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किश्तवाड़ जिले के डोलगाम में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच भीषण मुठभेड़, घेराबंदी जारी
31 Jan, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जम्मू। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के डोलगाम इलाके में शनिवार तड़के सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच एक बार फिर मुठभेड़ शुरू हो गई है। ऑपरेशन त्राशी-I के 14वें दिन सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली, जब उन्होंने छिपे हुए आतंकवादियों के साथ दोबारा संपर्क स्थापित किया। इस संयुक्त अभियान में भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कोर, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ के जवान शामिल हैं। इलाके की पूरी तरह से घेराबंदी कर दी गई है और दोनों ओर से भारी गोलीबारी जारी है।
खुफिया एजेंसियों से सटीक इनपुट मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने जमीन पर इस ऑपरेशन को तेज किया। यह मुठभेड़ उस समय शुरू हुई जब सुरक्षाबल पहले से ही किश्तवाड़ जिले में सक्रिय जैश-ए-मोहम्मद के तीन खूंखार आतंकवादियों की तलाश में बड़े पैमाने पर अभियान चला रहे थे। पिछले दो हफ्तों के भीतर इस क्षेत्र में आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच यह चौथी मुठभेड़ है। ऑपरेशन की गंभीरता को देखते हुए उत्तरी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने किश्तवाड़ का दौरा कर आतंकवाद विरोधी ग्रिड की समीक्षा की है। उनका उद्देश्य क्षेत्र में छिपे जैश के आतंकियों का सफाया करना है।
सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने किश्तवाड़ के चतरू और डोलगाम के आसपास के छह किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया है। सिंगपुरा, अरिगम, द्वाथर और नैदगाम जैसे इलाकों में कनेक्टिविटी बाधित है। गृह विभाग के आदेशानुसार, 23 जनवरी से लागू यह पाबंदी शुक्रवार रात के बाद भी जारी रखने का निर्णय लिया गया है ताकि किसी भी तरह की अफवाहों को फैलने से रोका जा सके। यह पूरा अभियान 18 जनवरी को बर्फ से ढके दुर्गम इलाकों में शुरू किया गया था। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और भारी बर्फबारी के कारण यह ऑपरेशन काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। पहले दिन की मुठभेड़ में एक पैराट्रूपर शहीद हो गया था और सात सैनिक घायल हुए थे। इसके बाद 22 जनवरी को माली दाना टॉप और 25 जनवरी को जंसीर-कंडीवार में भी आतंकियों से सामना हुआ, लेकिन वे घनी वनस्पतियों और गहरी बर्फ का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे थे। वर्तमान में सुरक्षाबल बेहद सतर्कता के साथ आगे बढ़ रहे हैं ताकि आतंकियों के भागने के सभी रास्ते बंद किए जा सकें।
10वीं के बाद इस स्कीम में करें अप्लाई, PhD तक मिलेगा फ्री शिक्षा सपोर्ट
31 Jan, 2026 03:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर बच्चे के माता-पिता का सपना होता है कि उनका बच्चा खूब पढ़े और तरक्की करे. स्कूली शिक्षा के साथ-साथ ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री भी आज के समय की जरूरत बन गई है. कई बार पैसे की कमी के कारण बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना (Post Metric Scholarship Scheme) लायी है.
पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना क्या है?
पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और आर्थिक रुप से पिछड़े वर्ग (EWS) के लिए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई है. प्रदेश सरकार 11 वीं क्लास से लेकर पीएचडी (PhD) तक की पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद कर रही है. ये लाभ केवल उन स्टूडेंट्स को मिलेगा, जिन्होंने 10वीं कक्षा पास की है. सरकार पढ़ाई का पूरा खर्च उठाती है, फीस का पैसा आ जाता है और हॉस्टल-मेस का खर्च दिया जाता है.
इस योजना का लाभ किसे मिलेगा?
छात्र-छात्राएं जो मध्य प्रदेश के निवासी होना अनिवार्य है.
स्टूडेंट्स को एडमिशन 11वीं, 12वीं, ग्रेजुएशन, पोस्टग्रेजुएशन, पीएचडी या किसी तकनीकी कोर्स में कराना होगा.
छात्रों को SC, ST, OBC अथवा EWS वर्ग का होना चाहिए.
इसके साथ ही माता-पिता की वार्षिक आय 2.50 लाख रुपये होना जरूरी है.
योजना के लिए आवेदन कैसे करें?
मध्य प्रदेश की आधिकारिक वेबसाइट MP Scholarship Portal 2.0 पर विजिट करना होगा.
यदि स्टूडेंट्स का पंजीकरण नहीं हुआ है तो रजिस्टर करना होगा. लॉग इन करना होगा.
जरूरी डॉक्यूमेंट्स की जानकारी देनी होगी और दस्तावेज अपलोड करना होगा.
यदि आपको स्कॉलरशिप मिल रही है तो रिन्यूबल पर क्लिक करके आगे की प्रोसेस पूरी कर सकते हैं.
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किन डॉक्यूमेंट्स की आवश्यकता होगी?
इस योजना का लाभ उठाने के लिए इनकम सर्टिफिकेट, जाति प्रमाण पत्र, पिछली क्लास की मार्कशीट (10वीं कक्षा की अनिवार्य), बैंक पासबुक की फोटोकॉपी होना जरूरी है. बैंक अकाउंट आधार कार्ड से लिंक होना अनिवार्य है.
सुपरजेट की डील डन! अब भारत आएगा दुनिया का सबसे चर्चित फाइटर जेट एसयू-57?
31 Jan, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (यूएसी) के बीच नागरिक विमान सुखोई सुपरजेट 100 (एसजे-100) के भारत में उत्पादन को लेकर हुए हालिया समझौते ने रक्षा और विमानन गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। इस साझेदारी के बाद अब यह सवाल प्रबल हो गया है कि क्या नागरिक उड्डयन के रास्ते रूस अपने सबसे घातक पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान सुखोई एसयू-57 के लिए भारतीय वायु सेना के दरवाजे खोलने की तैयारी कर रहा है।
भारत और रूस के बीच नागरिक विमानन के क्षेत्र में हुआ यह समझौता मेक इन इंडिया की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। एसजे-100 एक क्षेत्रीय जेट है और भारत में इसके निर्माण से एयरोस्पेस ईकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह नागरिक विमान समझौता भविष्य के बड़े सैन्य समझौतों के लिए एक टेस्ट केस हो सकता है। इसी बीच, रूसी एरोस्पेस कंपनी के शीर्ष अधिकारियों के बयानों ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) वादिम बदेखा ने संकेत दिए हैं कि दोनों देश एसयू-57ई लड़ाकू विमान के संयुक्त उत्पादन की तकनीकी संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं। उनके मुताबिक, भारत में पहले से ही सुखोई एसयू-30 के उत्पादन के लिए मौजूद सुविधाओं का उपयोग एसयू-57 के लाइसेंस प्राप्त उत्पादन के लिए किया जा सकता है।
एसयू-57 फेलो रूस का पहला पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर है, जो रडार की नजरों से बचने की बेजोड़ क्षमता रखता है। यह विमान सुपरक्रूज तकनीक से लैस है, जिससे यह बिना आफ्टरबर्नर के ध्वनि की गति से तेज उड़ सकता है। इसकी मिसाइलें इसके इंटरनल वेपन बे में छिपी होती हैं, जो इसके स्टील्थ फीचर को और प्रभावी बनाती हैं। हालांकि, भारत और एसयू-57 का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। भारत पहले रूस के साथ फिफ्थ जनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोग्राम का हिस्सा था, लेकिन 2018 में तकनीक हस्तांतरण और लागत से जुड़े मुद्दों के कारण भारत इस प्रोजेक्ट से पीछे हट गया था।
अब पासा पलटता हुआ इसलिए दिखाई दे रहा है क्योंकि रूस ने एसयू-57 के लिए नया और अधिक शक्तिशाली इंजन विकसित कर लिया है, जो भारत की पुरानी चिंताओं को दूर कर सकता है। साथ ही, चीन के पास जे-20 जैसे पांचवीं पीढ़ी के विमानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भारतीय वायु सेना को एक स्टील्थ फाइटर की तत्काल आवश्यकता महसूस हो रही है। इसके अलावा, रूस से बड़े रक्षा सौदे करने पर अमेरिका के प्रतिबंधों का खतरा भी एक बड़ा कूटनीतिक पहलू है। भारत अब केवल खरीददार नहीं बने रहना चाहता, बल्कि उसका जोर पूर्ण तकनीक हस्तांतरण पर है। यदि रूस इस मोर्चे पर ठोस प्रस्ताव देता है, तो भविष्य में फेलो भारतीय आकाश की सुरक्षा करते हुए दिखाई दे सकते हैं। फिलहाल, वायु सेना का मुख्य ध्यान राफेल के अगले बैच और तेजस जैसे स्वदेशी विमानों को मजबूती देने पर है।
तिरुपति लड्डू विवाद में क्लीनचिट खबरों को लेकर TTD चेयरमैन ने बताई सच्चाई, जानिए क्या कहा ?
31 Jan, 2026 01:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। तिरुपति में लड्डू प्रसाद (Laddu Prasad) में मिलावटी घी (Adulterated Ghee) के विवाद पर तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के अध्यक्ष बीआर नायडू ने कहा कि इस मामले में क्लीनचिट (Clean Chit) देने की खबर झूठी है। उन्होंने बताया कि यह केवल श्रद्धालुओं (Devotees) को भ्रमित करने के लिए फैलाया जा रहा है। नायडू ने कहा कि हिंदुओं के पवित्र मंदिर में इस तरह का मिलावटी प्रसाद बांटकर उनकी भावनाएं (Sentiments) आहत हुईं, और किसी को भी क्लीनचिट नहीं मिली है।
मीडिया से बातचीत में नायडू ने बताया
बीआर नायडू ने कहा कि वाईएसआरसीपी सरकार के दौरान लड्डू प्रसाद में मिलावटी घी का इस्तेमाल किया गया था। अब लोगों में भ्रम फैलाया जा रहा है कि इस मामले में क्लीनचिट मिल गई है, जो पूरी तरह गलत है। SIT की चार्जशीट में स्पष्ट रूप से लिखा गया कि लड्डू में मिलावटी घी का प्रयोग हुआ था और कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए यह किया गया। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने कॉन्ट्रैक्ट नियमों का उल्लंघन किया और ऐसे कंपनियों को ठेका दिया जो योग्य नहीं थीं।
ठेका देने में बड़ी लापरवाही
नायडू ने बताया कि जिस कंपनी के पास गाय नहीं थी, दुग्ध उत्पादन का कोई जरिया नहीं था और शुद्ध घी बनाने की क्षमता भी नहीं थी, उसे ठेका दे दिया गया। इसके बाद टीटीडी ने कंपनी से 60 लाख किलो घी खरीदा, जिसकी कीमत 250 करोड़ रुपये थी। नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड की जांच में पता चला कि इस घी में जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल किया गया। नायडू ने कहा कि इस घी से लगभग 20 करोड़ श्रीवरी लड्डू बनाए गए, और यह देश में मिलावट का सबसे बड़ा मामला है।
SIT ने क्या कहा?
SIT ने अपनी फाइनल चार्जशीट कोर्ट में दायर की और कहा कि इसमें जानवरों की चर्बी का उल्लेख नहीं था। इसके बाद वाईएसआरसीपी ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और डिप्टी CM पवन कल्याण पर आरोप लगाया कि दोनों मिलकर हिंदुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। चार्जशीट में कहा गया कि घी बनाने के लिए पाम तेल, पाम कर्नेल तेल और केमिकल एडिटिव्स का इस्तेमाल हुआ था, लेकिन जानवरों की चर्बी का कोई जिक्र नहीं था।
सीएम नायडू के आरोप
सितंबर 2024 में चंद्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया था कि जगन मोहन रेड्डी की सरकार के दौरान तिरुपति लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी वाले घी का इस्तेमाल किया जाता था। इस विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट ने SIT का गठन किया। इस मामले में उत्तराखंड की भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी के डायरेक्टर पोमिल जैन और विपिन जैन को भी आरोपी बनाया गया। TDP का कहना है कि SIT की चार्जशीट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि घी मिलावटी था और इसमें एक भी बूंद भी शुद्ध घी का इस्तेमाल नहीं हुआ।
देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 709.41 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर
31 Jan, 2026 12:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) (Reserve Bank of India – RBI) ने शुक्रवार को जारी आंकड़ों में बताया कि 23 जनवरी को समाप्त हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार का अहम घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 2.36 अरब डॉलर बढ़कर 562.88 अरब डॉलर हो गईं। इस दौरान स्वर्ण भंडार का मूल्य 5.63 अरब डॉलर बढ़कर 123.08 अरब डॉलर हो गया। इस अवधि में विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 3.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.73 अरब डॉलर हो गया। आंकड़ों के अनुसार इस दौरान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत की आरक्षित स्थिति भी 1.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.70 अरब डॉलर हो गई। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार सितंबर, 2024 में 704.89 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुंचा था।
दिल्ली में नगर विकास को बढ़ावा, सरकार ने MCD को दिए 500 करोड़
31 Jan, 2026 11:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। दिल्ली (Delhi) को साफ, स्वच्छ और प्रदूषण-मुक्त राजधानी बनाने की दिशा में दिल्ली सरकार (Delhi Government) ने बड़ा और दूरगामी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Chief Minister Rekha Gupta) ने शहर की सफाई व्यवस्था को मजबूत करने और धूल से होने वाले प्रदूषण पर काबू पाने के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को 500 करोड़ रुपये की एकमुश्त सहायता दी है। इस धनराशि से सफाई व सड़कों की छोटी-मोटी मरम्मत कर धूल उड़ने की समस्या को कम किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि सफाई व्यवस्था को स्थायी रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार आगे भी नगर निगम को हर साल 300 करोड़ रुपये की नियमित सहायता देती रहेगी।
इस विषय को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में शुक्रवार को दिल्ली सचिवालय में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में दिल्ली के कैबिनेट मंत्री आशीष सूद, दिल्ली के महापौर सरदार राजा इकबाल सिंह, नगर निगम की स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा, नेता सदन प्रवेश वाही, दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव राजीव वर्मा, निगम आयुक्त संजीव खिरवार सहित सरकार व नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राजधानी को साफ और स्वच्छ रखने के लिए एमसीडी को 500 करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए गए हैं। राशि का कुछ हिस्सा उन कंपनियों का पुराना बकाया चुकाने में खर्च होगा जो कचरा प्रबंधन का काम करती हैं ताकि वे बेहतर तरीके से अपने काम को अंजाम दे सकें। कुछ हिस्सा सफाई व्यवस्था को बिना किसी रुकावट के चलाने के लिए दिया जाएगा ताकि कचरा उठाने और उसे ले जाने में होने वाले मासिक घाटे की भरपाई की जा सके। साथ ही, कुछ हिस्सा उन खास इलाकों से कूड़ा हटाने के लिए भी दिया जाएगा जहां ठेकेदार काम नहीं करते। इसके अतिरिक्त सड़कों की छोटी-मोटी मरम्मत, जैसे गड्ढे भरने, छोटे पैच रिपेयर और धूल से होने वाले प्रदूषण को रोकने के कामों पर भी राशि खर्च की जाएगी।
बैठक में मुख्यमंत्री ने नगर निगम को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यह पूरी राशि केवल स्वीकृत उद्देश्यों के लिए ही उपयोग की जाए और इसका किसी अन्य योजना में उपयोग नहीं किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम को सभी वित्तीय नियमों का पालन करते हुए खर्च की नियमित निगरानी सुनिश्चित करनी होगी और समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट और उपयोगिता प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी को सही मायनों में विकसित दिल्ली बनाने के लिए स्वच्छ व प्रदूषण मुक्त किया जाना आवश्यक है। इसके लिए सफाई व्यवस्था का भी चाक-चौबंद रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कूड़ा आदि से निकली धूल भी प्रदूषण को बढ़ाती है, इसलिए हमारी सरकार ने निर्णय लिया है कि राजधानी को साफ व स्वच्छ बनाने की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर निगम को कूड़ा उठाने की व्यवस्था को और बेहतर बनाना होगा। दिल्ली सरकार सफाई से जुड़े आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए निगम को अलग से पर्याप्त धनराशि दे रही है, ताकि सफाई के काम में बेहतर और तेजी से नतीजे मिल सकें। उन्होंने कूड़े से ऊर्जा बनाने वाले नए प्लांट लगाने के निर्देश दिए और मौजूदा प्लांट को अपग्रेड करने को भी कहा। साथ ही, हरित कूड़े के सही उपयोग पर जोर देते हुए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में आधुनिक मशीनें लगाने के निर्देश एमसीडी नेताओं को दिए। उन्होंने कहा कि कूड़े का बेहतर प्रबंधन भी राजधानी को साफ-सुथरा बनाने में प्रभावी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि गीले व सूखे कूड़े का उठाने की प्रक्रिया भी सरल बनाई जाए ताकि लोगों का इस ओर रुझान बढ़े।
मेगा ट्रेड डील की नींव: भारत-ईयू के लिए गेम-चेंजर समझौता
31 Jan, 2026 10:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारत और ईयू मिलकर 2 अरब लोगों, वैश्विक जीडीपी का 25% और वैश्विक व्यापार का एक तिहाई हिस्सा हैं। दोनों देशों के बीच एक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक विशाल कदम है। जबकि व्यापार चर्चा लगभग दो दशकों से हो रही थी, 2022 से अधिक गहन चर्चा शुरू हुई और 27 जनवरी 2026 को संपन्न हुई।भू-राजनीतिक और रणनीतिक प्रभाव
डॉ. विकास गुप्ता, सीईओ और मुख्य निवेश रणनीतिकार, ओमनीसाइंस कैपिटल के अनुसार भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की स्थिति को देखते हुए, भारत- यू एफटीए प्रतीकात्मक है क्योंकि भारत अमेरिका को निर्यात की जाने वाली अधिकांश वस्तुओं के लिए अन्य बाजार खोजने में सक्षम है। इसे चीन पर निर्भरता कम करने के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पुनर्गठन पहलों के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। यह समझौता अमेरिका को पीछे धकेलेगा और दिखाता है कि भारत कृषि और डेयरी तक पहुंच पर समझौता नहीं करेगा क्योंकि बड़ी किसान आबादी इन क्षेत्रों पर निर्भर है। सकारात्मक रूप से लिया जाए तो यह दर्शाता है कि भारत उच्च-स्तरीय उत्पादों, जैसे वाइन, या विशिष्ट कृषि उत्पादों, जैसे कीवी आदि तक पहुंच देने के लिए तैयार है। यह एक टेम्पलेट हो सकता है जिसके साथ भारत-अमेरिका व्यापार समझौता हो सकता है।
समझौते की मुख्य विशेषताएं
ईयू के दृष्टिकोण के अनुसार, ईयू द्वारा निर्यात की जाने वाली 96% वस्तुओं पर कम या शून्य टैरिफ होगा, जबकि भारतीय दृष्टिकोण यह है कि 99% भारतीय निर्यात को विशेषाधिकार प्राप्त पहुंच मिलेगी।
निवेशकों के लिए सुझाव और रणनीति
निवेश के दृष्टिकोण से, किसी को बहुत उत्साहित नहीं होना चाहिए और जल्दबाजी में कार्य नहीं करना चाहिए
उचित विश्लेषण के बिना इनमें से किसी भी क्षेत्र में निवेश करना शुरू करने का कोई कारण नहीं है। निश्चित रूप से, इन क्षेत्रों में बाजार के नेताओं को विशेषाधिकार प्राप्त बाजार पहुंच से अधिकतम लाभ मिलने की संभावना है। प्रत्येक कंपनी को अगले 3-5 वर्षों में इससे राजस्व के मामले में कितना लाभ होगा, इसका अनुमान लगाने की आवश्यकता है। इसे मूल्यांकन मॉडल में शामिल करने की आवश्यकता है और फिर संशोधित आंतरिक मूल्य की वर्तमान बाजार कीमतों से तुलना करने की आवश्यकता है। केवल अगर बाजार मूल्य आंतरिक मूल्य से काफी कम है तो उन कंपनियों में निवेश करना समझ में आएगा।
अनुशासित निवेश दृष्टिकोण
आज भारत का शेयर बाज़ार केवल एक सामान्य चक्र का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह एक बड़े बदलाव का दौर है। जीएसटी सुधार, ब्याज दरों में नरमी और विदेशी पूँजी के साथ भारत की आर्थिक शक्ति मज़बूत हो रही है।
डॉ. विकास गुप्ता के मुताबिक निवेशक अगर वैज्ञानिक और अनुशासित रणनीति अपनाते हैं, तो यह दौर दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण का स्वर्णिम अवसर बन सकता है।
जिस पर निश्चित रूप से ध्यान केंद्रित किया जा सकता है वह उन क्षेत्रों या विकास वेक्टरों के बारे में जागरूक होना है जिन्हें उपरोक्त एफटीए विवरण को देखते हुए लाभ होने की संभावना है। उदाहरण के लिए, सेवाएं और उद्योग दो विकास वेक्टर हैं जिन्हें इससे महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलता है। इस विकास वेक्टर के लिए एक पोर्टफोलियो दृष्टिकोण जो सेवा कंपनियों के पूर्ण ब्रह्मांड पर ध्यान केंद्रित करता है और किसी भी समय कंपनियों के एक चयनित सेट में निवेश करता है जो विकास के अवसर को देखते हुए काफी गलत कीमत पर हैं, एफटीए लाभ सामने आने पर दीर्घकालिक रूप से संतोषजनक रिटर्न देने की संभावना है। इसी तरह, उद्योग विकास वेक्टर को इंजीनियरिंग बाजारों तक पहुंच से लाभ होगा।
हम इन क्षेत्रों की कंपनियों के लिए वैज्ञानिक निवेश ढांचे का पालन करने वाले अनुशासित दृष्टिकोण का सुझाव देंगे, न कि एफटीए के लाभार्थियों के रूप में प्रचारित तदर्थ शेयरों के लिए घुटने से झटका प्रतिक्रिया का।
लेखक डॉ. विकास वी. गुप्ता, ओम्निसाइंस कैपिटल के सीईओ और मुख्य निवेश रणनीतिकार हैं। ओम्निसाइंस कैपिटल एक वैश्विक निवेश प्रबंधन फर्म है, जो अपनी स्वामित्व वैज्ञानिक निवेश (Scientific Investment Approach) दर्शन के आधार पर भारतीय और वैश्विक इक्विटी निवेश पर केंद्रित है। डॉ. गुप्ता ने आईआईटी बॉम्बे से बी.टेक और कोलंबिया विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है। वे पूर्व वैज्ञानिक और प्रोफेसर रहे हैं तथा पूंजी बाजार में दो दशकों से अधिक का समृद्ध अनुभव रखते हैं। उनके लेख और विचार नियमित रूप से प्रमुख वैश्विक वित्तीय प्रकाशनों और मीडिया में प्रकाशित होते हैं।
दिल्ली में मुरारी बापू की कथा: वेद, भक्ति और मानवता का संगम
31 Jan, 2026 09:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु और सनातन धर्म की प्रखर आवाज मोरारी बापू (Morari Bapu) द्वारा राजधानी नई दिल्ली के ‘भारत मंडपम’ में आयोजित नौ दिवसीय रामकथा का समापन हुआ। 17 जनवरी से 25 जनवरी तक चली इस कथा का शीर्षक ‘मानस सनातन धर्म’ था, जिसका समापन गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर हुआ।
वेदों सहित विभिन्न शास्त्रों का संदर्भ देते हुए मोरारी बापू ने समझाया कि सनातन धर्म ही एकमात्र शाश्वत धर्म है, जिसे किसी ऐतिहासिक तिथि या कालखंड की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। उन्होंने कहा कि यह धर्म सभी आध्यात्मिक परंपराओं के सार को जोड़ता है और इसके केंद्र में सत्य, प्रेम, करुणा और अहिंसा के मूल्य समाहित हैं।
बापू ने आगाह किया कि सदियों से सनातन धर्म को कमजोर करने के कई बाहरी प्रयास हुए हैं, लेकिन आज सबसे बड़ा खतरा आंतरिक विभाजन से है। उन्होंने उन संप्रदायों पर चिंता व्यक्त की जो मनघड़ंत देवता (सनातन में जिनका कोई उल्लेख नहीं है) को स्थापित करने, बढ़ावा देने और पवित्र ग्रंथों में अनधिकृत बदलाव (क्षेपक) कर झूठी कथाएं प्रचारित कर रहे हैं।
बापू ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “भले ही ऐसे संप्रदायों को अन्य शक्तिशाली ‘गादियों’ का समर्थन मिल जाए, लेकिन ‘व्यास पीठ’ उन्हें कभी मान्यता नहीं देगी। व्यास पीठ अनादि काल से सनातन धर्म के वास्तविक मूल्यों, शास्त्रों और भगवान राम, कृष्ण, शिव एवं मां दुर्गा जैसे आराध्य देवों के प्रति अडिग रही है।”
सनातन धर्म के प्रामाणिक ग्रंथ
रामकथा के माध्यम से पूज्य मोरारी बापू ने स्पष्ट किया कि सनातन धर्म की परंपरा वेदों से शुरू होकर उपनिषदों, पुराणों और भगवद गीता तक जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गोस्वामी तुलसीदास कृत ‘रामचरितमानस’ इस निरंतरता का अंतिम प्रामाणिक ग्रंथ है। इसके बाद लिखे गए किसी भी ग्रंथ को सनातन धर्म के मूल ग्रंथों का हिस्सा नहीं माना जा सकता।
बापू ने काव्यात्मक रूप से सनातन धर्म के प्रतीकों को परिभाषित करते हुए कहा कि इसका प्रवाह गंगा है, पर्वत कैलाश है, अक्षय वृक्ष वटवृक्ष है, ग्रंथ वेद है, चक्र सुदर्शन है, शीतलता चंद्रमा है और प्रकाश स्वयं भगवान सूर्य हैं।
मानस सनातन धर्म रामकथा का शुभारंभ उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने किया तथा समापन सत्र को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संबोधित किया। कथा में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी शिरकत की और बापू के समक्ष यमुना नदी को पूर्णतः स्वच्छ करने का संकल्प लिया। कथा के प्रथम दिन बापू ने राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
विश्व शांति केंद्र के संस्थापक और प्रसिद्ध जैन आध्यात्मिक गुरु आचार्य लोकेश मुनि इस रामकथा के आयोजक रहे। बापू ने न केवल कथा के माध्यम से मार्गदर्शन किया, बल्कि विश्व शांति केंद्र के निर्माण हेतु स्वयं अंशदान देकर और अपने अनुयायियों (जिन्हें वे ‘पुष्प’ कहते हैं) को प्रेरित कर वित्तीय सहायता भी प्रदान की।
कथा के अंतिम दिन विभिन्न धर्मगुरुओं ने शिरकत कर सनातन धर्म की उदारता और भारतीय लोकतंत्र की समावेशी भावना की सराहना की।
‘मानस सनातन धर्म’ मोरारी बापू की 971वीं रामकथा थी। उल्लेखनीय है कि बापू कथा के लिए कोई पारिश्रमिक नहीं लेते हैं। कथा और वहां परोसा जाने वाला प्रसाद (भोजन) सभी के लिए पूरी तरह निःशुल्क रहता है।
सत्य, प्रेम और करुणा के मूल्यों में रची-बसी यह राम यात्रा सनातन धर्म को मजबूत करने और रामचरितमानस के प्रकाश को जन-जन तक पहुँचाने के मिशन के साथ निरंतर जारी है।
IAS हरि चंदना को अंतरराष्ट्रीय पहचान: डेमोक्रेटिक संघ की ‘चेंज मेकर्स लिस्ट 2025’ में नाम
31 Jan, 2026 08:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेलंगाना। लोकतांत्रिक मूल्यों को मज़बूती देने और नागरिकों की भागीदारी को सशक्त बनाने के लिए कार्यरत सामाजिक सुधार संगठन डेमोक्रेटिक संघ ने आईएएस अधिकारी हरि चंदना को अपनी प्रतिष्ठित चेंज मेकर्स लिस्ट 2025 में शामिल किया है। यह सम्मान उन्हें नागरिक-केंद्रित प्रशासन, सार्वजनिक नवाचार और समावेशी शासन व्यवस्था को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए दिया गया है।
डेमोक्रेटिक संघ की स्थापना सामाजिक कार्यकर्ता चैतन्य एमआरएसके और अभिनेत्री रेजिना कैसेंड्रा द्वारा की गई थी। संगठन हर वर्ष चेंज मेकर्स लिस्ट के माध्यम से उन व्यक्तियों और संस्थानों को पहचान देता है, जो शासन, सार्वजनिक नीति, सतत विकास, व्यवसाय, प्रौद्योगिकी, कला, मीडिया और सामाजिक सेवा के क्षेत्रों में सकारात्मक और स्थायी बदलाव लाने का कार्य कर रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य ऐसे नेतृत्व को सामने लाना है, जो केवल विचारों तक सीमित न होकर उन्हें ठोस परिणामों में बदलने की क्षमता रखता हो।
चेंज मेकर्स लिस्ट 2025 की घोषणा करते हुए डेमोक्रेटिक संघ के संस्थापक चैतन्य एमआरएसके ने कहा कि भारत इस समय एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है, जहां उसका लोकतांत्रिक भविष्य उन व्यक्तियों के हाथों में आकार ले रहा है, जो साहस, संवेदनशीलता और रचनात्मक सोच के साथ सार्वजनिक जीवन में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सूची उन लोगों को सम्मानित करने का प्रयास है, जिनका कार्य लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने के साथ-साथ आम नागरिकों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाता है।
सह-संस्थापक रेजिना कैसेंड्रा ने कहा कि चेंज मेकर्स लिस्ट 2025 में शामिल सभी व्यक्तित्व एक ऐसे भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो अधिक समावेशी, मानवीय और भविष्य की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि इन व्यक्तियों की पहलें पारंपरिक प्रणालियों को नई दिशा देती हैं और बड़े स्तर पर सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करती हैं।
आईएएस अधिकारी हरि चंदना को प्रशासन में लोगों को प्राथमिकता देने वाले दृष्टिकोण के लिए व्यापक रूप से जाना जाता है। उन्होंने शासन को केवल नियमों और प्रक्रियाओं तक सीमित न रखते हुए उसे नागरिकों की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ने का निरंतर प्रयास किया है। तकनीक और नवाचार के प्रभावी उपयोग के माध्यम से उन्होंने सरकारी सेवाओं की अंतिम छोर तक पहुंच सुनिश्चित करने और सेवा वितरण को अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है।
अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान श्रीमती हरि चंदना कई ऐसी पहलों से जुड़ी रही हैं, जिनका उद्देश्य जनसहभागिता को सरल बनाना, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक उत्तरदायी बनाना और यह सुनिश्चित करना रहा है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक सही समय पर पहुंचे। उनकी कार्यशैली को सक्रिय, समाधान-केंद्रित और नवाचार-प्रधान माना जाता है, जिसमें पारंपरिक शासन प्रणालियों को नागरिक-अनुकूल स्वरूप देने पर विशेष बल दिया गया है।
डेमोक्रेटिक संघ द्वारा दिया गया यह सम्मान इस बात का संकेत है कि देश में अब ऐसे प्रशासकों को विशेष महत्व दिया जा रहा है, जो परंपरागत ढांचे से आगे बढ़कर दीर्घकालिक और संस्थागत सुधारों की दिशा में कार्य कर रहे हैं। चेंज मेकर्स लिस्ट 2025 भारत में उभर रहे नेतृत्व की विविधता और गहराई को दर्शाती है और उन प्रयासों को मान्यता देती है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों को जमीनी स्तर पर साकार कर रहे हैं।
डेमोक्रेटिक संघ ने यह भी घोषणा की है कि चेंज मेकर्स लिस्ट 2025 में शामिल चयनित व्यक्तियों को संगठन के वार्षिक फोरम के दौरान सम्मानित किया जाएगा। यह फोरम नीति-निर्माताओं, सामाजिक नेताओं, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और जागरूक नागरिकों को एक मंच पर लाकर भारत में लोकतंत्र की वर्तमान स्थिति और भविष्य की दिशा पर सार्थक संवाद को प्रोत्साहित करता है।
तेज़, पारदर्शी और मानवीय प्रशासन की बढ़ती सार्वजनिक अपेक्षाओं के बीच, आईएएस अधिकारी श्रीमती हरि चंदना जैसी अधिकारी एक नई पीढ़ी के चेंज मेकर्स का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो दृष्टि, प्रतिबद्धता और जवाबदेही के साथ शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही हैं।
अविमुक्तेश्वरानंद से माफी मांगने को तैयार है प्रयागराज प्रशासन? दावे पर अधिकारियों के बयान से विवाद गहराया
30 Jan, 2026 01:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Swami Avimukteshwaranand Controversy: माघ मेला के दौरान स्नान को लेकर हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और पुलिस के बीच विवाद रुकने का नाम नहीं ले रहा है. अब यह मामला प्रयागराज हाई कोर्ट पहुंच गया है. एक ओर जहां अविमुक्तेश्वरानंद के PRO का दावा है कि उनको मनाने के लिए प्रशासन काफी कोशिश में जुटा है, तो वहीं प्रशासन ने इसको सिरे से खारिज कर दिया है. अविमुक्तेश्वरानंद के पीआरओ का दावा है कि अगर स्वामी जी की दोनों शर्तें मानी जाएंगी, तभी वे स्नान करेंगे. फिलहाल, प्रशासन और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है.
अविमुक्तेश्वरानंद के पीआरओ ने क्या कहा?
मौनी अमावस्या के दिन हुए विवाद के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि प्रयागराज प्रशासन के बड़े अधिकारी दोबारा पूरे सम्मान के साथ स्नान कराने के लिए मना रहे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि अविमुक्तेश्वरानंद स्वामी ने स्नान करने से पहले अपनी कई शर्तें रखी हैं. उन्होंने शिष्यों के साथ मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई, लिखित माफी मांगने और चारों शंकराचार्यों के लिए स्नान करने के लिए स्थाई SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) बनाने की मांग की है.
हाई कोर्ट पहुंचा विवाद
दरअसल, मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिष्यों के साथ संगम में स्नान करने के लिए जा रहे थे. इस दौरान प्रशासन ने उन्हें भीड़ का हवाला देते हुए जाने से मना कर दिया. प्रशासन के मना करने पर पुलिस और उनके शिष्यों के बीच विवाद हो गया. आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने शिष्यों के साथ मारपीट की, जिसका वीडियो भी वायरल हुआ था. विवाद के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद नाराज हो गए और वे बिना स्नान किए ही वापस लौट गए. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस मामले में कानून का सहारा लिया है और हाई कोर्ट में याचिका दायर करते हुए सीबीआई जांच की मांग की है.
मेला प्रशासन ने दावे को किया खारिज
अविमुक्तेश्वरानंद के पीआरओ द्वारा कही गई बातों को प्रयागराज प्रशासन ने सिरे से खारिज कर दिया है. प्रशासन का कहना है कि उनकी ओर से ऐसी कोई कोशिश नहीं की गई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के वकील ने प्रयागराज हाई कोर्ट में लेटर पिटीशन दायर कर कार्रवाई की मांग की है.
पिटीशन में शिष्यों के साथ मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने और इससे जुड़े अधिकारियों को सस्पेंड करने की मांग उठाई है. मामले में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी न हो दोषियों को सजा मिले, इसके लिए सीबीआई से जांच कराने की अपील की है.
बिना स्नान किए लौटे अविमुक्तेश्वरानंद
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद के बाद माघ मेला से बिना स्नान किए प्रयागराज से वाराणसी चले गए हैं. उनके शिष्यों का कहना है कि अगर प्रशासन हमारी शर्तों को स्वीकार करता है, तो वाराणसी आकर उन्हें मनाना होगा और ससम्मान प्रयागराज में स्नान कराना होगा. फिलहाल, प्रशासन और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है.
बीएचयू में दो हॉस्टल के छात्रों में हुई मारपीट, एक पीजी छात्र गंभीर रूप से घायल
30 Jan, 2026 01:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाराणसी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में दो छात्रावासों के छात्रों के बीच हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। रुइया हॉस्टल और बिरला-सी हॉस्टल के छात्रों के बीच मारपीट और पथराव की घटना में पीजी छात्र पीयूष तिवारी गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके सिर में गहरी चोट आई है, जिसके बाद उसे ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। घटना के बाद पूरे कैंपस में तनाव का माहौल बन गया।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, कि रुइया हॉस्टल के गेट पर उस समय करीब 50–60 छात्र प्रॉक्टोरियल बोर्ड से किसी मुद्दे पर बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान पीयूष तिवारी बाइक से वहां से गुजरा। तभी उसकी बिरला-सी हॉस्टल के तीन छात्रों से कहासुनी हो गई। देखते ही देखते बहस मारपीट में बदल गई, जिसमें पीयूष के सिर पर गंभीर चोट लग गई।
पीयूष के घायल होने की खबर फैलते ही रुइया हॉस्टल के छात्र आक्रोशित हो गए। इसी बीच आरोप है कि बिरला-सी हॉस्टल के 30–40 छात्र, जिनमें कुछ के चेहरे कपड़े से ढंके थे, लाठी-डंडे और पत्थर लेकर रुइया हॉस्टल की ओर दौड़ पड़े और जमकर पथराव किया। अचानक हुए इस हमले से इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
सूचना मिलते ही लंका थाना पुलिस, बीएचयू चौकी प्रभारी और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी काशी गौरव स्वयं मौके पर पहुंचे। हालात काबू में करने के लिए करीब 500 पुलिसकर्मियों, 3 एसीपी, 5 थानों की फोर्स, एक टीम पीएसी और आरपीएफ के जवानों को तैनात किया गया। इसी के साथ ही पूरे इलाके की ड्रोन से निगरानी रखी गई।
पुलिस ने बिरला-सी हॉस्टल को चारों ओर से घेर लिया है। तलाशी अभियान के तहत कई कमरों के ताले तोड़कर जांच की गई है। इस दौरान विश्वविद्यालय का प्रॉक्टोरियल बोर्ड भी मौके पर मौजूद रहा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी करने की बात कही है।
छात्रों का आरोप है कि घटना में कुछ निष्कासित छात्र भी शामिल थे, जिनके खिलाफ पहले से अनुशासनात्मक कार्रवाई हो चुकी है। घायल छात्र के समर्थन में रुइया हॉस्टल के छात्र आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। फिलहाल कैंपस में हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
हिमाचल में बर्फ देखने उमड़े पर्याटक, सड़कों पर ट्रैफिक जाम, रोज 15 हजार वाहन पहुंच रहे
30 Jan, 2026 12:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शिमला। शिमला और मनाली पर्यटकों से पूरी तरह पैक है। बर्फबारी थमने के बाद जैसे-जैसे सड़कें बहाल हो रही है, पर्यटक अब शिमला के नालदेहरा, कुफरी, महासू पीक, मनाली के सोलंगनाला और चंबा के डलहौजी तक पहुंचना लगे हैं। हिमाचल प्रदेश में बर्फ के फोटो-वीडियो वायरल होते ही देशभर से पर्यटकों का पहाड़ों पर जमावड़ा उमड़ने लगा हैं। इन जगह पर टूरिस्ट बर्फ में खेलने, डांस, स्नोमैन बनाने, हॉर्स व यॉक राइडिंग, स्केटिंग, स्नो स्कूटर, पैराग्लाइडिंग और रील्स रिकॉर्ड कर अपनी यात्रा को यादगार बना रहे हैं। दिनभर टूरिस्ट बर्फ में मस्ती कर रहे हैं। इस बीकेंड तक सड़क बहाली के बाद नारकंडा और अटल टनल तक टूरिस्ट पहुंच सकेंगे।
बता दें कि शिमला और मनाली के होटलों में 70 से 80 फीसदी तक ऑक्यूपेंसी हो चुकी है। वीकेंड पर इसके शत-प्रतिशत होने की संभावना है। इसलिए, वीकेंड पर शिमला-मनाली आने वाले टूरिस्ट को एडवांस बुकिंग की सलाह दी जाती है। शिमला के होटेलियर अश्ननी सूद ने बताया कि शिमला में चार साल बाद बर्फबारी हुई है। इससे अगले 15-20 दिन अच्छा टूरिस्ट आने की उम्मीद है।
वहीं पुलिस के अनुसार- अकेले शिमला में रोजाना 12 हजार से 15 हजार टूरिस्ट व्हीकल पहुंच रहे हैं। इससे शिमला शहर के साथ साथ छराबड़ा, कुफरी और फागू के बीच भी ट्रैफिक जाम लग रहा है। एक घंटे के सफर में चार से पांच घंटे लग रहे हैं। इससे टूरिस्ट के साथ साथ लोकल भी परेशान है। मनाली में भी बीते एक सप्ताह से पतलीकूलह, 15 व 16 मील से मनाली तक ट्रैफिक जाम टूरिस्ट लग रहा है। मनाली में ट्रैफिक जाम की सबसे बड़ी वजह आसपास के पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाली सड़कें बंद होना भी है क्योंकि भारी हिमपात के कारण जीभी वैली, सोलंग नाला, अटल टनल, कोकसर, केलांग इत्यादि पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाली सड़कें बंद थी। मगर अब सड़कों से बर्फ हटाने का काम जारी है। इससे एक-दो दिन में टूरिस्ट इन सभी पर्यटन स्थलों पर पहुंचना शुरू होगा। तब जाकर मनाली में ट्रैफिक जाम से भी निजात मिलेगी।
समीर वानखेड़े को हाई कोर्ट से झटका
30 Jan, 2026 11:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। आर्यन खान ड्रग केस के जांच अधिकारी रहे समीर वानखेड़े को गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका लगा। अदालत ने आर्यन खान की वेब सीरीज द बैड्स ऑफ बॉलीवुड के खिलाफ दायर उनकी याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई करने का उसके पास अधिकार नहीं है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि समीर वानखेड़े चाहें तो उचित अदालत में दोबारा याचिका दायर कर सकते हैं। अंतरिम याचिका पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने दो अहम सवालों पर विचार किया। समीर वानखेड़े ने इस मुकदमे में 2 करोड़ रुपए का मुआवजा भी मांगा था। उनका कहना था कि वह इस राशि को टाटा मेमोरियल कैंसर हॉस्पिटल में कैंसर मरीजों के इलाज के लिए दान करना चाहते हैं।
भारत-यूरोपीय संघ के बाद अब अमेरिका के साथ बड़ी व्यापारिक डील की तैयारी
30 Jan, 2026 10:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बाद अब भारत के लिए वैश्विक आर्थिक मोर्चे से एक और बड़ी खुशखबरी आ सकती है। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर चल रही बातचीत अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच गई है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापारिक वार्ता में बहुत महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है और दोनों पक्ष इस समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। हालांकि, भारत सरकार ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सकारात्मक परिणामों को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं।
आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को संकेत दिया कि जहां एक ओर भारत ने यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम चरण तक पहुँचाया है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के साथ भी बातचीत की गति को निरंतर बनाए रखा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-यूरोपीय संघ समझौता अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों का विकल्प नहीं है, क्योंकि भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों के वार्ताकार एक ऐसे निष्कर्ष की ओर बढ़ रहे हैं जो दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभकारी सिद्ध हो।
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार वार्ता कुछ जटिल मुद्दों के कारण धीमी पड़ गई थी। अगस्त में अमेरिकी प्रशासन द्वारा कुछ भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक का भारी शुल्क लगाने के प्रस्ताव के बाद बातचीत में गतिरोध पैदा हो गया था। इसमें विशेष रूप से रूसी तेल की खरीद को लेकर लगाया गया 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क, आव्रजन नीति और टैरिफ से जुड़े अन्य मुद्दे शामिल थे। इन चुनौतियों के बावजूद, हालिया प्रगति दर्शाती है कि दोनों देश अपने आपसी मतभेदों को सुलझाने के प्रति गंभीर हैं। व्यापार जगत में यह धारणा भी बनी थी कि भारत ने यूरोपीय संघ के साथ डील संभवतः अमेरिका की कठोर शुल्क नीति के जवाब में की है, परंतु सूत्रों ने इस धारणा को खारिज कर दिया है। स्पष्ट किया गया है कि यूरोपीय संघ के साथ समझौता पूरी तरह से आपसी हितों और लाभ के आधार पर है। भारत का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और यूरोप दोनों ही क्षेत्रों में अपना निर्यात बढ़ाना है, ताकि देश के भीतर विनिर्माण को गति मिले और रोजगार के नए अवसर सृजित हो सकें।
आगामी सप्ताह कूटनीतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाला है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के अगले सप्ताह वाशिंगटन की यात्रा पर जाने की संभावना है, जहाँ वे महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़ी एक उच्च स्तरीय बैठक में भाग लेंगे। 4 फरवरी को होने वाली इस बैठक की मेजबानी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो करेंगे। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी पूर्व में संकेत दिए थे कि भारत को अमेरिका के नेतृत्व वाले आठ देशों के समूह पैक्स सिलिका में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जा सकता है। राजदूत के इस आश्वासन और विदेश मंत्री की संभावित यात्रा से यह उम्मीद और बलवती हो गई है कि टैरिफ और तेल आयात जैसे विवादित मुद्दों पर जमी बर्फ जल्द ही पिघल सकती है और एक ऐतिहासिक व्यापारिक समझौता धरातल पर उतर सकता है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने काशी में कसा तंज, कहा भाजपा की सरकार में न्याय की आशा नहीं
30 Jan, 2026 09:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाराणसी । शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने काशी पहुंचकर गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि पूरे देश में लोगों ने वीडियो में देखा कि बटुकों को उनकी चोटी पकडक़र उन्हें अपमानित किया जा रहा है। अपनी गलती को गलती न मानना और अपने अपराध को न स्वीकार करना ये उन पर निर्भर करता है। जो अपराध किया वो सबके सामने आ ही गया है। अपने लोगों ने तो संयम से 11 दिन प्रयागराज में रहकर उनको मौका दिया कि आपसे जो अपराध हुआ है चाहे तो आप सुधार सकते हैं, लेकिन उन्होंने नहीं सुधारा। इसके बाद काशी वापस लौट गए हैं। इस पार्टी की सरकार में न्याय की कोई आशा न करे यही संदेश मिला है।
यूजीसी के नए नियमों पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह नियम इसी लिए लाया गया है कि उनकी कमियां जो हैं उसकी चर्चा कोई न करे। सवाल ये है कि यूजीसी जैसा नियम जो सनातन धर्म के लिए बहुत बड़ा खतरा है। सनातन धर्म में जातियां हैं, जातियां इसलिए नहीं हैं कि एक दूसरे से लड़ें, ये इसलिए है कि सभी लोगों की आजीविका सुरक्षित रहे। ये पुराने लोगों की बनाई गई परंपरा है। अब यूजीसी के सहारे इन लोगों ने एक जाति को दूसरे जाति के सामने लाकर खड़ा कर दिया है। इससे आपस में लडक़र उनको मरना ही मरना है। पूरे सनातन धर्म को समाप्त करने के लिए एक मशीन ले आए हैं। यूजीसी के नियम हिंदू समाज के लिए घातक हैं। इसलिए हम इसका विरोध करते हैं।
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