मध्य प्रदेश
मप्र में फर्जी सर्टिफिकेट पर नौकरी करने वालों की बहार
1 Jan, 2025 12:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल । फर्जी सर्टिफिकेट को लेकर महाराष्ट्र की ट्रेनी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर पर जिस तरह ताबड़तोड़ कार्रवाई हुई, वह नजीर बन गया है। लेकिन मप्र में इस कार्रवाई का कोई असर पड़ेगा, ऐसा लगता नहीं है। क्योंकि मप्र में फर्जी सर्टिफिकेट पर काम करने वालों की भरमार है। आलम यह है कि अगर कभी किसी के खिलाफ शिकायत हो भी जाती है तो जांच में ही उसकी पूरी नौकरी गुजर जाती है। यानी मप्रमें फर्जी सर्टिफिकेट पर नौकरी करने वालों की बहार ही बहार है।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र की ट्रेनी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी जाति और दिव्यांग प्रमाण-पत्र लगाकर नौकरी हासिल की है। मप्र में भी फर्जी प्रमाण-पत्र लगाकर नौकरी करने वाले अधिकारी कम नहीं हैं। इनमें कई आईपीएस और आईएएस भी शामिल हैं। आईपीएस ऑफिसर रघुवीर सिंह मीणा का जाति प्रमाण-पत्र गलत पाया जा चुका है। इसी तरह एक एडिशनल एसपी के खिलाफ फर्जी जाति प्रमाण पत्र से नौकरी पाने के मामले में एफआईआर तक दर्ज हो चुकी है। मप्र में करीबन 1000 अधिकारी-कर्मचारी जाति प्रमाण-पत्र संदेह के घेरे में हैं। जिनमें से करीब 90 प्रतिशत मामलों में अब तक विभागीय जांच ही पूरी नहीं हो सकी। जिससे दागी अधिकारी-कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और वो धड़ल्ले से सरकारी नौकरियों पर जमे हुए हैं।
प्रथम श्रेणी के 600 अधिकारी संदेह में
मप्र में हलवा जाति का प्रमाण-पत्र भी फर्जी मानकर निरस्त किया जा चुका है। विदिशा जिले के सिरोंज में मीणा जाति अनुसूचित जनजाति में आती थी, जबकि राजस्थान में मीणा सामान्य जाति में आते हैं। इसी का फायदा उठाकर सिरोंज से बड़ी संख्या में फर्जी जाति प्रमाण पत्र का खेल चला। जिसमें कई अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है, उधर कई जांच के घेरे में हैं। मध्यप्रदेश में करीबन 600 क्लास वन अधिकारियों के जाति प्रमाण पत्र संदेह के घेरे में हैं। इस मामले में मप्र के सेवानिवृत्त डीजी अरुण गुर्टू ने कहा कि, आईएएस, आईपीएस और आईएफएस इन तीनों में पद के दुरूपयोग के सबसे ज्यादा मामले हैं, क्योंकि इन पर किसी तरह का सरकार का अंकुश नहीं है। इसके अलावा मध्यप्रदेश में राज्य सरकार के विभागों में भी कई अधिकारी-कर्मचारी फर्जी जाति प्रमाण पत्र से नौकरी कर रहे हैं। लेकिन ऐसे मामलों में जांच की गति बेहद धीमी है। ऐसे कर्मचारी अधिकारी सालों नौकरी करके रिटायर्ड भी हो जाते हैं और जांच ही खत्म नहीं हो पाती। विधानसभा के शीत कालीन सत्र में कांग्रेस विधायक डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह द्वारा पूछे गए एक अन्य सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि 2020 के बाद पिछले चार साल में 24 अधिकारी कर्मचारियों के जाति प्रमाण पत्र को निरस्त किया जा चुका है। इसी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर इन कर्मचारी-अधिकारियों ने सरकारी नौकरी प्राप्त की थी। वहीं जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह ने इसकी लिखित जानकारी विधानसभा में दी है। जिसमें कहा गया है कि प्रदेश में 232 कर्मचारी अधिकारियों के जाति प्रमाण पर की जांच की जा रही है। इन 232 कर्मचारी-अधिकारियों के खिलाफ अलग-अलग लोगों द्वारा शिकायतें दर्ज कराई गई हैं।
छानबीन समिति के पास लंबित हैं मामले
आरोप है कि, फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी पाने वाले अधिकतर अधिकारी-कर्मचारियों की जांच उच्च स्तरीय छानबीन समिति के पास लंबित है। जिन प्रकरणों की जांचें पूरी हो चुकी हैं, उन मामलों में भी विभागीय स्तर से कोई एक्शन नहीं हो रहा है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने वाले अधिकारी-कर्मचारी बदस्तूर अपनी नौकरी कर रहे हैं। विभागीय अधिकारी भी इन्हें न तो नौकरी से हटा पा रहे हैं और न ही फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर अर्जित किए गए लाभ की वसूली करा रहे हैं। आरोप है कि, एक तरफ प्रदेश में हजारों लोग फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरियां कर रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है। वहीं, एक मामले में जबलपुर में सहकारिता विभाग में कार्यरत एक महिला ने कार्यालय में काम करने वाली एक अन्य सहयोगी की जानकारी आरटीआई में मांगी। जिस महिला की जानकारी मांगी गई उसने जानकारी मांगने वाली महिला के विरुद्ध एससीएसटी एक्ट में मामला भी दर्ज करा दिया। हालांकि राज्य सूचना आयोग ने इस मामले में कहा कि, शासकीय कार्यालय में काम करने वाली महिला के जाति प्रमाण पत्र की जानकारी व्यक्तिगत कैसे हो सकती है।
सालों बाद भी विभागीय कार्रवाई नहीं
इधर, एक अन्य मामले में फर्जी प्रमाण पत्र लगातार नौकरी पाने वाले अधिकारी के खिलाफ विभागीय स्तर से तो 11 साल पहले पुलिस थाने में स्नढ्ढक्र के लिए पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन उन्हें पद से हटाने की कार्रवाई आज तक नहीं हो पाई है। ऐसे अफसरों से वसूली की बात तो भूल ही जाइए। एक मामला जहां मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (मैपकास्ट) का है तो वहीं 8 मामले हथकरघा विभाग से जुड़े हैं। आरोप है कि, इनमें एक में भी दोषी अधिकारी-कर्मचारी पर एक्शन नहीं हुआ। विभागीय अधिकारियों की ओर से मामले को लंबे समय से दबाया जा रहा है। इसी का नतीजा है कि बड़ी संख्या में लोग फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर अपनी नौकरी पूरी करके रिटायर तक हो चुके हैं और ऐसे अधिकारियों के संबंध में तो कोई जांच करना ही नहीं चाहता है। बता दें कि, प्रमाण पत्र के दो चर्चित मामलों में सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग है। इसमें पहला माधुरी पाटिल बनाम एडिशनल कमिश्नर ट्राइबल डिपार्टमेंट महाराष्ट्र और दूसरा डायरेक्टर ट्राइबल वेलफेयर आंध्रप्रदेश बनाम लावेदी गिरी। इसमें कहा गया है कि यदि उच्च स्तरीय छानबीन समिति जाति प्रमाणपत्र को फर्जी पाती है, तो आरोपी को नियोक्ता सीधे बर्खास्त कर सकता है। संबंधित कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की जाए।
अफसरों-कारोबारियों की सांठ-गांठ की खुलेंगी परतें
1 Jan, 2025 11:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मप्र में रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन से जुड़ी तीन कंपनियों पर आयकर की छापेमारी में अफसरों और कारोबारियों के काले कारोबार की परतें खुलने वाली हैं। दरअसल, त्रिशूल कंस्ट्रक्शन के कॉल डिटेल्स (सीडीआर) आयकर विभाग को मिल चुकी है। आयकर विभाग इसकी पड़ताल में जुट गया है। दावा किया जा रहा है कि इसकी पड़ताल से चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। गौरतलब है कि रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन से जुड़ी कंपनियों पर आयकर की छापेमारी में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आयकर विभाग ने दस्तावेजों में एंट्री की है कि चंदनपुरा में 54 एकड़ जमीन खरीदने के लिए रायपुर के खनन कारोबारी महेंद्र गोयनका ने बिल्डर राजेश शर्मा को 45 करोड़ रुपए कैश दिया था। यह जमीन तीन अलग-अलग कंपनियों के जरिए खरीदी गई। राजेश शर्मा के घर से मिले दस्तावेजों में यूरो पायलेट प्रा.लि. नामक कंपनी सामने आई, जो गोयनका की बताई जा रही है। जमीन का सौदा 65 करोड़ रु. में हुआ था। बाद में कीमत 110 करोड़ हो गई। भुगतान तीन किश्तों में 25 करोड़, 55 करोड़ और 30 करोड़ रुपए के रूप में हुआ।
लगातार बातचीत करने वालों की सूची बन रही
जानकारी के अनुसार त्रिशूल कंस्ट्रक्शन के कॉल डिटेल्स (सीडीआर) आयकर विभाग को मिल चुकी है। इससे पहले महेंद्र गोयनका की डायरी से भी कई क्लू मिले हैं। सूत्रों की मानी जाए तो राजेश शर्मा के यहां से मिले मोबाइल फोन की सीडीआर का दस महीने ने निकाल लिया है। जिसमें उसने कई अफसरों से सीधे बातचीत की। इनमें लगातार टू वे कम्युनिकेशन करने वाले की सूची बन रही है। उनकी सीडीआर की जांच में मनी लांड्रिंग के बड़े खुलासे हो सकते हैं। आयकर के निशाने पर आए राजेश शर्मा की कई अफसरों से एक दिन में कई बार बात हुई। जबकि कुछ अफसरों से उसकी लगातार बातें होती रही हैं। आयकर विभाग को शक है कि इन अफसरों से इतनी बातचीत इंवेस्टमेंट को लेकर हो सकती है। यह भी सामने आया है कि कुछ अफसरों तक उसकी पहुंच अपने दलाल के जरिए थी। वल्लभ भवन, पुलिस मुख्यालय और वन विभाग में उसके दलाल मौजूद थे, जो अफसरों से जान पहचान और इंवेस्टमेंट करवाने के लिए राजेश शर्मा के संपर्क में लाए जाते थे। क्वालिटी बिल्डर्स के मुन्ना-विनोद अग्रवाल, ईशान बिल्डर्स के तेजेंदर और बलविंदर पाल पर आयकर विभाग के बाद अब मध्य प्रदेश कॉडर के कुछ आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अफसरों की मुश्किलें बढ़ सकती है। राजेश शर्मा ने दलालों के जरिए अपना जाल वल्लभ भवन, पुलिस मुख्यालय और वन विभाग में फैला लिया था। आयकर विभाग को जांच के दौरान इस संबंध में अहम जानकारी लग गई है। इस जानकारी की और पुख्ता करने के बाद इस विभाग की जद में प्रदेश के कई ब्यूरोक्रेटस और नेता आ सकते हैं।
अब होंगे चौंकाने वाले खुलासे
राजेश शर्मा सहित क्वालिटी बिल्डर्स के मुन्ना विनोद अग्रवाल, ईशान बिल्डर्स के तेजेंदर और बलविंदर पाल के 52 ठिकानों पर आयकर विभाग के छापों में मिली संपत्ति और दस्तावेजों के प्रारंभिक आंकलन में ही बड़ी मात्रा में बेनामी संपत्ति, शैल कंपनीज और बोगस खातों से फंड रोटेशन की आशंका को बल मिला है। आयकर की जांच इस दिशा में आगे बढ़ रही है कि किन लोगों की काली कमाई को सफेद करने के लिए किन किन कानूनों का उल्लंघन हुआ है। उन पर आयकर विभाग जिम्मेदारी फिक्स करेगा। आयकर विभाग ने राजेश से ने आठ करोड़ से ज्यादा की नकदी और करोड़ो रुपए की ज्वेलरी के जमीन के कागजात जप्त किये थे। आयकर विभाग ने इन सभी के यहां के मिले मोबाइल और अन्य दस्तावेजों और अलग- अलग बैंक खातों, लॉकर्स के आधार पर अपनी जांच को आगे बढ़ाया। दस्तावेजों में कई अफसरों के नाम और जिक्र मिला है। इनकी सीडीआर मिलने और उनकी जांच के बाद बड़े खुलासे होने की संभावना है।
दस्तावेजों में अफसरों के भी नाम
जानकारी के अनुसार दस्तावेजों में अफसरों के भी नाम आने लगे हैं। पहला नाम आईएफएस निवेदिता का है, जिन्होंने मंदिर में चांदी का मुकुट चढ़ाने के लिए राजेश को नकद पैसा दिया। यह कितना था, इसका जिक्र नहीं है। निवेदिता कौन है, इसकी जानकारी के बाद आयकर उन्हें पूछताछ के लिए बुला सकता है। आयकर छापों में दस्तावेजों में दलालों का भी जिक्र आया है। इसमें बताया गया कि भोपाल कलेक्ट्रेट व तहसील दफ्तर के लिए दलाली अरविंद दुबे करता था। पीएचक्यू में सब इंस्पेक्टर सोलंकी और वल्लभभवन में फॉरेस्ट के काम अजीत शर्मा देखता था। जानकारी के अनुसार 982602**01, 930102**01 और 748945**82 भी आयकर विभाग को मिले हैं, अब इनकी पड़ताल की जाएगी। गिट्टी का कारोबार करने वाली ट्राइडेंट इंटरप्राइजेज कंपनी के कागज मिले हैं, जिसे राजेश शर्मा की पत्नी चलाती है। त्रिशुल कंस्ट्रक्शन में भी पत्नी पार्टनर है। अवधेश सिंह, नान सिंह और धर्मेंद्र के आधार कार्ड मिले हैं। विभाग को शक है कि इनके नाम से भी रजिस्ट्री हुई। सेंट्रल पॉर्क की प्रॉपर्टी में राजेश ने बलविंदर उर्फ सोनू और बॉबी के साथ पार्टनरशिप की। वर्ष 2020-21 में निवेश किया। सेंट्रल पार्क के आठ प्लॉट जिन्हें 40 लाख रुपए में खरीदना बताया गया, उसके कागज बिल्डर राजेश के पास मिले हैं। सेंट्रल पार्क की 31 एकड़ जमीन के कई दस्तावेज मिले हैं, जिनमें नगद लेन-देन हुआ है। महेंद्र गोयनका के साथ सेंट्रल पार्क मामले में लिखित एग्रीमेंट नहीं मिला, लेकिन ऐसा बताया गया कि 15 प्रतिशत की प्रॉफिट शेयर वाली बात मौखिक हुई।
साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल का टोल-फ्री नंबर 1930 का स्टीकर जारी
1 Jan, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिलासपुर। पुलिस ग्राउंड में चेतना जागरूकता अभियान के तहत, चेतना विरुद्ध साइबर अपराध के तारतम्य में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसका नेतृत्व पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने किया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य साइबर अपराधों के बढ़ते खतरों के प्रति जन-जागरूकता फैलाना और नागरिकों को इससे बचाव के उपाय सिखाना था। इस अवसर पर साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के टोल-फ्री नंबर 1930 के स्टीकर जारी किए गए, जो लोगों को साइबर अपराध की रिपोर्टिंग के लिए प्रोत्साहित करेंगे। इन स्टीकर्स को पुलिस अधिकारियों ,पेट्रोलिंग के वाहन, चेतन मित्रों, मीडियाकर्मियों तथा आमजन के निजी वाहनों पर लगाया गया ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस सुविधा का लाभ उठा सकें।
पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने इस अवसर पर कहा कि साइबर अपराधों का बढ़ता खतरा हमारे समाज और व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है। जागरूकता और सतर्कता से ही हम इस खतरे को कम कर सकते हैं। उन्होंने जनता से आग्रह किया कि वे किसी भी साइबर अपराध का सामना करने पर तुरंत 1930 पर संपर्क करें।
कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षु आईपीएसड़सुमित कुमार ने आमजन को साइबर अपराधों के विभिन्न रूपों जैसे डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल्स से बचने के लिए जरूरी उपायों की जानकारी दी। साथ ही, यह सुनिश्चित किया गया कि सभी वर्गों तक यह संदेश पहुंचे।
इस अभियान में शहर के प्रमुख सामाजिक संस्थानों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे जनजागरूकता को व्यापक स्तर पर फैलाने में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती अर्चना झा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उदयन बेहार, नगर पुलिस अधीक्षक (कोतवाली) अक्षय प्रमोद सभद्रा, नगर पुलिस अधीक्षक (सिविल लाइन) निमितेश सिंह, अनुविभागीय पुलिस अधिकारी (कोटा) नूपुर उपाध्याय, उप पुलिस अधीक्षक यातायात संजय साहू, प्रशिक्षु आईपीएस सुमित कुमार, प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षक रोशन आहुजा सहित शहर के सभी थानों के थानाप्रभारी एवं अन्य पुलिस अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
नेता पुत्रों की कब खुलेगी किस्मत?
1 Jan, 2025 10:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल । मप्र भाजपा की राजनीति में नेता पुत्रों के राजनीतिक भविष्य पर तथाकथित तौर पर ताला लगा हुआ है। परिवारवाद पर भाजपा और विशेषकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रोक ने मप्र के उन नेता पुत्रों को मायूस कर दिया है, जो राजनीतिक विरासत पाकर अपना भविष्य संवारना चाहत थे। आलम यह है कि चुनावी राजनीति के साथ ही संगठन में भी नेता पुत्रों के लिए फिलहाल दरवाजे बंद हैं। ऐसे में हर कोई यही सवाल पूछ रहा है कि नेता पुत्रों की किस्मत का ताला कब खुलेगा?गौरतलब है कि मप्र में नेता पुत्रों की बड़ी पौध राजनीति में हाथ आजमान को तैयार है। लेकिन पीएम मोदी के सख्त रुख के चलते विधानसभा से लेकर लोकसभा चुनाव तक में नेता पुत्रों को टिकट नहीं मिला, बल्कि विधायक बेटे आकाश का टिकट कटने पर पूर्व राष्ट्रीय महासचिव और मप्र सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को चुनाव लडऩा पड़ा। वहीं अब संगठन चुनाव में भी उनकी पूछपरख नहीं हो रही है। चनावों में टिकट न मिलने के बाद अब संगठन चुनाव में भी इन नेता पुत्रों की कोई पूछपरख नहीं है। बता दें, पिछले दिनों लोकसभा चुनाव और कई राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली जीत को पार्टी ने परिवारवाद को बढ़ावा न देने की उपलब्धि भी करार दिया। यही वजह है कि जो नेता पुत्र हमेशा से राजनीति में आगे दिखाई देते थे, वे अब मैदान से ही गायब हैं।
राजनीति में सक्रिय नहीं नेताओं के पुत्र
भाजपा में आधे दर्जन से अधिक दिग्गज नेताओं ने कई वर्षों पहले से अपनी राजनीतिक विरासत को अगली पीढ़ी को सौंपने की तैयारी शुरू कर दी थी। लेकिन परिवारवाद के कारण कईयों की मंशा पूरी नहीं हो पाई है। पहले राजनीतिक और सामाजिक कार्यों में अपनी उपस्थिति का लोहा मनवाने वाले नेता पुत्र अब राजनीति में सक्रिय नहीं हैं। फिलहाल इस मुद्दे पर पार्टी के कोई भी नेता खुल कर बोलना नहीं चाहते हैं। हर किसी का यह कहना है कि राजनीतिक विरासत पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्पष्ट संदेश के बाद कहने के लिए कुछ नहीं बचता। इसका असर दिखने लगा है। पहले नेताओं के पुत्र सक्रिय रहते थे वे अब नजर नहीं आ रहे हैं। यदि परिवारवाद पर रोक का असर टिकट वितरण पर भी नजर आया तो दिग्गजों और उनके पुत्रों के राजनीतिक अरमान ठंडे हो जाएंगे। उधर, चुनावों में किस्मत आजमाने की आस लगाए बैठे नेता-नेता पुत्रों को पार्टी का यह दावा भी निराश करने वाला है कि पिछले दिनों जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए, वहां भाजपा को मिली जीत परिवारवाद को बढ़ावा नहीं देने की वजह से हुई है।
चुनाव लडऩे की मंशा धरी की धरी रह गई
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, जयंत मलैया, गौरीशंकर बिसेन और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा जैसे राजनेताओं के पुत्र-पुत्री पहले राजनीति में जमकर सक्रिय थे, वे अब कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में मप्र में पार्टी के दिग्गजों पर अपनी राजनीतिक विरासत पुत्रों को देने की मंशा पर संकट गहरा गया है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव के पहले से सक्रिय हैं। इस लोकसभा चुनाव में उन्होंने विदिशा में जनसभाएं की भी कीं। शिवराज सिंह चौहान ने यहां से चुनाव लड़ा है। हालांकि, पहले उन्होंने कहा था कि जनता योग्य समझेगी तभी टिकट की दावेदारी के बारे में सोचूंगा। पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री व विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के पुत्र देवेंद्र सिंह तोमर (रामू) भी लगभग 10 वर्ष से राजनीति में सक्रिय हैं। विधानसभा चुनाव 2023 में उन्हें टिकट मिलने की अटकलें थी पर पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने नरेंद्र सिंह तोमर को ही प्रदेश की राजनीति में लाकर विधानसभा चुनाव लड़ाया। सागर जिले की रहली विधानसभा सीट से नौ बार के विधायक और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव भी बेटे अभिषेक को स्थापित करना चाहते हैं। वह दमोह या खजुराहो से इस बार लोकसभा चुनाव के टिकट के लिए दावेदारी कर रहे थे, पर पार्टी ने दमोह से राहुल सिंह लोधी का उतारा। उधर, दमोह से वर्ष 2023 में सातवीं बार विधायक बने और पूर्व मंत्री जयंत मलैया के पुत्र सिद्धार्थ वर्ष 2021 के उपचुनाव में यहां भाजपा से टिकट की दावेदारी भी कर रहे थे, पर पार्टी ने कांग्रेस से आए राहुल लोधी को उतारा। राहुल चुनाव हारे तो मलैया परिवार पर भितरघात का आरोप लगा। सिद्धार्थ को पार्टी से निकाल दिया गया था। वह दोबारा अप्रैल 2023 में पार्टी में शामिल तो हो गए, पर पार्टी ने उनकी जगह फिर जयंत मलैया हो ही यहां से टिकट दिया। बालाघाट से विधायक व पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन अपनी बेटी मौसम को आगे बढ़ा रहे थे। उन्हें विधानसभा का टिकट भी मिला था, पर लडऩे से मना कर दिया तो अंतत: गौरीशंकर को ही चुनाव लडऩा पड़ा। अब नेता पुत्रों की किस्मत कब खुलेगी इसको लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
मोहन सरकार के नए साल का लक्ष्य निर्धारित
1 Jan, 2025 09:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश की डॉ मोहन यादव सरकार ने नए साल के लिए लक्ष्य निर्धारित किया है। सरकार ने प्रदेश के विकास के लिए रोड मैप बनाया है। चार साल और विजन का बड़ा खाका तैयार किया गया है। आइए जानते है एमपी सरकार के रोड मैप के अहम बिंदु प्रदेश की अर्थव्यवस्था को दोगुना किया जाएगा। एक लाख 25 हजार अस्थाई विद्युत कनेक्शन लेने वाले कृषकों को सौर ऊर्जा के पम्प प्रदाय किये जाएंगे। अगले 4 वर्ष में सौर ऊर्जा पम्प प्रदाय कर किसानों को विद्युत आपूर्ति में आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। कृषि फसलों के विविधीकरण की पहल की जाएगी, जिससे किसानों की आय में बढ़ौत्तरी हो। अधिक दाम प्रदान करने वाली फसलों की ओर किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
सिंचाई, एजुकेशन को लेकर
एमपी में वर्तमान में 50 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र है..अगले पांच वर्षों में इसे दोगुना एक 1 करोड़ हेक्टेयर किया जाएगा। वर्तमान में 17 शासकीय मेडिकल कॉलेज है और 13 प्राइवेट मेडिकल कॉलेज है। पीपीपी मोड पर 12 और 8 शासकीय मेडिकल कॉलेज चालू किये जाएंगे। प्रदेश में दुग्ध समितियों का विस्तार किया जाएगा। वर्तमान में प्राथमिक दुग्ध समितियां 8,500 गांवों में ही है। एक वर्ष में 15 हजार गांवों तथा 4 वर्षों में प्रदेश के समस्त गांवों तक दुग्ध समितियां गठित की जाएंगी।
एक लाख सरकारी भर्तियां
महिला स्व-सहायता समूह को जन आंदोलन बनाया जाएगा। वर्तमान में 25 लाख महिलाएं स्व-सहायता समूह से जुड़ी है यह संख्या चार वर्ष में 50 लाख तक बढ़ाई जाएगी। यात्रियों की सुविधा के लिए प्रदेश में बसों के लिये परिवहन कंपनी बनाकर संचालन किया जाएगा। वर्ष-2025 को उद्योग एवं रोजगार-वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। जिसमें युवाओं को शासकीय नौकरी के साथ स्व-रोजगार से जोडऩे का वृहद स्तर पर कार्य होगा। एक लाख सरकारी भर्तियां की जाएंगी।
मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र का गठन
प्रदेश में मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र (महानगर) का गठन किया जाएगा। इंदौर-उज्जैन-देवास-धार को मिलाकर एक और भौपाल-सीहोर रायसेन विदिशा-ब्यावरा (राजगड) को मिलाकर दूसरा मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र बनाया जाएगा। संभाग, जिला, तहसीलों और अनुविभागों का पुनर्गठन किया जाएगा। भारत सरकार के विजन के अनुरूप राज्य के सभी संभाग मुख्यालयों जैसे ग्वालियर, सागर, रीवा, जबलपुर, नर्मदपुरम, शहडोल आदि को भी क्षेत्रीय आर्थिक विकास केंद्र के रूप में विकसित करने की अवधारणा के साथ कार्य योजना बनाई जाएगी। प्रदेश में संतुलित नगरीय विकास को गति देने और आर्थिक विकास के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए पुनर्घनत्वीकरण और पुनर्विकास नीति के अतिरिक्त एकीकृत टाउनशिप नीति तैयार की जाएगी। इसमें निजी भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा।
दिग्विजय के गढ़ में आरएसएस का शक्ति संगम
1 Jan, 2025 08:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना के 100वें वर्ष में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के गढ़ राधौगढ़ में तीन दिवसीय राघौदय शक्ति संगम कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन 3, 4 और 5 जनवरी 2025 को पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में होगा।
इस कार्यक्रम में खंड-कुंभराज, चाचौड़ा, मधुसूदनगढ़ और राधौगढ़ से 3,000 से अधिक स्वयंसेवकों की भागीदारी रहेगी। गुना विभाग के अंतर्गत राधौगढ़ जिले में पहली बार इस तरह के विशाल और भव्य शक्ति संगम का आयोजन किया जा रहा है। 3 जनवरी को महापुरुषों के जीवन चरित्र पर आधारित भव्य प्रदर्शनी का उद्घाटन होगा। 4 जनवरी को राधौगढ़ नगर में स्वयंसेवकों का विशाल पथ संचलन होगा। 5 जनवरी को शिविर स्थल पर शारीरिक प्रदर्शन के साथ शक्ति संगम का समापन होगा।
बंगाल में सियासी हिंसा: मिताली बाग की कार पर हमला, सांसद और ड्राइवर घायल
विधानसभा के बाहर हाई-वोल्टेज ड्रामा: MLA ट्रैक्टर लेकर पहुंचे, पुलिस संग झूमाझटकी
राजनीति में बड़ा उलटफेर: राघव सहित 7 AAP सांसद BJP में, संजय सिंह की प्रतिक्रिया
गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मिलेगा पक्का घर
अंपायर के फैसले पर बहस करना माना जाता है अनुशासनहीनता
बंगाल चुनाव पर पीएम मोदी का बड़ा दावा, बोले- अब शपथ समारोह में आऊंगा
