पंजाब
अदालत का सख्त फैसला, बिना रियायत लंबी कैद का आदेश।
21 Mar, 2026 03:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लुधियाना। के बहुचर्चित दुष्कर्म एवं हत्या मामले में अहम फैसला सुनाते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दोषी की फांसी की सजा को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर की परिभाषा की सीमा पर खड़ा है। जांच में कुछ कमियां और संदेह की गुंजाइश मौजूद है। ऐसे में जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ ने दोषी को कम से कम 50 वर्ष की वास्तविक कैद भुगतने का आदेश दिया है जिसमें किसी प्रकार की रियायत नहीं दी जाएगी। साथ ही पाक्सो अधिनियम के तहत 25 वर्ष की सजा भी सुनाई गई है। अदालत ने पीड़ित परिवार को 75 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया।
बहलाकर अपने साथ ले गया था आरोपी
28 दिसंबर 2023 को चार वर्षीय बच्ची को उसके दादा के चाय स्टाल से बहला-फुसलाकर ले जाया गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म कर हत्या कर दी गई। बाद में शव को छिपा दिया गया था। 20 दिन बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया था और निचली अदालत ने उसे फांसी की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ सबूत पर्याप्त हैं लेकिन जांच के दौरान कुछ गंभीर खामियां सामने आईं। अदालत ने फर्जी अतिरिक्त न्यायिक स्वीकारोक्ति, मुख्य गवाह के बयान में विरोधाभास और एक महत्वपूर्ण गवाह की गैर-पेशी को ऐसे कारक माना, जो मौत की सजा के खिलाफ जाते हैं।
पीड़िता एक असहाय बच्ची थी
कोर्ट ने कहा कि हत्या पूर्व नियोजित नहीं थी बल्कि दुष्कर्म के बाद सबूत मिटाने की घबराहट में की गई। सजा तय करते समय समाज की सुरक्षा भी अहम है, लेकिन इसके लिए अपरिवर्तनीय दंड देना जरूरी नहीं है। कोर्ट ने भावुक टिप्पणी करते हुए कहा कि पीड़िता की गलती सिर्फ इतनी थी कि वह एक कमजोर और असहाय बच्ची थी। यह समाज और व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है कि ऐसी घटनाएं हो रही हैं। कोर्ट ने कहा कि हमें शिक्षा और सामाजिक मूल्यों में सुधार की आवश्यकता है ताकि जीवन के प्रति सम्मान विकसित हो सके। सजा निर्धारण पर अदालत ने कहा कि कम उम्र के पीड़ित मामलों में सख्त सजा जरूरी है। इसी आधार पर पांच वर्ष से कम उम्र की पीड़िता के मामलों में कम से कम 25 वर्ष की सजा को उचित माना गया। अदालत ने यह भी दोहराया कि न्याय का सिद्धांत यह है कि कोई निर्दोष दंडित न हो और कोई दोषी बच न सके।
वेयरहाउस डीएम के वीडियो में नाम आने के बाद इस्तीफा।
21 Mar, 2026 11:14 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंजाब। वेयरहाउस के अमृतसर के मैनेजर गगनदीप सिंह रंधावा ने शुक्रवार देर रात सल्फास निगल लिया। उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां शनिवार सुबह उनकी इलाज के दौरान मौत हो गई। मरने से पहले बनाए वीडियो में उन्होंने परिवहन मंत्री लालजीत भुल्लर का नाम लिया है। वीडियो सामने आने के बाद सीएम भगवंत मान ने लालजीत भुल्लर से इस्तीफा ले लिया है। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी अस्पताल पहुंचे और पूरे घटनाक्रम को लेकर जांच शुरू कर दी गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रहीं है। घटना के बाद सांसद गुरजीत सिंह औजला अस्पताल पहुंचे और उन्होंने मामले को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप गंभीर हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, ताकि तथ्यों की स्पष्ट जानकारी सामने आ सके। फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग मामले की जांच में जुटे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
सीएम बोले-जांच प्रभावित नहीं होने देंगे
वहीं सीएम भगवंत मान ने कहा कि कैबिनेट मंत्री का इस्तीफा ले लिया गया है। हम जांच प्रभावित नहीं होने दे सकते। हम अधिकारियों को तंग करने के लिए पावर में नहीं आए। भुल्लर का विभाग जल्द ही दूसरे मंत्री को दिया जाएगा।
विपक्ष हमलावर
कांग्रेस नेता सुखपाल खैरा ने लालजीत भुल्लर के खिलाफ तुरंत आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है। खैरा ने कहा कि भुल्लर पर पर वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के डीएम गगनदीप रंधावा को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप है, जिसके चलते रंधावा ने आत्महत्या कर ली। एक्स पर उन्होंने लिखा कि पहले मंत्री और उनके आदमियों ने रंधावा के साथ मारपीट की, और बाद में आत्महत्या करने से पहले रंधावा ने मंत्री का नाम लिया। मैं सरकार और पुलिस से आग्रह करता हूं कि इस मंत्री को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। अगर ऐसा नहीं होता, तो यह माना जाएगा कि पुलिस का इस्तेमाल केवल विपक्ष के साथ निजी हिसाब-किताब चुकाने के लिए किया जा रहा है। मामले में अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने सोशल मीडिया पर सरकार को घेरा। वहीं भाजपा नेता सुनील जाखड़ ने कहा कि पहले लोग फिरौती न मिलने की वजह से अपनी जान गंवा रहे थे, लेकिन अब सरकारी मंत्रियों की रिश्वत की मांग पूरी न कर पाने की वजह से अधिकारियों को अपनी जान देनी पड़ रही है। पंजाब एक क्रूर ईमानदार सरकार के राज में अपने सबसे मुश्किल समय से गुज़र रहा है। क्या मुख्यमंत्री अब भी अपनी सरकार को क्रूर ईमानदार लोगों की सरकार कह रहे हैं? वहीं भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कहा कि अमृतसर में वेयरहाउस कॉर्पोरेशन के डिस्ट्रिक्ट मैनेजर गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या बहुत दर्दनाक है और सत्ता में बैठे लोगों के काम करने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाती है। उन्हें इस ईमानदारी की सजा टॉर्चर के रूप में दी गई। उन्हें मंत्री के घर बुलाया गया, पीटा गया और जबरदस्ती 10 लाख रुपये की रिश्वत लेने की बात कबूल करवाने की कोशिश की गई। ये हालात दिखाते हैं कि लालजीत सिंह भुल्लर जैसे मंत्री कैसे अधिकारियों को बुलाकर उन पर गैर-कानूनी कमीशन के लिए दबाव डालते हैं। आप सरकार में भ्रष्टाचार आज अपने चरम पर है। अब जब आम आदमी पार्टी को पता चल गया है कि पंजाब के लोग अगले साल उन्हें सत्ता से बाहर कर देंगे, तो ये लोग पंजाब को लूट रहे हैं और ईमानदार अधिकारियों की बलि ले रहे हैं। हम गगनदीप सिंह की आत्महत्या की तुरंत और हाई-लेवल जांच की मांग करते हैं। दोषियों को हर कीमत पर ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
घरों में गैस की कमी, इंडक्शन चूल्हों का इस्तेमाल बढ़ा।
21 Mar, 2026 10:23 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लुधियाना। पंजाब में रसोई गैस की कमी का असर अब आम जनजीवन के साथ-साथ छोटे कारोबारियों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। खासकर स्ट्रीट फूड विक्रेता, ढाबा संचालक और चाय स्टॉल चलाने वाले लोग इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। अबोहर में गैस सिलिंडरों की अनियमित सप्लाई और बढ़ती दिक्कतों के कारण छोटे कारोबारियों के कामकाज पर सीधा असर पड़ा है। कई दुकानदारों का कहना है कि समय पर गैस नहीं मिलने से उन्हें या तो दुकान बंद रखनी पड़ती है या फिर सीमित मात्रा में ही सामान तैयार करना पड़ रहा है, जिससे उनकी आमदनी में गिरावट आई है। वहीं दूसरी ओर, घरों में भी गैस की कमी के चलते लोग अब वैकल्पिक साधनों की ओर रुख कर रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग इंडक्शन चूल्हों का इस्तेमाल करने लगे हैं। खासकर जिन घरों में बिजली की उपलब्धता बेहतर है, वहां इंडक्शन एक आसान विकल्प बनकर उभरा है। सरकार की फ्री बिजली योजना इस स्थिति में लोगों के लिए राहत का कारण बन रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि मुफ्त या रियायती बिजली मिलने से इंडक्शन का खर्च काफी हद तक संभल जाता है, जिससे गैस की कमी का असर कुछ कम हो रहा है। हालांकि, यह समाधान स्थायी नहीं है। स्ट्रीट फूड और छोटे व्यवसायों के लिए इंडक्शन पूरी तरह व्यवहारिक विकल्प नहीं बन पा रहा, क्योंकि बड़े स्तर पर खाना पकाने के लिए गैस ही अधिक उपयुक्त मानी जाती है। नगर कांग्रेस के प्रधान सुभाष बाघला और कारोबारियों ने प्रशासन से मांग की है कि गैस सप्लाई को जल्द से जल्द सुचारू किया जाए, ताकि आम जनता और छोटे व्यवसायों को राहत मिल सके।
अमृतसर में चूल्हों पर बन रहा मिड-डे मील
पंजाब के सरकारी स्कूलों में भी गैस की कमी के चलते कई स्कूलों में मिड-डे मील अब पारंपरिक चूल्हों पर तैयार किया जा रहा है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी हालत में बच्चों के भोजन में बाधा नहीं आनी चाहिए। अमृतसर के सरकारी हाई स्कूल इब्बन कलां में पिछले चार दिनों से गैस के बजाय लकड़ी के चूल्हों पर मिड-डे मील तैयार किया जा रहा है। स्कूल की प्रिंसिपल सिमी बेरी के अनुसार, रोजाना करीब 10 से 15 किलो लकड़ी का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद बच्चों को समय पर भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण एलपीजी गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। शिक्षा विभाग ने पहले ही स्कूलों को वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश जारी कर दिए थे। नए निर्देशों के अनुसार, जहां गैस सिलिंडर उपलब्ध नहीं हैं, वहां लकड़ी, बिजली या अन्य साधनों से मिड-डे मील तैयार किया जाए। विभाग ने सख्त शब्दों में कहा है कि बच्चों के भोजन से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। मिड-डे मील वर्कर हरजिंदर कौर ने बताया कि वे पूरी जिम्मेदारी के साथ भोजन तैयार कर रहे हैं और बच्चों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जा रही है।
पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल, भार्गव कैंप रेड के बाद हंगामा
20 Mar, 2026 03:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जालंधर। के भार्गव कैंप इलाके में पुलिस की छापेमारी के दौरान उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब स्थानीय परिवार ने पुलिस पर महिलाओं से मारपीट और बदसलूकी के गंभीर आरोप लगाए। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया और पीड़ित परिवार ने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है। एसीपी वेस्ट विजय कंवर पाल ने कहा कि एएसआई परवीन साथियों को साथ लेकर रोहित को लेने गए थे। जिसके खिलाफ शिकायत दर्ज थी और वह बुलाने के बावजूद थाने नहीं आया था। इस मामले में एडीसीपी राकेश ने जांच के आदेश दिए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, किसी पुराने आपसी विवाद की शिकायत के आधार पर पुलिस टीम एक घर में दबिश देने पहुंची थी। परिजनों का आरोप है कि पुलिस बिना महिला कर्मियों के घर में दाखिल हुई और युवकों को जबरन उठाने की कोशिश की। जब घर की महिलाओं ने इसका विरोध किया, तो उनके साथ कथित रूप से धक्का-मुक्की और मारपीट की गई। पीड़ित महिलाओं ने कैमरे के सामने चोटों के निशान दिखाते हुए दावा किया कि पुलिसकर्मियों ने थप्पड़ मारे, कपड़े खींचे और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। परिवार का कहना है कि यदि कोई शिकायत थी तो कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की जानी चाहिए थी। परिजनों ने यह भी दावा किया कि घटना की सीसीटीवी फुटेज मौजूद है और चश्मदीद गवाह पुलिस के कथित व्यवहार की पुष्टि कर सकते हैं। फिलहाल परिवार ने संबंधित अधिकारियों से दोषी कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं पूर्व विधायक और भाजपा नेता शीतल अंगुराल ने कहा कि परिवार को इंसाफ दिलाने के लिए थाने का घेराव किया है। अधिकारियों ने एएसआई पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था पर ऐसा नहीं हुआ। एसीपी विजय कंवर पाल ने कहा कि इस मामले में एएसआई परवीन सहित तीन पुलिस कर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है। पूर्व विधायक शीतल अंगुराल ने कहा कि पीड़ित महिला के साथ थाने जाकर शिकायत दी जा रही है। जिसकी कापी महिला आयोग और एससी कमीशन को भी भेजी जाएगी।
कामर्शियल LPG सप्लाई ठप, होटल इंडस्ट्री पर गहराया संकट
20 Mar, 2026 10:23 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लुधियाना (पंजाब)। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब पंजाब के होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर साफ दिखाई देने लगा है। कामर्शियल एलपीजी गैस की सप्लाई पिछले कई दिनों से ठप होने के कारण हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि होटलों के चूल्हे तक ठंडे पड़ने लगे हैं। संकट गहराने के साथ ही छोटे कारोबारियों के सामने अस्तित्व का सवाल खड़ा हो गया है और कई जगहों पर होटलों पर ताले लगने शुरू हो गए हैं। गैस संकट को लेकर वीरवार शाम होटल हाईलैंड में होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ पंजाब की अहम बैठक हुई, जिसमें उद्योग से जुड़े उद्यमियों ने मौजूदा हालात पर गंभीर चिंता जताई। बैठक में साफ कहा गया कि प्रशासन कामर्शियल एलपीजी गैस की आपूर्ति सुचारु बनाए रखने में पूरी तरह विफल रहा है। यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले दिनों में बड़े पैमाने पर होटल और रेस्टोरेंट बंद होने की नौबत आ सकती है। एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि इस सेक्टर के लिए कामर्शियल गैस की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक ठोस और स्थायी व्यवस्था बनाई जाए। कारोबारियों का कहना है कि होटल और रेस्टोरेंट पूरी तरह गैस पर निर्भर हैं और सप्लाई बाधित होने से पूरा कामकाज ठप पड़ गया है। उद्यमियों के अनुसार, छोटे रेस्टोरेंट में रोजाना औसतन दो से तीन कामर्शियल एलपीजी सिलिंडर की खपत होती है, जबकि मध्यम स्तर के रेस्टोरेंट में यह संख्या पांच से छह सिलिंडर तक पहुंचती है। बड़े रेस्टोरेंट्स में रोजाना दस या उससे अधिक सिलिंडर की जरूरत होती है। पिछले करीब बारह दिनों से गैस की सप्लाई नहीं होने से हालात बेहद गंभीर हो गए हैं।
सिंगल बर्नर डीजल भट्ठी के दाम बढ़े
कारोबारियों का कहना है कि पहले जो सिंगल बर्नर डीजल भट्ठी आठ से दस हजार रुपये में मिलती थी, उसकी कीमत अब बढ़कर तीस से पचास हजार रुपये तक पहुंच गई है। ऐसे में छोटे कारोबारियों के लिए यह विकल्प भी लगभग असंभव हो गया है।
मेन्यू कार्ड बदले
एसोसिएशन के प्रधान अमरवीर सिंह ने बताया कि गैस संकट के चलते होटल मालिकों को अपने मैन्यू कार्ड तक सीमित करने पड़े हैं। अब केवल चुनिंदा व्यंजन ही तैयार किए जा रहे हैं। अमरवीर सिंह ने कहा कि कुछ छोटे होटल पहले ही बंद हो चुके हैं और यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो यह संख्या तेजी से बढ़ सकती है। उन्होंने सरकार पर होटल और रेस्टोरेंट उद्योग की अनदेखी करने का आरोप लगाया और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
महंगाई की मार: कच्चे माल के दाम बढ़े, सस्ती सवारी हुई महंगी
20 Mar, 2026 01:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लुधियाना (पंजाब)। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर अब पंजाब के उद्योगों पर साफ नजर आने लगा है। खासकर साइकिल उद्योग, जो राज्य की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है, कच्चे माल की किल्लत और बढ़ती कीमतों के कारण गंभीर संकट से गुजर रहा है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि जी-13 बाइसाइकिल फोरम से जुड़े निर्माताओं ने सर्वसम्मति से एक अप्रैल से बेसिक साइकिल की कीमत में 225 रुपये तक का इजाफा करने का फैसला लिया है।
स्टील की कीमतों में बढ़ोतरी
फोरम के सदस्यों के अनुसार, स्टील की कीमतों में करीब आठ हजार रुपये प्रति टन तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साइकिल निर्माण में इस्तेमाल होने वाले स्टील पाइप के दाम 65 हजार रुपये प्रति टन से बढ़कर 73 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच गए हैं। इसके अलावा ब्रास की कीमत 500 रुपये से बढ़कर 800 रुपये प्रति किलो हो गई है, जबकि निकल के दाम 1400 रुपये से उछलकर 1700 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुके हैं। सिर्फ धातुओं तक ही नहीं, बल्कि प्लास्टिक उत्पादों की कीमतों में भी 50 से 60 फीसदी तक का उछाल आया है। वहीं केमिकल्स और पेंट के दामों में करीब 40 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। इन सभी कारणों से उद्योग की इनपुट कॉस्ट लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है। ऊर्जा के मोर्चे पर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। कमर्शियल एलपीजी गैस की आपूर्ति में लगातार बाधा आ रही है, जिससे उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। उद्योगों को समय पर गैस नहीं मिल पाने के कारण उत्पादन शेड्यूल भी गड़बड़ा रहा है। उद्योग जगत इसके विकल्प भी तलाश रहा है, लेकिन यह लंबी प्रक्रिया है।
बढ़ती लागत से उद्योगों को नुकसान
जी-13 बाइसाइकिल फोरम के अध्यक्ष राजिंदर जिंदल ने कहा कि युद्ध के बाद से कच्चे माल की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। बढ़ती लागत के कारण उद्योग को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सभी निर्माताओं ने मिलकर यह फैसला लिया है कि अब कीमतों में इजाफा करना जरूरी हो गया है। फोरम के महासचिव एवं नोवा साइकिल्स के एमडी रोहित पाहवा ने कहा कि स्टील निर्माता कंपनियां मनमाने तरीके से कीमतें बढ़ा रही हैं, जिससे उद्योग के लिए योजना बनाना मुश्किल हो गया है। उद्यमियों ने सरकार से मांग की है कि मौजूदा संकट को देखते हुए एमएसएमई सेक्टर को राहत दी जाए। खास तौर पर नियंत्रित कीमतों पर स्टील और अन्य कच्चा माल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही हालात नहीं सुधरे, तो इसका असर न केवल साइकिल उद्योग बल्कि अन्य छोटे और मध्यम उद्योगों पर भी पड़ेगा, जिससे राज्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
पुलिस हिरासत में मौत पर बड़ा फैसला, अदालत ने कहा- सबूत पर्याप्त
19 Mar, 2026 04:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बठिंडा (पंजाब)। करीब डेढ़ साल पहले सीआईए-1 में पुलिस हिरासत के दौरान हुई एक व्यक्ति की मौत के मामले में अहम मोड़ आ गया है। स्थानीय अदालत ने पंजाब पुलिस के पांच कर्मियों के खिलाफ हत्या समेत अन्य गंभीर धाराओं में ट्रायल चलाने का आदेश देते हुए केस को सेशन कोर्ट में भेज दिया है। मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास की अदालत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि आरोपितों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। आरोपितों में तत्कालीन सीआईए-1 इंचार्ज इंस्पेक्टर नवप्रीत सिंह, हेड कांस्टेबल राजविंदर सिंह और कांस्टेबल गगनप्रीत सिंह, हरजीत सिंह व जसविंदर सिंह शामिल हैं। सभी घटना के समय सीआईए-1 यूनिट में तैनात थे। मामला जिले के गांव लक्खी जंगल निवासी भिंदर सिंह की मौत से जुड़ा है। न्यायिक जांच में सामने आया कि भिंदर सिंह को कथित तौर पर गैरकानूनी हिरासत में रखकर यातनाएं दी गईं। रिपोर्ट के अनुसार उसे वॉटरबोर्डिंग तकनीक से प्रताड़ित किया गया, जिसमें व्यक्ति को डूबने जैसी स्थिति में लाया जाता है। जांच में यह भी पाया गया कि मौत के बाद इसे हादसा दर्शाने के लिए झील में डूबने की कहानी गढ़ी गई। न्यायिक जांच ने डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस के दावे को खारिज कर दिया। मृतक के भाई सतनाम सिंह ने 19 अक्तूबर 2024 को सेशन जज को पत्र लिखकर अवैध हिरासत और यातना के आरोप लगाए थे। मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड से भी संकेत मिला कि मृतक और इंस्पेक्टर एक ही समय में एक ही इलाके में मौजूद थे। पोस्टमार्टम में दो दिन की देरी को भी जांच में संदिग्ध माना गया। पुलिस का दावा था कि भिंदर सिंह ने थर्मल प्लांट के पास झील में छलांग लगाई थी, लेकिन अदालत ने इस थ्योरी को स्वीकार नहीं किया। परिवार पहले ही इसे हिरासत में मौत बताते हुए विरोध जता चुका है।
महिलाओं की घिसीं उंगलियों ने रोकी योजना की रफ्तार, वेरिफिकेशन में दिक्कत
19 Mar, 2026 04:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने पिछले दिनों महिलाओं को एक हजार रुपये प्रति माह रुपये देने के लिए मांवा-धीयां दा सत्कार योजना लागू की है। दावा है कि सूबे की 97 प्रतिशत महिलाएं इस योजना के दायरे में आएंगी। योजना की घोषणा के बाद से ही महिलाओं में खासा उत्साह बना हुआ है। चूंकि यह योजना डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर स्कीम है, इसलिए महिलाओं को मिलने वाला एक हजार रुपया सीधे उनके खाते में पहुंचेगा। पंजाब में काफी महिलाएं ऐसी हैं, जिन्होंने आज तक अपने बैंक खाते ही नहीं खुलवाए हैं। योजना का लाभ लेने के लिए ये महिलाएं अब बैंकों में अपने खाते खुलवाने उमड़ रही हैं मगर इस दौरान उनके समक्ष एक नई अड़चन सामने आ रही है। इन महिलाओं की अंगुलियों की लकीरें इस कदर घिस चुकी हैं कि उनकी बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन ही नहीं हो पा रही है। जिस वजह से उनके बैंक खातों में उनका आधार लिंक नहीं हो रहा है। बैंक उन्हें इसी समस्या के चलते लौटा रहे हैं। इस तरह की शिकायतें अब पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान तक पहुंचने लगी हैं।
ये है महिलाओं का दर्द
महिलाओं की घिसी अंगुलियां उनकी कड़ी मेहनत और कठोर कामकाज की स्थिति बयां करने के लिए काफी हैं। जानकारी के अनुसार जो महिलाएं बैंक में पहुंच रही हैं, उनमें से बहुत सी जरूरतमंद महिलाओं की अंगुलियों की लकीरें इसलिए मद्धम पड़ गई हैं, क्योंकि वे रोजाना या तो गोया (गोबर) थापती हैं, चारा काटती हैं या फिर घरों में बर्तन साफ करने का काम करती हैं। इस वजह से उनकी अंगुलियां घिसकर सांवलीं व हरी (रोजाना घास काटने की वजह से) हो चुकी हैं। नतीजतन बैंकों में आधार लिंक के लिए उनका बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन नहीं हो पा रहा है।
दुखड़ा सुनकर सीएम व्यथित
महिलाओं का यह दुखड़ा सूबे के सीएम भगवंत मान तक भी पहुंच चुका है, जिसे लेकर वे भावुक और व्यथित हैं। उन्होंने इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ के आला अफसरों से विभिन्न बैंकों के अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित करवाने के निर्देश दिए हैं। सीएम मान कहते हैं कि वे चाहते हैं कि हर जरूरतमंद महिला को इस योजना का लाभ मिले। अंगुलियों के निशान इस योजना में आड़े नहीं आ सकते, इसलिए बैंकों के अधिकारियों से बात करें और इसका हल निकलवाएंगे।
ये है योजना
सरकार की मावां-धीयां दा सत्कार योजना के तहत प्रदेश की सभी महिलाओं (सरकारी कर्मी या पेंशनर्स को छोड़कर) को प्रति माह 1000 रुपये दिए जाने हैं। यह रुपया सीधा खाते में आएगा। बैसाखी के दिन यानी 13 अप्रैल को इसके लिए पंजीकरण शुरू हो जाएगा। यह लाभ केवल उन महिलाओं को मिलेगा, जो पंजाब की वोटर हैं।
सरहाली रजबहा की हालत खराब, 22 किलोमीटर तक गाद से भरा मिला
19 Mar, 2026 08:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। इसे लापरवाही का बड़ा उदाहरण कहेंगे कि तरनतारन में 22 किलोमीटर लंबा सरहाली रहबहा (डिस्ट्रीब्यूटरी) कई वर्षों तक गाद के नीचे दबता चला गया और महकमे ने इस ओर कोई ध्यान ही नहीं दिया। इस रजबहा को तरनतारन के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में सिंचाई के लिए नहरी पानी पहुंचाने के मकसद से बनाया गया था। रजबहा पूरी तरह मिट्टी के नीचे दब गया और झाड़ियों में छिप गया। वर्षों तक लोग यहां नहरी पानी से सिंचाई सुविधा के लिए तरसते रहे। इलाके के लोग सरकार से मांग करने लगे कि जिस तरह अन्य जिलों के खेतों में सिंचाई के लिए नहरी पानी पहुंचाया जा रहा है। उसी तरह तरनतारन में भी एक रजबहा बनाकर विभिन्न माइनरों के जरिये उनके खेतों तक भी नहरी पानी पहुंचाया जाए। बीते नवंबर में तरनतारन उपचुनाव के दौरान भी यह मुद्दा उठा था। यह मांग जब मुख्यमंत्री भगवंत मान तक पहुंची तो उन्होंने जल स्रोत महकमे के प्रशासकीय सचिव कृष्ण कुमार को इसकी जिम्मेदारी सौंपी। इसके लिए सर्वे के बाद जब सरहाली इलाके में रजबहा बनाने का काम शुरू किया गया तो खोदाई के दौरान मिट्टी के नीचे एक निर्माण के रूप में ईंटें निकलने लगी। खुदाई जब जारी रखी गई तो 22 किलोमीटर तक ईंटों से बना एक तैयार रजबहा ढूंढ निकाला गया। यह देखकर महकमे के अफसर और सरकार भी हैरान हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान कहते हैं कि यह हैरान करने वाली बात है कि पिछली सरकारों में इस ओर कोई ध्यान ही नहीं दिया गया। 22 किलोमीटर लंबी डिस्ट्रीब्यूटरी मिट्टी के नीचे गुम हो जाती है और अफसरों व कर्मचारियों को भनक तक नहीं लगती। सीएम के अनुसार इसे ढूंढने वाले अफसर व कर्मचारी वाकई बधाई के पात्र हैं।
इन माइनरों से जोड़ा
जल स्रोत महकमे द्वारा ढूंढ निकाले गए इस रजबहा से कंग माइनर, जोरा डिस्टी, माछीके, खाबा, पट्टी डिस्टी, दुधेर माइनर, मनो चहल माइनर, चक मेहर माइनर, माल मोहरी व माल मोहरी माइनर को लिंक कर दिया गया है। इन माइनरों के माध्यम से अब विभिन्न गांवों तक पानी पहुंचना शुरू हो गया है।
4737 एकड़ खेतों तक पहुंचा पानी
गुम हो चुके रजबाहे को ढूंढने के बाद अभी तक 4737 एकड़ कृषि योग्य भूमि को सिंचाई के लिए नहरी पानी पहुंचने लगा है। रजबाहे से लिंक के बाद विभिन्न माइनरों के जरिये कंग, नौरंगाबाद, कैरों, बहनिवाल, जमालपुर समेत मियांवाल, असल उत्तर, भुरकोना, सरहाली, नौशहरा पन्नुआ, नंदपुर, खब्बे राजपूतान, कीरतोवाल, तुंग, प्रिंगरी, सभरांव, दुधेर, धत्तल, रानियां, मैनी, सहबजापुर, दिलावलपुर, मालमोहरी, लोहार, गज्जल, संगतपुरा, जोहल ढायेवाला, डुमनीवाला, वान, जामराई, ठठियां महंता गांवों के किसान को भी सिंचाई के लिए नहरी पानी मिल रहा है।
2000 से अधिक कंपनियों ने तैयार की भर्ती सूची
18 Mar, 2026 10:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। आज के डिजिटल और मुकाबले वाले दौर में जहां युवा वर्क फोर्स हाई सैलरी और तेज ट्रैक करिअर की मांग करती है, वहीं कॉरपोरेट जगत ने अपनी परफेक्ट वर्क फोर्स तलाशनी शुरू कर दी है। कंपनियां अब अनुशासित, जिम्मेदार और अत्यधिक दबाव झेलने में सक्षम पूर्व सैनिकों को प्राथमिकता दे रही हैं। पिछले पांच वर्षों में कॉरपोरेट सेक्टर का रुझान तेजी से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए जवानों की ओर बढ़ा है। यही कारण है कि देश की दो हजार से अधिक कंपनियां अब सीधे रक्षा मंत्रालय के पुनर्वास महानिदेशालय (डीजीआर) के संपर्क में हैं। इनमें विनिर्माण इकाइयों के साथ-साथ आईटी, एआई और डाटा साइंस जैसे हाई-टेक उद्योग भी शामिल हैं। कॉरपोरेट जहां युवाओं में चपलता देखता है, वहीं पूर्व सैनिकों में वह परिपक्वता, धैर्य और संकट प्रबंधन (क्राइसिस मैनेजमेंट) की क्षमता देखता है, जो किसी भी संगठन को मजबूती दे सकती है। कंपनियों का मानना है कि सेना में मिला अनुशासन और तनावपूर्ण परिस्थितियों में बेहतर निर्णय लेने की कला उन्हें दूसरी पारी के लिए सबसे उपयुक्त बनाती है। चंडीगढ़ में आयोजित एक जॉब फेयर के दौरान पुनर्वास महानिदेशक मेजर जनरल एसबीके सिंह ने अमर उजाला को बताया कि कॉरपोरेट सेक्टर को अब एहसास हुआ है कि पूर्व सैनिक केवल सुरक्षा गार्ड नहीं हैं, वे मैनेजर, टीम लीडर और टेक्निकल हेड की भूमिका में भी बखूबी फिट बैठते हैं। डीजीआर इसी कड़ी को मजबूत कर रहा है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा में अब पूर्व सैनिकों की भूमिका और बढ़ गई है। रिफाइनरियों, न्यूक्लियर प्लांट और हवाई अड्डों पर सीआईएसएफ के साथ पूर्व सैनिकों को भी सुरक्षा एजेंट के रूप में तैनात किया जा रहा है। डीजीआर के माध्यम से हर साल इन संस्थानों में लगभग 50 से 60 हजार पूर्व सैनिकों को नियोजित किया जा रहा है। हाल ही में चंडीगढ़ में आयोजित रोजगार मेले में विभिन्न कॉरपोरेट कंपनियां 1800 से 2000 रिक्तियां लेकर पहुंचीं, जहां पूर्व सैनिकों को हाथोंहाथ नौकरियां मिलीं।
स्वरोजगार पर जोर, हर साल 20 हजार सैनिक होंगे ट्रेंड
महानिदेशालय केवल नौकरी ही नहीं, बल्कि पूर्व सैनिकों को आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर दे रहा है। हर साल 20 हजार पूर्व सैनिकों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। डेयरी सेक्टर में पूर्व सैनिकों को जोड़ने के लिए पंजाब में वेरका, हरियाणा में वीटा, बिहार में सुधा और एमपी में सांची जैसे ब्रांड्स से हाथ मिलाया जा रहा है। साथ ही, आधुनिक कृषि के क्षेत्र में पूर्व सैनिक एग्रो ड्रोन तकनीक में भी करियर बना सकें, इसके लिए दक्षिण भारत की एक कंपनी के सहयोग से विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है।
पूर्व कांग्रेस पार्षद के भतीजे को बदमाशों ने मारी गोली
18 Mar, 2026 08:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमृतसर। के छेहरटा इलाके में मंगलवार देर रात अज्ञात एक्टिवा सवार ने पूर्व कांग्रेस पार्षद लखनपाल के भतीजे सागर को गोली मार दी। आसपास एकत्रित हुए लोगों ने तुरंत सागर को हॉस्पिटल पहुंचाया। जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। घटना रात करीब साढ़े 11 बजे की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार सागर अपनी बहन के साथ घर के बाहर कुत्तों को खाना खिलाने के लिए निकला था। इसी दौरान एक्टिवा पर सवार एक युवक वहां पहुंचा और उस पर गोली चला दी। गोली सागर के पेट में लगी। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया।घायल को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। एसीपी शिव दर्शन सिंह ने बताया कि आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और हमलावर की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस मामले के सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। इस वारदात के बाद पूर्व मंत्री राजकुमार वेरका ने सरकार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि राज्य की कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। पुलिसिया सरकार का अपराधियों पर कोई भी कंट्रोल नहीं रहा।
3500 करोड़ रुपये के निवेश से शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा बूस्ट
18 Mar, 2026 07:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने पंजाब शिक्षा क्रांति-2.0 की शुरुआत कर दी है, जिसके तहत अगले छह वर्षों में 3500 करोड़ रुपये के निवेश से स्कूली शिक्षा में व्यापक सुधार किए जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी पहल का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे को उन्नत करना और पंजाब की शिक्षा प्रणाली को विश्व स्तरीय मानकों के अनुरूप बनाना है। इस मिशन के क्रियान्वयन के लिए पंजाब सरकार ने विश्व बैंक के साथ करार किया है। कुल 3500 करोड़ रुपये में से 2500 करोड़ रुपये विश्व बैंक ऋण सहायता के रूप में प्रदान करेगा, जबकि 1000 करोड़ रुपये पंजाब सरकार वहन करेगी। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि शिक्षा क्रांति मिशन के पहले चरण की उल्लेखनीय उपलब्धियों को देखते हुए सरकार ने इसे आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। पहले चरण के तहत राज्य भर के सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल दी गई और पंजाब को राष्ट्रीय शिक्षा रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर पहुंचाया गया। भारत सरकार द्वारा आयोजित परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण-2024 में पंजाब ने केरल को पीछे छोड़ते हुए कक्षा शिक्षण परिणामों में प्रथम स्थान हासिल किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि शिक्षा क्रांति के तहत किए गए बुनियादी सुधारों को दर्शाती है, जिनमें कक्षा शिक्षण को सुदृढ़ करना, बुनियादी ढांचे का उन्नयन और लगभग 20 हजार सरकारी स्कूलों में प्रशासनिक सुधार शामिल हैं। इसके अलावा स्कूलों में कॅरिअर मार्गदर्शन प्रणाली और शिक्षक प्रशिक्षण तंत्र को भी मजबूत किया गया। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि पंजाब शिक्षा क्रांति-2.0 के तहत अब तक हासिल किए गए लक्ष्यों और उपलब्धियों को संस्थागत रूप दिया जाएगा। अब शिक्षा प्रणालियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पंजाब का हर बच्चा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अवसरों का हकदार है और यह मिशन उस लक्ष्य को प्राप्त करने में मददगार होगा।
विज्ञान, वाणिज्य संकाय तक पहुंच बढ़ेगी
शिक्षा मंत्री ने बताया कि 3500 करोड़ रुपये की लागत वाला यह मिशन परिणाम-आधारित हस्तक्षेपों के माध्यम से शिक्षा सुधारों को और गहरा तथा स्थायी बनाएगा। इसके तहत बुनियादी शिक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रत्येक बच्चा आवश्यक कौशल हासिल कर सके। इस पहल के तहत विज्ञान और वाणिज्य संकाय तक पहुंच बढ़ाई जाएगी, व्यावसायिक शिक्षा को उन्नत किया जाएगा और विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा एवं बेहतर रोजगार के लिए मार्गदर्शन देने के लिए संरचित कॅरिअर काउंसलिंग प्रणाली शुरू की जाएगी।
लॉन्च होगा डिजिटल कॅरिअर गाइडेंस पोर्टल
पंजाब शिक्षा विभाग इसी कड़ी में एक व्यापक डिजिटल कॅरिअर गाइडेंस पोर्टल भी लॉन्च करेगा, जिससे छात्रों को परामर्श, योग्यता मूल्यांकन और बेहतर करियर विकल्प चुनने में सहायता मिलेगी। साथ ही, डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली और स्कूल प्रबंधन समितियों को सशक्त बनाकर पारदर्शी एवं जवाबदेह स्कूल प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे सामुदायिक भागीदारी भी बढ़ेगी। यह मिशन भविष्य के लिए तैयार शिक्षा संबंधी बुनियादी ढांचा और प्रणालियां विकसित करेगा। इसके तहत व्यापक सुधार किए जाएंगे, ताकि दीर्घकालिक रूप से सुरक्षित, टिकाऊ और डिजिटल रूप से सक्षम शिक्षण वातावरण सुनिश्चित किया जा सके। पंजाब शिक्षा क्रांति द्वारा रखी गई मजबूत नींव को आगे बढ़ाते हुए पंजाब शिक्षा क्रांति 2.0 अब इस परिवर्तन को और विस्तार देगा।
पगड़ी और जूतों के साथ दिखाया गया कंकाल, मचा विवाद
17 Mar, 2026 06:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमृतसर (पंजाब)। एआई के जरिए एक वीडियो बनाकर कुछ लोगों की ओर से श्री हरमंदिर साहब की बेअदबी करने का मामला सामने आया है। वीडियो में एक कंकाल को पगड़ी पहनकर श्री हरमंदिर साहिब परिसर और लंगर हाल में जूते पहनकर घूमते हुए दिखाया गया है। इससे सिख समुदाय में रोष फैल गया है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने मामले में जांच शुरू कर दी है। कमेटी की ओर से संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई करने की पैरवी शुरू कर दी है। करीब डेढ़ मिनट का यह वीडियो सात दिन अमृतसर में थीम पर तैयार किया गया है। इसमें पहले दिन श्री हरमंदिर साहिब की परिक्रमा, दूसरे दिन लंगर हॉल के दृश्य, तीसरे दिन जलियांवाला बाग, चौथे दिन अमृतसरी कुलचे खाते और लस्सी पीते हुए, पांचवें दिन अटारी-वाघा बॉर्डर पर सेरेमनी देखते हुए, छठे दिन शहर की गलियों में घूमते और दुर्गियाना मंदिर में दर्शन करते हुए दृश्य शामिल किए गए हैं। सातवें दिन के हिस्से में सूर्योदय के समय फिर से श्री हरमंदिर साहिब की परिक्रमा के दौरान जूते पहने हुए बैठे होने का दृश्य दिखाया गया है, जिस पर सबसे अधिक आपत्ति जताई जा रही है। एसजीपीसी के अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और जिस किसी की ओर से भी ऐसी शरारत की गई है उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करवाई जाएगी। फिलहाल, संबंधित एजेंसियां वीडियो की सत्यता और इसके प्रसार से जुड़े सभी पहलुओं की जांच में जुटी हैं।
सिटी के कचरा प्रबंधन में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का खुलासा
17 Mar, 2026 04:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जालंधर। में नगर निगम के कूड़ा प्रबंधन में बड़ी धांधली का खुलासा हुआ है। मेयर विनीत धीर ने खुद मंगलवार सुबह डंपिंग साइट पर पहुंचकर जांच की और मौके पर ही गड़बड़ी पकड़ ली। यह छापामारी सुबह साढ़े सात बजे की गई। मेयर के साथ आप नेता सौरभ सेठ भी थे। जानकारी के मुताबिक, मेयर डंपिंग ग्राउंड पर खड़े होकर कूड़ा ढोने वाली गाड़ियों की निगरानी कर रहे थे। इसी दौरान एक टिप्पर जब कूड़ा डालने पहुंचा तो शक होने पर उसे खाली करवाया गया। जांच में सामने आया कि कूड़े की जगह उसमें मकान का मलबा भरा हुआ था। मौके पर ही मेयर ने टिप्पर मालिक को कड़ी फटकार लगाई और नगर निगम कमिश्नर को संबंधित ठेकेदार सतपाल के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि कूड़े की गाड़ियों को वजन के आधार पर भुगतान किया जाता था, जिसका फायदा उठाते हुए ठेकेदार कूड़े में ईंट-पत्थर मिलाकर वजन बढ़ा रहा था और निगम से अधिक पैसे वसूल रहा था। यह धंधा लंबे समय से चल रहा था। सूत्रों के अनुसार, उक्त ठेकेदार पर पहले भी दो बार 2-2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। बावजूद इसके, नियमों की अनदेखी जारी रही। अब नगर निगम इस ठेके को रद्द करने और आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी में है।
डीलर्स का दावा: 27 लाख के बजाय केवल 21 लाख सिलिंडर सप्लाई
17 Mar, 2026 03:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। पंजाब में एलपीजी आपूर्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। फेडरेशन ऑफ एलपीजी डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ पंजाब के प्रधान गुरपाल सिंह मान ने आरोप लगाया है कि सरकार ने राज्य में एलपीजी आपूर्ति में करीब 20 प्रतिशत की कटौती कर दी है, जिससे आम लोगों से लेकर कारोबारी वर्ग तक परेशान है। प्रेसवार्ता में मान ने बताया कि पहले जहां हर महीने करीब 27 लाख घरेलू गैस सिलिंडर भेजे जाते थे, अब यह संख्या घटकर लगभग 21 लाख रह गई है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि डीलरों को लोगों के गुस्से का सामना न करना पड़े। मान ने दावा किया कि व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लुधियाना में करीब 6 हजार मीट्रिक टन की कमर्शियल गैस मार्केट होने के बावजूद सप्लाई बाधित है।
उन्होंने कहा कि राज्य में करीब 980 गैस एजेंसियां 96 लाख उपभोक्ताओं की मांग पूरी करती हैं और हर महीने लगभग 27 लाख सिलिंडर वितरित किए जाते हैं। हालांकि, मौजूदा हालात में रोजाना 2 से 5 हजार बुकिंग लंबित हो रही हैं और बैकलॉग बढ़ता जा रहा है। फेडरेशन के अनुसार, लगभग 50 हजार कर्मचारी ग्राउंड पर काम कर रहे हैं। कोविड-19 के दौरान भी एलपीजी आपूर्ति बाधित नहीं हुई थी और डीलरों ने घर-घर सिलिंडर पहुंचाया था, लेकिन अब हालात विपरीत हो गए हैं। मान ने यह भी सवाल उठाया कि जब सरकार 71 दिनों का स्टॉक होने का दावा कर रही है, तो फिर कुछ ही घंटों में संकट क्यों गहरा गया। उन्होंने कहा कि प्लांट अपनी क्षमता से कम चल रहे हैं और कई जगह बंद भी किए जा रहे हैं, जिससे सप्लाई पर असर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि ओटीपी सिस्टम के जरिए सिलिंडर वितरण किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद ब्लैक मार्केटिंग की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। फेडरेशन ने सरकार से मांग की है कि एलपीजी संकट को स्वीकार करते हुए जल्द समाधान निकाला जाए, ताकि आम लोगों और व्यापारियों को राहत मिल सके।
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