मध्य प्रदेश
कुशीनगर एक्सप्रेस में बड़ा हादसा टला, चक्के से उठे धुएं ने मचाई अफरा-तफरी
24 Jul, 2025 03:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बुरहानपुर में कुशीनगर एक्सप्रेस में बड़ा हादसा टला, चक्के से उठे धुएं ने मचाई अफरा-तफरी
बुरहानपुर। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर रेलवे स्टेशन पर गुरुवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब मुंबई से गोरखपुर जा रही कुशीनगर एक्सप्रेस के बी-3 कोच के चक्कों से अचानक धुआं उठने लगा। ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचते ही रेलवे कर्मियों की सतर्कता से एक बड़ा हादसा टल गया।
घटना के समय ट्रेन प्लेटफॉर्म के नजदीक थी, तभी ड्यूटी पर तैनात रेलवे कर्मचारी सीताराम पटेल ने बी-3 कोच के चक्के से उठते धुएं को देखा और तुरंत हरकत में आ गए। उन्होंने यात्रियों को सतर्क करते हुए उन्हें कोच के प्रभावित हिस्से से हटाया और रेलवे अधिकारियों को सूचित किया।
तीन घंटे बाद रवाना हुई ट्रेन
रेलवे सुरक्षा टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। जांच में पाया गया कि कोच के हॉट एक्सल में स्पार्किंग के कारण धुआं उठ रहा था। एहतियातन कोच को ट्रेन से अलग कर दिया गया और ट्रेन को करीब तीन घंटे की देरी के बाद उसके गंतव्य की ओर रवाना किया गया।
पीछे से आ रही कई ट्रेनें रोकी गईं
घटना के चलते भुसावल रेल मंडल के कई स्टेशनों पर पीछे से आ रही ट्रेनों को भी रोकना पड़ा। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत कुशीनगर एक्सप्रेस को यार्ड में खड़ा कर उसकी जांच की गई। मौके पर पहुंचे रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी और सीएनडब्लू (Carriage & Wagon) की टीम ने तकनीकी जांच के बाद राहत कार्य पूरा किया।
रेल कर्मचारी की तत्परता से बची जानें
रेलवे अधिकारियों ने कर्मचारी सीताराम पटेल की तत्परता की सराहना की और माना कि यदि समय रहते धुआं न देखा जाता, तो बड़ा हादसा हो सकता था। रेलवे ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं।
भोपाल में मछली खानदान का ड्रग जिहाद
24 Jul, 2025 12:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल । लव, सेक्स,ड्रग्स जिहाद और बदमाशी का नाम बन चुके भोपाल के मछली परिवार के सारिक, सावर,और उसके ड्रग पैडलर भतीजे पर अब पुलिस ने लगाम लगाना शुरू कर दी है। दरअसल बीते कुछ दिनों से मध्यप्रदेश पुलिस ड्रग्स के खिलाफ अभियान चला रही है। पुलिस को जिहादी सारिक के भतीजे यासीन अहमद का पुलिस के पास इनपुट आया कि वह ड्रग पैडलर है।जिसके बाद पुलिस सक्रिय हुई और उसे फिल्मी स्टाइल में गिरफ्तार किया। यासीन की गिरफ्तारी ने कई ऐसे राज खोले है जो चौंकाने वाले है।पुलिस ने बताया कि आरोपी यासीन के मोबाइल में पिस्टल एवं रिवाल्वर जैसे हथियारों के फोटो हैं । जिसमें अन्य आसामाजिक व्यक्तियों के साथ पीड़ितो को डराया धमकाया जा रहा हैं उन व्यक्तियों की पहचान की जा रही हैं।यासीन आए दिन बच्चों के साथ मारपीट करता था।फिर उसे डराने के लिए उसका वीडियो बनाकर वायरल करने की धमकी देता था। पुलिस ने दूसरा बड़ा खुलासा करते हुए अपने प्रेस नोट ने बताया कि यासीन कई लड़कियों एवं महिलाओ के साथ आपत्तिजन शारीरिक शोषण के वीडियो हैं । जिसमें संदिग्ध व्यक्तियों एवं पीड़ितो की पहचान किया जा रही हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि कुछ ऐसे वीडियो है जिनको देखकर ऐसा लगता है कि टारगेट सिर्फ हिन्दू लड़कियों पर किया गया है।एक वीडियो में यासीन लड़की के साथ शारीरिक शोषण करते हुए दिखाई दे रहा है।इतना ही नहीं वह लड़कियों को नशे कराता हुआ दिखाई दे रहा है। यासीन पहले लड़कियों से दोस्ती करता बाद में उन्हें ड्रग की लत लगाकर वीडियो बना लेता। बंदूक की नोट पर मासूम लड़कियों को ड्रग्स तस्करी में डाल देता। पुलिस ने प्रेस नोट जारी करते हुए एक और चौंकाने बाला खुला किया।पुलिस ने बताया कि आरोपी यासीन के मोबाइल में मिले मारपीट के विडियो में अड़ीबाजी की जा रही हैं संभवतः पीड़ित व्यक्ति अपहरण कर बंधक बनाए गए हैं । इन पीड़ितो की पहचान की जा रही हैं। सूत्रों की माने तो यासीन अब तक 10 लोगों का अपहरण कर चुका है।लेकिन लोग उसके राजनीतिक रसूख और बदमाशी के चलते सामने नहीं आते थे।बंदूक की नोक पर बदमाशी करना उसका बड़ा पेसा है। प्रेस नोट में पुलिस ने ये भी जिक्र किया है कि यासीन के मोबाइल में ड्रग्स के फोटो विडियो मिले है, इनमें पीने वालो की पहचान कर खरीदने एवं बेचने वालो का नेटवर्क पता किया जा रहा है । एवं ड्रग्स कहां रखा हैं इसकी जानकारी पता की जा रही हैं।पुलिस यासीन की हर पहलू पर जांच कर रही है वहीं पुलिस ने अपील की है कि पीड़ित व्यक्ति स्वयं के साथ हुई घटनाओ रिपोर्ट या जानकारी क्राइम ब्रांच अथवा थाने को व्यक्तिगत रूप से रिपोर्ट कर सकते हैं या फोन पर अपनी जानकारी दे सकते हैं ताकि उनके साथ हुई घटनाओ पर पुलिस कार्यवाही की जा सके।
यासीन के मोबाइल ने जो राज उगले हैं उसको देखकर भोपाल पुलिस चौकी हुई है। दरअसल पुलिस ने भी यह नहीं सोचा था कि इतना बड़ा रैकेट यासीन के मोबाइल में मिल सकता है। मोबाइल में लड़कियों के नग्न फोटो से लेकर उनके साथ शारीरिक संबंध बनाने के वीडियो भी सामने आए हैं।पुलिस ने यह भी बताया कि किस तरीके से वह है अपराध करने के लिए हथियारों को रखने का शौकीन था।उसके मोबाइल में कई अंग्रेजी और देसी पिस्टल,रिवाल्वर के फोटो भी सामने आए हैं। यासीन के मोबाइल से महंगे- महंगे ड्रग्स के फोटोस भी सामने आए हैं इतना नहीं यासीन जिन लड़कियों के साथ में शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश करता था उनके वीडियो भी पुलिस के पास में है।पुलिस सूत्र बताते हैं कि एक वीडियो में यासीन अहमद एक लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश करता है। लड़की के लेफ्ट वाले पैर के हिस्से पर ड्रग्स की लाइन रखकर नाक से खींचता है उसके बाद एक हाथ में पिस्तौल रखकर लड़की को धमकता है।
यासीन भोपाल के क्लबो में लड़कियों को अपना शिकार बनाता था। दरअसल लड़कियों को शिकार बनाने के लिए उसमें नई तरकीब खोजली थी। यासीन पहले डीजे आर्टिस्ट बना। इसके बाद वह आए दिन भोपाल के क्लबों में डीजे पार्टी करने लगा। वहीं पर वह हिंदू लड़कियों को घेरता। उसके बाद उनसे दोस्ती कर उन्हें अपने जाल में फंसा लेता। क्लब की पार्टी खत्म होने के बाद वह आफ्टर पार्टी के नाम से देर रात आफ्टर पार्टी ऑर्गेनाइज करता। इन्हीं आफ्टर पार्टी के नाम पर भोपाल के युवा उसका शिकार बन जाते। आफ्टर पार्टी में नशे की खेफ परोसी जाती थी।जिसका पूरा इंतजाम यासीन और उसका सगा चाचा सावर करता था। हिंदू लड़के लड़कियों को ड्रग्स की लत लगाकर उनके साथ घिनौने कृत्य करना इसका आए दिन का काम हो चुका था। भोपाल पुलिस को इसके मोबाइल से ऐसे तकरीबन 35 से ज्यादा वीडियो मिले है। इसी के चलते क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने यासीन की 5 दिन की पुलिस रिमांड मांगी है। क्राइम ब्रांच के पुलिस अधिकारियों ने यह भी कहा है कि यदि कोई पीड़ित पुलिस के पास आना चाहता है तो उसका नाम गुप्त रखा जाएगा। पुलिस अब आफ्टर पार्टी करने वाले ठिकानों पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। सूत्रों की मां ने तो बीते दिन भोपाल क्राइम ब्रांच की टीम आफ्टरपार्टी बड़ी जगह हताई खेड़ा डैम के पास बने एक रिसॉर्ट में पहुंची थी जहां पर लड़कियों के कपड़े और आपत्ती जनक सामान भी मिला।
यासीन के मोबाइल से मिली कॉल डिटेल और वीडियो ने बहुत कुछ बयां किया हैं कॉल डिटेल के आधार पर एक बड़ा नाम निकलकर सामने आया है जो ड्रग तस्करी का सबसे बड़ा सरगना साबित हो सकता है। पुलिस के सूत्र बता रहे है कि पुलिस को अब मास्टर माइंड गौरव चौहान उर्फ नानखटाई की पुर जोर से तलाश है। दरअसल नानखटाई ही वह शख्स है जो सबसे पहले यासीन को मिला था। यासीन का जिहादी चाचा सारिक और नान खटाई बहुत अच्छे दोस्त है।यासीन को जानने वाले बताते है कि वह जब से नान खटाई के संपर्क में आया तब से वह ड्रग्स के कारोबार में लिप्त हो गया। नान खटाई भोपाल का वह छुपा हुआ पैडलर है जो भोपाल पुलिस को आए दिन चtकमा देता है। हालांकि पुलिस के पास उसकी डिटेल तो है लेकिन उसके शातिर पन के चलते बच जाता है। पुलिस के सूत्रों ने बताया है कि एक भी ऐसा दिन नहीं गया जब नानखटाई और यासीन बीच बात न हुई हो। सूत्र बता रहे है कि नान खटाई पुलिस के डर से भोपाल छोड़कर भाग चुका है। लेकिन पुलिस के बारे में एक कहावत सच है कि वह अपने पर आ जाए तो मुर्दे को भी खोजकर उससे जानकारी निकाल लेती है।
समुद्र मंथन दिवस आज, कलाओं में बघेश्वर और मणिधर प्रदर्शनी का शुभारंभ करेंगे मुख्यमंत्री
24 Jul, 2025 11:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। समुद्र मंथन दिवस (24 जुलाई 2025) को भोपाल के रवीन्द्र भवन परिसर में हरिहर राष्ट्रीय नाट्य समारोह अंतर्गत कलाओं में बघेश्वर और मणिधर प्रदर्शनी का शुभारंभ एवं वीर भारत न्यास द्वारा प्रकाशित पुस्तक लोक में मणिधर-बघेश्वर का लोकार्पण माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किया जायेगा। प्रदर्शनी और पुस्तक की विशेषता बताते हुए माननीय मुख्यमंत्री जी के संस्कृति सलाहकार एवं वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने कहा कि समुद्र मंथन में हरि और हर की अद्वितीय भूमिका रही है और संसार के विकासक्रम में शिव और शक्ति के अनन्य सहचर बाघ और नाग निरंतर सक्रिय रहे हैं और दोनों ही निरंतर अनेक परंपराओं के जनक भी है। इनके माध्यम से भी हम समाज के विकास की विभिन्न धाराओं को देख और पहचान सकते हैं।
उन्होंने कहा कि कलाओं में नाग एवं बाघ की प्रदर्शनी 24 से 29 जुलाई 2025 तक रवीन्द्र भवन में प्रदर्शित की जा रही है। प्रदर्शनी का शुभारंभ माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किया जायेगा। इस अवसर वीर भारत न्यास द्वारा प्रकाशित पुस्तक लोक में मणिधर-बघेश्वर का लोकार्पण भी होगा। मध्यप्रदेश जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी के सहयोग से पुस्तक में 100 से पारम्परिक लोक एवं जनजातीय कलाओं में नाग एवं बाघ की दुर्लभ छवियों को संकलित कर प्रकाशित किया गया है।
जन्मे को ‘कोलोडियॉन बेबी’ कहा गया: रतलाम‑रीवा में दुर्लभ अनुवांशिक विकार का मामला
24 Jul, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रीवा: जिले के चाकघाट तहसील क्षेत्र से एक अनोखी खबर सामने आई है. यहां पर रहने वाली प्रसुता ने एक बच्चे को जन्म दिया है. नवजात के जन्म लेते ही जब डॉक्टरों की नजर उस पर पड़ी तो वह हैरत में पड़ गए, क्योंकि अस्पताल में जन्म लेने वाला नवजात कोई साधारण नवजात की तरह नहीं है. नवजात की शक्ल हुबहु एक एलियन की तरह है. परिजनों के मुताबिक चाकघाट अस्पताल में बच्चे की नार्मल डिलेवरी हुई. वह आसमान्य था और उसकी हालत गंभीर है. इसके बाद उसे रीवा के गांधी मेमोरियल अस्पताल के ICU वार्ड में रखा गया. जिसका इलाज किया जा रहा है.
रीवा में प्रसूता ने दिया एलियन जैसी शक्ल वाले बच्चे को जन्म
दरअसल, मंगलवार की रात त्योंथर तहसील क्षेत्र स्थित ढकरा सोनौरी गांव की निवासी शांति देवी पटेल की बहू प्रियंका पटेल को प्रसव पीड़ा हुई. जिसके बाद उसे देर रात चाकघाट स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. बुधवार की सुबह बहू की नॉर्मल डिलेवरी हुई. डिलेवरी के बाद मां स्वस्थ थी, लेकिन बच्चा आसमान्य था. उसका शरीर क्षत-विक्षत है, देखने में वह बिल्कुल एक एलियन की तरह है. डॉक्टरों ने नवजात की हालत को गंभीर देखते हुए उसे रीवा गांधी मेमोरियल अस्पताल के लिए रेफर कर दिया. गांधी मेमोरियल अस्पताल के ICU वार्ड में भर्ती नवजात का इलाज अब डॉक्टरों की देखरेख में किया जा रहा है.
समय से दो माह पहले बहू ने दिया बच्चे को जन्म
त्योंथर निवासी शांति देवी पटेल के ने बताया "बहू प्रियंका पटेल को प्रसव पीड़ा के बाद मंगलवार की रात चाकघाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था. बुधवार सुबह 7 बजे नार्मल डिलेवरी हुई, लेकिन बच्चे का शरीर क्षत-विक्षत है. बच्चे की हालत को गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने रीवा रेफर किया है. शांति देवी ने बताया कि बहू की जांच कराने समय-समय पर शासकीय और प्राइवेट अस्पताल गईं. जहां अल्ट्रासाउंड के बाद भी डॉक्टरों ने मां और बच्चे को स्वस्थ बताया. जबकि डिलीवरी के बाद बच्चा अस्वस्थ पैदा हुआ."
डॉक्टर बोले- क्यों है बच्चे की ऐसी स्थिति
वहीं रीवा गांधी मेमोरियल अस्पताल के नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई JR1 पीडी आर्टिक डिपार्टमेंट के डॉ. नवीन कुमार मिश्रा ने बताया कि "अनुवांशिक बीमारी से ग्रसित एक नवजात चाकघाट अस्पताल से रेफर किया गया है. अनुवांशिक बीमारी में दोनों ही पेरेंट्स "कैरियर" होते हैं. ( इसका मतलब यह है कि माता-पिता के पास एक असामान्य जीन की एक प्रति है, लेकिन वे खुद उस बीमारी से पीड़ित नहीं हैं. अगर दोनों माता-पिता एक बीमारी के वाहक हैं, तो बच्चे में उस बीमारी के विकसित होने के 25 प्रतिशत खतरा होता है.) जिसके चलते वो बीमारी गर्भ में पल रहे बच्चे को हो जाती है.
भोपाल में 7 तहसीलों का गठन: हुजूर तहसील से 60 गांव होंगे काटे, हर विधानसभा में एक तहसील
24 Jul, 2025 10:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: मध्य प्रदेश में जिले, तहसील और संभागों की सीमाओं का नए सिरे से निर्धारण करने के लिए प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग की स्थापना की गई है. यहां जिलों की सीमाओं को बदलने के लिए प्रस्ताव मंगाए जा रहे हैं. लेकिन इससे पहले जिलास्तर पर भी इन सीमाओं का मूल्यांकन करना है और फिर इसकी रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजना है. इसी तारतम्य में भोपाल जिले की सीमाओं का भी नए सिरे से निर्धारण किया जा रहा है, जिससे राजधानी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.
हुजूर तहसील से कटेंगे 60 गांव, ये जुड़ेंगे
भोपाल जिले में तहसील पुनर्गठन की तैयारी चल रही है. इसके तहत कोलार तहसील से शहपुरा और बावड़िया क्षेत्र को हटाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. जबकि हुजूर तहसील में नए गांवो चंदनपुरा, मेंडोरा और मेंडोरी को जोड़ा जा रहा है. हुजूर तहसील के गांवों में करीब 60 गांव हटाकर अन्य तहसीलों में जोड़े जा रहे हैं. अभी जिले में 7 विधानसभा क्षेत्र हैं. लेकिन अगले परिसीमन में यहां विधानसभा की संख्या भी बढ़ेगी. ऐसे में जिले में अब 8 तहसीलें बनाई जा रही हैं. यानि हर विधानसभा में एक तहसील होगी.
सिटी नजूल की सीमाओं में नहीं होगा बदलाव
जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि हुजूर तहसील में अभी 195 गांव है. इनमें से 60 गांव हटाने के बाद यहां 135 गांव बचेंगे. वहीं टीटी नगर नजूल से 3 गांव हटाकर 7 नए जोड़े गए हैं. जिसके बाद यहां कुल 20 गांव रहेंगे. इसी तरह गोविंदपुरा नजूल में 19 गांव जोड़े गए हैं, अब इसमें गांव की कुल संख्या 35 हो जाएगी. जबकि एमपी नगर में 22 नए क्षेत्र जुड़ने से 30 गांव शामिल हो गए हैं. बैरागढ़ नजूल में 23 नए क्षेत्र जोड़ गए हैं, जिससे यहां कुल 40 क्षेत्र हो गए. हालांकि सिटी नजूल में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है.
जनता को नहीं तय करनी होगी लंबी दूरी
अधिकारियों ने बताया कि तहसील की सीमाओं में बदलाव होने से लोगों को राजस्व और जमीन से जुड़े कामों के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी. क्योंकि तहसील कार्यालय उनके निवास क्षेत्र के पास होगा. हुजूर तहसील में शहर व ग्रामीण दोनों क्षेत्र होने से प्रशासनिक काम-काज प्रभावित होता है. नई तहसीलों में अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती होगी, जिससे काम-काज में तेजी आएगी. नई तहसीलें दूरी क्षेत्रफल के अनुसार अलग से नजूल क्षेत्र तय करेंगी.
अभी यह है जिले में तहसीलों की स्थिति
भोपाल जिले में अभी बैरसिया, कोलार व हुजूर यानि 3 तहसीलें हैं. इन तहसीलों में कुल 8 नजूल क्षेत्र का एसडीएम के जरिए प्रबंधन होता है. हुजूर विधानसभा रिंग की तरह भोपाल जिले के चारों तरफ है. इसके साथ ही कोलार उपनगर व बैरागढ़ उपनगर दो अलग दिशाओं में है. इसका बड़ा हिस्सा नर्मदापुरम रोड पर कटारा और आगे के क्षेत्रों में है. नजूल क्षेत्रों में खुद के कार्यालय समेत अन्य जरूरी संसाधन विकसित नहीं कर सकते. तहसील गठन के बाद उसी क्षेत्र में कार्यालय व व्यवस्थाएं बनने से लोगों को अपने क्षेत्र में ही काम-काज की सुविधा मिलेगी. गोविंदपुरा नजूल का कार्यालय पुराने शहर में कलेक्ट्रेट में है. सिटी सर्कल का कार्यालय भी कलेक्ट्रेट में है. बैरागढ़ का कार्यालय भी बैरागढ़ के बजाय हुजूर में है.
'नक्शे और आबादी के अनुसार बदलेगी सीमा'
कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि "तहसीलों की सीमाओं को पुनः निर्धारण किया जा रहा है. इस संबंध में सोमवार को बैठक हो चुकी है. इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है. इसमें जिले के नक्शे और आबादी के अनुसार निर्णय लिया जाएगा. इस प्रस्ताव को अभी संभागायुक्त के माध्यम से शासन के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. समान क्षेत्र और समान आबादी व लोगों की सुविधा को देखते हुए तहसीलों का पुनर्गठन होगा."
सिया विवाद पर मोहन यादव का कड़ा रुख, दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों को छुट्टी पर भेजा
24 Jul, 2025 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: मध्य प्रदेश स्टेट एनवायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी यानि सिया के अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान का दफ्तर सील करने और 450 से अधिक पर्यावरणीय अनुमतियां जारी करने का आरोप लगने के बाद राज्य शासन ने पर्यावरण विभाग से संबंधित दो आईएएस अधिकारियों को हटा दिया है. अब इनकी जगह दूसरे आईएएस अधिकारियों को पर्यावरण विभाग और एप्को के महानिदेशक व कार्यपालन संचालक का प्रभार सौंपा गया है.
बुधवार को जारी आदेश के तहत 1991 बैच के आईएएस अशोक वर्णवाल को अपर मुख्य सचिव पर्यावरण विभाग और एप्को के महानिदेशक का प्रभार सौंपा है. जबकि दीपक आर्य को एप्को का कार्यपालन संचालक बनाया गया है.
नवनीत कोठारी को बनाया राजभवन में प्रमुख सचिव
दरअसल, 2001 बैच के आईएएस अधिकारी नवनीत मोहन कोठारी और सिया के चेयरमेन शिवनारायण सिंह चौहान के बीच हुए विवाद की वजह से कोठारी को पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव और एप्को के महानिदेशक के पद से हटना पड़ा. अब नवनीत कोठारी की जगह पर्यावरण विभाग की जिम्मेदारी अशोक बर्णवाल को सौंपी गई है.
वहीं इस मामले में 2013 बैच की आईएएस उमा महेश्वरी आर का नाम भी सामने आया था. ऐसे में महेश्वरी का कार्यभार आईएएस दीपक आर्य को सौंपा गया है. बता दें कि, अभी बर्णवाल के पास अपर मुख्य सचिव, वन विभाग तथा कृषि उत्पादन आयुक्त का प्रभार भी है. वहीं बर्णवाल को राज्यपाल का प्रमुख सचिव बनाया गया है.
इन आईएएस अधिकारियों के भी बदले प्रभार
2011 बैच के चन्द्रमौली शुक्ला वर्तमान में प्रबंध संचालक, एमपी इण्डस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पाेेशन लिमिटेड एवं प्रबंध संचालक मध्य प्रदेश स्टेट इण्डस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पाेेशन लिमिटेड, तथा आयुक्त, विमानन (अतिरिक्त प्रभार) का कार्यभार संभाल रहे हैं. अब उनको आईएएस सिबी चक्रवर्ती की जगह अपने वर्तमान कर्तव्यों के साथ-साथ अस्थाई रूप से आगामी आदेश तक अपर सचिव का प्रभार अतिरिक्त रूप से सौंपा गया है.
एप्को के महानिदेशक पद से उमा को हटाया
केसी गुप्ता को अपर मुख्य सचिव, कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. जिसके बाद अमित राठौर, प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन, कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त होंगे. वहीं, नए आदेश के तहत उमा महेश्वरी आर सह-आयुक्त-सह-संचालक, भारतीय चिकित्सा पद्धति एवं होम्योपेथी, मध्य प्रदेश भोपाल तथा कार्यपालन संचालक के पद पर बनी रहेंगी. लेकिन पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को), भोपाल (अतिरिक्त प्रभार) से मुक्त होंगी.
मिट्टी धंसने की घटना के बाद शहडोल में चला पुलिस का दंडात्मक अभियान, 5 पर मामला दर्ज
24 Jul, 2025 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शहडोल : भरी बरसात में सीवरलाइन का काम करने के दौरान पिछले दिनों दो मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई थी. सीवर लाइन के गड्ढे में पाइप डालते वक्त दो मजदूर उसमें दब गए थे. इस घटना के बाद शहडोल की सोहागपुर पुलिस ने प्रोजेक्ट इंजीनियर समेत 5 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है.
कैसे हुआ था सीवर लाइन हादसा?
17 जुलाई को भरी बरसात में सीवर लाइन का काम करते समय दो मजूदरों की दबकर मौत हो गई थी. शहडोल एसपी रामजी श्रीवास्तव ने बताया, '' 17 जुलाई को कोनी में सीवर लाइन की खुदाई के दौरान दो मजदूर दब गए थे. इस संबंध में सोहागपुर थाने में एक एफआईआर दर्ज की गई है. इस एफआईआर में प्रथम दृष्टया जिन लोगों को मुख्य आरोपी पाया गया है, उसमें प्रमुख रुप से प्रोजेक्ट इंजीनियर, जो सेफ्टी के लिए जवाबदार थे और बाकी सुपरवाइजर व अन्य को आरोपी बनाया गया है.''
शहडोल में सालों से सीवर लाइन का काम जारी
बता दें कि पिछले कई सालों से शहडोल जिले में सीवर लाइन का काम चल रहा है लेकिन अबतक ये पूरा नहीं हो सका है, सीवर लाइन के काम की वजह से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इसे लेकर लोगों में काफी गुस्सा भी था, फिर भी भरी बरसात में सीवर लाइन का काम चलता रहा. इसी दौरान 17 जुलाई को वार्ड नंबर एक कोनी में हादासा हो गया. पाइप डालते वक्त गड्ढे में मुकेश बैगा और महिपाल बैगा की दबकर मौत हो गई. कई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दोनों की बॉडी को बाहर निकाला गया था, इसके लिए लगभग 10 से 12 घंटे तकरेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया था.
इसे लेकर क्षेत्रवासियों में काफी आक्रोश है. साथ ही मजदूरों की मौत ने उनकी सुरक्षा व्यवस्था की भी पोल खोल कर रख दी है. सोहागपुर पुलिस के मुताबिक इस मामले में विवेचना की जा रही है और कई अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया जा सकता है.
चंद्रशेखर आजाद ने शहादत दे दी, पर अंग्रेजों के हाथ न आये, यह देश प्रेम की है पराकाष्ठा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
23 Jul, 2025 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमें गर्व है कि अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद जैसे महानायक मध्यप्रदेश की धरती पर जन्मे हैं। उन्होंने कहा कि अपनी समूची चेतना, जीवन और अस्तित्व भारतमाता के चरणों में समर्पित करने वाले अमर बलिदानी चंद्रशेखर आज़ाद के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित कर हम गौरवान्वित हैं। मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए समर्पित चंद्रशेखर आजाद का जीवन ऊर्जा, संकल्प और सेवा का अमिट अध्याय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद ने जब यह देखा कि अब गिरफ्तारी से बच पाना मुश्किल है तो अपने हाथों से ही खुद के प्राणोत्सर्ग कर शहादत दे दी, पर अंग्रेजों के हाथ नहीं आये, यह देश प्रेम की परकाष्ठा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की जयंती के अवसर पर अलीराजपुर जिले के चंद्रशेखर आज़ाद नगर (भाभरा) में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम "स्मरण-आजाद" को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। वीसी में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, प्रमुख सचिव संस्कृति एवं पर्यटन शिवशेखर शुक्ला सहित अधिकारी भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद एक साधारण परिवार में जन्मे असाधारण व्यक्तित्व के धनी थे। आज़ाद एक ऐसी आंधी थे, जिसने भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिलाकर रख दी थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद एक नाम नहीं, भारत की क्रांति का वह तेजस्वी स्वर था, जिसकी गूंज आज भी देशभक्ति की शपथ लेने वालों के हृदय में सुनाई देती है। बाल्यकाल से ही उनमें एक अलग तेज और एक अलग सोच थी। जब काशी में उन्होंने असहयोग आंदोलन में भाग लिया और गिरफ्तार हुए, तब न्यायाधीश के पूछने पर जो जवाब उन्होंने दिया, वह आज भी हर देशभक्त के हृदय में बसा है। जब उनसे, उनका नाम पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया- 'आजाद'। पिता का नाम पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया-स्वाधीनता। तीसरी बार जब उनके घर का पता पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया था- जेल। वे केवल एक क्रांतिकारी ही नहीं, एक विचारधारा और आत्मबल के प्रतीक थे, जिन्होंने यह संकल्प लिया था कि-'मैं आज़ाद था, आज़ाद हूं और आज़ाद ही रहूंगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद ने केवल एक क्रांतिकारी की ही नहीं, बल्कि संपूर्ण स्वाधीनता आंदोलन के सेनापति की भूमिका निभाई। वे हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सेनापति बने और शहीद भगत सिंह जैसे नौजवानों को भी उन्होंने दिशा दी थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाला लाजपत राय की शहादत का बदला लेने के लिए जब सांडर्स को लाहौर में मार गिराया गया, तब इस योजना के केंद्र में चंद्रशेखर आज़ाद ही थे और जब देश की क्रांति को धन की आवश्यकता पड़ी, तब काकोरी कांड (1925) में ब्रिटिश खजाने को लूटकर उन्होंने यह सिद्ध कर दिया था कि अगर लक्ष्य पवित्र हो, तो क्रांति भी तपस्या बन जाती है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि दुश्मनों से घिरे होने पर उन्होंने अंतिम गोली स्वयं पर चला दी, परंतु दुश्मन की पकड़ में नहीं आए। इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क (अब आज़ाद पार्क) में 27 फरवरी 1931 को पुलिस से घिरे होने पर अंतिम गोली खुद को मारकर प्राणोत्सर्ग कर दिया और अपने नाम के अनुरूप अंतिम सांस तक वे "आज़ाद" ही रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद की शहादत आज भी हमें यह याद दिलाती है कि स्वतंत्रता किसी एक दिन की घटना नहीं, बल्कि लाखों बलिदानों का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद की जयंती पर देश के युवाओं को उनके साहस, त्याग और बलिदान से प्रेरणा लेनी चाहिए। आजाद केवल एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के प्रखर प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि आज की नई पीढ़ी को चाहिए कि वह आज़ाद जी के जीवन व चरित्र से सीखें कि कैसे कोई अकेला व्यक्ति इतिहास की धारा बदल सकता है। राष्ट्र के लिए जीना और राष्ट्र के लिए मरना क्या होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज हम जिस आज़ाद हवा में सांस ले रहे हैं, वह चंद्रशेखर आजाद जैसे रणबांकुरों के बलिदान की ही देन है। हम सबका यह परम कर्तव्य है कि हम एकजुट होकर उनके सपनों का भारत गढ़ें।
उल्लेखनीय है कि चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म मध्यप्रदेश के वर्तमान अलीराजपुर जिले के एक छोटे से गांव भाभरा (अब चंद्रशेखर आज़ाद नगर के रूप में प्रचलित) में 23 जुलाई 1906 को हुआ था।
चंद्रशेखर आजाद नगर में हुए मुख्य कार्यक्रम स्थल पर अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान, संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी, पूर्व विधायक एवं वर्तमान में म.प्र. लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष माधो सिंह डाबर, भाभरा नगर परिषद की अध्यक्षा निर्मला डाबर, नगर परिषद के अध्यक्ष नारायण अरोड़ा, भाभरा जनपद पंचायत के अध्यक्ष जगदीश गणावा और जनपद पंचायत उपाध्यक्ष परमार सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव 24 जुलाई को वन विकास निगम के स्वर्ण जयंती वर्ष का उद्घाटन और राष्ट्रीय कार्यशाला का करेंगे शुभारंभ
23 Jul, 2025 10:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने पर 24 जुलाई को स्वर्ण जयंती वर्ष का उद्घाटन एवं राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ करेंगे।वे ‘विजन डॉक्यूमेंट-2047’ का विमोचन एवं प्रदर्शनी का उद्घाटन भी करेंगे। कार्यक्रम में निगम के उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारी को सम्मानित भी किया जायेगा।
वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप सिंह अहिरवार, अपर मुख्य सचिव वन अशोक बर्णवाल और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव भी उपस्थित रहेंगे।
गुरुवार 24 जुलाई को प्रात: 10:30 बजे से भारतीय वन प्रबंधन संस्थान नेहरू नगर भोपाल के ऑडिटोरियम में होने वाले कार्यक्रम के संबंध में प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम व्ही.एन. अम्बाड़े ने जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, तेलंगाना और कर्नाटक राज्य के वन विकास निगम के प्रबंध संचालक द्वारा विभिन्न विषयों जैसे थिनिंग व फेलिंग, जनरल प्लानटेशन, मियॉवाकी प्लानटेशन, डिपॉजिट वर्क, थीम वर्क, ईको टूरिज्म विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया जायेगा। कार्यशाला का उद्देश्य मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम लिमिटेड द्वारा विगत 50 वर्षों में किये गये वानिकी, वन एवं वन्य जीव संरक्षण कार्य को रेखांकित किया जाना है। कार्यक्रम में वन विकास निगम के कार्यों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन भी किया जायेगा।
वनीकरण में निगम की अनेक उपलब्धियां
मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम की स्थापना 24 जुलाई 1975 को हुई थी। निगम की स्थापना का उद्देश्य निम्न कोटि के वन क्षेत्रों को तेजी से बढ़ने वाली बहुमूल्य तथा बहु उपयोगी प्रजातियों के रोपण द्वारा उच्च कोटि के वन क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता एवं गुणवत्ता में सुधार लाना है। निगम का कार्य प्रदेश के 22 जिलों में संचालित है। निगम अंतर्गत कुल 13 काष्ठगार एवं 15 स्थाई रोपणियां स्थापित हैं। निगम को लगभग 4.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें से वर्ष 2025 तक 3.90 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का उपचारण किया जा चुका है एवं 3.14 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रोपण किया गया है। विगत 2 वर्षों में निगम द्वारा 2 करोड़ 48 लाख पौधों का रोपण किया गया है। निगम की रोपणियों में वर्ष 2025 में कुल 1 करोड़ 70 लाख सागौन रूटशूट सागौन का उत्पादन हुआ है।
टाइगर रिजर्व में चुनौती पूर्ण कार्य
वन विकास निगम की अधिकांश परियोजना मंडल टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान एवं अभयारण्य क्षेत्र बफर जोन से लगे हैं। इन क्षेत्रों में बाघ, तेंदुआ, भालू एवं हिरण आदि वन्य जीवों के विचरण की उपस्थिति दर्ज की गई है। वन्य जीवों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिये निगम द्वारा बोरीबंधान, तालाब निर्माण एवं झिरियां निर्माण का कार्य किया जाता है। वर्ष 2024-25 में लगभग 60 हजार घनमीटर इमारती काष्ठ एवं 3100 टन बांस का उत्पादन किया गया।
जैव विविधता के साथ साथ जलगंगा संवर्धन भी
निगम ने व्यावसायिक वृक्षारोपण के साथ जैव विविधता संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य भी किया जा रहा है। निगम द्वारा ‘जल गंगा संवर्धन’ एवं ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अंतर्गत लगभग 125 करोड़ पौधों का रोपण वृहद स्तर पर किया जा रहा है। निगम को वित्तीय वर्ष 2024-25 में 170 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है।
प्रदेश में इंग्लिश भाषा के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जायेगा
23 Jul, 2025 10:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इंग्लिश भाषा के शिक्षकों के प्रशिक्षण दिया जायेगा। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा इसकी विशेष व्यवस्था की जा रही है। प्रशिक्षण के लिये भोपाल में एक राज्य स्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान इंग्लिश लर्निंग ट्रेनिंग इन्स्टीट्यूट (ईएलटीआई) कार्यरत है। यह संस्थान राज्य के समस्त शासकीय, प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के शिक्षण संस्थानों में इंग्लिश भाषा संबंधी अकादमिक और प्रशिक्षण के क्षेत्र में मार्गदर्शन एवं सहयोग कर रहा है। ईएलटीआई संस्थान इंग्लिश भाषा अध्यापन क्षेत्र में सतत उन्नयन एवं स्तरीकरण के लिये हैदराबाद के इंग्लिश एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय (ईएफएलयू) से सहयोग प्राप्त कर रहा है।
इंग्लिश भाषा शिक्षकों का प्रशिक्षण
स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सरकारी सकूलों में इंग्लिश भाषा पढ़ाने वाले शिक्षकों के प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया है। प्रशिक्षण के लिये ईएलटीआई ने शिक्षण सत्र के लिये कैलेंडर तैयार किया है। संस्थान इंग्लिश भाषा के मूल्यांकन के लिये विभिन्न स्तरों के प्रश्न-पत्रों के निर्माण और अन्य विषय के प्रश्न-पत्रों के अनुवाद कार्य में भी सहयोग कर रहा है। इंग्लिश भाषा के शिक्षकों को प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से जुड़े डिप्लोमा कोर्स कराने के लिये उनकी चयन प्रक्रिया में भी सहयोग कर रहा है। प्रदेश के ग्रामीण एवं आदिवासी अंचलों में कार्यरत शिक्षकों के लिये प्रशिक्षण कार्यक्रम के आयोजन में संस्थान विशेष ध्यान दे रहा है। संस्थान समय-समय पर विभिन्न शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता के आकलन एवं मूल्यांकन के कार्यों को भी सतत रूप से कर रहा है।
इंग्लिश ओलम्पियाड
संस्थान ने पिछले वर्ष इंग्लिश विषय में कक्षा-2 से 8 के लिये संकुल, विकासखण्ड तथा जिला स्तरीय प्रतियोगिता के लिये ओलम्पियाड प्रश्न बैंक तथा प्रश्न-पत्रों का निर्माण किया था। पिछले वर्ष ओलम्पियाड में शामिल छात्रों की संख्या 10 लाख से अधिक रही। संस्थान ने माध्यमिक शालाओं में इंग्लिश विषय पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिये आवश्यकता आधारित प्रशिक्षण के लिये मेन्युअल का भी निर्माण किया है। संस्थान ने राज्य द्वारा निर्मित कक्षा-1 से 8 तक की इंग्लिश की पाठ्य-पुस्तकों और एनसीईआरटी से जुड़ी कक्षा-9 से 12 तक की पाठ्य-पुस्तकों के निर्माण में समन्वय का कार्य भी किया है।
कम खर्च में ज्यादा फायदा देने वाले फलदार और छायादार पौधों का बहुतायत में करें रोपण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
23 Jul, 2025 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसान हो या आमजन, खरीदकर पौधे लगाने और उन्हें बड़ा करने में लागत अधिक आती है, इसलिए सबको नर्सरी और बगीचा लगाने के लिए प्रेरित तो करें, परंतु उन्हें पौधे उद्यानिकी विभाग उपलब्ध कराये। कम खर्च में ज्यादा फायदा देने वाले फलदार और छायादार पौधों का बहुतायत में रोपण कराया जाये। पौधरोपण के कार्य में निजी सेक्टर और किसानों को भी जोड़ा जाये। अधिक लाभ देने वाली पौध प्रजाति का चयन किया जाये, जिससे भविष्य में इनकी मांग के अनुरूप आपूर्ति (पौध उत्पादन) भी तैयार की जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान की बैठक में समीक्षा कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के किसानों और निजी क्षेत्रों को भी 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से जोड़ा जाए। सभी विभाग लक्ष्य की पूर्ति के लिए पौधरोपण में तेजी लाएं और रोपे गए पौधों की मॉनिटिरिंग भी बेहतर तरीके से करें। उद्यानिकी विभाग किसानों को फलदार वृक्ष लगाने के लिए प्रेरित करे, जिससे निकट भविष्य में फलों को बेचकर उनकी आय में वृद्धि हो सके। 'एक बगिया मां के नाम' के माध्यम से राज्य सरकार स्व-सहायता समूहों की महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए भी संकल्पित है। फलों की बगिया विकसित करने के लिए उन्हें तीन साल तक आर्थिक मदद दी जाएगी।
वन विभाग ने लगाए हैं अब तक 5 करोड़ 38 लाख से अधिक पौधे
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर प्रदेशभर में गत 5 जून से 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान चलाया जा रहा है, जो 30 सितंबर तक चलेगा। प्रमुख सचिव पर्यावरण ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस से प्रारंभ 'एक पेड़ मां के नाम अभियान' की मॉनीटरिंग के लिए मेरी लाइफ पोर्टल तैयार किया गया है। गत 5 जून से अब तक प्रदेश के विभिन्न विभागों और जिलों में करीब 5 करोड़ 54 लाख से अधिक पौधरोपण कर पोर्टल पर दर्ज कर दिया गया है। इस अभियान में अकेले वन विभाग ने ही वर्ष 2025-26 में 3.40 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा था। इस लक्ष्य के विरूद्ध 22 जुलाई तक 5 करोड़ 38 लाख से अधिक पौधों का रोपण कर दिया गया है। कुल पौधरोपण की 95 प्रतिशत से अधिक उपलब्धि वन विभाग ने हासिल की है। वन विभाग ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की थी, जिसमें पौधरोपण क्षेत्रों को अभियान से जोड़ने, शासन के निर्देशानुसार पौधरोपण की तैयारियां, संयुक्त वन प्रबंधन समितियों की सक्रिय भागीदारी, प्लांटेशन मॉनिटरिंग सिस्टम से पौधों की निगरानी और “मेरी लाइफ” पोर्टल पर पौधरोपण की नियमित जानकारी अपलोड करना भी शामिल है।
अभियान की अब तक की प्रगति
'एक पेड़ मां के नाम' अभियान में उच्च शिक्षा विभाग ने 1.60 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। अब तक प्रदेश के सभी शासकीय विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालय परिसरों में 1 लाख से अधिक देशी फलदार पौधे लगाए जा चुके हैं। इसी प्रकार नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने 1 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य रखा है। लक्ष्य के विरूद्ध प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में 4.15 लाख छायादार और औषधीय पौधे लगाए जा चुके हैं। यह अभियान नगरीय क्षेत्र में अर्बन फॉरेस्ट (ग्रीन कवर) तैयार करने में बेहद सहायक सिद्ध होगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने बड़े पैमाने पर स्व-सहायता समूह की महिलाओं को पौधरोपण अभियान से जोड़ा है। अब तक 7 हजार से अधिक महिलाओं को पौधरोपण स्थल का भ्रमण कराया गया है। विभाग की योजना रोपित किए गए सभी पौधों के रख-रखाव की जिम्मेदारी महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपने की है।
करीब 50 हजार पौधे रोजाना लगा रहा स्कूल शिक्षा विभाग
अभियान के तहत स्कूल शिक्षा विभाग ने 86 लाख 27 हजार से अधिक पौधरोपण का लक्ष्य तय किया है। प्रदेश के सभी स्कूलों और खुले मैदान में अब तक 5 लाख 37 हजार 625 आम, अमरूद, नीम, पीपल, बरगद, सागौन एवं शीशम जैसे फलदार एवं छायादार पौधे लगाए जा चुके हैं। बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. संजय गोयल ने बताया कि विभाग ने स्कूली बच्चों को इस अभियान से सक्रियता से जोड़ा है। विभाग प्रतिदिन बच्चों से पौधरोपण कराकर बच्चों की माता के साथ फोटो खिंचवाकर इन्हें मेरी लाइफ पोर्टल पर दर्ज कर रहा है। उन्होंने बताया कि सबके सामूहिक सहयोग एवं प्रयासों से विभाग द्वारा रोजाना 50 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। अगले दो से तीन माह में विभाग अपना लक्ष्य पूर्ण कर लेगा।
उद्यानिकी विभाग ने लगाए 9.34 लाख से अधिक पौधे
उद्यानिकी विभाग ने 4862 हेक्टेयर क्षेत्र में 21 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। प्रदेशभर में खेत, नदियों से सटे क्षेत्र तथा जलाशयों व नालों के आसपास अब तक 9.34 लाख से अधिक पौधरोपण किया जा चुका है। इनमें आम, अमरूद, संतरा, नीबू जैसे विभिन्न फलदार पौधे शामिल हैं। इसी प्रकार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने 15 अगस्त से 15 सितंबर तक प्रदेश में “एक बगिया मां के नाम” अभियान प्रारंभ कर पौधरोपण का लक्ष्य हासिल करने की योजना बनाई है। विभाग द्वारा विगत 15 जुलाई से गंगोत्री हरित परियोजना, मां नर्मदा परिक्रमा पथ पर पौधरोपण की शुरुआत कर दी गई है। पर्यावरण विभाग ने ईको क्लब से माध्यम से लगभग 37 हजार स्कूल परिसरों में अब तक 2 लाख 76 से अधिक पौधरोपण किया है।
बैठक में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल, प्रमुख सचिव पर्यावरण नवनीत मोहन कोठारी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक असीम श्रीवास्तव, आयुक्त नगरीय विकास एवं आवास संकेत भोंडवे, संचालक सह आयुक्त एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास छोटे सिंह, आयुक्त उद्यानिकी प्रीति मैथिल सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
खरगौन क्षेत्र में 12 कॉलोनियों में 85 मकान खतरे की जद में
23 Jul, 2025 09:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : खरगौन शहर और आसपास के क्षेत्रों में ट्रांसमिशन लाइनों के प्रतिबंधित क्षेत्रों में हुए अवैध निर्माण पर 85 मकान मालिकों को अतिक्रमण हटाने के लिये नोटिस जारी किये गये हैं। उल्लेखनीय है कि खरगौन में मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) की 132 के.व्ही. से लेकर 220 के.व्ही. तक की छह प्रमुख ट्रांसमिशन लाइनों के समीप मानव जीवन के लिये घातक और विद्युत सुरक्षा मानकों के विरूद्ध अनाधिकृत निर्माण कर लिये गये है।
ट्रांसमिशन लाइनो की प्रतिबंधित सीमा में हुये निर्माण
खरगौन के अनेक क्षेत्रों में ट्रांसमिशन लाइनो के प्रतिबंधित सीमा में अनाधिकृत निर्माण किये गये है, जिनमें विद्युत मानकों के अनुरूप न्यूनतम सुरक्षा दूरी का उल्लंघन किया गया है। यहां के ओंकार दत्त रेजिडेंसी, निमरानी, द्वारका धाम कॉलोनी, साकेत नगर, जेतपुरा, यमुना नगर कॉलोनी, खरगोन मोतीपुरा, हिंगलाज नगर, स्मार्ट पार्क टाउनशिप, माँ रेवा विन्यास कॉलोनी, पानवा एवं भीलगांव आदि क्षेत्रों में ट्रांसमिशन लाइन और निर्माण के बीच बेहद कम क्लियरेंस पाया गया है। यह अति उच्च वोल्टेज की बिजली से जुड़े संभावित करंट, स्पार्किंग, और अग्निकांड जैसे गंभीर खतरे उत्पन्न कर सकता है।
इन ट्रांसमिशन लाइनों के समीप हुये निर्माण
खरगौन जिले में मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी की छह ट्रांसमिशन लाइने हैं जिनके समीप विद्युत सुरक्षा मानकों के विरूद्ध निर्माण कर लिये गये हैं। इन ट्रांसमिशन लाइनों में 132 के.व्ही. भीकनगांव-खरगोन डी.पी. लाइन, 132 के.व्ही. बिस्टन-लिलो लाइन, 132 के.व्ही. निमरानी-कसरावद लाइन, 220 के.व्ही. निमरानी-छैःगांव लाइन, 220 के.व्ही. निमरानी-ओंकारेश्वर लाइन एवं 220 के.व्ही. महेश्वर-पीथमपुर लाईन शामिल हैं।
जरूरी है 27 मीटर का कॉरिडोर
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुसार, 132 के.व्ही. या इससे अधिक वोल्टेज की ट्रांसमिशन लाइन के नीचे कम से कम 27 मीटर की सुरक्षित दूरी आवश्यक है, ताकि हवा में झूलते तारों से संपर्क न हो और दुर्घटना टाली जा सके।
600 से 950 गुना अधिक रहता है ट्रांसमिशन लाइनों से जान का खतरा
आम घरों में उपयोग होने वाली विद्युत आपूर्ति की तीव्रता मात्र 230 वोल्ट होती है। यह स्तर भी इतना अधिक होता है कि यदि कोई व्यक्ति गलती से इसके संपर्क में आ जाए तो गंभीर रूप से घायल हो सकता है या उसकी जान भी जा सकती है लेकिन इससे भी कहीं अधिक खतरनाक होती हैं। शहर भर में क्रियाशील एक्स्ट्रा हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनें, जिनमें विद्युत तीव्रता 132 के.व्ही. (यानी 132,000 वोल्ट) एवं 220 के.व्ही. (यानी 2,20,000 वोल्ट) होती है। यह घरेलू बिजली की तुलना में 600 से 950 गुना अधिक रहती है। यह अंतर दर्शाता है कि अगर मात्र 230 वोल्ट के संपर्क में आने से जान को खतरा हो सकता है, तो 132 या 220 के.व्ही. की ट्रांसमिशन लाइनों के पास रहने या निर्माण करने से कितना बड़ा जोखिम हो सकता है। ट्रांसमिशन लाइनों के आसपास निर्धारित प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण करना न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि यह जानलेवा जोखिम भी उत्पन्न करता है।
जनहित के कार्य समयसीमा में पूर्ण कराएं: राज्यमंत्री गौर
23 Jul, 2025 09:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने बुधवार को मंत्रालय में विभिन्न विकासकार्यों की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनहित से जुड़े सभी कार्य निर्धारित समयसीमा में पूर्ण किए जाएं। उन्होंने कहा कि अधूरे कार्यों के कारण आमजन को असुविधा होती है, जिसे किसी भी स्थिति में नजर अंदाज नहीं किया जा सकता।
अधूरे कार्य जल्द पूर्ण करने के निर्देश
राज्यमंत्री गौर ने आईटीआई रहवासी परिसर, गौतम नगर बस्ती, गायत्री नगर समेत अनेक कॉलोनियों के विकास कार्यों का प्राक्कलन शीघ्र तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने क्षेत्र में नियमित साफ-सफाई, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, नालियों की सफाई, विद्युत पोलों की शिफ्टिंग और अतिरिक्त ट्रांसफार्मरों की स्थापना कर स्ट्रीट लाइट व्यवस्था सुधारने पर बल दिया।
सरयू सरोवर पार्क का सौंदर्यीकरण और असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई होगी
राज्यमंत्री गौर ने सरयू सरोवर पार्क की बदहाल स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पार्क में खराब फव्वारे और झूलों की मरम्मत शीघ्र कराई जाए। पाथवे निर्माण, पार्क का समुचित रख-रखाव, हाईमास्ट लाइट की व्यवस्था एवं वाचनालय की बाउंड्रीवाल निर्माण कार्य शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए। साथ ही अयोध्या नगर क्षेत्र में बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों का सर्वे कर उन्हें पुनः चालू करने के निर्देश भी दिए। बैठक में लव-कुश यादव, पार्षद शिरोमणि शर्मा, उर्मिला मौर्य समेत अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
सड़क दुर्घटना से होने वाली मृत्यु से लोगों को बचाने मिशन मोड में करें कार्य
23 Jul, 2025 09:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : सड़क दुर्घटना पीड़ितों का नकदी रहित उपचार स्कीम, 2025 एवं राह-वीर योजना के प्रदेश में क्रियान्वयन के लिए विभिन्न विभागों द्वारा की जाने वाली कार्यवाही की मुख्य सचिव अनुराग जैन ने मंत्रालय में एक बैठक में बुधवार को समीक्षा की।
मुख्य सचिव जैन ने कहा कि सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को गोल्डन ऑवर मे इलाज मिल सके, इसके लिए संबंधित-विभाग मिलकर मिशन मोड में कार्य करें। दुर्घटना से होने वाली मृत्यु से लोगों को बचाने के सभी संभव प्रयास किये जाने चाहिये। संभावित दुर्घटना स्थलों को चिन्हांकित कर दुर्घटना के कारणों को दूर किया जाना चाहिये। सड़क सुरक्षा को मजबूत करने तथा नागरिकों को जागरूक करने का कार्य किया जाये। उन्होंने कहा कि सभी जिलों में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाये और परिवहन, स्वास्थ्य एवं लोक निर्माण विभाग मिलकर संयुक्त रूप से कार्य करें। ऐसा सिस्टम विकसित किया जाए कि नियत समय में कार्य हो सके। उन्होंने विभागों में बेहतर समन्वय तथा योजनाओं से संबंधित सभी-विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशिक्षित किए जाने के भी निर्देश दिए हैं।
बैठक में योजना के क्रियान्यन के लिए विभागों के दायित्वों का निर्धारण करने के साथ सुझाव भी लिये गये। अपर मुख्य सचिव जे.एन.कंसोटिया, संजय कुमार शुक्ल, सचिव परिवहन मनीष सिंह, परिवहन आयुक्त तथा लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, आयुष्मान भारत एवं पुलिस मुख्यालय के अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।
स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाओं के लिए तैयार करें पाठ्यक्रम : राज्यपाल पटेल
23 Jul, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाओं को पहचान कर विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम तैयार करें। उन्होंने प्रदेश में देश विदेश से निवेश प्रस्ताव प्राप्त करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल की सराहना की है। अपेक्षा की है कि निवेश परियोजना क्रियान्वयन के साथ ही उद्योग में रोजगार के लिए उपयुक्त अभ्यर्थी उपलब्ध कराने के लिए कोर्स प्रारम्भ करें, जिससे परियोजना शुरू होने के साथ ही आवश्यकता अनुसार स्थानीय स्तर के युवा उपलब्ध हो सकें।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज करेंसी का जमाना है, लेकिन स्किल (कौशल) ही करेंसी है, भारत इसे अच्छी तरह समझता है। इसीलिए हम नवाचार करते हुए कौशल विकास की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। मध्यप्रदेश एक कृषि प्रधान और तेजी से बढ़ता राज्य है। इसीलिए हम खेती की पढ़ाई को सामान्य महाविद्यालयों तक लेकर गए हैं। अगर कोई युवा खेती में करियर बनाना चाहे तो उसे आधुनिक तकनीक की जानकारी होनी चाहिए। विश्वविद्यालयों के दायरे विस्तृत होने चाहिए। सभी कोर्स यहां से संचालित होने चाहिए।
राज्यपाल पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उक्त विचार उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विकसित मध्यप्रदेश @2047 ‘रोजगार आधारित शिक्षा-रूझान एवं नए अवसर’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही है। कार्यशाला का आयोजन बुधवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में किया गया।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय रोजगार आधारित शिक्षा-रूझान एवं नए अवसर कार्यशाला समय की आवश्यकता है। भविष्य की तैयारी का सशक्त मंच है। रोजगार केन्द्रित शिक्षा और विकसित भारत के निर्माण में प्रदेश के योगदान को बढ़ाने की प्रभावी पहल है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि शिक्षा समाज की रीढ़ है। यह समय के साथ तालमेल बैठाने, नवाचारों को अपनाने और नवीन अवसरों का लाभ उठाने के लिए व्यक्ति, समाज और राष्ट्र को सक्षम बनाती है। इसलिए हमारी शिक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जो विद्यार्थियों को रोजगार के अवसरों तक सुलभ पहुंच देने के साथ ही उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त बनाए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिक्षा से मनुष्य का समग्र विकास होता है। यह आयोजन को बदलते दौर में रोजगार आधारित शिक्षा और अवसरों का विकास करने के क्रम किया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर सबसे पहले 1968 और उसके बाद 1988 में मंथन हुआ। अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर तीसरी बार मंथन हो रहा है। लेकिन आजादी के बाद 2020 से पहले कभी भी लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति से बाहर आकर विचार नहीं किया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल शासन की मंशा को समझने वाले दृष्टा थे। इसी भाव से उन्होंने सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करते हुए देश की जड़ों को मजबूत करने का कार्य किया। महात्मा गांधी ने अहिंसा के अस्त्र का उपयोग करते हुए देश के गांव-गांव तक स्वतंत्रता की अलख जगाई थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुनिया, भारत के साथ आने के लिए लालायित है। आक्रांताओं ने भारतीय संस्कृति पर आक्रमण करने के लिए हमारी शिक्षा के बड़े केंद्रों तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला को तोड़ने और जलाने का कार्य किया। मध्य प्रदेश 64 कलाओं की शिक्षा वाली भूमि है। इसीलिए भगवान श्रीकृष्ण शिक्षा ग्रहण करने के लिए उज्जैन के सांदीपनि आश्रम आए थे। हम उस देश के वासी हैं, जहां होठों पर सच्चाई रहती है और जो होठों पर सच्चाई लेकर आए वही शिक्षा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में शासकीय और निजी मिलाकर 70 से अधिक विश्वविद्यालय हैं। भारत विश्वगुरु है और गुरु वह जो हमारे जीवन में अंधकार हटाकर उसे प्रकाशमय कर दे। जेएनयू ने भी मध्यप्रदेश की कुलगुरु परंपरा को आत्मसात कर लिया है। सरकार प्रदेश में 10 हजार से अधिक शैक्षणिक संस्थाओं में एनईपी लागू करने पर आगे बढ़ चुकी है। प्रदेश में 220 से अधिक सांदीपनि विद्यालयों की शुरुआत की गई है। यहां विद्यार्थियों के लिए आधुनिक कंप्यूटर कोडिंग लैब स्थापित की गई हैं। शिक्षा केवल कागज की डिग्री लेने के लिए न हो, बल्कि वह भविष्य की चुनौतियों से लड़ने और उसे समझने में समर्थ हो। इसीलिए प्रदेश के विश्वविद्यालयों में आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्युटिंग और बायोटेक्नोलॉजी जैसे कोर्स शुरू किए गए हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश दूध उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर है। हमने शीर्ष स्तर पर पहुंचने का लक्ष्य रखा है। प्रदेश में 6 करोड़ से अधिक पशुधन है, इसीलिए राज्य सरकार प्रदेश में वेटेनरी कॉलेज की संख्या बढ़ाने पर जोर दे रही है। हम सिंचाई के रकबे के साथ-साथ मत्स्य उत्पादन को भी बढ़ाने के लिए संकल्पित हैं।
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि शिक्षा हर काल में सर्वोच्च रही है। भारतीय संस्कृति में संस्कारों को आगे बढ़ाते हुए रोजगार देने की परंपरा थी। बिना संस्कारों के हम श्रेष्ठ और कर्तव्यनिष्ठ नागरिक नहीं बना सकते हैं। प्रदेश में नई शिक्षा नीति और कार्य की जवाबदेही तय करने की पहल देश भर में स्थान बनाएगी और प्रदेश के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगी।
कार्यक्रम के प्रारंभ में राज्यपाल पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यशाला का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन कर किया। राज्यपाल पटेल का उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने पौधा, श्रीफल, अंग वस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। कार्यशाला में विषय -विशेषज्ञ इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) नई दिल्ली के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी और आई.ई.यू.ए.सी. के निदेशक डॉ. ए.सी. पांड़े ने विचार रखे।
राष्ट्रीय कार्यशाला के प्रारंभ में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन ने स्वागत उद्बोधन दिया। मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. भरत शरण सिंह ने आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव के.सी. गुप्ता, उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त प्रबल सिपाहा, प्रदेश के सभी शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलगुरू, वरिष्ठ प्राध्यापक और विषय-विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
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