राजनीति
‘मायावती को दीं गालियां, दलित लड़कियों का शोषण किया’; चंद्रशेखर रावण पर रोहिणी घावरी ने लगाए गंभीर आरोप
11 Oct, 2025 02:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इंदौर। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की नगीना लोकसभा सीट (Nagina Lok Sabha Seat) से सांसद और भीम आर्मी (Bhim Army) के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) पर इंदौर (Indore) की पीएचडी स्कॉलर डॉ. रोहिणी घावरी (Dr. Rohini Ghavri) ने उत्पीड़न, धोखेबाजी और कई दलित लड़कियों के शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। डॉ. रोहिणी का कहना है कि चंद्रशेखर ने शादी का झांसा देकर उनके साथ व्यक्तिगत संबंध बनाए और उन्हें धोखे में रखा। उन्होंने यह भी दावा किया है कि उनके पास चंद्रशेखर के खिलाफ वीडियो के रूप में पुख्ता सबूत हैं, जिसमें वे बहुजन समाज पार्टी और इसकी सुप्रीमो मायावती के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
डॉ. रोहिणी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि वह जून से ही चंद्रशेखर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश कर रही हैं। दिल्ली पुलिस द्वारा सुनवाई न किए जाने पर उन्होंने वकील की सलाह पर दिल्ली की एक अदालत में याचिका दायर की है। उन्होंने उन आरोपों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा है कि वह किसी राजनीतिक दल के इशारे पर यह सब कर रही हैं। रोहिणी ने कहा, “मेरी लड़ाई किसी पार्टी के लिए नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ है। अगर किसी को लगता है कि मैं किसी के कहने पर काम कर रही हूं, तो वे इसे सबूतों के साथ समाज के सामने साबित करें।”
रोहिणी ने दावा किया कि चंद्रशेखर ने उनके अलावा भी कई दलित लड़कियों का शोषण किया है। उन्होंने कहा, “मेरी कुछ ऐसी लड़कियों से बात हुई है, जिन्हें मेरी तरह ही शादी का झांसा देकर रिश्ते में रखा गया और बाद में छोड़ दिया गया।” उन्होंने 2017 के एक मामले का भी जिक्र किया, जिसमें सहारनपुर की एक जाटव लड़की ने चंद्रशेखर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी, लेकिन गरीब होने के कारण उसकी आवाज दबा दी गई।
डॉ. घावरी ने चंद्रशेखर की शादी को लेकर भी चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने बताया कि चंद्रशेखर ने अपनी शादी की बात छिपाई थी और इसे एक ‘कॉन्ट्रैक्चुअल मैरिज’ बताया था, जिससे वह जल्द छुटकारा पाना चाहते थे। रोहिणी के अनुसार, चंद्रशेखर की मां ने भी एक इंटरव्यू में कहा था कि उनके बेटे की शादी नहीं हुई है, जबकि चंद्रशेखर को एक बेटा भी है।
रोहिणी ने यह भी आरोप लगाया कि चंद्रशेखर ने बसपा सुप्रीमो मायावती के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा, “मेरे पास ऐसे वीडियो हैं, जिन्हें मैं जांच एजेंसियों को देने के लिए तैयार हूं। वह (चंद्रशेखर) नहीं चाहते थे कि कोई और दलित लीडरशिप में आगे बढ़े और इसीलिए वे मायावती जी की छवि खराब करने की कोशिश करते थे।”
‘सुसाइड करने के लिए उकसाया’, रोहिणी घावरी का सांसद चंद्रशेखर पर गंभीर आरोप, कहा- मायावती को बोले अपशब्द
11 Oct, 2025 01:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नगीना । उत्तर प्रदेश के नगीना लोकसभा सीट से सांसद चंद्रशेखर पर पीएचडी स्कॉलर रोहिणी घावरी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा करते हुए कहा है कि पहले मुझे इमोशनल लेवल पर ब्लैकमेल करने की कोशिश की। इसके बाद यूनाइटेड स्टेट्स (UN) में फर्जी केस करके करियर खत्म करने की कोशिश की। जब मुझे क्लीनचिट मिली तो पॉलिटिकव पॉवर का रौब जताने लगा। उन्होंने आगे बताया कि सांसद ने उनसे कहा कि अब मैं सांसद हूं, जो करते बने कर लो।
‘सुसाइड करने के लिए उकसाया’
रोहिणी घावरी ने इंटरव्यू में दावा किया है कि सांसद चंद्रशेखर, उनसे रिश्ते के लिए गिड़गिड़ाते थे। कहते थे कि तुम्हारे बिना जिंदा नहीं रहूंगा, मर जाऊंगा। ये वही इंसान है जो सुसाइड के लिए उकसा रहा था और 2022 में हमारे रिश्ते के लिए गिड़गिड़ा रहा था। उन्होंने आगे कहा कि कहती थी कि मैं सुसाइड कर लूंगी तो वह कहते हैं कि तुम्हारी मौत ऐसे ही होनी है तो यही सही। तुम्हारी मौत पर कोई कंट्रोल नहीं है।
पहले तलाक की हामी, बाद में मुकरे
घावरी ने दावा करते हुए कहा कि पहले सांसद चंद्रशेखर ने अपनी पत्नी से तलाक लेने की बात कही, बाद में इससे मुकर गए. उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर ने ये भी कहा था कि उनकी शादी एक समझौता है। ये ब्लैकमेल करके हुई है. लड़की शादी से पहले गर्भवती हो गई और एफआईआर करने जा रही थी। इस वजह से शादी करनी पड़ी। मैं पत्नी से बहुत नफरत करता हूं। मेरी चंद्रशेखर की मां से भी बात हुई लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा. रोहिणी ने आगे कहा कि उसने तलाक के लिए वादा किया था। ये भी कहा था कि इसके लिए वकील से बात कर ली है। पत्नी को इस बारे में बता दिया है कि अब तुम्हारे साथ नहीं रह पाऊंगा। रोहिणी से ही शादी करूंगा। फिर एक दिन कहने लगा कि पत्नी ब्लैकमेल कर रही है, छोड़ने पर सारे राज बात देगी। कह रही है कि शब्बीरपुर कांड का राज बता दूंगी।
रिश्ता खत्म करने की बात की
रोहिणी घावरी ने बताया कि चंद्रशेखर सांसद बनने के बाद सितंबर 2024 में ऑस्ट्रिया आया। यहां उसने मुझे बुलाया और रिश्ता खत्म करने की बात कहने लगा। उसने कहा कि मुझे समाज के लिए काम करना है। मारी जातियां अलग हैं. तुम वाल्मीकि हो और मैं जाटव हूं। अब ये रिश्ता यहीं खत्म करना होगा। उन्होंने बोला कि मैंने सवाल किया कि आपने तो कहा था कि एक बार सांसद बन जाऊंगा तो फिर हमारे रिश्ते पर कोई उंगली नहीं उठाएगा। हमारी शादी से दोनों कम्युनिटी के बीच यूनिटी बनेगी। हम मिलकर काम करेंगे. हमारी जोड़ी कांशीराम-मायावती जैसी है। अब सांसद बनकर आपकी राय बदल गई। उन्होंने कहा कि तब तक मुझे समझा आया कि चंद्रशेखर ने मुझे टूल की तरह इस्तेमाल किया।
कफ सिरप से बच्चों की मौत पर जीतू पटवारी ने साधा निशाना, बोले- सरकार को पहले से थी जानकारी, फिर भी नहीं की कार्रवाई
11 Oct, 2025 01:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश में कफ सिरप से अब तक 23 मासूमों की मौत हो चुकी है. इन बच्चों की मौत के मामले में मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने भारत सरकार की मेट्रोपॉलिटन सर्विलांस यूनिट (MSU) की रिपोर्ट दिखाकर कहा कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों को पहले से इसकी जानकारी थी, फिर भी कार्रवाई नहीं की गई।
सरकार को पहले से थी जानकारी – जीतू पटवारी
जीतू पटवारी ने कहा कि 19 सितंबर को भारत सरकार की मेट्रोपॉलिटन सर्विलांस यूनिट (MSU), नागपुर ने सरकार को जानकारी दी थी कि एक संदिग्ध बीमारी के तहत बच्चों की मौत हो रही है। इसके बाद केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार को इस मामले की पूरी जानकारी मिल गई थी, लेकिन फिर भी सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और बच्चों की मौतें होती रहीं। पटवारी ने कहा कि MSU की रिपोर्ट के अनुसार, नागपुर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती छिंदवाड़ा के बच्चों की संदिग्ध एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) से मौत हो रही थी। उन्होंने कहा कि मेरे पास जो रिपोर्ट है, वह भारत सरकार का सरकारी दस्तावेज है, यह मेरा निजी आरोप नहीं है। उन्होंने बताया कि 3 सितंबर को पहले बच्चे की मौत हुई थी और 19 सितंबर तक 8 बच्चों की मौत हो चुकी थी, लेकिन किसी बच्चे का पोस्टमार्टम नहीं हुआ। उन्होंन आगे कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग ने 19 सितंबर को एमपी सरकार को सूचित कर दिया था, फिर भी सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। पटवारी ने कहा कि प्रदेश में बच्चे मरते रहे, सब सोते रहे और सरकार दशहरा मनाती रही।
श्रेसन कंपनी मालिक 10 दिन की पुलिस रिमांड पर
जहरीले कफ सिरप से 23 बच्चों की मौत के मामले में कल SIT ने श्रेसन कंपनी के मालिक रंगनाथन गोविंदन को हिरासत में लिया था। जिसके बाद मालिक को SIT की टीम तमिलनाडु के चेन्नई से छिंदवाड़ा लेकर आई थी। कल कोर्ट में रंगनाथन की पेशी के बाद 10 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
बिहार सीट शेयरिंग को लेकर दिल्ली में अहम बैठक, 25 सीटों को लेकर की गई चर्चा
9 Oct, 2025 11:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: बिहार (Bihar) में चुनाव आयोग (election Commission) द्वारा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है, मगर अभी तक भी बिहार में महागठबंधन और एनडीए (NDA) में सीट शेयरिंग को लेकर मामला फंसा हुआ है. बुधवार को कांग्रेस ने सीट बंटवारें को लेकर अहम बैठक भी बुलाई है. बैठक में कांग्रेस नेता अजय माकन सहित अन्य नेता शामिल हुए हैं.
बताया गया है कि बैठक के दौरान बिहार की 25 सीटों को लेकर चर्चा की गई है और इन सीटों पर उम्मीदवरों के नाम पर भी मुहर लग गई हैं. वहीं कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि सीट बंटवारे को लेकर बिहार में जो भ्रम की स्थिति बनी हुई है. इसको देखते हुए बैठक का आयोजन किया गया और संदेश गया है कि कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी बिहार की जिन सीटों पर मुहर लगाएगी, उन्हीं सीटों पर कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे.
वहीं बिहार के पटना में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के आवास पर महागठबंधन के नेताओं की सीट शेयरिंग को लेकर मंगलवार देर रात तक चर्चा हुई. ऐसे में बुधवार को कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) की यह बैठक बुलाई गई है. मंगलवार को पटना में हुई बैठक में आरजेडी, कांग्रेस, विकासशील इंसान पार्टी और माकपा के प्रतिनिधि मौजूद रहे थे.
बताया जां रहा है कि पटना में हुई बैठक में विकासशील इंसान पार्टी (VIP) प्रमुख मुकेश सहनी की ओर से बिहार विधान सभा चुनाव में 40 से अधिक सीटों की मांग रखी थी और इस दौरान उन्होंने कांग्रेस द्वारा किए जा रहे 60 सीटों के दावे पर भी सवाल उठाया था. इस दौरान वीआईपी पार्टी की ओर से दावा भी किया गया था कि वीआईपी पार्टी के समर्थन के बिना विपक्ष सत्ता में नहीं आ सकता. इसलिए उन्हें पर्याप्त सम्मान और हिस्सेदारी मिलनी चाहिए.
सूत्रों के अनुसार, वीआईपी पार्टी की ओर से बैठक में सवाल उठाया गया कि बिहार में कांग्रेस सीटों के बंटवारें में इतनी हिस्सेदारी क्यों मांग रही है? इस सवाल पर कांग्रेस की तरफ से बताया गया कि बिहार में राहुल गांधी द्वारा निकाली गई वोटर अधिकार यात्रा और पार्टी द्वारा हाल में हुए चुनाव में किए गए प्रदर्शन से विपक्ष को नई ऊर्जा दी है. आरजेडी ऐसी सीटों पर अपने उम्मीदवारों को चुनाव में उतारना चाहती है जिन सीटों पर वीआईपी के पास मजबूत उम्मीदवार नहीं है. फिलहाल सूत्र बता रहें हैं कि कांग्रेस की बुधवार को हुई बैठक में बिहार की 25 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम पर मुहर लग चुकी है.
जीतू पटवारी बोले- मासूम बच्चों की मौत सिस्टम के भ्रष्टाचार का प्रमाण
9 Oct, 2025 10:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आज मध्य प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए छिंदवाड़ा में नकली और जहरीली खांसी की सिरप ‘कोल्ड्रिफ’ के सेवन से मासूम बच्चों की हो रही मौतों पर प्रदेश सरकार की आपराधिक लापरवाही पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह घटना न केवल स्वास्थ्य विभाग की विफलता का प्रतीक है, बल्कि पूरे सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार का जीता-जागता प्रमाण है।
पटवारी ने बताया कि कल तक 16 मासूम बच्चों की मौत हो चुकी थी, और आज एक और बच्चे की जान चली गई। कुल 17 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि कई बच्चे अभी भी वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कल मृतकों के परिजनों से मिले थे, लेकिन वेंटिलेटर पर पड़े बच्चों के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए? क्या उनकी जान बचाने के लिए कोई प्रभावी उपाय किए गए? कांग्रेस अध्यक्ष ने कलेक्टर को हटाने के सरकारी फैसले पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “कलेक्टर को हटाने से क्या फायदा? अगर वही कलेक्टर मौजूद रहते, तो वे स्थिति को जल्दी काबू में कर लेते। यह हटाना महज घटना से ध्यान भटकाने की साजिश है।”
पटवारी ने स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के इस्तीफे की मांग की और पूछा, “स्वास्थ्य मंत्री का इस्तीफा क्यों नहीं लिया जा रहा? क्या सरकार उन्हें बचाना चाहती है? राजेंद्र शुक्ल सीएम बनने का सपना देख रहे हैं, इसलिए मुख्यमंत्री उन्हें रोक रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई तो कर ली जाती है।
“उन्होंने नकली दवाओं के खतरे पर चिंता जताते हुए कहा, “नकली दवाओं से बच्चों की मौतें फिल्मों में ही देखी थीं, लेकिन अब यह हकीकत बन गई है। पहले भी इसी कंपनी (स्रेसन फार्मास्यूटिकल्स) की दवाई से बच्चों की मौतें हुई थीं, फिर भी मध्य प्रदेश में यह बिक्री जारी रही। यह साबित करता है कि फूड कंट्रोलरों को 50 प्रतिशत कमीशन मिलता है, और बिना कमीशन के कोई दवाई पास नहीं होती। स्वास्थ्य विभाग के पीएस को इसलिए नहीं हटाया जा रहा क्योंकि वे यादव हैं। यह सरकार मगरमच्छ की तरह है – ऊपर से शांत, लेकिन अंदर से खतरनाक। मोहन सरकार के मंत्रिमंडल में एक भी ईमानदार मंत्री नहीं बचा है
“पटवारी ने स्पष्ट किया कि ये मौतें भ्रष्टाचार का नतीजा हैं। राजेंद्र शुक्ल आज तक घटनास्थल पर नहीं पहुंचे, प्रभारी मंत्री वहां नहीं पहुंचे, स्वास्थ्य पीएस भी अभी तक नहीं पहुंचे। उन्होंने कहा, “25 बच्चों की जान सिस्टम ने ले ली। करप्शन के कारण ऐसी घटनाएं होती हैं।
“कांग्रेस की मांगें:
स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल, स्वास्थ्य आयुक्त, ड्रग कंट्रोलर सहित सभी जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई और निलंबन।
नकली दवाओं की बिक्री रोकने के लिए कड़े उपाय, जिसमें सभी दवा कंपनियों की जांच और कमीशनबाजी पर रोक।
प्रभावित परिवारों को मुआवजा और मुफ्त इलाज।
ऐसी कोई घटना दोबारा न हो, इसके लिए मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर सुझाव दिए जा रहे हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने घोषणा की कि 9 अक्टूबर को पूरे प्रदेश में हर ब्लॉक और जिला स्तर पर एक साथ कैंडल मार्च निकाला जाएगा, जिसमें मृतकों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। उन्होंने कहा, “भाजपा सरकार का ‘लापरवाह-चरित्र’ अपराध है! यह पीड़ित परिवारों की चिंता बढ़ा रहा है। आपराधिक लापरवाही से मासूमों को संकट में डालने वालों को सत्ता में रहने का हक नहीं!”कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर आंदोलन जारी रखेगी और दोषियों को सजा दिलवाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।
अमृतपाल ने उपचुनाव के लिए उम्मीदवार का किया ऐलान, हिंदू नेता की हत्या के आरोपी के भाई को दिया टिकट
9 Oct, 2025 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चण्डीगढ़ । पंजाब (Punjab) की तरनतारन विधानसभा सीट (Tarn Taran Assembly seat) पर उपचुनाव का बिगुल बज चुका है। इस सीट पर आगामी 11 नवंबर को उपचुनाव होने को है। वहीं 14 नवंबर को मतगणना के बाद नतीजों की घोषणा की जाएगी। इस सीट के लिए आम आदमी पार्टी, बीजेपी, कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल ने अपने-अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा पहले ही कर दी है। इस बीच अब मंगलवार को जेल में बंद खालिस्तानी अमृतपाल सिंह (Khalistani Amritpal Singh) की पार्टी ने भी अपने उम्मीदवार का ऐलान कर दिया।
गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी के विधायक डॉ. कश्मीर सिंह सोहल के निधन के बाद तरनतारन सीट पर उपचुनाव करवाया जा रहा है। इसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद खडूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह की पार्टी अकाली दल वारिस पंजाब दे ने अमृतसर के हिंदू नेता सुधीर सूरी की हत्या करने के आरोपी संदीप सिंह सन्नी के भाई मंदीप सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है।
मंदिर के बाहर हुई थी हिंदू नेता की हत्या
वारिस पंजाब दे ने जिस मंदीप सिंह को उम्मीदवार बनाया है, उसके भाई पर हिन्दू नेता के हत्या का आरोप है। नवंबर 2022 में शिवसेना नेता सुधीर सूरी की अमृतसर में सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। उन्हें उस वक्त गोली मारी गई थी, जब वह मजीठा रोड पर गोपाल मंदिर के बाहर धरने पर बैठे थे। सूरी और उनके समर्थक हिंदू देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियों की बेअदबी के खिलाफ विरोध जता रहे थे। तभी आरोपी संदीप सिंह सन्नी ने उन्हें गोलियां मारी थी। जांच से पता चला कि सन्नी अमृतपाल सिंह से प्रभावित था और उसी की विचारधारा को अपनाते हुए उसने सूरी की हत्या कर दी थी।
जेल में बंद है सन्नी
इसके बाद सन्नी फिलहाल जेल में बंद है। डिब्रूगढ़ जेल में बंद अमृतपाल सिंह की ओर से खडूर साहिब से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए ऐलान के बाद सन्नी को भी आजाद उम्मीदवार के रूप में चुनाव अमृतसर सीट से लड़ाने की कवायद शुरू हुई थी। हालांकि बाद में सिर्फ अमृतपाल ने ही चुनाव लड़ा था और रिकार्ड जीत दर्ज की थी है।
पंथक वोट तोड़ेगी अमृतपाल की पार्टी
अमृतपाल सिंह ने 2024 लोकसभा चुनाव में खडूर साहिब लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था और आप, कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा जैसे दिग्गज दलों के प्रत्याशियों को पछाड़ते हुए 4 लाख से अधिक वोटों के साथ जीत दर्ज की थी। तरनतारन विधानसभा सीट, खडूर साहिब संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली 9 विधानसभा सीटों में से एक है। इस क्षेत्र में अमृतपाल सिंह को मिली व्यापक जनसमर्थन से उत्साहित होकर अब संगठन ने विधानसभा उपचुनाव में भी उतरने का फैसला लिया है। यहां अमृतपाल सिंह की पार्टी पंथक वोट तोड़ सकती है और दूसरे दलों को नुक्सान पहुंचा सकती है। ऐसे में सबसे ज्यादा नुक्सान अकाली दल को हो सकता है जो पंजाब की सबसे बड़ी पंथक पार्टी है।
सियासी दलों ने कमर कसी
इस बीच सभी पार्टियां तरनतारन चुनाव जीतने के लिए कड़ी मशक्कत कर रही हैं। बॉर्डर बेल्ट की इस सीट के लिए सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने इस बार हरमीत सिंह संधू पर दांव खेला है। संधू 2002, 2007 व 2012 में विधायक रह चुके हैं। उन्होंने दो बार शिअद से चुनाव जीता और एक बार निर्दलीय चुनाव जीता था। साल 2017 व 2022 में वे हार गए थे। वहीं कांग्रेस ने किसान नेता करणबीर सिंह बुर्ज को मैदान में उतारा है। साल 2017 में कांग्रेस के डॉ. धर्मबीर अग्निहोत्री ने इस सीट से जीत दर्ज की थी। इसके अलावा शिरोमणि अकाली दल ने सुखविंदर कौर रंधावा को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं भाजपा ने उपचुनाव के लिए हरजीत सिंह संधू को प्रत्याशी बनाया है। संधू 2007 में यूथ अकाली दल के साथ जुड़े थे, जिसके बाद वर्ष 2022 पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हो गए थे।
बिहार में पीके फैक्टर का असर, चुनाव में उतरी केजरीवाल की आम आदमी पार्टी, RJD से नहीं मिल रहा तालमेल
9 Oct, 2025 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना । बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) की सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। 6 और 11 नवंबर को होने वाले इस चुनाव में एनडीए (NDA), महागठबंधन के अलावा एक नया दावेदार उभर रहा है- प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) की जन सुराज पार्टी। लेकिन इस बीच आम आदमी पार्टी (AAP) का अचानक मैदान में उतरना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली पार्टी ने तो अपने 11 उम्मीदवारों की पहली सूची भी जारी कर दी है। हालांकि राष्ट्रीय मुद्दों पर आम आदमी पार्टी (AAP) और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के बीच तालमेल देखने को मिला है, लेकिन इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने पहली बार मैदान में उतरने का फैसला किया है।
यह निर्णय तब आया है जब विपक्षी महागठबंधन की कमान बिहार में RJD के हाथों में है और वह NDA को सत्ता से बेदखल करने की मुहिम चला रही है। राष्ट्रीय स्तर पर आप और आरजेडी एक सुर में बोलते रहे हैं। लेकिन आप ने बिना आरजेडी के साथ गठबंधन किए मैदान में उतरने का फैसला किया है। यहां तक कि संसद सत्रों के दौरान AAP सांसद संजय सिंह और RJD के राज्यसभा सांसद मनोज झा के बीच की निकटता भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय रही है।
‘प्रशांत किशोर फैक्टर’ से जुड़ा एंट्री का फैसला
सूत्रों के हवाले से लिखा है कि प्रशांत किशोर (PK) और उनकी पार्टी ‘जन सुराज’ का उभार आम आदमी पार्टी के बिहार चुनाव में उतरने का मुख्य कारण बना। बिहार AAP अध्यक्ष राकेश यादव ने भी स्वीकार किया कि जन सुराज ने उनके संगठन पर प्रभाव डाला था। उन्होंने कहा, “लगभग 50% AAP कार्यकर्ता जन सुराज से जुड़ गए थे क्योंकि हम चुनाव नहीं लड़ रहे थे। लेकिन अब जैसे ही हमने चुनाव लड़ने का ऐलान किया, उनमें से कई लोग वापस लौटने की तैयारी में हैं।” AAP के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) संदीप पाठक ने कुछ दिन पहले घोषणा की थी कि पार्टी 6 और 11 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनावों में हिस्सा लेगी, जिसके परिणाम 14 नवंबर को घोषित होंगे।
‘जन सुराज’ से मुकाबले का मूड
राकेश यादव ने बताया कि टिकट के लिए अब तक लगभग 6,000 आवेदन मिले हैं और स्क्रीनिंग प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा, “दूसरी और तीसरी सूची जल्द जारी की जाएगी, जिनमें 30-40 उम्मीदवारों के नाम होंगे।” उन्होंने जन सुराज और AAP के राजनीतिक मॉडल में फर्क बताते हुए कहा, “प्रशांत किशोर दावा करते हैं कि वे बिहार को वैकल्पिक राजनीति का मॉडल देंगे, लेकिन वे भी दागी पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट देने की सोच रहे हैं। AAP ने जो दिल्ली और पंजाब में शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में कर दिखाया है, वही हमारा असली मॉडल है।”
आंतरिक असंतोष और संगठन की मजबूती
AAP के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पार्टी के बिहार संगठन में लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि राज्य में चुनाव लड़ा जाए। उन्होंने कहा, “हमने गोवा, गुजरात और हरियाणा में चुनाव लड़ा है, तो बिहार को अपवाद क्यों रखा जाए?” पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति (PAC) को बिहार इकाई ने यह समझाने में सफलता हासिल की कि स्थानीय स्तर पर संगठन तैयार है। दिल्ली की शीर्ष नेतृत्व ने बिहार इकाई को यह भी कहा है कि चुनाव संसाधन वे खुद जुटाएं, क्योंकि राष्ट्रीय नेतृत्व इस बार सीमित भूमिका निभाएगा।
RJD से संबंधों पर सवाल
जब पूछा गया कि क्या बिहार में चुनाव लड़ने से RJD के साथ संबंधों पर असर पड़ेगा, तो पार्टी नेताओं ने अलग-अलग राय दी। AAP के वरिष्ठ नेता संजीव झा ने कहा, “हम हिमाचल प्रदेश में चुनाव लड़े, वहां कांग्रेस जीती। लेकिन हमारा उद्देश्य हर राज्य में अपनी वैकल्पिक राजनीति का मॉडल पेश करना है। बिहार में भी जनता इसे देखेगी।” उन्होंने कहा कि भले ही RJD और AAP ने बिहार चुनाव को लेकर कोई औपचारिक परामर्श नहीं किया हो, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर INDIA गठबंधन की एकता पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि AAP उन सीटों पर उतरेगी या नहीं, जहां कांग्रेस चुनाव लड़ रही है। हालांकि, पार्टी का दावा है कि उसका उद्देश्य बिहार की जनता को दिल्ली और पंजाब जैसी ‘शिक्षा और स्वास्थ्य’ आधारित राजनीति का विकल्प देना है।
बिहार में पीके फैक्टर का असर, चुनाव में उतरी केजरीवाल की आम आदमी पार्टी, RJD से नहीं मिल रहा तालमेल
8 Oct, 2025 09:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना । बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) की सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। 6 और 11 नवंबर को होने वाले इस चुनाव में एनडीए (NDA), महागठबंधन के अलावा एक नया दावेदार उभर रहा है- प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) की जन सुराज पार्टी। लेकिन इस बीच आम आदमी पार्टी (AAP) का अचानक मैदान में उतरना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली पार्टी ने तो अपने 11 उम्मीदवारों की पहली सूची भी जारी कर दी है। हालांकि राष्ट्रीय मुद्दों पर आम आदमी पार्टी (AAP) और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के बीच तालमेल देखने को मिला है, लेकिन इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने पहली बार मैदान में उतरने का फैसला किया है।
यह निर्णय तब आया है जब विपक्षी महागठबंधन की कमान बिहार में RJD के हाथों में है और वह NDA को सत्ता से बेदखल करने की मुहिम चला रही है। राष्ट्रीय स्तर पर आप और आरजेडी एक सुर में बोलते रहे हैं। लेकिन आप ने बिना आरजेडी के साथ गठबंधन किए मैदान में उतरने का फैसला किया है। यहां तक कि संसद सत्रों के दौरान AAP सांसद संजय सिंह और RJD के राज्यसभा सांसद मनोज झा के बीच की निकटता भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय रही है।
‘प्रशांत किशोर फैक्टर’ से जुड़ा एंट्री का फैसला
सूत्रों के हवाले से लिखा है कि प्रशांत किशोर (PK) और उनकी पार्टी ‘जन सुराज’ का उभार आम आदमी पार्टी के बिहार चुनाव में उतरने का मुख्य कारण बना। बिहार AAP अध्यक्ष राकेश यादव ने भी स्वीकार किया कि जन सुराज ने उनके संगठन पर प्रभाव डाला था। उन्होंने कहा, “लगभग 50% AAP कार्यकर्ता जन सुराज से जुड़ गए थे क्योंकि हम चुनाव नहीं लड़ रहे थे। लेकिन अब जैसे ही हमने चुनाव लड़ने का ऐलान किया, उनमें से कई लोग वापस लौटने की तैयारी में हैं।” AAP के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) संदीप पाठक ने कुछ दिन पहले घोषणा की थी कि पार्टी 6 और 11 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनावों में हिस्सा लेगी, जिसके परिणाम 14 नवंबर को घोषित होंगे।
‘जन सुराज’ से मुकाबले का मूड
राकेश यादव ने बताया कि टिकट के लिए अब तक लगभग 6,000 आवेदन मिले हैं और स्क्रीनिंग प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा, “दूसरी और तीसरी सूची जल्द जारी की जाएगी, जिनमें 30-40 उम्मीदवारों के नाम होंगे।” उन्होंने जन सुराज और AAP के राजनीतिक मॉडल में फर्क बताते हुए कहा, “प्रशांत किशोर दावा करते हैं कि वे बिहार को वैकल्पिक राजनीति का मॉडल देंगे, लेकिन वे भी दागी पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट देने की सोच रहे हैं। AAP ने जो दिल्ली और पंजाब में शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में कर दिखाया है, वही हमारा असली मॉडल है।”
आंतरिक असंतोष और संगठन की मजबूती
AAP के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पार्टी के बिहार संगठन में लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि राज्य में चुनाव लड़ा जाए। उन्होंने कहा, “हमने गोवा, गुजरात और हरियाणा में चुनाव लड़ा है, तो बिहार को अपवाद क्यों रखा जाए?” पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति (PAC) को बिहार इकाई ने यह समझाने में सफलता हासिल की कि स्थानीय स्तर पर संगठन तैयार है। दिल्ली की शीर्ष नेतृत्व ने बिहार इकाई को यह भी कहा है कि चुनाव संसाधन वे खुद जुटाएं, क्योंकि राष्ट्रीय नेतृत्व इस बार सीमित भूमिका निभाएगा।
RJD से संबंधों पर सवाल
जब पूछा गया कि क्या बिहार में चुनाव लड़ने से RJD के साथ संबंधों पर असर पड़ेगा, तो पार्टी नेताओं ने अलग-अलग राय दी। AAP के वरिष्ठ नेता संजीव झा ने कहा, “हम हिमाचल प्रदेश में चुनाव लड़े, वहां कांग्रेस जीती। लेकिन हमारा उद्देश्य हर राज्य में अपनी वैकल्पिक राजनीति का मॉडल पेश करना है। बिहार में भी जनता इसे देखेगी।” उन्होंने कहा कि भले ही RJD और AAP ने बिहार चुनाव को लेकर कोई औपचारिक परामर्श नहीं किया हो, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर INDIA गठबंधन की एकता पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि AAP उन सीटों पर उतरेगी या नहीं, जहां कांग्रेस चुनाव लड़ रही है। हालांकि, पार्टी का दावा है कि उसका उद्देश्य बिहार की जनता को दिल्ली और पंजाब जैसी ‘शिक्षा और स्वास्थ्य’ आधारित राजनीति का विकल्प देना है।
बिहार में मोदी की 10, राजनाथ, अमित शाह की 25-25 और योगी की 10 चुनावी रैलियां
8 Oct, 2025 09:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का आधिकारिक ऐलान होने के साथ ही राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद सभी राजनीतिक दल तत्काल प्रभाव से चुनावी मोड में आकर अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (यू) (जदयू) ने अपने प्रचार अभियान की रूपरेखा बना ली है, जिसके तहत गठबंधन एक मजबूत संदेश देने के लिए निरंतर रणनीतिक बैठकों में जुटा हुआ है। भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य में 10 चुनावी रैलियां करने वाले हैं, जिनकी संख्या जरूरत पड़ने पर बढ़ सकती है। इसके अलावा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा भी 25-25 चुनावी सभाओं को संबोधित करने वाले है। जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीमांचल क्षेत्र में 10 रैलियां करने वाले है। वहीं, जदयू की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अक्टूबर के बाद प्रतिदिन चार रैलियां करने और प्रधानमंत्री मोदी की जनसभाओं में उनके साथ मंच साझा करने वाले है।
कृषि मंत्री की बैठक: किसानों को वैकल्पिक उपाय अपनाने के लिए किया प्रेरित
8 Oct, 2025 02:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिल्ली स्थित कृषि भवन में मंगलवार (7 अक्टूबर) को पराली प्रबंधन को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की. उनके साथ केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव भी मौजूद रहे. इस बैठक में पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह, हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा भी वर्चुअली शामिल हुए.
बैठक में पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने, धान के अवशेषों के बेहतर उपयोग, किसानों में जागरूकता, वित्तीय सहायता, निगरानी प्रणाली, फसल प्रबंधन और विविधिकरण जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. बैठक की शुरुआत में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्रियों ने अपने-अपने राज्यों में पराली प्रबंधन की स्थिति की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि संबंधित योजनाओं को पूरी सजगता और प्रतिबद्धता के साथ लागू किया जा रहा है और फील्ड अधिकारी पूरी तरह से सक्रिय हैं. हरियाणा के कृषि मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार किसानों को पराली न जलाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है, जिससे सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है और किसान वैकल्पिक उपायों को अपना रहे हैं.
कृषि मंत्री ने की राज्यों के प्रयासों की सराहना
राज्यों के प्रयासों की सराहना करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस दिशा में अच्छा कार्य हो रहा है, लेकिन व्यापक लक्ष्य प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयास आवश्यक हैं. उन्होंने किसानों के बीच जनजागरूकता को बेहद महत्वपूर्ण बताया और सुझाव दिया कि पंचायतों, स्थानीय प्रतिनिधियों एवं नोडल अधिकारियों को ग्राम स्तर पर सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए.
‘प्रयासों से सकारात्मक परिणाम मिलेंगे’
केंद्रीय कृषि मंत्री ने फसल प्रबंधन, डायरेक्ट सीडिंग, फसल विविधिकरण, आवंटित धन का प्रभावी उपयोग, निगरानी तंत्र और व्यावहारिक, लक्षित कार्य योजनाओं के निर्माण पर भी चर्चा की. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ठोस और समन्वित प्रयासों से निश्चित रूप से सकारात्मक और व्यावहारिक परिणाम सामने आएंगे.
मंत्री ने की सीधी बुवाई को बढ़ावा देने की अपील
शिवराज सिंह चौहान ने सभी राज्य कृषि मंत्रियों से अपने-अपने क्षेत्रों में सीधी बुवाई (Direct Seeding of Wheat) को बढ़ावा देने की अपील की. उन्होंने घोषणा की कि वो खुद 12 अक्टूबर को अपने खेत में धान की कटाई के तुरंत बाद गेहूं की डायरेक्ट बुवाई करेंगे ताकि किसानों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया जा सके. जिससे वो प्रेरित हों और पराली प्रबंधन को अपनाएं. उन्होंने कहा ‘जब किसान मुझे ऐसा करते देखेंगे, तो वे भी इसे अपनाने के लिए प्रेरित होंगे’.
कृषि मंत्री ने किसानों से रोटावेटर, चॉपर, बायो-डीकंपोजर, और मल्चिंग उपकरणों के उपयोग का आग्रह किया और कहा कि बायो-CNG व एथेनॉल प्लांट के जरिए पराली का प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि उपलब्ध धन का उचित उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि मशीनरी की उपलब्धता बाधा न बने. उन्होंने दीर्घकालिक उपायों के रूप में फसल विविधिकरण को प्राथमिकता देने पर बल दिया.
शिवराज सिंह चौहान ने दिए सुझाव
शिवराज सिंह चौहान ने पराली संग्रहण और निपटान तंत्र को बायो-CNG, पैलेट, कंपोस्ट इकाइयों, उद्योगों और थर्मल पावर प्लांट्स से जोड़ने का सुझाव दिया ताकि वैज्ञानिक तरीके से पराली प्रबंधन किया जा सके. केंद्रीय मंत्री ने प्रशिक्षण, जागरूकता, क्षमता निर्माण और रीयल-टाइम निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों के समन्वित प्रयासों से आने वाले दिनों में पराली जलाने की घटनाएं निश्चित रूप से और कम होंगी. मंत्री ने कहा ‘जमीनी स्तर पर निगरानी बेहद जरूरी है. मुझे विश्वास है कि सतत प्रयासों से हम बेहतर परिणाम प्राप्त करेंगे और पर्यावरण एवं जलवायु की रक्षा करने में सफल होंगे’.
मंत्री भूपेंद्र यादव ने की राज्यों की तारीफ
वहीं बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने राज्यों के अब तक के प्रयासों की सराहना की और आगामी 10 दिनों में कृषि मंत्रालय और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को और मजबूत करने पर जोर दिया. उन्होंने पराली के संग्रहण और भंडारण को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई ताकि इसका ईंट भट्ठों और थर्मल पावर प्लांट्स में सही उपयोग सुनिश्चित हो सके. इस बैठक में कृषि सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी, ICAR के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट सहित दोनों मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.
मुसलमानों , सिखों व बौद्धों के बाद अब दलितों का नंबर: AAP नेता भारद्वाज
8 Oct, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (SC) में एक 71 वर्षीय वकील ने जूता फेंकने की कोशिश की। अदालत में चल रही एक मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी वकील ने यह घटिया हरकत करने की कोशिश की, इस दौरान वह मंच के पास पहुंचा और जूता निकालकर फेंकने की कोशिश की, लेकिन वहां मौजूद सतर्क सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत हरकत में आकर उसे ऐसा करने से रोक दिया। देशभर में इस घटना को लेकर गुस्सा देखा जा रहा है।
आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने भी इस बारे में कड़ी नाराजगी जताते हुए केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। अपनी नाराजगी जताते हुए AAP नेता ने सोमवार को इस बारे में सोशल मीडिया पर कई पोस्ट कीं। जिनमें से एक में उन्होंने लिखा- सबका नम्बर आएगा , अगर चुप रहे तो कोई नहीं बचेगा। मुसलमानों , सिक्खों और बौद्धों के बाद अब दलितों का नंबर आ गया है। वहीं एक अन्य पोस्ट में भारद्वाज ने आरोपी वकील मयूर विहार निवासी राकेश किशोर (71) की फोटो शेयर करते हुए लिखा, ‘गांधी हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं।’
इसी मुद्दे को लेकर AAP नेता ने करीब 6 मिनट लंबा अपना एक वीडियो भी एक्स पर पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने कहा कि दलित समुदाय से आने वाले सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पर एक वकील ने जूते से हमला किया। यह बहुत ही घटिया कृत्य है, और इसकी जितनी हो सके उतनी आलोचना होनी चाहिए, सजा सुनिश्चित होनी चाहिए, लेकिन दक्षिणपंथी ट्रोल्स सुनियोजित तरीके से उस वकील को हीरो और मुख्य न्यायाधीश को खलनायक बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस वीडियो को शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, ‘सुप्रीम कोर्ट के दलित मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने वाले को पुलिस छोड़ दिया, सोशल मीडिया पर आतंकवादी गोडसे के समर्थक उत्सव मना रहे हैं, सभी जजों को खुली धमकी एक कमजोर न्यायपालिका की निशानी है, उपद्रवियों को केंद्र सरकार का संरक्षण साफ़ देखा जा सकता है।’
इसके अलावा एक अन्य पोस्ट में भारद्वाज ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, ‘इस सनातन के अपमान पर पूरी भाजपा चुप है ? क्या सवर्ण जाति और दलित जाति के लिए अलग अलग सनातन अपमान के मापदंड हैं ? दिल्ली की CM दुर्गा पूजा में प्रधानमंत्री की फोटो लगाने के लिए कह रही है। PM की पूजा मां दुर्गा के साथ करवाना चाहती थी, इस सनातन के अपमान पर किसी भाजपाई ट्रोल का खून नहीं खौल रहा ?’
उधर पार्टी के प्रमुख और राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी गवई पर हुए इस हमले की तीखी आलोचना की और इस बारे में प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, ‘CJI बी.आर. गवई पर जूता फेंकने की कोशिश सिर्फ़ एक न्यायाधीश पर नहीं बल्कि भारत की आत्मा पर हमला है, इस देश की न्यायपालिका पर हमला है। दलित बेटा मेहनत और ईमानदारी से देश की सर्वोच्च कुर्सी तक पहुंचे- ये इन लोगों को बर्दाश्त नहीं। इनकी हिम्मत तो देखो। इनके समर्थक खुलेआम CJI को सोशल मीडिया पर धमकियां दे रहे हैं। इस तरह की राजनीति और गुंडागर्दी ये देश कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।’
जीतू पटवारी बोले- मासूम बच्चों की मौत सिस्टम के भ्रष्टाचार का प्रमाण
8 Oct, 2025 10:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आज मध्य प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए छिंदवाड़ा में नकली और जहरीली खांसी की सिरप ‘कोल्ड्रिफ’ के सेवन से मासूम बच्चों की हो रही मौतों पर प्रदेश सरकार की आपराधिक लापरवाही पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह घटना न केवल स्वास्थ्य विभाग की विफलता का प्रतीक है, बल्कि पूरे सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार का जीता-जागता प्रमाण है।
पटवारी ने बताया कि कल तक 16 मासूम बच्चों की मौत हो चुकी थी, और आज एक और बच्चे की जान चली गई। कुल 17 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि कई बच्चे अभी भी वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कल मृतकों के परिजनों से मिले थे, लेकिन वेंटिलेटर पर पड़े बच्चों के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए? क्या उनकी जान बचाने के लिए कोई प्रभावी उपाय किए गए? कांग्रेस अध्यक्ष ने कलेक्टर को हटाने के सरकारी फैसले पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “कलेक्टर को हटाने से क्या फायदा? अगर वही कलेक्टर मौजूद रहते, तो वे स्थिति को जल्दी काबू में कर लेते। यह हटाना महज घटना से ध्यान भटकाने की साजिश है।”
पटवारी ने स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के इस्तीफे की मांग की और पूछा, “स्वास्थ्य मंत्री का इस्तीफा क्यों नहीं लिया जा रहा? क्या सरकार उन्हें बचाना चाहती है? राजेंद्र शुक्ल सीएम बनने का सपना देख रहे हैं, इसलिए मुख्यमंत्री उन्हें रोक रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई तो कर ली जाती है।
“उन्होंने नकली दवाओं के खतरे पर चिंता जताते हुए कहा, “नकली दवाओं से बच्चों की मौतें फिल्मों में ही देखी थीं, लेकिन अब यह हकीकत बन गई है। पहले भी इसी कंपनी (स्रेसन फार्मास्यूटिकल्स) की दवाई से बच्चों की मौतें हुई थीं, फिर भी मध्य प्रदेश में यह बिक्री जारी रही। यह साबित करता है कि फूड कंट्रोलरों को 50 प्रतिशत कमीशन मिलता है, और बिना कमीशन के कोई दवाई पास नहीं होती। स्वास्थ्य विभाग के पीएस को इसलिए नहीं हटाया जा रहा क्योंकि वे यादव हैं। यह सरकार मगरमच्छ की तरह है – ऊपर से शांत, लेकिन अंदर से खतरनाक। मोहन सरकार के मंत्रिमंडल में एक भी ईमानदार मंत्री नहीं बचा है
“पटवारी ने स्पष्ट किया कि ये मौतें भ्रष्टाचार का नतीजा हैं। राजेंद्र शुक्ल आज तक घटनास्थल पर नहीं पहुंचे, प्रभारी मंत्री वहां नहीं पहुंचे, स्वास्थ्य पीएस भी अभी तक नहीं पहुंचे। उन्होंने कहा, “25 बच्चों की जान सिस्टम ने ले ली। करप्शन के कारण ऐसी घटनाएं होती हैं।
“कांग्रेस की मांगें:
स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल, स्वास्थ्य आयुक्त, ड्रग कंट्रोलर सहित सभी जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई और निलंबन।
नकली दवाओं की बिक्री रोकने के लिए कड़े उपाय, जिसमें सभी दवा कंपनियों की जांच और कमीशनबाजी पर रोक।
प्रभावित परिवारों को मुआवजा और मुफ्त इलाज।
ऐसी कोई घटना दोबारा न हो, इसके लिए मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर सुझाव दिए जा रहे हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने घोषणा की कि 9 अक्टूबर को पूरे प्रदेश में हर ब्लॉक और जिला स्तर पर एक साथ कैंडल मार्च निकाला जाएगा, जिसमें मृतकों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। उन्होंने कहा, “भाजपा सरकार का ‘लापरवाह-चरित्र’ अपराध है! यह पीड़ित परिवारों की चिंता बढ़ा रहा है। आपराधिक लापरवाही से मासूमों को संकट में डालने वालों को सत्ता में रहने का हक नहीं!”कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर आंदोलन जारी रखेगी और दोषियों को सजा दिलवाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।
महागठबंधन में CM फेस पर फंसा पेंच! सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय, कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी कांग्रेस?
8 Oct, 2025 09:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 (Bihar Assembly Elections 2025) की तारीखें का ऐलान होते ही सीट शेयरिंग को लेकर माहौल गरमाने लगा है. चर्चा है कि बिहार चुनाव (Bihar elections) के लिए INDIA ब्लॉक आज सीट शेयरिंग का ऐलान कर सकता है. महागठबंधन में सीट शेयरिंग लगभग फाइनल हो चुका है, लेकिन CM फेस पर पेंच फंस हुआ है. बीते 3 दिन से तेजस्वी यादव के घर सीट शेयरिंग को लेकर मैराथन बैठकों का दौर जारी है.
बता दें कि रविवार देर शाम विधानसभा में विपक्षी दल RJD के नेता और और महागठबंधन की को-ऑर्डिनेशन कमेटी के प्रमुख तेजस्वी यादव के घर एक बैठक हुई थी, जिसमें महागठबंधन में शामिल सभी दलों को नेता शामिल हुए थे. इस बैठक के बाद विकासशील इंसान पार्टी के अध्यक्ष मुकेश सहनी ने मीडिया से बात करते हुए दावा किया था कि सीट शेयरिंग फाइनल हो गया है और महागठबंधन के चुनाव जीतने पर वे डिप्टी CM बनेंगे.
सूत्रों के अनुसार, RJD 145 सीटों पर बिहार विधानसभा चुनाव लड़ सकती है. कांग्रेस के खाते में 56 से 58 सीटें आ सकती हैं. मुकेश सहनी को 18 से 20 सीटें दी जा सकती हैं. वहीं CPI (ML) ने 19 सीटें ऑफर की गई हैं, जिन पर पार्टी ने नाराजगी जताई है. अब पार्टी 30 सीटों की लिस्ट RJD को सौंप सकती है. पशुपति पारस की राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी और हेमंत सोरेन की झारखंड मुक्ति मोर्चा महागठबंधन में शामिल होंगी या नहीं, इस पर अभी फैसला आना बाकी है. बता दें कि महागठबंधन में अब CM फेंस पर पेंच फंस गया है, क्योंकि तेजस्वी यादव का मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने को लेकर सभी दलों में सहमति नहीं बन पाई है.
बिहार विधानसभा चुनाव : NDA में सीट शेयरिंग पर खींचतान, चिराग की पार्टी ने कहा- जन सुराज से गठबंधन के दरवाजे खुले
8 Oct, 2025 08:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली. बिहार चुनाव (Bihar Elections) का ऐलान हो चुका है और सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में सीट शेयरिंग पर अभी मंथन का दौर जारी है. बिहार एनडीए के दो बड़े घटक भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) के अपने दावे हैं. चिराग पासवान (Chirag Paswan) की अगुवाई वाली लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के साथ ही जीतनराम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा की भी अपनी डिमांड है. चिराग की पार्टी 45 से 54 सीटों की डिमांड कर रही है.
एलजेपी (आर) के सूत्रों की मानें तो पार्टी बिहार चुनाव में 45 से 54 सीटों पर चुनाव लड़ने का लक्ष्य लेकर चल रही है. पार्टी सूत्रों का कहना है कि हमें राज्यसभा या विधान परिषद सीट की जरूरत नहीं है. चिराग पासवान शाहाबाद इलाके की किसी सीट से मैदान में उतर सकते हैं. चुनाव रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी से गठबंधन को लेकर सवाल पर एलजेपी (आर) सूत्रों का कहना है कि दरवाजे हमेशा खुले हैं. राजनीति में विकल्प हमेशा उपलब्ध रहते हैं.
बीजेपी और जेडीयू के सौ-सौ सीटों पर चुनाव लड़ने को लेकर सवाल पर एलजेपीआर सूत्रों ने कहा कि किसी भी नेता ने आधिकारिक तौर पर ऐसा कोई ऐलान किया है क्या? हमारी बातचीत बीजेपी से हो रही है, जेडीयू से नहीं. एलजेपीआर के सूत्रों का यह भी कहना है कि एनडीए को यह समझना होगा कि तेजस्वी यादव के खिलाफ चिराग पासवान एक डायनेमिक फेस हैं. चिराग पासवान ने सुनहरी बाग रोड स्थित अपने आवास में शिफ्ट नहीं हुए हैं, जो मंत्रियों का आधिकारिक आवास है.
एलजेपीआर सूत्रों का यह भी कहना है कि हम नहीं चाहते कि कैबिनेट पोस्ट को लेकर कोई हमें धमकाए. केंद्र में एक बर्थ से अधिक बिहार में सम्मानजनक सीटें मैटर करती हैं. एलजेपीआर ने एनडीए में अपने सहयोगी दलों को यह संदेश भी दिया कि हम निष्पक्ष तरीके से सीट शेयरिंग और बिहार की राजनीति में चिराग पासवान के बढ़ते प्रभाव की मान्यता चाहते हैं. गौरतलब है कि बिहार चुनाव के लिए तारीखों के ऐलान के बाद एलजेपीआर के प्रवक्ता धीरेंद्र मुन्ना ने दावा किया था कि हमारी तैयारी सभी 243 सीटों पर है.
उन्होंने सीट शेयरिंग को लेकर कहा था कि 2020 के बिहार चुनाव में जब हमें 20 से 22 सीटें दी जा रही थीं, तब हमारी राहें अलग हो गई थीं. मुझे नहीं लगता कि हमें 22 सीटें दी जाएं, तो बात बनेगी. एलजेपीआर प्रवक्ता ने कहा था कि गठबंधन में हम पहले 43 सीटों पर, उसके बाद हमने 137 सीटों पर चुनाव लड़ा. हमारी राय है कि पार्टी की सीटों का आंकड़ा इसके बीच ही रहना चाहिए. उन्होंने चुनाव कार्यक्रम के ऐलान का स्वागत करते हुए कहा था कि हमारी पार्टी पिछले छह महीने से तैयार है.
भारत पर खास जिम्मेदारी’, विदेश मंत्री जयशंकर का बयान— ‘ग्लोबल साउथ हमसे उम्मीद करता है’
7 Oct, 2025 04:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने कहा कि ‘भारत पर एक विशेष जिम्मेदारी है, क्योंकि वैश्विक दक्षिण के कई देश हमसे प्रेरणा लेते हैं।’ उन्होंने यह बात मंगलवार को आयोजित ‘ट्रस्ट एंड सेफ्टी इंडिया फेस्टिवल 2025’ (Trust and Safety India Festival) में कही। यह आयोजन फरवरी 2026 में होने वाले एआई इम्पैक्ट समिट (AI Impact Summit) की तैयारी का हिस्सा है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के भविष्य पर वैश्विक चर्चा होगी। उन्होंने जयशंकर ने कहा कि भारत आज दुनिया में डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर का एक प्रेरणास्रोत बन चुका है, चाहे बात आधार, यूपीआई, या डिजिटल गवर्नेंस की हो। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले दस वर्षों में जिस पैमाने पर जनता तक सेवाएं पहुंचाई हैं और शासन में पारदर्शिता व दक्षता लाई है, वह दुनिया के लिए एक मिसाल बन गई है।
उन्होंने कहा, ‘जब मैं विदेश जाता हूं, तो वहां के नेता मुझसे भारत की डिजिटल सफलताओं की चर्चा करते हैं। अब यह चर्चा एआई के क्षेत्र तक पहुंच चुकी है।’ विदेश मंत्री ने कहा कि भारत जैसे विशाल समाज के लिए ‘जिम्मेदार एआई’ की दिशा में काम करना बेहद जरूरी है। इसके लिए उन्होंने तीन प्रमुख कदम बताए। जिसमें स्वदेशी उपकरण और ढांचे तैयार करना, इन नवाचारों के लिए आत्म-मूल्यांकन प्रणाली बनाना. और ठोस दिशा-निर्देश तैयार करना शामिल है। उन्होंने कहा कि केवल इन कदमों के बाद ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि एआई का विकास, उसका उपयोग और शासन, सभी सुरक्षित और सभी के लिए सुलभ हों।
विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया इस समय एक ‘महान परिवर्तन के मोड़’ पर खड़ी है। जो फैसले आज लिए जाएंगे, वही आने वाले दशकों की दिशा तय करेंगे। उन्होंने कहा कि जो लोग एआई को अभी भी एक दूर की बात मानते हैं, उन्हें जल्द ही एहसास होगा कि आने वाले कुछ वर्षों में एआई हमारी अर्थव्यवस्थाओं, काम करने के तरीकों, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और जीवनशैली. सब कुछ बदल देगा। उन्होंने कहा, ‘एआई नए अवसर तो लाएगा ही, लेकिन इसके साथ नए खिलाड़ी और नई ताकतें भी उभरेंगी। इसलिए जरूरी है कि हम इसका संतुलित और जिम्मेदार नियमन करें।’
उन्होंने कहा कि एआई का असर हर नागरिक तक पहुंचेगा, इसलिए डिजिटल नागरिकों की सुरक्षा के लिए ‘गार्डरेल्स’ यानी सुरक्षा सीमाएं तय करना बहुत जरूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों का हवाला देते हुए कहा, ‘टेक्नोलॉजी तभी भलाई की ताकत बनती है, जब मानवता उसे सही दिशा देती है।’
चमत्कारी धाम का रहस्य! दक्षिण में बसे इस खाटू श्याम मंदिर की महिमा
शनि की उल्टी चाल से बदलेगा भाग्य, इन 3 राशियों को मिलेगा धन और प्यार
वनाधिकार पट्टा और पीएम आवास से मुरिया परिवार को मिला नया जीवन
वर्मी कंपोस्ट उत्पादन बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल
राज्यपाल पटेल से भारतीय विदेश सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी मिले
मध्यप्रदेश को सामाजिक न्याय के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिये करें समन्वित प्रयास : मंत्री कुशवाह
लेमनग्रास -किसानों के लिए कम पानी में ज्यादा कमाई का साधन
चेकडैम बना ग्रामीण आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार, जल संरक्षण से बदली खेती की तस्वीर
कौशल और सामाजिक उद्यमिता से होगा भारत विकसित : राज्यपाल पटेल
