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किसानों के लिए खुशखबरी! जंगली जानवरों और बारिश-बाढ़ से फसल नुकसान पर अब मिलेगा मुआवजा, जानिए कैसे उठाएं लाभ?
21 Nov, 2025 01:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
PM Fasal Bima Yojana: किसानों के लिए अच्छी खबर है. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को बड़ा तोहफा दिया है, जो उनके लिए वरदान साबित होगा. देशभर के किसान इन दो समस्याओं को जूझ रहे थे. जिसका सरकार से भी कोई मुआवजा नहीं मिलता था. अब केंद्र सरकार ने किसानों की मांगों को ध्यान में रखते हुए बीमा योजना के तहत लाभ देने की घोषणा की है.
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जानकारी देते हुए बताया, “PM फसल बीमा योजना के तहत दो नुकसान कवर नहीं किए गए थे और इनकी मांग लंबे समय से की जा रही थी. एक, जंगली जानवरों से फसलों को नुकसान. दूसरा, ज्यादा बारिश से बाढ़ या पानी भरने से फसलों को नुकसान. मैं आपको बताना चाहूंगा कि ये दोनों नुकसान अब फसल बीमा योजना के तहत कवर किए जा रहे हैं. अगर जंगली जानवर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, तो उसका मुआवजा दिया जाएगा. अगर पानी भरने से फसलों को नुकसान होता है, तो उसका भी मुआवजा दिया जाएगा.”
72 घंटे में देनी होगी नुकसान की जानकारी
अगर फसल में किसी प्रकार से नुकसान हुआ है तो इसकी जानकारी 72 घंटे के अंदर फसल बीमा ऐप पर जियो-टैग्ड फोटो के साथ दर्ज करनी होगी. सरकार ने फसल नुकसान को जोखिम श्रेणी के पांचवे ‘ऐड-ऑन कवर’ के रूप में मान्यता दी है. इसके लिए राज्य सरकार जंगली जानवरों की सूची को अधिसूचित करेंगे और जंगली जानवरों से सबसे ज्यादा जिन जिलों में फसलों को नुकसान हो रहा है, उनकी पहचान करेंगे. ताकि किसानों को सही लाभ मिल सके.
लंबे समय से थी किसानों की मांग
बता दें, काफी समय से लगातार किसान फसल नुकसान को लेकर मुआवजे की मांग कर रहे थे. सबसे ज्यादा जंगली जानवरों से मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, तमिलनाडु और केरल के किसान परेशान रहते हैं. वहीं कई राज्य जलभराव की स्थिति से जूझ रहे हैं, जिन्हें हर बार फसलों को लेकर नुकसान उठाना पड़ता है. किसानों की समस्या को देखते हुए कृषि विभाग ने यह फैसला लिया है.
प्रशांत किशोर का ऐतिहासिक फैसला: परिवार के लिए एक घर छोड़कर सारी संपत्ति दान, जानिए क्या है जनसुराज अभियान का उद्देश्य?
21 Nov, 2025 12:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Prashant Kishor Announcement: बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद जनसुराज के मुखिया प्रशांत किशोर ने बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि अपने परिवार के लिए एक घर छोड़कर अपनी सारी चल-अचल संपत्ति जनसुराज अभियान के लिए डोनेट करता हूं.
इसके साथ ही उन्होंने सभी से कम से कम 1 हजार रुपया इस अभियान में डोनेट करने की अपील की है.
एक ही परिवार के 6 सदस्य BJP के टिकट पर चुनावी मैदान में, जानिए महाराष्ट्र निकाय चुनाव में क्या है बीजेपी की रणनीति?
21 Nov, 2025 12:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Maharashtra BJP Parivarvad: खानदानी राजनीति पर निशाना साधने वाली भाजपा ने महाराष्ट्र में सिद्ध कर दिया कि ;परिवारवाद’ सिर्फ चुनावी जुमला है. भाजपा से स्थानीय निकाय चुनाव में एक ही परिवार के 6 लोगों ने नॉमिनेट कर सबको हैरान कर दिया. भाजपा के इस परिवारवाद को लेकर पूरे प्रदेश में चर्चा हो रही है. यहां सत्ता गठबंधन और विपक्ष दोनों ही अपनी आंतरिक चुनौतियों से जूझते दिख रहे हैं.
कांग्रेस का परंपरागत गढ़ माने जाने वाले नांदेड़ में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के बीजेपी में शामिल होने के बाद चुनावी समीकरण बदले-बदले नजर आ रहे हैं. लोहा नगर परिषद में बीजेपी ने ऐसा दांव चला है जिसने इसकी चर्चा सिर्फ नांदेड़ ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में हो रही है. क्योंकि परिवारवाद का मुद्दा बनाकर विपक्ष को घेरने वाली भाजपा ने एक ही परिवार के 6 लोगों को चुनावी मैदान में उतारा है.
एक ही परिवार में 6 लोगों को टिकट
लोहा में बीजेपी-शिवसेना (शिंदे गुट) गठबंधन ने नगर परिषद अध्यक्ष पद के लिए गजानन सूर्यवंशी को उम्मीदवार बनाया है. इसमें सबसे दिलचस्प बात यह है कि पार्टी ने सूर्यवंशी परिवार के 5 और सदस्यों को भी अलग-अलग वार्डों से टिकट दे दिया. भाजपा की इस सूची में गजानन सूर्यवंशी की पत्नी, भाई, भाभी, जीजा और भतीजे की पत्नी शामिल हैं.
नॉमिनेशन वापस लेने की अंतिम डेट आज
गजानन सूर्यवंशी की पत्नी गोदावरी सूर्यवंशी ने वार्ड 7A, भाई सचिन सूर्यवंशी-वार्ड 1A, भाभी सुप्रिया सूर्यवंशी-वार्ड 8A, जीजा युवराज वाघमारे-वार्ड 7B और भतीजे की पत्नी रीना वयावरे ने वार्ड 3 से स्थानीय निकाय चुनाव में नॉमिनेशन किया है. आज 21 दिसंबर को नाम वापस लेने की अंतिम डेट है. स्थानीय निकाय के इन चुनावों के लिए 2 दिसंबर को वोट डाले जाएंगे. 3 दिसंबर को वोटों की गिनती के साथ नतीजे आएंगे.
पूर्व सीएम अशोक चव्हाण की प्रतिष्ठा दांव पर
बता दें, नांदेड़ में स्थानीय निकाय चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा एमपी अशोक चव्हाण की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. परिणाम क्या होंगे यह तो नतीजे आने के बाद ही क्लियर हो पाएंगे. लेकिन इस चुनाव में 6 लोगों के एक ही परिवार से चुनाव लड़ने के बाद सबकी निगाहें टिकी हुई हैं.
विपक्ष ने साधा निशान
भाजपा द्वारा एक ही परिवार के 6 सदस्यों को टिकट दिए जाने के बाद विपक्षी दल एनसीपी अजित पवार गुट के विधायक प्रताप पाटिल चिखलीकर ने भाजपा नेताओं पर निशाना साधा है, उन्होंने भाजपा सांसद अशोक चव्हाण कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा को लोहा में उम्मीदवार ही नहीं मिल रहे, इसलिए एक घर के लोगों को प्रत्याशी बना दिया. इतना ही नहीं उन्होंने पार्टी नेतृत्व से इस मामले को गंभीरता से लेने की अपील की है और इसका जिम्मेदार अशोक चव्हाण को जिम्मेदार ठहराया है.
कमरे में कोयला जलाकर सो रहे चार कर्मचारियों की दम घुटने से मौत
21 Nov, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कानपुर । यूपी के कानपुर महानगर के पनकी थाना क्षेत्र में फैक्ट्री के कमरे में सो रहे चार युवकों की मौत हो गई। गुरुवार सुबह जब फैक्ट्री कर्मचारियों ने कमरे का दरवाजा खटखटाया तो कोई हलचल नहीं हुई। तुरंत इसकी सूचना फैक्ट्री मालिक को दी गई। कमरा खोलकर देखा गया तो चारों की लाश पड़ी मिली। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। मौके पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल पर जांच की है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर आशुतोष कुमार ने बताया कि अभी तक की पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है, कि चारों युवक बुधवार रात को कमरे में आग जलाकर सोए हुए थे। संभवतः दम घुटने से उनकी मौत हुई है. मृतक युवकों की पहचान अयोध्या निवासी अमित वर्मा (32), देवरिया निवासी संजू सिंह (22), दौड़ अंसारी (28) और राहुल सिंह (23) के रूप में हुई है। पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने बताया कि ऑयल सीड मील में काम चल रहा था। वहां कुल सात कर्मचारी मौजूद थे। इनमें से तीन बाहर चले गए थे। रात में चार युवकों ने खाना खाने के बाद कमरे के अंदर कोयला जलाकर दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। कमरे में किसी प्रकार का वेंटिलेशन नहीं था। कोयला जलने से कार्बन मोनोऑक्साइड गैस पैदा हुई, जिसे चारों युवक उसी में सांस लेते रहे। उसी दौरान उनकी मौत हो गई।
देश में जलवायु संकट गहराया: चार वर्षों में 400 फीसदी फसल को नुकसान
21 Nov, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश में जलवायु संकट गहराया है और 2025 (जनवरी से सितंबर) में 99 फीसदी दिन किसी न किसी चरम मौसमी घटना की चपेट में रहे। देश ने लू, शीत लहर, बिजली, तूफान, भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाओं का सामना किया। इस भयावह स्थिति का मानवीय और आर्थिक दोनों तरह से भारी खामियाजा चुकाना पड़ा है। सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरनमेंट (सीएसई) और डाउन टू अर्थ की वार्षिक क्लाइमेट इंडिया 2025 रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक इन नौ महीनों में, चरम मौसमी घटनाओं ने 4,064 लोगों की जान ली, जो पिछले चार वर्षों की तुलना में 48 फीसदी की वृद्धि है। कृषि क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, जिसमें 9.47 मिलियन हेक्टेयर (करीब 47 मिलियन एकड़) फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ, जो चार वर्षों में 400 फीसदी की भारी वृद्धि को दर्शाता है। इसके अलावा, 99,533 घर नष्ट हुए और लगभग 58,982 जानवरों की मौत हुई। 2025 में, कम से कम 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 2022 के बाद से सबसे अधिक चरम मौसमी दिन दर्ज किए गए। फरवरी से सितंबर 2025 तक, लगातार आठ महीनों तक देश के 30 या उससे अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चरम मौसम की घटनाएं रिकॉर्ड की गईं।
हिमाचल में सबसे अधिक 257 चरम मौसमी दिन रहे
हिमाचल प्रदेश (257 दिन) में देश में सबसे अधिक चरम मौसमी दिन रहे, जबकि मध्य प्रदेश में सबसे अधिक 532 मौतें दर्ज की गईं। रिपोर्ट बताती है कि मॉनसून का मौसम सबसे अधिक विनाशकारी रहा। लगातार चौथे वर्ष, जून से सितंबर तक के सभी 122 मॉनसून दिन चरम मौसम से प्रभावित रहे, जिससे 3,007 मौतें हुईं। कुल 4,064 मौतों में, भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन सबसे घातक रहे, जिनसे 2,440 मौतें हुईं, इसके बाद बिजली और तूफान से 1,456 मौतें हुईं।
2025 में जलवायु के कई रिकॉर्ड टूटे
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 ने कई जलवायु रिकॉर्ड तोड़े। जनवरी 1901 के बाद पांचवां सबसे शुष्क महीना था, जबकि फरवरी 124 वर्षों में सबसे गर्म रहा। सितंबर में देश का सातवां सबसे अधिक औसत तापमान दर्ज किया गया। महाराष्ट्र 84 लाख हेक्टेयर के साथ फसल क्षेत्र के नुकसान के मामले में सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्य था। क्षेत्रीय रूप से, उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में घटनाओं की सबसे अधिक आवृत्ति दर्ज की गई, जबकि मध्य क्षेत्र में 1,093 लोगों की मौतें हुईं।
जलवायु परिवर्तन का पैमाना समझना होगा
रिपोर्ट जारी करते हुए, सीएसई की महानिदेशक सुनिता नारायण ने कहा, देश को अब सिर्फ आपदाओं को गिनने की जरूरत नहीं है, बल्कि उस पैमाने को समझने की जरूरत है जिस पर जलवायु परिवर्तन हो रहा है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर उत्सर्जन कटौती की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया, क्योंकि इतने बड़े पैमाने की आपदाओं के लिए कोई भी अनुकूलन संभव नहीं होगा। सीएसई के कार्यक्रम निदेशक किरन पांडे ने मानसून के दौरान बढ़ते तापमान को चिंताजनक बताया, जो अनियमित और चरम मौसमी घटनाओं को ट्रिगर कर सकता है। डाउन टू अर्थ के प्रबंध संपादक रिचर्ड महापात्रा ने कहा कि यह रिपोर्ट एक आवश्यक चेतावनी है और बिना निर्णायक शमन प्रयासों के आज की आपदाएं कल का नया सामान्य बन जाएंगी।
उठक-बैठक लगवाने वाली टीचर गिरफ्तार
21 Nov, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पालघर। महाराष्ट्र के पालघर जिले में छठवीं कक्षा की छात्रा काजल की मौत के मामले में पुलिस ने गुरुवार को महिला टीचर ममता यादव को गिरफ्तार किया है। इसी टीचर ने बच्ची को 100 उठक-बैठक की सजा दी थी।उसके खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है। वालीव पुलिस के मुताबिक घटना 8 नवंबर की है, जब 10 मिनट लेट आने पर टीचर ने बच्ची को 100 उठक-बैठक की सजा दी। इससे बच्ची की तबीयत बिगड़ी और 5 दिन बाद 13 नवंबर को इलाज के दौरान बच्ची ने दम तोड़ दिया था। घटना के बाद डीईओ ने जांच के आदेश दिए थे। टीचर ममता को पहले ही सतिवली के प्राइवेट स्कूल से हटाया जा चुका था। बच्ची की मौत के बाद स्थानीय लोगों और मनसे कार्यकर्ताओं ने विरोध किया, जिसके बाद पुलिस ने केस दर्ज किया।
भारतीय वायुसेना के रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट की आकस्मिक फोर्स लैंडिंग
21 Nov, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अगरतला। राजस्थान स्थित जैसलमेर के निकट भारतीय वायुसेना के एक रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (आरपीए) को आकस्मिक फोर्स लैंडिंग करनी पड़ी है। यह एयरक्राफ्ट एक नियमित प्रशिक्षण मिशन पर था। इस दौरान एयरक्राफ्ट के इंजन में तकनीकी खराबी आ गई। हालांकि, अद्भुत पेशेवर कौशल का प्रदर्शन करते हुए एयरक्राफ्ट को सुरक्षित रूप से लैंड करा लिया गया। यह घटना उस समय हुई जब प्रशिक्षण सॉर्टी के दौरान रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट के इंजन में अचानक खराबी दर्ज की गई। गुरुवार को भारतीय वायुसेना ने इस संदर्भ में यह आधिकारिक जानकारी दी। भारतीय वायुसेना द्वारा जारी आधिकारिक बयान में बताया गया है कि ऑपरेटरों ने स्थिति का त्वरित आकलन किया। वायुसेना के ऑपरेटरों ने नियंत्रित तरीके से एयरक्राफ्ट को एक खाली फील्ड में सुरक्षित उतारा। इस सूझबूझ के कारण न तो किसी प्रकार की जनहानि हुई और न ही जमीन पर किसी संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
वायुसेना ने यह भी पुष्टि की है कि एयरक्राफ्ट को बहुत कम नुकसान हुआ है और उसे सुरक्षित रूप से बरामद कर लिया गया है। वायुसेना के अधिकारियों के अनुसार, इंजन में आई खराबी की विस्तृत तकनीकी जांच जल्द ही शुरू की जाएगी। तकनीकी खराबी के सटीक कारणों का पता लगाना इसलिए भी जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को होने से रोका जा सके।
ममता बनर्जी ने SIR को बताया 'खतरनाक', चुनाव आयोग को लिखा पत्र - जानिए क्या है पूरा मामला?
21 Nov, 2025 08:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
SIR In Bengal: पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) शुरू की गई है. बिहार के बाद अब बंगाल में भी यह अभियान तेज हुआ है, लेकिन इसके चलते राजनीतिक विवाद गहरा गया है. तृणमूल कांग्रेस लगातार इस प्रक्रिया का विरोध कर रही है और अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर कार्रवाई रोकने की मांग की है.
CM ममता ने लगाए ये आरोप
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने तीन पन्नों के पत्र में आरोप लगाया कि बूथ-लेवल ऑफिसर (BLO) पर असहनीय कार्यभार डाल दिया गया है. उन्होंने कहा कि BLO घर-घर जाकर सर्वे कर रहे हैं और उन पर "अमानवीय दबाव" बनाया जा रहा है. ममता ने लिखा कि कर्मचारियों को सहायता देने, समय-सीमा बढ़ाने या खामियों को दूर करने के बजाय राज्य निर्वाचन आयोग धमकी भरे रवैये के साथ काम कर रहा है.
जलपाईगुड़ी का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि जलपाईगुड़ी के मालबाजार में एक महिला BLO अपने घर में मृत मिली थीं. परिवार का आरोप है कि वह SIR के दबाव से तनाव में थीं. इससे पहले केरल और राजस्थान में भी BLO के आत्महत्या करने की खबरें आ चुकी हैं. ममता ने सोशल मीडिया पर भी इस घटना पर दुख जताया और इसे प्रणालीगत विफलता बताया.
SIR प्रक्रिया को बताया खतरनाक
अपने पत्र में ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त से अपील की कि SIR प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए, BLO को पर्याप्त प्रशिक्षण और सहायता दी जाए, और इस पूरी कवायद की समीक्षा की जाए. उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रक्रिया अनियोजित, अव्यवस्थित और खतरनाक है, जिससे अधिकारी और आम नागरिक दोनों परेशान हो रहे हैं. ममता ने आरोप लगाया कि बुनियादी तैयारी और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव में शुरुआत से ही यह अभियान लड़खड़ा गया है.
EC का आया जवाब
दूसरी ओर, चुनाव आयोग के सूत्रों ने दावा किया है कि BLO को दिल्ली में आयोग के ट्रेनिंग सेंटर और राज्य के CEO कार्यालय द्वारा पूरी ट्रेनिंग दी गई है. आयोग ने कहा कि वह मुख्यमंत्री की चिट्ठी का बारीकी से अध्ययन कर रहा है और जल्द विस्तृत जवाब देगा. साथ ही यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर BLO की मदद के लिए अतिरिक्त अधिकारी तैनात किए जा सकते हैं, जैसे बिहार में जीविका दीदी और वॉलंटियर्स को जोड़ा गया था.
भूकंप के तेज झटके: 5.2 तीव्रता का भूकंप, जानिए कहां और कितनी गहराई पर था केंद्र, क्या है खतरा?
21 Nov, 2025 08:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Pakistan Earthquake: पाकिस्तान में एक बार फिर से भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. हालांकि इस भूकंप से अभी तक कहीं से भी किसी भी प्रकार के जान या माल के नुकसान की खबर नहीं है. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान के उत्तरी क्षेत्र में शुक्रवार तड़के भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 5.2 दर्ज की गई. ये भूकंप शुक्रवार सुबह करीब 3 बजकर 9 मिनट (स्थानीय समयानुसार सुबह 2:39 बजे) पर आया. जिससे देश के कई उत्तरी इलाका दहल गया.
एनसीएस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया. जिसमें उसने बताया कि इस भूकंप का केंद्र 36.12° उत्तरी अक्षांश और 71.51° पूर्वी देशांतर पर जमीन के नीचे 135 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था. यह स्थान पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा के पास एक पहाड़ी क्षेत्र है, जहां नियमित भूकंप आते रहते हैं.
अधिक गहराई में आने की वजह से इस भूकंप से नुकसान की संभावना कम है. भूकंप वैज्ञानिकों का कहना है कि गहरे भूकंप अक्सर सतह तक पहुंचने से पहले ही अधिक ऊर्जा नष्ट कर देते हैं, जबकि उथले भूकंप ज़्यादा ज़मीनी कंपन पैदा करते हैं.
भूकंप के लिए बेहद संवेदनशील है पाकिस्तान
बता दें कि पाकिस्तान भूकंप के लिए बेहद संवेदनशील है. क्योंकि भारत का ये पड़ोसी देश दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय बेल्टों में से एक पर स्थित है, जहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटें टकराती हैं. यह निरंतर टकराव हिमालय को ऊपर की ओर धकेलता है. जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और उत्तरी भारत में लगातार भूकंप का खतरा पैदा करता है.
वहीं पाकिस्तान के बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और गिलगित-बाल्टिस्तान सहित कई प्रांत सीधे प्लेट सीमा पर स्थित हैं. इन क्षेत्रों में अक्सर मध्यम से तेज झटके महसूस किए जाते हैं. इसके साथ ही भारतीय प्लेट के किनारे स्थित सिंध और पंजाब भी भूकंपीय जोखिमों का सामना करते हैं, हालांकि यहां आने वाले भूकंपों की तीव्रता काफी कम होती है.
BSNL के प्रीपेड प्लान्स हुए महंगे, जानिए कैसे बचाएं अपने पैसे और कौन से प्लान्स हैं अभी भी सस्ते!
21 Nov, 2025 08:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
BSNL Prepaid Plan: अगर आप BSNL की सिम इस्तेमाल करते हैं, तो आपका रिचार्ज महंगा होने जा रहा है. BSNL ने सीधे तौर पर प्रीपेड प्लान्स की कीमत नहीं बढ़ाई है. लेकिन कई प्लान्स की वैलिडिटी घटा दी है. जिसके चलते सभी प्रीपेड प्लान 20 प्रतिशत तक महंगे हो गए है. कंपनी के इस बदलाव का असर लाखों यूजर्स पर देखने को मिलेगा. टेलीकॉम सेक्टर में बढ़ते हाइक को इस बदलाव के पीछे की बड़ी वजह माना जा रहा है.
प्रीपेड प्लान्स की घटी वैलिडिटी
आमतौर पर टेलीकॉम कंपनियां रिचार्ज प्लान की कीमतें बढ़ाकर टैरिफ महंगा करती हैं, लेकिन BSNL ने एक अलग रणनीति अपनाई है. कंपनी ने अपने प्रीपेड प्लान्स की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन कई लोकप्रिय प्लान्स की वैलिडिटी घटा दी है.
इसका मतलब है कि जिस प्लान में पहले आपको ज्यादा दिनों की वैधता मिलती थी, अब उसी कीमत में आपको कम दिन मिलेंगे. इसके तहत 99, 107, 147, 153, 197, 439 और 879 रुपये के प्रीपेड प्लान्स की वैलिडिटी घटा दी है.
20% तक महंगे हुए प्लान
वैलिडिटी में की गई इस कटौती का सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा. दिनों की संख्या कम होने के कारण BSNL के प्रीपेड प्लान अब पहले के मुकाबले 20 प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं. यदि कोई प्लान पहले 30 दिनों के लिए आता था और अब वह केवल 24 या 26 दिनों के लिए कर दिया गया है, तो आपको साल भर में ज्यादा बार रिचार्ज करना होगा, जिससे आपका कुल खर्च बढ़ जाएगा.
बेंगलुरु टेक समिट में मध्यप्रदेश की धमक : टियर-2 टेक्नोलॉजी हब के रूप में हुआ प्रदर्शन
21 Nov, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु/इंदौर। राज्य सरकार ने बेंगलुरु इंटरनेशनल एग्जीबिशन सेंटर (बीआईईसी) में आयोजित बेंगलुरु टेक समिट (बीटीसी) 2025 में उल्लेखनीय भागीदारी दर्ज की। इस प्रदर्शनी मंडप से राज्य की तेजी से विकसित होती टेक्नोलजी ईकोसिस्टम और भारत के प्रमुख टियर-2 इनोवेशन हब के रूप में मध्यप्रदेश की स्थिति को प्रभावशाली रूप से प्रदर्शित किया गया।
मंडप में प्रमुख रूप से ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) पॉलिसी 2025, ड्रोन प्रमोशन और उपयोग पॉलिसी 2025, AVGC-XR पॉलिसी 2025 और सेमीकंडक्टर पॉलिसी 2025 प्रदर्शित की गईं। इन प्रगतिशील नीतियों का उद्देश्य राज्य को सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं, सेमीकंडक्टर निर्माण, डेटा सेंटर और ड्रोन तकनीक के लिए एक आकर्षक निवेश केंद्र बनाना है।
मध्यप्रदेश के तकनीकी परिदृश्य को 15 से अधिक आईटी पार्क, 1200 से अधिक टेक-स्टार्टअप्स और 2 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के आंकड़ों से सशक्त बताया गया। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में कई बड़ी कंपनियों का संचालन राज्य को एक मजबूत निवेशक-अनुकूल वातावरण प्रदान करता है। राज्य प्रतिनिधिमंडल ने इंफोसिस, टीसीएस, हिताची जैसी प्रमुख कंपनियों के टेक-लीडर्स के साथ संवाद किया। इन संवादों में डेटा सेंटर विस्तार, सेमीकंडक्टर निर्माण, इंजीनियरिंग आरएंडडी और एआई/क्लाउड तकनीक में गहरी रुचि दिखाई दी।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने कहा कि मध्यप्रदेश एक फ्यूचर रैडी इनोवेशन परिदृश्य तैयार कर रहा है, जिसमें मजबूत बुनियादी ढांचा, प्रगतिशील नीतियां और विश्व स्तर की कंपनियों के लिए भरपूर अवसर मौजूद हैं। बीटीसी 2025 में भागीदारी ने राज्य को सबसे निवेश-योग्य और नवाचार-संचालित तकनीकी हब के रूप में स्थापित किया है।
मनी लॉन्ड्रिंग केस में रॉबर्ट वाड्रा पर शिकंजा कसता, ED ने दायर की चार्जशीट
20 Nov, 2025 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ब्रिटेन स्थित रक्षा डीलर संजय भंडारी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। बता दें कि, इससे कथित विदेशी संपत्तियों और अवैध वित्तीय संबंधों की लंबे समय से चल रही जांच फिर से शुरू हो गई है। ये चार्जशीट दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट में दायर की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत वाड्रा का बयान इसी वर्ष जुलाई में दर्ज किया गया था। एजेंसी ने उन पर डिफेंस डीलर भंडारी से जुड़ी विदेशी संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े होने का आरोप लगाया है, जो पहले से ही विदेशों में अघोषित संपत्ति रखने के आरोपों का सामना कर रहा है।
लंदन की संपत्ति से जुड़ा है मामला
2016 में भंडारी पर हुई इनकम टैक्स छापेमारी के बाद शुरू हुई है। इसमें कथित तौर पर ऐसे ईमेल और दस्तावेज मिले थे जो वाड्रा और उनके सहयोगियों के साथ उसके संबंधों की ओर इशारा करते थे। इन सामग्रियों में कथित तौर पर लंदन स्थित एक संपत्ति के रिनोवेशन का ज़िक्र था, जिसके बारे में माना जाता है कि वह संजय भंडारी की है। जांचकर्ताओं का दावा है कि इस संपत्ति का रिनोवेशन रॉबर्ट वाड्रा के निर्देशों और उनसे जुड़े बिचौलियों के जरिए किया गया था।
संजय भंडारी घोषित हो चुका भगोड़ा
बता दें कि, पिछले कुछ सालों में ईडी ने हरियाणा में वाड्रा, भंडारी और दोनों से जुड़े व्यक्तियों से जुड़े भूमि लेनदेन की भी जांच की है।
आरोप है कि ये सौदे एक व्यापक नेटवर्क का हिस्सा थे जिसके माध्यम से धन का लेन-देन किया गया और संपत्ति अर्जित की गई। 2016 में भारत छोड़कर भागे भंडारी को दिल्ली की एक अदालत ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया है। वहीं, एजेंसी ने इससे पहले भारत में कई संपत्तियों को कुर्क किया था, जिनके बारे में कहा गया था कि वे वाड्रा या उनसे जुड़ी संस्थाओं से जुड़ी हैं। एजेंसी का दावा था कि वे भंडारी के विदेशी सौदों के माध्यम से अर्जित अपराध की आय हैं।
रॉबर्ट वाड्रा ने आरोपों को किया खारिज
गौरतलब है कि, रॉबर्ट वाड्रा ने लगातार आरोपों को खारिज किया है और जांच को राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा है कि लंदन में उनकी कोई संपत्ति नहीं है और उन्होंने मामले में बरामद दस्तावेजों की ईडी की व्याख्या पर सवाल उठाए हैं।
सबसे ज्यादा बार सीएम की शपथ लेने का रिकॉर्ड नीतीश कुमार के नाम दर्ज
20 Nov, 2025 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। बिहार की जनता ने फिर नीतीश कुमार के हाथ में राज्य की बागडोर सौंप दी है। उन्होंने नीतीश को अपना नया सीएम चुन लिया है। गुरुवार को नीतीश कुमार बिहार के सीएम के रूप में 10वीं बार सीएम पद की शपथ ली। बता दें वह इससे पहले 9 बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। इसके साथ उन्होंने देश में सबसे ज्यादा बार सीएम पद की शपथ लेने का रिकॉर्ड भी कायम कर लिया है।
10वीं बार सीएम बनने के बावजूद नीतीश कुमार सबसे लंबे समय तक सीएम पद पर रहने वाले मुख्यमंत्री नहीं है। यह रिकॉर्ड सिक्किम के पूर्व सीएम पवन कुमार चामलिंग के नाम है। अगर नीतीश कुमार इस रिकॉर्ड को तोड़ना चाहते हैं, तो उन्होंने अगले 6 सालों तक सीएम पद पर बने रहना होगा।
बता दें नीतीश कुमार अब तक 9 बार सीएम पद का कार्यभार संभाल चुके हैं और गुरुवार को 10वीं बार सीएम पद की शपथ ली। वह पहली बार साल 2000 में 7 दिनों के लिए सीएम बने थे। उन्होंने एक सीएम के तौर पर 18 साल से ज्यादा का सफर तय किया है। बिहार के इतिहास में आज तक किसी भी नेता ने इतने लंबे समय तक सीएम का पद नहीं संभाला था। इसके साथ अगर वह अलग 6 सालों तक सीएम पद पर बने रहते हैं, तो वह देश में सबसे ज्यादा लंबे समय तक सीएम पद पर बने रहने का भी रिकॉर्ड अपने नाम कर लेंगे।
वहीं तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता हैं, जो साल 1991 से लेकर 2016 तक 6 बार राज्य के मुख्यमंत्री पद पर काबिज रहीं। जयललिता, जिन्हें लोग ‘अम्मा’ के नाम से जानते थे उन्होंने पहली बार 1991 में तमिलनाडु की सबसे कम उम्र की सीएम के तौर पर पद संभाला था। उनका कार्यकाल अधिकारों को सेंट्रलाइज करने और सोशल वेलफेयर प्रोग्राम शुरू करने के लिए खास था। इस सूची में तीसरा नाम है सिक्किम के पूर्व सीएम पवन कुमार चामलिंग का, जिन्होंने 1994 से लेकर 2019 तक 5 बार राज्य के सीएम पद की शपथ ली थी। इसके साथ वह देश में सबसे लंबे समय तक सीएम बने रहने वाले पहले शख्स हैं और अब तक यह रिकॉर्ड उन्हीं के नाम है। एक सीएम के तौर पर उन्होंने 24 साल 165 दिनों तक सीएम के रूप में कार्य किया।
पवन कुमार चामलिंग के साथ-साथ ओडिशा के पूर्व सीएम नवीन पटनायक और पश्चिम बंगाल के पूर्व सीएम ज्योति बसु भी 5 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। नवीन पटनायक में पहली 5 मार्च 2000 को पहली बार ओडिशा की सत्ता संभाली थी, लेकिन साल 2024 में हुए विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा और वह 12 जून 2024 तक 24 साल 99 दिनों तक ही सीएम रहे।
वहीं पश्चिम बंगाल के पूर्व सीएम ज्योति बसु भी 5 बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं। उन्होंने पहली बार 1977 में सीएम पद पर रहते हुए बंगाल की सत्ता संभाली थी। वह साल 2000 तक पश्चिम बंगाल के सीएम रहे। इस दौरान उन्होंने 5 बार राज्य के सीएम पद की शपथ ग्रहण की।
कामकाजी महिलाओं से क्यों सुप्रीम कोर्ट ने कहा, समय रहते अपनी वसीयत बना लें
20 Nov, 2025 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। वर्तमान में महिलाएं किसी भी तरह से पुरुषों से कम नहीं हैं। महिलाएं अपने दम पर प्रॉपर्टी भी बना रही हैं। लेकिन, आपने कभी सोचा है कि आत्मनिर्भर महिलाएं अपनी संपत्ति की रक्षा किस तरह से करें? खासकर उन हालातों में जब किसी विवाहित महिला की मौत होती है और उनकी कोई संतान भी नहीं होती हैं। इसतरह के मामलो में उस महिला का पति उनकी संपत्ति का स्वाभाविक उत्तराधिकारी बन जाता है। फिर चाहे महिला को माता-पिता की ओर से प्रॉपर्टी मिली हो या उन्होंने अपनी मेहनत से अर्जित की गई हो। सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं को अपना वसीयतनामा बनाने की सलाह दी है, ताकि वे अपनी संपत्ति के बारे में खुद फैसला ले सकें। फिर चाहे उनकी खुद की कमाई प्रॉपर्टी हो या माता-पिता से मिली संपत्ति हो।
सुप्रीम कोर्ट ने महत्त्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए सभी हिंदू महिलाओं से अपील की कि वे अपनी स्व-अर्जित और अन्य संपत्तियों के बंटवारे को लेकर किसी भी तरह का विवाद टालने के लिए समय रहते वसीयत तैयार कर लें। शीर्ष अदालत ने कहा कि बिना वसीयत के महिलाओं की संपत्ति का उनके माता-पिता को न मिल पाना अक्सर कड़वाहट और तकलीफ का कारण बनता है, इस वसीयत के द्वारा रोका जा सकता है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने यह सलाह उस वक्त दी जब वह हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 15(1)(बी) को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस प्रावधान में यदि कोई हिंदू महिला बिना वसीयत, बिना संतान और बिना पति की मृत्यु होती है, तब उसकी संपत्ति पर पति के वारिसों का अधिकार माता-पिता से ऊपर होगा।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने वकील द्वारा दायर जनहित याचिका को सुनने से इंकार करते हुए कहा कि इसतरह के संवैधानिक सवाल उन लोगों द्वारा उठाने चाहिए जो वास्तव में इससे प्रभावित हों। अदालत ने प्रावधान की वैधता पर कोई अंतिम राय देने के बजाय इस प्रश्न को खुला छोड़ दिया। केंद्र की ओर से उपस्थित अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने प्रावधान का बचाव करते हुए कहा कि 1956 में कानून बनाने वालों ने एक वैज्ञानिक ढांचा तैयार किया था। उन्होंने कहा कि तब यह कल्पना नहीं की गई थी कि महिलाएं इतनी बड़ी मात्रा में स्वयं द्वारा अर्जित संपत्ति की मालिक होंगी, लेकिन अधिनियम की धारा 30 के तहत महिलाओं को अपनी संपत्ति अपनी इच्छा अनुसार वसीयत करने का पूरा अधिकार दिया गया है।
सेना पर टिप्पणी केस: सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को 4 दिसंबर तक राहत दी
20 Nov, 2025 04:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे एक मामले में राहत जारी रखी है। कोर्ट ने उस मामले में ये राहत जारी रखी है, जिसमें कांग्रेस सांसद पर साल 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सेना पर कथित अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप है।
दरअसल, सु्प्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर लगी अंतरिम रोक को 4 दिसंबर तक बढ़ा दिया। दो जजों की पीठ जस्टिस एम.एम सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने यह फैसला लिया है। कोर्ट ने सुनवाई यह कहते हुए टाल दी कि सुनवाई टालने के लिए एक लेटर भेजा गया था।
राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को दी है चुनौती
बता दें कि यह पूरा मामला राहुल गांधी की कथित टिप्पणी से जुड़ा है, जिसको लेकर आरोप लगे हैं कि कांग्रेस नेता ने सेना का अपमान किया है। राहुल गांधी ने 29 मई के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की उस अर्जी को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने लखनऊ की ट्रायल कोर्ट की ओर से जारी समन को रद करने की मांग की थी।
पहले भी कार्यवाही पर रोक लगा चुका है कोर्ट
गौरतलब है कि इससे पहले अगस्त में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की आगे की कार्यवाही पर रोक लगाने का आदेश दिया था। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार और शिकायतकर्ता से जवाब मांगा था। हालांकि, उसी दौरान कोर्ट ने पूछा था कि उन्होंने कैसे यह कह दिया कि 2000 वर्ग किलोमीटर भारतीय भूमि चीन के कब्जे में है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या आप वहां पर मौजूद थे? कोर्ट ने यह भी कहा था कि अगर आप सच्चे भारतीय होंगे, तो ऐसे बयान कभी नहीं देंगे।
राहुल के वकील की दलील क्या है?
उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने दलील दी है कि विपक्ष के नेता को देश के मुद्दों पर सवाल उठाने से रोका नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार, कोर्ट को कोई भी आपराधिक शिकायत स्वीकार करने से पहले आरोपी की भी बात सुननी चाहिए।
4 दिसंबर को अगली सुनवाई
राहुल गांधी के वकील की दलील है कि शिकायत पढ़कर ही आरोप संदिग्ध लगते हैं और यह भी कहा कि राहुल गांधी लखनऊ के निवासी नहीं हैं, इसलिए समन जारी करने से पहले आरोपों की जांच करनी चाहिए। बता दें इस मामले में अगली सुनवाई 4 दिसंबर को होगी।
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