राजनीति
जंग के दौरान बुनियादी ढांचे पर अमेरिकी हमलों की निंदा
21 Mar, 2026 04:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत की और उन्हें ईद व नौरोज की शुभकामनाएं दी गईं। इस दौरान प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में अहम बुनियादी ढांचे पर हो रहे हमलों की निंदा की।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से बातचीत हुई और उन्हें ईद तथा नौरोज की शुभकामनाएं दी गईं। हमने उम्मीद जताई कि यह त्योहारों का समय पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि लेकर आएगा। क्षेत्र में अहम बुनियादी ढांचे पर हो रहे हमलों की निंदा की गई, क्योंकि ये क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालते हैं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित करते हैं। समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने की जरूरत दोहराई गई कि जलमार्ग खुले और सुरक्षित रहें। ईरान में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और संरक्षा के लिए ईरान के लगातार समर्थन की सराहना की गई।बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने उन हमलों की कड़ी निंदा की, जिनमें बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया है, और कहा कि ऐसे हमले क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक आपूर्ति शृंखला के लिए गंभीर खतरा हैं। उन्होंने मध्य पूर्व में शांति, सुरक्षा और संवाद की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। मोदी ने यह भी कहा कि समुद्री मार्गों और शिपिंग लेनों को खुला और सुरक्षित बनाए रखना आवश्यक है, ताकि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर कोई नकारात्मक असर न पड़े। यह बातचीत भारत-ईरान संबंधों को मजबूती देने के साथ-साथ क्षेत्रीय तनाव पर संतुलित कूटनीति की भारत की नीति को दर्शाती है। बातचीत के अलावा मोदी ने क्षेत्रीय सुरक्षा पर चिंता और शांति पर बल दिया और वैश्विक स्तर पर वार्ता और कूटनीति का समर्थन फिर से दोहराया।
राज्य सरकार ने खोला खजाना, दो वर्गों को मिला बड़ा फायदा।
21 Mar, 2026 02:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिमाचल। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश का वर्ष 2026–27 का बजट पेश किया। प्रतिकूल आर्थिक परिस्थितियों और बढ़ते कर्ज के दबाव के बीच यह बजट विशेष महत्व रखता है। मुख्यमंत्री की विपक्ष पर टिप्पणी के बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया। लगातार व्यवधान को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही 11:30 बजे तक स्थगित कर दी। अध्यक्ष ने सभी सदस्यों से शांति बनाए रखते हुए बजट सुनने का आग्रह किया और बताया कि 35 मिनट का समय विरोध में व्यर्थ गया।
मछुआरों के लिए बड़ी घोषणाएं
मुख्यमंत्री ने “मछुआरा योजना” शुरू करने की घोषणा की। जलाशयों की मछलियों के लिए पहली बार ₹100 प्रति किलो न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय किया गया। यदि नीलामी मूल्य ₹100 से कम होता है, तो ₹20 तक का अनुदान DBT के माध्यम से दिया जाएगा। मछलियों पर रॉयल्टी 7% से घटाकर 1% कर दी गई। राज्य में 100 नई ट्राउट इकाइयां स्थापित की जाएंगी।
बरसात में सहायता
मछुआरों को बरसात के मौसम में ₹3501 की एकमुश्त सम्मान निधि मिलेगी। मछली पकड़ने के उपकरणों पर 90% तक अनुदान दिया जाएगा। नाव खरीदने पर 70% सब्सिडी DBT के माध्यम से प्रदान की जाएगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर और कृषि
हमीरपुर में ₹25 करोड़ की लागत से एक्वा पार्क बनाया जाएगा। वहीं, पोल्ट्री फार्म को “उड़ान योजना” के तहत PPP मोड पर विकसित किया जाएगा। प्रत्येक पोल्ट्री यूनिट को भूमि पर 30% सब्सिडी और बैंक सहायता पर अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
किसानों के लिए राहत
प्राकृतिक गेहूं का मूल्य ₹60 से बढ़ाकर ₹80 प्रति किलो, मक्की ₹40 से बढ़ाकर ₹50 प्रति किलो, हल्दी का MSP ₹90 से बढ़ाकर ₹150 प्रति किलो, अदरक के लिए पहली बार ₹30 प्रति किलो समर्थन मूल्य घोषित, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा, गाय और भैंस के दूध के दाम में ₹10 प्रति लीटर की बढ़ोतरी, गद्दी समुदाय के लिए ₹300 करोड़ की विशेष योजना की गई। इसके साथ चरवाहों को डिजिटल कार्ड जारी किए जाएंगे, जिनमें उनका पूरा रिकॉर्ड होगा।
दूध के नए दाम
गाय का दूध: ₹51 से बढ़ाकर ₹61 प्रति लीटर
भैंस का दूध: ₹61 से बढ़ाकर ₹71 प्रति लीटर
बजट का आकार घटा
इस बार बजट का कुल आकार ₹54,928 करोड़ रखा गया। पिछले वर्ष के ₹58,514 करोड़ की तुलना में ₹3,586 करोड़ कम। यह पहली बार है जब बजट का आकार बढ़ाने के बजाय घटाया गया है।
अधूरी परियोजनाओं पर फोकस
70% पूर्ण हो चुकी 300 परियोजनाओं को पूरा करने के लिए ₹500 करोड़ का प्रावधान।
युवाओं और योजनाओं पर फोकस
युवाओं के स्वरोजगार के लिए ₹650 करोड़ की राजीव गांधी स्टार्टअप योजना।
सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से अंग्रेज़ी माध्यम शुरू।
महिलाओं को चरणबद्ध तरीके से ₹1500 प्रति माह देने की योजना।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार अपनी सभी 10 गारंटियों को 100% पूरा करेगी।
पिछला बजट
पिछले वित्त वर्ष में ₹58,514 करोड़ का बजट पेश किया गया था। इस वर्ष भी परिस्थितियों को देखते हुए बजट इसी के आसपास रहने का अनुमान था। बजट से पहले मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ देर रात तक मसौदे पर चर्चा की और अंतिम रूप दिया।
सरकार की चुप्पी पर कांग्रेस का सवाल – क्या है भारत की रणनीति?
21 Mar, 2026 02:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कांग्रेस पार्टी ने मोदी सरकार पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस मसले पर प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी को 'नैतिक कायरता' बताया है।
जयराम रमेश ने क्या-क्या कहा?
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "एक तरफ दुनिया की बड़ी शक्तियां और अरब देश इस संघर्ष को रोकने के लिए प्रयास कर रहे हैं, वहीं खुद को 'विश्वगुरु' और 'ग्लोबल साउथ' की आवाज बताने वाले प्रधानमंत्री मोदी इस मुद्दे पर रहस्यमयी चुप्पी साधे हुए हैं।" उन्होंने आगे लिखा, "भारत का इतिहास हमेशा से उत्पीड़ितों के साथ खड़े होने और न्यायपूर्ण शांति का समर्थन करने का रहा है, लेकिन मौजूदा सरकार इस विरासत को धूमिल कर रही है।"
'भारत के बुनियादी उसूलों के साथ गद्दारी'
कांग्रेस नेता ने कहा कि यह सिर्फ कूटनीतिक विफलता नहीं है, बल्कि भारत के बुनियादी उसूलों के साथ गद्दारी है। जयराम रमेश ने कहा कि महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के समय से ही भारत ने फिलिस्तीन के मुद्दे और पश्चिम एशिया में स्थिरता के लिए एक स्वतंत्र और मुखर स्टैंड लिया है। उन्होंने कहा, "आज की चुप्पी यह दर्शाती है कि सरकार अपने नैतिक रुख को राजनीतिक लाभ के लिए कुर्बान कर चुकी है।"
स्पष्ट स्टैंड ले सरकार-रमेश
जयराम रमेश ने मांग की है कि प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्रालय को तुरंत अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब निर्दोष नागरिक मारे जा रहे हों और पूरा क्षेत्र युद्ध की आग में झुलस रहा हो, तब भारत का मूकदर्शक बने रहना शर्मनाक है। कांग्रेस नेताने कहा कि भारत की यह 'रणनीतिक चुप्पी' अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी साख को नुकसान पहुंचा रही है और उन देशों को निराश कर रही है जो भारत पर भरोसा करते हैं। गौरतलब है कि हाल के कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति में समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। अब देखना यह है कि विदेश मंत्रालय कांग्रेस नेता के इस 'नैतिक कायरता' के आरोप पर क्या प्रतिक्रिया देता है।
हाईकमान पर छोड़ा फैसला, बोले – पार्टी जो तय करेगी वही मान्य
21 Mar, 2026 01:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल|राज्यसभा में अपनी उम्मीदवारी को लेकर पूर्व पीसीसी चीफ अरुण यादव ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि मैं इस दौड़ में शामिल नहीं हूं. कांग्रेस उम्मीदवार कौन होगा, इसका निर्णय हाईकमान तय करेंगे. उन्होंने बिहार कांग्रेस विधायकों द्वारा किए गए भीतरघार पर कहा कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस पूरी तरह से एकजुट है|
एमपी में ऐसा है राज्यसभा सीटों का गणित
मध्य प्रदेश से तीन राज्यसभा सीटें खाली हाेने जा रही हैं, इन सीटों के लिए चुनाव अप्रैल-मई में संभावित माने जा रहे हैं, लेकिन यह लड़ाई अब राजनीति से ज्यादा गणितिय समीकरण में उलझ गई है. प्रदेश में दो सीटों पर भाजपा और एक सीट पर कांग्रेस पार्टी ने अपनी पकड़ बनाई है. लेकिन कांग्रेस से दिग्विजय सिंह की राज्यसभा सीट 10 अप्रैल को खाली होने वाली है. जिसको लेकर पार्टी में नया चेहरा कौन होगा इसकी चर्चा तेज हो गई है|
राज्यसभा के लिए 230 विधायकों का गणित
राज्यसभा की तीन सीटों पर होने वाले चुनाव में 230 विधायकों के गणित पर चुनाव होने वाला है. इसमें एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 58 वोट की जरुरत होगी. विधानसभा में आंकड़ो के हिसाब से देखा जाए तो कांग्रेस के पास 65 विधायक है. लेकिन इसमें बीना विधायक निर्मला सप्रे अब भाजपा के साथ हैं. ऐसे में कांग्रेस के पास 64 विधायक बचते हैं. वहीं विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद भी वोट नहीं डाल पाएंगे, ऐसे में कांग्रेस के पास 63 वोट बचेंगे|
2020 में 2026 विधायकों के साथ हुआ था राज्यसभा चुनाव
2022 के राष्ट्रपति चुनाव के समय एनडीए की उम्मीदवार द्रोपदी मुर्मू के लिए मध्य प्रदेश से बड़े पैमाने पर क्रॉसवोटिंग देखने को मिली थी, जिसने कांग्रेस को चौंका दिया था. वहीं 2020 में एमपी की तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुआ था, वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में जाने के कारण 22 विधायकों और दो का निधन हाेने की वजह से 206 सीटों के गणित के साथ चुनाव हुआ था. इसमें 52 वोटों की जरुरत थी, जिसमें दिग्विजय सिंह ने 57 वोट के साथ राज्यसभा चुनाव में अपनी जीत हासिल की थी|
‘एक ही लक्ष्य, BJP को सत्ता से हटाना’, ममता का बयान।
21 Mar, 2026 01:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शनिवार को कोलकाता के रेड रोड पर आयोजित ईद-उल-फितर के बड़े कार्यक्रम में शामिल हुईं। इस मौके पर उन्होंने लोगों को ईद की शुभकामनाएं दीं और राज्य व देश की तरक्की की कामना की। अपने भाषण में ममता बनर्जी ने साफ कहा कि उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का मुख्य लक्ष्य भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को सत्ता से हटाना है। उन्होंने कहा कि वे देश को बीजेपी के असर से बचाना चाहती हैं। उन्होंने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी तीखा हमला बोला। ममता ने आरोप लगाया कि बीजेपी लोगों के अधिकार छीनने की कोशिश कर रही है और वह ऐसा नहीं होने देंगी।
SIR मुद्दे पर क्या कहा?
ममता बनर्जी ने SIR (नागरिकों का रजिस्टर) के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि इसमें कई लोगों के नाम हटा दिए गए थे। इसको लेकर उन्होंने अदालतों का दरवाजा खटखटाया- कोलकाता हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गईं। उन्होंने भरोसा जताया कि लोगों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे और कहा कि वह हर धर्म, जाति और समुदाय के लोगों के साथ खड़ी हैं।
बीजेपी पर गंभीर आरोप
ममता बनर्जी ने बीजेपी पर कई आरोप लगाए। उन्होंने कहा, ”बीजेपी “गुंडों और चोरों की पार्टी” है। कुछ लोग बीजेपी से पैसे लेकर वोट बांटने का काम कर रहे हैं। केंद्र सरकार राज्य की सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करना चाहती है।”
सीमा और सुरक्षा को लेकर चिंता
ममता बनर्जी ने दावा किया कि सीमावर्ती इलाकों से कुछ ताकतें बंगाल में अशांति फैलाने की कोशिश कर रही हैं। उनके अनुसार, बाहर से पैसा और हथियार लाने की कोशिश हो रही है। इसका मकसद दंगे भड़काना और राज्य को अस्थिर करना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे एकजुट रहें और किसी भी तरह के लालच या डर में न आएं।
“अघोषित राष्ट्रपति शासन” जैसा माहौल
ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य में हालात ऐसे लग रहे हैं जैसे बिना घोषणा के राष्ट्रपति शासन लागू हो गया हो। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं कमजोर हो रही हैं। चुनाव के समय प्रशासन में दखल दिया जा रहा है।
जनता से अपील
अपने भाषण के अंत में ममता बनर्जी ने लोगों से कहा, एकजुट रहें, सतर्क रहें और लोकतंत्र और राज्य की एकता की रक्षा करें। उन्होंने कहा कि यह समय सोच-समझकर फैसले लेने का है ताकि देश और राज्य का भविष्य सुरक्षित रह सके।
‘भारतीयों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता’, यूएई राजदूत का बड़ा बयान।
21 Mar, 2026 01:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हमलों के बीच भी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने भारत के साथ अपने मजबूत रिश्ते का संदेश दिया है। भारत में यूएई के राजदूत अब्दुल नासिर अलशाली ने ईद के मौके पर एक खुला पत्र लिखकर भारत और यूएई के मजबूत रिश्तों पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा तनाव और हमलों के बावजूद यूएई पूरी तरह सुरक्षित, स्थिर और सामान्य रूप से काम कर रहा है। उन्होंने भारतीय समुदाय को भरोसा दिलाया कि हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं और सुरक्षा, सेवाएं व व्यापार बिना रुकावट जारी हैं। अब्दुल नासिर अलशाली के इस संदेश के जरिए यूएई ने न सिर्फ अपनी तैयारियों का संकेत दिया, बल्कि भारत-यूएई साझेदारी की मजबूती और भरोसे को भी फिर से रेखांकित किया। पत्र में राजदूत ने बताया कि ईरान ने यूएई पर 2000 से ज्यादा मिसाइल और ड्रोन से हमले किए, लेकिन ज्यादातर को देश की रक्षा प्रणाली ने रोक लिया। इसके बावजूद देश में बिजली, पानी, स्वास्थ्य, संचार और खाने-पीने जैसी सभी जरूरी सेवाएं बिना किसी रुकावट के चल रही हैं। होटल, मॉल, पर्यटन स्थल और बैंकिंग व्यवस्था भी सामान्य रूप से काम कर रही है।
यूएई में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों पर क्या कहा?
नासिर अलशाली ने कहा कि यूएई में रहने वाले 40 लाख से ज्यादा भारतीय पूरी सुरक्षा और विश्वास के साथ अपना जीवन जी रहे हैं। उनके अनुसार, यूएई ने ऐसी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था बनाई है, जो ऐसे मुश्किल समय में भी देश को स्थिर बनाए रखती है। राजदूत ने भारतीय कारोबारियों को भरोसा दिलाया कि यूएई में व्यापार पूरी तरह चालू है। सप्लाई चेन, बंदरगाह और एयरपोर्ट सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत और यूएई के बीच संबंध बहुत पुराने और मजबूत हैं, जो हर मुश्किल दौर में और मजबूत होते हैं।
यूएई में रहने वाले भारतीयों को बताया अहम हिस्सा
उन्होंने यह भी कहा कि यूएई में रहने वाले भारतीय सिर्फ प्रवासी नहीं, बल्कि इस देश का अहम हिस्सा हैं। वे यहां काम करते हैं, परिवार बसाते हैं और देश के विकास में योगदान देते हैं। कई लोगों के लिए यूएई अब सिर्फ काम की जगह नहीं, बल्कि उनका घर बन चुका है। राजदूत ने बताया कि भारत सरकार भी इस पूरे समय में लगातार संपर्क में है और भारतीयों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर है।
भारत और यूएई के बीच व्यापार
बता दें कि भारत और यूएई के बीच व्यापार 100 अरब डॉलर से ज्यादा का हो चुका है और यूएई-भारत CEPA समझौता के तहत दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध और मजबूत हो रहे हैं। इससे पहले 18 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से फोन पर बात की थी और हमलों की कड़ी निंदा करते हुए हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवाजाही की जरूरत पर जोर दिया था।
भारत-बांग्लादेश रिश्तों में नई गर्माहट के संकेत मिले।
21 Mar, 2026 06:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अंतरिम सरकार के दौरान बिगड़े भारत और बांग्लादेश के द्विपक्षीय रिश्ते वापस पटरी पर लौटने के आसार हैं। बांग्लादेश की नवनिर्वाचित तारिक रहमान सरकार के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान अगले महीने के पहले हफ्ते भारत आएंगे। शुक्रवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर की भारत स्थित बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्लाह की मुलाकात के बाद ये जानकारी सामने आई है। गौरतलब है कि बीते साल के अंतिम दिन पूर्व पीएम खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने बांग्लादेश गए जयशंकर ने अपने बांग्लादेशी समकक्ष को भारत आने का न्योता दिया था। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह मुलाकात आपसी संबंधों को आगे बढ़ाने पर केंद्रित थी। सूत्रों के मुताबिक विदेश मंत्री रहमान 8 अप्रैल को हिंद महासागर सम्मेलन में शिरकत करने के क्रम में दिल्ली होते हुए मॉरीशस जाएंगे। इससे पूर्व भारत ने बांग्लादेश में नई सरकार के गठन का स्वागत किया था और प्रधानमंत्री मोदी ने तब बीएनपी के मुखिया और वर्तमान पीएम तारिक रहमान को फोन कर बधाई दी थी। बाद में उनके शपथ ग्रहण में शामिल होने बांग्लादेश गए लोकसभा स्पीकर ने पीएम रहमान को मोदी का पत्र सौंपा था, जिसमें उन्हें भारत आने का न्यौता दिया गया था।
ऊर्जा संकट के बीच बढ़ी नजदीकी
यूं तो नई सरकार के गठन के बाद से ही दोनों ओर से द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाने की पहल हुई, मगर इसमें पश्चिम एशिया में ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट ने भी अहम भूमिका निभाई। इस दौरान बांग्लादेश ने भारत से 50 हजार टन डीजल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। भारत इस अनुरोध के मद्देनजर पहली खेप के तहत 5,000 टन डीजल भेजने के साथ उपलब्धता के आधार पर और मदद करने के संकेत दे चुका है।
अंतरिम सरकार में रहते भी की थी संबंध बेहतर करने की पहल
अंतरिम सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहते विदेश मंत्री रहमान ने दोनों देशों के बिगड़ते रिश्ते को ठीक करने की पहल की थी। तब दिल्ली दौरे पर आए रहमान ने एनएसए अजित डोभाल से बात की थी। गौरतलब है कि रहमान इकलौते शख्स हैं, जिन्हें अंतरिम सरकार के साथ नई सरकार में भी शामिल होने का अवसर मिला।
धीरे-धीरे आगे बढ़ने की रणनीति...
दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा मुद्दा अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यार्पण का है। हालांकि संकेत हैं कि इस मुख्य मुद्दे से पहले दोनों देश अन्य मामलों में नरमी लाने की रणनीति पर आगे बढ़ रहे हैं। इस क्रम में इस दौरे को भी देखा जा रहा है।
भागवत ने कहा, शांति और स्थिरता के लिए जरूरी है एकता और अनुशासन
20 Mar, 2026 07:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नागपुर। आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत ने शुक्रवार को कहा कि स्वार्थ और वर्चस्व की लालसा विश्व में संघर्षों का मूल कारण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से ही प्राप्त की जा सकती है। नागपुर में एक सभा को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि पिछले 2000 सालों से दुनिया ने संघर्षों को सुलझाने के लिए विभिन्न विचारों पर प्रयोग किए हैं, लेकिन सफलता नगण्य रही है। उन्होंने बताया कि धार्मिक असहिष्णुता, जबरन धर्मांतरण और श्रेष्ठता-हीनता की धारणाएं आज भी मौजूद हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भागवत ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा यह सिखाती है कि सभी आपस में जुड़े हुए और एक हैं और उन्होंने संघर्ष से सद्भाव और सहयोग की ओर बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान भी धीरे-धीरे इसी समझ की ओर बढ़ रहा है। भागवत ने कहा कि दुनिया में संघर्षों की जड़ स्वार्थ एवं वर्चस्व की चाह है और स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से ही हासिल की जा सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक भागवत ने आचरण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि धर्म केवल शास्त्रों तक सीमित नहीं रह सकता बल्कि यह लोगों के व्यवहार में भी दिखना चाहिए। उन्होंने कहा कि अनुशासन और नैतिक मूल्यों के पालन के लिए निरंतर अभ्यास की जरूरत होती है और इसमें अक्सर व्यक्तिगत कठिनाई भी झेलनी पड़ती हैं। भागवत ने कहा कि भारत मानवता में विश्वास करता है जबकि अन्य देश अस्तित्व के लिए संघर्ष और ताकतवर के टिके रहने के सिद्धांत को मानते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया को संघर्ष नहीं, बल्कि सौहार्द की जरूरत है।
अतुल का टिकट काटकर बीजेपी ने कांग्रेस छोड़कर आए बोरदोलोई को दिया मौका
20 Mar, 2026 05:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डिसपुर। प्रद्युत बोरदोलोई ने कांग्रेस छोड़ने के 24 घंटे के अंदर ही आगामी राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी का टिकट हासिल कर असम की राजनीति में हलचल मचा दी है। वहीं, उनके बेटे प्रतीक बोरदोलोई ने मार्गेरिटा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव न लड़ने का फैसला किया है। कांग्रेस के लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने बुधवार को बीजेपी में शामिल होकर कांग्रेस से अपना नाता तोड़ दिया। बीजेपी ने उन्हें दिसपुर से मैदान में उतारा है और मौजूदा विधायक अतुल बोरा का टिकट काट दिया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक असम गण परिषद (एजीपी) के संस्थापक सदस्यों में से एक बोरा ने 1985 में दिसपुर सीट जीती थी। 2013 में बोरा बीजेपी में शामिल हो गए और लगातार दो चुनावों में पार्टी के लिए यह सीट जीती। प्रद्युत बोरदोलोई ने 1998 से 2016 तक मार्गेरिटा सीट जीती थी। पिछले विधानसभा चुनावों में हार के बाद उन्होंने नागांव लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 2024 में उन्होंने फिर से नागांव सीट जीती।
बीजेपी में शामिल होने को भावनात्मक रूप से कठिन बताते हुए दो बार के सांसद और पूर्व तरुण गोगोई के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे प्रद्युत बोरदोलोई ने कहा कि उन्हें पार्टी के अंदर घुटन और उपेक्षा महसूस हो रही थी और वे एक ऐसे मंच की तलाश में थे जहां वे सम्मान के साथ काम कर सकें। वहीं बोरा ने कहा कि मैं 1985 से दिसपुर का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं और अपने राजनीतिक सफर में तीन मुख्यमंत्रियों को हरा चुका हूं। मुझे पार्टी से उम्मीद थी कि वह मेरे पिछले रिकॉर्ड पर विचार करेगी।
बोरा ने बीजेपी के अंदर मौजूदा स्थिति पर खेद व्यक्त करते हुए कहा कि इससे उनका मोहभंग हो गया है। आज बीजेपी में काम करने का माहौल नहीं है। कार्यकर्ता असमंजस में हैं कि वे कहां जाएं। पार्टी खुद को सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करती है, फिर भी अब वह बाहर से उम्मीदवार ला रही है।
उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट विस्तार से बदले सियासी समीकरण, 5 नए मंत्री शामिल
20 Mar, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देहरादून। उत्तराखंड सरकार में लंबे समय के इंतजार के बाद आखिरकार मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया गया। इस विस्तार में पांच विधायकों को कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल किया गया है, जिससे राज्य की राजनीति में नई हलचल देखने को मिल रही है। राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल ने सभी नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित कई वरिष्ठ नेता और अधिकारी मौजूद रहे।
संतुलन साधने की कोशिश
मंत्रिमंडल विस्तार को राजनीतिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। लंबे समय से कैबिनेट विस्तार की चर्चा चल रही थी और कई विधायकों को मंत्री बनाए जाने की उम्मीद थी। ऐसे में इस फैसले से संगठन और सरकार के बीच तालमेल मजबूत करने की कोशिश की गई है।
किन्हें मिला मौका?
हालांकि आधिकारिक तौर पर सभी नामों की सूची जारी की गई है, लेकिन इस विस्तार में अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है। इससे पार्टी के अंदर संतुलन बनाए रखने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनाई गई है।
विपक्ष का हमला
विपक्ष ने इस विस्तार पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह कदम राजनीतिक दबाव में लिया गया है और इससे जनता की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। वहीं सरकार का कहना है कि यह विस्तार प्रशासनिक कामकाज को और प्रभावी बनाने के लिए जरूरी था।
आगे की चुनौती
नए मंत्रियों के सामने अब अपने-अपने विभागों में तेजी से काम करने और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की चुनौती होगी। साथ ही सरकार के लिए भी यह जरूरी होगा कि वह विकास कार्यों को गति दे और राज्य में स्थिरता बनाए रखे। मंत्रिमंडल विस्तार को उत्तराखंड की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले समय में साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।
भाजपा की पहली उम्मीदवार सूची में 88 नाम, असम में चुनावी तैयारी तेज
20 Mar, 2026 10:03 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुवाहाटी। असम विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने गुरुवार को अपने कैंडिडेट्स की पहली लिस्ट जारी की। इसमें सीएम हिमंता बिस्व सरमा सहित 88 नाम हैं। हिमंता अपनी परंपरागत सीट जालुकबारी से चुनाव लड़ेंगे। वे सातवीं बार इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। 25 दिन पहले भाजपा में आए पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा को भी टिकट दिया गया है। भाजपा ने एक दिन कांग्रेस छोडक़र पार्टी जॉइन करने वाले सांसद प्रद्युत बोरदोलोई को दिसपुर से उम्मीदवार बनाया गया है।
इधर, प्रद्युत बोरदोलोई के भाजपा में शामिल होने के बाद उनके बेटे प्रतीक बोरदोलोई ने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर चुनाव नहीं लडऩे का ऐलान किया है। प्रतीक ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े को लिखे पत्र में कहा कि अब उनका कांग्रेस उम्मीदवार बने रहना सही नहीं होगा। प्रतीक ने कहा कि मैं पूरी जिम्मेदारी और सम्मान के साथ मार्घेरिटा सीट से अपनी उम्मीदवारी वापस ले रहा हूं। यहां के लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को उम्मीदवार को लेकर स्पष्टता और भरोसा मिलना चाहिए। मैं पार्टी का सदस्य बना रहूंगा और नेतृत्व जो जिम्मेदारी देगा, उसे निभाऊंगा। प्रतीक को कांग्रेस ने मार्घेरिटा सीट से उम्मीदवार बनाया था, जहां से उनके पिता 4 बार विधायक रह चुके हैं। असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए 9 अप्रैल को मतदान होगा। 4 मई को मतगणना होगी। बीजेपी 126 में से 89 पर चुनाव लड़ेगी। बाकी 37 में से असम गण परिषद (एजीपी) को 26, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) को 11 सीटें दी गईं हैं।
उत्तम नगर हिंसा पर राहुल का बयान: भाजपा समाज को धार्मिक आधार पर विभाजित कर रही
20 Mar, 2026 09:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उत्तम नगर घटना को लेकर भाजपा पर सांप्रदायिक हिंसा भडक़ाने का आरोप लगाया और दिल्ली के निवासियों से अपील की कि वे किसी भी उकसावे में न आएं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि उत्तम नगर के लोगों ने हिंसा की भारी कीमत चुकाई है। एक तरफ एक जवान लडक़े, तरुण, की जान चली गई, दूसरी तरफ एक पूरा परिवार उत्पीडऩ का सामना कर रहा है। उन्हें और खून-खराबा नहीं चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा कि खून-खराबा केवल भाजपा और उसका इकोसिस्टम चाहता है, जो नफऱत के तवे पर हिंसा की रोटी सेंकने के हर मौके का फायदा उठाता है। गांधी ने आगे कहा कि वो (भाजपा) चाहते हैं कि देश हिंदू-मुसलमान में उलझा रहे, ताकि लोग यह न पूछ सकें कि आखिर प्रधानमंत्री देश की रक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और सामरिक संप्रभुता को अमेरिका के हवाले करने पर क्यों मजबूर हैं - इसीलिए, दिन-दहाड़े देश की राजधानी में फिर से दंगों जैसे हालात खड़े किए जा रहे हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने दिल्लीवासियों से अनुरोध है किसी बहकावे में न आएं - देश की शक्ति हमारी एकता, भाईचारे और मोहब्बत में है। जोड़ो जोड़ो, भारत जोड़ो।
शिंदे से संपर्क में शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसद, पार्टी में हो सकता बदलाव
20 Mar, 2026 08:53 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत में क्या डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे एक बार खेला करने जा रहे हैं? शिंदे के दिल्ली दौरे से महाराष्ट्र में ऑपरेशन टाइगर की चर्चा तेज हो गई है, जिसे लेकर उद्धव ठाकरे गुट में बेचैनी बढ़ गई है। कहा जा रहा है कि उद्धव के आधे से ज्यादा सांसद शिंदे गुट का दामन थाम सकते हैं।
मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि शिवसेना (यूबीटी) के आधे से ज्यादा सांसद डिप्टी सीएम एकनाथ शिंद के संपर्क में है और दल बदलने के लिए तैयार का रहे हैं। शिंदे का यह कदम उस बड़े मिशन का हिस्सा है, जिसका मकसद अपनी पार्टी की ताकत बढ़ाना और संसद में अपने सदस्यों की संख्या बढ़ाना है। महाराष्ट्र की राजनीति में फिर से बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है। शिंदे के तीन दिवसीय दिल्ली दौरे ने उद्धव ठाकरे गुट की बेचैनी को बढ़ा दिया है। हालांकि, शिंदे के साथ दिल्ली दौरे पर मौजूद रहे उदय सामंत ने कहा कि यह दौरा पूरी तरह से सांसदों के साथ संवाद और मार्ग दर्शन के लिए था।
रिपोर्ट के मुताबिक डिप्टी सीएम एकनाथ ने अपने दिल्ली दौरे पर सबसे पहले संसद भवन पहुंचे। संसद भवन में पीएम मोदी से मुलाकात की और उसके केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से भी मिले थे। सूत्रों की माने तो उद्धव ठाकरे के 9 लोकसभा सांसदों में से आधे से ज्यादा सांसद डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के संपर्क में है और पाला बदलने के इच्छुक हैं। शिवसेना के सूत्रों ने बताया है कि दिल्ली यात्रा के दौरान एकनाथ शिंदे ने अपने सांसदों के साथ पीएम मोदी से मुलाकात की और इस दौरान उन्होंने उद्धव गुट के सांसदों के पाला बदलने के मुद्दे पर चर्चा की। ऐसे शिंदे ने दिल्ली दौरे पर कानूनी विशेषज्ञों से इस संबंध में राय भी ली है। इसके बाद से ऑपरेशन टाइगर की चर्चा तेज हो गई।
बता दें महाराष्ट्र में 2024 के विधानसभा चुनाव से बीजेपी के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन अपनी जीत का सिलसिला बरकार रखा है। नगर निगम चुनाव से लेकर जिला परिषद और मेयर तक के चुनाव में बीजेपी और शिवेसना की जोड़ी हिट रही है। दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे ने मुंबई की सत्ता भी गंवा चुकी है और बीजेपी का बीएमसी पर पूरी तरह से कब्जा है, जिसके चलते शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं में राजनीतिक बेचैनी बढ़ गई।
उद्धव गुट के सांसदों के पाला बदलने की संभावनाओं से शिंदे गुट के नेता इनकार कर रहे हैं। शिवसेना कोटे के मंत्री उदय सामंत ने स्पष्ट किया है कि शिंदे के दिल्ली दौरे का ऑपरेशन टाइगर से कोई संबंध नहीं है। शिंदे गुट के नेता भले ही इनकार कर रहे हों, लेकिन उद्धव गुट बेचैन है। उद्धव ठाकरे के सामने अपने सियासी वजूद को बचाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। केंद्र से लेकर राज्य तक की सत्ता से बाहर हो गई है। इतना ही नहीं जिला परिषद से लेकर नगर निगम और नगर पालिका तक में पार्टी कमजोर हुई है।
केंद्र में मंत्री पद पर नीतीश कुमार की नियुक्ति: मोदी की नैतिक जीत?
20 Mar, 2026 07:55 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। बिहार के सीएम नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए चुने जा चुके हैं। उनके राज्यसभा जाने पर आरजेडी के कद्दावर नेता शिवानंद तिवारी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नीतीश कुमार के इस फैसले को लेकर कहा और नीतीश कुमार से जुड़ी पुरानी बातों का जिक्र किया है। बुधवार को शिवानंद ने फेसबुक पोस्ट के जरिए कहा कि मुझे नहीं मालूम कि राज्यसभा का सदस्य बनने के बाद नीतीश कुमार आगे क्या करने वाले हैं। एक चर्चा यह है कि वे केंद्र सरकार में मंत्री बन सकते हैं। केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल होना या न होना उनकी इच्छा पर निर्भर करता है, लेकिन यदि ऐसा हुआ तो एक तरह से यह नरेंद्र मोदी की नैतिक विजय मानी जाएगी।
उन्होंने कहा कि याद कीजिए, ये वही नीतीश कुमार हैं जो कभी नरेंद्र मोदी का चेहरा तक देखना पसंद नहीं करते थे। नरेंद्र मोदी की वजह से उन्होंने बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों के लिए रखा गया भोज तक रद्द कर दिया था। ऐसे में यदि वह आज नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल के सदस्य बनते हैं, तो मोदीजी के लिए इससे बड़ा गौरव और क्या हो सकता है!
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शिवानंद ने कहा कि एक समय में उन्होंने नीतीश कुमार के साथ काम किया है। अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल के सदस्य रहने के बाद और बिहार में सबसे लंबे समय तक सीएम रहने के बाद क्या उनके लिए मोदी मंत्रिमंडल का सदस्य बनना उचित और गरिमापूर्ण होगा? एक समय ऐसा भी था जब एनडीए गठबंधन के लिए बिहार के चुनाव प्रचार में उन्होंने नरेंद्र मोदी को आने तक नहीं दिया था। वे कहा करते थे कि बिहार में एक मोदी पहले से मौजूद है यानी सुशील मोदी दूसरे मोदी की यहां क्या जरूरत।
आरजेडी के वरिष्ठ नेता ने कहा कि अगर नरेंद्र मोदी सचमुच नीतीश कुमार को सम्मान देना चाहते हैं, तो एनडीए गठबंधन का राष्ट्रीय संयोजक बनाना उनकी प्रतिष्ठा के ज्यादा अनुकूल होगा। इससे उनकी गरिमा भी बनी रहेगी और गठबंधन की राजनीति में उनकी भूमिका भी बनी रहेगी।
नीतीश, नैतिकता और सवाल: शिवानंद तिवारी के पोस्ट का राजनीतिक संदेश क्या है?
19 Mar, 2026 11:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना. बिहार के पुराने समाजवादी नेता शिवानंद तिवारी ने फेसबुक पर नीतीश कुमार को लेकर एक लंबा पोस्ट लिखा है. इसमें उन्होंने कहा कि राज्यसभा सांसद बनने के बाद अगर नीतीश केंद्र सरकार में मंत्री बनते हैं तो यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नैतिक विजय होगी. पोस्ट में उन्होंने याद दिलाया कि एक समय नीतीश मोदी का चेहरा तक देखना नहीं चाहते थे. नरेंद्र मोदी की वजह से भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के लिए रखा भोज तक रद्द कर दिया था. अब अगर नीतीश मोदी कैबिनेट में शामिल होते हैं तो मोदी के लिए इससे बड़ा गौरव क्या हो सकता है. शिवानंद तिवारी ने यह पोस्ट बुधवार (18 मार्च) को लिखा है जिसने राजनीति के गलियारों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है.
पुरानी दोस्ती और वर्तमान तंज
बता दें कि शिवानंद तिवारी एक समय में नीतीश कुमार के बहुत करीब रहे हैं. समता पार्टी की नींव रखने में नीतीश कुमार के साथ शिवानंद तिवारी की भी भूमिका थी और बाद में जदयू में भी साथ काम किया. शिवानंद तिवारी जदयू के महासचिव और प्रवक्ता भी रह चुके हैं, लेकिन बाद में आरजेडी में चले गए और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने. अब वह आरजेडी से बागी हैं और तेजस्वी यादव पर भी सवाल उठाते हैं. लेकिन नीतीश कुमार के साथ पुरानी निकटता अभी भी मन में है.
अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि नीतीश कुमार के साथ निकटता से काम करने के बाद यह सोचकर पीड़ा होती है. अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में रहने और बिहार में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री बनने के बाद क्या मोदी कैबिनेट में शामिल होना गरिमापूर्ण होगा. शिवांद तिवारी का यह तंज नीतीश की बदलती राजनीति पर है.शिवांद तिवारी ने कई पुरानी घटनाएं याद कीं और लिखा कि, एक समय एनडीए गठबंधन के चुनाव प्रचार में नीतीश ने मोदी को बिहार आने नहीं दिया. वे कहा करते थे कि बिहार में एक मोदी पहले से मौजूद है यानी सुशील मोदी. दूसरे मोदी की यहां क्या जरूरत है. यह बात 2010 के आसपास की है जब नीतीश मोदी को प्रधानमंत्री उम्मीदवार नहीं मानते थे. 2013 में नीतीश ने मोदी के नाम पर भाजपा से गठबंधन तोड़ दिया. मोदी की वजह से भाजपा की बैठक का भोज रद्द करने की घटना भी सच्ची है. नीतीश वाजपेयी सरकार में रेल मंत्री रह चुके हैं. लेकिन अब जब नीतीश राज्यसभा जा रहे हैं और केंद्र मंत्री की चर्चा है तो तिवारी कहते हैं कि यह नीतीश की पुरानी छवि पर सवाल खड़ा करेगा.
शिवानंद तिवारी ने साफ और स्पष्ट रूप में कहा है कि, अगर मोदी नीतीश को सम्मान देना चाहते हैं तो उन्हें केंद्रीय मंत्री नहीं बल्कि एनडीए का राष्ट्रीय संयोजक बना दें. इससे नीतीश की गरिमा बनी रहेगी और गठबंधन की राजनीति में उनकी भूमिका भी रहेगी. केंद्र मंत्री बनना तिवारी को जंचता नहीं. उन्होंने लिखा कि अगर नीतीश यह फैसला लेते हैं तो यह दुर्भाग्यपूर्ण दिन होगा. उनकी इच्छा पर निर्भर है, लेकिन नैतिक रूप से यह मोदी की जीत होगी.
बिहार सियासत पर शिवानंद के पोस्ट का असर
शिवानंद तिवारी का यह पोस्ट ऐसे समय आया है जब नीतीश कुमार समृद्धि यात्रा कर रहे हैं और उत्तराधिकारी की चर्चा तेज है. सम्राट चौधरी और निशांत कुमार जैसे नाम सामने हैं. बता दें कि शिवानंद तिवारी ने पहले भी अगले मुख्यमंत्री को लेकर पोस्ट लिखा था. अब यह बयान नीतीश की केंद्र में भूमिका पर फोकस कर रहा है. भाजपा इसे नैतिक जीत मान सकती है क्योंकि नीतीश ने 2014 में मोदी के खिलाफ मोर्चा खोला था. लेकिन जदयू और एनडीए में यह बहस छेड़ देगा कि नीतीश की गरिमा कैसे बनी रहे. वहीं आरजेडी इसे नीतीश की असंगति बताएगा.
नीतीश की नैतिकता और नाम का सवाल
पोस्ट का सबसे बड़ा मतलब नीतीश कुमार के नाम और नैतिकता से जुड़ा है. शिवानंद तिवारी पूछ रहे हैं कि इतने साल मुख्यमंत्री रहने के बाद क्या केंद्र में छोटा पद लेना सही है. यह सवाल बिहार के लोगों के मन में भी है. शिवानंद तिवारी ने पुरानी दोस्ती वाला पोस्ट कहा है कि यह सिर्फ व्यक्तिगत नहीं बल्कि पूरे समाजवादी खेमे का सवाल है. ऐसे में अब देखना है कि नीतीश राज्यसभा जाने के बाद क्या फैसला लेते हैं. उनके आसपास के लोग क्या सलाह देते हैं. बहरहाल, इन सवालों के बीच शिवानंद तिवारी का पोस्ट जहां पुरानी यादों को ताजा कर रहा है, वहीं नई सियासी हवा को दिशा दे रहा है. बिहार अब इंतजार कर रहा है कि नीतीश का अगला कदम क्या होगा?
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