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कोलकाता: बीएसएफ और आरपीएफ ने 30 लाख के सोने के साथ तस्कर पकड़ा
7 Nov, 2025 08:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता के पास, पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) और रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) ने एक तस्कर को 30 लाख रुपए मूल्य के सोने के साथ गिरफ्तार किया। 194 बटालियन के बीएसएफ जवानों को खुफिया सूचना मिली थी कि सोने की तस्करी की योजना बनाई जा रही है। इस जानकारी के आधार पर दोनों एजेंसियों की संयुक्त टीम ने बंकिम नगर रेलवे स्टेशन पर विशेष अभियान चलाया।
शाम करीब 3.10 बजे, खुफिया रिपोर्ट में बताए गए हुलिए से मिलता-जुलता एक भारतीय नागरिक स्टेशन पहुंचा। जैसे ही वह बाइक पार्किंग से प्लेटफॉर्म की ओर गया और लौट कर आया, जवानों ने उसे पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से 251.7 ग्राम सोना और दो स्मार्टफोन बरामद किए गए। सोने की कीमत लगभग 30,32,985 रुपए आंकी गई।
पुछताछ में आरोपी ने बताया कि उसे दोपहर में फोन आया था और उसे बताया गया कि स्टेशन पर एक पैकेट मिलेगा। उसने यह सोना दो स्थानीय सुनारों को देना था और बदले में कैश लेना था। आरोपी को आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को सौंप दिया गया है, जबकि उसके मोबाइल डेटा से रैकेट में शामिल अन्य लोगों का पता लगाया जा रहा है।
बीएसएफ अधिकारी ने जवानों की तत्परता और आरपीएफ के साथ सहयोग की सराहना की। उन्होंने बॉर्डर इलाके के लोगों से अपील की कि वे स्मगलिंग से जुड़ी जानकारी ‘सीमा साथी’ हेल्पलाइन 14419 या व्हाट्सएप नंबर 9903472227 पर साझा करें। भरोसेमंद सूचना देने वालों को उचित इनाम दिया जाएगा और उनकी पहचान गुप्त रखी जाएगी।
हमदाबाद विमान हादसा: SC ने पायलट को दोषी ठहराने से किया इंकार
7 Nov, 2025 06:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
SC on Ahmedabad Plane Crash: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अहमदाबाद विमान हादसा मामले में स्पष्ट किया कि पायलट को किसी भी तरह से दोषी नहीं ठहराया जा सकता। वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी कि विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की जांच स्वतंत्र नहीं है। इस पर न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि दुर्घटना के लिए किसी को अनुचित रूप से दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
जून 2025 में अहमदाबाद से लंदन जा रहे एयर इंडिया के विमान में हादसा हुआ था, जिसमें 260 लोग मारे गए थे। इसमें पायलट सुमीत सभरवाल भी शामिल थे। उनके पिता पुष्कर राज सभरवाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसमें उन्होंने स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा, “आपके दिवंगत बेटे को कोई भी दोषी नहीं ठहरा सकता। यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इस त्रासदी का बोझ आपको नहीं उठाना चाहिए।” कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए 10 नवंबर को मामले की अगली सुनवाई तय की।
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि AAIB की जांच अब तक 4 महीने से चल रही है और इसमें पारदर्शिता नहीं है। कोर्ट ने कहा कि जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाने के लिए वैधानिक प्रावधानों को चुनौती देना आवश्यक होगा। सुनवाई के दौरान विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स को भी खारिज कर दिया गया, जिनमें पायलट की गलती बताई गई थी।
83 करोड़ की ऑनलाइन धोखाधड़ी का भंडाफोड़, 12 गिरफ्तार
7 Nov, 2025 04:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नवी मुंबई। नवी मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन गेमिंग के ज़रिए पूरे देश में साइबर धोखाधड़ी करने वाले शातिर लोगों एक गैंग का भंडाफोड़ किया है। इस गैंग ने न सिर्फ़ महाराष्ट्र बल्कि कई राज्यों में भी सैकड़ों लोगों को धोखाधड़ी के जाल में फंसाकर उनसे 83.97 करोड़ रुपये की ठगी की थी। इस मामले में पुलिस ने 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके पास से कीमती सामान ज़ब्त किया है। क्राइम ब्रांच की जांच के मुताबिक, यह गैंग ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर पूरे देश में गैर-कानूनी सट्टेबाजी और साइबर धोखाधड़ी फैला रहा था। यह गैंग अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, वाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप के ज़रिए “गेम खेलो और दोगुना पैसा कमाओ”, “बस अपनी किस्मत आज़माओ और कमाओ” जैसे विज्ञापन देकर आम लोगों को लालच दे रहा था। लोग इस लालच में आकर ऐप डाउनलोड करके पैसे जमा कर देते थे। लेकिन उसके बाद, ऑनलाइन गेमिंग गेम बंद कर दिया जाता था और अकाउंट ब्लॉक कर दिए जाते थे। उसके बाद, अकाउंट से सारे पैसे निकाल लिए जाते थे। पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपियों ने इसके ज़रिए 886 अलग-अलग बैंक अकाउंट का इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर ट्रांज़ैक्शन किए। बताया गया है कि इस रैकेट के मुख्य मास्टरमाइंड इमरान उस्मानी मिन्हाज शेख (32) को पुलिस ने सीबीडी बेलापुर रेलवे स्टेशन इलाके से गिरफ्तार किया। इमरान लोगों से पासबुक, एटीएम कार्ड और मोबाइल सिम कार्ड लेकर धोखाधड़ी के लिए फर्जी बैंक अकाउंट खोलता था। फिर वह यह जानकारी अपने दूसरे साथियों को देता था, जो इन अकाउंट से ट्रांजैक्शन करके विदेशी अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करते थे।
* डोंबिवली और पुणे में भी छापे मारे गए
इमरान की गिरफ्तारी के बाद, पुलिस ने डोंबिवली और पुणे के पास पिंपरी-चिंचवड़ इलाकों में कई जगहों पर छापे मारे। इस कार्रवाई में 6 और लोगों को गिरफ्तार किया गया है और उनके कंप्यूटर और मोबाइल फोन से साइबर ट्रांजैक्शन के सबूत जब्त किए गए हैं। बाद में जांच के दौरान, 5 और साथियों की पहचान की गई और उन्हें भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपियों के पास से 52 मोबाइल फोन, 7 लैपटॉप, 99 डेबिट कार्ड, 64 पासबुक, 1 टाटा सफारी स्टॉर्म गाड़ी, जिसकी कीमत 18.05 लाख रुपये है, जब्त की है। इस मामले में सीबीडी बेलापुर पुलिस स्टेशन में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट (आईटी Act), महाराष्ट्र गैंबलिंग प्रिवेंशन एक्ट, ऑनलाइन गेमिंग प्रिवेंशन एक्ट 2025 के तहत केस दर्ज किया गया है। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सुनील शिंदे (क्राइम ब्रांच, नवी मुंबई) की देखरेख में इस मामले की जांच चल रही है। जांच अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि इमरान और उसके साथियों ने धोखाधड़ी का पैसा कहां इन्वेस्ट किया और क्या विदेशी अकाउंट्स से कोई लिंक हैं।
* साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करें- नवी मुंबई पुलिस
इस बीच नवी मुंबई पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान लिंक, ऑनलाइन गेमिंग ऐप या वाट्सएप इन्वेस्टमेंट ग्रुप में शामिल न हों। ऐसे प्लेटफॉर्म पर पैसे का लालच देने वाले ज़्यादातर लोग धोखाधड़ी करने वाले और गैर-कानूनी होते हैं। साइबर पुलिस एक पब्लिक अवेयरनेस कैंपेन चला रही है और नागरिकों से अपील है कि अगर उनके साथ कोई धोखाधड़ी हो तो वे तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।
बिहार में 5 प्रतिशत अतिरिक्त मतदान होते ही बदलती रहीं सरकारें, पहले चरण में 8 प्रतिशत हुआ ज्यादा मतदान
7 Nov, 2025 03:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के 18 ज़िलों की 121 सीटों पर उतरे 1314 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है। गुरुवार को पहले चरण में मतदाताओं का उत्साह ज़बरदस्त देखने को मिला। पहले फेज की 121 सीटों पर 64.69 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो पिछले चुनाव से करीब साढ़े आठ फीसदी मतदान ज्यादा हुआ है।
चुनाव आयोग के मुताबिक पहले फेज की 121 सीटों पर 64.69 फीसदी मतदान रहा जबकि 2020 के विधानसभा चुनाव में इन सीटों पर 56 फीसदी के करीब मतदान रहा। इस लिहाज़ से देखें तो वोटिंग पैटर्न कहता है कि पिछले चुनाव से करीब साढ़े आठ फ़ीसदी वोटिंग ज़्यादा हुई है। इस बार चुनाव में जिस तरह से मतदान बढ़ा है, उससे सियासी दलों की धड़कनें बढ़ गई हैं। बिहार की सियासत में इस बार के मतदान को अभूतपूर्व माना जा रहा है, क्योंकि प्रदेश के इतिहास में यह सर्वाधिक वोटिंग है। साल 2020 में पहले चरण में 56.1 फीसदी वोटिंग हुई, लेकिन उस समय पहले फेज में 71 सीटों पर चुनाव हुए थे जबकि इस बार 121 सीट पर चुनाव हुए हैं।
2020 में पहले फेज में 3.70 करोड़ कुल वोटर थे, जिसमें से 2.06 करोड़ ने वोट किया था। लेकिन अबकी बार पहले फेज में कुल 3.75 करोड़ वोटर हैं, जो पिछली बार से 5 लाख अधिक हैं। इस बार की पहले चरण में 64.69 फासदी वोटिंग हुई। अब सियासी दल इस बढ़े वोटिंग पैटर्न को अपने-अपने लिहाज से मुफीद बता रहे हैं। बिहार में इससे पहले 1951-52 से 2020 तक सबसे अधिक 2000 के विधानसभा चुनाव में 62.57 फीसदी वोट पड़े थे जबकि 1951-52 से 2024 तक हुए लोकसभा चुनाव में बिहार में सबसे अधिक 1998 में 64।60 फीसदी मतदान हुआ था, जो कि इस बार बिहार में पहले चरण की सीटों पर हुए वोटिंग ने इसे भी पछाड़ दिया।
वोटिंग फीसदी के घटने-बढ़ने का सीधा-सीधा असर चुनाव के नतीजों पर भी पड़ता है। भारत के चुनावी इतिहास में आमतौर पर माना जाता है कि जब वोटिंग ज़्यादा होती है, तो जनता बदलाव (एंटी इंकम्बेंसी) चाहती है। लेकिन ऐसा हर बार नहीं होता। चुनाव में देखा गया है कि कई बार अधिक मतदान का मतलब सरकार के प्रति समर्थन (प्रो इंकम्बेंसी) भी रहती है। मतलब साफ है कि वोटर्स की ये सक्रियता किस दिशा में जाएगी, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। एसआईआर के बाद पहली बार चुनाव हुए हैं। एसआईआर में तमाम वोट काटे गए हैं तो कुछ नए वोट जोड़े गए हैं। इस तरह फर्जी वोटर हटाए जाने की वजह से भी वोटिंग बढ़ने का कारण माना जा रहा है, लेकिन बिहार में जब-जब वोटिंग बढ़ी है तो सत्ता बदल जाती है।
बिहार में वोटिंग बढ़ने से बदली सरकार
बिहार में विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो 1951-52 से 2020 तक केवल तीन बार ही 60 फीसदी से अधिक वोटिंग हुई। 1990 में 62।04, 1995 में 61.79 और अब से पहले सबसे अधिक रिकॉर्ड 2020 में 62.57 वोट पड़े थे, लेकिन इस बार सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। अभी पहले चरण में 64.69 फ़ीसदी वोटिंग रही है। ऐसे ही अगले चरण में वोटिंग हुई तो बिहार के इतिहास में यह अपने आप में एक रिकॉर्ड होगा। बिहार में अभी तक सबसे कम 42.60 फ़ीसदी भी 1951-52 में ही वोट पड़े थे।
कैसे बदल जाती है सरकार
बिहार में सबसे पहले 1967 के चुनाव में वोटिंग में इजाफा हुआ तो सरकार बदली। 1962 में 44.5 फ़ीसदी वोटिंग के मुकाबले 1967 में 51.5 फीसदी मतदान रहा। इस तरह 7 फ़ीसदी वोटिंग ज़्यादा हुई थी और कांग्रेस के हाथों से सरकार निकल गई थी बिहार में पहली बार गैर-कांग्रेसी दलों ने मिलकर सरकार बनाई थी।1967 के बाद 1980 में भी यही पैटर्न दिखा। वर्ष 1980 में 57.3 फीसदी मतदान हुआ था जबकि 1977 के चुनाव में 50.5 फ़ीसदी वोटिंग रही। इस तरह 6.8 फ़ीसदी ज़्यादा मतदान हुआ, जिसका नतीजा रहा कि सरकार बदल गई। जनता पार्टी को हार झेलना पड़ा और कांग्रेस वापसी कर गई।1980 के बाद 1990 के विधानसभा चुनाव में मतदान में ज़बरदस्त इजाफा हुआ। 1990 में 62 फीसदी मतदान हुआ था जबकि उससे पहले 1985 में 56।3 फीसदी मतदान रहा। इस तरह 5.8 फीसदी ज़्यादा मतदान की बढ़ोतरी ने बिहार की सत्ता परिवर्तन कर दिया था।
कांग्रेस को सत्ता से बाहर होना पड़ा था और जनता दल ने सरकार बनाई थी। इसके बाद बिहार में सत्ता परिवर्तन नवंबर 2005 में हुआ, जब 16 फीसदी वोटिंग कम हुई थी। इस बार बिहार के पहले चरण के चुनाव में साढ़े आठ फीसदी वोटिंग ज़्यादा हुई है, जिसके नफा-नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
भरी अदालत में भड़क उठे सीजेआई बोले- अटॉर्नी जनरल को बता दीजिए….
7 Nov, 2025 02:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अटॉर्नी जनरल के लगातार अनुपस्थित रहने पर सीजेआई बीआर गवई भड़क गए। ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि लगातार तीसरी बार अटॉर्नी जनरल सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्य भाटी को शब्दों में निर्देश दिया कि वे अटॉर्नी जनरल को बता दें कि सोमवार को इस मामले की सुनवाई पूरी की जाएगी, ऐसे में वे अदालत में अपना पक्ष रखने के लिए मौजूद रहें।
सीजेआई गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि सोमवार 10 नवंबर 2025 को इस मामले को क्लोज कर दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट, 2021 की संवैधानिक वैधता को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार द्वारा एक बार फिर स्थगन की मांग किए जाने पर सीजेआई जस्टिस गवई ने कड़ा रुख अपनाया। सीजेआई ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लग रहा है कि केंद्र इस मामले की सुनवाई 23 नवंबर को मेरे रिटायर होने के बाद ही करवाना चाहती है। मामला विभिन्न प्रमुख ट्रिब्यूनलों में नियुक्ति और उनके कार्यकाल एवं प्रक्रियाओं से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था ट्रिब्यूनलों की स्वतंत्रता को प्रभावित करती है, क्योंकि नियुक्तियों में कार्यपालिका की भूमिका बहुत अधिक है। सीजेआई की बेंच ने एएसजी ऐश्वर्य भाटी से रूबरू होते हुए स्पष्ट शब्दों में पूछा कि अगर आप नहीं चाहतीं कि हम सुनवाई करें, तो स्पष्ट कह दें।
दरअसल, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई न करने का अनुरोध किया था। कोर्ट ने 7 नवंबर की तिथि पहले ही तय कर रखी थी। एएसजी ने कोर्ट को बताया कि अटॉर्नी जनरल आर। वेंकटरमणी अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में व्यस्त हैं। इस पर सीजेआई जसिटस गवई ने तीखे शब्दों में प्रतिक्रिया दी। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, सीजेआई जस्टिस गवई ने कहा, ‘अगर आप नहीं चाहते कि हम सुनें और फैसला दें, तो बस बता दें। ऐसा लगता है कि आप चाहते हैं कि यह मामला 24 नवंबर के बाद सुना जाए।’ सीजेआई जस्टिस गवई 23 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। सीजेआई की पीठ ने यह भी कहा कि अदालत ने एजी को तीन बार समय दिया, लेकिन हर बार यही बताया गया कि वे व्यस्त हैं। एएसजी ऐश्वर्य भाटी ने बताया कि एजी व्यक्तिगत रूप से यह मामला देख रहे हैं, लेकिन सीजेआई ने इस पर भी आपत्ति जताई और कहा कि तीन बार स्थगन के बावजूद एजी कोर्ट में पेश नहीं हुए हैं। सीजेआई जस्टिस गवई ने 2 नवंबर की आधी रात को केंद्र द्वारा दाखिल उस अर्जी का भी उल्लेख किया जिसमें इस मामले को संविधान पीठ के पास भेजने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, ‘पहले आप स्थगन मांगते रहते हैं और फिर रात में अर्जी देते हैं कि मामला संविधान पीठ को भेजा जाए। यह अदालत के साथ न्यायपूर्ण रवैया नहीं है।
पुणे के जमीन घोटाले से हिली महाराष्ट्र की राजनीति, पार्थ पवार पर बढ़ा दबाव
7 Nov, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाराष्ट्र के पुणे का कथित जमीन घोटाला अब तूल पकड़ता जा रहा है. विपक्ष इस मामले को लेकर सरकार पर सवाल खड़े कर रही है, तो वहीं दूसरी तरफ पुलिस ने इस मामले में अब केस दर्ज कर लिया है. पुलिस ने ये केस अजित पवार के बेटे पार्थ पवार की कंपनी के डायरेक्टर और उनके रिश्तेदार दिग्विजय पाटिल के साथ- साथ 2 सरकारी अधिकारियों पर किया है. पूरा मामला स्टाम्प ड्यूटी की चोरी और हेराफेरी से जुड़ा हुआ है.
इस पूरे मामले को लेकर विपक्ष पिछले लंबे समय से कार्रवाई की मांग कर रही है. इसके साथ ही एसआईटी जांच की भी मांग की गई थी. यही वजह है कि ये मामला दर्ज किया गया है.
तीन लोगों पर दर्ज किया गया केस
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार के जमीन घोटाले के मामले में पुणे पुलिस FIR दर्ज की गई है. इसमें तीन लोगों की खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. जिनमें शीतल तेजवानी (पार्थ पवार की पॉवर ऑफ अटॉर्नी इसके पास है), दिग्विजय पाटिल (Amadea Enterprises का दूसरा पार्टनर..), रविन्द्र तारु, रजिस्टार शामिल है.
21 करोड़ की स्टाम्प ड्यूटी चोरी
पार्थ पवार पर आरोप है कि उनकी कंपनी Amadea Enterprises ने पुणे में मंडावा इलाके ने सरकारी जमीन जो 1800 करोड़ की है उसको सिर्फ 300 करोड़ में खरीदा है. Amadea Enterprises कम्पनी में दो पार्टनर हैं, जिसमें एक पार्थ पवार है. आरोप है कि 21 करोड़ स्टाम्प ड्यूटी पर सिर्फ 500 के स्टाम्प यूज कर पूरा काम किया गया है. महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने इस पूरे मामले में जांच के आदेश भी दिए हैं.
सीएम ने दिए जांच के आदेश
इस पूरे मामले को लेकर विपक्ष सरकार पर सवाल खड़े कर रहा है. यही वजह है कि बीते दिन CM देवेंद्र फडणवीस ने जांच के आदेश दिए थे. अगर किसी भी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है, तो उस पर कठोर कार्रवाई की जाएगी. इस मामले में पर तुरंत एक्शन लेते हुए सीएम ने तहसीलदार सूर्यकांत येवले और उपनिबंधक रविंद्र तारु को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया था.
औरंगाबाद में गूंजा मोदी का संदेश – “बिहार ने फिर किया विकास के पक्ष में मतदान”
7 Nov, 2025 01:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को बिहार के औरंगाबाद में चुनावी जनसभा को संबोधित किया. राज्य में पहले चरण की वोटिंग के बाद पीएम मोदी की ये पहली रैली थी. उन्होंने बंपर वोटिंग के बाद कहा कि बिहार में एक बार फिर एनडीए की सरकार आ रही है. फिर से सुशासन की सरकार आ रही है. 6 नवंबर यानी गुरुवार को हुई पहले चरण में करीब 64.46 प्रतिशत मतदान हुआ था.
पीएम ने कहा, बिहार के नौजवानों ने भी आरजेडी के झूठ के पिटारे को खारिज कर दिया है. बिहार का मतदाता नरेंद्र-नीतिश के ट्रैक रिकॉर्ड पर भरोसा कर रहा है. पहले चरण के मतदान से यह तय है कि फिर एक बार एनडीए सरकार. पीएम ने कहा, हमारी डबल इंजन की सरकार ने बिहार के विकास के लिए 3 गुना ज्यादा पैसे दिए. बिहार में आज हर इलाके में सड़कें, पुल, रेलवे के ट्रे, अस्पताल और कॉलेज बन रहे हैं. एनडीए के पास लोगों की जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग योजना है.
राम मंदिर, ऑपरेशन सिंदूर का किया जिक्र
पीएम मोदी ने कहा, मोदी ने कहा था, राम मंदिर बनेगा और डंके की चोट पर राम मंदिर बन गया. मोदी ने वादा किया था, अनुच्छेद 370 की दीवार गिरेगी और फिर अनुच्छेद 370 हट गया. मोदी ने बिहार की इसी धरती पर कहा था कि पहलगाम हमले का बदला लिया जाएगा और फिर देश ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को तबाह होते हुए देखा.
पीएम ने आगे कहा, मैंने वन रैंक, वन पेंशन का वादा हमारे देश की रक्षा करने वाले वीर जवानों से किया था. आज, 7 नवंबर को वन रैंक, वन पेंशन लागू हुए 11 साल पूरे हो रहे हैं. हमारे सैनिक परिवार पिछले 4 दशकों से वन रैंक, वन पेंशन की मांग कर रहे थे, लेकिन कांग्रेस ने हर बार उनसे झूठ बोला. मैंने अपने सैनिक भाइयों और बहनों को वन रैंक, वन पेंशन लागू करने की गारंटी दी थी, और ये गारंटी पूरी भी की.
पीएम ने कहा, इन 11 वर्षों में, हमारे रिटायर्ड फौजी भाई-बहनों और उनके परिवारों को एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि दी जा चुकी है.
बिहार माओवादी आतंक से हो रहा मुक्त
पीएम ने आगे कहा, जब आपने दिल्ली में मोदी को बैठाया, तब मैंने तय किया कि नक्सलवाद और माओवादी आतंक की कमर तोड़ कर रहूंगा. हमने नक्सलवाद, माओवादी आतंक के खिलाफ कार्रवाई की. आज बिहार, माओवादी आतंक के डर से मुक्त हो रहा है. माओवादी आतंक अब समाप्त होने की कगार पर है.
RJD-कांग्रेस पर साधा निशाना
पीएम ने आरजेडी और कांग्रेस पर इस दौरान जमकर निशाना साधा. पीएम ने कहा, जंगलराज वालों के पास वो सब कुछ है, जो नौकरी और निवेश, दोनों के लिए खतरा है. ये लोग अभी से बच्चों को रंगदार बनाने की बातें कर रहे हैं. ये खुली घोषणा कर रहे हैं, “भैया की सरकार” आएगी तो कट्टा, दोनाली, फिरौती… यही सब चलेगा. इसलिए इन लोगों से सतर्क रहना है, बिहार को कट्टा सरकार नहीं चाहिए.
PM ने किसानों का किया जिक्र
पीएम मोदी ने इस मौके पर किसानों का भी जिक्र किया. पीएम ने कहा, कांग्रेस ने छोटे किसानों को कभी पूछा तक नहीं. ये मोदी हैं, जो किसानों की सच्ची चिंता करते हैं. हमारी सरकार किसानों को सालाना 6,000 रुपये की सहायता राशि देती है. अब जब बिहार में फिर से एनडीए सरकार बनेगी, तो किसानों को 3 हजार रुपये अतिरिक्त दिए जाएंगे यानी कुल 9 हजार रुपये सालाना की सहायता.
पीएम ने आगे कहा, कांग्रेस और आरजेडी वाले सत्ता के लिए किसी को भी धोखा दे सकते हैं. औरंगाबाद इसका सबसे बड़ा गवाह है. यहां जो कुछ हुआ, उसे पूरा बिहार देख चुका है. कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष का आरजेडी ने अपमान किया. आरजेडी ने कांग्रेस को वही सीटें दीं, जिन्हें वो पिछले 3540 वर्षों से जीत नहीं पाई है. आरजेडी ने कांग्रेस के कनपटी पर कट्टा रखकर मुख्यमंत्री की उम्मीदवारी छीन ली. जो लोग अपने साथियों को धोखा दे सकते हैं, क्या वो बिहार की जनता के सगे हो सकते हैं?
JNU छात्रसंघ चुनाव 2025: चारों पदों पर लेफ्ट की जीत, अध्यक्ष बनीं बनारस की अदिति मिश्रा
7 Nov, 2025 12:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में हुए छात्रसंघ चुनाव 2025 के नतीजे घोषित हो गए हैं। इस बार चारों पदों पर लेफ्ट यूनिटी ने शानदार जीत दर्ज की है, जिससे एक बार फिर जेएनयू परिसर में वामदलों की मजबूत पकड़ दिखी है। अध्यक्ष पद पर उत्तर प्रदेश के वाराणसी की अदिति मिश्रा ने जीत हासिल की है। अदिति वर्तमान में लैंगिक हिंसा विषय पर पीएचडी कर रही हैं।
अदिति मिश्रा कौन हैं?
अदिति वाराणसी की रहने वाली हैं और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने लेफ्ट यूनिटी पैनल (AISA, SFI और DSF) के संयुक्त उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। अदिति को कुल 1,937 वोट मिले, जिससे उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को हराकर जीत दर्ज की।
BHU से ग्रेजुएशन करने के बाद JNU में शोध
अदिति ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से अर्थशास्त्र में स्नातक किया है। फिलहाल वे JNU के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज़ के सेंटर फॉर कंपेरेटिव पॉलिटिक्स एंड पॉलिटिकल थ्योरी में पीएचडी कर रही हैं। राजनीति में उनकी सक्रियता और युवाओं में लोकप्रियता को देखते हुए लेफ्ट यूनिटी ने उन्हें अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया था।
छात्र आंदोलनों और महिला अधिकारों से जुड़ीं रही हैं सक्रिय
अदिति लंबे समय से छात्र आंदोलनों से जुड़ी रही हैं। उन्होंने 2017 में बीएचयू में महिला हॉस्टल कर्फ्यू टाइमिंग के खिलाफ आंदोलन किया था और 2019 में विश्वविद्यालयों में फीस वृद्धि का विरोध करते हुए भी अग्रणी भूमिका निभाई थी।
पूर्व में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की सदस्य रहीं अदिति अब JNU में लैंगिक हिंसा और महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। उनकी जीत को छात्र राजनीति में महिला नेतृत्व के उभरते प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: सड़कों से हटाए जाएं आवारा पशु, बने गश्ती दल
7 Nov, 2025 12:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
SC on Stray Animals on Roads: सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने शुक्रवार को सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और नगर निकायों को निर्देश दिया कि वे राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों और अन्य सड़कों से आवारा पशुओं को तुरंत हटाने की कार्रवाई करें।
कोर्ट ने कहा कि सड़क सुरक्षा और लोगों की जान की रक्षा के लिए यह कदम बेहद जरूरी है। आदेश में कहा गया कि हर राज्य और नगर निकाय एक राजमार्ग गश्ती दल का गठन करें, जो सड़कों पर भटक रहे आवारा पशुओं को पकड़कर सुरक्षित आश्रय गृहों में रखे। इन आश्रय गृहों में पशुओं की उचित देखभाल और भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला हाल के दिनों में कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए लिया है। अदालत ने कहा कि यह न केवल सार्वजनिक सुरक्षा का सवाल है, बल्कि सड़क हादसों और संक्रमण के खतरे से भी जुड़ा मुद्दा है।
इसके साथ ही, कोर्ट ने आदेश दिया कि स्कूलों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस स्टैंड, डिपो और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थलों में आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। इन स्थानों पर बाड़ या सुरक्षा व्यवस्था लगाई जाए ताकि आम जनता सुरक्षित रह सके।
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश से उम्मीद की जा रही है कि देशभर में सड़क सुरक्षा और पशु कल्याण दोनों में सुधार देखने को मिलेगा।
अमरकंटक के जंगलों में फैला साल बोरर कीट, दस हजार से अधिक साल के पेड़ क्षतिग्रस्त
7 Nov, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अनूपपुर। अमरकंटक (Amarkantak) के जंगलों (Forests) में साल के पेड़ गंभीर साल बोरर कीट (Borer Insect) से ग्रसित पाए गए हैं। साल बोरर कीट एक विनाशकारी कीट है, जो मुख्य रूप से साल के पेड़ों (Trees) को नुकसान पहुंचाता है, उन्हें खोखला कर देता है। यह कीट साल के पेड़ों के लिए सबसे खतरनाक कीटों में से एक है और यह खड़े पेड़ और ताजी कटी हुई लकड़ी दोनों को प्रभावित करता है। बीते कई महीनों से अमरकंटक के जंगलों में साल बोरर कीड़े का प्रकोप फैला हुआ है। जिसके कारण अमरकंटक के जंगल में स्थित 10 हजार से अधिक साल के पेड़ इससे क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।
अमरकंटक के जंगल में वर्तमान समय में 20 लाख 86 हजार 416 साल के वृक्ष स्थित हैं। साल बोरर कीट से क्षतिग्रस्त पाए गए। पेड़ का सर्वे कार्य भी वन विभाग में पूर्ण कर लिया है। इसमें अभी तक की गणना में 10563 साल के पेड़ में साल बोरर के कीट लगे होने की जानकारी सामने आई है। अमरकंटक के जंगल में स्थित लगभग 6.5 प्रतिशत पेड़ इससे प्रभावित हैं।
वन परिक्षेत्र अमरकंटक कार्यालय ने साल बोरर कीट से ग्रसित वृक्ष की गणना करते हुए इसकी जानकारी वरिष्ठ कार्यालय को भेजी गई है। इसके साथ ही इसके रोकथाम के लिए क्या किया जाए इस पर क्या इंतजाम किए जाए इसके लिए मार्ग दर्शन मांगा गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अमरकंटक में लाखों की संख्या में साल के पेड़ स्थित है यदि वन विभाग ने जल्द ही इस पर कोई कार्रवाई नहीं की तो अन्य वृक्ष में भी इसके फैलने का खतरा बना हुआ है।
पादरी बनकर छिप रहे रेप के आरोपी को 24 साल बाद पकड़ा
7 Nov, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई। कानून (Law) के हाथ लंबे हैं… ये बात तमिलनाडु के चेन्नई (Chennai) से गिरफ्तार (Arrest) हुए रेप (Rape) के आरोपी के मामले में साबित हो गई। दरअसल, केरल के तिरुवनंतपुरम में 2001 में एक नाबालिग लड़की (Minor Girl) का यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) हुआ था। पुलिस ने चेन्नई में आरोपी को लगभग 24 साल फरार रहने के बाद गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान तिरुवनंतपुरम के नीरामनकारा के रहने वाले मुथुकुमार के रूप में हुई। पुलिस के मुताबिक, नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न के मामले में वंचियूर पुलिस थाने में केस दर्ज किया था।
आरोप के मुताबिक, ट्यूशन पढ़ाने वाले मुथुकुमार ने पीड़िता को स्कूल के वक्त उससे मिलने के लिए कहा था। स्कूल में लंच के दौरान लड़की उसके ट्यूशन सेंटर गई थी, जहां आरोपी ने उसका यौन उत्पीड़न किया था। स्कूल टीचर ने जब नाबालिग लड़की को क्लास में नहीं देखा तो उन्होंने उसके माता-पिता को खबर की, जिन्होंने बाद में उसे मुथुकुमार के घर पर पाया। हालांकि, उस समय मुथुकुमार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया गया था लेकिन बाद में उसे बेल मिल गई थी और वह फरार हो गया था।
पुलिस ने आगे बताया कि आरोपी मुथुकुमार कई राज्यों में छिपा रहा था। सावधानी बरतते हुए उसने कभी मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं किया। जानकारी के मुताबिक, वह तिरुवनंतपुरम में अपने परिवार को कैश जमा मशीनों के जरिए उनके बैंक खातों में पैसे भेजता था। पुलिस ने हाल ही में लंबित मुकदमों की समीक्षा करते हुए मुथुकुमार का पता लगाने की नए सिरे से कोशिश की।
पुलिस अधिकारी के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने आरोपी के रिश्तेदारों और दोस्तों के मोबाइल नंबरों और बैंक खातों पर नजर रखी। उन्होंने करीब 150 फोन नंबरों और 30 बैंक खातों की निगरानी की। इसी दौरान, पुलिस चेन्नई से मिले एक संदिग्ध फोन नंबर से आरोपी तक पहुंच गई। पुलिस ने बताया कि मुथुकुमार ने ईसाई धर्म अपना लिया था। उसने नाम बदलकर सैम कर लिया था और अयनावरम में पादरी के रूप में काम कर रहा था। उसने चेन्नई में 2 बार शादी की। वह पब्लिक टेलीफोन बूथों और अन्य लोगों के मोबाइल फोन इस्तेमाल करके अपने रिश्तेदारों से संपर्क बनाता था।
बढ़ता प्रदूषण और दमघोंटू हवा… PM मोदी के दूत ने SC से लगाई नेशनल इमरजेंसी घोषित करने की गुहार
7 Nov, 2025 09:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi) समेत देश के कई हिस्सों और शहरों में बढ़ते प्रदूषण (Increasing Pollution Cities) और दमघोंटू हवा (Suffocating Air) के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है और वायु प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने की मांग की गई है। इतना ही नहीं याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी में राष्ट्रीय स्तर पर “सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल” (National Health Emergency) लागू करने की भी मांग की है। ताकि ग्रामीण से लेकर शहरी स्तर तक लोगों को प्रदूषण के गंभीर परिणामों से बचाया जा सके।
यह याचिका ल्यूक क्रिस्टोफर कॉउटिन्हो ने दायर की है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के फिट इंडिया मूवमेंट के वेलनेस चैंपियन यानी दूत रहे हैं। याचिका में उन्होंने तर्क दिया है कि एक व्यापक नीतिगत ढाँचे के बावजूद, ग्रामीण और शहरी भारत के बड़े हिस्से में वायु की गुणवत्ता लगातार खराब बनी हुई है और कई मामलों में यह बदतर स्तर को भी पार कर गई है।
संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला
एक रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार का हवाला देते हुए, कोर्ट से अधिकारियों को वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के ठोस उपाय करने का निर्देश देने की माँग की है। याचिका में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु आदि प्रमुख भारतीय शहरों में PM₂.₅ और PM₁₀ जैसे प्रदूषकों का वार्षिक औसत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा अधिसूचित राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS), 2009 के तहत निर्धारित सीमा से लगातार अधिक बना हुआ है।
मानकों का घोर उल्लंघन
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में इस बात पर जोर दिया है कि भारतीय मानक पहले से ही एक उच्च सीमा निर्धारित करते हैं, क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2021 वायु गुणवत्ता दिशानिर्देश PM₂.₅ के लिए 5 μg/m³ और PM₁₀ के लिए 15 μg/m³ की वार्षिक औसत सीमा निर्धारित करते हैं। उन्होंने कोर्ट को बताया है कि दिल्ली में PM₂.₅ का वास्तविक वार्षिक औसत स्तर लगभग 105 μg/m³ दर्ज किया गया है, जबकि कोलकाता में लगभग 33 μg/m³ और लखनऊ में लगभग 90 μg/m³ दर्ज किया गया है, जो भारतीय मानकों का उल्लंघन है।
इस समस्या से निपटने में अधिकारियों की विफलता को उजागर करते हुए याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि 1.4 अरब से ज़्यादा नागरिक हर दिन जहरीली हवा में साँस लेने को मजबूर हैं। उन्होंने आगे कहा कि वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रमों से ग्रामीण क्षेत्रों का बहिष्करण एक बुनियादी ढाँचागत कमज़ोरी को दर्शाता है।
कौन हैं क्रिस्टोफर?
ल्यूक क्रिस्टोफर कॉउटिन्हो एक भारतीय जीवनशैली गुरु और एकीकृत एवं जीवनशैली चिकित्सा के क्षेत्र में थिंकर हैं, जो स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करते रहे हैं। वह उत्तम स्वास्थ्य के लिए पोषण, व्यायाम, नींद, इमोशनल डिटॉक्स और अध्यात्म जैसे पांच स्तंभों पर जोर देते रहे हैं। वे यू केयर वेलनेस प्रोग्राम के संस्थापक हैं और स्वास्थ्य पर बेस्टसेलिंग पुस्तकें लिखने के लिए जाने जाते हैं। वह वायु प्रदूषण जैसे सामाजिक मुद्दों के समाधान के लिए भी सक्रिय रहे हैं।
उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को बड़ी राहत, गुजरात हाई कोर्ट ने 6 माह की अंतरिम जमानत दी
7 Nov, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डेस्क। गुजरात हाई कोर्ट (Gujarat High Court) ने रेप (Rape) के दोषी आसाराम (Asaram) को छह महीने की अंतरिम जमानत (Interim Bail) दे दी है। यह फैसला उसकी चिकित्सकीय स्थिति और उपचार के अधिकार को देखते हुए सुनाया गया है। 86 वर्षीय आसाराम हृदय से संबंधित बीमारी से पीड़ित है।
आसाराम पक्ष ने दलीलें दी कि जोधपुर कोर्ट ने आसाराम को 6 महीने के लिए जमानत दी है। वे हृदय से संबंधित बीमारी से पीड़ित हैं। आसाराम की उम्र 86 वर्ष है, और उन्हें उपचार का अधिकार है। यदि 6 महीनों में अपील की सुनवाई आगे नहीं बढ़ती, तो वे फिर से जमानत के लिए आवेदन कर सकेंगे।
कोर्ट का कहना है कि आसाराम की चिकित्सकीय स्थिति को देखते हुए जोधपुर हाई कोर्ट ने उसे जमानत दी थी, इसलिए गुजरात हाई कोर्ट अलग रुख नहीं अपना सकता। यदि राजस्थान सरकार इस जमानत को चुनौती देती है, तो गुजरात सरकार भी ऐसा कर सकेगी। सरकार की ओर से कहा गया कि अगर जोधपुर जेल में पर्याप्त चिकित्सकीय सुविधाएं नहीं हों, तो उसे साबरमती जेल में स्थानांतरित किया जा सकता है।
SI की निर्मम हत्या: घर के सामने ईंटों से कुचला गए हुड़दंगी, हरियाणा में हत्याकांड से हड़कंप मचा
7 Nov, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । हरियाणा(Haryana) के हिसार(Hisar) में एक सनसनीखेज वारदात(sensational incident) सामने आई है। यहां हुड़दंग का विरोध करने पर हरियाणा पुलिस(Haryana Police) के एक सब इंस्पेक्टर रमेश(Sub Inspector Ramesh) की ईंट व डंडों से पीट-पीटकर हत्या(lynching) कर दी। गुरुवार रात 12 बजे ये वारदात हुई। मृतक की पहचान 57 साल के रमेश कुमार के रूप में हुई है। लंबे समय से पुलिस विभाग में तैनात थे और अगले साल जनवरी में उन्हें रिटायर होना था। वारदात की सूचना पा कर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए हिसार के सिविल अस्पताल में भिजवाया गया है।
रात को गली में युवक कर रहे थे गाली गलौज
सब इंस्पेक्टर रमेश कुमार एडीजीपी ऑफिस में 10 साल से तैनात थे। वह ढाणी श्यामलाल की गली नंबर-3 में परिवार के साथ रहते थे। गुरुवार रात 10:30 बजे कुछ युवक गली में हुड़दंग और गाली गलौज कर रहे थे। शोर शराबा होने पर सब इंस्पेक्टर रमेश घर से बाहर निकले और उन्होंने युवकों को हुड़दंग करने से रोका। उस समय तो युवक चल गए लेकिन एक घण्टे बाद कार व दोपहिया वाहनों पर आए।
उन्होंने रमेश के घर के सामने गाली गलौज करना शुरू कर दिया। रमेश ने उन्हें रोका तो उन्होंने डंडों व ईंटों से हमला कर दिया। रमेश घायल होकर गिर गए। चीख पुकार सुनकर परिवार के लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे और हमलावरों का पीछा किया, लेकिन वे भागने में कामयाब हो गए।
आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस दे रही दबिश
नई सब्जी मंडी चौकी इंचार्ज राजबाला ने कहा कि परिजनों के बयान पर कार्रवाई की जाएगी। आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है। पुलिस की अलग-अलग टीमें दबिश दे रही हैं। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जायेगा। वहीं, इस वारदात से हरियाणा में कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस अफसर की सरेआम हत्या हो जाती है तो आम जनता की सुरक्षा कैसे होगी? हरियाणा के नए डीजीपी ओपी सिंह ने कार्यभार संभालने के बाद कई बार बयान दिया है कि हरियाणा में बदमाशों की खैर नहीं है, लेकिन अब उनके अफसर तक सुरक्षित नहीं हैं।
NIA-ATS की संयुक्त कार्रवाई: तहरीक-ए-तालिबान से जुड़े ओसामा को पकड़ा
6 Nov, 2025 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नेशनल इंवेस्टिेगेशन एजेंसी (NIA) के इनपुट पर एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने राजस्थान मौलवी ओसामा उमर को गिरफ्तार किया है. एटीएस का दावा है कि ओसामा प्रतिबंधित अफगानिस्तान के आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़ा है. आरोपी पिछले करीब 4 साल से आतंकवादी संगठन से जुड़ा था. ATS ने आरोपी को जयपुर से पकड़ा है. दावा किया जा रहा है कि आरोपी जिहाद के लिए चार लोगों का ब्रेन वॉश करके उनको कट्टर बना रहा था.
एटीएस की गिरफ्त में आए सांचौर के मौलवी ओसामा उमर का संबंध अफगानिस्तान के आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से था. ओसामा 4 साल से संगठन के टॉप कमांडर के संपर्क में था. ATS ने 4 दिन पूछताछ के बाद मामला दर्ज कर मौलवी को गिरफ्तार कर लिया है. पकड़े गए चार अन्य संदिग्धों को भी ओसामा आतंकी संगठन से जुड़ने के लिए दबाव बना रहा था.
टीटीपी के टॉप कमांडरों से करता था संपर्क
ATS की पूछताछ में सामने आया कि ओसामा इंटरनेट कॉलिंग से आंतकी टॉप कमांडरों से संपर्क करता था. मौलवी देश के बाहर भागने की फिराक में था और दुबई के रास्ते वो अफगानिस्तान जाने की प्लानिंग कर रहा था. वहीं, ATS आईजी विकास कुमार ने बताया कि पिछले दिनों राजस्थान एटीएस ने 4 जिलों में छापेमारी कर 5 लोगों को पकड़ा था. पकड़ा गया ओसामा उमर, मसूद पंडीपार बाड़मेर का, मोहम्मद अयूब पीपाड़ जोधपुर का, मोहम्मद जुनेद बागोर मोहल्ला करौली का और बसीर रामसर बाड़मेर का रहने वाला है.
क्या होता है कट्टरवाद?
यदि कोई व्यक्ति कट्टरवाद की तरफ बढ़ता है तो उसे दूर करने की प्रक्रिया को डीरेडिकलाइन कहा जाता है. एटीएस ने एक टीम बना रखी है, जिसमें एटीएस के साथ-साथ उदारपंची लोग, गर्म की व्याख्या करने वाले रामुचित लोग और समाज के कुछ गणमान्य शामिल होते हैं. ये लोग रेडिकलाइज (कट्टरवाद) व्यक्ति की काउंसलिंग करते हैं. उसे कट्टरवाद से दूर करने का प्रयास करते हैं और सही दिशा की ओर ले जाते हैं और एटीएस की फील्ड की टीम लगातार निगरानी रखती हैं और समय-समय पर फिर यहां कमेटी के सामने लाकर उसकी विचारधारा को परखती है. ऐसे व्यक्ति का रिकॉर्ड रखा जाता है.
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