मध्य प्रदेश
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन में कम रही मौजूदगी, 8 कार्यकर्ता ही पहुंचे
16 Jun, 2026 10:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज होने के खिलाफ कांग्रेस आलाकमान ने पूरे मध्य प्रदेश में चक्काजाम और प्रदर्शन का बिगुल फूंका था। इसी सिलसिले में राजधानी भोपाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश दफ्तर का घेराव करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई थी। परंतु, जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट रही और सोमवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) मुख्यालय के बाहर आयोजित इस प्रदर्शन में महज 8 युवा कांग्रेस कार्यकर्ता ही शरीक होने पहुंचे।
हैरानी की बात यह रही कि आंदोलन स्थल पर जितने प्रदर्शनकारी मौजूद नहीं थे, उससे कई गुना ज्यादा तादाद वहां मुस्तैद पुलिस बल की थी। कार्यकर्ताओं की बेहद कम संख्या को देखते हुए तैनात पुलिसकर्मियों ने भी मुस्तैदी दिखाने या उन्हें पुतला फूंकने से रोकने की कोई खास जहमत नहीं उठाई। गिने-चुने कार्यकर्ताओं ने ही वहां पर नारेबाजी की और मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला दहन कर अपनी नाराजगी जाहिर की।
पार्टी के कड़े फरमान का नहीं हुआ असर
विपक्षी दल के भीतर इस लचर प्रदर्शन को लेकर आंतरिक सवाल खड़े होने लगे हैं, क्योंकि 12 जून को ही मध्य प्रदेश कांग्रेस के संगठन प्रभारी डॉ. संजय कामले ने एक लिखित आदेश जारी किया था। इसमें युवा कांग्रेस, एनएसयूआई (NSUI) और महिला कांग्रेस की इकाइयों को 15 से 17 जून तक लगातार भाजपा कार्यालयों को घेरने और उग्र प्रदर्शन करने का जिम्मा सौंपा गया था। इस कड़े निर्देश के बाद भी भोपाल में कांग्रेसी कार्यकर्ता भाजपा दफ्तर तक मार्च करने की हिम्मत नहीं जुटा सके और पूरा हंगामा पीसीसी बाउंड्री के बाहर ही सिमट कर रह गया।
प्रेस नोट के जरिए साख बचाने की कोशिश
भीड़ न जुटने के बाद उपजी फजीहत के बीच भोपाल शहर युवा कांग्रेस ने बाद में एक आधिकारिक विज्ञप्ति जारी की। इस प्रेस नोट में उन्होंने इस बेहद छोटे प्रदर्शन को केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग के तानाशाही रवैये के खिलाफ 'लोकतंत्र को बचाने की बड़ी लड़ाई' करार दिया। इस विरोध मार्च की कमान जिला महासचिव अनीस शर्मा के हाथों में थी, जिसे युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अमित खत्री के दिशा-निर्देशों पर अमलीजामा पहनाया गया था।
कागजों पर मजबूत और जमीन पर सिर्फ आठ
इस पूरे घटनाक्रम में जिला उपाध्यक्ष नीरज यादव, महासचिव दर्शन कोरी, ब्लॉक अध्यक्ष मोहन रुडेले सहित भूपेंद्र मिश्रा, रिजूल सेन, सूरज लोधी, भीम लोवंशी और सुजल समेत केवल आठ चेहरे ही मैदान में डटे दिखाई दिए। संख्या बल की इस भारी कमी के बावजूद, संगठन ने अपने बयानों में इस प्रदर्शन को बेहद आक्रामक, मजबूत और निर्णायक साबित करने का प्रयास किया।
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल
युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अमित खत्री ने इस प्रशासनिक कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताते हुए आरोप मढ़ा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किया जाना पूरी तरह से गैर-संवैधानिक और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत है। उन्होंने इसे सत्तापक्ष की राजनीतिक दुर्भावना का नतीजा बताते हुए कहा कि इस फैसले से चुनाव आयोग की निष्पक्ष छवि कटघरे में आ गई है। खत्री ने चेतावनी दी कि युवाओं की टोली इस नाइंसाफी के खिलाफ चुप नहीं बैठेगी और जनता के अधिकारों के लिए सड़क से संसद तक अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी।
MP सरकार सख्त: परिवार से अलग रहने वालों की अनुकंपा नियुक्ति पर असर संभव
16 Jun, 2026 10:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश शासन अनुकंपा नियुक्ति के मौजूदा प्रावधानों में एक बड़ा फेरबदल करने की तैयारी में है। इन नियमों को पहले से कहीं अधिक व्यावहारिक और सरकारी सेवकों के परिवारों के अनुकूल बनाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में पूरा ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, जिसे अंतिम मंजूरी के लिए जल्द ही मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा।
नए प्रस्तावों के आने के बाद अनुकंपा के आधार पर मिली नौकरी से किसी को भी अचानक सेवामुक्त करना आसान नहीं होगा। अब कोई भी प्रशासनिक विभाग बिना किसी ठोस या गंभीर वजह के अनुकंपा पर नियुक्त कर्मचारी को पद से नहीं हटा सकेगा। इसके अलावा, अनुकंपा नौकरी न लेने वाले आश्रित परिवारों को मिलने वाले पांच वर्षीय भरण-पोषण भत्ते को बंद करने का एक सुझाव आया था, लेकिन सामान्य प्रशासन और वित्त विभाग दोनों ने ही इस पर असहमति जताते हुए इसे खारिज कर दिया। वहीं, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के निधन पर आश्रितों को दी जाने वाली 2 लाख रुपये की एकमुश्त सहायता राशि को बढ़ाने की मांग पर फिलहाल कोई सहमति नहीं बनी है और यह साल 2014 से चली आ रही व्यवस्था के अनुरूप ही यथावत रहेगी।
परिवार की उपेक्षा करने पर छिनेगी नौकरी
प्रस्तावित नियमों के तहत यदि अनुकंपा नियुक्ति पाने वाला बेटा या परिवार का कोई अन्य सदस्य नौकरी मिलने के बाद अपने ही आश्रित परिवार को बेसहारा छोड़ देता है या उनकी देखभाल करने से साफ मना कर देता है, तो सरकार उसे तत्काल प्रभाव से शासकीय सेवा से बर्खास्त कर देगी।
लापता कर्मचारियों के नियमों में संशोधन
पूर्व के नियमों के अनुसार, यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी लगातार 7 वर्षों तक लापता रहता था, तो उसे मृत मानकर उसके परिवार के किसी योग्य सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दे दी जाती थी। अब इसमें एक अहम बदलाव किया जा रहा है, जिसके तहत यदि नौकरी मिलने के बाद लापता कर्मचारी वापस मिल जाता है, तो आश्रित को दी गई वह नियुक्ति रद्द की जा सकती है।
सीपीसीटी परीक्षा पास करना बेहद जरूरी
अनुकंपा के आधार पर नियुक्त होने वाले कर्मचारियों के लिए कंप्यूटर दक्षता प्रमाणीकरण परीक्षा (CPCT) को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। इस योग्यता को हासिल करने के लिए कर्मचारियों को 3 से 4 साल का पर्याप्त समय दिया जाता है। यदि कोई कर्मचारी इस तय समय सीमा के भीतर परीक्षा उत्तीर्ण करने में असफल रहता है, तो उसकी सरकारी सेवा समाप्त कर दी जाएगी।
CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान, जगदीशपुर के ऐतिहासिक किले को मिलेगा नया सम्मान
16 Jun, 2026 10:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी के समीप स्थित ऐतिहासिक स्थल जगदीशपुर में 'डेस्टिनेशन कैबिनेट' के आयोजन की प्रशासनिक तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जगदीशपुर के प्राचीन किले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा की है। इस पुरातन धरोहर के गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित करने और इसे राष्ट्रीय पटल पर एक नई पहचान दिलाने के संकल्प के साथ राज्य सरकार जल्द ही इस परिसर में अपनी कैबिनेट बैठक आयोजित करने जा रही है।
सांस्कृतिक स्थलों पर बैठकों का सिलसिला
राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के प्रमुख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक केंद्रों को बढ़ावा देने की नीति के तहत यह अहम फैसला लिया गया है। इससे पहले इंदौर के प्रसिद्ध राजवाड़ा, दमोह के संग्रामपुर, खरगोन के ऐतिहासिक महेश्वर और वैश्विक पर्यटन स्थल खजुराहो में सफलतापूर्वक मंत्रिपरिषद की बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इसी कड़ी में अब अगला गंतव्य भोपाल के पास स्थित जगदीशपुर को चुना गया है। संस्कृति विभाग की विशेष समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आला अफसरों को आयोजन रूपरेखा तैयार कर प्राथमिक व्यवस्थाएं जुटाने के कड़े निर्देश दिए हैं।
उच्च स्तरीय बैठक में तैयारियों की समीक्षा
मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अमले को निर्देशित किया है कि जगदीशपुर के ऐतिहासिक और सामरिक महत्व को देशव्यापी स्तर पर प्रचारित करने के लिए एक ठोस कार्ययोजना पर काम किया जाए। इस उच्च स्तरीय विमर्श के दौरान प्रदेश के मुख्य सचिव सहित संस्कृति और पुरातत्व विभाग के तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी संबंधित विभागों को इस विशेष कैबिनेट बैठक की सुरक्षा, बुनियादी ढांचे और गरिमा के अनुकूल तमाम प्रबंध समय सीमा के भीतर मुकम्मल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
जगदीशपुर नामकरण और ऐतिहासिक गौरव
यह स्थान अपने ऐतिहासिक घटनाक्रमों के लिए जाना जाता है। गौरतलब है कि राज्य शासन द्वारा पूर्व में इस क्षेत्र का नाम 'इस्लाम नगर' से परिवर्तित कर पुनः इसका प्राचीन और मूल नाम 'जगदीशपुर' किया गया था। सरकार का मानना है कि इस ऐतिहासिक महत्व वाले स्थान पर कैबिनेट की बैठक आयोजित होने से न केवल इस क्षेत्र के सांस्कृतिक गौरव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी, बल्कि आने वाले दिनों में यहां पर्यटन की असीम संभावनाओं के द्वार भी खुलेंगे।
पुनर्परीक्षा के लिए तैयारियां पूरी, केंद्रों पर ऑन-द-स्पॉट प्रिंट होंगे पेपर
16 Jun, 2026 10:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। राज्य शिक्षा केंद्र के दिशा-निर्देशों के अनुरूप शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए कक्षा 5वीं और 8वीं की पूरक (पुनर्परीक्षा) परीक्षाएं मंगलवार यानी आज 16 जून से प्रारंभ हो गई हैं। यह परीक्षाएं आगामी 23 जून तक चलेंगी। इस विशेष परीक्षा में केवल वही छात्र-छात्राएं हिस्सा ले रहे हैं, जो मुख्य वार्षिक परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो पाए थे या किसी अपरिहार्य कारणवश परीक्षा में शामिल होने से वंचित रह गए थे। परीक्षा का समय रोजाना सुबह 10 बजे तय किया गया है।
शिक्षकों को मिली छात्रों को लाने की जिम्मेदारी
परीक्षाओं के सफल और सुचारू संचालन के लिए जन शिक्षा केंद्र स्तर पर विशेष परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। संबंधित स्कूलों के प्रधानाध्यापकों, प्राचार्यों और शिक्षकों को यह कड़ा जिम्मा सौंपा गया है कि वे सभी पंजीकृत छात्र-छात्राओं की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करें और उन्हें समय पर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने में मदद करें।
पेपर लीक रोकने के लिए अनूठी तकनीक
इस बार परीक्षाओं की शुचिता और गोपनीयता को बरकरार रखने के लिए प्रशासन ने बेहद कड़े और नए इंतजाम किए हैं। प्रश्नपत्रों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा बदलाव करते हुए यह निर्णय लिया गया है कि पेपरों की छपाई पहले से न होकर सीधे परीक्षा केंद्रों पर ही की जाएगी। परीक्षा का समय होने से ठीक पहले केंद्राध्यक्ष आधिकारिक परीक्षा पोर्टल से प्रश्नपत्र डाउनलोड करेंगे और वहीं पर उनकी प्रिंटिंग निकाली जाएगी। इस संवेदनशील कार्य प्रणाली की देखरेख के लिए जिला परियोजना समन्वयक को मुख्य नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है।
हाईटेक संसाधनों से लैस हुए परीक्षा केंद्र
प्रिंटिंग की इस नई व्यवस्था को बिना किसी रुकावट के पूरा करने के लिए सभी केंद्रों पर आधुनिक तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। हर एक केंद्र पर कम से कम दो चालू हालत में कंप्यूटर या लैपटॉप, दो हाई-स्पीड प्रिंटर, तेज इंटरनेट सेवा, पर्याप्त मात्रा में ए-4 साइज के कागज, प्रिंटर टोनर और बिजली गुल होने की स्थिति में पावर बैकअप (बिजली आपूर्ति) के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की तकनीकी बाधा सामने न आए।
मोहन सरकार की बैठक आज, कई प्रस्तावों पर लग सकती है अंतिम मुहर
16 Jun, 2026 10:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित मंत्रालय में आज, मंगलवार (16 जून 2026) को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक आयोजित होने जा रही है। दोपहर 12:15 बजे शुरू होने वाली इस बैठक में प्रदेश के विकास, किसानों के कल्याण और जनहित से जुड़े कई बड़े प्रस्तावों पर चर्चा होगी। इस बैठक में बुनियादी ढांचे (अधोसंरचना) को मजबूत करने और प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलावों को लेकर अहम मुहर लग सकती है, जिसके आधिकारिक निर्णय बैठक के बाद साझा किए जाएंगे।
ट्रांसफर नीति की समय-सीमा और कैशलेस बीमा पर सस्पेंस
इस कैबिनेट बैठक में सबसे ज्यादा नजर कर्मचारियों की तबादला नीति पर रहने वाली है। सरकार ने पहले 1 से 15 जून तक तबादलों की छूट दी थी, लेकिन कई विभागों की सूचियां अब भी अटकी हुई हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री पहले ही तारीख न बढ़ाने के संकेत दे चुके हैं, लेकिन मंत्रियों के दबाव के बाद आज ट्रांसफर विंडो को कुछ अतिरिक्त समय देने के प्रस्ताव पर अंतिम फैसला हो सकता है। इसके अलावा, सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 'कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना' लागू करने के प्रारूप पर भी मुहर लग सकती है, जिसे मुख्य सचिव अनुराग जैन की समिति पहले ही हरी झंडी दे चुकी है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी निवेश और किसानों के लिए बड़े फैसले
बैठक में चिकित्सा सुविधाओं के कायाकल्प के लिए 'स्वस्थ अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति 2026' को मंजूरी दी जा सकती है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना और निजी निवेश को आकर्षित करना है। इसके साथ ही, आगामी बुआई के सीजन को देखते हुए प्रदेश में खाद की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और किसानों को संकट से बचाने के लिए भी कैबिनेट में विशेष रणनीति बनाई जाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आज का व्यस्त शेड्यूल
कैबिनेट बैठक के अलावा मुख्यमंत्री आज कई अन्य संगठनात्मक और प्रशासनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। उनका आज का पूरा कार्यक्रम इस प्रकार है:
सुबह 11:00 बजे: बीजेपी कार्यालय में आयोजित 'पीएम मोदी के 12 साल के सफल कार्यकाल' कार्यक्रम में सहभागिता।
सुबह 11:30 बजे: मंत्रालय आगमन।
सुबह 11:35 बजे: उच्च शिक्षा विभाग की महत्वपूर्ण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC)।
दोपहर 12:15 बजे: मंत्रालय में कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता।
दोपहर 01:30 बजे: मंत्रालय में विभिन्न अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से मुलाकात।
दोपहर 02:30 बजे: मुख्यमंत्री निवास (CM House) आगमन।
दोपहर 02:35 से 03:05 बजे: विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों से सीधा संवाद।
शाम 04:00 बजे: किसान कल्याण और कृषि विभाग से जुड़ी एक उच्च स्तरीय बैठक में शामिल होंगे।
MP विधानसभा में मानसून सत्र की तैयारी, UCC पर चर्चा के आसार
16 Jun, 2026 10:26 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का आगामी मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से प्रारंभ होने की संभावना है। यह पूरा सत्र करीब 15 दिनों तक चल सकता है, जिसके दौरान 10 से 12 विधायी बैठकें आयोजित की जाएंगी। विधानसभा सचिवालय की ओर से इस सत्र के आयोजन का आधिकारिक प्रस्ताव राज्यपाल मंगुभाई पटेल को भेज दिया गया है। राजभवन से इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के तुरंत बाद सत्र की औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।
संसदीय नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार, किसी भी विधानसभा सत्र की शुरुआत से कम से कम एक महीना पहले उसकी सूचना सार्वजनिक करना अनिवार्य होता है। इस नियम के तहत माना जा रहा है कि 19 जून तक सत्र से जुड़ी अधिसूचना हर हाल में जारी हो जाएगी। अधिसूचना के साथ ही विधायकों के लिए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश करने और नियम 139 के तहत विभिन्न जनहित के मुद्दों पर चर्चा करने की समय सीमा भी निर्धारित कर दी जाएगी।
बजट और नए अध्यादेशों पर होगी चर्चा
इस आगामी सत्र के दौरान राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपना पहला अनुपूरक बजट सदन के पटल पर रखेगी। इसके अतिरिक्त, विधायी कामकाज के तहत कई अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों को भी मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। इनमें मुख्य रूप से पंचायत एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 (संशोधन) अध्यादेश – 2026 और मध्य प्रदेश उपकर (संशोधन) अध्यादेश 2026 शामिल हैं, जिनके लिए शासन स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
यूसीसी की सिफारिशें पटल पर रखने के संकेत
मानसून सत्र के दौरान सबसे ज्यादा नजरें समान नागरिक संहिता (UCC) से जुड़े घटनाक्रमों पर टिकी रहेंगी। राज्य सरकार द्वारा यूसीसी को लेकर आम जनता और विशेषज्ञों से सुझाव मांगने की तय समय सीमा 15 जून को समाप्त हो चुकी है। अब सरकार इन प्राप्त सुझावों की समीक्षा करने और ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने में जुट गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी कई सार्वजनिक मंचों से इसके संकेत दिए हैं।
आदिवासी समुदाय को मिलेगी विशेष छूट
मुख्यमंत्री के बयानों के अनुसार, समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करने के लिए गठित की गई पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों और सुझावों को इसी मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में चर्चा के लिए प्रस्तुत किया जा सकता है। सरकार ने यह भी साफ किया है कि इस कानून के दायरे से प्रदेश की मूल निवासी आदिवासी जनजातियों को पूरी तरह अलग रखा जाएगा। इसके साथ ही, कानून को लागू करने से पहले सभी वर्गों के बीच एक व्यापक सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा।
155 एसएएस अधिकारियों के ट्रांसफर, कई विभागों में बड़ा बदलाव
16 Jun, 2026 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों के लिए तय की गई 15 जून की समय-सीमा खत्म हो गई है। अंतिम दिन सोमवार की देर रात तक विभिन्न विभागों में सूचियां फाइनल करने की होड़ मची रही। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने देर रात 155 राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) अधिकारियों के तबादला आदेश जारी किए। इसके अलावा लोक निर्माण, स्वास्थ्य, परिवहन और राजस्व जैसे बड़े विभागों को मिलाकर करीब 10 से 15 हजार कर्मचारियों की ट्रांसफर लिस्ट जारी की गई। जिन विभागों में सूचियां अधूरी रह गई हैं, उनके मंत्री आज (मंगलवार) होने वाली कैबिनेट बैठक में तारीख बढ़ाने की मांग रख सकते हैं।
देर रात तक सूचियों पर मंथन, हजारों की फेरबदल
तबादलों की अंतिम तारीख होने के कारण सोमवार को मंत्रालय में दिनभर गहमागहमी का माहौल रहा। कई मंत्री देर रात तक अपने विभागों में डटे रहे और सूचियों को अंतिम रूप देते दिखे। राजस्व विभाग ने तहसीलदार और नायब तहसीलदारों के साथ-साथ 723 पटवारियों के स्थानांतरण आदेश जारी किए। वहीं, स्वास्थ्य विभाग द्वारा 329 स्टाफ नर्सों समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के तबादले किए गए। हालांकि, भारी व्यस्तता और कम समय के चलते कई विभागों का काम अधूरा रह गया, जिससे कुछ सूचियां अटक गईं।
कैबिनेट में उठ सकती है तारीख बढ़ाने की मांग
चूंकि कई विभागों में अभी भी स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है, इसलिए आज होने वाली कैबिनेट बैठक में कुछ मंत्रियों द्वारा ट्रांसफर विंडो की समय-सीमा को आगे बढ़ाने की मांग की जा सकती है। बता दें कि राज्य सरकार ने तबादला नीति-2026 को 20 मई को हुई कैबिनेट बैठक में मंजूरी दी थी, जिसके बाद 1 जून से 15 जून तक का समय निर्धारित किया गया था। अब देखना होगा कि अधूरे पड़े तबादलों को लेकर सरकार मंत्रियों को कोई अतिरिक्त मोहलत देती है या नहीं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव के सख्त संकेत
तारीख बढ़ाने की मांग के बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव के पुराने बयानों ने मंत्रियों की चिंता बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री ने पहले ही कई मंचों से यह साफ संकेत दे दिए थे कि 15 जून के बाद किसी भी परिस्थिति में समय-सीमा नहीं बढ़ाई जाएगी और सभी विभागों को तय वक्त के अंदर ही अपनी कागजी कार्रवाई पूरी करनी होगी। ऐसे में आज मंगलवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली इस कैबिनेट बैठक पर सबकी नजरें टिकी हैं कि क्या सरकार अपने सख्त रुख पर कायम रहती है या कोई ढील दी जाएगी।
मध्य प्रदेश में नई व्यवस्था: परीक्षा केंद्र पर ही प्रिंट होगा प्रश्न पत्र
16 Jun, 2026 07:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश में शैक्षणिक सत्र 2025-26 की कक्षा 5वीं और 8वीं की वार्षिक मुख्य परीक्षा में अनुत्तीर्ण (Fail) या अनुपस्थित रहे छात्रों के लिए 'पुनः परीक्षा' (सप्लीमेंट्री परीक्षा) आज यानी मंगलवार (16 जून 2026) से शुरू हो गई है। राज्य शिक्षा केंद्र (RSK) के तत्वावधान में आयोजित यह परीक्षा 23 जून 2026 तक चलेगी। इस विशेष परीक्षा के सफल संचालन के लिए प्रदेश भर में कुल 2,795 परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहाँ हर रोज सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक एक ही पाली (शिफ्ट) में पेपर आयोजित किए जाएंगे।
इस परीक्षा में शासकीय, मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों, अनुदान प्राप्त शालाओं और पंजीकृत मदरसों के छात्र शामिल हो रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, कक्षा 5वीं के करीब 1 लाख 17 हजार और कक्षा 8वीं के लगभग 1 लाख 32 हजार से अधिक परीक्षार्थी इस बार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
हाईटेक सुरक्षा: परीक्षा केंद्र पर ही 'ऑन स्पॉट' प्रिंट होंगे पेपर
इस बार परीक्षा की शुचिता और प्रश्नपत्रों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए राज्य शिक्षा केंद्र ने बेहद कड़ा और आधुनिक तरीका अपनाया है:
ऑन स्पॉट प्रिंटिंग: प्रश्नपत्र पहले से छपकर केंद्रों पर नहीं आएंगे, बल्कि परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले केंद्राध्यक्ष द्वारा सीधे पोर्टल से डाउनलोड कर 'ऑन स्पॉट' प्रिंट किए जाएंगे।
कड़े इंतजाम: निर्बाध प्रिंटिंग के लिए जिला परियोजना समन्वयक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। हर केंद्र पर कम से कम 2 कंप्यूटर/लैपटॉप, 2 चालू हालत में प्रिंटर, इंटरनेट, टोनर और बिजली के बैकअप के साथ पर्याप्त मात्रा में ए-4 साइज के कागज सुनिश्चित किए गए हैं।
शिक्षकों की जिम्मेदारी: परीक्षा के लिए केवल जनशिक्षा केंद्र स्तर पर ही सेंटर बनाए गए हैं। बच्चों को सुरक्षित परीक्षा केंद्र तक पहुँचाने और उनकी उपस्थिति दर्ज कराने की जिम्मेदारी सीधे संबंधित स्कूल के प्रधानाध्यापक या शिक्षक को सौंपी गई है।
33% अंक अनिवार्य; फेल होने पर मिलेगा एक और 'विशेष' मौका
छात्रों को इस पुनः परीक्षा में पास होकर अगली कक्षा में प्रमोट होने के लिए प्रत्येक विषय में न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य होगा। इसके बाद 24 जून से 28 जून के बीच उत्तर पुस्तिकाओं का तेजी से मूल्यांकन किया जाएगा।
विशेष नोट: यदि कोई छात्र इस पुनः परीक्षा में भी एक या दो विषयों में अनुत्तीर्ण रह जाता है, तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है। रिजल्ट घोषित होने के बाद शिक्षा विभाग ऐसे छात्रों के लिए एक और 'विशेष कंपार्टमेंट परीक्षा' आयोजित करेगा, जिसकी तारीखें बाद में जारी की जाएंगी।
कक्षा 5वीं एवं 8वीं की संशोधित परीक्षा समय-सारणी (टाइम-टेबल)
कक्षा 5वीं पुनः परीक्षा समय-सारणी:
16 जून: प्रथम भाषा (हिंदी/अंग्रेजी/उर्दू/मराठी)
18 जून: गणित / संगीत (दृष्टिबाधित छात्रों के लिए)
19 जून: द्वितीय भाषा (अंग्रेजी/हिंदी)
20 जून: पर्यावरण अध्ययन
22 जून: अतिरिक्त भाषा (संस्कृत/हिंदी/उर्दू/पंजाबी आदि) या चित्रकला
कक्षा 8वीं पुनः परीक्षा समय-सारणी:
16 जून: प्रथम भाषा (हिंदी/अंग्रेजी/उर्दू/मराठी - सहायक वाचन सहित)
18 जून: गणित / संगीत (दृष्टिबाधित छात्रों के लिए)
19 जून: द्वितीय भाषा (अंग्रेजी/हिंदी)
20 जून: विज्ञान
22 जून: तृतीय भाषा (संस्कृत/हिंदी/अरबी/मराठी/गुजराती आदि) या चित्रकला
23 जून: सामाजिक विज्ञान
बारिश की आहट तेज, MP के 30 जिलों में आंधी और बरसात का अलर्ट
16 Jun, 2026 07:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश में जून महीने के शुरुआती 15 दिनों में मानसून की चाल काफी सुस्त रही है। सूबे के कई प्रमुख महानगरों सहित 55 में से 35 जिलों में इस बार उम्मीद से कम पानी बरसा है। मौसम विज्ञान केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 15 जून के बीच राज्य में अमूमन 31.9 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए थी, परंतु इस बार महज 22.7 मिलीमीटर बारिश ही रिकॉर्ड की गई है, जो सामान्य स्तर से लगभग 29 फीसदी कम है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अब तक हुई यह बूंदाबांदी केवल प्री-मानसून सिस्टम की वजह से हुई है, जबकि असली दक्षिण-पश्चिम मानसून के 18 से 19 जून के आसपास मध्य प्रदेश की सीमाओं में दाखिल होने की उम्मीद है, जिसके बाद ही झमाझम बारिश का दौर शुरू होगा।
अनेक जिलों में अंधड़ और बौछारों की चेतावनी
मौसम विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, मंगलवार को राज्य के 30 से भी ज्यादा जिलों में धूलभरी आंधी चलने और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने के आसार बने हुए हैं। इस बदलाव से भोपाल, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, देवास, सीहोर, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, बैतूल, नर्मदापुरम, रायसेन, सागर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना जैसे क्षेत्रों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल सकता है।
मालवा और बुंदेलखंड में तीखे रहेंगे सूरज के तेवर
राहत की इस खबर के बीच प्रदेश के कुछ हिस्सों में झुलसाने वाली गर्मी और तेज धूप का दौर अभी थमता नजर नहीं आ रहा है। इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, आगर-मालवा, राजगढ़, नीमच, मंदसौर, रतलाम, खरगोन, बड़वानी, धार, अलीराजपुर, झाबुआ, जबलपुर, कटनी, शहडोल, सतना, रीवा, सीधी और सिंगरौली जैसे इलाकों में फिलहाल तेज धूप लोगों को परेशान करती रहेगी।
बदले मौसम से पारे में दर्ज की गई गिरावट
इससे पहले सोमवार को भी राज्य के कई अंचलों में तेज हवाओं के साथ पानी गिरा। राजधानी भोपाल और सागर में आधे इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई, जबकि सीहोर, रायसेन, राजगढ़ और छिंदवाड़ा में भी अच्छी बौछारें पड़ीं। इस मौसमी फेरबदल के कारण कई शहरों में दिन के तापमान में कमी आई है, जिससे लोगों को तपन से थोड़ी राहत मिली है। दर्ज किए गए आंकड़ों के अनुसार, भोपाल में अधिकतम तापमान 34.5 डिग्री सेल्सियस, इंदौर में 37.1 डिग्री, उज्जैन में 38 डिग्री, जबलपुर में 38.7 डिग्री और ग्वालियर में 39.2 डिग्री सेल्सियस रहा।
इंदौर के डायल-112 हीरोज
15 Jun, 2026 11:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : इंदौर जिले के थाना खजराना क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशीलता एवं तत्पर कार्यवाही से खेलते-खेलते घर से निकलकर परिजनों से बिछड़ गए 03 वर्षीय बालक को सुरक्षित तलाश कर उसके परिवार से मिलाया गया। समय पर की गई सहायता से मासूम सकुशल अपने घर पहुँच सका।
14 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना खजराना क्षेत्र अंतर्गत पटेल कॉलोनी में एक 03 वर्षीय बालक गुम हो गया है। पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही थाना खजराना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया।
डायल-112 स्टाफ आरक्षक श्री सुनील मालवीय, आरक्षक श्री करण चौधरी एवं पायलट श्री अंकित शुक्ला ने मौके पर पहुँचकर परिजनों से बालक के संबंध में आवश्यक जानकारी एवं उसका फोटो प्राप्त किया। इसके उपरांत टीम ने आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय रूप से तलाश एवं पूछताछ प्रारंभ की। तलाश के दौरान बालक के संबंध में जानकारी प्राप्त होने पर डायल-112 जवानों ने उसे सुरक्षित संरक्षण में लिया और उसके घर पहुँचकर आवश्यक पहचान एवं सत्यापन उपरांत परिजनों के सुपुर्द किया।
डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन सहायता ही नहीं, बल्कि बच्चों एवं आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मानवीय संवेदनाओं के साथ हर परिस्थिति में सहायता पहुँचाने का कार्य भी निरंतर कर रही है।
सभी समाजों को, उनकी परम्पराओं को जोड़ें, आल्हा-ऊदल स्मृति उत्सव और श्रावण महोत्सव भी मनायें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
15 Jun, 2026 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आगामी छह-सात माह में बड़े त्यौहार, सांस्कृतिक पर्व एवं मेले मनायें जायेंगे। ये सभी त्यौहार हमारी धार्मिक आस्थाओं और प्रकृति के प्रति हमारी कृतज्ञता के प्रतीक हैं। इन सभी अवसरों पर संस्कृति विभाग सभी समाजों को, उनकी आस्थाओं और सांस्कृतिक परम्पराओं को जोड़कर वृहद आयोजन करें। आल्हा-ऊदल वीर रस गायन के प्रतीक हैं, उनकी स्मृति में आयोजन किए जाएं। श्रावण महोत्सव और भुजरिया पर्व भी मनाएं। नागपंचमी पर जैव विविधता संरक्षण (सर्प प्रजातियों के संरक्षण) का संदेश दिया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संस्कृति विभाग लोगों को जोड़कर ऐसे आयोजन करें, जिनसे हमारी कला और संस्कृति के संवर्धन के साथ ही सरकार के संदेश का भी प्रसार हो।
मुख्यमंत्री सोमवार को मंत्रालय में संस्कृति विभाग अंतर्गत संचालित योजनाओं एवं गतिविधियों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की कला, संस्कृति, परम्पराएं और समृद्ध पुरातात्त्विक धरोहरें प्रदेश की अमूल्य पूंजी हैं, जिन्हें संरक्षित और संवर्धित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए योजनाबद्ध और प्रभावी प्रयास किए जाएं। डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सांस्कृतिक अभ्युदय के लिए हमारी सरकार हर जरूरी प्रयास कर रही है। हम समाज को साथ लेकर इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। बैठक में संस्कृति, पर्यटन एवं धार्मिक न्यास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्कृति विभाग द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए तैयार किये गये 'कला पंचांग' का विमोचन भी किया। इसमें विभाग द्वारा वर्ष भर की जाने वाली कलात्मक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का पूरा कैलेंडर तैयार किया गया है। अब इन्हें सिलसिलेवार क्रियान्वित किया जायेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भविष्य में प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का दायरा और तेजी से बढ़ेगा। विभागीय आंतरिक विशेषताओं और विशेषज्ञताओं का समुचित संयोजन करते हुए संस्कृति विभाग की और बेहतर पुनर्संरचना की जाये। विभागीय गतिविधियों का आधुनिक संदर्भों में विस्तार भी किया जाये। उन्होंने कहा कि संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग सभी मिलकर काम करें, ताकि प्रदेश में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिले। इससे प्रदेश में उत्कृष्ट कारीगरी से निर्मित होने वाले क्रॉफ्ट आइटम्स, हैंडलूम आइटम्स और कशीदाकारी को भी पहचान मिलेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट वीर विक्रमादित्य के नाम से एक पृथक अकादमी का गठन किया जाये। इसमें विक्रमादित्य के जीवनवृत्त पर समग्र शोध एवं अन्य संगत गतिविधियां भी संचालित की जायें।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य के बाहर के प्रसिद्ध मंदिरों और देव स्थानों के अतिरिक्त अब प्रदेश में मौजूद 2 ज्योतिर्लिंगों, जागृत एवं मंशापूर्ण शक्ति पीठों एवं अन्य धार्मिक स्थलों को भी मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना में शामिल किया जाये।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशेष रूप से श्रीराम वन गमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इनके निर्माण कार्यों में और अधिक गति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उक्त दोनों परियोजनाएं धार्मिक आस्था के केंद्र होने के साथ ही प्रदेश के सांस्कृतिक और पर्यटन विकास की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनका कार्य शीघ्र पूर्ण होने से प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सांस्कृतिक गतिविधियों में जनसहभागिता बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के गांवों, कस्बों और शहरों में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ा जाए, ताकि नई पीढ़ी अपनी समृद्ध कला और सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें।
बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्कृति विभाग की विभिन्न योजनाओं, संरक्षण कार्यों तथा आगामी सांस्कृतिक आयोजनों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को और सशक्त बनाने के लिए समन्वित प्रयास किए जाने पर बल दिया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल के नजदीक जगदीशपुर स्थित पुराने किले की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि इस किले के इतिहास को जीवंत करने और इसे राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए भविष्य में जल्द ही यहां स्टेट कैबिनेट मीटिंग की जायेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में जन्मे या यहां से निकलकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले गायकों, कलाकारों और अन्य जनों की जानकारी एकत्रित कर इन्हें मध्यप्रदेश में प्रस्तुति देने के लिए राज़ी किया जाये। इससे मध्यप्रदेश की कला एवं सांस्कृतिक विविधताओं को देश-दुनिया में नई पहचान और एक्सपोजर मिलेगा और अपनी माटी से जुड़कर ऐसे कलाकारों को भी खुशी होगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पद्म पुरस्कारों के लिए प्रदेश के कलाकारों, समाजसेवियों, पर्यावरणविदों के केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले प्रस्तावों पर संस्कृति विभाग भी अपनी ओर से अनुशंसा करे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी पद्म पुरस्कार विजेताओं की आर्थिक मदद के लिए एक स्थायी योजना तैयार की जाये, ताकि जरुरतमंदों को शासन की योजना के तहत आर्थिक सहयोग दिया जा सके।
अपर मुख्य सचिव संस्कृति शिव शेख़र शुक्ला ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 17 धार्मिक/सांस्कृतिक लोक और 20 संग्रहालयों का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 से अब तक संस्कृति विभाग के अधीन करीब 4160 करोड़ रुपए के निर्माण कार्यों पर काम जारी हैं। कुछ काम पूरे भी हो चुके हैं। जल्द ही लोकार्पण भी कराया जायेगा। प्रदेश में श्रीराम वन गमन पथ निर्माण पर 160 करोड़ रुपए के काम जारी हैं। महाकाल लोक में मूर्ति स्थापना के कार्य प्रगति पर है। ओरछा में भगवान राम राजा लोक एकदम नये स्वरूप में (छह नई थीम पर) तैयार किया जा रहा है। प्रदेश के सभी लोकों के नियमित संचालन के लिए स्थायी प्रबंधन भी किये जा रहे हैं। प्रदेश के सभी संगीत महाविद्यालयों और सांची स्थित बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के सुचारू संचालन के लिए भी जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश के नाट्य विद्यालय में विभाग द्वारा डिग्री कोर्सेस चलाये जा रहे हैं। यह विद्यालय इतना प्रसिद्ध है कि अब नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के पदाधिकारी विजिट करके यहां उपलब्ध सुविधाओं और कोर्सेस की जानकारी ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि चित्रकूट के समग्र विकास के लिए उत्तरप्रदेश सरकार के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।
बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी, आयुक्त पुरातत्व मदन नागरगोजे, संचालक, संस्कृति एनपी नामदेव सहित अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।
हौंसले की बुलंदी से हर मंजिल होती है आसान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
15 Jun, 2026 10:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि परिवार में गरीबी, कठिनाई के बावजूद हौंसले की बुलंदी से हर मंजिल आसान होती है। विषम परिस्थितियों में भी कुमारी चांदनी ने परिश्रम, लगन और दृढ़ संकल्प से जो उपलब्धि हासिल की है, वह प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव एमपी बोर्ड 12वीं की टॉपर कुमारी चांदनी विश्वकर्मा से मिलने ई-स्कूटर से विधानसभा के निकट स्थित भीम नगर बस्ती पहुंचे। ई-स्कूटर पर सवार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वयं हेलमेट पहना और उनके साथ ई-स्कूटर पर पीछे बैठे विधायक भगवान दास सबनानी ने भी हेलमेट लगाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सेवा सुशासन और गरीब कल्याण के 12 वर्ष पूर्ण होने, सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं की प्रभावशीलता के संबंध में स्थानीय निवासियों से संवाद भी किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुमारी चांदनी और उनके परिजन से आत्मीय भेंट की और परिजन के साथ सेल्फी भी ली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चांदनी की उत्कृष्ट सफलता पर बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की और आशीर्वाद प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रतिभावान बेटी की पढ़ाई में गरीबी कभी बाधा नहीं बनेगी। कुमारी चांदनी को शासन की सभी योजनाओं का लाभ दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने इलेक्ट्रिक टू व्हीलर चलाकर दिया ईंधन बचाने का संदेश
मुख्यमंत्री डॉ. यादव वैश्विक ईंधन संकट के बीच भीम नगर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर से पहुंचे। उन्होंने देशवासियों से ईंधन बचाने और पर्यावरण-संरक्षण के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल अपनाने की अपील की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रहित में सबसे पहले अपना कारकेड घटाने का निर्णय लिया था। उनकी पहल पर कारकेड में इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) को शामिल किया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मौजूदगी में एग्रो सौर पीवी के लिए हुआ एमओयू
15 Jun, 2026 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रदेश में एग्रो सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने की मंशा पर एक और उपलब्धि हासिल हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मौजूदगी में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग, मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड तथा जर्मन सरकार समर्थित इंडो-जर्मन एग्री वोल्टाइक सहयोग परियोजना (आईजीसीए) के मध्य सोमवार को मंत्रालय, भोपाल में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर आदान-प्रदान किया गया। एग्री वोल्टाइक, कृषि एवं सौर ऊर्जा के संयुक्त उपयोग को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया एक संगठन है। इसका उद्देश्य कृषि भूमि पर खेती के साथ-साथ उसी खेत में ही सौर ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित करना है, जिससे अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता कम हो, खाद्य सुरक्षा बनी रहे तथा भूमि संबंधी विवादों से भी बचा जा सके। इस काम में जर्मन कम्पनी सरकार को सहयोग देगी। यह पहल पीएम-कुसुम 2.0 सहित विभिन्न योजनाओं के अनुरूप राज्य में विशिष्ट एग्रीवोल्टाइक ढांचा विकसित करने, किसानों की आय बढ़ाने, भूमि उपयोग दक्षता सुधारने, उत्पादित ऊर्जा की सुरक्षा सुदृढ़ करने तथा जलवायु-अनुकूल ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने में सहायक होगी। यह गैर-बाध्यकारी समझौता ज्ञापन मई 2030 तक प्रभावी रहेगा। इस अवसर पर नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला, अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग श्री मनु श्रीवास्तव, प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड श्री अमनवीर सिंह बैंस, भारत में जर्मन दूतावास के पदाधिकारी, एग्री वोल्टाइक संगठन से श्री एलेक्जेंडर, जर्मनी की जीआईजेड कम्पनी के पदाधिकारी सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
एग्री सौर पीवी के तहत सरकार किसानों को सब्सिडी देगी। इससे किसान अपनी जमीन के मालिकाना हकदार होंगे। किसान जमीन में खेती करेंगे और उसी खेत में सोलर पैनल लगाकर सौर ऊर्जा उत्पादन कर अतिरिक्त आय भी अर्जित करेंगे। यह किसानों के लिए डबल सौगात होगी।
राज्य सरकार और इंडो-जर्मन एग्री वोल्टाइक सहयोग परियोजना के मध्य हुई इस परस्पर साझेदारी के अंतर्गत कम्पनी द्वारा एग्रीवोल्टाइक परियोजनाओं की पहचान, तकनीकी एवं आर्थिक मूल्यांकन, डिजाइन, वित्तीय व्यवहार्यता और क्रियान्वयन में सहयोग किया जाएगा। इसके तहत प्रदेश के किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, ऊर्जा विकासकर्ताओं, डिस्ट्रीब्यूशन कम्पनीज (डिस्कॉम) एवं अन्य संबंधित हितधारकों के लिए क्षमता निर्माण और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। कम्पनी द्वारा राज्य में कृषि उत्पादकता एवं खाद्य सुरक्षा को संरक्षित रखते हुए उपयुक्त नीतिगत एवं नियामक ढांचा विकसित करने में भी सहयोग किया जाएगा।
सीमाओं की सुरक्षा की तरह महत्वपूर्ण है डेटा की सुरक्षा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
15 Jun, 2026 09:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज की सबसे मूल्यवान संपत्ति डेटा है। डिजिटल सुरक्षा समय की मांग है। डेटा की सुरक्षा, राष्ट्र की सीमा की सुरक्षा जितनी महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ वर्षों में न केवल देश अपितु पूरी दुनिया में सायबर तकनीक और उससे जुड़ी चुनौतियों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। हर दिन इसके नए आयाम सामने आ रहे हैं। अपराध के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी आधुनिक तकनीक और द्रोण जैसे साधनों के उपयोग से सुरक्षा चुनौतियों का नया स्वरूप देखने को मिला। प्रधानमंत्री मोदी का देश की सुरक्षा को हर तरह से सशक्त बनाने के लिए अभिनंदन है। प्रधानमंत्री मोदी की विशेषता है कि वह समय से पहले आने वाले वाली चुनौतियों को पहचान लेते हैं और शासन-प्रशासन और जन सामान्य को उसके प्रति जागरूक करने के लिए तत्काल आवश्यक कदम भी उठाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर सायबर अपराध, डीप फेक और अन्य चुनौतियों पर केंद्रित कार्यशाला में सायबर सुरक्षा संस्कृति को सशक्त बनाने में सभी मार्ग खोजे जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव "राज्य डेटा के लिए सायबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने" पर सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में कार्यशाला के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला का उद्देश्य राज्य शासन के विभिन्न विभागों में सायबर सुरक्षा से जुड़ी वर्तमान चुनौतियों, उभरते सायबर खतरों, डेटा संरक्षण की आवश्यकताओं और डिजिटल शासन प्रणालियों की सुरक्षा पर व्यापक विचार-विमर्श करना है।
सायबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा सेंटर
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सायबर अपराध और डेटा सुरक्षा की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए राज्य में सायबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से यह रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाएगा। सेंटर केंद्रीय सायबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के लिये महत्वपूर्ण आधार बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सायबर अटैक की समय पर पहचान और निगरानी में आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था से लैस सेंटर की महती भूमिका होगी। यह व्यवस्था केवल प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि पूर्वानुमान आधारित निरंतर सतर्कता की दिशा में ठोस कदम साबित होगी।
डीबीटी की पारदर्शी व्यवस्था से हितग्राहियों तक पहुंचने लगा है शत-प्रतिशत लाभ
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश बदलते दौर में हर तरह की चुनौतियों से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। सायबर अपराधियों के विरुद्ध मध्यप्रदेश पुलिस ने अच्छा काम करके दिखाया है। वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने जीरो बैलेंस पर बैंक अकाउंट खोलने की शुरुआत की। जनधन खाते खुलने से देशभर में जरूरतमंदों को डीबीटी के माध्यम से हितलाभ सीधे उनके बैंक खाते में दिया जाने लगा। डीबीटी की पारदर्शी व्यवस्था लागू होने से शत प्रतिशत लाभ हितग्राहियों तक पहुंचने लगा। दुनिया ने भारत की यूपीआई पेमेंट सिस्टम का लोहा माना है। ऐसे समय में जब नागरिकों को डिजिटल और ऑनलाइन माध्यम से लाभ पहुंच रहा है तो सरकार पर सुरक्षा की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। नागरिकों के मन में विश्वास पैदा करने के लिए राज्य सरकार हर पहलू को ध्यान में रखकर कार्य कर रही है।
सायबर क्राइम के अदृश्य खतरों से निपटने के लिये आवश्यक प्रबंधन जरूरी
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सुरक्षा के तमाम चाक-चौबंद उपायों के बाद भी अगर जीवनभर की गाढ़ी कमाई एक झटके में कोई सायबर अपराधी उड़ा ले जाए तो दु:ख होता है। सायबर क्राइम के अदृश्य खतरों से निपटने के लिये सभी आवश्यक प्रबंधन करना वर्तमान दौर की जरूरत है। सायबर क्राइम और डेटा सेफ्टी के मामले में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है। राज्य का डेटा हमारी सबसे मूल्यवान संपत्ति है। डेटा ब्रीच की स्थिति में आर्थिक भरपाई की जिम्मेदारी भी सरकार की होगी। प्रदेश सरकार सायबर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
नागरिकों को अधिकाधिक डिजिटल सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिये हो रहा निरंतर कार्य : पी.एस. सेल्वेन्द्रन
प्रमुख सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एम. सेल्वेन्द्रन ने कहा कि मध्यप्रदेश ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। विभाग नागरिकों को अधिकाधिक डिजिटल सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की विभिन्न डिजिटल नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना और पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ सायबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण की चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं, इसलिए नागरिकों के व्यक्तिगत, वित्तीय, भूमि, शिक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी डेटा की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
प्रमुख सचिव सेल्वेन्द्रन ने कहा कि इसी उद्देश्य से एमपी-सीईआरटी की स्थापना की गई है, जो सायबर खतरों की निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया और समन्वित कार्रवाई से प्रदेश की सायबर सुरक्षा को सुदृढ़ कर रहा है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के मार्गदर्शन में आयोजित यह कार्यशाला सायबर सुरक्षा के लिए मजबूत संस्थागत एवं नीतिगत ढाँचा विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। कार्यशाला में प्राप्त सुझावों के आधार पर प्रदेश में सुरक्षित, विश्वसनीय एवं भविष्य उन्मुख साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को और मजबूत किया जाएगा।
एमपी-सीईआरटी और आधुनिक सुरक्षा तंत्र से सुदृढ़ हो रही सायबर सुरक्षा व्यवस्था : एम.डी. वशिष्ठ
प्रबंध संचालक एमपीएसईडीसी आशीष वशिष्ठ ने कहा कि प्रदेश में 1700 से अधिक शासकीय सेवाएं डिजिटली नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ सायबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण का महत्व भी बढ़ा है। नागरिकों के स्वास्थ्य, शिक्षा, भूमि एवं संपत्ति सहित विभिन्न शासकीय अभिलेखों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। एमडी वशिष्ठ ने बताया कि प्रदेश में एमपी-सीईआरटी, स्टेट डेटा सेंटर के सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर और सुरक्षित स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (स्वान) से सायबर सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कार्यशाला में प्राप्त सुझावों और विशेषज्ञों के अनुभवों के आधार पर राज्य के लिए एक मजबूत, प्रभावी और भविष्य उन्मुख साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क विकसित करने में सहायता मिलेगी।
प्रदेश में 44 सायबर कमांडो और 3 हजार सायबर वॉरियर तैयार किए जाएंगे : एडीजी मनोहर
एडीजी ए. साई मनोहर ने कहा कि सायबर अपराध और डेटा सुरक्षा आज डिजिटल युग की प्रमुख चुनौतियां हैं। सायबर हेल्पलाइन 1930, त्वरित शिकायत निवारण व्यवस्था और जागरूकता अभियानों के माध्यम से प्रदेश में सायबर अपराधों की रोकथाम के लिए प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे अनेक मामलों में नागरिकों की बड़ी राशि सुरक्षित कराई गई है। उन्होंने कहा कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ शासकीय डेटा और प्रणालियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। इसी उद्देश्य से एमपी-सीईआरटी, आधुनिक निगरानी प्रणाली और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। साथ ही स्कूलों, महाविद्यालयों और शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक सायबर जागरूकता अभियान संचालित किए जा रहे हैं।
एडीजी मनोहर ने बताया कि प्रदेश में सायबर सुरक्षा क्षमता को बढ़ाने के लिए वर्तमान में 6 सायबर कमांडो कार्यरत हैं और 38 अन्य का चयन किया जा चुका है। राज्य सायबर सेल में सिंहस्थ - 2028 से पहले 44 सायबर कमांडो तैयार कर लिए जाएंगे। सिंहस्थ में सायबर अटैक पर बारीकी से नजर रखने और उसे समय रहते प्रतिबंधित करने के लिए लगभग 3 हजार इंजीनियरिंग विद्यार्थियों एवं युवा स्वयं सेवकों को ‘सायबर वॉरियर’ के रूप में प्रशिक्षित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि सायबर सुरक्षा के क्षेत्र में रोकथाम, जागरूकता और त्वरित प्रतिक्रिया ही सबसे प्रभावी उपाय हैं और राज्य नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जा रहा है।
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम, सुरक्षित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, सायबर अपराध नियंत्रण, आईएफएमआईएस नेक्स्ट जेन परियोजना के माध्यम से सायबर सुरक्षा सुदृढ़ीकरण और एनआईसीनेट की सायबर सुरक्षा संरचना जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रस्तुतियाँ दीं। इसके अतिरिक्त डिजिलॉकर, एंटिटी लॉकर, एपीआई सेतु एवं यूएक्स4जी, एंड-पॉइंट सुरक्षा, वेब एवं आईटी अवसंरचना की सायबर सुरक्षा स्थिति और सुरक्षित एआई परिवर्तन यात्रा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों (सीआईएसओ) की सहभागिता से विषयगत समूह चर्चा आयोजित की गई। इस दौरान सायबर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर 5 समानांतर समूह गठित कर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।समूह चर्चाओं में जोखिम आधारित आकलन एवं सिक्योरिटी निगरानी, राज्य डेटा सेंटर (एसडीसी) एवं स्वान सुरक्षा, लेगेसी प्रणालियों का आधुनिकीकरण, सुरक्षा-बाय-डिज़ाइन एवं ज़ीरो-ट्रस्ट मॉडल, डेटा वर्गीकरण एवं डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और सायबर सुरक्षा क्षमता निर्माण, जागरूकता और एमपी-सीईआरटी की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
प्रतिभागियों ने अपने-अपने विभागों में सायबर सुरक्षा से संबंधित वर्तमान व्यवस्थाओं, प्रमुख चुनौतियों, तकनीकी एवं प्रशासनिक अंतरालों और सुधार की संभावनाओं पर विचार साझा किए। समूहों द्वारा राज्य शासन की डिजिटल परिसंपत्तियों और संवेदनशील डेटा की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए विभिन्न सुझाव एवं अनुशंसाएँ भी प्रस्तुत की गईं। चर्चा में सायबर सुरक्षा के क्षेत्र में विभागीय समन्वय बढ़ाने, जोखिम प्रबंधन को सुदृढ़ करने, सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना विकसित करने और डेटा संरक्षण संबंधी व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाने पर विशेष बल दिया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य राज्य की डिजिटल परिसंपत्तियों और डेटा की सुरक्षा को मजबूत करने के साथ विभिन्न विभागों के बीच सायबर सुरक्षा संबंधी समन्वय और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना रहा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिले जीनानी कम्पनी के पदाधिकारी
15 Jun, 2026 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सोमवार को मंत्रालय में बंगलुरू बेस्ड जीनानी डॉट एआई कम्पनी के पदाधिकारियों ने सौजन्य भेंट की। कम्पनी पदाधिकारियों ने मध्यप्रदेश में सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र (आईटी सेक्टर) में निवेश करने की मंशा व्यक्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कम्पनी पदाधिकारियों से कहा कि वे निवेश के संदर्भ में ठोस परियोजना प्रस्ताव और स्पष्ट रोडमैप लेकर आएं, सरकार कम्पनी की सभी प्रकार की मदद करेगी।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव सूचना प्रौद्योगिकी विभाग एम सेलवेंद्रम, जीनानी डॉट एआई कम्पनी के सह-संस्थापक एवं मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी अनंत नागाराज, कम्पनी के हेड ऑफ एआई ट्रांसफार्मेशन (पब्लिक सेक्टर) कर्नल आदिश वाबुमकर (रिटायर्ड) भी उपस्थित थे।
कम्पनी पदाधिकारियों ने बताया कि मध्यप्रदेश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) पर व्यापक संभावनाएं हैं। जीनानी डॉट एआई के विभिन्न मॉडलों को प्रदेश में कृषि, स्वास्य्व, वन, ग्रामीण विभाग और राजस्व विभागों में प्रभावी रूप से लागू कर दक्षता बढ़ाने और नागरिक सेवाओं में सुधार पर विस्तार से काम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि उनकी कम्पनी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर काम करती है, जिसमें शासकीय और निजी क्षेत्र शामिल हैं।
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