मध्य प्रदेश
मुख्यमंत्री आज तीन विभागों के 362 चयनित अधिकारी-कर्मचारियों को वितरित किये नियुक्ति पत्र
10 Jan, 2025 01:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज राजधानी भोपाल के रविन्द्र भवन में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के लिए चयनित 362 शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। जनसंपर्क अधिकारी बबीता मिश्रा ने बताया कि कार्यक्रम में किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के 256 कृषि विस्तार अधिकारी, पशुपालन एवं डेयरी विभाग के 70 सहायक पशु चिकित्सक तथा राजस्व विभाग के 36 नवचयनित नायब तहसीलदारों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव युवा अधिकारियों का उत्साहवर्धन करेंगे तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करेंगे।
इस बार 1.63 लाख लाड़ली बहनों का नाम कटेगा
10 Jan, 2025 12:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल । मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की 1 लाख 63 हजार महिलाओं को इस बार 1250 रुपए की किस्त नहीं मिलेगी। इन महिलाओं की उम्र 60 साल से अधिक हो चुकी है। ऐसे में महिला और बाल विकास विभाग ने इन्हें अपात्र घोषित कर दिया है। अब जनवरी 2025 में 1.26 करोड़ महिलाओं को ही 1250 रुपए की किस्त मिल सकेगी। इससे पहले 11 दिसंबर 2024 को 1.28 करोड़ महिलाओं के खाते में 1572 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए थे।
जनवरी 2025 में 20वीं किस्त मिलने वाली है। इसके लिए विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। अनुमान है कि सरकार 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जयंती के दिन आयोजित दो अलग-अलग कार्यक्रमों के दौरान राशि ट्रांसफर कर सकती है। सरकार ने किस्त देने के लिए 31 दिसंबर 2024 को 5 हजार करोड़ का कर्ज भी ले लिया है, जिसका भुगतान सरकार को एक जनवरी 2025 को हो गया है।
नए नाम नहीं जुड़ रहे, पुराने घटते जा रहे
इस योजना में नए नाम नहीं जोड़े जा रहे हैं, इसके उलट 20 माह से लागू इस योजना में पात्र महिलाओं के नाम उम्र और अन्य शर्तों के आधार पर कटते जा रहे हैं। इसी कारण इनकी संख्या 2023 और 2024 में बढऩे की बजाय घटी है। जब योजना शुरू हुई थी तो कुल 1 करोड़ 31 लाख 35 हजार 985 आवेदन आए थे। इसके बाद 2 लाख 18 हजार 858 नाम आपत्तियों को आधार बनाकर काटे गए थे। जिसके बाद यह संख्या 1 करोड़ 29 लाख 5 हजार 457 रह गई थी। अब यह संख्या एक करोड़ 26 लाख से अधिक तक पहुंचने वाली है।
ऐसे घट रहे पात्र महिलाओं के नाम
योजना में पात्र महिलाओं के नाम कम होने को लेकर जो जानकारी अफसरों ने दी है, उसके अनुसार इसकी सबसे बड़ी शर्त महिला की उम्र साठ साल पूरी होना है। इसके अलावा योजना का लाभ पाने वाली जिन महिलाओं की मृत्यु हो जाती है उनके नाम भी हर माह डिलीट किए जाते हैं। साथ ही जो महिला पात्रता की शर्तों के आधार पर लाभ का परित्याग करने के लिए विभाग को लिखित में जानकारी देती हैं, उनके भी नाम काटे जाते हैं।
धार्मिक स्थलों के आसपास की दुकानें होंगी बंद
10 Jan, 2025 11:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल । मप्र सरकार इस बार शराब नीति में परिवर्तन करेगी। उज्जैन सहित कुछ अन्य धार्मिक स्थलों के आसपास स्थित शराब दुकानें बंद कर सकती हैं। दरअसल, महाकाल लोक बनने के बाद पूरे देश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। शराब दुकानों के आसपास कई बार कानून व्यवस्था की स्थिति गड़बड़ा जाती है। इससे गलत संदेश जाता है, इसलिए कुछ दुकानें बंद की जा सकती हैं। वहीं अभी तक दुकानों के समूह बनाकर नीलामी की जाती थी लेकिन वर्ष 2025-26 के लिए एकल दुकान की नीलामी होगी। इससे प्रतिस्पर्धा होगी और राजस्व बढ़ेगा।
प्रदेश में 3,605 कंपोजिट शराब दुकानें हैं, जिन्हें 1,100 समूह बनाकर नीलाम किया गया था। तय किया गया है कि आदिवासी क्षेत्रों में ग्रामसभा की अनुमति से ही शराब दुकानें खोली जाएंगी। धार्मिक स्थलों के पास स्थित कुछ दुकानों को बंद भी किया जाएगा। 2025-26 के लिए प्रस्तावित नीति को जल्द ही कैबिनेट में प्रस्तुत किया जा सकता है।
दुकानों के समूह बनाकर प्रक्रिया की थी
प्रदेश में देसी और विदेशी शराब के लिए अलग-अलग दुकानों के स्थान पर कंपोजिट दुकान की व्यवस्था लागू की गई है। वार्षिक मूल्य 15 प्रतिशत बढ़ाकर नवीनीकरण किया गया था। चूंकि, दुकानों के समूह बनाकर प्रक्रिया की गई थी, इसलिए अधिकतर दुकानें नवीनीकरण में चलीं गईं। जिनका नवीनीकरण नहीं हुआ, उन्हें वार्षिक मूल्य कम करके दे दिया गया। इस बार नवीनीकरण के स्थान पर एकल दुकान की नीलामी पर जोर रहेगा। वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और नए लोगों को भी मौका मिलेगा। राजस्व भी अधिक आएगा। 2003 में एकल दुकान नीलामी की व्यवस्था थी।
अहाते का विकल्प तलाश सकती है सरकार
शिवराज सरकार ने 2023 में अहाते बंद करने का निर्णय लिया था। इसके पीछे तर्क यह था कि अहाते में बैठाकर शराब पिलाने से कानून व्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है। झगड़े होते हैं। हालांकि, इस व्यवस्था को बंद करने के बाद दुकान के आसपास लोग शराब पीने लगे हैं, जिससे आमजन को परेशानी भी हो रही है। इसे देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था का प्रविधान किया जा सकता है।
जिलाध्यक्षों के कारण अटका प्रदेशाध्यक्ष का चुनाव
10 Jan, 2025 10:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल । माना जाता है कि मप्र का भाजपा संगठन और नेता सबसे सुशासित होते हैं। लेकिन संगठन चुनाव में पार्टी के दिग्गज नेताओं ने ऐसी गुत्थी फंसाई है कि जिलाध्यक्षों का चुनाव अधर में अटक गया है। दरअसल, भाजपा के दिग्गज नेता पार्टी गाइड लाइन को दरकिनार कर अपनी पसंद के नेता को जिलाध्यक्ष बनाना चाहते हैं। ऐसे में जिलाध्यक्षों की सूची फाइनल नहीं हो पा रही है। वहीं जिलाध्यक्षों के कारण प्रदेशाध्यक्ष का चुनाव की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। खासबात यह है कि पार्टी वीथ डिफरेंस में पठ्ठावाद हावी होता नजर आ रहा है। दिल्ली से लेकर भोपाल तक अनिर्णय की स्थिति बनी हुई है। यह हालात कभी कांग्रेस में हुआ करते थे, जो अब भाजपा में दिखाई दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह स्थिति कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं के साइड इफेक्ट है।
गौरतलब है कि 5 जनवरी तक जिलाध्यक्षों का चुनाव संपन्न हो जाना था। लेकिन जिला भाजपा अध्यक्षों की घोषणा को लेकर टकटकी लगाए भाजपा कार्यकर्ताओं का इंतजार लंबा होता जा रहा है। पार्टी में अपनों को जिलाध्यक्ष बनाने की लड़ाई इतनी तेज हो गई कि कई दौर की बैठकें होने के बाद भी इन पर निर्णय नहीं हो पा रहा है। भोपाल से लेकर दिल्ली तक जिला अध्यक्षों के चयन को लेकर कवायद जारी है। इस बीच पिछले कई दिनों से चल रही इस कवायद में भाजपा अपने मूल स्वरूप से अलग दिखाई दी। प्रदेश में संभवत: पहली बार हुआ कि पिछले पांच दिनों से जिला अध्यक्षों के चयन को लेकर चल रही कवायद पर अंतिम निर्णय की स्थिति नहीं बन सकी। जबकि पहले भाजपा में ऐसा नहीं होता था, भाजपा में रायशुमारी के बाद यह तय हो जाता था कि किस जिले का अध्यक्ष कौन बनेगा।
नेताओं के बीच चल रही होड़
जानकारी के अनुसार पार्टी के दिग्गज नेता जिला संगठन पर अपनी पकड़ मजबूत रखना चाहते हैं। बड़े नेता अपने समर्थक को जिला अध्यक्ष बनवाने के लिए जोर लगा रहे हैं। अपने ज्यादा समर्थकों को जिलों की कमान दिलाने के लिए नेताओं के बीच होड़ चल रही है। स्थिति यह है कि क्षेत्र के विधायकों- सांसदों में सामंजस्य नहीं हो रहा है। कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं की वर्किंग और पंसद भाजपा संगठन से मेल नहीं खा रही है। निवर्तमान जिला अध्यक्ष अपने स्थान पर अपने पट्ठे के लिए लॉबिंग कर रहे हैं। सूत्रों की मानी जाए तो केंद्रीय संगठन का बहुत ज्यादा हस्तक्षेप जिला अध्यक्ष के चयन को लेकर नहीं हैं। चुनावी प्रक्रिया के बीच शिवप्रकाश और सरोज पाण्डेय को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इन्होंने दो जनवरी को बैठक कर जिला अध्यक्ष के चयन को लेकर केंद्रीय संगठन की ओर से औपचारिकता पूरी कर दी, लेकिन प्रदेश भाजपा के नेता ऐसे सक्रिय हुए कि जो घोषणा पांच जनवरी तक होना थी, वह 9 जनवरी की दोपहर तक नहीं हो सकी। केंद्रीय संगठन भी इस बार मप्र भाजपा के नेताओं के बीच जो चल रहा है उसे वॉच कर रहा है।
यहां इनके बीच वर्चस्व की जंग
प्रदेश में हर बड़ा नेता चाहता है कि उसके क्षेत्र में उसकी पसंद का जिलाध्यक्ष बने। जिला अध्यक्ष के चयन की खींचतान को लेकर सबसे चर्चित जिला सागर है। वहीं ग्वालियर चंबल में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, बुंदेलखंड में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह, मंत्री गोविंद राजपूत, मध्य क्षेत्र में शिवराज सिंह चौहान, भगवान दास सबनानी, विश्वास सारंग, हेमंत खंडेलवाल, मालवा-निमाड़ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, राज्यसभा सदस्य सुमेर सिंह सोलंकी, महाकौशल में मंत्री प्रहलाद पटेल, मंत्री राकेश सिंह, फग्गन सिंह कुलस्ते और विंध्य में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, सांसद गणेश सिंह के बीच वर्चस्व की जंग चल रही है।
मप्र में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष का चुनाव होगा दिलचस्प
10 Jan, 2025 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल । मप्र में भाजपा जिलाध्यक्षों के चुनाव को लेकर जिस तरह खींचतान मची है उससे लग रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष की रेस दिलचस्प होने जा रही है। क्योंकि जिला अध्यक्षों के लिए पहले से खींचतान मची है। ऐसे ही प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए समीकरण बैठाए जा रहे हैं। कई कद्दावर नेताओं के नाम रेस में हैं। इस पद का इतिहास बताता है कि 1980 के बाद से सात बार मालवा क्षेत्र के नेता अध्यक्ष बने। इनमें सुंदरलाल पटवा, कैलाश जोशी, विक्रम वर्मा जैसे नेता शामिल हैं।
चार बार ग्वालियर-चंबल के नेताओं को मौका मिला। नरेंद्र सिंह तोमर दो बार प्रदेश अध्यक्ष रहे। ऐसे ही महाकौशल से दो और मध्य क्षेत्र से एक बार शिवराज सिंह प्रदेश अध्यक्ष रहे। हालांकि बुदेलखंड और विंध्य के नेताओं की किस्मत साथ नहीं दे रही है। इसी का नतीजा है कि इस क्षेत्र के नेताओं की प्रदेश अध्यक्ष बनने की हसरत अभी तक अधूरी रही है। इसीलिए जब भी प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ शुरू होती है, तब-विंध्य और बुदेलखंड के नेता दबी जुबान से इस बात को कहते रहते हैं कि आखिर हमारा नंबर कब आएगा। इस बार ‘कौन सी युक्ति से नियुक्ति’ होगी इसके लिए भोपाल से दिल्ली तक समीकरण बैठाए जा रहे हैं। 1980 के बाद दो बार ऐसा भी हुआ है जब छत्तीसगढ़ के भाजपा नेताओं को प्रदेश अध्यक्ष बनने का मौका मिला है। 1990 से 1994 तक रायगढ़ के लखीराम अग्रवाल और 1997 से 2000 तक नंदकुमार राय अध्यक्ष रहे। मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा लगातार 58 माह से पद पर हैं। इससे पहले 50 माह तक पटवा दूसरे कार्यकाल में 12 जनवरी 1986 से 8 मार्च 1990 तक अध्यक्ष रहे।
अविभाजित मप्र में इन्हें मिला अवसर
1980 के बाद दो बार ऐसा भी हुआ है जब छत्तीसगढ़ के भाजपा नेताओं को प्रदेश अध्यक्ष बनने का मौका मिला है। 1990 से 1994 तक रायगढ़ के लखीराम अग्रवाल और 1997 से 2000 तक नंदकुमार राय अध्यक्ष रहे।
वीडी का रेकॉर्ड
मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा लगातार 58 माह से पद पर हैं। इससे पहले 50 माह तक पटवा दूसरे कार्यकाल में 12 जनवरी 1986 से 8 मार्च 1990 तक अध्यक्ष रहे।
किस क्षेत्र से कितने नेताओं को मिला मौका
अध्यक्ष जिला क्षेत्र कार्यकाल
सुंदरलाल पटवा मंदसौर मालवा 5 दिसं. 1980-30 नवं. 1983
कैलाश जोशी देवास मालवा 1 दिसं. 1983-31 मार्च 1985
शिवप्रसाद चेनपुरिया जबलपुर महाकौशल 1 अप्रेल 1985-11 जन. 1986
सुंदरलाल पटवा मंदसौर मालवा 12 जन. 1986-8 मार्च 1990
लक्ष्मीनारायण पांडे रतलाम मालवा 14 जून 1994-8 नवं. 1997
विक्रम वर्मा धार मालवा 12 जु. 2000-26 अग. 2002
कैलाश जोशी देवास मालवा 27 अग. 2002-16 मई 2005
शिवराज सिंह विदिशा मध्य 16 मई 2005-17 फर. 2006
सत्यनारायण जटिया उज्जैन मालवा 27 फर.2006-21 नवं. 2006
नरेंद्र सिंह तोमर ग्वालियर ग्वालियर 22 नवं. 2006-7 मई 2010
प्रभात झा ग्वालियर ग्वालियर 8 मई 2010-15 दिसं. 2012
नरेंद्र सिंह तोमर ग्वालियर ग्वालियर 16 दिसं. 2012-16 अग. 2014
नंदकुमार चौहान खंडवा निमाड़ 16 अग. 2014-4 जन. 2016
नंदकुमार चौहान खंडवा निमाड़ 4 जन. 2016-18 अप्रेल 2018
राकेश सिंह जबलपुर महाकौशल 18 अप्रे. 2018-15 फर. 2020
वीडी शर्मा मुरैना चंबल 15 फर. 2020 से लगातार
एचएमपीवी से निपटने मप्र का स्वास्थ्य महकमा तैयार
10 Jan, 2025 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल । देश में एक बार फिर चीनी वायरस ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। भारत सरकार ने देश के सभी राज्यों को सतर्क रहने के लिए कहा है, लेकिन चिंता जैसी स्थिति फिलहाल नहीं है। इस संबंध में केंद्र की ओर से राज्यों को किसी भी तरह के लिखित निर्देश नहीं मिले हैं। इधर मप्र सरकार ने किसी भी विकट स्थिति से निपटने के लिए अपने स्वास्थ्य संसाधनों को अलर्ट कर कर दिया है। स्वास्थ्य विशेष रोजाना श्वसन संबंधी मरीजों की बीमारियों को नजर रखे हुए हैं।
जानकारी के अनुसार रविवार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीनी वायरस एचएमपीवी को कोरोना की तरह खतरनाक बताकर मीडिया में खबरें सामने आईं। हालांकि भारतीय विशेषज्ञों ने अगले ही दिन इस वायरस की गंभीरता को लेकर स्थिति यह कहकर स्पष्ट कर दी कि इस तरह का वायरल सालों से भारत में है और सर्दियों में ज्यादा फैलता है। इससे श्वसन संबंधी बीमारी होती है। लेकिन भारतीय विशेषज्ञों ने इसे कतई गंभीर नहीं बताया है। स्वास्थ्य आयुक्त मप्र ने बताया कि किसी भी बीमारी की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। फिलहाल किसी खास बीमारी या वायरस विशेष की गंभीरता को लेकर भारत सरकार से कोई निर्देश नहीं मिले हैं।
स्वास्थ्य महकमे में जारी है बैठकों का दौर
एचएमपीवी को लेकर मप्र सरकार के स्वास्थ्य विभाग में बैठकों का दौर जारी है। सोमवार से नियमित तौर उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल एवं विभाग के प्रमुख सचिव संदीप यादव एवं स्वास्थ्य आयुक्त तरुण राठी अलग-अलग बैठकें कर रहें। भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय से भी नियमित संपर्क में है। इस बीच मप्र सरकार ने सभी जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मोहल्ला क्लीनिक समेत अन्य सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाओं से लेकर अन्य जरूरी सुविधाओं की वस्तुस्थिति का आंकलन किया है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि मौसमी बीमारियों समेत अन्य सभी बीमारियों की दवाएं अनिवार्य रूप से सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध कराने को कहा गया है।
मानव संसाधन बढ़ाने पर जोर
इधर स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सक एवं पैरामेडिकल स्टॉफ की भर्ती प्रक्रिया तेज कर दी है। उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल इसको लेकर विभागीय स्तर पर बैठक कर चुके हैं। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती इसी महीने शुरू हो जाएगी। इसी तरह चिकित्सकों की भर्ती केा लेकर लोक सेवा आयोग के साथ भी पत्राचार एवं बैठकों का क्रम जारी है। उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने बताया कि लोक सेवा आयोग के माध्यम से एक साथ 2 हजार चिकित्सक एवं विशेषकों की भर्ती की प्रक्रिया होना है। यह बड़ा लक्ष्य है।
मप्र में नहीं है जांच लैब
ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) को लेकर पहली बार इस तरह की चर्चा सामने आई हैं। इससे पहले राज्य में कभी भी इस वायरस को लेकर कोई बीमारी फैलने की जानकारी सरकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि एचएमपीवी की जांच की मप्र में कहीं भी लैब नहीं है। शुरूआत में कोरोना की जांच की भी मप्र में कोई लैब नहीं थी। बाद में कोरोना जांच की किट ही बाजार में उपलब्ध हो गई थी।
मध्यप्रदेश में प्लास्टिक उद्योग के विकास की अपार संभावनाएं- मुख्यमंत्री डॉ. यादव
9 Jan, 2025 11:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में प्लास्टिक उद्योग के विकास की अपार संभावनाएं हैं। यह उद्योग का नया क्षेत्र है और इसका बड़ा बाजार है। इस उद्योग में रोजगार की भी बेहतर और बड़े अवसर हैं। प्लास्टिक उद्योग के विकास के लिए इसके दुष्प्रभाव को दूर कर सावधानी रखते हुए आगे बढ़ेंगे। प्लास्टिक के दुष्प्रभावों को दूर करने के लिए रियूज और वेस्ट मैनेजमेंट को बढ़ावा दिया जाएगा। रियूज और वेस्ट मैनेजमेंट की तकनीक को विकसित करने के लिए वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की मदद भी ली जाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को इंदौर में प्रारंभ हुए प्लास्टिक उद्योग सम्मेलन प्लास्टपैक 2025 को संबोधित कर रहे थे। यह सम्मेलन 12 जनवरी तक उद्योग मेले के रूप में चलेगा। इसमें प्लास्टिक उद्योग से जुड़ी 400 से अधिक कंपनियां और 2 हजार से अधिक प्रदर्शक हिस्सा ले रहे हैं। यह कार्यक्रम मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) के सहयोग से हो रहा है। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक रमेश मेंदोला तथा मधु वर्मा, महापौर परिषद के सदस्य अभिषेक शर्मा तथा इंडियन प्लास्टपेक फोरम के चेयरमेन सचिन बंसल आदि मौजूद थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्लास्टिक उद्योग के विकास की प्रदेश में अपार संभावनाएं हैं। इस उद्योग के विकास में पूरी मदद दी जाएगी। बदलते दौर में प्लास्टिक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। यह जीवन उपयोगी भी है। प्लास्टिक ने अपनी उपयोगिता कोविड काल में साबित की है। यह जीवन रक्षक के रूप में सामने आया है। कोविड के दौरान पीपीई कीट हो या मॉस्क आदि में प्लास्टिक का उपयोग हुआ है। जीवन में इसकी उपयोगिता को नकारा नहीं जा सकता है। प्लास्टिक के दुष्प्रभाव भी हैं। इन दुष्प्रभावों को दूर करने के प्रयास होंगे। पर्यावरण की चिंता भी रखी जायेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति और नई दिशा दी जा रही है। प्रदेश में औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए रिजनल स्तर पर इन्वेस्टर समिट आयोजित किये जा रहे हैं। इसके बेहतर परिणाम भी मिल रहें हैं। प्रदेश में अब तक 6 रिजनल इन्वेस्टर समिट आयोजित हो चुकी है। इनके माध्यम से चार लाख करोड़ रूपये का निवेश प्रदेश में आया है। इससे लगभग तीन लाख लोगों को रोजगा मिलेगा। उक्त निवेश से प्रदेश में 200 करोड़ रूपये का राजस्व भी प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में गुजरात मॉडल पर तेजी से विकास किया जा रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने सम्मेलन में लगाये गये स्टॉलों का अवलोकन भी किया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में इंडियन प्लास्ट पैक फोरम के चेयरमेन सचिन बंसल ने स्वागत भाषण देते हुए आयोजन के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) के साझा प्रयासों से आयोजित इस विशाल सम्मेलन में 400 से अधिक कंपनियां अपनी नवीनतम तकनीक, उत्पाद और नवाचारों का प्रदर्शन कर रही हैं। इस आयोजन में 2 हजार से अधिक प्रदर्शक भाग ले रहे है। एक्जीबिशन सेंटर को छह अलग अलग डोम में विभाजित किया गया है, जहां लाइव मशीनों और उत्पादों का प्रदर्शन किया जा रहा है। यह सम्मेलन व्यापारियों और उद्यमियों के लिए तो एक मंच है ही, साथ ही छात्रों, शोधकर्ताओं और पर्यावरणविदों के लिए भी एक ज्ञानवर्धक अनुभव प्रदान करेगा।
जीआईएस से पहले एमएसएमई की नई पॉलिसी से प्रदेश के उद्योग परिदृश्य को मिलेगी नई उड़ान : मंत्री काश्यप
9 Jan, 2025 10:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने उद्योग संघों के प्रतिनिनिधों से कहा है कि प्रदेश सरकार ग्लोबल इन्वेस्टर समिट से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में नई एमएसएमई (MSME) पॉलिसी के साथ ही भूमि आवंटन नियम और प्रोत्साहन की ऐसी पॉलिसी लाएगी जिससे मध्यप्रदेश में स्थानीय उद्यमिता का विकास विदेशी निवेशकों को प्रदेश में उद्योग लगाने के लिये आकर्षित करने के साथ सर्वाधिक रोजगार सृजन वाले प्रदेश के रूप में उभरे।
मंत्री काश्यप गुरुवार को मंत्रालय में उद्योग संघों के पदाधिकारियों से एमएसएमई की प्रचलित पॉलिसी पर चर्चा और सुझाव संगोष्ठी में संवाद कर रहे थे। इस अवसर पर प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह, सचिव सुप्रियंका दास और उद्योग आयुक्त दिलीप कुमार भी उपस्थित थे।
मंत्री काश्यप ने कहा कि उद्योग प्रतिनिधियों से प्राप्त सुझाव को नई पॉलिसी में शामिल करने से का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार नये औघोगिक क्षेत्रों के विकास और निर्यात संवर्धन पर मजबूत पहल करेगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि एमएसएमई में प्रोत्साहन के लिये और भी अधिक पारदर्शी नीति बनाई जाएगी और स्टार्ट-अप के साथ क्लस्टर के विकास का नया ईको-सिस्टम बनेगा। यह नव उदमियों, अनुसूचित जाति, जनजातीय और महिलाओं की इकाईयों के लिए मददगार होगा।
एमएसएमई मंत्री ने कहा कि वर्ष-2025 को उद्योग वर्ष के रूप में मनाने की मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप ऐसी पॉलिसी बनाई जा रही है, जिससे स्थानीय स्तर पर निवेश और उद्योग का विकास हो सके। उन्होंने ने कहा कि संभाग स्तर पर हो रही रीजनल इंडस्ट्री कॉन्कलेव के अच्छे परिणाम परिलक्षित हुए हैं। इससे नजदीकी जिलों के उद्योगपतियों के सहभागिता से निवेश और रोजगार की संभावनाएं बनी है।
मंत्री काश्यप ने कहा कि अलगे सप्ताह निर्यात को बढ़ाने के लिए एक वृहद कार्यशाला होगी। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर स्थापित किए गए निवेश सेंटर वन, स्टॉप सेंटर के रूप में उद्योगपतियों से निरंतर संवाद स्थापित करेगी। मंत्री काश्यप कहा कि कलेक्टर्स इस समिति को लीड करेंगे।
मंत्री काश्यप ने बताया कि एमएसएमई की प्रोत्साहन सब्सिडी को बढ़ाकर 700 से 1100 करोड़ रूपए कर दिया गया है। उद्योग परिसंघों ने सरकार की इस पहल पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि एक ऐसा पोर्टल विकसित किया जा रहा है जिसमें पॉलिसी और नीतियों के साथ उद्योगपतियों का एक ही जगह डाटा संग्रहित होगा। उद्योग संघों के प्रतिनिधियों को प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह ने भी आश्वस्त किया कि नई पॉलिसी में उद्योगों के बेहतर विकास की नीति अपनाई जाएगी।
संवाद में एमएसएमई विकास नीति के संबंध में मुख्य रूप से निर्यात को बढ़ावा देने के लिए ट्रांसपोर्ट अनुदान, नवकरणीय ऊर्जा मुख्यत: सोलर प्लांट को सहायता, जेड प्रमाणन को बढ़ावा देने, इंडस्ट्रियल अवशिष्ट के लिए सहायता एवं टेस्टिंग लैब को बढ़ावा देने के सुझाव प्रतिनिधियों के द्वारा दिए गए। औघोगिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने दोहरे कराधान को समाप्त करने, भूखंड हस्तानांतरण नीति को सरल किए जाने, महिला उद्मियों द्वारा संचालित व्यवसायों को अधोसंरचना प्रदान करने, बड़े शहरों के साथ सभी जिलों में एमएसएमई के लिए नए औदयोगिक क्षेत्र विकसित करने, प्रोत्साहन नीति में डाइ मोल्ड एंड फिक्चर क्षेत्र को शामिल करने, बड़े शहरों में बहुमंजिला औद्योगिक क्षेत्रों के निर्माण तथा वर्तमान उद्योगों की उत्पादन लागत कम करने गुणवत्ता बढ़ाने नवीन तकनीक एवं के प्रयोग एवं आधुनिकीकरण पर अतिरिक्त अनुदान प्रदान करने जैसे सुझाव दिए।
इस अवसर पर लघु उद्योग भारती गोविंदपुरा इंडस्ड्री, एसोसियेशन फिक्की, दलित इण्डियन चेम्बर ऑफ कामर्स (डिक्की), सी.आई.आई., एमडी सुव्रत इण्डस्ट्रीयल सिस्टम, पीएचडीसीसीआई एसोचेम, मण्डीदीप इण्ड, एसोसियेशन, एसोसिएशन ऑफ इण्डस्ट्रीज इन्दौर, अवंतिका उद्योग संघ उज्जैन, एमआईएमपी उज्जैन, मावे जबलपुर एवं बगरोदा औद्योगिक संघ भोपाल के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
आम जनों के प्रति हमेशा आत्मीयता का भाव रखें : राज्यपाल पटेल
9 Jan, 2025 10:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रशिक्षु अधिकारी अपने सेवा काल में आम जनों के प्रति हमेशा आत्मीयता का भाव रखे। गरीब, वंचित और निर्दोषों के साथ शालीन व्यवहार करे।ईमानदार, निष्पक्ष और संवेदनशील अधिकारियों को ही आम जनता के बीच विश्वास और भरपूर सम्मान प्राप्त होता है।
राज्यपाल पटेल 29वें बैच के सशस्त्र सीमा बल के प्रशिक्षु सहायक कमाण्डेंट अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर प्रशिक्षु अधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएं दी। राजभवन के बैक्वेट हॉल में आयोजित सौजन्य भेंट कार्यक्रम में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव के.सी. गुप्ता भी मौजूद रहे।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि आप उन चुनिंदा व्यक्तियों में शामिल हैं जिन्हें सशस्त्र सीमा बल का महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर देश सेवा का अवसर प्राप्त हुआ है। आप सभी को आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएँ देने का अवसर मिलेगा। इस लिए जरूरी है कि आपके कार्य, आचरण और मर्यादा में सदैव जनहित प्राथमिकता में रहे। उन्होंने कहा कि आपका प्रत्येक कदम राष्ट्र की सेवा और जनता के कल्याण की दिशा में होना चाहिए। यही आपकी सफलता और सच्ची सेवा का मापदंड होगा। आपकी प्रतिबद्धता और दक्षता सशस्त्र सीमा बल की गौरवशाली परंपरा को और भी ऊँचाई पर ले जाएगी जो आपके परिवार, समुदाय, बल, और पूरे राष्ट्र के लिए गर्व का विषय होगी।
डिजिटल चुनौतियों के प्रति रहे जागरूक और आमजनों को भी करे
राज्यपाल पटेल ने कहा कि वर्तमान में साइबर अपराध, तस्करों द्वारा नई-नई तकनीकों का उपयोग, और अन्य उभरती चुनौतियाँ आपके सेवा काल में बड़ा दायित्व प्रस्तुत करेगी। सभी अधिकारी डिजिटल युग की समस्याओं जैसे डिजिटल अरेस्ट, हेकिंग आदि के प्रति पहले स्वयं जागरूक और सतर्क रहे, फिर आमजनों को भी अपने स्तर पर जागरूक करने का प्रयास करे।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि एस.एस.बी. ने वर्तमान परिदृश्य में शांति और व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा, नक्सलवाद और सीमा प्रबंधन की हर चुनौतियों पर अपनी प्रभावशाली भूमिका निभाई है। मुझे पूरा विश्वास है कि उत्कृष्ट प्रशिक्षण, अद्वितीय कौशल, और दृढ़ संकल्प के आधार पर आप इन चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करेंगे।
राज्यपाल पटेल का सौजन्य भेंट कार्यक्रम में पौधा भेंट कर स्वागत और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया गया। उन्होंने सभी प्रशिक्षु सहायक कमाण्डेंट का परिचय प्राप्त किया। स्वागत उद्बोधन सशस्त्र सीमा बल अकादमी भोपाल के उप महानिरीक्षक अजीत सिंह राठौर ने दिया। उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग से चयनित 29वें बैच सहायक कमाण्डेंट प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षु अधिकारियों की ओर से सुराशि भारद्वाज और आशीष राघव ने अकादमी के प्रशिक्षण अनुभवों को साझा किया। उप कमाण्डेंट सचिन कुमार ने आभार माना।
भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े प्रदेश के सभी स्थान तीर्थ के रूप में होंगे विकसित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
9 Jan, 2025 09:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक अनुष्ठान का पर्व अनवरत जारी है। मध्यप्रदेश में विद्यमान भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े सभी स्थानों को तीर्थस्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण की जन्म-स्थली के परिवार सहित दर्शन के बाद मीडिया से चर्चा में यह विचार व्यक्त किए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की समाज हितैषी लीलाओं के साथ उनका शिक्षा ग्रहण करना, मित्रता के उत्कृष्ट भाव का प्रकटीकरण, भगवान परशुराम से सुदर्शन चक्र प्राप्त करने जैसी कई गतिविधियां मध्यप्रदेश की भूमि पर हुई हैं। इन सभी स्थानों को राज्य सरकार तीर्थ के रूप में विकसित करने जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। देश-दुनिया में बड़ी संख्या में विद्यमान भगवान श्रीकृष्ण के अनुयायियों के लिए मध्यप्रदेश में विकसित यह तीर्थ श्रद्धा और आकर्षण का केंद्र बनेंगे। राज्य सरकार द्वारा इस वर्ष पूरे प्रदेश में गौवर्धन पूजा और गीता जयंती का धूमधाम से आयोजन किया गया। प्रदेश में जन्माष्टमी भी पूर्ण उल्लास और आनंद के साथ मनाई जाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सामाजिक समरसता, सहिष्णुता और सत्य के मार्ग पर चलने की जो प्रेरणा प्रदान की है, हम सब उसे अपने जीवन में धारण करें यही ईश्वर से प्रार्थना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मथुरा, गोकुल, वृंदावन और भगवान कृष्ण के जन्म-स्थली पर उनका आगमन भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से ही संभव हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान श्रीकृष्ण से प्रदेशवासियों के मंगल और कल्याण की प्रार्थना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जन्म-स्थली में दर्शन के बाद एक दुकान से मधुसूधन के मनमोहक बाल स्वरूप की प्रतिमा ली।
जनजातीय कल्याण कार्यक्रम क्रियान्वयन का लक्ष्य अन्त्योदय हो : राज्यपाल पटेल
9 Jan, 2025 09:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि जनजातीय कल्याण कार्यक्रम क्रियान्वयन में अन्त्योदय का लक्ष्य रहें। जनजातीय समुदाय की सबसे पिछड़ी जनजाति, उसमें सबसे पिछड़े परिवार को हितलाभ देने में प्राथमिकता दी जाए।
राज्यपाल पटेल ने गुरुवार को पशुपालन, उच्च शिक्षा, वन और जनजातीय कार्य विभाग की क्रमिक रुप से राजभवन में समीक्षा की। बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव के.सी. गुप्ता भी मौजूद थे।
राज्यपाल द्वारा जनजातीय कार्य विभाग की समीक्षा
राज्यपाल पटेल ने जनजातीय कार्य विभाग की समीक्षा में कहा कि प्रधानमंत्री की पहल जनमन कार्यक्रम जनजातीय समुदायों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का अभूतपूर्व प्रयास है। जनजातीय परिवार को विकास की मुख्यधारा में जोड़ने का दुर्लभ अवसर है। आवश्यकता संवेदनशीलता के साथ लक्ष्य बनाकर समर्पित भाव से कार्य करने की है। उन्होंने कहा कि जनमन के तहत बनी कार्य-योजना के कार्य समय पर पूरे हों और उनकी गुणवत्ता उत्कृष्ट हो। उन्होंने सिकल सेल के संबंध में चर्चा के दौरान कन्या छात्रावास के रक्त परीक्षण में 78 प्रतिशत लड़कियों में रक्त अल्पता मिलने की जानकारी देते हुए, छात्रावासों में पौष्टिक भोजन के अनुसार मेन्यू तैयार करने की जरूरत बताई। उन्होंने जनमन के तहत संचालित मोबाइल मेडिकल वैन में सिकल सेल जांच और सिकल सेल औषधियों के वितरण की व्यवस्था किए जाने के लिए कहा है। जनजातीय विकासखण्डों के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के परिसर में जन औषधि केन्द्र खोलने और केन्द्र संचालन की पात्रता पूरी करने वाले जनजातीय युवाओं को नियुक्त करने के लिए कहा है।
जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने जनजातीय छात्रावासों के रहवासियों को हेल्थ कार्ड उपलब्ध कराने की बात कही है। बैठक में प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य गुलशन बामरा उपस्थित थे।
राज्यपाल द्वारा पशुपालन एवं डेयरी विभाग की समीक्षा
राज्यपाल पटेल ने पशुपालन एवं डेयरी विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना क्रियान्वयन की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य पी.वी.टी.जी. जनजातियों को सतत आजीविका उपलब्ध कराना है। जरूरी है कि योजना में अति गरीब परिवारों को प्राथमिकता दी जाए। योजना राज्य सरकार के कार्यक्रम के रूप में पृथक से ही संचालित की जाए। किसी अन्य योजना अथवा कार्यक्रम में समावेशन नहीं किया जाए। राज्यपाल को बताया गया कि राजभवन के निर्देशानुसार जनसंख्या के अनुपात में लक्ष्यों का निर्धारण किया गया है। बैगा जनजाति के 30, सहरिया जनजाति के 374 और भारिया जनजाति के 30 हितग्राही परिवारों को 2-2 दुधारू पशुओं से लाभान्वित किया जा रहा है। पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल और प्रमुख सचिव पशुपालन उमाकांत उमराव भी उपस्थित थे।
राज्यपाल द्वारा उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा
राज्यपाल पटेल ने उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा में जनजाति प्रतिभाओं के टैलेंट पूल के ऑन एवं ऑफ लाइन सम्मेलनों के आयोजनों की जरूरत बताई है। जनजाति कल्याण योजनाओं केन्द्र सरकार के पोर्टल के साथ विभाग को संबंद्ध होने के लिए कहा है, जिससे योजनाओं के दोहरे लाभ की समस्या उत्पन्न नहीं हो। उन्होंने कहा कि जनजातीय आबादी के मान से विभागीय बजट के प्रावधान के संबंध में विचार किया जाना चाहिए। विभाग द्वारा जनजातीय युवाओं की खेल प्रतिभा और अभिरुचि के अनुसार केन्द्र सरकार के खेल प्राधिकरण के साथ समन्वय से किसी एक खेल को चयनित कर प्रोत्साहन का प्रयास समग्रता के साथ किया जाए। उन्होंने जनजातीय पदों के बैकलॉग के संबंध में भी चर्चा की। उच्च शिक्षा विभाग से अपेक्षा की है कि वह बैकलॉग के स्वरूप और पदों की पूर्ति में होने वाली समस्याओं को चिन्हांकित करें। पदों की पूर्ति के लिए योग्य जनजाति उम्मीदवारों की उपलब्धता कराने के प्रयासों का नेतृत्व करें। बैठक में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन, आयुक्त उच्च शिक्षा निशांत बरबड़े उपस्थित थे।
राज्यपाल ने की वन विभाग के कार्यों की समीक्षा
राज्यपाल पटेल ने वन विभाग की समीक्षा में विभाग के अधिकारियों से अपेक्षा की है कि वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत सामुदायिक वन अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विशेष पहल करें। आवश्यकता होने पर मानव संसाधनों की उपलब्धता के संबंध में विचार किया जाना चाहिए। राज्यपाल को बताया गया कि वन अधिकार अधिनियम के तहत पट्टे देने के प्रावधानों को सरलीकृत किया गया है। विभागीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार पट्टाधारियों को वन अधिकार अधिनियम के तहत पट्टे देने की कार्रवाई प्रचलित है। अपर मुख्य सचिव वन अशोक बर्णवाल उपस्थित थे।
महिला नायब तहसीलदार को ऑन लाइन न्यू ईयर पार्टी का टिकट बुक कराना पड़ा महंगा
9 Jan, 2025 08:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। होटल ताज में न्यू ईयर पार्टी का टिकट बुक कराने के लिये महिला नायब तहसीलदार को ऑन लाइन नंबर सर्च कर उस पर संपर्क करना महंगा पड़ गया। यह नंबर सायबर ठग का था, जिसने उन्हें टिकट बुक कराने का झांसा देते उनके पति के एकाउंट से 2 लाख 64 हजार की रकम उड़ा दी। महिला अधिकारी के पति अंकित दुबे सीआईएसएफ में असिस्टेंट कमाडेंट हैं, पत्नि ने उनके क्रेडिड कार्ड से पैमैंट करने की बात करते हुए सारी डिटेल शेयर करने के साथ ही ओटीपी भी बता दिया। थाना पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार अंकित दुबे सीआईएएसएफ में असिस्टेंट कमाण्डेंट के पद पर हैं। वर्तमान में उनकी पोस्टिंग छिंदवाड़ा जिले में हैं। उनकी पत्नी नायब तहसीलदार हैं। पत्नी परिवार के साथ शाहपुरा में रहती हैं। बीती 31 दिसंबर को परिवार ने नए साल की पार्टी के लिए होटल ताज जाने का प्लान बनाया था, लेकिन उनके पास होटल ताल का कोई संपर्क नंबर नहीं था। गूगल सर्च करने पर होटल ताज की वेबसाइट नजर आई उसको क्लिक कर उन्होंने दिए गए मोबाइल नंबर पर कॉल किया। दूसरी और से बात करने वाले व्यक्ति ने कहा कि बुकिंग के लिये बहुत कम टिकट बचे हुए हैं। आपको जल्दी टिकट की बुकिंग करनी होगी। बुकिंग के प्रोसेस की जानकारी लेने के बाद नायब तहसीलदार पत्नी ने कहा कि वे क्रेडिट कार्ड के जरिए पैमैंट करेंगी। नायब तहसीलदार पत्नी ने भुगतान के लिए अपने पति सहायक कमाण्डेंट अंकित दुबे के क्रेडिट कार्ड की डिटेल शातिर को बता दी। जालसाज ने उनको ओटीपी भेजा वह ओटीपी पति अकिंत दुबे के मोबाइल पर पहुंचा। नायब तहसीलदार की पत्नी ने पति को कॉल कर ओटीपी पूछा और युवक को बता दिया। विश्वास में लेने के लिये अज्ञात आरोपी ने पहले पहले 102 रुपए भेजे। और दूसरी बार में उसने क्रेडिट कार्ड के एकांउट से 2 लाख 64 हजार रुपए की रकम उड़ा दी। ढाई लाख से अधिक रकम निकलने का मैसेज आते ही अकिंत दुबे समझ गये की वह सायबर ठगी का शिकार हो गये है। उन्होंने होटल ताज से जानकारी जुटाई तब पता चला कि उनके टिकट की बुकिंग नहीं हुई और जो वेबसाइट और मोबाइल नंबर उन्होनें बताया है कि वह होटल ताज का नहीं है। इसके बाद उन्होनें पहले तो अपने स्तर पर जालसाज के बारे में पता करने की कोशिश की। इसके बाद मामले की शिकायत शाहपुरा थाने में की गई। शिकायत की जॉच के आधार पर पुलिस ने मोबाइल फोन नंबर 9343287665 के धारक के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस मोबाइल नंबर सहित उन बैंक खातों की डिटेल के आधार पर आरोपी की पहचान जुटाने के प्रयास कर रही है, जिनमें ठकी की रकम ट्रांसफर की गई है।
प्रेमिका ने पति, भाई के साथ मिलकर पूर्व प्रेमी को ब्लैकमेल कर ऐंठे 12 लाख
9 Jan, 2025 07:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। पुराने शहर के शाहजहॉनाबाद इलाके में प्रेमिका द्वारा शादी के बाद पूर्व प्रेमी को ब्लैकमेल कर लाखो की रकम ऐंठने का मामला सामने आया है। आरोपी महिला की करतूत में उसका पति और भाई भी शामिल थे। तीनो ने फरियादी को ब्लैकमेल कर उससे 12 लाख की रकम ऐंठ ली। अब आरोपी उससे इससे अधिक रकम की डिमांड कर रहे थे, जिससे परेशान होकर फरियादी पुलिस के पास जा पहुंचा। मिली जानकारी के अनुसार प्रॉपर्टी का काम करने वाले फरियादी ने पुलिस को बताया कि पूर्व में उनका आरोपी महिला नूरजहां से नजदीकियां थी। बाद में महिला की शादी अन्य व्यक्ति से हो गई लेकिन इसके बाद भी वो लगातार उनके संपर्क में बनी रही। फरियादी की कुछ पुरानी पर्सनल तस्वीरें महिला के पास थी। बीते समय वह इन तस्वीरो के आधार र अपने पति और भाई के साथ मिलकर उसे ब्लैकमेल करने लगी। तीनो ने उसे बदनाम करने और झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर करीब 12 लाख की रकम ऐंठ ली थी। इसके बाद तीनो ने इससे अधिक रकम देने की मांग की। ब्लेकमेंलिग से तंग आकर फरियादी पुलिस के पास पहुंचा और लिखित शिकायत कर दी। पुलिस का कहना है, कि महिला उसके भाई और पति के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की जॉच करने के साथ ही आरोपियों की तलाश की जा रही है।
जनसुनवाई में पुलिस के खिलाफ की गई शिकायत का स्टेटस घर बैठे देख सकेंगे, हेल्पलाइन नंबर. 181 पर मिलेगा स्टेटस अपडेट
9 Jan, 2025 06:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: मध्य प्रदेश में अब आपको पुलिस के खिलाफ शिकायतों का ऑनलाइन अपडेट मिलेगा. दरअसल, एमपी में पुलिस की जनसुनवाई को सीएम हेल्पलाइन नंबर 181 से भी जोड़ दिया गया है. इसके तहत अब आप घर बैठे भी जनसुनवाई में पुलिस के खिलाफ की गई शिकायत का स्टेटस देख सकेंगे. 29 दिन में होगा शिकायत का समाधान: ऐसा पहली बार होगा जब जिले के पुलिस अधीक्षक को अपने ही थाने या स्टाफ के खिलाफ मिली शिकायत की जांच पूरी करने के लिए सिर्फ 7 दिन का समय मिलेगा. इसके अलावा 29 दिन में शिकायत का समाधान करना अनिवार्य होगा. इस नियम के तहत समाधान नहीं होने पर मामला पुलिस मुख्यालय से एडीजी के पास पहुंचेगा. इसमें एसपी को बताना होगा कि इतने दिन में भी शिकायतकर्ता की शिकायत का समाधान क्यों नहीं हुआ?
सभी अफसरों की बनाई जा रही हैं लॉगइन आईडी
एडीजी शिकायत डीसी सागर के अनुसार - पुलिस की जनसुनवाई में आने वाली शिकायतों को सीएम हेल्पलाइन 181 से जोड़ने से अब उनकी मॉनिटरिंग, समाधान में तेजी आएगी और पारदर्शिता भी बढ़ेगी। डीजीपी के निर्देश पर इसके लिए थाना प्रभारी से लेकर एसपी और संबंधित शाखा के एडीजी तक की लॉगइन आईडी बनाई गई है।
सीएम हेल्पलाइन नंबर 181 पर ऑनलाइन अपडेट होंगी शिकायतें
शिकायत करने की इस नई व्यवस्था के अनुसार जनसुनवाई में पुलिस मुख्यालय को जो भी शिकायतें मिलेंगी, उन्हें जल्द से जल्द सीएम हेल्पलाइन 181 पर अपलोड किया जाएगा। इस प्रक्रिया में शिकायतों को सबसे पहले टीआई (एल-1) के पास भेजा जाएगा। लेकिन, अगर 15 दिन में समाधान नहीं होता है तो मामला एसपी (एल-2) को सौंप दिया जाएगा।
नियम के अनुसार एसपी को 7 दिन के भीतर निराकरण के लिए कार्रवाई करनी होगी। इसके बाद शिकायत एल-3 कैटेगरी यानी डीआईजी-आईजी के पास जाएगी। अगर यहां भी शिकायत का समाधान नहीं होता है तो मामला नोडल अधिकारी एडीजी शिकायत शाखा के पास भेजा जाएगा।
मध्य प्रदेश सरकार की शराब नीति में बदलाव की योजना, अहातों को लेकर सरकार ले सकती है फैसला
9 Jan, 2025 03:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार इस बार शराब नीति में बदलाव करेगी। अब तक दुकानों के समूह बनाकर नीलामी की जाती थी, लेकिन वर्ष 2025-26 के लिए एकल दुकानों की नीलामी की जाएगी। इससे प्रतिस्पर्धा पैदा होगी और राजस्व में वृद्धि होगी। प्रदेश में 3,605 कंपोजिट शराब दुकानें हैं, जिनकी नीलामी 1,100 समूह बनाकर की गई। तय किया गया है कि आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभा की अनुमति से ही शराब की दुकानें खोली जाएंगी। धार्मिक स्थलों के पास स्थित कुछ दुकानें बंद भी की जाएंगी। 2025-26 के लिए प्रस्तावित नीति जल्द ही कैबिनेट में पेश की जा सकती है।
दुकानों के समूह बनाकर की गई प्रक्रिया
प्रदेश में देसी और विदेशी शराब की अलग-अलग दुकानों के स्थान पर कंपोजिट दुकानों की व्यवस्था लागू की गई है। वार्षिक मूल्य में 15 प्रतिशत की वृद्धि करके नवीनीकरण किया गया। चूंकि दुकानों के समूह बनाकर प्रक्रिया की गई, इसलिए अधिकांश दुकानें नवीनीकरण में चली गईं। जिनका नवीनीकरण नहीं हुआ, उन्हें वार्षिक मूल्य घटाकर दिया गया। इस बार नवीनीकरण के स्थान पर एकल दुकानों की नीलामी पर जोर दिया जाएगा। वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और नए लोगों को भी मौका मिलेगा। राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। 2003 में एकल दुकान नीलामी की व्यवस्था थी।
सरकार अहाते का विकल्प तलाश सकती है
शिवराज सरकार ने 2023 में अहाते को बंद करने का फैसला किया था। इसके पीछे तर्क यह था कि अहाते में बैठकर शराब परोसने से कानून व्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है। झगड़े होते हैं। हालांकि, इस व्यवस्था को बंद करने के बाद लोग दुकान के आसपास शराब पीने लगे हैं, जिससे आम लोगों को भी परेशानी हो रही है। इसे देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था का प्रावधान किया जा सकता है।
धार्मिक स्थलों के आसपास स्थित दुकानें हो सकती हैं बंद
उज्जैन समेत कुछ अन्य धार्मिक स्थलों के आसपास स्थित शराब की दुकानें बंद हो सकती हैं। दरअसल, महाकाल लोक बनने के बाद देशभर से आने वाले पर्यटकों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। कई बार शराब की दुकानों के आसपास कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ जाती है। इससे गलत संदेश जाता है, इसलिए कुछ दुकानें बंद की जा सकती हैं।
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