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पुतिन ने जेलेंस्की को दिया मॉस्को आने का न्योता, एक बार फिर जगी शांति की उम्मीद
31 Jan, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को। पिछले चार वर्षों से जारी रूस और यूक्रेन के भीषण युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक ऐसा कदम उठाया गया है, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। अब तक जेलेंस्की और पुतिन के बीच जिस नफरत और तल्खी की बातें की जा रही थीं, उन्हें किनारे रखते हुए रूस ने पहली बार बातचीत के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आधिकारिक तौर पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को शांति वार्ता के लिए मॉस्को आमंत्रित किया है। इस कदम का अर्थ यह है कि अब दोनों देश किसी तीसरे पक्ष के दखल के बिना आमने-सामने बैठकर इस खूनी संघर्ष को सुलझाने की कोशिश कर सकते हैं।
गुरुवार को क्रेमलिन से आई इस खबर ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा गलियारों में हलचल तेज कर दी है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने पुष्टि की है कि न्योता भेज दिया गया है, हालांकि जेलेंस्की प्रशासन की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या पुष्टि नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मुलाकात सफल होती है, तो यह सदी की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत साबित हो सकती है। इस बड़ी हलचल के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सक्रियता दिखाई है। ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से फोन पर लंबी बातचीत की है। वॉशिंगटन में कैबिनेट मीटिंग के दौरान ट्रंप ने खुलासा किया कि उन्होंने पुतिन से मानवीय आधार पर कीव और अन्य यूक्रेनी शहरों पर हमले रोकने की व्यक्तिगत गुजारिश की थी। ट्रंप के अनुसार, उन्होंने पुतिन से कहा था कि यूक्रेन में पड़ रही हाड़ कंपा देने वाली भीषण ठंड को देखते हुए सैन्य कार्रवाइयों पर लगाम लगाई जाए। ट्रंप ने दावा किया कि पुतिन ने उनकी बात मानते हुए वादा किया है कि वे कम से कम एक हफ्ते तक कीव पर कोई हमला नहीं करेंगे। ट्रंप ने इसे पुतिन का बड़प्पन करार देते हुए कहा कि जो लोग फोन कॉल को बेकार बता रहे थे, वे गलत साबित हुए हैं। वर्तमान में यूक्रेन अभूतपूर्व ऊर्जा संकट और भीषण ठंड का सामना कर रहा है। रूस के हालिया हमलों के कारण यूक्रेन का पावर ग्रिड बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे लाखों लोग बिना बिजली और हीटिंग के रहने को मजबूर हैं। ऐसी स्थितियों में जहां हड्डियां गला देने वाली ठंड मौत का सबब बन रही है, वहां एक हफ्ते का संघर्ष विराम और मॉस्को में सीधी वार्ता का प्रस्ताव शांति की एक नई किरण लेकर आया है। अब पूरी दुनिया की नजरें जेलेंस्की के जवाब पर टिकी हैं कि क्या वे इस न्योते को स्वीकार कर युद्ध के खात्मे की ओर कदम बढ़ाते हैं या नहीं।
वैश्विक समस्याएं किसी एक शक्ति के हुक्म चलाने से हल नहीं होंगी: यूएन महासचिव
31 Jan, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयार्क। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गुरुवार को अमेरिका और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधा है। गुटेरेस ने साफ कहा कि किसी एक देश के हुक्म चलाने से दुनिया नहीं चलती और इससे किसी भी समस्या का निपटारा नहीं किया जा सकता है। गुटेरेस ने चीन पर भी निशाना साधा। वहीं यूएन चीफ ने बहुध्रुवीयता की जरूरत पर जोर देते हुए हालिया भारत-ईयू ट्रेड डील का भी जिक्र किया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गुटेरेस अपने कार्यकाल के 10वें और आखिरी साल की शुरुआत के मौके पर यह बात कही।
बता दें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद इस साल के अंत में उनके उत्तराधिकारी का चुनाव करेगी। अपने कार्यकाल में कई युद्धों की शुरूआत देखने वाले गुटेरेस बदलते वैश्विक परिदृश्य को लेकर चिंता जताई। इस दौरान गुटेरेस ने कहा कि वैश्विक समस्याएं किसी एक शक्ति के हुक्म चलाने से हल नहीं होंगी और दो शक्तियों द्वारा दुनिया को 2 भाग में बांट देने से कुछ होगा। उन्होंने अमेरिका और चीन का नाम भी लिया। गुटेरेस ने कहा कि यह विचार है कि दो पोल्स हैं, एक अमेरिका में केंद्रित है और दूसरा चीन में… लेकिन अगर हम एक स्थिर दुनिया चाहते हैं, अगर हम एक ऐसी दुनिया चाहते हैं जिसमें शांति बनी रहे, जिसका विकास हो सके और समानता आए, तो हमें बहुध्रुवीयता का समर्थन करने की जरुरत है। मैं बहुत सारी पॉजिटिव उम्मीदों के साथ हाल के ट्रेड एग्रीमेंट देख रहे हैं। जैसे भारत और ईयू के बीच हाल ही में हुआ समझौता।
बता दें हाल के दिनों में कई देशों ने अमेरिकी प्रभुत्व के खिलाफ बयान दिए हैं। वहीं गुटेरेस की ये टिप्पणी ट्रंप द्वारा बोर्ड ऑफ पीस के गठन के एक हफ्ते बाद आई हैं। ट्रंप ने इसे संयुक्त राष्ट्र का विकल्प तक बता दिया है। हालांकि गुटेरेस ने ट्रंप को संदेश देते हुए कहा कि मेरी राय में अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की मूल जिम्मेदारी संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद की है। गुटेरेस ने कहा कि आज के समय में अंतर्राष्ट्रीय कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। अंतर्राष्ट्रीय कानून को कुचला जा रहा है। सहयोग कम हो रहा है और बहुपक्षीय संस्थाओं पर कई मोर्चों पर हमला हो रहा है। आज जंग शुरू करने वालों को सजा नहीं मिल रही जिससे तनाव बढ़ रहा है, अविश्वास बढ़ रहा है और बुरे लोगों के लिए मौके बढ़ रहे हैं। गुटेरेस ने कहा है कि इतनी बाधाओं के बावजूद संयुक्त राष्ट्र हार नहीं मानेगा और शांति की स्थापना करने की पूरी कोशिश करेगा।
रूस की जगह अब वेनेजुएला बनेगा भारत का ऑयल पार्टनर, ट्रंप ने दिया ये बड़ा ऑफर
31 Jan, 2026 10:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन. अमेरिका (US) ने भारत (India) से कहा है कि वह जल्द ही वेनेजुएला (Venezuela) से कच्चा तेल (Crude oil) खरीदना दोबारा शुरू कर सकता है. रॉयटर्स से बात करने वाले मामले से जुड़े तीन सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका इस सप्लाई को रूसी तेल के विकल्प के तौर पर पेश कर रहा है, क्योंकि भारत रूसी तेल का आयात तेजी से घटाने जा रहा है.
यह पहल ऐसे समय पर हुई है, जब वॉशिंगटन की ओर से रूसी तेल आयात से जुड़े टैरिफ बढ़ाने के बाद भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद में बड़ी कटौती का वादा किया है. सूत्रों के अनुसार, आने वाले महीनों में भारत रूसी तेल का आयात कई लाख बैरल प्रतिदिन तक घटाने की तैयारी में है.
वेनेजुएला से तेल खरीदने वालों पर लगा दिया था टैरिफ
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मार्च 2025 में वेनेजुएला का तेल खरीदने वाले देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था. इसके साथ ही उनकी सरकार ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ अभियान तेज किया था, जिन्हें 3 जनवरी को अमेरिकी बलों ने पकड़ लिया था.
लेकिन कौन बेचेगा वेनेजुएला का तेल?
इसके बाद अमेरिका के रुख में बदलाव के संकेत मिले. वॉशिंगटन ने नई दिल्ली से कहा कि वह रूसी सप्लाई में कमी की भरपाई के लिए वेनेजुएला से तेल खरीद फिर शुरू कर सकता है. यह कदम रूस के तेल निर्यात से होने वाली आय को सीमित करने की अमेरिकी रणनीति का हिस्सा है, जिससे यूक्रेन युद्ध को फंडिंग मिल रही है. सूत्रों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वेनेजुएला का तेल किसी निजी ट्रेडिंग कंपनियों के जरिए बेचा जाएगा या सीधे वहां की सरकारी तेल कंपनी के माध्यम से.
‘कच्चे तेल के स्रोतों में लाएंगे विविधता’
यूक्रेन पर 2022 में रूस के हमले के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों और भारी छूट के चलते भारत रूस का बड़ा तेल खरीदार बन गया था. हालांकि बाद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ा दिए. रूसी तेल खरीद से जुड़े अतिरिक्त टैरिफ जोड़ने के बाद अगस्त तक ये टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गए. पिछले हफ्ते तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि रूसी तेल का आयात घटाने के साथ भारत अपने कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता ला रहा है. उन्होंने वेनेजुएला को लेकर सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा.
5 से 6 लाख बैरल प्रतिदिन तक गिर सकता है आयातरॉयटर्स के दो सूत्रों के मुताबिक, भारत जल्द ही रूसी तेल आयात को 10 लाख बैरल प्रतिदिन से नीचे लाने की तैयारी में है. जनवरी में यह करीब 12 लाख बैरल प्रतिदिन था. फरवरी में इसके 10 लाख बैरल और मार्च में करीब 8 लाख बैरल प्रतिदिन तक गिरने का अनुमान है. एक अन्य सूत्र ने कहा कि आगे चलकर यह मात्रा 5 से 6 लाख बैरल प्रतिदिन तक भी आ सकती है. ऐसा होने से भारत को अमेरिका के साथ व्यापक व्यापार समझौता करने में मदद मिल सकती है.
व्यापार से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में भारत का रूसी तेल आयात पिछले दो साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया. इससे भारत के आयात में ओपेक देशों के तेल की हिस्सेदारी 11 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई. भारतीय रिफाइनरियों ने कमी पूरी करने के लिए मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका से तेल की खरीद बढ़ा दी है.
पूरे यूरोपीय यूनियन को एक न्यूक्लियर अंब्रेला के नीचे लाना होगा: फ्रेडरिक मर्ज
31 Jan, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि जब तक अमेरिका है, तभी तक यूरोप सुरक्षित है, लेकिन अब इस ब्लैकमेल का जवाब जर्मनी ने देने की ठान ली है। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने संकेत दिए हैं, जिसमें कहा जा रहा कि जर्मनी अब यूरोपीय देशों को न्यूक्लियर अंब्रेला मुहैया कराएगा। जर्मनी इसके जिए फ्रांस के साथ जुगलबंदी करने की योजना बना रहा है और न्यूक्लियर सिक्यूरिटी डेवलप करने की तैयारी है।
यूरोपीय देश लंबे समय से अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका और उसके न्यूक्लियर वेपन पर निर्भर रहे हैं, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने जिए तरह उन्हें दोयम दर्जे का बताने की कोशिश की है, उससे यूरोपीय देश काफी गुस्से में हैं। ट्रंप की इस हरकत से उनका भरोसा टूट गया है क्योंकि ट्रंप कह चुके हैं कि अमेरिका उन देशों की रक्षा नहीं करेगा जो अपनी सुरक्षा पर पर्याप्त खर्च नहीं कर रहे हैं। ग्रीनलैंड खरीदने और उस पर कब्जा करने की बात कहकर ट्रंप ने आग में घी डाल दी है। इन घटनाओं ने जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि उन्हें अमेरिका के भरोसे रहने के बजाय अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि अमेरिका के साथ मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था का एक विकल्प बनाना होगा। पूरे यूरोपीय यूनियन को एक न्यूक्लियर अंब्रेला के नीचे लाना होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ये बातचीत अभी शुरुआती चरण में है और कोई भी फैसला तत्काल नहीं लिया जाने वाला है। गुरुवार को मर्ज ने कहा कि हम जानते हैं कि हमें कई रणनीतिक और सैन्य नीतिगत फैसलों पर पहुंचना है, लेकिन फिलहाल अभी वह समय नहीं आया है। मर्ज ने यह भी साफ किया कि यह बातचीत अमेरिका के साथ न्यूक्लियर-शेयरिंग के विरोध में नहीं है, बल्कि यह उसे और मजबूत करने की एक कोशिश है।
मर्ज की पार्टी के सहयोगी और संसदीय रक्षा समिति के प्रमुख ने इस योजना को और बल दिया है। उन्होंने दावा किया कि जर्मनी के पास वह तकनीकी क्षमता है जिसका उपयोग यूरोपीय परमाणु हथियार विकसित करने में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमारे पास मिसाइलें या वारहेड्स नहीं हैं, लेकिन हमारे पास एक अहम तकनीकी है जिसे हम एक संयुक्त यूरोपीय पहल में योगदान दे सकते हैं।
बता दें फ्रेडरिक मर्ज का यह बयान बताता है कि यूरोप अब सुरक्षा के मामले में ‘आत्मनिर्भर’ होने की दिशा में गंभीर है। ट्रंप की अनिश्चित नीतियों ने जर्मनी को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अगर अमेरिका पीछे हटता है, तो यूरोप के पास अपनी सुरक्षा के लिए क्या विकल्प बचेगा? खुद का परमाणु बम न सही, लेकिन ब्रिटेन और फ्रांस के साथ मिलकर एक ‘ज्वाइंट न्यूक्लियर अंब्रेला’ तैयार करना ट्रंप के ‘सिक्योरिटी दांव’ को बेदम करने का नया प्लान हो सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट है कि बर्लिन अब वाशिंगटन की धमकियों के आगे झुकने के बजाय विकल्प तलाश रहा है।
अमेरिकी हमले के चलते ईरान मेट्रो स्टेशनों को बना रहा बंकर, कभी भी हो सकती है जंग?
31 Jan, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच टेंशन बढ़ती जा रही है। ट्रंप ने पहले समुंदर में अपना आर्माडा तैनात किया, फिर खामेनेई से परमाणु पर समझौता करने का प्रेशर डाला। ईरान ने भी ‘हाथ ट्रिगर पर रखा है’। इन हालातों के बीच किसी भी वक्त अमेरिका-ईरान के बीच जंग शुरू होने का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में तेहरान से दो ऐसी खबरें आई हैं, जिसकी वजह से मिडिल ईस्ट में सन्नाटा छा गया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ईरान और रूस से आ रही ये दो खबरें संकेत दे रही हैं कि मध्य पूर्व में किसी भी वक्त एक बड़ा धमाका या महायुद्ध छिड़ सकता है। तेहरान के मेयर ने ऐलान किया है। अमेरिका और इजराइल के बढ़ते खतरों को देखते हुए तेहरान के मेट्रो स्टेशनों और अंडरग्राउंड पार्किंग लॉट्स को ‘इमरजेंसी वॉर शेल्टर’ में बदला जा रहा है। ईरान को डर है कि अमेरिका किसी भी पल उसके सैन्य ठिकानों या परमाणु केंद्रों पर हवाई हमले कर सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई पहले ही सुरक्षित अंडरग्राउंड बंकर में शिफ्ट हो चुके हैं। ईरान ने जवाबी कार्रवाई के लिए अपनी सेना को 1000 नए घातक ड्रोन सौंपे हैं, ताकि किसी भी हमले को ‘कुचलने वाला’ जवाब दिया जा सके।
इसके अलावा रूस ने भी एक बड़ा फैसला लिया है। रूसी परमाणु ऊर्जा निगम के प्रमुख ने बताया कि रूस बुशहर परमाणु संयंत्र से अपने कर्मचारियों को निकालने के लिए पूरी तरह तैयार है। दावा किया जा रहा है कि वहां करीब 400 रूसी विशेषज्ञ और उनके परिवार मौजूद हैं। रूस ने उन्हें अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्ते निकालने का प्लान तैयार किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को ‘परमाणु डील’ साइन करने या फिर ‘अब तक के सबसे भयानक हमले’ का सामना करने की चेतावनी दी है।
इस मुस्लिम देश के पूर्व राष्ट्रपति ने किया भगवान तिरुपति बालाजी का पूजन…हाथ जोड़कर पैदल ही पहुंचे मंदिर
31 Jan, 2026 08:26 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु। इंडोनेशिया के पूर्व राष्ट्रपति जोको विडोडो (Former Indonesian President Joko Widodo) ने गुरुवार को तिरुमला स्थित भगवान वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर (Lord Venkateswara Swamy Temple at Tirumala) में पूजा-अर्चना करने पहुंचे थे। सोशल मीडिया पर उनका वीडियो भी वायरल हो रहा है। वह मंदिर परिसर में हाथ जोड़कर पैदल ही दर्शन के लिए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के अधिकारियों ने विडोडो का स्वागत किया और बाद में उन्हें मंदिर में दर्शन के लिए ले गए।
एक अधिकारी ने बताया, ‘‘इंडोनेशिया के सातवें राष्ट्रपति (विडोडो) ने भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन किए और उनका स्वागत टीटीडी के अधिकारियों ने किया।’’ दर्शन के बाद टीटीडी के अधिकारियों ने उन्हें रेशमी वस्त्र और प्रसाद भेंट किया तथा रंगनायकुला मंडपम में भगवान वेंकटेश्वर की एक तस्वीर प्रदान की।
कभी बौद्ध और हिंदू राजाओं का था शासन
बता दें कि इंडोनेशिया सबसे बड़ा मुस्लिम राष्ट्र है, इसके बावजूद यहां हिंदू संस्कृति की झलक साफ दिखाई देती है। इसे मुनियों का देश कहा जाता है। यहां की आबादी करीब 27 करोड़ है जिनमें से 90 करोड़ मुस्लिम हैं। यहां कभी हिंदू और बौद्ध राजाओं का राज हुआ करता था। ऐसे में आज भी इंडोनेशिया में कई प्रसिद्ध हिंदू मंदिर हैं। इसके अलावा यहां रामायण की भी मान्यता है।
यहां 8वीं सदी में मुस्लिम व्यापारी पहुंचे थे। इसके बाद धीरे-धीरे यहां इस्लाम का प्रचार होने लगा। कछ शासकों ने इस्लाम अपनाया तो घराने ही इस्लामिक हो गए। जो मुस्लिम व्यापारी यहां आते थे वे यहां की स्थानीय महिलाओं से शादी करते थे। ऐसे में धर्मांतरण का एक बड़ा दौर यहां चला। इसी वजह से हिंदू और बौद्ध राजाओं वाला देश एक मुस्लिम राष्ट्र बन गया।
मिंग माफिया परिवार के 11 लोगों को चीन ने दी फांसी, सरगना की ब्रिटेन में थी हवेली
31 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। चीन ने म्यांमार के कुख्यात मिंग माफिया परिवार के 11 लोगों को फांसी दे दी। यह वही गैंग है जो इंटरनेट पर फर्जी रोमांस, क्रिप्टोकरेंसी ठगी, ऑनलाइन स्कैम और इंसानी गुलामी जैसे संगीन अपराधों के लिए बदनाम था। इस गिरोह के सदस्य लोगों को पहले ऑनलाइन प्रेम जाल में फंसाते थे, फिर उन्हें धोखाधड़ी, वेश्यावृत्ति और जबरन मजदूरी जैसे अवैध कामों में धकेल देते थे। चीन की कोर्ट ने इन सभी को सितंबर में मौत की सजा सुनाई थी और गुरुवार को सजा को अमलीजामा पहनाया गया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मिंग परिवार के सदस्यों को ‘हत्या, मारपीट, गैरकानूनी हिरासत, धोखाधड़ी और अवैध कैसीनो संचालन’ जैसे अपराधों के लिए दोषी पाया गया था। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यह गैंग अब तक कम से कम 14 चीनी नागरिकों की हत्या कर चुका था और कई लोगों को अपाहिज बना दिया था। म्यांमार के लाउकैंग क्षेत्र में इनका नेटवर्क अत्यंत क्रूर तरीके से चलता था, जहां पीड़ितों को जबरन बंदी बनाकर उनसे ठगी करवाई जाती थी। मिंग माफिया का तरीका बेहद खतरनाक था। यह लोग ‘लव स्कैम’ के जरिए लोगों को प्रेमजाल में फंसाते, फिर उन्हें क्रिप्टो निवेश के नाम पर लूटते थे। यदि कोई उनके लिए काम करने से इंकार करता, तो उन्हें कैद कर बिजली के झटकों और बर्बर यातनाओं से तोड़ा जाता था।
इस गैंग का सरगना चेन झी ब्रिटेन में आलीशान जिंदगी जी रहा था। लंदन के पॉश इलाके एवेन्यू रोड पर उसकी करोड़ों की हवेली थी, साथ ही कई महंगी कमर्शियल बिल्डिंग्स और फ्लैट्स भी उसके नाम थे। ब्रिटिश सरकार ने उसके सभी ठिकानों को जब्त कर लिया है ताकि आपराधिक कमाई को खत्म किया जा सके। इस प्रकार के माफिया नेटवर्क भारत तक भी पहुंच चुका है। म्यांमार और कंबोडिया में चल रहे कई ‘डिजिटल गुलामी’ केंद्रों में अब तक 70 से ज्यादा भारतीय फंस चुके हैं। हाल ही में भारत सरकार ने बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया है। 6 नवंबर 2025 को भारतीय वायुसेना के विशेष विमानों ने 270 भारतीयों को थाईलैंड के रास्ते बचाया था। इससे पहले मार्च 2025 में भी 549 भारतीयों को म्यांमार-थाईलैंड सीमा से सुरक्षित निकाला था।
रिपोर्ट के मुताबिक अक्सर युवाओं को ‘आईटी जॉब’ का झांसा देकर थाईलैंड बुलाया जाता है और फिर किडनैप कर म्यांमार ले जाया जाता है। वहां उनके पासपोर्ट छीन लिए जाते हैं और उन्हें ‘पिग बुचरिंग’ जैसे ऑनलाइन स्कैम करवाने के लिए मजबूर किया जाता है। मिंग जैसे गैंग अब भारतीयों को भी निशाना बना रहे हैं, क्योंकि वे अंग्रेजी और हिंदी बोलने वालों को भारतीय बाजार में ठगी के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं।
यूनुस के सपने हुए खाक, भारतीय उद्योग बांग्लादेश में आने की थी भविष्यवाणी, अब मिलें बंद होने की कगार पर
30 Jan, 2026 03:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । भारत (India) को लेकर बांग्लादेश (Bangladesh) में हुईं हाल की घटनाओं ने काफी चर्चा बटोरी है। खासकर अंतरिम नेता और नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री मुहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) की एक पुरानी भविष्यवाणी खूब वायरल हो रही है। पिछले साल यानी 2025 में यूनुस भारत (India) पर ट्रंप के भारी भरकम टैरिफ से बेहद खुश नजर आ रहे थे। इतना ही नहीं, उन्होंने यहां तक दावा कर दिया था कि भारतीय इंडस्ट्रीज (विशेष रूप से टेक्सटाइल सेक्टर) बांग्लादेश में फैक्टरियां लगाएंगी, क्योंकि वहां उत्पादन लागत बहुत कम है।
अमेरिकी पत्रकार मेहदी हसन के साथ इंटरव्यू में यूनुस ने दावा किया था कि- ‘अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ के कारण भारतीय उद्योग भारत छोड़कर बांग्लादेश का रुख करेंगे। भारत पर अमेरिका के टैरिफ ज्यादा हैं, जबकि बांग्लादेश को कम टैरिफ मिला है जिससे भारतीय कंपनियां बांग्लादेश में अपनी फैक्ट्रियां लगाएंगी।’ लेकिन आज की हकीकत ये है कि बांग्लादेश की खुद की कपड़े मिलें बंद होने की कगार पर हैं।
घरेलू कपड़ा उद्योग बंद होने की कगार
जनवरी 2026 के अंत में बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग एक बड़े संकट के मुहाने पर खड़ा है। एक ओर अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस भारत पर अमेरिकी टैरिफ के बहाने तंज कस रहे थे, तो दूसरी ओर देश का अपना घरेलू कपड़ा उद्योग बंद होने की कगार पर है। बांग्लादेश का जमीनी हकीकत काफी चिंताजनक है। बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (BTMA) ने घोषणा की है कि 1 फरवरी 2026 से देश की सभी टेक्सटाइल मिलें अनिश्चित काल के लिए बंद कर दी जाएंगी।
BTMA के अध्यक्ष शौकत अजीज रसेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मिल मालिकों के पास बैंक लोन चुकाने की क्षमता नहीं बची है। उनकी पूंजी 50% से ज्यादा घट चुकी है, और कई मिलें पहले ही बंद हो चुकी हैं। बांग्लादेशी मिलों का आरोप है कि भारत से आने वाले सस्ते सूत ने घरेलू बाजार को तबाह कर दिया है। लगभग 12,000 करोड़ टका का स्थानीय स्टॉक बिना बिका पड़ा है। गैस की भारी किल्लत और बढ़ती कीमतों के कारण उत्पादन क्षमता 50% तक गिर गई है। BTMA की मांग है कि सरकार 10-30 काउंट के सूत के आयात पर ड्यूटी-फ्री सुविधा वापस ले और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करे।
भारत-ईयू (EU) डील: बांग्लादेश के लिए खतरे की घंटी
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को मदर ऑफ ऑल डील्स कहा जा रहा है। यह बांग्लादेश के गारमेंट एक्सपोर्ट के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होने वाला है। वर्तमान में बांग्लादेश LDC (अल्प विकसित देश) होने के नाते EU में ड्यूटी-फ्री एक्सेस पाता है, जबकि भारत को 12% टैक्स देना पड़ता है।
इस डील के बाद भारत को भी 0% टैरिफ मिलेगा। भारत के पास खुद का कच्चा माल (कपास और सूत) है। ड्यूटी हटते ही भारतीय कपड़े बांग्लादेशी कपड़ों की तुलना में सस्ते और बेहतर गुणवत्ता वाले हो जाएंगे। बांग्लादेश 2026-27 तक LDC श्रेणी से बाहर हो जाएगा, जिससे उसका खुद का ड्यूटी-फ्री कोटा खत्म हो जाएगा। ऐसे में भारत के साथ मुकाबला करना लगभग असंभव होगा। यूरोपीय संघ में हर तीसरा व्यक्ति बांग्लादेशी डेनिम पहनता है। डील के बाद भारत इस बाजार का एक बड़ा हिस्सा कब्जा सकता है।
मोहम्मद यूनुस जहां एक तरफ भारतीय कंपनियों के बांग्लादेश आने की उम्मीद जता रहे थे, वहीं हकीकत यह है कि बांग्लादेश का अपना ‘बैकवर्ड लिंकेज’ (सूत और कपड़ा बनाने वाली मिलें) बंद हो रहा है।
युद्ध के बीच में रूस का बड़ा कदम, जेलेंस्की को शांति वार्ता के लिए मॉस्को आने का दिया न्योता
30 Jan, 2026 02:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को. रूस (Russia) ने अमेरिका (US) की मध्यस्थता में यूक्रेन युद्ध (Ukraine war) समाप्त करने के प्रयास के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) को शांति वार्ता के लिए मॉस्को आने का निमंत्रण दिया है। क्रेमलिन ने एक बयान में इसकी जानकारी दी। दोनों देशों के बीच यह संघर्ष लगभग चार वर्षों से जारी है। क्रेमलिन की ओर से यह भी बताया गया कि रूस और यूक्रेन ने युद्ध में मारे गए सैनिकों की अदला-बदली का एक और चरण पूरा किया है। हालांकि, दोनों देशों के बीच ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकने को लेकर किसी सहमति की अटकलों पर रूस ने टिप्पणी करने से इन्कार किया।
बातचीत को गति मिलने के संकेत
पिछले सप्ताहांत अबूधाबी में अमेरिका की मध्यस्थता में हुई बातचीत से शांति प्रयासों को कुछ गति मिली है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच मतभेद अब भी बने हुए हैं। मोर्चे पर लड़ाई जारी है और हालिया मिसाइल हमलों से यूक्रेन को बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है।
एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, जेलेंस्की और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बैठक की संभावना बढ़ी है। रविवार को अबूधाबी में दोनों देशों के वार्ताकारों की अगली बैठक प्रस्तावित है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि शांति प्रक्रिया में सकारात्मक प्रगति हो रही है। हालांकि, क्षेत्रीय नियंत्रण और युद्ध के बाद की व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सहमति अभी दूर है।
अस्थायी संघर्ष विराम की बढ़ी उम्मीद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को दावा किया कि उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से एक हफ्ते के लिए यूक्रेन की राजधानी कीव पर हमले ने करने को कहा है क्योंकि यूक्रेन में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है। रूसी हमले के चलते यूक्रेन के कई शहरों के अहम ढांचे को भारी नुकसान हुआ है और देशभर में लोग बिना बिजली और गर्मी के रहने को मजबूर हैं। ट्रंप ने दावा किया है कि पुतिन इसके लिए तैयार हो गए हैं। हालांकि अभी तक रूस की तरफ से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जहां दिन और रात में नहीं है फर्क, चार महीने बिना सूरज के जीवन जीते हैं लोग
30 Jan, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ओस्लो । हम और आप अक्सर एक बादल छाने या एक दिन की बारिश होने से उदास हो जाते हैं, वहीं नॉर्वे के लॉन्गइयरबायेन में करीब 2,500 लोग हर साल लगातार चार महीने यानी नवंबर से फरवरी तक घने अंधेरे में ही अपनी जिंदगी बिताते हैं। विज्ञान की भाषा में इसे पोलर नाइट कहते हैं। जहां सूरज पर्दे के पीछे ही रहता है और दुनिया पूरी तरह कृत्रिम रोशनी पर निर्भर हो जाती है। हमारी डेली रूटीन जहां सूरज की पहली किरण से तय होती है, वहीं यहां के लोगों की घड़ी नंबरों का खेल है। बाकी दुनिया में सूरज का उगना ताजगी लाता है, लेकिन यहां की सुबह और रात में कोई फर्क नहीं होता। यहां के लोग विटामिन-डी की गोलियां और विशेष लाइट थेरेपी वाले लैंप्स का सहारा लेते हैं।
हमारे यहां संडे का मतलब पिकनिक होता है, लेकिन यहां संडे का मतलब है बर्फ के तूफान के बीच अपने घर के अंदर खुद को व्यस्त रखना। इतने लंबे अंधेरे में रहने वाले लोगों को चिड़चिड़ाहट और डिप्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। इससे लड़ने के लिए यहां के लोग एक फिलॉसफी अपनाते हैं, जिसे वे कोसेलिग कहते हैं। यह हमारी सुकून की भावना जैसा है। लोग अपने घरों को अनगिनत मोमबत्तियों, गर्म कॉफी और ऊनी कंबलों से सजाते हैं। अंधेरे को कोसने के बजाय यहां के लोग उसे त्यौहार की तरह मनाते हैं। हर शाम किसी न किसी के घर पर संगीत, बोर्ड गेम्स या कहानियों की महफिल सजती है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यहां अकेलापन दूर करने का सबसे अच्छा तरीका कम्युनिटी डिनर यानी सामूहिक भोज होता है। इस द्वीप पर करीब 50 अलग-अलग देशों के लोग रहते हैं, जो मुख्य रूप से रिसर्च या माइनिंग के लिए आए हैं। इतनी विविधता के बावजूद यहां का आपसी जुड़ाव कमाल का है। अंधेरे के महीनों में यहां की सोशल लाइफ बाकी दुनिया से ज्यादा सक्रिय हो जाती है। लोग स्नोमोबाइल पर सवार होकर मीलों दूर नीली बर्फ की वादियों में नॉर्दर्न लाइट्स देखने निकलते हैं। हमारे लिए यह अजूबा है, उनके लिए रात की सैर है। यहां के लोग पोलर जैज जैसे म्यूजिक फेस्टिवल्स का आयोजन करते हैं ताकि शहर का सन्नाटा संगीत से भरा रहे।
यहां के रूटीन सबसे रोचक है अंधेरे में सुरक्षा। जब आप अंधेरे में घर से निकलते हैं, तो आपको न केवल कड़ाके की ठंड मतलब माइनस 30 डिग्री तक की सर्दी से बचना है, बल्कि पोलर बीयर से भी सावधान रहना है। यहां इंसानों से ज्यादा भालू हैं और अंधेरे में वे और भी खतरनाक हो जाते हैं। इसलिए यहां के लोग हमेशा अपनी हेडलाइट्स और रिफ्लेक्टिव जैकेट पहनकर चलते हैं। यहां की सड़कों पर अजनबियों का एक-दूसरे को हेलो कहना आम है, क्योंकि इस घने अंधेरे में हर इंसान एक-दूसरे का सहारा होता है।
सबसे रोचक बात यह है कि जब फरवरी के आखिर में पहली बार सूरज की किरण इस द्वीप के एक पुराने अस्पताल की सीढ़ियों पर पड़ती है, तो पूरा शहर वहां इकट्ठा होकर सोलफेस्टुका मनाता है। वह नजारा भावुक कर देने वाला होता है। लोग उस एक किरण को देखने के लिए हफ्तों इंतजार करते हैं। यह पल उन्हें याद दिलाता है कि अंधेरा कितना ही लंबा क्यों न हो, उजाला लौटकर जरूर आता है। स्वालबार्ड की यह काली रात हमें सिखाती है कि खुशियां बाहरी परिस्थितियों की मोहताज नहीं होतीं। जहां हम छोटी-छोटी परेशानियों में घिर जाते हैं, वहां ये लोग 4 महीने के अंधेरे को एक-दूसरे के साथ, प्यार और उत्सव के साथ जीत लेते हैं।
ईरान-अमेरिका के बीच जंग होने की आहट.........तुर्की बफर जोन बनाने में जुटा
30 Jan, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंकारा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि एक और एयरक्राफ्ट कैरियर ईरान की तरफ निकल चुका है। जिससे ईरान पर अमेरिकी हमले की आशंका बढ़ गई है। अमेरिका का पहला एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन पहले ही गल्फ ऑफ ओमान पहुंच चुका है और वहां मिडिल ईस्ट में दाखिल हो चुका है। इसके बाद मिडिल ईस्ट में अफरा तफरी का माहौल है। संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब ने बयान जारी कर ईरान पर होने वाले हमले में अपने एयरस्पेस के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने की घोषणा की है। वहीं अब तुर्की, ईरान में सरकार गिरने की स्थिति में बफर जोन बनाने के प्लान पर काम कर रहा है।
ईरान विदेश मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी के सूत्रों के हवाले से इसकी जानकारी दी है। इसमें बताया गया हैं कि अगर सबसे खराब स्थिति बनती है और तेहरान में सरकार गिर जाती है, तब तुर्की, बॉर्डर के ईरानी तरफ एक बफर जोन बनाने की योजना बना रहा है। विदेश मंत्रालय ने मामले से परिचित दो सीनियर अधिकारियों के हवाले से बताया है कि गुरुवार को तुर्की विदेश मंत्रालय के टॉप अधिकारियों ने संसद में बंद कमरे की बैठक की है। इस बैठक में सांसदों को ब्रीफ कर बताया कि अंकारा, ईरान को लेकर कई संभावित स्थितियों की तैयारी कर रहा है।
इस ब्रीफिंग में मौजूद एक अधिकारी ने कहा कि तुर्की के अधिकारियों को आशंका है कि ईरान पर अगर हमला होता है, तब शरणार्थियों की एक बड़ी लहर उनके देश की तरफ बढ़ सकती है। तुर्की के अधिकारी उस लहर को मैनेज करने के लिए पहले से ही प्लान बनाकर रखना चाहते हैं। तुर्की के अधिकारियों ने इसके लिए बफर जोन शब्द का इस्तेमाल किया है। हालांकि दूसरे व्यक्ति ने बफर जोन शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है, लेकिन उन्होंने सामान्य उपायों से आगे जाने की इच्छा जता दी है। उस अधिकारी ने कहा है कि ईरान की तरफ से हर संभव कोशिश की जानी चाहिए कि अगर माइग्रेशन होता है, तब वहां उनकी ही जमीन पर हो।
तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि अंकारा ने एक टेक्नोलॉजी से बेहतर फिजिकल बैरियर सिस्टम के जरिए ईरान के साथ अपनी 560 किमी लंबी सीमा पर सुरक्षा मजबूत की है। तुर्की ने ईरान के शरणार्थियों को रोकने के लिए 203 इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल टावर और 43 एलिवेटर-सुसज्जित टावर, 380 किलोमीटर लंबी मॉड्यूलर कंक्रीट की दीवार और 553 किमी लंबी रक्षात्मक खाइयों का निर्माण किया है। तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ड्रोन और एयरक्राफ्ट सहित जासूसी और निगरानी सिस्टम से बॉर्डर वाले इलाकों की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है।
तुर्की मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ब्रीफिंग के दौरान तुर्की के अधिकारियों ने सांसदों को बताया है कि इस महीने की शुरुआत में सरकार के खिलाफ हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के दौरान करीब 4 हजार से ज्यादा ईरानी नागरिकों को मार दिया गया है, जबकि 20 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारी गंभीर घायल हैं। तुर्की के अधिकारियों ने सांसदों को बताया है कि ईरानी सरकार ने प्रदर्शनकारियों की भीड़ को कुचलने के लिए हद से ज्यादा बल का प्रयोग किया है और देश में दो हफ्ते से ज्यादा वक्त से इंटरनेट पूरी तरह से बंद है।
ईरान की घेराबंदी कर रहा है अमेरिका
मिडिल ईस्ट आई ने खाड़ी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि अमेरिका, ईरान के सीनियर अधिकारियों और कमांडरों पर सटीक हमले करने की योजना पर काम कर रहा है, जिन्हें वो प्रदर्शनकारियों की मौत के लिए जिम्मेदार मानता है।
हमें सुरक्षा परिषद का प्रतिनिधित्व और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए कार्रवाई करनी चाहिए
30 Jan, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधारों की मांग की है। उन्होंने कहा है कि हमें सुरक्षा परिषद के प्रतिनिधित्व और प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए बिना किसी देरी के कार्रवाई करनी चाहिए। उनका यह बयान भारत की संयुक्त राष्ट्र की आलोचना करने के तुरंत बाद आया। हालांकि, एंटोनियो गुटेरेस का निशाना अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस है। गुटेरेस ने बोर्ड ऑफ पीस का नाम लिए बिना उसकी जमकर आलोचना की और कहा कि संयुक्त राष्ट्र के अलावा कोई दूसरी संस्था या एड-हॉक गठबंधन कानूनी तौर पर सभी देशों को मजबूर नहीं कर सकता है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एंटोनियो गुटेरेस ने एक्स पर पोस्ट में लिखा- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद शांति और सुरक्षा के मामलों पर सभी सदस्य देशों की ओर से कार्रवाई करने का अधिकार रखने वाली अकेली संस्था है। सिर्फ यही ऐसे फैसले लेती है जो सभी पर लागू होते हैं। कोई भी दूसरी संस्था या एड-हॉक गठबंधन कानूनी तौर पर सभी देशों को शांति और सुरक्षा पर फैसलों का पालन करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। इसकी जिम्मेदारी अनोखी है। इसका दायित्व सार्वभौमिक है। इसीलिए सुधार जरूरी है। इसीलिए हमें सुरक्षा परिषद के प्रतिनिधित्व और प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए बिना किसी देरी के कार्रवाई करनी चाहिए।
बता दें भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को अब अंतरराष्ट्रीय शांति सुनिश्चित करने वाली संस्था के रूप में नहीं देखा जा रहा है और शांति एवं सुरक्षा से जुड़े परिणाम हासिल करने के लिए चर्चाएं समानांतर बहुपक्षीय ढांचों की ओर बढ़ गई हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत ने ‘अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन की फिर पुष्टि: शांति, न्याय और बहुपक्षवाद को पुनर्जीवित करने के मार्ग’ विषय पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस में कहा कि सार्वभौमिक सदस्यता वाले बहुपक्षवाद, जिसके केंद्र में संयुक्त राष्ट्र है, पर दबाव बढ़ रहा है। इस संगठन के सामने चुनौतियां केवल बजटीय नहीं हैं। संघर्षों से निपटने में जड़ता और प्रभावहीनता इसकी एक बड़ी कमी बनी हुई है।
बता दें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने गाजा के लिए बोर्ड ऑफ पीस शुरू किया है, जिसे संयुक्त राष्ट्र के विकल्प या प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप ने पीएम मोदी समेत कई वैश्विक नेताओं को अपने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। यह बोर्ड गाजा में स्थायी शांति लाने और वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के लिए एक नए साहसपूर्ण तरीके पर काम करेगा। पिछले हफ्ते दावोस में विश्व आर्थिक मंच के मौके पर एक कार्यक्रम में, ट्रंप ने शांति बोर्ड के घोषणापत्र को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दी। ट्रंप बोर्ड के अध्यक्ष के तौर पर काम करेंगे, और जिन देशों ने इसके घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए हैं उनमें अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अज़रबैजान, बहरीन, बुल्गारिया, हंगरी, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कज़ाकिस्तान, कोसोवो, मंगोलिया, मोरक्को, पाकिस्तान, पैराग्वे, कतर, सऊदी अरब, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात और उज़्बेकिस्तान शामिल हैं।
कोलंबिया में हुआ विमान हादसा, सांसद सहित 15 लोगों की मौत, पहाड़ी इलाके में मिला मलबा
30 Jan, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलंबिया। दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहां बुधवार, को एक विमान दुर्घटना में एक सांसद और चुनावी उम्मीदवार सहित कुल 15 लोगों की जान चली गई। विमानन अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह हादसा वेनेजुएला सीमा के पास उत्तर संतांदर के दुर्गम पहाड़ी इलाके में हुआ। दुर्घटनाग्रस्त विमान कोलंबिया की सरकारी एयरलाइन सटेना का था। ट्विन इंजन वाले इस प्रोपेलर विमान ने कुकुटा शहर से ओकाणा के लिए उड़ान भरी थी। उड़ान भरने के मात्र 12 मिनट बाद ही विमान का संपर्क एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीएस) से टूट गया, जिससे हड़कंप मच गया।
घंटों चले गहन खोजी अभियान के बाद, वायुसेना को प्लाया डी बेलन के ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्र में विमान का मलबा मिला। राहत और बचाव दल जब तक वहां पहुंचे, तब तक विमान में सवार सभी 15 यात्रियों की मृत्यु हो चुकी थी। इस हादसे में जान गंवाने वालों में 36 वर्षीय डायोजनीज क्विंटरो भी शामिल हैं, जो कोलंबिया की संसद के सक्रिय सदस्य थे। क्विंटरो कटाटुम्बो क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे, जो लंबे समय से संघर्ष और कोका की खेती के लिए चर्चा में रहता है। वह 2022 में उन 16 विशेष प्रतिनिधियों में से एक चुने गए थे, जिन्हें देश के दशकों पुराने आंतरिक संघर्ष के पीड़ितों के लिए आरक्षित सीटों पर जगह मिली थी। उनके साथ ही आगामी चुनाव के उम्मीदवार कार्लोस साल्सेडो की भी इस दुखद घटना में मृत्यु हो गई। जिस स्थान पर यह विमान क्रैश हुआ, वह एंडीज पर्वतमाला का एक बेहद ऊबड़-खाबड़ और चुनौतीपूर्ण इलाका है। यह क्षेत्र कोलंबिया के सबसे बड़े गुरिल्ला समूह, नेशनल लिबरेशन आर्मी के प्रभाव वाला माना जाता है। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, क्षेत्र का कठिन भूगोल और अचानक बदलने वाला मौसम इस हादसे की वजह हो सकता है। कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने इस त्रासदी पर गहरा शोक व्यक्त किया है और पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदनाएं प्रकट की हैं। फिलहाल विमानन एजेंसियां इस बात की विस्तृत जांच कर रही हैं कि हादसे का असली कारण तकनीकी खराबी थी या खराब मौसम। गौरतलब है कि इससे एक दिन पूर्व ही भारत में भी एक बड़ा विमान हादसा हुआ था, जिसमें महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की बारामती में चार्टर प्लेन क्रैश होने से मृत्यु हो गई थी।
हवा में विमान का पहिया गिर जाने के बाद भी पायलट ने अटलांटिक के ऊपर तय किया 10 घंटे का सफर
30 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। विमान यात्रा के दौरान किसी तकनीकी खराबी की खबर मात्र से यात्रियों और चालक दल के पसीने छूट जाते हैं, लेकिन हाल ही में अटलांटिक महासागर के ऊपर एक ऐसा वाकया पेश आया जिसने विमानन विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया। लास वेगास से लंदन जा रहे एक एयरबस ए350-1000 विमान का पहिया टेकऑफ के तुरंत बाद ही निकलकर नीचे गिर गया। इस बड़ी गड़बड़ी के बावजूद, पायलट ने सूझबूझ का परिचय देते हुए न केवल उड़ान जारी रखी, बल्कि 10 घंटे का लंबा सफर तय कर विमान को सुरक्षित लैंडिंग भी कराई।
यह घटना सोमवार रात की है जब ब्रिटिश एयरवेज की उड़ान ने लास वेगास के हैरी रीड इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। जैसे ही विमान ने रनवे से ऊंचाई पकड़नी शुरू की, पीछे के लैंडिंग गियर से एक काला पहिया अलग होकर नीचे गिरता हुआ दिखाई दिया। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले दृश्य को जमीन पर मौजूद लोगों ने कैमरे में कैद कर लिया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना के बाद एयरपोर्ट प्रशासन और स्टाफ की सांसें अटकी रहीं, लेकिन पायलट ने अटलांटिक महासागर के ऊपर से विमान को ले जाने का साहसिक निर्णय लिया। हैरानी की बात यह है कि डेटा के अनुसार, विमान न केवल सुरक्षित लैंडिंग करने में सफल रहा, बल्कि लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर अपने निर्धारित समय से करीब 27 मिनट पहले ही पहुंच गया। विमान के सुरक्षित उतरते ही एयरपोर्ट स्टाफ और यात्रियों ने राहत की सांस ली। हालांकि, इस बात की जांच अभी भी जारी है कि उड़ान भरते समय इतना महत्वपूर्ण हिस्सा विमान से कैसे अलग हो गया।
इस मामले पर एयरलाइंस ने अपना आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि उनके लिए यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और वे इस घटना की जांच में विमानन अधिकारियों का पूरा सहयोग कर रहे हैं। लास वेगास एयरपोर्ट प्रशासन ने पुष्टि की है कि रनवे से खोया हुआ टायर बरामद कर लिया गया है और इस पूरी घटना में किसी को भी कोई चोट नहीं आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि एयरबस ए350-1000 जैसे विशालकाय विमानों में कई पहिए होते हैं, जो इस तरह के आपातकाल को संभालने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। यदि एक पहिया निकल भी जाए, तो बाकी पहिए लैंडिंग के समय विमान का वजन संभालने की क्षमता रखते हैं। फिर भी, टेकऑफ के वक्त इस तरह की खराबी आना सुरक्षा के मानकों पर बड़े सवाल खड़े करता है।
प्राकृतिक चीजों से उपचार की 500 साल पुरानी किताब मिली
29 Jan, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मैनचेस्टर। यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर के वैज्ञानिकों को 1531 के आसपास की एक पुरानी किताब मिली है, जो यूरोप के पुनर्जागरण काल की मानी जा रही है। यह किताब जॉन रायलैंड्स लाइब्रेरी में सुरक्षित रखी गई थी और इसे बार्थोलोमाउस वोग्थेर नाम के एक नेत्र चिकित्सक ने लिखा था। इस किताब में उस दौर में आम लोगों को होने वाली बीमारियों और उनके उपचारों का विस्तार से जिक्र किया गया है। उस समय डॉक्टर और वैद्य प्राकृतिक चीजों के जरिए इलाज करने की सलाह देते थे। मसलन, दिल से जुड़ी बीमारियों के लिए अगर की लकड़ी का इस्तेमाल बताया गया था, जिसे दिल को साफ करने और धड़कन सामान्य रखने में सहायक माना जाता था। किताब में सिर दर्द जैसी आम समस्या के लिए भी अजीब उपाय दर्ज हैं। उस समय लोगों को तंबाकू के पाइप में दालचीनी डालकर पीने की सलाह दी जाती थी। लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाले उपाय गंजेपन और बालों की मजबूती से जुड़े हैं। उस दौर में यह माना जाता था कि बाल झड़ना एक बीमारी है और इसे ठीक करने के लिए सिर पर इंसानी मल लगाने की सलाह दी जाती थी। लोगों का विश्वास था कि ऐसा करने से सिर की बीमारी दूर हो जाएगी और दोबारा बाल उगने लगेंगे।
इतना ही नहीं, मजबूत और घने बालों के लिए छिपकली के सिरों को पीसकर बने मिश्रण को सिर पर लगाने का भी उल्लेख किताब में मिलता है। किताब में सिर्फ बालों से जुड़े ही नहीं, बल्कि मुंह के छालों के इलाज के लिए भी हैरान करने वाले तरीके दर्ज हैं। उस समय हिप्पोपोटेमस यानी दरियाई घोड़े के दांतों का इस्तेमाल मुंह के छालों को ठीक करने के लिए किया जाता था। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस किताब में अलग-अलग तरह की हैंडराइटिंग देखने को मिलती है, जिससे अंदाजा लगाया जाता है कि इसमें कई लोगों ने अपने-अपने अनुभव और उपचार जोड़े होंगे। हालांकि, यह साफ नहीं है कि इन उपायों को लिखने वाले चिकित्सकों ने खुद इन्हें अपनाया था या नहीं। राहत की बात यह है कि किताब में दर्ज सभी उपचार नुकसानदेह नहीं थे, लेकिन कई तरीके आज के नजरिए से बेहद अजीब और अविश्वसनीय लगते हैं।
बता दें कि दुनिया में शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा जिसे अपने झड़ते बाल अच्छे लगते हों। खासकर पुरुष गंजेपन से बचने के लिए हर मुमकिन कोशिश करते हैं, वहीं महिलाओं में बाल झड़ने की समस्या कई बार मानसिक तनाव और अवसाद तक की वजह बन जाती है। आज के दौर में विग, हेयर ट्रांसप्लांट और एडवांस्ड ट्रीटमेंट जैसे कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन 15वीं और 16वीं सदी में हालात बिल्कुल अलग थे। उस समय आधुनिक चिकित्सा का अभाव था और लोग बाल उगाने के लिए ऐसे देसी और अजीब उपाय अपनाते थे।
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