देश
दिल्ली ब्लास्ट के बाद बंद लाल किला मेट्रो स्टेशन अब फिर से खोल दिया गया
16 Nov, 2025 09:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । दिल्ली ब्लास्ट के बाद बंद लाल किला मेट्रो स्टेशन (Red Fort Metro station which was closed after the Delhi Blast) अब फिर से खोल दिया गया (Has now Reopened) । दिल्ली में लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास कार में हुए धमाके के बाद सुरक्षा के लिहाज से दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने लाल किला मेट्रो स्टेशन को अस्थायी तौर पर बंद कर दिया था । डीएमआरसी की ओर से शनिवार को इस संबंध में जानकारी दी गई।
डीएमआरसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “सेवा अपडेट: लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 2 और 3 अब यात्रियों के लिए खुल गए हैं।” इससे पहले, डीएमआरसी ने गुरुवार को एक्स पोस्ट में बताया था कि लाल किला मेट्रो स्टेशन अगली सूचना तक बंद रहेगा। डीएमआरसी ने पोस्ट में लिखा था, “सेवा अपडेट, सुरक्षा कारणों से लाल किला मेट्रो स्टेशन अगली सूचना तक बंद रहेगा। अन्य सभी स्टेशन सामान्य रूप से चालू हैं।”
गौरतलब है कि बीते सोमवार वॉयलेट लाइन पर स्थित लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-1 के बाहर एक कार में तेज धमाका हुआ था। इस हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई थी और एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए थे। यह धमाका इतना जोरदार था कि मेट्रो स्टेशन के एंट्री गेट पर लगे शीशे चकनाचूर हो गए। घटना के तुरंत बाद आसपास स्थित मेट्रो स्टेशनों पर भी एहतियातन कुछ समय के लिए एंट्री रोक दी गई थी।
जानकारी के अनुसार, ब्लास्ट की घटना के बाद दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके में कड़ी निगरानी बढ़ा दी है। सभी मुख्य मार्गों, बाजारों और मेट्रो कॉरिडोर को सीसीटीवी कैमरों के जरिए रियल टाइम मॉनिटर किया जा रहा है। कंट्रोल रूम को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। साथ ही सोशल मीडिया पर भी सुरक्षा एजेंसियां करीबी नजर रख रही हैं। पुलिस ने चेतावनी जारी की है कि किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रामक सूचना फैलाने की कोशिश को गंभीरता से लिया जाएगा और ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दिल्ली ब्लास्ट मामले से जुड़े तीन डॉक्टरों का लाइसेंस तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया एनएमसी ने
16 Nov, 2025 08:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने दिल्ली ब्लास्ट मामले से जुड़े (Linked to Delhi Blasts Case) तीन डॉक्टरों का लाइसेंस तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया (Canceled Licenses of Three Doctors with immediate Effect) । यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर मेडिकल काउंसिल की सिफारिश और जांच एजेंसियों द्वारा जुटाए गए ठोस साक्ष्यों के आधार पर की गई है।
एनएमसी की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि नौगाम, श्रीनगर पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर संख्या 162/2025 में कई संदिग्धों की भूमिका सामने आई थी। इसी मामले की जांच में तीन डॉक्टरों की संलिप्तता भी उजागर हुई। आदेश के अनुसार डॉक्टर मुजफ्फर अहमद (पंजीकरण संख्या 14680/2017), डॉक्टर अदील अहमद राठर (पंजीकरण संख्या 15892/2019) और डॉक्टर मुजमिल शकील (पंजीकरण संख्या 15130/2018), जो जम्मू-कश्मीर मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत थे, उन्हें जांच एजेंसियों द्वारा एकत्रित प्रमाणों के आधार पर इस गंभीर केस में शामिल पाया गया।
एनएमसी ने कहा कि यह आचरण चिकित्सकीय पेशे की नैतिक मान्यताओं, ईमानदारी और जनता के भरोसे के पूरी तरह प्रतिकूल है। भारतीय चिकित्सा परिषद विनियम 2002 के अध्याय 1 के क्लॉज 1.1.1 और 1.1.2 के तहत ऐसे कृत्य को गंभीर उल्लंघन माना जाता है। जम्मू-कश्मीर मेडिकल काउंसिल ने अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए इन तीनों डॉक्टरों का पंजीकरण रद्द करने का आदेश जारी कर दिया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि तीनों डॉक्टरों के नाम तुरंत प्रभाव से मेडिकल प्रैक्टिशनर रजिस्टर से हटा दिए जाएं। इसके बाद वे चिकित्सा कार्य, किसी भी चिकित्सा संस्थान में नियुक्ति या मेडिकल पेशे से जुड़े किसी भी दायित्व का निर्वहन नहीं कर सकेंगे, जब तक कि आगे कोई नया आदेश जारी न हो।
बता दें कि लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-1 के पास खड़ी एक कार में 10 नवंबर को धमाका हुआ था। इस हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों घायल हो गए। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मामले की जांच के लिए 10 अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित की है। इसमें एक आईजी, दो डीआईजी, तीन एसपी और बाकी डीएसपी स्तर के अधिकारी शामिल हैं। जांच एजेंसियां सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी नजर रख रही हैं और दिल्ली भर के कई स्थानों से मोबाइल फोन डंप डेटा एकत्र कर रही हैं। साथ ही, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और मुंबई में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है और भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों और धार्मिक स्थलों के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
लाल किले के पास विस्फोट के बाद राहत: 5 दिन बाद खुला नेताजी सुभाष मार्ग, सामान्य हुई आवाजाही
15 Nov, 2025 07:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली में लाल किले के पास हुए कार बम विस्फोट ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को गहराई से झकझोर दिया था। इस धमाके के बाद पुरानी दिल्ली के कई हिस्सों में कड़े प्रतिबंध लागू किए गए, जिससे आम लोगों और व्यापारियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पांच दिनों की पाबंदी के बाद नेताजी सुभाष मार्ग को आखिरकार आज दोबारा खोल दिया गया, जिससे स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने राहत की सांस ली।
सोमवार को लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए इस धमाके में कई लोग मारे गए और कई घायल हुए थे। इसे संभावित आतंकी हमले की कोशिश माना जा रहा है। घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने नेताजी सुभाष मार्ग को छत्ता रेल कट से सुभाष मार्ग कट तक बंद कर दिया था, ताकि एनआईए, एनएसजी और पुलिस टीमें बिना बाधा जांच पूरी कर सकें।
इसी बीच, डीएमआरसी ने लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 2 और 3 को भी सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया था। शनिवार सुबह इन्हें दोबारा खोल दिया गया, जिससे यात्रियों की दिक्कतें काफी कम हुईं और पुरानी दिल्ली की मेट्रो कनेक्टिविटी पूरी तरह बहाल हो गई।
सड़क खुलने के साथ ही पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक, खारी बावली, भागीरथ पैलेस और फोटोग्राफी मार्केट जैसी व्यस्त जगहों पर कारोबार फिर से पटरी पर लौटने लगा है। कई व्यापारियों ने बताया कि पांच दिनों में ग्राहक लगभग नहीं के बराबर थे, जिससे व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ। मार्ग खुलने के बाद उनमें फिर से उम्मीद जगी है।
गुजरात में पीएम मोदी का रोड शो, बिरसा मुंडा जयंती समारोह में शामिल— 9,700 करोड़ की परियोजनाओं का करेंगे उद्घाटन
15 Nov, 2025 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। बिहार में NDA की जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने गृह राज्य गुजरात के दौरे पर हैं। गुजरात के नर्मदा जिले में पीएम मोदी का भव्य स्वागत हुआ है। इस दौरान उन्होंने धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती समारोह में हिस्सा लिया।
इस खास मौके पर पीएम मोदी ने गुजरात को करोड़ों क सौगात दी है। गुजरात दौरे पर पीएम मोदी राज्य में 9,700 करोड़ रुपये की अलग-अलग विकास परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाएंगे। इसके अलावा पीएम मोदी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की भी समीक्षा करेंगे।
भगवान बिरसा मुंडा के 150 जयंती को 'जनजातीय गौरव दिवस' के रूप में मनाया जाएगा। इस दौरान डेडियापाड़ा में भव्य कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया है।
नर्मदा में पीएम मोदी का रोड शो
गुजरात के नर्मदा जिले में पीएम मोदी का भव्य रोड शो भी देखने को मिला। बिहार जीत के बाद गुजरात में पीएम मोदी की एंट्री पर प्रशंकों में भारी उत्साह था। रोडशो के दौरान पीएम मोदी पर फूल बरसाए गए, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं।
मंदिर में की पूजा
नर्मदा में पीएम मोदी ने देवमोगरा मंदिर में भी आशीर्वाद लिया। उन्होनें पूरे विधि विधान के साथ देवी मां की पूजा करते हुए प्रसाद अर्पित किया।
राज्यपाल ने किया सम्मानित
बिरसा मुंडा के जयंती समारोह में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने पीएम मोदी का स्वागत किया। वहीं, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल समेत जनजातीय समुदाय के सदस्यों ने पीएम मोदी को सम्मानित किया।
कई परियोजनाओं का करेंगे उद्घाटन
गुजरात दौरे पर पीएम मोदी धरती आबा जनजाति ग्राम उतकर्ष अभियान के तहत बने 1 लाख घरों के गृह प्रवेश करवाएंगे। इसके अलावा वो 42 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRS) का उद्घाटन करेंगे और 50 नए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की नींव रखेंगे । पीएम मोदी गुजरात के 14 आदिवासी जिलों में 250 बसों को भी हरी झंडी दिखाएंगे।
स्टाइलिश बैक कवर से हो सकता है बड़ा नुकसान! मोबाइल ब्लास्ट का खतरा, जानिए क्यों जरूरी है सावधानी?"
15 Nov, 2025 03:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Mobile cover impact: आज के डेट में मोबाइल इंसानों के लिए सबसे उपयोगी वस्तुओं में से एक है. बहुत से लोग महंगी-महंगी मोबाइल खरीदते हैं. वहीं भीड़-भाड़ में मोबाइल सबसे अलग और सुंदर दिखे उसके लिए लोग अट्रैक्टिव कवर का इस्तेमाल करते हैं. ये मोबाइल कवर दिखने में स्टाइलिश जरूर होते हैं, लेकिन कई बार ये फोन की गर्मी और बैटरी लाइफ पर बुरा असर डाल देते हैं. जिससे मोबाइल ब्लास्ट होने की संभावना बढ़ जाती है.
मोबाइल कब हीट होता है
बता दें कि मोबाइल में कुछ ऐसे टेक्निकल पार्ट्स इस्तेमाल किए जाते हैं, जिन्हे सुरक्षित रखना बहुत जरूरी होता है. जिसमें मोबाइल के अंदर बैटरी, चिपसेट, एंटीना, डिस्प्ले और बहुत से हार्डवेयर पार्ट्स होते हैं. जब मोबाइल कोई हैवी टास्क करता है, तो उसके पार्ट्स जैसे-प्रोसेसर, रैम (RAM), ग्राफिक्स प्रोसेसर, और बैटरी, पूरी क्षमता से काम करते हैं. इसी वजह से मोबाइल से हीट प्रडूस होने लगते हैं.
स्टाइलिश कवर लगाने का इम्पैक्ट
स्मार्टफोन में जो स्टाइलिश कवर इस्तेमाल किए जाते हैं, वो फोन के कूलिंग सिस्टम को रोक सकते हैं. इसके अलावा फोन के होल को भी बंद कर सकते हैं. ज्यादातर लोग अपने मोबाइल को ड्यूरेबिलिटी देने के लिए मोटे और रग्ड कवर का यूज करते हैं. जिसकी वजह से हीट ट्रैप हो जाती है. वहीं हीट ट्रैप होने से बैटरी पर कई निगेटिव इफेक्ट्स पड़ते हैं, जिसमें बैटरी ब्लास्ट हो सकता है.
इन कारणों की वजहों से भी फोन होता है हीट
इसके अलावा अगर मोबाइल ज्यादा हीट करता है, तो इसके कई कारण भी हो सकते है. जैसें-मोबाइल प्रोसेसर पर ज्यादा लोड पड़ना, फास्ट चार्जिंग या लंबे समय तक चार्जिंग पर लगाए रखना, लगातार डेटा ट्रांसफर या प्रोसेस होने की स्थिति में भी मोबाइल गर्म हो जाता है. हाई ब्राइटनेस की वजह से भी मोबाइल का स्क्रीन तेज गर्म हो जाती है.
हल्के कवर का करें इस्तेमाल
अगर आप चाहते हैं कि आपका स्मार्टफोन हीट न हो और अच्छे से काम करे तो, उसके लिए आपको हल्का कवर का यूज करना चाहिए. इससे आपके फोन की हीट बाहर निकलती रहेगी और मोबाइल का तापमान भी नॉर्मल रहेगा.
सनातन एकता पदयात्रा का 9वां दिन: जया किशोरी ने दी उपस्थिति, आज अखबरपुर में रुकाव
15 Nov, 2025 01:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मथुरा। बागेश्वर धाम के पीठाधीश पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की 10 दिवसीय पदयात्रा जारी है. इस पदयात्रा में कथावाचक जया किशोरी भी शामिल होने के लिए पहुंची. मथुरा में पहुंची सनातन हिंदू एकता पदयात्रा 2.0 में जया किशोरी के अलावा कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर, चिन्मयानंद बापू समेत कई कथावाचक और साधु-संत भी शामिल होने के लिए पहुंचे.
बाबा बागेश्वर की पदयात्रा का 9वां दिन आज
बाबा बागेश्वर की सनातन हिंदू एकता पदयात्रा 2.0 का आज 9वां दिन है. दिल्ली के छतरपुर स्थित कात्यायनी माता मंदिर से शुरू हुई यह पदयात्रा अब अंतिम पड़ाव की ओर है. 16 नवंबर को यह यात्रा वृंदावन में समाप्त हो जाएगी. आज 9वें दिन यह यात्रा मथुरा के अखबरपुर स्थित एस के एस कॉलेज के सामने रुकेगी. इसके बाद राधा गोविंद जी मंदिर, जैंत में रात्रि विश्राम के लिए यात्रा ठहरेगी.
बिरसा मुंडा: आदिवासियों के ‘धरती आबा’ जिनकी दहाड़ से अंग्रेज भी खाते थे खौफ, जानिए उनका शौर्य गाथा!
15 Nov, 2025 01:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Birsa Munda 150th Birth Anniversary: 15 नवंबर का दिन भारतीय इतिहास में एक ऐसे महानायक के नाम दर्ज है, जिसने महज़ 25 साल की छोटी उम्र में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी थी. हम बात कर रहे हैं आदिवासियों के भगवान माने जाने वाले बिरसा मुंडा की, जिनकी आज 150वीं जयंती है.
इस विशेष अवसर पर पीएम मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. पीएम मोदी गुजरात के नर्मदा जिले में याहामोगी देवमोगरा धाम में कुलदेवी पंडोरी माता की पूजा करने पहुंचे हैं. यह वही क्षेत्र है जहां जनजातीय समुदाय बिरसा मुंडा को अपनी आस्था और संघर्ष का प्रतीक मानता है.
केंद्र सरकार ने बिरसा मुंडा के सम्मान में 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की है. इस साल राष्ट्रीय स्तर का मुख्य कार्यक्रम गुजरात के नर्मदा जिले के डेडियापाड़ा में आयोजित किया जा रहा है. नर्मदा जिले का यह क्षेत्र, जहां पीएम पूजा-अर्चना कर रहे हैं, स्वयंभू याहा पंडोरी देवमोगरा माता का धाम है. यह देवी गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान के आदिवासी समुदायों के लिए कुलदेवी हैं.
क्यों हुआ था पहला महासंग्राम?
बिरसा मुंडा की कहानी 1857 की क्रांति के बाद अंग्रेजों के खिलाफ आदिवासियों के पहले बड़े महासंग्राम यानी ‘उलगुलान’ से शुरू होती है. 1789 से 1820 के बीच, छोटानागपुर क्षेत्र के मुंडा आदिवासियों में विद्रोह की आग सुलग रही थी, जिसका मुख्य कारण था ‘खुंटकट्टी व्यवस्था’ पर अंग्रेजों की चोट.
खुंटकट्टी व्यवस्था मुंडाओं की वह पारंपरिक संस्था थी, जिसके तहत एक ही किल्ली यानी कुल के सभी परिवार मिलकर जंगल साफ करके जमीन को खेती योग्य बनाते थे और उस पर सामूहिक अधिकार रखते थे. अंग्रेजों ने इस पारंपरिक स्वामित्व को खत्म करने की दमनकारी नीतियां लागू कीं. उनकी ‘बांटो और राज करो’ की नीति ने आदिवासियों को ज़मीन और जंगल से बेदखल करना शुरू कर दिया, जिससे नफरत और आक्रोश बढ़ता गया.
स्कूल से निकाले गए बिरसा
1875 में उलिहातू गांव में सुगना मुंडा और कर्मी मुंडा के घर जन्मे बिरसा का बचपन संघर्षों में बीता. शुरुआती दौर में उनके परिवार ने ईसाई धर्म अपना लिया था. उन्होंने मिशनरी स्कूल में पढ़ाई की, लेकिन जल्द ही उनका मोहभंग हो गया.
बिरसा ने पहचान लिया कि ईसाई मिशनरियां भी आदिवासियों की जमीनों पर कब्ज़ा करने की साज़िश में शामिल हैं. मिशनरियों की आलोचना करने पर उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया. युवा बिरसा ने इसके बाद सरदार आंदोलन में हिस्सा लिया और नारा दिया, “साहब-साहब एक टोपी है.” इसका अर्थ था कि सभी गोरे एक जैसे हैं और सब सत्ता की टोपी पहने हुए हैं.
जब बिरसा बन गए ‘धरती आबा’
साल 1891 से 1896 के बीच बिरसा ने ईसाई धर्म छोड़कर, धर्म, दर्शन और नीति का गहन ज्ञान प्राप्त किया. उन्होंने आंदोलन के साथ-साथ उपदेश देना भी शुरू किया, जिससे बड़ी संख्या में लोग उनके अनुयायी बन गए. उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि लोग उन्हें ईश्वर का दूत और भगवान मानने लगे. उनके अनुयायी ‘बिरसाइत’ कहलाए. इस तरह, बिरसा मुंडा आदिवासियों के बीच ‘धरती आबा’ के रूप में पूजे जाने लगे.
महाविद्रोह की घोषणा
अगस्त 1895 में वन संबंधी बकाये की माफी के लिए बिरसा ने चाईबासा तक यात्रा की, लेकिन अंग्रेजी हुकूमत ने उनकी मांग ठुकरा दी. इस अपमान के बाद बिरसा ने वह ऐतिहासिक ऐलान किया जिसने क्रांति की शुरुआत की, “सरकार खत्म. अब जंगल-जमीन पर आदिवासियों का राज होगा.” उन्होंने बुलंद आवाज़ में नारा दिया, “अबुआ दिसुम, अबुआ राज” जिसका मतलब है, “हमारे देश पर हमारा राज होगा.” यह नारा अंग्रेज़ों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया.
गिरफ्तारी और जेल से रिहाई
बिरसा की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर अंग्रेज़ी हुकूमत ने उन्हें गिरफ्तार करने की कई बार कोशिश की. आखिरकार, 24 अगस्त 1895 को पुलिस अधीक्षक मेयर्स के नेतृत्व में पुलिस ने रात में बिरसा को गिरफ्तार कर लिया. उन्हें रांची जेल ले जाया गया और बाद में हजारीबाग जेल भेजा गया. उन पर ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लोगों को भड़काने का आरोप लगा और उन्हें 2 साल की सज़ा सुनाई गई.
1897 में झारखंड में भयानक अकाल और चेचक की महामारी फैली. इसी दौरान, ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया की डायमंड जुबिली के समारोहों का आयोजन हो रहा था. इस अवसर पर देश के कई आंदोलनकारियों के साथ बिरसा मुंडा को भी रिहा कर दिया गया.
30 नवंबर, 1897 को जेल से छूटने के बाद बिरसा सीधे चलकद लौटे. उन्होंने सबसे पहले अकाल और महामारी से पीड़ित लोगों की सेवा शुरू की. इसके साथ ही, वह गुप्त रूप से राजनीतिक सभाएं करने लगे, जिससे एक नए और बड़े आंदोलन की जमीन तैयार होने लगी.
जब बिरसा ने छेड़ा हथियारबंद संघर्ष
अंग्रेज़ सरकार समझ चुकी थी कि बिरसा मुंडा को रोकना आसान नहीं है. जनवरी 1900 में, पुलिस और सेना ने बिरसा की तलाश में पोड़ाहाट के जंगलों तक को छान मारा. सरकार ने बिरसा की सूचना देने वाले के लिए इनाम घोषित कर दिया, लेकिन आदिवासियों ने अपने ‘भगवान’ के बारे में एक शब्द भी नहीं बताया.
इसके बाद बिरसा ने सीधे हथियारबंद संघर्ष का ऐलान कर दिया. यह इतिहास में उलगुलान के नाम से दर्ज हुआ. बिरसा की अगुवाई में लगभग 60 जत्थों ने एकसाथ हुकूमत के ठिकानों, सरकारी कार्यालयों और गिरजाघरों पर धावा बोल दिया. चक्रधरपुर और पोड़ाहाट जैसे इलाकों में अंग्रेज़ों के आवासों में आग लगा दी गई.
इस महासंग्राम का सबसे भीषण रूप 8 जनवरी, 1900 को डोम्बारी पहाड़ियों पर दिखा. सेना ने बिरसाइत जत्थों को चारों ओर से घेर लिया. विद्रोहियों ने ज़ोरदार दहाड़ लगाई, “गोरो, अपने देश वापस जाओ.” फौज और विद्रोहियों के बीच हुई इस खूनी जंग में लगभग 200 मुंडा शहीद हो गए, लेकिन बिरसा अंग्रेजों के हाथ नहीं आए.
जेल में रहस्यमयी मौत
अंग्रेज़ी हुकूमत के लिए बिरसा मुंडा को पकड़ना इज़्ज़त का सवाल बन गया था. आखिरकार, 3 फरवरी, 1900 को एक जंगल में बने शिविर में सोते वक्त अंग्रेज़ों ने बिरसा को पकड़ लिया. उन्हें तत्काल खूंटी के रास्ते रांची कारागार में बंद कर दिया गया. बिरसा के साथ ही करीब 500 आंदोलनकारियों को गिरफ्तार किया गया.
मुकदमे की सुनवाई चल रही थी. 20 मई, 1900 को बिरसा को कोर्ट ले जाया गया, लेकिन तबीयत खराब होने की वजह से उन्हें वापस जेल भेज दिया गया. अगले 10 दिन तक यही खबर आती रही कि बिरसा बीमार हैं. और फिर, 9 जून, 1900 की सुबह अचानक यह खबर आई कि हैजे की वजह से बिरसा मुंडा की मौत हो गई.
हालांकि, कई इतिहासकारों और आदिवासियों का मानना है कि अंग्रेज़ी हुकूमत ने उन्हें जेल में धीमा जहर दिया था, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ती गई और उनकी मृत्यु हो गई.
25 की उम्र में अमर हुए ‘भगवान’ बिरसा
महज 25 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले बिरसा मुंडा अपनी छोटी सी ज़िंदगी में इतना बड़ा संघर्ष करके गए कि आज भी वह भारत के जनजातीय समाज के लिए प्रेरणा के सबसे बड़े स्रोत हैं. उनका नारा ‘अबुआ दिसुम, अबुआ राज’ आज भी जंगल-ज़मीन के अधिकार की लड़ाई में एक मशाल की तरह जलता है. बिरसा मुंडा सही मायने में आदिवासियों के ‘भगवान’ और भारत के सच्चे ‘धरती आबा’ हैं.
राहुल गांधी की 1300 किमी यात्रा का सुपर फ्लॉप शो: बिहार में कांग्रेस का सूपड़ा साफ, 61 में से सिर्फ 6 सीटें!
15 Nov, 2025 01:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Congress RJD Yatra Analysis: बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद यह साफ हो गया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और तेजस्वी यादव द्वारा निकाली गई वोटर अधिकार यात्रा पूरी तरह फेल रही. जिस रूट से यह यात्रा गुजरी, वहां ज्यादातर सीटों पर एनडीए ने एकतरफा जीत दर्ज की. यानी इस यात्रा का चुनावी असर न के बराबर रहा. शुक्रवार को आए नतीजों में एनडीए को 202 सीटें मिली तो वहीं महागठबंधन को सिर्फ 35 सीटें मिली हैं.
25 जिलों के गुजरी यात्रा
महागठबंधन ने यह यात्रा चुनाव के कुछ सप्ताह पहले ही शुरू की थी. जिसमें दावा किया कि ‘वोटों की रक्षा’ और ‘वोट चोरी के खिलाफ आवाज’ उठाई गई है. राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना था कि इससे जमीनी पकड़ मजबूत होगी लेकिन नतीजों ने पानी फेर दिया. महागठबंधन की यह यात्रा 17 अगस्त को सासाराम के डेहरी से शुरू हुई थी, जो बिहार के 25 जिलों से होकर गुजरी.
जहां से निकली यात्रा, वहां से MGB का सफाया
एनडीए के बड़े नेता जिन सीटों पर चुनाव प्रचार किए, वहां ज्यादातर उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की. वहीं, महागठबंधन में बिल्कुल उल्टा निकला. महागठबंधन ने जिन क्षेत्रों में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ निकाली और खूब मेहनत की. वहां के परिणाम निराशाजनक रहे. कांग्रेस पार्टी को इन क्षेत्रों की केवल 1 ही सीट पर जीत मिल पाई है, वह सीट है अररिया. जहां से कांग्रेस के अबिदुर रहमान ने जेडीयू के शगुफ्ता अजीम को हराया है.
1300 किमी. की ‘वोटर अधिकार यात्रा’
वोटर अधिकार यात्रा का समापन 1 सितंबर को किया गया था. जिसमें राहुल गांधी, तेजस्वी यादव, सीपीआई (एमएल) के दीपंकर भट्टाचार्य और वीआईपी के मुकेश सहनी समेत कई दिग्गज शामिल हुए. बिहार में यह यात्रा करीब 1300 किमी. रही. नतीजों को देखने के बाद ऐसा नहीं लगता कि बिहार में इस यात्रा का कोई खास प्रभाव पड़ा. इससे न तो जनसमर्थन जुड़ा और न ही राजनीतिक हवा बदली. बल्कि जिन इलाकों से यात्रा गुजरी, वहां महागठबंधन को करारी हार मिली. यानी कहा जा सकता है कि 1300 किमी. की यात्रा करने वाले राहुल गांधी को 13 सीटें भी नहीं मिल पाईं.
पीएम मोदी का गुजरात दौरा: 9,700 करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्यास आज
15 Nov, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार यानी 15 नवंबर को गुजरात का दौरा करेंगे.पीएम मोदी मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की प्रगति की समीक्षा करेंगे. वह भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेंगे. इसके लिए पीएम मोदी नर्मदा जिले के डेडियापाड़ा भी जाएंगे. इस यात्रा के दौरान वो 9,700 करोड़ रुपये से ज्यादा की कई बुनियादी ढांचा और विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे. ये परियोजनाएं आदिवासी कल्याण, बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य, शिक्षा और विरासत से जुड़ी हुई रहेंगी.
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के मुताबिक, पीएम मोदी सूरत में निर्माणाधीन बुलेट ट्रेन स्टेशन का दौरा करेंगे. साथ ही वो मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (एमएएचएसआर) की प्रगति की समीक्षा करेंगे. यह भारत की सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक है. इसमें देश की हाई-स्पीड कनेक्टिविटी की दिशा में आगे बढ़ाने के लिहाज से काफी अहम है.
यहां एमएएचएसआर लगभग 508 किलोमीटर लंबा है. इसमें 352 किलोमीटर गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली में और 156 किलोमीटर महाराष्ट्र में है. यह कॉरिडोर साबरमती, अहमदाबाद, आणंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलिमोरा, वापी, बोईसर, विरार, ठाणे और मुंबई सहित प्रमुख शहरों को जोड़ेगा. ये भारत के परिवहन बुनियादी ढांचे में एक बड़े बदलाव का कदम होगा.
85 प्रतिशत पुलों का इस्तेमाल बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में
प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में 85% रास्ता (465 किमी) पुलों पर बनाया जा रहा है. इससे जमीन कम इस्तेमाल होगी और सुरक्षा ज्यादा रहेगी. इस प्रोजेक्स के 326 किमी पुल बन चुके हैं, 25 में से 17 नदी पुल तैयार हो गए हैं. एक बार चालू हो जाने पर, बुलेट ट्रेन मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा के समय को लगभग दो घंटे तक कम कर देगी, जिससे शहर-शहर के बीच सफर आसान और ज्यादा आरामदायक रहेगा. इस परियोजना से कॉरिडोर पर व्यापार, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. इसके साथ ही क्षेत्रीय विकास को गति मिलने की उम्मीद है.
ये लगभग 47 किलोमीटर लंबा सूरत-बिलिमोरा खंड, निर्माण के अंतिम चरण में है. यहां सिविल कार्य और ट्रैक बिछाने का काम पहले ही पूरा हो चुका है. प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि सूरत स्टेशन का डिजाइन शहर के विश्व प्रसिद्ध हीरा उद्योग से प्रेरित है. ये इसकी भव्यता और कार्यक्षमता दोनों को दर्शाता है. स्टेशन में विशाल प्रतीक्षालय, शौचालय, खुदरा दुकानें हैं और यह सूरत मेट्रो, सिटी बसों और भारतीय रेलवे के साथ निर्बाध मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी प्रदान करता है.
दोपहर बाद, प्रधानमंत्री नर्मदा जिले के देवमोगरा मंदिर में पूजा-अर्चना और दर्शन करेंगे. फिर वो बिरसा मुंडा जयंती कार्यक्रम के लिए डेडियापाड़ा जाएंगे. इस कार्यक्रम के दौरान, वे आदिवासी समुदायों के उत्थान और ग्रामीण एवं दूरदराज के क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में सुधार के उद्देश्य से कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे.
दिल्ली ब्लास्ट के बाद कोलकाता कॉलेज में बवाल, दीवारों पर लिखे नफरती संदेश
15 Nov, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश की राजधानी में लाल किले के सामने हुए कार ब्लास्ट में विशेष समुदाय के डॉक्टरों के नाम सामने आए हैं। सभी डॉक्टर मिलकर देश में बड़ी आतंकी साजिश को अंजाम देने की तैयारी कर रहे थे। इनका नाम उजागर होने के बाद कोलकाता विश्वविद्यालय में सनसनीखेज घटना घटी है।
दिल्ली ब्लास्ट के कुछ दिन बाद ही कोलकाता के एक विश्वविद्यालय पर समुदाय विशेष के लिए नफरत भरी बातें लिखने का मामला सामने आया है। कुछ लोगों ने विश्वविद्यालय की दीवारों पर हेट स्पीच से जुड़े नारे उकेरे हैं, जिसका कुछ लोग विरोध भी कर रहे हैं।
दीवारों पर लिखा नफरती संदेश
यह मामला कोलकाता के भारतीय सांख्यिकी संस्थान का है। कैंपस में स्थित ब्वॉयज हॉस्टल की दीवारों पर चॉक से लिखा है, "कुत्ते और मुस्लिम न आएं"। वहीं, कूड़ेदान पर लिखा गया, "मुस्लिमों के लिए सिर्फ यही जगह सही है।" इसके अलावा सीवी रमन हॉल के दरवाजे पर लिखा गया, "मुस्लिमों को अंदर आने की अनुमति नहीं है।"
कैंपस में विरोध प्रदर्शन
कैंपस में लगे इन नारों के खिलाफ कई लोगों ने मोर्चा खोल दिया है। इसमें कुछ अभ्यार्थी भी शामिल हैं। उनका कहना है, "अपनी धार्मिक नफरत को यहीं फेंक दो" हॉस्टल के मुख्य द्वार पर संविधान का अनुच्छेद 15 लगाया गया है।
बता दें कि अनुच्छेद 15 धर्म, जाति, लिंग, रंग और जन्मस्थल के आधार पर भेदभाव करने के खिलाफ एक मौलिक अधिकार है। विरोध प्रदर्शन करने के अलावा कई छात्रों ने 13 नवंबर को डीन से भी इसकी शिकायत की। डीन बिस्वब्रत प्रधान ने छात्रों की मांग पर हस्ताक्षर भी कर दिए हैं।
डीन ने दी चेतावनी
बिस्वब्रत प्रधान का कहना है, "संस्थान इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करता है। एक विशेष समुदाय के दिल को ठेस पहुंचाने के आरोप में कॉलेज प्रशासन आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा।"
अगले 24 घंटे में गिरेगा तापमान, उत्तरी भारत ठंड की चपेट में....
15 Nov, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। नवंबर का महीना आधा बीतने के साथ देश के कई राज्यों में ठंड का कहर बढ़ने लगा है। सुबह-शाम तापमान गिरने के साथ दिन की धूप में भी हल्की ठंड का एहसास होने लगा है। वहीं, मौसम विभाग ने कई राज्यों में शीतलहर की चेतावनी जारी की है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, पूर्वी राजस्थान से लेकर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और झारखंड समेत आसपास के राज्यों में आज और कल यानी 15-16 नवंबर को शीतलहर चलने की संभावना है।
कई राज्यों में बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने तमिलनाडु, केरल और माहे के कुछ इलाकों में 16 नवंबर तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं, 16-18 नवंबर तक आंध्र प्रदेश और अंडमान एवं निकोबार द्वीप पर तेज बरसात की संभावना है।
24 घंटे बाद गिरेगा पारा
मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटे में उत्तर भारत के तापमान में कुछ ज्यादा गिरावट नहीं होगी। हालांकि, 24 घंटे के बाद कई जगहों पर तापमान 3-4 डिग्री सेल्सियस तक कम हो सकता है।
दिल्ली में दम घोटेगा प्रदूषण
राजधानी दिल्ली में ठंड का सितम बढ़ने वाला है। हालांकि, सर्दियों से ज्यादा प्रदूषित हवा ने लोगों का सांस लेना मुश्किल कर दिया है। दिल्ली के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 410 के भी पार पहुंच गया है। वहीं, बढ़ती ठंड के साथ AQI और भी अधिक होने की संभावना है।
यूपी में लुढ़ेगा तापमान
उत्तर प्रदेश में शीतलहर के साथ ठंड बढ़ने के आसार हैं। इस दौरान तेज सर्द हवाओं के साथ हल्का कोहरा और धुंध भी देखने को मिल सकती है। खासकर लखनऊ, मेरठ और मुजफ्फरनगर के आसपास के इलाकों में तापमान 11 डिग्री सेल्सियस से कम होने की संभावना है। वहीं, कानपुर, बरेली, अयोध्या और बाराबंकी में न्यूनतम तापमान 8-10 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।
बिहार में बढ़ेगी ठंड
यूपी और झारखंड में चलने वाली शीतलहर का असर बिहार में भी देखने को मिल सकता है। राज्य में कोहरा छाए रहने के साथ तापमान में भारी गिरावट की संभावना है, जिससे ठंड अचानक से बढ़ सकती है।
नौगाम पुलिस स्टेशन में भीषण विस्फोट: 9 की मौत, 30 घायल, आतंकी कनेक्शन की जांच जारी!
15 Nov, 2025 09:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Srinagar Blast: जम्मू कश्मीर के नौगाम पुलिस स्टेशन में शुक्रवार देर रात एक जोरदार धमाका हो गया. इस धमाके में 9 लोगों की मौत हो गई और 30 लोग घायल हैं. घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. धमाके की आवाज कई किमी दूर तक सुनाई दी. वहीं, धमाके की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ब्लास्ट के बाद मानव अंग 300 फीट दूर तक बिखरे मिले.
एक घंटे तक होते रहे धमाके
प्रत्यक्षदर्शी और सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक ब्लास्ट इतना तीव्र था कि आग और धुएं का गुबार आसमान में कई सौ फीट तक उठता दिखाई दिया. आज तक की रिपोर्ट के अनुसार एक घंटे तक छोटे-छोटे धमाके होते रहे. इस वजह से राहत और बचाव दल को रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा.
लापरवाही या आतंकी साजिश
जांच एजेंसियां दो अलग-अलग एंगल से इस घटना की जांच कर रही हैं. न्यूज रिपोर्ट्स के मुताबिक बताया जा रहा है कि पुलिस स्टेशन के भीतर 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट जैसी विस्फोटक सामग्री रखी हुई थी. इसमें ही धमाका हुआ, ये ब्लास्ट तब हुआ जब मजिस्ट्रेट की निगरानी में उसे सील कराया जा रहा था.
ये भी पढ़ें: ‘क्या 20 हजार करोड़ में जनता के वोट खरीदे जा सकते हैं?’, बिहार चुनाव के नतीजों पर पप्पू यादव का बयान
इसके अलावा दूसरा एंगल ये है कि लाल किला आतंकी धमाके के मामले में जम्मू कश्मीर पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है. इसी दौरान पुलिस ने एक कार जब्त की, जो नौगाम पुलिस स्टेशन परिसर में खड़ी हुई थी. ऐसी आशंका जताई जा रही है कि इसमें विस्फोटक था या IED लगाया गया था. जिसके विस्फोट ने अमोनियम नाइट्रेट को डेटोनेट कर दिया. आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के शैडो संगठन पीएएफएफ(PAFF) ने इस घटना की जिम्मेदारी ली है. जांच अधिकारी इस दावे की सत्यता की जांच कर रहे हैं.
भारतीय सेना का कमाल: अरुणाचल में 16 हजार फीट ऊंचाई पर मोनो रेल शुरू
15 Nov, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इटानगर। भारतीय सेना की गजराज कोर ने अरुणाचल प्रदेश के कामेंग हिमालय में 16,000 फीट की ऊंचाई पर एक स्वदेशी मोनो रेल प्रणाली का संचालन शुरू किया है। यह हाई एल्टीट्यूड वाले क्षेत्र में रसद आपूर्ति को लेकर बड़ी सफलता है।
रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने कहा कि इस प्रणाली की संकल्पना, इंजीनियरिंग और तैनाती सफलतापूर्वक की गई है, ताकि क्षेत्र में सैनिकों के सामने आने वाली सबसे कठिन परिचालन चुनौतियों में से एक का समाधान किया जा सके। साथ ही बर्फ, कठिन भूभाग और अप्रत्याशित मौसम के कारण नियमित रूप से कटी रहने वाली अग्रिम चौकियों तक निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि कामेंग हिमालय के दुर्गम विस्तार में सैन्य अभियानों के लिए वर्ष भर सैनिकों को बनाए रखने के लिए यह एक महत्वपूर्ण समाधान है। मोनो रेल प्रणाली एक बार में 300 किलो से अधिक भार का परिवहन कर सकती है, जो उन दूरस्थ चौकियों के लिए एक विश्वसनीय जीवनरेखा प्रदान करती है जहां संचार या आपूर्ति का कोई अन्य साधन नहीं है।
लेफ्टिनेंट कर्नल रावत ने कहा कि यह मिशन-महत्वपूर्ण भंडार, गोला-बारूद, राशन, ईंधन, इंजीनियरिंग उपकरण और अन्य भारी सामानों की आवाजाही सुनिश्चित करता है, जहां पारंपरिक परिवहन विधियां अक्सर विफल हो जाती हैं। यह दिन-रात चालू रहती है और ओलावृष्टि या तूफान के दौरान भी काम करती है।
अपनी रसद पहुंचाने की भूमिका के अलावा मोनो रेल ने हताहत को वहां से निकालने में भी अपनी क्षमता प्रदर्शित की है। यह उन क्षेत्रों में एक सुरक्षित विकल्प है जहां हेलीकॉप्टर से निकासी असंभव हो सकती है और पैदल निकासी धीमी और खतरनाक है।
जनजातीय वीरता का स्मरण, PM मोदी ने दी स्वतंत्रता सेनानियों को नमन
15 Nov, 2025 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दशकों तक, भारत के आदिवासी नायक, जिनके साहस ने उत्पीड़न के खिलाफ राष्ट्र के संघर्ष को आकार दिया, इतिहास के हाशिये पर ही रहे. लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में इसमें बदलाव आया है. स्मारक कार्यक्रमों, स्मारकों, प्रकाशनों, प्रतीकात्मक विमोचनों और वंशजों के साथ सीधे जुड़ाव के माध्यम से, आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों की कहानियों को अब भारत की राष्ट्रीय विरासत की आधारशिला के रूप में मनाया जाता है.
राष्ट्रीय उत्सवों के माध्यम से इतिहास का सम्मान
आदिवासी इतिहास को जीवित रखने के महत्व को समझते हुए, मोदी सरकार ने 15 नवंबर को आदिवासी गौरव दिवस के रूप में स्थापित किया, जो भारत के आदिवासी क्रांतिकारी भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के रूप में मनाया जाता है. समय के साथ, यह उत्सव आदिवासी गौरव सप्ताह के रूप में विस्तारित हो गया है, जिसे विभिन्न मंत्रालयों और राज्यों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रदर्शनियों और शैक्षिक गतिविधियों के साथ मनाया जाता है जो आदिवासी नायकों की विरासत को जीवंत करते हैं. कैबिनेट ने 15 नवंबर को आदिवासी गौरव दिवस के रूप में घोषित करने को मंजूरी दी.
2023 में, सरकार ने रानी दुर्गावती की 500वीं जन्म शताब्दी के राष्ट्रीय समारोह की घोषणा की, जिससे भारत की आदिवासी महिलाओं के नेतृत्व और साहस को और अधिक उजागर किया गया.
हूल दिवस पर, उन्होंने संथाल नायकों सिद्धो-कान्हो, चांद-भैरव और फूलो-झानो को सम्मानित किया और उत्पीड़न के विरुद्ध उनके विद्रोह को जन स्मृति में जीवित रखा. प्रधानमंत्री ने हूल दिवस पर आदिवासी नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की.
राजस्थान के बांसवाड़ा में, उन्होंने गोविंद गुरु, तिलका मांझी, सिद्धू-कान्हू और बुधु भगत जैसे नायकों को याद करते हुए मानगढ़ धाम की गौरव गाथा में भाग लिया.
वे झारखंड के उलिहातु में बिरसा मुंडा की जन्मस्थली का दौरा करने वाले पहले प्रधानमंत्री भी बने, जहां उन्होंने उलगुलान आंदोलन के नेता को पुष्पांजलि अर्पित की, जिससे आदिवासी वीरता राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना में और अधिक समाहित हो गई.
परिवारों को जोड़ना: इतिहास को व्यक्तिगत बनाना
प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण की एक विशिष्ट विशेषता आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों के साथ सीधा जुड़ाव रही है, और इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि इतिहास केवल स्मारकों से नहीं, बल्कि जीवित परिवारों से जुड़ा है.
उन्होंने ओडिशा में पाइका विद्रोह के नायकों, जिनमें बख्शी जगबंधु, रिंडो माझी और लक्ष्मी पांडा शामिल थे, उनके परिवारों को सम्मानित किया और 1817 के सशस्त्र विद्रोह में उनके साहस की सराहना की.
प्रधानमंत्री मोदी ने शहीद वीर नारायण सिंह के वंशजों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की, उनका हालचाल पूछा और यह सुनिश्चित किया कि उनके योगदान को याद रखा जाए.
बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने बिरसा मुंडा, सिदो मुर्मू, कान्हू मुर्मू और अन्य आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों को देश भर में आदिवासी समुदायों के समर्थन के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला.
परिवारों के साथ जुड़कर, प्रधानमंत्री ने इतिहास से मानवीय जुड़ाव स्थापित किया है और इस बात पर जोर दिया है कि आदिवासी नेताओं के बलिदान भारत की पहचान को आकार देते रहे हैं.
स्मारक और सार्वजनिक स्थल: विरासत को समेटना
प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण के तहत, भारत के आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के साहस को पूरे देश में संरक्षित और सम्मानित किया जा रहा है. अपने 2016 के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में घोषित, जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय योजना के तहत 10 राज्यों में 11 संग्रहालयों को मंज़ूरी दी गई है, जिससे उनके नेतृत्व और संघर्षों को सम्मान देने वाले स्थान निर्मित होंगे.
कर्नाटक में जनजातीय संग्रहालयों की स्थापना
अब तक तीन संग्रहालयों का उद्घाटन किया जा चुका है:
भगवान बिरसा मुंडा स्मारक पार्क-सह-स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय, रांची
बादल भोई राज्य जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय, छिंदवाड़ा
राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय, जबलपुर
प्रधानमंत्री मोदी ने जबलपुर में वीरांगना रानी दुर्गावती स्मारक और उद्यान का भूमि पूजन भी किया.
रानी मां गाइदिन्ल्यू जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय का विकास उनकी विरासत के सम्मान में किया जा रहा है.
प्रधानमंत्री मोदी ने रायपुर में आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों पर भारत के पहले डिजिटल संग्रहालय का भी उद्घाटन किया, जिसका नाम शहीद वीर नारायण सिंह के नाम पर रखा गया है, जो देश भर के नागरिकों और छात्रों के लिए इंटरैक्टिव कहानियां और कलाकृतियां प्रस्तुत करता है.
इन भौतिक और डिजिटल स्मारकों के माध्यम से, आदिवासी वीरता अब भारत के सांस्कृतिक और नागरिक ताने-बाने में गुंथी हुई है, जो पीढ़ियों को उनके साहस की विरासत का सम्मान करने और उसे आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है.
आदिवासी नायकों का सम्मान
प्रधानमंत्री मोदी ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत के सार्वजनिक स्थान भी आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को प्रतिबिंबित करें.
भोपाल स्थित रानी कमलापति रेलवे स्टेशन गोंड रानी को अमर करता है. प्रधानमंत्री भोपाल में पुनर्विकसित रानी कमलापति रेलवे स्टेशन राष्ट्र को समर्पित करेंगे.
जननायक टंट्या भील स्टेशन और टंट्या मामा भील विश्वविद्यालय ब्रिटिश शासन का विरोध करने वाले भील योद्धाओं को याद करते हैं.
आंध्र प्रदेश के भीमावरम में अल्लूरी सीताराम राजू की 30 फुट ऊँची कांस्य प्रतिमा स्थापित की गई है जो रम्पा विद्रोह के दौरान उनके नेतृत्व का प्रतीक है.
प्रधानमंत्री ने आंध्र प्रदेश के भीमावरम में महान स्वतंत्रता सेनानी अल्लूरी सीताराम राजू की वर्ष भर चलने वाली 125वीं जयंती समारोह का शुभारंभ किया. इसी तरह, झारखंड में, प्रधानमंत्री मोदी ने रांची में बिरसा मुंडा की एक प्रतिमा का अनावरण किया, जो आदिवासी आदर्श और उलगुलान आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका का सम्मान करता है.
जनजातीय क्षेत्रों में बिरसा मुंडा जनजातीय गौरव उपवन स्थापित किए जा रहे हैं, जो श्रद्धांजलि को समुदायों और आगंतुकों दोनों के लिए जीवंत विरासत स्थलों में बदल रहे हैं. इन पहलों के माध्यम से, स्मारक, स्टेशन, विश्वविद्यालय और संग्रहालय मिलकर स्मृति का एक जीवंत परिदृश्य तैयार करते हैं.
बिहार की जनता ने गर्दा उड़ा दिया, अब कट्टा सरकार नहीं लौटेगी: पीएम मोदी का गमछा लहराते हुए ऐलान
14 Nov, 2025 08:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
PM Modi on Bihar Election 2025: बिहार में NDA की बहार आ गई है. प्रदेश की 243 विधानसभा सीट में से 202 सीट पर NDA बढ़त बनाए हुए. बिहार से लेकर दिल्ली तक इस प्रचंड जीत का जश्न मनाया जा रहा है. बड़ी संख्या में BJP कार्यकर्ता ढोल-नगाड़े बजाकर और एक दूसरे का मुंह मीठा कराकर जश्न मना रहे हैं. इस जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी BJP मुख्यालय पहुंचे हैं. PM मोदी गमछा लहराते हुए पहुंचे और हाथ जोड़कर कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया. इस दौरान मखाने की माला से प्रधानमंत्री का स्वागत किया गया.
पार्टी दफ्तर पहुंचते ही PM मोदी ने लहराया गमछा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब बीजेपी मुख्यालय पहुंचे तो उन्होंने गमछा लहराया. साथ ही हाथ जोड़कर कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया. इस मौके पर केंद्रीय मंत्री और BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मखाने की माला से PM मोदी को सम्मानित किया.
‘जय छठी मैया…’ से गूंजा मुख्यालय
PM मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत जय छठी मैया नारे से की. इसके बाद बड़ी संख्या में मौजूद कार्यकर्ताओं ने भी जोर-जोर से जय छठी मैया के नारे लगाए. इसके बाद PM मोदी ने कहा कि बिहार की जनता ने गर्दा उड़ा दिया.
‘अब कट्टा सरकार वापस नहीं आएगी’
PM मोदी ने अपने संबोधन में कहा- ‘आज बिहार के घर-घर में मखाना की खीर बनाना पक्का कर दिया है. मुझे खुशी है कि यहां भी सबको मखाने की खीर खिलाई गई है. हम NDA के लोग जनता-जनार्दन के सेवक हैं. हम अपनी मेहनत से जनता का दिल खुश करते रहते हैं. हम तो जनता का दिल चुराकर बैठे हैं इसलिए पूरे बिहार ने बता दिया है फिर एक बार NDA सरकार. मैंने चुनाव में बार-बार कहा था. बिहार में जब मैं जंगलराज और कट्टाराज की बात करता था तो RJD कभी विरोध नहीं करता था, लेकिन कांग्रेस को बहुत चुभता था. मैं कहता हूं अब कट्टा सरकार वापस नहीं आएगी.’
‘बिहार रिकॉर्ड मतदान कर रहा है’
अपने संबोधन में PM मोदी ने कहा- ‘बिहार के लोगों ने विकसित बिहार के लिए मतदान किया. समृद्ध बिहार के लिए मतदान किया. मैंने जनता से रिकॉर्ड मतदान का आग्रह किया था और बिहार के लोगों ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए. मैंने कहा था कि NDA को प्रचंड बहुमत दें. बिहार की जनता ने इसे भी सही साबित किया. 2010 के बाद का सबसे बड़ा जनादेश NDA को दिया गया है. मैं बहुत विनम्रता से, NDA के सभी दलों की ओर से बिहार की महान जनता का आभार व्यक्त करता हूं. उन्हें नमन करता हूं. बिहार रिकॉर्ड मतदान कर रहा है.’
साडा अध्यक्ष पद के लिए अशोक शर्मा का नाम चर्चा में
श्री विश्वकर्मा महापंचायत संगठन की प्रदेश स्तरीय बैठक 30 को बैठक में होंगे कई महत्वपूर्ण निर्णय
बंगाल में कानून-व्यवस्था पर घमासान, नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप
विधानसभा-1 के वार्ड 9 से अभियान का शुभारंभ, जनभागीदारी पर जोर
