राजनीति
आर्थिक चेतावनी: राहुल गांधी का हमला, रुपये की कीमत में गिरावट और महंगाई की संभावना
23 Mar, 2026 10:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने शनिवार को रुपये की गिरावट और बढ़ती ईंधन कीमतों (fuel prices) को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आशंका जताई कि देश में महंगाई की नई लहर आने वाली है और सरकार के पास इससे निपटने की कोई ठोस रणनीति नहीं है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 100 के करीब पहुंच रहा है, जबकि औद्योगिक ईंधन की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। उनके मुताबिक ये सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि आने वाली महंगाई के स्पष्ट संकेत हैं। हाल ही में रुपया 64 पैसे गिरकर 93.53 के स्तर पर पहुंचा, जिसे इसका रिकॉर्ड निचला स्तर बताया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर भारत पर पड़ेगा। राहुल गांधी के अनुसार रुपये की कमजोरी और ईंधन महंगाई के चार बड़े प्रभाव होंगे—उत्पादन और परिवहन लागत में वृद्धि, सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्यमों पर दबाव, रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों द्वारा पूंजी निकासी से शेयर बाजार पर असर। उन्होंने कहा कि इन सबका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इन संकेतों को नजरअंदाज कर रही है और सिर्फ बयानबाजी कर रही है। उनका दावा है कि चुनाव के बाद पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी की जा सकती है। उन्होंने कहा कि चुनावी मौसम में कीमतों को स्थिर रखकर जनता को भ्रमित किया जा रहा है, लेकिन मतदान के बाद ईंधन महंगा हो सकता है।
कांग्रेस नेता ने कहा, “सवाल यह नहीं है कि सरकार क्या कह रही है, सवाल यह है कि आपकी थाली में क्या बचा है।” इस मुद्दे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने भी रुपये की गिरावट को वैश्विक कारणों से जोड़ते हुए केंद्र सरकार से ईंधन करों में कटौती की मांग की है।
राजनीति में बड़ा कदम: मायावती ने MP, बिहार और छत्तीसगढ़ के लिए बनाया खास प्लान
23 Mar, 2026 09:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती (Bahujan Samaj Party Chief Mayawati) ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले विधानसभा चुनावों (Assembly elections) में बसपा महज उपस्थिति दर्ज कराने के लिए नहीं, बल्कि ‘शासक वर्ग’ बनने के संकल्प के साथ मैदान में उतरेगी. हाल ही में मध्य प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ हुई मैराथन बैठक में उन्होंने जीत का नया ब्लूप्रिंट साझा किया है. बैठक के दौरान ऑल इंडिया स्तर पर हुई पिछली बैठक के निर्देशों की समीक्षा की गई. मायावती ने पिछली कमियों को दूर करते हुए इन तीन प्रमुख राज्यों में पार्टी को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और और जनाधार बढ़ाने पर जोर दिया है.
‘सत्ता की मास्टर चाबी’ को अपने हाथ में लेना है
बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने आगामी राजनीतिक समीकरणों को साधने के लिए अपनी सक्रियता तेज कर दी है. लखनऊ में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में मायावती ने मध्य प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ की स्टेट कमेटियों के साथ रणनीतिक मंथन किया. बैठक के दौरान मायावती ने साफ किया कि जातिवादी शोषण और गरीब विरोधी शासन से मुक्ति पाने का एकमात्र रास्ता ‘सत्ता की मास्टर चाबी’ अपने हाथ में लेना है. उन्होंने तीनों राज्यों के पदाधिकारियों को मिशनरी भावना के साथ काम करने के निर्देश दिए.
बैठक में भावुक हुईं मायावती
मायावती ने भावुक होते हुए कहा कि मान्यवर कांशीराम जी ने जिस मिशन के लिए अपना जीवन समर्पित किया, उसे पूरा करने के लिए वह जी-जान से जुटी हैं. मायावती ने कहा कि जब-जब और जहां-जहां BSP मजबूत हुई है, वहां दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों का वास्तविक भला हुआ है. अब चुनावी सफलता अर्जित करना समय की सबसे बड़ी मांग है. मायावती ने कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि अम्बेडकरवादी मूवमेंट को आगे बढ़ाकर ही बहुजन समाज अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है.
कांग्रेस में तकरार: खड़गे के घर रातभर चली हाई-वोल्टेज वार्ता, राहुल गांधी ने रोकी केरल की लिस्ट
23 Mar, 2026 08:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली. केरल (Kerala) में विधानसभा चुनाव (assembly elections) का बिगुल बज चुका है. वोटिंग 9 अप्रैल को होगी और नतीजे 4 मई को आएंगे. तमाम राजनीतिक पार्टियों ने कमर कस ली है. जाहिर है, जब केरल में चुनाव हैं तो दिल्ली में राजनीतिक हलचल (Political Turmoil) भी तेज होगी. लंबे समय से कांग्रेस केरल में सत्ता से दूर है, ऐसे में सत्ता में वापसी की बेचैनी दिल्ली तक साफ दिखाई दे रही है. बीती रात कांग्रेस के भीतर जो हलचल हुई उसने पार्टी के अंदर चल रही स्थिति को खुलकर सामने ला दिया. रात साढ़े दस बजे से लेकर सुबह ढाई बजे तक चला यह हाई-वोल्टेज ड्रामा सिर्फ एक बैठक नहीं था, बल्कि सत्ता की रणनीति, असहमति और नेतृत्व की पकड़ का लाइव प्रदर्शन था. मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पर जुटे दिग्गज नेताओं के बीच माहौल गंभीर था. इसकी वजह राहुल गांधी की नाराजगी थी. केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस कैंडिडेट की लिस्ट जारी हो चुकी थी लेकिन राहुल गांधी ने उसे रोक दिया. सवाल उठे, फैसले बदले और पूरी प्रक्रिया पर फिर से मंथन शुरू हो गया.यह सिर्फ टिकट बंटवारे का मामला नहीं था. यह नेतृत्व बनाम संगठन, रणनीति बनाम दबाव और चुनावी गणित बनाम जमीनी हकीकत की टक्कर थी. राहुल गांधी ने साफ संकेत दे दिया कि बिना ठोस डेटा, जातीय समीकरण और सर्वे फीडबैक के टिकट बांटना अब मंजूर नहीं होगा. सांसदों को चुनाव लड़ाने पर भी रोक लगा दी गई. इससे कई दिग्गजों की उम्मीदों पर पानी फिर गया. इस फैसले ने यह भी दिखा दिया कि पार्टी अब जोखिम लेने के बजाय सोच-समझकर कदम बढ़ाना चाहती है.
क्या हुआ बैठक में, किसे मिला झटका, किसका बढ़ा दबदबा?
रात 10:30 बजे शुरू हुई CEC बैठक तड़के 2:30 बजे तक चली. इस दौरान सबसे बड़ा फैसला यह रहा कि कोई भी लोकसभा सांसद विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगा. के सुधाकरन, अदूर प्रकाश औरशफी परम्बिल जैसे नेताओं की उम्मीदों को झटका लगा. राहुल गांधी का तर्क साफ था अगर सांसद चुनाव लड़ेंगे तो उपचुनाव होंगे और पार्टी कमजोर पड़ेगी. टिकट वितरण में वेणुगोपाल का दबदबा साफ नजर आया. करीब 60% उम्मीदवार उनके गुट से जुड़े बताए जा रहे हैं. वहीं रमेश चेन्निथला औरवी डी सतीशन के गुट को भी हिस्सेदारी मिली. दिलचस्प बात यह रही कि शशि थरूर ने टिकट वितरण में कोई दखल नहीं दिया.
कांग्रेस ने इस बार सोशल इंजीनियरिंग पर बड़ा दांव खेला है. ईसाई, नायर और एझावा समुदाय को संतुलित प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है. 92 में से 52 उम्मीदवार 50 साल से कम उम्र के हैं, यानी युवाओं को प्राथमिकता दी गई है. लेकिन महिला प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, जहां केवल 9 महिलाओं को टिकट मिला.
राहुल गांधी सोमवार को वडोदरा आएंगे, आदिवासी क्षेत्रों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर करेंगे संवाद
22 Mar, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वडोदरा| कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी 23 मार्च, सोमवार को वडोदरा का दौरा करेंगे। इस दौरान वे आदिवासी क्षेत्रों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर संवाद करेंगे। गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमित चावड़ा ने वडोदरा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस दौरे की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में करीब 1000 डॉक्टर, इंजीनियर और विभिन्न एनजीओ के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस संवाद में आदिवासी अधिकार, विकास और सामाजिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब राहुल गांधी केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर लगातार हमलावर हैं। उन्होंने हाल ही में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के 93 के स्तर के नीचे जाने पर चिंता जताई थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने लिखा कि रुपये की कमजोरी और औद्योगिक ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी भविष्य में महंगाई के संकेत हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार के पास कोई ठोस आर्थिक रणनीति नहीं है और केवल भाषण दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्पादन और परिवहन महंगे होने से सबसे ज्यादा असर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) पर पड़ेगा, जिससे रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। राहुल गांधी के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) भारतीय शेयर बाजार से निवेश निकाल रहे हैं, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93 के स्तर को पार कर गया था। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और विदेशी निवेश के लगातार बाहर जाने से रुपये पर दबाव देखा जा रहा है। ऐसे में राहुल गांधी का वडोदरा दौरा, आर्थिक मुद्दों के बीच आदिवासी समुदाय से जुड़े सवालों पर केंद्रित रहने की उम्मीद है।
असम विधानसभा चुनाव: टीएमसी ने दूसरी सूची जारी कर 7 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए
22 Mar, 2026 06:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिसपुर। असम विधानसभा चुनाव को लेकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने अपनी दूसरी उम्मीदवार सूची जारी कर दी है। पार्टी ने यह घोषणा अपने शीर्ष नेतृत्व और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मार्गदर्शन में की। इस सूची में असम की सात विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम शामिल किए गए हैं।
जारी सूची के अनुसार मांडिया (बारपेटा) सीट से शेरमन अली अहमद को टिकट दिया गया है। हाजो-सुअलकुची (एससी) सीट से रोजी अहमद (फुनू दास), गुवाहाटी सेंट्रल से अविजीत मजूमदार, चाबुआ-लाहोवाल (डिब्रूगढ़) से इनुस कुमार कंदापन, मरियानी (जोरहाट) से परेश बोरा, करीमगंज नॉर्थ से परिमल रंजन रॉय और करीमगंज साउथ से अजीज अहमद खान (रानू खान) को उम्मीदवार बनाया गया है। इसके साथ ही पार्टी ने अपनी पहली सूची में एक बदलाव भी किया है। पहली सूची में शामिल क्रम संख्या 6 के तहत चामरिया विधानसभा सीट (एसी नंबर 27) से घोषित उम्मीदवार की उम्मीदवारी वापस ले ली गई है। टीएमसी ने अपने सभी उम्मीदवारों को शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि वे जनता के बीच जाकर सेवा भावना के साथ काम करें और लोगों का विश्वास हासिल करें।
इससे पहले टीएमसी ने शनिवार को अपनी पहली सूची जारी की थी, जिसमें 17 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा गया था। असम विधानसभा में कुल 126 सीटें हैं और यह एक सदनीय विधायिका है। चुनाव आयोग के अनुसार इनमें से 9 सीटें अनुसूचित जाति (एससी) और 19 सीटें अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित हैं। असम का राजनीतिक महत्व संसद में भी देखा जाता है, जहां राज्य से लोकसभा की 14 सीटें और राज्यसभा की 7 सीटें हैं। राज्य की सभी 126 विधानसभा सीटों पर मतदान एक ही चरण में 9 अप्रैल को होगा, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी।
तेल-गैस संकट पर पीएम मोदी कर रहे बड़ी बैठक, होर्मुज के चक्रव्यूह को भेदने के लिए मंत्रियों संग चर्चा
22 Mar, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध की आहट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं. इस बैठक का मुख्य एजेंडा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैदा हुए ऊर्जा संकट से निपटना और भारत में तेल, गैस और उर्वरक की सप्लाई आपूर्ति सुनिश्चित करना है. सूत्रों के अनुसार, बैठक में पेट्रोलियम और बिजली मंत्रालय के वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी भी शामिल होंगे. 28 फरवरी से शुरू हुआ यह संघर्ष अब अपने तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर नियंत्रण कर जहाजों की आवाजाही को सीमित करने से वैश्विक शिपिंग रूट बुरी तरह प्रभावित हुआ है. चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, इसलिए इस समुद्री मार्ग की नाकेबंदी भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक चुनौती बन गई है.
इससे पहले 12 मार्च को प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया था कि पश्चिम एशिया का युद्ध दुनिया के लिए एक बड़ी परीक्षा है. उन्होंने इसे राष्ट्रीय चरित्र की महत्वपूर्ण कसौटी बताते हुए जनता से धैर्य और जागरूकता की अपील की थी. सरकार का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक अस्थिरता का असर भारतीय उपभोक्ताओं की जेब और घरेलू उद्योगों पर न पड़े. युद्ध शुरू होने के बाद से पीएम मोदी लगातार वैश्विक नेताओं के संपर्क में हैं. उन्होंने सऊदी अरब, यूएई, कतर, इजरायल और ईरान सहित कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से फोन पर बात की है. आज की बैठक में इन कूटनीतिक चर्चाओं के नतीजों और वैकल्पिक सप्लाई रूट पर भी विचार किया जा सकता है.
मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच एक्शन में PM मोदी! ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा फैसला तय
22 Mar, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी जंग ने ग्लोबल लेवल पर बैचेनी बढ़ा दी है. जहां ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच बीते 23 दिन से लड़ाई जारी है. इसकी वजह से दुनियाभर में तेल और गैस की किल्लत दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है. इसका असर भारत में भी देखने को मिल रहा है. इसी समस्या को हल करने के लिए रविवार (22 मार्च 2026) की शाम देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक अहम बैठक करने जा रहे हैं. इस बैठक में सरकार के कई बड़े मंत्री शामिल होंगे और देश की ऊर्जा से जुड़ी स्थिति की समीक्षा की जाएगी.
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बदल रहे हैं. इसी को देखते हुए सरकार पहले से तैयारी कर रही है ताकि देश पर किसी तरह का असर न पड़े. पीएम मोदी के बैठक में पेट्रोलियम, कच्चे तेल, बिजली और खाद जैसे जरूरी क्षेत्रों पर खास ध्यान दिया जाएगा. सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इन सभी चीजों की सप्लाई बिना किसी रुकावट के चलती रहे. इसके साथ ही देश में सामान की ढुलाई और वितरण सही तरीके से हो, इस पर भी चर्चा होगी, ताकि आम लोगों और उद्योगों को किसी तरह की परेशानी न हो.
सियासी गर्मी: ‘धुरंधर 2’ को लेकर बैन और डायरेक्टर-प्रोड्यूसर पर कार्रवाई की उठी मांग
22 Mar, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। बॉक्स ऑफिस पर तेजी से आगे बढ़ रही फिल्म धुरंधर 2 (Dhurandhar 2) अब राजनीतिक विवादों में घिरती नजर आ रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी (Rashid Alvi) ने फिल्म पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसके प्रदर्शन पर रोक लगाने और निर्माताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अल्वी का कहना है कि फिल्म में माफिया अतीक अहमद की सार्वजनिक हत्या को सही ठहराने का प्रयास किया गया है, जो समाज और न्याय व्यवस्था के लिए गलत संदेश देता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या फिल्मों के जरिए इस तरह की घटनाओं को उचित ठहराना सही है।
“ऐसी फिल्मों से माहौल खराब होता है”
राशिद अल्वी ने आरोप लगाया कि इस तरह की फिल्मों से देश का माहौल खराब होता है। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है ऐसी फिल्मों को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन या फंडिंग मिलती हो, हालांकि इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं किया।
उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि अगर फिल्मों के जरिए हत्याओं को जायज ठहराया जाएगा, तो क्या देश में अदालतों की जरूरत ही खत्म हो जाएगी?
पाकिस्तान-चीन एंगल पर भी सवाल
कांग्रेस नेता ने फिल्म की कहानी पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें केवल पाकिस्तान के खिलाफ माहौल दिखाया गया है, जबकि चीन का जिक्र नहीं किया गया। उनके मुताबिक, यह एकतरफा सोच को दर्शाता है।
नोटबंदी को लेकर भी उठे सवाल
अल्वी ने दावा किया कि फिल्म में नोटबंदी जैसे मुद्दे को भी सही ठहराने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि इस तरह के चित्रण से उन लोगों की पीड़ा नजरअंदाज होती है, जो उस फैसले से प्रभावित हुए थे।
बॉक्स ऑफिस पर मजबूत प्रदर्शन
विवादों के बीच धुरंधर 2 की कमाई लगातार बढ़ रही है। फिल्म ने रिलीज के शुरुआती दो दिनों में ही 200 करोड़ रुपये से अधिक का कलेक्शन कर लिया है। इससे पहले इसके पहले भाग धुरंधर ने 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की थी।
प्रोपेगैंडा बनाम एंटरटेनमेंट की बहस
फिल्म को लेकर देश में दो धड़े बनते दिख रहे हैं। एक पक्ष इसे प्रोपेगैंडा करार दे रहा है, जबकि दूसरा इसे मनोरंजन और देशभक्ति से जुड़ी कहानी बता रहा है।
फिलहाल, धुरंधर 2 पर बैन को लेकर कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है, लेकिन इस विवाद ने फिल्म को लेकर राजनीतिक बहस जरूर तेज कर दी है।
राहुल गांधी का फैसले ने खड़गे के घर में मचाई हलचल, केरल लिस्ट पर विवाद
22 Mar, 2026 11:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली. केरल (Kerala) में विधानसभा चुनाव (assembly elections) का बिगुल बज चुका है. वोटिंग 9 अप्रैल को होगी और नतीजे 4 मई को आएंगे. तमाम राजनीतिक पार्टियों ने कमर कस ली है. जाहिर है, जब केरल में चुनाव हैं तो दिल्ली में राजनीतिक हलचल (Political Turmoil) भी तेज होगी. लंबे समय से कांग्रेस केरल में सत्ता से दूर है, ऐसे में सत्ता में वापसी की बेचैनी दिल्ली तक साफ दिखाई दे रही है. बीती रात कांग्रेस के भीतर जो हलचल हुई उसने पार्टी के अंदर चल रही स्थिति को खुलकर सामने ला दिया. रात साढ़े दस बजे से लेकर सुबह ढाई बजे तक चला यह हाई-वोल्टेज ड्रामा सिर्फ एक बैठक नहीं था, बल्कि सत्ता की रणनीति, असहमति और नेतृत्व की पकड़ का लाइव प्रदर्शन था. मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पर जुटे दिग्गज नेताओं के बीच माहौल गंभीर था. इसकी वजह राहुल गांधी की नाराजगी थी. केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस कैंडिडेट की लिस्ट जारी हो चुकी थी लेकिन राहुल गांधी ने उसे रोक दिया. सवाल उठे, फैसले बदले और पूरी प्रक्रिया पर फिर से मंथन शुरू हो गया.
यह सिर्फ टिकट बंटवारे का मामला नहीं था. यह नेतृत्व बनाम संगठन, रणनीति बनाम दबाव और चुनावी गणित बनाम जमीनी हकीकत की टक्कर थी. राहुल गांधी ने साफ संकेत दे दिया कि बिना ठोस डेटा, जातीय समीकरण और सर्वे फीडबैक के टिकट बांटना अब मंजूर नहीं होगा. सांसदों को चुनाव लड़ाने पर भी रोक लगा दी गई. इससे कई दिग्गजों की उम्मीदों पर पानी फिर गया. इस फैसले ने यह भी दिखा दिया कि पार्टी अब जोखिम लेने के बजाय सोच-समझकर कदम बढ़ाना चाहती है.
क्या हुआ बैठक में, किसे मिला झटका, किसका बढ़ा दबदबा?
रात 10:30 बजे शुरू हुई CEC बैठक तड़के 2:30 बजे तक चली. इस दौरान सबसे बड़ा फैसला यह रहा कि कोई भी लोकसभा सांसद विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगा. के सुधाकरन, अदूर प्रकाश औरशफी परम्बिल जैसे नेताओं की उम्मीदों को झटका लगा. राहुल गांधी का तर्क साफ था अगर सांसद चुनाव लड़ेंगे तो उपचुनाव होंगे और पार्टी कमजोर पड़ेगी.
टिकट वितरण में वेणुगोपाल का दबदबा साफ नजर आया. करीब 60% उम्मीदवार उनके गुट से जुड़े बताए जा रहे हैं. वहीं रमेश चेन्निथला औरवी डी सतीशन के गुट को भी हिस्सेदारी मिली. दिलचस्प बात यह रही कि शशि थरूर ने टिकट वितरण में कोई दखल नहीं दिया.
कांग्रेस ने इस बार सोशल इंजीनियरिंग पर बड़ा दांव खेला है. ईसाई, नायर और एझावा समुदाय को संतुलित प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है. 92 में से 52 उम्मीदवार 50 साल से कम उम्र के हैं, यानी युवाओं को प्राथमिकता दी गई है. लेकिन महिला प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, जहां केवल 9 महिलाओं को टिकट मिला.
‘दीदी की 10 प्रतिज्ञा’: ममता बनर्जी का घोषणापत्र महिलाओं और युवाओं को समर्पित
22 Mar, 2026 10:58 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) को लेकर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी कर दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने ‘दीदी की 10 प्रतिज्ञा’ के नाम से जनता के सामने वादों का खाका पेश किया, जिसमें खासतौर पर महिलाओं, बेरोजगार युवाओं और किसानों को केंद्र में रखा गया है।
घोषणापत्र में सबसे बड़ा दांव महिलाओं और बेरोजगारों पर खेला गया है। ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना के तहत अब सामान्य वर्ग की महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये और SC/ST वर्ग की महिलाओं को 1,700 रुपये देने का वादा किया गया है। वहीं ‘युवा साथी’ योजना के तहत बेरोजगार युवाओं को नौकरी मिलने तक 1,500 रुपये मासिक भत्ता जारी रखने की बात कही गई है।
ममता बनर्जी ने कहा कि यह घोषणापत्र कल्याण और विकास का संतुलित रोडमैप है, जिसमें सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक मजबूती पर भी जोर दिया गया है।
महिलाओं, युवाओं और किसानों के लिए बड़े वादे
टीएमसी ने अपने वादों में ‘लक्ष्मी भंडार’ की राशि में 500 रुपये की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। इसके अलावा राज्य में अगली सरकार बनने पर किसानों के लिए 30,000 करोड़ रुपये का अलग कृषि बजट लाने का वादा भी किया गया है, जिसमें भूमिहीन किसानों को भी शामिल किया जाएगा।
स्वास्थ्य और शिक्षा पर जोर
घोषणापत्र में ‘दुआरे चिकित्सा’ योजना शुरू करने की बात कही गई है, जिसके तहत घर के पास ही स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही, हजारों सरकारी स्कूलों को ई-लर्निंग से लैस कर आधुनिक बनाने का भी ऐलान किया गया है।
‘दीदी की 10 प्रतिज्ञा’ क्या हैं?
महिलाओं को ₹1,500–₹1,700 मासिक सहायता
बेरोजगार युवाओं को ₹1,500 मासिक भत्ता
हर परिवार को पक्का घर
‘दुआरे चिकित्सा’ के जरिए घर-घर इलाज
₹30,000 करोड़ का कृषि बजट
हर घर तक स्वच्छ पेयजल
स्कूलों का आधुनिकीकरण और ई-लर्निंग
बुजुर्गों के लिए पेंशन विस्तार
नए आर्थिक केंद्र और बुनियादी ढांचा विकास
7 नए जिलों और नगरपालिकाओं का गठन
BJP पर निशाना, एकजुटता की अपील
घोषणापत्र जारी करते हुए ममता बनर्जी ने लोगों से भाजपा के खिलाफ एकजुट होने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्य के मामलों में दखल बढ़ा रही है। ममता ने यह भी कहा कि भाजपा को आगामी चुनाव में हार का अंदेशा है, इसलिए वह दबाव की राजनीति कर रही है।
उन्होंने जनता से पश्चिम बंगाल की पहचान और स्वायत्तता को बचाने के लिए टीएमसी का समर्थन करने की अपील की।
शशिकला-रामदास साथ आएं, चुनावी रणनीति: सभी सीटों पर साझा मुकाबला
22 Mar, 2026 09:57 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई. तमिलनाडु (Tamil Nadu) की राजनीति में 2026 के विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) से पहले हलचल तेज हो गई है। एक नई राजनीतिक साझेदारी (Political Partnership) की चर्चा जोर पकड़ रही है, जिसने राज्य की सियासत को और दिलचस्प बना दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता (J. Jayalalithaa) की करीबी सहयोगी वीके शशिकला ने हाल ही में अपनी नई पार्टी ऑल इंडिया पुराची थलाइवर मक्कल मुनेत्र कषगम बनाई है। शशिकला ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अन्य समान विचारधारा वाले दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी।
इसी क्रम में शशिकला ने एस रामदास से मुलाकात की, जो पट्टाली मक्कल कच्ची (पीएमके) के संस्थापक हैं। इस मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने संकेत दिया कि वे मिलकर चुनाव लड़ सकते हैं। रामदास ने कहा कि यह गठबंधन तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा असर डाल रहा है और इससे कई लोगों में हलचल मच गई है। उन्होंने बताया कि यह नया मोर्चा राज्य की सभी 234 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही कुछ और दल भी इस गठबंधन में शामिल हो सकते हैं।
पिता और बेटे के साथ राजनीतिक मतभेद
इस बीच, रामदास के बेटे अनबुमणि रामदास ने अलग राजनीतिक रास्ता अपनाते हुए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होकर अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम के साथ समझौता किया है। इस वजह से पिता और बेटे के बीच राजनीतिक मतभेद की भी चर्चा हो रही है।
तमिलनाडु का सियासी समीकरण
हालांकि तमिलनाडु में मुख्य मुकाबला फिलहाल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के नेतृत्व वाले गठबंधन और एनडीए के बीच माना जा रहा है एनडीए में AIADMK के साथ भारतीय जनता पार्टी और PMK जैसे दल शामिल हैं। वहीं, अभिनेता विजय भी अपनी पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम के जरिए इस चुनाव में पहली बार उतरने जा रहे हैं।
इससे चुनाव त्रिकोणीय मुकाबला बन सकता है। कुल मिलाकर, शशिकला और रामदास की संभावित साझेदारी ने तमिलनाडु की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस नए गठबंधन में और कौन-कौन शामिल होता है और इसका चुनावी परिणामों पर क्या असर पड़ता है।
सियासी उलटफेर की आहट: बिहार में CM और डिप्टी CM पदों को लेकर चर्चा जोरों पर
22 Mar, 2026 08:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। बिहार (Bihar) की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, सत्ता संतुलन बदलने की पटकथा लगभग तैयार है, जिसमें अब तक ‘छोटे भाई’ की भूमिका में रही बीजेपी (BJP) मुख्यमंत्री पद संभाल सकती है, जबकि जेडीयू (JDU) नई भूमिका में नजर आएगी।
सत्ता समीकरण बदलने की तैयारी
बताया जा रहा है कि नई व्यवस्था के तहत बीजेपी को मुख्यमंत्री पद दिया जाएगा। वहीं, जेडीयू को दो उपमुख्यमंत्री पद मिलने की संभावना है। इस संभावित बदलाव से राज्य की मौजूदा राजनीतिक संरचना पूरी तरह बदल सकती है और गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन नया रूप ले सकता है।
नीतीश कुमार की नई भूमिका तय?
सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार 10 अप्रैल से राज्यसभा सदस्य के रूप में नई पारी शुरू कर सकते हैं। इससे पहले वे मुख्यमंत्री पद और विधान परिषद की सदस्यता छोड़ सकते हैं। यह भी कहा जा रहा है कि वे केंद्र में मंत्री बनने के बजाय राज्यसभा में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
मंत्रालयों का बंटवारा और फॉर्मूला
नई सरकार के फॉर्मूले के तहत बीजेपी को मुख्यमंत्री पद के साथ करीब 15 मंत्री पद मिल सकते हैं। वहीं जेडीयू को दो उपमुख्यमंत्री पदों सहित 16 मंत्री पद दिए जाने की चर्चा है। गृह मंत्रालय और विधानसभा अध्यक्ष का पद बीजेपी के पास रह सकता है, जबकि विधान परिषद के सभापति का पद जेडीयू को मिलने की संभावना है।
निशांत कुमार की एंट्री पर नजर
इस राजनीतिक बदलाव के बीच निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में एंट्री को अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, जबकि दूसरे डिप्टी सीएम के रूप में जेडीयू के किसी वरिष्ठ नेता को मौका मिलेगा। बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार सरकार को मार्गदर्शन देते रहेंगे और संगठन को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने पर ध्यान देंगे।
सहयोगी दलों का समीकरण बरकरार
गठबंधन में सहयोगी दलों के लिए पुराना फॉर्मूला ही लागू रहने की संभावना है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को दो मंत्री पद, जबकि अन्य सहयोगी दलों को एक-एक मंत्री पद मिल सकते हैं। नई सरकार का फोकस आगामी चुनावों की तैयारी और वादों को पूरा करने पर रहेगा।
सम्राट चौधरी को लेकर बढ़ी अटकलें
हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान सम्राट चौधरी को लेकर नीतीश कुमार के बयान के बाद अटकलें तेज हो गई हैं। उन्होंने इशारों में कहा था कि “ये बिहार को संभालेंगे”, जिससे उन्हें भविष्य के मुख्यमंत्री के तौर पर देखा जाने लगा। हालांकि, जेडीयू की ओर से इन कयासों को खारिज किया गया है और कहा गया है कि ऐसा कोई औपचारिक संकेत नहीं दिया गया है। इसके बावजूद बिहार की राजनीति में संभावित बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
केंद्रीय नीतियों पर उठाए सवाल, आम आदमी की चिंता व्यक्त की
21 Mar, 2026 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली।अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारत का रुपया रिकॉर्ड स्तर पर नीचे जा चुका है। कमजोर होते जा रहे रुपये में लगातार हो रही गिरावट को लेकर राहुल गांधी ने चिंता जताई है। पश्चिम एशिया में वैश्विक ताकतों के टकराव से उपजे तनाव के कारण महंगाई को लेकर आगाह करते हुए राहुल गांधी ने एक्स पर विस्तार से पोस्ट लिखा। उन्होंने कहा, सरकार भले ही हालात सामान्य होने का दावा करे, लेकिन सच्चाई कुछ और है। उन्होंने उद्योग जगत में इस्तेमाल किए जाने वाले ईंधन के महंगे होने का जिक्र करते हुए लिखा कि ये महज आंकड़े नहीं आने वाली महंगाई के साफ संकेत हैं।
राहुल गांधी ने किन मुद्दों पर सरकार को घेरा?
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल के साथ-साथ रसोई गैस (एलपीजी) की कीमतों में भी उछाल की आशंका व्यक्त की है। उन्होंने अपने एक्स पोस्ट में आने वाले दिनों में दाम बढ़ाए जाने का जिक्र कर लिखा, 'उत्पादन और ट्रांसपोर्ट महंगे होंगे।'
शेयर बाजार पर भी असर पड़ेगा
राहुल गांधी ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) पर सर्वाधिक असर पड़ने की बात भी कही। उन्होंने लिखा, 'MSMEs को सबसे ज्यादा चोट लगेगी, रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ेंगे।' आने वाले दिनों में शेयर बाजार पर असर पड़ने का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का भी उल्लेख किया। राहुल ने कहा कि एफआईआई का पैसा तेजी से बाहर जाएगा, जिससे शेयर बाजार पर दबाव बढ़ेगा।
पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात को लेकर केंद्र सरकार को घेरते हुए राहुल ने अपने पोस्ट में आगे लिखा, 'हर परिवार की जेब पर इसका सीधा और गहरा असर पड़ना तय है। और यह सिर्फ वक्त की बात है-- चुनाव के बाद पेट्रोल, डीजल, एलपीजी की कीमतें भी बढ़ा दी जाएंगी।' उन्होंने आगे लिखा, 'मोदी सरकार के पास न दिशा है, न रणनीति- सिर्फ बयानबाजी है। सवाल यह नहीं कि सरकार क्या कह रही है- सवाल यह है कि आपकी थाली में क्या बचा है।'
गौरतलब है कि विगत 28 फरवरी से शुरू हुआ ईरान और अमेरिका-इस्राइल टकराव बीते 22 दिनों से जारी है। युद्ध की आंच खाड़ी देशों के अलावा अब भारत तक भी पहुंचने लगी है। भारत आने वाले तेल और गैस के जहाजों को होर्मुज क्षेत्र से गुजरने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। भारत से फल-सब्जियां निर्यात करने वाले किसान भी चुनौतियों से जूझ रहे हैं। जानकारों का मानना है कि जल्द ही शांति बहाल न होने की सूरत में पश्चिम एशिया की इस लड़ाई के दीर्घकालिक असर दिखेंगे।
‘भाजपा की बी-टीम है कांग्रेस’ – सीएम विजयन का विवादित बयान
21 Mar, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तिरुवनंतपुरम|केरल में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस बीच मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस भारतीय जनता पार्टी की 'बी-टीम' है।
राहुल गांधी एक 'दुर्लभ घटना' हैं: विजयन
अब आप सोच रहे होंगे कि अचानक विजयन ने राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को लपेटे में क्यों लिया है। दरअसल, राहुल गांधी ने हाल ही में कहा था कि जांच एजेंसियां विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार कर रही है, आखिर केरल के मुख्यमंत्री अब तक जेल से बाहर क्यों हैं? इस पर पलटवार करते हुए विजयन ने कहा कि कुछ लोग देख और अनुभव कर के भी नहीं सीखते। वे सामान्य इंसान नहीं, बल्कि एक 'दुर्लभ घटना' हैं। यह उन लोगों के साथ होता है जिनमें चीजों को समझने की क्षमता नहीं होती। राहुल गांधी इसी श्रेणी में आते हैं।
विजयन ने दिया केजरीवाल का उदाहरण
विजयन ने अरविंद केजरीवाल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने उन पर भी गंभीर आरोप लगाए थे, लेकिन अदालत ने उन्हें क्लीन चिट देकर कांग्रेस के मुंह पर करारा तमाचा जड़ा है। इतनी फजीहत के बाद भी राहुल वही गलतियां दोहरा रहे हैं।
सांप्रदायिकता से समझौता कर रही है कांग्रेस
मुख्यमंत्री विजयन ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्तर पर राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस भाजपा की असल 'बी-टीम' बन चुकी है। उन्होंने दावा किया कि केरल में भी कांग्रेस और भाजपा के बीच 'अपवित्र गठबंधन' पुराना है। विजयन के मुताबिक, "UDF वोट बैंक के लिए बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक, दोनों तरह की सांप्रदायिकता से समझौता करने को तैयार है। लेकिन एलडीएफ का स्टैंड साफ है। उन्होंने कहा कि हम देश के लिए खतरा बनने वाली किसी भी सांप्रदायिक शक्ति के साथ खड़े नहीं होंगे।
धार्मिक संगठन और सांप्रदायिकता अलग-अलग
केरल के सीएम विजयन ने आगे कहा कि धार्मिक संगठन अपने समुदाय के मुद्दों को उठाते हैं और उन्हें सांप्रदायिक ताकतों के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने साफ किया कि सरकार सांप्रदायिक ताकतों का विरोध करेगी, न कि धार्मिक संगठनों का।
चुनावी माहौल में दिया ‘BJP हटाओ, देश बचाओ’ का नारा
21 Mar, 2026 06:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता| में ईद के मौके पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और भाजपा पर जोरदार हमला बोला। रेड रोड पर ईद की नमाज के बाद लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सबसे बड़ा घुसपैठिया तक कह दिया। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लोगों के वोट देने के अधिकार को छीनने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट में संशोधन के नाम पर असली वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं, खासकर अल्पसंख्यक इलाकों में।
'ये चुनाव लोकतंत्र और अधिकारों को बचाने की लड़ाई'
उन्होंने लोगों से कहा कि आने वाला विधानसभा चुनाव सिर्फ सत्ता का चुनाव नहीं है, बल्कि लोकतंत्र और अधिकारों को बचाने की लड़ाई है। ममता ने साफ कहा कि वे अंत तक इस मुद्दे पर लड़ेंगी और उन्होंने इस मामले में अदालतों का भी दरवाजा खटखटाया है। ममता ने भाजपा पर यह भी आरोप लगाया कि वह देश में हिंदू-मुस्लिम की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि जब नेता विदेश जाते हैं तो दोस्ती की बात करते हैं, लेकिन देश लौटते ही लोगों को घुसपैठिया कहकर बांटने की कोशिश शुरू हो जाती है।
'बंगाल में अघोषित राष्ट्रपति शासन जैसा माहौल'
उन्होंने केंद्र पर यह भी आरोप लगाया कि बंगाल में अघोषित राष्ट्रपति शासन जैसा माहौल बना दिया गया है, लेकिन उनकी सरकार डरने वाली नहीं है। अपने भाषण में ममता बनर्जी ने बंगाल की एकता पर जोर दिया और कहा कि यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी मिलकर रहते हैं और किसी को भी इस एकता को तोड़ने नहीं दिया जाएगा।
अभिषेक बनर्जी ने भी बोला हमला, भाजपा का पलटवार
इस मौके पर टीएमसी के नेता अभिषेक बनर्जी ने भी कहा कि बंगाल की सांप्रदायिक एकता की रक्षा की जाएगी और जो लोग समाज को बांटने की कोशिश कर रहे हैं, वे सफल नहीं होंगे। वहीं भाजपा ने ममता के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री के लिए ऐसे शब्द इस्तेमाल करना गलत है और इससे संवैधानिक पद की गरिमा गिरती है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव
सीटें: 294, बहुमत: 148 - 4 मई को नतीजे
पहला चरण (152 सीटें) - मतदान- 23 अप्रैल
दूसरा चरण (142 सीटें)- मतदान- 29 अप्रैल
बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए इस बार मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है। टीएमसी जहां चौथी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। ऐसे में वोटर लिस्ट, घुसपैठ और वोटिंग अधिकार जैसे मुद्दे चुनाव के केंद्र में आ गए हैं।
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ईरान की सख्ती: अब जहाजों को लेनी होगी IRGC की इजाजत
साहब की बहाली के लिए बाबू ने मांगी घूस: 40 हजार रुपये के साथ पकड़े गए स्थापना शाखा प्रभारी।
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