मध्य प्रदेश
राष्ट्रपति मुर्मु ने चीता मित्रों से किया संवाद और चीता संरक्षण की ली जानकारी
22 Jun, 2026 10:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने दो दिवसीय कूनो नेशनल पार्क के प्रवास के दौरान सोमवार को चीता मित्रों से संवाद कर चीता संरक्षण के प्रयासों की जानकारी ली। राष्ट्रपति ने चीता मित्रों से चर्चा करते हुए उनके द्वारा चीतों की सुरक्षा और आमजन के बीच चीतों के व्यवहार को लेकर किये जा रहे जन-जागरूकता के प्रयासों के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सभी चीता मित्रों से वन-टू-वन चर्चा कर परियोजना के लिए उनके द्वारा मानसेवी रूप से किये जा रहे प्रयासों की सराहना की।
राष्ट्रपति मुर्मु को चीता मित्रों ने अवगत कराया कि कूनो नेशनल पार्क से लगे सभी ग्रामों में चीता मित्र मौजूद है, जिनके द्वारा चीतो की सुरक्षा के संबंध में ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। चीतो के आबादी क्षेत्र में आवागमन की स्थिति पर किये जाने वाले कार्यों के संबंध में सभी को अवगत कराया गया है। ग्रामीणों को यह जानकारी भी दी जा रही है कि स्वभाविक रूप से चीते किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते है। चीता जब आबादी क्षेत्र अथवा खेतों में दिखाई दे तो तत्काल वन विभाग को अवगत कराया जाये, जिससे उन्हें किसी भी प्रकार से नुकसान न पहुँचे। भारत में चीतों की पुनर्बसाहट के लिए यह परियोजना अति महत्वपूर्ण है।
इस दौरान चीता मित्र कुलदीप आदिवासी सिलोरी, संग्राम आदिवासी एवं कु. राजनदंनी आदिवासी हथेडी, मल्हा आदिवासी सेसईपुरा, शिवम आदिवासी पालपुर, विनोद आदिवासी पैरा, रामलखन आदिवासी कराहल, लालाराम आदिवासी सेसईपुरा, दौलतराम आदिवासी सेसईपुरा और सतीश आदिवासी मोरावन मौजूद रहें।
इस अवसर पर वन विभाग के प्रमुख सचिव संदीप यादव, पीसीसीएफ शुभरंजन सेन, कमिश्नर सुरेश कुमार, आईजी सचिन अतुलकर, कलेक्टर सुशीला दाहिमा, पुलिस अधीक्षक सुधीर अग्रवाल, सीसीएफ उत्तम कुमार, डीएफओ आर थिरूकुराल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहें।
उल्लेखनीय है कि कूनो नेशनल पार्क में चीतों की पुनर्स्थापन योजना को लगभग साढ़े तीन वर्ष से अधिक का समय हो गया है। नेशनल पार्क में नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका एवं बोत्सवाना से चीतों को लाया गया है, वर्तमान में देश में चीतों की संख्या 52 है, जिनमें से 49 चीते कूनो नेशनल पार्क में तथा 03 चीते मंदसौर स्थित गांधी सागर अभ्यारण में मौजूद है। भारत में जन्मे चीतो की संख्या 32 है, चीता प्रोजेक्ट निरंतर सफलता की ओर आगे बढ रहा है।
राष्ट्रपति मुर्मु चीता मित्रों से संवाद के उपरांत हेलीकॉप्टर से ग्वालियर के लिये रवाना हुई। हेलीपेड पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मीनिस्टर इन वेटिंग एवं जिले के प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला, सांसद शिवमंगल सिंह तोमर सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारियों ने आदरपूर्वक विदाई दी।
El Niño का असर जारी, मध्य प्रदेश में मानसून पर पड़ा बड़ा प्रभाव
22 Jun, 2026 10:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। देशभर में अल नीनो (El Niño) के असर के कारण मानसून की रफ्तार काफी सुस्त पड़ गई है। इसका सीधा प्रभाव मध्य प्रदेश में भी देखने को मिल रहा है, जहां जून के मध्य तक आ जाने वाला मानसून इस बार अब तक पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, प्रदेशवासियों को मानसूनी बारिश के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा। इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अल नीनो के चलते राज्य के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात पैदा होने की आशंका बढ़ गई है।
मानसून में देरी और सूखे की आहट
आमतौर पर मध्य प्रदेश में मानसून 15 जून के आसपास दस्तक दे देता है, लेकिन इस बार 22 जून बीत जाने के बाद भी इसकी मजबूत एंट्री नहीं हो सकी है। देश में मानसून के प्रवेश को करीब 20 दिन हो चुके हैं, फिर भी अल नीनो प्रभाव के कारण इसकी गति कमजोर है। इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्य सरकार के साथ मिलकर मोर्चा संभाल लिया है। वर्तमान में प्रदेश के 16 जिलों पर सूखे का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। आम जनता और किसानों में घबराहट न फैले, इसलिए सरकार ने सभी प्रभावित जिलों की सूची को पूरी तरह सार्वजनिक नहीं किया है। हालांकि, धार, झाबुआ, बड़वानी, नीमच, रतलाम, दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, शिवपुरी, मंडला, सतना, बैतूल, छिंदवाड़ा और खंडवा जैसे जिलों को हाई अलर्ट पर माना जा रहा है।
किसानों के लिए बन रहा विशेष कंटिजेंसी प्लान
बारिश में हो रही इस देरी का सबसे बड़ा असर खरीफ फसलों की बुआई और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका है। इस संकट से निपटने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय और राज्य सरकार मिलकर एक विशेष 'कंटिजेंसी प्लान' (आपातकालीन योजना) तैयार कर रहे हैं। इसके तहत किसानों को वैकल्पिक और कम पानी में पकने वाली फसलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि मंत्रालय का स्पष्ट कहना है कि यदि मानसून सामान्य नहीं रहता है, तो किसानों को ऐसी फसलों की ओर रुख करना होगा जो कम पानी में भी बेहतर उत्पादन दे सकें, ताकि उन्हें भारी आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।
जून के अंत में मानसून सक्रिय होने की संभावना
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, मध्य प्रदेश में मानसूनी गतिविधियों के दोबारा मजबूत होने में अभी कुछ दिनों का समय और लगेगा। वर्तमान मौसमी प्रणालियों को देखते हुए अनुमान लगाया गया है कि 29 जून के आसपास प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो सकता है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो का यह प्रभाव केवल मध्य प्रदेश तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई अन्य राज्य भी इससे प्रभावित हैं। इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को भेज दी गई है ताकि समय रहते सभी जरूरी कदम उठाए जा सकें।
सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी और आवासों में ईको फ्रेंडली भवन निर्माण सामग्री के उपयोग को करें प्रोत्साहित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
22 Jun, 2026 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पर जिला मुख्यालयों पर होने वाले कार्यक्रमों में जिलों के प्रभारी मंत्री, जिलों में हुए विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं की उपलब्धियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करेंगे। समारोह स्थल पर विकास कार्यों और योजनाओं को जनसामन्य के सामने रखने के लिए प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी, यह प्रेजेंटेशन एक तरह से विकास कार्यों के सोशल ऑडिट जैसा होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिला विकास समितियों का राजधानी भोपाल में सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। जिला विकास समितियां विकास गतिविधियों के लिए शासकीय नियोजन में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। निजी निवेश को भी प्रोत्साहित करने के लिए जिला विकास समितियां प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विधानसभा क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाने और किफायती आवासों के निर्माण में ईको फ्रेंडली भवन निर्माण सामग्री के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने राज्य के विभागवार, संभागवार और जिलावार समस्त सांख्यिकी आंकड़े एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मंत्रालय में योजना, आर्थिक एवं साख्यिकी विभाग की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में उप-मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, मनीष रस्तोगी तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
विश्राम घाट पर ही मृत्यु पंजीयन की हो व्यवस्था
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र में सभी विभागों की गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जाए। योजना अंतर्गत कराए गए कार्यों के संधारण की भी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि योजना में श्रेष्ठ कार्य तथा नवाचार करने वालों को प्रोत्साहित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश जन्म और मृत्यु पंजीकरण की व्यवस्था की समीक्षा के दौरान मृत्यु पंजीयन के लिए विश्राम घाट पर ही पंजीयन की प्रक्रिया शुरू करने की व्यवस्था के लिए कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। इससे विशेष रूप से ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्र के लोगों को मृत्यु प्रमाण-पत्र प्राप्त करने में आसानी होगी।
जिलों के विकास सूचकांक स्थानीय परिस्थितियों पर हों आधारित
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिलों के विकास सूचकांक स्थानीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर अलग-अलग निर्धारित किया जाए। औद्योगिक पृष्ठ भूमि, कृषि आधारित व्यवस्था, वन क्षेत्र संपन्न जिलों के लिए विकास के सूचकांक अलग-अलग हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने, ग्रामीण क्षेत्र में स्वयं का मकान बनाने वालों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने और उपयुक्त भवन निर्माण सामग्री के संबंध में जागरूक करने के लिए भी जरूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रस्फुटन और नवाकुंर समितियों की रही सक्रिय सहभागिता
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक एक लाख 37 हजार से अधिक छात्र लाभान्वित हो चुके हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रस्फुटन और नवाकुंर समितियों ने कुएँ, बावड़ी, तालाब, नदी घाट सफाई, जल संगोष्ठी और बावड़ी उत्सव जैसे आयोजनों में सक्रिय सहभागिता की। बैठक में बताया गया कि विमुक्त, घुमंतु और अर्द्ध-घुमंतु परिवारों के चिन्हाकंन और पंजीकरण के लिए जारी अभियान में अब तक पच्चीस हजार से अधिक परिवारों की जानकारी पोर्टल पर प्रविष्ट की जा चुकी है। प्रदेश में मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रशिक्षण की प्रक्रिया भी जारी है।
राष्ट्रपति मुर्मु को ग्वालियर विमानतल पर दी भावभीनी विदाई
22 Jun, 2026 09:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मध्यप्रदेश के 5 दिवसीयभ्रमण के बाद22 जून को सुबह वायुसेना के विमान से ग्वालियर से दिल्ली रवाना हुईं। राष्ट्रपति मुर्मु श्योपुर जिले के कूनों से हैलीकॉप्टर से वायुसेना के विमानतल महाराजपुरा ग्वालियर पधारीं। उनके साथ मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल भी थे।
ग्वालियर विमानतल पर राज्यपाल पटेल, प्रदेश के जल संसाधन मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट, सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, सांसद भारत सिंह कुशवाह एवं महापौर शोभा सिकरवार ने विदाई दी।
विमानतल पर अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव, डीजी होमगार्ड सुप्रज्ञा रिचा श्रीवास्तव, संभागीय आयुक्त मनोज खत्री, आईजी अरविंद कुमार सक्सेना, डीआईजी असित यादव, कलेक्टर रुचिका चौहान, पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह, नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय एवं वायु सेना के अधिकारी उपस्थित रहे।
मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए हर जिले में विकसित की जाए एक हैचरी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
22 Jun, 2026 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि एकीकृत मत्स्योघोग नीति : 2026 के कारण प्रदेश में मछली पालन सेक्टर में 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आ रहा है। प्रदेश में प्राप्त 2 लाख 91 हजार 9 सौ 38 केज के प्रस्तावों के लिए कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं। प्रदेश में मोती उत्पादन को भी प्रोत्साहित किया जाये, इसके लिए अन्य राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिसेस का अध्ययन कर उनका क्रियान्वयन प्रदेश में सुनिश्चित किया जायें। प्रदेश को मछली उत्पादन में आत्म निर्भर बनाना जरूरी है। अगले ढाई साल में हमें मछली बीज अन्य स्थानों से नहीं खरीदना पड़े, इस लक्ष्य को ध्यान में रखकर विभाग कार्य करे। हर जिले में एक हेचरी आवश्यक रूप से विकसित की जाये। जिलों में मछली बीज आसानी से मिलने से प्रदेश में मछली उत्पादन में और बढ़ोत्तरी होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश मछुआ कल्याण तथा मत्यस्य विकास विभाग की समीक्षा बैठक में दिए। मंत्रालय में हुई बैठक में मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्य मंत्री श्री नारायण सिंह पवार, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, विभाग के सचिव श्री स्वतंत्र कुमार सिंह तथा विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
मछुआ क्रेडिट कार्ड में मध्यप्रदेश, देश में दूसरे स्थान पर
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में बढ़ रहे मछली उत्पादन को दृष्टिगत रखते हुए कोल्ड चेन तथा अन्य आवश्यक इंफ्रास्टक्चर विकसित किया जाये। ब्रांडिंग और निर्यात के लिए आवश्यक नेटवर्किंग को भी प्रोत्साहित किया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नदियों के पुनर्जीवन, जलीय जीवों के संरक्षण के लिए सभी संबंधित विभाग परस्पर समन्वय से कार्य करें। जलीय ईको सिस्टम को विकसित करने और जल सम्पदा पर आधारित पर्यटन गतिविधियों को विस्तार देने के लिए भी कार्य योजना बनाई जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि मछुआ किसान क्रेडिट कार्ड के अंतर्गत अन्तर्देशीय जल क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। राष्ट्रीय स्तर पर अन्तर्देशीय मत्स्य पालन में सिवनी जिले को वर्ष 2023-24 के लिए प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।
रेलवे स्टेशनों पर मिलेगा मनोरंजन का नया अनुभव, भोपाल मंडल में 15 जगहों पर विकास
22 Jun, 2026 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। यदि आप एक व्यापारी हैं, स्टार्टअप चलाते हैं या निवेश के लिए किसी ऐसे स्थान की तलाश में हैं जहां ग्राहकों की भारी मौजूदगी (गारंटीड फुटफॉल) हो, तो भारतीय रेलवे आपके लिए एक सुनहरा अवसर लेकर आया है। पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल ने 'अमृत भारत स्टेशन योजना' के तहत नया रूप ले रहे 15 रेलवे स्टेशनों पर कमर्शियल स्पेस (वाणिज्यिक स्थानों) के उपयोग के लिए बिजनेस प्रपोजल मांगे हैं। इस योजना के जरिए अब रेलवे स्टेशनों को सिर्फ यात्रा का जरिया नहीं, बल्कि शहरों के बड़े आर्थिक और व्यापारिक केंद्र (सिटी सेंटर) के रूप में तब्दील किया जा रहा है।
ड्राइव-इन सिनेमा से लेकर गेमिंग जोन जैसे आधुनिक आइडिया
रेल प्रशासन स्टेशन परिसरों को हाई-टेक लुक देने के लिए पारंपरिक दुकानों के ढर्रे से अलग हटकर नए और यात्री-केंद्रित बिजनेस आइडिया को प्राथमिकता दे रहा है। कारोबारी नीचे दी गई श्रेणियों या किसी अन्य नए कांसेप्ट पर अपने प्रस्ताव दे सकते हैं:
मनोरंजन और गैजेट्स: ड्राइव-इन सिनेमा, गेमिंग जोन, बाल मनोरंजन केंद्र और डिजिटल एक्सपीरियंस सेंटर।
सुविधाएं और आतिथ्य: आधुनिक प्रतीक्षालय/लाउंज, पर्यटन एवं आतिथ्य सेवाएं और मल्टीफंक्शनल कॉम्प्लेक्स।
बैंकिंग और टेक: डिजिटल बैंकिंग यूनिट, ई-लॉबी और हाई-टेक एटीएम।
भोपाल मंडल के ये 15 स्टेशन बनेंगे नए 'बिजनेस हब'
अमृत भारत योजना के तहत नर्मदापुरम और शाजापुर स्टेशनों का पुनर्विकास कार्य पूरा हो चुका है, जबकि 13 अन्य प्रमुख स्टेशनों पर काम बहुत तेजी से चल रहा है। इस पूरी योजना में शामिल 15 स्टेशन जहां बिजनेस सेंटर विकसित किए जाएंगे, वे इस प्रकार हैं:
नर्मदापुरम, शाजापुर, हरदा, खिरकिया, बनापुरा, इटारसी, साँची, विदिशा, गंजबासौदा, अशोकनगर, गुना, रुठियाई, शिवपुरी, ब्यावरा-राजगढ़ और संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) स्टेशन।
पारदर्शी टेंडर और ई-नीलामी के जरिए अलॉटमेंट
रेलवे स्टेशनों पर व्यापार शुरू करने के लिए आवंटन की प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी और सरल रखा गया है:
सम्पर्क और सर्वेक्षण: इच्छुक कारोबारी सीधे संबंधित स्टेशन के मंडल वाणिज्य निरीक्षक से मिलकर उपलब्ध खाली जगहों का निरीक्षण और अपनी व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुसार प्रस्ताव तैयार कर सकते हैं।
चयन प्रक्रिया: प्राप्त सभी प्रस्तावों का रेलवे बोर्ड की नीतियों के तहत परीक्षण किया जाएगा। जो प्रस्ताव व्यावहारिक और उपयोगी पाए जाएंगे, उन्हें ई-नीलामी या टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से अंतिम रूप दिया जाएगा।
इस योजना का उद्देश्य स्टेशनों को केवल यात्री सुविधाओं तक सीमित न रखकर व्यापार, निवेश और आर्थिक विकास का मुख्य केंद्र बनाना है, जिससे शहरों के विकास में रेलवे का योगदान और अधिक बढ़ सके।
नगर निगम ट्रक में आग लगने से भोपाल में हड़कंप, मौके पर जुटे लोग
22 Jun, 2026 04:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। शहर के रायसेन रोड पर स्थित एलएनसीटी यूनिवर्सिटी (LNCT University) गेट के सामने से गुजर रहे नगर निगम के एक कचरा ट्रक में अचानक भीषण आग लग गई। शॉर्ट सर्किट की वजह से ट्रक के केबिन के निचले हिस्से में भड़की आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप ले लिया। वहां मौजूद कर्मचारियों और राहगीरों ने बोतलों में पानी भरकर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी।
चलते ट्रक में भड़की आग और रेस्क्यू की कोशिश
बताया जा रहा है कि रविवार रात को नगर निगम का यह कंटेनरनुमा ट्रक आदमपुर कचरा खंती (कचरा डंपिंग साइट) से वापस लौट रहा था। जैसे ही ट्रक एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार के सामने पहुंचा, केबिन से अचानक तेज धुआं निकलने लगा। ड्राइवर ने तुरंत गाड़ी रोककर नीचे उतरकर देखा तो केबिन के निचले हिस्से में आग लग चुकी थी। आग बुझाने के लिए वहां से गुजर रहे राहगीरों की मदद ली गई और एक अन्य गाड़ी में रखीं पानी की बड़ी बोतलों से आग पर काबू पाने की कोशिश की गई, लेकिन आग लगातार बढ़ती गई।
दमकल की देरी और हुआ भारी नुकसान
स्थानीय लोगों के प्रयास विफल रहने के बाद आग की लपटें तेजी से फैल गईं। कुछ ही मिनटों में आग ने पूरे केबिन को अपनी चपेट में ले लिया और ट्रक के आगे के दोनों टायर भी पूरी तरह जलकर खाक हो गए। इस आपातकालीन स्थिति में एक बड़ी लापरवाही यह भी सामने आई कि हादसे की सूचना देने के करीब आधे घंटे बाद तक दमकल (फायर ब्रिगेड) की गाड़ी मौके पर नहीं पहुंच सकी, जिससे ट्रक का अगला हिस्सा पूरी तरह नष्ट हो गया।
बिना फिटनेस, इंश्योरेंस और परमिट के दौड़ रहा था ट्रक
इस हादसे के बाद जब नगर निगम के इस दुर्घटनाग्रस्त ट्रक के दस्तावेजों की जांच की गई, तो बेहद चौंकाने वाली और गंभीर लापरवाही उजागर हुई। ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार, इस सरकारी वाहन का न तो फिटनेस था, न इंश्योरेंस और न ही इसके पास वैध रोड परमिट था। रिकॉर्ड से पता चला है कि इस ट्रक का फिटनेस साल 2021 से और इंश्योरेंस साल 2019 से रिन्यू नहीं कराया गया था, जिससे सीधे तौर पर सड़क सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया है।
मंदिर प्रबंधन पर उठे सवाल, शंकराचार्य सदानंद ने जताई चिंता
22 Jun, 2026 03:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
छिंदवाड़ा: द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज के छिंदवाड़ा आगमन पर उनके अनुयायियों और बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान मीडिया और श्रद्धालुओं से चर्चा करते हुए शंकराचार्य ने देश के वर्तमान धार्मिक, प्रशासनिक और सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने अयोध्या राम मंदिर में सामने आए कथित दान चोरी मामले पर गहरा दुख प्रकट करने के साथ-साथ देश में बढ़ रहे धर्मांतरण के मामलों पर भी चिंता जताई और इसके स्थायी समाधान के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दों को निम्नलिखित तीन मुख्य शीर्षकों के तहत समझा जा सकता है:
राम मंदिर दान चोरी पर दुख और 'सनातन संरक्षण बोर्ड' का सुझाव
शंकराचार्य ने अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा किए गए कथित भ्रष्टाचार और दान राशि के दुरुपयोग को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और पीड़ादायक बताया। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु अपनी गाढ़ी कमाई और अगाध श्रद्धा के साथ मंदिरों में दान करते हैं, इसलिए उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ बिल्कुल नहीं होना चाहिए। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए उन्होंने देश के मंदिरों के संचालन और संरक्षण हेतु एक स्वतंत्र ‘सनातन संरक्षण बोर्ड’ या विशेषज्ञ समिति के गठन की मांग की, ताकि सरकारी नियंत्रण से इतर मंदिरों की व्यवस्था पारदर्शी बनी रहे।
सरकारी अधिकारियों की कार्यशैली और प्रशासनिक समझ पर सवाल
मंदिरों के प्रबंधन पर बात करते हुए उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को सनातन धर्म के विधि-विधान, पूजा-पद्धति, धार्मिक नैतिकता और आध्यात्मिक व्यवस्थाओं की पर्याप्त समझ नहीं होती है। उनका मानना है कि जो व्यक्ति जिस क्षेत्र का विशेषज्ञ होता है, वही उस कार्य को बेहतर ढंग से संभाल सकता है। इसलिए धार्मिक स्थलों का प्रबंधन प्रशासनिक अधिकारियों के बजाय धर्मशास्त्रों के ज्ञाताओं, अनुभवी संतों और विषय के विशेषज्ञों को ही सौंपा जाना चाहिए ताकि व्यवस्थाओं की पवित्रता और मर्यादा बनी रहे।
धर्मांतरण और 'लव जिहाद' को रोकने के लिए कड़े कानून की मांग
धर्मांतरण और 'लव जिहाद' जैसे मुद्दों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि किसी भी देश में 'संख्या बल' का बहुत बड़ा महत्व होता है, क्योंकि जिसकी संख्या अधिक होगी, वही देश पर शासन करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि एक सोची-समझी साजिश के तहत देश में इन गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है, जिस पर सरकार और समाज उतना ध्यान नहीं दे रहे हैं जितना जरूरी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इन राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को तत्काल रोकने के लिए कठोरतम कानून बनाकर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, जबकि संत समाज इस विषय में जनजागरण का कार्य लगातार कर रहा है।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की स्मृति में बूथ गौरव दिवस मनाएगी BJP
22 Jun, 2026 02:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: भारतीय जनता पार्टी ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 की ऐतिहासिक समाप्ति और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में एक राष्ट्रव्यापी महाअभियान चलाने का निर्णय लिया है। केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशानुसार, देश के अन्य हिस्सों के साथ-साथ मध्य प्रदेश में भी 23 जून से 6 जुलाई तक ‘डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी संस्मरण पखवाड़ा’ का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस व्यापक अभियान के सुचारू संचालन और जमीनी स्तर पर इसकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक उच्च स्तरीय केंद्रीय संचालन टोली का गठन किया गया है, जिसमें मध्य प्रदेश के भाजपा प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह को विशेष रूप से शामिल किया गया है, जो राज्य के सभी बूथ स्तरीय कार्यक्रमों की सीधे मॉनिटरिंग करेंगे।
बूथ स्तर पर वैचारिक व्याख्यान और गौरव दिवस का आयोजन
इस अभियान के तहत मध्य प्रदेश के सभी मतदान केंद्रों (बूथों) पर ‘बूथ गौरव दिवस’ मनाया जाएगा, जिसके अंतर्गत विशेष वैचारिक व्याख्यानों का आयोजन होगा। इसके साथ ही, प्रत्येक नगर और शहर के किसी प्रमुख चौराहे, उद्यान अथवा मार्ग का नामकरण डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर करने का निर्णय लिया गया है, जहां उनकी प्रतिमा या चित्र का अनावरण भी किया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कार्यकर्ताओं और आम जनता को डॉ. मुखर्जी के राष्ट्र निर्माण में योगदान और उनकी कश्मीर नीति से गहराई से अवगत कराना है, जिसमें जनसंपर्क और संगठनात्मक मजबूती पर विशेष जोर रहेगा।
जिला स्तर पर कार्यकर्ता सम्मेलन और धारा 370 पर बौद्धिक सत्र
पखवाड़े के दौरान मंडल और जिला स्तर पर विशेष बौद्धिक सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति के ऐतिहासिक सफर पर प्रकाश डाला जाएगा। इसके अलावा, प्रदेश के सभी जिलों में बड़े पैमाने पर कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इन सम्मेलनों में डॉ. मुखर्जी के सामाजिक एवं राजनीतिक योगदान, एक केंद्रीय मंत्री के रूप में उनकी दूरदर्शी कार्यशैली और भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में उनके ऐतिहासिक सफर पर केंद्रित विशेष व्याख्यान दिए जाएंगे, ताकि पार्टी की मूल विचारधारा को पुनर्जीवित किया जा सके।
शैक्षणिक परिसरों के बाहर छात्र सम्मेलन और सुदृढ़ संगठनात्मक ढांचा
नई पीढ़ी और युवाओं को भाजपा की राष्ट्रवादी विचारधारा से जोड़ने के लिए प्रदेश के प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों के बाहर विशेष छात्र सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। केंद्रीय दिशा-निर्देशों के अनुसार, ये कार्यक्रम पूरी तरह से शैक्षणिक परिसरों के बाहर आयोजित होंगे। इस पूरे अभियान को व्यवस्थित ढंग से क्रियान्वित करने के लिए एक मजबूत संगठनात्मक ढांचा तैयार किया गया है, जिसके तहत प्रदेश स्तर पर एक वरिष्ठ कार्यकर्ता की कमान में 5 सदस्यीय टोली, प्रत्येक जिले में 4 सदस्यीय टोली और मंडल स्तर पर 3 सदस्यीय टोली काम करेगी। अभियान की सफलता के लिए प्रदेश और जिला स्तर पर वर्चुअल व फिजिकल बैठकें आयोजित कर सभी पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों और संगठन महामंत्रियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
मयंक साहू मर्डर केस के मुख्य आरोपी यश सोनी सहित दो गिरफ्तार, पुलिस ने कसा शिकंजा
22 Jun, 2026 01:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सागर। मोतीनगर थाना क्षेत्र के चर्चित मयंक साहू मर्डर केस में कानून व्यवस्था को एक बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस की विशेष टीमों ने कई राज्यों में सघन तलाशी अभियान चलाने के बाद 10-10 हजार रुपये के दो इनामी अपराधियों को धर दबोचा है। गिरफ्तार किए गए बदमाशों में वारदात का मुख्य सूत्रधार यश सोनी और उसका करीबी सहयोगी मनु सोनी शामिल हैं। इस पूरे हत्याकांड में पुलिस अब तक सात आरोपियों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा चुकी है, जबकि उनका एक अन्य साथी ओम अहिरवार अब भी कानून की गिरफ्त से बाहर है।
पुरानी दुश्मनी के कारण सरेआम की थी अंधाधुंध गोलाबारी
पुलिस प्रशासन ने मामले का पटाक्षेप करते हुए बताया कि 21 मई 2026 की रात विवेकानंद वार्ड के मछरयाई इलाके में स्थित गोंड बब्बा चबूतरा के पास पुरानी रंजिश के चलते दो पक्षों में हिंसक झड़प हुई थी। इस दौरान आरोपियों ने शिकायतकर्ता ओम साहू और उनके भाई मयंक साहू के साथ न केवल दुर्व्यवहार किया, बल्कि उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। इस हमले में गंभीर रूप से घायल मयंक साहू ने अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था, वहीं ओम साहू पर चाकू से जानलेवा वार किया गया था। इस खूनी खेल के बाद पुलिस ने हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा कायम किया था।
चार राज्यों में बदले ठिकाने और रेलवे आउटर पर बिछाया गया जाल
वारदात को अंजाम देने के बाद से ही दोनों शातिर अपराधी पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहे थे। वे कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए गुजरात, दिल्ली, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश के इंदौर व कटनी जैसे शहरों में लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे थे। आरोपियों की इस लुका-छिपी को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने उन पर इनाम घोषित किया था। अंततः साइबर सेल की तकनीकी मदद से 19 जून की रात पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी पैसों की व्यवस्था करने सागर आ रहे हैं। इस सटीक सूचना पर बम्हौरी रेंगुवा रेलवे आउटर पर घेराबंदी कर मनु सोनी को दबोच लिया गया, वहीं मुख्य आरोपी यश सोनी को उत्तर प्रदेश के ललितपुर से गिरफ्तार कर वारदात में इस्तेमाल कट्टा बरामद किया गया।
एमडी ड्रग्स की बरामदगी और सोशल मीडिया पर दहशत फैलाने का खेल
पकड़े गए अपराधियों का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड बेहद खूंखार रहा है। आरोपी मनु सोनी के खिलाफ हत्या, डकैती और जानलेवा हमले जैसे करीब 25 गंभीर मुकदमे पहले से दर्ज हैं। गिरफ्तारी के दौरान तलाशी लेने पर उसके पास से 20 ग्राम अवैध एमडी ड्रग्स भी मिली, जिसके कारण उस पर एनडीपीएस एक्ट के तहत एक और केस दर्ज किया गया है। मुख्य आरोपी यश सोनी पर भी 8 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसी बीच, सोशल मीडिया पर चर्चा बटोरने के लिए एक नाबालिग लड़के ने आरोपियों के नाम से किसी अन्य व्यक्ति को जान से मारने की धमकी भरा संदेश फैलाकर शहर में डर का माहौल बनाने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस जांच में यह केवल पब्लिसिटी स्टंट निकला। फिलहाल पुलिस अंतिम फरार आरोपी की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।
UCC को लेकर सरकार का अगला कदम, भोपाल बैठक के बाद मानसून सत्र में आ सकता है बिल
22 Jun, 2026 11:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को अमलीजामा पहनाने के लिहाज से सोमवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण साबित होने जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में गठित उच्च स्तरीय समिति आज भोपाल में राजनीतिक दलों के नेताओं, धार्मिक गुरुओं, विभिन्न सामाजिक आयोगों के डेलीगेट्स और आला प्रशासनिक अफसरों के साथ मैराथन बैठक करेगी। इस व्यापक विचार-विमर्श के बाद यूसीसी का अंतिम ड्राफ्ट तैयार कर राज्य सरकार को सुपुर्द किए जाने की प्रबल संभावना है। भोपाल की नरोन्हा प्रशासनिक अकादमी में सुबह से लेकर शाम तक चलने वाले इस मंथन में महिला, बाल, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक आयोग समेत कई अहम संस्थाओं के प्रतिनिधि अपनी राय रखेंगे। दोपहर के सत्र में विभिन्न राजनीतिक दलों और शाम को धार्मिक नेताओं के साथ संवाद का कार्यक्रम तय किया गया है।
प्रशासनिक तंत्र से फीडबैक और लाखों सुझावों का विश्लेषण
इस महामंथन के लिए समिति ने शासन के सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अफसरों को भी तलब किया है। बैठक में गृह विभाग कानून-व्यवस्था और इसके प्रशासनिक पक्षों पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन देगा, जबकि अन्य महकमे अपने-अपने कार्यक्षेत्र से जुड़े तकनीकी सुझाव समिति के सामने रखेंगे। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, समिति को ऑनलाइन पोर्टल, जनसुनवाई और विभिन्न अन्य स्रोतों के जरिए लगभग दो से ढाई लाख से अधिक सुझाव मिले हैं। विशेषज्ञ इन सभी इनपुट्स का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं ताकि नए कानून के प्रारूप में हर वर्ग की चिंताओं और उनके हितों का पूरा ख्याल रखा जा सके।
मंत्रिमंडल की हरी झंडी के बाद मानसून सत्र में आएगा बिल
समिति की ओर से रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद मुख्य सचिव अनुराग जैन की कप्तानी वाली वरिष्ठ सचिवों की कमेटी इस पूरे ड्राफ्ट का परीक्षण करेगी। वहां से पास होने के बाद इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। मंत्रिमंडल की मुहर लगते ही इसे 20 जुलाई से प्रस्तावित मध्य प्रदेश विधानसभा के आगामी मानसून सत्र के दौरान सदन के पटल पर विधिवत चर्चा और पारित होने के लिए पेश किया जा सकता है।
जनता से संवाद की लंबी प्रक्रिया का आखिरी और निर्णायक दौर
राज्य सरकार यूसीसी के संवेदनशील मसौदे को लेकर पिछले काफी समय से हर स्तर पर जनपरामर्श का अभियान चला रही है। इस कवायद के तहत आम जनता से लेकर कानूनविदों, बुद्धिजीवियों, गैर-सरकारी संगठनों, जन-प्रतिनिधियों और विभिन्न संप्रदायों के प्रमुखों से फीडबैक जुटाया गया है। सोमवार को राजधानी में हो रही इस उच्च स्तरीय बैठक को इस पूरी जनपरामर्श प्रक्रिया का अंतिम और सबसे निर्णायक पड़ाव माना जा रहा है, जिसके बाद सूबे में नए कानून की रूपरेखा पूरी तरह साफ हो जाएगी।
मरीजों के लिए बड़ी राहत, QR स्कैन करते ही उपलब्ध होगी मेडिकल हिस्ट्री
22 Jun, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी को स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में देश का सबसे आधुनिक और पहला ‘मॉडल डिजिटल हेल्थ डिस्ट्रिक्ट’ बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग चिकित्सा और उपचार की पूरी प्रक्रिया को बेहद सुगम, त्वरित और आधुनिक तकनीक से लैस करने के लिए एक वृहद कार्ययोजना पर काम कर रहा है। इसके अंतर्गत जिले के सभी शासकीय अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और लगभग 3000 निजी (प्राइवेट) चिकित्सालयों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा। इस एकीकृत नेटवर्क के तैयार होने से जहां आम मरीजों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, वहीं डॉक्टरों को भी एक क्लिक पर संबंधित मरीज की पुरानी बीमारी और उपचार (मेडिकल हिस्ट्री) की सटीक जानकारी मिल सकेगी।
चार महीने का विशेष एक्शन प्लान: अब पर्चों और फाइलों से मिलेगी मुक्ति
इस महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य परियोजना के लागू होते ही पूरा हेल्थ केयर सिस्टम डिजिटल और पूरी तरह पेपरलेस हो जाएगा। इस व्यवस्था को धरातल पर उतारने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 4 महीनों का एक कड़ा 'एक्शन प्लान' तैयार किया है, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
डिजिटल क्षमता का ऑडिट: जिले के सभी छोटे-बड़े अस्पतालों की तकनीकी और डिजिटल अवसंरचना की जांच की जाएगी, ताकि कमियों को दूर कर उन्हें नए सिस्टम के अनुकूल बनाया जा सके।
अस्पतालों और डॉक्टरों का डिजिटल पंजीयन: जिले के हर रजिस्टर्ड डॉक्टर और अस्पताल की एक विशिष्ट डिजिटल आईडी (पहचान) तैयार की जाएगी। इसके साथ ही 'हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम' (HMIS) को अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा।
विशेष ट्रेनिंग सत्र: डॉक्टरों, कंपाउंडरों और पैरामेडिकल स्टाफ को डिजिटल पर्चे (प्रिस्क्रिप्शन) लिखने और ऑनलाइन जांच रिपोर्ट तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
आभा (ABHA) नंबर से एंट्री: मरीजों को अस्पताल आते समय भारी-भरकम फाइलें लाने की आवश्यकता नहीं होगी। वे केवल अपने 'आभा नंबर' (Ayushman Bharat Health Account) के जरिए सीधे डॉक्टर से परामर्श ले सकेंगे, जिससे रजिस्ट्रेशन काउंटरों पर लगने वाली लंबी कतारें पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी।
क्यूआर कोड और मिस्ड कॉल से मिलेगा टोकन, कम होगी मेडिक्लेम की धोखाधड़ी
इस डिजिटल क्रांतिकारी बदलाव से आम नागरिकों और चिकित्सा प्रणाली को कई प्रत्यक्ष लाभ मिलेंगे:
स्मार्ट टोकन सिस्टम: मरीजों को अब ओपीडी पर्ची के लिए घंटों इंतजार नहीं करना होगा। अस्पताल परिसर में लगे क्यूआर (QR) कोड को स्कैन करने या निर्धारित नंबर पर मिस्ड कॉल देते ही मरीज की बुनियादी जानकारी सीधे संबंधित डॉक्टर के कंप्यूटर स्क्रीन पर पहुंच जाएगी और मरीज के मोबाइल पर टोकन नंबर आ जाएगा।
फर्जीवाड़े पर रोक: पूरी उपचार प्रक्रिया के डिजिटल डेटाबेस में दर्ज होने के कारण स्वास्थ्य बीमा (मेडिक्लेम) के दावों में होने वाली वित्तीय हेराफेरी, फर्जी बिलिंग और गड़बड़ियों पर पूरी तरह लगाम लगेगी।
डिजिटल फार्मेसी: डॉक्टर द्वारा केबिन से जनरेट किया गया डिजिटल पर्चा सीधे अस्पताल के मेडिकल स्टोर या फार्मेसी काउंटर पर ट्रांसफर हो जाएगा, जिससे मरीज को बिना किसी मानवीय चूक के सही दवाएं तुरंत मिल सकेंगी।
एमपी में मानसून की दस्तक पर सस्पेंस, मौसम विभाग ने जारी किया पूर्वानुमान
22 Jun, 2026 07:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश के नागरिकों और विशेषकर किसानों को मानसून की फुहारों के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा। इस बार मानसूनी हवाएं अपने निर्धारित समय यानी 15 जून से करीब सात दिन पिछड़ चुकी हैं। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मानसूनी सिस्टम फिलहाल तेलंगाना क्षेत्र में अटका हुआ है, जिसके चलते मध्य प्रदेश तक इसके पहुंचने की गति धीमी हो गई है। हालांकि, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का अनुमान है कि आगामी चार दिनों के भीतर स्थितियां अनुकूल होंगी और राज्य में मानसून की सक्रिय दस्तक हो सकती है।
आखिर क्यों अटक गया मानसून?
सामान्य तौर पर मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में 15 जून या उसके आस-पास मानसूनी सीजन शुरू हो जाता है। लेकिन इस बार 22 जून की तारीख बीत जाने के बाद भी बादलों का स्थायी डेरा नजर नहीं आ रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून को गति देने और मजबूत बनाने वाले मौसमी सिस्टम इस समय कमजोर पड़ गए हैं।
यही वजह है कि मानसून की आगे बढ़ने की रफ्तार थम गई है और वह बीते 8 जून से एक ही भौगोलिक क्षेत्र में स्थिर बना हुआ है। बीते वर्ष 2025 की स्थिति देखें तो 16 जून को ही मानसून ने प्रदेश की सीमाओं में प्रवेश कर लिया था। वर्तमान पूर्वानुमानों के अनुसार, मानसूनी हवाएं 23 जून को पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में प्रवेश करेंगी, जिसके दो दिन बाद यानी 25 जून तक मध्य प्रदेश में इसके पहुंचने की प्रबल संभावना है।
देरी से बदला मौसम का गणित, बारिश के ग्राफ में भारी गिरावट
समय पर मानसूनी सिस्टम सक्रिय न होने के कारण प्रदेश में प्री-मानसून और मौसमी बारिश के आंकड़ों में भारी कमी दर्ज की गई है। मौसम केंद्र के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार:
औसत में गिरावट: इस चालू सीजन में मध्य प्रदेश में अब तक कोटे की तुलना में केवल 48 प्रतिशत ही वर्षा दर्ज की गई है।
पूर्वी अंचल में सूखा: जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के अंतर्गत आने वाले 24 जिलों में सामान्य से 69 फीसदी कम पानी बरसा है।
पश्चिमी और मध्य क्षेत्र की स्थिति: भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभागों में वर्षा की कमी का यह आंकड़ा लगभग 24 प्रतिशत के स्तर पर बना हुआ है।
इन जिलों के लिए मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी
भले ही मानसून के आगमन में देरी हो रही है, लेकिन स्थानीय चक्रवातीय सिस्टम के कारण प्रदेश के विभिन्न अंचलों में तेज आंधी और गरज-चमक के साथ खंड वर्षा का दौर जारी है।
बीते रविवार (21 जून) को राजधानी भोपाल, सतना, जबलपुर सहित छतरपुर जिले के खजुराहो, नौगांव और सिवनी में झमाझम बौछारें पड़ीं, जिससे लोगों को भीषण उमस से कुछ राहत मिली। मौसम केंद्र ने आगामी 24 से 48 घंटों के भीतर झाबुआ, आलीराजपुर, रीवा, सतना, शहडोल, अनूपपुर, कटनी और दमोह जिलों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की चेतावनी (alert) जारी की है।
भारतीय संस्कृति, परंपरा और भाषाओं के प्रति सम्मान का भाव विकसित करना विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी : राष्ट्रपति मुर्मु
21 Jun, 2026 11:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि शिक्षण संस्थान केवल डिग्री देने के केंद्र नहीं, बल्कि नवाचार, अनुसंधान, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और रचनात्मक सोच के विकास के प्रमुख केंद्र होते हैं। विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, परंपरा और भाषाओं के प्रति सम्मान का भाव विकसित करना भी विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। आधुनिकता और परंपरा के संतुलन से ही देश का समग्र विकास संभव है। राष्ट्र्पति मुर्मु रविवार को जबलपुर में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहीं थी।
इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मु ने विभिन्न संकायों में एक से अधिक स्वर्ण पदक अर्जित करने वाले 20 छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किये और उपाधियों का वितरण किया। कार्यक्रम में विश्व्विद्यालय के 141 विद्यार्थियों को 240 स्वर्ण पदकों का वितरण किया गया। साथ ही 182 शोधार्थियों को पीएचडी सहित विभिन्न उपाधियां प्रदान की। महामहिम राष्ट्रपति मुर्मु ने विश्विविद्यालय परिसर स्थित वीरांगना रानी दुर्गावती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि भी अर्पित की।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि जबलपुर विश्वविद्यालय का नाम वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर होना गर्व का विषय है। रानी दुर्गावती वीरता, साहस, शौर्य और पराक्रम की प्रतिमूर्ति थीं और नारी शक्ति के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत रहेंगी। उन्होंने महान वीरांगना की स्मृति को नमन करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय से जुड़े विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों को जनजातीय समाज, वंचित वर्गों तथा विशेषकर बेटियों के सशक्तिकरण के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय जिस क्षेत्र में स्थित है, वहां जनजातीय और वनवासी संस्कृति की समृद्ध उपस्थिति है। ऐसे में यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं का दायित्व केवल अपने करियर तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें अपने समाज और गांवों तक पहुंचकर वहां के लोगों का मार्गदर्शन भी करना चाहिए।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि सरकार जनजातीय और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं चला रही है। कई बार लोगों को इन योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ लेने की प्रक्रिया का पता नहीं होता। ऐसे में शिक्षित युवाओं, विशेषकर जनजातीय समाज से आगे बढ़े युवक-युवतियों का कर्तव्य है कि वे अपने समाज के बीच जाकर लोगों को मार्गदर्शन दें। उन्होंने कहा कि विकसित भारत@2047 का सपना तभी साकार होगा, जब समाज के अंतिम व्यक्ति और पिछड़े समुदायों को भी विकास की मुख्यधारा में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की पहचान, संस्कृति, परंपरा और अस्मिता को बनाए रखना उतना ही आवश्यक है, जितना आधुनिक विकास में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना। जनजातीय समाज के कौशल, पारंपरिक ज्ञान और शिल्प को आधुनिक शिक्षा, नवाचार और शोध से जोड़ने की आवश्यकता है। इस दिशा में विश्वविद्यालयों और अन्य शिक्षण संस्थानों को विशेष प्रयास करने चाहिए, जिससे जनजातीय ज्ञान परंपरा का व्यवस्थित अध्ययन हो सके और उसका लाभ व्यापक समाज तक पहुंचे।
राष्ट्रपति मुर्मु ने विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रमों में समाहित करने, नवाचार को प्रोत्साहन देने तथा डिजाइन इनोवेशन सेंटर के माध्यम से पेटेंट प्राप्त करने जैसे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में बेटियों की संख्या अधिक है, जो महिला सशक्तिकरण और बदलते भारत की सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करती है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि आज का भारत युवाओं का भारत है और देश को उनसे बड़ी अपेक्षाएं हैं। केंद्र और राज्य सरकारें युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। विश्वविद्यालयों को चाहिए कि वे शिक्षा, शोध, नवाचार और कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर और राष्ट्र निर्माण के लिए सक्षम बनाएं। उन्होंने कहा कि आज विश्व तेजी से बदल रहा है और जीवनशैली में भी तीव्र परिवर्तन आ रहा है, लेकिन इस बदलते दौर में भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों को नहीं भूलना चाहिए। देश के युवाओं को भारत के सांस्कृतिक मूल्यों और आदर्शों को अपने जीवन का आधार बनाना चाहिए। सत्य, अहिंसा, करुणा, सेवा और ईमानदारी जैसे मूल्य भारतीय चेतना का अभिन्न हिस्सा हैं। इन मूल्यों को जीवन में अपनाकर युवा न केवल कठिन परिस्थितियों का दृढ़ता से सामना कर सकते हैं, बल्कि आदर्श नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
राष्ट्रपति मुर्मु ने विद्यार्थियों से कहा कि उनकी जिम्मेदारियां केवल परिवार या विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं हैं। वे राष्ट्र की आकांक्षाओं और भविष्य के निर्माता हैं। युवाओं के कंधों पर देश का भविष्य टिका है और उनके ज्ञान, ऊर्जा तथा संकल्प से विकसित भारत का सपना साकार होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखते हुए समाज के व्यापक कल्याण के लिए भी करें।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि शिक्षित युवा अपने आसपास के वंचित, ग्रामीण और जनजातीय समुदायों की समस्याओं को समझें, उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करें और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि आज जो विद्यार्थी विश्वविद्यालय से निकल रहे हैं, वे भविष्य में अधिकारी, प्रोफेसर, वैज्ञानिक, शोधकर्ता और विभिन्न क्षेत्रों के नेतृत्वकर्ता बनेंगे। ऐसे में उनका दायित्व और भी बढ़ जाता है कि वे समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्य करें।
रानी दुर्गावती आज भी जनजातीय समुदाय सहित देश की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का केंद्र
राज्यपाल एवं कुलाधिपति मंगुभाई पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह का राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के मुख्य आतिथ्य में संपन्न होना हम सभी के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। उन्होंने अमर वीरांगना महारानी रानी दुर्गावती को नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन जनजातीय अस्मिता, प्रजा कल्याण, नारी शक्ति, त्याग, पराक्रम, नेतृत्व क्षमता और आत्मगौरव का अमर संदेश है। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती आज भी जनजातीय समुदाय सहित देश की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का केंद्र हैं।
राज्यपाल पटेल ने दीक्षांत समारोह में उपस्थित छात्र-छात्राओं से कहा कि उनकी डिग्री केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि विकसित भारत के निर्माण, नवाचार और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य को आकार देने वाली शक्ति है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे रानी दुर्गावती सहित देश के महान जननायकों के शौर्य, लोककल्याण और संघर्षपूर्ण जीवन से प्रेरणा लेकर समाज के प्रति अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करें। उन्होंने प्रत्येक विश्वविद्यालय से 5-5 पिछड़े ग्रामों को गोद लेने का आग्रह करते हुए कहा कि विद्यार्थी स्वयं इन ग्रामों में जाकर वहाँ की परिस्थितियों को समझें और अनुभव करें कि जनजातीय समाज और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए किन-किन क्षेत्रों में कार्य करने की आवश्यकता है। इससे विद्यार्थियों में समाज सेवा की भावना, संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व का विकास होगा।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि केंद्र सरकार की अनेक जनकल्याणकारी योजनाएँ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के उद्देश्य से संचालित की जा रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से पीएम जनमन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अत्यंत पिछड़े जनजातीय समुदायों, विशेषकर बैगा, भारिया और सहरिया समाज के उत्थान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में ऐसे लाखों लोग निवास करते हैं और उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने विशेष प्रावधान किए हैं। उन्होंने धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना सहित विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके लिए हजारों करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने क्षेत्र और तहसीलों का ऐसा विकास मानचित्र तैयार करने में सहयोग करें, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि जनजातीय विकास एवं बुनियादी सुविधाओं से संबंधित कौन-कौन से कार्य अभी शेष हैं। इससे प्रत्येक गरीब और जरूरतमंद जनजातीय परिवार तक शासन की योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से पहुँचाया जा सकेगा।
राज्यपाल पटेल ने विद्यार्थियों से कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें संस्कार दिए, उनका पालन-पोषण किया और विश्वविद्यालय ने उन्हें शिक्षा एवं आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया है। अब उनकी जिम्मेदारी है कि वे अपनी जड़ों और समाज को कभी न भूलें तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएँ। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यार्थी अपने जीवन में सफलता प्राप्त करने के साथ-साथ समाज के लिए भी उपयोगी सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थियों के जीवन का एक नया अध्याय प्रारंभ हो रहा है, तब समय की मांग है कि वे महारानी रानी दुर्गावती से मिली प्रेरणा को अपने जीवन में आत्मसात करें और लोकतांत्रिक मूल्यों, नारी सशक्तिकरण तथा विकसित भारत के संकल्प को अपना जीवन ध्येय बनाकर राष्ट्र की उन्नति में अपना श्रेष्ठ योगदान दें।
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में प्राप्त करेगा नई ऊंचाइयां : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी उपस्थिति ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह को और अधिक गौरवशाली बना दिया है। यह अवसर न केवल विश्वविद्यालय बल्कि सम्पूर्ण मध्यप्रदेश के लिए गर्व और गौरव का विषय है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय केवल उच्च शिक्षा का संस्थान नहीं है। यह वीरता, स्वाभिमान और बलिदान की उस गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है, जिसे अमर वीरांगना रानी दुर्गावती ने अपने साहस और अदम्य पराक्रम से स्थापित किया। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती ने मुगल सम्राट अकबर की विशाल सेना के विरुद्ध अनेक युद्ध लड़कर अपनी असाधारण वीरता का परिचय दिया और मातृभूमि की स्वतंत्रता तथा सम्मान की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देकर आने वाली पीढ़ियों के लिए अमर प्रेरणा का उदाहरण प्रस्तुत किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। यहां से निकलने वाली प्रतिभाएं देश और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगी। उन्होंने कहा कि आज विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं अपनी प्रतिभा और उत्कृष्ट प्रदर्शन से प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित कर रहे हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अनेक विद्यार्थियों द्वारा एक से अधिक स्वर्ण पदक अर्जित करना प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रमाण है। विशेष रूप से छात्राओं की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि बेटियों की सफलता न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज और प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है और मध्यप्रदेश भी शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में उच्च शिक्षा की सकल नामांकन दर राष्ट्रीय औसत से अधिक होकर 28.9 प्रतिशत तक पहुंच गई है। स्कूल शिक्षा में ड्रॉपआउट दर को शून्य के करीब लाने के प्रयास सफल रहे हैं। प्रदेश सरकार ने तीन नए शासकीय विश्वविद्यालयों की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को गुणवत्तापूर्ण, तकनीकी एवं रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कृषि प्रधान राज्य होने से प्रदेश में किसान कल्यारण वर्ष अंतर्गत कृषि एवं व्यावसायिक शिक्षा के साथ ही नवाचार आधारित अध्ययन को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे युवा आधुनिक तकनीक के माध्यम से आत्मनिर्भर बन सकें और राष्ट्र निर्माण में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकें।
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके पश्चात कुलगुरु प्रो. डॉ. राजेश कुमार वर्मा ने स्मृति चिन्ह भेंट कर राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री का स्वागत किया। स्वागत भाषण में कुलगुरु डॉ. वर्मा ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय ने पहली बार एनएएसी से A+ ग्रेड प्राप्त किया है, जो संस्थान के लिए गौरव का विषय है। स्वर्ण पदक धारकों एवं उपाधि प्राप्तकर्ताओं का राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री के साथ संयुक्त छायाचित्र समारोह का विशेष आकर्षण रहा। विद्यार्थियों ने इसे अपने जीवन की अविस्मरणीय उपलब्धि बताया।
कार्यक्रम में उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार, राज्य सभा सांसद सुमित्रा वाल्मीक, सांसद आशीष दुबे, महापौर जगत बहादुर सिंह, विधायक सर्वअशोक रोहाणी, डॉ. अभिलाष पांडे, नीरज सिंह, संतोष बरकड़े, लखन घनघोरिया, अखिलेश जैन, संभागायुक्त धनंजय सिंह, कलेक्टार राघवेन्द्र सिंह, पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर 15 हजार से अधिक श्रमिकों ने किया सामूहिक योगाभ्यास
21 Jun, 2026 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : श्रम और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने प्रदेश के श्रमिकों के कल्याण और उनके उत्तम स्वास्थ्य के लिए उन्हें योग से जुड़ने का विशेष आह्वान किया था। मंत्री पटेल के इस प्रेरक आह्वान का असर पूरे प्रदेश में देखने को मिला! अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर राज्य के औद्योगिक और विभिन्न कार्यक्षेत्रों में श्रमिकों ने बढ़-चढ़कर योगाभ्यास किया। प्रदेश के कुल 337 संस्थानों में 15 हजार से अधिक श्रमिकों ने सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन शैली अपनाने और योग को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।
सचिव श्रम रघुराज राजेंद्रन ने कहा कि योग किसी एक दिवस तक सीमित न होकर, श्रमिकों के दैनिक जीवन का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि श्रमिक प्रतिदिन योग से जुड़ें, जिससे वे शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ रह सकें। एक स्वस्थ और ऊर्जावान श्रमिक ही आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण और प्रदेश के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
श्रम विभाग और मध्यप्रदेश श्रम कल्याण मंडल के प्रयासों से आयोजित इस प्रदेश स्तरीय योग कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों ने भी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई। श्रम मंत्री पटेल ने स्वयं जबलपुर में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में उपस्थित होकर श्रमिकों के साथ योग किया। इसी क्रम में, श्रम आयुक्त संदीप जी आर ने इंदौर के एमराल्ड हाइट्स स्कूल में आयोजित मंडल के विशेष कार्यक्रम में भाग लिया। प्रदेश के अलग-अलग अंचलों से प्राप्त तस्वीरों और जानकारियों के अनुसार, सभी वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होकर श्रमिकों का उत्साहवर्धन किया।
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