राजनीति
क्या बंगाल में मोदी मैजिक फिर चलेगा? BJP की माइक्रो प्लानिंग किन सीटों पर करेगी असर
6 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में जैसे-जैसे वोटिंग का समय नजदीक आ रहा है, वैसे वैसे ही सियासी पारा हाई होता जा रहा है. तमाम राजनीतिक दल अपने दमखम के साथ मैदान में उतर रहे हैं. 9 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल में अपने चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत करेंगे. वह एक दिन में 3 जनसभाओं को संबोधित करेंगे. बीजेपी इस चुनाव में दावा कर रही है कि वह सत्ता परिवर्तन करके ही रहेगी. यही वजह है कि पूरी जोर आजमाइश लगाई जा रही है.
बंगाल में जीत हासिल करने के लिए बीजेपी पिछले 5 सालों से ही मेहनत कर रही है. इस समय राज्य में कई केंद्रीय मंत्रियों के साथ-साथ कई राज्यों के मंत्री और नेताओं ने डेरा डाल रखा है. बंगाल में सत्ता की लड़ाई हर दिन तेज होती जा रही है.
किन इलाकों पर है बीजेपी की नजर
पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी ने बहुत पहले तय कर लिया था कि किन इलाकों में मेहनत की जरूरत है. खासतौर पर इस बार फोकस बॉर्डर वाले इलाकों में है. यही वजह है कि इन इलाकों में कई दिग्गज नेताओं की जनसभाएं आयोजित कराई जा रही हैं. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 6 अप्रैल को बंगाल पहुंचकर बोंगांव में रोड शो और नामांकन कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे.काकद्वीप में केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर की जनसभा भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है.
पीएम मोदी की सभा के बाद तेज होगा प्रचार
भारतीय जनता पार्टी ने तय किया है कि 9 अप्रैल को पीएम मोदी 3 जगहों पर जनसभाएं संबोधित करेंगे. इसके बाद ही चुनाव प्रचार को और तेज किया जाएगा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ साथ पार्टी के कई दिग्गज नेताओं की जन सभाएं आयोजित की जाएगी.
पीएम 9 अप्रैल को आसनसोल में जनसभा करेंगे, इसका फोकस औद्योगिक और हिंदी भाषी वोट बैंक रहने वाला है. दूसरी सभा तमलुक में आयोजित की जाएगी. इसका मुख्य फोकस ग्रामीण और तटीय बेल्ट की वोटों को अपने पाले में लाना है. तीसरी और आखिरी सभा बीरभूमि में आयोजित की जाएगी. यह इलाका राजनीतिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है. इसके साथ ही काफी संवेदनशील और हिंसा प्रभावित क्षेत्र भी है. यही वजह है कि यहां जनसभा को आयोजन किया जा रहा है.
बंगाल में किसके बीच मुख्य मुकाबला
पश्चिम बंगाल में इस बार मुकाबला बीजेपी और टीएमसी के बीच ही नजर आ रहा है. कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने खुद स्वीकार किया है कि उनकी पार्टी के लिए यह चुनाव काफी कठिन रहने वाला है. जबकि सीबीएम पहले ही राज्य में कमजोर स्थिति में पहुंच चुकी है. हालांकि कुछ सीटों पर स्थानीय राजनीतिक दल मजबूत स्थिति में नजर आ रहे हैं. जबकि पूरे प्रदेश की बात की जाए तो मुकाबला बीजेपी और टीएमसी के बीच है.
केरल की सियासत गरमाई, PM मोदी बोले- LDF सरकार की विदाई तय
5 Apr, 2026 12:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तिरुवल्ला (केरल) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि एलडीएफ सरकार की विदाई की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. केरल में भाजपा के नेतृत्व में राजग सत्ता में आएगा.
पठानमथिट्टा जिले में भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए की एक रैली में बोलते हुए, मोदी ने कहा कि राज्य में भगवा पार्टी के कार्यकर्ताओं ने केरल में लेफ्ट शासन को अलविदा कहने के लिए एक मजबूत मूड का संकेत दिया है.
राज्य में 140 विधानसभा सीटों के लिए 9 अप्रैल को चुनाव होंगे. अपने भाषण में, पीएम ने कहा कि अगर भाजपा राज्य में सत्ता में आती है, तो वह केरल में विकास सुनिश्चित करेगी जैसा कि उसने सात उत्तर-पूर्व राज्यों में से छह में किया है जहां वह सत्ता में है और गोवा में जहां ईसाई आबादी काफी है.
उन्होंने कहा कि केरल में बहुत क्षमता है, फिर भी विकास की दौड़ में यह दूसरे राज्यों से पीछे है. उन्होंने आरोप लगाया कि केरल के ग्रामीण इलाकों में बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर खराब था क्योंकि एलडीएफ और यूडीएफ ने उस पर ध्यान नहीं दिया.
पीएम ने कहा कि केंद्र की एनडीए सरकार ने केरल के विकास के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है, जबकि राज्य में अब तक भाजपा की सरकार नहीं है. उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार ने केरल में विकास पर कांग्रेस की यूपीए सरकारों से पांच गुना ज़्यादा खर्च किया है.
पीएम मोदी ने राज्य की लेफ्ट सरकार पर सबरी रेल प्रोजेक्ट में देरी करने का भी आरोप लगाया और दावा किया कि इससे तिरुवल्ला के लोगों को काफी नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा कि जब केरल में भाजपा की डबल इंजन वाली सरकार सत्ता में आएगी, तो सभी रुकावटें दूर हो जाएंगी. "यह मोदी की गारंटी है"
उन्होंने यह भी कहा कि पूरे देश में, अगर एनडीए की नीतियों से किसी ग्रुप को सबसे ज़्यादा फ़ायदा होता है, तो वह "मेरी मांएं, बहनें, बेटियां और महिलाएं हैं". मोदी ने नौकरी के लिए केरल से युवाओं के माइग्रेशन का भी जिक्र किया और कहा कि यह राज्य की सबसे बड़ी समस्या है. उन्होंने कहा कि केरल के विकास में भ्रष्टाचार और कम्युनलिज़्म दो सबसे बड़ी रुकावटें हैं और इसे दूर करने के लिए एलडीएफ को हराना जरूरी है.
प्रधानमंत्री मोदी ने रोडशो का नेतृत्व किया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में एक रोडशो का नेतृत्व किया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अपने अभियान को तेज कर दिया है
तिरुवल्ला में एक जनसभा के बाद, मोदी शाम को राज्य की राजधानी पहुंचे और यहां किल्लीपलम से 1.5 किलोमीटर लंबा रोडशो शुरू किया.
रोडशो में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और उत्साही समर्थक शामिल हुए और उन्होंने झंडे लहराते हुए तथा नारे लगाते हुए प्रधानमंत्री की एक झलक पाने की कोशिश की. राजीव चंद्रशेखर और आर श्रीलेखा समेत भाजपा के उम्मीदवार भी रोडशो में शामिल हुए. भाजपा के राज्य नेतृत्व को उम्मीद है कि मोदी के जोरदार प्रचार अभियान से उन्हें राज्य में जमीनी स्तर पर मजबूत पैठ बनाने और आगामी चुनावों में अच्छी खासी सीट पर जीत दर्ज करने में मदद मिलेगी.
क्या 2026 में बदलेगी सत्ता? ममता बनर्जी के दावे से सियासी हलचल
5 Apr, 2026 12:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
विधानसभा चुनाव पश्चिम बंगाल में है, लेकिन टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी दिल्ली को निशाने पर ले रही हैं. चुनावी रणनीति और उसे लागू करने में माहिर ममता बनर्जी का ‘दिल्ली चलो’ का नारा क्या वाकई में मोदी सरकार के लिए चिंता का सबब है? यह सवाल राजनीतिक गलियारों में उठने लगे हैं. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में भारतीय जनता पार्टी और केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला किया. उन्होंने अपने एक बयान में दावा है कि 2026 के आखिर तक नरेंद्र मोदी की सरकार गिर सकती है और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) का अगला राजनीतिक लक्ष्य “दिल्ली” होगा. उनके इस बयान ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की राजनीतिक सरगर्मी तेज हो चुकी है और बीजेपी-टीएमसी के बीच मुकाबला काफी आक्रामक होता जा रहा है. आप आखिर तक इस खबर को पढ़ते रहिए, फिर आप समझ पाएंगे कि ममता बनर्जी ने यह बयान किस संदर्भ में दिया, इसके पीछे की राजनीतिक रणनीति क्या है और इसका राष्ट्रीय राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है.
क्या कहा ममता बनर्जी ने?
एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी और केंद्र सरकार जनता के अधिकारों को कमजोर कर रही है और लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रियाओं और प्रशासनिक फैसलों के जरिए उनकी सरकार को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है. इसी संदर्भ में उन्होंने दावा किया कि केंद्र की सरकार ज्यादा समय तक नहीं टिकेगी और आने वाले समय में राजनीतिक परिस्थितियाँ बदल सकती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल में जीत के बाद उनकी पार्टी राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ी भूमिका निभाने का लक्ष्य रखती है और “दिल्ली को टारगेट” करेगी.
बंगाल चुनाव और बयान का संदर्भ
दरअसल, पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से राजनीतिक तापमान चरम पर है. चुनाव टीएमसी और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला देखा जा रहा है. पिछले चुनाव यानी 2021 में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने 215 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी थी, जबकि बीजेपी मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी थी. अब 2026 के चुनाव को दोनों पार्टियां प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देख रही हैं. ममता बनर्जी का यह बयान इसी चुनावी माहौल में आया है, जहां वे अपने समर्थकों को यह संदेश देना चाहती हैं कि टीएमसी केवल राज्य की राजनीति तक सीमित नहीं है बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चुनौती देने की क्षमता रखती है. यानी, दीदी का यह दांव अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को चार्ज करने के लिए है. वह किसी भी सूरत में बीजेपी के अंडरग्राउंड अग्रेसिव प्रचार को हावी नहीं होने देना चाहती. वह अपने बयान से सिद्ध करना चाहती हैं कि उनका कद पीएम नरेंद्र मोदी के बराबर है, और उसे वह बंगाल की जंग के बाद चुनौती देंगी.
चुनाव आयोग और बीजेपी पर आरोप
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और बीजेपी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि कुछ प्रशासनिक कदमों और चुनावी प्रक्रियाओं के जरिए राज्य सरकार की शक्तियों को कम करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाने या अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं के माध्यम से चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है. ऐसे आरोपों के जरिए वे यह संदेश देने की कोशिश कर रही हैं कि उनकी पार्टी “लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा” की लड़ाई लड़ रही है.
‘दिल्ली टारगेट’ का राजनीतिक मतलब?
ममता बनर्जी के “दिल्ली टारगेट” वाले बयान का सीधा मतलब अपनी टीम के मोराल को बूस्ट करने के साथ-साथ केंद्र की सत्ता को चुनौती देना है. टीएमसी लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रही है. पिछले कुछ वर्षों में पार्टी ने गोवा, त्रिपुरा और उत्तर-पूर्व के कुछ राज्यों में संगठन विस्तार की कोशिश की है. इसके अलावा कई विपक्षी नेताओं के साथ ममता बनर्जी की मुलाकातें भी इस रणनीति का हिस्सा मानी जाती हैं. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अगर टीएमसी 2026 में बंगाल में फिर से मजबूत जीत दर्ज करती है, तो ममता बनर्जी विपक्षी राजनीति में और अधिक प्रभावशाली नेता बन सकती हैं.
बीजेपी की रणनीति और जवाब
दूसरी ओर बीजेपी भी बंगाल को लेकर अंडरग्राउंड आक्रामक रणनीति अपना रही है. अंडरग्राउंड आक्रामक रणनीति से मतलब ठीक वैसे ही है, जैसे पार्टी ने हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली में अपने कैंपेन को अंजाम दिया. यानी, साइलेंट किलर की तरह पार्टी का कैंपेन मुहल्ला बैठकों और ड्राइंग रूम के जरिए किया जा रहा है. पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने दावा किया है कि 2026 के चुनाव में बंगाल में सत्ता परिवर्तन हो सकता है. बीजेपी का आरोप है कि राज्य में भ्रष्टाचार, प्रशासनिक विफलता और राजनीतिक हिंसा जैसी समस्याएं बढ़ी हैं. इसी मुद्दे को लेकर पार्टी ममता सरकार के खिलाफ अभियान चला रही है. इस तरह बंगाल चुनाव केवल राज्य की सत्ता का सवाल नहीं रह गया है, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत दे सकता है.
बंगाल चुनाव 2026: TMC की स्टार कैंपेनर लिस्ट सामने, जानें कौन-कौन शामिल
5 Apr, 2026 11:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव (West Bengal Election 2026) को लेकर सियासत गरमाई हुई है। इसी बीच तृणमूल कांग्रेस ने शनिवार को चुनाव के पहले चरण के लिए स्टार प्रचारकों की सूची जारी करती है। इसमें कुल 40 नाम शामिल हैं। पहले नंबर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम है। इसके अलावा राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी, मंत्री फिरहाद हकीम, नेता सुब्रत बक्शी, कल्याण बनर्जी और कई दिग्गज नेताओं को भी इस लिस्ट में शामिल किया है।
प्रचारकों की सूची में कई महिलाओं और मुस्लिम नेताओं को शामिल किया गया है। प्रतीक उर रहमान जो पिछले महीने ही CPI (M) को छोड़कर टीएमसी में शामिल हुए थे, वह भी चुनाव प्रचार में नजर आएंगे। इसके अलावा मुशर्रफ हुसैन को भी इस सूची में शामिल किया गया है।
सुब्रत बक्शी, चंद्रिमा भट्टाचार्य, सायोनी घोष, दीपक अधिकारी, श्रीकांत महतो, आदिति मुंशी, कोयल मल्लिक, बाबुल सुप्रियो, प्रतिमा मंडल, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, देवांगशु भट्टाचार्य स्नेहसीश चक्रवर्ती, जयप्रकाश मजूमदार और कुणाल घोष को भी शामिल किया गया है।
कई सितारों के नाम भी लिस्ट में शामिल
स्टार प्रचारकों की सूची में कई सितारों का नाम भी शामिल किया गया है। बांग्ला सिनेमा की लोकप्रिय एक्ट्रेस रचना बनर्जी, जून मालिया और राज चक्रबर्ती चुनाव प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं। इसके अलावा महुआ मोइत्रा, शत्रुघ्न सिन्हा, कीर्ति आजाद और क्रिकेटर यूसुफ पठान का नाम भी इस लिस्ट में जोड़ा गया है।
कब होंगे राज्य में चुनाव?
बंगाल में 294 विधानसभा सीटों के लिए मतदान दो चरणों में होने वाले हैं। पहला चरण 23 अप्रैल से शुरू होगा। वहीं दूसरे चरण की शुरुआत 29 अप्रैल 2026 से होने वाली है। परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। टीएमसी ने उम्मीदवारों की सूची मार्च में ही जारी कर दी थी। पूरे देश नजर बंगाल चुनाव पर टिकी हुई है। इस बार बीजेपी और टीएमसी के कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: बीजेपी ने जारी की 5वीं लिस्ट, कई सीटों पर फेरबदल
5 Apr, 2026 09:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को अपने उम्मीदवारों की पांचवीं और अंतिम लिस्ट जारी कर दी। इस घोषणा के साथ ही भाजपा ने राज्य की सभी 292 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। पांचवीं सूची में पांच नए उम्मीदवारों के नाम सामने आए हैं, जबकि तीन सीटों पर पार्टी ने अपने पहले घोषित प्रत्याशियों को बदल दिया है।
भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने इन नामों पर मुहर लगाई। यह लिस्ट जारी होने के बाद अब भाजपा राज्य की हर सीट पर सीधे तौर पर चुनाव मैदान में उतरने को तैयार है। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में कराने का ऐलान किया है, जिसके लिए राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
पांचवीं लिस्ट में किसे कहां से मिला टिकट?
कृष्णानगर उत्तर: तारकनाथ चटर्जी
कल्याणी: अनुपम बिस्वास
दम दम उत्तर: सौरव सिकदार
मध्यमग्राम: अनिंद्रद्य राजू बनर्जी
उलुबेरिया पूर्व: रुद्रप्रसाद बनर्जी
इन पांच नए नामों के साथ, भाजपा ने तीन विधानसभा सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों के नामों में संशोधन भी किया है। यह बदलाव रणनीतिक माना जा रहा है, ताकि पार्टी बेहतर प्रदर्शन कर सके।
तीन सीटों पर बदले गए प्रत्याशी
बशीरहाट उत्तर: अब कौशिक सिद्धार्थ उम्मीदवार होंगे।
विष्णुपुर: अब अभिजीत सरदार को मौका मिला है।
बेहाला पूर्व: अब शंकर सिकदार चुनाव लड़ेंगे।
इस तरह, भाजपा ने अपनी पांचवीं लिस्ट में कुल आठ उम्मीदवारों को लेकर फैसला किया है, जिसमें पांच नए और तीन संशोधित नाम हैं।
बंगाल की सभी 292 विधानसभा सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार घोषित
भाजपा ने पश्चिम बंगाल की 292 विधानसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया है। पार्टी ने अपनी पहली लिस्ट में 144 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया था। इसके बाद, दूसरी लिस्ट में 111, तीसरी लिस्ट में 19 और चौथी लिस्ट में 13 उम्मीदवारों के नाम सामने आए थे। अब पांचवीं लिस्ट के साथ, पार्टी ने सभी 292 सीटों पर अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं, जो चुनावी तैयारियों की गंभीरता को दर्शाता है।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान दो चरणों में होगा। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को निर्धारित है, जबकि दूसरे चरण के लिए मतदाता 29 अप्रैल को अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इन तारीखों के करीब आते ही राज्य में राजनीतिक गहमागहमी और बढ़ गई है।
चुनाव के बीच, विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता लगातार पश्चिम बंगाल का दौरा कर रहे हैं। वे जनसभाएं कर रहे हैं, रोड शो आयोजित कर रहे हैं और मतदाताओं को लुभाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। नेताओं के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गई है, जिसमें एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। भाजपा की कोशिश राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने और सत्ताधारी दल को चुनौती देने की है, जबकि अन्य दल भी अपनी रणनीति के तहत आगे बढ़ रहे हैं। सभी पार्टियां इस चुनाव को अपनी साख से जोड़कर देख रही हैं, जिससे मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है।
राज्यसभा क्रॉस वोटिंग मामला: कांग्रेस की डिसिप्लिनरी कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट
5 Apr, 2026 08:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा कांग्रेस की डिसिप्लिनरी एक्शन कमेटी (DAC) ने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने वाले पांच विधायकों को पार्टी से निलंबित करने की सिफारिश की है। दरअसल कमेटी ने अपनी रिपोर्ट ईमेल के जरिए प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह को सौंप दी है, जिसमें इन विधायकों के खिलाफ कड़ा एक्शन लेने की बात कही गई है। इस रिपोर्ट के बाद हरियाणा कांग्रेस में राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है, क्योंकि अब हाईकमान इन विधायकों के भविष्य पर अंतिम फैसला लेगा।
वहीं रिपोर्ट मिलने के बाद प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह इसे सीधे पार्टी हाईकमान को भेजेंगे। हाईकमान ही अब इन विधायकों पर अंतिम फैसला करेगा। अगर पार्टी इन विधायकों को सस्पेंड करती है, तो वे विधानसभा सदस्य बने रहेंगे, लेकिन सदन के अंदर पार्टी के व्हिप को मानने के लिए बाध्य होंगे। इसका मतलब है कि अगर कांग्रेस किसी विधेयक या प्रस्ताव पर व्हिप जारी करती है, तो इन निलंबित विधायकों को उसका पालन करना होगा, नहीं तो उनके खिलाफ आगे कार्रवाई हो सकती है।
DAC की बैठक में चर्चा हुई थी
दरअसल शुक्रवार को चंडीगढ़ में हुई DAC की बैठक में इस बात पर गहराई से चर्चा हुई थी कि पांचों विधायकों को ऐसी सजा दी जाए जिससे उन्हें भविष्य में सदन के अंदर मनमानी करने की कोई छूट न मिले। कमेटी का मकसद यह था कि ये विधायक न पूरी तरह पार्टी में रह पाएं और न ही पूरी तरह बाहर निकल पाएं, जिससे अंत में वे खुद ही पार्टी छोड़ने पर मजबूर हो जाएं। यह रणनीति विधायकों को सबक सिखाने और पार्टी के अंदर अनुशासन बनाए रखने के लिए अपनाई जा रही है।
DAC की बैठक लगभग सवा घंटे तक चली, जिसमें कई अहम घटनाक्रम हुए। सुबह 10 बजे नारायणगढ़ से विधायक शैली चौधरी और साढौरा से विधायक रेनू बाला ने अनुशासन समिति के चेयरमैन धर्मपाल मलिक को व्हाट्सएप पर एक टाइप किया हुआ पत्र भेजा। इसमें उन्होंने कोई भी फैसला लेने से पहले व्यक्तिगत पेशी (पर्सनल हियरिंग) का मौका मांगा था, जिसे कमेटी ने तुरंत स्वीकार कर लिया। शाम 4 बजे कमेटी की बैठक शुरू होने का समय तय था। इससे पहले ही दोनों विधायक शैली चौधरी और रेनू बाला चंडीगढ़ स्थित कांग्रेस मुख्यालय पहुंच गईं। रेनू बाला ने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की और सीधे अंदर चली गईं, जबकि शैली चौधरी ने कहा कि उन्हें बुलाया गया था, इसलिए वे यहां आई हैं।
अपना पक्ष रखने के लिए 10-10 मिनट का समय मिला
दोनों विधायकों को कमेटी के सामने अपना पक्ष रखने के लिए 10-10 मिनट का समय मिला। पहले रेनू बाला ने अपनी बात रखी और दोहराया कि उन्होंने राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को ही वोट दिया है। उनके बाद शैली चौधरी ने भी यही बात कही। सूत्रों के अनुसार, एक विधायक ने दावा किया कि उन्होंने अपना वोट कांग्रेस विधायक दल (CLP) के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा को दिखाया था, जबकि दूसरी विधायक ने कहा कि उन्होंने पार्टी प्रभारी बीके हरिप्रसाद को वोट दिखाया था।
दोनों विधायकों का पक्ष सुनने के बाद कमेटी के सदस्यों ने करीब एक घंटे तक आपस में चर्चा की है। इस दौरान कमेटी ने बाकी तीन विधायकों, पुन्हाना के मोहम्मद इलियास और हथीन के मोहम्मद इजराइल के लिखित जवाबों को भी पढ़ा है। सूत्रों के अनुसार, कमेटी इस बात पर एकमत रही है कि विधायकों को कड़ा संदेश दिया जाना चाहिए, लेकिन इस दौरान तकनीकी पेचीदगियों पर भी गहराई से विचार किया गया है। चूंकि पुन्हाना विधायक मोहम्मद इलियास और हथीन विधायक मोहम्मद इजराइल ने शोकॉज नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया था, इसलिए कमेटी ने पहली नजर में यह मान लिया है कि उन्होंने क्रॉस वोटिंग की है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, क्रॉस वोटिंग के आरोपी विधायकों को लेकर दो मुख्य विकल्पों पर चर्चा हुई है उन्हें निलंबित किया जाए या पार्टी से बाहर निकाला जाए। दोनों ही स्थितियों में विधायकों की विधानसभा सदस्यता पर तुरंत कोई खतरा नहीं होगा। निलंबन की स्थिति में, जैसा कि पहले बताया गया है, पार्टी का व्हिप मान्य होगा। इसका अर्थ यह है कि अगर कांग्रेस सदन में किसी भी मामले में व्हिप जारी करती है, तो इन विधायकों को उसका पालन करना अनिवार्य होगा। अगर वे व्हिप का उल्लंघन करते हैं, तो उन पर दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है।
Kerala में माकपा में दरार, सुधाकरण ने सीएम Pinarayi Vijayan पर साधा निशाना
4 Apr, 2026 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तिरुवनंतपुरम। केरल की सियासत में इन दिनों वह हो रहा है जो फिल्मों में होता है! वामपंथ के सबसे मजबूत किलों में से एक अलप्पुझा में कुछ ऐसा हुआ है, जिसकी गूंज तिरुवनंतपुरम के सत्ता के गलियारों तक बहुत जोर से सुनाई दे रही है। दरअसल, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआईएम) के कद्दावर नेता जी सुधाकरण ने बगावत की लाल झंडी उठा ली है। उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हालांकि, इसमें अब तक की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दशकों तक कम्युनिस्ट विचारधारा को जीने वाले सुधाकरण ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ मंच साझा किया।
विजयन पर बरसे सुधाकरण
जी सुधाकरण ने कहा कि मैंने कम्युनिस्ट पार्टी में 63 साल गुजारे हैं। जब मैं 15 साल का था, तब पार्टी से जुड़ा था। मेरा अपना एक लंबा राजनीतिक इतिहास है। उन्होंने कहा कि 1967 के दौर में जब वह खुद जमीन पर काम कर रहे थे, तब विजयन को त्रावणकोर और दक्षिण केरल में कोई जानता तक नहीं था। वह सिर्फ मालाबार के थालास्सेरी तक ही सीमित थे।
राहुल गांधी ने किया स्वागत
राहुल गांधी ने इस मौके का पूरा फायदा उठाया। उन्होंने मंच से सुधाकरण का गर्मजोशी से स्वागत किया। राहुल ने कहा कि आज वामपंथ अपनी विचारधारा खो चुका है और उसकी बुनियाद कमजोर हो गई है। यही वजह है कि सुधाकरण जैसे कद्दावर और सच्चे नेताओं को कांग्रेस और यूडीएफ के साथ आना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में माकपा ने सुधाकरण को किनारे कर दिया था, जिसके बाद से वह शांत बैठे थे। लेकिन इस बार चुनाव से ठीक पहले उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान कर दिया। कांग्रेस की अगुवाई वाले गठबंधन यूडीएफ ने तुरंत उन्हें अपना समर्थन दे दिया, जिससे अलप्पुझा की लड़ाई अब बेहद रोमांचक हो गई है।
भावुक होकर किया 'शहीद' भाई को याद
सुधाकरण सिर्फ राजनीतिक हमले तक ही सीमित नहीं रहे। उन्होंने एक बेहद भावुक मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि विजयन के नेतृत्व वाली माकपा ने उनके शहीद भाई की कानूनी लड़ाई में भी परिवार का साथ नहीं दिया। उन्हें अपने भाई के लिए न्याय की लड़ाई अकेले अपने पैसों के दम पर लड़नी पड़ी।
ममता बनर्जी का बड़ा दावा: शांति के लिए BJP को सत्ता से बाहर करना होगा, एकजुटता का आह्वान
4 Apr, 2026 04:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता | पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लोगों से आने वाले विधानसभा चुनाव में BJP को हराने के लिए एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अगर लोग अगले 5 साल शांति से रहना चाहते हैं, तो उन्हें BJP को रोकना होगा।
BJP धर्म के नाम पर लोगों को बांटती- ममता बनर्जी
सीएम ममता बनर्जी शनिवार को मालदा जिले के मानिकचक में एक जनसभा को संबोधित कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने BJP पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि BJP धर्म के नाम पर लोगों को बांटती है और राज्य में अशांति फैलाने की कोशिश करती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की एजेंसियों जैसे NIA, CBI और ED का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है। उनके मुताबिक, इन एजेंसियों के जरिए उनकी पार्टी के नेताओं और उम्मीदवारों पर दबाव बनाया जा रहा है।मुख्यमंत्री ने कहा कि BJP बंगाल की संस्कृति को नहीं समझती। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यहां माँ काली के प्रसाद में मछली और मांस भी शामिल होता है, लेकिन BJP लोगों पर अपनी सोच थोपना चाहती है।ममता बनर्जी ने लोगों से अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं। उन्होंने दावा किया कि मालदा में बेगुनाह लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है और माहौल खराब करने की कोशिश हो रही है।
BJP और कांग्रेस के बीच गुप्त समझौते का आरोप
उन्होंने BJP और कांग्रेस के बीच गुप्त समझौते का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि अगर दूसरी पार्टियों को वोट दिया गया, तो NRC लागू हो सकता है और डिटेंशन कैंप बनाए जा सकते हैं। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार किसी को भी ऐसे कैंप में नहीं जाने देगी।मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गरीब लोगों के खाने-पीने तक में दखल दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राज्यों में बंगाली बोलने वालों के साथ हिंसा होती है और प्रवासी मजदूरों को वोट डालने से रोका जा रहा है। अंत में ममता बनर्जी ने कहा कि BJP लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता में आई है, लेकिन अब लोगों को भी लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देना होगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे एकजुट होकर अपनी वोट की ताकत का इस्तेमाल करें।
चुनाव की तारीखें:
पश्चिम बंगाल में 294 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में होंगे, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी।
Rahul Gandhi ने सरकार को घेरा, सरकारी इमारतों में चीनी कैमरों पर चिंता
4 Apr, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि भले ही सरकार ने आम लोगों के लिए चीनी CCTV कैमरों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है, लेकिन सरकारी इमारतों के अंदर अभी भी ऐसे कैमरे लगे हुए हैं। राहुल गांधी ने इस बात पर चिंता जताई कि विदेशी AI प्लेटफॉर्म संवेदनशील डेटा को प्रोसेस कर रहे हैं और सरकार इस मुद्दे पर पूरी तरह से चुप है। उन्होंने इस चुप्पी को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।
IT मंत्रालय के जवाबों से असंतुष्ट राहुल गांधी
राहुल गांधी ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में संसद में इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्रालय से कई अहम सवाल पूछे थे। उनके सवालों का जो जवाब आया, उसमें बहुत कुछ कहा गया, लेकिन जो असल में पूछा गया था, उसका कोई सीधा या स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने सरकार के इस रवैये पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है और इसे पारदर्शिता की कमी करार दिया है। राहुल गांधी ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें जो जवाब मिले, वे पूरी तरह से गोलमोल थे और किसी भी ठोस जानकारी से रहित थे।
राहुल गांधी ने मंत्रालय से विशिष्ट जानकारी मांगी थी। उन्होंने पूछा था कि सरकारी इमारतों में लगे कैमरे किन देशों से आए हैं? उनमें से कितने कैमरे सुरक्षा की दृष्टि से प्रमाणित किए गए हैं? कौन से विदेशी AI प्लेटफॉर्म सरकारी डेटा को प्रोसेस कर रहे हैं, और उनके नाम क्या हैं? इसके अलावा, उन्होंने यह भी जानना चाहा था कि कौन से प्रतिबंधित ऐप्स, जो पहले सुरक्षा कारणों से बैन किए गए थे, अब अलग-अलग नामों के साथ अभी भी चल रहे हैं। ये सभी सवाल सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा गोपनीयता से जुड़े थे। मंत्रालय के जवाब पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें इन सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्रालय के पत्र में न तो कोई संख्या बताई गई, न ही किसी प्लेटफार्म का नाम। उन्होंने इस स्थिति को अस्वीकार्य बताया, खासकर जब देश की संवेदनशील जानकारी और डेटा की सुरक्षा का मुद्दा दांव पर हो। उनका कहना था कि सरकार इस महत्वपूर्ण विषय पर जानबूझकर अंधेरा बनाए हुए है।
राहुल गांधी का आरोप, बोले- देश को अंधेरे में रखा जा रहा है
राहुल गांधी ने सरकार के जवाब का पत्र अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया और एक बार फिर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने लिखा कि पांच साल पहले यह स्वीकार किया गया था कि सरकार द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे लगभग दस लाख चीनी कैमरे डेटा ट्रांसफर का जोखिम पैदा करते हैं। लेकिन, आज भी सरकार यह बताने को तैयार नहीं है कि जो कैमरे हम पर नजर रख रहे हैं, वे सुरक्षित हैं या नहीं। यह जानकारी छुपाना सीधे तौर पर भारत को अंधेरे में रखने की एक सोची-समझी साजिश है, जैसा कि राहुल गांधी ने कहा।
उन्होंने अपने आरोपों को और धार देते हुए कहा कि मोदी सरकार अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है और विदेशी निगरानी की सच्चाई को छिपाकर हर नागरिक की सुरक्षा को जोखिम में डाल रही है। यह बयान सरकार की डेटा सुरक्षा नीतियों पर गंभीर सवाल उठाता है और पारदर्शिता की मांग को मजबूती से सामने रखता है। राहुल गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों को यह जानने का पूरा हक है कि उनकी गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है या नहीं।
दिल्ली में सड़कों से हट रहे चीनी CCTV, सरकारी इमारतों पर सवाल
यह मामला उस समय सामने आया है जब दिल्ली में सार्वजनिक स्थानों से चीनी CCTV कैमरों को हटाने का काम चल रहा है। दिल्ली के CCTV सर्विलांस नेटवर्क का आधे से ज़्यादा हिस्सा चीन में बने कैमरों का है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं लगातार बढ़ रही थीं। दिल्ली सरकार ने इन चिंताओं को देखते हुए इन कैमरों को चरणबद्ध तरीके से बदलने का काम शुरू कर दिया है। यह कदम एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है, जहां सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री प्रवेश वर्मा ने बुधवार को घोषणा की कि चीनी कंपनी Hikvision से लिए गए कैमरों को पूरे शहर से धीरे-धीरे हटाया जाएगा। इन कैमरों की जगह दूसरे देशों में बने, सुरक्षित और प्रमाणित कैमरे लगाए जाएंगे। दिल्ली सरकार का यह फैसला सार्वजनिक सुरक्षा और डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे पता चलता है कि राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा चिंताओं को गंभीरता से लिया जा रहा है।
दिल्ली में PWD ने कुल 2.7 लाख से ज़्यादा CCTV कैमरे लगाए हैं। इनमें से पहले चरण के दौरान, जो सितंबर 2020 से नवंबर 2022 तक चला था, लगभग 1.4 लाख कैमरे चीन में बने थे। यह एक बड़ी संख्या है, जो सुरक्षा जोखिम को बढ़ा सकती थी। हालांकि, दूसरे चरण में, जो जून 2025 से मार्च 2026 तक चलने वाला है, बाकी बचे हुए कैमरे चीन के अलावा दूसरे देशों से लिए जाएंगे। यह योजना भविष्य में ऐसे जोखिमों को कम करने के लिए तैयार की गई है।
इन सबके बीच, राहुल गांधी का मुख्य सवाल सरकारी इमारतों के अंदर चीनी कैमरों को लेकर है। दिल्ली की सड़कों से चीनी कैमरे हटाए जा रहे हैं, लेकिन सरकारी इमारतों के भीतर लगे इन कैमरों को लेकर सरकार ने अभी तक कोई ठोस कार्रवाई या स्पष्ट बयान नहीं दिया है। इसी मुद्दे पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि जब आम लोगों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है, तो देश के संवेदनशील सरकारी डेटा की सुरक्षा को लेकर ऐसी ढिलाई क्यों बरती जा रही है। यह स्थिति सरकार की डेटा सुरक्षा नीति में एक बड़े विरोधाभास को उजागर करती है।
राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा, “पांच साल पहले यह मानने के बाद कि सरकार द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे 10 लाख चीनी कैमरे डेटा ट्रांसफर के जोखिम पैदा करते हैं, आज भी सरकार ने ये नहीं बताया कि आज जो कैमरे हम पर नजर रख रहे हैं, वे सुरक्षित हैं या नहीं। यह जानबूझकर भारत को अंधेरे में रखने की साजिश है। मोदी सरकार अपनी नाकामी पर पर्दा डाल विदेशी निगरानी की सच्चाई छिपा कर हर नागरिक की सुरक्षा को जोखिम में डाल रही है।” उनके ये आरोप सरकार पर गंभीर दबाव बनाते हैं कि वह डेटा सुरक्षा और पारदर्शिता पर अधिक ध्यान दे।
ममता बनर्जी का बड़ा बयान: जांच एजेंसी की कार्रवाई पर उठाए सवाल
4 Apr, 2026 03:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता | पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मालदा जिले के मोथाबाड़ी में हुई हिंसा को लेकर केंद्र सरकार और एनआईए पर निशाना साधा है। बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा कि मोथाबाड़ी में न्यायिक अधिकारियों का घेराव करने वाले असली गुनहगार तो भाग निकले हैं, लेकिन एनआईए अब बेकसूर स्थानीय लोगों को पकड़कर उन्हें परेशान कर रही है।तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने कहा कि दो सांप्रदायिक पार्टियों ने न्यायिक अधिकारियों का घेराव किया और वहां से फरार हो गईं। अब एनआईए जांच के नाम पर हमारे स्थानीय युवाओं को प्रताड़ित कर रही है। इस एजेंसी ने जांच के बहाने करीब 50 मासूम लोगों को उठा लिया है। दावा किया जा रहा है कि ममता बनर्जी का इशारा कथित तौर पर आईएसएफ और एआईएमआईएम की तरफ था।
वोटर लिस्ट से नाम हटने पर जताई हैरानी
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनावी रैली में मौजूद भीड़ से यह भी पूछा कि कितने लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं? इसके बाद दीदी ने मंच पर मौजूद अपनी पार्टी के स्थानीय नेताओं को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अब हमारी पार्टी को यहां चुनावी रैलियां और बैठकें करने की कोई जरूरत नहीं है। मेरी पहली प्राथमिकता इन लोगों की मदद करना है। जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गलत तरीके से हटाए गए हैं, उनके नाम ट्रिब्यूनल में आवेदन करके वापस जुड़वाएं। ममता बनर्जी ने जनता से अपील की कि वे सीधे न्यायिक अधिकारियों के पास जाने के बजाय ट्रिब्यूनल के जरिए कानूनी रास्ता अपनाएं।
भाजपा पर लगाया माहौल बिगाड़ने का आरोप
इतना ही नहीं, सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि आप किसी भी तरह के उकसावे में न आएं। भाजपा चाहती है कि यहां हिंसा भड़के, जिससे वह केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करके हमारे लोगों को उठा सके, जैसा कि उन्होंने मोथाबाड़ी में किया है।
क्या था पूरा मामला?
बताते चलें कि बुधवार को मालदा के मोथाबाड़ी इलाके में भारी हंगामा हुआ था। वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों की भीड़ अचानक हिंसक हो गई थी। इस भीड़ ने सात न्यायिक अधिकारियों को स्थानीय बीडीओ दफ्तर में और एक अन्य अधिकारी को उनकी गाड़ी में करीब 9 घंटे तक बंधक बनाए रखा था।इस दौरान जमकर पत्थरबाजी हुई,सड़कें जाम की गईं और पुलिस पर भी हमला किया गया था। इस मामले में राज्य की सीआईडी ने अब तक 35 लोगों को गिरफ्तार किया है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद चुनाव आयोग ने इस पूरे मामले की जांच एनआईए को सौंप दी है।
विजय का मेगा प्लान: पुदुचेरी में फ्री बिजली और 25 लाख बीमा देने का वादा
4 Apr, 2026 03:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुदुचेरी | आगामी नौ अप्रैल को होने वाले पुदुचेरी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर टीवीके के प्रमुख विजय ने कांग्रेस-डीएमके गठबंधन को भ्रमित गठबंधन करार दिया। वहीं, विजय ने एनआर कांग्रेस-भाजपा गठबंधन को थका हुआ गठबंधन बताया। उन्होंने कहा कि ये दोनों ही राष्ट्रीय दल केंद्र में वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद पुदुचेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने में विफल रहे हैं।पुदुचेरी में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए विजय ने मतदाताओं से केंद्र शासित प्रदेश में पार्टी के सीटी चुनाव चिन्ह का समर्थन करने का आग्रह किया। उन्होंने इसे 'एक उंगली की क्रांति' की शुरुआत बताया, जो शायद उनकी किसी फिल्म के डायलॉग से जुड़ा था।
पुदुचेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की भरी हुंकार
विजय ने वादा किया कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो वे पुदुचेरी को उपराज्यपाल के हस्तक्षेप से मुक्त करते हुए कानूनी रूप से पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए 100 प्रतिशत कोशिश करेंगे।अपनी पार्टी के उम्मीदवारों को जनता के साथ खड़े रहने वाले के रूप में पेश करते हुए विजय ने जन कल्याणकारी योजनाओं की एक सूची लोगों के सामने पेश की। उन्होंने आश्वासन दिया कि टीवीके के सत्ता में आने के छह महीने के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव कराए जाएंगे।
मुफ्त बिजली और स्वास्थ्य बीमा का किया एलान
उन्होंने बताया कि पार्टी के एजेंडे में हर परिवार के लिए 25 लाख रुपये का चिकित्सा बीमा और गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों के लिए 200 यूनिट मुफ्त बिजली प्रदान करना शामिल है। शिक्षा के क्षेत्र में विजय ने पुदुचेरी विश्वविद्यालय ऑफ एप्लाइड साइंसेज एंड आर्ट्स की स्थापना की घोषणा की। क्षेत्र के विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने मतदाताओं से एक सुरक्षित और पारदर्शी प्रशासन प्रदान करने का अवसर मांगा।
गठबंधन की राजनीति पर क्या बोले विजय?
विजय की टिप्पणियों से पुदुचेरी में चुनावी राजनीति गरमा गई है। उन्होंने राष्ट्रीय दलों पर राज्य के विकास की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है और क्षेत्रीय दलों के महत्व पर जोर दिया है। उनके बयान सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर संभावित दरारों और विपक्षी दलों की रणनीतियों पर बड़ा निशाना माने जा रहे हैं।
बंगाल में भाजपा का बड़ा दांव: सत्ता मिली तो ‘जिहाद’ मामलों पर कड़ा एक्शन
4 Apr, 2026 02:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य ने राज्य में पहचान, सुरक्षा और जनसांख्यिकी बदलाव को बड़ा चुनावी मुद्दा बताया है। भट्टाचार्य ने कहा कि अगर बंगाल में भाजपा की सरकार बनती है, तो वह लव जिहाद और लैंड जिहाद पर सख्त कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए अगर उनकी पार्टी को सांप्रदायिक भी कहा जाता है, तो उन्हें इसकी परवाह नहीं है।भट्टाचार्य ने मीडिया को दिए साक्षात्कार में इस चुनाव को केवल भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच का मुकाबला नहीं माना। उन्होंने इसे बंगाली हिंदुओं और राष्ट्रवादी सोच रखने वाले मुसलमानों के अस्तित्व की निर्णायक लड़ाई बताया है। उनका कहना है कि बंगाल के सीमावर्ती जिलों में जनसांख्यिकी बदल रही है और तृणमूल कांग्रेस की तुष्टीकरण की नीति ने स्थिति को और खराब कर दिया है। उन्होंने बांग्लादेश के ताजा हालातों का हवाला देते हुए सुरक्षा पर सवाल उठाए। भट्टाचार्य ने कहा कि वहां कट्टरपंथ के कारण हिंदुओं को निशाना बनाया गया और महिलाओं का जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया। उन्होंने दावा किया कि जो स्थिति बांग्लादेश में बनी, वैसी ही चुनौतियां पश्चिम बंगाल के सामने भी खड़ी हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ममता बनर्जी की सरकार वापस आती है, तो यह बंगाल के लिए आखिरी चुनाव साबित हो सकता है।
लव जिहाद की परिभाषा समझाते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि कुछ लोग हिंदू नाम रखकर लड़कियों को प्रेम के जाल में फंसाते हैं। रिश्ता गहरा होने के बाद वे अपनी असली पहचान उजागर करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि राज्य में लैंड जिहाद भी तेजी से फैल रहा है। उनके अनुसार, बांग्लादेशी घुसपैठिए आदिवासी लड़कियों से विवाह कर उनकी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। मुर्शिदाबाद को आधार बनाकर ये घुसपैठिए झारखंड और बिहार के वन क्षेत्रों तक पहुंच गए हैं।घुसपैठ के मुद्दे पर बोलते हुए भाजपा नेता ने निर्वाचन आयोग के मतदाता सूची सुधार अभियान (एसआईआर) का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश सबसे ऊपर है और चुनाव में हार-जीत बड़ी बात नहीं है। एसआईआर का मकसद मतदाता सूची को साफ और सही बनाना है। भट्टाचार्य का कहना है कि यह लड़ाई केवल धर्म की नहीं, बल्कि कट्टरपंथ के खिलाफ लोकतंत्र को बचाने की है। बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि 4 मई को नतीजे आएंगे।
‘ईसाई समुदाय के खिलाफ कानून’: FCRA संशोधन पर सतीशन का हमला
4 Apr, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने शनिवार को केंद्र सरकार और बीजेपी पर तीखा हमला बोला और उन्हें भेड़ की खाल में भेड़िया बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी एक तरफ क्रिसमस के दौरान चर्चों और बिशप के घरों में केक लेकर जाती है, लेकिन दूसरी तरफ ऐसे कानून लाती है जो ईसाई समुदाय के हितों को प्रभावित करते हैं।कासरगोड में मीडिया से बातचीत के दौरान सतीशन ने कहा कि प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) संशोधन बेहद खतरनाक हैं। उनके अनुसार, इन संशोधनों के तहत केंद्र सरकार किसी भी विदेशी फंड प्राप्त करने वाली संस्था का लाइसेंस बिना स्पष्ट कारण बताए नवीनीकृत करने से इनकार कर सकती है। इतना ही नहीं, जिन संस्थाओं का लाइसेंस रिन्यू नहीं होगा, उनकी संपत्तियों पर भी केंद्र सरकार कब्जा कर सकती है।उन्होंने केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी को सलाह दी कि वे इस बिल को ठीक से पढ़ें। गोपी ने हाल ही में कहा था कि यह संशोधन किसी खास धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि देश के हितों और संपत्तियों की सुरक्षा के लिए है।
संपत्तियों को निशाना बनाने के उद्देश्य लाया जा रहा कानून
सतीशन ने दावा किया कि कांग्रेस ने एफसीआरए कानून अवैध विदेशी फंडिंग को रोकने के लिए बनाया था, लेकिन मौजूदा संशोधन अल्पसंख्यक समुदायों की संपत्तियों को निशाना बनाने के उद्देश्य से लाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि भविष्य में सरकार चर्च से जुड़ा कोई नया कानून भी ला सकती है, जैसा कि वक्फ कानून में संशोधन के जरिए किया गया।
वाम सरकार और एसडीपीआई पर भी निशाना
सतीशन ने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और एलडीएफ पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि CPI(M) ने अपने ही रुख के खिलाफ जाकर SDPI जैसे संगठन का समर्थन स्वीकार किया है, जिसे पार्टी पहले चरमपंथी बता चुकी है।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और पार्टी नेतृत्व सत्ता में बने रहने के लिए ऐसे संगठनों का समर्थन लेने को तैयार हैं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि विजयन कांग्रेस पर वेलफेयर पार्टी के समर्थन को लेकर हमला करते हैं, लेकिन एसडीपीआई, पीडीपी और आरएसएस के समर्थन पर चुप रहते हैं, जो उनकी दोहरेपन को दर्शाता है।
हिंसा और चुनावी माहौल पर चिंता
विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि आगामी 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले एलडीएफ हार के डर से हिंसा का सहारा ले रहा है। उन्होंने कांग्रेस सांसद शशि थरूर के गनमैन और ड्राइवर पर हुए हमले, उनके काफिले को रोके जाने और कई जगहों पर यूडीएफ के प्रचार सामग्री को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं को इसका उदाहरण बताया।सतीशन ने कहा कि इस तरह की घटनाएं यूडीएफ को नहीं रोक पाएंगी। उन्होंने दावा किया कि यूडीएफ राज्य में मजबूत एंटी-इंकम्बेंसी के दम पर चुनाव में 100 से अधिक सीटें जीतने जा रहा है।इसके साथ ही उन्होंने उन सर्वेक्षणों को अविश्वसनीय बताया, जिनमें मुकाबला कांटे का बताया जा रहा है। उनके मुताबिक, जमीनी हकीकत में यूडीएफ और एलडीएफ के बीच बड़ा अंतर है और इसका फायदा विपक्षी गठबंधन को मिलेगा।
वोटिंग से पहले नियम कड़े: सियासी दलों को विज्ञापन के लिए लेनी होगी अनुमति
4 Apr, 2026 01:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तिरुवनंतपुरम | केरल विधानसभा चुनाव में मतदान के दिन और उससे एक दिन पहले यानी आठ और नौ अप्रैल को प्रिंट मीडिया में किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार विज्ञापन नहीं छपवाए जा सकेंगे। चुनाव आयोग ने निर्देश दिए हैं कि बिना मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति से अनुमति मिले कोई भी विज्ञापन प्रकाशित नहीं किया जा सकेगा।चुनाव आयोग के इस फैसले का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया के अंतिम चरणों में भ्रामक, आपत्तिजनक या भड़काऊ विज्ञापनों के प्रभाव को रोकना है। केरल के मुख्य चुनावी अधिकारी रतन यू केलकर ने शुक्रवार देर रात यह निर्देश जारी किए।
क्यों लिया चुनाव आयोग ने यह फैसला?
निर्देश के अनुसार, चुनाव के महत्वपूर्ण पड़ाव पर ऐसे विज्ञापनों के कारण प्रभावित पक्षों और उम्मीदवारों को आवश्यक स्पष्टीकरण देने का अवसर नहीं मिल पाता है। ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह फैसला लिया है।
क्या है निगरानी समिति और इसकी भूमिका?
मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति (एमसीएमसी) का गठन चुनाव आयोग द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि राजनीतिक विज्ञापनों में कोई भी ऐसी सामग्री न हो जो भ्रामक, भड़काऊ या किसी भी समुदाय या व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली हो। यह समिति विज्ञापनों की सामग्री की जांच करती है। अगर वह नियमों के अनुरूप पाई जाती है, तो उसे प्रकाशित करने की अनुमति देती है।
निर्देश का मुख्य बिंदु
प्रतिबंधित अवधि: आठ और नौ अप्रैल।
प्रतिबंधित माध्यम: प्रिंट मीडिया।
आवश्यकता: किसी भी राजनीतिक दल, उम्मीदवार, संगठन या व्यक्ति को इन दो दिनों में कोई भी विज्ञापन प्रकाशित करने से पहले राज्य या जिला स्तर पर संबंधित समिति से पूर्व-प्रमाणन प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
आवेदन की समय-सीमा: प्रस्तावित विज्ञापनों को प्रकाशन की तारीख से कम से कम दो दिन पहले राज्य या जिला निगरानी समिति के सामने प्रस्तुत करना होगा।
मालदा घेराव मामले में सियासत तेज: माकपा ने अपने रुख का किया बचाव
4 Apr, 2026 01:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता | पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों के घेराव और हिंसा को लेकर सियासत तेज हो गई है। माकपा के वरिष्ठ नेता मोहम्मद सलीम ने इस घटना का बचाव करते हुए कहा कि जब अन्याय कानून बन जाता है, तो विरोध ही एकमात्र रास्ता बचता है।सलीम ने कहा कि यह घटना केंद्र और राज्य सरकार की विफलताओं का परिणाम है, खासकर मतदाता सूची से नाम हटाने के विवाद को लेकर लोगों में भारी नाराजगी है। उनके मुताबिक, जब लोगों के नागरिक और वोटिंग अधिकार प्रभावित होते हैं, तो ऐसे आंदोलन स्वाभाविक हो जाते हैं।मालदा के मोथाबाड़ी इलाके में बुधवार को हालात उस समय बिगड़ गए जब प्रदर्शनकारी भीड़ ने सड़क जाम, तोड़फोड़ और पुलिस पर हमला किया। इस दौरान सात न्यायिक अधिकारियों को बीडीओ कार्यालय में बंधक बना लिया गया, जबकि एक अधिकारी को वाहन में करीब नौ घंटे तक रोके रखा गया।
अब तक 35 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी
इस मामले में अब तक 35 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच की जिम्मेदारी सीआईडी के साथ-साथ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को भी सौंपी गई है, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सक्रिय हुई है। सलीम ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक तंत्र और चुनाव आयोग जनता को न्याय देने में विफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर पड़ती हैं, तो शासन पुलिस राज्य की तरह व्यवहार करने लगता है, जिससे जनता का विरोध बढ़ना तय है।उन्होंने यह भी दावा किया कि विवादित मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया (SIR) गरीब, अल्पसंख्यक और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के खिलाफ एक तरह का अभियान है। सलीम के अनुसार, बिना स्पष्ट कारणों के लोगों के नाम हटाए गए, जिससे समाज के कई वर्ग प्रभावित हुए।
ईरान के फैसले का असर: सप्लाई की चिंता खत्म होते ही कच्चा तेल सस्ता, अब भारत पर टिकी सबकी नजर।
World Heritage Day 2026: विरासत के संरक्षण का संकल्प, आइए देखें दुनिया के ये 7 अजूबे।
₹1,00,000 करोड़ का प्रोजेक्ट: मुंबई के गोरेगांव में 10 साल में तैयार होगी 'अदाणी सिटी'।
वेतन वृद्धि का ऐलान: केंद्र सरकार ने नए साल के तोहफे के रूप में बढ़ाया महंगाई भत्ता
मिलावटी तेल को कहें अलविदा! रसोई में खुद तैयार करें 100% प्योर पीनट ऑयल।
कानूनी दांव-पेंच का दौर: हाईकोर्ट पहुंचने से प्रभावित हुई निचली अदालत की कार्यवाही, सस्पेंस बरकरार।
अनुष्का से रितिका तक: आईपीएल 2026 में छाया इन स्टार वाइव्स का जबरदस्त फैशन सेंस।
योगी आदित्यनाथ की हुंकार: घुसपैठियों से मुक्त बंगाल ही मां का सच्चा सपना
रुके नहीं वीरेंद्र: तहसीलदार पद पर रहते हुए जारी रखी मेहनत, अब बने प्रदेश के दूसरे टॉपर।
18वीं लोकसभा का सातवां सत्र संपन्न: 9 विधेयक पारित, लेकिन संविधान संशोधन बिल अटका
