मध्य प्रदेश
आईईएचई एवं सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ झारखंड के बीच हुआ एमओयू
25 Jun, 2026 11:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल एवं सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ झारखंड, रांची के बीच गुरुवार को एक एमओयू हुआ है। एमओयू के अंतर्गत रिसर्च स्कॉलर्स एवं फैकल्टी एक्सचेंज, वैज्ञानिक शोध, अकादमिक प्रोजेक्ट्स, सेमिनार, कॉन्फ्रेंस एवं संयुक्त शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। एमओयू से दोनों संस्थाओं के विद्यार्थियों, रिसर्च स्कॉलर्स एवं फैकल्टी को लाभ होगा। साथ ही दोनों संस्थाओं के बीच जॉइंट रिसर्च प्रोजेक्ट एवं पेटेंट पर भी कार्य किया जाएगा। इस दौरान आईईएचई संस्थान द्वारा संस्थान की अकादमिक गतिविधि, रिसर्च कार्यों एवं उपलब्धियों के बारे में प्रेजेंटेशन दिया गया।
एमओयू के अंतर्गत दोनों संस्थान एक मॉनिटरिंग टीम गठित करेंगे। एमओयू के दौरान सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ झारखंड के कुलगुरु, प्रोफेसर सारंग मेढेकर, रजिस्ट्रार, श्री के. खोसला राव, डीन (आर एंड डी), प्रोफेसर मनोज कुमार तथा आईईएचई के संचालक, डॉक्टर प्रज्ञेश कुमार अग्रवाल, प्रोफेसर अनुज, प्रोफेसर शैलजा दुबे, प्रोफेसर बी.के. सिन्हा, प्रोफेसर अमित जैन, प्रोफेसर महेंद्र सिंघई, प्रोफेसर सभाकांत द्विवेदी आदि उपस्थित रहे।
बुजुर्गों और असहाय लोगों का आदर करना हमारा धर्म : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
25 Jun, 2026 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि घर में बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद होना, तपती धूप में ठंडी छांव के समान होता है। हमारी संस्कृति में बुजुर्गों, असहायों और समाज के सबसे कमजोर वर्ग को आदर देना केवल कर्तव्य नहीं बल्कि हमारा धर्म माना गया है। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारी कोशिश है कि राज्य का कोई भी निर्धन परिवार, माताएं, बहनें या हमारे दिव्यांग साथी स्वयं को बेसहारा न समझें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में अंत्योदय का संकल्प सिद्ध हो रहा है। इसी दिशा में राज्य सरकार भी गरीबों, वंचितों और कमजोर वर्गों के कल्याण में जुटी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से सामाजिक सुरक्षा पेंशन वितरण के लिए मंत्रालय में आयोजित कार्यक्रम में यह विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम से विभिन्न जिलों के हितग्राही वर्चुअली जुड़े।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 33 लाख 92 हजार 695 से अधिक भाई-बहनों और बुजुर्गों के खातों में माह मई महीने की 203 करोड़ 56 लाख रुपये की सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की। इस अवसर पर सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, संजय शुक्ला, मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली वायंगणकर कार्यक्रम में उपस्थित थी।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन सरकार के स्नेह, सम्मान और सुरक्षा का वचन है
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन केवल आर्थिक सहायता नहीं है, अपितु निर्धन परिवारों, दिव्यांग साथियों में आपके प्रति सरकार का स्नेह, सम्मान और सुरक्षा का वचन है। राज्य सरकार सभी को अपने परिवार का हिस्सा मानती है। सरकार प्रत्येक नागरिक के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में राज्य सरकार ने किसान हितैषी महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रदेश के किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज दिया जाएगा और इसे चुकाने की समयावधि 31 मार्च नहीं होगी, बल्कि किसान जिस तारीख को कर्ज लेंगे, उसे अगले 12 माह की अवधि में ऋण भरना होगा।
10 साल में देश के 25 करोड़ से ज्यादा लोग बाहर आए गरीबी से
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश का प्रत्येक नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहा है। पिछले 10 वर्षों में देश के 25 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से 80 करोड़ से अधिक लोगों को हर महीने मुफ्त राशन मिल रहा है। प्रधानमंत्री आवास, आयुष्मान भारत, जल-जीवन मिशन, उज्जवला योजना जैसी योजनाओं ने जन-कल्याण का इतिहास लिखा है। राज्य सरकार अधिकांश कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में देश में अग्रणी है। सरकार गरीब, युवा, नारी और किसान कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि वितरण कार्यक्रम में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से वरिष्ठजन, माताएं-बहनें और हितग्राही वर्चुअली सम्मिलत हुए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आपदा में बचाव पर ब्रेल लिपि में प्रकाशित पुस्तक का किया लोकार्पण
25 Jun, 2026 10:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नि:शक्तजन के लिए आग, हीटवेब (लू) और आकाशीय बिजली से बचाव के संबंध में ब्रेललिपि में प्रकाशित पुस्तक का गुरूवार को मंत्रालय में लोकार्पण किया। पुस्तक का मुद्रण आपदा प्रबंध संस्थान भोपाल द्वारा सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सहयोग से कराया गया है।
केरल और असम के बाद नि:शक्तजन के लिए आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में इस तरह की पहल मध्यप्रदेश द्वारा की गई है। दृष्टिबाधित भाई-बहनों के लिए यह पुस्तक अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। इस अवसर पर सामाजिक न्याय एवं दिव्यांग सशक्तिकरण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव संजय शुक्ला, प्रमुख सचिव सोनाली वायंगणकर उपस्थित थी।
शैक्षणिक पाठ्यक्रम में नशे के दुष्परिणामों पर जानकारी देना आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
25 Jun, 2026 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि दिव्यांगजन के आवागमन के लिए सभी शासकीय भवनों को बाधारहित बनाना आवश्यक है। बच्चों में दिव्यांगता के बारे में संवेदनशीलता विकसित करने के लिए स्कूली पाठ्यक्रम में आवश्यक सामग्री शामिल की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नशामुक्ति के लिए चलायें जा रहे अभियान के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वित रूप से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नशे के दुष्परिणामों से किशोरों और युवाओं को समय रहते परिचित कराना जरूरी है। नशे के विरूद्ध वातावरण बनाने के उद्देश्य से स्कूली और महाविद्यालयीन स्तरों के पाठ्यक्रमों में नशे के विरूद्ध जागरूकता पर केंद्रित सामग्री शामिल की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दिव्यांगजन को निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने और उनकी क्षमता अनुसार कौशल उन्नयन की गतिविधियां भी संचालित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उक्त निर्देश सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की समीक्षा बैठक में दिए। मंत्रालय में गुरूवार को हुई बैठक में विभाग के मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा, मुख्य सचिव अनुराग जैन विशेष रूप से उपस्थित थे।
दिव्यांगजन के लिए की गई है 168 स्मार्ट क्लास
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जन्म दिवस, विवाह वर्षगांठ जैसे शुभ अवसरों और परिजन की स्मृति में जरूरतमंदों को भोजन कराने की परंपरा भारतीय संस्कृति में रही है। उन्होंने ऐसी व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक पहल को, प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर निराश्रितों को भोजन कराने के लिए निश्चित व्यवस्था के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया। बैठक में जानकारी दी गई कि मुख्यमंत्री सेवा पखवाड़ा अभियान वर्ष 2025 अंतर्गत प्रदेश में 6 करोड़ 52 लाख रुपए के कृत्रिम अंग एवं सहायक यंत्र दिव्यागंजन को उपलब्ध कराये गये। प्रदेश में दिव्यांगजन के लिए संचालित विशेष विद्यालयों में दिव्यांगजन के लिए 168 स्मार्ट क्लास तैयार की गई हैं। नशामुक्ति भारत अभियान के अंतर्गत 12 हजार वालेंटियर्स बनाये गये हैं, जो नशे के दुष्परिणामों से जन सामान्य को अवगत करा रहे हैं। दिव्यांगजन को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें रोजगार उपलबध कराने के लिए भारत सरकार से प्राप्त पुरस्कार संस्थानों से एमओयू किया गया है। इन संस्थाओं द्वारा 12 दिव्यांगजनों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। वृद्धजनों की देखभाल के लिए 54 प्रतिभागियों को केयर-गिवर का प्रशिक्षण दिलवाया गया। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभाग में संचालित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की। बैठक में अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, संजय शुक्ला, मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली वायंगणकर सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
विकसित भारत के निर्माण में युवाओं को मिले अधिक से अधिक अवसर : राज्यपाल पटेल
25 Jun, 2026 09:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विकसित भारत@2047 की संकल्पना को साकार करने की दिशा में प्रदेश के युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालयों द्वारा अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी वर्ष 2047 में भारत को विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के लिये सभी वर्गों से सतत् विचार-विमर्श करते रहे है जिसमें युवा भी शामिल है। विश्वविद्यालयों का दायित्व है कि विद्यार्थियों में राष्ट्र निर्माण के जज्बे को और अधिक सुदृढ़ करने में अपना सक्रिय योगदान दें। राज्यपाल पटेल गुरूवार को लोकभवन में आयोजित विश्वविद्यालय समन्वय समिति की 102वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के संचालन एवं समन्वय संबंधी विभिन्न विषयों की समीक्षा की गई।
राज्यपाल पटेल ने विश्वविद्यालयों को सेवायोजित पूर्व विद्यार्थियों के लिए प्रत्येक 2 वर्ष में प्लेसमेंट सम्मेलन आयोजित करने की सलाह दी है। प्लेसमेंट सम्मेलन में वर्तमान छात्र-छात्राओं को प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलेगा। विश्वविद्यालय का गौरव भी बढ़ेगा। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विश्व के लगभग 200 देशों में किये गये योगाभ्यास से योग की वैश्विक स्वीकार्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को योग को नियमित गतिविधियों को मासिक साप्ताहिक आयोजन के क्रम में शुरू करना चाहिए। इसकी शुरुआत छात्रावासों से की जा सकती है। उन्होंने रोजगारोन्मुखी प्रमाण-पत्र एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रमों को गरीब एवं वंचित परिवारों की आत्मनिर्भरता में व्यवहारिक पहल बताया। कृषि संबद्ध विभिन्न कार्यों के लिए भी प्रमाणन व्यवस्था विकसित किए जाने पर बल दिया।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के विश्वास के साथ उन्हें विश्वविद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने भेजते हैं। इस विश्वास को बनाये रखना कुलगुरुओं और प्राध्यापकों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को ज्ञान और कौशल के साथ सामाजिक संवेदनशीलता से भी जोड़ना जरूरी है। विश्वविद्यालय गाँव को गोद लेकर ग्रामीणों के साथ संवाद और विकास गतिविधियों में विद्यार्थियों को सहभागी बनाएं। पिछड़े समुदायों एवं क्षेत्रों के विकास की अभूतपूर्व योजना पीएम-जनमन, धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए विद्यार्थियों को भी जोड़े। महाविद्यालयीन और विश्वविद्यालयीन छात्रों को गाँवों का भ्रमण करवाएं। इससे प्राप्त अनुभव विद्यार्थियों को भावी जीवन में वंचित और गरीब वर्गों के प्रति संवेदनशील बनाएगा।
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने विश्वविद्यालयों द्वारा वित्तीय प्रबंधन को व्यवस्थित करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रावधानों और निर्देशों का उल्लंघन गंभीर अनियमितता है। कुलगुरू वित्तीय निर्देशों की सीमा का कड़ाई से पालन करें। मंत्री परमार ने कहा कि कॉमन पोर्टल के माध्यम से एकीकृत ई-प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ना निजी विश्वविद्यालयों के लिए स्वैच्छिक है, किन्तु विश्वविद्यालय में प्रवेश होने की सूचना आयोग के पोर्टल पर प्रदर्शित होने की ऑटोमेडेट व्यवस्था की जाना अनिवार्य है।
बैठक में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा, राज्यपाल के उप सचिव सुनील दुबे, शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलगुरू, लोकभवन एवं उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
कृषक कल्याण वर्ष में अगली छमाही में 14 जिलों में 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बढ़ेंगी सिंचाई सुविधाएं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
25 Jun, 2026 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कृषक कल्याण वर्ष में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। इस वर्ष 14 जिलों में जिन सिंचाई परियोजनाओं के कार्य पूर्ण हो गए हैं, उनके लोकार्पण की तैयारी कर ली गई है। आगामी 6 माह में लगभग 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं में वृद्धि करने वाली इन परियोजनाओं का लोकार्पण होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में गुरूवार को मंत्रालय में हुई जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभागों के कार्यों की समीक्षा बैठक में जानकारी दी गई कि कृषक कल्याण वर्ष में अनेक सिंचाई परियोजनाओं के लोकार्पण होंगे। इनमें बड़वानी, सीहोर, शाजापुर, देवास, झाबुआ, धार, खण्डवा, खरगोन, आलीराजपुर, राजगढ़, जबलपुर, कटनी और मण्डला जिलों की सिंचाई परियोजनाएं शामिल हैं। बैठक में सिंहस्थ से जुड़ी तीन परियोजनाओं के कार्यों की प्रगति की समीक्षा भी की गई।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नर्मदा घाटी विकास और जल संसाधन विभाग के कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव जल संसाधन विभाग और नर्मदा घाटी विकास विभाग डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव वित्त श्री मनीष रस्तोगी सहित संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
केन-मंदाकिनी लिंक अंतर प्रांतीय परियोजना का प्रस्ताव भारत सरकार को प्रेषित
बैठक में जानकारी दी गई कि केन-मंदाकिनी लिंक अन्तर्राज्यीय सिंचाई परियोजना का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया है। इस परियोजना से 93 हजार 310 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता का विकास होगा और 15.8 मेगावाट विद्युत उत्पादन किया जा सकेगा। परियोजना में 20 किलोमीटर लंबाई की टनल भी बनाई जाएगी। परियोजना की लागत 8400 करोड़ रुपए से अधिक होगी।
सिंहस्थ से जुड़ी परियोजनाओं के कार्यों में प्रगति
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ आयोजन के उद्देश्य से पूर्ण की जाने वाली परियोजनाओं के कार्यों की जानकारी प्राप्त की। इनमें सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना का 82% कार्य पूर्ण हो गया है। बैठक में बताया गया कि कान्ह डायवर्सन क्लोज्ड डक्ट परियोजना में 66% प्रगति है। शिप्रा तट पर सिंहस्थ में करोड़ों लोगों द्वारा सुविधाजनक ढंग से पुण्य स्नान का लाभ लेने के दृष्टि से 29 किलोमीटर लंबाई में बनाए जा रहे घाटों का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस कार्य में भी 60% प्रगति है।
सिंचाई क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि
प्रदेश में सिंचित रकबा निरंतर बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश में निर्मित और निर्माणाधीन परियोजनाओं से निकट भविष्य में मिलने वाले लाभ को जोड़ें तो प्रदेश में सिंचित क्षेत्र 95. 45 लाख हेक्टेयर हो जाएगा। इसके अलावा अन्य स्वीकृति प्राप्त परियोजनाओं को समाहित करें तो यह आंकड़ा 108 लाख हेक्टेयर होगा। कार्यों को तेजी से पूरा किए जाने के फलस्वरूप सिंचाई क्षेत्र का निरंतर विस्तार हो रहा है। गत ढाई वर्ष में लगभग 10 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र में वृद्धि हुई है।
केन-बेतवा अंतर्राज्यीय परियोजनाओं में पुनर्व्यवस्थापन के लिए विशेष पैकेज
बैठक में जानकारी दी गई कि केन -बेतवा अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना में बुंदेलखण्ड क्षेत्र के दस जिलों में 8.11 लाख हेक्टेयर वार्षिक सिंचाई के साथ 130 मेगावॉट ऊर्जा उत्पादन भी होगा। परियोजना में भू-अर्जन, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन के लिए विशेष पैकेज के तहत अवार्ड पारित कर 90 प्रतिशत भुगतान किया चुका है। बीना कॉम्प्लेक्स बहुउद्देश्य परियोजना में चकरपुर एवं मड़िया बांध का काम पूरा हो गया है। संशोधित पार्वती काली सिंध चम्बल अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना में 13 जिलों के 6.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी।
कारम परियोजना और छिंदवाड़ा की चतुर्थ बांध परियोजना
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि वर्ष 2022 में क्षतिग्रस्त हुए कारम बांध के वर्ष 2024 से पुनर्निर्माण के कार्य प्रारंभ हुए, जो लगभग पूर्ण हो गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चतुर्थ बांध परियोजना (छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्प्लेक्स) के कार्यों और अन्य परियोजनाओं के कार्यों की समीक्षा की।
स्लीमनाबाद टनल के उद्घाटन की तैयारी
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नर्मदा की अमृत धारा को सोन नदी से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण स्लीमनाबाद टनल के उद्घाटन के लिए आवश्यक तैयारी के निर्देश दिए। बरगी व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत जबलपुर स्थित बरगी बांध से निकलने वाली यह ट्रांस-वैली केनाल प्रदेश की सबसे ज्यादा 227 क्यूमेक डिस्चार्ज करयिंग कैपेसिटी वाली नहर के माध्यम से जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, रीवा और पन्ना के लगभग डेढ़ हजार गांव की करीब ढाई लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का वरदान प्राप्त होगा। दायीं तट मुख्य नहर के किलोमीटर 104 से 116 के मध्य निर्मित इस टनल का कार्य लगभग डेढ़ दशक से चल रहा था, जो लगभग पूर्ण हो चुका है। टनल की कुल लम्बाई 11.952 किलोमीटर और जल प्रवाह क्षमता 152 क्यूमेक है। टनल का डायमीटर 10.140 मीटर है। किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने में इस टनल की विशेष उपयोगिता होगी।
हाई कोर्ट ने दी राहत, अभिषेक बनर्जी की गिरफ्तारी पर रोक जारी रहेगी
25 Jun, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जबलपुर (मध्य प्रदेश)। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से एक बार फिर बड़ी कानूनी राहत मिली है। न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय लेते हुए बनर्जी के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर लगी रोक को फिर से बहाल कर दिया है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने उनकी उस मुख्य याचिका को भी पुनर्जीवित (बहाल) कर दिया है, जिसे तकनीकी कारणों से खारिज कर दिया गया था। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकल पीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए यह नया आदेश जारी किया है, जिससे टीएमसी सांसद को तात्कालिक कानूनी सुरक्षा कवच मिल गया है।
वकील की अनुपस्थिति के कारण 17 जून को खारिज हो गई थी याचिका, हट गई थी राहत
इस मामले में मोड़ तब आया था जब बीते 17 जून 2026 को हुई सुनवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी या उनके पक्ष का कोई भी अधिवक्ता न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ था। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने माना था कि याचिकाकर्ता इस कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाने का इच्छुक नहीं है। परिणाम स्वरूप, कोर्ट ने बनर्जी की याचिका को खारिज करते हुए उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर लगी रोक को हटा लिया था, जिससे उनकी गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया था। हालांकि, अब एकल पीठ ने अपने पूर्व के उस सख्त आदेश को पलटते हुए याचिकाकर्ता को दोबारा राहत प्रदान की है।
क्या है विवाद? आकाश विजयवर्गीय को 'गुंडा' कहने पर भोपाल में दर्ज हुआ था मुकदमा
यह पूरा विवाद साल 2020 का है, जब कोलकाता में आयोजित एक राजनीतिक रैली के दौरान अभिषेक बनर्जी ने मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बेटे और इंदौर के पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय को कथित तौर पर 'गुंडा' कहकर संबोधित किया था। इस सार्वजनिक बयान को अपनी सामाजिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा पर गहरा आघात बताते हुए आकाश विजयवर्गीय ने साल 2021 में भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट (MP-MLA Court) में बनर्जी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया था।
एमपी-एमएलए कोर्ट के वारंट को दी थी चुनौती; फिलहाल टली गिरफ्तारी
भोपाल की निचली अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद टीएमसी सांसद के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इस वारंट के विरोध में अभिषेक बनर्जी ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की शरण ली थी। उनके वकीलों ने तर्क दिया था कि वे एक जिम्मेदार सांसद हैं और उनके कानून से भागने की कोई आशंका नहीं है। हाई कोर्ट ने इन दलीलों के आधार पर पहली बार 12 नवंबर 2025 को गिरफ्तारी वारंट पर अंतरिम रोक लगाई थी। अब ताजा आदेश के बाद हाई कोर्ट से मिली वह राहत आगे भी बरकरार रहेगी और आगामी सुनवाई तक पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकेगी।
नौ IPS पदों पर प्रमोशन की तैयारी, आज DPC में होगा बड़ा फैसला
25 Jun, 2026 04:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। राज्य पुलिस सेवा (SPS) के वरिष्ठ अधिकारियों को प्रमोट कर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) का कैडर सौंपने की प्रशासनिक कवायद काफी तेज हो गई है। प्रदेश के पुलिस महकमे में लंबे समय से इंतजार की जा रही विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की एक महत्वपूर्ण बैठक गुरुवार को आयोजित होने जा रही है। इस उच्च स्तरीय बैठक में प्रांतीय अधिकारियों की वरिष्ठता, उनके सेवा रिकॉर्ड की शुद्धता और निर्धारित पात्रता के कड़े मानकों के आधार पर नामों का बारीकी से मूल्यांकन किया जाएगा। इस अहम प्रक्रिया के जरिए इस बार राज्य के नौ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को आईपीएस कैडर का गौरव हासिल होने का सुनहरा अवसर मिल सकता है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, इस वर्ष की चयन सूची में मुख्य रूप से वर्ष 1997, 1998 और 2000 बैच के अधिकारियों के नामों और उनकी सेवा फाइलों पर प्रमुखता से विचार किया जा रहा है, जिसे शासन स्तर पर समय से मंजूरी मिलने के कारण प्रक्रिया को गति मिली है।
पिछले वर्ष के रिक्त पद को भी मिला समावेशन और विचारणीय नाम
इस बार की पदोन्नति प्रक्रिया की एक खास बात यह है कि इसमें पिछले वर्ष का एक बैकलॉग पद भी शामिल किया जा रहा है। दरअसल, बीते साल किसी अंतिम और ठोस निर्णय के अभाव में आईपीएस अवॉर्ड का एक पद खाली रह गया था, जिसे अब चालू वर्ष के कोटे में समाहित कर लिया गया है। इस वजह से पदोन्नति पाने वाले पात्र दावेदारों की संख्या में इजाफा तय माना जा रहा है। इस पूरी चयन प्रक्रिया के दौरान सीताराम सतस्या, अंजना तिवारी, सत्येंद्र सिंह तोमर, समर वर्मा, अमृत मीणा, निमिषा पांडे, राजेश कुमार मिश्रा, मलय जैन, अमित सक्सेना, मनीषा पाठक सोनी, सुमन गुर्जर, संदीप मिश्रा और सव्यसांची सर्राफ जैसे वरिष्ठ नामों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। हालांकि, इनमें से कुछ अधिकारियों के पूर्व के विभागीय मामलों, सेवा अभिलेखों की त्रुटियों या अन्य बारीक तकनीकी वजहों से आपत्तियां भी सामने आ सकती हैं, और यदि ऐसा होता है, तो वरिष्ठता सूची में उनके ठीक नीचे मौजूद अन्य पात्र अफसरों की किस्मत चमक सकती है।
समय से काफी पहले शुरू हुई मूल्यांकन की यह पूरी प्रक्रिया
डीपीसी की इस बैठक में सभी संबंधित अधिकारियों के वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (ACR), उनके पूरे करियर के सर्विस रिकॉर्ड, अनुशासनात्मक कार्रवाई की वर्तमान स्थिति तथा केंद्र सरकार द्वारा तय किए गए विशिष्ट पैमानों को आधार बनाकर गहनता से जांच की जाएगी। यहां से अंतिम रूप से चुने गए अधिकारियों के नामों के प्रस्ताव को पहले केंद्र सरकार और फिर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के पास अंतिम मुहर के लिए भेजा जाएगा, जहां से हरी झंडी मिलने के बाद गृह विभाग द्वारा आधिकारिक तौर पर नियुक्ति की अधिसूचना जारी की जाएगी। पुलिस महकमे के जानकारों का कहना है कि सामान्य तौर पर आईपीएस अवॉर्ड से जुड़ी यह जटिल प्रक्रिया साल के आखिरी महीनों में जाकर रफ्तार पकड़ती थी, लेकिन इस बार राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय की सक्रियता के कारण सारे जरूरी प्रस्ताव काफी पहले भेज दिए गए, जिससे जून महीने में ही डीपीसी की तिथि तय हो गई और प्रमोशन की राह देख रहे अधिकारियों को समय से पहले बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
MP के स्टेट सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन पर बढ़ता कर्ज, रोज़ 23 करोड़ ब्याज का भार
25 Jun, 2026 04:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार के साथ-साथ राज्य के सरकारी संस्थान भी इन दिनों भारी कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन (एससीएससी) की वित्तीय स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। कॉरपोरेशन की अपनी कोई खास कमाई नहीं हो रही है, लेकिन इसके बावजूद उसे हर दिन सिर्फ ब्याज के तौर पर 23 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान करना पड़ रहा है। इस समय कॉरपोरेशन पर कुल 103 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज है।
सीजन की कमाई भी ब्याज में हो रही है खत्म
कॉरपोरेशन को मुख्य रूप से धान और गेहूं की खरीदी के सीजन में कमीशन के जरिए अच्छी आमदनी होती है। हालांकि, यह कमाई इतनी भी नहीं है कि इससे कर्ज का मूलधन (वास्तविक कर्ज) चुकाया जा सके। जब रोज का करोड़ों रुपया सिर्फ ब्याज देने में ही चला जा रहा है, तो ऐसे में यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि कॉरपोरेशन इस भारी कर्ज को कब और कैसे चुका पाएगा।
महज दो साल में ढाई गुना बढ़ा ब्याज का बोझ
आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2024 में कॉरपोरेशन को हर दिन करीब 9 करोड़ रुपये का ब्याज चुकाना पड़ता था। लेकिन पिछले 28 महीनों में यह स्थिति और बिगड़ गई और साल 2026 आते-आते हर दिन दिया जाने वाला यह ब्याज बढ़कर 23.2 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसे मैनेजमेंट की लापरवाही कहें या मजबूरी, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि आने वाले जुलाई महीने तक यह कर्ज 50 करोड़ रुपये और बढ़ सकता है। इस बीच, सत्ता पक्ष के ही भाजपा विधायक विनोद विश्नोई ने बारदाने (बोरे) की खरीदी में भ्रष्टाचार होने के गंभीर आरोप भी लगाए हैं।
अधिकारी का दावा: वित्तीय प्रबंधन में कोई कमी नहीं
दूसरी तरफ, लगातार बढ़ते कर्ज और ब्याज के इस मामले पर अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) रश्मि अरुण शमी का एक अलग पक्ष सामने आया है। उनका कहना है कि कॉरपोरेशन के वित्तीय प्रबंधन में किसी भी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं है और मैनेजमेंट पूरी तरह सही ढंग से काम कर रहा है। उन्होंने दलील दी कि कॉरपोरेशन अब पहले के मुकाबले बहुत बड़े पैमाने पर फसलों की खरीदी कर रहा है। चूंकि यह पूरी खरीदी कर्ज लेकर की जाती है, इसी वजह से कुल कर्ज और उसका ब्याज बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।
लोकतंत्र प्रहरियों के सम्मान में सीएम मोहन यादव का संदेश, जागरूक रहने की अपील
25 Jun, 2026 01:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। देश में 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल की बरसी पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लोकतंत्र प्रहरियों को नमन करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला दिन बताया है। उन्होंने कहा कि तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार के अहंकार के कारण देश पर आपातकाल थोपा गया था, जिसने संविधान की आत्मा और लोकतांत्रिक मूल्यों को गंभीर आघात पहुंचाया। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से लोकतंत्र की रक्षा और राष्ट्रसेवा के लिए निरंतर समर्पित रहने का संकल्प लेने का आह्वान किया। गौरतलब है कि केंद्र की भाजपा सरकार ने साल 2024 में 25 जून को हर वर्ष “संविधान हत्या दिवस” के रूप में मनाने की घोषणा की थी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लोकतंत्र सेनानियों को दी श्रद्धांजलि
आपातकाल की 51वीं बरसी पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे भारतीय राजनीति का एक ऐसा काला अध्याय बताया जिसने देश के स्वाभिमान को गहरी चोट पहुँचाई थी। उन्होंने अपने संदेश में कहा, "इस विभीषिका के विरुद्ध डटकर खड़े होने वाले सभी लोकतंत्र योद्धाओं और प्रहरियों का देश सदैव ऋणी रहेगा। आइए, हम सब यह संकल्प लें कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए सदैव समर्पित होकर देश की सेवा करते रहेंगे।" मुख्यमंत्री ने आगे जोड़ा कि 25 जून 1975 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने संविधान की मूल भावना को पूरी तरह कुचल दिया था। उन्होंने यह भी भरोसा जताया कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नया भारत संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोच्च मानते हुए आगे बढ़ रहा है।
आपातकाल: भारतीय राजनीति का सबसे विवादित दौर
भारतीय इतिहास में 25 जून 1975 का दिन एक अमिट और विवादित मोड़ लेकर आया था, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सिफारिश पर देश में इमरजेंसी की घोषणा की गई थी। यह आपातकाल 25 जून 1975 से लेकर 21 मार्च 1977 तक (करीब 21 महीने) लागू रहा। इस दमनकारी दौर के दौरान:
देश के प्रमुख विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मुखर पत्रकारों को बिना शर्त गिरफ्तार कर जेलों में डाल दिया गया था।
मीडिया और प्रेस पर सख्त सेंसरशिप लागू कर दी गई थी, जिससे अभिव्यक्ति की आजादी पूरी तरह छिन गई थी।
आम नागरिकों को संविधान से मिलने वाली बुनियादी स्वतंत्रताओं और अधिकारों पर कड़ा प्रतिबंध लगा दिया गया था।
अनुच्छेद 352 और लोकतंत्र की सीख
तकनीकी रूप से देश में यह आपातकाल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 352 (Article 352) के तहत आंतरिक अशांति के आधार पर घोषित किया गया था। राजनीतिक विश्लेषकों और इतिहासकारों का मानना है कि आपातकाल की ये ऐतिहासिक घटनाएं आज भी देश को लोकतंत्र के प्रति हमेशा सतर्क रहने की सीख देती हैं। उस दौर की कड़वी स्मृतियां हमें याद दिलाती हैं कि संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा करना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी परीक्षा और जिम्मेदारी होती है।
एक बोतल पानी बनी मुसीबत, रेडिसन होटल को देना पड़ा मुआवजा
25 Jun, 2026 09:58 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के एक नामी होटल को पानी की बोतल पर तय कीमत से ज्यादा पैसे वसूलना बेहद महंगा पड़ गया है। जिला उपभोक्ता आयोग ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए होटल प्रबंधन को पीड़ित ग्राहक को मुआवजा देने का बड़ा आदेश सुनाया है। अदालत ने होटल को कुल 8 हजार रुपये लौटाने और हर्जाना भरने को कहा है। यह पूरा मामला करीब चार साल पुराना है, जिस पर अब जाकर उपभोक्ता (कंज्यूमर) के पक्ष में यह अहम फैसला आया है।
60 रुपये की पानी की बोतल का थमाया 175 का बिल
यह पूरा विवाद साल 2022 का है। रायसेन रोड के रहने वाले हुकुम सिंह ठाकुर अपने कुछ दोस्तों के साथ भोपाल के मशहूर होटल रेडिसन में बुफे डिनर करने गए थे। डिनर के बाद जब उनके सामने बिल आया, तो उसे देखकर वे हैरान रह गए। बिल में 60 रुपये की पानी की बोतल के लिए उनसे सीधे 175 रुपये जोड़े गए थे। जब ग्राहक ने इस अत्यधिक कीमत का विरोध किया और आपत्ति जताई, तो होटल प्रबंधन ने उनकी बात सुनने से साफ इनकार कर दिया और मनमाना बिल वसूल लिया।
मामला सुलझाने की कोशिश नाकाम, पहुंचे उपभोक्ता अदालत
होटल के इस अड़ियल रवैये के बाद पीड़ित ग्राहक ने पहले तो आपसी बातचीत से मामला सुलझाने का प्रयास किया। जब होटल प्रबंधन अपनी गलती मानने को तैयार नहीं हुआ, तो उन्होंने हार मानने के बजाय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट में चली सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। उपभोक्ता ने पुख्ता दस्तावेजों और बिल को सबूत के तौर पर पेश करते हुए साबित किया कि उनसे न सिर्फ पानी की ज्यादा कीमत ली गई, बल्कि उस पर अतिरिक्त जीएसटी (GST) भी वसूला गया।
अदालत का फैसला और होटल को तगड़ा झटका
दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने और रिकॉर्ड की बारीकी से जांच करने के बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने ग्राहक की शिकायत को बिल्कुल सही पाया। अदालत ने माना कि होटल ने नियमों के खिलाफ जाकर ग्राहक से गलत वसूली की है और उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया है। आयोग ने होटल रेडिसन को आदेश दिया कि वह उपभोक्ता से ली गई अतिरिक्त जीएसटी की राशि तुरंत वापस करे। इसके साथ ही, ग्राहक को हुए मानसिक कष्ट और अदालती कार्यवाही में हुए खर्च की भरपाई के लिए कुल 8 हजार रुपये का हर्जाना देने का निर्देश दिया।
संस्थानों को कोर्ट की दो टूक नसीहत
इस ऐतिहासिक फैसले को सुनाते हुए उपभोक्ता आयोग ने बिजनेस संस्थानों को एक सख्त संदेश भी दिया है। आयोग ने अपने आदेश में साफ कहा कि नियमों का उल्लंघन करके ग्राहकों से अतिरिक्त पैसे वसूलना पूरी तरह गलत है। अगर कोई ग्राहक किसी गड़बड़ी की शिकायत करता है, तो कंपनियों और होटलों को समय रहते उसका समाधान करना चाहिए। अगर संस्थान अपनी मनमानी बंद नहीं करेंगे, तो ग्राहकों को कानूनी मंच पर जाकर न्याय पाने का पूरा अधिकार है।
गुणवत्ता की निगरानी के मानक मापदंड किए जाए निर्धारित : राज्यपाल पटेल
24 Jun, 2026 11:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि योजनाओं की मंशा और क्रियान्वयन की व्यवहारिकता में संवेदनशीलता की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का मूल्यांकन मुख्यतः तकनीकी विषय है, इसलिए हितग्राहियों की प्रतिक्रिया पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। निर्माण सामग्री एवं कार्य की गुणवत्ता की निगरानी के मानक मापदंड निर्धारित किए जाए। अधिकारियों द्वारा निगरानी मापदंड के अनुसार नियमित गुणवत्ता परीक्षण करना चाहिए।
राज्यपाल पटेल लोक भवन में बुधवार को आयोजित समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल को बैठक में पीएम-जनमन योजना अंतर्गत 9 विभागों की 11 अधोसंरचनात्मक, 7 हितग्राही मूलक योजनाओं और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत 17 विभागों की 25 योजनाओं की प्रगति की जानकारी दी गई।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि जनजातीय बहुल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता की पहल पीएम-जनमन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजनाएं है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य के लिए निर्धारित समय सीमा तक कार्य की रीति-नीति उचित नहीं है। रणनीति, समय सीमा से पहले कार्य पूरा करने की होनी चाहिए। नए कार्यों के क्रियान्वयन में पूर्व अनुभवों और चुनौतियों को दृष्टिगत रखते हुए कार्य योजना तैयार की जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अति पिछड़ी जनजातियों के विकास और उत्थान के प्रयासों को आवश्यकता और बहुलता की प्राथमिकता के साथ क्रियान्वयन की औपचारिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए।
राज्यपाल पटेल ने प्रदेश में सिकल सेल उन्मूलन अभियान के तीव्र गति से क्रियान्वयन पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 से पूर्व वर्ष 2026 तक लक्ष्य का पूरा होना अनुमानित है। उन्होंने सभी संबंधितों को इसके लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि 15 वर्ष की आयु तक के सिकल सेल रोगी वाहक के स्वास्थ्य प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे उनका भावी जीवन सुरक्षित हो जाएगा। जरूरी है कि सिकल सेल की दवाओं की उपलब्धता सदैव सुनिश्चित रहे। एलोपैथिक उपचार पद्धति के साथ ही आयुर्वेद औषधियों के उपयोग के संबंध में जन जागरण के प्रयासों की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की दवाओं के उपयोग से रक्त की उपलब्धता बढ़ने और थकान में कमी के उत्साह जनक प्रारंभिक परिणाम प्राप्त हुए है। राज्यपाल ने बैठक में जनजातीय बहुल क्षेत्रों की तहसीलवार बुनियादी सुविधाओं का मानचित्र तैयार कर प्रभावी निगरानी, जन औषधि केन्द्रों के संचालन में जनजातीय युवाओं की भागीदारी तथा विद्यालयों में छात्राओं, छात्र के पृथक शौचालयों की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर बल दिया।
समीक्षा बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा, जनजातीय प्रकोष्ठ की सदस्य सचिव श्रीमती मीनाक्षी सिंह, प्रकोष्ठ के सदस्य, लोक भवन और जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
जो एक बार मध्यप्रदेश आता है, वह यहीं का होकर रह जाता है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
24 Jun, 2026 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि समय तभी बदलता है, जब संकल्प बड़ा होता है। सभी भारतीयों के लिए यह गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृढ़ संकल्प और दूरदर्शी नेतृत्व में भारत का समय बदला है। विश्व के कई देशों ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से प्रधानमंत्री मोदी को विभूषित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने विकसित भारत @2047 और अर्थव्यवस्था को 30 ट्रिलियन डॉलर पहुंचाने का संकल्प लिया है। राज्य सरकार का यह प्रयास होगा कि इसमें से लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर का योगदान मध्यप्रदेश का हो। मध्यप्रदेश, प्रधानमंत्री मोदी के सेवा, सुशासन और जन कल्याण के संकल्पों को पूर्ण करने का निरंतर प्रयास कर रहा है। वर्तमान में मध्यप्रदेश की गिनती देश के सबसे तेजी से प्रगति करने वाले राज्यों में हो रही है। हम विरासत भी और विकास भी के पथ पर लगातार अग्रसर हो रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज वीरांगना रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस है। उन्होंने रानी दुर्गावती का स्मरण करते हुए कहा कि प्रदेशवासी रानी दुर्गावती के बलिदान को सदैव याद रखेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव "विकसित मध्यप्रदेश" विषय पर आयोजित कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल में आयोजित कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। कॉन्क्लेव में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, सूक्ष्म लघु एवं उद्योग मंत्री चैतन्य काश्यप, मुख्य सचिव अनुराग जैन विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कॉन्क्लेव में शामिल उद्योगपतियों से राज्य में मौजूद निवेश संभावनाओं का लाभ उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश की विशेषता है कि एक बार जो मध्यप्रदेश आता है, यहीं का होकर रह जाता है। कार्यक्रम में उद्योग व्यापार जगत के प्रतिनिधि, निवेशक, बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि तथा नीति निर्माता शामिल हुए।
प्रदेश में पिछले तीन साल से विकास का कारवां लगातार बढ़ रहा है आगे
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में पिछले तीन साल से विकास का कारवां लगातार आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश में नए उद्योग स्थापित करने के लिए पर्याप्त लैंड बैंक है। राज्य सरकार ने उद्योग अनुकूल वातावरण तैयार करने लिए पारदर्शी और उद्योग मित्र नीतियां लागू की हैं। मध्यप्रदेश की इन्हीं विशेषताओं के कारण निवेशक उद्योग लगाने के लिए राज्य में आ रहे हैं। देश के मध्य में स्थित होने के कारण उन्हें कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स का विशेष लाभ भी मिलेगा। प्रदेश सरकार ने चारों दिशाओं में सड़क कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए अधोसंरचना विकास पर विशेष बल दिया है।
राज्य सरकार 10 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों को ला चुकी है धरातल पर
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में भोपाल में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 का आयोजन किया गया, जिसमें अभूतपूर्व निवेश प्राप्त हुआ और एमओयू साइन हुए। यह प्रसन्नता का विषय है कि 10 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों को राज्य सरकार धरातल पर ला चुकी है। मध्यप्रदेश की छवि कृषि प्रधान राज्य के साथ उद्योग मित्र राज्य की भी बनी है। राज्य सरकार ने वर्ष 2025 को उद्योग और रोजगार को समर्पित किया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय युवा प्रतिभाओं ने दुनिया की बड़ी से बड़ी कंपनियों में शीर्ष पदों पर पहुंचकर भारत का मान बढ़ाया है। स्पेस टेक्नोलॉजी में भारतीय वैज्ञानिकों ने नए कीर्तिमान गढ़े हैं। राज्य सरकार ने भी अपनी स्पेस-टेक पॉलिसी लॉन्च की है। मध्यप्रदेश को सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए हम निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
राज्यपाल पटेल ने वीरांगना रानी दुर्गावती को दी श्रद्धांजलि
24 Jun, 2026 10:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर उनको नमन किया। उन्होंने लोकभवन में बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में रानी दुर्गावती के चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की। राज्यपाल पटेल ने रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर दो मिनट का मौन धारण किया। रानी दुर्गावती का पुण्य स्मरण कर नमन किया।
लोकभवन के स्वर्ण जयंती सभागार में आयोजित रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस कार्यक्रम में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, लोकभवन एवं जनजातीय प्रकोष्ठ के सदस्य, अधिकारी गण उपस्थित थे।
अदम्य साहस, अद्वितीय पराक्रम और साहस की मिसाल थीं वीरांगना रानी दुर्गावती : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
24 Jun, 2026 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि रानी दुर्गावती, अदम्य साहस, अद्वितीय पराक्रम और साहस की प्रतिमूर्ति थीं। नारी शक्ति का पराक्रम मां दुर्गावती के व्यक्तित्व में नजर आता है। मुगलों को युद्धों में धूल चटाने वाली ऐसी वीरांगना रानी दुर्गावती का आज 463वां बलिदान दिवस है। रानी दुर्गावती ने गौंडवाना साम्राज्य में 52 गढ़ों पर शासन किया। पति की असमय मृत्यु के बाद 5 साल के बेटे को सिंहासन पर बैठाया और 15 साल तक जनता की सेवा के लिए और क्षेत्र की रक्षा के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया। मध्यप्रदेश की धरती पर लगभग 500 वर्ष पूर्व रानी दुर्गावती का जन्म हुआ, लेकिन आज पूरा देश और प्रदेश उन्हें आदर के साथ स्मरण करता है। हमारा सौभाग्य है कि प्रदेश सरकार के गठन के बाद मंत्रि-परिषद की पहली बैठक जबलपुर में रानी दुर्गावती को समर्पित कर आयोजित की गई थी। इसके बाद दूसरी कैबिनेट बैठक रानी दुर्गावती के गौंडवाना साम्राज्य की राजधानी संग्रामपुर में आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि जबलपुर एयरपोर्ट का नाम वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर रखने के लिए केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर उनकी समाधि स्थल नर्रई नाला जबलपुर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती को समर्पित नवीन संस्थान जबलपुर में 100 करोड़ रूपए की लागत से मदन महल के पास तैयार हो रहा है, जिसका लोकार्पण बहुत जल्द किया जाएगा। इस संस्थान से प्रदेश की भावी पीढ़ी रानी दुर्गावती के गौरवशाली अतीत और कार्यों से परिचित होंगी। जबलपुर में रानी दुर्गावती के नाम पर एक चिड़ियाघर (जू) और वन्य प्राणी रेस्क्यू सेंटर बन रहा है। इसके साथ ही 35वीं बटालियन मंडला का नाम रानी दुर्गावती के नाम पर रखा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के नायकों की वीरता और समृद्ध विरासत को सही रूप में प्रस्तुत करने के लिए 'विरासत से विकास' अभियान शुरू किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती का शासन काल, गौंड साम्राज्य का स्वर्णिम युग था। रानी दुर्गावती ने किसान कल्याण के लिए उस दौर में बीज संग्रह, फसल चक्रण और जल संचय के महत्वपूर्ण कार्य कराए थे। उनके प्रबंधन के परिणाम स्वरूप अनाज के भंडार भरे हुए थे।
किसानों के कल्याण के लिए ठोस निर्णय ले रही है सरकार
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिए संकल्पित है और पूरा वर्ष किसानों को समर्पित करते हुए ठोस निर्णय ले रही है। अब किसान बंधुओं के लिए शून्य ब्याज दर पर 31 मार्च तक कर्ज चुकाने की बाध्यता खत्म कर दी गई है। किसान जिस तारीख को लोन लेंगे, तब से एक वर्ष की समयावधि में कर्ज चुकाया जा सकेगा। राज्य सरकार 880 करोड़ रुपए का भुगतान वित्तीय संस्थाओं को करेगी। राज्य सरकार पर्यटन, उद्योगों और अधोसंरचना विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शासकीय परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण करने पर सरकार किसानों को अब चार गुना मुआवजा देगी। प्रदेश में संचालित रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना से कोदो-कुटकी पैदा करने वाले किसानों को लाभ मिल रहा है। प्रदेश की लाड़ली बहनों को हर माह जारी हो रहे 1500 रुपए से उनकी आत्मनिर्भरता बढ़ी है। किसानों को प्रधानमंत्री सम्मान निधि का भी लाभ मिल रहा है। रानी दुर्गावती द्वारा किसानों के कल्याण के लिये चलाये गये कार्यक्रमों से प्रेरित होकर प्रदेश सरकार भी निरंतर कृषक हित में कार्य कर रही है। हमारी सरकार के पास किसान कल्याण और कल्याणकारी योजनाओं के लिए धन की कमी नहीं है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय कल्याण के लिए प्रधानमंत्री मोदी लगातार कार्य कर रहे हैं। देश में पहली बार जनजातीय वर्ग द्रौपदी मुर्मु राष्ट्रपति पद को सुशोभित कर रही हैं। राज्य सरकार सबका साथ, सबका विकास और सबका प्रयास के भाव से काम कर रही है। हमारी सरकार जो कहती है, वो करके दिखाती है।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके ने वीरांगना रानी दुर्गावती के संबंध में ओजपूर्ण कविता से अपने उदबोधन की शुरूआत करते हुये ‘’अड़े खड़ी दीवार बने, सदैव से प्रेम की दीवानी, तूफानों से हार न मानी, मरकर हुई अमर रानी, मरकर हुई अमर रानी’’ये पंक्तियों पढ़ी। उन्होंने वीरांगना महारानी रानी दुर्गावती के चरणों को नमन करते हुये कहा कि केंद्र और राज्य सरकार जनजातीय समाज के सम्मान, उत्थान, भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार जल संरक्षण, वन संरक्षण, जनजातीय अंचलों के विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में लगातार काम कर रही है। उन्होंने जनजातीय समाज से अपनी भाषा, बोली, संस्कृति और परंपराओं को सहेजने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि रानी दुर्गावती के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि वीरांगना रानी दुर्गावती का नाम लेते ही महाकौशल और मध्यप्रदेश के कण-कण में श्रद्धा का भाव जाग उठता है। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती केवल एक वीर योद्धा नहीं थीं, बल्कि जल प्रबंधन, कृषि व्यवस्था, आत्मसम्मान और मातृभूमि के प्रति समर्पण की अद्भुत प्रतिमूर्ति थीं। उनके द्वारा बनाए गई तालाबों की श्रृंखला, जल संचयन और संसाधनों के उपयोग की उनकी व्यवस्था आज भी बड़े-बड़े जल विशेषज्ञों को चकित करती है। मंत्री सिंह ने कहा कि जबलपुर की धरती के लिए यह गर्व का विषय है कि यह वही भूमि है, जहाँ वीरांगना रानी दुर्गावती का बलिदान हुआ। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से आग्रह किया कि जबलपुर एयरपोर्ट का नाम भी वीरांगना महारानी रानी दुर्गावती के नाम पर किया जाए। यह केवल नामकरण नहीं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक अस्मिता और गौरव को राष्ट्रीय पहचान देने वाला निर्णय होगा।
वरिष्ठ विधायक एवं प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि रानी दुर्गावती का बलिदान स्वतंत्रता, संस्कृति, अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा का अमर प्रतीक है। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती ने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि सम्मान के साथ मृत्यु, अपमानजनक जीवन से कहीं श्रेष्ठ होती है। खंडेलवाल ने कहा कि जनजातीय समाज का योगदान भारत के इतिहास में अमूल्य है और रानी दुर्गावती उसी गौरवशाली परंपरा की सबसे उज्ज्वल प्रेरणाओं में से एक हैं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को रानी दुर्गावती के जीवन से यह सीख लेनी चाहिए कि देश की स्वतंत्रता और स्वाभिमान सहज रूप से नहीं मिले, बल्कि इसके लिए अनगिनत वीरों और वीरांगनाओं ने अपना सर्वस्व बलिदान किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश उन महान विभूतियों को सम्मानपूर्वक स्मरण कर रहा है, जिन्होंने भारत की अस्मिता और संस्कृति की रक्षा के लिए संघर्ष किया।
समाधि स्थल पर श्रद्धा सुमन किये अर्पित
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम की शुरूआत में ग्राम नर्रई नाला स्थित वीरांगना महारानी रानी दुर्गावती की समाधि स्थल पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया। शहीद वीर नारायण की प्रतिमा पर भी पुष्पांजलि अर्पित की। साथ ही गौंड समाज के आराध्य देवता बड़ा देव का पूजन-अर्चन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
इस अवसर पर राज्यसभा सांसद सुमित्रा वाल्मीकि, सांसद आशीष दुबे, महापौर जगत बहादुर सिंह, विधायक अशोक रोहाणी, सुशील तिवारी 'इंदू', नीरज सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी, श्रद्धालू और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
राशिफल 05 जुलाई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
जश्न में फायरिंग पड़ी भारी, बिहार में BJP विधायक को कोर्ट ने सुनाई सजा
गुजरात में पीएम मोदी बोले- सेमीकंडक्टर सेक्टर में दुनिया का भरोसा जीत रहा भारत
चंदौसी: शिक्षिका की मौत के बाद वकील पर FIR, सुसाइड नोट बना अहम सबूत
जनता को जल्द इंसाफ दिलाने की दिशा में बिहार सरकार का अहम निर्णय
जमीन विवाद में गर्भवती महिला पर हमले से दो अजन्मे बच्चों की मौत, इलाके में आक्रोश
बटाला फायरिंग केस: धमकी और गोलियों से दहला इलाका, जांच जारी
कथित चंदा चोरी केस में बड़ा खुलासा: चार्टर्ड प्लेन से सिंडिकेट के आका, ट्रेन से ले जाया गया रामलला का सोना!
मानसून सत्र की तारीखों का ऐलान: 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा संसद का सत्र
क्या कानून बचा सकता है एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर के आरोपी पति को? सुप्रीम कोर्ट ने दिया अहम फैसला
