बिहार-झारखण्ड
आज आखिरी दिन, राबड़ी देवी का आवास रहेगा या खाली होगा? टकराव के आसार
15 Jun, 2026 04:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी के आधिकारिक निवास को लेकर चल रहा सियासी गतिरोध अब चरम पर पहुंच गया है। राजधानी पटना के प्रतिष्ठित '10 सर्कुलर रोड' स्थित इस बंगले को खाली करने के लिए शासन और जिला प्रशासन द्वारा तय की गई 15 दिनों की मुहलत आज यानी 15 जून को खत्म हो रही है। इस समयसीमा के समाप्त होने के साथ ही राजनीतिक गलियारों में यह सुगबुगाहट तेज हो गई है कि लालू-राबड़ी परिवार इस आवास को छोड़ देगा या फिर इस मुद्दे पर सूबे की राजनीति में कोई नया घमासान शुरू होगा।
प्रशासनिक नोटिस और नए बंगले का आवंटन
भवन निर्माण विभाग की ओर से बीते 30 मई को एक आधिकारिक नोटिस जारी कर पूर्व मुख्यमंत्री को दो सप्ताह के भीतर यह बंगला खाली करने का हुक्म दिया गया था। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, राबड़ी देवी को नेता प्रतिपक्ष की हैसियत से '39 हार्डिंग रोड' पर एक नया सरकारी बंगला काफी समय पहले ही अलॉट किया जा चुका है। नियमों के तहत नया ठिकाना मिलने के बाद पुराने आवास को छोड़ देना चाहिए था, लेकिन '10 सर्कुलर रोड' को खाली नहीं किए जाने की वजह से अब यह सस्पेंस गहरा गया है कि प्रशासन आज क्या रुख अपनाएगा।
मुख्यमंत्री का सख्त रुख और लोकतांत्रिक दुहाई
इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी कड़ा रुख अख्तियार करते हुए बिना नाम लिए राजद नेतृत्व पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने सार्वजनिक मंच से साफ शब्दों में कहा कि लोकतंत्र में किसी भी सरकारी बंगले को निजी बपौती नहीं माना जा सकता और हर किसी को नियमों के दायरे में आना ही होगा। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोगों को यह भ्रम है कि उनसे उनका सरकारी घर कभी वापस नहीं लिया जा सकता, लेकिन उन्हें यह याद रखना चाहिए कि देश में राजतंत्र खत्म हो चुका है और कानून सबके लिए बराबर है, इसलिए आवास तो खाली करना ही पड़ेगा।
आर-पार के मूड में पूर्व मुख्यमंत्री और पुलिस की दस्तक
दूसरी तरफ, इस प्रशासनिक सख्ती के सामने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भी बगावती तेवर अपनाते हुए सीधे मुख्यमंत्री को चुनौती दे डाली थी। उन्होंने दोटूक लहजे में कहा था कि सरकार चाहे तो घर खाली कराने के लिए अपनी फौज भेज दे, वह खुद से इसे खाली नहीं करेंगी। इस तीखे बयान के बाद सचिवालय डीएसपी डॉ. अन्नू ने तत्काल राबड़ी आवास पहुंचकर उनसे मुलाकात की थी। माना जा रहा है कि पुलिस अधिकारी ने कानून-व्यवस्था की स्थिति को भांपते हुए उन्हें शांतिपूर्वक नया बंगला स्वीकार करने की समझाइश दी थी, जिसके बाद आज की कार्रवाई पर पूरे सूबे की निगाहें टिकी हैं।
महाधिवक्ता के इस्तीफे की चर्चा के बीच झारखंड में राजनीतिक घमासान
15 Jun, 2026 01:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रांची। झारखंड में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल के बीच राज्य के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) राजीव रंजन के इस्तीफे की खबरों ने तूल पकड़ लिया है। इस घटनाक्रम को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) नीत सरकार पर तीखा हमला बोला है और राज्य में संवैधानिक पदों की गरिमा के साथ 'म्यूजिकल चेयर' का खेल खेलने का आरोप लगाया है। भाजपा का कहना है कि इस सरकार में किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का भविष्य सुरक्षित नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, राजीव रंजन ने अपना इस्तीफा मुख्य सचिव को सौंप दिया था, हालांकि इस पर महाधिवक्ता या सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या बयान नहीं आया है। राजीव रंजन साल 2020 से, यानी मौजूदा गठबंधन सरकार के गठन के समय से ही इस पद पर बने हुए थे।
विपक्ष ने सरकार को घेरा और श्वेत पत्र की मांग की
इस पूरे मामले पर विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि सरकार चाहे इस इस्तीफे को स्वेच्छा से लिया गया फैसला बताए या दबाव का परिणाम, राज्य की जनता असलियत को अच्छी तरह समझ रही है। उन्होंने सरकार से महाधिवक्ता के पूरे कार्यकाल पर एक श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। विपक्ष का तर्क है कि अगर उनका कार्यकाल बेहतर था तो उन्हें हटाने की नौबत क्यों आई, और अगर उनका काम संतोषजनक नहीं था तो उन्हें इतने लंबे समय तक इस महत्वपूर्ण पद पर क्यों बनाए रखा गया।
रोहितश्य रॉय की नए महाधिवक्ता के रूप में नियुक्ति
राजीव रंजन के इस्तीफे के बाद राज्य सरकार ने वरिष्ठ अधिवक्ता रोहितश्य रॉय को झारखंड का नया महाधिवक्ता नियुक्त किया है, जिसकी अधिसूचना देर शाम जारी कर दी गई। विधि विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 165(1) के तहत राज्यपाल ने पूर्व महाधिवक्ता का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। नए महाधिवक्ता रोहितश्य रॉय झारखंड उच्च न्यायालय के बेहद अनुभवी और प्रतिष्ठित वकीलों में शुमार हैं। वे लंबे समय से संवैधानिक, दीवानी, सेवा संबंधी मामलों के साथ-साथ रिट याचिकाओं और सिविल विवादों में सरकार व अन्य पक्षों की पैरवी करते रहे हैं।
क्या होती है महाधिवक्ता की भूमिका
महाधिवक्ता का पद राज्य सरकार के भीतर सर्वोच्च कानूनी सलाहकार का होता है। उनका मुख्य कार्य उच्च न्यायालय और अन्य कानूनी मंचों पर राज्य सरकार का पक्ष मजबूती से रखना है। इसके अलावा, राज्य की नीतियों को तैयार करने, विधायी प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से चलाने और जटिल संवैधानिक व कानूनी मामलों में सरकार को उचित परामर्श देने में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। प्रशासनिक और कानूनी नजरिए से इस बड़े बदलाव को राज्य के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
मगध को मिलेगी विकास की नई रफ्तार, खिजरसराय में बनेगा हाईटेक टेक्नोलॉजी सेंटर
15 Jun, 2026 11:34 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गयाजी । मगध क्षेत्र के युवाओं के लिए सोमवार का दिन एक नया इतिहास रचने जा रहा है। जिले के खिजरसराय प्रखंड के अंतर्गत आने वाले देवांग में लगभग 200 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट से तैयार होने वाले हाई-टेक टेक्नोलॉजी सेंटर का भूमिपूजन सूबे के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा किया जाएगा। इस बड़े प्रोजेक्ट को इलाके में रोजगार के नए साधन जुटाने, युवाओं के कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। शिलान्यास और भूमिपूजन की इस औपचारिक प्रक्रिया को पूरा करने के बाद मुख्यमंत्री वहां उपस्थित एक विशाल जनसभा को भी संबोधित करेंगे।
तकनीकी कौशल को बढ़ावा और युवाओं के पलायन पर रोक
लंबे समय से बड़े औद्योगिक और तकनीकी संस्थानों की कमी का सामना कर रहे मगध संभाग के लिए यह केंद्र एक बड़ी सौगात माना जा रहा है। इस अत्याधुनिक सेंटर के चालू होने से स्थानीय छात्र-छात्राओं को एडवांस टेक्निकल ट्रेनिंग, नए स्टार्टअप शुरू करने और स्वरोजगार के बेहतरीन मौके मिलेंगे। इलाके के लोगों का कहना है कि रोजगार के अभाव में यहां के युवाओं को मजबूरन दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब घर के पास ही उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और काम मिलने से इस पलायन पर काफी हद तक लगाम लग सकेगी और स्थानीय स्तर पर ही एक कुशल वर्कफोर्स तैयार होगी।
भव्य पंडाल और सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम
मुख्यमंत्री के इस वीआईपी कार्यक्रम को भव्य रूप देने के लिए जिला प्रशासन ने बड़े पैमाने पर तैयारियां की हैं। कार्यक्रम के आयोजन के लिए करीब 90 हजार वर्ग मीटर के विशाल भूभाग में एक भव्य पंडाल का निर्माण किया गया है, जिसमें हजारों आम नागरिकों के बैठने की उत्तम व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही पंडाल परिसर में पीने के पानी, अस्थाई मेडिकल कैंप, शौचालयों और आपातकालीन सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए गए हैं। पूरे आयोजन स्थल को बेहद खूबसूरत ढंग से सजाया-संवारा गया है।
वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी और यातायात व्यवस्था में बदलाव
मुख्यमंत्री के दौरे के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस बल पूरी तरह से हाई अलर्ट पर हैं। सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक न हो, इसके लिए मगध प्रमंडल के कमिश्नर, आईजी, जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) और एसएसपी समेत तमाम आला अधिकारियों ने खुद कार्यक्रम स्थल का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया है। कार्यक्रम के दौरान शहर और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए पुलिस द्वारा विशेष सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है और आम जनता की सहूलियत के लिए कई रूटों को डायवर्ट करते हुए वैकल्पिक मार्ग तय किए गए हैं।
चांडिल में पुलिसकर्मी पर कार्रवाई, आदिवासी महिला से दुर्व्यवहार के आरोप में ASI निलंबित
15 Jun, 2026 10:26 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सरायकेला। सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रुचाप गांव में एक आदिवासी महिला के साथ अभद्रता करने और घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। जिले की पुलिस अधीक्षक (एसपी) निधि द्विवेदी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित एक्शन लिया है और आरोपी चांडिल थाने के एएसआई यमुना राम को सस्पेंड कर दिया है। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था, जिसके बाद यह अनुशासनात्मक कदम उठाया गया।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद एक्शन
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो इंटरनेट पर वायरल होने के बाद सरायकेला-खरसावां जिला पुलिस तुरंत हरकत में आई। एसपी निधि द्विवेदी ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सबसे पहले आरोपी एएसआई यमुना राम को लाइन हाजिर करते हुए सरायकेला पुलिस केंद्र भेज दिया था। इसके बाद उच्चाधिकारियों द्वारा मामले की पूरी गहनता से जांच करवाई गई। विभागीय जांच रिपोर्ट में आए तथ्यों के आधार पर दोषी पुलिस पदाधिकारी की कार्यशैली को गलत पाया गया, जिसके फलस्वरूप उन्हें तत्काल प्रभाव से नौकरी से सस्पेंड कर दिया गया है।
विभागीय जांच और कड़े रुख की चेतावनी
पुलिस प्रशासन की ओर से इस कार्रवाई के बाद एक स्पष्ट संदेश दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले की विभागीय जांच अभी पूरी तरह बंद नहीं हुई है बल्कि नियमों के तहत आगे भी जारी रहेगी। पुलिस विभाग ने साफ तौर पर कहा है कि जनता के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार, अमानवीय कृत्य या नियम विरुद्ध कार्यशैली को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी कर्मियों पर आगे भी ऐसी ही सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आरोपी एएसआई पर मारपीट और बदसलूकी का आरोप
पूरा मामला तब उजागर हुआ जब रुचाप गांव की रहने वाली सोमवारी मुंडा नामक महिला ने पुलिस अधीक्षक और एसडीपीओ को लिखित शिकायत दी। पीड़िता ने अपने आवेदन में बताया कि एएसआई यमुना राम उनके भांजे बलराम सिंह मुंडा को हिरासत में लेने के लिए गांव पहुंचे थे। जब महिला ने इसका विरोध किया तो पुलिस अधिकारी ने उनके साथ गाली-गलौज की और लाठी से उनकी पिटाई कर दी। महिला का आरोप है कि इस झड़प और मारपीट के दौरान उनके कपड़े भी फट गए और उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई गई। इस घटना का वीडियो जैसे ही लोगों के बीच पहुंचा, यह पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया, जिसके बाद रविवार को आरोपी एएसआई के निलंबन के आदेश जारी कर दिए गए।
रेलवे स्टेशन उपद्रव मामला: 6 आरोपी गिरफ्तार, फरार अभ्यर्थियों की तलाश में छापेमारी
15 Jun, 2026 10:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार में मद्य निषेध सिपाही भर्ती परीक्षा में शामिल होने जा रहे परीक्षार्थियों ने पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर भारी बवाल काटा। इस दौरान उग्र अभ्यर्थियों ने जमकर पत्थरबाजी की, जिससे स्टेशन परिसर स्थित कई दुकानों और कार्यालयों के शीशे चकनाचूर हो गए। रेलवे और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने तथा इस उपद्रव को अंजाम देने के आरोप में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 6 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है, साथ ही इस मामले में एफआईआर भी दर्ज कर ली गई है।
स्पेशल ट्रेनों की मांग को लेकर रेल ट्रैक किया जाम
घटनाक्रम की जानकारी देते हुए पुलिस अधिकारियों ने बताया कि देर रात करीब 12 बजे पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर परीक्षा देने जा रहे छात्रों की भारी भीड़ जमा थी। उस वक्त स्टेशन पर सीमांचल एक्सप्रेस और मधुबनी समर स्पेशल ट्रेनें खड़ी थीं, लेकिन अभ्यर्थी अपनी परीक्षा छूटने के डर से प्रशासन से दो और अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनें चलाने की मांग करने लगे। मांग के अनुसार प्रशासन ने करीब 2 बजे तक अतिरिक्त ट्रेन की व्यवस्था भी करा दी, लेकिन इसके बाद भी प्रदर्शनकारी शांत नहीं हुए। उग्र हुई भीड़ ने रेलवे ट्रैक पर उतरकर सीमांचल एक्सप्रेस, मधुबनी समर स्पेशल, परीक्षा स्पेशल और एक मालगाड़ी को जबरन रोक दिया और पटरी पर बैठकर परीक्षा केंद्रों को गृह जिलों में आवंटित करने या पूरी परीक्षा को ही स्थगित करने की मांग पर अड़ गए।
मैराथन समझाइश रही बेअसर और अचानक भड़की हिंसा
रेलवे ट्रैक जाम होने की सूचना मिलते ही जीआरपी, आरपीएफ, जिला प्रशासन और पटना के डीएम सहित कई थानों की पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गई। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने करीब चार घंटे से अधिक समय तक प्रदर्शनकारियों को समझाने और ट्रेनों से रवाना होने की मैराथन कोशिशें कीं, लेकिन उपद्रवी मानने को तैयार नहीं थे। इसी बीच भीड़ में शामिल कुछ शरारती तत्वों ने अचानक पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों पर भारी पथराव शुरू कर दिया। इस हिंसक हमले में कई पुलिसकर्मी और पदाधिकारी चोटिल हो गए। आम यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को काबू में करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा, जिसके तहत आंसू गैस के 8 गोले दागे गए और हवाई फायरिंग भी करनी पड़ी, तब जाकर भीड़ को खदेड़ा जा सका।
परीक्षा रद्द कराने की साजिश और पुलिसिया कार्रवाई
जांच में सामने आया है कि इस हंगामे के पीछे कुछ शरारती तत्वों की सोची-समझी मंशा थी। अधिकारियों के अनुसार, भीड़ में मौजूद कुछ लड़के जानबूझकर यह माहौल बना रहे थे कि यदि पहली पाली की परीक्षा छूटती है, तो दूसरी पाली की परीक्षा भी नहीं होने दी जानी चाहिए और हंगामा खड़ा कर पूरी परीक्षा को ही निरस्त करा दिया जाए। अधिकारियों के बार-बार यह भरोसा दिलाने के बावजूद कि किसी की परीक्षा नहीं छूटेगी, उपद्रवियों ने हिंसा का रास्ता चुना। फिलहाल पुलिस ने मौके से 6 आरोपियों को दबोच लिया है और सीसीटीवी व वीडियो फुटेज के आधार पर अन्य दंगाइयों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है। सुबह करीब 6:20 बजे तक स्थिति पूरी तरह सामान्य कर सभी ट्रेनों को रवाना कर दिया गया।
केंद्र सरकार ने 33 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को डीजी पद पर किया इम्पैनल, बिहार कैडर के चार अधिकारियों को बड़ी जिम्मेदारी की संभावना
14 Jun, 2026 06:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। केंद्र सरकार की कैबिनेट नियुक्ति समिति ने शुक्रवार, 12 जून 2026 को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत देशभर के 33 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को महानिदेशक (डीजी) या उसके समकक्ष पदों पर इम्पैनलमेंट की मंजूरी प्रदान की गई है। सरकार का यह कदम प्रशासनिक दक्षता को मजबूत करने और शीर्ष सुरक्षा पदों पर अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। इस सूची में बिहार कैडर का विशेष दबदबा देखने को मिला है। दिल्ली में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत बिहार कैडर के चार वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का नाम शीर्ष प्राथमिकता में शामिल किया गया है। ये अधिकारी केंद्रीय सुरक्षा व्यवस्था में राज्य की मजबूत प्रशासनिक पहचान का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, सूची में शामिल सभी चार अधिकारी 1995 बैच के अनुभवी आईपीएस अधिकारी हैं। इनमें जग मोहन और पंकज कुमार दराद प्रमुख नाम हैं, जिन्होंने बिहार में कई महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। इसके अलावा बिहार कैडर की वरिष्ठ महिला आईपीएस अधिकारी आर. मलारविजी और सुशील मानसिंह खोपड़े का नाम भी इस सूची में शामिल है। इम्पैनलमेंट के बाद ये सभी अधिकारी भविष्य में केंद्रीय सुरक्षा बलों, खुफिया एजेंसियों या अन्य प्रमुख केंद्रीय संस्थानों में महानिदेशक (डीजी) या समकक्ष पदों पर नियुक्त किए जा सकेंगे।
बिहार में प्रेशर हॉर्न पर सख्ती: अवैध हॉर्न लगाने वालों पर कार्रवाई, दुकानों पर भी होगी छापेमारी
14 Jun, 2026 05:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार में अब प्रेशर हॉर्न और मल्टी-ट्यून्ड हॉर्न लगाने वाले वाहन मालिकों के खिलाफ परिवहन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। राज्यभर में विशेष जांच अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है, जिसके तहत ऐसे हॉर्न का उपयोग करने वाले वाहनों के साथ-साथ उन्हें बेचने वाले दुकानदारों पर भी कार्रवाई की जाएगी। परिवहन विभाग के अनुसार, अवैध हॉर्न की बिक्री और उपयोग पर छापेमारी कर उन्हें जब्त किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि प्रेशर हॉर्न और मल्टी-ट्यून्ड हॉर्न ध्वनि प्रदूषण बढ़ाने के साथ-साथ सड़क सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करते हैं। इस संबंध में परिवहन सचिव राज कुमार ने सभी जिलों के जिला परिवहन पदाधिकारियों को विशेष जांच और प्रवर्तन अभियान चलाने का निर्देश दिया है। साथ ही नगर आयुक्तों को भी अपने वाहनों से ऐसे हॉर्न हटाने के आदेश जारी किए गए हैं। अभियान के तहत स्कूल वाहनों और अन्य सार्वजनिक वाहनों की भी सघन जांच की जाएगी। यदि किसी वाहन में प्रेशर या उच्च तीव्रता वाले मल्टी-ट्यून्ड हॉर्न पाए जाते हैं, तो मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 190(2) के तहत कार्रवाई की जाएगी। परिवहन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसे हॉर्न का उपयोग दंडनीय अपराध है। विभाग ने वाहन चालकों और मालिकों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और ध्वनि प्रदूषण व यातायात सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अवैध हॉर्न का उपयोग न करें।
बिहार में ई-चालान न भरने वालों पर सख्ती: 6 महीने बाद वाहन ब्लैकलिस्ट, लाइसेंस-रजिस्ट्रेशन रद्द तक की कार्रवाई संभव
14 Jun, 2026 04:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार परिवहन विभाग ने यातायात नियमों का उल्लंघन कर ई-चालान की राशि जमा नहीं करने वाले वाहन मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का फैसला लिया है। नए निर्देशों के अनुसार, यदि कोई वाहन मालिक निर्धारित समय सीमा यानी छह महीने के भीतर चालान का भुगतान नहीं करता है, तो उसके वाहन को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। इसके अलावा, ऐसे मामलों में वाहन का रजिस्ट्रेशन और चालक के ड्राइविंग लाइसेंस को रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। विभाग का कहना है कि ई-चालान व्यवस्था के बावजूद बड़ी संख्या में लोग जुर्माना भरने में लापरवाही कर रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, केवल नालंदा जिले में ही हजारों वाहनों पर करोड़ों रुपये का जुर्माना लंबित है। विभाग ने ऐसे वाहनों की सूची तैयार कर निगरानी तेज कर दी है। ब्लैकलिस्ट होने पर वाहन मालिक को कई समस्याओं का सामना करना पड़ेगा, जैसे दस्तावेजों का नवीनीकरण, वाहन ट्रांसफर और बिक्री पर रोक तथा ऑनलाइन परिवहन सेवाओं का बंद हो जाना। परिवहन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे समय पर ई-चालान का भुगतान करें, ताकि आगे किसी कानूनी और प्रशासनिक परेशानी से बचा जा सके।
पटना में बवाल ऐसा कि रेल आईजी को गन निकालकर संभालना पड़ा मोर्चा
14 Jun, 2026 03:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। राजधानी पटना के पाटलिपुत्र स्टेशन पर रविवार की सुबह-सुबह हुए भारी बवाल से पूरा स्टेशन परिसर दहल उठा। मद्य निषेध विभाग भर्ती परीक्षा में शामिल होने आए सैकड़ों छात्रों का गुस्सा इस कदर फूटा कि उन्होंने न सिर्फ रेलवे ट्रैक को जाम कर दिया, बल्कि ट्रेनों के ऊपर चढ़कर जमकर हंगामा किया। उग्र छात्रों ने स्टेशन परिसर पर भारी रोड़ेबाजी भी की, जिससे वहां मौजूद आम यात्रियों में दहशत फैल गई। हालात इस कदर बेकाबू हो गए कि खुद रेल आईजी को हाथ में गन लेकर मोर्चा संभालना पड़ा।
इस पूरे बवाल की मुख्य वजह ट्रेनों की कमी और उनके परिचालन में हुई देरी को बताया जा रहा है। दरअसल, राज्य के कोने-कोने से सैकड़ों की संख्या में अभ्यर्थी मद्य निषेध विभाग की भर्ती परीक्षा में शामिल होने के लिए पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर जुटे थे। छात्र परीक्षा केंद्रों पर समय से पहुंचने के लिए ट्रेनों का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच ट्रेन के विलंब होने की सूचना मिलते ही अभ्यर्थियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। पटना के जिलाधिकारी डॉक्टर त्यागराजन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि प्रशासन और रेलवे की ओर से अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए विशेष ट्रेनों की व्यवस्था की गई थी। दो स्पेशल ट्रेनें पहले से ही स्टेशन पर मौजूद भी थीं। वहीं, आईजी जीतेंद्र राणा ने बताया कि पहली पाली की परीक्षा में शामिल होने वाले कुछ अभ्यर्थियों को समय पर परीक्षा केंद्र न पहुंच पाने की गंभीर चिंता सता रही थी, जिसके कारण अचानक यह विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।गुस्साए छात्र रेलवे ट्रैक पर उतर आए और मांग करने लगे कि उन्हें परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित और समय पर पहुंचाने के लिए तुरंत अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनों का इंतजाम किया जाए। छात्रों के इस ट्रैक जाम और प्रदर्शन की वजह से कई अन्य नियमित ट्रेनों का संचालन पूरी तरह प्रभावित हो गया और रेल सेवा बुरी तरह चरमरा गई। स्टेशन परिसर के पास दुकान चलाने वाले स्थानीय दुकानदार संजय कुमार ने बताया कि परीक्षा देने के लिए बहुत बड़ी संख्या में छात्र पहुंचे थे, लेकिन परीक्षार्थियों की भारी भीड़ के मुकाबले ट्रेनों की संख्या बेहद कम थी, जिससे छात्रों का धैर्य टूट गया। नाराज छात्रों ने एक ट्रेन का रास्ता रोक दिया और उसे आगे नहीं बढ़ने दिया। घटनास्थल पर मौजूद लोगों के मुताबिक, हालात उस वक्त और ज्यादा बिगड़ गए जब प्रशासन की टीम छात्रों को समझाने-बुझाने पहुंची। छात्र किसी भी कीमत पर रेलवे ट्रैक से हटने को तैयार नहीं थे। पुलिस प्रशासन ने पहले उन्हें शांतिपूर्वक हटने की चेतावनी दी, लेकिन जब छात्र नहीं माने तो पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। बल प्रयोग से प्रदर्शनकारी छात्र और भी उग्र हो गए। उग्र छात्रों ने ट्रेन में तोड़फोड़ शुरू कर दी और पूरे स्टेशन परिसर को निशाना बनाकर पथराव (रोड़ेबाजी) शुरू कर दिया।
इसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने और उग्र भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और लाठियां चटकानी पड़ीं। खुद आईजी जीतेंद्र राणा हाथ में गन लेकर मोर्चा संभालते और छात्रों को नियंत्रित करते नजर आए। इस दौरान स्टेशन परिसर में काफी देर तक अफरातफरी और भगदड़ की स्थिति बनी रही, जिससे आम यात्रियों को घंटों तक खौफ के साए में बिताना पड़ा। इस हिंसक हंगामे और पथराव में रेल आईजी समेत कुछ अन्य पुलिसकर्मी भी जख्मी हुए हैं। इस पूरी घटना के बाद पुलिस प्रशासन का कहना है कि छात्रों के इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन में कुछ असामाजिक तत्व घुस आए थे। इन्हीं उपद्रवियों ने प्रदर्शन को हिंसक रूप दिया और माहौल बिगाड़ने की साजिश रची। पुलिस अधिकारियों ने साफ किया है कि स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं। फुटेज के आधार पर इन असामाजिक तत्वों की पहचान की जा रही है और जल्द ही मामला दर्ज कर सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कोडरमा मुआवजा घोटाले की जांच तेज, पूर्व भू-अर्जन पदाधिकारी पर शिकंजा
13 Jun, 2026 01:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोडरमा। कोडरमा-रांची रेल परियोजना के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजा राशि के आवंटन में भारी धांधली और लाभार्थियों से मोटी दलाली वसूलने के मामले में कोडरमा के तत्कालीन जिला भू-अर्जन अधिकारी शारदानंद देव के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, तत्कालीन अधिकारी पर विस्थापितों को मुआवजा बांटने के एवज में 10 से लेकर 25 फीसदी तक का फिक्स कमीशन लेने का गंभीर आरोप है। एसीबी ने अंदेशा जताया है कि इस काली कमाई के जरिए बड़े पैमाने पर आय से अधिक संपत्ति बनाई गई है। वित्तीय विश्लेषण के अनुसार, 1 मार्च 2014 से 31 जनवरी 2016 के बीच अधिकारी की वैध स्रोतों से कुल कमाई महज 16.47 लाख रुपये थी, जबकि इसी दौरान उनका कुल खर्च और निवेश बढ़कर 90.27 लाख रुपये तक पहुंच गया, जो उनकी वास्तविक आय के मुकाबले बेहद ज्यादा है।
पीड़ित महिला की शिकायत पर खुला फर्जीवाड़े का खेल
इस पूरे भ्रष्टाचार की कहानी साल 2017 में तब शुरू हुई, जब रेल परियोजना में जमीन गंवाने वाले ग्रामीणों ने मुआवजा वितरण में धांधली की लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद एसीबी ने प्राथमिक जांच दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। तफ्तीश के दौरान कुश्मा देवी नामक एक पीड़ित ग्रामीण महिला ने चौंकाने वाला आरोप लगाते हुए बताया कि उसे मुआवजे की राशि आवंटित करने के बाद, विभाग के लोगों ने बैंक में खाता खुलवाने का झांसा देकर उससे कई कोरे दस्तावेजों और कागजातों पर दस्तखत करवा लिए थे। बाद में शातिर तरीके से उसके बैंक खाते से एक बड़ी रकम गायब कर दी गई।
परिजनों के बैंक खातों में लाखों का लेन-देन और जमीन की खरीद
एसीबी की वित्तीय जांच में यह बात सामने आई है कि वित्तीय वर्ष 2014-15 के दौरान शारदानंद देव, उनकी पत्नी सुधा देव, कथित पत्नी सुमित्रा देवी सहित अन्य करीबियों के बैंक खातों में 54 लाख रुपये से अधिक की संदिग्ध नकदी जमा कराई गई थी। केवल बैंक लेन-देन ही नहीं, बल्कि इसी समयावधि में इस सिंडिकेट द्वारा परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम पर करीब 20.76 लाख रुपये मूल्य की बेनामी जमीनें भी खरीदी गईं। इसके अलावा आरोपी अधिकारी की पुत्री स्मिता देव के नाम पर भी कई भूखंडों की रजिस्ट्री कराए जाने के पुख्ता प्रमाण जांच टीम के हाथ लगे हैं।
चास में आलीशान तीन मंजिला इमारत और आगामी कानूनी शिकंजा
भ्रष्टाचार की कड़ियों को जोड़ते हुए जांच टीम जब बोकारो के चास इलाके में पहुंची, तो वहां आरोपी अधिकारी का एक आलीशान तीन मंजिला मकान मिला, जिसे बनाने में शुरुआती अनुमान के मुताबिक लगभग 75 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो अब इस अवैध कमीशनखोरी, अकूत अचल संपत्ति और संदिग्ध बैंक लेन-देन के तमाम साक्ष्यों को मजबूत करने में जुटी है। जांच एजेंसी का कहना है कि तमाम सबूतों का मिलान अंतिम दौर में है और जल्द ही इस मामले में संलिप्त तत्कालीन अधिकारी और उनके मददगारों पर गिरफ्तारी सहित कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
85 वर्षीय महिला मृत मिली, हत्या की आशंका से इलाके में हड़कंप
13 Jun, 2026 01:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले के बड़कागांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पंकरी बरवाडीह गांव में शनिवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। यहाँ एक बुजुर्ग महिला की लाश उसके अपने ही घर के भीतर रक्तरंजित हालत में बरामद हुई, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। वारदात की भनक लगते ही बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण घटना स्थल पर एकत्रित हो गए। मृत महिला की पहचान स्वर्गीय चौधरी साव की 85 वर्षीय पत्नी मंगनी के रूप में की गई है। बुजुर्ग महिला का शव अत्यंत संदेहास्पद स्थिति में मिला है और उनके सिर पर किसी भारी वस्तु से किए गए हमले के गहरे जख्म मौजूद हैं, जिसके कारण प्रथम दृष्टया इस मामले को हत्या से जोड़कर देखा जा रहा है।
पुलिस टीम ने संभाला मोर्चा और तकनीकी विशेषज्ञों को बुलाया
स्थानीय निवासियों द्वारा घटना की तत्काल जानकारी दिए जाने के बाद बड़कागांव थाने की पुलिस टीम बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंची और घटनास्थल को अपने नियंत्रण में लेकर तफ्तीश शुरू कर दी। मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा वारदात से जुड़े सूक्ष्म साक्ष्य और सुराग बटोरने के लिए फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट्स (अंगुलियों के निशान लेने वाले विशेषज्ञ) तथा डॉग स्क्वॉड (खोजी कुत्तों के दस्ते) की विशेष टीमों को मौके पर बुलाया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अपराधियों तक पहुंचने के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों और हर मुमकिन पहलू का सहारा लिया जा रहा है ताकि घटना स्थल से कोई भी महत्वपूर्ण सबूत छूटने न पाए।
शव को भेजा गया विच्छेदन गृह, रिपोर्ट के बाद साफ होगी तस्वीर
जांच टीम ने घटना स्थल की बारीकी से कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद बुजुर्ग महिला के शव को अपने कब्जे में ले लिया है और उसे पोस्टमार्टम (शव परीक्षण) के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही इस बात का आधिकारिक और सटीक खुलासा हो सकेगा कि वृद्धा की मौत किन परिस्थितियों में और किस वजह से हुई थी। फिलहाल, पुलिस आपसी रंजिश, लूटपाट और पारिवारिक विवाद सहित सभी संभावित कोणों को ध्यान में रखकर गहनता से सुराग तलाशने में जुटी हुई है।
अस्पताल पहुंचाने की जद्दोजहद में मौत, एंबुलेंस सेवा पर उठे गंभीर सवाल
13 Jun, 2026 12:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जामताड़ा। देश की चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता का एक बेहद हृदयविदारक मामला सामने आया है। समय पर आपातकालीन चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण एक मरणासन्न मरीज को ट्रैक्टर-ट्रॉली पर चारपाई लादकर अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। इस विचलित करने वाली घटना ने सरकारी दावों और आपातकालीन एंबुलेंस सेवाओं की जमीनी हकीकत की पोल खोलकर रख दी है। पूरा वाकया जामताड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली गोपालपुर पंचायत के शहरबेड़ा गांव का है, जहां शुक्रवार 12 जून की रात को मोनू टुडू नामक युवक की अचानक तबीयत बेहद खराब हो गई। उसकी बिगड़ती हालत को देख घबराए परिवार वालों ने तत्काल सरकारी 108 एंबुलेंस सेवा को फोन मिलाया, परंतु आरोप है कि बार-बार मिन्नतें करने और मदद की गुहार लगाने के बाद भी एंबुलेंस गांव नहीं पहुंची।
मजबूर परिजनों ने ट्रैक्टर पर चारपाई रखकर तय किया सफर
जब सिस्टम की तरफ से कोई मदद नहीं मिली और मरीज की स्थिति लगातार नाजुक होती गई, तो असहाय परिजनों और ग्रामीणों ने अपनी तरफ से प्रयास करने का फैसला किया। गांव में मौजूद एक ट्रैक्टर की ट्रॉली पर खटिया बिछाई गई और उस पर बीमार मोनू टुडू को लिटाकर जैसे-तैसे जामताड़ा सदर अस्पताल पहुंचाया गया। दुर्भाग्यवश, एंबुलेंस न मिलने के कारण रास्ते में ही काफी कीमती समय बर्बाद हो चुका था। अस्पताल पहुंचने के तुरंत बाद चिकित्सकों ने मरीज का इलाज शुरू भी किया, लेकिन समय पर प्राथमिक चिकित्सा न मिलने के कारण उपचार के दौरान ही उसने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
चूक की कड़ियों को जोड़ने के लिए सिविल सर्जन ने दिए जांच के निर्देश
इस पूरे गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी यानी सिविल सर्जन डॉ. शिव प्रसाद मिश्रा ने कहा कि यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और इसमें कहां पर लापरवाही हुई है, इसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि जांच दल इस बात की विशेष पड़ताल करेगा कि परिजनों द्वारा किए गए कॉल के बाद भी 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा समय पर क्यों नहीं उपलब्ध हो सकी। इसके लिए कॉल सेंटर के रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे और यदि किसी भी स्तर पर प्रशासनिक या तकनीकी चूक पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
AEDO भर्ती परीक्षा में खेल की परतें खुलीं, जांच एजेंसी ने बताई हैरान करने वाली बात
13 Jun, 2026 12:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा अप्रैल 2026 में स्थगित की गई सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) और सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी भर्ती परीक्षा को लेकर एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला पर्दाफाश हुआ है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की गहन तफ्तीश में यह बात खुलकर सामने आई है कि इस पूरी परीक्षा प्रणाली में बड़े पैमाने पर धांधली की गई थी और पूरा प्रशासनिक तंत्र कथित रूप से परीक्षा माफिया के इशारों पर काम कर रहा था। जांच रिपोर्ट के अनुसार, अभ्यर्थियों के बायोमेट्रिक मिलान के लिए अधिकृत की गई निजी एजेंसी ने रेंडमाइजेशन (यैंडम चयन) के अनिवार्य नियमों को ताक पर रख दिया। नियमों को दरकिनार कर अंतिम पलों में उन बाहरी और अनधिकृत लोगों को परीक्षा केंद्रों पर तैनात कर दिया गया, जिनका नाम आधिकारिक सूची में था ही नहीं। इस घोर लापरवाही ने परीक्षा की शुचिता और पारदर्शिता पर गहरे सवालिया निशान लगा दिए हैं।
परीक्षार्थी ही कर रहे थे बायोमेट्रिक जांच, एजेंसी होगी ब्लैकलिस्ट
जांच एजेंसी ने एक और हैरान करने वाला खुलासा करते हुए बताया कि परीक्षा केंद्रों पर जिन लोगों को बायोमेट्रिक सत्यापन की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उनमें से कई कर्मचारी खुद इसी एईडीओ परीक्षा में बतौर अभ्यर्थी शामिल हो रहे थे। परीक्षा नियमों के तहत ऐसे किसी भी हितधारक को परीक्षा ड्यूटी का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता, इसके बावजूद उन्हें संवेदनशील पदों पर बैठाया गया। इस मामले के सामने आने के बाद जयपुर की बायोमेट्रिक सत्यापन कंपनी 'मेसर्स साईं एजुकेयर प्राइवेट लिमिटेड' के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया है। इस दागी कंपनी को ब्लैकलिस्ट (काली सूची में डालना) करने का एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसे बिहार सरकार के साथ-साथ देश की अन्य सभी प्रमुख परीक्षा आयोजक संस्थाओं को भी भेजा जा रहा है ताकि वे भविष्य में इसके साथ कोई काम न करें।
35 जालसाज गिरफ्तार और जैमर प्रणाली में भी भारी सेंधमारी
इस महाघोटाले को लेकर अब तक मुंगेर, नालंदा, वैशाली, बेगूसराय और नवादा जिलों में पांच अलग-अलग आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें कार्रवाई करते हुए जांच दल ने अब तक 35 आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। पकड़े गए लोगों में बायोमेट्रिक कंपनी के कई तकनीकी कर्मचारी, सुपरवाइजर और जिला को-ऑर्डिनेटर शामिल हैं। इसके अलावा, बेगूसराय, छपरा और नालंदा के केंद्रों से ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए नकल कराए जाने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। ईओयू को तगड़ा अंदेशा है कि परीक्षा हॉल में इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलों को रोकने के लिए लगाए गए जैमर सिस्टम को जानबूझकर निष्क्रिय या कमजोर किया गया था। इस साजिश में जैमर सेवा प्रदाता कंपनी 'ईसीआईएल' के कर्मचारियों की भूमिका की भी बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
पुराने दागियों को सौंपी कमान, बीपीएससी अधिकारी भी रडार पर
पूरी परीक्षा व्यवस्था को दागी हाथों में सौंपने की बात भी साबित हुई है। मुंगेर में जिला समन्वयक बनाए गए सुजल कुमार और समीर कुमार पहले भी सिपाही भर्ती परीक्षा में हुई धांधली के मुख्य आरोपियों में शामिल थे, जबकि नालंदा के चंदन कुमार को पूर्व में कदाचार (नकल) के आरोप में परीक्षा से बाहर किया जा चुका था। ऐसे आपराधिक इतिहास वाले लोगों को इतनी बड़ी परीक्षा के प्रबंधन का जिम्मा मिलना एक गंभीर साजिश की ओर इशारा करता है। आर्थिक अपराध इकाई अब इस बात की तह तक जाने में जुटी है कि बीपीएससी (BPSC) के किन अधिकारियों और कर्मचारियों के पास परीक्षा के सुचारू संचालन और इसकी निगरानी की जिम्मेदारी थी। जांच टीम का कहना है कि आयोग के भीतर बैठे जिन भी चेहरों ने लापरवाही बरती या माफिया का साथ दिया, उन्हें चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
बिहार में पुलिस-मुठभेड़, एक बदमाश मारा गया; थानेदार समेत दो जवान घायल
13 Jun, 2026 10:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार की राजधानी पटना के मसौढ़ी थाना क्षेत्र अंतर्गत मनीचक गांव में शुक्रवार की शाम एक अपहृत युवक को छुड़ाने गई पुलिस टीम पर बदमाशों ने अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। इस अचानक हुए हमले में एडिशनल थाना प्रभारी राहुल कुमार के पैर में गोली लगी है, जबकि एएसआई संजय कुमार के हाथ को छूती हुई एक गोली निकल गई। इस जानलेवा हमले के बाद भी पुलिस बल ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए जवाबी फायरिंग की, जिससे घबराकर अपराधी पीछे हटने को मजबूर हो गए। दोनों जख्मी पुलिसकर्मियों को तुरंत इलाज के लिए पटना एम्स में दाखिल कराया गया है, जहां उनकी हालत अब नियंत्रण में बताई जा रही है।
छापेमारी के दौरान मुठभेड़ और इनामी हैदर का खात्मा
पुलिस की ओर से की गई आत्मरक्षार्थ जवाबी कार्रवाई में गिरोह के एक मुख्य शातिर अपराधी को भी गोली लगी। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, घायल होने के बाद उसके साथी उसे छुपाकर पहले पुनपुन स्वास्थ्य केंद्र, फिर पीएमसीएच और उसके बाद अन्य निजी अस्पतालों में ले गए, लेकिन आखिरकार दम तोड़ने के कारण उसकी मौत हो गई। मृत अपराधी की शिनाख्त मोहम्मद हैदर के रूप में की गई है, जो मसौढ़ी इलाके का एक पुराना और कुख्यात हिस्ट्रीशीटर था। हैदर पहले भी कत्ल के एक संगीन मामले में जेल की हवा खा चुका था और कुछ ही समय पूर्व जमानत पर जेल से छूटकर बाहर आया था।
मोबाइल सौदे के बहाने जाल बिछाकर किया था किडनैप
अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते बंधक बनाए गए युवक को अपराधियों के चंगुल से पूरी तरह सुरक्षित बचा लिया गया है। मुक्त कराए गए पीड़ित युवक ने पूछताछ में एक बड़े रैकेट का खुलासा करते हुए बताया कि बदमाशों ने उसे एक ऑनलाइन शॉपिंग ऐप के जरिए मोबाइल फोन खरीदने और बेचने के बहाने बात करने के लिए मनीचक गांव बुलाया था। जैसे ही वह तय स्थान पर पहुंचा, वहां पहले से घात लगाए बैठे करीब छह अपराधियों ने उसे हथियारों के बल पर बंधक बना लिया। बदमाशों ने उसके पास मौजूद नकदी लूटने की कोशिश की और विरोध करने पर उसकी हत्या की योजना बना रहे थे, तभी मौके पर पुलिस की टीम पहुंच गई।
फरार बदमाशों की तलाश में पुलिस की ताबड़तोड़ दबिश
मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए पुलिस अधीक्षक (पूर्वी) परिचय कुमार ने बताया कि शुक्रवार की शाम करीब 7:30 बजे मुखबिर से पुख्ता इनपुट मिला था कि कुछ अपराधी एक युवक को बंधक बनाकर उसकी जान लेने की फिराक में हैं। सूचना मिलते ही अतिरिक्त थाना प्रभारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित कर मौके पर रवाना की गई थी, जिस पर अपराधियों ने देखते ही गोलियां चलाना शुरू कर दिया था। पुलिस प्रशासन का कहना है कि इस वारदात में शामिल गिरोह के अन्य सभी सदस्यों की पहचान सुनिश्चित कर ली गई है और फरार आरोपियों को सरगर्मी से तलाशने के लिए पूरे इलाके की नाकेबंदी कर लगातार छापेमारी की जा रही है।
बिहार में मानसून की रफ्तार तेज, कई इलाकों में बारिश के आसार
13 Jun, 2026 09:03 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। पूर्णिया के रास्ते बिहार में मानसून की दस्तक तो हो गई है, लेकिन आम जनता को चिलचिलाती गर्मी और उमस से अब तक पूरी राहत नहीं मिल सकी है। राजधानी पटना सहित दक्षिण-पश्चिम बिहार के तमाम जिलों में उमस भरे मौसम ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। इसी बीच, मौसम विज्ञान केंद्र ने कोसी, सीमांचल, मिथिला और अंग प्रदेश के कई जिलों के लिए वर्षा का अलर्ट जारी किया है। विभाग के मुताबिक, किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, खगड़िया, भागलपुर, बांका, मुंगेर और जमुई में अनेक स्थानों पर बादल बरसने की उम्मीद है, जबकि उत्तर, मध्य और दक्षिण-पश्चिम बिहार के कुछ हिस्सों में छिटपुट वर्षा दर्ज की जा सकती है।
कोसी और सीमांचल अंचल में मानसूनी बादल पूरी तरह सक्रिय
मौसम विज्ञान केंद्र के बुलेटिन के अनुसार, मानसून ने उत्तर-पश्चिम और पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के साथ-साथ बिहार के शेष हिस्सों, ओडिशा और झारखंड के कुछ नए क्षेत्रों में अपनी पहुंच बढ़ा ली है। इसके प्रभाव से सुपौल, अररिया, किशनगंज, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा, शिवहर, मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, बेगूसराय, खगड़िया, बांका, मुंगेर और लखीसराय जैसे जिलों में मानसूनी हवाएं पूरी तरह प्रभावी हो चुकी हैं। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर अनुकूल परिस्थितियों के चलते यह मानसूनी सिस्टम महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और झारखंड के साथ बिहार के अन्य हिस्सों की तरफ तेजी से आगे बढ़ेगा।
कटिहार के प्राणपुर में रिकॉर्ड 82.8 मिलीमीटर मूसलाधार वर्षा
बीते 24 घंटों के दौरान कटिहार और पूर्णिया प्रमंडल के विस्तृत इलाकों में जोरदार मानसूनी फुहारें पड़ी हैं। आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा 82.8 मिलीमीटर पानी कटिहार के प्राणपुर में बरसा, जबकि बरारी में 82.2 मिलीमीटर और धमदाहा में 56.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त आजमनगर, समेली, बरहरा कोठी, बनमनखी, पूर्णिया शहर, किशनगंज और जाले समेत कई अन्य स्थानों पर भी मध्यम से भारी बारिश दर्ज की गई है। इस बीच, विभिन्न शहरों का न्यूनतम तापमान भी दर्ज किया गया, जिसमें वाल्मीकिनगर में 25.0 डिग्री, पटना में 28.5 डिग्री, गया में 27.2 डिग्री, मुजफ्फरपुर में 27.6 डिग्री, भागलपुर व पूर्णिया में 27.1 डिग्री और जीरादेई में सबसे अधिक 31.7 डिग्री सेल्सियस पारा रहा।
राजधानी पटना में 16 और 17 जून से मिलेगी उमस से राहत
पटना वासियों को आगामी पांच दिनों तक उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद कम ही है। 13 से 17 जून के मध्य शहर का अधिकतम तापमान 36 से 38 डिग्री और न्यूनतम तापमान 28 से 29 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। हालांकि, 14 जून को मौसम का मिजाज थोड़ा बदल सकता है और हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन 15 जून को एक बार फिर तीखी धूप निकलने की संभावना है। पटना में मौसम का असल यू-टर्न 16 और 17 जून को देखने को मिलेगा, जब बादलों की आवाजाही बढ़ने के साथ ही गरज-चमक के साथ झमाझम बारिश का दौर शुरू होगा, जिससे तापमान लुढ़क कर 36 डिग्री सेल्सियस तक आ सकता है।
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