बिहार-झारखण्ड
सीएम सम्राट चौधरी पैदल निकले, पेट्रोल कीमत बढ़ोतरी के बीच लिया संदेश
15 May, 2026 11:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना: देश के भीतर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुए हालिया इजाफे के बीच बिहार के राजनीतिक गलियारों से एक बेहद अनूठी और अनुकरणीय तस्वीर सामने आई है। राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज अचानक अपने सरकारी आवास से मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित दफ्तर के लिए पैदल ही रवाना हो गए। मुख्यमंत्री को इस तरह आम राहगीरों की तरह सड़क पर चलते देख हर कोई हैरान रह गया। मुख्यमंत्री ने अपनी इस पैदल यात्रा का एक छोटा सा वीडियो भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर साझा किया है, जिसमें उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान को स्वीकार करते हुए वे आज पैदल ही कार्यालय पहुंचे हैं, जो अब इंटरनेट पर तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है।
मंत्रिमंडल और सहयोगियों ने भी अपनाया सादगी का मार्ग
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की इस अनूठी पहल का असर उनके मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों पर भी तत्काल देखने को मिला। मुख्यमंत्री के पदचिन्हों पर चलते हुए राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री दीपक प्रकाश भी अपने आवास से दफ्तर के लिए पैदल ही निकल पड़े। इसी क्रम में एक और दिलचस्प नजारा तब देखने को मिला जब प्रदेश के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी अपनी चमचमाती सरकारी गाड़ियों को छोड़कर एक साधारण ई-रिक्शा में सवार होकर सचिवालय पहुंचे। सरकार के शीर्ष नेतृत्व द्वारा ईंधन की बचत और पर्यावरण संरक्षण को लेकर किए गए इस जमीनी प्रयास की आम जनता और राजनीतिक हलकों में काफी सराहना की जा रही है।
ईंधन की भारी बचत के लिए मुख्यमंत्री कारकेड में कटौती
इस प्रतीकात्मक शुरुआत से महज दो दिन पहले ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार की जनता और प्रशासनिक अधिकारियों से पेट्रोलियम पदार्थों की बचत के लिए वाहनों का कम से कम उपयोग करने की पुरजोर अपील की थी। इस दिशा में खुद उदाहरण पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने अपने स्वयं के कारकेड यानी सुरक्षा काफिले में शामिल होने वाले वाहनों की संख्या को घटाकर न्यूनतम करने का एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। सरकार की ओर से सभी मंत्रियों, निगम बोर्ड के अध्यक्षों, सदस्यों, जनप्रतिनिधियों और आला प्रशासनिक अधिकारियों से साफ तौर पर कहा गया है कि वे किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में अतिरिक्त सुरक्षा या वीआईपी वाहनों के बेड़े के बिना ही शामिल हों।
डिजिटल बैठकों को प्राथमिकता और पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर जोर
राज्य सरकार ने ईंधन की खपत को रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर भी कई दूरगामी नीतिगत निर्देश जारी किए हैं। सभी सरकारी विभागों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे भविष्य में होने वाली सभी प्रकार की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठकों और महत्वपूर्ण कॉन्फ्रेंस को भौतिक रूप से आयोजित करने के बजाय केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ही संपन्न करें। इसके साथ ही आम नागरिकों से भी यह विशेष आग्रह किया गया है कि वे अपने निजी वाहनों को सड़कों पर निकालने के बजाय मेट्रो, सिटी बस और ऑटो जैसे सार्वजनिक परिवहन के साधनों के उपयोग को प्राथमिकता दें ताकि सामूहिक रूप से ईंधन संकट का मुकाबला किया जा सके।
वर्क फ्रॉम होम की संस्कृति और 'नो व्हीकल डे' का नया विजन
प्रशासनिक सुधारों की इस कड़ी में मुख्यमंत्री ने एक कदम और आगे बढ़ाते हुए सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के दफ्तरों को 'वर्क फ्रॉम होम' यानी घर से काम करने की कार्यसंस्कृति को फिर से बढ़ावा देने की महत्वपूर्ण सलाह दी है। इसके अलावा समाज में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से सप्ताह में किसी भी एक दिन को अनिवार्य रूप से 'नो व्हीकल डे' के रूप में आयोजित करने का आग्रह किया गया है, जिसके तहत उस दिन लोग अपने वाहनों का त्याग करेंगे। इसी के साथ एक और अनूठा प्रशासनिक निर्देश भी सामने आया है जिसके तहत प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालयों की कैंटीन में स्वास्थ्य और पर्यावरण के दृष्टिकोण से पाम ऑयल के इस्तेमाल को भी न्यूनतम करने को कहा गया है।
पटना हाट में फायरिंग, कारोबारी को मार डाला गया
15 May, 2026 11:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना: बिहार की राजधानी में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वे कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। गुरुवार की रात शहर के अति-व्यस्त व्यापारिक केंद्र मुसल्लहपुर हाट में एक सनसनीखेज वारदात को अंजाम देते हुए बदमाशों ने मसाला व्यवसायी पिंटू कुमार की बेरहमी से हत्या कर दी। अपराधियों ने इस दुस्साहसिक घटना के लिए बिजली विभाग द्वारा पहले से घोषित ब्लैक आउट के समय को चुना ताकि घने अंधेरे की आड़ में वे अपने मंसूबों को अंजाम दे सकें। जैसे ही क्षेत्र की बिजली वापस आई, वैसे ही कारोबारी के काउंटर पर उनका खून से लथपथ शव देखकर पूरे बाजार में हड़कंप मच गया।
साइलेंसर वाली पिस्टल से पिता के सामने वारदात
वारदात पटना सिटी के सुल्तानगंज थाना क्षेत्र की है जहाँ अपराधी पूरी तैयारी के साथ आए थे। उन्होंने पिंटू कुमार के सिर में सटाकर साइलेंसर लगी पिस्टल से गोली दागी ताकि बाजार के शोर और अंधेरे के बीच गोली की आवाज किसी को सुनाई न दे। इस खौफनाक मंजर के दौरान मृतक के बुजुर्ग पिता भी वहीं मौजूद थे जो अपनी आंखों के सामने बेटे को दम तोड़ते देखने के लिए विवश हो गए। आनन-फानन में बदहवास परिजन गंभीर रूप से घायल व्यवसायी को पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर भागे, परंतु वहां तैनात चिकित्सकों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पूर्व के आर्थिक लेन-देन और विवाद पर टिकी तफ्तीश
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन में खलबली मच गई और आनन-फानन में पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। मृतक के परिजनों से शुरुआती पूछताछ में यह बात सामने आई है कि लगभग दो सप्ताह पहले पैसों के लेन-देन को लेकर पिंटू कुमार का कुछ स्थानीय लोगों के साथ गंभीर विवाद हुआ था। पुलिस अब इस आपसी रंजिश और आर्थिक लेन-देन के कोण को मुख्य आधार मानकर अपनी जांच को आगे बढ़ा रही है ताकि हत्या की असली वजह और साजिशकर्ताओं का पर्दाफाश किया जा सके।
सोची-समझी साजिश और ब्लैक आउट का फायदा
मामले की गंभीरता को देखते हुए सिटी एसपी परिचय कुमार ने स्वयं घटना स्थल का मुआयना किया और मातहतों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि ठीक शाम सात बजकर दो मिनट पर इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया जो यह साफ दर्शाता है कि अपराधियों को बिजली कटौती के समय की सटीक जानकारी थी। हालांकि ब्लैक आउट की वजह से प्रत्यक्ष रूप से कोई भी चश्मदीद हमलावरों को नहीं देख पाया, लेकिन पुलिस अब बाजार और आसपास के मार्गों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है ताकि संदिग्धों की पहचान कर उन्हें जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जा सके।
टावर पर आत्महत्या की धमकी, युवक को सुरक्षित उतारा गया
15 May, 2026 11:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दरभंगा: बिहार के दरभंगा जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ बहेड़ी थाना क्षेत्र के हावीडीह गांव में एक युवक जमीन से जुड़े एक कथित झूठे मुकदमे से अपना नाम हटाने की मांग को लेकर मोबाइल टावर पर चढ़ गया। अक्सर पारिवारिक कलह या प्रेम प्रसंग के मामलों में ऐसे कदम उठाने की खबरें आती हैं, लेकिन इस बार मामला कानूनी कार्रवाई से उपजे आक्रोश का था। युवक ने टावर की ऊंचाई से छलांग लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त करने की धमकी दी, जिसके बाद पूरे इलाके में लगभग सात घंटे तक भारी प्रशासनिक और सामाजिक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
झूठे मुकदमे की आशंका और युवक का आक्रोश
हावीडीह गांव के निवासी राजाराम यादव का अट्ठाईस वर्षीय पुत्र अमरजीत यादव इस बात से बेहद क्षुब्ध था कि गांव के एक भूमि विवाद से जुड़े मामले की प्राथमिकी में उसका नाम भी शामिल कर लिया गया था। युवक का यह साफ तौर पर आरोप था कि विपक्षी दल द्वारा उसे एक सोची-समझी साजिश के तहत इस विवाद में घसीटा गया है ताकि उसे जेल भिजवाया जा सके। इसी नाइंसाफी और कानूनी उलझन से घबराकर उसने विरोध का यह आत्मघाती रास्ता चुना और गुरुवार की दोपहर गांव के बीचोबीच स्थित मोबाइल टावर के सबसे ऊपरी हिस्से पर जा बैठा, जिससे ग्रामीणों के बीच हड़कंप मच गया।
मौके पर ग्रामीणों की भीड़ और प्रशासनिक अमले की मुस्तैदी
जैसे ही इस घटना की भनक स्थानीय निवासियों को लगी, वैसे ही टावर के इर्द-गिर्द सैकड़ों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा और युवक के परिजन बदहवास होकर उसे नीचे आने की गुहार लगाने लगे। मामले की संवेदनशीलता और बिगड़ते हालातों को देखते हुए बहेड़ी थाना पुलिस के साथ अंचलाधिकारी धनश्री बाला तुरंत घटना स्थल पर पहुंचे। थानाध्यक्ष सूरज गुप्ता ने लाउडस्पीकर के माध्यम से युवक से संवाद स्थापित करने का प्रयास किया और उसे कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखने को कहा, परंतु युवक अपनी इस मांग पर अड़ा रहा कि जब तक उसका नाम इस मामले से पूरी तरह नहीं हटाया जाता और दोषियों को जेल नहीं भेजा जाता, वह नीचे नहीं आएगा।
गुरु की सीख और लिखित आश्वासन से टला बड़ा हादसा
घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद भी जब प्रशासन को सफलता नहीं मिली, तो युवक के गुरु जटाशंकर झा को विशेष रूप से मौके पर आमंत्रित किया गया। गुरु ने माइक संभालते हुए अपने शिष्य को बेहद आत्मीयता से समझाया, जिसका युवक के मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ा और उसका गुस्सा कुछ शांत हुआ। इसके तुरंत बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच करने और निर्दोष को न फंसाने का एक लिखित आश्वासन युवक को सौंपा, जिसके बाद आखिरकार लगभग सात घंटे की कड़ी जद्दोजहद के अंत में युवक को सुरक्षित रूप से नीचे उतारा जा सका और सभी ने राहत की सांस ली।
दूसरी शादी के बाद मामला गरमा गया: पहली पत्नी के जेवर गायब
15 May, 2026 08:24 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहाँ ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के एक चिकित्सक ने अपनी दूसरी पत्नी और उसके मायके वालों पर घर से कीमती आभूषण समेटकर फरार होने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित डॉक्टर का कहना है कि उन्होंने अपनी पहली पत्नी के निधन के बाद बच्चों की देखरेख और बेहतर भविष्य की उम्मीद में वर्ष 2022 में कोलकाता की एक युवती से निकाह किया था, लेकिन समय के साथ उन्हें सुखद भविष्य के बजाय धोखे और प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। फिलहाल पुलिस ने चिकित्सक की तहरीर पर मामला दर्ज कर लिया है और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
वैवाहिक जीवन में धोखे और प्रताड़ना का खुलासा
चिकित्सक ने अपनी शिकायत में उल्लेख किया है कि शादी के कुछ समय बीतने के बाद ही उनकी पत्नी के व्यवहार में अचानक कड़वाहट आने लगी और वह बच्चों के प्रति बेहद कठोर हो गई। इसी बीच डॉक्टर को इस बात की भनक लगी कि जिस महिला से उन्होंने निकाह किया है, वह पहले से ही विवाहित थी और यह जानकारी उनसे पूरी तरह छिपाई गई थी। बच्चों की परवरिश की खातिर वे सब कुछ सहते रहे, लेकिन स्थिति तब और बिगड़ गई जब उनकी अनुपस्थिति में बच्चों के साथ मारपीट और मानसिक उत्पीड़न का सिलसिला शुरू हो गया।
जेवरात लेकर फरार होने की सोची-समझी साजिश
पीड़ित के अनुसार जब उन्होंने पत्नी की हरकतों की शिकायत उसके मायके वालों से की, तो समाधान होने के बजाय साजिश का नया दौर शुरू हो गया। कोलकाता से आए ससुराल पक्ष के लोगों ने कथित तौर पर सुलह का बहाना बनाया, लेकिन मौका पाकर घर में रखे सभी कीमती सामान और आभूषणों पर हाथ साफ कर दिया। डॉक्टर का आरोप है कि आरोपियों ने उनकी दिवंगत पहली पत्नी के यादगार जेवर और शादी के दौरान मिले अन्य बहुमूल्य आभूषण भी साथ ले गए और बिना किसी सूचना के रातों-रात कोलकाता के लिए रवाना हो गए।
कानूनी कार्रवाई और पुलिसिया तफ्तीश का दौर
घटना के बाद जब पीड़ित ने अपने सामान की वापसी के लिए संपर्क करने का प्रयास किया, तो उन्हें कोलकाता से लगातार धमकियां मिलने लगीं जिससे परेशान होकर उन्होंने कानून की शरण ली। ब्रह्मपुरा थाना प्रभारी विपिन कुमार रंजन ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि डॉक्टर की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और पुलिस की एक टीम साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है। पुलिस अब कोलकाता स्थित महिला के ठिकानों और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि की पड़ताल कर रही है ताकि सच सामने आ सके।
सामाजिक सुरक्षा और वैवाहिक सतर्कता का संदेश
यह घटना समाज के उन वर्गों के लिए एक चेतावनी की तरह है जो जल्दबाजी में या बिना पूर्ण सत्यापन के वैवाहिक संबंध स्थापित कर लेते हैं। डॉक्टर ने अपनी आपबीती में बताया कि कैसे वे कोलकाता के कुछ बिचौलियों के झांसे में आ गए, जिसका परिणाम आज उन्हें आर्थिक और मानसिक क्षति के रूप में भुगतना पड़ रहा है। स्थानीय प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि वैवाहिक अनुबंधों से पहले संबंधित पक्षों की पूरी जानकारी जुटाना अत्यंत आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी जालसाजी और धोखाधड़ी की घटनाओं से बचा जा सके।
30 लाख में MBBS सीट दिलाने का खेल पकड़ा गया, चार आरोपी गिरफ्तार
14 May, 2026 04:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में धांधली करने और एमबीबीएस की सीट दिलाने का झांसा देकर करोड़ों की ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पर्दाफाश किया है, जिसमें कथित मास्टरमाइंड और एक डॉक्टर समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
नीट परीक्षा से ठीक पहले बड़े गिरोह का भंडाफोड़
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक गुप्त सूचना और तकनीकी निगरानी के आधार पर कार्रवाई करते हुए नीट अभ्यर्थियों के साथ धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के मुख्य सरगना संतोष कुमार जायसवाल और उसके तीन अन्य साथियों को दबोच लिया है। पुलिस के मुताबिक यह गिरोह छात्रों और उनके अभिभावकों को मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाने का लालच देकर अपना शिकार बनाता था। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने गाजियाबाद और दिल्ली के विभिन्न इलाकों से करीब 18 छात्रों को आरोपियों के चंगुल से मुक्त कराया है, जिन्हें कथित तौर पर प्रश्न पत्र मुहैया कराने के बहाने अज्ञात स्थानों पर रखा गया था।
फर्जी प्रश्न पत्र और वसूली का काला कारोबार
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि आरोपी पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों और विभिन्न कोचिंग संस्थानों के नोट्स को मिलाकर एक फर्जी प्रश्न पत्र तैयार करते थे ताकि छात्रों को गुमराह किया जा सके। इस काम के लिए गिरोह के सदस्य प्रत्येक परिवार से 20 से 30 लाख रुपये की मोटी रकम मांगते थे और गारंटी के तौर पर उनसे 10वीं व 12वीं की मूल मार्कशीट के साथ-साथ हस्ताक्षर किए हुए खाली चेक भी ले लेते थे। पुलिस ने छापेमारी के दौरान प्रश्न-उत्तर सामग्री के लगभग 149 पन्ने और कई आपत्तिजनक दस्तावेज भी बरामद किए हैं जो आरोपियों की संलिप्तता को पुख्ता करते हैं।
संगठित तरीके से अंजाम दी जाती थी ठगी
पुलिस की पूछताछ में खुलासा हुआ है कि इस गिरोह का प्रत्येक सदस्य एक निर्धारित भूमिका निभाता था ताकि पूरा नेटवर्क बिना किसी बाधा के संचालित हो सके। मास्टरमाइंड संतोष जायसवाल जहां पूरी साजिश का मुख्य संचालक था, वहीं गिरफ्तार किया गया डॉक्टर अखलाक आलम कथित फर्जी प्रश्न पत्र तैयार करने का विशेषज्ञ था। गिरोह के अन्य सदस्य जैसे संत प्रताप सिंह छात्रों के ठहरने और आवास की व्यवस्था देखता था, जबकि विनोद भाई पटेल का काम गुजरात जैसे राज्यों से जरूरतमंद परिवारों को ढूंढकर उन्हें गिरोह के जाल में फंसाना था।
सूरत पुलिस की सूचना और सफल पुलिसिया कार्रवाई
इस पूरे ऑपरेशन की शुरुआत सूरत पुलिस से मिली एक गोपनीय जानकारी के बाद हुई, जिसमें दिल्ली के महिपालपुर इलाके में संदिग्ध गतिविधियों की बात कही गई थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने होटलों और संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर गाजियाबाद के एक फ्लैट तक पहुंची। पुलिस ने सभी बरामद छात्रों को काउंसलिंग के बाद परीक्षा में बैठने की अनुमति दी ताकि उनका शैक्षणिक भविष्य प्रभावित न हो। फिलहाल पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और इस नेटवर्क के अन्य संभावित सदस्यों की तलाश जारी है।
मंदिर में प्रेम की मूरत, 60 की उम्र में प्यार ने जीता दिल
14 May, 2026 04:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कटिहार: बिहार के कटिहार जिले में प्रेम की एक ऐसी अनोखी मिसाल सामने आई है जहां उम्र की तमाम बंदिशों को किनारे रखते हुए एक बुजुर्ग जोड़े ने मंदिर में एक-दूसरे का हाथ थाम लिया और हमेशा के लिए एक-दूजे के हो गए।
सामाजिक चर्चाओं के बीच परवान चढ़ी प्रेम कहानी
मनिहारी प्रखंड की बाघमारा पंचायत में साठ साल के एक बुजुर्ग और उनकी प्रेमिका के बीच के रिश्ते को लेकर पिछले काफी समय से गांव में चर्चाओं का बाजार गर्म था। जब समाज में इस प्रेम प्रसंग को लेकर बातें अधिक होने लगीं, तो मामले को सुलझाने के लिए पंचायत बुलाई गई ताकि किसी विवाद की स्थिति से बचा जा सके। ग्रामीणों और पंचायत सदस्यों ने दोनों को समझाने और सामाजिक मान्यताओं का हवाला देने की कोशिश की, लेकिन प्रेमी जोड़ा अपने फैसले पर पूरी तरह अडिग रहा और उन्होंने समाज के सामने अपने रिश्ते को स्वीकार करने की इच्छा जताई।
पंचायत की सहमति और मंदिर में संपन्न हुआ विवाह
काफी देर तक चली गहमागहमी और आपसी बातचीत के बाद पंचायत ने दोनों के अटूट प्रेम को देखते हुए विवाद खत्म करने का रास्ता निकाला। सामाजिक सहमति और शांति बनाए रखने के उद्देश्य से पंचायत ने दोनों की शादी कराने का निर्णय लिया, जिसके बाद गांव के ही एक मंदिर में पूरे विधि-विधान के साथ विवाह संपन्न कराया गया। बुजुर्ग दूल्हे ने जब अपनी प्रेमिका की मांग में सिंदूर भरा, तो वहां मौजूद ग्रामीणों ने तालियां बजाकर इस जोड़े का स्वागत किया और उन्हें नए जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई अनोखी शादी की तस्वीरें
इस विवाह का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रही हैं, जिसे देखकर लोग हैरान भी हैं और तरह-तरह की दिलचस्प प्रतिक्रियाएं भी दे रहे हैं। इंटरनेट पर लोग इस घटना को सच्चे प्यार की जीत बता रहे हैं, तो कुछ लोग इतनी अधिक उम्र में शादी के फैसले को लेकर अचंभित नजर आ रहे हैं। यह वीडियो अब केवल मनिहारी प्रखंड ही नहीं, बल्कि पूरे कटिहार जिले में कौतूहल का विषय बन गया है और लोग इस जोड़े के साहस की चर्चा कर रहे हैं।
समाज के लिए मिसाल और चर्चा का केंद्र
कटिहार में हुई इस शादी ने यह संदेश दिया है कि प्रेम के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती और यदि इरादे सच्चे हों तो समाज भी अंततः अपनी स्वीकृति दे ही देता है। मंदिर परिसर में मौजूद चश्मदीदों का कहना है कि यह शादी इलाके में लंबे समय तक याद रखी जाएगी क्योंकि इसमें किसी प्रकार का कोई दिखावा नहीं बल्कि केवल आपसी विश्वास और समर्पण दिखाई दिया। वर्तमान में यह पूरी घटना बाघमारा पंचायत के आसपास के गांवों में चर्चा का मुख्य केंद्र बनी हुई है।
दरभंगा में अधिकारियों ने दी CISF गार्ड ऑफ ऑनर के साथ सम्मान
14 May, 2026 12:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दरभंगा: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी गुरुवार को मिथिलांचल की धरती दरभंगा पहुंचे, जहाँ एयरपोर्ट पर उनका भव्य और पारंपरिक स्वागत किया गया। इस अवसर पर बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर, विधायक डॉ. मुरारी मोहन और जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री को पाग, चादर और मखाने की माला पहनाकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री का यह दौरा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे और महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की समीक्षा के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एयरपोर्ट सुरक्षा और सीआईएसएफ को कमान
दरभंगा एयरपोर्ट पहुंचने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वहां की वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था का विस्तृत जायजा लिया। उन्होंने हवाई अड्डे की सुरक्षा को और अधिक चाक-चौबंद बनाने के उद्देश्य से इसकी जिम्मेदारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों को सौंपे जाने के विषय पर उच्चाधिकारियों के साथ गहन विचार-विमर्श किया। इस दौरान सीआईएसएफ की एक टुकड़ी ने मुख्यमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया, जिसके बाद उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यात्रियों की सुरक्षा और हवाई अड्डे की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जानी चाहिए।
विकास परियोजनाओं और एम्स निर्माण की प्रगति
मुख्यमंत्री के इस दौरे का मुख्य केंद्र दरभंगा एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन और बहुप्रतीक्षित एम्स (AIIMS) के निर्माण कार्य की समीक्षा करना था। उन्होंने संबंधित विभागीय अधिकारियों से निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली और स्पष्ट किया कि इन परियोजनाओं का समय पर पूरा होना पूरे उत्तर बिहार के विकास के लिए आवश्यक है। सम्राट चौधरी ने जोर देकर कहा कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता से समझौता किए बिना तय समय सीमा के भीतर सभी तकनीकी बाधाओं को दूर किया जाए ताकि आम जनता को जल्द से जल्द बेहतर स्वास्थ्य और हवाई सेवाएं मिल सकें।
पारंपरिक उद्घाटन और जनप्रतिनिधियों का संवाद
एयरपोर्ट की समीक्षा के पश्चात मुख्यमंत्री ने आयोजित कार्यक्रम में दीप प्रज्वलित कर औपचारिक रूप से समारोह की शुरुआत की। इस दौरान भाजपा और जेडीयू के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ कई प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे, जिनसे मुख्यमंत्री ने क्षेत्र की अन्य स्थानीय समस्याओं और विकास कार्यों पर चर्चा की। उन्होंने सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि मिथिला क्षेत्र का समग्र विकास उनकी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है और दरभंगा को एक प्रमुख आर्थिक व स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
दो महीने की गर्भवती महिला की रहस्यमयी मौत, मां ने उठाया हत्या का सवाल
14 May, 2026 09:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुजफ्फरपुर: जिले के बोचहा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मझौली गांव में एक नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। मृतका की पहचान उन्नीस वर्षीय निशा कुमारी के रूप में हुई है, जिसकी शादी कुछ समय पूर्व ही संतोष कुमार के साथ संपन्न हुई थी। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस ने त्वरित कार्यवाही करते हुए शव को अपने कब्जे में लिया और गहन जांच के लिए मेडिकल कॉलेज भेज दिया है, जबकि इस दुखद घटना के बाद से ही मृतका के मायके में शोक की लहर व्याप्त है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
दहेज की वेदी पर चढ़ी एक और मासूम जान
निशा की मां ने ससुराल पक्ष पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि शादी के बाद से ही उनकी बेटी को निरंतर मानसिक और शारीरिक यातनाएं दी जा रही थीं। परिजनों का दावा है कि ससुराल के लोग दहेज के रूप में एक मोटरसाइकिल की मांग पर अड़े हुए थे और मांग पूरी न होने के कारण अक्सर घर में विवाद की स्थिति बनी रहती थी। मृतका के मायके वालों का कहना है कि उन्होंने अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए कुछ समय की मोहलत मांगी थी, परंतु ससुराल पक्ष ने उनकी एक न सुनी और प्रताड़ना का दौर जारी रखा।
गर्भवती होने के बावजूद बेरहमी और प्रताड़ना
इस पूरे मामले में सबसे हृदयविदारक पहलू यह है कि मृतका दो महीने की गर्भवती थी, लेकिन इसके बावजूद उसके प्रति किसी भी प्रकार की सहानुभूति नहीं दिखाई गई। मृतका की मां ने सीधे तौर पर दामाद और देवर पर मारपीट और उत्पीड़न का आरोप लगाया है। उनका मानना है कि यह आत्महत्या का मामला नहीं बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या है, जिसे अब आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया जा रहा है। परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी बेटी को प्रताड़ित करने वाले दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्यवाही की जाए।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिसिया तफ्तीश पर टिकी निगाहें
बोचहा थाना प्रभारी ने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर विस्तृत छानबीन कर रही है। हालांकि शुरुआती जांच में यह मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन वास्तविकता का पता पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिजनों की ओर से औपचारिक लिखित शिकायत मिलते ही संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर अग्रिम विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
एक साथ तीन थानेदार सस्पेंड, पुलिस विभाग में सख्ती बढ़ी
14 May, 2026 07:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मधेपुरा: जिले के पुलिस कप्तान संदीप सिंह ने कानून व्यवस्था और जनसुनवाई में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। कर्तव्य के प्रति उदासीनता और आम जनता की शिकायतों को नजरअंदाज करने के आरोपों के चलते एसपी ने तीन थानों के प्रभारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। पुलिस अधीक्षक की इस सख्त कार्यवाही का मुख्य उद्देश्य जिले में पुलिसिंग को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और आम जनता के प्रति संवेदनशील बनाना है, ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके और अपराधियों के मन में कानून का भय बना रहे।
लापरवाह थानाध्यक्षों पर अनुशासन का डंडा
निलंबन की इस कार्यवाही की चपेट में भर्राही, बिहारीगंज और पुरैनी थानों के अध्यक्ष आए हैं, जिन्हें तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इन अधिकारियों के विरुद्ध लगातार यह शिकायतें मिल रही थीं कि वे थानों में आने वाले फरियादियों के साथ न केवल उदासीन व्यवहार करते हैं, बल्कि गंभीर मामलों में एफआईआर दर्ज करने में भी अनावश्यक टालमटोल की जाती है। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए जब जिला पुलिस के वरीय अधिकारियों से जांच कराई गई, तो इन थानाध्यक्षों की कार्यशैली में भारी कमियां और अपराध नियंत्रण में ढिलाई की पुष्टि हुई, जिसके परिणाम स्वरूप यह निलंबन आदेश जारी हुआ।
आपराधिक मामलों में शिथिलता और जांच की पुष्टि
तीनों निलंबित अधिकारियों के विरुद्ध विशिष्ट मामलों में गंभीर गड़बड़ियां पाई गई हैं, जिनमें चेन स्नेचिंग, लूट और बैंक डकैती जैसे संगीन अपराधों के प्रति उनकी संवेदनहीनता उजागर हुई है। बिहारीगंज के पूर्व थानाध्यक्ष पर जहां प्राथमिकी दर्ज करने में देरी का दोष सिद्ध हुआ है, वहीं पुरैनी थानाध्यक्ष पर एक व्यवसायी के साथ हुई लूट के मामले में बयान तक दर्ज न करने का गंभीर आरोप लगा है। इसी तरह भर्राही थानाध्यक्ष की कार्यप्रणाली भी बैंक लूट जैसी वारदातों के बाद अपेक्षित सक्रियता न दिखाने के कारण कटघरे में रही। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि इन अधिकारियों ने अपराध रोकने और अपराधियों को पकड़ने की दिशा में पुलिस नियमावली के अनुरूप तत्परता नहीं दिखाई।
पुलिस महकमे को स्पष्ट संदेश और वैकल्पिक व्यवस्था
एसपी संदीप सिंह ने इस कार्यवाही के माध्यम से जिले के समस्त पुलिस बल को यह कड़ा संदेश दिया है कि अपराध नियंत्रण में किसी भी स्तर की कोताही सहन नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि थानों में आने वाले हर पीड़ित की बात गंभीरता से सुनी जानी चाहिए और कानून के दायरे में त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करना अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। वर्तमान में इन तीनों थानों का कामकाज सुचारू रूप से चलाने के लिए जिम्मेदारी अपर थानाध्यक्षों को सौंप दी गई है, जबकि नए और नियमित थानाध्यक्षों की तैनाती के लिए चयन प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है ताकि क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो।
नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा की राह देखी, लेकिन अभी तक कुछ नहीं
14 May, 2026 07:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना: बिहार की सियासत में पिछले एक महीने के भीतर आए भूचाल ने राजनीतिक पंडितों और नीतीश कुमार को दशकों से जानने वाले करीबियों को भी हैरत में डाल दिया है। किसी ने कल्पना नहीं की थी कि 'परिवारवाद' के धुर विरोधी रहे नीतीश कुमार इतनी नाटकीयता के साथ मुख्यमंत्री की कुर्सी त्याग देंगे और अपने बेटे निशांत कुमार के राजनीतिक राजतिलक के साक्षी बनेंगे। 14 अप्रैल को उनके इस्तीफे के साथ ही अप्रत्याशित घटनाक्रमों का जो सिलसिला शुरू हुआ, उसने जेडीयू के भीतर और बाहर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जहाँ अब मुख्य चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि राज्यसभा जाने के फैसले के बदले क्या भाजपा नेतृत्व के साथ किसी विशेष सम्मानजनक पद को लेकर कोई गुप्त समझौता हुआ है।
सत्ता त्याग और राजनीतिक विरासत का हस्तांतरण
नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना महज एक प्रशासनिक निर्णय नहीं था, बल्कि इसे उनकी राजनीतिक विरासत के हस्तांतरण के रूप में देखा जा रहा है। आश्चर्यजनक यह रहा कि तीन सदनों के सदस्य रह चुके नीतीश ने अचानक राज्यसभा जाने की इच्छा जताई और जब तक विधान परिषद से इस्तीफे की अंतिम तारीख नहीं आई, उन्होंने सस्पेंस बनाए रखा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उन्होंने बहुत ही सधे हुए तरीके से खुद को पृष्ठभूमि में धकेला ताकि उनके पुत्र निशांत कुमार के लिए कैबिनेट में जगह और पार्टी में सक्रिय भूमिका का मार्ग प्रशस्त हो सके। बेटे के शपथ ग्रहण समारोह में उनकी उपस्थिति ने उस हिचक को भी समाप्त कर दिया जो दशकों तक उनकी छवि का हिस्सा रही थी।
उपमुख्यमंत्री की मांग और भविष्य की कूटनीति
जब नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने और राज्यसभा की ओर रुख करने का ऐलान किया था, तब जदयू खेमे के भीतर उन्हें देश का उप-प्रधानमंत्री बनाए जाने की मांग ने काफी जोर पकड़ा था। हालांकि वर्तमान में यह मांग सार्वजनिक रूप से भले ही शांत नजर आ रही हो, लेकिन पार्टी के पुराने वफादार अब भी इस उम्मीद में हैं कि केंद्र सरकार में उन्हें कोई अत्यंत प्रभावशाली पोर्टफोलियो या सम्मानजनक ओहदा दिया जाएगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के पीछे जो 'डील' चर्चा में थी, उसका खुलासा आने वाले समय में होगा क्योंकि नीतीश कुमार जैसे कद्दावर नेता को सक्रिय राजनीति से पूरी तरह अलग समझना एक बड़ी भूल साबित हो सकती है।
दिल्ली की राजनीति और भाजपा की रणनीति
राष्ट्रीय स्तर पर नीतीश कुमार का केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के लिए एक बड़ी रणनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि जिस नेता ने वर्षों तक भाजपा के विरुद्ध विपक्षी मोर्चे की अगुवाई की, यदि वह केंद्र में मंत्री के तौर पर प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कार्य करते हैं, तो इससे भाजपा को एक मजबूत मनोवैज्ञानिक बढ़त मिलेगी। इसके साथ ही, नीतीश कुमार को बिहार की सक्रिय राजनीति से दिल्ली स्थानांतरित करने से भाजपा को राज्य में अपने स्वतंत्र आधार विस्तार और नीतीश के प्रभाव क्षेत्र से बाहर निकलने का एक बेहतर अवसर मिल सकता है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और नीतीश की सक्रियता
भले ही सत्ता की कमान अब सम्राट चौधरी के हाथों में है, लेकिन नीतीश कुमार की सक्रियता आज भी शासन और पार्टी के कामकाज में साफ झलकती है। वे न केवल अपने बेटे के मंत्रालय के कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं, बल्कि जदयू कोटे के अन्य मंत्रियों के साथ भी निरंतर संपर्क बनाए हुए हैं। वर्तमान मुख्यमंत्री भी इस बात से भली-भांति परिचित हैं कि नीतीश कुमार का अनुभव और उनकी उपस्थिति सरकार के लिए कितनी महत्वपूर्ण है, इसीलिए दिल्ली प्रवास हो या पटना में वापसी, सम्राट चौधरी शिष्टाचार के नाते नीतीश से परामर्श लेना नहीं भूलते। हालांकि, अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्यसभा में नामांकन के बाद केंद्र की राजनीति में नीतीश कुमार की क्या भूमिका तय होती है।
सीतामढ़ी स्कूल में दिनदहाड़े हमला, छात्र पर जानलेवा हमला
13 May, 2026 04:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सीतामढ़ी। जिले के नानपुर थाना क्षेत्र से एक ऐसी दुस्साहसिक वारदात सामने आई है जिसने शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। यहाँ के नानपुर उत्तरी पंचायत स्थित राजकीय उर्दू मध्य विद्यालय में पढ़ाई के दौरान अपराधियों ने दुस्साहस का परिचय देते हुए एक छात्र पर जानलेवा हमला कर दिया। दिनदहाड़े क्लासरूम में घुसकर की गई इस चाकूबाजी की घटना से न केवल विद्यालय के छात्र और शिक्षक बुरी तरह सहम गए बल्कि पूरे क्षेत्र में दहशत और सनसनी का माहौल व्याप्त हो गया है।
आपसी रंजिश और क्लासरूम में खूनी संघर्ष
इस पूरी वारदात के पीछे बाइक चलाने को लेकर हुआ एक मामूली विवाद बताया जा रहा है जो देखते ही देखते खूनी रंजिश में तब्दील हो गया। जानकारी के मुताबिक मोहम्मद अरहान और आरोपियों के बीच कुछ समय पहले तेज रफ्तार बाइक चलाने को लेकर कहासुनी हुई थी जिसे मन में रखते हुए तीन हमलावरों ने योजनाबद्ध तरीके से स्कूल पर धावा बोला। हमलावर सीधे विद्यालय की पहली मंजिल पर स्थित कक्षा में दाखिल हुए और वहां मौजूद छात्र अरहान पर चाकू से ताबड़तोड़ पांच वार किए जिससे वह लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ा और क्लासरूम अखाड़े में तब्दील हो गया।
पुलिस की मुस्तैदी और दो हमलावरों की गिरफ्तारी
घटना के तुरंत बाद विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने साहस का परिचय देते हुए पुलिस हेल्पलाइन डायल 112 को इसकी जानकारी दी जिसके बाद पुलिस की टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। पुलिस की गाड़ी का सायरन सुनते ही हमलावरों में हड़कंप मच गया और भागने की कोशिश कर रहे दो मुख्य आरोपियों आकाश कुमार और सार्थक कुमार को पुलिस ने रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। हालांकि इनका तीसरा सहयोगी अभिषेक कुमार मौके पर मची अफरातफरी का लाभ उठाकर भागने में सफल रहा जिसकी तलाश में पुलिस की विभिन्न टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।
घायल छात्र की स्थिति और प्रशासनिक कार्यवाही
हमले में गंभीर रूप से घायल मोहम्मद अरहान को आनन-फानन में स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे सीतामढ़ी सदर अस्पताल रेफर कर दिया है। वर्तमान में छात्र का उपचार जारी है और उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है जबकि पुलिस प्रशासन ने घटना की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। थाना अध्यक्ष देवव्रत कुमार के नेतृत्व में पुलिस की टीमें फरार अपराधी की धरपकड़ के लिए सक्रिय हैं और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं।
CM का निर्देश: ऑफिस में वर्क फ्रॉम होम, मंत्री कम गाड़ियों से चलें
13 May, 2026 02:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसाधनों के संरक्षण वाले आह्वान को आगे बढ़ाते हुए आम जनता और सरकारी तंत्र से विशेष अपील की है। उन्होंने नागरिकों से निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन के उपयोग पर बल देने और सरकारी व निजी कार्यालयों में 'वर्क फ्रॉम होम' को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है। प्रधानमंत्री द्वारा पिछले दो दिनों में ईंधन और विदेशी मुद्रा की बचत को लेकर किए गए संदेश के बाद अब बिहार सरकार ने भी संसाधनों के संयमपूर्ण उपयोग की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं, जिसका उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करना और अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगाना है।
मंत्रियों के काफिले में बड़ी कटौती और सादगी की मिसाल
प्रधानमंत्री की अपील का व्यापक असर अब बिहार सरकार के कामकाज और मंत्रियों की जीवनशैली में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। नई सरकार के गठन के बाद मंत्रियों के साथ चलने वाले वाहनों के लंबे काफिले अब बीते दिनों की बात होती जा रहे हैं। पटना सचिवालय में आयोजित हालिया कैबिनेट बैठक के दौरान यह सुखद बदलाव देखने को मिला जहां मंत्रियों ने अपने एस्कॉर्ट और सुरक्षा वाहनों की संख्या में भारी कटौती की है। स्थिति यह रही कि कई प्रमुख मंत्री अलग-अलग गाड़ियों के बजाय एक ही वाहन में सवार होकर बैठक में पहुंचे, जो सरकारी संसाधनों की बचत और टीम वर्क का एक बड़ा संदेश दे रहा है।
मुख्यमंत्री ने स्वयं किया इलेक्ट्रिक वाहनों का चुनाव
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री के विजन को धरातल पर उतारने के लिए स्वयं मिसाल पेश की है और वे अब आधिकारिक कार्यक्रमों में इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग कर रहे हैं। सचिवालय की बैठक हो या पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम, मुख्यमंत्री को पर्यावरण अनुकूल इलेक्ट्रिक गाड़ी में सफर करते देखा गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेट्रोल और डीजल की खपत कम करना न केवल पर्यावरण के लिए जरूरी है बल्कि यह देश की आर्थिक सेहत के लिए भी अनिवार्य है। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से भी आग्रह किया है कि वे सप्ताह में कम से कम एक दिन 'नो व्हीकल डे' का पालन करें ताकि समाज में एक सकारात्मक चेतना जागृत हो सके।
संसाधनों के संरक्षण हेतु प्रधानमंत्री के राष्ट्रव्यापी सुझाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से देशहित में कई महत्वपूर्ण बदलाव अपनाने का आग्रह किया है जिसमें सोने की खरीद और अनावश्यक विदेश यात्राओं को कुछ समय के लिए टालना शामिल है। उनका मानना है कि खाद्य तेल, उर्वरक और ईंधन के आयात पर देश का एक बड़ा हिस्सा खर्च होता है, जिसे स्वदेशी विकल्पों और प्राकृतिक खेती को अपनाकर कम किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने कारपूलिंग और मेट्रो जैसी सुविधाओं के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ यह भी सुझाव दिया है कि भारतीय नागरिक विदेशी मेहमानों को भारत आने के लिए प्रेरित करें। इन कदमों से न केवल विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित होगा बल्कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी नई गति प्राप्त होगी।
8 साल की बच्ची के साथ अपराध, सीतामढ़ी में तनावपूर्ण स्थिति और आगजनी
13 May, 2026 12:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सीतामढ़ी। बिहार के सीतामढ़ी जिले में मानवता को कलंकित करने वाली एक अत्यंत हृदयविदारक घटना प्रकाश में आई है। नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मेला रोड इलाके में एक आठ वर्षीय मासूम बच्ची को दरिंदगी का शिकार बनाया गया है। इस वीभत्स वारदात की खबर फैलते ही संपूर्ण क्षेत्र में सनसनी फैल गई और स्थानीय निवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। पीड़ित परिवार के साथ एकजुट होकर आक्रोशित लोगों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है, जिससे स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है।
सड़क पर उतरकर भारी जन-आक्रोश और यातायात ठप
घटना के विरोध में स्थानीय नागरिकों ने सड़क जाम कर उग्र प्रदर्शन किया और न्याय की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की। आक्रोशित भीड़ ने सड़क के बीचों-बीच टायर जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया और आवाजाही पूरी तरह बाधित कर दी जिससे घंटों तक राहगीरों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों की स्पष्ट मांग है कि दोषी को अविलंब गिरफ्तार कर उसे ऐसी कठोर सजा दी जाए जो समाज में एक मिसाल बन सके क्योंकि इस तरह की घटनाएं सामाजिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
घटनास्थल पर पुलिस की मुस्तैदी और सुरक्षा घेरा
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने भारी पुलिस बल को मौके पर तैनात कर दिया है और पूरे मेला रोड इलाके को एक तरह से पुलिस छावनी में बदल दिया गया है। सूचना मिलते ही नगर थाना पुलिस के साथ-साथ वरीय पुलिस अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे ताकि कानून-व्यवस्था को संभाला जा सके और किसी भी अप्रिय स्थिति को टाला जा सके। अधिकारियों ने उग्र भीड़ से बातचीत कर उन्हें शांत करने का प्रयास किया और आश्वासन दिया कि पुलिस पूरी संवेदनशीलता से कार्य कर रही है तथा शांति बनाए रखने के लिए संवेदनशील बिंदुओं पर अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती कर दी गई है।
आरोपी की धरपकड़ के लिए सघन छापेमारी अभियान
पुलिस प्रशासन ने दोषी को पकड़ने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और नगर थाना अध्यक्ष के नेतृत्व में पुलिस की अलग-अलग विशेष टीमों का गठन किया गया है। आरोपी के संभावित छिपने के ठिकानों पर पुलिस द्वारा लगातार छापेमारी की जा रही है और तकनीकी सर्विलांस के माध्यम से अपराधी की लोकेशन का पता लगाने की कोशिश जारी है। पुलिस ने पीड़िता को तत्काल मेडिकल परीक्षण के लिए अस्पताल भेजते हुए मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है और यह दावा किया है कि जल्द ही अपराधी सलाखों के पीछे होगा।
गुरुजी की झपकी, बच्चों का मैदान में क्रिकेट का मज़ा
13 May, 2026 10:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। जिले के बाढ़ अनुमंडल अंतर्गत इब्राहिमपुर नयाटोला स्थित प्राथमिक विद्यालय से शिक्षा जगत को शर्मसार करने वाली एक तस्वीर सामने आई है, जहाँ गुरुजी की भारी लापरवाही उजागर हुई है। सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे एक वीडियो में स्कूल के प्रभारी शिक्षक कक्षा के भीतर ही गहरी नींद में सोते हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि दूसरी ओर छात्र-छात्राएं अपनी पढ़ाई और कक्षाओं को त्यागकर स्कूल के मैदान में खेलकूद में व्यस्त नजर आ रहे हैं। इस घटना ने सरकारी स्कूलों में दी जा रही शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, जिससे स्थानीय अभिभावकों में गहरा रोष व्याप्त है।
गुरुजी की निद्रा और मैदान में छात्रों का शोर
विद्यालय में शिक्षा के प्रति संवेदनहीनता का आलम यह रहा कि जिस समय बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, उस वक्त वे परिसर में क्रिकेट खेलने में मशगूल थे और उन्हें शिक्षा देने के लिए जिम्मेदार प्रभारी शिक्षक बेंच पर आराम फरमा रहे थे। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने नौनिहालों को उज्जवल भविष्य के सपने लेकर स्कूल भेजते हैं, परंतु शिक्षकों की ऐसी कार्यशैली उनके बच्चों के भविष्य को अंधकार की ओर धकेल रही है। बताया जा रहा है कि जनगणना कार्य में अन्य शिक्षकों की व्यस्तता का लाभ उठाते हुए प्रभारी शिक्षक ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया और शिक्षण कार्य को पूरी तरह ठप कर दिया।
पूर्व के विवाद और शिक्षक का विवादित इतिहास
इब्राहिमपुर नयाटोला के इस विद्यालय के प्रभारी शिक्षक का विवादों से पुराना नाता रहा है और यह पहली बार नहीं है जब उनकी कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठी हैं। इससे पूर्व भी एक वीडियो चर्चा का विषय बना था जिसमें वे एक महिला के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए उन्हें छड़ी से पीटते नजर आए थे, जिस पर शिक्षा विभाग को संज्ञान लेने के लिए पत्र भी लिखा गया था। लगातार एक के बाद एक सामने आ रही इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर बार-बार की गई शिकायतों को नजरअंदाज किए जाने के कारण ही शिक्षक के हौसले बुलंद हैं और वे नियमों को ताक पर रखकर अपनी मनमानी कर रहे हैं।
ग्रामीणों का आक्रोश और साक्ष्य के रूप में वीडियो
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि स्कूल में पढ़ाई का स्तर लंबे समय से गिरा हुआ है और कई बार मौखिक चेतावनी देने के बाद भी जब सुधार नहीं हुआ, तो उन्होंने खुद इस सच्चाई को उजागर करने का निर्णय लिया। ग्रामीणों ने ही चुपके से प्रभारी शिक्षक की सोते हुए वीडियो बनाई ताकि वे प्रशासन के सामने ठोस प्रमाण प्रस्तुत कर सकें। इस वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद अब पूरे क्षेत्र में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली की आलोचना हो रही है और लोग मांग कर रहे हैं कि केवल कागजी खानापूर्ति करने के बजाय ऐसे शिक्षकों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
विभागीय जांच और कार्रवाई का आश्वासन
बाढ़ के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अमित कुमार ने इस गंभीर मामले की पुष्टि करते हुए कहा है कि विद्यालय प्रबंधन और संबंधित शिक्षक के विरुद्ध पूर्व में भी कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं। अब साक्ष्य के तौर पर वीडियो सामने आने के बाद विभाग ने इसे अत्यंत गंभीरता से लिया है और मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकारी ड्यूटी के दौरान इस तरह की अनुशासनहीनता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी पाए जाने पर शिक्षक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
पटना पुलिस का एनकाउंटर, दो कुख्यात अपराधी घायल, शहर में दहशत
13 May, 2026 08:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार की राजधानी से सटे बिहटा इलाके में मंगलवार की देर रात पुलिस और अपराधियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में दो कुख्यात बदमाशों को दबोच लिया गया। आनंदपुर बांध के समीप हुई इस कार्रवाई में एसटीएफ और अपराधियों के बीच कई राउंड गोलियां चलीं, जिसमें विदेशी राय और पप्पू राय नामक दो इनामी अपराधी घायल हो गए। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि ये बदमाश किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की साजिश रच रहे हैं, जिसके बाद की गई घेराबंदी में दोनों के पैरों में गोलियां लगीं और उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
एसटीएफ की घेराबंदी और आधी रात का एनकाउंटर
पटना एसटीएफ को सटीक इनपुट मिला था कि कुख्यात विदेशी राय और पप्पू राय बिहटा के आनंदपुर बांध क्षेत्र में छिपे हुए हैं, जिसके बाद विशेष टीम ने इलाके को चारों तरफ से सील कर दिया। खुद को घिरा देख अपराधियों ने पुलिस बल पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभाला और आत्मरक्षार्थ गोलियां चलाईं। इस मुठभेड़ में दोनों तरफ से हुई गोलीबारी के बीच अपराधियों के भागने के मंसूबे नाकाम हो गए और वे पुलिस की गोली का शिकार होकर जमीन पर गिर पड़े।
कुख्यात शूटरों की गिरफ्तारी और गंभीर आपराधिक इतिहास
पकड़े गए दोनों अपराधियों का रिकॉर्ड बेहद खौफनाक रहा है और वे पटना सहित आसपास के जिलों में सुपारी किलर के रूप में सक्रिय थे। इन बदमाशों पर हत्या, लूट, डकैती और रंगदारी के दर्जनों गंभीर मामले दर्ज हैं, जिसके कारण पुलिस लंबे समय से इनकी सरगर्मी से तलाश कर रही थी। विदेशी राय और पप्पू राय की गिरफ्तारी को पुलिस प्रशासन एक बड़ी उपलब्धि मान रहा है क्योंकि इनके बाहर रहने से क्षेत्र में व्यापारियों और आम लोगों के बीच दहशत का माहौल बना हुआ था।
घायल अपराधियों का उपचार और पुलिस की सख्त निगरानी
मुठभेड़ के बाद घायल अवस्था में दोनों बदमाशों को तत्काल बिहटा के स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें पटना एम्स रेफर कर दिया गया। फिलहाल अस्पताल के वार्ड को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है ताकि उपचार के दौरान सुरक्षा में कोई चूक न हो। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी स्वयं पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं और आरोपियों के स्वास्थ्य में सुधार होते ही उन्हें न्यायिक हिरासत में लेकर पूछताछ की जाएगी।
अपराध मुक्त अभियान और भविष्य की कार्रवाई
इस सफल एनकाउंटर के बाद पुलिस के उच्चाधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और साक्ष्य जुटाए हैं ताकि अदालत में आरोपियों के खिलाफ मजबूत पैरवी की जा सके। प्रशासन का कहना है कि राजधानी और उसके सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय गिरोहों के खिलाफ यह अभियान निरंतर जारी रहेगा और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। इस कार्रवाई से स्थानीय जनता ने राहत की सांस ली है और पुलिस अब इनके अन्य साथियों और हथियारों के स्रोत का पता लगाने में जुटी है।
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