महाराष्ट्र
रेलवे की शान रही सुरेखा यादव का रिटायरमेंट: 36 साल की सेवा के बाद अंतिम ट्रेन पर मिला भावुक विदाई समारोह और रिकॉर्ड तोड़ने वाला दिन
19 Sep, 2025 06:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: भारतीय रेलवे की पहली महिला ट्रेन ड्राइवर सुरेखा यादव इस महीने अपने 36 साल की सेवा को अलविदा कहेंगी। सुरेखा यादव इंडियन रेलवे के साथ एशिया में पहली महिला ट्रेन ड्राइवर हैं। वह 30 सितंबर को रिटायर हो जाएंगी। भारतीय रेलवे में इतने सालों तक ट्रेन ड्राइवर रहीं सुरेखा यादव के रिटायरमेंट की जानकारी सेंट्रल रेलवे ने दी है। सेंट्रल रेलवे ने एक बयान में कहा है कि एशिया की पहली महिला रेल चालक श्रीमती सुरेखा यादव, 36 वर्षों की शानदार सेवा के बाद 30 सितंबर को सेवानिवृत्त होंगी। सेंट्रल रेलवे ने सुरेखा यादव को एक सच्ची पथप्रदर्शक, उन्होंने बाधाओं को तोड़ा, अनगिनत महिलाओं को प्रेरित किया और साबित किया कि कोई भी सपना अधूरी नहीं है। उनकी यात्रा भारतीय रेलवे में महिला सशक्तिकरण का प्रतीक सदैव बनी रहेगी।
नवरात्रि में होंगी रिटायर
यह महज संयाेग है कि जब सुरेखा यादव रेलवे से रिटायरमेंट लेंगी तब देश में नवरात्रि का पर्व चल रहा होगा। 30 सितंबर को उनका आखिरी दिन होगा। ऐसे में नारी शक्ति की आराधना के बीच सुरेखा यादव भारतीय रेलवे को अलविदा कहेंगी। एशिया की पहली महिला रेल पायलट सुरेखा यादव मूलरूप से महाराष्ट्र की रहने वाली हैं। उनका जन्म महाराष्ट्र में 2 सितंबर 1965 को हुआ था। उन्होंने राज्य के सतारा में स्थित सेंट पॉल कॉन्वेंट हाई स्कूल से अपनी शुरुआती शिक्षा हासिल की। इसक बाद आगे की पढ़ाई के लिए सुरेखा ने वोकेशनल ट्रेनिंग कोर्स किया और बाद में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हासिल किया।
कैसे बनीं ट्रेन की ड्राइवर?
स्कूल में दिनों में सुरेखा आम लड़कियों की तरह भी अपने करियर और भविष्य को लेकर सपने देखती थीं। उन दिनों वह लोको ड्राइवर नहीं, बल्कि टीचर बनना चाहती थीं। उन्होंने टीचर बनने के लिए बी-एड की डिग्री प्राप्त करने की योजना बनाई थी। लेकिन शायद किस्मत को कुछ और मंजूर था। बाद में उनका चयन रेलवे में हुआ है। सुरेखा यादव ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें टेक्निकल बैकग्राउंड काफी इंटरेस्ट था। इसीलिए उन्होंने पायलट के लिए फॉर्म भरा था। साल 1986 में उनकी लिखित परीक्षा हुई, जिसमें पास होने के बाद इंटरव्यू भी क्लियर कर लिया। सुरेखा कल्याण ट्रेनिंग स्कूल में सहायक चालक के तौर पर नियुक्त हुईं। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद 1989 में सुरेखा यादव नियमित सहायक ड्राइवर के पद पर प्रमोट हुईं।
रेलवे में तय किया लंबा सफर
सुरेखा ने सबसे पहले मालगाड़ी के ड्राइवर के तौर पर करियर की शुरुआत की। धीरे-धीरे उनकी ड्राइविंग स्किल्स बेहतर होती गई। साल 2000 में मोटर महिला के पद पर उनका प्रमोशन हुआ। उसके बाद साल 2011 में सुरेखा एक्सप्रेस मेल की पायलट बनीं। इसी साल महिला दिवस के मौके पर सुरेखा यादव को एशिया की पहली महिला ट्रेन ड्राइवर होने का खिताब हासिल हुआ। सुरेखा ने सबसे खतरनाक रेलवे रूट माने जाने वाले पुणे के डेक्कन क्वीन से सीएसटी रूट पर ट्रेन ड्राइविंग की है। सुरेखा के पिता एक किसान थे, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत से एक बड़ा मुकाम हासिल किया। पिछले बार सुरेखा तब सुर्खियों में आई थीं जब उन्होंने मार्च 2023 में सेमी-हाई-स्पीड वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन चलाई थी। वह ऐसा करने वाली पहली महिला बनीं थी। उन्होंने सोलापुर से मुंबई छत्रपति शिवाजी टर्मिनस तक 455 किलोमीटर की दूरी तय की थी। सुरेखा यादव के पति महाराष्ट्र पुलिस में हैं।
BMC चुनाव को उद्धव ठाकरे ने बताया शिवसेना के लिए ‘अग्निपरीक्षा’, बोले- यह सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं बल्कि विचारधारा की परीक्षा है
19 Sep, 2025 06:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बीएमसी चुनावों को अपनी पार्टी के लिए अग्निपरीक्षा करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं बल्कि शिवसेना (यूबीटी) की ताकत और अस्तित्व की भी परीक्षा है। ठाकरे ने अपने शाखा प्रमुखों की बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कार्यकर्ता और नेता 227 वार्डों में पूरी ताकत से तैयारी करें और कोई भी वार्ड नजरअंदाज न किया जाए। बैठक में उद्धव ठाकरे ने साफ किया कि जो पूर्व पार्षद शिंदे गुट में चले गए थे और अब वापसी करना चाहते हैं, उन्हें टिकट देने की कोई गारंटी नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी के हित को देखते हुए ही टिकट वितरण किया जाएगा और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को महत्व नहीं दिया जाएगा।
क्या एमएनएस के साथ होगा गठबंधन
ठाकरे ने बताया कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे के साथ बातचीत चल रही है और समय आने पर गठबंधन पर औपचारिक घोषणा की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, एमएनएस करीब 90 से 95 सीटों की मांग कर रही है, लेकिन सीट-टू-सीट बातचीत के बाद यह संख्या व्यावहारिक रूप से तय की जाएगी। शिवसेना (यूबीटी) के एक पदाधिकारी ने कहा कि उद्धवजी ने सभी को तैयारी शुरू करने को कहा है। उन्होंने यह चुनाव अग्निपरीक्षा बताया है और कहा कि किसी भी हालत में बीएमसी में शिवसेना (यूबीटी) का महापौर बैठना चाहिए। गठबंधन की घोषणा समय आने पर होगी, लेकिन अभी हर वार्ड में तैयारी शुरू करनी होगी।
पूर्व पार्षदों की वापसी की चर्चा
बीएमसी के कई पूर्व पार्षद, जिन्होंने पहले शिंदे गुट का साथ दिया था, अब उद्धव कैंप में लौटने की इच्छा जता रहे हैं। हालांकि, उद्धव ठाकरे ने इस पर सख्त रुख अपनाया है और कहा है कि टिकट देने का कोई वादा नहीं किया जाएगा। पूर्व शिवसेना (यूबीटी) पार्षद सुरेश पाटिल ने कहा कि मराठी लोग चाहते हैं कि शिवसेना और एमएनएस में गठबंधन हो। अगर यह हुआ तो महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। हमने उद्धवजी से यही आग्रह किया है, अब अंतिम फैसला वे ही लेंगे
बीड, हिंगोली, धाराशिव, परभणी और लातूर में कुनबी प्रमाणपत्र वितरण पर सियासत गर्माई; अजित पवार-फडणवीस की ‘दूरी’ पर नजरें
18 Sep, 2025 05:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीड : महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को मराठा समुदाय के युवाओं को कुनबी जाति प्रमाण पत्र सौंपने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी। मराठवाड़ा मुक्ति दिवस के आधिकारिक समारोह के दौरान मराठवाड़ा क्षेत्र के आठ में से पांच ज़िलों में यह वितरण किया गया। यह कदम आरक्षण के लिए लंबे आंदोलन के बाद उठाया गया है। मनोज जरांगे के आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने मराठा युवाओं को कुनबी जाति प्रमाण पत्र देने का फैसला किया था। इन पांच ज़िलों के युवाओं ने प्रमाण पत्र दिए गए तो उन्होंने इसका श्रेय आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे को दिया। इन प्रमाण पत्रों से मराठों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में शामिल किया जा सकेगा, जिससे वे शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ उठा सकेंगे।
बीड में अजित पवार ने बांटे प्रमाणपत्र
बीड में, मुक्ति दिवस कार्यक्रम के बाद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने मराठा समुदाय के युवाओं को प्रमाण पत्रों का पहला बैच स्वयं सौंपा। अन्य ज़िलों में भी इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिलों के संरक्षक मंत्रियों ने ये प्रमाणपत्र वितरण किए।
पालक मंत्रियों ने अपने जिलों में दिए सर्टिफिकेट
हिंगोली के संरक्षक मंत्री नरहरि ज़िरवाल, परभणी के संरक्षक मंत्री मेघना बोर्डिकर, धाराशिव के संरक्षक मंत्री प्रताप सरनाईक और लातूर के संरक्षक मंत्री शिवेंद्रराजे भोंसले ने अपने-अपने जिलों में युवाओं को प्रमाण पत्र सौंपे। जिरवाल ने कहा कि फ़िलहाल, मैं यह नहीं कह सकता कि ये कुनबी प्रमाणपत्र कानूनी जांच में टिक पाएंगे या नहीं। ये प्रमाणपत्र जारी हो चुके हैं और निश्चित रूप से जांच प्रक्रिया से गुज़रे होंगे। मेरे लिए यह अनुमान लगाना अनुचित होगा कि कानूनी तौर पर इनका क्या होगा। अधिकारियों ने कहा कि यह प्रतीकात्मक था, जिससे प्रमाणपत्र वितरण अभियान की आधिकारिक शुरुआत हुई। आने वाले दिनों में स्थानीय प्रशासनिक कार्यालयों के माध्यम से पूर्ण पैमाने पर प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे।
देवेंद्र फडणवीस ने बनाई दूरी
हालांकि, छत्रपति संभाजीनगर, जालना और नांदेड़ ज़िलों में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री पंकजा मुंडे और ओबीसी कल्याण मंत्री अतुल सावे जैसे वरिष्ठ राजनेताओं की मौजूदगी के बावजूद, मुक्ति दिवस समारोहों के दौरान सार्वजनिक रूप से कोई कुनबी प्रमाणपत्र वितरित नहीं किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि इन ज़िलों में प्रमाणपत्र वितरण की प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी, लेकिन बुधवार के कार्यक्रम केवल आधिकारिक समारोहों तक ही सीमित रहे।
राजनीतिक रूप में अहम कदम
कुनबी प्रमाणपत्रों के वितरण को राजनीतिक रूप से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, खासकर मराठवाड़ा में, जहां आरक्षण की मांग ज़ोरदार रही है। सरकार का यह निर्णय महीनों तक चले विरोध प्रदर्शनों, भूख हड़तालों और कार्यकर्ता मनोज जरांगे के नेतृत्व में मराठा समुदाय के नेताओं के साथ बातचीत के बाद आया है।
मुंबई: पत्नी ने ‘हनीट्रैप’ में फंसाकर कर्ज के बहाने ठगे 1.73 करोड़, ‘सोनम रघुवंशी’ के मामले से भी बड़ा खुलासा
18 Sep, 2025 05:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: भांडुप इलाके से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां एक महिला ने अपने तीन साथियों की मदद से पति को करीब एक करोड़ रुपये का चूना लगा दिया। पीड़ित विशाल अशोक रोडे ने भांडुप थाने में शिकायत दर्ज कराई है। इसके बाद पत्नी पूनम रोडे और उसके तीन सहयोगियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। पुलिस के मुताबिक पूनम एक निजी कंपनी में काम करती हैं जहां उसकी दोस्ती आरोपियों से हुई थी। 2019 में पूनम ने अपने पति को कर्ज दिलाने के नाम पर अपने इन दोस्तों से मिलवाया और भरोसा दिलाया कि वे आर्थिक मदद करेंगे। पूनम के पति विशाल को कर्ज चाहिए था। इसलिए उसने शर्त स्वीकार कर लिया। पत्नी की हरकत ने इंदौर के बहुचर्चित राजा रघुवंशी केस की याद दिला दी है। इस मामले में पत्नी ने पति को चूना लगाकर हनीट्रैप में फंसा दिया।
प्रोसेसिंग फीस के नाम लिए लाखों
आरोप है कि विशाल द्वारा प्रोसेसिंग फीस 6.92 लाख रुपये चुकाने के बाद भी उसको कर्ज नहीं मिला। इस बारे में पूछताछ करने पर आरोपियों ने अपने कंपनी में काम करने वाली एक महिला को विशाल से कर्ज के बारे में ऑनलाइन बातचीत करने के लिए कहा। लेकिन बातचीत के दौरान महिला ने विशाल से नजदीकी बढ़ा ली और विशाल और खुद के बीच अश्लील तस्वीरों को साझा करने लगी। आरोप है कि इन्हीं तस्वीरों के जरिए आरोपी विशाल को ब्लैकमेल करने लगी। पीड़ित द्वारा पुलिस को दिए बयान और दर्ज रिपोर्ट के अनुसार 2022 से अब तक पूनम ने हर महीने 2.20 लाख रुपये पति के खाते से अपने खाते में ट्रांसफर करवाए। इससे उसके खाते में कुल 82.23 लाख रुपये पहुंचे।
वूसली के बाद बनाया संपत्ति पर दबाव
पीड़ित द्वारा पुलिस को दिए बयान और दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, 2022 से अब तक पूनम ने हर महीने 2.20 लाख रुपये पति के खाते से अपने खाते में ट्रांसफर करवाए। इससे उसके खाते में कुल 82.23 लाख रुपये पहुंचे। इतना ही नहीं, आरोपियों ने विशाल से उसकी संपत्ति के दस्तावेजों पर जबरन हस्ताक्षर भी कराए। आखिरकार लंबे समय तक चुप रहने के बाद विशाल ने पत्नी और उसके साथियों की प्रताड़ना से तंग आकर साहस जुटाया और भांडुप पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ विशाल से करीब 1.73 करोड़ की ठगी का मामला दर्ज कर लिया है। हालांकि, इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। सबको नोटिस जारी कर दिया गया है।
हिंदी-मराठी विवाद के बीच महाराष्ट्र सरकार का कदम, त्रिभाषा समिति की पहली बैठक में होगा बड़ा फैसला
18 Sep, 2025 05:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र में हिंदी बनाम मराठी भाषा विवाद के मुद्दे पर गठित त्रिभाषा समिति आम लोगों के साथ ठाकरे ब्रदर्स (उद्धव ठाकरे-राज ठाकरे) से भी राय लेगी। प्राथमिक विद्यालयों में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में शामिल करने या नहीं करने के लिए गठित त्रिभाषा समिति की पहली बैठक बुधवार को मंत्रालय में हुई। बैठक में समिति ने तय किया है कि वह आम लोगों के साथ-साथ, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे से राय लेगी। इसके लिए समिति ने प्रश्नावली भी तैयार की है। समिति अलग से एक वेबसाइट भी बनवाएंगी, ताकि लोग वहां भी अपने विचार रख सके। अंत में समिति एक रिपोर्ट तैयार कर 5 दिसंबर तक सरकार को सौंपेगी। इसके बाद में सरकार उचित निर्णय लेगी। सीएम देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली महायुति सरकार ने इस समिति का गठन किया था।
समिति ने दिया था त्रिभाषा का सुझाव
गौरतलब है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 महाराष्ट्र में लागू करने के लिए डॉ. रघुनाथ माशेलकर के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया गया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कक्षा पहली से मराठी, अंग्रेजी और हिंदी की पढ़ाई शुरू करने का सुझाव दिया था। उन्हीं के सुझाव पर ही महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में त्रिभाषा फार्मूला लागू करते हुए कक्षा पहली से मराठी, अंग्रेजी और हिंदी की पढ़ाई को अनिवार्य कर दिया। इसे लागू करने के लिए सरकार ने शासनादेश जारी किया जिसका ठाकरे बंधुओं सहित कांग्रेस ने भी विरोध किया था। विरोध के चलते सरकार ने वह जीआर वापस ले लिया। हालिया मॉनसून सत्र की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने त्रिभाषा नीति तय करने के लिए डॉ. नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया। समिति को 5 दिसंबर तक रिपोर्ट सौंपना है।
समिति ने तैयार की प्रश्नावली
बुधवार को मंत्रालय में त्रिभाषा समिति की पहली बैठक हुई। बैठक के बाद समिति के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र जाधव ने बताया कि हम लोगों ने कामकाज की रूपरेखा तय की गई। हमने प्रश्नावली तैयार की है। इसमें सवाल होंगे कि त्रिभाषा फार्मूले को कब से लागू किया जाए ? कक्षा पहली से, तीसरी से या पांचवीं से? दूसरी प्रश्नावली मराठी भाषा के लिए काम कर रहे संस्थाओं, राजनेताओं, कार्यकर्ताओं, लेखकों, उद्यमी और विचारवंत लोगों के लिए होगी। डॉ. जाधव ने कहा कि समिति के सदस्य उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे सहित अन्य नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। साथ प्रश्नावली सभी कॉलेज, संगठनों को भेंजेंगे। हम उनसे उम्मीद रखते हैं कि वे भी हमें फीडबैक दें।
पूरे राज्य में जाएगी समिति
समिति राज्य भर में अलग-अलग जगह जाकर त्रिभाषा फार्मूले को लेकर फीडबैक लेगी। जाधव ने बताया कि वे अगले 10-15 दिनों में इन नेताओं से प्रत्यक्ष मुलाकात कर उनका पक्ष जानने की कोशिश करेंगे। समिति के अध्यक्ष डॉ. जाधव ने बताया कि हम काम पूरा कर 5 दिसंबर तक सरकार को रिपोर्ट सौंप देंगे। उन्होंने ने कहा कि हम सिफारिश करेंगे, लेकिन अंतिम निर्णय लेने का अधिकार सरकार का होगा।
नवंबर अंत में मुंबई में बैठक
समिति के अध्यक्ष डॉ. जाधव ने बताया कि राज्य के आठ बड़े शहरों में भी समिति के सदस्य जाएंगे। उनसे भी फीडबैक लेंगे। उनकी भी राय जानेंगे। डॉ जाधव ने बताया कि वे लोग 8 अक्टूबर को संभाजीनगर, 10 अक्टूबर को नागपुर, 30 अक्टूबर को कोल्हापुर, 31 अक्टूबर को रत्नागिरी, 11 नवंबर को नासिक, 13 नवंबर को पुणे, 21 नवंबर को सोलापुर जाएंगे और अंत में नवंबर के अंतिम सप्ताह में मुंबई में बैठक होगी। इसके अलावा समिति अन्य राज्यों में लागू त्रिभाषा फार्मूले का भी अध्ययन करेगी।
मुंबई की राजनीति में हलचल, भाजपा अध्यक्ष अमित साटम का बयान – “कहीं कोई खान न बन जाए मुंबई का मेयर
17 Sep, 2025 05:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में सबसे ज्यादा अहम मुंबई के दंगल को माना जा रहा है। ऐसे में जब सुप्रीम कोर्ट ने लोकल बॉडी चुनावों को कराने के लिए 21 जनवरी, 2026 की डेडलाइन तय कर दी है तब मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम का एक ऐसा बयान सामने आया है। जिस पर राजनीतिक गरमा सकती है। साटम ने चेताया है कि किसी खान को मेयर न बनने दें। अमित साटम में बीजेपी की विजय संकल्प रैली में यह विवास्पद टिप्पणी की। इस रैली में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री पीयूष गाेयल भी मौजूद थे। बीजेपी के नवनियुक्त मुंबई अध्यक्ष ने मुस्लिम समुदाय का हवाला देते हुए कहा कि आगामी नगर निगम चुनाव शहर की सुरक्षा के लिए हैं। किसी खान को मुंबई का मेयर नहीं बनना चाहिए, जिससे विवाद खड़ा हो गया है। अमित साटम अंधेरी वेस्ट से विधायक भी हैं।
साटम ने दूसरे देशों का दिया हवाला
साटम को हाल ही में पार्टी ने आशीष शेलार की जगह पर मुंबई बीजेपी की कमान सौंपी है। साटम एक जमाने में बीजेपी के दिग्गज नेता रहे गोपीनाथ मुंडे के पीए यानी निजी सहायक थे। साटम बीएमसी के पार्षद भी रह चुके हैं। साटम ने जब बीजेपी की विजय संकल्प रैली में यह टिप्पणी की तो कार्यक्रम में तमाम बीजेपी के नेता मौजूद थे। साटम ने चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि यह लड़ाई मुंबई को सुरक्षित रखने की है। अंतरराष्ट्रीय देशों में घुसपैठ हो रही है और उनके रंग बदल रहे हैं। कुछ शहरों के मेयरों के उपनाम देखिए। क्या हम मुंबई में भी यही पैटर्न चाहते हैं? साटम की टिप्पणी को लंदन के मेयर सादिक खान की ओर इशारा कर रही है, जिनकी जड़ें पाकिस्तान में हैं।
उद्धव ठाकरे पर साधा निशाना
साटम ने कहा कि यह पैटर्न वर्सोवा-मालवणी शैली हर जगह फैल सकती है। मुंबईकरों के दरवाजे पर एक बांग्लादेशी होगा। कल हर वार्ड में एक हारून खान चुना जा सकता है, और कोई खान मुंबई का मेयर बन सकता है। ऐसा न होने दें। हारून खान उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना यूबीटी के विधायक हैं। वह मुंबई की वर्सोवा सीट से जीते हैं। वह लंबे समय से उद्धव ठाकरे के साथ हैं। मुंबई के वर्सोवा और मालवणी में मुस्लिम आबादी अच्छी-खासी है। साटम के बयान के वोटों के धुव्रीकरण करने से जोड़कर देखा जा रहा है। साटम ने कहा कि यह जिम्मेदारी कार्यकर्ताओं की है कि महायुति का एक मेयर बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) का कार्यभार संभाले। बीएमसी में मेयर पद लंबे वक्त से उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना के पास रहा है। मुंबई की आखिरी मेयर किशोरी पेडनेकर थीं। अब तक मुंबई को कुल 76 मेयर मिले हैं।
मुंबई शाखा में HDFC बैंक कर्मचारी द्वारा जवान के साथ बदसलूकी, मामला तूल पकड़ता देख जांच के आदेश
17 Sep, 2025 05:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई : HDFC Bank मुंबई की एक कर्मचारी का ऑडियो सामने आया है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर गुस्सा उमड़ रहा है। बताया जा रहा है कि यह ऑडियो एचडीएफसी बैंक की एक कर्मचारी अनुराधा वर्मा है। इसमें वह लोन रिकवरी के लिए सेना के एक जवान को कॉल करती है। इस दौरान सेना के जवान ने ज्यादा ब्याज पर सवाल उठाया तो वह उसके ऊपर भड़क जाती है। उसे भद्दी-भद्दी गालियां देती है और यहां तक कि पूरी सेना और शहीदों के लिए आपत्तिजनक शब्द कहती है। लोगों ने एचडीएफसी बैंक से इस महिला स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है ऑडियो में सुनाई दे रहा है कि महिला कह रही है कि तुम्हें मैसेज का रिप्लाई तो देना चाहिए था न। बताते कि मजबूरी है मैडम, अभी नहीं दे सकता। जवाब नहीं दे रहे। इस पर शख्स पूछता है कि मैंने कई बार पूछा कि मेरा 15 लाख 85 हजार लोन सेंशन किया आपने, 16 लाख के हिसाब से ब्याज कैसे लिया जा रहा है?
सेना के जवान को बताया गवांर
इस पर अनुराधा वर्मा तिलमिला जाती है और भड़कते हुए कहती है बताया तो है, 75 बार तुम्हे। अब तुम गंवार हो तो क्या कर सकते हैं। पढ़े-लिखे होते तो किसी अच्छी कंपनी में नौकरी कर रहे होते। गंवार हो, तभी बॉर्डर पर भेज दिए गए हो। गंवार-जाहिल कहीं के।
शहीदों को लेकर आपत्तिजनक बात
शख्स महिला से ठीक से बात करने को कहता है, लेकिन वह उसकी एक नहीं सुनती और आगे कहती है कि किसी के हक का खाने का नहीं। हजम नहीं होगा। तुम्हारे जैसे लोग ही होते हैं, जिनके बच्चे विकलांग पैदा होते हैं। तुम्हारे जैसे ही होते हैं जो बॉर्डर पर शहीद हो जाते हैं। रखो अभी फोन। आओ पंद्रह दिन में, मैं देखती हूं तुम कहां के तुर्रम खान हो। कौन सी चीज हो। मैं भी डिफेंस फैमिली से बिलॉन्ग करती हूं। गाली देते हुए वह कहती है ... मैं भी 12 साल से सीआरपीएफ में बिजनेस कर रही हूं। महिला की गाली सुनते ही सेना का जवान कहता है, मैं आपको दिखाता हूं, जिस तरह से आप बात कर रही हैं।
'...ज्ञान क्या घंटा दोगे...'
महिला कहती है दिखाओ... दिखाओ... दिखाओ... कितनी बड़ी फैमिली से हो। इतनी बड़ी फैमिली से होते तो लोन पर नहीं जीते। 15-16 लाख लोन न लेते। चल ज्ञान मत दे। लोन पर जी रहे हो, मुझे ज्ञान दोगे घंटा...। सेना का जवान कहता है.. लोन पर जी रहे हो? महिला कहती है हां बिल्कुल, 5 हजार रुपये देने में तुम्हारी नानी याद आ गई हैं। सेना का जवान कहता है, अब मैं आपको दिखाता हूं, आपकी रिकॉर्डिंग है मेरे पास। महिला कहती है बोल मत अब आकर दिखा... रख रिकॉर्डिंग, जिधर भेजने का है भेज, जिधर दिखाने का है, दिखा, बिंदास दिखा, जो चाहिए मैं भेज देती हूं। तुम क्या घंटा मुझे देखोगे, तुम जो उखाड़ सकते हो, उखाड़ लो। तू आ, दिखाती हूं।
'तेरे बाप की नौकर नहीं...'
सेना का जवान कहता है कि सर्विस सर्टिफिकेट जो बनाया है, वह मुझे भेजो, तो वह कहती है कि क्यों स्क्रीनशॉट नहीं लिया क्या? क्यों कुछ भेजूं, तेरे बाप की नौकर हूं। पागल दिखती हूं, पांच-छह हजार रुपये के लिए रो रहा है... चल रख फोन।
महाराष्ट्र के गांव में अनोखा जन्म, किसान की भैंस से पैदा हुआ दो सिर वाला बछड़ा; ग्रामीणों ने पूजा-अर्चना शुरू की
17 Sep, 2025 05:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोल्हापुर: महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के कागल तहसील के बनगे गांव में एक अनोखी और दुर्लभ घटना सामने आई है। यहां किसान सुरेश सुतार के घर पर उनकी भैंस ने एक बछड़े को जन्म दिया। लेकिन जब उन्होंने भेंस को बछड़े को देखा तो हैरान रह गए। दरअसल इस बछड़े के एक नहीं बल्कि दो सिर थे। जैसे ही इसकी जानकारी गांव वालों को लगी तो किसानों के घर पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। हर कोई इस बछड़े को देखना चाहता था और उसके साथ फोटो खिंचवाने लगा। यह घटना पूरे गांव में चर्चा का विषय बन गई है।
गांव वाले मान रहे चमत्कार
ग्रामीण इस बछड़े को देखने के बाद इसे चमत्कार मान रहे हैं। कुछ लोगों ने तो उसकी पूजा करना शुरू कर दिया। तो वहीं कुछ धूप और अगरबत्ती भी साथ ले आए। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोई चमत्कार नहीं बल्कि एक दुर्लभ जैविक स्थिति है, जिसे पॉलीसेफली कहा जाता है। इसमें भ्रूण जुड़वा बनने की प्रक्रिया शुरू तो करता है लेकिन पूरी नहीं हो पाती। इसी कारण एक ही शरीर पर दो सिर विकसित हो जाते हैं। इस स्थिति में पैदा हुए बछड़े के दो सिर, दो आंखें, दो कान और अलग-अलग मुंह होते हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से ऐसे बछड़ों का जीवन अनिश्चित होता है। कई बार यह जन्म के बाद लंबे समय तक जीवित नहीं रह पाते, जबकि कुछ मामलों में वे कुछ समय तक जी सकते हैं।
डॉक्टर बोले- इसे अधविश्वास ने न जोड़ें
वहीं इस बछड़े को देखने के बाद कई लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ इसे चमत्कार तो कुछ इसे भगवान का रूप मान रहे हैं। हालांकि, डॉक्टरों और पशु विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीणों को इसे अंधविश्वास से जोड़ने के बजाय वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना चाहिए। यह दुर्लभ मामला न सिर्फ कोल्हापुर जिले में बल्कि पूरे महाराष्ट्र में चर्चा का केंद्र बन गया है। इससे पहले भी देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे मामले सामने आए हैं, लेकिन वे बहुत ही कम देखने को मिलते हैं।
उद्धव ठाकरे का तीखा सवाल: ‘अगर यही मापदंड है तो क्या जय शाह को भी देशद्रोही कहेंगे?’ – भारत-पाक मैच पर PM मोदी से उठाए सवाल
13 Sep, 2025 05:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: एशिया कप में भारत-पाकिस्तान मैच कल यानी रविवार शाम को खेला जाएगा। हालांकि इस मैच से पहले भारत में विपक्षी दलों के नेताओं ने इस मैच का बहिष्कार करने की मांग की है। शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए विदेश में प्रतिनिधिमंडल भेजने से बेहतर होता कि वे भारत-पाकिस्तान मैच का बहिष्कार करते। कल सुबह 11 बजे सभी महिलाएं इकट्ठा होकर एक बड़े डिब्बे में सिंदूर की पुड़िया भरकर भेजेंगी। अभी समय नहीं बीता है। पीएम मोदी को मजबूती से कहना चाहिए कि यह मैच नहीं होगा। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछना चाहता हूं कि क्या आप जय शाह को भी देशद्रोही कहेंगे? जैसे आपके कुछ अंधभक्तों ने नीरज चोपड़ा को देशद्रोही कहा था? उद्धव ठाकरे ने यह सवाल पूछा है।
पहलगाम हमले का खून अभी सूखा नहीं-उद्धव
उद्धव ठाकरे ने मुंबई में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि पहलगाम हमले में मारे गए लोगों का खून अभी सूखा नहीं है। घाव अभी भरा नहीं है। उस समय हम सभी को लग रहा था कि पाकिस्तान अपनी औकात में नहीं रहेगा। पाकिस्तान को दो-तीन टुकड़ों में बांटने के मकसद से एक युद्ध छेड़ा गया था और इसे ' ऑपरेशन सिंदूर' नाम दिया गया था। रक्षा मंत्री ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है। पाकिस्तान हमेशा कुछ दिनों बाद हमला करता है। जब उसके सैनिक बहादुरी दिखाते हैं।
पाकिस्तान से मैच कैसे खेल रहे-उद्धव
उद्धव ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप कहते हैं कि उन्होंने इस युद्ध को रोका। भारतीय जैवलिन थ्रो खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने एक पाकिस्तानी खिलाड़ी को भारत आमंत्रित किया था। वह आए या नहीं, यह तो पता नहीं, लेकिन कुछ अंधभक्तों ने नीरज चोपड़ा को देशद्रोही कहा था। उद्धव ठाकरे ने कहा कि जिस पाकिस्तान से हमने युद्ध का ऐलान किया था, उसी के साथ हम मैच खेल रहे हैं।
पीएम मोदी से पूछा सवाल
उद्धव ठाकरे ने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद मोदी जी ने दुनिया भर में सभी दलों के सांसदों को भेजकर कहा था कि पाकिस्तान हमारे देश में आतंकवाद फैला रहा है। अब कल के मैच के बारे में मोदी जी का क्या कहना है? मुझे लगता है ये देशभक्ति है और धंधा चल रहा है। क्या रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह युद्ध रुकने का ऐलान करने वाले हैं?
जावेद मियांदाद का जिक्र
उद्धव ने पूछा कि क्या हमें पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलना चाहिए जबकि हमारे सैनिक सीमा पर अपनी जान कुर्बान कर रहे हैं? उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए क्रिकेट मैच को देशभक्ति का मजाक करार दिया। उद्धव ने मुंबई स्थित आवास ‘मातोश्री’ में बाल ठाकरे और पाकिस्तानी क्रिकेटर जावेद मियांदाद के बीच हुई एक पुरानी मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि मेरे पिता ने जावेद मियांदाद से कहा था कि जब तक पाकिस्तान से भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियां जारी रहेंगी, तब तक कोई क्रिकेट मैच नहीं खेला जाएगा।
महिला सशक्तिकरण की नई तस्वीर: महाराष्ट्र में जिला परिषद अध्यक्ष की 50% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित, 34 सीटों पर तय हुआ आरक्षण
13 Sep, 2025 05:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों के इसी साल के अंत में होने की संभवना व्यक्त की जा रही है। महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग द्वारा इस दिशा में तैयारियां भी की जा रही है। एक तरफ जहां चुनाव आयोग तैयारियों में व्यस्त है तो वहीं दूसरी ओर सरकार की तरफ से बड़ा अपडेट सामने आया है। सरकार ने राज्य के 34 जिला परिषद के अध्यक्ष पदों के लिए आरक्षण घोषित कर दिया है। सरकार की तरफ से जारी शासनादेश में ठाणे, पालघर, पुणे, सोलापुर सहित राज्य की 34 जिला परिषदों के अध्यक्ष पदों के लिए आरक्षण घोषित किया गया है। इसमें महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण दिया गया है।
17 सीटों पर महिला बनेंगी अध्यक्ष
राज्य सरकार के शासनादेश के अनुसार 34 में से 17 सीटों पर महिला अध्यक्ष बनेंगी। जिला परिषद अध्यक्ष पद के लिए जारी की गई आरक्षण की सूची के अनुसार, ठाणे, पुणे, रायगढ़, सिंधुदुर्ग, नाशिक, जलगांव, छत्रपति संभाजीनगर, बुलढाणा, यवतमाल और नागपुर जिला परिषदों के अध्यक्ष पद सामान्य वर्ग के लिए खुला रखा गया है। वहीं ठाणे, सांगली, कोल्हापुर, लातूर, अमरावती, गोंदिया और गढ़चिरौली जिलों में सामान्य (महिला) आरक्षण लागू किया गया है। इसी तरह अनुसूचित जाति के लिए बीड (महिला), हिंगोली, परभणी, वर्धा और चंद्रपुर (महिला) पद आरक्षित किए गए हैं. सूची के अनुसार, अनुसूचित जनजाति के लिए पालघर, नंदुरबार, अहिल्यानगर के अध्यक्ष पद महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। इसी तरह अकोला और वाशिम (महिला) जिलों में भी अध्यक्ष पद महिलाओं के लिए आरक्षित होने की वजह से महिला राज देखने को मिलेगा।
जिला परिषदों के अध्यक्ष पद की आरक्षण सूची
ठाणे- सामान्य (महिला)
पालघर-अनुसूचित जनजाति
रायगढ़ - सामान्य
रत्नागिरी - नागरिकों की पिछड़ी श्रेणी (महिला)
सिंधुदुर्ग-सामान
नाशिक - सामान्य
धुले-नागरिकों की पिछड़ी श्रेणी (महिला)
नंदुरबार-अनुसूचित जनजाति
जलगांव-सामान्य
अहिल्यानगर अनुसूचित जनजाति (महिला)
पुणे-सामान्य
सातारा-नागरिकों की पिछड़ी श्रेणी (महिलाएं)
सांगली -सामान्य (महिला)
सोलापुर नागरिकों की पिछड़ी श्रेणी
कोल्हापुर - सामान्य (महिला)
छत्रपति संभाजीनगर-सामान्य
जालना-नागरिकों की पिछड़ी श्रेणी (महिला)
बीड-अनुसूचित जाति (महिला)
हिंगोली - अनुसूचित जातियां
लातूर सामान्य (महिला)
अमरावती - सामान्य (महिला)
अकोला-अनुसूचित जनजाति (महिला)
परभणी-अनुसूचित जाति
वाशिम-अनुसूचित जनजाति (महिला)
बुलढाणा-सामान्य
यवतमाल सामान्य
नागपुर-नागरिकों की पिछड़ी श्रेणी
वर्धा अनुसूचित जाति
भंडारा - नागरिकों की पिछड़ी श्रेणी
गोंदिया - सामान्य (महिला)
चंद्रपुर-अनुसूचित जाति (महिला)
गढ़चिरौली - सामान्य (महिला)
यहां पुरुषों का होगा दबदबा
ओबीसी के लिए रत्नागिरी (महिला), धुले (महिला), सातारा (महिला), सोलापुर, जालना (महिला), नांदेड़, धाराशिव नागपुर नागपुर और भंडारा जिला परिषदों का अध्यक्ष पद आरक्षित रखा गया है। यहां पुरुषों का दबदबा देखने को मिलेगा. इस तरह से विभिन्न श्रेणियों में जारी आरक्षण का स्थानीय निकायों के चुनावों में प्रभाव देखने को मिलेगा।
OBC आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र में मचा हंगामा; युवक की सुसाइड से भड़की नाराज़गी, छगन भुजबल के तेवर से बढ़ी सरकार की टेंशन
13 Sep, 2025 05:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र में मनोज जरांगे पाटिल की अगुवाई में हुए मराठा आंदोलन को शांत करने के लिए फडणवीस सरकार ने हैदराबाद गैजेट को लेकर एक जीआर (शासनादेश) जारी किया था। छगन भुजबल पहले ही जीआर की भाषा OBC को नामंजूर होने की बात कह चुके हैं। इस सब प्रकरण के बीच महाराष्ट्र के लातूर में ओबीसी समुदाय के युवक और सामाजिक कार्यकर्ता की आत्महत्या ने सरकार की टेंशन बढ़ा दी है। फडणवीस सरकार में मंत्री छगन भुजबल ने कहा है कि आरक्षण बचाने के लिए कुर्बानी देनी पड़ रही है। मराठा आरक्षण के लिए जारी जीआर के बाद ओबीसी समाज इसका विरोध कर रहा है। सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या आरक्षण की आग फिर से तो नहीं भड़केगी?
सरकार ने पर भेदभाव का आरोप
लातूर के युवक भरत कराड द्वारा मांजरा नदी में छलांग लगाकर आत्महत्या करने के बाद माहौल और गरमा गया है। पुलिस ने इस हादसे को लेकर एक सुसाइड नोट भी बरामद किया है, जिसमें कराड ने महायुति सरकार पर भेदभाव करने के साथ ओबीसी समाज को धोखा देने का आरोप लगाया है। जिस शख्स ने आत्महत्या की है, वह ऑटो रिक्शा चलाता था और ओबीसी से जुड़े आन्दोलन में भाग लेता था। मंत्री भुजबल का आरोप है कि इस जीआर की वजह से ओबीसी आरक्षण को नुकसान पहुंचेगा, हालांकि महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस कह रहे हैं नए सरकारी आदेश का ओबीसी समुदाय पर कोई असर नहीं पड़ेगा और इससे केवल कुनबी जाति के पात्र मराठों को ही मदद मिलेगी।
आरक्षण छीनने नहीं देंगे: भुजबल
भुजबल ने बाद में बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि हमलोग किसी भी कीमत पर ओबीसी का आरक्षण छीनने नहीं देंगे। भुजबल ने कहा कि सरकार द्वारा जारी समाज के लोगों से आत्महत्या जैसा कदम न उठाने की जीआर से ओबीसी समाज के लोगों में बेचैनी है, ओबीसी नेता छगन भुजबल शुक्रवार को कराड के परिवार से मिलने के लिए लातूर पहुंचे। उनके साथ पूर्व मंत्री व ओबीसी नेता धनंजय मुंडे भी मौजूद थे। भुजबल का कहना है कि राज्य में मराठा समाज का वर्चस्व रहा है। उनके पास सत्ता में ताकत के अलावा चीनी मिलें और सहकारी क्षेत्र में दबदबा है। ऐसे में पूरे समाज को ओबीसी वर्ग में शामिल करने की मांग न्यायसंगत नहीं है। भुजबल का कहना है कि मराठा समुदाय में विद्वान लोगों को इस मुद्दे पर बोलना चाहिए।
भुजबल ने रख दिए आंकड़े
भुजबल का कहना है कि मराठा समुदाय को 25,000 करोड़ रुपये (विभिन्न राज्य सरकार की योजनाओं के तहत) मिलते हैं जबकि ओबीसी समुदाय को 5,000 करोड़ रुपये मिलते हैं। इसमें न्याय कहां है? मराठा समुदाय के लिए लगभग हर दूसरे दिन (सरकारी योजनाओं की) नई घोषणाएं होती हैं। एनसीपी के कोटे से मंत्री ने कहा कि मराठा नेता मनोज जरांगे पाटिल ने आतंक का माहौल बनाया और राज्य सरकार को आदेश जारी करने के लिए धमकाया। उन्होंने कहा कि जब राज्य ने उन्हें (मराठों को) दो लाख कुनबी जाति प्रमाण पत्र दिए थे, तब हम चुप थे।
बीजेपी के भीतर हलचल: मोहित कंबोज ने राजनीति से थोड़ा संन्यास लिया, समर्थकों में उड़ा सवाल — अगले कदम क्या होंगे?
13 Sep, 2025 05:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: बीजेपी में उभरते नेता के तौर पर देखे जाने वाले मोहित कंबोज से सक्रिय राजनीति से हटने का फैसला किया है। कंबोज पिछले साल तक सुर्खियों में आ गए थे, जब उन्होंने मुंबई विधानसभा चुनावों में महाराष्ट्र के पूर्व डीजीपी और पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त संजय पांडेय के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान किया था, हालांकि पांडेय चुनाव में नहीं उतरे थे। यह पूर मामला तब हुआ था जब पांडेय कांग्रेस में शामिल हुए थे। मुंबई शहर बीजेपी में अपने तेवरों से जगह बनाने वाले मोहित कंबोज (41) साल के हैं। मोहित कंबोज को महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस का करीबी माना जाता है। मोहित कंबोज ने जहां पर राजनीति से संन्यास का ऐलान किया है तो इसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी पत्नी अक्षा कंबोज सुर्खियों में आ गई है।
क्यों लिया राजनीति से संन्यास?
एफपीजे ने मोहित कंबोज हवाले से उनके सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की बात लिखी है। एफपीजे से बातचीत में मोहित कंबोज ने स्पष्ट किया मैं भाजपा का सदस्य बना रहा, पिछले छह महीनों से जानबूझकर राजनीतिक रूप से सक्रियता नहीं दिखाई। मैं अपने व्यवसाय को ज़्यादा समय देना चाहता हूं। मोहित कंबोज ने बिजनेस पर फोकस करने का कारण दिया है।
मोहित के फैसले से सभी हैरान
मोहित कंबोज के फैसले से बीजेपी के नेता भी हैरान हैं। पिछले दिनों मुंबई में बीजेपी ने अमित साटम को शहर अध्यक्ष नियुक्त किया था। मोहित कंबोज ऐसे वक्त पर राजनीति से दूर हुए हैं जब मुंबई में बीएमसी चुनाव होने हैं। मोहित कंबोज 2002 में वाराणसी से मुंबई पहुंचे थे। कुछ ही समय में इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बन गए, जहाँ उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ी।
बीजेपी में बनाई थी अलग छवि
मोहित कंबोज की सक्रियता को देखते हुए उन्हें 2013 में शहर भाजपा का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया और अगले वर्ष उन्हें गोरेगांव (पूर्व) के डिंडोशी से विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी का टिकट दिया गया। 353.53 करोड़ रुपये की घोषित संपत्ति के साथ वे महाराष्ट्र के सबसे धनी उम्मीदवार थे। त्रिकोणीय मुकाबले में वे शिवसेना के सुनील प्रभु से चुनाव हार गए। हार के बावजूद उन्हें भाजपा की युवा शाखा, भारतीय जनता युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया। मोहित कंबोज के सियासी संन्यास के बाद उनकी पत्नी अक्षा कंबोज की कंपनी को मुंबई में बड़े प्रोजेक्ट मिलने की चर्चा भी सोशल मीडिया में चर्चा हो रही है।
हौसला हो तो फासला क्या?
इस सबके बाद मोहित कंबोज ने एक्स पर लिखा है कि मंजिलें क्या है, रास्ता क्या है ? हौसला हो तो फासला क्या है। न पूछो कि मेरी मंजिल कहां है, अभी तो सफर का इरादा किया है, न हारुंगा हौसला उम्र भर, ये मैंने खुद से वादा किया है। मोहित कंबोज एस्पेक्ट ग्लोबल के सीईओ हैं। उनकी पत्नी इस कंपनी की चेयरपर्सन हैं, हालांकि उनकी पत्नी क्रिकेट आईएसपीएल टीम टाइगर्स ऑफ कोलकाता की सह-मालिक भी हैं। तो वहीं मोहित कंबोज भारतीय फाउंडेशन के चेयरमैन हैं।
कशिश मेथवानी: सौंदर्य प्रतियोगिताओं की रौनक से उठकर राष्ट्रीय मान-सम्मान की ओर, CDS में रही टॉप रैंक और अब भारतीय सेना अधिकारी
13 Sep, 2025 05:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुणे: महाराष्ट्र के पुणे की रहने वाली कशिश मेथवानी ने साबित कर दिया है कि अगर जज़्बा हो तो इंसान किसी भी मुकाम को हासिल कर सकता है। 2023 में मिस इंटरनेशनल इंडिया का खिताब जीतने वाली कशिश ने मॉडलिंग और एक्टिंग के आकर्षक प्रस्तावों को ठुकरा कर सेना की वर्दी पहनने का फैसला किया। चेन्नै के ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमीसे कठिन प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अब वह भारतीय सेना की एयर डिफेंस यूनिट में कमीशन प्राप्त कर चुकी हैं। उनके पिता पूर्व वैज्ञानिक रहे हैं और बाद में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ क्वालिटी एश्योरेंस में डिफेंस सिविलियन के रूप में कार्यरत रहे। उनकी मां आर्मी पब्लिक स्कूल में शिक्षिका हैं। परिवार में पहले कोई भी सेना में नहीं रहा, लेकिन माता-पिता ने कशिश के फैसले का पूरा समर्थन किया।
कौन हैं कशिश मेथवानी
कशिश ने बायोटेक्नोलॉजी में मास्टर्स डिग्री हासिल की है और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु से थीसिस भी की है। उन्हें हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी का प्रस्ताव भी मिला था, लेकिन उन्होंने देश सेवा का रास्ता चुना। उनकी यह सोच कॉलेज के दिनों में नेशनल कैडेट कॉर्प्स में शामिल होने के बाद और मज़बूत हुई। एनसीसी ने उन्हें वह जीवन दिखाया, जहां वह वास्तव में खुद को फिट मानती थीं। वह सिर्फ एक कैडेट ही नहीं, बल्कि बहुमुखी प्रतिभा की धनी भी हैं। कशिश भरतनाट्यम डांसर, तबला वादक, क्विज़र और डिबेटर हैं। उन्होंने ‘क्रिटिकल कॉज़’ नामक एनजीओ भी शुरू किया है। ओटीए में उन्होंने बास्केटबॉल, वॉलीबॉल और हैंडबॉल में अकादमी का प्रतिनिधित्व किया और प्रमुख कार्यक्रमों में कमेंट्री वॉयस और एंकर की भूमिका निभाई।
शैक्षणिक और खेल दोनों क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन
कशिश ने OTA में 11 महीने की कठोर ट्रेनिंग के दौरान शैक्षणिक और खेल दोनों क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने आर्मी एयर डिफेंस मेडल सहित कई पुरस्कार जीते। मार्च में उन्हें सिख लाइट इन्फेंट्री रेजिमेंट मेडल, ड्रिल एंड डिसिप्लिन बैज और कमांडेंट्स पेन से भी नवाज़ा गया। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने बटालियन अंडर ऑफिसर और बाद में एकेडमी अंडर ऑफिसर जैसे नेतृत्वकारी पद संभाले, जो कि अकादमी का सर्वोच्च पद है। कशिश का कहना है कि मेरे लिए यह एक समय में एक कदम आगे बढ़ने के बारे में है। मैं अपनी यूनिट और सेना को अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहती हूं। उन्होंने कहा कि पेजेंट्री उनके लिए केवल एक शौक था, लेकिन एनसीसी के अनुभव और गणतंत्र दिवस परेड में प्रधानमंत्री से ऑल इंडिया बेस्ट कैडेट अवॉर्ड प्राप्त करना उनके जीवन का निर्णायक मोड़ रहा।
अजित पवार ने किया ऐलान: ‘अहमदनगर’ स्टेशन का नाम ‘अहिल्यानगर’, जल्द ही औरंगाबाद स्टेशन का नाम भी बदलेगा
13 Sep, 2025 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय से मंजूरी बाद अहमदनगर रेलवे स्टेशन अब अहिल्यानगर रेलवे स्टेशन कर दिया गया है। केंद्र सरकार की मंजूरी मिलते ही राज्य सरकार ने इस बारे में अधिसूचना जारी करने में देरी नहीं की। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा कि अहमदनगर रेलवे स्टेशन का नाम अहिल्यानगर करने की मांग कई संस्थाएं, संगठन और आम आदमी करते आ रहे थे। इसी पृष्ठभूमि में और पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर की त्रिशताब्दी जयंती वर्ष में रेलवे स्टेशन का नाम बदलने का निर्णय लिया गया। यह बेहद खुशी की बात है।
अजित पवार ने क्या बताया?
महायुति सरकार ने अहमदनगर का नाम बदलकर अहिल्यानगर कर दिया था। रेलवे स्टेशन का नाम बदलने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री अजित पवार लगातार प्रयास कर रहे थे। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने पिछले महीने ही रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर रेलवे मंत्रालय और बाद में केंद्रीय गृह मंत्रालय से अहमदनगर रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर अहिल्यानगर करने का अनुरोध किया था। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा कि अहिल्यानगर स्टेशन का नया नाम देने के बाद जल्द ही औरंगाबाद रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर छत्रपति संभाजी नगर रेलवे स्टेशन किया जाएगा, इसके लिए हम प्रयासरत हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की
दरअसल अक्टूबर 2024 में अहमदनगर जिले का नाम अहिल्यानगर करने को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की थी। इसके पहले मार्च 2024 में कैबिनेट ने जिले का नाम बदलने का प्रस्ताव को मंजूर किया था। अहिल्याबाई होलकर के 9वे वंशज व महाराष्ट्र विधान परिषद के सभापति प्रो.राम शिंदे ने केंद्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि अहिल्यानगर की जनता इसकी सालों से मांग कर रही थी । जनता सवाल कर रही थी कि जब अहमदनगर जिले का नाम बदलकर अहिल्यानगर कर दिया गया है तो अहमदनगर रेलवे स्टेशन का नाम क्यों नहीं बदला जा रहा है?
महाराष्ट्र की जनता खुश
जनता की भावना को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की मांग केंद्र सरकार से की। और जैसे ही केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय से अहमदनगर रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर अहिल्यानगर रेलवे करने की मंजूरी दी वैसे ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने तत्काल अधिसूचना जारी की। सरकार के इस निर्णय का अहिल्यानगर जिले के लोग ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र की जनता और देश की जनता बहुत खुश है। महायुति सरकार के इस निर्णय के लिए सभापति राम शिंदे ने सरकार को धन्यवाद देते हुए आभार प्रकट किया।
अजित पवार ने शाह का धन्यवाद किया
नाम बदलवाने में बड़ी भूमिका निभाने वाले उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को धन्यवाद दिया। अजित पवार के कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी इस प्रयास का हिस्सा थे। पिछले महीने पवार ने वैष्णव को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि स्टेशन का नाम बदलकर शहर के नए नाम के अनुरूप कर दिया जाए। पवार ने कहा कि ‘लंबे समय से चली आ रही मांग अब पूरी हो गई है। नाम बदलने का विशेष महत्व है क्योंकि हम पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर की 300वीं जयंती वर्ष मना रहे हैं। शहर का नाम अहिल्यानगर रखे जाने के बाद कई संगठन और नागरिक मांग कर रहे थे कि रेलवे स्टेशन का नाम भी बदला जाए। पवार ने यह भी कहा कि औरंगाबाद रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर छत्रपति संभाजी नगर रेलवे स्टेशन करने के प्रयास चल रहे हैं।
फडणवीस बने ‘कड़क कैप्टन’: नगर निगमों की कमान IAS अफसरों को सौंपने का ऐलान, प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव के संकेत
12 Sep, 2025 01:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र में महायुति सरकार की अगुवाई कर रहे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कड़क अंदाज सामने आया है। मुख्यमंत्री ने एक बड़े आदेश में कहा है कि राज्य के नगर निगमों का नेतृत्व केवल आईएएस अधिकारी ही करेंगे। मुख्यमंत्री फडणवीस ने मीरा-भाईंदर के पूर्व आयुक्त दिलीप ढोले और वसई-विरार के पूर्व आयुक्त अनिल पवार सहित छोटे नगर निगमों में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामलों की बाढ़ आने के बाद यह फैसला लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शहरी विकास विभाग को नियमों में बदलाव करने का निर्देश दिया है ताकि राज्य के 29 नगर निगमों के आयुक्त केवल आईएएस अधिकारी ही नियुक्त किए जाएं।
सिर्फ आईएएस को मिलेगी कमान
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जल्द ही राज्य के नगर निगमों में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है। महाराष्ट्र के ज्यादातर नगर निगम प्रशासकों के हवाले हैं, क्योंकि इलेक्टेड विंग का कार्यकाल पूरा हो चुका है। कुछ साल पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा शासित कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने 14 नगर निगमों को आईएएस-कैडर के अधिकारियों के नेतृत्व में अधिसूचित किया था। इनमें मुंबई, ठाणे, पुणे, नागपुर, कोल्हापुर, कल्याण-डोंबिवली और वसई-विरार शामिल हैं। इस आदेश के बावजूद, राज्य सरकार राज्य कैडर या मुख्य अधिकारी (सीओ) कैडर के अधिकारियों की नियुक्ति करती रही। अब मुख्यमंत्री के आदेश के बाद बाकी नगर निगमों में भी IAS ही कमान संभालेंगे। वे ही कमिश्नर बनेंगे।
भ्रष्टाचार के मामलों ने बढ़ाई मुश्किल
यह सामने आया है कि मीरा भाईंदर नगर निगम (MBMC) जैसे कुछ मामलों में प्रमुख अधिकारी सीओ कैडर के भी नहीं थे। सामान्य प्रशासन विभाग और नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों ने कहा कि स्थानीय राजनेताओं के लिए राज्य कैडर के अधिकारियों को नगर निगम प्रमुख के रूप में किया था। एमबीएमसी में सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के दो निजी सचिवों को आयुक्त नियुक्त किया था। उनमें से एक दिलीप ढोले था। उन्हें अगस्त 2023 में धन शोधन के एक मामले में ईडी की जांच का सामना करना पड़ा। पूर्व वसई-विरार आयुक्त अनिल पवार भी ईडी के शिकंजे में आ गए थे। पवार एक राज्य सेवा अधिकारी हैं जिन्हें आईएएस कैडर में पदोन्नत किया गया था। फडणवीस के निर्देश के बाद आने वाले दिनों में यूडीडी द्वारा बड़ा बदलाव किए जाने की संभावना बढ़ गई है। यह विभाग डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के पास है।
राशिफल 21 मई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
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सीएचसी पलारी के लैब में जांच सुचारू रूप से संचालित
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से की भेंट
ग्रामीण विकास में रोजगार सहायकों की महत्वपूर्ण भूमिका, राज्य सरकार इनके हित की चिंता करेगी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
