर सकता है, क्योंकि मांग आयातित उपकरणों की ओर बढ़ जाती है। भारत का स्वदेशीकरण पर जोर ऐसे दबावों को कम करने में सहायक है। इससे मांग का एक बड़ा हिस्सा देश की अर्थव्यवस्था के भीतर ही बना रहता है, जो रोजगार सृजन और निवेश को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा खर्च एक लक्षित मांग झटके के रूप में कार्य करता है। यह सरकारी उपभोग को बढ़ाता है और विशेष रूप से रक्षा से जुड़े क्षेत्रों में निजी खर्च को प्रोत्साहित कर सकता है। समय के साथ, यह उत्पादकता को भी समर्थन दे सकता है। आईएमएफ का मानना है कि सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता देने वाला निर्माण लंबे समय तक उत्पादकता वृद्धि का समर्थन कर सकता है।
खर्च में तेजी के जोखिम
हालांकि, आईएमएफ ने रक्षा खर्च में बहुत तेजी से वृद्धि होने पर कुछ जोखिमों की ओर भी इशारा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अत्यधिक वृद्धि से राजकोषीय घाटा जीडीपी के लगभग 2.6 प्रतिशत तक बढ़ सकता है और सार्वजनिक ऋण तीन साल के भीतर लगभग 7 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। ये दबाव संघर्ष की स्थिति में और बढ़ सकते हैं, जब कर्ज तेजी से बढ़ता है और सामाजिक खर्चों में कटौती करनी पड़ सकती है।
वैश्विक परिदृश्य और भारत का स्थान
2010 के दशक के मध्य से दुनिया भर में रक्षा खर्च बढ़ रहा है। वर्तमान में लगभग 40 प्रतिशत देश अपनी जीडीपी का 2 प्रतिशत से अधिक रक्षा पर खर्च करते हैं। नाटो सदस्यों ने 2035 तक अपने रक्षा और सुरक्षा खर्च को जीडीपी के 5 प्रतिशत तक बढ़ाने का वादा किया है, जो सैन्य खर्च में निरंतर वृद्धि की ओर संकेत करता है। भारत अपनी जीडीपी का लगभग 2 प्रतिशत रक्षा पर खर्च करता है। हाल के वर्षों में, नीतिगत सुधारों और प्रोत्साहनों के माध्यम से देश ने घरेलू उत्पादन को बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। आईएमएफ के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि जिन देशों की स्थानीय रक्षा उद्योग मजबूत है, वे अपने सैन्य खर्च को आर्थिक विकास में बदलने और बाहरी जोखिमों को कम करने के लिए बेहतर स्थिति में हैं।
कमजोर ग्लोबल संकेतों के बीच बाजार फिसला, सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट
9 Apr, 2026 09:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार के दिन कमजोर शुरुआत हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 500 अंक से अधिक गिरा, निफ्टी 23,850 से नीचे आ गया। ओपनिंग के दौरान 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 558.43 (-0.72 %) अंकों की बढ़त के साथ 77,004.47 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। वहीं, निफ्टी 157.10 (-0.65%) अंक टूटकर 23,840.25 पर पहुंच गया। अदाणी पोर्ट्स और इंफोसिस के शेयरों में 2% तक की गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 16 पैसे गिरकर 92.70 पर आ गया।
ईरान-अमेरिका युद्धविराम पर अनिश्चितता बढ़ने और निवेशकों का मनोबल गिरने से भारतीय शेयर बाजारों में गुरुवार को लगातार पांच सत्रों की बढ़त का सिलसिला टूट गया और बाजार में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स में इंफोसिस, अदाणी पोर्ट्स, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचसीएलटेक और एलएंडटी के शेयरों में 2% तक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि टाटा स्टील, एनटीपीसी, बीईएल और पावर ग्रिड के शेयरों में सबसे ज्यादा लाभ हुआ। बाजारों में अस्थिरता मापने वाले इंडिया वीआईसी में पिछले सत्र में लगभग 20% की गिरावट के बाद 1% से अधिक की वृद्धि हुई। एनएसई पर निफ्टी आईटी में लगभग 1% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी मेटल में 1% से अधिक की वृद्धि हुई। वहीं, मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों ने बेंचमार्क सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन करते हुए बढ़त दर्ज की। निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांकों में मामूली बढ़त देखी गई। एनएसई पर 597 शेयरों में गिरावट आई, जबकि 1,969 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई और 76 शेयर अपरिवर्तित रहे।
बाजार में गिरावट के चार बड़े कारण क्या?
ईरान-अमेरिका युद्धविराम की उम्मीदें धूमिल हो रही हैं। हालांकि ईरान और अमेरिका के बीच अंततः एक संक्षिप्त युद्धविराम पर सहमति बन गई, जिससे वैश्विक शेयर बाजारों को काफी राहत मिली। पर इस्राइल ने लेबनान में ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह के खिलाफ अपना समानांतर युद्ध जारी रखा है। ईरान ने इस्राइल और अमेरिका दोनों पर युद्धविराम समझौते की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और कहा कि शांति वार्ता को आगे बढ़ाना अनुचित होगा। होर्मुज जलडमरूमध्य, जिसे यातायात के लिए खोलने की तैयारी थी, अब भी जहाजों के लिए बंद है। इस बीच, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक पोस्ट में कहा, "संघर्ष क्षेत्र में कुछ स्थानों पर युद्धविराम उल्लंघन की खबरें आई हैं, जो शांति प्रक्रिया की भावना को कमजोर करती हैं। मैं सभी पक्षों से संयम बरतने और दो सप्ताह के लिए, जैसा कि सहमति हुई थी, युद्धविराम का सम्मान करने का आग्रह करता हूं, ताकि संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में कूटनीति अग्रणी भूमिका निभा सके।"
तेल की कीमतें फिर 95 डॉलर से ऊपर पहुंच गईं। मध्य पूर्व से होकर तेल और गैस परिवहन के लिए महत्वपूर्ण जलमार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने की आशंकाओं के बीच, गुरुवार को तेल की कीमतों में उछाल आया। ब्रेंट क्रूड वायदा 2% से अधिक बढ़कर 96.70 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 3% बढ़कर 97 डॉलर प्रति बैरल हो गया। यह उछाल युद्धविराम की घोषणा के बाद तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट के एक दिन बाद आया है, जो 110 डॉलर से गिरकर 95 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई थीं।
वैश्विक बाजार अधिकतर गिरावट के साथ बंद हुए, क्योंकि युद्धविराम के प्रभावी होने की उम्मीदें धूमिल होती जा रही थीं। जापान का निक्केई 0.8% गिरा, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग 0.2% नीचे आया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1.5% से अधिक गिर गया, और चीन का शंघाई कंपोजिट 0.7% नीचे आया। कल वॉल स्ट्रीट में भारी बढ़त के साथ कारोबार समाप्त हुआ, लेकिन डॉव जोन्स फ्यूचर्स फिलहाल गिरावट में हैं, जो आज अमेरिकी शेयर बाजारों के कमजोर शुरुआत का संकेत दे रहे हैं।
एफआईआई द्वारा बिक्री जारी है विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिससे दलाल स्ट्रीट में निवेशकों की भावना पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। एनएसई के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशक लगातार 26वें सत्र में भारतीय शेयरों में शुद्ध बिक्री करते रहे और बुधवार को लगभग 2,812 करोड़ रुपये के शेयर बेचे गए। इसका निवेशकों की धारणा पर असर पड़ा।
वैश्विक व्यापार के लिए अहम मार्ग खुलने की तैयारी, टोल वसूली की योजना
8 Apr, 2026 12:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) जल्द ही खुलने के आसार हैं। सीजफायर (Ceasefire) के बाद ईरान (Iran) ने भी शर्तों पर सहमति जता दी है। अब यहां से तेल के जहाजों का गुजरना शुरू हो जाएगा। हालांकि, खबरें हैं कि इसके लिए मुल्कों को ईरान के साथ ओमान (Oman) को भी टोल टैक्स (Toll Tax) देना होगा। इसे लेकर आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन कहा जा रहा है कि टैक्स की बात सीजफायर की शर्तों में शामिल है।
क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि दो सप्ताह के सीजफायर प्लान में फीस की बात कही गई है। इसके तहत ईरान और ओमान दोनों ही मुल्क स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकलने वाले जहाजों से फीस वसूलेंगे। अधिकारी का कहना है कि ईरान इस रकम का इस्तेमाल मुल्क में दोबारा होने वाले निर्माण कार्यों के लिए करेगा। जबकि, यह साफ नहीं है कि ओमान राशि का किस तरह इस्तेमाल करेगा।
अब तक फ्री था
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ओमान और ईरान के जलक्षेत्र में आता है, लेकिन दुनिया इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग ही मानती थी। इसके चलते अब तक कोई भी देश जहाज निकलने के लिए टोल नहीं देता था।
भारत भी दे रहा है फीस?
बीते कुछ दिनों में शिवालिक, नंदा देवी, जग वसंद, पाइन गैस, ग्रीन सान्वी समेत कई जहाज भारत की ओर पहुंचे हैं। हालांकि, अब 16 भारतीय झंडे वाले जहाज स्ट्रेट पर अटके हुए हैं। अब तक यह साफ नहीं है कि भारत की तरफ से कोई फीस दी जा रही है या नहीं। वरिष्ठ अधिकारी ने इस स्ट्रेट को पार करने के लिए शुल्क लिए जाने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘हमें इस तरह के भुगतान की कोई जानकारी नहीं है।’होर्मुज जलमार्ग ईरान की तरफ से बंद किए जाने के बाद यहां जहाजों का आवागमन करीब 95 प्रतिशत गिर गया था। बाद में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की तरफ से जारी बयान के अनुसार, चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान को गुजरने की अनुमति दी गई थी।
बाब-अल-मंदेब पर भी मंडराया था खतरा
एक दिन पहले ही ईरान ने चेतावनी दी थी कि मेरिका-इजरायल ने अगर सैन्य कार्रवाइयां जारी रखीं ,तो वह यमन में अपने हूती सहयोगियों के माध्यम से बाब-अल-मंदेब मार्ग को पूरी तरह बंद कर देगा। ईरान की यह धमकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस सख्त चेतावनी के तुरंत बाद आई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान शर्तों पर सहमत नहीं होता है तो ‘पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी’।
ईरान ने कहा कि ‘अगर स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है’ तो तेहरान हूतियों से मदद मांगेगा, ‘जो बाब-अल-मंदेब जलमार्ग को भी बंद कर देंगे’। हूती विद्रोहियों का यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण है। ये विद्रोही पहले भी इस बड़े जलमार्ग और उसके आसपास जहाजों पर अक्सर हमले करते रहे हैं, जो लाल सागर में समुद्री डकैती और उग्रवाद का प्रमुख कारण रहा है।
विकास दर और महंगाई पर गवर्नर का बयान, रेपो रेट में नहीं हुआ बदलाव
8 Apr, 2026 11:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की हालिया बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति और भविष्य की चुनौतियों पर व्यापक चर्चा की गई। वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच केंद्रीय बैंक ने स्थिरता और सतर्कता को अपनी नीति का मुख्य आधार बनाया है। नीतिगत ब्याज दरों से लेकर विदेशी मुद्रा भंडार और एनबीएफसी की स्थिति तक, इस बैठक में लिए गए प्रमुख फैसलों के बारे में जानें।
1. नीतिगत दरों पर रिजर्व बैंक का रुख
मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने सर्वसम्मति से न्यूट्रल रुख अपनाते हुए नीतिगत ब्याज दर पर यथास्थिति बनाए रखने का फैसला किया।
इस फैसले के तहत, रेपो रेट बिना किसी बदलाव के 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है।
तरलता प्रबंधन को लेकर रिज़र्व बैंक भविष्य में सक्रिय और पूर्व-सक्रिय दृष्टिकोण अपनाएगा।
2. महंगाई और आर्थिक विकास
चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।
इसके साथ ही, हेडलाइन मुद्रास्फीति नियंत्रण में है और केंद्रीय बैंक के चार प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है।
निकट भविष्य के लिए खाद्य पदार्थों की कीमतों का आउटलुक आरामदायक स्थिति में है।
हालांकि, ऊर्जा की कीमतों में हालिया उछाल महंगाई के लिए एक संभावित जोखिम बनकर सामने आया है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी (जीडीपी) विकास दर 6.9 प्रतिशत अनुमानित है, जो पिछले वित्त वर्ष के 7.6 प्रतिशत के मुकाबले थोड़ी कम है।
उच्च-आवृत्ति संकेतक दर्शाते हैं कि देश की आर्थिक गतिविधि और इसकी गति निरंतर बनी हुई है।
3. वैश्विक चुनौतियां और उनका असर
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था वर्तमान में अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रही है।
लगातार चल रहे संघर्षों के कारण पैदा हुई भारी अनिश्चितता आर्थिक दृष्टिकोण पर भारी पड़ रही है।
उच्च ऊर्जा कीमतों और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान से आर्थिक विकास के प्रभावित होने की आशंका है।
इन बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के लिए निरंतर निगरानी आवश्यक हो गई है।
रिजर्व बैंक उभरती हुई स्थिति पर कड़ी नजर रखेगा और ऐसी नीतियां लागू करेगा जो अर्थव्यवस्था के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता दें।
4. विदेशी मुद्रा, रुपया और बाजार
3 अप्रैल तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 696.1 अरब डॉलर के मजबूत स्तर पर पहुंच गया है।
मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक बुनियादी ढांचे के बावजूद, पिछले साल भारतीय रुपये में पिछले वर्षों के औसत की तुलना में अधिक गिरावट दर्ज की गई।
आरबीआई की विनिमय दर नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है, और बाज़ार में अस्थिरता रोकने के लिए बैंक हस्तक्षेप जारी रखेगा।
रेमिटेंस में अपेक्षित मजबूती के कारण चालू खाता घाटा को मध्यम और एक टिकाऊ स्तर पर रखने में मदद मिलेगी।
भारत अभी भी ग्रीनफील्ड एफडीआई परियोजनाओं के लिए दुनिया का एक आकर्षक गंतव्य बना हुआ है।
5. बैंकिंग और एनबीएफसी
गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के बुनियादी मानक बेहद मजबूत हैं।
एनबीएफसी सेक्टर पूंजी के मोर्चे पर मजबूत है। यह बेहतरीन लिक्विडिटी और ग्रॉस एनपीए में हुए सुधार के साथ काम कर रहा है।
आरबीआई की यह मौद्रिक नीति बताती है कि वैश्विक स्तर पर व्याप्त तनाव और ऊर्जा संकट के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है। 696.1 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार, नियंत्रण में महंगाई दर और एनबीएफसी सेक्टर की मजबूती सकारात्मक संकेत हैं। रिज़र्व बैंक का न्यूट्रल रुख और यथास्थिति का फैसला यह सुनिश्चित करता है कि नीति निर्माता किसी भी वैश्विक झटके से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार और सतर्क हैं।
कानूनी विवाद के बीच अदाणी समूह ने कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखा
8 Apr, 2026 10:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय उद्योगपति गौतम अदाणी ने अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (एसईसी) की तरफ से उनके खिलाफ दर्ज सिविल फ्रॉड केस को खारिज करने की मांग की है। मंगलवार को न्यूयॉर्क की ब्रुकलिन फेडरल कोर्ट में दाखिल एक याचिका में अदानी के वकीलों ने एसईसी के दावों को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया।
अदानी और उनके भतीजे सागर अदाणी पर नवंबर 2024 में आरोप लगा था कि उन्होंने अदानी ग्रीन एनर्जी के लिए लाभ पाने हेतु भारतीय अधिकारियों को करोड़ों डॉलर की रिश्वत देने का वादा किया था। एसईसी का दावा है कि 2021 में 6,965 करोड़ रुपये के बॉन्ड ऑफरिंग दस्तावेजों में इस योजना को छिपाया गया। अदालती फाइलिंग में वकीलों ने दलील दी कि यह मामला अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन है, क्योंकि घटना और संबंधित व्यक्ति भारत के हैं। साथ ही वे बॉन्ड कभी अमेरिकी एक्सचेंज पर ट्रेड नहीं हुए थे। वकीलों ने रिश्वतखोरी के दावों को निराधार बताते हुए कहा कि इसमें अदाणी की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी। फिलहाल इस मामले पर एसईसी की ओर से प्रतिक्रिया नहीं आई है।
एजीआर बकाया मामले में वोडाफोन आइडिया को राहत
दूरसंचार विभाग ने वोडाफोन-आइडिया के समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) से जुड़े बकाये के पुनर्मूल्यांकन की समय-सीमा जून तक बढ़ा दी है। पहले इस प्रक्रिया को 31 मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया था। स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क की समीक्षा के चलते समय-सीमा बढ़ाई गई है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वोडाफोन-आइडिया को राहत देते हुए वित्त वर्ष 2006-07 से 2018-19 तक के एजीआर बकाये को 87,695 करोड़ रुपये पर स्थिर कर दिया है।
दूरदराज क्षेत्रों में खुलेंगे बैंकिंग आउटलेट व टच पॉइंट, ग्राहकों को मिलेंगी बेहतर सेवाएं
बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने के लिए रिजर्व बैंक मौजूदा नियमों में बड़ा बदलाव कर रहा है। इसके लिए नया मसौदा तैयार कर लिया गया है। गांव-कस्बों में बैंकिंग सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए बैंकिंग आउटलेट व टच पॉइंट खुलेंगे। इन आउटलेट के जरिये खाता खोलने, पैसा निकालने, जमा करने, ट्रांसफर करने, चेक, पासबुक व एटीएम कार्ड समेत तमाम सुविधाएं उपलब्ध होंगी। नए नियमों के साथ इस व्यवस्था को जुलाई से लागू करने की तैयारी है। बिजनेस बैंकिंग आउटलेट व बैंकिंग टच पॉइंट के लिए अलग अलग व्यापार प्रतिनिधि (बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट) रखे जाएंगे। ये बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट अपनी सहायता के लिए उप-एजेंट भी रख सकेंगे। इनके कार्यों के लिए संबंधित बैंक पूर्ण रूप से जिम्मेदार होगा। बैंकिंग आउटलेट सप्ताह में 5 दिन और रोजाना कम से कम चार घंटे काम करेंगे। छोटे लेनदेन वाले बैंकिंग टच प्वाइंट के लिए कोई समय तय नहीं होगा। दोनों श्रेणियों में परिश्रामिक भी दिया जाएगा।
मिलेंगी ये सुविधाएं
बैलेंस जांच, मिनी स्टेटमेंट, डेबिट कार्ड जारी व ब्लॉक
चेक सेवाएं, आधार/मोबाइल लिंकिंग, पासबुक अपडेट, बिल भुगतान
शिकायत दर्ज, ऋण/बीमा/पेंशन, केवाईसी अपडेट, नोट व सिक्के
जमा वृद्धि के मामले में बेहतर रहा निजी बैंकों का प्रदर्शन
वित्त वर्ष 25-26 की चौथी तिमाही के दौरान निजी क्षेत्र के बैंकों ने सरकारी बैंकों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। निजी बैंकों की जमा वृद्धि 12 से 17 फीसदी के बीच रही, जबकि सरकारी बैंकों में यह 2 से 14 फीसदी तक सीमित रही। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक 2.43 लाख करोड़ रुपये के साथ शीर्ष पर रहा। सरकारी बैंकों में बैंक ऑफ इंडिया ने सबसे अधिक 14.33 फीसदी की बढ़त दर्ज की। कर्ज के मोर्चे पर बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने सबसे अधिक 2.92 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बांटा।
मॉर्गन स्टेनली ने भारत का जीडीपी अनुमान घटाया
मॉर्गन स्टेनली ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत के वास्तविक जीडीपी अनुमान को 30 आधार अंक घटाकर 6.5 फीसदी से 6.2 फीसदी कर दिया है। मॉर्गन स्टेनली ने कहा कि औद्योगिक लागत बढ़ने से उत्पादन में कटौती हो रही है, साथ ही रुपये की कमजोरी से आयातित वस्तुओं पर महंगाई भी बढ़ रही है।
इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री 24.6 फीसदी बढ़ी
इलेक्ट्रिक वाहनों की खुदरा बिक्री वर्ष 2025-26 के दौरान 24.6 फीसदी बढ़कर 24.52 लाख इकाई हो गई। फाडा के अनुसार, दोपहिया वाहनों की बिक्री 14 लाख इकाइयों को पार कर गई, जबकि इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की बिक्री लगभग दो लाख इकाइयों के करीब पहुंच गई।
आईडीबीआई बैंक विनिवेश के लिए नया प्रस्ताव
आईडीबीआई बैंक के विनिवेश को आगे बढ़ाने के लिए सरकार संभावित खरीदारों से संशोधित वित्तीय बोलियां मांग सकती है। बैंक के अधिग्रहण के लिए फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स और एमिरेट्स एनबीडी प्रमुख बोलीदाताओं के रूप में सामने आए हैं।
एपल के पहले फोल्डेबल आईफोन में परीक्षण में ही मिलीं खामियां
एपल के पहले फोल्डेबल आईफोन के शुरुआती परीक्षणों में कई तकनीकी खामियां सामने आई हैं, जिसके कारण इनके उत्पादन और शिपमेंट में देरी का अनुमान है। ये आईफोन इस साल की दूसरी छमाही में लॉन्च किए जाने थे। जापानी पत्रिका निक्केई एशिया ने सूत्रों के हवाले से बताया कि कंपनी को इंजीनियरिंग टेस्ट प्रोडक्शन (ईटीपी) चरण के दौरान इन गड़बड़ियों का पता चला, जो उम्मीद से कहीं अधिक हैं। हालांकि, एपल ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया है।
कॉल-एसएमएस के लिए सस्ते मोबाइल प्लान को अनिवार्य करने की तैयारी
ट्राई का नया प्रस्ताव : सिर्फ कॉल और एसएमएस सेवाएं लेने वाले उपभोक्ताओं को अतिरिक्त भुगतान से मिलेगी राहत
दूरसंचार नियामक ट्राई ने सस्ते मोबाइल प्लान के लिए एक अहम प्रस्ताव किया है। अब मोबाइल कंपनियों को ऐसे किफायती मोबाइल प्लान पेश करने होंगे, जिनमें सिर्फ कॉल और एसएमएस की सुविधा हो और जिसकी कीमत मौजूदा डाटा वाले प्लान से कम हो। दूरसंचार उपभोक्ता संरक्षण (तेरहवां संशोधन) विनियमन, 2026 के मसौदे में ट्राई ने कहा है कि हर टेलीकॉम ऑपरेटर को कम से कम एक ऐसा विशेष प्लान देना होगा, जिसमें केवल वॉयस और एसएमएस सेवाएं शामिल हों। ट्राई के अनुसार, पहले भी इस तरह के वाउचर जारी करने का प्रावधान किया गया था, लेकिन कंपनियों ने सीमित विकल्प और लंबी वैधता वाले ही कुछ प्लान पेश किए। साथ ही, इन प्लानों की कीमतें भी अधिक रखी गईं। ट्राई ने नए मसौदे पर दूरसंचार उद्योग और अन्य हितधारकों से 28 अप्रैल तक सुझाव मांगे हैं।
अनावश्यक सेवाओं की बिक्री पर रोक
ट्राई का मानना है कि इस कदम से उपभोक्ताओं को फायदा होगा। पारदर्शिता बढ़ेगी और अनावश्यक सेवाओं की जबरन बिक्री पर रोक लगेगी। जिन उपभोक्ताओं को इंटरनेट की जरूरत नहीं है, उन्हें अतिरिक्त भुगतान से राहत मिलेगी। क्या-क्या बदलेगा..हर वैधता अवधि के लिए डाटा वाले प्लान के साथ समान अवधि का केवल वॉयस-एसएमएस प्लान भी देना होगा। इन प्लानों की कीमत डाटा वाले प्लान से कम रखनी होगी। उपभोक्ताओं को अलग-अलग विकल्प उपलब्ध कराए जाएंगे।
वैश्विक तनाव कम होते ही सर्राफा बाजार में सोना-चांदी चमकने लगे
8 Apr, 2026 09:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने ईरान (Iran) पर हमले दो हफ्तों के लिए टालने का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद सोने की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली है। एमसीएक्स पर चांदी की कीमत (Silver Price) 6% या 13,000 रुपये से अधिक बढ़कर 2,44,770 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जबकि एमसीएक्स पर सोने की कीमत (Gold Price ) 2.4% या 3600 रुपये से अधिक बढ़कर 1,53,944 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई।
इंटरनेशनल मार्केट में भी स्पॉट गोल्ड 2.3% चढ़कर 4,811.66 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 3.3% की तेजी के साथ 4,840 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर बंद हुए।
बाजार में ‘रिलीफ रैली’, आगे भी दिख सकता है उतार-चढ़ाव
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह तेजी फिलहाल “रिलीफ रैली” है। ब्लूमबर्ग ने एक्सपर्ट ताई वोंग के हवाले से बताया है कि सोने के लिए 4,930 डॉलर और 5,000 डॉलर के स्तर अहम रेजिस्टेंस बने रहेंगे। हालांकि, आगे की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान इस युद्धविराम का पालन करता है या नहीं।
पाकिस्तान की मध्यस्थता से बातचीत की उम्मीद
पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता खुलता दिख रहा है। खबरों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में बातचीत शुरू हो सकती है। हालांकि, ईरान ने साफ किया है कि बातचीत का मतलब यह नहीं है कि तनाव पूरी तरह खत्म हो गया है।
सोने के लिए ऊर्जा कीमतें और महंगाई बनी बड़ी चिंता
ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव अब भी बाजार के लिए बड़ा जोखिम बना हुआ है। अगर तेल की कीमतें फिर बढ़ती हैं, तो इससे वैश्विक महंगाई बढ़ सकती है और केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों पर फैसला लेना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे माहौल में सोना पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन ऊंची ब्याज दरें इसकी तेजी को सीमित भी कर सकती हैं।
चांदी और अन्य धातुओं में भी तेजी
सोने के साथ-साथ अन्य कीमती धातुओं में भी उछाल देखने को मिला। स्पॉट सिल्वर 4.3% बढ़कर 76.08 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई। प्लैटिनम 2.4% चढ़ा, जबकि पैलेडियम में 2.1% की बढ़त दर्ज की गई।
राहत के संकेत, लेकिन अनिश्चितता बरकरार
ट्रंप के फैसले से फिलहाल बाजार को राहत जरूर मिली है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सोने की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, क्योंकि बाजार अब अमेरिका-ईरान वार्ता और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर नजर रखे हुए है।
निफ्टी में 815 अंकों की तेजी, बाजार में जबरदस्त खरीदारी देखी गई
8 Apr, 2026 09:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान युद्धविराम की घोषणा के बाद भारतीय बाजार में तेजी दिखी। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स में 2,700 से अधिक अंकों का उछाल दिखा। वहीं, दूसरी ओर निफ्टी 815 अंकों की तेजी के बाद 23,900 के पार पहुंच गया। आज आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के फैसले भी आने हैं। बाजार में निवेश करने वाले लोगों की नजर इस पर भी बनी रहेगी। दो हफ्ते के संघर्ष-विराम की घोषणा का असर रुपये पर भी दिखा। अमेरिका और ईरान के बीच सहमति बनने के बाद शुरुआती कारोबार में रुपया 50 पैसे मजबूत होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.56 पर पहुंच गया।
सेंसेक्स की कंपनियों का हाल
सेंसेक्स में सूचीबद्ध 30 कंपनियों में से इंटरग्लोब एविएशन के शेयरों में सबसे अधिक लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। लार्सन एंड टुब्रो, बजाज फाइनेंस, अदानी पोर्ट्स, बजाज फिनसर्व और महिंद्रा एंड महिंद्रा भी प्रमुख लाभ कमाने वाली कंपनियों में शामिल थीं। टेक महिंद्रा इस दौड़ में एकमात्र पिछड़ने वाली कंपनी के रूप में उभरी।
एशियाई बाजारों में दिखी तेजी
एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क कोस्पी, जापान का निक्केई 225 सूचकांक, शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक काफी ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रहे थे। मंगलवार को अमेरिकी बाजार स्थिर रुख के साथ बंद हुए।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
अनुसंधान विश्लेषक और लिवेलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक हरिप्रसाद के ने कहा कि इसका मुख्य कारण अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में दो सप्ताह के विराम की घोषणा और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन की सुविधा प्रदान करने की सहमति है। इससे ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान से संबंधित तात्कालिक चिंताओं में काफी कमी आई है, जो वैश्विक बाजारों के लिए एक बड़ा खतरा बनी हुई थी। उन्होंने आगे कहा कि भू-राजनीतिक तनाव में कमी आने से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है, जो मुद्रास्फीति और मुद्रा दोनों दृष्टिकोणों से भारत के लिए विशेष रूप से सकारात्मक है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम ने निकट भविष्य के बाजार परिदृश्य को नाटकीय रूप से बदल दिया है। युद्धविराम के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत में आई भारी गिरावट (95 अमेरिकी डॉलर तक) से बाजार में फिर से तेजी आएगी। यह युद्धविराम, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति, उचित बाजार मूल्यों के समर्थन से बाजार को फिर से तेजी लाने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
ब्रेंट क्रूड का भाव गिरकर 94.80 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 13.24 प्रतिशत गिरकर 94.80 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मंगलवार को 8,692.11 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 7,979.50 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। मंगलवार को सेंसेक्स 509.73 अंक या 0.69 प्रतिशत बढ़कर 74,616.58 पर बंद हुआ। निफ्टी 155.40 अंक या 0.68 प्रतिशत चढ़कर 23,123.65 पर समाप्त हुआ।
दो हफ्ते की मोहलत के बाद अमेरिकी बाजार में जबरदस्त उछाल देखा गया
8 Apr, 2026 07:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित बड़े हमले को दो हफ्तों के लिए टालने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के सुरक्षित गुजरने की अनुमति देता है, तो फिलहाल सैन्य कार्रवाई रोकी जा सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट
इस फैसले का असर तुरंत वैश्विक बाजारों पर दिखा। कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत करीब 18% गिरकर लगभग 92.60 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जबकि ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 6% गिरकर 103.40 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। हालांकि, ये कीमतें अभी भी युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर से ज्यादा हैं।
अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी, निवेशकों में भरोसा
वहीं, अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली। एसएंडपी 500 के फ्यूचर्स लगभग 2.4% ऊपर चले गए, जिससे निवेशकों में भरोसा बढ़ता नजर आया। बाजार को उम्मीद है कि अगर तनाव कम होता है, तो आर्थिक हालात भी स्थिर हो सकते हैं।
ट्रंप ने किया सीजफायर का एलान
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा एलान करते हुए कहा है कि ईरान पर होने वाले संभावित हमले और बमबारी को फिलहाल दो हफ्तों के लिए रोक दिया गया है। ट्रंप ने बताया कि यह एक 'दोनों तरफ से लागू होने वाला सीजफायर' होगा, यानी इस दौरान न अमेरिका हमला करेगा और न ही ईरान कोई आक्रामक कदम उठाएगा। हालांकि इस समझौते के लिए एक बड़ी शर्त रखी गई है, ईरान को तुरंत, पूरी तरह और सुरक्षित तरीके से होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना होगा।
अमेरिका को ईरान ने भेजा 10 बिंदु वाला शांति प्रस्ताव
ट्रंप ने यह भी बताया कि ईरान की तरफ से 10 बिंदुओं वाला एक कारगर शांति प्रस्ताव आया है, जिससे 28 फरवरी से चल रहे युद्ध को खत्म करने का रास्ता निकल सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि अगले दो हफ्तों में हालात किस दिशा में जाते हैं, क्या शांति बनेगी या फिर तनाव फिर से बढ़ेगा।
शेयर बाजार टूटा तो सोने ने पकड़ी रफ्तार, आज के ताजा रेट देखें
7 Apr, 2026 03:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मंगलवार को सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज खोलने की धमकी दी, इसके बाद बाजार में घबराहट बढ़ गई। निवेशकों के सतर्क रुख के कारण, मई 2026 के लिए एमसीएक्स चांदी वायदा 1,579 रुपये गिर गया। यह 0.7 फीसदी की गिरावट के साथ 2.31 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ। जून 2026 के लिए सोने का वायदा भी 356 रुपये कम हुआ। सोना 0.2 फीसदी की गिरावट के साथ 1.49 लाख रुपये प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया। बाजार की स्थिति अस्थिर बनी हुई है।
सोने की कीमतों में गिरावट, शादी के सीजन में गहनों की खरीदारी बढ़ने की उम्मीद
मंगलवार को वैश्विक सोने की कीमतों में मिश्रित रुझान देखा गया। स्पॉट गोल्ड 4,646.69 डॉलर प्रति औंस पर लगभग स्थिर रहा। वहीं, जून डिलीवरी के लिए अमेरिकी सोने का वायदा 0.2 फीसदी गिरकर 4,674.40 डॉलर पर आ गया। सर्राफा बाजार के जानकारों का अनुमान है कि सोने की कीमतों में हालिया गिरावट को देखते हुए खरीदार अप्रैल से जुलाई वाले शादी के सीजन के लिए गहनों की खरीदारी की पहल कर सकते हैं। अनुमान के मुताबिक अक्षय तृतीया के आसपास कई लोग अग्रिम ऑर्डर दे सकते हैं।
ट्रंप की चेतावनी के बाद बढ़ी टेंशन, होर्मुज पर दुनिया की नजर
7 Apr, 2026 11:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच गहराते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई मंगलवार की समयसीमा (डेडलाइन) के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई है। इस तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को ईरान के लिए फिर से खोलने की समयसीमा के सीधे असर से मंगलवार को वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से अधिक का भारी उछाल दर्ज किया गया, जिससे कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि
कच्चे तेल के बाजार में दर्ज किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड फ्यूचर्स 3 प्रतिशत या 4.15 डॉलर से अधिक बढ़कर 116.56 डॉलर पर पहुंच गया है। वहीं, सुबह 9:57 बजे तक ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.69 प्रतिशत या 1.86 डॉलर की बढ़त के साथ 111.63 डॉलर के इंट्राडे उच्च स्तर पर कारोबार कर रहा था। ब्रेंट क्रूड ने इस संघर्ष की शुरुआत के बाद से 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की है, जो 27 फरवरी के 72.48 डॉलर के स्तर से उछलकर 9 मार्च तक 119.50 डॉलर तक पहुंच गया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति का आक्रामक रुख और गंभीर धमकियां
कीमतों में यह ताजा तेजी अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के संबंध में ईरान के प्रति दिखाए गए नए आक्रामक रुख के बाद आई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि तेहरान जलडमरूमध्य को खोलने की मंगलवार रात की समयसीमा का अनुपालन नहीं करता है, तो उस पर कहर बरपाया जाएगा । उन्होंने यह भी धमकी दी कि ईरान को "एक ही रात में खत्म" किया जा सकता है। ट्रंप के अनुसार, यदि कोई समझौता नहीं होता है, तो ईरान का हर पुल नष्ट कर दिया जाएगा और वहां के हर बिजली संयंत्र को हमेशा के लिए तबाह कर दिया जाएगा।
ऊर्जा आपूर्ति शृखला और ईरान की प्रतिक्रिया
दूसरी ओर, ऐसी खबरें हैं कि ईरान ने संघर्षविराम योजना को खारिज कर दिया है और दुनिया की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था के साथ अपनी लड़ाई जारी रखी है। वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का सामरिक महत्व बहुत अधिक है:
यह जलमार्ग दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के वैश्विक तेल प्रवाह को संभालता है।
28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग लगातार बाधित है।
इस गतिरोध के कारण इस साल कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 90 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो औसतन 100 डॉलर के आंकड़े के आसपास बनी हुई है।
ऊर्जा बाजार की इस अस्थिरता का मिला-जुला असर वैश्विक इक्विटी बाजारों पर दिखाई दे रहा है। जहां अमेरिका में वॉल स्ट्रीट मामूली सकारात्मक रुख के साथ बंद हुआ और एशियाई शेयरों में मिला-जुला कारोबार देखा गया, वहीं भारतीय शेयर बाजारों में मंगलवार को गिरावट का रुख रहा। भारत के प्रमुख सूचकांक, सेंसेक्स और निफ्टी, 1 प्रतिशत तक गिरकर कारोबार कर रहे थे।
सरकार का बड़ा फैसला, छोटे गैस सिलिंडर अब ज्यादा मिलेंगे
7 Apr, 2026 10:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश भर के विभिन्न राज्यों में प्रवासी मजदूरों को एक बड़ी राहत देते हुए 5 किलो वाले 'फ्री ट्रेड एलपीजी' (एफटीएल) गैस सिलिंडरों का दैनिक आवंटन (कोटा) दोगुना करने का फैसला किया है। मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति के बीच सरकार यह सुनिश्चित करने का हर संभव प्रयास कर रही है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे। पेट्रोलियम मंत्रालय के इस अहम नीतिगत फैसले से शहरों में काम करने वाले लाखों श्रमिकों को सीधा फायदा मिलेगा।
कोटे में बढ़ोतरी और वितरण का नया ढांचा
पेट्रोलियम मंत्रालय की एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, सिलिंडर का यह बढ़ा हुआ आवंटन प्रवासी श्रमिकों को प्रदान की जाने वाली औसत दैनिक आपूर्ति पर आधारित होगा। यह संशोधित नया आवंटन सरकार द्वारा मार्च में घोषित की गई 20 प्रतिशत की पिछली सीमा के पार चला गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये अतिरिक्त पांच किलो वाले एफटीएल सिलिंडर सीधे राज्य सरकारों और उनके खाद्य व नागरिक आपूर्ति विभागों को सौंपे जाएंगे। इन सिलेंडरों का वितरण तेल विपणन कंपनियों की सहायता से विशेष रूप से केवल प्रवासी मजदूरों के लिए ही किया जाएगा, ताकि लक्षित वर्ग तक इसका लाभ पहुंच सके।
बुकिंग के नए नियम और ऊर्जा प्रबंधन
एलपीजी की मांग को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए सरकार ने मांग और आपूर्ति से जुड़े कई कड़े और महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
रिफाइनरी आउटपुट: मांग पूरी करने के लिए रिफाइनरियों का उत्पादन बढ़ाया जा रहा है।
बुकिंग अंतराल में बदलाव: गैस बुकिंग का समय बढ़ाकर शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन तक कर दिया गया है।
वैकल्पिक ईंधन की व्यवस्था: एलपीजी पर से दबाव कम करने के लिए मिट्टी का तेल और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधनों को भी उपलब्ध कराया गया है।
पीएनजी का विस्तार: सभी राज्यों को पीएनजी कनेक्शन का नेटवर्क तेज गति से विस्तारित करने की सलाह दी गई है।
सरकार ने साफ किया है कि इन सबके बीच घरेलू एलपीजी और पीएनजी आपूर्ति के साथ-साथ अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे अति-महत्वपूर्ण क्षेत्रों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
डिजिटल भुगतान को बढ़ावा और आपूर्ति का हाल
सरकार ने आम नागरिकों को सलाह दी है कि वे एलपीजी बुकिंग के लिए डिजिटल माध्यमों का ही उपयोग करें और जब तक बहुत जरूरी न हो, डिस्ट्रीब्यूटर के पास जाने से बचें। साथ ही, लोगों से अपील की गई है कि वे घबराहट में जरूरत से ज्यादा खरीदारी न करें और सूचनाओं के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें। प्रवासी श्रमिकों को आश्वस्त करते हुए सरकार ने कहा है कि उनकी एलपीजी आपूर्ति में कोई व्यवधान नहीं है। ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, हाल ही में लगभग 51 लाख घरेलू एलपीजी सिलिंडरों की डिलीवरी की गई है। इस दौरान ऑनलाइन बुकिंग का आंकड़ा उछलकर 95 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसके अलावा, गैस की कालाबाजारी या हेराफेरी रोकने के लिए 'डिलीवरी ऑथेंटिकेशन-आधारित' वितरण प्रणाली का सख्ती से पालन किया जा रहा है।
आम आदमी का किचन बजट बिगड़ा, टमाटर ने बढ़ाई परेशानी
7 Apr, 2026 10:05 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। बढ़ती महंगाई के बीच आम आदमी की रसोई और उसके बजट से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल इंटेलिजेंस की रोटी राइस रेट नाम की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 में घर पर पकाई जाने वाली खाने की थाली की कीमतों में मिला-जुला रुख देखने को मिला है। उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत की कीमतों के आधार पर तैयार की गई इस रिपोर्ट में बताया गया है कि किन चीजों ने आपकी थाली को महंगा किया और किनसे आपको राहत मिली।
सवाल: मार्च 2026 में शाकाहारी और मांसाहारी थाली की कीमतों में क्या बदलाव आया?
जवाब: रिपोर्ट के मुताबिक, सालाना आधार पर मार्च 2026 में मांसाहारी थाली की कीमत में 1 प्रतिशत की गिरावट आई है। वहीं, शाकाहारी थाली की कीमत पिछले साल के मुकाबले पूरी तरह स्थिर रही है। हालांकि, यदि मासिक आधार पर तुलना करें, तो शाकाहारी थाली 3 प्रतिशत और मांसाहारी थाली 2 प्रतिशत सस्ती हुई है।
सवाल: प्याज और आलू की कीमतों ने आम आदमी को कितनी राहत दी?
जवाब: सब्जियों के मोर्चे पर प्याज और आलू ने आम आदमी को बड़ी राहत दी है। सालाना आधार पर प्याज की कीमतों में 25 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसका मुख्य कारण रबी और लेट खरीफ फसल की एक साथ बंपर पैदावार, कमजोर निर्यात और ज्यादा सप्लाई है। इसी तरह, होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर से मांग कम होने के कारण आलू की कीमतें भी 13 प्रतिशत गिर गई हैं।
सवाल: जब प्याज-आलू सस्ते हुए, तो शाकाहारी थाली की कीमत क्यों नहीं घटी?
जवाब: शाकाहारी थाली का बजट मुख्य रूप से टमाटर ने बिगाड़ दिया है। मार्च 2025 में जो टमाटर 21 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, वह मार्च 2026 में 33 प्रतिशत महंगा होकर 28 रुपये प्रति किलो हो गया है। दरअसल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में बुवाई में देरी के कारण टमाटर की पैदावार और बाजार में इसकी आवक बुरी तरह प्रभावित हुई है।
सवाल: मांसाहारी थाली की कीमत में 1% की गिरावट के पीछे क्या वजह है?
जवाब: मांसाहारी थाली के सस्ता होने का सबसे मुख्य कारण ब्रॉयलर (मुर्गे) की कीमतों में कमी आना है। एक मांसाहारी थाली की कुल लागत में ब्रॉयलर की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत होती है। सालाना आधार पर ब्रॉयलर की कीमतों में दो प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे पूरी मांसाहारी थाली की कीमत नीचे आ गई।
सवाल: दालों के दाम और सप्लाई को लेकर रिपोर्ट में क्या अच्छी खबर है?
जवाब: दालों के मोर्चे पर आम आदमी के लिए राहत की खबर है। मासिक आधार पर दालों की कीमतों में छह प्रतिशत की कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई-जून मार्केटिंग वर्ष के लिए अरहर का स्टॉक इस साल 20 प्रतिशत ज्यादा रहने का अनुमान है। वहीं, जनवरी-दिसंबर मार्केटिंग वर्ष के लिए चने का स्टॉक भी लगभग 10 प्रतिशत ज्यादा है। इसी ज्यादा स्टॉक के कारण दालों की कीमतों पर नीचे की ओर दबाव बना हुआ है।
सवाल: क्या गैस और तेल की कीमतों ने भी थाली का बजट बढ़ाया है?
जवाब: जी हां, टमाटर के अलावा रसोई गैस और खाद्य तेल ने भी रसोई का बजट बढ़ाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं के कारण खाद्य तेल की कीमतों में 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा, लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) सिलेंडर की कीमत भी 14 प्रतिशत बढ़ गई है। इन्हीं महंगे कारकों ने प्याज-आलू से मिलने वाली राहत को सीमित कर दिया।
सवाल: अब आगे क्या?
जवाब: जहां एक तरफ आलू, प्याज और दालों के बेहतर स्टॉक ने रसोई का बजट सुधारने में मदद की, वहीं टमाटर, खाद्य तेल और रसोई गैस की महंगाई ने आम आदमी की जेब पर दबाव बनाए रखा। आने वाले समय में सब्जियों की पैदावार और वैश्विक सप्लाई चेन की स्थिति ही यह तय करेगी कि खाद्य महंगाई से आम आदमी को पूरी तरह राहत मिलेगी या नहीं।
एविएशन इंडस्ट्री का बड़ा नाम: कैसे Campbell Wilson पहुंचे टॉप पोजीशन तक
7 Apr, 2026 08:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश की प्रमुख एयरलाइन एअर इंडिया में बड़ा नेतृत्व परिवर्तन होने जा रहा है। कंपनी के मौजूदा सीईओ कैंपबेल विल्सन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, कंपनी ने उनसे अनुरोध किया है कि नए सीईओ की नियुक्ति तक वे अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहें, ताकि ट्रांजिशन सुचारु रूप से हो सके। बताया जा रहा है कि उनका कार्यकाल सितंबर 2027 तक था, लेकिन उन्होंने पहले ही संकेत दे दिया था कि वे इसे आगे नहीं बढ़ाना चाहते। इसी वजह से कंपनी ने जनवरी 2026 से ही नए सीईओ की तलाश शुरू कर दी थी।
कौन हैं कैंपबेल विल्सन?
कैंपबेल विल्सन एविएशन इंडस्ट्री का जाना-पहचाना नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1996 में सिंगापुर एयरलाइंस में मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में की थी। न्यूजीलैंड के निवर्सिटी ऑफ कैंटरबरी से मास्टर ऑफ कॉमर्स (फर्स्ट क्लास ऑनर्स) करने वाले विल्सन ने कनाडा, हांगकांग और जापान जैसे देशों में काम किया है। वे स्कूट के फाउंडिंग सीईओ भी रहे हैं और 2011 से 2016 तक इस लो-कॉस्ट एयरलाइन का नेतृत्व किया। बाद में 2020 में फिर से स्कूट के सीईओ बने। इसके बाद 2022 में उन्होंने एअर इंडिया का कार्यभार संभाला।
अब कौन बनेगा नया CEO?
एअर इंडिया में नए सीईओ की तलाश अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इस दौड़ में कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के अनुभवी दिग्गज शामिल बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, अगले सप्ताह होने वाली अहम बैठक में नए नाम पर मुहर लग सकती है, हालांकि कंपनी ने अभी तक किसी भी उम्मीदवार की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
एअर इंडिया के सामने बड़ी चुनौतियां
एअर इंडिया इस समय कई मोर्चों पर दबाव में है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में कंपनी को करीब ₹20,000 करोड़ तक का नुकसान होने की आशंका है। इसकी मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है, जिसके चलते एयरस्पेस प्रतिबंध लागू हो रहे हैं। इससे फ्लाइट्स के रूट बदलने और अतिरिक्त ईंधन खर्च बढ़ गया है, खासकर लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर इसका असर पड़ा है। इसके अलावा, नए विमानों की डिलीवरी में देरी और ऑपरेशनल लागत में बढ़ोतरी भी कंपनी की परेशानी बढ़ा रही है।
AI-171 हादसे का असर अब भी जारी
पिछले साल अहमदाबाद से लंदन जा रही फ्लाइट AI-171 टेकऑफ के तुरंत बाद क्रैश हो गई थी, जिसमें 260 लोगों की जान चली गई थी। इस हादसे का असर अभी भी कंपनी की छवि और संचालन पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दुर्घटना की अंतिम जांच रिपोर्ट, जो जून 2026 तक आने की उम्मीद है, नए सीईओ की नियुक्ति के फैसले को भी प्रभावित कर सकती है।
इंडिगो में भी हुआ था बड़ा बदलाव
एअर इंडिया से पहले इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स ने भी 10 मार्च को इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद कंपनी ने विली वॉल्श को नया सीईओ नियुक्त किया। इंडिगो भी हाल के समय में ऑपरेशनल संकट और भारी नुकसान से जूझ रही थी।
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