मध्य प्रदेश
वन कटाई में शामिल फॉरेस्ट डिप्टी रेंजर निलंबित
5 Jan, 2025 12:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल । छतरपुर में वन विभाग के डिप्टी रेंजर रवि खरे को अवैध वन कटाई मामले में शामिल होने के चलते निलंबित किया गया है। उनका एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिसमें वह किसी व्यक्ति से पेड़ों की कटाई के बारे में बातचीत कर रहे थे। इसके बाद रात को बीट गंगवाहा क्र. पी-648 में एक ट्रैक्टर ट्राली में अवैध सागौन की लकड़ी जब्त की गई। इसके बाद वन मंडल अधिकारी सर्वेश सानवानी ने डिप्टी रेंजर पर वन विभाग की छवि खराब करने और वन कटाई में शामिल होने के चलते तत्काल कार्रवाई की।
निलंबन अवधि में मुख्यालय भेजा
उन पर सिविल सेवा आचरण अधिनियम 1956 के नियम 3 का उल्लंघन करने के लिए मध्यप्रदेश सिविल सेवा वर्गीकरण नियंत्रण और अपील नियम 1966 के नियम 9 (क) के तहत निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें मुख्यालय वन परिक्षेत्र बक्सवाहा भेजा गया है।
यह था मामला
बसारी रेंज में गुरुवार रात तीन बजे वन विभाग की टीम ने लगभग दो लाख रुपए की सागौन की लकड़ी को ट्रैक्टर सहित जब्त किया। आरोप लगा था कि, वहां विभाग के डिप्टी रेंजर रवि खरे की शह पर लंबे समय से सागौन लकड़ी की तस्करी चल रही थी। इसके कुछ ऑडियो भी शुक्रवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इन वायरल ऑडियो में डिप्टी रेंजर रवि खरे पेड़ों की कटाई अपनी जिम्मेदारी पर रात के अंधेरे में करने को कह रहे थे। साथ ही ऑडियो में वह पैसों के लेन-देन की भी बात करते सुनाई दे रहे थे। इसके बाद डिप्टी रेंजर रवि खरे को निलंबित किया गया।
लहसुन की नीलामी में चलेगी किसानों की मर्जी
5 Jan, 2025 11:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल । मंडी के बने सरकारी नियम-कायदों में लहसुन को सब्जी की श्रेणी में ही रखा जाएगा। किसान की मर्जी है कि वो चाहे तो अपनी उपजाई लहसुन को सरकारी सिस्टम से बेचे या व्यापारियों के पास ले जाकर बेचे। इंदौर के बिजलपुर के किसान कैलाश मुकाती के प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय दिया है। इसके साथ ही मप्र में आठ साल से लहसुन की बिक्री पर चल रहे विवाद का पटाक्षेप हो गया है। इसी के साथ सरकारी सिस्टम से लहसुन की नीलामी करवाने के बंधन से किसानों को मुक्ति मिल गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय देते हुए मप्र हाई कोर्ट की डिवीजनल बेंच के उस निर्णय को बरकरार रखा है कि लहसुन जल्द खराब होने वाली कमोडिटी है। ऐसे में इसे सब्जियों की श्रेणी में रखा जाएगा। किसान अपनी सुविधा व दाम के अनुसार इसकी बिक्री करवा सकते हैं। लहसुन की नीलामी में सालभर से किसानों की नहीं सरकारी मर्जी चल रही थी। बीते वर्ष फरवरी से इंदौर मंडी में लहसुन की सीधी नीलामी करने से आढ़तियों और व्यापारियों को रोक दिया गया था। नियम लागू कर दिया था कि अनाज-मसालों की तरह लहसुन की नीलामी सरकारी मंडी में सरकारी कर्मचारी करेंगे। इसके बाद मंडी में कई बार विरोध प्रदर्शन भी हुआ। किसानों ने मांग की कि उनकी उपज को कहां बेचना है यह उनकी मर्जी पर छोडऩा चाहिए।
आठ वर्षों से विवाद, उलझे थे किसान
प्रदेश में लहसुन पर विवाद करीब आठ वर्षों से चल रहा था। किसानों के संगठन के आवेदन पर मप्र मंडी बोर्ड ने 2015 में लहसुन को सब्जी की श्रेणी में शामिल कर लिया था। इससे किसानों को यह छूट मिल गई थी कि वे चाहे तो लहसुन को सरकारी बोली प्रक्रिया में बेचें या चाहे तो सब्जियों के साथ आढ़तियों या व्यापारियों के द्वारा नीलाम करवा दें। लेकिन इसके कुछ समय बाद ही कृषि विभाग ने इस आदेश को रद कर दिया और कृषि उपज मंडी समिति अधिनियम(1972) का हवाला देकर लहसुन को मसाले की श्रेणी में डाल दिया। 2016 में मंडी व्यापारियों की एसोसिएशन हाई कोर्ट पहुंची।
मर्जी से नीलामी की छूट दी
कोर्ट ने 2017 में लहसुन को सब्जी में माना और किसानों की मर्जी से नीलामी की छूट दी। इसी बीच एक व्यापारी मुकेश सोमानी ने पुनर्विचार याचिका दायर की। हाई कोर्ट ने फिर से फिर से लहसुन को मसालों की श्रेणी में रख दिया। इस आधार पर सरकार ने फरवरी 2024 में आदेश जारी कर इंदौर मंडी में हो रही लहसुन की नीलामी से आढ़तियों को बाहर कर दिया। सरकारी कर्मचारियों से नीलामी शुरू कर दी। किसानों ने इसका विरोध किया। कहा कि उनकी जानकारी और पक्ष जाने बगैर निर्णय हुआ। बिजलपुर के किसान कैलाश मुकाती ने किसानों की ओर से हाई कोर्ट की डिवीजनल बेंच में अपील की। इस पर जुलाई 2024 में हाई कोर्ट की डिवीजनल बेंच ने निर्णय दिया कि लहसुन सब्जी है और किसान इसे अपनी मर्जी जहां चाहे बिक्री कर सकता है।
अब अध्यक्षों के नाम की घोषणा का इंतजार
5 Jan, 2025 10:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल । भाजपा के संगठन चुनाव में अब जिला और शहर अध्यक्षों के नाम की घोषणा का इंतजार है। अपने समर्थक को पद दिलाने के लिए हर नेता ने पूरी ताकत लगा दी है। इस बात की संभावना है कि अध्यक्षों की नियुक्ति में प्रदेश के तीन नेताओं की पसंद को महत्व दिया जाएगा।
भाजपा के संगठन चुनाव में अपने समर्थक को अध्यक्ष पद पर बैठाने के लिए भाजपा के बड़े नेता पूरी ताकत लगाए हुए हैं। इसी का परिणाम है कि इस बार भाजपा में जबरदस्त कशमकश की स्थिति बन गई है। पार्टी हाईकमान जहां महिलाओं को तवज्जो देने की बात कर रहा है तो वहीं पार्टी के प्रदेश के नेता मेरा समर्थक सबसे अच्छा के ध्येय वाक्य पर चल रहे हैं। इस समय भाजपा में भोपाल, इंदौर सहित आठ जिलों में नियुक्त किए जाने वाले अध्यक्ष को लेकर सबसे ज्यादा गदर मची हुई है। प्रदेश भाजपा कार्यालय के नेताओं का कहना है कि अगले दो दिन के अंदर सभी जिला अध्यक्ष के नाम की सूची जारी कर दी जाएगी। भोपाल में चर्चा का सिलसिला पूरा हो चुका है। जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा अपने जिले में जाकर जो जानकारी प्राप्त की गई, वह जानकारी राज्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष रख दी गई है। इस जानकारी के आधार पर हर शहर और जिला अध्यक्ष के पद के लिए तीन नाम का पैनल बनाकर दिल्ली भेजने का काम हो चुका है। अब दिल्ली से जिन नामों पर मुहर लगकर आएगी उन नामों की घोषणा भोपाल से कर दी जाएगी। भाजपा के इस संगठन चुनाव में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा और पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा की पसंद को महत्व मिलने के आसार नजर आ रहे हैं। इसमें भी ऐसा समझा जा रहा है कि मुख्यमंत्री और संगठन महामंत्री की पसंद को ज्यादा तवज्जो दी जाएगी। इसके साथ ही इस चुनाव में कुछ नेताओं को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिल सके इसके लिए उत्तरप्रदेश के प्रभावी भाजपा नेता भी सक्रिय हो गए हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में मध्यप्रदेश के प्रभारी रहे केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की ओर से भी कुछ नामों को आगे बढ़ाया गया है।
संघ और भाजपा नेताओं के समन्वय से तय होंगे नाम
भाजपा के संगठन चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी कर रहे नेताओं में से कुछ नेता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शरण में चले गए हैं। जिन नेताओं ने अब तक संघ के स्वयंसेवक के रूप में अपना ज्यादा समय देकर बेहतर कार्य किया है वह चाहते हैं कि उनके नाम को संघ की ओर से भी आगे बढ़ाया जाए। इस स्थिति को देखते हुए ऐसा लगता है कि संघ की पसंद के आधार पर भी कुछ अध्यक्ष नियुक्त किए जा सकते हंै।
कुछ नामों से चौंकाएगी भाजपा
भाजपा में जब इस तरह के फैसले लेने की घड़ी आती है तब चौंकाने वाला नाम घोषित कर दिया जाता है। इस बार भी इस बात की संभावना बहुत ज्यादा है कि कुछ जिलों में अध्यक्ष के पद पर पार्टी की ओर से ऐसे नाम की घोषणा कर दी जाए, जिस नाम को सुनकर सभी चौंक जाएं। अध्यक्षों की नियुक्ति में पार्टी द्वारा जातिगत समीकरण पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही वर्तमान में आंबेडकर वाले मुद्दे के प्रभावी होने के कारण पर्याप्त संख्या में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग से भी अध्यक्ष नियुक्त किए जाएंगे।
आउटसोर्स-अस्थाई कर्मचारियों का प्रदेशभर में प्रदर्शन 7 को
5 Jan, 2025 09:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल । न्यूनतम वेतन एवं नौकरी में सुरक्षा की मांग को लेकर अस्थाई और आउटसोर्स कर्मचारी 7 जनवरी को पूरे प्रदेश में प्रदर्शन करेंगे। आउटसोर्स, अस्थाई कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के आव्हान पर सभी जिलों में कलेक्टोरेट में कर्मचारी इक_े होंगे और नारे लगाएंगे। इन मांगों को लेकर मोर्चा चरणबद्ध आंदोलन चला रहा है। इससे पहले जिलों में प्रदर्शन और मंत्रियों के निवास पर डेरा डाला जा चुका है।
मोर्चा के अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने बताया कि आंदोलन के अगले चरण में सभी 55 जिलों में कलेक्टोरेट में प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री और श्रम मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। शर्मा ने कहा कि ग्राम पंचायत, नगरीय निकाय, स्कूल,छात्रावास, अन्य सरकारी विभागों में हजारों अस्थाई कर्मचारी हैं, जिन्हें विभाग सीधे वेतन देता है, इन्हें श्रम कानून का लाभ नहीं मिल रहा है, जबकि श्रमायुक्त के आदेश इन्हें न्यूनतम वेतन, पीएफ, ईएसआई के दायरे में लाने के हैं। ऐसी ही स्थिति सरकारी विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की है, जिन्हें भी श्रम कानून के तहत मिले अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। 7 जनवरी को सभी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, निजी क्षेत्र में काम करने वाले सभी अस्थाई, आउटसोर्स, ठेका कर्मचारी एवं श्रमिकों को श्रम कानूनों का लाभ दिलाने, पुनरीक्षित न्यूनतम वेतन अप्रैल 2024 से एरियर सहित भुगतान कराने की मांग को लेकर आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि हम न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 के तहत अप्रैल 2024 में पुन: न्यूनतम वेतन पुनरीक्षित कर 21,000 रुपए करने और ग्राम पंचायतों एवं स्कूलों-छात्रावासों के कर्मचारियों को श्रम कानूनों का लाभ दिलाने की मांग कर रहे हैं। शर्मा ने प्रदेश के सभी आउटसोर्स, अस्थाई कर्मचारी, श्रमिकों से प्रदर्शनों में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। बता दें कि 3 दिसंबर को इंदौर हाईकोर्ट ने न्यूनतम वेतन से लगी रोक हटा दी है। फिर भी श्रम विभाग पुनरीक्षित न्यूनतम वेतन का एरियर सहित भुगतान कराने का आदेश नहीं निकाल रहा है। जिससे प्रदेश के 35 लाख से अधिक श्रमिक-कर्मचारी में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
25 प्रतिशत आरक्षण से खुश नहीं अतिथि विद्वान
5 Jan, 2025 08:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल । लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे अतिथि विद्वानों को मध्य प्रदेश सरकार ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित उच्च शिक्षा विभाग के राजपत्रित(असिस्टेंट प्रोफेसर, ग्रंथपाल, क्रीड़ा अधिकारी सहित अन्य) कर्मचारियों की भर्ती में 25 प्रतिशत आरक्षण दिया है। उन्हें आयु सीमा में अधिकतम 10 वर्ष की छूट भी दी गई है, पर प्रदेश के अतिथि विद्वान सरकार के इस निर्णय से खुश नहीं हैं। अतिथि विद्वान संघ के अध्यक्ष डॉ. देवराज सिंह का कहना है कि 20-20 साल से सेवाएं दे रहे अतिथि विद्वान अब ओवर ऐज हो रहे हैं। ऐसे में उनका, योग्यता एवं अनुभव के आधार पर पुनर्वास किया जाना चाहिए।
प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में 4500 अतिथि विद्वान कार्यरत हैं। इनमें से 3650 अतिथि विद्वान यूजीसी के मापदंड पूरे करते हैं। जबकि 850 एमफिल और पीजी है। डॉ. सिंह कहते हैं कि जो अतिथि विद्वान पहले से यूजीसी के मापदंड पूरे कर रहे हैं, उन्हें फिर से परीक्षा में बैठाना कहां तक ठीक है। इस निर्णय के कारण तो 1125 अतिथि विद्वान ही परीक्षा में बैठने के लिए पात्र होंगे। ऐसे में सभी को लाभ कैसे मिलेगा, जबकि पिछले 20 साल से भी अधिक समय से वह इसी उम्मीद में पढ़ा रहे हैं कि कभी न कभी नियमित हो जाएंगे। वे कहते हैं कि मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग ने 28 साल बाद साल 2017 में परीक्षा कराई थी। ऐसा ही आगे हुआ तो हम कभी नियमित नहीं हो पाएंगे। वर्तमान में कार्यरत अतिथि विद्वानों की उम्र 45 से 50 साल हो गई है। इसके बाद उन्हें दूसरा कोई मौका भी नहीं मिलेगा। इस निर्णय से अतिथि विद्वानों का काफी नुकसान होगा। हम मुख्यमंत्री से मिलेंगे और संशोधन का निवेदन करेंगे।
हटाए जाने का डर बरकरार
1 सितंबर 2023 को मुख्यमंत्री निवास में अतिथि विद्वानों की महापंचायत बुलाई गई थी, जिसमें 50 हजार रुपए मासिक वेतन देने, सरकारी कर्मचारियों के समान अवकाश, नजदीक के कॉलेज में तबादला, सीधी भर्ती में 25 प्रतिशत पद अतिथियों के लिए आरक्षित करने, प्रतिवर्ष 4 एवं अधिकतम 20 अंक देने, फालेन आउट अतिथि विद्वानों को फिर से रिक्त पदों पर मौका देने की घोषणा तो पूरी हो गईं, पर अतिथि विद्वान को सेवा से बाहर नहीं करने की घोषणा अब तक पूरी नहीं हुई है।
केंद्र के अनुरूप पेंशन के नियम बनाएगी मप्र सरकार
5 Jan, 2025 07:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल । मप्र में कर्मचारियों के अवकाश और पेंशन के नियम लंबे समय बाद संशोधित किए जाएंगे। इन्हें केंद्र सरकार के नियमों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इसके लिए वित्त विभाग ने सामान्य प्रशासन और वित्त विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारियों का समूह बनाया है, जो मार्च 2025 तक अनुशंसा देगा। इसके आधार पर नियम वित्तीय वर्ष के समाप्त होने से पहले नियम को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा है। वित्त विभाग ने पेंशन और अवकाश नियम में संशोधन के लिए गठित समूह में वित्त सेवा के आरके जैन, सामान्य प्रशासन विभाग के एमके बातव को शामिल किया गया है। इसके साथ ही वित्त सेवा के दो अन्य अधिकारी भी इस काम को देखेंगे।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार पेंशन नियमों में कई परिवर्तन कर चुकी हैं। इसमें 25 वर्ष से अधिक अविवाहित पुत्री, विधवा, परित्याक्ता को परिवार पेंशन देने का प्रविधान है। पेंशनरों की मांग को देखते हुए सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जीपी सिंघल की अध्यक्षता वाले कर्मचारी आयोग ने पेंशन नियम का परीक्षण करके संशोधन संबंधी अपनी रिपोर्ट वित्त विभाग को तीन वर्ष पहले दी थीं। इस पर विभाग ने पेंशन संचालनालय से अभिमत भी मांगा था, जो दिया जा चुका है। सूत्रों का कहना है कि इसी रिपोर्ट के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इसी तरह अवकाश संबंधी 1977 के नियम भी वर्तमान व्यवस्था को देखते हुए बदले जाएंगे।
पूर्व केंद्रीय मंत्री पचौरी ने किया आर.एम.पी .सिंह की किताबों का विमोचन
4 Jan, 2025 04:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल / पूर्व केंद्रीय मंत्री ने आज मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार एवं जनसंपर्क के पूर्व अपर संचालक आरएमपी सिंह की पुस्तक रामचरित मानस में संवाद संप्रेषण और परिहार शासको के उत्थान एवं पतन का विमोचन किया| श्री पचौरी ने कहा कि समाज के विकास और रचनात्मक समझ कायम रखने में मीडिया और लेखकों की महत्वपूर्ण भूमिका है समाज का दायित्व कि वह समय पर लेखकों सम्मानित करे| श्री पचौरी ने आरएमपी सिंह द्वारा रचित रामचरितमानस में संवाद संप्रेषण पुस्तक के द्वितीय संस्करण और परिहार शासको के उत्थान एवं पतन का विमोचन करते हुए कहा कि यह गर्व की बात है मध्य प्रदेश के रहने वाले श्री आरएमपी सिंह ने देश के लिए काफी कुछ किया है वर्तमान दौर में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका समाज को देखने में मिल रही है लेकिन श्री सिंह ने बताया है कि रामायण काल में भी संवाद संप्रेषण की महत्वपूर्ण भूमिका रही है रामायण काल में भी मीडिया की भूमिका के महत्व को इस किताब में रेखांकित किया गया है श्री सिंह ने रामायण काल में हुई पत्रकार वार्ता का भी इस पुस्तक में जिक्र किया है |यह एक बड़े सौभाग्य की बात है जब पूरा देश राम मय है और हम राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के 1 साल पूर्ण करने जा रहे हैं ऐसे अवसर पर इस पुस्तक का समाज के सामने आना अत्यंत महत्वपूर्ण है उन्होंने अपनी तरफ से लेखक को साधुवाद देते हुए कहा कि यह किताब आने वाले कई पीढियां के लिए शोध का विषय होगी| पुस्तकों के लेखक आरएमपी सिंह ने कहा कि मुझे इस किताब लेखन की प्रेरणा शेक्सपियर की कविता डिवालिंग टाइम से मिली| पुस्तक लेखन के प्रति मेरा रुझान शेक्सपियर की किताबें पढ़ने के बाद ही जागृत हुआ समय सब कुछ बदल सकता है लेकिन लेखक के लेखन को कभी नष्ट नहीं कर सकता जिसका जीता जागता उदाहरण है रामायण ,गीता ,महाभारत, कुरान बाइबल जैसे अन्य कई महत्वपूर्ण कृतियां जो आदि अनादि काल से समाज को दिशा दिखाने का कार्य कर रही है|
इस अवसर पर राजनीतिक विश्लेषक एवं स्वदेश न्यूज़ चैनल के सलाहकार संपादक कृष्ण मोहन झा ने कहा की श्री आरएमपी सिंह ने लगभग 12 किताबों की रचना की है विभिन्न विषयों पर लिखी गई किताबें आज भी युवाओं के लिए लाभदायक है रामचरितमानस में संवाद संप्रेषण किताब के प्रथम संस्करण का जब विमोचन हुआ था उस समय मुझे याद है कि तत्कालीन जनसंपर्क मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने कहा था कि यह किताब समाज खुले दिल से स्वीकार करेगा और यह किताब इतनी बिकेगी की प्रकाशक को तीन चार संस्करण प्रकाशित करने पड़ेंगे |आज मुझे उनकी यह बात सच साबित होते हुए दिखाई दे रहा है श्री सिंह ने जनसंपर्क पर भी चार किताबों का लेखन किया है,| इस अवसर पर डिजियाना मीडिया समूह के फाउंडर ग्रुप एडिटर रिजवान अहमद सिद्दीकी ने कहा की लेखक समाज को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करता है श्री आरएमपी सिंह की है किताब परिहार शासको को समझने का अवसर प्रदान करेगी साथ ही रामचरितमानस के विभिन्न पहलुओं के साथ संवाद संप्रेषण भी यह बताने का प्रयास करेगी की पुरातन काल में भी मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है स्वरूप भिन्न जरूर रहा हो|
कार्यक्रम की शुरुआत में अतिथियों का स्वागत फूल माला के साथ श्रीमती रागिनी सिंह ने किया और आभार प्रदर्शन मीनाक्षी सिंह ने किया, इस अवसर पर सीआरपी सिंह की पोतियां tiaara और निहारा ने भी अपने विचार व्यक्त किया|
भाभी से होती है 12 साल के बच्चे की 'शादी', टीकमगढ़ में निभाई जाती है अनोखी परंपरा
4 Jan, 2025 11:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ के एक गांव में शादी की अनोखी परंपरा है। यहां 12 साल के बच्चे की घोड़ी की जगह बकरे पर बैठाकर बारात निकाली जाती है। शादी से पहले पूरे गांव में बारात घूमती है। खास बात ये है कि बच्चे की शादी उसी की भाभी से होती है।
सैकड़ों साल पुरानी परंपरा
दरअसल, ये शादी असल नहीं बस एक परंपरा है। ये परंपरा लोहिया समाज की है जो 400 साल से चल रही है। यहां बड़े बेटे का कर्णछेदन शादी समारोह की तरह बड़ी धूमधाम से होता है। कर्णछेदन के दौरान बड़े बेटे को दूल्हा बनाया जाता है और उसकी बारात बकरे पर निकाली जाती है। शादी में परिवार के अलावा रिश्तेदार और पड़ोसी भी शामिल होते हैं। शादी की रस्में पूरे विधि विधान से होती है।
बीते दिनों भी ऐसी ही शादी देखने को मिली। यहां, प्रकाश अग्रवाल नाम के एक व्यक्ति के बड़े पोते राघव अग्रवाल का कर्णछेदन समारोह शादी की तरह हुआ। पुरानी परंपरा के अनुसार, शादी से पहले दूल्हे को बकरे पर घूमाया गया।
बारात निकलने के दौरान रिश्तेदारों ने खूब डांस किया और आतिशबाजी भी की।
कई पीढ़ियों से चल रही परंपरा
प्रकाश अग्रवाल ने बताया कि ये कर्णछेदन की परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है। ये उनके दादा-परदादा के जमाने से चल रही है। आज भी लोहिया समाज के लोग इसे कर रहे हैं।
खरेंटा गांव में कुत्ते पर गोबर फेंकने पर बवाल, दबंगों ने परिवार पर किया हमला
4 Jan, 2025 11:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुरैना। मुरैना से एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। अंबाह थाना क्षेत्र के खरेंटा गांव में कुत्ते पर गोबर फेंकने पर दबंगों ने एक परिवार पर हमला बोल दिया। पहले सड़क पर महिला को घसीट-घसीट कर पीटा, फिर लाठी-फरसे से हमला किया। बीच बचाव करने आए महिला के बच्चों को भी बख्शा नहीं गया और उन्हें भी बुरी तरह पीटा।
दरअसल, रामवरण माहौर का 12 वर्षीय बेटा घूरे पर गोबर फेंकने जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में पड़ोसी का कुत्ता उस पर भौंकने लगा। डरकर बच्चे ने तसले में भरा गोबर कुत्ते पर ही फेंक दिया। इस बात पर अनिल तोमर, राजेश तोमर व उसके स्वजन ने विवाद शुरू कर दिया और बच्चे की मां को ही पीटने लगे।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। अंबाह पुलिस ने पांच आरोपितों पर केस दर्ज कर लिया है।
विवाद इतना बढ़ा कि पड़ोसियों ने लाठी-डंडे लेकर लड़के के घर पर धावा बोल दिया। बच्चे की मां अनीता को बाल पकड़ कर घर से निकाला और सड़क पर घसीटते ले गए। अनीता को बचाने उसकी बेटियां आईं तो दबंगों ने उनकी भी पिटाई कर दी, यह देख अनीता ने प्रतिरोध किया तो उस पर लाठी व फरसे से हमला कर दिया, जिससे वह घायल हो गई।
पीड़ित महिला की बेटियों को अंबाह अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, जबकि गंभीर घायल अनीता को अंबाह से जिला अस्पताल में रेफर किया गया है। इसका वीडियो किसी ने मोबाइल से बना लिया और सोशल मीडिया पोस्ट कर दिया।
अंबाह टीआई सतेंद्र सिंह कुशवाह ने बताया कि घायल महिला की शिकायत पर कुम्हेर सिंह तोमर, राजेश सिंह तोमर, अनिल तोमर, गबडू तोमर और प्रदीप सिसौदिया पर एफआइआर दर्ज कर ली है।
भोपाल गैस कांड: जहरीले कचरे के निष्पादन पर सीएम मोहन यादव ने आपात बैठक बुलाई, कहा......
4 Jan, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल गैस कांड के जहरीले कचरे के निष्पादन को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच सीएम मोहन यादव ने देर रात बुलाई आपातकालीन उच्च स्तरीय बैठक,, बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्री के अलावा बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, धार के प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, लीगल डिपार्टमेंट के अधिकारी, विधि विशेषज्ञ, सीएस एवं अन्य अधिकारी रहे मौजूद,, बैठक में कचरे के निष्पादन में कोर्ट के निर्देश का पालन करते हुए आगामी कार्यवाही पर मंथन हुआ,, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि राज्य सरकार जनता के साथ दृढ़ता से खड़ी है। जनता का किसी भी प्रकार अहित हो, यह हम बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। माननीय न्यायालय के सामने विषय लाएंगे और न्यायालय के आदेश के परिपालन में ही किसी कार्यवाही पर आगे बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागरिकों से अपील की है कि झूठी अफवाहों पर विश्वास न करें। हम सब जनता के साथ हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार जनकल्याणकारी, जनहितैषी तथा जनभावनाओं का आदर करती है। जनता से अपील है कि किसी भ्रम में न आएं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार जनता के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाली सरकार है। इस नाते सदैव जनता के हित को लेकर हम आगे बढ़े हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और हाईकोर्ट के आदेश के परिपालन में यूनियन कार्बाइड का कचरा माननीय न्यायालय के निर्देश पर पीथमपुर पहुंचाने का परिपालन किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमने न्यायालय की याचिकाओं और आदेशों के तारतम्य में सुरक्षा मापदंडों का परिपालन करते हुए केवल परिवहन किया है। माननीय न्यायालय ने इस कार्य के लिए डेडलाइन दी थी कि 4 जनवरी के पहले-पहले कचरा निर्धारित स्थान पर पहुंचना चाहिए। न्यायालय को 6 जनवरी तक इसकी रिपोर्ट अपेक्षित थी। इसी परिप्रेक्ष्य में आदेश के परिपालन में यह निर्दिष्ट स्थान पर, जो उनके द्वारा बताया गया था, परिवहन आदेश न्यायालयों द्वारा दिया गया था।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उनके ध्यान में यह बात आयी कि जनभावनाओं के लिए ऐसी परिस्थितियों में जनता तक यह विषय पहुंचना चाहिए। सुरक्षा के मापदंडों पर किसी प्रकार से कोई खतरा या कोई डर का भाव जनता के बीच आया तो राज्य सरकार यह प्रयास करेगी कि माननीय न्यायालय के समक्ष यह विषय प्रस्तुत हो। इसके बाद ही आगामी किसी प्रकार की कार्यवाही की जाए। माननीय न्यायालय जैसा आदेश देगा, हम उसका पालन करने के लिए तत्पर रहेंगे। तब तक आगे नहीं बढ़ेंगे, जब तक न्यायालय कोई निर्देश जारी नहीं करता।
अपने अनुभव से अन्य लोगों का मार्ग करें प्रशस्त : उप मुख्यमंत्री देवड़ा
3 Jan, 2025 11:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि शासकीय सेवा में काम करने के बाद सेवानिवृत्त होना सिर्फ शासकीय कार्य से निवृत्त होना है, अब आप स्वतंत्र होकर कई रचनात्मक कार्य कर सकते हैं और अपने अनुभव से लोगों का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने यह बात मप्र अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स) की ओर से भारत की प्रथम महिला शिक्षिका माता सावित्रीबाई फुले की 194वीं जयंती के अवसर पर मप्र मंत्रालयीन सेवा से वर्ष 2024 में सेवानिवृत्त शासकीय सेवकों के विदाई समारोह के दौरान कही। उन्होंने कहा कि आप अपना समय भविष्य की नई बुनियाद तैयार करने में लगा सकते हैं।
विदाई समारोह के शुभारंभ पर उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने माता सावित्रीबाई फुले और बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर के छायाचित्र पर पुष्पमाला अर्पित कर देश भक्ति गीत और मध्यप्रदेश गायन से कार्यक्रम की शुरूआत की। इस अवसर पर माता सावित्रीबाई फुले द्वारा भारत की महिलाओं के लिए किये गये संघर्ष, योगदान व लोकहित में समर्पित जीवन पर प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री देवडा ने सभी सेवानिवृत्त शासकीय सेवकों को बधाई एवं शुभकानाए दी और दीर्घ आयु, स्वस्थ जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि शासकीय कर्मचारियों एवं अधिकारियों का विदाई समारोह अत्यंत सराहनीय कार्य है। सामाजिक दायित्व के निर्वहन के साथ समरसता व भाईचारा और वरिष्ठों के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
विदाई समारोह में वर्ष 2024 में सेवानिवृत्त हुए कुल 84 शासकीय सेवक शामिल हुए। सभी का उप मुख्यमंत्री देवड़ा एवं महानिदेशक आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी जे.एन. कंसोटिया द्वारा शॉल, श्रीफल व स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मान किया। इस अवसर पर जे.एन. कंसोटिया, महानिदेशक आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी, भोपाल, अध्यक्ष अजाक्स मंत्रालय घनश्याम भकोरिया समेत बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त अधिकारी, कर्मचारी एवं उनके परिजन उपस्थित रहे।।
792 वन ग्रामों का राजस्व ग्रामों में किया परिवर्तन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
3 Jan, 2025 11:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में 6 माह का विशेष अभियान चलाकर 792 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की अधिसूचना संबंधित कलेक्टर्स द्वारा जारी कर दी गई है। इसमें बैतूल जिले के 91, डिंडौरी के 86, मंडला के 75, खरगौन के 65, बड़वानी के 64, खंडवा के 51, सीहोर के 49, छिंदवाड़ा के 48, बालाघाट के 46, हरदा के 42, बुरहानपुर के 37, सिवनी के 28, नर्मदापुरम के 24, भोपाल के 14, धार के 13, देवास के 12, सिंगरौली के 11, नरसिंहपुर के 10, रायसेन के 7, टीकमगढ़ एवं जबलपुर के 5-5, सागर के 4, विदिशा, राजगढ़, इंदौर, कटनी और गुना के 1-1 गांव शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में कुल 827 वन ग्राम बचे थे। इनमें से 792 को राजस्व ग्राम में परिवर्तित किया जा चुका है। शेष 35 वन ग्रामों के वीरान/विस्थापित होने अथवा डूब क्षेत्र में होने से परिवर्तन करने की आवश्यकता नहीं रही। इस प्रकार विस्थापित होने वाले गांव को छोड़कर प्रदेश के सभी वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में परिवर्तित कर दिया गया है। इन 792 ग्रामों के राजस्व नक्शा बनाने का कार्य राजस्व विभाग द्वारा शुरू कर दिया है। भू-अभिलेख और नक्शा पूरे हो जाने से अब ग्रामवासियों को बड़ी सहूलियत होगी।
अब यह सुविधाएं मिल सकेंगी
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन ग्राम के राजस्व ग्राम में परिवर्तित हो जाने से ग्रामवासियों को अनेक सुविधाएं और विकास की सौगातें मिल सकेंगी। बँटवारा और नामांतरण होने के साथ फसलों की गिरदावरी भी हो सकेगी। प्राकृतिक आपदा पर फसल बीमा योजना का लाभ मिलेगा, आँगनवाड़ी एवं विद्यालय भवन स्वीकृत हो सकेंगे और स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी। बिजली, पानी, सड़क और तालाबों आदि सुविधाओं का निर्माण भी हो सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्राम सभा के माध्यम से वनवासियों के कल्याण के लिये कार्य का अवसर भी मिलेगा।
देश के 80 प्रतिशत से अधिक घड़ियालों का घर है चंबल नदी
3 Jan, 2025 10:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : वन्य जीवन से समृद्ध मध्यप्रदेश बाघ प्रदेश, चीता प्रदेश, तेंदुआ प्रदेश के साथ अब घड़ियाल प्रदेश भी है। यहाँ गिद्धों का आदर्श रहवास है। देश में घड़ियालों की संख्या 3044 है और उसमें से मध्यप्रदेश में 2456 है। इस प्रकार देश में 80 प्रतिशत से अधिक घड़ियालों का घर है मध्यप्रदेश। यहाँ पर डॉल्फिन का भी रहवास है। मध्यप्रदेश में अथक प्रयासों से घड़ियालों के संरक्षण का कार्य किया गया। उनके प्राकृतिक रहवास को सुरक्षित बनाया गया और अवैध शिकार पर रोक लगायी गयी। साथ ही अवैज्ञानिक मछली पकड़ने के तौर-तरीकों को बंद किया गया।
435 किलोमीटर क्षेत्र को किया चंबल घड़ियाल अभयारण्य घोषित
चंबल नदी के 435 किलोमीटर क्षेत्र को चंबल घड़ियाल अभयारण्य घोषित किया गया है। चंबल नदी मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सीमा पर बहती है। नदी में घड़ियालों की वृद्धि की वजह देवरी ईको सेंटर है। इस सेंटर में घड़ियाल के अण्डे लाये जाते हैं और उनसे बच्चे निकलने के बाद उनका पालन किया जाता है। बच्चों की आयु 3 साल होने पर उन्हें नदी में छोड़ दिया जाता है। प्रतिवर्ष 200 घड़ियाल को “ग्रो-एण्ड-रिलीज’’ कार्यक्रम के तहत नदी में छोड़ा जाता है। स्वच्छ नदियों में रहना और नदियों को स्वच्छ रखना घड़ियालों की विशेषता है। इसी वजह से कई राज्यों से इसकी माँग की जाती है। चंबल नदी के घड़ियाल प्रदेश एवं देश की नदियों की शान बढ़ा रहे हैं। जलीय जीव घड़ियाल नदियों का ईको सिस्टम मजबूत करते हैं।
देश में वर्ष 1950 और 1960 के दशक के बीच घड़ियालों की आबादी में 80 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आयी। भारत सरकार ने 1970 के दशक में इसे संरक्षण प्रदान किया। संरक्षण समूहों ने प्रजनन और पुन: प्रवेश कार्यक्रम शुरू किये। हालांकि, वर्ष 1997 और वर्ष 2006 के बीच घड़ियालों की आबादी में गिरावट आयी।
घड़ियाल को गेवियलिस गैंगेटिकस, जिसे गेवियल या मछली खाने वाला मगरमच्छ भी कहा जाता है। वयस्क मादा घड़ियाल 2.6 से 4.5 मीटर (8 फीट 6 इंच से 14 फीट 6 इंच) लम्बी होती है और नर घड़ियाल 3 से 6 मीटर (9 फीट 10 इंच से 19 फीट 8 इंच) लम्बे होते हैं। वयस्क नर के थूथन के अंत में एक अलग सिरा होता है, जो घड़ा नामक मिट्टी के बर्तन जैसा दिखता है, इसलिये इसका नाम घड़ियाल पड़ा। घड़ियाल अपने लम्बी, संकरी थूथन और 110 आपस में जुड़े तीखे दाँतों की वजह से मछली पकड़ने में सहायक होते हैं।
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य की स्थापना के लिये 30 सितम्बर, 1978 में भारत सरकार की प्रशासनिक स्वीकृति मिली थी। घड़ियालों का कुनबा बढ़ाने के लिये मुरैना में चंबल घड़ियाल सेंक्चुरी के देवरी घड़ियाल सेंटर में हेचिंग सेंटर शुरू किये जायेंगे। इन नदियों के किनारे बसे 75 गाँव के लोगों को जागरूक किया गया है। गाँव के 1200 लोग घड़ियाल मित्र के रूप में वन विभाग के साथ काम कर रहे हैं।
पंजाब में वर्ष 1960-70 के बाद से वहाँ की नदियों से घड़ियाल गायब हो गये थे। चंबल नदी के देवरी घड़ियाल सेंटर से वर्ष 2017 में घड़ियाल पंजाब भेजे गये थे। वर्ष 2018 में 25 घड़ियाल सतलुज नदी के लिये भेजे गये और वर्ष 2020 में व्यास नदी के लिये 25 घड़ियाल भेजे गये थे।
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य
चंबल नदी के पारिस्थतिकी तंत्र को सुरक्षित रखने की दिशा में राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य बनाया गया था। तीन राज्यों में स्थित इस सेंचुरी का मुख्य आकर्षण घड़ियाल और दुर्लभ पक्षी ‘स्कीमर’ है। यह गंगेटिक में पायी जाने वाली डॉल्फिन, घड़ियाल, मगरमच्छ और साफ पानी के कछुओं के लिये प्रसिद्ध है। वर्ष 1979 में इसे राष्ट्रीय अभयारण्य घोषित किया गया था। यह तीन राज्यों मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान में फैला हुआ है। अब तक प्रवासी एवं यहाँ रहने वाले पक्षियों की 290 से अधिक प्रजातियों की पहचान की जा चुकी है। इस अभयारण्य का मुख्य आकर्षण घड़ियाल और दुर्लभ पक्षी “इण्डियन स्मीकर’’ है। यह दुर्लभ पक्षी गर्मियों के मौसम में यहाँ अपना घरोंदा बनाते हैं। देश में अपनी कुल आबादी के करीब 80 फीसदी स्मीकर चंबल सेंचुरी में प्रवास करते हैं।
57वीं शलाका जनजातीय चित्र प्रदर्शनी जनजातीय संग्रहालय में भील समुदाय की युवा चित्रकार रीता भूरिया के चित्रों की प्रदर्शनी
3 Jan, 2025 10:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय द्वारा प्रदेश के जनजातीय चित्रकारों के लिए चित्र प्रदर्शनी और चित्रों की बिक्री के लिये सार्थक मंच उपलब्ध कराने की दृष्टि से प्रतिमाह 'लिखन्दरा प्रदर्शनी दीर्घा' में किसी एक जनजातीय चित्रकार की प्रदर्शनी सह विक्रय का संयोजन 'शलाका' नाम से किया जाता है। इसी क्रम में 3 जनवरी, 2025 से भील समुदाय की युवा चित्रकार रीता भूरिया के चित्रों की प्रदर्शनी सह-विक्रय का संयोजन किया गया है। प्रदर्शनी 30 जनवरी, 2025 (मंगलवार से रविवार) तक निरंतर रहेगी।
युवा भीली चित्रकार रीता भूरिया
युवा भीली चित्रकार रीता भूरिया का जन्म भोपाल (मध्यप्रदेश) में हुआ। पिता श्री विजय भूरिया निजी क्षेत्र में नौकरी करते हैं एवं माता शांता भूरिया भी भीली चित्रकला में जाना-पहचाना नाम हैं। वे प्रख्यात भीली चित्रकार पद्मश्री भूरीबाई की नातिन हैं। उन्हें चित्रकला का हुनर विरासत में मिला है।
रीता ने विज्ञान विषय में स्नातक तक की शिक्षा हासिल की है। उन्हें चित्रकला का शौक बचपन से ही रहा है। उन्होंने बैंगलोर, नई दिल्ली, लखनऊ आदि शहरों में आयोजित कुछेक एकल एवं संयुक्त चित्रकला प्रदर्शनियों में भाग लिया है। उनके चित्रों में जंगली पशु-पक्षी और प्रकृति विशेष तौर पर दृष्टव्य होते हैं। वे अपनी सफलता का सम्पूर्ण श्रेय अपनी कला-गुरु अर्थात् अपनी नानी भूरीबाई को देती हैं।
कला साध्य भी है, आराध्य भी है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
3 Jan, 2025 09:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को एनसीईआरटी परिसर भोपाल के कला मंडपम में संस्कृति और कला के अनूठे संगम राष्ट्रीय कला उत्सव 2024-25 का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलित कर भव्य आयोजन की शुरुआत की। कार्यक्रम में पारंपरिक और आधुनिक कला सामंजस्य का सुंदर समावेश किया गया है। राष्ट्रीय कला उत्सव 2024-25 सोमवार 6 जनवरी तक चलेगा, जिसमें देशभर से आए कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कला हमारे समाज, हमारी संस्कृति का प्रतिबिंब है। इसे बढ़ावा देना हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कला एक साधना और कलाकार एक साधक है। कला साध्य भी है और आराध्य भी है। कला ही समाज को अलंकृत करती है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा कलाकारों और सांस्कृतिक संस्थाओं को हर संभव समर्थन देने की बात कही और कला के संरक्षण और संवर्धन पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान श्रीकृष्ण का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण 64 कलाओं और 14 विधाओं में निपुण थे। वे ललित कलाओं में पारंगत थे। वे रागी थे, अनुरागी थे, धर्म की स्थापना के लिए इस धरा पर आये परम योगी थे। यौगिक क्रियाओं के प्रवर्तक श्रीकृष्ण सच्चे अर्थों में योगिराज थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अनेकता से एकता भारत की विशेषता है। हमें अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर नाज़ करना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह उत्सव, भारत सरकार द्वारा वर्ष 2015 से प्रारंभ किया गया यह एक अनूठा कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों की कलात्मक प्रतिभा को विकसित करना और भारतीय कला एवं शिल्प की धरोहर को संरक्षित तथा यथावत रखना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा को विद्यार्थियों में प्रचारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 शिक्षा के माध्यम से कला और संस्कृति को बढ़ावा देने पर बल देती है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय कला एवं संस्कृति का संवर्धन न केवल राष्ट्र, बल्कि प्रत्येक नागरिक के लिए भी महत्वपूर्ण है। कला एवं संस्कृति विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों और नैतिकता की भावना को विकसित करती है, जिससे वे मशीनी होने की अपेक्षा संवदेनशील मनुष्य बन पाते हैं। कला की कोई भी विधा हो, यह अधिगम का एक सशक्त माध्यम है। कला चाहे नृत्य हो, गायन हो, वादन हो, चित्रण हो, शिल्पकला या अन्य कोई भी विधा हो अथवा स्थानीय/पारम्परिक खेल-खिलौने हों, ये सभी विधाएं विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक, वैचारिक, सामाजिक, भावनात्मक और व्यावहारिक विकास में वृद्धि करती हैं। कला उत्सव, हमारे विद्यार्थियों को एक ऐसा मंच प्रदान कर रहा है, जहाँ वे संपूर्ण भारत के सांस्कृतिक रूप को समग्रता में अनुभव कर सकते हैं। कला उत्सव में अलग-अलग राज्यों से जुड़े छात्र-छात्राओं का परस्पर संवाद उन्हें संपूर्ण भारत से जुड़ाव की अनुभूति कराता है।
स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने देश के विभिन्न अंचलों से आये बाल कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि यह कला उत्सव बाल कलाकारों को उनकी प्रतिभा की अभिव्यक्ति/प्रदर्शन का मंच प्रदान करता है। उन्होंने आल्हादित होकर कहा कि आज हमारे बच्चे ज्ञान-विज्ञान, कला-कौशल, संस्कृति से जुड़कर अपनी मेधा से देश का नाम रोशन कर रहे हैं। बाल कलाकार अपनी कला को ओर अधिक निखारें। पूरा क्षितिज उनका है, भविष्य उन्हीं का है।
केन्द्रीय शिक्षा एवं साक्षरता मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव आनंदराव विष्णु पाटिल ने बताया कि विकसित भारत अभियान एवं एक भारत श्रेष्ठ भारत की मूल मंशा के लिये इस कला उत्सव का यह 10वां संस्करण है। इसके जरिए बच्चे अपनी कला को और निखार रहे हैं।
एनसीईआरटी नई दिल्ली के निदेशक प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी ने कहा कि हमारी नई शिक्षा नीति पूरी तरह भारतीयता से समावेशित है। यह ऐसी है कि विद्यार्थियों को कला विषय में विज्ञान का और विज्ञान व सामाजिक विज्ञान विषय में कला का बोध होता है। हमने अब तक जो किया वह विकसित भारत के निर्माण को समर्पित है। कला उत्सव में तीन दिन बाल कलाकारों का प्रदर्शन होता है। चौथे व अंतिम दिन जूरी द्वारा कलाकारों को पुरस्कृत कर कला उत्सव का समापन किया जाता है।
स्वागत भाषण में कला उत्सव की राष्ट्रीय संयोजक प्रो. ज्योत्सना तिवारी ने बताया कि यह 10वां एवं भोपाल में आयोजित तीसरा राष्ट्रीय कला उत्सव है। आयोजन का मूल उद्देश्य है कि अपनी कला के जरिए बच्चे आगे बढ़े। देश भर के करीब 500 बाल कलाकार अपने शिक्षकों/अभिभावकों के साथ भोपाल आकर आयोजन को सफल बना रहे हैं।
कार्यक्रम में विधायक भगवानदास सबनानी, महापौर श्रीमती मालती राय, केन्द्रीय शिक्षा एवं साक्षरता मंत्रालय में संयुक्त सचिव श्रीमती अर्चना शर्मा, डॉ. दीपक पालीवाल, प्रो. चित्रा सिंह, प्रो. रत्नामाला आर्य, एन.सी. ओझा सहित बड़ी संख्या में आये बाल कलाकार, शिक्षक, अभिभावक एवं दर्शक उपस्थित थे।
केंद्रीय शिक्षा एवं साक्षरता मंत्रालय की पहल पर राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) नई दिल्ली द्वारा क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, भोपाल और पं. सुन्दरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान, भोपाल में 10वें राष्ट्रीय कला उत्सव का आयोजन किया गया है। इसमें केंद्रीय विद्यालय संगठन, नवोदय विद्यालय समिति, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय सहित भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के माध्यमिक स्तर के लगभग साढ़े पांच सौ विद्यार्थी अपने एस्कॉर्ट के साथ भाग ले रहे हैं। गायन, वादन, नृत्य, दृश्य कला, रंगमंच और परम्परागत कहानी जैसी कला-विधाओं पर हो रहे इस कला उत्सव में भारत के लब्ध-प्रतिष्ठ कला साधकों को निर्णायकों के रूप में आमंत्रित किया गया है। अव्वल प्रदर्शन करने वाले बाल कलाकारों को क्रमश: स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक/पुरस्कार से नवाजा जाएगा।
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