मध्य प्रदेश
स्मार्ट मीटर में भोपाल ने मारी बाजी
13 Jan, 2025 10:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल । मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर के मामले में भोपाल ने बाजी मार ली है। इस मामले में ग्वालियर फिसड्डी साबित हो रहा है। अब तक कुल लगाए गए 76 हजार 277 स्मार्ट मीटर में से अकेले भोपाल के शहरी इलाकों में 66 हजार 943 और भोपाल ग्रामीण में छह हजार 745 मीटर लगे हैं, जबकि इस मामले में ग्वालियर शहर में 97, ग्वालियर ग्रामीण में 559 मीटर ही लग पाए हैं। इन स्मार्ट मीटरों के लगने से उपभोक्ताओं से लेकर कंपनी तक को फायदा हो रहा है। कंपनी को जहां बिजली चोरी और बिलों की बकाया राशि वसूलने से मुक्ति मिली है, तो उपभोक्ताओं को देरी से होने वाली बिलिंग से राहत मिली है। दरअसल यह स्मार्ट मीटर लगाने का काम केंद्र सरकार की रिवेंड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) योजना के तहत किया जा रहा है। बिजली कंपनी के आंकड़ों के मुताबिक नर्मदापुरम ग्रामीण में एक हजार 414, बैतूल ग्रामीण में 99, राजगढ़ ग्रामीण में 102, सीहोर ग्रामीण में 305, विदिशा ग्रामीण में 14 स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। स्मार्ट मीटर लगने से उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं, सटीक बिलिंग और ऊर्जा दक्षता में सुधार होगा। स्मार्ट मीटर से रियल टाइम डेटा प्राप्त किया जा सकता है, जिससे उपभोक्ताओं को सटीक और समय पर बिलिंग सुनिश्चित की जा रही है।
बिल में राहत
स्मार्ट मीटर के लगने से सुरक्षा निधि से छूट, पहले से जमा सुरक्षा-राशि से पहला रिचार्ज, मौजूदा टैरिफ के अनुसार, घरेलू एवं गैर घरेलू व्यावसायिक बिल में 25 पैसे प्रति यूनिट की छूट, ऊर्जा-प्रभार से जुड़े अन्य प्रभारों यथा विद्युत शुल्क, टीओडी सरचार्ज, पावर फैक्टर सरचार्ज की घटी विद्युत दर से गणना, प्रत्येक भुगतान पर, बिल राशि के शून्य से पांच प्रतिशत की छूट, घरेलू श्रेणी में छूट की कोई अधिकतम सीमा नहीं, जबकि अन्य श्रेणियों में छूट की अधिकतम सीमा में 20 रुपये जैसे लाभ मिलेंगे।
यह है स्मार्ट मीटर की खासियत
- स्मार्ट मीटर एक डिजिटल डिवाइस है, जो बिजली के उपयोग को प्रति घंटे या उससे कम अंतराल पर रिकॉर्ड करता है।
- यह वायरलेस या वायर्ड नेटवर्क के जरिए यूटिलिटी प्रोवाइडर से जुड़ा होता है।
- स्मार्ट मीटर से रिमोट मीटर रीडिंग, आउटेज का पता लगाना और अपडेट करना संभव होता है।
- स्मार्ट मीटर, पारंपरिक मीटरों के मुकाबले रियल टाइम में बिजली के इस्तेमाल के आंकड़े देता है।
- स्मार्ट मीटर दो तरह के होते हैं, तीन-चरण और एकल-चरण।
- औद्योगिक और वाणिज्यिक उद्यमों में आम तौर पर तीन-चरण कनेक्शन का इस्तेमाल किया जाता है।
मंत्रियों को अब भी रास नहीं आ रही ई-फाइलिंग
13 Jan, 2025 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। सरकार व शासन का जहां पूरा जोर मंत्रालय में ई- फाईलिंग सिस्टम पर बना हुआ है, वहीं इस मामले में प्रदेश के मंत्री और उनके स्टाफ में पदस्थ कर्मचारी रुचि नहीं ले रहे हैं। यही वजह है कि इस सिस्टम के मंत्रालय में लागू होने के बाद भी अफसरों को मैनूअली फाइल तैयार करानी पड़ रही है। इसकी वजह है मंत्रियों द्वारा ई फाइलिंग सिस्टम की जगह अब भी मैनुअली रुप से काम करना। दरअसल मंत्रालय में निचले स्तर से लेकर एएसीएस स्तर तक पूरा काम ई- फाईलिंग सिस्टम पर होता है, लेकिन जैसे ही मंत्रियों की बारी आती है तो फिर ई- फाईलिंग सिस्टम की जगह उन्हें मैनूअली रुप से तैयार करना पड़ता है। इसके बाद फाइल मंत्रालय से मंत्री के आवास पर पहुंचाई जाती है। उल्लेखनीय है कि मंत्रालय में एक जनवरी से ई-फाइल सिस्टम लागू हो गया है।
इसके बाद से ही सभी विभागों में फाइलों का काम डिजिटली होने लगा है। इससे समय के साथ ही कागजों का खर्च बचने लगा है, लेकिन मंत्रियों के इस प्लेटफार्म पर काम नहीं करने की वजह से अधिकारियों को कंप्यूटर से ई-फाइल के प्रिंट निकलवाने पड़ रहे हैं। मंत्रियों से फाइल मंजूर होनेू के बाद एक बार फिर से उसे ई -फाईलिंग सिस्टम में डालना पड़ रहा है। इसके लिए फाइल के मुख्य पृष्ठ को स्कैन करके फिर से फाइल डिजिटली आगे बढ़ाई जाती है। अहम बात यह है कि इस तरह की स्थिति तब बनी हुई है, जबकि मंत्रियों के निजी स्टाफ में शामिल कर्मचारियों को ई-ऑफिस सिस्टम का प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। मंत्रियों के ई-ऑफिस सिस्टम नहीं अपनाने से इसे लागू करने का मसकद फिलहाल पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। दरअसल, सरकार ने प्रशासनिक कामकाज में तेजी एवं पारदर्शिता लाने के मकसद से शासकीय कार्यालयों में ई-ऑफिस सिस्टम तीन चरणों में लागू किए जाने का निर्णय लिया है। पहले चरण में एक जनवरी से इसे मंत्रालय में लागू किया जा चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसका शुभारंभ किया था। दूसरे चरण में सभी विभागाध्यक्ष तीन चरणों में लागू होना है ई-ऑफिस सिस्टम, मंत्रालय के बाद विभागाध्यक्ष कार्यालयों में और फिर जिलों के सरकारी कार्यालयों में इसे लागू किया जाएगा। तीसरे चरण में सभी जिला स्तर के सरकारी कार्यालयों में इसे लागू किया जाना है। खास बात यह है कि मंत्रालय में ई-ऑफिस सिस्टम लागू होने के बाद फाइले जहां ऑनलाइन एक से दूसरे कर्मचारी/अधिकारी तक ऑनलाइन मूव कर रही हैं, वहीं कुछ फाइलें मैनुअली भी आगे बढ़ाई जा रही है। इससे अब भी अधिकारी-कर्मचारियों की टेबलों पर फाइलों का अंबार लगना शुरु हो गया है। इससे कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है कि अधिकारी जिस फाइल को मैनुअली आगे बढ़ा चुके होते हैं, वह फाइल डिजिटली उनके पास आ जाती है। सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ई-ऑफिस सिस्टम लागू हुए अभी कुछ ही दिन हुए हैं। शुरुआत में कुछ दिक्कतें सामने आना स्वभाविक है, लेकिन धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हो जाएगी। इसमें कम से कम छह माह का समय लग सकता है।
एक बार फिर से प्रशिक्षण की तैयारी
मंत्रालय के अधिकारी-कर्मचारियों को ई-ऑफिस सिस्टम का प्रशिक्षण एक बार दिया जा चुका है। अब इसके लागू होने से एक बार फिर से इसका प्रशिक्षण देने की तैयारी है, जिससे की काम करने में कोई परेशानी नही आए। जैसे ही आला अफसरों से स्वीकृति मिलेगी फिर से प्रशिक्षण देने का काम शुरु कर दिया जाएगा।
यह है इससे फायदा
- मंत्रालय में फाइलों पर काम होने में तेजी आएगी। इसकी वजह है हर फाइल की लोकेशन अपडेट रहेगी।
- ई-ऑफिस सिस्टम से हर स्तर पर जवाबदेही तय हो जाएगी। इस सिस्टम में लिपिक से लेकर मुख्य सचिव तक फाइल निपटाने की समय-सीमा तय है। फाइल समय पर नहीं करने के लिए कारण भी बताना होगा।
- बिना किसी कारण के फाइल को नहीं रोका जा सकेगा। इसके बाद भी फाइलें लंबित रहती है, तो संबंधितों पर कार्रवाई की जा सकेगी।
- ई-ऑफिस सिस्टम में हर फाइल को ट्रेस करना आसान है।
- इमरजेंसी में एक ऑफिस से दूसरे ऑफिस में अधिकारियों को फाइल लेकर आना जाना नहीं पड़ेगा। एक क्लिक पर फाइल सामने स्क्रीन पर मिल जाएगी।
वनाधिकार और पेसा को धार देगी भाजपा
13 Jan, 2025 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल । मप्र में भाजपा एक बार फिर से आदिवासियों पर फोकस करने जा रही है। प्रदेश के इस बड़े वोट को साधने के लिए भाजपा और प्रदेश सरकार वनाधिकार और पेसा कानून को धार देने की तैयारी कर रही है। गौरतलब है कि भाजपा की नजरें विधानसभा की उन 82 सीटों पर हैं, जो अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए आरक्षित हैं। 230 सीटों की विधानसभा में अनुसूचित जाति (अजा) की 35 और अनुसूचित जनजाति (अजजा) वर्ग के लिए 47 आरक्षित हैं। यह वर्ग थोकबंद वोट देता है। इसलिए भाजपा इस वर्ग को साधने की लगातार कोशिश करना चाहती है।
अपनी रणनीति के तहत भाजपा अब पेसा अधिनियम 1996 के प्रभावी क्रियान्वयन पर फोकस करेगी। इसका मकसद अनुसूचित जनजाति वर्ग में पार्टी की पैठ मजबूत करना है। मप्र में एक कारण यह भी है कि यहां अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों से विधानसभा चुनाव में भाजपा को उसके अपेक्षित मत नहीं मिल सके थे, ऐसे में वह पेसा के माध्यम से अनुसूचित जनजातीय वर्ग को लुभाकर उनकी नाराजगी को दूर करना चाहती है। दरअसल, भाजपा की नजर मप्र विधानसभा की उन 47 सीटों पर है, जो अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। 230 सीटों की विधानसभा में वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले 31 सीटें थीं, लेकिन अनुसूचित जाति- जनजाति वर्ग के मुंह मोडऩे से पार्टी के हाथ से सत्ता फिसल गई। वर्ष 2023 के चुनाव में भी भाजपा के साथ एसटी वर्ग वापस नहीं आया है। पेसा एक्ट में जनजातीय वर्ग को अपने स्थानीय स्वशासन से जोडकऱ रखने और उसे सशक्त बनाने का प्रयास किया गया है। इसके अंतर्गत जनजातीय क्षेत्रों की ग्रामसभा को शक्तिशाली बनाकर उनमें- आदिवासियों के पारंपरिक प्रथाओं के अनुसार प्रशासनिक ढांचा विकसित किया गया है।
सत्ता की चाबी आदिवासी मतदाताओं के हाथों में
मप्र में सत्ता की चाबी आदिवासी मतदाताओं के हाथों में है, यह अतिश्योक्ति नहीं, बल्कि पिछले कई चुनावों के परिणामों का विश्लेषण बताता है। यही एक वजह है कि भाजपा ने पेसा पर अपना फोकस बढ़ाया है। पिछले चुनाव परिणामों को देखें तो पता चलता है कि वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में आदिवासी मतदाताओं ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया था तो पार्टी 29 सीटों पर चुनाव जीती थी। वहीं, 2013 में भी आदिवासियों ने भाजपा का साथ दिया और दो सीट की वृद्धि के साथ 31 सीटों पर पहुंच गई, एक अन्य निर्दलीय भी भाजपा समर्थक ही था, लेकिन 2018 में आदिवासी सीटों ने ही मप्र की राजनीति की तस्वीर बदल दी थी, तब कांग्रेस ने 30 सीटें जीतकर मप्र में सरकार बनाई थी और भाजपा का आंकड़ा गिरकर 16 पर पहुंच गया था। वर्ष 2023 के चुनाव में विधानसभा में एसटी के लिए आरक्षित 47 सीटों में भी भाजपा को 24 सीट ही जीत पाई जबकि कांग्रेस को 22 और एक पर अन्य को विजय मिली है। यही वजह है कि आदिवासी वर्ग ने भाजपा की चिंता बढ़ाई हुई है। दूसरी वजह झारखंड के चुनाव परिणाम हैं, जहां आदिवासियों ने भाजपा को निराश किया। ये ऐसे कारण है कि भाजपा अब पेसा के बहाने ही अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने कहा है कि पेसा कानून में प्रस्तुत समस्त दावों का निराकरण समय-सीमा निर्धारित कर प्राथमिकता पर किया जाए। डा. यादव ने पेसा अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जनजातीय कार्य विभाग में पेसा सेल गठित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुरूप धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत विभिन्न हितग्राहीमूलक योजनाओं में समस्त पात्र भाई-बहनों का शत-प्रतिशत सेचुरेशन सुनिश्चित किया जाए।
भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवा दें हर संभव योगदान: मुख्यमंत्री डॉ.यादव
12 Jan, 2025 11:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि युवा, हमेशा से ही देश और समाज को समर्पित रहे हैं। अंग्रेजों के विरूद्ध स्वतंत्रता संग्राम हो या अन्य आक्रांताओं के विरोध के समय, युवाओं ने आवश्यकता होने पर देश और समाज के लिए अपने प्राणों की आहुति देकर धर्म, संस्कृति और जीवन मूल्यों को सुरक्षित रखा है। वर्तमान समय भारत को विश्व में विकसित देश के रूप में स्थापित करने का समय है। यह हमारा सौभाग्य है कि देश को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नेतृत्व और मार्गदर्शन प्राप्त है। उन्होंने आह्वान किया कि युवा अपनी क्षमता, योग्यता और परिश्रम से वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के प्रति समर्पित भाव से अपनी-अपनी विधाओं के क्षेत्र में हरसंभव योगदान दें। प्रधानमंत्री मोदी के ध्येय वाक्य "ज्ञान पर ध्यान" के अंतर्गत गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। देश की प्रगति के लिए युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक दिशा देने के उद्देश्य से ही प्रदेश में स्वामी विवेकानंद जयंती-राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर "स्वामी विवेकानंद युवा शक्ति मिशन" आरंभ किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को रवीन्द्र भवन भोपाल में युवा शक्ति मिशन के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरू और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं युवा उपस्थित थे।
युवा पोर्टल किया लांच और युवाओं को दिलाई शपथ
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर और स्वामी विवेकानंद के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आत्म दीपो भव: - संवाद, सामर्थ्य, समृद्धि के मिशन के वाक्य पर आधारित युवा शक्ति मिशन के लोगो का अनावरण किया। उन्होंने युवाओं को कौशलयुक्त व आत्मनिर्भर बनने तथा अपने जीवन रूपी दीपक को प्रज्ज्वलित कर समाज का पथ प्रदर्शन करने की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मिशन के थीम साँग तथा युवाओं को विभिन्न विभागों की जानकारियां प्रदान के उद्देश्य से विकसित युवा पोर्टल भी लोकार्पित किया। साथ ही युवा वर्ग के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य केलिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संयुक्त रूप से विकसित उमंग वेलनेस कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर "उमंग" पर केन्द्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।
एमओयू का हुआ आदान-प्रदान, बालिकाओं को दिये प्रोत्साहन पत्र
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सम्मुख ग्लोबल स्किल पार्क और ट्राइडेंट कम्पनी के मध्य युवाओं के कौशल उन्नयन और औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुसार प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए एमओयू का आदान-प्रदान हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूएन विमेन द्वारा संचालित वी-स्टेम परियोजना के अंतर्गत शासकीय महिला आईटीआई बैतूल तथा अन्य संस्थाओं में विभिन्न ट्रेड में प्रशिक्षण प्राप्त प्रदेश के जनजातीय बहुल जिलों की बालिकाओं को प्रोत्साहन पत्र प्रदान किए।
मध्यप्रदेश के डेढ़ करोड़ युवाओं को स्बावलंबी और आत्मनिर्भर बनाना है मिशन का उद्देश्य
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विश्व का सबसे युवा देश भारत है और हम सभी प्रश्नों के समाधान अपनी क्षमता और योग्यता के आधार पर करने में सक्षम है। मध्यप्रदेश में ही डेढ़ करोड़ से अधिक युवा शक्ति है। उनसे संवाद कर उनकी रूचि और योग्यता के अनुरूप उनके भविष्य और प्रगति के लिए राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। समस्त 54 विभागों में संचालित युवाओं के हित और उनसे संबंधित योजनाओं और कार्यक्रमों में समन्वय करते हुए युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उनकी क्षमता संवर्धन के लिए उद्यमिता में प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर उन्हें स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाना तथा युवाओं की ऊर्जा का देश और प्रदेश हित में उपयोग सुनिश्चित करना युवा शक्ति मिशन का उद्देश्य है।
युवाओं को बनाएंगे नौकरी देने वाला
वर्तमान युग में कौशल उन्नयन और इस क्षेत्र में प्रशिक्षण का विशेष महत्व है। शासकीय सेवा या निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने के साथ उद्यमिता विकास के लिए कार्य करते हुए युवाओं को नौकरी करने वाला नहीं, नौकरी देने वाला बनाया जाएगा। मिशन के अंतर्गत युवाओं के जीवन को खुशहाल, समृद्धशाली बनाने के लिए लक्ष्य निर्धारित कर समय-सीमा में उनकी प्राप्ति के लिए रोडमैप भी बनाया गया है।
स्वामी विवेकानंद के विचारों को चरितार्थ करें युवा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2030 तक प्रदेश के 70 प्रतिशत से अधिक युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास होगा। शिक्षा, रोजगार के साथ व्यक्तित्व विकास और बेहतर जीवन का भी आधार है। मिशन का लक्ष्य रखा गया है कि प्रदेश का प्रत्येक युवा वर्ष 2028 तक कक्षा 10वीं तथा वर्ष 2030 तक कक्षा 12 के स्तर तक शिक्षा पूरी करें। युवाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए अपनी रूचि अनुसार उद्यमिता और रोजगार के लिए अन्य क्षेत्रों में प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाएगा। कई देशों ने तकनीक के दम पर विश्व में अपनी विशेष पहचान बनाई है। हमारे युवा भी नये संकल्प के साथ आगे बढ़ें और स्वामी विवेकानंद जी के "उठो, जागो और तब तक मत रूको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो" के ध्येय वाक्य को चरितार्थ करें।
युवा अपनी ऊर्जा से दीपक के समान फैलाए प्रकाश
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वामी विवेकानंद युवा शक्ति मिशन, प्रदेश के युवाओं के सपनों को साकार करने में राज्य शासन की ओर से आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में एक कदम है। प्रधानमंत्री मोदी का मानना है कि गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति को केन्द्रित कर विकास गतिविधियां संचालित करने से देश कम समय में विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को प्राप्त कर सकेगा। उनकी मंशानुसार ही राज्य सरकार द्वारा स्वामी विवेकानन्द युवा शक्ति मिशन आरंभ किया गया है। युवा असीम ऊर्जा का स्त्रोत हैं, उनकी यह ऊर्जा दीपक के समान प्रकाश फैलाने में उपयोग में आए, यही युवा शक्ति मिशन का उद्देश्य है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार युवाओं को दिशा देने के प्रयास के लिए प्रतिबद्ध है। वर्तमान समय और आवश्कता के अनुसार युवाओं से संवाद के माध्यम से उन्हें शिक्षा के साथ अन्य विधाओं में प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराने के लिए भी राज्य सरकार संवदेनशील है।
खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने भारतीय संस्कृति, धर्म और दर्शन को विश्व में स्थापित करने में स्वामी विवेकानंद के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर आरंभ युवा शक्ति मिशन प्रधानमंत्री मोदी के शक्तिशाली-वैभवशाली भारत निर्माण के लिए शुरू किए गए यज्ञ में आहुति के समान है। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के विचारों से प्रेरणा पाकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा आरंभ किए गया युवा शक्ति मिशन, युवाओं को सशक्त करने में सहायक होगा। युवाओं को गुणवत्ता शिक्षा, रोजगारपरक दक्षता उपलब्ध कराकर उन्हें विकास की धारा से जोड़ने में भी मिशन से मदद मिलेगी। सांसद खजुराहो वी.डी. शर्मा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने लक्ष्य प्राप्ति तक प्रयासों को जारी रखने का आहवान किया था। वर्तमान समय में युवाओं को आत्मनिर्भर होने के साथ देश के लिए जीने और स्वयं को समाज हित के लिए संकल्पित करने और लक्ष्य निर्धारित करने की भी आवश्यकता है। प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा आरंभ किये गये युवा शक्ति मिशन प्रदेश के युवाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वारा खोलेगा।
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचारों ने ऐतिहासिक रूप से भारतीय धर्म, दर्शन और संस्कृति की प्रतिष्ठा वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के साथ देश के युवाओं को निराशा के समय में भी प्रेरित किया है। स्वामी विवेकानंद युवा शक्ति मिशन के सृजन में राज्य शासन के साथ विभिन्न हितधारकों के दृष्टिकोण को समाहित किया गया है। विकास और सशक्तिकरण के उद्देश्य से स्थापित मिशन, युवाओं में आत्मविश्वास-उद्यमिता-शिक्षा-कौशल-स्वयं के स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता के साथ समाज में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए भी युवाओं को प्रेरित करेगा। कार्यक्रम के अंत में अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव ने प्रतीक चिन्ह के रूप में मुख्यमंत्री डॉ. यादव सहित समस्त अतिथिगण को स्वामी विवेकानंद की पुस्तकों का सेट भेंट किया।
गरीब, किसान, युवा और महिला कल्याण के लिये मिशन मोड पर हो रहा है काम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
12 Jan, 2025 10:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार समाज के हर वर्ग के हित के लिए कार्य कर रही है। प्रदेश में महिला, युवा, गरीब और किसानों के लिए मिशन मोड में कार्य किया जा रहा है। आज से 125 वर्ष पहले जब हमारा भारत गुलाम था और निराशा में डूबा हुआ था, तब स्वामी विवेकानंद ने उस निराशा को दूर करते हुए सब में उत्साह भरा और कहा था कि 21वीं शताब्दी भारत एवं सनातन संस्कृति की होगी। उनका यह कथन आज प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व में सत्य सिद्ध हो रहा है। आज विश्व में भारत का दौर चल रहा है। स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर हम सभी संकल्प लें कि भारत के साथ मध्य प्रदेश के विकास के लिए कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करेंगे। सबके साथ से देश की तरक्की और सब का विकास होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को शाजापुर जिले की तहसील कालापीपल में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश की 1.27 करोड़ लाड़ली बहनों के खातों में 1553 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की। साथ ही 55 लाख सामाजिक सुरक्षा पेंशन के हितग्राहियों के खातों में 335 करोड़ रुपये और 26 लाख बहनों को सिलेण्डर रीफिलिंग के लिये दी जाने वाली राशि अंतरित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 10 करोड़ 11 लाख राशि के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन किया। कार्यक्रम में विभिन्न योजनाओं के तहत हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित किये गये।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्र के विकास के लिए भी अनेक घोषणाएँ की। उन्होंने कालापीपल तहसील को राजस्व अनुभाग बनाने तथा पोलायकलां उप मंडी को मुख्य मंडी बनाए जाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कालापीपल में 15 ग्रामीण सड़कों के निर्माण और 11 गाँव के नाम बदलने की घोषणा की। ग्राम निपानिया हिस्सामुद्दीन को निपानिया देव, ढाबला हुसैनपुर को ढाबला राम, मोहम्मदपुर पवाड़िया को रामपुर पवाड़िया, खजूरी अलाहदाद को खजूरी राम, हाजीपुर को हीरापुर, मोहम्मदपुर मछनाई को मोहनपुर, रीछड़ी मुरादाबाद को रीछड़ी, खलीलपुर (ग्राम पंचायत सिलोंदा) को रामपुर, ऊँचोद को ऊँचावद, घट्टी मुख्त्यारपुर को घट्टी और शेखपुर बोंगी को अवधपुरी नाम देने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर प्रदेश में युवाओं के कल्याण के लिए युवा शक्ति मिशन योजना प्रारंभ की गई है। हमारा संकल्प है जब तक युवा को काम नहीं तब तक हमें आराम नहीं। हम युवाओं को सम्मानपूर्वक रोजगार देने के साथ ही स्वावलंबी और सामर्थ्यशाली बनाना चाहते हैं। प्रदेश में 2 लाख 70 हजार सरकारी पदों पर भरती की जाएगी। इसके साथ ही निजी क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में रोजगार सृजन हो रहा है। प्रदेश में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव, महानगरों में रोड-शो, खनन कॉन्क्लेव ओर यूके-जर्मन के माध्यम से चार लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। आगामी 16 तारीख को शहडोल में रीजनल इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार किसानों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। निरंतर बिजली और हर खेत को पानी मिलने से किसान वर्ष भर फसल ले सकेंगे। अब सरकार ने निर्णय लिया है कि किसानों को रात में सिंचाई नहीं करनी पड़ेगी, उन्हें दिन में ही 8 से 10 घंटे सिंचाई के लिए बिजली मिलेगी। उन्होंने घोषणा की कि पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना से जिले के 155 गांव को भी योजना से जोड़ा जायेगा। प्रदेश में अगले 5 वर्षों में सिंचाई के रकबे को एक करोड़ हैक्टेयर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण हमारी प्राथमिकता है। हमारी सनातन संस्कृति में महिलाओं का सम्मान सर्वोच्च है। प्रदेश में लाड़ली बहना योजना एवं अन्य योजनाओं का लाभ महिलाओं को निरंतर मिलता रहेगा। लाड़ली बहनों को हर माह राशि मिलेगी, वर्ष में एक बार नहीं हर माह रक्षाबंधन मनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम निरंतर गरीब कल्याण के लिए कार्य कर रहे हैं। वर्ष 2003-4 में जहां मध्य प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 7500 रुपए वार्षिक थी, आज बढ़कर 1 लाख 40 हजार रुपए हो गई है। हर व्यक्ति को 24 घंटे बिजली मिल रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने हर गरीब को पक्का मकान दिलाने का संकल्प लिया है। उज्ज्वला योजना के माध्यम से हर घर में गैस कनेक्शन दिया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सुशासन हमारा लक्ष्य है। पहले अपने कामों के लिए पटवारी को ढूंढना पड़ता था लेकिन अब नामांतरण, बटवारा जैसे कार्य आसानी से हो जाते हैं। साइबर तहसील योजना के माध्यम से रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण अपने आप हो जाता है। अब विद्यार्थियों को मार्कशीट और टीसी आदि के लिए चक्कर नहीं लगाने पड़ते, डिजिलॉकर के माध्यम से यह दस्तावेज मोबाइल पर ही प्राप्त हो जाते हैं।
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प के अनुरूप GYAN (गरीब, युवा, किसान और महिला) पर ध्यान के विज़न पर अमल करने के लिये मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में महाअभियान चल रहा है। मध्यप्रदेश इसमें अग्रणी है। क्षेत्रीय विधायक घनश्याम चंद्रवंशी ने क्षेत्र के विकास के लिये अनेक प्रस्ताव रखे। कार्यक्रम में जन-प्रतिनिधि, अधिकारी, बड़ी संख्या में लाड़ली बहनें, किसान बंधु और आमजन उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कालापीपल पहुँचने पर नगर के विभिन्न स्थानों पर भव्य स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री ने नागरिकों का अभिवादन किया।
प्राचीन तेलिया हनुमान मंदिर को पर्यटन स्थल के रूप में करेंगे विकसित
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कालापीपल में आयोजित कार्यक्रम के बाद प्राचीन तेलिया हनुमान मंदिर में दर्शन कर पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्रीहनुमान मंदिर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जायेगा।
प्रयागराज महाकुम्भ में आकर्षण का केंद्र होगा ‘एकात्म धाम‘
12 Jan, 2025 09:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : सनातन संस्कृति की दिव्य अनुभूति के महापर्व "महाकुम्भ प्रयागराज : 2025" में तीर्थराज प्रयाग के पावन संगम तट पर आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास, मध्यप्रदेश द्वारा अद्वैत वेदान्त दर्शन के लोकव्यापीकरण एवं सार्वभौमिक एकात्मता की संकल्पना के उद्देश्य से एक माह 12 जनवरी से 12 फरवरी 2025 तक "एकात्म धाम शिविर" सेक्टर-18, हरिश्चन्द्र मार्ग, महाकुम्भ क्षेत्र, झूंसी, प्रयागराज, उत्तरप्रदेश में किया जा रहा है।
एकात्म धाम शिविर में प्रतिदिन अद्वैत वेदान्त पर केन्द्रित संवाद, श्रवण, मनन, निधिध्यासन द्वारा ध्यान, शास्त्रार्थ सभा, संत समागम, शंकर संगीत एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम, वैदिक अनुष्ठान एवं भाष्य पारायण, 'एकात्म धाम' प्रकल्प पर केन्द्रित प्रदर्शनी, अद्वैतामृतम्, विमर्श सभा, पुस्तक प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र होगी।
पहली बार प्रयागराज महाकुम्भ में आएंगे श्रृंगेरी शंकराचार्य, शास्त्रार्थ सभा एवं संत समागम की करेंगे अध्यक्षता
दशनामी संन्यास परम्परा के लाखों साधु-संत, संन्यासी, आचार्य महामंडलेश्वर, महंत सहित आर्ष परंपरा के मनीषी महाकुम्भ में सम्मिलित होते हैं। यह सुखद संयोग है कि इस बार महाकुम्भ में पहली बार श्रृंगेरी शंकराचार्य विधुशेखर भारती सन्निधानम् आएंगे, वे एकात्म धाम द्वारा 25 एवं 26 जनवरी को शास्त्रार्थ सभा एवं 27 जनवरी को संत-समागम की अध्यक्षता करेंगे। शास्त्रार्थ सभा में देश-दुनिया के प्रमुख विद्वान आएंगे जो आत्मा, जगत जैसे मनुष्य के जिज्ञास्य विषयों पर चिंतन की अनेक धाराओं के अनुसार विवेचना करेंगे। शास्त्रार्थ चिंतन के मूल्यांकन की विशेष विधि है जिसमें विषय को प्रस्तुत किया जाता है और विद्वत परिषद वाद, जल्प और वितण्डा के रूप में समालोचनात्मक पद्धति से विचार करती है। शास्त्रार्थ सभा में प्रो. राजाराम शुक्ल (वाराणसी), प्रो. मणि द्रविड़ शास्त्री (चेन्नई), प्रो. श्रीहरि शिवराम धायगुड़े (तिरुपति) सहित अनेक विद्वान शामिल होंगे। संत समागम में श्रृंगेरी शंकराचार्य के साथ द्वारिका शंकराचार्य सदानंद सरस्वती, जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि महाराज सहित हजारों साधु संत शामिल होंगे।
अद्वैत एवं शांति विषय पर आयोजित विमर्श सभा में शामिल होंगे पद्मविभूषण रविशंकर, अद्वैत एवं पर्यावरण सत्र में एरिक सोहेम (नार्वे) होंगे शामिल
विमर्श सभा में देश- दुनिया के विद्वान 5 प्रमुख विषयों पर अद्वैत दर्शन की प्रासंगिकता पर विमर्श करेंगे। 28 जनवरी को अद्वैत एवं पर्यावरण विषय पर संयुक्त राष्ट्र संघ के पूर्व कार्यकारी निदेशक (पर्यावरण) एवं एकात्म धाम के एम्बेंसडर एरिक सोहेम, परमार्थ निकेतन के प्रमुख स्वामी चिदानंद मुनि, पद्मभूषण अनिल जोशी, 31 जनवरी को अद्वैत एवं विकास विषय पर नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार, एरिक सोहेम, 2 फरवरी को अद्वैत एवं शांति विषय पर आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक पद्मविभूषण रविशंकर, 4 फरवरी को अद्वैत एवं संस्कृति एवं 5 फरवरी को अद्वैत एवं विज्ञान विषय पर आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. कामकोटि, रामकृष्ण मिशन के स्वामी आत्मप्रियानंद, प्रो. मृत्युंजय गुहा सहित अनेक विषय विशेषज्ञ सम्मिलित होंगे।
‘दृग्दृश्यविवेक’ पर 12 से 17 जनवरी तक आनंदमूर्ति गुरू माँ के होंगे प्रवचन
शिविर में 12 से 17 जनवरी तक आनंदमूर्ति गुरू माँ आचार्य शंकर विरचित दृग्दृश्यविवेक, 25 से 27 जनवरी तक स्वामी परमात्मानंद सरस्वती ‘कठोपनिषद’, 6 फरवरी को स्वामिनी विमलानंद सरस्वती एवं 7 फरवरी को स्वामी मित्रानंद सरस्वती आचार्य शंकर के जीवन दर्शन पर संवाद करेंगे। 6-7 फरवरी को ही शाम 6 बजे से अभिनेता नीतिश भारद्वाज एवं कोरियोग्राफर मैत्रेयी पहाड़ी ‘शंकर गाथा’ की प्रस्तुति देंगी। दिनांक 8 से 12 फरवरी तक राम जन्म भूमि न्यास के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविन्द देव गिरि प्रतिदिन शंकरो लोकशंकर: आचार्य शंकर के जीवन प्रसंग पर कथा करेंगे।
सांस्कृतिक एवं वैचारिक महाकुम्भ के साथ ‘एक ओंकार’ में गूंजेगे एकात्मता के स्वर...
सांस्कृतिक कार्यक्रम की श्रृंखला में ‘एक ओंकार’ के अंतर्गत अलंकार सिंह ‘गुरूवाणी’ में अद्वैत गायन, पद्ममधुप मुद्गल ‘कबीर वाणी’ में अद्वैत गायन, जयतीर्थ ‘संत तुकाराम’ की वाणी में अद्वैत (अभँग) तथा रजनी गायत्री ‘शंकर स्त्रोतम्’ की प्रस्तुति देंगी। वैदिक अनुष्ठान के साथ ही प्रतिदिन 20 बटुक एवं आचार्य वेद एवं भाष्य पारायण करेंगे।
महाकुम्भ पूर्व से पश्चिम एवं उत्तर से दक्षिण तक आचार्य शंकर द्वारा स्थापित सांस्कृतिक एकता का साक्षी बने इसी भाव के साथ संन्यास परम्परा के विराट उत्सव के रूप में युग-युगीन सनातन ज्ञान-परम्परा के इस प्रकट-प्रभावी उत्सव में एकात्म धाम शिविर आयोजित है।
आचार्य शंकर ने भारतवर्ष का भ्रमण कर सम्पूर्ण राष्ट्र को सार्वभौमिक एकात्मता से आलोकित किया। अद्वैत वेदान्त दर्शन के शिरोमणि, सनातन वैदिक धर्म के पुनरुद्धारक एवं सांस्कृतिक एकता के देवदूत शंकर भगवत्पाद का जीवन-दर्शन अनंत वर्षों तक संपूर्ण विश्व का पाथेय बने, इस संकल्प के साथ आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास, मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग आचार्य शंकर की संन्यास एवं ज्ञान भूमि 'ओंकारेश्वर' में भव्य एवं दिव्य 'एकात्म धाम' के निर्माण के लिए संकल्पित है।
एकात्म धाम प्रकल्प में आचार्य शंकर की 108 फीट ऊँची बहुधातु 'एकात्मता की मूर्ति' (Statue of Oneness), आचार्य शंकर के जीवन तथा दर्शन पर आधारित संग्रहालय 'अद्वैत लोक' एवं अद्वैत वेदान्त दर्शन के अध्ययन, शोध एवं विस्तार हेतु 'आचार्य शंकर अन्तर्राष्ट्रीय अद्वैत वेदान्त संस्थान' की स्थापना करते हुए एकात्मता के वैश्विक केन्द्र (A Global Centre of Oneness) के रूप में विकसित किया जा रहा है।
दिव्य शक्तियां पहुंचाएंगी मंज़िल तक : राज्यपाल पटेल
12 Jan, 2025 09:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि ब्लाइंड चैलेंज कार रैली का आयोजन अद्भुत प्रसंग है। कार रैली में दिव्यांग नेवीगेटर, अपनी दिव्य शक्तियों से वाहन चालक को रास्ता बताकर मंज़िल तक पहुंचाएंगे। दिव्यांगजनों की शक्तियों से समाज का साक्षात्कार कराएंगे।
राज्यपाल पटेल आरुषि संस्था की 20 वीं ब्लाइंड चैलेंज कार रैली को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शुभारंभ कार्यक्रम में भारत माता की जय और वंदे मातरम के जय घोष से रैली में ऊर्जा का संचार करते हुए प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। राज्यपाल ने डी.बी. मॉल परिसर में आयोजित शुभारंभ कार्यक्रम में कार रैली को झंडी दिखाकर रवाना किया।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि दिव्यांगजनों के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए आरुषि संस्था के प्रयास सराहनीय है। राज्यपाल पटेल का संस्था की बालिका सुस्तुति दोशी ने पौधा भेंट कर स्वागत किया। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के डायरेक्टर डॉ. अमिताभ पाण्डे ने शॉल और स्मृति चिन्ह् भेंट कर अभिनन्दन किया। बालिका सुस्नेहा ने भी अपने अनुभवों को साझा किया। कार्यक्रम में आरूषि संस्था के डायरेक्टर अनिल मुदगल, उद्योगपति एवं समाजसेवी दिलीप सूर्यवंशी, कार रैली के दिव्यांग नेविगेटर, वाहन चालक, अन्य प्रतिभागी और उनके परिजन उपस्थितथे।
स्वामी विवेकानन्द जयंती पर राज्यपाल पटेल ने किया नमन
12 Jan, 2025 09:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने स्वामी विवेकानन्द जी की जयंती पर उनको नमन किया। उन्होंने युवा तेज और ओज के प्रतीक स्वामी विवेकानंद के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।
राजभवन के बेंक्वेट हॉल में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी अरविंद पुरोहित, नियंत्रक श्रीमती शिल्पी दिवाकर और अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 17 से 20 जनवरी के बीच वियतनाम में इंटरनेशनल कन्वेंशन
12 Jan, 2025 12:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल । देश के ट्रेवल एजेंट्स के प्रमुख संगठन ट्रेवल एजेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (टाफी) और वियतनाम टूरिज्म बोर्ड मिलकर वियतनाम में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन करने जा रहे हैं। 17 से 20 जनवरी के बीच वियतनाम के निंबिन राज्य में होने वाले इस कन्वेंशन में भोपाल सहित देश के 400 से ज्यादा एजेंट्स शामिल होंगे। इसका मकसद दोनों देशों के बीच पर्यटन को बढ़ावा देना है।
टाफी के प्रदेश अध्यक्ष शैलेंद्र खरे ने बताया कि भारत और वियतनाम के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। हर साल लाखों पर्यटन वियतनाम से भारत आते और भारत से वियतनाम जाते हैं। दोनों देशों के बीच पर्यटन को बढ़ावा देने और पर्यटकों के लिए ज्यादा सुविधा मुहैया करवाने के लिए इस कन्वेंशन का आयोजन होने जा रहा है। इसमें वियतनाम के पर्यटन मंत्रालय, एयरलाइंस, होटल एसोसिएशन और ट्रेवल एजेंट्स संगठनों के पदाधिकारी शामिल होंगे। भारत से इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए 400 ट्रेवल एजेंट्स जा रहे हैं। फेडरेशन के सचिव अमोल कटारिया ने बताया कि इसमें एजेंट्स को वियतनाम के प्रमुख पर्यटन स्थलों के साथ ही ऐसे स्थान, जो ज्यादा लोकप्रिय नहीं हैं, लेकिन काफी सुंदर हैं, को भी दिखाया जाएगा, ताकि एजेंट्स पर्यटकों को बेहतर जानकारी दे सकें।
4 साल में कैसे बढ़ेगा 55 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र
12 Jan, 2025 11:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मप्र सरकार का खेती-किसानी पर सबसे अधिक फोकस है। इसके लिए सरकार सिंचाई का रकबा बढ़ाया जा रहा है। सरकार ने आगामी 4 साल में प्रदेश में सिंचाई का रकबा 1 करोड़ हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रदेश में वर्तमान में 45 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र है। ऐसे में सवाल उठता है कि 4 साल में सरकार 55 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र कैसे बढ़ा पाएगी।विधायकों द्वारा विधानसभा में उठाए गए भ्रष्टाचार सहित अन्य मुद्दे और नई सिंचाई परियोजनाओं के काम प्रारंभ करने पर केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं। जबकि प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के नाम पर सरकार करीब 40 हजार करोड़ के काम कर रही है। जल संसाधन विभाग के अलावा एनवीडीए द्वारा निर्मित कराई जा रही परियोजनाओं के बाद भी टारगेट पूरा होने की संभावना कम ही नजर आ रही है। ऐसे में मप्र की भाजपा सरकार अगले चार सालों में एक करोड़ हेक्टेयर में सिंचाई का दावा कर रही है, जबकि वर्तमान में 45 लाख हेक्टेयर में ही बामुश्किल सिंचाई हो पा रही है।
अधर में योजनाएं-परियोजनाएं
विधानसभा में समय-समय पर उठे सवालों पर यह तथ्य सामने आया है कि प्रदेश में विभिन्न सिंचाई परियोजनाएं-योजनाएं अधर में हैं। विधानसभा के 2021 के सत्र के दौरान संजय पाठक ने हितग्राहियों को भू-अर्जन का लंबित मुआवजा दिलाने, त्योंथर के ग्राम खाम्हा सहित अन्य ग्रामों में सिंचाई सुविधा का विस्तार करने, चंदौरा जलाशय क मुख्य नहर की लाइनिंग का मुद्दा सुखदेव पांसे ने उठाया था, यह कार्य भी परीक्षणाधीन बताया गया है। जौरा में स्टॉप डेम कम काजवे का निर्माण, दिनेश राय मुनमुन ने हैदाराबाद की पेंटाना कंस्ट्रक्शन कंपनी को जल संसाधन विभाग द्वारा भुगतान में अनियमितता किए जाने पर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग पर अभी तक कुछ नहीं हुआ। उधर, विधायक हिना कांवरे ने 2022 में खराड़ी जलाशय की नहर में लाइनिंग कार्य के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा, लेकिन यह प्रस्ताव अभी तक शासन को नहीं मिला, बल्कि चीफ इंजीनियर के यहां पेंडिंग होने के कारण आश्वासन पूरा नहीं हुआ। तत्कालीन प्रागीलाल जाटव ने करैरा नगर में रियान, वॉटर टैंक द्वारा तोड़ें गए सीसी से आए दिन हो रहे एक्सीटेंड का मुद्दा उठाया, लेकिन जोड़ी गई सीसी पर रेस्टोरेशन का कार्य शीघ्र पूरा कराने का आश्वासन पेंडिंग है।
100 से अधिक प्रस्ताव और सुझाव पेंडिंग
विधायकों द्वारा सदन में उठाए गए बांध और जलाशय निर्माण से जुडें करीब 100 से अधिक प्रस्ताव और सुझाव पेंडिंग हैं। विधानसभा के फरवरी-मार्च 2017 में हुए सत्र के दौरान तत्कालीन विधायक मुकेश नायक ने पत्रा जिले में बांध टूटने के कारण और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध संस्थित जांच पूर्ण की जाकर ठेकेदार मेसर्स त्रिशूल कन्स्ट्रक्शन जबलपुर से व्यय की गई राशि की वसूली करने का मुद्दा उठाया था। जिस पर सरकार ने जवाब दिया था कि दोषी अधिकारियों पर डीई की जा रही है और ठेकेदार से वसूली की जाएगी। यह मुद्दा आश्वासन में पेंडिंग है। ग्वालियर के भितरवार की क्षतिग्रस्त हुई हर्सी-टेकनपुर सडक़ का मरम्मत कार्य कराने का मुद्दा लाखन सिंह यादव ने उठाया था। सरकार ने आश्वासन दिया था कि इस सडक़ को ठीक कराने में 75 या 100 करोड़ भी खर्च होंगे तो अगले बजट में लाएंगे, लेकिन यह भी आश्वासन क्रमांक 0/183 में पंडिंग है। बिलखुरा व सिरस्वाहा का मुद्दा मुकेश नायक ने 2018 में भी पुन उठाया। सरकार ने दोषी अधिकारियों के विरुद्ध डीई प्रारंभ की और कहा-जलाशय की मरम्मत पर 2 करोड़ की राशि खर्च हुई है, जिसकी वसूली दोषी निर्माण कंपनी त्रिशूल कंस्ट्रक्शन पर आरोपित की गई है, लेकिन मामला अभी भी पेंडिंग है।
इस साल इन विधायकों ने उठाए ये मुद्दे
इस साल विधानसभा में सिंचाई से संबंधित कई मुद्दे उठाए गए। कमलेश्वर डोडियार ने ग्राम पंचायत लुणी के राधाकुंआ में तालाब निर्माण कराने का मामला उठाया। वहीं सुरेंद्र सिंह गहरवार ने चित्रकूट के पाथरकछार रानीपुर एवं नरदेहा में सिंचाई के लिए बांध बनाए जाने, अनुभा मुंजारे ने बड़ी नहरों से माइनर नहर बनाने, नहर के साइड मार्ग की मरम्मत कराने की मांग की है। विवेक पटेल ने बालाघाट जिले के नाद गांव अंतर्गत डोकरिया जलाशय का निर्माण कराने, राजेंद्र पांडेय ने रतलाम के ग्राम मधून में डेम निर्माण, सुरेन्द्र सिंह ने यूपी बार्डर के समीप कंदर बांध बनाने। अभय मिश्रा सेमरिया में प्रतापपुर माइनर से जरमोहरा बांध तक पानी पहुंचाने, सब माइनर नहर का निर्माण कराने फूलसिंह बरैया ने ग्राम रेडा से सेमई सब माइनर नहर का गहरीकरण एवं पक्का निर्माण कराने का मुद्दा उठाया। केदार डाबर ने खारक तालाब से ग्राम चौखंड कान्ऱ्या पानी सहित अन्य गांवों में सिंचाई सुविधा का विस्तार, बिसाहूलाल सिंह ने गोहधारी नदी के कैलाश घाट पर रपटा कम स्टॉप डेम तथा कठना नदी पर डेम निर्माण, राजेन्द्र भारती ने सोय नदी पर स्टॉप डेम कम बीपरवाल को मंजूरी देने, प्रहलाद लोधी ने फत्रा जिले के खमरिया में सिंचाई के लिए बांध का निर्माण कराने, रमेश प्रसाद खटीक ने करेंरा अंतर्गत महुअर नदी पर बने नावली डैम से माइक्रो सिंचाई परियोजना शुरू करने और इंजी. ऋषि अग्रवाल ने ग्वारखेड़ा नदी में डायवर्सन निर्माण कर कलौरा तालाब से पानी पहुंचाने का मुद्दा उठाया।
भंडारण शुल्क की वसूली नहीं हुई तो राज्य परिवहन जैसे डूब जाएगा कार्पोरेशन
12 Jan, 2025 10:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल । मध्य प्रदेश वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन का स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन, विपणन संघ, नाफेड पर 2127 करोड़ रुपए भंडारण शुल्क बकाया है। राशि की वसूली न होने के कारण कार्पोरेशन के कर्मचारियों को वेतन देने और अन्य प्रासंगिक व्यय में आ रही दिक्कत ने कर्मचारियों को चिंता में डाल दिया है। उनका कहना है कि कार्पोरेशन 1958 से लगातार लाभ में चल रहा है, लेकिन 3 वर्ष से? वसूली न होने से निगम के कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है। कहीं कार्पोरेशन की स्थिति भी राज्य परिवहन निगम जैसी न हो जाए।
एमपी वेयरहाउसिंग कार्पोरेशन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अनिल वाजपेयी ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में फिजूल खर्ची तत्काल बंद करने, कार्पोरेशन में दो पद संभालने वाले कर्मचारियों को एक-एक पद देने की मांग की है। ताकि सभी अधिकारी ठीक से अपने काम पर ध्यान दे सकें और इस हड़बड़ी का असर कार्पोरेशन और कर्मचारियों पर न पड़े।
पढ़ाने की जगह बाबू बनें शिक्षक
12 Jan, 2025 09:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल । मप्र में शिक्षकों की कमी के कारण शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल है। इतना ही नहीं प्रदेश भर में 20 हजार से अधिक शिक्षक शिक्षा विभाग छोडक़र अन्य विभागों में कामकाज संभाल रहे है। अधिकांश शिक्षक दफ्तरों में बाबूगिरी करने में ही खुश हैं। इन शिक्षकों को बाबूगिरी का काम इतना पसंद आ रहा है कि अटैचमेंट खत्म होने के बाद भी मूल विभाग में वापस नहीं आ रहे हैं। वे छात्रों को पढ़ाने के बजाए दफ्तरों में जी हुजूरी कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार नवसाक्षरता के नाम पर प्रदेश में पांच हजार से अधिक शिक्षक अटैचमेंट पर चल रहे हैं। प्रदेश में कक्षा दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा आगामी 25 फरवरी से प्रारंभ हो रही है। इसके पहले नवमीं ग्यारहवीं की परीक्षाएं भी होंगी। परीक्षाओं के पहले शिक्षकों की कमी के चलते स्कूल शिक्षा विभाग ने नया फरमान जारी किया है। प्लान तैयार किया है। इसके तहत जिन स्कूलों में विषय शिक्षकों की कमी है, उनके यहां नजदीकी स्कूलों से शिक्षकों को बुलाकर पढ़ाया जाएगा। यह कार्य सप्ताह में शिक्षक दो दिन करेंगे।
शिक्षकों पर दोहरा कार्य
जानकारी के अनुसार दूसरी तरफ विभाग में अटैचमेंट का खेल चल रहा है। प्रदेश में 20 हजार से अधिक शिक्षक ऐसे है, जो स्कूलों में पढ़ाने के बजाय दफ्तरों में बाबूगिरी कर रहे हैं। विभाग इन शिक्षकों का अटैचमेंच समाप्त करने के बजाय स्कूलों में ही पदस्थ अन्य शिक्षकों पर दोहरा कार्य डाल रहा है। आयुक्त लोक शिक्षण शिल्पा गुप्ता ने कुछ माह पहले आयुक सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि विभिन्न कामों के लिए विभिन्न कार्यालयों में अटैच किए गए शिक्षकों को तत्काल वापस करें। उन्होंने कलेक्टरों को 25 जून 2013 और 8 नवंबर 2017 के सामान्य प्रशासन विभाग, 30 मई 2017 और 20 सितंबर 2019 के स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देशों की याद दिलाई। आदेशों में शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 (आरटीई) और न्यायालयीन प्रकरण में पारित निर्णयों के हवाले से कहा गया है कि शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्य में नहीं लगाया जा सकता है। आयुक्त ने निर्देशों में साफ कहा कि शिक्षकों को भविष्य में भी गैर शैक्षणिक कार्यों में नहीं लगाया जाए। ऐसा हुआ तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।
निर्देशों का पालन नहीं
गैर शैक्षणिक कार्य में लगाए गए शिक्षकों को मूल पदस्थापना के लिए कार्यमुक्त कर शिक्षण कार्य कराने को कहा गया है। बावजूद इसके अभी भी प्रदेश में संभागीय संयुक्त संचालक लोक शिक्षण, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला परियोजना समन्वयक, विकास खंड शिक्षा अधिकारी और निर्वाचन कार्य के लिए कलेक्टर, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (एसडीएम), तहसील सहित अन्य कार्यालयों में अटैच है। इन शिक्षकों के स्कूलों में लौटने से पढ़ाई की स्थिति सुधरेगी। अभी शिक्षकों की कमी के कारण सरकारी स्कूलों में पढ़ाई नहीं हो पा रही है। नवसारक्षता के नाम पर हर जिले में 70 से 80 शिक्षकों को अटैच कर रखा है। भोपाल जिले में करीब 70 शिक्षक नवसाक्षरता कार्यक्रम में सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि इन शिक्षकों को यह कार्य स्कूलों में पढ़ाई कराने के साथ करना है, लेकिन ऐसा होता नहीं है। नवसाक्षरता में अटैच शिक्षक स्कूलों में पढ़ाने नहीं जाते है। इससे राजधानी समेत पूरे प्रदेश में करीब पांच हजार से अधिक शिक्षक स्कूलों की पढ़ाने से दूर है। स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत माध्यमिक शिक्षा मंडल, लोक शिक्षण संचालनालय, राज्य शिक्षा केंद्र, डीईओ कार्यालय समेत अन्य जगहों पर कई शिक्षक अटैच हैं। उच्च पद के प्रभार व अतिशेष शिक्षकों की काउंसलिंग के दौरान इन्हें हटाए जाने के निर्देश भी हुए, लेकिन इन शिक्षकों ने जोड़-तोड़ दोबारा मुख्यालयों में पदस्थापना कराने में सफल हो गए। रतलाम जिले में हाल में अटैचमेंट के चलते एक स्कूल में शिक्षकों कमी से शिक्षिका की बे्रन स्ट्रोक से मौत हो गई। इस मामले को लेकर रतलाम जिले में शिक्षकों ने कई दिनों तक प्रदर्शन कर सभी प्रकार के अटैचमेंट समाप्त करने की मांग की थी। बावजूद इसके रतलाम जिले में करीब 70 शिक्षक नवसाक्षरता कार्यक्रम में अटैच है। करीब 30 शिक्षक विभिन्न कार्यालयों में बाबूगिरी कर रहे हैं।
बर्बाद हो रहा बच्चों का भविष्य
जानकारी के मुताबिक, इन शिक्षकों का वेतन स्कूलों से जारी होता है। लेकिन यह सभी दूसरे विभागों में अटैच है। दरअसल स्कूल शिक्षा विभाग के पास पर्याप्त शिक्षक होने के बाद भी बच्चों को शिक्षा नहीं मिल पा रही है। क्योंकि यह सभी शिक्षक के शैक्षणिक कार्यों में लगे हुए हैं। बता दे, कई बार विभाग की ओर से शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति व अटैचमेंट समाप्त कर उन्हें मूल संस्था में लौटने का आदेश भी जारी कर दिया जाता है लेकिन उसके बाद भी उसका पालन नहीं किया जाता। अभी मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग की तरफ से तबादला नीति जारी की जाती है। जिसमें ये कहा गया है कि दूसरे जगह शिक्षकों को अटैच नहीं किया जाए लेकिन उसके बाद भी 20 हजार से ज्यादा शिक्षक कई जगहों पर अटैच है। इनमें शामिल है कलेक्ट्रेट कार्यालय, मंत्रालय, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, मंत्री और अन्य अधिकारियों के वहां। अभी भी इसको लेकर कई बार आदेश जारी हो चुके हैं लेकिन उसके बाद भी इसकी प्रक्रिया नहीं हो पा रही हैं।
हर युवा को रोजगार, संकल्पबद्ध राज्य सरकार : मंत्री शुक्ला
11 Jan, 2025 10:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने भिण्ड जिले के मेहगांव में शुक्रवार को युवा संगम जिला स्तरीय रोजगार, स्व-रोजगार एवं अप्रेंटिस शिप मेले में युवाओं को नियुक्ति-पत्र सौंपे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिये संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रही है। मंत्री शुक्ला कार्यक्रम में मौजूद जनता और युवाओं को संबोधित कर रहे थे। जिला स्तरीय रोजगार, स्व-रोजगार मेले में 62 प्रतिष्ठित कम्पनियों ने सहभागिता की।
नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री शुक्ला ने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवा पीढ़ी की महत्वपूर्ण भूमिका है। युवाओं को शिक्षित व कुशल बना कर उन्हें योग्यता के आधार पर रोजगार एवं स्व-रोजगार प्रदान करने में केन्द्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा हर युवा को शिक्षित कर रोजगार से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव इसके लिए 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जयंती के शुभ अवसर पर प्रदेश के युवाओं को महत्वपूर्ण सौगात देने जा रहे हैं।
नवकरणीय ऊर्जा मंत्री शुक्ला ने कहा कि जिला स्तरीय रोजगार मेले का मुख्य उद्देश्य युवाओं को उचित नौकरी दिलाने में मदद करना है। इस तरह के रोजगार मेलों से युवाओं को रोजगार के नये अवसर प्राप्त होते हैं। हमारा प्रयास है कि जिला स्तरीय रोजगार मेले को विकासखंड स्तर पर भी ले जाया जाये, जिससे कि ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को भी रोजगार के अवसर सरलता से मुहैया कराये जा सकें। इन मेलों से रोजगार के इच्छुक युवाओं को कंपनी से सीधे संपर्क करने का अवसर भी सहज उपलब्ध होता है।
मंत्री शुक्ला ने कहा कि उन्हें गर्व है कि भिण्ड आगे बढ़ रहा है। अब वो समय नहीं है, जब भिण्ड की पहचान डकैतों से की जाती थी। आज भिण्ड के युवा देश की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। भिण्ड जिले के युवा आईएएस एवं आईपीएस भी बन रहे हैं। उन्होंने युवाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आप आगे बढ़ने का प्रयास करें, मार्ग की बाधाएं दूर करने का काम मध्यप्रदेश सरकार के प्रतिनिधि के रूप में वे करेंगे।
रोजगार मेले में पहुंचे 786 युवाओं का विभिन्न कंपनियों से आए अधिकारियों ने साक्षात्कार लिया। इसमें 400 युवाओं का तत्काल चयन किया गया। मंत्री शुक्ला ने मेले में ही 100 से अधिक युवाओं को ऑफर लेटर भी प्रदान किये।
भिण्ड के जिला स्तरीय रोजगार, स्व-रोजगार मेला में इवेलटेक इन्डस्ट्री मालनपुर, देवकवी हाइड्रोलिक एण्ड इंजीनियरिंग मालनपुर, मोरध्वज इन्ड्रस्टी मालनपुर, जोली कन्टेनरस, पुखराज पोलीमर्स मालनपुर, व्हीएस इन्टरप्राइजेज मालनपुर, मोरविननन्दन स्टील प्राइवेट, डेलफिस कन्टेनर प्राइवेट लिमिटेड, वेनचुरा सालासर, हाइलाइट ड्रग्स एण्ड फर्मासिटिकल्स लिमिटेड पी सीकोसमा सॉप, सांई फर्मासिटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड, शिव शक्ति टेंक, ग्लोरियस पॉलीप्लास्ट मालनपुर, राघव ट्रासंफार्मर इन्ड्रस्टी, डेफट ओरगेनिक्स लिमिटेड, मायरा बायोमास इनरजी, एएस पाइर इंजीनियरिंग, जय मारूति, जय मां अनजनिया गैस, मां कैला देवी मेटल, बृजवासी पैकिंग, सूर्या रोशनी, एसआरएफ लिमिटेड, सुप्रीम, तेवा, मेडिल फॉर्मूलेशन, जमुना ऑटो, रिसवा, इनवर्ट सुगर, सूर्या रोशनी स्टील लिमिटेड मालनपुर एवं अन्य प्रतिष्ठित कम्पनियों द्वारा भाग लिया गया। ushraj sin
पदोन्नति में अफसर मस्त कर्मचारी कर्मचारी त्रस्त
11 Jan, 2025 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। नए साल के पहले ही दिन प्रदेश के आला अफसरों यानि की अखिल भारतीय सेवाओं के अफसरों को थोक में पदोन्नति प्रदान कर दी जाती है, लेकिन प्रदेश के अन्य कर्मचारियों को हर साल इंतजार ही करना पड़ता है। हालत यह है कि बीते आठ सालों से कर्मचारियों को पदोन्नति का जो इंतजार बना हुआ है, वह समाप्त होने का नाम ही नहीं ले रहा है। जिन अफसरों को नए साल के पहले ही दिन यह लाभ अनवरत रूप से मिलता चला आ रहा है। उनमें आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अफसर शामिल हैं। इन अफसरों को लगातार पदोन्नति मिलने की वजह से प्रदेश के कर्मचारियों की ङ्क्षचता ही नहीं है। इसकी वजह से इन सालों में प्रदेश के करीब सवा लाख कर्मचारी बगैर पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त होने को मजबूर हो चुके हैं। इस मामले में पूर्व की सरकारों से लेकर वर्तमान सरकार तक का रवैया दोहरा बना हुआ है।प्रदेश के इतिहास में यह पहला मौका है जब राज्य के अधिकारी-कर्मचारियों को जद्दोजहद के बाद भी प्रमोशन नहीं मिल पा रहा है, जबकि नौकरशाहों के मामले में कोई अड़चन नहीं है। एक ही प्रदेश में दो प्रकार की नीति होने से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती ही जा रही है।
नौकरशाह इसलिए फायदे में
हाईकोर्ट ने 2002 के पदोन्नति नियम खारिज किए हैं, जबकि नौकरशाहों ने बीच का रास्ता निकाल लिया। इन्हें प्रमोशन के बजाय वरिष्ठ वेतनमान दिया जाता है। वरिष्ठ वेतनमान मिलने से ओहदा भी बढ़ रहा है। कर्मचारियों के मामले मेें सरकार तर्क देती है कि मामला कोर्ट में है। आदेश का इंतजार किया जा रहा है। इसकी वजह से राज्य के अधिकारी-कर्मचारी भी इंतजार ही कर रहे हैं।
दिखावे के लिए बना दी जाती हैं कमेटी
कमलनाथ सरकार के समय मामला सदन में उठा। तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने आसंदी से यहां तक कहा कि जब तक राज्य कर्मचारियों के प्रमोशन शुरू नहीं होते, तब तक नौकरशाहों के भी प्रमोशन न किए जाएं। राज्य कर्मचारियों के प्रमोशन का रास्ता निकालने हाईपावर कमेटी बनाई गई। कमेटी कागजों तक सीमित रही। बैठक नहीं हो पाई और कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई। शिवराज सरकार में भी कैबिनेट कमेटी गठित हुई, लेकिन कोई निर्णय नहीं हो सका। तभी से मामला फाइलों में कैद है। हालांकि अधिकारी, कर्मचारियों की नाराजगी दूर करने के लिए सरकार ने उच्च पद का प्रभार देने का रास्ता निकाला है। कर्मचारियों और अधिकारियों को कार्यवाहक का प्रभार सौंपकर संतुष्ट किया जा रहा है। पुलिस, जेल और वन विभाग के वर्दी वाले पदों पर यह व्यवस्था लागू की गई है, लेकिन कर्मचारी इससे संतुष्ट नहीं हैं।
क्यों नहीं मिल रहा प्रमोशन
2002 में तत्कालीन सरकार ने पदोन्नति नियम बनाते हुए प्रमोशन में आरक्षण का प्रावधान कर दिया। ऐसे में आरक्षित वर्ग के कर्मचारी प्रमोशन पाते गए, लेकिन सामान्य वर्ग के कर्मचारी पिछड़ गए। विवाद बढ़ा तो कर्मचारी कोर्ट पहुंचे। प्रमोशन में आरक्षण समाप्त करने का आग्रह किया। तर्क दिया कि प्रमोशन का लाभ सिर्फ एक बार मिलना चाहिए। मप्र हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल 2016 को मप्र लोक सेवा (पदोन्नति) नियम 2002 खारिज कर दिया। सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। शीर्ष कोर्ट ने यथास्थिति रखने का आदेश दिया। यानी तब से राज्य में अधिकारी-कर्मचारियों के प्रमोशन बंद हैं।
माँ नर्मदा के जल से सिंचित होगी बड़वानी जिले की कृषि भूमि : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
11 Jan, 2025 09:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हर खेत को पानी और हर हाथ को रोजगार दिलाना हमारा संकल्प है। पारस के स्पर्श से लोहा जिस प्रकार सोना हो जाता है, उसी प्रकार धरती को पानी मिले तो वह सोना उगलती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश में विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से हम इस संकल्प को पूरा करेंगे। हम हर गांव तक और हर खेत तक पानी पहुंचाएंगे। यह पानी अगर 60-70 वर्ष पहले खेतों को मिल जाता तो आज देश की दशा ही बदल जाती। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि माँ नर्मदा मध्यप्रदेश की जीवनदायिनी है और निमाड़ के लोगों को माँ नर्मदा का आँचल मिला है। नर्मदा घाटी की इंदिरा सागर परियोजना और लोअर गोई परियोजना की नहरों से बड़वानी जिले में सूक्ष्म सिंचाई पहले से हो रही है। अब सेंधवा और निवाली माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना से जिले के सुदूर क्षेत्रों में किसानों को अपने खेतों तक सिंचाई के लिये पर्याप्त मात्रा में माँ नर्मदा का जल उपलब्ध हो सकेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को बड़वानी जिले की सेंधवा कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित कार्यक्रम में 1402.74 करोड़ रूपये की लागत वाली सेंधवा माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना और 1088.24 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित होने वाली निवाली माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना का भूमि-पूजन कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने दोनों परियोजनाओं का नामकरण करते हुये कहा कि सेंधवा माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना निमाड़ के गांधी रामचंद्र विट्ठल के नाम पर और निवाली माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना का नाम टंटया मामा के नाम पर होगा।
कार्यक्रम में अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागरसिंह चौहान, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष अंतरसिंह आर्य, राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेरसिंह सोलंकी, लोकसभा सांसद गजेन्द्रसिंह पटेल, पूर्व मंत्री प्रेमसिंह पटेल सहित जन-प्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन मौजूद रहे।
वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में किया जायेगा परिवर्तित
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि टंट्या मामा, भीमा नायक जैसे जनजातीय नायकों ने देश के स्वाभिमान के लिए अंग्रेजों से संघर्ष किया। उनके नाम से अंग्रेज थर्राते थे। रेल उन्हें प्रणाम करके आगे बढ़ती थी। हम उनके बलिदान को याद करते हैं और उन्हें नमन करते हैं। हमारी सरकार ने कार्यभार ग्रहण करने के 3 महीने के अल्प समय में ही खरगोन में टंट्या मामा के नाम पर विश्वविद्यालय बनाया। जनजाति भाइयों के कल्याण के लिए टंट्या मामा योजना भी चलाई गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजातीय क्षेत्र के समग्र विकास के लिए वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में परिवर्तित करने की घोषणा की। साथ ही निवाली में विद्युत उप केंद्र प्रारंभ करने और विभिन्न नवीन मार्गो के निर्माण की घोषणा भी की।
हर पात्र व्यक्ति को मिलेगा पक्का मकान
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह बदलाव का दौर है। हम हर व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाएंगे, जन कल्याण हमारा मकसद है। प्रदेश में मुख्यमंत्री जनकल्याण अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें 26 जनवरी तक हर पंचायत, हर वार्ड में शिविर लगाए जा रहे हैं और शासन की विभिन्न योजनाओं का जनता को लाभ दिया जा रहा है। हमारी सरकार हर वर्ग के कल्याण के लिए कार्य कर रही है। गरीब, महिला, युवा और किसान कल्याण हमारी प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार हर व्यक्ति को पक्का मकान दिलाने के लिए भी संकल्पित है। जो व्यक्ति छूट गए हैं उनका दोबारा सर्वेक्षण कराया जाएगा।
स्वामी विवेकानंद की जयंती पर शुरू होगा युवा शक्ति मिशन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा के प्रदेश में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं। पलायन भी रुकेगा। बड़ी संख्या में सरकारी और निजी क्षेत्र में भर्तियां की जाएगी। स्वामी विवेकानंद जी के जन्म दिवस युवा दिवस से हम प्रदेश में युवा शक्ति मिशन शुरू कर रहे हैं। इसके अंतर्गत युवाओं के कल्याण, विशेष रूप से उन्हें रोजगार दिलाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। कल रविवार को लाडली बहनों की राशि उनके खातों में अंतरित की जाएगी।
हितग्राहियों और प्रबुद्धजनों से किया संवाद
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम के दौरान विभिन्न योजनाओं में हितग्राहियों को हितलाभ वितरण किये। उन्होंने हितग्राहियों से संवाद कर योजनाओं के लाभ और उससे उनके जीवन में आये बदलाव के बारे में जाना। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले प्रबुद्धजनों से संवाद भी किया और उनके द्वारा किये जा रहे समाज सेवा के कार्यों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में 58.463 करोड़ की लागत के 19 विकास कार्यों का लोकार्पण भी किया।
सेंधवा उद्वहन माइक्रो सिंचाई परियोजना
सेंधवा माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना से जिले के 98 ग्रामों में लगभग 44148.50 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा होगी। परियोजना से लगभग 53 हजार कृषक लाभान्वित होंगे। बड़वानी तहसील के ग्राम खेड़ी के समीप से नर्मदा नदी के जल को 2.70 मीटर व्यास की पाईप लाईन के माध्यम से 501 मीटर की उंचाई तक जल उद्वहन किया जायेगा। दाब-युक्त जल से कृषक स्प्रिंकलर/ड्रिप के माध्यम से सिंचाई का लाभ ले सकेंगे एवं कम जल से अधिक सिंचाई का लाभ मिलेगा। इस पद्धति से सिंचाई हेतु किसानों को भूमि समतल करने की आवश्यकता नहीं होगी। परियोजना के मुख्य पाईप लाईन की कुल लंबाई 56.394 किलोमीटर है। परियोजना से लाभान्वित ग्राम : सेंधवा माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना से सेंधवा तहसील के 67 ग्राम, राजपुर तहसील के 24 ग्राम, निवाली तहसील के 06 ग्राम, बड़वानी तहसील के 01 ग्राम के कृषक लाभान्वित होंगे। परियोजना की लागत 1402.74 करोड़ रुपये है।
निवाली उद्वहन माइक्रो सिंचाई परियोजना
निवाली माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना से जिले के 87 ग्रामों में लगभग 33 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। परियोजना अंतर्गत तहसील पाटी के ग्राम बोरखेड़ी के समीप से नर्मदा नदी के जल को 2.60 मीटर व्यास की पाईप लाईन के माध्यम से 465 मीटर की उंचाई तक जल उद्वहन किया जायेगा। दाब-युक्त जल से कृषक स्प्रिंकलर/ड्रिप के माध्यम से सिंचाई का लाभ ले सकेंगे एवं कम जल से अधिक सिंचाई का लाभ मिलेगा। इस पद्धति से सिंचाई हेतु किसानों को भूमि समतल करने की आवश्यकता नही होगी। परियोजना में मुख्य पाईप लाईन की कुल लंबाई 40.183 किलोमीटर है। परियोजना से तहसील पाटी के 29 ग्राम, बड़वानी के 26 ग्राम और निवाली के 32 ग्रामों के कृषक लाभान्वित होंगे। परियोजना की लागत 1088.24 करोड़ रुपये है।
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