राजनीति
आप सरकार ने दलितों के लिए की कर्जमाफी, हजारों परिवारों को मिलेगी राहत
4 Jun, 2025 11:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। पंजाब की मान सरकार ने करीब 68 करोड़ रुपए की कर्जमाफी का ऐलान किया है। एससी लैंड डिवेलपमेंट ऐंड फाइनेंस कॉर्पोरेशन से कर्ज लेने वाले करीब 4727 दलित परिवारों को इसका फायदा होगा। जानकारी के मुताबिक दलित परिवारों का यह कर्ज डिफाल्ट हो चुका था। कुल माफ किए गए 68 करोड़ रुपए में 30 करोड़ मूलधान, 22 करोड़ ब्याज और 15 करोड़ रुपए पीनल ब्याज है। आप सरकार ने मार्च 2020 तक के कर्ज को माफ करने का ऐलान किया है।
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के मुताबिक 2025-26 के बजट में ही इस कर्जमाफी के लिए बजट का आवंटन किया गया था। उन्होंने कहा कि 2020 के बाद कर्ज लेने वालों के साथ भी संवेदनशीलता से डील किया जाएगा। चीमा ने कहा कि इन दलित परिवारों की वास्तविक परेशानी की वजह से वे कर्ज अदा नहीं कर पाए। वहीं इस कर्ज की रिकवरी रेट 84 फीसदी थी।
बता दें जनवरी में विधानसभा में मामला उठा था कि पंजाब स्टेट कोऑपरेटिव एग्रीकल्चर डिवेलपमेंट बैंक के पास किसानों को नया कर्ज देने के लिए पैसा नहीं है। बताया जा रहा है कि राज्य में 55574 किसानों का करीब 1444 करोड़ रुपया बकाया है। वहीं मात्र तीन सौ करोड़ रुपए की रिकवरी पर ही नाबार्ड की किश्त और कर्मचारियों के वेतन का काम चल रहा है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नदियों के मुद्दे पर भी जवाब देते हुए कहा कि सतलज, रावी और ब्यास नदियों में पानी कम हो गया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ नदी में पानी कम हो गया है दूसरी तरफ दूसरे राज्यों की मांग में इजाफा हुआ है।
वहीं भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड तब से वही है। पंजाब में भी पानी की मांग बढ़ी है। उन्होंने दावा किया कि आप सरकार ने नहरों की खुदाई करवाई है और अब पानी राज्य के हर कोने में पहुंच रहा है।
नीतीश सरकार का बड़ा फैसला, एविएशन फ्यूल पर घटाया वैट
4 Jun, 2025 10:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के दाम घट गए हैं। नीतीश कैबिनेट ने एटीएफ पर वैट की दर को 29 फीसदी से घटाकर 4 फीसदी करने का फैसला लिया है। इससे पटना, गया और दरभंगा एयरपोर्ट से फ्लाइट के टिकट सस्ते हो जाएंगे। साथ ही हवाई यात्रियों की संख्या में भी इजाफा होगा। टैक्स कम होने से विमानों की संख्या में भी बढ़ोतरी होने के आसार हैं।
सीएम नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को राज्य कैबिनेट की बैठक हुई। इसमें कुल 47 फैसलों पर मुहर लगाई गई। इसमें एक फैसला वाणिज्य एवं कर विभाग का भी है। इसके तहत बिहार में रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत एविएशन टर्बाइन फ्यूल की दर को 1 फीसदी पर यथावत रखने का फैसला लिया गया। साथ ही अन्य मामलों में एटीएफ की बिक्री पर राज्य सरकार द्वारा आगे से 4 फीसदी वैट ही लगाया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक अभी तक बिहार में एटीएफ पर वैट की दर 29 फीसदी थी। इससे कई एयरलाइन्स को विमानों का फ्यूल महंगा खरीदना पड़ रहा था। इसका असर यात्रियों पर पड़ रहा है। वैट कम होने से बिहार में हवाई यात्रा का किराया भी घटेगा।
बता दें बिहार में अभी तीन एयरपोर्ट से फ्लाइट का संचालन किया जा रहा है। पटना, गया और दरभंगा एयरपोर्ट। आने वाले महीनों में पूर्णिया एयरपोर्ट पर भी फ्लाइट संचालन शुरू हो जाएगा। सरकार अन्य शहरों में भी नए एयरपोर्ट शुरू करने की योजना पर काम कर रही है।
2020 की गलती से सबक: तेजस्वी यादव ने बदली रणनीति, जानें नए सियासी समीकरण
4 Jun, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Bihar Election: बिहार में विधानसभा चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई है। राजनीतिक पार्टियों ने तैयारी तेज कर दी है। इसी बिच सियासी बिछात भी बिछने लग गई है। बिहार में एनडीए और महागठबंधन के अलावा दो और दल ऐसे है जिन पर दोनों गुटों की नजर बनी हुई है। इनमें एक जन सुराज पार्टी और दूसरा AIMIM है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक AIMIM महागठबंधन का हिस्सा हो सकती है। हालांकि अभी तक इसके बारे में आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। यदि महागठबंधन में ओवैसी की पार्टी शामिल होती है तो NDA को जरूर झटका लगेगा।
BJP को हराने की विचारधारा-AIMIM
AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान और अन्य नेताओं ने कहा है कि उनकी विचारधारा BJP को हराने और बिहार को सशक्त बनाने की है। उन्होंने महागठबंधन से उदारता दिखाने की अपील की है, ताकि मुस्लिम वोटों का बंटवारा रोका जा सके, जिससे NDA को फायदा हो सकता है।
AIMIM के आने से महागठबंधन होगा मजबूत
राजनीतिक विश्लेषक ओम प्रकाश अश्क के मुताबिक यदि ओवैसी की पार्टी महागठबंधन में शामिल होती है तो महागठबंधन को इससे फायदा होगा। AIMIM का सीमांचल में प्रभाव मजबूत है। सीमांचल क्षेत्र की 24 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम वोटबैंक ज्यादा है। ऐसे में यदि ओवैसी की पार्टी महागठबंधन का हिस्सा बनती हैं तो मुस्लिम वोट का तुष्टिकरण नहीं होगा और वोट महागठबंधन की तरफ जाएगा, इससे महागठबंधन को फायदा होगा।
2020 में महागठबंधन को पहुंचाया था नुकसान
राजनीतिक विश्लेषक ओम प्रकाश अश्क ने बताया कि विधानसभा चुनाव 2020 में AIMIM से महागठबंधन को नुकसान हुआ था। 2020 में ओवैसी की पार्टी ने 5 सीटे जीतीं थी, जिससे महागठबंधन को नुकसान हुआ था, क्योंकि मुस्लिम वोट बैंक बंट गया था। हालांकि बाद में चार विधायक राजद में शामिल हो गए थे। इसके अलावा उपचुनाव में भी एआईएमआईएम से महागठबंधन को नुकसान हुआ था।
मुख्य समस्या सीट बंटवारा
बता दें कि बिहार में 243 विधानसभा सीटें है। किसी भी गठबंधन को सरकार बनाने के लिए 122 सीटों की आवश्यकता है। ओम प्रकाश अश्क ने बताया कि महागठबंधन ओवैसी को शामिल तो कर सकता है, लेकिन मुख्य समस्या सीटों का बंटवारा है। फिलहाल महागठबंधन में सीटों के बंटवारों को लेकर खींचतान चल रही है, ऐसे में यदि ओवैसी को भी शामिल किया जाता है तो और खींचतान बढ़ जाएगी।
2020 में RJD ने 144 सीटों पर लड़ा चुनाव
विधानसभा चुनाव 2020 में राजद ने 144 सीटों पर चुनाव लड़ा और 75 सीटें जीती थी। वहीं कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा और 19 सीटों पर जीत हासिल की थी। इसके अलावा CPI-ML: 19 सीटों पर लड़ा और 12 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं CPI: 6 सीटों पर लड़ा और दो सीटों पर जीत हासिल की। CPM: 4 सीटों पर लड़ा और 2 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं विधानसभा चुनाव 2025 में मुकेश सहनी की पार्टी भी महागठबंधन का हिस्सा है। मुकेश सहनी खुद को डिप्टी सीएम भी बता रहे हैं। ऐसे में मुकेश सहनी भी अच्छी संख्या में सीटों की मांग कर रहे हैं। 2020 में कांग्रेस को छोड़कर महागठबंधन के सभी दलों ने अच्छा प्रदर्शन किया था। राजद चाहेगी कि वह 150 सीटों पर लड़े वहीं CPI-ML भी पिछली बार से ज्यादा सीटों की मांग कर रही है।
कांग्रेस सरकार में हुई नौ सर्जिकल स्ट्राइक, पार्टी ने नहीं किया राजनीतिकरण: सुरजेवाला
4 Jun, 2025 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर के मोदी सरकार की एयरस्ट्राइक की तारीफ करने वाली टिप्पणियों को लेकर उठे विवाद के बीच कांग्रेस ने कहा कि राजनीतिक नेतृत्व ने हमेशा सशस्त्र बलों को आतंकी शिविरों या आतंकवादियों को बेअसर करने की स्वतंत्रता दी है। इन शक्तियों का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। कांग्रेस सांसद रणदीप सुरजेवाला ने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस के कार्यकाल में कम से कम नौ ऐसे सर्जिकल स्ट्राइक का दस्तावेजीकरण किया गया है।
कांग्रेस का मानना है कि सत्ताधारी पार्टी या किसी और के लिए राजनीतिक लाभ के साधन के रूप में सशस्त्र बलों का इस्तेमाल करना अपवित्र है। हाल ही में पनामा में प्रवासी समुदाय के कार्यक्रम में शशि थरूर ने विवाद को हवा दे दी। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि यह भारत के सैन्य रुख में बदलाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 2016 के उरी हमले के बाद पहली बार भारत ने एलओसी पार करके आतंकी ठिकानों को तबाह किया। यहां तक कि कारगिल युद्ध के दौरान भी हमने एलओसी पार नहीं की थी।
थरूर की टिप्पणियों पर उनकी ही पार्टी के सहयोगियों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की, लेकिन सुरजेवाला ने कहा कि पार्टी पिछले दो दशकों में कई सर्जिकल स्ट्राइक पर सच्चाई सामने लाने के लिए सामने आई है। उन्होंने कहा कि यह किसी भी तरह से समझौता किए बिना, हमारे बलों की परिचालन स्वतंत्रता और सीमा पार संचालन को स्पष्ट करने का मामला है। कांग्रेस सरकारों द्वारा किए गए सर्जिकल स्ट्राइक को सूचीबद्ध करते हुए सुरजेवाला ने कहा कि पिछले दो दशकों में अलग-अलग समय पर सटीकता और प्रभावी पैठ के साथ रणनीतिक सर्जिकल स्ट्राइक करना सशस्त्र बलों के धैर्य और दृढ़ संकल्प की विशेषता रही है।
क्या संसद का विशेष सत्र जरूरी? जानिए परंपरा, विपक्ष की मांग और सरकार का रुख
4 Jun, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Parliament Special Session: पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुनिया में गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों से भारत की एकजुटता का अच्छा संदेश गया है लेकिन अब देश के अंदर सियासी दांवपेंच शुरू हो गया है। कांग्रेस के नेतृत्व में 16 विपक्षी दलों ने यहां कांस्टीट्यूशन क्लब में बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। पत्र पर विपक्ष के 200 सांसदों के हस्ताक्षर का दावा किया गया है। विपक्ष की मांग है कि गत 40 दिनों में जो कुछ घटा है, उसके बारे दुनिया के साथ संसद के जरिए देश के लोगों के साथ भी चर्चा जरूरी है। उधर, सरकारी सूत्रों ने कहा है कि सामने मानसून सत्र आ रहा है तो विशेष सत्र की मांग का कोई औचित्य नहीं है। मानसून सत्र में विपक्ष के पास सवाल करने का मौका होगा और जवाब दिए जाएंगे। मानसून सत्र जुलाई में तय है।
सीडीएस के खुलास के बाद जरूरी हुआ सत्रः कांग्रेस
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पोस्ट में कहा कि 10 मई को ही लोकसभा और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष ने प्रधानमंत्री को संसद का विशेष सत्र बुलाने के लिए पत्र लिखा था। दो दिन पहले सिंगापुर में सीडीएस अनिल चौहान ने जो खुलासे किए हैं, उसके बाद यह सत्र और भी आवश्यक और तात्कालिक हो गया है। रमेश ने कहा कि अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप के ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के लिए व्यापारिक दबाव का इस्तेमाल करने के दावे ओर पहलगाम आतंकी हमले के आरोपी गिरफ्त से दूर रहने जैसे सवालों के जवाब जरूरी हैं।
विपक्ष की मांग औचित्यहीनः सरकार
सरकारी सूत्रों का कहना है कि जुलाई में संसद का मानसून सत्र प्रस्तावित है तो वहां विपक्ष को सवाल पूछने का भरपूर मौका मिलेगा। जो भी सवाल खड़े होंगे, सरकार जवाब देगी। ऐसे में मानसून सत्र से पहले विशेष सत्र बुलाने की मांग उचित नहीं है। सरकार इस मांग पर विचार भी नहीं कर रही है। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत कह चुके हैं कि सरकार के पास छिपाने को कुछ नहीं है। संसद सत्र में जवाब दिए जाएंगे।
इन सवालों का जवाब चाहता है विपक्ष
-ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किन परिस्थितियों में हुआ सीजफायर, अमेरिका ने श्रेय लेने की क्यों कोशिश की?
-ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकवाद से निपटने की हमारी रणनीति क्या होनी चाहिए?
-क्या हम पाकिस्तान को दुनिया में कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने में सफल हो पाए?
इन दलों के सांसदों ने की मांग
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, शिवसेना (उबाठा), राष्ट्रीय जनता दल, नेशनल कांफ्रेंस, माकपा, आईयूएमएल, भाकपा, आरएसपी, झामुमो, भाकपा (माले) (लिबरेशन) सहित 16 अन्य दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री को लिखे इस पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।
विशेष सत्र की परंपरा नहीं, सिर्फ 1962 में हुआ
अतीत में देखें तो युद्ध या सीमा पर संघर्ष को लेकर संसद के विशेष सत्र की कोई परंपरा नहीं है। सिर्फ 1962 में चीन से युद्ध के बाद ही तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने संसद का विशेष सत्र बुलाकर विपक्ष के सवालों के जवाब दिए थे। इसके बाद पाकिस्तान से 1965 व1971 के युद्ध और 1999 में करगिल संघर्ष के बाद विशेष सत्र नहीं बुलाए गए।
78 साल में हुए 10 विशेष सत्र
1 14-15 अगस्त 1947: देश की आजादी और अंग्रेजाें से सत्ता हस्तांतरण
2 8-9 नवंबर 1962 – भारत-चीन युद्ध के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा पर चर्चा
3 14-15 अगस्त 1972 – स्वतंत्रता की 25वीं वर्षगांठ पर
4 9 अगस्त 1992 – ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की 50वीं वर्षगांठ पर
5 14-15 अगस्त 1997 – आजादी की 50वीं वर्षगांठ पर
6 22-24 जुलाई 2008 – यूपीए सरकार के खिलाफ विश्वास मत पर
7 13 मई 2012 – संसद की पहली बैठक की 60वीं वर्षगांठ पर
8 26-27 नवंबर 2015 – बाबा साहेब आंबेडकर की 125वीं जयंती पर
9 30 जून 2017 – जीएसटी की शुरुआत पर
10 18-22 सितंबर 2023 – नए संसद भवन में महिलाओं के आरक्षण से जुड़ा 106वां संविधान संशोधन पारित करने के लिए विशेष सत्र
मप्र के कांग्रेस नेताओं को राहुल की दो टूक: गुटबाजी खत्म करो, कोई बदलाव चाहिए तो बताओ, मैं करूं....
4 Jun, 2025 08:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को राजधानी भोपाल में कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान की शुरुआत की। इस अभियान का उद्देश्य 2028 के विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी संगठन को मजबूत करना और बीस सालों से निस्तेज पड़े कांग्रेस संगठन को मिशन 2028 के लिए तैयार करना है। अपने पांच घंटे के दौरे के दौरान राहुल गांधी ने पांच बैठकों में हिस्सा लिया और नेताओं को गुटबाजी खत्म करने, एकजुट होकर काम करने और संगठनात्मक ढांचे को सशक्त बनाने का कड़ा संदेश दिया। राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं को निर्देश देते हुए कहा कि गुटबाजी खत्म करें और मिलकर काम करें। कोई भी फैसला ऊपर से नहीं थोपा जाएगा। आप सब मिलकर फैसला करें और अगर कोई बदलाव की जरूरत होगी तो हम करेंगे।
हेराफेरी बर्दाश्त नहीं
कांग्रेस के सीनियर लीडर ने संगठन के पुनर्गठन को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी तरह की हेराफेरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर कहीं कुछ गलत दिखा, तो हम उसे तुरंत बदल देंगे। राहुल ने यह भी कहा कि भाजपा की मदद करने वाले नेताओं की पहचान की जाए और संगठन में सही व्यक्ति को सही स्थान दिया जाए।
जिम्मेदारी और जवाबदेही भी तय होगी
कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने बताया कि राहुल गांधी ने जिला कांग्रेस कमेटियों को ताकतवर बनाने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि जिला कांग्रेस कमेटियों की भूमिका को लोकसभा, विधानसभा, नगर निगम और नगर पालिका में उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बनाया जाएगा। इसके साथ ही उनकी जिम्मेदारी और जवाबदेही भी तय की जाएगी। नायक ने बताया कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) और राज्य के पर्यवेक्षक मिलकर इस प्रक्रिया को निष्पक्ष रूप से पूरा करेंगे। ब्लॉक, सेक्टर, वार्ड और पंचायत स्तर पर कांग्रेस कमेटियों का गठन युद्ध स्तर पर किया जाएगा, ताकि चुनाव के दौरान एक सशक्त संगठन तैयार हो, जो भाजपा के खिलाफ राष्ट्रीय मुद्दों और कांग्रेस की विचारधारा को मजबूती से सामने रख सके।
हम कर्मकांडों में विश्वास नहीं करते
राहुल गांधी के जूते पहनकर इंदिरा गांधी को श्रद्धांजलि देने के भाजपा के आरोपों पर मुकेश नायक ने जवाब देते हुए कहा कि हम कर्मकांडों में विश्वास करने वाले लोग नहीं हैं। संस्कार के नाम पर आंख में धूल झोंकना, धर्मांधता को बढ़ावा देना और नकली लोगों को नकली कपड़े पहनाकर जनता के बीच खड़ा करना अब पुराना हो चुका है। जनता इससे ऊब चुकी है। कांग्रेस का लक्ष्य समता-आधारित समाज का निर्माण और समावेशी विकास है।
नकुलनाथ की गैरमौजूदगी पर सफाई
नकुलनाथ के बैठक में शामिल न होने पर नायक ने कहा कि कमलनाथ जी आए हैं, यह पर्याप्त है। बैठक के दौरान नेताओं के फोन बंद करवाए गए, ताकि पूरी तरह से संगठनात्मक चर्चा पर ध्यान केंद्रित किया जा सके। राहुल गांधी ने सभी वरिष्ठ नेताओं से सुझाव मांगे और एकजुटता के साथ भाजपा का मुकाबला करने का आह्वान किया। इस अभियान के जरिए कांग्रेस मध्य प्रदेश में अपनी खोई जमीन वापस पाने और 2028 में सत्ता में वापसी की तैयारी में जुट गई है।
राहुल गांधी का आरोप: मोदी सरकार अमेरिका के दबाव में झुकी
3 Jun, 2025 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Rahul Gandhi Bhopal Visit: राहुल गांधी मंगलवार को भोपाल दौरे पर आए थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने मंगलवार को भोपाल में कहा- ट्रम्प का एक फोन आया और नरेंद्र जी तुरंत सरेंडर हो गए। इतिहास गवाह है, यही BJP-RSS का कैरेक्टर है। ये हमेशा झुकते हैं। भारत ने 1971 में अमेरिका की धमकी के बावजूद पाकिस्तान को तोड़ा था। कांग्रेस के बब्बर शेर और शेरनियां सुपर पावर से लड़ते हैं, कभी झुकते नहीं हैं।
लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने निशाना साधते हुए कहा कि ये बीजेपी, आरएसएस वालों को मैं अच्छी तरह जानता हूं। इन पर थोड़ा सा दबाव डालो, थोड़ा सा धक्का मारो। डरकर भाग जाते हैं। जैसे उधर से ट्रंप ने एक इशारा किया, फोन उठाया, कहा- मोदी जी क्या कर रहे हो। नरेंदर.. सरेंडर… और जी हुजूर कर मोदी जी ने ट्रंप के इशारे का पालन किया।
आगे राहुल ने कहा कि आपको एक समय याद होगा जब फोन कॉल नहीं आया था। 7th फ्लीट आई थी। 71 वन की लड़ाई में हथियार आए थे, एयरक्रॉफ्ट कैरियर आए थे। इंदिरा गांधी जी ने कहा कि मुझे जो करना है करूंगी। ये फर्क है…इनका कैरेक्टर है ये। सारे के सारे ऐसे हैं। आजादी के समय से सरेंडर वाली चिट्टी लिखने की आदत है। एक सेकेंड में थोड़ा-सा दवाब पड़े भाइया ये लो..हां तो ये इनका कैरेक्टर है। कांग्रेस पार्टी सरेंडर नहीं होती है। गांधी जी, जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल ये सरेंडर वाले लोग नहीं है। ये सुपरपावर से लड़ने वाले लोग हैं।
जातिगत जनगणना पर बोले राहुल
राहुल गांधी ने कहा कि हमने कह दिया कि हम सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ेंगे और लोकसभा में जातिगत जनगणना पास करवा के दिखाएंगे।इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मोहन भागवत, नितिन गडकरी ने कई बातें कहीं, लेकिन इन पर थोड़ा सा दबाव पड़ा और ये सरेंडर कर गए। बीजेपी-आरएसएस के लोग दबाव में आकर जातिगत जनगणना की बात बोल गए हैं, लेकिन जातिगत जनगणना नहीं कराना चाहते हैं। ये लोग देश में न्याय नहीं चाहते।
असम कांग्रेस अध्यक्ष बने गौरव गोगोई, पदभार ग्रहण समारोह में मची अफरातफरी
3 Jun, 2025 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
असम: असम कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई ने मंगलवार को पदभार ग्रहण किया. इस दौरान कार्यकर्ताओं में प्रदेश अध्यक्ष गोगोई को बधाई देने वालों की होड़ रही. आलम यह रहा कि गोगोई के सम्मान समारोह में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मंच पर चढ़ गए. आयोजकों ने जब मंच गिरने की आशंका जताई तो कार्यक्रम में अफरातफरी मच गई. इसके चलते दो बार कार्यक्रम को कुछ देर के लिए रोका गया.
दो बार रोकना पड़ा कार्यक्रम, अव्यवस्था हावी
कांग्रेस ने असम में गौरव गोगोई को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है. मंगलवार को उन्होंने पदभार ग्रहण किया. इसके बाद गौरव गोगोई के सम्मान में दिसपुर क्षेत्र में मनबेन्द्र शर्मा कॉम्प्लेक्स कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें गौरव गोगोई ने तीन नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्षों के साथ भाग लिया. कार्यक्रम में लगभग दो हजार पार्टी सदस्य मौजूद थे, लेकिन जब गोगोई मंच की ओर बढ़े तो लोगों में उनका स्वागत करने के लिए धक्का-मुक्की होने लगी. तमाम पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं और सदस्य गौरव गोगोई के साथ अन्य वरिष्ठ नेताओं को बधाई देने के लिए मंच पर चढ़ गए. आलम यह रहा कि छोटे से लकड़ी के मंच पर 300से अधिक लोग मौजूद थे. इस दौरान आयोजकों ने लोगों से कहा कि वे मंच से उतर जाएं अन्यथा मंच ध्वस्त हो जाएगा. लोग नहीं माने तो कार्यक्रम को दो बार बीच में स्थगित करना पड़ा.
राजीव भवन में ग्रहण किया कार्यभार
इससे पहले गौरव गोगोई ने पार्टी के राज्य मुख्यालय राजीव भवन में निवर्तमान अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा से नए पार्टी प्रमुख का पदभार संभाला. उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देने के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं. हम असम में कांग्रेस की सरकार बनाने की कोशिश करेंगे. हमने देखा है कि पिछले कुछ दिनों में लोगों का हमारे प्रति स्नेह बढ़ा है. इससे पहले उन्होंने कामाख्या मंदिर में आशीर्वाद लिया था.
कर्नाटक HC की कमल हासन को फटकार, कहा – 'जनभावनाओं से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं'
3 Jun, 2025 02:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु: कर्नाटक हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के अभिनेता-राजनेता कमल हासन को कन्नड़ भाषा को लेकर दिए उनके विवादास्पद बयान पर कड़ी फटकार लगाई है. अदालत ने उन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का दुरुपयोग कर जनभावनाओं को ठेस पहुंचाने से चेताया और विवादित बयान को वापस लेने की सलाह दी.
दरअसल, कमल हासन ने हाल ही में दावा किया था कि कन्नड़ भाषा तमिल से उत्पन्न हुई है. इस बयान के बाद कर्नाटक में विवाद गहरा गया. हाईकोर्ट ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, "आप साधारण व्यक्ति नहीं हैं. आपके पास बोलने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार दूसरों की भावनाओं को आहत करने के लिए नहीं है."
कोर्ट ने आगे कहा, "आपको यह समझना होगा कि एक बार अंडा फूटने के बाद उसे दोबारा जोड़ना संभव नहीं है. आपने यह बयान दिया है, अब उसे वापस लीजिए. अगर आपने किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है तो माफी मांगनी चाहिए."
अदालत ने यह भी इशारा किया कि कमल हासन की आने वाली फिल्म 'ठग लाइफ' कर्नाटक में रिलीज होनी है और वहां से करोड़ों का राजस्व प्राप्त हो सकता है. कोर्ट ने कहा, "कर्नाटक से कमाई हो सकती है लेकिन अगर आपको कन्नड़ जनता की जरूरत नहीं है तो इस कमाई को भी छोड़ दीजिए. हम किसी को भी जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं देंगे." गौरतलब है कि 70 वर्षीय कमल हासन जल्द ही तमिलनाडु की सत्तारूढ़ द्रमुक पार्टी के समर्थन से राज्यसभा सांसद बनने की संभावना रखते हैं. इस पूरे विवाद ने राजनीतिक हलकों में भी गर्माहट ला दी है.
ब्रह्मपुत्र का पानी रोकने की आशंका पर पाकिस्तान घबराया, हिमंत बोले- 'नुकसान तुम्हें, फायदा हमें'
3 Jun, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत द्वारा सिंधु जल संधि को आंशिक रूप से निलंबित करने के फैसले से पाकिस्तान में घबराहट साफ नजर आ रही है. पाकिस्तान लगातार भारत को लेकर भड़काऊ बयानबाजी कर रहा है और अब उसने चीन का नाम घसीटते हुए दावा किया है कि अगर भारत सिंधु संधि से पीछे हटता है तो चीन भारत में ब्रह्मपुत्र नदी का जल प्रवाह रोक सकता है. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पाकिस्तान की इस धमकी को तथ्यों के साथ सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए स्पष्ट किया कि ब्रह्मपुत्र नदी की निर्भरता चीन पर नहीं, बल्कि भारत की मानसूनी वर्षा और सहायक नदियों पर है. सरमा के मुताबिक चीन ब्रह्मपुत्र के कुल जल प्रवाह में केवल 30 से 35 प्रतिशत ही योगदान देता है, जो कि मुख्यतः ग्लेशियर के पिघलने और सीमित वर्षा से आता है.
ब्रह्मपुत्र: भारत में और प्रबल होती नदी
सरमा ने बताया कि ब्रह्मपुत्र एक ऐसी नदी है जो भारत में प्रवेश के बाद और अधिक शक्तिशाली हो जाती है. अरुणाचल प्रदेश, असम, नागालैंड और मेघालय में भारी मानसूनी वर्षा होती है जो नदी को जल प्रदान करती है. इसके अलावा सुबनसिरी, लोहित, कामेंग, मानस, धनसिरी, जिया-भाराली, कोपिली, कृष्णाई, दिगारू और कुलसी जैसी सहायक नदियां ब्रह्मपुत्र को जल देती हैं. तूतिंग पर चीन सीमा से जहां इसका प्रवाह 2,000 से 3,000 घन मीटर/सेकंड होता है, वहीं गुवाहाटी जैसे क्षेत्रों में यह मानसून के समय 15,000 से 20,000 घन मीटर/सेकंड तक पहुंच जाता है.
पाकिस्तान को चेतावनी, डर फैलाने से पहले जानें सच्चाई
सरमा ने साफ कहा कि ब्रह्मपुत्र एक भारतीय, वर्षा-पोषित नदी प्रणाली है जो किसी एक देश पर निर्भर नहीं है. यदि चीन जल को सीमित भी करता है, तो भी भारत को उससे बड़ा नुकसान नहीं होगा, बल्कि इससे असम की भीषण बाढ़ों में कमी आ सकती है जो हर साल लाखों लोगों को विस्थापित करती हैं. पाकिस्तान, जिसने 74 वर्षों तक सिंधु जल संधि से अनुचित लाभ उठाया, अब भारत की संप्रभुता से घबरा रहा है.
ब्रह्मपुत्र: भारत की सभ्यता और शक्ति की पहचान
अंत में, सरमा ने पाकिस्तान को याद दिलाया कि ब्रह्मपुत्र नदी किसी एक स्रोत पर आधारित नहीं है, बल्कि यह भारत के भूगोल, मानसून और सांस्कृतिक शक्ति से पोषित होती है. ऐसे में पाकिस्तान द्वारा डर फैलाने की कोशिश व्यर्थ है और भारत अपने जल संसाधनों पर अब स्वतंत्र और संप्रभु निर्णय लेने में सक्षम है.
राहुल गांधी के दौरे से पहले हरियाणा कांग्रेस में हलचल, शमशेर सिंह गोगी का तीखा बयान
3 Jun, 2025 12:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 4 जून को चंडीगढ़ दौरे से पहले हरियाणा कांग्रेस में अंदरूनी हलचल तेज हो गई है। पूर्व विधायक शमशेर सिंह गोगी ने संगठनात्मक मुद्दों को लेकर बड़ा बयान देते हुए पार्टी के भीतर की खींचतान पर खुलकर नाराजगी जताई है।
गोगी ने कहा कि राहुल गांधी की अगुवाई में हरियाणा कांग्रेस के संगठन को मज़बूत किया जा रहा है, लेकिन अगर ज़िम्मेदार पदों पर गलत लोगों को बैठाया गया तो संगठन को नुकसान हो सकता है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, अगर दूध की रखवाली के लिए बिल्ली को बिठा दोगे तो दूध थोड़ी बचेगा? उनके इस बयान को कांग्रेस के कुछ नेताओं पर परोक्ष हमला माना जा रहा है। गोगी ने ज़ोर देकर कहा कि जिलाध्यक्ष जैसे पदों पर उन्हीं लोगों को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए जो सच्चे कांग्रेसी हों, न कि वे जो अपने निजी स्वार्थ या रिश्तेदारी को प्राथमिकता दें। उनका यह बयान आगामी संगठनात्मक बैठकों से पहले पार्टी के लिए एक स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।
उन्होंने कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा के उस बयान का भी समर्थन किया जिसमें उन्होंने विधानसभा चुनाव में अपने साथ हुई अन्यायपूर्ण स्थिति की बात कही थी। गोगी ने कहा, अगर सैलजा को साथ लिया गया होता तो आज हरियाणा में बीजेपी की सरकार नहीं होती। कांग्रेस, कांग्रेस से ही हारी है। गोगी ने राहुल गांधी के उस बयान को भी याद किया जिसमें उन्होंने पार्टी में स्लीपर सेल की बात कही थी। उन्होंने कहा कि वे राहुल गांधी के विचारों का पूरी तरह समर्थन करते हैं और आशा है कि इस बार संगठन मज़बूती से खड़ा किया जाएगा।
राहुल गांधी के दौरे से पहले ही हरियाणा कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक फेरबदल को लेकर चर्चाएं और बयानबाज़ी तेज हो चुकी है। अब 4 जून की बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हैं कि क्या कोई बड़ा फैसला होता है या फिर यह आंतरिक खींचतान आगे भी यूं ही जारी रहेगी।
क्या एक बार फिर एक होगा पवार परिवार! शरद पवार के पोते ने बढ़ाया सस्पेंस
3 Jun, 2025 11:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। क्या महाराष्ट्र के पवार परिवार के दोनों गुट एक हो जाएंगे? यह सवाल महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय से बना हुआ है। अब अजित पवार और शरद पवार गुट की एकता के कयास तेज हो गए हैं। इसकी वजह शरद पवार के पोते और उनके करीबी रहे रोहित पवार का एक बयान है। उनसे मीडिया ने पूछा कि अजित पवार की एनसीपी और शरद पवार की एनसीपी-एसपी के बीच विलय हो सकता है। इस पर रोहित पवार ने कहा कि सुप्रिया सुले ही इस बारे में आखिरी फैसला लेंगी। रोहित का विलय को लेकर इनकार न करना और पूरी बात तो सुप्रिया सुले पर छोड़ना मायने रखता है।
अब तक रोहित पवार या फिर परिवार का कोई भी सदस्य एकता की बातों को खारिज करता आ रहा था। अब यदि उन्होंने एकता की बात पर खुलकर जवाब नहीं दिया है तो इसके मायने निकाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि अंदरखाने कुछ चल रहा है। ऐसे में रोहित ने कुछ भी साफ जवाब नहीं दिया।
एक कार्यक्रम में बोलते हुए रोहित पवार ने कहा कि साहब ने सुप्रिया सुले को यह जिम्मेदारी दी है। वही इस पर विदेश दौरे से लौटकर बात करेंगी। फिलहाल सुप्रिया सुले ऑपरेशन सिंदूर के बारे में दुनिया के कई देशों को जानकारी देने वाले डेलिगेशन के साथ विदेश में हैं। सुप्रिया सुले 5 जून को भारत वापस आएंगी और हम सभी उनका इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अजित पवार गुट के साथ विलय को लेकर हमारे विधायकों या कार्यकर्ताओं के बीच कोई बात नहीं हुई। सुप्रिया सुले ही कोई फैसला लेंगी।
माना जा रहा है कि शरद पवार बीजेपी और एनसीपी की अजित पवार के साथ गठबंधन पर विचार कर रहे हैं, लेकिन अब भी संदेह है। इसकी वजह है कि शरद पवार का राजनीतिक रूप से चौंकाने का इतिहास रहा है। रोहित ने कहा कि शरद पवार जब कुछ कहते हैं तो उसके गहरे मायने होते हैं। कई बार वह जो कहते हैं, उससे उलट कुछ चल रहा होता है। उन्होंने कहा कि शरद पवार महाराष्ट्र की जनता के हित में जल्द ही कोई फैसला लेंगे।
बता दें अजित पवार गुट ने जब अलग होकर बीजेपी के साथ गठबंधन किया था तो शरद पवार गुट का यही कहना था कि ऐसा करना गलत है। इसलिए क्योंकि बीजेपी के साथ उसके वैचारिक मतभेद हैं। अब यदि शरद पवार की पार्टी ने अजित का साथ दिया और बीजेपी संग गठबंधन हुआ तो यह चौंकाने वाली बात होगी।
कांग्रेसी नेता अरविंद नेताम बने, संघ का चेहरा
3 Jun, 2025 10:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नागपुर। पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व कांग्रेस नेता आदिवासी नेता के रूप में अब संघ के चेहरे बनकर देशभर में आदिवासियों के बीच अलख जगाएंगे। 5 जून को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नागपुर मुख्यालय में होने वाले वार्षिक कार्यक्रम में उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है।अरविंद नेताम संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ मंच साझा करेंगे। यह सौभाग्य गिने-चुने लोगों को ही मिलता है।
केंद्र सरकार द्वारा जाति जनगणना की बात स्वीकार किए जाने के बाद जिस तरीके की स्थिति बन रही है। उसको देखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 83 साल के आदिवासी नेता अरविंद नेताम को आदिवासियों के बीच राष्ट्रीय स्तर पर भेजने की योजना बनाई है। इस खबर के बाद आदिवासी राजनीति और छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक हलचल मच गई है। अरविंद नेताम का कांग्रेस का बैकग्राउंड है। वह लंबे समय तक केंद्रीय मंत्री रहे हैं। देश भर के आदिवासी नेताओं में उनके विशिष्ट स्थान है। कई राज्यों के आदिवासी अपने आप को हिंदू नहीं मानते हैं। संघ आदिवासियों को हिंदू मानकर उन्हें संघ की विचारधारा से जोड़ने के लिए लगातार काम कर रहा है। अरविंद नेता इस काम को आगे बढ़ाने के लिए अब संघ परिवार के साथ खुलकर सामने आ गए हैं।
पीएम मोदी ने पैराग्वे के राष्ट्रपति से कहा कि दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं
3 Jun, 2025 08:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में पैराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेना पलासिओस के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान दोनों देशों ने आपसी संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। इस दौरान पीएम मोदी ने पैराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेना पलासिओस से कहा कि दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आपकी यात्रा बहुत ही ऐतिहासिक है। दूसरी बार पैराग्वे के किसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा हो रही है। मुझे खुशी है कि आपके साथ ताकतवर प्रतिनिधिमंडल आया है। आप केवल दिल्ली ही नहीं बल्कि मुंबई भी जा रहे हैं, इससे आपसी संबंधों को प्रगाढ़ करने की आपकी प्रतिबद्धता बिल्कुल स्पष्ट है। मेरा विश्वास है कि आपसी सहयोग से हम साझी समृद्धि की ओर मार्ग प्रशस्त करेंगे। हमारे पास आर्थिक सहयोग सहित डिजिटल प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, कृषि, स्वास्थ्य, रक्षा, रेलवे और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर हैं।”
पीएम मोदी ने कहा, “भारत और पैराग्वे आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। साइबर क्राइम, संगठित अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी जैसी आम चुनौतियों से लड़ने के लिए सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। भारत और पैराग्वे ग्लोबल साउथ के अभिन्न अंग हैं। हमारी आशाएं, आकांक्षाएं और चुनौतियां में समानता है, इसलिए हम एक-दूसरे के अनुभवों से सीखते हुए इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपट सकते हैं।”
उन्होंने कहा कि हमें संतोष है कि कोविड महामारी के समय हम भारत में बनी वैक्सीन को पैराग्वे के लोगों के साथ साझा करने में सक्षम थे। ऐसी और भी क्षमताएं हम एक-दूसरे के साथ साझा कर सकते हैं। मुझे विश्वास है कि आपकी यात्रा से आपसी संबंधों के विश्वास, व्यापार और करीबी सहयोग के स्तंभों को नई मजबूती मिलेगी। यह भारत-लैटिन अमेरिका संबंधों को भी नए आयाम प्रदान करेगी। पिछले साल, मैंने गुयाना में कैरिकॉम शिखर सम्मेलन में भाग लिया था, जहां हमने कई विषयों पर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की थी। हम इन सभी क्षेत्रों में पैराग्वे और सभी लैटिन अमेरिकी देशों के साथ मिलकर काम कर सकते हैं।
"तेजप्रताप का ‘जयचंद’ तंज गरमाया सियासत, BJP बोली – बताएंगे असली गद्दार कौन"
2 Jun, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Tej Pratap Yadav: लालू यादव के बेटे तेज प्रताप इन दिनों अपने निजी रिश्तों की वजह से चर्चा में हैं। वे कहां हैं इसकी कोई जानकारी परिवार से लेकर उनके मित्र तक को नहीं है। कुछ दिन पहले ही अनुष्का यादव के साथ सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल होने के बाद लालू प्रसाद यादव ने तेजप्रताप को पार्टी और परिवार से बेदखल कर दिया था। इसके कुछ दिनों के बाद बेटे तेज प्रताप ने सोशल मीडिया पर दो पोस्ट शेयर कर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए अपने पिता और भाई से भावुक अपील करते हुए जयचंद की बार बार चर्चा किया। इसके बाद से बिहार का राजनीतिक तापमान बढ़ गया है।
‘जयचंद’ कौन है, वह बीजेपी बताएगी
बिहार बीजेपी की ओर से इसके बाद एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा गया कि ‘जयचंद’ कौन है, वह बीजेपी बताएगी। बीजेपी के इस पोस्ट के बाद से बिहार में राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। जयचंद पॉलिटिक्स में हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (लोकतांत्रिक) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने भी एंट्री मारते हुए लिखा कि- सब पहचानते हैं बिहार के जयचंद को, जो उस वक्त बिहार के सत्ताधिराज थे। जीतनराम मांझी ने लालू प्रसाद पर तंज कसते हुए आगे लिखा “अपने शासनकाल में दलितों-पिछड़ों-वंचितों का नरसंहार कराने वाला सत्ताधीश जयचंद कौन था? कौन था समाज का जयचंद? सब जानते हैं जंगलराज के पनाहगाहों को, सब बिहार के जयचंद को पहचानते हैं।
तेजप्रताप के बयान से बिहार में बवाल
तेजप्रताप यादव के एक पोस्ट के बाद बिहार में राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। सोशल मीडिया एक्स पर तेजप्रताप ने लिखा पापा आप नहीं होते तो ना ये पार्टी होती और ना मेरे साथ राजनीति करने वाले कुछ “जयचंद” जैसे लालची लोग।’ ‘मेरे भाई मम्मी पापा का ख्याल रखना, “जयचंद” हर जगह है अंदर भी और बाहर भी।’इसके कुछ देर के बाद ही तेजप्रताप यादव ने तेजस्वी के लिए एक दूसरा भावुक संदेश शेयर करते हुए लिखा। मेरे अर्जुन से मुझे अलग करने का सपना देखने वालों, तुम कभी अपनी साजिशों में सफल नहीं हो सकोगे। कृष्ण की सेना तो तुम ले सकते हो लेकिन खुद कृष्ण को नहीं। हर साजिश को जल्द बेनकाब करूंगा। तेज प्रताप ने आगे लिखा- बस मेरे भाई भरोसा रखना। मैं हर परिस्थिति में तुम्हारे साथ हूं, फिलहाल दूर हूं लेकिन मेरा आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ था और रहेगा। मेरे भाई मम्मी-पापा का ख्याल रखना, जयचंद हर जगह है अंदर भी और बाहर भी। तेजप्रताप के इन दो पोस्ट के बाद बिहार की राजनीति में जयचंद की एंट्री के साथ ही सियासी तापमान बढ़ गया।
एक ही जयचंद है और उसके बारे में सभी को पता है: सम्राट चौधरी
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, “लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी और कर्पूरी ठाकुर जी से विश्वासघात कर कांग्रेस की गोद में बैठने वाला बिहार का जयचंद कौन है? एक ही जयचंद हैं! सबको पता है।” बिहार की जयचंद पॉलिटिक्स में एंट्री मारते हुए जेडीयू ने अपने एक्स हैंडल से लिखा है, “समाजवादी आंदोलन के नेताओं से छल करके कांग्रेस की गोद में बैठ कर बिहार को बर्बादी के गड्ढे में धकेलने वाले बिहार के जयचंद को कौन नहीं जानता?”
तेजस्वी के करीबी मित्र की ओर तेजप्रताप का है इशारा?
बिहार की राजनीति को समझने वाले सीनियर पत्रकार लव कुमार मिश्रा कहते हैं कि तेजप्रताप यादव जिस जयचंद की बात कर रहे हैं, वे तेजस्वी यादव के बेहद करीबी मित्र संजय यादव है। राज्यसभा सांसद संजय यादव और तेजप्रताप यादव में कभी नहीं बनी है। निजी रिश्तों की वजह से परिवार में अलग थलग पड़ने पर तेजप्रताप यादव संभवत: इसके लिए संजय यादव को जिम्मेवार मान रहे हैं। वे जब अब बार-बार ‘जयचंद’ की चर्चा कर रहे हैं तो कड़ियों की लड़ियां जुड़ती जा रही हैं और ऐसा लग रहा है कि तेजप्रताप जिस जयचंद की चर्चा कर रहे हैं वो कोई और नहीं संजय यादव हैं।
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