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एस्टोनिया की बड़ी कार्रवाई: पुतिन के टैंकर 'Jaguar' को रोकने की कोशिश
15 May, 2025 06:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूक्रेन जंग के बीच रूस और NATO के रिश्तों में एक और तनावपूर्ण मोड़ आ गया है. इस बार मामला यूक्रेन नहीं, बल्कि एक छोटे से देश एस्टोनिया से जुड़ा है, जिसने समंदर में रूस के “शैडो फ्लीट” यानी गुपचुप जहाज पर बड़ी कार्रवाई की कोशिश की.
बताया जा रहा है कि एस्टोनिया की नेवी और एयरफोर्स ने बाल्टिक सागर में एक संदिग्ध रूसी तेल टैंकर को रोकने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों देशों की वॉरशिप्स और फाइटर जेट्स आमने-सामने आ गए.
किस जहाज पर हुआ विवाद?
जिस जहाज पर विवाद हुआ, उसका नाम Jaguar है. ये 800 फीट लंबा कच्चा तेल ले जाने वाला टैंकर है, जो दिखावे के लिए गैबॉन का झंडा लगा कर चल रहा था, लेकिन ब्रिटेन ने हाल ही में इस पर प्रतिबंध लगाते हुए इसे रूस की शैडो फ्लीट का हिस्सा बताया, शैडो फ्लीट वो जहाज होते हैं जो रूस पर लगे प्रतिबंधों के बावजूद गुपचुप तरीके से तेल पहुंचाते हैं.
NATO और रूस के लड़ाकू विमान आमने-सामने
एस्टोनिया की ओर से जब इस जहाज को रोका गया, तो उसने सहयोग करने से इनकार कर दिया. इसके बाद NATO की ओर से पोलैंड के MiG-29 लड़ाकू विमानों को अलर्ट पर भेजा गया. जवाब में रूस ने अपना Su-35S फाइटर जेट भेज दिया, जिसने कथित तौर पर एस्टोनिया की हवाई सीमा का उल्लंघन किया. इसके बाद बाल्टिक सागर के ऊपर एक तनावपूर्ण डॉगफाइट यानी हवा में झड़प हुई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आया.
हेलिकॉप्टर से चढ़ाई की कोशिश, लेकिन…
एस्टोनिया की तरफ से A139 हेलिकॉप्टर और M-28 Skytruck विमान भी भेजे गए. सैनिकों ने हेलिकॉप्टर से जहाज पर उतरने की कोशिश की, लेकिन रूसी क्रू मेंबर्स ने उन्हें पीछे हटा दिया. जहाज से रूसी भाषा में आवाज आई “इन जोकरों को देखो”, जो कि एस्टोनियाई सैनिकों के लिए कही गई थी. लंबे तनाव के बाद टैंकर Jaguar एस्टोनिया को चकमा देकर रूस के कब्जे वाले गोगलैंड द्वीप के पास पहुंच गया और वहां लंगर डाल दिया. रूसी मीडिया ने इसे बड़ी कामयाबी बताया और कहा कि पश्चिमी देशों की कोशिशें फेल हो गईं.
राजनयिक स्तर पर भी टकराव
इस घटना के बाद एस्टोनिया ने रूस के राजनयिक Lenar Salimullin को तलब कर सख्त विरोध दर्ज कराया. एस्टोनिया के विदेश मंत्री मार्गुस त्साहकना ने कहा है कि ये बेहद गंभीर और अस्वीकार्य घटना है. रूस पर कड़े और तेज़ प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए. एस्टोनिया के डिफेंस मिनिस्टर हैनो पेवकुर ने कहा कि ये जहाज बिना किसी वैध राष्ट्रीयता के चल रहा था और देश की क्रिटिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए खतरा बन सकता था. इसलिए हमने इसे रूसी जलसीमा तक पहुंचने तक एस्कॉर्ट किया.
बलूचिस्तान ने स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में पहचान की करी घोषणा, 'पाकिस्तान हमारा हिस्सा नहीं'
15 May, 2025 05:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान पर भारत का सैन्य ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है, वहीं 14 मई 2025 को बलूच लेखक और कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बलूचिस्तान गणराज्य की स्वतंत्रता की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान के लोगों ने अपना राष्ट्रीय निर्णय ले लिया है। बलूचिस्तान अब पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है और दुनिया को चुप नहीं रहना चाहिए। उन्होंने भारत से नई दिल्ली में बलूच दूतावास खोलने की अनुमति मांगी और संयुक्त राष्ट्र से बलूचिस्तान लोकतांत्रिक गणराज्य को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने और मुद्रा, पासपोर्ट और अन्य संसाधनों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता प्रदान करने का अनुरोध किया है।
देखा जाए तो भारत के पास एक ऐसा अवसर आ रहा है। जो पाकिस्तान पर लगाम लगाने के लिए काफी है। भारत के पास उस देश से बदला लेने का एक बड़ा अवसर है जो भारत में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ाकर भारत को परेशान करता रहता है। सवाल यह उठता है कि क्या भारत को ऐसे अवसर का उपयोग पाकिस्तान को कमजोर करने के लिए करना चाहिए? क्या भारत को बलूच स्वतंत्रता सेनानियों को मान्यता देनी चाहिए और उनके साथ खड़ा होना चाहिए? क्या प्रकृति एक बार फिर 1971 को दोहरा रही है? क्या आज यह संभव है कि भारत बांग्लादेश के निर्माण की तरह पाकिस्तान को तोड़कर एक और स्वतंत्र देश बलूचिस्तान बनाए? इसका उत्तर निश्चित रूप से हां है। इतना ही नहीं, यह काम भी भारत को जल्दी से जल्दी करना चाहिए। क्योंकि भारत बलूचों को मान्यता देने वाला पहला देश होना चाहिए। यह न केवल पाकिस्तान को परेशान करने के लिए जरूरी है, बल्कि यह भारत का नैतिक कर्तव्य भी है।
जब से पाकिस्तान ने 1948 में सैन्य कार्रवाई के आधार पर बलूचिस्तान पर कब्जा किया है, तब से ज्यादातर बलूचों को यह धारणा हो गई है कि पाकिस्तान कभी उनका नहीं था और न ही कभी उनका हो सकता है। अंग्रेजों के जाने के साथ ही बलूचों ने अपनी आजादी की घोषणा कर दी। पाकिस्तान ने पहले तो इसे स्वीकार कर लिया था, लेकिन बाद में इससे इनकार कर दिया। अंग्रेजों ने 1876 में सबसे बड़े बलूच नेता खुदादाद खान (खान ऑफ कलात) के साथ जो संधि की थी, उसके अनुसार बलूचिस्तान एक स्वतंत्र देश था। कहा जाता है कि खुदादाद खान को जिन्ना पर भरोसा नहीं था और इसलिए वह भारत में शामिल होना चाहता था। लेकिन 1946 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। संभव है कि नेहरू ने ऐसा न किया हो। लेकिन यह माना जा सकता है कि अगर भारत ने बलूचिस्तान पर आंख नहीं मूंद ली होती, तो कम से कम जिन्ना उस पर कब्ज़ा नहीं कर पाते। इसके साथ ही यह भी कहा जा सकता है कि जिस तरह से जिन्ना ने कलात पर कब्ज़ा किया, भारत भी वैसा ही कर सकता था। कम से कम अगर भारत ने उस पर कब्ज़ा कर लिया होता, तो बलूचों को ये जुल्म के दिन नहीं देखने पड़ते। 2016 में स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बलूचिस्तान और गिलगित के लोगों के प्रति अपनी सहानुभूति दिखाई थी। मोदी के पास बलूच लोगों की मांगों पर विचार करने का मौका है, ताकि नेहरू की गलतियों को सुधारा जा सके और भारत को बलूचिस्तान को एक देश के रूप में मान्यता देने वाला पहला देश बनाया जा सके।
2- पाकिस्तान के खिलाफ भारत की जवाबी रणनीति
कश्मीर में पाकिस्तान के हस्तक्षेप को देखते हुए, कुछ लोगों का मानना है कि बलूचिस्तान का समर्थन करना भारत के लिए जवाबी रणनीति हो सकती है। बलूच नेताओं ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) को खाली करने की भारत की मांग का समर्थन किया है और चेतावनी दी है कि पाकिस्तान की अड़ियल नीति क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ा सकती है। भारत को कम से कम इतना तो करना ही चाहिए कि वह बलूच नेताओं की आज़ादी का समर्थन करे। बलूच स्वतंत्रता सेनानियों ने पाकिस्तान को परेशान कर रखा है। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) का कहना है कि वह बलूचिस्तान की आज़ादी के लिए सशस्त्र संघर्ष में सक्रिय है। हाल के महीनों में, BLA ने पाकिस्तानी सेना और पुलिस के ठिकानों पर हमले तेज़ कर दिए हैं। 11 मई 2025 को, BLA ने सैन्य काफिले, पुलिस स्टेशनों और प्रमुख राजमार्गों सहित 51 स्थानों पर 71 हमले करने का दावा किया। बलूच क्रांतिकारियों ने डेरा बुगती में गैस क्षेत्रों पर हमला किया, जिससे 100 से ज़्यादा गैस कुएँ प्रभावित हुए।
3-भारत के लिए सामरिक महत्व
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, जो ग्वादर बंदरगाह और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का घर है। भारत के लिए, बलूचिस्तान की स्वतंत्रता का समर्थन करना पाकिस्तान और चीन की रणनीतिक योजनाओं को कमज़ोर करने का एक तरीका हो सकता है, क्योंकि CPEC भारत के लिए सुरक्षा चिंता का विषय है। यह भारत को ग्वादर बंदरगाह और अरब सागर पर भू-राजनीतिक लाभ देगा। बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, जो इसके लगभग 44% भूभाग पर स्थित है। यदि बलूचिस्तान स्वतंत्र हो जाता है, तो पाकिस्तान अपनी भौगोलिक और आर्थिक शक्ति का एक बड़ा हिस्सा खो देगा, जिससे उसकी क्षेत्रीय स्थिति कमज़ोर हो जाएगी।
बलूचिस्तान की अरब सागर तटरेखा लगभग 700 किलोमीटर है, जो इसे भू-रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है। एक स्वतंत्र बलूचिस्तान भारत को ग्वादर और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक मित्र राष्ट्र प्रदान कर सकता है, जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। भारत का चाबहार बंदरगाह (ईरान में) ग्वादर का प्रतिद्वंद्वी है और अफ़गानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुँच के लिए महत्वपूर्ण है। स्वतंत्र बलूचिस्तान भारत की चाबहार परियोजना को मजबूत कर सकता है, क्योंकि इससे पाकिस्तान का प्रभाव कम होगा। मित्रवत बलूचिस्तान भारत को अरब सागर में अपनी नौसैनिक उपस्थिति बढ़ाने का अवसर दे सकता है, जिससे पाकिस्तान और चीन की नौसैनिक गतिविधियों पर नज़र रखी जा सकती है।
4-बलूच नेताओं की भारत से बार-बार अपील
हाल के वर्षों में बलूच नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अपनी आज़ादी के लिए बार-बार भारत से समर्थन मांगा है। इसी क्रम में 9 मई को बलूच नेताओं ने बलूचिस्तान गणराज्य की घोषणा की और भारत से मान्यता मांगी। दरअसल, बलूच नेताओं को भारत से बड़ी उम्मीदें रही हैं। बलूचों को लगता है कि जिस तरह भारत ने पूर्वी पाकिस्तान को एक स्वतंत्र देश में बदल दिया, उसी तरह भारत बलूचों के लिए भी कदम उठाएगा। बलूचिस्तान की स्वयंभू पीएम नायला कादरी 2023 में भारत की यात्रा पर थीं। वे हरिद्वार गई थीं, जहां उन्होंने मां गंगा की आरती के दौरान बलूचिस्तान की आज़ादी के लिए प्रार्थना की थी। नायला अक्सर भारत और वहां के लोगों से बलूचिस्तान के लिए समर्थन मांगती रही हैं।
इसी तरह मीर यार बलूच ने 9 मई 2025 को बलूचिस्तान की आज़ादी का ऐलान किया और भारत से दिल्ली में बलूच दूतावास खोलने की मांग की, जैसा कि इस लेख में बताया गया है। इसके अलावा कई एक्स पोस्ट में बलूच नेताओं ने भारत को सबसे पहले समर्थन देने वाला देश बनने की बात भी कही है, जैसे कि इस एक्स पोस्ट में कहा गया है कि भारत को बलूचिस्तान की आज़ादी को मान्यता देनी चाहिए ताकि पाकिस्तान को आर्थिक और सामरिक लाभ से वंचित किया जा सके। शायद यही वजह है कि भारत में भी बलूच आंदोलन को समर्थन देने की भावना बढ़ रही है। शायद यही वजह है कि भारत ही बलूचों की आखिरी उम्मीद है। इसलिए भारत को आगे बढ़कर बलूचिस्तान की आज़ादी को अपना नैतिक कर्तव्य मानते हुए मान्यता देनी चाहिए।
धारूहेड़ा में अवैध कॉलोनी पर चला प्रशासन का बुलडोजर, दो एकड़ में तोड़फोड़
15 May, 2025 04:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रेवाड़ी के धारूहेड़ा में जिला नगर योजनाकार की टीम द्वारा नंदरामपुर बास रोड पर करीब दो एकड़ में विकसित की जा रही अवैध कॉलोनी में तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई।
बता दें कि दोपहर को जिला नगर योजनाकार मनदीप सिंह की अगुवाई में टीम धारूहेड़ा पहुंची और वहां पर जेसीबी से दो एकड़ में अवैध रूप से विकसित हो रही अवैध कॉलोनी में चारदीवारी पर तोड़फोड़ की गई।
जिला नगर योजनाकार मनदीप सिंह ने आमजन से अनुरोध किया है कि नियंत्रित क्षेत्र में कोई भी अवैध निर्माण न करें और प्लाट खरीदने से पहले इस कार्यालय से उस कॉलोनी की वैधता बारे सुनिश्चित करें ताकि विभागीय कार्रवाई एवं आर्थिक नुकसान से बचाव हो सके।
किसी भी प्रकार का निर्माण करने से पहले सरकार के नियमानुसार अनुमति लेना जरूरी है।
यमुनानगर में विधवा महिला से 40 लाख की ठगी, जमीन दिलाने के नाम पर लूटा पैसा
15 May, 2025 04:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यमुनानगर: हरियाणा के यमुनानगर जिले के गांव सारण निवासी विधवा रोशनी देवी की जमीन कागजों में चढ़वाने व अच्छे दामों में बिकवाने का झांसा देकर 40 लाख रुपये ठग लिए गए। आरोपित गांव सारण निवासी देशराज कश्यप, सेक्टर 17 निवासी रोहित मंगला, थाना छप्पर निवासी बलबीर, गुरमीत पर लगा है।
आरोपितों में से किसी ने खुद को तहसीलदार का पुत्र तो किसी ने पुलिस व डीसी कार्यालय में अधिकारी बताया। पीड़िता ने आरोपितों को यह रुपये भी मकान गिरवी रख, बैंक व रिश्तेदारों से उधार लेकर दिए। बुधवार को थाना छप्पर पुलिस ने मामले में केस दर्ज किया है।
क्या है पूरा मामला?
गांव सारण निवासी रोशनी देवी ने बताया कि उसकी गांव कलावड़ में चार कनाल आठ मरले जमीन है। गांव का ही देशराज कश्यप एक दिन घर पर आया। उसने कहा कि इस जमीन का कोई प्रूफ आपके पास नहीं है। इस जमीन को आपके नाम कागजों में चढ़ाकर अच्छे दामों पर बिकवा देंगे। उसकी बातों में आ गई। आारोपित अपने रोहित मंगला, बलबीर सिंह, अमित कुमार व गुरमीत सिंह के साथ आया।
आरोपित ने कहा कि रोहित मंगला तहसीलदार का बेटा है। बलबीर डीसी कार्यालय में बड़ा अधिकारी और गुरमीत सिंह पुलिस अधिकारी है। आरोपित गुरमीत वर्दी पहने हुए था। कहा कि यह बड़े अधिकारी व रसूख वाले लोग है। इस जमीन को एक करोड़ रुपये के आसपास बिकवा देंगे। जिस पर अपने बेटे जितेंद्र से बात की। वह भी तैयार हो गया।
आरोपियों ने ऐसे दिया झांसा
आरोपितों ने कहा कि जमीन की पैमाइस कराने व गिरदावरी चढ़ाने के लिए शुरूआत में पांच लाख रुपये देने होंगे, क्योंकि इसमें खर्च आएगा। उनकी बातों में आकर आरोपितों को चार लाख 51 हजार रुपये दे दिए। आरोपितों ने कहा कि यह रुपये तहसीलदार को दिए हैं। बाकी रुपयों का और इंतजाम कर लो। जमीन की पैमाइस सही तरीके से होने के बाद रकबा बढ़ जाएगा।
उसके बाद आरोपितों को साढ़े सात लाख रुपये दिए। इसके बाद आरोपित कभी हाई कोर्ट में केस करने तो कभी कुछ और बहाने लगाकर रुपये लेने लगे। आरोपितों को रुपये देने के लिए मकान तक गिरवी रख दिया, बैंक से लोन लिया और कुछ रुपये कतर में रह रहे अपने बेटे मांगे।
इस तरह से अलग-अलग कर आरोपितों ने 40 लाख रुपये ठग लिए। बाद में कोर्ट व तहसील से जाकर पता किया। जानकारी मिली कि उसकी जमीन से संबंधित कोई केस नहीं है। जब आरोपितों से इस संबंध में बात की तो वह हत्या कराने की धमकी देने लगे।
बांग्लादेश में राजनीतिक संकट गहराया, यूनुस की कुर्सी हिलने लगी
15 May, 2025 02:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया डॉ. मोहम्मद यूनुस को सत्ता संभाले अभी साल भर भी नहीं हुए हैं, लेकिन विदेश मंत्रालय की अंदरूनी कलह और लगातार बढ़ती अव्यवस्था ने उनकी नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यूनुस की तेज़ रफ्तार और निर्णायक शैली को जहां एक ओर उनके कुछ करीबी समर्थक सुधार की कोशिश बता रहे हैं, वहीं मंत्रालय के अंदर उनके सलाहकारों और सचिवों के साथ बढ़ती टकराव की स्थिति ने शासन व्यवस्था की नींव हिला दी है. मंत्रालय के भीतर फैसले लटक रहे हैं, सलाहकार एक-दूसरे पर दोष मढ़ रहे हैं और विदेश नीति में दिशा की कमी साफ झलक रही है.
सूत्रों के मुताबिक, विदेश मंत्रालय के शीर्ष स्तर पर चल रही खींचतान का केंद्र बने हैं विदेश सचिव मो. जसीम उद्दीन और सलाहकार तौहीद हुसैन. दोनों के बीच समन्वय की भारी कमी देखी जा रही है. बताया जा रहा है कि निर्णय प्रक्रिया में सुस्ती और कुछ मामलों में गलत फैसलों के चलते कई कूटनीतिक पहल अधर में लटक गए हैं. मंत्रालय के अंदरूनी सूत्र इसे डेडलॉक की स्थिति बता रहे हैं, जिससे नीतिगत फैसलों पर असर पड़ा है.
डैमेज कंट्रोल में यूनुस, लेकिन टीम में ही असहमति
मंत्रालय की बिगड़ती तस्वीर को सुधारने के लिए डॉ. मोहम्मद यूनुस ने लुत्फे सिद्दिकी, खालिलुर रहमान और सूफिउर रहमान जैसे अनुभवी नामों को ज़िम्मेदारियां दीं. इनमें से खालिलुर को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और सूफिउर को विदेश राज्य मंत्री जैसा दर्जा मिला. लेकिन यूनुस के इन कदमों को भी मंत्रालय के अंदर ही चुनौती मिलने लगी. खुद तौहीद हुसैन और सचिव जसीम उद्दीन ने सूफिउर की नियुक्ति पर आपत्ति जताई, जिससे हालात और उलझ गए.
जापान दौरे से पहले बड़ी बैठक टली, उठा सवाल
मुख्य सलाहकार यूनुस की प्रस्तावित जापान यात्रा से ठीक पहले विदेश मंत्रालय की एक अहम सलाहकार बैठक को अचानक टाल दिया गया. यह फैसला कूटनीतिक हलकों में चिंता का कारण बना. बाद में मामला किसी तरह सुलझा, लेकिन इससे मंत्रालय में असहमति और अंदरूनी कलह की तस्वीर सार्वजनिक हो गई.
सचिव के हटने की चर्चा, नेतृत्व परिवर्तन तय?
इन घटनाओं के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि सरकार विदेश सचिव मो. जसीम उद्दीन को हटाने की योजना बना चुकी है. खुद जसीम एक “सम्मानजनक विदाई” की तलाश में हैं, लेकिन विदेश में राजदूत पद जैसे विकल्पों की फिलहाल उपलब्धता न होने से उनकी अगली भूमिका को लेकर संशय बना हुआ है. मंत्रालय में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना अब बेहद प्रबल मानी जा रही है.
नूर खान एयरबेस पर भारत का हमला, परमाणु सुरक्षा यूनिट को भी नुकसान
15 May, 2025 02:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत ने हाल ही में चार दिनों तक पाकिस्तान से चले टकराव के दौरान पाकिस्तान की सैन्य सुविधाओं और हवाई अड्डों को निशाना बनाया था, जिसमें भारत को 'साफ बढ़त' मिली है। टाइम्स की रिपोर्ट में हुआ है।
रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ?
रिपोर्ट के अनुसार, हमलों के पहले और बाद की हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट इमेज में भारतीय हमलों से पाकिस्तान के एयरबेस को 'स्पष्ट नुकसान' पहुंचा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच का यह संघर्ष बीते पचास वर्षों में सबसे ज्यादा बड़ा था और दोनों पक्ष ने एक दूसरे पर मिसाइलों का प्रयोग किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, सैटेलाइट इमेज से पता चलता है कि हमले व्यापक थे, लेकिन नुकसान दावे से कहीं अधिक सीमित था और इन हमलों में पाकिस्तान को ज्यादा नुकसान पहुंचा है।
इसमें कहा गया है कि भले ही दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर नुकसान पहुंचाने का दावा किया है, लेकिन सैटेलाइट इमेज से साफ पता चलता है कि भारत ने सटीक टारगेट पर निशाना साधा है।
भोलारी और नूर खान एयरबेस पर हमला
कराची के निकट भोलारी एयरबेस पर किया गया हमला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां सैटेलाइट तस्वीरों से विमान हैंगर को पहुंचा नुकसान साफ दिखाई दे रहा है। कराची से करीब 100 मील दूर स्थित भोलारी एयरबेस पर भारत ने एयरक्राफ्ट हैंगर को टारगेट किया था।
रिपोर्ट में कहा गया है, "दृश्यों में हैंगर जैसी दिखने वाली जगह पर स्पष्ट नुकसान दिखाई दे रहा है।" इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत का सबसे संवेदनशील हमला नूर खान एयरबेस पर था, जो पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के पास स्थित है और सेना मुख्यालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के करीब है।
नूर खान एयरबेस पर मौजूद यूनिट पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की सुरक्षा देखती है। यहां की सुविधाओं को भारत ने सटीक हथियारों से नुकसान पहुंचाया है।
सरगोधा और रहीम यार खान एयरबेस पर हमला
भारत ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तान के सरगोधा और रहीम यार खान एयरबेस के रनवे को भारी नुकसान पहुंचाया है। सैटेलाइट इमेज ने इन दावों का समर्थन किया, जिसमें प्रभावित बुनियादी ढांचों को दिखाया गया है।
पाकिस्तान के खोखले दावे
पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने भारत के उधमपुर एयरबेस को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। लेकिन, 12 मई की सैटेलाइट तस्वीरें उस दावे की पुष्टि नहीं करती हैं और एयरबेस बिना किसी क्षति के है।
NYT के बाद वाशिंगटन पोस्ट ने खोली PAK की पोल
रिपोर्ट ने सबूतों के साथ पाकिस्तान को पहुंचे नुकसान को दिखाया है। अब वाशिंगटन पोस्ट ने भी अपनी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है कि भारत के हमले में पाकिस्तान के कम से कम 6 एयरबेसों पर रनवे और संरचनाओं को नुकसान पहुंचा है।
दो दर्जन से अधिक सैटेलाइट इमेज और उसके बाद के वीडियो की समीक्षा में पाया गया कि हमलों में वायुसेना की ओर से इस्तेमाल किए जाने वाले तीन हैंगर, दो रनवे और दो मोबाइल इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है। भारत द्वारा किए गए हमले पाकिस्तान के 100 मील के अंदर तक थे।
रूस-यूक्रेन वार्ता आज, क्या खत्म होगी जंग? दुनिया टिकी निगाहें
15 May, 2025 11:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को। दुनिया की निगाह आज होने वाली रूस-यूक्रेन वार्ता पर हैं क्योंकि तुर्किए में रूस और यूक्रेन के बीच पिछले तीन साल से जारी युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से वार्ता होने जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक इस वार्ता से पुतिन दूर रहेंगे। वहीं, रूस-यूक्रेन वार्ता के लिए प्रतिनिधिमंडल की घोषणा की जा चुकी है।
पुतिन ने वार्ता में शामिल होने जा रहे अधिकारियों की घोषणा की
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उन अधिकारियों के नामों की घोषणा की है जो आज तुर्किए में होने वाली यूक्रेन के साथ नए सिरे से वार्ता में रूस का प्रतिनिधित्व करेंगे।
क्रेमलिन के सहयोगी व्लादिमीर मेडिंस्की रूसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे, जिसमें उप विदेश मंत्री मिखाइल गालुजिन, उप रक्षा मंत्री अलेक्जेंडर फोमिन और इगोर कोस्ट्युकोव शामिल होंगे, जो रूसी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ के मुख्य निदेशालय के प्रमुख हैं।
वार्ता में ये लोग भी रहेंगे मौजूद
पुतिन ने वार्ता का समर्थन करने के लिए विशेषज्ञों के एक समूह को भी नामित किया है। इनमें जनरल स्टाफ के सूचना विभाग के प्रथम उप प्रमुख अलेक्जेंडर जोरिन, मानवीय नीति के लिए राष्ट्रपति निदेशालय की उप प्रमुख येलेना पोडोब्रेयेव्स्काया, विदेश मंत्रालय में दूसरे सीआईएस विभाग के निदेशक एलेक्सी पोलिशचुक और रक्षा मंत्रालय के अंतर्राष्ट्रीय सैन्य सहयोग निदेशालय के उप प्रमुख विक्टर शेवत्सोव शामिल हैं।
इस्तांबुल में होने जा रही है रूस-यूक्रेन के बीच चर्चा
क्रेमलिन के सहायक यूरी उशाकोव ने पुष्टि की कि यूक्रेन के साथ चर्चा गुरुवार को इस्तांबुल में फिर से शुरू होगी। रिपोर्ट के अनुसार, इस्तांबुल जाने वाले रूसी प्रतिनिधिमंडल की योजना तकनीकी और राजनीतिक दोनों मुद्दों पर चर्चा करने की है।
पुतिन ने दिया था यूक्रेन को वार्ता का निमंत्रण
राष्ट्रपति पुतिन ने औपचारिक रूप से यूक्रेन को 11 मई को सीधी बातचीत फिर से शुरू करने के लिए बिना शर्त निमंत्रण दिया।
इससे पहले, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा था कि यूक्रेन अपने अगले कदम तय करने से पहले इस बात पर बारीकी से नजर रख रहा है कि रूस तुर्किए में होने वाली आगामी वार्ता में किसे भेजता है। जेलेंस्की ने रूस के इरादों पर भी संदेह व्यक्त किया और मॉस्को से हाल ही में मिले संकेतों को अविश्वसनीय बताया।
जेलेंस्की ने पुतिन से आमने-सामने मिलने की इच्छा जताई
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने भी गुरुवार (15 मई) को होने वाली वार्ता में अपने रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन से आमने-सामने बात करने की इच्छा जाहिर की है। लेकिन, जेलेंस्की के सलाहकार मिखाइलो पोडोल्याक ने दो टूक कहा है कि वह वार्ता में तभी भाग लेंगे, जब पुतिन भी वहां होंगे और वह पुतिन के अलावा किसी अन्य रूसी प्रतिनिधि से नहीं मिलेंगे।
ट्रंप को लेकर भी आया बयान
सूत्रों ने बताया कि पोडोल्याक ने क्रेमलिन को यह भी दिखाने की चुनौती दी है कि वह वाकई में ईमानदारी से शांति के लिए प्रयासरत है। हालांकि, ट्रंप ने जरूरत पड़ने पर खुद भी इस वार्ता में शामिल होने की पेशकश की है। लेकिन, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा है कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि रूसी सरकार का कोई प्रतिनिधि इसमें शामिल होगा या नहीं।
आर्थिक संकट में फंसे पाकिस्तान को IMF का सहारा, फिर मिला लोन
15 May, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
करांची। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पाकिस्तान के लिए 1.023 अरब अमेरिकी डॉलर की दूसरी किश्त जारी की है। केंद्रीय बैंक ने बुधवार को यह जानकारी दी।
दूसरी किस्त ऐसे समय जारी हुआ है, जब आईएमएफ पाकिस्तान के आगामी बजट पर वर्चुअल चर्चा कर रहा है, क्योंकि क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं के कारण उसके मिशन की इस्लामाबाद यात्रा में देरी हुई है। इस हस्तांतरण के साथ आईएमएफ की कुल वितरण लगभग 210 अमेरिकी डॉलर हो गया है।
आईएमएफ वार्ता 16 मई तक जारी रहेगी
इस पर पिछले साल पाकिस्तान और वैश्विक ऋणदाता के बीच हस्ताक्षर किए गए थे। फेडरल सरकार दो जून को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बजट पेश करने की योजना बना रही है। आईएमएफ वार्ता 16 मई तक जारी रहेगी।
वहीं, आइएमएफ जून में बांग्लादेश को 130 करोड़ अमेरिकी डॉलर जारी करने वाला है, जो उसके 470 करोड़ अमेरिकी डालर के ऋण कार्यक्रम की चौथी समीक्षा और विनिमय दर सुधारों पर बातचीत में सफलता के बाद होगा।
भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क जरूरी, ईरान सरकार का नया फरमान जारी
14 May, 2025 05:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान में एक बार फिर कोरोना का खतरा मंडराने लगा है. देश में कोविड-19 मामलों में तेजी से हो रही बढ़ोतरी ने सरकार और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है. इसी के मद्देनजर सरकार ने सार्वजनिक स्थलों पर मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है. खासकर भीड़-भाड़ वाले इलाकों और बंद जगहों पर लोगों को मास्क लगाकर ही आने-जाने की सलाह दी गई है.
रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर के अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि वायरस एक बार फिर फैल रहा है. हालांकि अब तक कोविड के मामलों को लेकर कोई स्पष्ट डेटा जारी नहीं किया गया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग मान रहा है कि यह ओमिक्रॉन वैरिएंट का ही नया प्रभाव है.
ईरानी डॉक्टरों ने क्या कहा?
संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. ने बताया कि वृद्ध नागरिकों, गर्भवती महिलाओं, दिल के मरीजों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों को पहले की तरह ही सतर्कता बरतने की जरूरत है. उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे लोग घर से बाहर निकलते समय मास्क जरूर पहनें और अनावश्यक यात्रा से बचें.
ईरान के उप स्वास्थ्य मंत्री अलीरेजा रईसी ने हाल ही में देशभर की यूनिवर्सिटी स्वास्थ्य इकाइयों को पत्र लिखकर चेताया कि कोरोना और फ्लू जैसे श्वसन संबंधी रोगों से सतर्क रहने की जरूरत है. उन्होंने विशेष रूप से सार्वजनिक कार्यालयों, अस्पतालों और बंद वातावरण में मास्क पहनने को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं.
आधिकारिक आंकड़ों पर एक नजर
गौरतलब है कि फरवरी 2020 में चीन के बाद ईरान दूसरा देश था जिसने आधिकारिक रूप से कोरोना महामारी की पुष्टि की थी. तब से अब तक देश में 1,45,000 से अधिक मौतें और 75 लाख से अधिक संक्रमण के मामले दर्ज हो चुके हैं. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक आंकड़े इससे सात गुना अधिक हो सकते हैं. सरकार की ओर से नया मास्क आदेश देश में फिर से संक्रमण की गंभीरता को दर्शा रहा है. ऐसे में आम लोगों से अपील की गई है कि वे पूर्व की तरह सतर्कता बरतें और मास्क के साथ अन्य कोविड प्रोटोकॉल का पालन करें.
मुख्यमंत्री नायब सैनी की बड़ी घोषणा, आरक्षण के साथ पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया का वादा
14 May, 2025 05:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा के सरकारी विभागों, बोर्ड-निगमों, स्वायत्त संस्थाओं और सरकारी कंपनियों में चतुर्थ श्रेणी के 7596 पदों पर भर्ती होगी। पहली बार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पदों की भर्ती में 1209 पद वंचित अनुसूचित जाति (डीएससी) और अन्य अनुसूचित जाति (ओएससी) के लिए आरक्षित किए गए हैं। इनमें डीएससी के लिए 605 और ओएससी के लिए 604 पद आरक्षित रहेंगे।
सीएम सैनी ने की घोषणा
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने हरियाणा राज्य कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) के माध्यम से जल्द ही चतुर्थ श्रेणी पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। भर्ती में वंचित अनुसूचित जाति और अन्य अनुसूचित जाति के साथ ही पिछड़ा वर्ग-ए (बीसीए), पिछड़ा वर्ग-बी (बीसीबी), आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईब्लयूएस), दिव्यांग, खिलाड़ियों और एक्स सर्विसमैन को आरक्षण का लाभ दिया जाएगा।
चयन के लिए आवेदक के सामान्य पात्रता परीक्षा (सीईटी) स्कोर का उपयोग किया जाएगा। यह पारदर्शी और मेरिट-आधारित चयन प्रक्रिया को सुनिश्चित करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी वर्गों के लिए आरक्षण की नई व्यवस्था अंतर्विशिष्ट असमानताओं को दूर करने और आरक्षण लाभों के निष्पक्ष वितरण को सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है। यह पहल न केवल रोजगार सृजन को बढ़ावा देगी, बल्कि सामाजिक समावेशिता और निष्पक्षता को भी सुनिश्चित करेगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' के मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए प्रदेश सरकार युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने के अपने वादे को पूरा करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है।
यह भर्ती प्रक्रिया सामाजिक न्याय को भी करेगी मजबूत
नायब सिंह सैनी ने कहा कि केंद्र और हरियाणा सरकार का साझा लक्ष्य 'अंत्योदय' अर्थात समाज के सबसे वंचित वर्ग के उत्थान को प्राथमिकता देना है। यह भर्ती प्रक्रिया समाज के सभी वर्गों, विशेष रूप से अनुसूचित जातियों और अन्य पिछड़े समुदायों को उनका हक दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह भर्ती प्रक्रिया न केवल रोजगार के अवसर प्रदान करेगी, बल्कि सामाजिक न्याय को भी मजबूत करेगी। भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष रखने के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग कर आवेदन और चयन प्रक्रिया को और अधिक सुगम और कुशल बनाया जाएगा। यह पहल युवाओं के लिए नए अवसरों का द्वार खोलने के साथ ही सामाजिक समावेश और समानता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगी।
ग्लोबल एविएशन की रिपोर्ट में दावा – रूसी हथियार से गिराया गया था मलेशियाई विमान
14 May, 2025 04:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ग्लोबल एविएशन काउंसिल ने MH17 विमान को मार गिराने के लिए रूस को जिम्मेदार बताया है. ग्लोबल एविएशन काउंसिल ने मंगलवार को कहा कि एक दशक से पहले यूक्रेन के हवाई क्षेत्र उड़ रहे मलेशियाई एयरलाइंस की प्लेन नं 17 को मार गिराने के लिए रूस जिम्मेदार है. इस हादसे के दौरान 298 लोगों ने अपनी जान गवाई थी.
इस रिपोर्ट के आने के बाद मरने वाले लोगों के परिवारों को इंसाफ मिलने की उम्मीद बढ़ी है. साथ ही उनको मुआवजा मिलने की संभावना अब पहले से ज्यादा हो गई है. रूस ने अपनी तरफ से इस रिपोर्ट को खारिज किया है और MH17 क्रैश में अपना हाथ होने से इंकार किया है. हालांकि डच नेतृत्व वाली एक अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ने 2016 में कहा कि ऐम्स्टर्डैम से कुआलालंपुर जाने वाले विमान को 17 जुलाई 2014 को यूक्रेनी क्षेत्र में मार गिराया गया था, इस क्षेत्र पर अलगाववादी संगठनों का नियंत्रण है. आरोप है कि इस विमान को गिराने में रूसी मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ था.
नीदरलैंड और ऑस्ट्रेलिया दर्ज कराया था मामला
बताते चले कि नीदरलैंड और ऑस्ट्रेलिया ने 2022 में मॉन्ट्रियल में ग्लोबल एविएशन काउंसिल के ऑफिस में रूस के खिलाफ मामला दर्ज कराया था. मंगलवार को आए फैसले का नीदलैंड और ऑस्ट्रेलिया ने स्वागत किया है.
परिषद ने अपनी जांच में पाया कि रूस ने शिकागो कन्वेंशन का उल्लंघन किया है जिसके अनुसार उड़ान के दौरान नागरिक विमानों के खिलाफ हथियारों का उपयोग करने से बचना चाहिए.
क्या बोलें पीड़ित?
इस फैसले के आने के बाद अपने बेटे को खो चुके डच पिता थॉमस शैंसमैन ने कहा कि इस फैसले से स्पष्ट है कि रूस इस घटना का जिम्मेदार है और इससे उन्हें मुआवजा मिल सकता है. लेकिन वे और उनके रिश्तेदार चाहते है कि हादसे का जिम्मेदार देश अपनी गलती स्वीकार करे. उनका यह भी कहना है कि पैसे से कुछ भी वापस नहीं खरीदा जा सकता है.
रूस ने खारिज किए आरोप
रूस ने अपनी तरफ से सभी दावों और जांचों को खारिज किया है. क्रेमलिन ने अपने बयान में जांच को एकतरफा बताते हुए, रिपोर्ट को खारिज कर दिया है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा रूस ने इस घटना की जांच में हिस्सा नहीं लिया है. इसलिए हम इन निष्कर्षों को स्वीकार नहीं करेंगे.
हरियाणा में सहकारी और निजी बसों पर भी लगेगा पशु सुरक्षा का संदेश
14 May, 2025 04:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा में सड़कों पर दौड़ती सभी रोडवेज बसों पर अब 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' के साथ 'जानवरों पर दया करो' का संदेश भी दिखेगा।
इतना ही नहीं, सहकारी परिवहन समितियों और प्राइवेट बस संचालकों को भी जीवों को बचाने के लिए प्रेरित करता स्लोगन लिखना होगा। यह फैसला पशुओं के प्रति दयालुता बढ़ाने और सड़क पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।
हिंदी के साथ अंग्रेजी में भी लिखा जाएगा स्लोगन
प्रदेश सरकार ने सभी सार्वजनिक परिवहन वाहनों पर पशु कल्याण से जुड़ा संदेश लिखना अनिवार्य कर दिया है। परिवहन आयुक्त ने सभी जिला परिवहन अधिकारियों सह क्षेत्रीय यातायात प्राधिकरण सचिवों को आदेशों का सख्ती से पालन कराने का निर्देश दिया है। हिंदी के साथ अंग्रेजी में भी यह स्लोगन लिखा जा सकेगा।
स्लोगन की न्यूनतम ऊंचाई 150 मिलीमीटर (एमएम) होनी चाहिए ताकि वह आसानी से पढ़ने में आ सके। इसे ऐसे स्थान पर लगाना होगा, जहां से वह सभी को दिखाई दे। स्लोगन का रंग इस हिसाब से हो कि यह बस के रंग में न मिले। यानी स्लोगन स्पष्ट रूप से दिखे। इसे पेंट या स्टीकर के रूप में भी लगाया जा सकता है। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से लोगों में पशु कल्याण को लेकर जागरूकता बढ़ेगी और सड़क पर बेसहारा या घरेलू जानवरों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ेगी।
मेनका गांधी ने अनिल विज को लिखा था पत्र
दरअसल, यात्री वाहनों के साथ ही रोडवेज बसों पर स्लोगन के जरिये बेटियों को बचाने के लिए जागरूक करने का अभियान सफल रहा। इसे देखते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 25 फरवरी को सभी राज्यों के परिवहन आयुक्तों और प्रधान सचिवों को पशुओं पर दया करने और उनका ख्याल रखने के लिए स्लोगन की मदद लेने के लिए लिखित अनुरोध भेजा था।
इसमें कहा गया है कि हाल के वर्षों में मानव व जीवों के बीच संघर्ष के कई मामले सामने आए हैं। विशेषकर जंगल क्षेत्र में जीवों को लेकर जागरूकता ज्यादा जरूरी है। वाहनों पर जीवों के प्रति सरल रहने और उन्हें बचाने की जागरूकता के स्लोगन इसमें अहम भूमिका निभा सकते हैं।
वहीं, पशु अधिकार कार्यकर्ता और पर्यावरणविद के रूप में पहचान बनाने वाली पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेत्री मेनका गांधी ने भी हरियाणा के परिवहन मंत्री अनिल विज को इस संबंध में पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने सार्वजनिक परिवहन वाहनों पर पशु कल्याण से जुड़ा संदेश लिखना अनिवार्य करने की वकालत की। विज ने इस पर गंभीरता दिखाते हुए तुरंत प्रभाव से परिवहन अधिकारियों को केंद्र सरकार के आदेश को सख्ती से लागू कराने का निर्देश जारी कर दिया।
पर्यावरण और जीव-जंतुओं की रक्षा करना सभी का कर्तव्य
संविधान के अनुच्छेद 51 ए (जी) के अनुसार प्रत्येक नागरिक का यह मौलिक कर्तव्य है कि वह वन, झील, नदी और वन्य जीवन सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार करे तथा जीवित प्राणियों के प्रति दया भाव रखे। इसके अलावा पशु कल्याण सुनिश्चित करने के लिए दो कानून, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 बनाए गए हैं।
युद्ध नहीं, बातचीत करें भारत-पाकिस्तान: ट्रंप ने फिर दिया चौंकाने वाला बयान
14 May, 2025 01:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत और पाकिस्तान के बीच फिलहाल तनाव कम है। दोनों के बीच सीजफायर लागू हो गया है। ऐसे में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत-पाक के बीच संबंधों को बेहतर करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिका की मध्यस्थता के बाद भारत और पाकिस्तान संघर्ष विराम के लिए तैयार हो गए। अब ट्रंप ने दोनों देशों को खाने पर जाने को कहा है।
'हमें मिसाइल नहीं चलो बिजनेस करें'
ट्रंप ने एक पोस्ट में कहा, 'दोनों देशों के पास बहुत शक्तिशाली, मजबूत और चतुर नेता हैं। यह सब रुक गया और उम्मीद है कि यह ऐसे ही रहेगा वे (भारत-पाकिस्तान) सच में साथ मिल रहे हैं। शायद हम उन्हें साथ में लाकर एक अच्छा डिनर भी करा सकें। उस संघर्ष में लाखों लोग मारे जा सकते थे जो छोटे से शुरू हुआ और दिन-ब-दिन बड़ा होता जा रहा था।'
उन्होंने कहा, 'हमें परमाणु मिसाइलों का व्यापार नहीं करना चाहिए, बल्कि वस्तुओं का व्यापार करना चाहिए, उन अच्छी चीजों का जो आप बनाते हैं। शायद हम उन्हें थोड़ा साथ ला सकें। जहां वे बाहर जाकर साथ में अच्छा खाना खा सकें। ट्रंप ने आगे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की उनके योगदान के लिए प्रशंसा की।
मुझे युद्ध पसंद नहीं- ट्रंप
ट्रम्प ने आगे दावा किया, 'हमने कुछ दिन पहले ही ऐतिहासिक युद्ध विराम पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष में लाखों लोग मारे जा सकते थे।' बता दें यूएस-सऊदी निवेश फोरम में राष्ट्रपति ट्रंप ने ये दावा किया है। उन्होंने कहा है- 'मेरी सबसे बड़ी उम्मीद शांति निर्माता और एकजुटता लाने वाला बनना है। मुझे युद्ध पसंद नहीं है।
भारत ने पाक को दी चेतावनी
वहीं दूसरी तरफ भारत ने इस हफ्ते अपने पड़ोसी को कड़ी चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर जैसे आतंकवाद विरोधी अभियान, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में नौ स्थानों पर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था, अब भारत की प्रतिक्रिया में एक नया मानक पेश करेंगे। भारत सरकार ने जोर देकर कहा कि अगर पाकिस्तान में आतंकवादी तत्व फिर से संगठित होने की कोशिश करते हैं तो उसके बल फिर से कार्रवाई करेंगे।
आतंकी कार्रवाई पर भारत के सख्त रुख के बाद पाकिस्तान का पलटवार
14 May, 2025 10:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। भारत द्वारा आतंकियों पर की गई कार्रवाई और फिर पाकिस्तान द्वारा हमले की कोशिश करने के बाद मिले करारा जवाब के बाद पाकिस्तान की सरकार अब बौखला चुकी है।
इस बीच पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के एक कर्मचारी को जासूसी के आरोप में आवंछित घोषित कर दिया। पाकिस्तान ने भारतीय राजनयिक और उनके परिवार को 24 घंटे के अंदर पाकिस्तान छोड़ने को कहा है।
पाकिस्तान सरकार ने किया पोस्ट
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, "इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के एक कर्मचारी को अवांछित व्यक्ति घोषित किया गया है।"
"पाकिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के एक कर्मचारी को उसकी विशेषाधिकार प्राप्त स्थिति के साथ असंगत गतिविधियों में संलग्न होने के लिए अवांछित व्यक्ति घोषित किया है। संबंधित अधिकारी को 24 घंटे के भीतर पाकिस्तान छोड़ने का निर्देश दिया गया है।"
भारत के एक्शन से बौखलाया पाक
पोस्ट में कहा गया, "भारतीय उच्चायुक्त को आज विदेश मंत्रालय में बुलाया गया था और इस आदेश से अवगत कराया गया।"
उल्लेखनीय है कि भारत ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग में कार्यरत एक पाकिस्तानी अदिकारी को भारत में उसकी आधिकारिक स्थिति के अनुरूप नहीं होने वाली गतिविधियों में संलिप्त होने के कारण 'अवांछित व्यक्ति' घोषित किया था।
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, "भारत सरकार ने नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग में कार्यरत एक पाकिस्तानी अधिकारी को भारत में अपने आधिकारिक दर्जे के अनुरूप गतिविधियों में संलिप्त होने के कारण अवांछित व्यक्ति घोषित किया गया है। अधिकारी को 24 घंटे के भीतर भारत छोड़ने को कहा गया है।"
आतंकवाद के खिलाफ भारत का एक्शन
भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, जिसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कई आतंकी ठिकानों पर हमला किया गया था। यह हमला 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए घातक हमले का बदला लेने के लिए किया गया था, जिसमें 26 पर्यटक मारे गए थे।
100 से ज़्यादा आतंकवादियों को मार गिराने के अलावा, इन हमलों में पाकिस्तान के अंदर 11 एयर बेस को निशाना बनाया गया और उनकी सैन्य क्षमताओं को काफी नुकसान पहुंचाया गया। हवाई, जमीनी और समुद्री अभियानों को संयमित तरीक़े से अंजाम दिया गया, जिसमें नागरिकों की कम से कम हताहत होने पर ज़ोर दिया गया।
कनाडा की नई विदेश मंत्री बनीं अनीता आनंद, गीता पर हाथ रखकर ली शपथ
14 May, 2025 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टोरंटो। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने मंगलवार को अपने कैबिनेट में फेरबदल की घोषणा की, जिसमें भारतीय मूल की अनीता आनंद को विदेश मंत्री के रूप में नियुक्त किया है। यह कदम उन्होंने हाल ही में पुन: निर्वाचित लिबरल सरकार के गठन के तहत उठाया है।
गीता पर हाथ रखकर ली शपथ
अनीता आनंद ने मंगलवार को गीता पर हाथ रखकर नए विदेश मंत्री के रूप में शपथ ली। वह कनाडा की विदेश मंत्री बनने वाली पहली हिंदू महिला भी हैं। कनाडा कई विदेशी मामलों की चुनौतियों से निपट रहा है।
मेलानी जोली को उद्योग मंत्री बनाया गया
इस साल की शुरुआत में जस्टिन ट्रूडो की जगह लेने वाले और पिछले महीने चुनाव जीतने वाले कार्नी ने अनीता आनंद को मेलानी जोली की जगह विदेश मंत्री नियुक्त किया है। मेलानी जोली को उद्योग मंत्री बनाया गया है। अनीता आनंद ने पहले रक्षा मंत्री सहित कई भूमिकाएं निभाई हैं।
फ्रांस्वा फिलिप शैम्पेन बने रहेंगे वित्त मंत्री
फ्रांस्वा फिलिप शैम्पेन ने वित्त मंत्री के रूप में अपना पद बरकरार रखा है, जबकि डोमिनिक लेब्लांक कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच व्यापार युद्ध के दौरान व्यापार मंत्री बने हुए हैं। कार्नी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कनाडा के प्रति दिखाई गई आक्रामकता का सामना करने का वादा करके प्रधानमंत्री का पद हासिल किया है।
कार्नी ने कहा कि कनाडाई लोगों ने इस नई सरकार को संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ एक नए आर्थिक और सुरक्षा संबंध को परिभाषित करने और सभी कनाडाई लोगों के लिए एक मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने के लिए एक मजबूत जनादेश के साथ चुना है।
कार्नी ने कहा कि राजा चार्ल्स तृतीय 27 मई को संसद के फिर से शुरू होने पर कनाडाई सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए एक भाषण देंगे।
पिता तमिलनाडु से और मां पंजाब से थीं
अनीता आनंद का जन्म केंटविले, नोवा स्कोटिया में हुआ था। उनके माता-पिता भारतीय फिजिशियन थे। उनके पिता तमिलनाडु से और मां पंजाब से थीं। अनीता की दो बहनें हैं गीता आनंद, जो टोरंटो में एक वकील हैं और सोनिया आनंद, जो मैकमास्टर यूनिवर्सिटी में एक फिजिशियन और शोधकर्ता हैं।
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‘बिहान’ योजना से बदल रही ग्रामीण महिलाओं की तस्वीर, बिलासो बाई बनीं ‘लखपति दीदी’
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रद्धेय बृजमोहन मिश्रा की जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की
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कृषि मंत्री नेताम ने मिट्टी एवं बीजों की पूजा की और ट्रैक्टर चलाकर बीजों की बुआई की
महतारी वंदन योजना से मिली नई दिशा, प्रेम बाई बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
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