राजनीति
राम मंदिर ट्रस्ट बोला- अच्छा है राम याद आए, पहले मंत्र सीखिए
15 Jul, 2026 11:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नागपुर। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे द्वारा 18 जुलाई को नागपुर में प्रस्तावित 'राम रक्षा आंदोलन' को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। आंदोलन के मुख्य केंद्र नागपुर के प्रसिद्ध रामनगर श्रीराम मंदिर ट्रस्ट ने मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार के राजनीतिक आयोजन को अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है। ट्रस्ट प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि मंदिर केवल धार्मिक गतिविधियों और उपासना के लिए है, वहां किसी भी तरह का राजनीतिक आंदोलन, विरोध प्रदर्शन या नारेबाजी स्वीकार्य नहीं होगी।
मंदिर परिसर नहीं बनेगा राजनीतिक मंच: रवि वाघमारे
रामनगर श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष रवि वाघमारे ने इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि शिवसेना (यूबीटी) की ओर से अभी तक परिसर के उपयोग के लिए कोई आधिकारिक आवेदन या अनुमति नहीं मांगी गई है। उन्होंने कहा कि कोई भी भक्त मंदिर में आकर 'राम रक्षा स्तोत्र' का पाठ, हनुमान चालीसा या अन्य कोई भी धार्मिक अनुष्ठान कर सकता है, लेकिन इस पवित्र स्थान को सियासी अखाड़ा बनने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी इस ट्रस्ट के आजीवन सदस्य हैं, लेकिन यदि सत्तारूढ़ दल भाजपा भी मंदिर के भीतर ऐसा कोई राजनीतिक कार्यक्रम करना चाहे, तो नियम उनके लिए भी यही रहेंगे।
संजय राउत का पलटवार और ट्रस्टी का तीखा तंज
अयोध्या राम मंदिर में हुए कथित दान घोटाले के विरोध में शुरू किए जा रहे इस आंदोलन पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरी महाराज ने उद्धव ठाकरे पर सीधा तंज कसा है। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह बेहद अच्छी बात है कि अंततः उन्हें प्रभु श्रीराम की याद आई, लेकिन बेहतर होगा कि वे पहले 'राम रक्षा स्तोत्र' को पूरी तरह कंठस्थ (याद) कर लें, जिसके बाद अन्य लोग भी उनके साथ जुड़ने पर विचार करेंगे। दूसरी ओर, शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने पलटवार करते हुए कहा कि भगवान राम की पूजा-अर्चना और स्तोत्र का पाठ करना कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं है और इसके लिए उन्हें किसी भी मंदिर प्रशासन से विशेष अनुमति लेने की कोई आवश्यकता नहीं है।
NCP के दोनों गुट फडणवीस के बंगले पर पहुंचे, जयंत पाटिल बोले- 5 मिनट में लौट आया
15 Jul, 2026 09:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में उस समय अचानक हलचल तेज हो गई, जब मंगलवार देर रात राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के कद्दावर नेता जयंत पाटिल, सत्ताधारी राकांपा (अजित पवार गुट) के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल के साथ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आधिकारिक आवास 'वर्षा' पर पहुंचे। तीनों दिग्गज नेताओं के एक साथ मुख्यमंत्री आवास पर दिखाई देने के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर कयासबाजी का दौर शुरू हो गया है।
जयंत पाटिल ने कयासों को किया खारिज
इस कथित सीक्रेट मीटिंग पर मचे राजनीतिक बवाल के बीच शरद पवार गुट के नेता जयंत पाटिल ने खुद सामने आकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में किसी भी तरह की गुप्त राजनीतिक साठगांठ से साफ इनकार किया। पाटिल ने स्पष्ट किया कि वे केवल इस्लामपुर नगर परिषद के नगराध्यक्ष को अयोग्य घोषित किए जाने के एक स्थानीय प्रशासनिक मामले को लेकर मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे थे, और इस मुलाकात का वहां मौजूद अजित पवार गुट के नेताओं से कोई लेना-देना नहीं था।
बंद कमरे में लंबी चर्चा के दावे और सफाई
सूत्रों और राजनीतिक हलकों में यह दावा किया जा रहा है कि मुख्यमंत्री और इन नेताओं के बीच बंद कमरे में करीब सवा घंटे तक गहन मंथन हुआ, जिसमें दोनों गुटों के नेताओं ने आपस में भी बातचीत की। हालांकि, जयंत पाटिल ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वे रात करीब 10:30 बजे वहां पहुंचे थे और मुख्यमंत्री से महज 5 मिनट की औपचारिक मुलाकात के बाद 10:45 बजे बाहर आ गए थे। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की भनक तक नहीं थी कि सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल भी उसी समय वहां मौजूद थे।
गठबंधन में शामिल होने की अटकलों को मिली हवा
भले ही इस मुलाकात को पूरी तरह गैर-राजनीतिक और प्रशासनिक बताया जा रहा हो, लेकिन विपक्षी खेमे के प्रमुख नेता की मुख्यमंत्री से इस अचानक मुलाकात ने महाराष्ट्र का सियासी तापमान बढ़ा दिया है। राजनीतिक विश्लेषक इसे इसलिए भी बेहद अहम मान रहे हैं क्योंकि पिछले कुछ समय से शरद पवार गुट के सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के साथ जाने की अफवाहें उड़ रही हैं, और आधी रात के इस घटनाक्रम ने इन चर्चाओं को और ज्यादा हवा दे दी है।
परेड ग्राउंड को लेकर कांग्रेस और प्रशासन आमने-सामने
15 Jul, 2026 08:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देहरादून। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आगामी 17 जुलाई को होने वाले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर जारी राजनीतिक गतिरोध के बीच कांग्रेस ने आयोजन स्थल में बदलाव करने की घोषणा की है। परेड ग्राउंड में प्रशासन द्वारा अनुमति निरस्त किए जाने के बाद अब यह कार्यक्रम देहरादून के बन्नू स्कूल मैदान में आयोजित किया जाएगा। कांग्रेस नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय कार्यक्रम में शिरकत करने वाले विद्यार्थियों और उनके परिजनों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए लिया गया है।
अनुमति निरस्त होने पर देर रात सड़कों पर उतरी कांग्रेस
जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा परेड ग्राउंड में कार्यक्रम की मंजूरी न दिए जाने की खबर मिलते ही मंगलवार देर रात कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच सैकड़ों कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए मैदान के मुख्य प्रवेश द्वार पर पहुंच गए, जहां गेट खुलवाने को लेकर पुलिस अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इसके बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने मैदान के बाहर ही धरने पर बैठकर राज्य सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
सरकार पर लगाया राजनीतिक दबाव का आरोप
धरना प्रदर्शन के दौरान उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने शासन पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन ने पहले तीन दिनों के लिए विधिवत अनुमति दी थी, जिसे बाद में राजनीतिक दबाव में आकर रद्द कर दिया गया। गोदियाल ने दावा किया कि मैदान के लिए तय सरकारी शुल्क 65 हजार रुपये के मुकाबले पार्टी ने 1.77 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि जमा कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी कार्यक्रम का बहाना पूरी तरह निराधार है क्योंकि मैदान में ऐसा कोई आयोजन नहीं चल रहा था, जिससे साफ है कि सरकार इस छात्र संवाद कार्यक्रम से घबरा गई है।
सुरक्षा को प्राथमिकता देकर बदला फैसला
रातभर चले इस सियासी ड्रामे और टकराव की स्थिति के बाद कांग्रेस ने कूटनीतिक रूप से परेड ग्राउंड से कदम पीछे खींच लिए हैं। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी वहां कार्यक्रम कराने में सक्षम थी, लेकिन वे नहीं चाहते कि किसी भी छात्र या अभिभावक को सुरक्षा से जुड़ा कोई जोखिम उठाना पड़े। अब नए आयोजन स्थल यानी बन्नू स्कूल मैदान पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात है और कांग्रेस कार्यकर्ता 17 जुलाई के कार्यक्रम को सफल बनाने की तैयारियों में जुट गए हैं।
सचिन पायलट का बड़ा राजनीतिक बयान, अगले CM और पंचायत चुनाव पर खुलकर बोले
14 Jul, 2026 04:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांसवाड़ा: कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल में केंद्र सरकार ने देश की संवैधानिक संस्थाओं को पूरी तरह खोखला कर दिया है। सरकार द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र एजेंसियों का खुलकर दुरुपयोग किया जा रहा है। मीडिया से मुखातिब होते हुए पायलट ने कहा कि नीट (NEET) पेपर लीक और राम मंदिर के चंदा चोरी मामले में सरकार केवल लीपापोती करने में जुटी है। उन्होंने मांग की कि सरकार को इन गंभीर मामलों में निष्पक्ष जांच कर 'दूध का दूध और पानी का पानी' करना चाहिए।
हार के डर से चुनाव टाल रही भजनलाल सरकार
सचिन पायलट ने राजस्थान की भजनलाल सरकार पर स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों को जानबूझकर टालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार चुनाव कराने से पूरी तरह घबरा रही है, क्योंकि उसे पता है कि जनता के बीच जाते ही नतीजे उसके खिलाफ आएंगे। हाईकोर्ट से कई बार फटकार मिलने के बावजूद सरकार चुनाव न कराने के बहाने ढूंढ रही है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि यहां सरकार चलाने वालों को खुद नहीं मालूम कि वे कब तक अपनी कुर्सी पर रहेंगे, क्योंकि सत्ता का रिमोट कंट्रोल पूरी तरह दिल्ली से संचालित हो रहा है। पायलट ने दावा किया कि जब भी चुनाव होंगे, केवल ग्रामीण ही नहीं बल्कि शहरी क्षेत्रों में भी जनता भाजपा को सबक सिखाएगी और कांग्रेस प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज करेगी।
अफसरशाही के भरोसे चल रहा देश
पायलट ने 'वन नेशन-वन इलेक्शन' के नारे को लेकर भी घेरा। उन्होंने कहा कि इस स्लोगन की आड़ में चुनाव टालने की कोशिशें हो रही हैं। तमाम न्यायिक मंचों द्वारा फटकार लगाए जाने के बाद भी इस डबल इंजन सरकार ने पूरे देश को अधिकारियों (अफसरशाही) के भरोसे छोड़ दिया है, जिससे आम जनता के काम ठप पड़े हैं और हर वर्ग हताश है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हो चुकी है।
प्रदेश का हर वर्ग और भाजपा कार्यकर्ता भी परेशान
राजस्थान सरकार के अब तक के कार्यकाल पर टिप्पणी करते हुए पायलट ने कहा कि अल्प समय में ही जनता इस शासन से ऊब चुकी है। राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। किसान, महिलाएं, कर्मचारी और आम नागरिक त्रस्त हैं। जनहित के काम तो दूर, खुद भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं की भी सुनवाई नहीं हो रही है। सरकारी विभागों में खाली पड़े पदों को भरा नहीं जा रहा है, जिससे युवाओं में भारी आक्रोश है।
आर्टिफिशियल मैंडेट और अगले सीएम के सवाल पर रुख
जब सचिन पायलट से उनके अगले मुख्यमंत्री बनने को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि इन बातों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। उनका पूरा ध्यान आने वाले राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को मजबूती से जिताने पर है। उन्होंने भाजपा पर लोकतांत्रिक मूल्यों को ताक पर रखने का आरोप लगाते हुए कहा कि शिवसेना, एनसीपी और तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टियों के सांसदों-विधायकों को तोड़कर विपक्षी सरकारों को अस्थिर किया गया। जब भाजपा को जनता का वास्तविक जनादेश नहीं मिलता, तो वह संसद और राज्यों में जोड़-तोड़ कर 'आर्टिफिशियल मैंडेट' (कृत्रिम बहुमत) तैयार करने की कोशिश करती है। देश की जागरूक जनता यह सब देख रही है और वक्त आने पर इसका करारा जवाब देगी।
सोनम वांगचुक को लेकर महुआ का बड़ा बयान, सियासत हुई तेज
14 Jul, 2026 04:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर लद्दाख की मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य लगातार चिंताजनक होता जा रहा है। 28 जून से शुरू हुए उनके इस अनशन के कारण उनके शरीर पर विपरीत असर पड़ा है। 'सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस' (CJP) के अनुसार, भूख हड़ताल के चलते वांगचुक का वजन अब तक 8.2 किलोग्राम कम हो चुका है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनके स्वास्थ्य की चौबीसों घंटे निगरानी कर रही है। सोनम वांगचुक की गिरती सेहत को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दीपके और सांसद महुआ मोइत्रा समेत कई प्रमुख हस्तियों ने उनसे अपना अनशन समाप्त करने का विनम्र अनुरोध किया है।
20 जुलाई को संसद मार्च की घोषणा
लद्दाख के अधिकारों की इस लड़ाई को आगे बढ़ाते हुए सीजेपी ने आगामी 20 जुलाई को एक विशाल 'संसद मार्च' का आह्वान किया है। आंदोलन से जुड़े रणनीतिकारों का मानना है कि यह मार्च प्रदर्शन का सबसे निर्णायक और ऐतिहासिक चरण साबित होने वाला है। इस विरोध प्रदर्शन के जरिए लद्दाख को विशेष संवैधानिक सुरक्षा देने की मांग को और पुरजोर तरीके से केंद्र सरकार के समक्ष रखा जाएगा।
मानसून सत्र के साथ बढ़ेगा टकराव?
संयोग से जिस दिन प्रदर्शनकारियों ने संसद घेराव का फैसला किया है, ठीक उसी दिन यानी 20 जुलाई से ही संसद का मानसून सत्र भी आरंभ होने जा रहा है। ऐसे में दिल्ली में राजनीतिक और सामाजिक हलचल बेहद तेज होने की उम्मीद है। अब पूरे देश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार मानसून सत्र की शुरुआत से पहले प्रदर्शनकारियों से बातचीत की मेज पर आती है, या फिर यह आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक उग्र रूप अख्तियार करेगा।
अंकित शर्मा केस: ताहिर हुसैन के साथ केजरीवाल पर भी BJP का हमला
14 Jul, 2026 03:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: साल 2020 में हुए दिल्ली दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो (IB) के अफसर अंकित शर्मा की नृशंस हत्या के मामले में अदालत ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित पांच अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया है। अदालत के इस फैसले के बाद देश का सियासी पारा पूरी तरह गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कोर्ट के इस निर्णय का पुरजोर स्वागत किया है, वहीं दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस आलाकमान पर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं। मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि ताहिर हुसैन को सीधे तौर पर अरविंद केजरीवाल का 'राजनीतिक संरक्षण' हासिल था और वह उन्हीं के दिशा-निर्देशों पर काम कर रहा था।
ताहिर के असली आका अरविंद केजरीवाल: भाजपा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अदालत के फैसले का जिक्र करते हुए गौरव भाटिया ने अरविंद केजरीवाल को इस पूरे घटनाक्रम का सह-आरोपी करार दिया। उन्होंने कहा कि वारदात के समय मुख्य आरोपी ताहिर हुसैन न सिर्फ आम आदमी पार्टी का पार्षद था, बल्कि वह केजरीवाल का बेहद करीबी भी था। अब जब अदालत ने ताहिर हुसैन को हत्या (IPC 302), अपहरण (IPC 365) और समाज में नफरत फैलाने (IPC 153A) जैसी गंभीर धाराओं के तहत दोषी मान लिया है, तो इसके पीछे की बड़ी साजिश से भी पर्दा उठना चाहिए। भाटिया ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले के पीछे असली दिमाग अरविंद केजरीवाल का था, जिन्होंने न सिर्फ इस साजिश को शह दी बल्कि बाद में मामले को दबाने का प्रयास भी किया। उन्होंने सवाल उठाया कि दिल्ली का मुख्यमंत्री रहते हुए भी केजरीवाल ने अंकित शर्मा या दंगों में जान गंवाने वाले अन्य निर्दोष नागरिकों के हक में एक शब्द भी क्यों नहीं बोला।
मजहबी पहचान के कारण हुई अंकित की बर्बर हत्या
भाजपा प्रवक्ता ने अदालत की टिप्पणियों को रेखांकित करते हुए कहा कि यह पूरी घटना एक सोची-समझी और गहरी साजिश का नतीजा थी, जिसका मकसद एक खास समुदाय को निशाना बनाना था। उन्होंने कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि जब अंकित शर्मा भीड़ की तरफ बढ़े, तब ताहिर हुसैन ने ही दंगाइयों को उकसाया था। अदालत ने भी माना है कि यह पूरी साजिश हिंदू विरोधी मानसिकता के तहत रची गई थी और अंकित को सिर्फ उनकी धार्मिक पहचान के कारण मौत के घाट उतारा गया। अंकित के शरीर पर मिले चाकू के 51 घाव इस बात का सबूत हैं कि दंगाइयों ने किस कदर क्रूरता की सारी हदें पार कर दी थीं।
वोट बैंक के लिए दंगाइयों के साथ खड़ी है 'आप'
आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान द्वारा अदालत के इस फैसले को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताए जाने पर भाजपा ने कड़ा ऐतराज जताया है। गौरव भाटिया ने कहा कि कोर्ट के फैसले पर इस तरह की टिप्पणी करना आम आदमी पार्टी के असली चरित्र और उसके डीएनए को उजागर करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सिर्फ और सिर्फ अपनी वोट बैंक की सियासत चमकाने के लिए अपराधियों और दंगाइयों के पक्ष में खड़ी नजर आ रही है, जो बेहद निंदनीय है।
E-20 फ्यूल पर घमासान, केजरीवाल ने सबूतों के साथ मुकाबले का किया दावा
14 Jul, 2026 03:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने देश में बढ़ रहे ई-20 पेट्रोल के इस्तेमाल और उससे जुड़े उपभोक्ताओं के हितों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने केंद्र सरकार से ई-20 ईंधन की कीमतों में तत्काल कटौती करने की अपील की है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का तर्क है कि ई-20 पेट्रोल का माइलेज सामान्य पेट्रोल की तुलना में कम होता है, इसलिए इसकी बाजार कीमत भी उसी अनुपात में कम तय की जानी चाहिए। इस महत्वपूर्ण विषय पर विस्तृत चर्चा के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात का समय भी मांगा है।
कम माइलेज के बदले कम कीमत की मांग
अरविंद केजरीवाल ने अपने बयान में कहा कि पर्यावरण को बचाने और कच्चे तेल के आयात को कम करने के लिए पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाने (ई-20) का सरकार का फैसला स्वागत योग्य है, लेकिन इसका आर्थिक बोझ आम जनता पर नहीं डाला जाना चाहिए। उन्होंने तकनीकी रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि ई-20 ईंधन के इस्तेमाल से वाहनों की माइलेज में गिरावट आती है, जिसका सीधा मतलब है कि जनता को उतने ही पैसों में कम दूरी तय करने को मिल रही है। ऐसे में यह तार्किक है कि ई-20 पेट्रोल को सामान्य ईंधन के मुकाबले सस्ते दामों पर बेचा जाए ताकि वाहन चालकों को नुकसान न हो।
प्रधानमंत्री से मुलाकात की इच्छा
इस संवेदनशील और सीधे जनता से जुड़े मुद्दे पर गंभीरता दिखाते हुए आम आदमी पार्टी के प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से व्यक्तिगत रूप से मिलने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि वे इस विषय पर आम उपभोक्ताओं, विशेषकर मध्यम वर्ग और वाहन मालिकों की चिंताओं को प्रधानमंत्री के सामने रखना चाहते हैं। केजरीवाल के अनुसार, यदि सरकार इस ईंधन पर टैक्स या बेस प्राइस कम करती है, तो इससे न केवल लोगों को राहत मिलेगी बल्कि देश में वैकल्पिक और हरित ईंधन को लेकर जनता का भरोसा भी बढ़ेगा।
राहुल गांधी के आरोपों पर आयोजकों का जवाब, बोले- तथ्यों के बिना न करें राजनीति
14 Jul, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में आयोजित 'मेलबर्न मीट्स मोदी' भव्य समारोह के आयोजकों ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नाम एक खुला पत्र जारी किया है। इस खत के जरिए आयोजकों ने कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें कार्यक्रम में आई भीड़ को 'पेड क्राउड' यानी पैसे देकर बुलाई गई भीड़ कहा गया था। आयोजन समिति ने कांग्रेस के दोनों शीर्ष नेताओं से अपने विवादित बयान को वापस लेने और भारतीय समुदाय से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की पुरजोर मांग की है।
'मोदी एयरवेज' और आत्मनिर्भर प्रवासी
यह खुला खत उन प्रवासी स्वयंसेवकों (वॉलंटियर्स) की ओर से लिखा गया है, जिन्होंने 9 जुलाई को मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में हुए इस कार्यक्रम के लिए सिडनी से मेलबर्न तक 'मोदी एयरवेज' नामक एक विशेष चार्टर्ड फ्लाइट की व्यवस्था की थी। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि इस ऐतिहासिक यात्रा या कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों के आने-जाने और ठहरने का खर्च न तो भारतीय जनता पार्टी ने उठाया, न भारत सरकार ने और न ही ऑस्ट्रेलिया सरकार ने। इस फ्लाइट में सफर करने वाले सभी अप्रवासियों ने अपने टिकट और ठहरने का पूरा खर्च खुद अपनी जेब से वहन किया था, जबकि कुछ लोगों की मदद स्थानीय समुदाय ने की थी।
घरेलू राजनीति के चक्कर में प्रवासियों का अपमान
आयोजन टीम के सदस्य अमित कारंत ने इस पूरे मामले पर गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि सिडनी, एडिलेड, पर्थ और ब्रिस्बेन जैसे ऑस्ट्रेलिया के दूर-दराज के शहरों से लोग अपनी मर्जी और उत्साह के साथ मेलबर्न पहुंचे थे। इसमें किसी भी राजनीतिक दल या सरकारी संस्था का कोई वित्तीय योगदान नहीं था। खत में जोर देकर कहा गया है कि कांग्रेस नेताओं द्वारा इस स्वैच्छिक आयोजन को 'प्रायोजित' बताना वहां रहने वाले हजारों भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों की ईमानदारी और उनकी स्वतंत्र सोच का अपमान है। इस विशेष विमान में ऑस्ट्रेलियाई नागरिक, स्थायी निवासी, कामकाजी पेशेवर, उद्योगपति, छात्र और बुजुर्ग शामिल थे, जिन्हें भाड़े की भीड़ कहना प्रवासियों की गरिमा को ठेस पहुंचाना है। पत्र के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया का भारतीय समाज किसी एक विचारधारा से नहीं बंधा है; वहां हर दल के समर्थक और राजनीति से दूर रहने वाले लोग भी शामिल हैं।
वॉलंटियर्स की महीनों की मेहनत और तीन बड़ी मांगें
स्वयंसेवकों का कहना है कि इस चार्टर्ड विमान सेवा को धरातल पर उतारने के लिए महीनों की कड़े परिश्रम, कागजी कार्रवाई और यात्रियों से तालमेल की आवश्यकता पड़ी थी। कई प्रवासियों ने अपने व्यापार और परिवारों को छोड़कर दिन-रात इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना योगदान दिया। इसी कड़ी मेहनत का हवाला देते हुए आयोजकों ने कांग्रेस नेतृत्व के सामने तीन मुख्य मांगें रखी हैं:
कांग्रेस सार्वजनिक रूप से स्वीकार करे कि इस फ्लाइट के लिए बीजेपी या भारत सरकार ने कोई पैसा नहीं दिया।
जनता को पैसे देकर जुटाने वाले सभी निराधार आरोप तुरंत वापस लिए जाएं।
इस पूरे आयोजन से जुड़े वॉलंटियर्स, यात्रियों और ऑस्ट्रेलिया के समस्त भारतीय समुदाय से बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगी जाए।
मार्वल स्टेडियम में उमड़ा था जनसैलाब
9 जुलाई को मेलबर्न के ऐतिहासिक मार्वल स्टेडियम में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में रिकॉर्ड 30 हजार से अधिक लोग जुटे थे। इस दौरान मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और विक्टोरिया प्रांत की प्रीमियर जैसिंटा एलन भी विशेष रूप से उपस्थित थीं। आयोजकों ने अंत में कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को भारत के भीतर विरोध करने का पूरा लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन देश की अंदरूनी राजनीति के लिए सात समंदर पार बैठे भारतीय प्रवासियों को निशाना बनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
युवा कांग्रेस ने भरी चुनावी हुंकार, CM बोले— अब परंपरा नहीं, इतिहास बनेगा
14 Jul, 2026 12:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शिमला: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा पता नहीं किस खयाली दुनिया में जी रही है और उन्हें जाने क्यों ऐसा लगता है कि प्रदेश में सत्ता बदलने की पुरानी परंपरा जारी रहेगी। सीएम सुक्खू ने दांव के साथ कहा कि इस मर्तबा हिमाचल में परंपरा नहीं, बल्कि इतिहास बदलेगा। उन्होंने विरोधियों को तंज कसते हुए याद दिलाया कि वे शायद भूल गए हैं कि वे जब भी किसी पद पर रहे हैं, लंबे समय तक रहे हैं—चाहे वह एनएसयूआई के अध्यक्ष का कार्यकाल हो, युवा कांग्रेस का अध्यक्ष पद हो या फिर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी। मुख्यमंत्री सोमवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में युवा कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के शुभारंभ के अवसर पर संबोधित कर रहे थे।
नीट पेपर लीक और अग्निवीर योजना पर केंद्र को घेरा
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि हाल ही में हुए नीट (NEET) पेपर लीक मामले ने देश के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य और उनके सपनों को चकनाचूर कर दिया है। युवाओं के भविष्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
छात्रों की गूंज अभियान: इस अभियान के माध्यम से युवा कांग्रेस पूरे प्रदेश में धरना-प्रदर्शन आयोजित कर छात्रों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को उठाएगी और जनता को जागरूक करेगी।
अग्निवीर योजना पर प्रहार: सीएम ने कहा कि केंद्र की अग्निवीर योजना ने हिमाचल के वीर युवाओं के साथ सरासर अन्याय किया है। इसके विपरीत, राज्य की कांग्रेस सरकार पुलिस सहित विभिन्न सरकारी विभागों में पूरी पारदर्शिता के साथ नियमित भर्तियां कर रही है।
शोक प्रस्ताव: कार्यक्रम के दौरान नीट पेपर लीक के तनाव के चलते जान गंवाने वाले 21 छात्रों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन भी रखा गया।
शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े सुधारों का दावा
पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके कार्यकाल में पुलिस भर्ती और अधीनस्थ चयन आयोग के पेपर लीक हुए थे, जिसे बंद कर वर्तमान सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए 'राज्य चयन आयोग' का गठन किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में देश का नंबर-वन राज्य बनाना उनका संकल्प है। वर्ष 2021 में गुणात्मक शिक्षा के मामले में हिमाचल 21वें स्थान पर खिसक गया था, जो अब सुधारे गए प्रयासों से 5वें स्थान पर आ गया है। सरकार अब प्रदेश में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस सीबीएसई स्कूल स्थापित कर रही है। इसके साथ ही, स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने के लिए दिल्ली एम्स (AIIMS) की तर्ज पर आधुनिक मशीनें और उपकरण अस्पतालों में उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
छात्र राजनीति की पृष्ठभूमि और कार्यकर्ताओं को तरजीह
अपनी सियासी पारी को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका राजनीतिक सफर छात्र राजनीति की जमीनी हकीकत से शुरू हुआ था और कांग्रेस पार्टी ने ही उन्हें आज सूबे के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने का मौका दिया है। उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में बनी पंचवर्षीय योजनाओं, आईआईटी और एम्स जैसे संस्थानों का जिक्र करते हुए कांग्रेस की मजबूत विकासवादी सोच को सराहा।
इस दौरान युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष छत्तर सिंह द्वारा संगठन के सक्रिय पदाधिकारियों को सरकार में समायोजित करने की मांग पर मुख्यमंत्री ने बड़ा भरोसा दिया। सीएम सुक्खू ने घोषणा की कि युवा कांग्रेस जिन भी जिला अध्यक्षों के नामों की सूची उन्हें सौंपेगी, उन सभी को सरकार की 'शिकायत निवारण समितियों' में सदस्य के रूप में शामिल कर उचित तवज्जो दी जाएगी।
अयोध्या चंदा विवाद में सियासी बयानबाजी तेज
14 Jul, 2026 12:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अयोध्या: देश-विदेश के करोड़ों रामभक्तों की आस्था के केंद्र अयोध्या धाम से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने देश की सियासत में हलचल तेज कर दी है। प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए मिले चंदे में कथित वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की बात करने वाले प्रधानमंत्री इस बेहद संवेदनशील और आस्था से जुड़े मुद्दे पर मौन साधे हुए हैं।
कांग्रेस का देशव्यापी हल्लाबोल: 4 दिनों में 50 प्रेस कॉन्फ्रेंस
कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक बेहद आक्रामक पोस्ट साझा कर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लिया। उन्होंने इसे देश की जनता और भक्तों के साथ विश्वासघात करार दिया।
जयराम रमेश ने अपने बयान में कहा:
"आस्था से खिलवाड़ और चंदे की चोरी! आखिर अयोध्या धाम में प्रभु श्री राम के मंदिर निर्माण के चंदे में हुई इस सुनियोजित हेराफेरी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रहस्यमयी चुप्पी क्या दर्शाती है? क्या यह जनता के भरोसे के साथ धोखा नहीं है? भ्रष्टाचार पर 'ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा' का नारा देने वाले प्रधानमंत्री पिछले एक महीने से इस गंभीर धांधली पर मौन क्यों हैं? देश उनसे जवाब मांग रहा है।"
कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। जयराम रमेश के मुताबिक, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने पिछले चार दिनों के भीतर देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में 50 से अधिक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सीधे सरकार को घेरा है और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है।
कोर्ट का कड़ा रुख: 8 आरोपी जेल में, अब 27 जुलाई को होगी सुनवाई
सियासी घमासान के बीच इस मामले पर कानूनी शिकंजा भी कसता जा रहा है। अयोध्या की स्थानीय अदालत ने चंदा गबन मामले के सभी आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत और 14 दिनों के लिए बढ़ा दी है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी: सुरक्षा और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी आठ आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट के समक्ष पेश किया गया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।
अहम सबूत दाखिल: मामले की जांच कर रहे विवेचक (IO) आशुतोष तिवारी ने एंटी-करप्शन कोर्ट में रिमांड के दौरान आरोपियों के पास से बरामद किए गए महत्वपूर्ण दस्तावेज और साक्ष्य पेश किए हैं, जिससे आरोपियों की कानूनी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
सुप्रीम कोर्ट की एंट्री: केंद्र, यूपी सरकार और ट्रस्ट को नोटिस
इस मामले में सबसे बड़ा कानूनी मोड़ तब आया जब देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने राम मंदिर चंदे में कथित गबन और हेराफेरी की स्वतंत्र व कोर्ट-निगरानी में जांच (Court-Monitored Probe) की मांग वाली याचिकाओं पर संज्ञान लिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए:
केंद्र सरकार
उत्तर प्रदेश सरकार
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट
इन तीनों पक्षों को नोटिस जारी कर इस पूरे मामले पर उनका जवाब तलब किया है। कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब इस मामले की जांच के दायरे और पारदर्शिता को लेकर प्रशासनिक दबाव बेहद बढ़ गया है।
आखिर क्यों बार-बार विवादों में आता है राम मंदिर का चंदा?
यह पहली बार नहीं है जब राम मंदिर के पैसों या जमीन को लेकर इस तरह के गंभीर आरोप लगे हैं। इससे पहले भी ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे हैं:
2021 का जमीन खरीद विवाद: साल 2021 में भी विपक्षी दलों (विशेषकर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस) ने आरोप लगाया था कि अयोध्या में मंदिर के पास की एक जमीन, जिसे एक शख्स ने ₹2 करोड़ में खरीदा था, उसे महज कुछ ही मिनटों बाद राम मंदिर ट्रस्ट को ₹18.5 करोड़ में बेच दिया गया। हालांकि, ट्रस्ट ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था।
करोड़ों भक्तों की भावनाएं दांव पर: राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पास अब तक देश-विदेश से ₹3,500 करोड़ से अधिक का दान आ चुका है। इसमें ऑनलाइन ट्रांसफर, चेक, सोने-चांदी के आभूषण और नकद शामिल हैं। इतनी बड़ी धनराशि के प्रबंधन में जरा सी भी चूक या धोखाधड़ी सीधे तौर पर करोड़ों भक्तों की धार्मिक भावनाओं को आहत करती है।
पारदर्शिता की उठ रही मांग: राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के घोटालों और फर्जी रसीदों के जरिए होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए ट्रस्ट को अपनी ऑडिट रिपोर्ट और दानकर्ताओं की सूची को पूरी तरह सार्वजनिक और डिजिटल रूप से पारदर्शी बनाना चाहिए, ताकि कोई भी असामाजिक तत्व धर्म के नाम पर ठगी न कर सके।
पार्टी में बढ़ी कलह, NCP पर संकट के संकेत
14 Jul, 2026 11:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के कद्दावर नेता अजित पवार के निधन के बाद पार्टी की कमान संभालने वाली सुनेत्रा पवार के सामने इस समय सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा है। शुरुआती दौर में उन्हें संगठन और सरकार दोनों ही मोर्चों पर तेजी से जिम्मेदारियां सौंपी गईं, लेकिन अब उनके नेतृत्व और कार्यप्रणाली को लेकर पार्टी के भीतर ही गंभीर सवाल और असंतोष उभरने लगा है।
नेतृत्व और राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव पर उठे सवाल
एनसीपी के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के कई वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं ने संगठन की वर्तमान कार्यप्रणाली पर खुलकर आपत्ति जताई है। बताया जा रहा है कि असंतोष की मुख्य वजह राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया है, जिसे पार्टी का एक धड़ा पूरी तरह अपारदर्शी मान रहा है। इस मामले को अब कानूनी चुनौती भी दी जा चुकी है, जिससे यह बहस तेज हो गई है कि क्या सुनेत्रा पवार पार्टी के सभी गुटों और दिग्गज नेताओं को एक साथ बांधकर रख पाएंगी या पार्टी में बिखराव और गहरा होगा।
भावनात्मक समर्थन बनाम संगठनात्मक क्षमता
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अजित पवार जैसे कद्दावर और जमीनी पकड़ रखने वाले नेता के बाद एनसीपी जैसी क्षेत्रीय शक्ति का नेतृत्व करना बेहद जटिल काम है। पार्टी में कई ऐसे वरिष्ठ नेता हैं जिनकी अपनी मजबूत राजनीतिक जमीन है। ऐसे में जानकारों का कहना है कि:
सुनेत्रा पवार केवल अजित पवार के नाम पर मिलने वाले भावनात्मक समर्थन के भरोसे लंबे समय तक पार्टी नहीं चला सकतीं।
उन्हें अपनी संगठनात्मक क्षमता, कूटनीतिक कौशल और राजनीतिक संतुलन के दम पर खुद को साबित करना होगा।
सभी वरिष्ठों को उचित सम्मान और निर्णयों में हिस्सेदारी देकर ही वह अपनी स्थिति को सुरक्षित कर सकती हैं।
समर्थक और विरोधी गुटों के अपने-अपने तर्क
इस पूरे विवाद पर पार्टी दो धड़ों में बंटी नजर आ रही है। सुनेत्रा पवार के समर्थकों का तर्क है कि उन्होंने अत्यंत कठिन और संकटपूर्ण समय में आगे बढ़कर पार्टी का नेतृत्व संभाला और संगठन को बिखरने से बचाया। समर्थकों को भरोसा है कि यह शुरुआती असंतोष है जो समय के साथ धीरे-धीरे शांत हो जाएगा। इसके विपरीत, विरोधी गुट का कहना है कि यह किसी व्यक्ति का नहीं बल्कि पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रक्रियाओं का मामला है। वे संगठन में लिए जा रहे एकतरफा फैसलों की समीक्षा की मांग पर अड़े हैं।
एनसीपी के भविष्य पर पड़ेगा सीधा असर
आने वाले दिन महाराष्ट्र की राजनीति और खुद एनसीपी के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं। यदि सुनेत्रा पवार समय रहते पार्टी के भीतर पनप रहे इस असंतोष को दबाने या असंतुष्ट नेताओं को मनाने में नाकाम रहती हैं, तो इसका सीधा असर आगामी चुनावों में पार्टी की राजनीतिक ताकत और साख पर पड़ेगा। वहीं, यदि वह सभी गुटों में समन्वय स्थापित कर लेती हैं, तो यह उनके नेतृत्व की एक बड़ी राजनीतिक जीत होगी।
बक्सर से ग्लोबल सफर, कैसी रही प्रशांत किशोर की पढ़ाई
14 Jul, 2026 11:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बक्सर/पटना: बिहार के सियासी गलियारे में इन दिनों बयानों के तीर और राजनीतिक बिसात बिछाने का खेल चरम पर है. इसी बीच जन सुराज पार्टी के प्रणेता प्रशांत किशोर के राजनीतिक भविष्य और उनके अतीत को लेकर भी चर्चाओं का बाजार काफी गर्म हो गया है. चुनावी रणनीतियों के परदे के पीछे से निकलकर सीधे सक्रिय राजनीति के मैदान में उतरे प्रशांत किशोर अक्सर मौजूदा नेताओं के ज्ञान और उनकी दूरदर्शिता पर तीखे सवाल खड़े करते दिखाई देते हैं.
विपक्ष ने घेरा तो खुला शैक्षणिक रिकॉर्ड
जब प्रशांत किशोर ने अन्य नेताओं की समझ को चुनौती देना शुरू किया, तो पलटवार में विपक्षी दलों ने खुद उनकी अपनी योग्यता को ही कठघरे में खड़ा कर दिया. विरोधियों की ओर से लगातार यह सवाल उछाला जाने लगा कि देश के बड़े-बड़े दिग्गजों को चुनाव जिताने का दावा करने वाले प्रशांत किशोर खुद कितने शिक्षित हैं और उनका शैक्षणिक इतिहास क्या रहा है. इस सियासी घमासान और कयासों के बीच अब उनके एक चुनावी हलफनामे ने इस पूरे विवाद पर विराम लगा दिया है, जिसमें उनकी पढ़ाई-लिखाई का पूरा ब्यौरा साफ-साफ दर्ज है.
स्कूली शिक्षा से लेकर कॉलेज तक का सफर
चुनावी दस्तावेज के अनुसार प्रशांत किशोर की शुरुआती और उच्च माध्यमिक शिक्षा बिहार में ही संपन्न हुई है. उन्होंने साल 1991 में बक्सर के एम.पी. हाई स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी. इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने राजधानी का रुख किया और साल 1993 में पटना के विख्यात पटना साइंस कॉलेज से इंटरमीडिएट (विज्ञान) की पढ़ाई पूरी की.
प्रबंधन की डिग्री और विदेशी भाषा का ज्ञान
हलफनामे के मुताबिक अपनी शुरुआती पढ़ाई के बाद प्रशांत किशोर ने प्रबंधन (मैनेजमेंट) की राह चुनी. उन्होंने साल 1996 से 1999 के दौरान लखनऊ विश्वविद्यालय के बिजनेस स्टडीज विभाग से बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन यानी बीबीए की डिग्री हासिल की. इसके बाद उन्होंने साल 2003 में हैदराबाद के एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया से मास्टर ऑफ हेल्थकेयर एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई पूरी की, जो कि अमेरिका की प्रसिद्ध जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के सहयोग से चलाया जाने वाला एक विशेष कोर्स था. इतना ही नहीं, उन्होंने साल 2010 में फ्रांस के एक संस्थान से गहन फ्रेंच भाषा का डिप्लोमा भी प्राप्त किया है.
16 जुलाई को विपक्ष करेगा शक्ति प्रदर्शन
14 Jul, 2026 10:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: संसद के आगामी मानसून सत्र को लेकर देश में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। मोदी सरकार को विधायी और नीतिगत मोर्चों पर घेरने के लिए विपक्षी गठबंधन ने एक बड़े महामंथन की तैयारी कर ली है। आगामी 16 जुलाई को कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी के दिल्ली स्थित आवास 10 जनपथ पर विपक्ष की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक बैठक बुलाई गई है।
दो-तिहाई बहुमत की मंशा पर ब्रेक लगाने की तैयारी
इस हाई-प्रोफाइल बैठक के पीछे कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य पूरे विपक्ष को एक मजबूत बैनर तले एकजुट करना है। विपक्षी रणनीतिकारों का मानना है कि इस संयुक्त मोर्चे के जरिए दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में सरकार की दो-तिहाई बहुमत हासिल करने और अपनी इच्छा के अनुसार मनमाने विधेयक या संवैधानिक संशोधन पारित कराने की मंशा पर प्रभावी ढंग से ब्रेक लगाया जा सकता है।
इन तीन प्रमुख मुद्दों पर सरकार को घेरेगा विपक्ष
विपक्षी दलों ने इस सत्र के लिए सरकार को कटघरे में खड़ा करने के लिए तीन बेहद संवेदनशील और बड़े मुद्दों को चिन्हित किया है, जिन पर सदन में तीखी बहस होना तय माना जा रहा है:
पेपर लीक मामला: हाल ही में देश की बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आई धांधली और पेपर लीक के मुद्दे पर विपक्ष युवाओं की आवाज बनकर सरकार पर चौतरफा हमला करेगा।
ई-20 (इथेनॉल मिश्रण): पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E20) की नीति, इसके क्रियान्वयन और इससे जुड़ी आर्थिक व कृषि संबंधी चिंताओं को लेकर भी सरकार से तीखे सवाल पूछे जाएंगे।
चढ़ावा चोरी विवाद: धार्मिक स्थलों या अन्य स्रोतों से जुड़े चढ़ावा चोरी के हालिया मामलों को लेकर भी विपक्ष संसद में जवाबदेही की मांग करेगा।
राहुल, प्रियंका और खरगे ने खुद संभाली कमान
इस बार विपक्ष को एकजुट रखने और रणनीति को अचूक बनाने के लिए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने खुद कमान अपने हाथों में ले ली है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाcontent संयुक्त रूप से इस मोर्चे को आगे बढ़ा रहे हैं। खासकर दक्षिण भारत के अपने सबसे प्रमुख और मजबूत सहयोगी दल द्रमुक (DMK) को पूरी तरह से साथ बनाए रखने और विभिन्न मुद्दों पर उनकी सहमति हासिल करने के लिए कांग्रेस के इन शीर्ष नेताओं ने व्यक्तिगत रूप से कवायद तेज कर दी है।
खरीद-फरोख्त वाले बयान पर सीएम उमर पर कार्रवाई
14 Jul, 2026 08:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
श्रीनगर/जम्मू: जम्मू-कश्मीर की सियासत में इन दिनों भारी उबाल देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष सत पॉल शर्मा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बीच जुबानी जंग अब कानूनी लड़ाई में तब्दील हो गई है। भाजपा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को ₹100 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजा है, जिस पर पलटवार करते हुए उमर अब्दुल्ला ने इसे भाजपा का 'लव लेटर' करार दिया है।
₹100 करोड़ का कानूनी नोटिस और माफी की मांग
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सत पॉल शर्मा द्वारा भेजे गए इस कानूनी नोटिस में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर पार्टी की छवि धूमिल करने और बेहद बेबुनियाद आरोप लगाने का दावा किया गया है। नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि मुख्यमंत्री ने अगले सात दिनों के भीतर अपने आरोपों को वापस लेते हुए सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी, तो उनके खिलाफ ₹100 करोड़ के दीवानी और आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
क्या था मुख्यमंत्री का विवादित बयान?
इस पूरे सियासी घमासान की शुरुआत 11 जुलाई को श्रीनगर में आयोजित नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक सम्मेलन के दौरान हुई थी। वहां मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जनसभा को संबोधित करते हुए भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) का सनसनीखेज आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों को पाला बदलने के लिए ₹20 से ₹30 करोड़ नकद, मंत्री पद और जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करवाने का प्रलोभन दिया था। अब्दुल्ला ने यह भी कहा था कि रिश्वत की पेशकश करने वाला नेता देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) का एक नामचीन वकील है।
'मुझे लव लेटर मिला है' – उमर अब्दुल्ला का तीखा तंज
कानूनी नोटिस मिलने के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आक्रामक अंदाज में इस पर चुटकी ली। उन्होंने डिजिटल माध्यम से नोटिस मिलने की बात स्वीकार करते हुए इसे 'लव लेटर' (प्रेम पत्र) की संज्ञा दी। अब्दुल्ला ने तंज कसते हुए कहा, "मैं इसे अपने लिए बहुत बड़ा सम्मान मानता हूं, क्योंकि पूरे जम्मू-कश्मीर में मैं इकलौता ऐसा राजनेता हूं जिसे भाजपा से लव लेटर मिला है।" उन्होंने आगे आरोप लगाया कि यह भाजपा की कमजोरी और उनके लड़ने के अजीब तरीके को दर्शाता है, जहां वे राजनीतिक लड़ाई जमीन पर लड़ने के बजाय अदालतों की आड़ लेकर लड़ना चाहते हैं।
नामांकन से पहले और बाद में बयानबाजी तेज, दतिया उपचुनाव में बढ़ा राजनीतिक तापमान
13 Jul, 2026 04:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार कुंवर घनश्याम सिंह ने अपने भारी संख्या में समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। इस सियासी शक्ति प्रदर्शन के बाद कलेक्ट्रेट के पास स्थित भैरव मंदिर परिसर में एक विशाल आमसभा का आयोजन किया गया। जनसभा में पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, वरिष्ठ नेता राजेंद्र भारती और अशोक सिंह जैसे दिग्गज कांग्रेसी नेता कुछ विलंब से पहुंचे, लेकिन मंच पर आते ही उन्होंने उपस्थित कार्यकर्ताओं में जबरदस्त चुनावी जोश फूंक दिया।
विपक्ष पर तीखा तंज और पुराने जनादेश का भरोसा
नामांकन रैली और सभा के बाद मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेंद्र भारती बेहद आश्वस्त नजर आए। उन्होंने अंगूठा दिखाते हुए पूरे भरोसे के साथ कहा कि दतिया के मतदाताओं ने इस बार अपना मन पूरी तरह साफ कर लिया है। उनके अनुसार, साल 2023 के आम चुनाव में जनता ने जो जनादेश दिया था, उसे 2026 के इस उपचुनाव में भी पूरी ताकत के साथ दोहराया जाएगा। भारतीय जनता पार्टी के भीतर टिकट वितरण को लेकर मचे अंदरूनी घमासान पर चुटकी लेते हुए भारती ने कहा कि पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का पत्ता कटने से केवल कांग्रेसी ही नहीं, बल्कि दतिया का आम नागरिक भी बेहद राहत महसूस कर रहा है, क्योंकि लोग पिछले 20 वर्षों के शासन से पूरी तरह तंग आ चुके थे।
दिग्विजय सिंह का मीडिया पर गुस्सा और तीखा बयान
इस हाई-प्रोफाइल नामांकन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सभा से पहले विख्यात पीतांबरा पीठ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की और राज्य की खुशहाली की कामना की। हालांकि, मंदिर परिसर से बाहर निकलते ही जब पत्रकारों ने उनसे चुनाव को लेकर सवाल दागने शुरू किए, तो वे अपना आपा खो बैठे और कैमरे के सामने 'चल हट' कहते हुए आगे बढ़ गए। इसके बाद जब उनसे दोबारा राजनीतिक समीकरणों पर सवाल किया गया, तो उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि राजनीति को छोड़िए और राम मंदिर चंदे के मुद्दे पर बात कीजिए। उन्होंने सीधे तौर पर चंपत राय पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें गिरफ्तार करने की मांग की और कहा कि वे मोदी जी से चंदा चोरों को न बचाने की अपील करते हैं। उन्होंने साफ किया कि वे इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के रुख की परवाह किए बिना अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
भाजपा का पलटवार और कांग्रेस पर बौखलाहट का आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का पत्रकारों को झिड़कने वाला यह वीडियो सोशल मीडिया पर आते ही तेजी से वायरल हो गया, जिस पर सत्ताधारी दल भाजपा ने तत्काल और कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने इस आचरण की कटु निंदा करते हुए इसे कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की पत्रकारिता विरोधी मानसिकता का जीता-जागता प्रमाण बताया। अग्रवाल ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना मीडिया का अधिकार है और मर्यादा में रहकर जवाब देना नेताओं का कर्तव्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि दतिया में अपनी खिसकती राजनीतिक जमीन को देखकर कांग्रेस पूरी तरह बौखला गई है, जिसके कारण उनके बड़े नेता इस तरह की अमर्यादित भाषा का सहारा ले रहे हैं। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद अब सबकी निगाहें दतिया के मतदाताओं पर टिक गई हैं कि वे बदलाव चुनते हैं या निरंतरता।
बाघ सप्ताह के अंतर्गत वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में पॉम पेंटिग प्रतियोगिता का आयोजन
सुशासन का ‘सेवा सेतु’: नेतानार के फूलसिंह और रामबती को आवेदन के दिन ही मिला विवाह प्रमाण पत्र
डिजिटल क्रांति से जगमगाया अबूझमाड़
बाहरी आडंबरों से अलग है दादाजी धूनीवाले धाम, जहां आध्यात्मिक शक्ति का होता है अनुभव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा की पहल से समय पर उपचार ने बचाई 4 वर्षीय मासूम की जान
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा की पहल से दिव्यांग समझराम साहू को मिली बैटरी चलित मोटराइज्ड ट्रायसायकल
निशातपुरा रेलवे स्टेशन से भोपाल के विकास को मिलेगी नई रफ्तार : मंत्री सारंग
जौहर यूनिवर्सिटी को राहत, ध्वस्तीकरण आदेश पर रोक से टली कार्रवाई
पेपर लीक पर संसद में होगी बहस? सरकार-विपक्ष के बीच बनी सहमति के संकेत
