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वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर संसद से सुप्रीम कोर्ट तक छिड़ी बहस
10 Apr, 2025 05:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वक्फ संशोधन अधिनियम को लेकर सत्ता पक्ष इसकी लगातार तारीफ कर रहा है तो विपक्ष इसके खिलाफ लगातार मुखर है. कई सांसद इस अधिनियम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रूख कर चुके हैं. इस लिस्ट में मणिपुर विधानसभा में नेशनल पीपुल्स पार्टी इंडिया (NPP) के नेता और क्षेत्रगाओ सीट से विधायक शेख नूरुल हसन ने वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
खास बात यह है कि हसन की पार्टी एनपीपी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा है और बीजेपी की सहयोगी भी है. याचिकाकर्ता ने याचिका के जरिए इस संशोधन पर चिंता जताई है, जिसमें इस्लाम का पालन करने वाले अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को अपनी संपत्ति वक्फ को देने से वंचित कर दिया गया है. उनका तर्क है कि यह प्रावधान उनके अपने धर्म का पालन करने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है.
धारा 3ई अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के खिलाफ
वक्ट संशोधन अधिनियम 2025 की धारा 3ई अनुसूचित जनजाति के लोगों (5वीं या छठी अनुसूची के तहत) के स्वामित्व वाली भूमि को वक्फ संपत्ति घोषित करने से रोकती है. याचिका के अनुसार, “धारा 3ई के अनुसार संविधान की 5वीं अनुसूची या छठी अनुसूची के प्रावधानों के तहत अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों की कोई भी जमीन वक्फ संपत्ति के रूप में घोषित या स्वीकार नहीं की जाएगी. इसलिए इस तरह का प्रतिबंध अनुसूचित जनजातियों के लोगों को उनके धार्मिक अधिकारों का प्रयोग करने से रोकता है और यह भेदभावपूर्ण है.”
पिछले दिनों संसद के दोनों सदनों ने लंबी बहस के बाद वक्ट संशोधन विधेयक को पास कर दिया था, जिसे 5 अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस अधिनियम को मंजूरी दे दी थी. फिर सरकार की ओर से नोटिफिकेशन जारी होने के बाद 8 अप्रैल को इस एक्ट को देशभर में लागू कर दिया गया.
वक्फ की धार्मिक आजादी में बाधा डालता
याचिका में यह भी कहा गया कि वक्फ में संशोधन मनमाना है और मुस्लिम धार्मिक संपत्तियों को नियंत्रित करने की कोशिश है. इसमें कहा गया है कि यह संशोधन मनमाने तरीके से प्रतिबंध लगाता है और इस्लामी धार्मिक बंदोबस्तों पर सरकार के नियंत्रण को भी बढ़ाता है, जो वक्फ की धार्मिक आजादी में बाधा डालता है.
इसमें आगे कहा गया है कि ये संशोधन वक्फ के धार्मिक चरित्र को भी विकृत करेंगे और साथ ही वक्फ तथा वक्फ बोर्डों के प्रशासन में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अपरिवर्तनीय रूप से नुकसान पहुंचाएंगे. याचिका में यह भी कहा गया है कि उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ को खत्म करने का प्रावधान राम जन्मभूमि मामले में दिए गए फैसले के उलट है.
इससे पहले टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी, कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, AAP विधायक अमानतुल्लाह खान के अलावा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB), जमीयत उलमा-ए-हिंद और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) समेत कई अन्य लोगों और संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया है.
रामदेव के 'शरबत जिहाद' बयान से सोशल मीडिया पर मचा बवाल
10 Apr, 2025 05:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
योग गुरु रामदेव ने हाल ही में फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने “शरबत जिहाद” शब्द का उपयोग किया और इसने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी. वीडियो में रामदेव का कहना था कि एक प्रसिद्ध शरबत बनाने वाली कंपनी अपने मुनाफे से मस्जिदें और मदरसे बना रही है. इसके बजाय उन्होंने लोगों से पतंजलि का गुलाब शरबत खरीदने की अपील की.
यह वीडियो पतंजलि प्रोडक्ट्स के आधिकारिक फेसबुक पेज पर शेयर किया गया, जिसमें लिखा गया है कि शरबत जिहाद और कोल्ड ड्रिंक के नाम पर बिक रहे टॉयलेट क्लीनर के जहर से अपने परिवार और मासूम बच्चों को बचाएं. केवल पतंजलि शरबत और जूस ही घर लाएं. गूगल सर्च पर जाकर ‘पतंजलि स्टोर या चिकित्सालय नियर मी’ सर्च करें.
शरबत जिहाद को लेकर बाबा रामदेव ने क्या कहा
बाबा रामदेव ने इस वीडियो में सॉफ्ट ड्रिंक कंपनियों की कड़ी आलोचना की और कहा कि जो लोग गर्मी में ठंडे पेय पदार्थ पीते हैं, वे असल में स्वास्थ्य के लिए खतरनाक “जहर” पी रहे हैं. उन्होंने इन पेय पदार्थों को एक प्रकार से “हमला” करार दिया.
रामदेव ने कहा कि इस प्रकार के शरबत पीने से मस्जिदों और मदरसों को आर्थिक मदद मिलती है, जबकि पतंजलि का गुलाब शरबत पीने से पैसा गुरुकुल, आचार्यकुलम, पतंजलि विश्वविद्यालय और भारतीय शिक्षा बोर्ड को जाता है.
बाबा रामदेव ने शरबत जिहाद से बचने की दी सलाह
रामदेव ने इसे शरबत जिहाद का नाम देते हुए इसे लव जिहाद और वोट जिहाद से जोड़ने की कोशिश की. उनका कहना था कि जैसे लोग लव जिहाद और वोट जिहाद से बचने की सलाह देते हैं, वैसे ही अब शरबत जिहाद से भी बचना चाहिए.
बाबा रामदेव का बयान सोशल मीडिया वायरल हो गया है और इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं समाने आ रही हैं. लोगों के बीच इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.
वक्फ अधिनियम पर चुप्पी क्यों? पीडीपी ने सरकार से मांगा जवाब
10 Apr, 2025 04:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जम्मू-कश्मीर में विधानसभा द्वारा वक्फ अधिनियम पर प्रस्ताव पारित नहीं हो सका है. इसे लेकर राजनीतिक पार्टियों ने चिंता जताई है. पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व की एक तत्काल बैठक बुलाई. श्रीनगर में आयोजित इस बैठक में डॉ. महबूब बेग, आसिया नक्श, गुलाम नबी लोन हंजूरा, मुहम्मद खुर्शीद आलम, बशारत बुखारी और अन्य सहित पीडीपी के प्रमुख नेता शामिल हुए. कथित तौर पर नेताओं ने विधायी मंच पर वक्फ से संबंधित मामलों को संबोधित करने में देरी के निहितार्थों पर विस्तार से चर्चा की.
पार्टी सूत्रों ने बताया कि महबूबा मुफ्ती ने इस मुद्दे पर विधानसभा की चुप्पी पर गंभीर चिंता व्यक्त की और इसे गहरे धार्मिक और प्रशासनिक महत्व का मामला बताया.
पीडीपी की बैठक में बना ये प्लान
उन्होंने कथित तौर पर पार्टी के सहयोगियों से कहा, “वक्फ अधिनियम पर प्रस्ताव पारित करने में विफलता केवल एक राजनीतिक चूक नहीं है, यह हमारे संस्थानों की धार्मिक भावना और स्वायत्तता को प्रभावित करती है.” वक्फ संपत्तियां, जिनमें दरगाह, मस्जिद और कब्रिस्तान शामिल हैं, लंबे समय से इस क्षेत्र में मुस्लिम समाज के धार्मिक और सांस्कृतिक ताने-बाने का केंद्र रही हैं.
उन्होंने कहा कि उचित कानून के माध्यम से उनके प्रशासन को संचालित करने में किसी भी तरह की देरी या अस्पष्टता ने समुदाय के भीतर आशंका पैदा कर दी है.
महबूबा मुफ्ती ने सीएम उमर पर साधा निशाना
बैठक में मौजूद नेताओं ने स्पष्ट कानून की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया जो वक्फ संपत्तियों को कुप्रबंधन या राजनीतिक हस्तक्षेप से बचाता है, उन्होंने सरकार से वक्फ अधिनियम पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने और धार्मिक निकायों की पवित्रता सुनिश्चित करने का भी आह्वान किया.
बता दें कि हाल में लोकसभा और राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पारित हो गया है. उसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है. इससे इस विधेयक का कानून बनने का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन विपक्षी पार्टियां लगातार वक्फ कानून का विरोध कर रही हैं. ऐसे में जम्मू कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला के रवैया पर महबूबा मुफ्ती ने रोष जताया है और उन पर सियासी हमला बोला है.
कांग्रेस का मिशन गुजरात: राहुल गांधी के नेतृत्व में बीजेपी को हराने की तैयारी
10 Apr, 2025 01:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कांग्रेस ने अपने खिसके हुए जनाधार को पाने और दोबारा से खड़े होने के लिए गुजरात के अहमदाबाद में दो दिनों तक चिंतन-मंथन किया. साबरमती के तट से कांग्रेस ने दो संकल्पनाओं के प्रस्ताव को पारित किया, जिसमें पहला राष्ट्रीय और दूसरा गुजरात पर केंद्रित रहा. कांग्रेस समझ रही है कि देश की सत्ता से बीजेपी को बाहर करना है तो उसकी शुरुआत गुजरात से ही करनी होगी. ऐसे में कांग्रेस ने मिशन गुजरात को फतह करने संकल्प के साथ आगे बढ़ने की सियासी प्लानिंग की है, लेकिन राहुल गांधी का यह सपना कैसे साकार होगा?
गुजरात में विधानसभा चुनाव 2027 में है और कांग्रेस ने ढाई साल पहले अपनी तैयारी शुरू कर दी है. गुजरात की सत्ता से तीन दशकों से दूर कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सिर्फ सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि महात्मा गांधी और सरदार पटेल के विचारों के साथ सेवा का यज्ञ करना है. यही वजह थी कि कांग्रेस ने देश की आजादी की लड़ाई में गुजरात के योगदान को रेखांकित करते हुए बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने का टारगेट तय किया. कांग्रेस समझ रही है कि अगर पीएम मोदी और अमित शाह के गृह राज्य में बीजेपी हारती है तो फिर देश के बाकी राज्यों में बीजेपी का तिलस्म टूट जाएगा.
कांग्रेस ने गुजरात जीतने का रखा लक्ष्य
कांग्रेस ने अहमदाबाद अधिवेशन में गुजरात को फतह करने का लक्ष्य रखा, जिसके लिए पार्टी ने गुजरात और कांग्रेस के रिश्तों को सामने रखने की कोशिश की तो कांग्रेस शासन में गुजरात में हुए विकास की गाथाओं का भी जिक्र किया, फिर चाहे राज्य में दूध क्रांति हो या फिर नर्मदा सिंचाई योजना और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का अस्तित्व में आना. कांग्रेस ने बताने की कोशिश की कि आजादी के बाद गुजरात के विकास में कांग्रेस की कैसी अहम भूमिका रही.
अधिवेशन के अंतिम दिन बुधवार को पार्टी ने गुजरात प्रस्ताव जारी करते हुए राज्य की भाजपा सरकार को आड़े हाथ लिया. कांग्रेस के प्रस्ताव में कहा गया कि गुजरात महात्मा गांधी और सरदार पटेल की जन्मभूमि है,जिसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई रही है. कांग्रेस ने महात्मा गांधी और सरदार पटेल को कांग्रेस का पूर्व अध्यक्ष बताते हुए कहा कि वो उनके सपनों का गुजरात बनाने के लिए सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष के लिए तैयार हैं. इतना ही नहीं सरदार पटेल और नेहरू के रिश्तों को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले सवालों को साजिश करार दिया और बताने की कवायद की है कि दोनों के बीच मजबूत और मधुर रिश्ते रहे हैं.
कांग्रेस की सियासी राह में कितनी मुश्किलें
गुजरात की सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस दोबारा से वापसी नहीं कर सकी है. सूबे में तीन दशक से बीजेपी काबिज है और उसे अपनी राजनीति की प्रयोगशाला बना चुकी है. गुजरात पीएम मोदी-गृह मंत्री अमित शाह का गृह राज्य है. नरेंद्र मोदी गुजरात मॉडल के दम पर 2014 में देश के पीएम बने. गुजरात को बीजेपी ने सियासी प्रयोगशाला बनाया है, 1995 के बाद से उसे कोई मात नहीं दे सका. पिछले 30 सालों में कांग्रेस ने अपनी सियासी जड़े शहर से लेकर गांव तक जमाने में कामयाब रही है.
वहीं, दूसरी तरफ गुजरात में कांग्रेस अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है. कांग्रेस अगर 2027 में चुनावों में 2017 का प्रदर्शन दोहरा ले तो भी बड़ी बात होती. 2022 में बीजेपी ने सूबे की 182 सीटों में से 157 सीटें जीतकर इतिहास रचा तो 2017 के चुनाव में 77 सीटें पाने वाली कांग्रेस 2022 में महज 17 सीट पर जीत सकी है. गुजरात में कांग्रेस को लेकर एक छवि बनी है कि वह बीजेपी को हराने में सक्षम नहीं है. इसका लाभ चुनाव में आम आदमी पार्टी को मिला. आम आदमी पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनावों में 14 फीसदी वोट हासिल किया और पांच सीटें जीती थीं. उसने कांग्रेस की पूरी तरह से कमर तोड़ दी थी.
कांग्रेस के पास गुजरात में बीजेपी की हिंदुत्व की राजनीति का मुक़ाबला करने के लिए कोई ठोस नैरेटिव नहीं है. इतना ही नहीं कांग्रेस के पास बीजेपी के गुजरात मॉडल का सियासी विकल्प भी नहीं रख पाई. इसी का नतीजा है कि 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का गुजरात में खाता तक नहीं खुला और 2024 के चुनाव में उसे महज एक लोकसभा सीट से संतोष करना पड़ा.बीजेपी गुजरात निकाय चुनाव से लेकर विधानसभा और लोकसभा की जंग फतह करती रही है.
कांग्रेस का घटता सियासी जनाधार
कांग्रेस को सूबे के सत्ता से बाहर हुए तीन दशक हो गए हैं, जिसके चलते पार्टी के तमाम दिग्गज नेता साथ छोड़कर जा चुके हैं और कार्यकर्ता का मोहभंग हो गया है. इस तरह से राज्य में कांग्रेस के पास फिलहाल एक सांसद और 12 विधायक ही बचे हैं. इसके अलावा कांग्रेस का सियासी जनाधार पूरी तरह से खिसक चुका है. कांग्रेस के आधा दर्जन विधायकों ने साथ थोड़ दिया और पार्टी में विश्वास का संकट भी खड़ा हो गया है. कांग्रेस में नेता रहे भूपेंद्र पटेल सरकार में मंत्री भी हैं.
बीजेपी 2022 के गुजरात की विधानसभा चुनाव में 188 सीटों में से 52.50 फीसदी वोटों के साथ 156 सीटें जीतने में कामयाब रही थी. कांग्रेस 27.28 फीसदी वोटों के साथ महज 17 सीटें ही जीत सके थे. 2017 की तुलना में कांग्रेस का 14 फीसदी वोट गिर गया था. इससे पहले तक पार्टी का राज्य में 40 फीसदी के लगभग वोट शेयर हुआ करता था, लेकिन 2022 के चुनाव में भारी कमी आई है. 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का वोट 61.86 फीसदी रहा तो कांग्रेस को 31.24 फीसदी वोट मिले.
कांग्रेस का सपना कैसे होगा साकार
गुजरात में कांग्रेस भले ही अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है, लेकिन उसके बाद भी उसे अपने लिए सियासी उम्मीदें दिख रही है. गुजरात में 3 दशक से बीजेपी सत्ता में है, जिसके चलते उसके खिलाफ एंटी इनकंबेंसी से उभरने की उम्मीद मानी जा रही. इसीलिए कांग्रेस ने पिछले तीन दशकों में बीजेपी शासनकाल में राज्य में शिक्षा और स्वास्थ्य के गिरते स्तर, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, किसानों की स्थिति, छोटे उद्योगों की हालत को लेकर सियासी माहौल बनाने की रूपरेखा तैयार की है.
कांग्रेस ने कहा कि गुजरात में 40 प्रतिशत बच्चे कुपोषण का शिकार हैं, जबकि 55 प्रतिशत महिलाओं में खून की कमी है. युवा बेरोजगारी के कारण ठेके पर काम करने को मजबूर हैं. महिलाओं, दलितों और आदिवासियों के खिलाफ अत्याचार बढ़ रहे हैं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमले हो रहे हैं. स्कूलों में शिक्षकों और अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी है. किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है और श्रमिक वर्ग शोषण का शिकार हो रहा है.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश और पवन खेड़ा ने मीडिया से कहा कि गुजरात का विकास कांग्रेस की देन है. यहां औद्योगिक विकास की नींव कांग्रेस ने वर्ष 1960 से 1990 के बीच रखीय अमूल की स्थापना कर देश में श्वेत क्रांति का मार्ग प्रशस्त किया. सरदार सरोवर बांध, नर्मदा नहर, गुजरात का स्टील उद्योग, कपड़ा उद्योग व मीलें भी कांग्रेस की देन हैं, लेकिन भाजपा की नीतियों के कारण आज राज्य के उद्योग धंधे संकट में हैं.
कांग्रेस ने अहमदाबाद अधिवेशन में गुजरात को एक रोडमैप देने की कोशिश की कि अगर पार्टी सत्ता में आती है कि तो वो युवाओं, महिलाओं, किसानों और उद्यमियों के लिए क्या-क्या कदम उठाएगी. कांग्रेस ने प्रस्ताव में कहा कि हम टेक्नोलॉजी की मदद से एक आधुनिक और विकसित गुजरात सहित भारत का निर्माण करने के लक्ष्य के साथ कृषि,औद्योगिक सेवा क्षेत्र, महिलाओं के सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित करेंगे और महंगाई, बेरोजगारी, और भ्रष्टाचार का उन्मूलन करेंगे.
कांग्रेस ने प्रस्ताव में कहा कि अनुसूचित जातियों,जनजातियों और महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों का डटकर मुकाबला करेगी. कांग्रेस ने ड्रग्स तस्करी और पेपर लीक पर चिंता जताते हुए संगठित ड्रग माफिया पर नियंत्रण लगाने का आश्वासन दिया. पार्टी ने एक आधुनिक और विकसित गुजरात के निर्माण के लिए कृषि, औद्योगिक सेवा क्षेत्र और महिलाओं के सशक्तीकरण पर ध्यान केंद्रित करने का संकल्प लिया. ऐसे में कांग्रेस को लग रहा है कि गुजरात में बीजेपी नरेंद्र मोदी के चलते सियासी बुलंदी पर है. 2027 तक पीएम मोदी का सियासी जादू लोगों के सिर से उतर जाएगा और बीजेपी को हरा देंगे. हालांकि यह गुजरात में इतना आसान नहीं है, क्योंकि बीजेपी की यह सियासी प्रयोगशाला रही है.
तहव्वुर राणा को भारत लाने पर कांग्रेस का हमला
10 Apr, 2025 01:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई आतंकी हमले के मास्टर माइंड तहव्वुर राणा को अमेरिका से शाम तक भारत लाया जाएगा. इस पर कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा है. उन्होंने मोदी सरकार को माफी मांगने के लिए कहा. आतंकी तहव्वुर राणा का 26/11 का ये क्रूर आतंकी, जिसने इस आतंकी हमले को प्लान किया था.
इसे कांग्रेस की सरकार ने चिन्हित किया था और इसे लाने की प्रक्रिया शुरू की थी. उन्होंने कहा कि 26/11 साल 2008 और आज 10 अप्रैल 2025 है. उन्होंने सवाल पूछते हुए कहा कि इसमें 11 साल मोदी जी आपके हैं और आपकी सरकार के हैं, जिस आतंकी हमने चिन्हित कर लिया था, उसे लाने में आपको 11 साल लग गए. उन्होंने कहा कि आपको देश से माफी मांगनी चाहिए.
बीजेपी का ट्रैक रिकॉर्ड बुझदिल
आतंकवाद के खिलाफ भाजपा का ट्रैक रिकॉर्ड बड़ा कमजोर और बुझदिल रहा है. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो हमनें आतंकवाद के सामने इंदिरा गांधी और राहुल गांधी को कुर्बान किया है.
दिल्ली एयपोर्ट की बढ़ाई गई सुरक्षा
मुंबई आंतकी हमले के मास्टरमाइंड के भारत प्रत्यर्पण से पहले दिल्ली एयरपोर्ट की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. STWAT के कमांडर मौके पर मुस्तैदी से तैनात कर दिए गए हैं. सुरक्षा के लिहाज से दिल्ली पुलिस भी चौकन्नी है. इस मामले की कवरेज को लेकर मीडिया कोर्ट के अंदर नहीं जा सकती है, फिलहाल इसपर बैन लगाया गया है.
किसी तरह की सुरक्षा की चूक न हो सके इसके लिए NIA हेडक्वार्टर के सामने आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगाई गई है. NIA के ठीक सामने के मेट्रो स्टेशन गेट नंबर 2 को भी बंद किया गया है. जवाहर लाल नेहरू मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर दो से एंट्री नहीं बंद है. भारत में आने के बाद तहव्वुर राणा को एनआईए की टीम अरेस्ट करेगी.
तहव्वुर राणा को सुरक्षा के कई लेयर में ले जाया जाएगा. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के SWAT कमांडो के सुरक्षा के बीच उसे बुलेटप्रूफ गाड़ी में ले जाया जाएगा. तहव्वुर राणा को भारत में प्रत्यर्पण के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी.
26/11 का मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा कुछ ही देर में पहुंचेगा भारत
10 Apr, 2025 10:34 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
26/11 मुंबई आतंकी हमले का मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा अब से कुछ देर में भारत की धरती पर होगा. उसे अमेरिका से लाया जा रहा है. तहव्वुर को जिस विमान से लाया जा रहा है वो दिल्ली में उतरेगा. इस बीच, एयरपोर्ट पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है. SWAT कमांडो की टीम एयरपोर्ट पहुंच गई है.
NIA करेगी अरेस्ट
भारत में आने के बाद तहव्वुर राणा को सबसे पहले एनआईए 26/11 हमले को लेकर दर्ज अपने केस में गिरफ्तार करेगी. उसके बाद तहव्वुर राणा को NIA के हेडक्वार्टर लेकर जाया जाएगा, जहां उसका मेडिकल टेस्ट होगा. उसके बाद राणा को कोर्ट में पेश कर उसकी रिमांड मांगी जाएगी.
दिल्ली एयरपोर्ट से भारी सुरक्षा के बीच राणा को NIA हेडक्वार्टर लेकर जाया जाएगा. कई लेयर की सिक्योरिटी होगी. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के SWAT कमांडो के सुरक्षा घेरे में उसे ले जाया जाएगा. दिल्ली पुलिस की कई गाड़ियां राणा के काफिले को एस्कॉर्ट करेंगी. राणा एयरपोर्ट से बुलेटप्रूफ गाड़ी में जाएगा.
166 लोगों की गई थी जान
तहव्वुर राणा पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक है और 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक अमेरिकी नागरिक डेविड कोलमैन हेडली का करीबी है.
26 नवंबर 2008 को 10 पाकिस्तानी आतंकवादियों के एक समूह ने मुंबई में एक रेलवे स्टेशन, दो होटलों र एक यहूदी केंद्र पर हमला किया था. साल 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों में छह अमेरिकियों समेत कुल 166 लोग मारे गए थे. इन हमलों को 10 पाकिस्तानी आतंकवादियों ने अंजाम दिया था. इसी मामले में नवंबर 2012 में, पाकिस्तान के आतंकवादी अजमल कसाब को पुणे की यरवदा जेल में फांसी दे दी गई थी.
भारत कई वर्षों से राणा के प्रत्यर्पण का प्रयास कर रहा था, क्योंकि उसके लश्कर-ए-तैयबा और हेडली के साथ संबंध हैं. राणा ने अमेरिका में उपलब्ध सभी कानूनी विकल्पों का उपयोग किया, लेकिन उसे हर जगह से झटका मिला.
ट्रंप ने किया था ऐलान
फरवरी में व्हाइट हाउस में प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि उनके प्रशासन ने दुनिया के सबसे बुरे व्यक्ति राणा को भारत में न्याय का सामना करने के लिए प्रत्यर्पित करने की मंजूरी दे दी है
कंगना रनौत का आरोप: खाली पड़े घर का बिजली बिल आया 1 लाख रुपये
10 Apr, 2025 10:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिमाचल प्रदेश में कंगना ने कांगू में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस ने हिमाचल की दुर्दशा कर दी है. उन्होंने कहा कि जिस घर में वो रहती भी नहीं हैं, वहां बिजली का बिल 1 लाख रुपये का आया है. ये उनका मनाली का घर जो खाली पड़ा हुआ है. वहीं बिजली विभाग ने कंगना के इस आरोप को गलत बताया है. एचपीएसईबीएल ने कहा कि 90,384 रुपये का बिल दो महीने का है, जिसमें उनका पुराना बकाया भी शामिल है.
कंगना ने कांग्रेस को भ्रष्ट सरकार कहा. उन्होंने कहा कि जब-जब इनकी सरकार रही है, तब-तब बड़े घोटाले हुए हैं. उन्होंने 2 जी घोटाले का भी जिक्र किया. बीजेपी की सराहना करते हुए कंगना ने कहा कि चांद पर तो दाग भी होता है, लेकिन प्रधानमंत्री पर कोई दाग नहीं है.
हिमाचल प्रदेश के मंडी से लोकसभा सदस्य कंगना ने एक जनसभा में हिमाचल प्रदेश में बढ़े हुए बिजली बिल को लेकर राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस की आलोचना की थी. कंगना ने कहा कि मुझे मनाली के अपने घर के लिए एक महीने का एक लाख रुपये का बिजली बिल मिला है. मैं तो वहां रहती भी नहीं हूं. कितनी खराब स्थिति है.
सही समय पर नहीं किया पेमेंट
एचपीएसईबीएल ने कंगना के दावे को पूरी तरह से गलत बताया है. उन्होंने कहा कि 90,384 रुपये का बिल दो महीने (जनवरी और फरवरी 2025) का है. इसमें से 32,287 रुपये उनका पिछला बकाया है, जिसे इस बिल में शामिल किया गया है. उन्होंने बताया कि कंगना ने अक्टूबर से दिसंबर तक के अपने बिल का समय पर पेमेंट नहीं किया.
अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर, 2024 के लिए कंगना के घर का कुल बिजली का बिल 82,061 रुपये था. उसने कहा कि जनवरी और फरवरी के बिल का भुगतान 28 मार्च को किया गया था. इस दौरान कुल खपत 14,000 यूनिट थी. इससे ये साफ होता है कि कंगना के घर पर हर महीने के बिजली खपत बहुत ज्यादा थी. इनकी बिजली की खपत 5,000 -9,000 यूनिट तक थी. उन्हें बिजली बिल पर हिमाचल प्रदेश सरकार की दी जाने वाली सब्सिडी भी मिलती है.
एयर इंडिया के उड़ान में यात्री की शर्मनाक हरकत, साथी यात्री पर किया पेशाब
9 Apr, 2025 06:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिल्ली से बैंकॉक जा रही एक उड़ान के दौरान एयर इंडिया के एक यात्री ने साथी यात्री पर कथित तौर पर पेशाब की है। सूत्रों के अनुसार, बुधवार को ये फ्लाइट बैंकॉक जा रही थी, इसी दौरान ये घटना घटी। उन्होंने बताया कि एयर इंडिया ने इस घटना की सूचना नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) को दे दी है।
घटना के बारे में पूछे जाने पर नागरिक उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू ने बुधवार को कहा कि मंत्रालय इस घटना का संज्ञान लेगा और एयरलाइन से बात करेगा। उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में एक कार्यक्रम से इतर कहा, 'अगर कोई गलत काम हुआ है, तो हम आवश्यक कार्रवाई करेंगे।'
पहले भी हुई हैं इस तरह की हरकतें
अप्रैल 2024 में ऑस्ट्रेलिया के एक विमान में भी पेशाब कांड हुआ था। एक हवाई यात्री ने ऐसी जगह पेशाब कर दी थी, जिसके बाद पूरे विमान में बवाल मच गया था। मामला सिडनी हवाई अड्डे का था। यहां पर उड़ान के पहुंचने के बाद विमान से उतरने में देरी के दौरान एक यात्री ने कप में पेशाब कर दी। ऐसा करने के लिए उस यात्री पर जुर्माना लगाया गया था।
ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने बताया था कि ये घटना, पिछले दिसंबर में ऑकलैंड से 3 घंटे की एयर न्यूजीलैंड की उड़ान के बाद हुई थी और सिडनी की एक अदालत ने फरवरी में आक्रामक व्यवहार के लिए 53 वर्षीय व्यक्ति पर 600 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (395 अमेरिकी डॉलर) का जुर्माना लगाया था। यह घटना लोगों के ध्यान में तब आई, जब न्यूजीलैंड की समाचार वेबसाइट ‘स्टफ’ ने बताया कि उसी पंक्ति में एक यात्री हॉली ने कहा कि उसने विमान के चालक दल को इस व्यवहार की सूचना दी थी।
इससे पहले जुलाई 2023 में अमेरिका की स्पिरिट एयरलाइंस की एक फ्लाइट में भी पेशाब कांड हुआ था। एक महिला ने अमेरिका स्थित स्पिरिट एयरलाइंस की उड़ान के फर्श पर पेशाब कर दी थी। दरअसल पहले ये महिला कर्मचारियों से बहस कर रही थी और वॉशरूम जाना चाहती है। लेकिन वह ज्यादा देर रुक नहीं सकी और फ्लाइट के कोने में पेशाब कर दी।
जीरकपुर में 1878 करोड़ से बनेगा बाईपास, केंद्रीय कैबिनेट ने प्रस्ताव को दी मंजूरी
9 Apr, 2025 04:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में कई प्रस्ताव पास किए गए। बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि केंद्रीय कैबिनेट और आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने वाले तीन अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इनमें रेलवे लाइन दोहरीकरण, हाईवे बाईपास निर्माण और सिंचाई नेटवर्क के आधुनिकीकरण की योजनाएं शामिल हैं।
तिरुपति-पकाला-कटपाड़ी रेल लाइन सेक्शन का दोहरीकरण
केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के बीच 104 किलोमीटर लंबे तिरुपति-पकाला-कटपाड़ी सिंगल रेलवे लाइन सेक्शन के दोहरीकरण को मंजूरी दी है। इस परियोजना की कुल लागत 1332 करोड़ रुपये होगी। यह परियोजना यात्रियों की सुविधा, लॉजिस्टिक लागत में कमी, तेल आयात में कटौती और CO2 उत्सर्जन में कमी लाकर रेल संचालन को अधिक टिकाऊ और कुशल बनाएगी। लगभग 400 गांवों और 14 लाख की आबादी को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। तिरुपति में स्थित प्रसिद्ध श्री तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर, जहां रोज़ाना 75000 तीर्थयात्री पहुंचते हैं (त्योहारों पर यह संख्या 1.5 लाख तक पहुंचती है) का आवागमन आसान होगा। निर्माण के दौरान लगभग 35 लाख मानव-दिनों का प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा।
जीरकपुर बाईपास (पंजाब-हरियाणा) के निर्माण को मंजूरी
कैबिनेट समिति ने जीरकपुर बाईपास (6 लेन, 19.2 किमी) के निर्माण को मंजूरी दी है, जिसकी लागत 1878.31 करोड़ रुपये है। यह परियोजना पंजाब और हरियाणा में राष्ट्रीय राजमार्गों के जंक्शन को जोड़ेगी और PM गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत विकसित की जाएगी। बाईपास NH-7 (जीरकपुर-पटियाला) से शुरू होकर NH-5 (जीरकपुर-परवाणू) तक जाएगा। जीरकपुर और पंचकूला जैसे अति-शहरी और जामग्रस्त क्षेत्रों से ट्रैफिक को डायवर्ट करेगा। पटियाला, दिल्ली, मोहाली एयरोसिटी और हिमाचल प्रदेश को सीधा जोड़ने में मदद करेगा। इस योजना के तहत चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली अर्बन एग्लोमरेशन को एक रिंग रोड नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
M-CADWM योजना को मंजूरी
कैबिनेट ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (M-CADWM) योजना को वर्ष 2025-26 तक लागू करने की मंजूरी दी है। इसकी प्रारंभिक लागत 1600 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। यह योजना खेतों तक पाइपलाइन के जरिए सिंचाई जल पहुंचाने के लिए बुनियादी ढांचा मजबूत करेगी। उपयुक्त टेक्नोलॉजी के माध्यम से जल प्रबंधन किया जाएगा। इससे जल उपयोग क्षमता बढ़ेगी, कृषि उत्पादन और किसानों की आय में इज़ाफा होगा।
परियोजनाओं को स्थायी बनाने के लिए WUS को सिंचाई संपत्तियों का प्रबंधन सौंपा जाएगा और 5 वर्षों तक सहायता दी जाएगी। योजना के अंतर्गत विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट्स लागू किए जाएंगे, जिनसे मिले अनुभवों के आधार पर 2026 से राष्ट्रीय योजना की शुरुआत की जाएगी। इन तीनों परियोजनाओं से न केवल देश की आधारभूत संरचना को मजबूती मिलेगी, बल्कि रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधार की भी उम्मीद है।
मिलनाडु के दिग्गज नेता कुमारी अनंथन का निधन, पार्टी और राजनीति से जुड़े नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
9 Apr, 2025 12:57 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (टीएनसीसी) के पूर्व अध्यक्ष और प्रख्यात गांधीवादी कुमारी अनंथन का बुधवार तड़के निधन हो गया। वह 93 वर्ष की थे।
अनंथन वेल्लोर ने एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे उम्र संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे।
कुमारी अनंथन तमिलनाडु की राजनीति में एक प्रमुख व्यक्तित्व थे। वे न केवल एक कुशल राजनेता थे, बल्कि तमिल भाषा और संस्कृति के प्रबल समर्थक भी थे। उनकी बेटी वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन ने पिता के निधन की जानकारी दी।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अनंथन के निधन पर शोक जताया और तमिलिसाई के सालीग्राम, चेन्नई स्थित आवास पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
स्टालिन ने कहा, “कुमारी अनंथन ने अपना जीवन कांग्रेस आंदोलन और तमिल समाज के उत्थान के लिए समर्पित किया। उनका निधन तमिल समुदाय के लिए अपूरणीय क्षति है।”
पार्टी लाइन से ऊपर उठकर कई राजनीतिक नेताओं ने दिग्गज नेता को श्रद्धांजलि दी। भाजपा तमिलनाडु के अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा, “एक कट्टर राष्ट्रवादी, कुमारी अनंथन का निधन तमिलनाडु और साहित्य जगत के लिए एक क्षति है।”
19 मार्च, 1933 को कन्याकुमारी जिले के अगस्तीश्वरम में जन्मे अनंथन स्वतंत्रता सेनानी हरिकृष्णन और थंगम्माल के पुत्र थे। कांग्रेस के दिग्गज नेता के. कामराज से प्रेरित होकर उन्होंने गांधीवादी आदर्शों पर आधारित राजनीतिक यात्रा शुरू की।
उन्होंने संसद में तमिल में भाषण देने का अधिकार स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1977 में वे नागरकोइल से लोकसभा सांसद चुने गए और बाद में 1980, 1984, 1989 और 1991 में तमिलनाडु विधानसभा के लिए चार बार विधायक रहे। उनकी वाकपटुता के लोग कायल थे। यही कारण है कि उन्हें ‘इलाकिया सेल्वर’ (साहित्यिक धन) की उपाधि से नवाजा गया।
टीएनसीसी अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने किसानों और हाशिए पर पड़े समुदायों के हितों की रक्षा के लिए राज्य भर में कई पदयात्राओं का नेतृत्व किया। उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों में एक विरोध प्रदर्शन था जिसके बाद छोटे किसानों को मुफ्त बिजली मुहैया कराने के प्रावधान पर मुहर लगी।
उन्होंने राज्य में केंद्रीय सरकारी कार्यालयों में तमिल भाषा को प्राथमिकता देने की वकालत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके आजीवन योगदान के सम्मान में, अनंथन को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिनमें महाकवि भारतियार पुरस्कार और पेरुंथलैवर कामराज पुरस्कार शामिल हैं।
2024 में स्वतंत्रता दिवस पर उन्हें मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा प्रतिष्ठित थगैसल तमिलझर पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
उनका पार्थिव शरीर चेन्नई के सालिग्रामम में उनकी बेटी के निवास पर जनता के अंतिम दर्शन हेतु रखा जाएगा।
अनंथन की राजनीतिक विरासत उनकी बेटी तमिलिसाई सुंदरराजन आगे बढ़ा रही हैं, जो भाजपा की वरिष्ठ नेता हैं। उनके भतीजे विजय वसंत कन्याकुमारी से वर्तमान सांसद हैं। उनके छोटे भाई, दिवंगत वसंतकुमार भी उसी निर्वाचन क्षेत्र से सांसद रह चुके हैं।
दिल्ली में ‘विश्व नवकार महामंत्र दिवस’ मनाया, पीएम मोदी ने 9 संकल्पों पर किया जोर
9 Apr, 2025 11:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 'नवकार महामंत्र दिवस' कार्यक्रम में शामिल हुए। पीएम मोदी ने अन्य लोगों के साथ 'नवकार महामंत्र दिवस' कार्यक्रम में 'नवकार महामंत्र' का जाप किया। इसके बाद उन्होंने लोगों को संबोधित भी किया। इस दौरान उन्होंने सबसे पहले 9 संकल्पों पर बात की।
उन्होंने कहा साथियों जब आज इतनी बड़ी संख्या में नवकार महामंत्र का जाप किया तो मैं चाहता हूं सब ये 9 संकल्प लेकर जाएं-
9 संकल्प
पहला संकल्प- पानी बचाने का संकल्प है।
दूसरा संकल्प- एक पेड़ मां के नाम।
तीसरा संकल्प- साफ सफाई का।
चौथा संकल्प- वोकल पर लोकल। उन्होंने कहा, जिस सामान में भारत की मिट्टी की महक है, हमें उसे खरीदना है और लोगों को भी प्रेरित करना है।
पांचवां संकल्प- देश दर्शन
छठां संकल्प- नेचरल फार्मिंग को अपनाना
सांतवां संकल्प- खेलती लाइफस्टाइल को अपनाना, खानपान में
आठवां संकल्प- अपनी जिंदगी में योगा और खेल को अपनाइए
नौंवा संकल्प - गरीबों की मदद करना
भारत थमेगा नहीं ऊंचाई को छुएगा
इसके बाद पीएम मोदी ने कहा-मैंने लालकिले से कहा है- विकसित भारत यानी विकास भी, विरासत भी। एक ऐसा भारत जो रुकेगा नहीं, ऐसा भारत जो थमेगा नहीं। जो ऊंचाई छुएगा, लेकिन अपनी जड़ों से नहीं कटेगा।
'आध्यात्मिक शक्ति को अब भी अपने भीतर अनुभव कर रहा हूं'
पीएम मोदी ने आगे कहा, 'मैं नवकार महामंत्र की इस आध्यात्मिक शक्ति को अब भी अपने अंदर अनुभव कर रहा हूं। कुछ साल पूर्व मैं बंगलूरू में ऐसे ही एक सामुहिक मंत्रोच्चार का साक्षी बना था, आज वही अनुभूति हुई और उतनी ही गहराई में हुई।'
'एकता का संदेश है आयोजन'
पीएम ने कहा-नवकार महामंत्र इस विजडम का स्त्रोत बन सकता है, नई पीढ़ी के लिए ये मंत्र जप नहीं दिशा है। ये आयोजन एकता का संदेश बना है, जो कोई भारत माता की जय बोलता है, हमें उसे लेकर जाना है। अंत में अपना संबोधन को विराम देते हुए उन्होंने कहा , मैं जैन समाज, मुनि-महाराज को भी नमन करता हूं।
उन्होंने कहा कि नवकार महामंत्र एक मार्ग है। ऐसा मार्ग जो इंसान को भीतर से शुद्ध करता है, जो इंसान को सौहार्द की राह दिखाता है।
बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने सिकल सेल बीमारी का पता लगाने के लिए बनाई किफायती और पोर्टेबल डिवाइस
9 Apr, 2025 11:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु के रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (आरआरआई) वैज्ञानिकों ने खून के इंफेक्शन और एनीमिया जैसी बीमारी जिसे सिकल सेल बीमारी (एससीडी) कहते हैं इसकी जांच के लिए एक किफायती, पोर्टेबल डिवाइस बनाया है. प्रोफेसर गौतम सोनी के नेतृत्व में, टीम ने ऐसी तकनीक तैयार की है जो रेड बल्ड सेल की कठोरता को मापती है, स्वस्थ और एससीडी-प्रभावित सेल के बीच का फर्क सामने रख कर बीमारी का पता लगाती है. यह डिवाइस कैसे काम करता है, कितना असरदार है, यह जानने के साथ-साथ पहले यह जानना जरूरी है कि यह सिकल सेल बीमारी क्या है और इस में क्या-क्या मुश्किल होती है.
इस डिवाइस का नाम इलेक्ट्रो-फ्लुइडिक डिवाइस है जो इस तरह से तैयार किया गया है कि यह खून के इंफेक्शन और एनीमिया जैसी समस्याओं को आसानी से पता लगा लेता है. इस डिवाइस को टेस्ट करने के लिए रिसर्च टीम ने एससीडी पेशेंट और स्वस्थ लोगों के बल्ड सेल की तुलना करके डिवाइस का टेस्ट किया. आरआरआई ने मंगलवार को कहा, उनकी मेथाडोलॉजी में सेल की मात्रा और उसकी कठोरता (Stiffness) को मापने के लिए फ्री-फ़्लाइट और कंस्ट्रिक्टेड-फ़्लाइट मोड में नमूनों का अध्ययन करना शामिल है.
क्या होती है सिकल सेल बीमारी
सिकल सेल एनीमिया एक ऐसी बीमारी है जिसमें खून की कमी हो जाती है. यह एक अनुवांशिक बीमारी है, जो जेनरेशन टू जेनरेशन चलती है. इस बीमारी में जो हमारे रेड बल्ड सेल होते हैं उनका शेप बदल जाता है. रेड बल्ड सेल आमतौर पर गोल आकार के होते हैं, लेकिन इस बीमारी में वो सिकल के शेप के या आधे चांद के शेप के हो जाते हैं. जहां स्वस्थ बल्ड सेल अपना आकार जरूरत के आधार पर बदल लेते हैं, पतली नली से गुजरते वक्त पतले हो जाते हैं, लेकिन सिकल बल्ड सेल कठोर हो जाते हैं, यह अपना आकार नहीं बदल पाते और डर यह होता है कि अगर यह छोटी रक्त कोशिकाओं से गुजरेंगे तो वो ब्लॉक हो जाती है और आगे खून स्पलाई नहीं हो पाता है. इस बीमारी की वजह से शरीर में खून की कमी हो जाती है.
एनीमिया की शिकायत होती है. भारत में ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक में एनीमिया के काफी केस सामने आते हैं. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के मुताबिक (2019-21) के में, पुरुषों (15-49 वर्ष) में 25.0 प्रतिशत और महिलाओं (15-49 वर्ष) में 57.0 प्रतिशत है. लड़कों (15-19 वर्ष) में 31.1 प्रतिशत, लड़कियों में 59.1 प्रतिशत, गर्भवती महिलाओं (15-49 वर्ष) में 52.2 प्रतिशत और बच्चों (6-59 महीने) में 67.1 प्रतिशत एनीमिया के केस है.
एनीमिया से लड़ने में करेगा मदद
डिवाइस का यह इनोवेशन राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया को खत्म करने के मिशन का समर्थन कर सकता है, जिसके जरिए केंद्र का लक्ष्य 2047 तक एससीडी को खत्म करना है. एससीडी एक जीन उत्परिवर्तन (Gene mutation) है जो रेड बल्ड सेल के सख्त होने की वजह से गंभीर समस्या पैदा करता है, जिससे दुनिया भर में लाखों लोग प्रभावित होते हैं, जिनमें ग्रामीण भारत के कई लोग भी शामिल हैं. आरआरआई ने कहा, हाई-प्रदर्शन तरल क्रोमैटोग्राफी (एचपीएलसी) जैसे मौजूदा डिवाइस बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग कार्यक्रमों के लिए महंगे हैं.
आरआरआई में इस डिवाइस को सोनी, एस कौशिक और ए मिश्रा ने डेवलप किया है. हाई रिज़ॉल्यूशन और थ्रूपुट के साथ यह डिवाइस सेल को पूरी तरह से टेस्ट करता है. यह एससीडी और स्वस्थ रेड बल्ड सेल के बीच फर्क आराम से सामने रख देता है. प्रमुख इन्वेस्टिगेटर गौतम सोनी ने कहा, यह नई तकनीक आरबीसी फिजियोलॉजी और सेल की कठोरता में परिवर्तन पर हाई-रिज़ॉल्यूशन के साथ टेस्ट करती है.
ट्यूमर का भी लगेगा पता
आरआरआई ने कहा कि पोर्टेबल और लागत प्रभावी डिवाइस ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग के लिए विशेष रूप से कामगर साबित हो सकता है, इससे संभावित रूप से एससीडी का पहले ही पता लगाया जा सकता है. एससीडी स्क्रीनिंग से परे यह ट्यूमर सेल का पता लगाने, पशु में बल्ड की बीमारी जैसी चीजों में भी अहम रोल निभा सकता है.
बीजेपी आलाकमान का कड़ा संदेश, नेताओं से विवादित बयानबाजी से बचने की अपील
9 Apr, 2025 11:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डॉ. भीमराव आंबेडकर, संविधान, आरक्षण और दलित मुद्दों पर लगातार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को निशाने पर लिया जाता है. साथ ही साथ पार्टी के नेताओं के बयानों के चलते उसके लिए काउंटर करना आसान नहीं होता है. अब आलाकमान ने पार्टी नेताओं को सख्त संदेश दिया है. बीआर आंबेडकर सम्मान अभियान की राष्ट्रीय कार्यशाला में बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा की मौजूदगी में संगठन महासचिव बी एल संतोष ने कहा कि पार्टी के नेता इन मुद्दों पर विवादित बयान न दें. अनावश्यक बयानबाजी से बचें और पार्टी लाइन के अनुसार ही अपनी बात रखें.
दरअसल, पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को संविधान बदलने वाले बयानों के कारण नुकसान उठाना पड़ा था. बीजेपी को यूपी, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में चुनावी नुकसान हुआ था. अनिल हेगड़े, लल्लू सिंह और ज्योति मिर्धा के बयानों से विपक्ष को मौका मिल गया था, जिसके बाद बीजेपी डिफेंसिव मोड में नजर आ रही थी. हर रैली में संविधान से किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं करने की बात आमजन तक पहुंचाई गई, लेकिन पार्टी डैमेज कंट्रोल नहीं कर पाई.
हेगड़े, लल्लू सिंह और मिर्धा ने क्या दिए थे बयान?
बीजेपी नेता हेगड़े ने कहा था कि जो लोग खुद को धर्मनिर्पेक्ष कहते हैं, वे नहीं जानते कि उनका खून क्या है. हां, संविधान यह अधिकार देता है कि हम खुद को धर्मनिरपेक्ष कहें, लेकिन संविधान में कई बार संशोधन हो चुके हैं, हम भी उसमें संशोधन करेंगे, हम सत्ता में इसलिए ही आए हैं.
लल्लू सिंह ने कहा था कि केंद्र में सरकार तो 275 सांसदों से ही बन जाएगी, लेकिन संविधान बदलने के लिए अधिक सांसदों की जरूरत होगी, तभी संविधान बदल सकता है. वहीं, कांग्रेस से बीजेपी में आईं ज्योति मिर्धा ने बयान दिया था कि देश के हित में कई कठोर निर्णय लेने होते हैं. उनके लिए हमें कई संवैधानिक बदलाव करने पड़ते हैं. इसके लिए लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में पास होना चाहिए. लोकसभा में बीजेपी की प्रचंड बहुमत है. इस बार तीसरी बार लोकसभा में एनडीए की प्रचंड बहुमत लाना है.
बीजेपी इस साल 14 अप्रैल से मनाएगी आंबेडकर की जयंती
बीजेपी इस साल 14 अप्रैल को डॉ आंबेडकर की जयंती बड़े स्तर पर मना रही है. इसके लिए मंगलवार को राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. इसमें देश भर में सम्मान अभियान कैसे चलाना है, इसे लेकर निर्देश दिए गए. अब प्रदेश स्तर पर भी कार्यशालाएं आयोजित होंगी और वहां भी नेताओं और कार्यकर्ताओं को ऐसे ही निर्देश दिए जाएंगे.
राम रहीम को फिर मिली फरलो, 21 दिन के लिए सिरसा डेरा में रहेंगे।
9 Apr, 2025 11:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा के रोहतक की सुनारिया जेल से डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम पर सरकार एक बार फिर से मेहरबान हो गई है. रेप और हत्या के मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहा राम रहीम जेल से बाहर आ गया है. राम रहीम को हरियाणा सरकार ने एक बार फिर से 21 दिन की फरलो दी है. अब वो पुलिस सुरक्षा के बीच जेल से निकल कर सिरसा अपने डेरा को ओर वापस चला गया है. राम रहीम इस बार फरलो में सिरसा डेरा में ही रहेगा.
13 वीं बार आया फरलो पर आया बाहर
सिरसा डेरा सच्चा सौदा का प्रमुख राम रहीम 13वीं बार फरलो पर आया है. राम रहीम को जेल से लेने के लिए हनीप्रीत और डेरा की गाड़ियों का काफिला पहुंचा. दिल्ली चुनाव से पहले भी राम रहीम 30 दिन की फरोल पर बाहर आया था.
फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह की अस्थायी रिहाई के खिलाफ शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था. 2017 में राम रहीम को अपने दो शिष्यों के साथ रेप करने के लिए 20 साल की कैद की सजा सुनाई गई थी.
फरलो क्या है?
फरलो (Furlough) के तहत जेल में सजा काट रहा कैदी कुछ समय के लिए जेल से बाहर आ सकता है. ये उसका अधिकार नहीं है, बल्कि सजा के दौरान ही बाहर जाने की अनुमति दी जाती है. फरलो को बिना किसी जरूरी कारण के भी दिया जा सकता है, हालांकि इसके लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं. ये कैदियों की एक तरह की छुट्टी है, जिसके जरिए वो जेल से बाहर आ सकता है.
कैदियों को जेल की जिंदगी से कुछ समय दूर रखने के लिए इस तरह की व्यवस्था की गई है. ऐसा इसलिए है, ताकि कैदी अपने परिवार और समाज से भी जाकर अपने संबंधों को बरकरार रख सके.
हालांकि, जिन कैदियों के बाहर आने से किसी भी तरह के सुरक्षा या अपराध होने की आशंका होती है उन्हें फरलो नहीं दी जाती है. फरलो कानूनी अधिकार नहीं है, बल्कि कैदी के व्यवहार और जेल अधीक्षक की राय पर दिया जाता है. जब दोषी दोषसिद्धि के बाद तीन साल की सजा काट चुका होता है, तब वो फरलो पर बाहर आ सकता है.
26/11 हमले के दोषी तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण पूरा, कल दिल्ली पहुंचने की संभावना।
9 Apr, 2025 10:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
26/11 हमले के आरोपी तहव्वुर राणा कल भारत आ जाएगा. सूत्रों के हवाले से ये खबर सामने आएगी. तहब्बुर राणा कल सुबह अमेरिका से दिल्ली पहुंच जाएगा. एनआईए की टीम उसके साथ है. राणा के प्रत्यर्पण से संबंधित सारी औपचारिकताएं अमेरिका के साथ भारतीय एजेंसियों ने पूरी कर ली हैं. अमेरिका की अदालत में सारे जरूरी कागजात भारतीय एजेंसी ने सौंप दिए हैं और अदालत की अनुमति भी ले ली गई है.
पिछले दो महीना से नेशनल इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी, इंटेलिजेंस ब्यूरो विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय की संयुक्त टीम अमेरिका के अधिकारियों से तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण के मामले में संपर्क में थी और सारी औपचारिकताएं पूरी कर रही थी. हालांकि, अब यह औपचारिकताएं पूरी हो गई है और 26/11 के आरोपी तहव्वुर राणा को भारत लाया जा रहा है.
राणा की याचिका हुई खारिज
जहां भारत एक तरफ लगातार तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण की कोशिश कर रहा था. वहीं, दूसरी तरफ राणा ने भी सुप्रीम कोर्ट में इस प्रत्यपर्ण को रोकने की याचिका डाली थी. हालांकि, हाल ही में तहव्वुर राणा को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा. कोर्ट ने उसकी भारत प्रत्यर्पण पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी. इस मामले में कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए तहव्वुर राणा ने भारत को लेकर कहा था, अगर मुझे भारत प्रत्यर्पित किया जाता है तो वहां मुझे प्रताड़ित किया जा सकता है. मैं भारत में नहीं रह पाऊंगा.
आतंकी हमले में हाथ
आरोपी तहव्वुर राणा पाकिस्तान की निवासी है. उसने 10 साल पाकिस्तान की सेना में बतौर डॉक्टर काम किया है. फिर नौकरी छोड़ने के बाद वो भारत के खिलाफ नापाक साजिशों में लग गया. अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, 2006 से नवंबर 2008 तक आरोपी राणा ने डेविड हेडली और पाकिस्तान के अन्य लोगों के साथ मिलकर मुंबई हमलों की साजिश रची थी. उसने मुंबई हमले को अंजाम देने के लिए आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और हरकत-उल-जिहाद-ए-इस्लामी की मदद की थी.
26/11 यानी 26 नवंबर 2008 वो तारीख जिस दिन मुंबई में एक भयानक आतंकी साजिश को अंजाम दिया गया. रात के वक्त 10 आतकंवादियों ने अलग-अलग स्थानों को घेरकर गोलीबारी शुरू कर दी थी. समुद्री रास्ते से मुंबई पहुंचे आतंकवादी लश्कर-ए-तैयबा के थे. यह हमले चार दिन बाद यानी 29 नवंबर को खत्म हुए थे. इस आतंकी साजिश में कई मासूम भारतीयों की मौत हो गई थी. 166 बेकसूरों की मौत के साथ हमले में 300 से ज्यादा लोग जख्मी हुए थे.
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