मध्य प्रदेश
थाना परिसर में आत्मदाह का प्रयास करने वाले युवक ने तोड़ा दम, सुनवाई ना होने से था परेशान
29 Jul, 2025 10:49 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ग्वालियर: हजीरा पुलिस थाना परिसर में 24 जुलाई को पुलिस के सामने आत्मदाह का प्रयास करने वाले युवक की सोमवार को इलाज के दौरान मौत हो गई. युवक अपने ही सगे रिश्तेदारों से पीड़ित था और सुनवाई ना होने के चलते उसने ऐसा कदम उठाया था.
पुलिस थाने में लगाई थी खुद को आग
बता दें कि बीते 24 जुलाई को ग्वालियर के बिरला नगर लाइन नंबर 1 में रहने वाले युवक ने हजीरा पुलिस थाना परिसर में खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किया था. युवक लगातार अपने बहन-बहनोई से प्रताड़ित था और उसका अपने घर के मकान का विवाद चल रहा था. उसका आरोप था कि पुलिस उसकी सुनवाई करने की जगह उसे परेशान कर रही है. इसी बात से हताश हो कर उसने प्राणघातक कदम उठाया था.
इलाज के दौरान तोड़ा दम
युवक द्वारा आग लगाते ही पुलिस ने तुरंत उसकी आग बुझाने का प्रयास किया लेकिन तब तक वह 80 फीसदी तक झुलस चुका था. जिसके बाद पुलिस ने आनन फानन में उसे जेएएच हॉस्पिटल में भर्ती कराया था जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई थी. चूंकि युवक का शरीर हद से ज्यादा झुलस चुका था, ऐसे में 4 दिन इलाज के बाद सोमवार को उसने दम तोड़ दिया. हालांकि युवक की मौत के बाद परिजन ने शहर के हाजिर चौक पर शव रखकर चक्काजाम किया और आरोपियों पर कार्रवाई की मांग भी की.
क्या है पूरा मामला?
असल में पीड़ित युवक का अपनी बहन और बहनोई से पैतृक मकान को लेकर विवाद था, उसका आरोप था कि उसके दोनों रिश्तेदार उसके मकान पर कई वर्षों से कब्जा किए हुए हैं. इस बात को लेकर कई बार विवाद भी हुआ था. युवक की पत्नी के अनुसार बीते 23 जुलाई को उसका ननदोई अपने एक दोस्त के साथ घर आया और दोनों ने महिला से छेड़छाड़ की. ये बात जब अपने पति को बताई तो ननदोई से विवाद हुआ, जिसमें युवक के साथ मारपीट भी हुई. इस घटना के बाद पीड़ित दंपति पुलिस में शिकायत करने पहुंचे तो ननदोई ने भी झूठी मारपीट की शिकायत पुलिस में की. जिस पर पुलिस ने पीड़ित दंपति की कोई सुनवाई नहीं की.
घटना के एक दिन बाद हुई थी एफआईआर
इस घटना से आहत होकर 24 जुलाई को युवक ने पुलिस थाना परिसर में ही खुद को आग लगा ली. इस घटना के बाद मामला उछला तो 25 जुलाई को ननदोई और उसके दोस्त पर पुलिस ने छेड़छाड़ और मारपीट का मामला दर्ज कर लिया.
वहीं युवक की मौत के बाद एएसपी केएल चंदानी का कहना है कि "पूरे मामले की जांच की जा रही है. युवक की इलाज के दौरान मौत हो गई है ऐसे में आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामले में खुदकुशी के लिए उकसाने के संबंध में धाराओं में इजाफा किया जाएगा. एक दिन पहले ही आरोपी ननदोई और उसके दोस्त को गिरफ्तार कर लिया गया था."
दिव्यांगता परमात्मा का परम अंश और इनकी सेवा परमात्मा की सेवा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
28 Jul, 2025 11:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सामाजिक समानता और समरसता लोक कल्याणकारी राज्य का प्राथमिक दायित्व है। समाज के सभी वर्गों, विशेषकर दिव्यांगजनों और कमजोर वर्गों के हितों की पूर्ति एवं उनका संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। सरकार दिव्यांगजनों को संबल देकर उन्हें समर्थ और सशक्त बनाने के लिए हर जरूरी कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दिव्यांगजन परमात्मा का परम अंश है और इनकी सेवा परमात्मा की सेवा है। दिव्यांगजनों को लाभ दिलाने के लिए शिविर लगाएं। इन शिविरों में नए दिव्यांगजनों को भी चिन्हित किया जाए और उन्हें उनकी जरूरत के मुताबिक सहयोग, मार्गदर्शन तथा सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि सामाजिक न्याय विभाग द्वारा संचालित सभी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचे, इसके लिए योजना कियान्वयन की सतत् निगरानी भी सुनिश्चित की जाये।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिव्यांगजनों के विकास एवं कल्याण के लिए अब तक हुए प्रयासों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा में लाने और उन्हें स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमारी सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। हम सबका यह कर्तव्य है कि इस पुनीत कार्य में सभी सक्रिय होकर भागीदारी करें। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों एवं कुष्ठ पीड़ितों के कल्याण के लिए अन्य प्रदेशों में प्रचलित मॉडल का भी अनुसरण करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि कल्याणियों के विवाह के लिए संचालित मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह प्रोत्साहन योजना का अधिक से अधिक प्रचार किया जाए जिससे जरूरतमंद कल्याणी इसका लाभ ले सकें। इस कार्य के लिए एक पोर्टल तैयार कर लिया गया है।
बैठक में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण, उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण सोनाली वायंगणकर सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
नवनिर्मित पेड ओल्ड एज होम का लोकार्पण बहुत जल्द
बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पेड ओल्ड एज होम आज के दौर में वरिष्ठ नागरिकों की जरूरत बनते जा रहे हैं। नए परिवेश में बच्चे पढ़ने या नौकरी के लिए विदेश/बाहर चले जाते हैं। आगरा और जयपुर जैसे शहरों में पेड ओल्ड एज होम अच्छी तरह से संचालित हैं। इस तरह के वृद्धाश्रमों के लिए भारतीय परिवेश और संस्कृति से जुड़ा कोई हिन्दी नाम तय कर इन्हें प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की देख-रेख सेवा का काम है इस काम से अशासकीय संगठनों और धार्मिक व परमार्थ संस्थाओं को भी जोड़ें।
मंत्री कुशवाह ने बताया कि भोपाल के पत्रकार कॉलोनी क्षेत्र में कुल 23.96 करोड़ रुपए की लागत से एक शासकीय पेड ओल्ड एज होम का निर्माण कराया गया है। इस नवनिर्मित भवन का लोकार्पण बहुत जल्द मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कर कमलों से ही कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस नवनिर्मित पेड ओल्ड एज होम में सेवाएं देने के लिए इच्छुक संस्था के चयन के लिए कार्रवाई की जा रही है। इसका संचालन यहां निवासरत वरिष्ठजनों से समुचित शुल्क लेकर किया जाएगा। इस वृद्धाश्रम के कमरों का किराया सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के बैंकखाते में जमा कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसी तरह के अन्य पेड ओल्ड एज होम्स के निर्माण के लिए निजी संस्थाएं भी निवेश के लिए आगे आ रही हैं। इन निजी संस्थाओं द्वारा निर्माण के लिए शासन से भूमि की मांग की जा रही है।
विशिष्ट पहचान पत्र और पेंशन भुगतान में उल्लेखनीय प्रगति
मंत्री कुशवाह ने बताया कि प्रदेश में अबतक 9.57 लाख से अधिक दिव्यांगजनों के यूडीआईडी कार्ड (विशिष्ट पहचान पत्र) बनाए जा चुके हैं। इन पहचान पत्रों के आधार पर दिव्यांगजन शासकीय योजनाओं का सीधा लाभ प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 56 लाख से अधिक पेंशन हितग्राहियों को हर माह 339 करोड़ रुपए से अधिक की राशि सिंगल क्लिक के जरिए उनके बैंकखातों में हस्तांतरित की जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के लिए विशेष भर्ती अभियान भी चलाया जा रहा है, जिसके तहत 2500 से अधिक दिव्यांगजनों को शासकीय सेवा में रोजगार प्रदान किया गया है। मंत्री कुशवाह ने बताया कि नि:शक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत बीते 10 सालों में कुल 11294 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया। उन्होंने बताया कि दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठ जनों के उपचार के लिए प्रदेश के सभी जिलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित किया गया है इन केन्द्रों में फिजियोथेरेपिस्ट के साथ ही अन्य प्रकार की थैरेपेटिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
निःशुल्क दिव्यांग हेल्पलाइन 1800-233-4397 शुरु
बैठक में प्रमुख सचिव वायंगणकर ने बताया कि प्रदेश में श्रवण बाधित दिव्यांगजनों की सहायता के लिए लाइव इंटरप्रेटर सेवाएं प्रारंभ की गई हैं। इसके लिए "डेफ कैन एसोसिएशन" संगठन के साथ एमओयू किया गया है। "आरूषि" संस्था के सहयोग से निःशुल्क दिव्यांग हेल्पलाइन 1800-233-4397 की शुरुआत भी की गई है। उन्होंने जानकारी दी कि दिव्यांगजनों की खेल प्रतिभाओं को अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इनकी प्रतिस्पर्धा गतिविधियों के प्रोत्साहन के लिए विशेष योजना तैयार की जा रही है। प्रदेश के कुछ चयनित जिलों में वृद्धाश्रम और नशामुक्ति केंद्रों की स्थापना की जा रही है। वृद्धजनों को घर पर ही देखरेख का प्रशिक्षण देने के लिए इस विषय में महारत रखने वाली संस्थाओं का चयन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को 'मिशन कर्मयोगी' के अंतर्गत आईगोट पोर्टल पर पंजीकृत किया गया है। विभाग के अधीन सभी शासकीय एवं अशासकीय संस्थाओं की सतत् निगरानी के लिए एक मोबाइल ऐप विकसित किया गया है और इसके तहत अब तक 135 संस्थाओं का निरीक्षण किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि 42 जिलों में ई-ऑफिस प्रणाली से विभागीय कार्य संपादित किये जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम में होंगे शामिल
28 Jul, 2025 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 29 जुलाई मंगलवार को दोपहर 12 बजे कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर भोपाल में ‘अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस’ के अवसर पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। वे इस अवसर पर वन्य जीव ट्रांस लोकेशन, रेस्क्यू एवं डॉग स्क्वॉड वाहनों का लोकार्पण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव वन्य जीव संरक्षण गतिविधियों से संबंधित प्रदर्शनी का अवलोकन कर वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली वन सुरक्षा समितियों, ईको विकास समिति, ग्राम वन समिति और वन कर्मियों को पुरस्कृत भी करेंगे।
राज्य स्तरीय कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप सिंह अहिरवार, अपर मुख्य सचिव वन अशोक बर्णवाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव शुभरंजन सेन, वन सुरक्षा समितियों, ईको विकास समिति, ग्राम वन समिति के सदस्य और वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहेंगे।
आंगनवाड़ी केंद्रों को सशक्त बनाकर ECCE के लक्ष्यों की ओर अग्रसर मध्यप्रदेश
28 Jul, 2025 10:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : अपर मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास रश्मि अरुण शमी ने कहा है कि प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) की प्रभावी कार्ययोजना तब ही संभव है जब हम विभागीय मैदानी अमले के अनुभवों और संसाधनों का व्यावहारिक उपयोग करें। आंगनवाड़ी केंद्रों को सशक्त बनाना प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा के लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में निर्णायक कदम है। शमी ने यह भी रेखांकित किया कि ECCE नीति की सफलता का आधार उसके क्रियान्वयन में लगे अमले की सहभागिता है। बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा के क्षेत्र में जमीनी अनुभवों का समावेश आगामी कार्ययोजना की दिशा तय करेगा।
अपर मुख्य सचिव शमी रविवार को मुख्य सचिवों के 5वें राष्ट्रीय सम्मेलन के अंतर्गत “Human Capital for Viksit Bharat” विषय की उप-थीम “ECCE: Laying the Foundation” पर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा रविवार को भोपाल के होटल लेक व्यू रेसीडेंसी में आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रही थी।
2047 के विकसित भारत की नींव ECCE में: आयुक्त महिला बाल विकास सूफिया
आयुक्त महिला एवं बाल विकास, सूफिया फारूकी वली ने कहा कि ECCE विकसित भारत के निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की निरंतर दक्षता विकास को आवश्यक बताते हुए कहा कि आज के आंगनवाड़ी केंद्रों में पल रहे बच्चे ही कल की निपुण मानव पूंजी हैं। मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत i-GoT ऐप जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का नियमित उपयोग परियोजना अधिकारियों और पर्यवेक्षकों को अद्यतन रखने में सहायक होगा।
समूह चर्चा के माध्यम से सुझावों का संकलन
कार्यशाला में प्रतिभागियों को पाँच समूहों में बाँटकर पाँच प्रमुख विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। इन समूहों से प्राप्त सुझावों का समेकन कर ECCE को सशक्त बनाने हेतु एक व्यावहारिक एवं ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
कार्यशाला में संभागीय संयुक्त संचालक, जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी, पर्यवेक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि, संचालनालय के अधिकारी एवं ECCE के विषय-विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी की।
रोग की पहचान, फॉलोअप और समय पर सही उपचार महत्वपूर्ण : उप मुख्यमंत्री शुक्ल
28 Jul, 2025 10:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि रोग की पहचान, उसका फॉलोअप और समय पर सही इलाज उपलब्ध होना, रोग के निदान के लिए महत्वपूर्ण घटक हैं। सशक्तिकरण स्वास्थ्य तंत्र के लिए इन सभी घटकों पर आपसी समन्वय से कार्य करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कैंसर पीड़ित बच्चों को उन्नत इलाज और सामाजिक सहयोग की संपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सोमवार को मंत्रालय भोपाल में पीडियाट्रिक कैंसर के बेहतर प्रबंधन के लिए कैनकिड्स संस्था से सहयोग के विभिन्न बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि राज्य सरकार पीडियाट्रिक कैंसर की चुनौती से निपटने के लिए एकीकृत रणनीति पर कार्य करेगी, जिसमें शासन, विशेषज्ञ संस्थाएं और समाज की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। राज्य में उपलब्ध संसाधनों और विशेषज्ञों के बेहतर उपयोग के लिए हब-स्पोक्स और रेफरल पाथवे मॉडल को अनुमोदित कर चरणबद्ध रूप से क्रियान्वित किया जाएगा। मानव संसाधन जैसे स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और सामाजिक सहयोग टीमों की क्षमता वृद्धि और प्रशिक्षण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कैनकिड्स संस्था से इस सहयोग के लिए अपने सुझाव देने का आग्रह किया।
बैठक में पीडियाट्रिक कैंसर की देखरेख के लिए उपयुक्त अधोसंरचना के सृजन एवं सुदृढ़ीकरण के विभिन्न विषयों पर विमर्श किया गया। सेवा प्रदाय की गुणवत्ता में सुधार के लिए सामाजिक सहयोग सेवाओं को समाहित करने और सहयोग के विभिन्न आयामों पर चर्चा की गयी। उपचार, देखरेख और सहयोग के लिए प्रोटोकॉल आधारित थैरेपी, बोन मैरो ट्रांसप्लांट और नवीनतम उपचार पद्धतियों को अपनाने साथ ही बहु-केंद्रित अनुसंधान, डेटा संकलन, नवाचार और एकीकरण को प्रोत्साहन देने के सुझाव पर योजनाबद्ध कार्यवाही करने पर चर्चा हुई। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, आयुक्त स्वास्थ्य तरुण राठी, मिशन संचालक एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी एवं कैनकिड्स संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
नई शिक्षा नीति से रोजगार और कौशल विकास में बढेंगी संभावना : स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह
28 Jul, 2025 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि देश में वर्ष 2014 के बाद शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़ा बदलाव देश में लागू की गई नई शिक्षा नीति-2020 है। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का शिक्षा के क्षेत्र में लिया गया महत्वपूर्ण निर्णय है। नई शिक्षा नीति से स्कूल में बच्चों का कौशल विकास और भविष्य में रोजगार की संभावनाओं को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश के उन अग्रणी राज्यों में है, जहां नई शिक्षा नीति को निरंतर प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। मंत्री सिंह सोमवार को भोपाल के मॉडल स्कूल टीटी नगर छात्र संघ के शपथ समारोह को संबोधित कर रहे थे। मंत्री सिंह ने इस मौके पर प्रतिभाशाली बच्चों को सम्मानित किया। इन बच्चों ने बोर्ड की कक्षा 12वीं और 10वीं की परीक्षा में 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किये हैं।
स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह ने प्रदेश के स्कूलों की गुणवत्ता की चर्चा करते हुए कहा कि राज्य में 75 हजार स्कूल मॉडल, एक्सीलेंस और पीएमके रूप में सर्व-सुविधा के साथ विकसित किये जा चुके हैं। बच्चों को विश्व-स्तरीय अध्ययन सुविधा उपलब्ध कराने के लिये करीब 300 स्कूल सांदीपनि विद्यालय के रूप में संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि रतलाम के सांदीपनि स्कूल ने तो दुनिया के श्रेष्ठ स्कूलों में अपना स्थान बनाया है। यह मध्यप्रदेश के लिये गौरव की बात है। मॉडल स्कूल टीटी नगर की चर्चा करते हुए मंत्री सिंह ने कहा कि यह स्कूल अपनी उत्कृष्टता के कारण प्रदेश में अपना अलग स्थान रखता है। इस स्कूल के पढ़े बच्चों ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त की है।
डिजिटल अटेंडेंस
स्कूल शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लागू डिजिटल अटेंडेंस व्यवस्था शिक्षकों के लिये भी सुविधाजनक है। शिक्षक डिजिटल प्लेटफार्म से अपने अवकाश की स्वीकृति, लेखा संबंधी और समस्याओं को भी दर्ज करा सकते हैं। इस डिजिटल प्लेटफार्म को भोपाल के कमांड सेंटर से संचालित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग जल्द ही अनुकंपा नियुक्ति नीति भी घोषित करेगा। इसके माध्यम से एक निश्चित समय-सीमा में दिवंगत शिक्षकों के परिवार के नियुक्ति संबंधी प्रकरणों को हल किया जायेगा।
कार्यक्रम को विधायक भगवान दास सबनानी ने भी संबोधित किया। मॉडल स्कूल की प्राचार्य रेखा शर्मा ने गुणवत्ता के क्षेत्र में स्कूल को प्राप्त श्रेष्ठ पुरस्कारों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छात्रसंघ के चुनाव के जरिये बच्चों को चुनाव प्रणाली और लोकतंत्र के महत्व के बारे में बताया गया है। बच्चों ने इस मौके पर देश की विविधता भरी संस्कृति पर केन्द्रित आकर्षक सामूहिक नृत्यों को प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में क्षेत्र की पार्षद अनीता अनेजा, उप प्राचार्य आर.के. श्रीवास्तव, शिक्षकगण और परिजन भी मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन शिक्षक डॉ. शबनम खान ने किया।
अमरकंटक ताप विद्युत गृह की यूनिट नंबर 5 ने लगातार दूसरी बार बनाया 300 दिन विद्युत उत्पादन करने का नया रिकार्ड
28 Jul, 2025 09:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई के अभियंताओं व कार्मिकों के समर्पण, कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता ने 210 मेगावाट स्थापित क्षमता की यूनिट को लगातार 300 दिन तक संचालित करने में सफलता हासिल की है। यूनिट ने अपनी स्थापना के बाद दूसरी बार 300 दिन विद्युत उत्पादन करने का रिकार्ड बनाया। इस यूनिट ने दूसरी बार 1 अक्टूबर 2024 से 28 जुलाई 2025 तक 300 दिन सतत् विद्युत उत्पादन करने का रिकार्ड बनाया। इससे पूर्व इस यूनिट ने 27 अगस्त 2023 से 22 जून 2024 तक 300 दिन सतत् विद्युत उत्पादन करने का नया रिकार्ड बनाया था। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने अमरकंटक ताप विद्युत गृह के यूनिट नंबर 5 के अभियंताओं व कार्मिकों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि समर्पण, कड़ी मेहनत व प्रतिबद्धता से लक्ष्य अर्जित करने का यह सर्वश्रेष्ठ व अनुकरणीय उदाहरण है।
सारनी की यूनिट नंबर 10 के नाम दर्ज है सर्वाधिक 305 दिन सतत् विद्युत उत्पादन का रिकार्ड
मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी की 250 मेगावाट स्थापित क्षमता की यूनिट नंबर 10 के खाते में सर्वाधिक 305 दिन सतत् विद्युत उत्पादन करने का रिकार्ड दर्ज है। इस यूनिट ने यह उपलब्धि वित्तीय वर्ष 2022-23 में हासिल की थी।
विभिन्न मापदंडों में भी मिली उपलब्धि
विद्युत गृह चचाई की यूनिट ने 300 दिन सतत् विद्युत उत्पादन करने का कीर्तिमान अर्जित कर इसी अवधि में विभिन्न मापदंडों में भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। यूनिट ने 99.52 फीसदी प्लांट उपलब्धता फेक्टर (पीएएफ), 97.33 फीसदी प्लांट लोड फेक्टर (पीएलएफ) व 9.08 प्रतिशत ऑक्जलरी कंजम्पशन की उपलब्धि हासिल की।
नदियों और जल स्त्रोतों के प्रति समाज को संवेदनशील बनाने का सांस्कृतिक प्रयास है "सदानीरा" प्रदर्शनी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
28 Jul, 2025 09:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप राज्य सरकार ने 30 मार्च से 30 जून 2025 तक 90 दिवसीय जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया। सम्पूर्ण प्रदेश में चले इस अभियान में जनभागीदारी की अद्भुत मिसाल देखने को मिली। स्थानीय नागरिकों ने जल संरक्षण के प्रति अपनी सहभागिता सुनिश्चित की नदियों, जलस्रोतों व जल संरचनाओं को संरक्षित करने 2 लाख 30 हजार 740 से अधिक जलदूतों ने पंजीयन कराया। अभियान के अंतर्गत अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल कर निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति करते हुए मध्यप्रदेश में 84 हजार 726 खेत तालाब, 1 लाख 4 हजार 276 कूप रिचार्ज पिट और 1283 अमृत सरोवरों का निर्माण कराया गया। इतना ही नहीं जल संचय करने वाले जिलों में खंडवा देशभर में नबर वन बना और राज्यों की श्रेणी में मध्यप्रदेश, देश में चौथे स्थान पर रहा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा के सेंट्रल हॉल में जल गंगा संवर्धन अभियान की उपलब्धियों पर केंद्रित प्रदर्शनी "सदानीरा" का शुभारंभ कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी मौजूद रहे।
नदी संरक्षण वैज्ञानिक दायित्व के साथ सांस्कृतिक चेतना का भी है आह्वान
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस अभियान ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश की एक अलग पहचान स्थापित की है। यह अभियान अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा स्त्रोत है। अभियान की अभूतपूर्व उपलब्धियों को प्रदर्शनी के रूप में संयोजित किया गया है। यह प्रदर्शनी नदियों और जल स्त्रोतों के प्रति समाज को संवेदनशील बनाने का एक सांस्कृतिक प्रयास है। नदियां जलधाराएं ही नहीं, हमारी स्मृतियों, परंपराओं और जीवन की आधारशिला है। नदी संरक्षण केवल वैज्ञानिक दायित्व नहीं, अपितु सांस्कृतिक चेतना का आह्वान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा के सेंट्रल हॉल तथा फोर लेन मुक्ताकाशी परिसर में केन्द्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। यह प्रदर्शनी विधानसभा सत्र के दौरान विधानसभा सदस्यों के अवलोकन के लिए उपलब्ध रहेगी।
वीर भारत न्यास ने किया प्रदेश की जलीय विविधता को प्रदर्शित
प्रदर्शनी में जल गंगा संवर्धन अभियान की उपलब्धियों, प्रदेश की बावड़ियों, जलीय जीवन के प्राणतत्व-जलचर, अमृतस्य नर्मदा, उपग्रह की नजर से प्रदेश की प्रमुख जल संरचनाओं जैसी प्रदेश की जलीय विविधता को वीर भारत न्यास द्वारा प्रदर्शित किया गया है। इस प्रदर्शनी में जनसंपर्क विभाग और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय एवं बरकतउल्ला विश्वविद्यालय सहयोगी संस्थाएं हैं।
"मध्यप्रदेश में बाघ की दहाड़ बरकरार"
28 Jul, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मध्यप्रदेश के लिये विशेष महत्व रखता है। बाघों के अस्तित्व और संरक्षण के लिये प्रदेश में जो कार्य हुए है, उसके परिणाम स्वरूप आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक बाघ मध्यप्रदेश में है, यह न सिर्फ मध्यप्रदेश बल्कि भारत के लिये भी गर्व की बात है। वर्ष 2022 में हुई बाघ गणना में भारत में करीब 3682 बाघ की पुष्टि हुई, जिसमें सर्वाधिक 785 बाघ मध्यप्रदेश में होना पाये गये।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की संवेदनशील पहल के परिणाम स्वरूप बाघों की संख्या में वृद्धि के लिये निरंतर प्रयास हो रहे हैं। बाघ रहवास वाले क्षेत्रों के सक्रिय प्रबंधन के फलस्वरूप बाघों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है। मध्यप्रदेश के कॉरिडोर उत्तर एवं दक्षिण भारत के बाघ रिजर्व से आपस में जुड़े हुए हैं। प्रदेश में बाघों की संख्या बढ़ाने में राष्ट्रीय उद्यानों के बेहतर प्रबंधन की मुख्य भूमिका है। राज्य शासन द्वारा जंगल से लगे गांवों का विस्थापन किया जाकर बहुत बड़ा भूभाग जैविक दवाब से मुक्त कराया गया है। संरक्षित क्षेत्रों से गांव के विस्थापन के फलस्वरूप वन्य प्राणियों के रहवास क्षेत्र का विस्तार हुआ है। कान्हा, पेंच और कूनो पालपुर के कोर क्षेत्र से सभी गांवों को विस्थापित किया जा चुका है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व का 90 प्रतिशत से अधिक कोर क्षेत्र भी जैविक दबाव से मुक्त हो चुका है। विस्थापन के बाद घांस विशेषज्ञों की मदद लेकर स्थानीय प्रजातियों के घास के मैदान विकसित किये गये हैं, जिससे शाकाहारी वन्य प्राणियों के लिये वर्षभर चारा उपलब्ध होता है। संरक्षित क्षेत्रों में रहवास विकास कार्यक्रम चलाया जाकर सक्रिय प्रबंधन से विगत वर्षों में अधिक चीतल की संख्या वाले क्षेत्र से कम संख्या वाले चीतल विहीन क्षेत्रों में सफलता से चीतलों को स्थानांतरित किया गया है। इस पहल से चीतल, जो कि बाघों का मुख्य भोजन है, उनकी संख्या में वृद्धि हुई है और पूरे भूभाग में चीतल की उपस्थिति पहले से अधिक हुई है।
राष्ट्रीय उद्यानों के प्रबंधन में मध्यप्रदेश शीर्ष पर
मध्यप्रदेश ने टाइगर राज्य का दर्जा हासिल करने के साथ ही राष्ट्रीय उद्यानों और संरक्षित क्षेत्र के प्रभावी प्रबंधन में भी देश में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को यूनेस्को की विश्व धरोहर की संभावित सूची में शामिल किया गया है। केन्द्र सरकार द्वारा जारी टाइगर रिजर्व के प्रबंधन की प्रभावशीलता मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार पेंच टाइगर रिजर्व ने देश में सर्वोच्च रेंक प्राप्त की है। बांधवगढ़, कान्हा, संजय और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को सर्वश्रेष्ठ प्रबंधन वाले रिजर्व माना गया है। इन राष्ट्रीय उद्यानों में अनुपम प्रबंधन योजनाओं और नवाचारी तरीकों को अपनाया गया है।
बाघों के सरंक्षण की पहल
राज्य सरकार बाघों के संरक्षण के लिये कई पहल कर रही है जिनमें वन्य जीव अभयारणों का संरक्षण और प्रबंधन, बाघों की निगरानी के लिये आधुनिक तकनीकों का उपयोग और स्थानीय समुदायों को रोजगार प्रदान करना शामिल है। मध्यप्रदेश में 9 टाइगर रिजर्व हैं, जिसमें (कान्हा किसली, बांधवगढ़, पेंच, पन्ना बुंदेलखंड, सतपुड़ा नर्मदापुरम, संजय दुबरी सीधी, नौरादेही, माधव नेशनल पार्क और डॉ. विष्णु वाकणकर टाइगर रिजर्व (रातापानी) शामिल हैं।मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सबसे अधिक बाघ हैं। यह रिजर्व मध्यप्रदेश का सबसे प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व है।
मध्यप्रदेश के टाइगर रिजर्व में विदेशी पर्यटकों की संख्या में बढ़ोत्तरी
वन्य जीव पर्यटन में मध्यप्रदेश विशेष आकर्षण का केन्द्र बनकर उभरा है। टाइगर रिजर्व में देशी और विदेशी पर्यटकों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। प्रदेश के टाइगर रिजर्व में वर्ष 2024-25 में 32 हजार 528, कान्हा टाइगर रिजर्व में 23 हजार 59, पन्ना टाइगर रिजर्व में 15 हजार 201, पेंच टाइगर रिजर्व में 13 हजार 127 और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 10 हजार 38 विदेशी पर्यटक की उपस्थिति रही। जबकि वर्ष 2023-24 में विदेशी पर्यटकों की संख्या बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 25 हजार 894, कान्हा टाइगर रिजर्व में 18 हजार 179, पन्ना टाइगर रिजर्व में 12 हजार 538, पेंच टाइगर रिजर्व में 9 हजार 856 और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 6 हजार 876 थी।
मध्यपदेश टाइगर रिजर्व में 5 वर्ष में भारतीय पर्यटकों की संख्या 7 लाख 38 हजार 637 और विदेशी पर्यटकों की संख्या 85 हजार 742 रही। इस प्रकार कुल 8 लाख 24 हजार 379 पर्यटकों की संख्या रही। 5 वर्षों में टाइगर रिजर्व की लगभग 61 करोड़ 22 लाख रूपये की आय हुई है।
बाघों का सर्वश्रेष्ठ आवास क्षेत्र ‘कान्हा टाइगर रिजर्व’
भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व को बाघों का सर्वश्रेष्ठ आवास क्षेत्र घोषित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार कान्हा टाइगर रिजर्व में शाकाहारी वन्य प्राणियों की संख्या देश में सबसे अधिक है, जिनमें चीतल, सांभर, गौर, जंगली सुअर, बार्किंग डियर, नीलगाय और हॉग डियर जैसे शाकाहारी जीवों की बहुतायत है, जो बाघों के लिए भोजन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। बाघों के निवास के लिये कान्हा रिजर्व में घास के मैदान, जंगल और नदियां शामिल हैं, जो बाघों के लिए संख्या रहवास उपयुक्त हैं। कान्हा टाइगर रिजर्व में सक्रिय आवास प्रबंधन प्रथाओं को लागू किया गया है, जैसे चरागाहों का रखरखाव, जल संसाधन विकास और आक्रामक पौधों को हटाना। कान्हा में गांवों को कोर क्षेत्र से स्थानांतरित कर दिया गया है, जिससे मानवीय हस्तक्षेप कम हो गया है और वन्यजीवों को स्वतंत्र रूप से घूमने की अनुमति मिलती है। कान्हा टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की निगरानी के लिए M-STriPES मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाता है और वन कर्मियों को नियमित प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
कान्हा टाइगर रिजर्व प्रदेश के मंडला जिले में स्थित है इसका कुल क्षेत्रफल 2074 वर्ग किलोमीटर है जिसमें 917.43 वर्ग किलोमीटर कोर क्षेत्र और 1134 वर्ग किलोमीटर में बफर जोन शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कान्हा टाइगर रिजर्व को बाघों का सर्वश्रेष्ठ आवास घोषित किये जाने पर वन अमले को बधाई दी थी। उन्होंने कहा कि अन्य रिजर्व भी इस दिशा में सकारात्मक पहल करें।
मध्यप्रदेश में बाघों के संरक्षण में नवाचार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर मध्यप्रदेश में बाघों के संरक्षण के लिये कई नवाचार किये जा रहे हैं। जीन टेस्टिंग - मध्यप्रदेश में बाघों की जीन टेस्टिंग करने की योजना है, जिससे उनकी सटीक पहचान की जा सकेगी। गुजरात के बनतारा जू और रेस्क्यू सेंटर की तर्ज पर उज्जैन और जबलपुर में रेस्क्यू सेंटर बनाये जा रहे हैं।
ड्रोन स्क्वाड – पन्ना टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण में अत्याधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल करते हुए ‘ड्रोन स्क्वाड’ का संचालन शुरू किया गया है। इससे वन्यजीवों की खोज, उनके बचाव, जंगल में आग का पता लगाने और मानव-पशु संघर्ष को रोकने में मदद मिलेगी।
विस्थापन और रहवास विकास – मध्यप्रदेश में बाघों के संरक्षण के लिये 200 गांवों को विस्थापित किया गया है और रहवास विकास कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इससे बाघों के आवास क्षेत्र का विस्तार हुआ है और उनकी संख्या में भी वृद्धि हो रही है। टाइगर रिजर्व के विस्तार के साथ इन नवाचारों के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश में बाघों की संख्या में वृद्धि हुई है और यह देश में सबसे अधिक बाघों वाला राज्य बन गया है।
मध्यप्रदेश में वन्य जीव अपराध नियंत्रण की पहल
मध्यप्रदेश में वन्यजीव अपराध नियंत्रण इकाई का गठन किया गया है, जो वन्यजीवों के शिकार और अवैध व्यापार को रोकने के लिए काम करती है। पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई से शिकारियों को पकड़ने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने में मदद मिल रही है। ग्राम वन प्रबंधन समितियों को वन्यजीव संरक्षण में शामिल किया गया है, जो शिकार को रोकने में मदद करती हैं। वन विभाग द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, जिससे लोगों को वन्यजीवों के महत्व और उनके संरक्षण के बारे में जागरूक हो सके। मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जैसे कि ड्रोन और कैमरा ट्रैप, जिससे शिकारियों की निगरानी की जा सके। वन विभाग ने वन्यजीव अपराधियों की सूची तैयार की है, जिससे उनके खिलाफ कार्रवाई करने में मदद मिल सके। मध्यप्रदेश वन विभाग ने अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग कर रहा है, जिससे वन्यजीव संरक्षण में मदद मिल सके। इन गतिविधियों के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश में शिकार की घटनाओं में कमी आई है और वन्यजीवों की संख्या में वृद्धि हुई है।
"कब हुई बाघ दिवस मनाने की शुरूआत
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाने का निर्णय 29 जुलाई 2010 में सेंट पीटर्सबर्ग (रूस) बाघ सम्मेलन में लिया गया था। इस सम्मेलन में बाघ की आबादी वाले 13 देशों ने वादा किया था कि वर्ष 2022 तक बाघों की आबादी दोगुनी कर देंगे। मध्यप्रदेश बाघों के प्रबंधन में निरंतरता और उत्तरोत्तर सुधार करने में अग्रणी है। बाघ संरक्षण न केवल जैव विविधता के लिये महत्वपूर्ण है बल्कि यह पारिस्थितिकी के संतुलन को भी बनाये रखता है।
सीहोर में स्कूल या खंडहर? पढ़ाई के बीच मंडरा रहा खतरा, प्रशासन खामोश
28 Jul, 2025 06:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सीहोर। राजस्थान के झालावाड़ में स्कूल की छत गिरने से सात मासूमों की मौत की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। लेकिन मध्यप्रदेश का सीहोर जिला इससे कोई सीख लेता नहीं दिख रहा है। जिले में 1557 शासकीय स्कूल हैं, जिनमें से करीब 200 स्कूल खस्ताहाल इमारतों में संचालित हो रहे हैं। इन भवनों की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
जान जोखिम में डालकर पढ़ाई कर रहे बच्चे
सीहोर जिले के कई स्कूलों की छतों में दरारें पड़ चुकी हैं। कई दीवारें झड़ चुकी हैं और छतों से सरिए बाहर निकल आए हैं। शासकीय प्राथमिक शाला लसूड़िया कांगर, इछावर की हालत ऐसी ही है। जहां 70 छात्र और तीन शिक्षक जान जोखिम में डालकर पढ़ाई कर रहे हैं। बारिश में छतों से पानी टपकता है, जिससे पढ़ाई बाधित होती है और हर समय दुर्घटना का डर बना रहता है।
टीन की छतें और पॉलिथीन का सहारा
कमला नेहरू माध्यमिक शाला सीहोर की छत टीन की चादरों से बनी है, जो बरसात में टपकती है। ऐसे में शिक्षक पॉलिथीन बिछाकर बच्चों को पढ़ाते हैं। यहां 37 बच्चे और तीन शिक्षक हैं, पर स्कूल में मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। ये दृश्य सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को दर्शाने के लिए काफी हैं।
गंदगी, जीव-जंतु और टूटी दीवारों का खौफ
प्राथमिक शाला दशहरा वाला, सीहोर में स्थिति और भी भयावह है। चारों तरफ गंदगी, टूटी दीवारें और जहरीले जीव-जंतुओं का डर हर समय बच्चों पर मंडराता रहता है। यहां पढ़ने वाले 29 बच्चे और दो शिक्षक रोज जान जोखिम में डालकर स्कूल आते हैं। तमाम शिकायती पत्रों और आवेदन के बावजूद अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
जर्जर भवन बंद, लेकिन छात्रों को ठूंसा गया दूसरे कमरों में
हाई सेकेंडरी स्कूल निम्नागांव में स्कूल भवन पूरी तरह से असुरक्षित हो चुका है, जिससे उसे बंद कर दिया गया है। लेकिन कक्षा छह से आठ तक के 100 से अधिक बच्चों को अन्य कक्षों में एक साथ बैठा कर पढ़ाया जा रहा है। इससे न केवल पढ़ाई बाधित हो रही है, बल्कि बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।
भय और तनाव के बीच जारी है शिक्षा
इन हालातों में पालक अपने बच्चों को रोज डर के साए में स्कूल भेजते हैं। वे मजबूरी में शिक्षा दिला रहे हैं, लेकिन भीतर ही भीतर हर दिन आशंका बनी रहती है कि कहीं कोई हादसा न हो जाए। वहीं शिक्षक भी लगातार तनाव में रहते हैं, क्योंकि वे बच्चों की सुरक्षा को लेकर खुद को जिम्मेदार मानते हैं।
शिक्षा विभाग और प्रशासन पर गंभीर सवाल
जहां एक ओर देशभर में जर्जर स्कूल भवनों की समीक्षा और पुनर्निर्माण की कवायद शुरू हो चुकी है, वहीं सीहोर में अब तक सिर्फ कागजी योजनाएं बन रही हैं। न तो मरम्मत की कोई स्पष्ट योजना सामने आई है और न ही कोई आपातकालीन कार्य योजना बन पाई है।
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार है?
डीपीसी आर.आर. उइके का कहना है कि माध्यमिक स्तर के 93 स्कूलों में मरम्मत कार्य चल रहा है और हाई सेकेंडरी स्कूलों की देखरेख जिला शिक्षा अधिकारी करते हैं, जिन्हें प्रति स्कूल 3.50 लाख रुपये की राशि शासन से मिलती है। कलेक्टर बालागुरु के. ने भी निर्देश दिए हैं कि जर्जर भवनों में कक्षाएं न लगें, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं।
MP विधानसभा में विपक्ष का हंगामा, कार्यवाही स्थगित कर सत्र मंगलवार तक बढ़ाया गया
28 Jul, 2025 05:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा का 12 दिवसीय मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। सत्र में कांग्रेस, मोहन यादव सरकार को घेरने की तैयारी में है। कांग्रेस कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार और वित्तीय संकट जैसे मुद्दों पर सरकार से सवाल करेगी। सत्र में 10 बैठकें होंगी। तीन विधेयक और एक अनुपूरक बजट भी पेश किया जाएगा।
मंगलवार तक स्थगित हुआ सदन
मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन, कांग्रेस विधायकों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया और ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर विरोध जताया। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने पूर्व विधायकों और अन्य दिवंगत व्यक्तियों को श्रद्धांजलि दी, जिसके बाद सदन की कार्यवाही मंगलवार तक स्थगित कर दी गई। सत्र में अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा और तीन सरकारी विधेयक भी प्रस्तुत किए जाएंगे।
पहलगाम आतंकी हमले और अहमदाबाद एयर इंडिया विमान हादसे के मृतकों को श्रद्धांजलि
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद पूर्व विधायक राजा सुरेंद्र बहादुर सिंह, रघुनाथ चौधरी, शंकर लाल मुन्नाखेड़ी, सरदार सुखदेव सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास, गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय कुमार रुपाणी, फिल्म अभिनेता मनोज कुमार, लोक कलाकार रामसहाय पांडे को श्रद्धांजलि दी। पहलगाम आतंकी हमले और अहमदाबाद एयर इंडिया विमान हादसे के मृतकों को भी श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद सदन की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
बीजेपी सरकार की गिरगिट से तुलना
मानसून सत्र के पहले दिन विधानसभा के नेता विपक्ष उमंग सिंघार ने कांग्रेस विधायकों के साथ विधानसभा परिसर में स्थित गांधी प्रतिमा के सामने प्रदर्शन किया। वह ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण देने और जातिगत जनगणना में पारदर्शिता को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। सभी विधायकों के हाथों में सांकेतिक गिरगिट लगे थे। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार को गिरगिट से ज्यादा रंग बदलने वाला बताया।
नेता विपक्ष ने बुलाई बैठक
विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने सत्र से पहले पार्टी विधायकों की बैठक बुलाई। इसमें मुद्दों पर चर्चा हुई और सरकार को घेरने की रणनीति बनाई गई। सिंघार ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार, आदिवासियों को जमीन से बेदखल करना, भ्रष्टाचार, नशीली दवाओं का दुरुपयोग, खाली पदों पर भर्ती, जाति जनगणना और OBC आरक्षण जैसे मुद्दे उठाए जाएंगे।
मोहन सरकार गिनाएगी उपलब्धियां
मानसून सत्र में मोहन सरकार अपनी उपलब्धियां बताएगी। खासकर मुख्यमंत्री के निवेश आकर्षित करने के प्रयासों को। सरकार किसानों के लिए सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने, नए मेडिकल कॉलेज खोलने और गरीबों के लिए योजनाओं के बारे में भी बताएगी।
3377 प्रश्न पूछे जाएंगे
विधानसभा के प्रमुख सचिव, ए.पी. सिंह ने कहा कि सदन में कई काम होंगे। विधानसभा सचिवालय को सदस्यों से 3377 प्रश्न, 226 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, एक स्थगन प्रस्ताव और धारा 139 के तहत चर्चा के लिए नोटिस मिले हैं। 23 निजी सदस्यों के विधेयक भी हैं।
स्पीकर ने किया विधानसभा का निरीक्षण
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र तोमर ने रविवार को विधानसभा भवन का निरीक्षण किया। पत्रकारों द्वारा प्रदर्शनों पर प्रतिबंध के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, 'यह कुछ नया नहीं है।'
कांग्रेस ने की सर्कुलर की आलोचना
कांग्रेस ने इस सर्कुलर की आलोचना करते हुए कहा कि यह असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास है।
‘मामा’ का एमपी कनेक्शन बरकरार, दिल्ली की कुर्सी पर बैठकर भी राज्य में सक्रिय
28 Jul, 2025 04:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: शिवराज सिंह चौहान भले ही अब केंद्र में कृषि मंत्री की भूमिका में हों, लेकिन उनकी चालें, मुस्कानें और मुलाकातें साफ कह रही हैं कि उनका दिल अब भी मध्य प्रदेश की धरती के लिए धड़कता है। धड़के भी क्यों ना? जहां जन्म लिया, जहां से राजनीति का ककहरा सीखा और फिर 20 साल सत्ता के मुखिया रहे। दिल धड़कना तो लाजिमी है लेकिन आदिवासियों के हक की आवाज हो, किसान सभा हो या उनकी पदयात्रा... राजनीति के जानकार बताते हैं कि सीहोर से इंदौर तक उनकी मौजूदगी केवल सरकारी दौरे नहीं, बल्कि एक नई राजनीतिक पटकथा का संकेत लगती हैं।
क्या हैं इस बढ़ती सक्रियता के मायने?
मध्य प्रदेश की राजनीति को करीब से जानने वाले वरिष्ठ पत्रकार देवश्री माली कहते हैं कि मुख्यमंत्री मोहन यादव को शिवराज सिंह चौहान की ओर से कोई चुनौती आने की संभावना नहीं है। अगर हम बीजेपी का ट्रेंड देखें तो हमें यह बात समझ आ जाएगी। जब यह लोग शिवराज सिंह को लेकर आए थे, तब उमा भारती हर द्रष्टि से बहुत बड़ी नेता थीं। बाबूलाल गौर भी ठीक-ठाक पुराने नेता थे। लेकिन तब भी शिवराज को लेकर आया गया। इस बार भी ऐसा ही सीन है लेकिन शिवराज अब चरित्र अभिनेता के रूप में आ गए हैं। अब उनको आगे ही जाना है। हम 20 साल काम कर चुके नेता और पहली बार काम कर रहे नेता के बीच में तुलना करेंगे तो यह सही नहीं होगा।
'शिवराज सिंह का कार्यक्षेत्र है मध्य प्रदेश'
मध्य प्रदेश की राजनीति को करीब से जानने वाले राजनीतिक विश्लेषक प्रो. लोकेंद्र सिंह इस मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए कहते हैं कि मध्य प्रदेश उनका घर है, मध्य प्रदेश उनका कार्यक्षेत्र है, वह मध्य प्रदेश से चुनकर आते हैं। यहां तो एक्टिव होंगे ही होंगे लेकिन साथ ही साथ अन्य राज्यों में भी उनकी बराबर सक्रियता रहती है। चूंकि वह रहने वाले यहीं के हैं तो यहीं आएंगे।
मुख्यमंत्री मोहन यादव को कितना नुकसान?
प्रो. लोकेंद्र सिंह बताते हैं कि शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री मोहन यादव को नुकसान पहुंचाकर सबकी नाराजगी मोल क्यों लेंगे। ये बाजार में बनाया जाने वाला विषय है। यह पूछे जाने पर कि केंद्र में शिवराज बिना उनकी मर्जी के भेजे गये, प्रो. लोकेंद्र सिंह कहते हैं कि 20 साल मुख्यमंत्री रहने वाले व्यक्ति को सामान्य सांसद तो बना नहीं सकते। ये तो लॉजिक भी नहीं होता। ऐसा करना एक बड़े वर्ग को नाराज करना भी हो जाता। केंद्र उनकी काबिलियत का उपयोग करना चाहता था। इसलिए उन्हें कृषि मंत्री बनाकर दिल्ली बुला लिया।
'समीकरण के हिसाब से मिलती है पद प्रतिष्ठा'
एमपी के एक और वरिष्ठ पत्रकार से जब इस विषय पर चर्चा की गई, तो उन्होंने कहा कि राजनीति में पद प्रतिष्ठा समीकरण के हिसाब से मिलती है। एक वक्त था, जब समीकरण ऐसे बने थे कि उमा भारती जैसी दिग्गज नेता को हटाकर शिवराज सिंह को मुख्यमंत्री बनाया गया। अभी समीकरण अलग हैं, लोकसभा चुनाव में बीजेपी को बहुमत नहीं मिला है। गठबंधन में सरकार बनाने की वजह से बीजेपी को केंद्र में कुछ ऐसे चेहरे चाहिए, जो सर्वमान्य हों। शिवराज सिंह ऐसे कुछ चेहरों में से एक हैं। मध्य प्रदेश में उनकी सक्रियता को सिर्फ उनके कार्यक्षेत्र या जड़ों से जुड़ने की कोशिश से नहीं जोड़ सकते। उनका अधिकारियों को डांटना, सीएम के घर आदिवासियों को लेकर पहुंचना, पदयात्राएं, उनका एटीट्यूड... सब कुछ उन्हीं की लिखी स्क्रिप्ट का हिस्सा लगता है।
रिटायर्ड हर्ट नहीं होना चाहते हैं 'मामा'
क्या ये एक संयोग है कि वे अपने पुराने गढ़ों में फिर से जनसंपर्क कर रहे हैं, या एक सुनियोजित वापसी की पटकथा? शिवराज की यह सक्रियता न केवल भाजपा के आंतरिक संतुलन को झकझोर रही है, बल्कि यह भी जता रही है कि मध्य प्रदेश की राजनीति से 'मामा' अभी रिटायर्ड हर्ट नहीं हुए हैं।
सीहोर में दर्दनाक हादसा, झरने में डूबकर गई दो छात्रों की जान
28 Jul, 2025 04:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सीहोर: बारिश के बाद मध्य प्रदेश में डैम लबालबा हैं। इसके साथ ही झरनों में भी बहाव तेज है। झरनों के पास लोगों की भीड़ खूब उमड़ रही है। इस दौरान कई लोग अपनी जान भी जोखिम में डाल रहे हैं। इसकी वजह से कई लोगों की मौत भी हो रही है। सीहोर में वीआईटी कॉलेज के दो छात्रों की भेरू खो झरने में डूबने से मौत हो गई है।
दो छात्रों की मौत
दरअसल, रविवार को वीआईटी कॉलेज सीहोर के पांच छात्र नरेंद्र (20) गुजरात, वामासी (20) हैदराबाद, ललित (20) हैदराबाद, सिन्मुक (20) हैदराबाद और हेमंत (20) हैदराबाद। पिकनिक मनाने भेरू खो झरने पर पहुंचे थे। शाम करीब 6-7 बजे के बीच जब वे मौज-मस्ती कर रहे थे, तभी सिन्मुक सेल्फी लेते समय फिसल कर झरने में जा गिरा, उसे बचाने के लिए हेमंत भी झरने में कूद गया, लेकिन दोनों ही बाहर नहीं आ सके। साथ आए तीन अन्य छात्र सकुशल जंगल से बाहर आ गए और उन्होंने घटना की सूचना दी।
मौके पर पहुंची पुलिस टीम
सूचना मिलते ही इछावर थाना पुलिस की टीम, एसडीआरएफ और एम्बुलेंस के साथ मौके पर पहुंची। रात का समय और झरने की गहराई अधिक होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में परेशानी आई, जिसके चलते रात में अभियान रोकना पड़ा था। सुबह होते ही दोबारा तलाशी अभियान शुरू किया गया और करीब 11 बजे दोनों छात्रों के शव निकाल लिए गए। शवों को पीएम के लिए भेजा गया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है। इसके साथ ही पुलिस ने परिजनों को सूचना दे दी है। परिजन हैदराबाद से सीहोर पहुंचेंगे और शव को ले जाएंगे। प्रशासन की टीम लगातार लोगों से अपील कर रही है कि बारिश में ऐसी जगहों पर नहीं जाएं। अगर जाएं भी तो सावधानी बरते। इसके बावजूद लोग लापरवाही बरत रहे हैं, जिसकी वजह से जान गंवानी पड़ रही है।
बुंदेलखंड की अयोध्या में अनोखा आयोजन, भगवान राम के झूला उत्सव का शुभारंभ
28 Jul, 2025 04:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टीमकगढ़ (ओरछा)। बुंदेलखंड की अयोध्या के नाम से विख्यात धार्मिक नगरी ओरछा में श्रावण तीज पर भगवान रामराजा झूले पर विराजमान हो गए हैं। इस दौरान रामराजा सरकार के दर्शन के लिए दुनियाभर से लाखों श्रद्धालु सावन के महीने में ओरछा पहुंचते हैं। दरअसल, ओरछा में सावन तीज का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है, इस दिन भगवान रामराजा गर्भगृह से निकलकर झूले पर विराजमान होते हैं। वे पूरे परिवार के साथ झूले पर बैठते हैं और अपनी प्रजा की सुनवाई करते हैं। यह परंपरा राजशाही काल से चली आ रही है। ओरछा का राम मंदिर विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की पूजा भगवान के रूप में नहीं, बल्कि राजा के रूप में की जाती है। इस अवसर पर स्थानीय नगर परिषद तीन दिवसीय मेले का आयोजन भी करती है।
ओरछा के तहसीलदार सुनील बाल्मीकि ने बताया कि जब भगवान रामराजा तीन दिन के लिए गर्भगृह से बाहर आते हैं, तो श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, साथ ही अतिरिक्त कर्मचारियों की ड्यूटी भी मंदिर परिसर में लगाई गई है। भगवान रामराजा 29 जुलाई तक झूले पर विराजमान रहेंगे, उसके बाद वे गर्भगृह में वापस चले जाएंगे। श्रद्धालु विनय तिवारी ने बताया कि वर्ष में एक बार राजा राम गर्भगृह से बाहर आकर झूले पर विराजते हैं और अपने भक्तों को दर्शन देते हैं, इस दौरान मांगी गई मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
मध्य प्रदेश विधानसभा सदन के पहले दिन कांग्रेस ने गिरगिट रूपक का प्रयोग: सरकार मुद्दों से भाग रही है
28 Jul, 2025 11:57 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 28 जुलाई से शुरू हो गया है। पहले दिन सत्र की कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस नेताओं ने गिरगिट लेकर प्रदर्शन किया। विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कांग्रेसी विधायकों ने OBC आरक्षण, जातिगत जनगणना और भर्ती परीक्षा समेत कई मुद्दों को सरकार को घेरा।
गिरगिट लेकर विधानसभा पहुंचे कांग्रेस नेता
कांग्रेस नेता प्रतीकात्मक रूप से गिरगिरट लेकर विधानसभा पहुंचे। सत्र के पहले दिन की कार्यवाही शुरू होने से पहले सदन के बाहर OBC आरक्षण, जातिगत जनगणना और भर्ती परीक्षा समेत कई मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान MP विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि OBC वर्ग से सरकार बनाने के लिए बीजेपी वोट मांग रही है और OBC वर्ग की पीठ में छुरा घोंप रही है। युवाओं से भर्ती के नाम पर छलावा हो रहा है।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अध्यक्ष से कहा
संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सदन में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से कहा- आपकी रंगबाजी दिख रही है। उन्होंने सबको सावन की बधाई दी। इसके बाद विधानसभा सचिवालय के ड्रेस कोड को लेकर कहा कि धीरे-धीरे धीरे संसद की परंपरा को लागू किया जा रहा है। विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सबसे पहले निधन का उल्लेख किया गया और दिवंगतों को श्रद्धांजलि दी गई।विधानसभा के पूर्व सदस्यों और गुजरात के पूर्व सीएम विजय कुमार रूपाणी को श्रद्धांजलि दी गई। साथ ही पहलगाम में हुए आतंकी हमले में मृत नौसेना के अधिकारी समेत पर्यटकों को भी श्रद्धांजलि दी गई। अहमदाबाद एयर इंडिया विमान दुर्घटना में मृत यात्रियों और मेडिकल छात्रों को भी मध्य प्रदेश विधानसभा में श्रद्धांजलि दी गई।दिवंगत आत्माओं को दी जा रही श्रद्धांजलि, निधन को लेकर किया जा रहा उल्लेख।
एमपी विधानसभा के मानसून सत्र की पहली दिन की कार्यवाही शुरू
मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत हो गई है। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले वंदे मातरम गाया गया. सदन में सचिवालय के कर्मचारी ड्रेस कोड में आए। विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि OBC वर्ग से सरकार बनाने के लिए बीजेपी वोट मांग रही है और OBC वर्ग की पीठ में छुरा घोंप रही है। युवाओं से भर्ती के नाम पर छलावा हो रहा है। एमपी विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले सत्र के पहले दिन कांग्रेस नेताओं ने जमकर हंगामा किया। कांग्रेस नेता प्रतीकात्मक रूप से गिरगिट लेकर पहुंचे और OBC आरक्षण, जातिगत जनगणना और भर्ती परीक्षा समेत कई मुद्दों को सरकार को घेरा।
मतदान के बीच बंगाल में बवाल: मुर्शिदाबाद से सिलीगुड़ी तक झड़प, तोड़फोड़ और आगजनी की खबरें
BJP सांसद का हमला: मल्लिकार्जुन खरगे का ‘दिमागी संतुलन बिगड़ा’
नहर किनारे वीडियो शूटिंग के दौरान हादसा, इलाके में मातम
यूपी बोर्ड के नतीजे आए: हाईस्कूल 90.42% और इंटर 80.38% पास
जबलपुर स्टेशन पर मानवता की मिसाल, स्काउट्स-गाइड्स की पहल
आग की लपटों में घिरा देवन, लगातार धमाकों से सहमे ग्रामीण
‘लखनऊ की पिच वाका जैसी’, LSG कोच ने ठीकरा सतह पर फोड़ा
IPL विवाद पर तुषारा ने बदला रुख, माफी मांगकर मामला शांत
सरकारी कर्मचारियों से मारपीट पर भड़का संघ, जुलूस निकालने की चेतावनी
