धर्म एवं ज्योतिष
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
13 Apr, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- विरोधियों से तनाव, क्लेश, कष्ट, धन का व्यय तथा समय की हानि होगी।
वृष राशि :- आर्थिक योजना फलीभूत हो, स्त्री वर्ग से सुख, कार्य में सुधार होगा।
मिथुन राशि :- क्रोध व अशांति से विवाद ग्रस्त हों, व्यावसायिक क्षमता बढ़ेगी, ध्यान दें।
कर्क राशि :- बिगड़े हुये कार्य बनें, कार्य योजना फलीभूत होगी, मनोवृत्ति संवेदनशील बनी रहेगी।
सिंह राशि :- इष्ट-मित्र सुखवर्धक हों, तनाव व आरोप से बचिये, अशांति बनेगी।
कन्या राशि :- कुछ बाधायें व विलम्ब संभव, मानसिक तनाव तथा मन उद्विघ्न बना रहेगा।
तुला राशि :- धन हानि, शरीर कष्ट, मानसिक बेचैनी बढ़ेगी, व्यर्थ भ्रमण तथा धन का व्यय होगा।
वृश्चिक राशि :- आर्थिक योजना पूर्ण हो, सफलता के साधन बनें तथा कार्य कुशलता से संतोष होगा।
धनु राशि :- दैनिक समृद्धि के साधन बनें, अचानक कोई शुभ समाचार में अवश्य जाना होगा।
मकर राशि :- व्यावसायिक समृद्धि के साधन जुटायें, स्त्री-वर्ग से सुख, रुके कार्य बनेंगे।
कुंभ राशि :- भाग्य का सितारा साथ देगा, बिगड़े कार्य बनेंगे, कार्य में विशेष सफलता मिलेगी।
मीन राशि :- कार्य विफल हों, प्रयत्नशील बने रहने पर ही सफलता मिलेगी, ध्यान रखें।
महर्षि बाल्मीकि से पहले हनुमान जी ने लिखी थी रामायण, फिर अचानक गायब कैसे हो गई! पढ़ें हनुमत गाथा
12 Apr, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रामायण को महर्षि बाल्मीकि द्वारा लिखा गया. इसे लिखने में उनको बहुत परिश्रम और समय देना पड़ा. लेकिन एक रामायण ऐसी भी है जिसे बाल्मीकि जी से पहले हनुमान जी ने लिख डाला था.हनुमान जी ने इस रामायण को कब और कैसे लिखा एवं इस रामायण का क्या हुआ? आइये विस्तार से जानते हैं इस कथा के बारे में.
हनुमद रामायण: ऐसा माना जाता है कि प्रभु श्रीराम की रावण के ऊपर विजय प्राप्त करने के पश्चात ईश्वर की आराधना के लिये हनुमान हिमालय पर चले गये थे. वहां जाकर उन्होंने पर्वत शिलाओं पर अपने नाखून से रामायण की रचना की जिसमे उन्होनें प्रभु श्रीराम गाथा का उल्लेख किया था. कुछ समयोपरांत जब महर्षि वाल्मिकी हनुमानजी को अपने द्वारा रची गई रामायण दिखाने पहुंचे तो उन्होंने हनुमानजी द्वारा रचित रामायण भी देखी. उसे देखकर वाल्मिकी थोड़े निराश हो गये तो हनुमान ने उनसे उनकी निराशा का कारण पूछा तो महर्षि बोले कि उन्होने कठोर परिश्रम के पश्चात जो रामायण रची है वो हनुमान की रचना के समक्ष कुछ भी नहीं है अतः आने वाले समय में उनकी रचना उपेक्षित रह जायेगी. ये सुनकर हनुमान ने रामायण रचित पर्वत शिला को एक कन्धे पर उठाया और दूसरे कन्धे पर महर्षि वाल्मिकी को बिठा कर समुद्र के पास गये और स्वयं द्वारा की गई रचना को राम को समर्पित करते हुए समुद्र में समा दिया. तभी से हनुमान द्वारा रची गई हनुमद रामायण उपलब्ध नहीं है. तदुपरांत महर्षि वाल्मिकी ने कहा कि तुम धन्य हो हनुमान, तुम्हारे जैसा कोइ दूसरा नहीं है और साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि वो हनुमान की महिमा का गुणगान करने के लिये एक जन्म और लेंगे. इस बात को उन्होने अपनी रचना के अंत मे कहा भी है.
महाकवि तुलसीदास जी ही थे महर्षि बाल्मीकि का का अवतार : माना जाता है कि रामचरितमानस के रचयिता कवि तुलसी दास कोई और नहीं बल्कि महर्षि वाल्मिकी का ही दूसरा अवतार थे.
तुलसीदास को मिली हनुमद रामायण की एक शिला : महाकवि तुलसीदास के समय में ही एक पटलिका को समुद्र के किनारे पाया गया जिसे कि एक सार्वजनिक स्थल पर टांग दिया गया था. ताकी विद्यार्थी उस गूढ़लिपि को पढ़कर उसका अर्थ निकाल सकें. माना जाता है कि कालीदास ने उसका अर्थ निकाल लिया था और वो ये भी जान गये थे कि ये पटलिका कोई और नहिं बल्कि हनुमान द्वारा उनके पूर्व जन्म में रची गई हनुमद् रामायण का ही एक अंश है. जो कि पर्वत शिला से निकल कर ज़ल के साथ प्रवाहित होके यहां तक आ गई है. उस पटलिका को पाकर तुलसीदास ने अपने आपको बहुत भग्यशाली माना कि उन्हें हनुमद रामायण के श्लोक का एक पद्य प्राप्त हुआ.
गाय को रोटी खिलाने से चमक जाएगा भाग्य! जानिए इसके अनेक फायदों के बारे में
12 Apr, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में गाय को पवित्र और मां के समान माना गया है. गौ माता के अंदर सभी देवी-देवताओं का वास होता है. यह परंपरा कि हर दिन की पहली रोटी गाय के लिए बनाई जाती है, ये भारतीय घरों में बहुत आम है. यह केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली ज्योतिषीय और आध्यात्मिक उपाय है. जिस घर में गौ माता की सेवा होती है, उस घर में सुख, शांति और लक्ष्मी का वास होता है.
धन और समृद्धि बढ़ती है
ज्योतिष में गाय को गुरु ग्रह (बृहस्पति) से जोड़ा जाता है, जो ज्ञान, धन और खुशहाली का प्रतीक है. गाय को रोटी खिलाने से घर में लक्ष्मी का वास होता है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है. यह उपाय गुरु ग्रह को मज़बूत करने में मदद करता है.
सेहत में सुधार होता है
गाय को पोषण और स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है. खासकर शुभ दिनों पर गाय को रोटी या हरा चारा खिलाने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं कम होती हैं और व्यक्ति की शारीरिक व मानसिक ताकत बढ़ती है.
पाप और बुरा कर्म कम होता है
गाय को रोटी खिलाना एक पुण्य का काम माना जाता है. यह नकारात्मक कर्मों को कम करने और पिछले जन्म या इस जन्म के दोषों को हल्का करने में सहायक होता है. इससे जीवन में पॉजिटिव बदलाव आते हैं.
पारिवारिक संबंध मजबूत होते हैं
गाय को भोजन देने से घर-परिवार में प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है. यह उपाय घरेलू कलह को दूर करने और आपसी रिश्तों को बेहतर बनाने में मदद करता है.
ग्रहों के दोषों का समाधान
अगर किसी की कुंडली में गुरु ग्रह कमज़ोर हो या कोई ग्रह दोष हो, तो ज्योतिष में गाय को रोटी, गुड़, हरा चारा या चने खिलाने की सलाह दी जाती है. यह उपाय ग्रहों के बुरे प्रभाव को कम करता है.
काली गाय को रोटी खिलाने से लाभ?
सफेद गाय को रोटी खिलाने से माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है. यह सौभाग्य, धन और सुख-शांति प्रदान करने वाला उपाय माना गया है. वहीं काली गाय को रोटी खिलाने से शनि दोषों से मुक्ति मिलती है.
कुछ खाते-खाते कट गई है अचानक जीभ? ये घटना देती है जीवन से जुड़े बड़े संकेत
12 Apr, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बचपन में जब भी गलती से हमारी जीभ कट जाती थी, तो घर के बड़े अक्सर कहते थे कि “कोई तुम्हें बुरा भला कह रहा है.” हम भी उस बात को बिना सोचे समझे सच मान लेते थे. लेकिन जैसे जैसे उम्र बढ़ती है, इंसान सवाल करने लगता है और हर चीज को समझने की कोशिश करता है. अब सवाल यह है कि क्या वास्तव में जीभ कटने के पीछे कोई विशेष संकेत होता है? क्या ज्योतिष में इसका कोई मतलब बताया गया है? आइए जानते हैं. भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से.
जब कोई अचानक अपनी जीभ काट लेता है, तो यह सिर्फ एक शारीरिक घटना नहीं मानी जाती, बल्कि कुछ लोग इसे आध्यात्मिक संकेत मानते हैं. माना जाता है कि ऐसी घटनाएं हमें किसी गहरे भाव या चेतावनी की ओर इशारा करती हैं.
क्या कहता है ज्योतिष शास्त्र?
-ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जीभ कटने की घटना कई बातों का प्रतीक हो सकती है. सबसे पहली बात, यह एक चेतावनी हो सकती है कि आपको अपने बोलने के तरीके में सावधानी बरतनी चाहिए. हो सकता है आप किसी से कुछ ऐसा कह चुके हों, जो नहीं कहना चाहिए था या आगे कुछ बोलने वाले हों जो किसी को ठेस पहुंचा सकता है.
-दूसरी बात यह भी मानी जाती है कि यह घटना आपको खुद पर नियंत्रण रखने का संकेत देती है. अगर आप अपने जीवन में लापरवाह हो गए हैं या किसी गलत आदत में फंसे हैं, तो यह संकेत आपको रोकने के लिए आता है कि अब वक्त है संभलने का.
-कुछ ज्योतिषी मानते हैं कि यह आपके आस पास की नकारात्मक ऊर्जा का भी संकेत हो सकता है. ऐसे में कहा जाता है कि अपनी सोच और संगत पर ध्यान देना जरूरी है. कहीं ऐसा तो नहीं कि आप किसी गलत सोच या झूठे व्यक्ति के संपर्क में आ गए हैं?
छुपे हुए खतरे और आत्मनिरीक्षण
कभी कभी जीभ कटना यह भी बताता है कि आपके आसपास कोई खतरा है, जो आपको दिख नहीं रहा. यह खतरा मानसिक भी हो सकता है और किसी रिश्ते या हालात से जुड़ा हुआ भी. इसलिए जरूरी है कि आप अपने आसपास की चीजों को गहराई से देखें और सोचें कि क्या कुछ गलत हो रहा है.
-यह घटना आत्मनिरीक्षण का मौका भी होती है. यह हमें याद दिलाती है कि हमें ईमानदारी से अपनी गलतियों को स्वीकार करना चाहिए और उन्हें सुधारने की कोशिश करनी चाहिए.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
12 Apr, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- कुछ विरोधी तत्व परेशान करेंगे, कुटुम्ब में घोर अशांति अवश्य ही बनेगी।
वृष राशि :- मन उद्विघ्न रहे, स्वास्थ्य नरम रहे, विरोधियों की परेशानी से बचेंगे।
मिथुन राशि :- विरोधी परेशान करें, आकस्मिक दुर्घटना से बचें, मानसिक विभ्रम बना रहेगा।
कर्क राशि :- अधिकारियों के तनाव से बचिये, दैनिक व्यवसाय गति उत्तम अवश्य ही बनेगी।
सिंह राशि :- अग्नि-चोटादि का भय, सतर्कता से कार्य करें, लाभ अवश्य ही होगा।
कन्या राशि :- विभ्रम, आवेग, अशांति, हानि तथा असमय की स्थिति सदैव बनी रहेगी।
तुला राशि :- विरोधी तत्व परेशान करें, अनायास बाधा, शरीर कष्ट, चोटादि की संभावना।
वृश्चिक राशि :- परिश्रम करने पर भी सफलता दिखायी न पड़ेगी तथा क्लेश, अशांति अवश्य बनेगी।
धनु राशि :- अनायास विभ्रम अवश्य ही बनेगा, परिश्रम करने पर भी सफलता दिखाई न दे।
मकर राशि :- सतर्कता से कार्य करें, अधिकारियों का समर्थन मिले, कार्यगति विभ्रम होगा।
कुंभ राशि :- आर्थिक योजना पूर्ण हो, सफलता के साधन बनें तथा कार्य कुशल होवें।
मीन राशि :- धन हानि, शरीर कष्ट, मानसिक वेदना, व्यर्थ भ्रमण तथा धन हानि अवश्य होगी।
बहुत खास है इस बार हनुमान जयंती, खुद हनुमान जी करेंगे शनि की पीढ़ा से बेड़ा पार! करें यह उपाय
11 Apr, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है. इस साल हनुमान जयंती 12 अप्रैल को शनिवार के दिन मनाई जाएगी. मान्यता है कलयुग के सबसे सिद्ध देवता है हनुमान जी. जो आज भी जीवित है और अपने भक्तों पर समय-समय पर कृपा करके देश और दुनिया के सामने चमत्कार के अनूठे नजारे पेश करते हैं.
बहुत खास है इस बार हनुमान जयंती : वर्ष 2025 यानी इस वर्ष हनुमान जयंती इसलिए भी खास है कि इस दिन कई राजयोग का निर्माण हो रहा है. मीन राशि में बुध शुक्र शनि राहु और सूर्य जैसे बड़े ग्रह पंचग्रही योग बना रहे हैं. इसके अलावा बुधादित्य, शुक्रादित्य, लक्ष्मी नारायण और मालव्य राजयोग बनेंगे.
हनुमान जी को लगाएं भोग : हनुमान जी को भोग के रूप में बनारसी पान का भोग लगाएं. ध्यान रहे इस पान में चूना और तम्बाकू नहीं होना चाहिए.साथ ही गोला, गुलकंद, लोंग,सुगंधित किमाम आदि सभी चीज होनी चाहिए. इसके अलावा हनुमान जी को मीठी बूंदी या रोट अर्पित करना चाहिए. भोग लगाने के पश्चात वहां मौजूद लोगों में उसे वितरित करें और स्वयं भी प्रसाद ग्रहण करें.
शनि देव की मिलेगी कृपा : जिन जातकों की जन्म कुंडली में शनि की साडेसाती अथवा पनौती या दशा चल रही है उन लोगों के लिए यह हनुमान जयंती किसी वरदान से काम नहीं है. शनि की पीड़ा से मुक्ति के लिए हनुमान जी की भक्ति बहुत कारगर उपाय है और इस बार हनुमान जयंती शनिवार के दिन ही है. इसलिए सनी से प्रभावित जातक इस दिन भंडारे का आयोजन करें. यदि यह संभावना हो तो चने का भोग हनुमान जी को अर्पित करें और गरीबों में उसे वितरित करें.
साढ़े साती से बचाएंगे हनुमान जी : जिस चाहता हूं की जन्म कुंडली में साडेसाती चल रही है उन जातकों को दक्षिण मुखी हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए. दक्षिण मुखी हनुमान जी को चोला चढ़ाएं एवं उनके समक्ष स्वच्छ आसन पर बैठकर राम रक्षा स्त्रोत और बजरंग बाण का पाठ करें. साथ ही शनिदेव की पीड़ा से मुक्ति पाने की प्रार्थना करें.
भक्त के सम्मान के लिए भगवान ने उगा ली मूंछ! तब से पड़ गया ये नाम, चमत्कार से कम नहीं इस महावीर मंदिर की कहानी
11 Apr, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत में ऐसे कई मंदिर हैं, जो अपने चमत्कार और अलग-अलग मान्यताओं के लिए अपनी पहचान रखते हैं. ऐसे में हम आपको भारत के ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे, जहां भगवान महावीर की प्रतिमा पर आपको मूंछ नजर आएगी और भारत का एक मात्र ऐसा मंदिर है, जो पाली जिले के घाणेराव में स्थित है. इस मंदिर का नाम मुछाला महावीर तीर्थ है, जो अपने आप में काफी खास है.
खास इसलिए है, क्योंकि यहां भगवान महावीर की प्रतिमा पर मूंछ नजर आती है. भारत में इसके अलावा कहीं भी भगवान महावीर की प्रतिमा में मूंछ नहीं मिलती. पाली शहर से करीब 73 किलोमीटर दूर है सादड़ी शहर. इस क्षेत्र के अरावली की पहाड़ियों और जंगल से घिरे गांव घाणेराव से 6 किलोमीटर दूर पूर्व दिशा में सूकी नदी के किनारे यह पुराना चमत्कारी मंदिर बना हुआ है, जिसको सभी मुछाला महावीर तीर्थ के नाम से जानते हैं.
मंदिर में नृत्य करती देवी-देवताओं की प्रतिमाएं
मंदिर का मुख्य द्वार उत्तर दिशा में है. दोनों ओर पत्थर के हाथी बने हुए हैं. मंदिर में प्रवेश करने पर खंभों पर टिका विशाल खुला मंडप मिलता है. मंदिर का गगनचुंबी शिखर और बड़ा रंगमंडप, फेरी के झरोखों की बारीक नक्काशी दार जालियां बेहतरीन स्थापत्य कला का नमूना पेश करती हैं. मंदिर में नृत्य करती देवी देवताओं की प्रतिमाएं मन-मोहक हैं. मंदिर में चारों ओर कतारबद्ध देहरियां हैं. मंदिर के गर्भगृह में भगवान विराजमान हैं और चारों तरफ परिक्रमा मार्ग है.
मंदिर के निर्माण की यह कहानी
ईश्वर के भव्य विमान के जैसे इस चौबीस जिनालय वाले भव्य मंदिर का निर्माण कब और किसने कराया, इसके पुख्ता सबूत नहीं मिलते. फिर भी पुरावेत्ताओं और स्थापत्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह मंदिर 10वीं-11वीं सदी में निर्मित हो सकता है. ऐसा भी कहा जाता है कि मंदिर का निर्माण भगवान महावीर के बड़े भाई नंदीवर्द्धन के परिवार से संबधित सोहन सिंह ने करवाया था. यह उल्लेख यहां प्राचीन लिपि में एक शिलालेख पर भी मिलता है.
मंदिर से जुड़ी अनोखी दंतकथा
पाषाण की प्रतिमा के मुख पर मूंछें निकल आने को लेकर इस मंदिर से जुड़ी एक दंतकथा प्रचलित है. कहते हैं कि एक बार मेवाड़ के महाराणा कुंभा अपने सामन्तों के साथ यहां दर्शन करने आए. मंदिर के पुजारी अक्षयचक्र ने भगवान की प्रतिमा को नहलाया जल अर्पित कर आदर किया, तो जल में एक बाल नजर आया. एक सामंत ने इस पर कटाक्ष किया, तो पुजारी अक्षयचक्र ने जवाब में कहा कि भगवान समय-समय पर अपनी इच्छा के अनुसार अनेक रूप धारण करते रहते हैं.
पुजारी को मिला 3 दिन का समय
इस पर हठीले महाराणा कुंभा ने इस बात को साबित करने का आदेश दे दिया. पुजारी को 3 दिन का समय दिया गया. कहते हैं कि पुजारी अक्षयचक्र ने तीन दिन तक अखंड व्रत किया. जब उन्होंने मंदिर के गेट खोले, तो सच में महावीर स्वामी की प्रतिमा के मुख पर मूंछें निकल आई थी. इस पर महाराणा कुंभा को यकीन नहीं हुआ. वे प्रतिमा के नजदीक गए और मूंछ का एक बाल खींचा.
मालामाल बना देते हैं हरी इलायची के 4 सरल उपाय, इस खास मंत्र का करें जाप, कभी खाली नहीं होगी आपकी तिजोरी!
11 Apr, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर किसी की ख्वाहिश होती है कि उसकी जिंदगी में पैसा और सुख शांति बनी रहे, लेकिन कई बार मेहनत करने के बावजूद भी आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं हो पाता. अगर आप भी ऐसे हालात का सामना कर रहे हैं, तो आपके लिए एक बेहद आसान और असरदार उपाय है-हरी इलायची. यह छोटी सी चीज सिर्फ खाने या मसाले में ही नहीं, बल्कि ज्योतिष के नजरिए से भी काफी खास मानी जाती है.
दरअसल, हरी इलायची को घर की सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने और धन की राह में आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए बहुत उपयोगी माना गया है. ऐसा माना जाता है कि इसमें कुछ खास तरह की ऊर्जा होती है, जो नकारात्मक असर को खत्म करती है और खुशहाली को बुलावा देती है. कौनसे हैं
1. घर से निकलते वक्त दो इलायची मुंह में रखें
अगर आप किसी काम के लिए बाहर जा रहे हैं, खासकर अगर वो काम पैसे से जुड़ा है जैसे नौकरी का इंटरव्यू, बिज़नेस डील या कोई खास मीटिंग, तो घर से निकलते समय दो हरी इलायची अपने मुंह में रख लें. माना जाता है कि इससे आत्मविश्वास बढ़ता है, सोच में सकारात्मकता आती है और कामयाबी मिलने की संभावना बढ़ जाती है.
2. इलायची के साथ ‘श्रीं’ मंत्र का जाप करें
अगर आप आर्थिक तरक्की चाहते हैं, तो मुंह में इलायची रखकर तीन बार ‘श्रीं’ मंत्र का उच्चारण करें. यह मंत्र लक्ष्मी जी से जुड़ा हुआ है और इसे धन आकर्षित करने वाला माना जाता है. ऐसा करने से आपकी आर्थिक सोच मजबूत होती है और आपके आस पास की ऊर्जा भी आपसे सहयोग करने लगती है.
3. रात को तकिए के नीचे रखें दो इलायची
यह उपाय बहुत आसान है लेकिन असरदार. जब भी आप सोने जाएं, तो अपने तकिए के नीचे दो हरी इलायचियां रख लें. कहा जाता है कि इससे नींद बेहतर होती है, तनाव कम होता है और दिमाग में नए विचार आने लगते हैं जो भविष्य में आर्थिक सुधार का रास्ता दिखाते हैं.
4. घर की उत्तर पूर्व दिशा में रखें इलायची
अगर आप चाहते हैं कि आपके घर में हमेशा सुख शांति और पैसों की कमी न हो, तो एक कटोरे में इलायची भरकर उसे घर की उत्तर पूर्व दिशा में रख दें. हर 21 दिन बाद इलायची बदल दें और पुरानी इलायची को किसी पेड़ या पौधे की जड़ में दबा दें. इससे आपके घर में सकारात्मक माहौल बना रहेगा.
23 या 24 अप्रैल! इस दिन रखा जाएगा वरुथिनी एकादशी का व्रत
11 Apr, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चैत्र पूर्णिमा समाप्ति के बाद वैशाख का महीना शुरू हो जाएगा. हिंदू कैलेंडर के अनुसार वैशाख का महीना बेहद शुभ और पवित्र माना जाता है. वैशाख के महीने में भगवान श्री कृष्ण की पूजा का विधान है. इसलिए यह महीना भगवान श्री कृष्ण को समर्पित रहता है. वहीं वैशाख महीने की पहली एकादशी जल्द ही आने वाली है. माना जाता है कि जो भी जातक व्रत रखकर एकादशी के दिन भगवान श्री कृष्णा और माता लक्ष्मी की पूजा आराधना करते हैं, उनकी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती है. घर में सुख समृद्धि की वृद्धि होती है. वैशाख महीने की पहली एकादशी की तिथि को लेकर थोड़ी सी असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य?
देवघर के पागल बाबा आश्रम स्थित मुद्गल ज्योतिष केंद्र के प्रसिद्ध ज्योतिष आचार्य पंडित नंदिनी किशोर मुद्गल ने लोकल 18 के संवाददाता से बातचीत करते हुए कहा कि हिंदू धर्म में वरुथनी एकादशी का खास महत्व है. हर साल वरुथनी एकादशी का पर्व वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है. इस साल 23 अप्रैल को वरुथनी एकादशी का त्यौहार मनाया जाएगा. इस दिन लक्ष्मी नारायण की पूजा करने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
कब से हो रही है एकादशी तिथि की शुरुआत
ऋषिकेश पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि की शुरुआत 23 अप्रैल शाम 04 बजकर 43 मिनट से हो रही है और समापन अगले दिन यानी 24 अप्रैल शाम 04 बजकर 13 मिनट मे हो रहा है. उदया तिथि 24 अप्रैल होने की वजह से 24 अप्रैल को ही और उसने एकादशी का व्रत रखा जाएगा.
क्या महत्व है वरुथिनी एकादशी का
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि वरुथिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि विधान के साथ अगर पूजा आराधना करें हर मनोकामना पूर्ण होती है.खासकर जिनके विवाह में देरी हो रही है वैसे जातक वरुथिनी एकादशी के दिन पूरा दिन व्रत रख अपनी मनोकामना लिये भगवान विष्णु के सहस्त्र नाम का जाप करे और माता लक्ष्मी को हल्दी का गांठ अर्पण करे.जल्द ही मनोकामना पूर्ण होगीं.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
11 Apr, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- कुछ विद्युत कार्य करना परेशान करेगा, कुटुम्ब में घोर अशांति बनेगी, कार्य बना लें।
वृष राशि :- स्त्री वर्ग से चिन्ता, तनाव, क्लेश तथा मानसिक उद्विघ्नता अवश्य ही बनेगी, ध्यान दें।
मिथुन राशि :- तनाव, क्लेश व अशांति, मानसिक विभ्रम तथा अनावश्यक उद्विघ्नता बनेगी।
कर्क राशि :- भाग्य का सितारा साथ देगा, बिगड़े कार्य अवश्य ही बन जायेंगे, योजना बनेगी।
सिंह राशि :- आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा तथा कार्य में सुधार अवश्य ही होगा।
कन्या राशि :- क्लेश व अशांति, कार्य-व्यवसाय में बाधा अवश्य होगी, भ्रमण होगा।
तुला राशि :- मानसिक उद्विघ्नता, स्वास्थ्य नरम रहेगा, धन का व्यर्थ व्यय होगा।
वृश्चिक राशि :- तनाव, क्लेश व अशांति, मानसिक बेचैनी, धन का व्यर्थ व्यय होगा।
धनु राशि :- चिन्तायें कम हों, इष्ट मित्र सुख वर्धक होंगे, तनाव, क्लेश व अशांति अवश्य बनेगी।
मकर राशि :- धन कष्ट, व्यय, चोटादि की संभावना, सतर्कता बरतें, समय का ध्यान रखें।
कुंभ राशि :- कार्य-कुशलता से संतोष एवं समृद्धि के योग अवश्य ही बनेंगे, ध्यान दें।
मीन राशि :- भाग्य का सितारा मंद रहे, तनाव, क्लेश व अशांति होगी, ध्यान दें।
सनातन धर्म में तुलसी से जुड़ी है कई मान्यताएं
10 Apr, 2025 07:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में तुलसी के पौधे का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि तुलसी के पौधे में मां लक्ष्मी का वास होता है। इसके अलावा, तुलसी को लेकर तमाम मान्यताएं भी हैं। , तुलसी के पास छिपकली का दिखना शुभ संकेत है। माना जाता है कि, यदि तुलसी के पौधे के पास छिपकली दिखाई देती तो इसका मतलब है कि धन-लाभ और समृद्धि हो सकती है।
यह घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली लाने वाला माना जाता है। इसके अलावा तुलसी के पौधे के पास छिपकली का दिखना घर में सकारात्मक ऊर्जा के बढ़ने और अच्छे समय के आगमन का प्रतीक माना जाता है। अगर तुलसी पर छिपकली दिखाई दे और वह सुरक्षित रूप से चली जाए, तो इसे शुभ माना जाता है और यह संकेत करता है कि आपकी मनोकामनाएं पूरी होने वाली हैं। कुछ संस्कृतियों में, छिपकली को बुरी शक्तियों से सुरक्षा प्रदान करने वाला माना जाता है। इसलिए, तुलसी के पास छिपकली का दिखना घर और परिवार की सुरक्षा का प्रतीक भी माना जाता है। वहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, लेकिन यदि छिपकली बार-बार तुलसी के पौधे पर आती दिखे, तो यह घर में कलह या विवाद का संकेत हो सकता है। तुलसी में मंजरी आने का मतलब है कि जीवन में आने वाले संकटों से निजात मिलेगी। इसके लिए तुलसी की मंजरी को लाल कपड़े में बांधकर अपने घर के उस स्थान पर रख दें, जहां आप अपना धन रखते हैं। ऐसा करने से आपके घर में मां लक्ष्मी का वास होगा.
इस प्रकार मिलेगी प्रेम में सफलता
10 Apr, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जीवन में प्रेम का भी अहम स्थान होता है पर कई लोगों को यह नहीं मिलता। ऐसे लोगों के लिए यहां प्रस्तुत हैं कुछ उपाय। यह तो सभी जानते हैं कि शरद रितु प्रेम के लिए उत्तम मानी गई है, ऐसे में प्रेम के देवता भगवान श्रीकृष्ण ने भी इसी समय महारास रचाया था। इस रितु का चंद्रमा आपको मनचाहे प्रेम का वरदान देता प्रतीत होता है। इसलिए प्रेम चाहने वाले यदि यह उपाय करें तो वो सफल अवश्य ही होंगे।
शाम के समय राधा-कृष्ण की उपासना करें।
दोनों को संयुक्त रूप से एक गुलाब के फूलों की माला अर्पित करें।
मध्य रात्रि को सफेद वस्त्र धारण करके चन्द्रमा को अर्घ्य दें।
इसके बाद ॐ राधावल्लभाय नमः मंत्र का कम से कम 3 माला जाप करें।
या मधुराष्टक का कम से कम 3 बार पाठ करें।
फिर मनचाहे प्रेम को पाने की प्रार्थना करें।
भगवान को अर्पित की हुई गुलाब की माला को अपने पास सुरक्षित रख लें।
इन उपायों से निश्चित ही मनचाहे प्रेम की प्राप्ति होती है और सभी संबंधों में प्रेम और लगाव बढ़ने लगता है।
बालाजी मंदिर से जुड़ी ये मान्यताएं
10 Apr, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत के ऐतिहासिक और सबसे अमीर मंदिरों में से एक है तिरुपति बालाजी मंदिर है। तिरुपति महाराज जी के दरबार में देश-विदेश के भक्तों की भीड़ रहती है। यहां अमीर और गरीब दोनों जाते हैं। हर साल लाखों लोग तिरुमाला की पहाडिय़ों पर उनके दर्शन करने आते हैं। तिरुपति के इतने प्रचलित होने के पीछे कई कथाएं और मान्यताएं हैं। इस मंदिर से बहुत सारी मान्यताएं जुड़ी हैं।
माना जाता है कि तिरुपति बालाजी अपनी पत्नी पद्मावती के साथ तिरुमला में रहते हैं।
तिरुपति बालाजी मंदिर के मुख्य दरवाजे के दाईं ओर एक छड़ी है। कहा जाता है कि इसी छड़ी से बालाजी की बाल रूप में पिटाई हुई थी, जिसके चलते उनकी ठोड़ी पर चोट आई थी।
मान्यता है कि बालरूप में एक बार बालाजी को ठोड़ी से रक्त आया था। इसके बाद से ही बालाजी की प्रतिमा की ठोड़ी पर चंदन लगाने का चलन शुरू हुआ।
कहते हैं कि बालाजी के सिर रेशमी बाल हैं और उनके रेशमी बाल कभी उलझते नहीं।
कहते हैं कि तिरुपति बालाजी मंदिर से करीब करीब 23 किलोमीटर दूर एक से लाए गए फूल भगवान को चढ़ाए जाते हैं। इतना ही नहीं वहीं से भगवान को चढ़ाई जाने वाली दूसरी वस्तुएं भी आती हैं।
हैरानी की बात तो यह है कि वास्तव में बालाजी महाराज मंदिर में दाएं कोने में विराजमान हैं, लेकिन उन्हें देख कर ऐसा लगता है मानों वे गर्भगृह के मध्य भाग में हों।
तिरुपति बालाजी मंदिर में बालाजी महाराज को रोजाना धोती और साड़ी से सजाया जाता है।
कहते हैं कि बालाजी महाराज की मूर्ती की पीठ पर कान लगाकर सुनने से समुद्र घोष सुनाई देता है और उनकी पीठ को चाहे जितनी बार भी क्यों न साफ कर लिया जाए वहां बार बार गीलापन आ जाता है।
नंदी के बिना शिवलिंग को माना जाता है अधूरा
10 Apr, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवान शिव के किसी भी मंदिर में शिवलिंग के आसपास एक नंदी बैल जरूर होता है क्यों नंदी के बिना शिवलिंग को अधूरा माना जाता है। इस बारे में पुराणों की एक कथा में कहा गया है शिलाद नाम के ऋषि थे जिन्होंने लम्बे समय तक शिव की तपस्या की थी। जिसके बाद भगवान शिव ने उनकी तपस्या से खुश होकर शिलाद को नंदी के रूप में पुत्र दिया था।
शिलाद ऋषि एक आश्रम में रहते थे। उनका पुत्र भी उन्हीं के आश्रम में ज्ञान प्राप्त करता था। एक समय की बात है शिलाद ऋषि के आश्रम में मित्र और वरुण नामक दो संत आए थे। जिनकी सेवा का जिम्मा शिलाद ऋषि ने अपने पुत्र नंदी को सौंपा। नंदी ने पूरी श्रद्धा से दोनों संतों की सेवा की। संत जब आश्रम से जाने लगे तो उन्होंने शिलाद ऋषि को दीर्घायु होने का आर्शिवाद दिया पर नंदी को नहीं।
इस बात से शिलाद ऋषि परेशान हो गए। अपनी परेशानी को उन्होंने संतों के आगे रखने की सोची और संतों से बात का कारण पूछा। तब संत पहले तो सोच में पड़ गए। पर थोड़ी देर बाद उन्होंने कहा, नंदी अल्पायु है। यह सुनकर मानों शिलाद ऋषि के पैरों तले जमीन खिसक गई। शिलाद ऋषि काफी परेशान रहने लगे।
एक दिन पिता की चिंता को देखते हुए नंदी ने उनसे पूछा, ‘क्या बात है, आप इतना परेशान क्यों हैं पिताजी।’ शिलाद ऋषि ने कहा संतों ने कहा है कि तुम अल्पायु हो। इसीलिए मेरा मन बहुत चिंतित है। नंदी ने जब पिता की परेशानी का कारण सुना तो वह बहुत जोर से हंसने लगा और बोला, ‘भगवान शिव ने मुझे आपको दिया है। ऐसे में मेरी रक्षा करना भी उनकी ही जिम्मेदारी है, इसलिए आप परेशान न हों।’
नंदी पिता को शांत करके भगवान शिव की तपस्या करने लगे। दिनरात तप करने के बाद नंदी को भगवान शिव ने दर्शन दिए। शिवजी ने कहा, ‘क्या इच्छा है तुम्हारी वत्स’. नंदी ने कहा, मैं ताउम्र सिर्फ आपके सानिध्य में ही रहना चाहता हूं। नंदी से खुश होकर शिवजी ने नंदी को गले लगा लिया। शिवजी ने नंदी को बैल का चेहरा दिया और उन्हें अपने वाहन, अपना मित्र, अपने गणों में सबसे उत्तम रूप में स्वीकार कर लिया।इसके बाद ही शिवजी के मंदिर के बाद से नंदी के बैल रूप को स्थापित किया जाने लगा।
समस्याआं का समाधान बताते हैं यंत्र
10 Apr, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिन्दू धर्म के अनेक ग्रंथों में कई तरह के चक्रों और यंत्रों के बारे में विस्तार से उल्लेख किया गया है। जिनमें राम शलाका प्रश्नावली, हनुमान प्रश्नावली चक्र, नवदुर्गा प्रश्नावली चक्र, श्रीगणेश प्रश्नावली चक्र आदि प्रमुख हैं। कहते हैं इन चक्रों और यंत्रों की सहायता से लोग अपने मन में उठ रहे सवालों, जीवन में आने वाली कठिनाइयों आदि का समाधान पा सकते हैं। इन चक्रों और यंत्रों की सहायता लेकर केवल आम आदमी ही नहीं बल्कि ज्योतिष और पुरोहित लोग भी सटीक भविष्यवाणियां तक कर देते हैं।
श्री राम शलाका प्रश्नावली
श्री राम शलाका प्रश्नावली का उल्लेख गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस में प्राप्त होता है। यह राम भक्ति पर आधारित है। इस प्रश्नावली का प्रयोग से लोग जीवन के अनेक प्रश्नों का जवाब पाते हैं। इस प्रश्नावली का प्रयोग के बारे कहा जाता है कि सबसे पहले भगवान श्रीराम का स्मरण करते हुए किसी सवाल को मन में अच्छी तरह सोच लिया जाता है।फिर शलाका चार्ट पर दिए गए किसी भी अक्षर पर आंख बंद कर उंगली रख दी जाती है। जिस अक्षर पर उंगली रखी जाती है, उसके अक्षर से प्रत्येक 9वें नम्बर के अक्षर को जोड़ कर एक चौपाई बनती है, जो प्रश्नकर्ता के प्रश्न का उत्तर होती है।
हनुमान प्रश्नावली चक्र
यह बात बहुत कम लोगों को पता है कि हनुमानजी एक उच्च कोटि के ज्योतिषी भी थे। इसका कारण शायद यह हो सकता है कि वे शिव के ग्यारहवें अंशावतार थे, जिनसे ज्योतिष विद्या की उत्पत्ति हुई मानी जाती है। कहते हैं, हनुमानजी ने ज्योतिष प्रश्नावली के 40 चक्र बनाए हैं। यहां भी प्रश्नकर्ता आंख मूंद कर चक्र के नाम पर उंगली रखता है। अगर उंगली किसी लाइन पर रखी गई होती है, तो दोबारा उंगली रखी जाती है। फिर नाम के अनुसार शुभ-अशुभ फल का निराकरण किया जाता है। कहते हैं। रामायण काल के परम दुर्लभ यंत्रों में हनुमान चक्र श्रेष्ठ यंत्रों का सिरमौर है।
नवदुर्गा प्रश्नावली चक्र
अनेक लोग, विशेष देवी दुर्गा के परम भक्त, यह मानते हैं कि नवदुर्गा प्रश्नावली चक्र एक चमत्कारिक चक्र है, जिसे के माध्यम से कोई भी अपने जीवन की समस्त परेशानियों और मन के सवालों का संतोषजनक हल आसानी से पा सकते हैं। इस चक्र के उपयोग की विधि के लिए पहले पांच बार ऊँ ऐं ह्लीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे मंत्र का जप करना पड़ता फिर एक बार या देवी सर्वभूतेषु मातृरुपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: मंत्र का जप कर, आंखें बंद करके सवाल पूछा जाता है और देवी दुर्गा का स्मरण करते हुए प्रश्नावली चक्र पर उंगली घुमाते हुए रोक दिया जाता है, जिस कोष्ठक उंगली होती है। उस कोष्ठक में लिखे अंक के अनुसार फलादेश को जाना जाता है।
श्रीगणेश प्रश्नावली चक्र
हिंदू मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश प्रथमपूज्य हैं। वे सभी मांगलिक कार्यों में सबसे पहले पूजे जाते हैं। उनकी पूजा के बिना कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता। श्रीगणेश प्रश्नावली यंत्र के माध्यम से भी लोग अपने जीवन की सभी परेशानियों और सवालों के हल जानने की कोशिश करते हैं। जिसे भी अपने सवालों का जवाब या परेशानियों का हल जानना होता है, वे पहले पांच बार ऊँ नम: शिवाय: और फिर 11 बार ऊँ गं गणपतयै नम: मंत्र का जप करते हैं और फिर आंखें बंद करके अपना सवाल मन में रख भगवान गणेश का स्मरण करते हुए प्रश्नावली चक्र प्रश्नावली चक्र पर उंगली घुमाते हुए रोक देते हैं, जिस कोष्ठक उंगली होती है। उस कोष्ठक में लिखे अंक के अनुसार फलादेश को जाना जाता है।
शिव प्रश्नावली यंत्र
इस यंत्र में भगवान शिव के एक चित्र पर 1 से 7 तक अंक दिए गए होते हैं। श्रद्धालु अपनी आंख बंद करके पूरी आस्था और भक्ति के साथ शिवजी का ध्यान करते हैं और और मन ही मन ऊं नम: शिवाय: मंत्र का जाप कर उंगली को शिव यंत्र पर घुमाते हैं और फिर उंगली घुमाते हुए रोक देते हैं, जिस कोष्ठक उंगली होती है। उस कोष्ठक में लिखे अंक के अनुसार फलादेश को जाना जाता है। इन प्रश्नावलियों और यंत्रों के अलावा अनेक लोग साईं प्रश्नावली का उपयोग भी अपने मन में उठ रहे सवालों का जवाब पाने के लिए करते हैं।
घर बैठे लें स्ट्रीट फूड का मजा, बनाएं मसालेदार झालमुड़ी
भोपाल में 'नारी शक्ति' का आक्रोश: महिला आरक्षण पर भाजपा ने विपक्ष को घेरा
दिल्ली में द्विपक्षीय संबंधों की नई सुगबुगाहट; पीएम मोदी और ली जे म्योंग के बीच होगी अहम चर्चा
ऊर्जा के क्षेत्र में नई साझेदारी: त्रिकोमाली प्रोजेक्ट और गैस ग्रिड पर भारत-श्रीलंका में बनी सहमति
लू लगने पर तुरंत क्या करें? आसान भाषा में समझें पूरी जानकारी
जश्न बना अभिशाप: कपूरथला में PR की खुशी में चले पटाखे, 30 एकड़ गेहूं की फसल स्वाहा
तमिलनाडु का महासंग्राम: राहुल गांधी के तीखे तेवरों से सत्ता पक्ष में खलबली
