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यूनिवर्सल पेंशन स्कीम: सरकार का नया कदम, करोड़ों लोगों को मिलेगा लाभ
26 Feb, 2025 09:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने पिछले महीने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए यूनिफाइड पेंशन स्कीम का ऑधिकारिक ऐलान किया है, जो अगले फाइनेंशियल ईयर यानी 1 अप्रैल 2025 से लागू होने वाली है. इसी बीच, खबर सामने आ रही है कि सरकार आम नागरिकों के लिए यूनिवर्सल पेंशन स्कीम (Universal Pension Scheme) लाने की तैयारी कर रही है. इस पेंशन स्कीम को लाने के पीछे का मकसद निर्माण श्रमिक, घरेलू कर्मचारी और गिग वर्कर्स जैसे असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोग पेंशन का लाभ देना है. अगर यह स्कीम लागू होती है, देश के करोड़ों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी.
सरकार की ओर से नहीं मिलेगा कोई योगदान
एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस पेंशन योजना में स्वैछिक योगदान की सुविधा होगी और इसमें सरकार का कोई वित्तीय योगदान नहीं होगा. हालांकि, यह योजना मौजूदा पेंशन योजनाओं को समाहित कर सकती है, जो सरकार की ओर चलाए जा रहे बचत और पेंशन स्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है. इसके अलावा, यह यूनिवर्सल पेंशन स्कीम मौजूदा 'न्यू पेंशन स्कीम' (NPS) को भी शामिल कर सकती है, ताकि पेंशन सिस्टम को और बेहतर तरीके से कार्यान्वित किया जा सके.
इस योजना को 'नई पेंशन योजना' कहा जा रहा है और यह इसी नाम से चल प्रस्तावित हो सकती है. रिपोर्ट में आगे कहा गया कि प्रस्ताव दस्तावेज पूरा होने के बाद संबंध लोगों से परामर्श किया जाएगा.
मौजूदा समय में ये हैं दो पेंशन स्कीम
बता दें कि मौजूदा समय में 18 से 70 साल के उम्र वाले देश के सभी लोगों के लिए'न्यू पेंशन सिस्टम' (NPS) उपलब्ध है. इसमें योजना में विदेशों में रहने वाले भारतीय लोग (NRI) भी शामिल हो सकते हैं. इसके अलावा, कंपनियां भी अपने कर्मचारियों को इस योजना का लाभ दे सकती हैं.
प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन पेशन योजना
इसके अलावा, गवर्नमेंट ने अनएथराइज्ड सेक्टर्स के वर्कर्स के लिए प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना भी शुरू की है. इस योजना का लाभ केवल वहीं लोग उठा सकते हैं, जो न्यू पेंशन स्कीम (NPS), कर्मचारी राज्य बीमा निगम या इनकम टैक्स के तहत नहीं आते. इस स्कीम के तहत, लाभार्थियों को 60 साल की उम्र के बाद 3,000 रुपये पेंशन के रूप में मिलेगी. अगर लाभार्थी की मृत्यु हो जाती है, तो उनके परिवार को 50% पेंशन के रूप में लाभ मिलेगा. वहीं, अगर कोई व्यक्ति इस योजना में नियमित कंट्रीब्यूशन किया है और 60 साल से पहले उसकी मौत हो जाती है तो,ऐसी स्थिति में पत्नी योजना में कंट्रीब्यूशन जारी रख सकती है.
स्कोडा ऑटो पर 12,000 करोड़ रुपये की टैक्स डिमांड: हाईकोर्ट ने कस्टम विभाग से स्पष्टीकरण मांगा
26 Feb, 2025 09:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जर्मन कार मेकर स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया से देश के कस्टम विभाग ने 1.4 अरब डॉलर (करीब 12,000 करोड़ रुपए) की टैक्स डिमांड की हुई है. इसके लिए कंपनी को जो नोटिस भेजा गया वह उसके खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट चली गई और नोटिस को ‘मनमाना’ बताया. अब इस मामले में नया मोड़ आ गया है. सुनवाई के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट में जस्टिस बी. पी. कोलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पूनीवाला की खंडपीठ ने कस्टम विभाग से एक एफिडेविट दाखिल करने को कहा है, जबकि पिछली सुनवाई में कोर्ट की इस डिवीजन बेंच ने नोटिस के लिए टैक्स अधिकारी की तारीफ की थी. कोर्ट की बेंच ने बुधवार को निर्देश दिया कि कस्टम डिपार्टमेंट अपने भेजे गए नोटिस को एक्सप्लेन करे और इसके लिए एक एफिडेविट जमा करे. डिपार्टमेंट बताए कि कैसे उसका सितंबर 2024 में भेजा गया 1.4 अरब डॉलर की टैक्स डिमांड का ‘कारण बताओ’ नोटिस लिमिटेशन के दायरे में नहीं आना चाहिए.
क्या-क्या हुआ सुनवाई के दौरान?
बेंच स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. कस्टम डिपार्टमेंट का कहना है कि कंपनी ने अपनी स्कोडा, ऑडी और फॉक्सवैगन कारों के इंपोर्ट को सही से डिफाइन नहीं किया.उसने इनके इंपोर्ट को एक-एक ऑटो पार्ट का इंपोर्ट दिखाया है, जबकि ये उसकी कारों का ‘सीकेडी इंपोर्ट’ है. सीकेडी इंपोर्ट का मतलब कंप्लीटली नॉक्ड डाउन इंपोर्ट से होता है. इसमें किसी कार को पुर्जा-पुर्जा करके आयात किया जाता है और भारत में फिर फैक्टरी में उसे असेंबल कर दिया जाता है. जबकि ऑटो पार्ट के इंपोर्ट में कार के किसी एक या दो पार्ट का आयात होता है. इन दोनों पर ही इंपोर्ट ड्यूटी अलग-अलग तरह से काउंट होती है.
वहीं स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया का कहना है कि कस्टम विभाग इस तरह अचानक से इतने टैक्स की डिमांड नहीं कर सकता, जब उसने कई साल तक इसके बारे में कुछ पूछा ही नहीं. कंपनी का कहना है कि वह लगभग एक दशक से अलग-अलग ऑटो पार्ट्स की कैटेगरी में टैक्स जमा करा रही है.
कस्टम विभाग की ओर से अदालत में कहा गया कि उसने लंबी जांच के बाद ही कंपनी पर सीकेडी कैटेगरी में टैक्स देने की डिमांड जेनरेट की है. बुधवार को कोर्ट ने साफ किया कि वह इस मामले में अभी पूरी सुनवाई नहीं कर रहा है. वह बस कस्टम डिपार्टमेंट से ये समझना चाहती है कि क्या उसका भेजा नोटिस लिमिटेशन के दायरे में आता है या नहीं. कस्टम विभाग को ये एफिडेविट 10 मार्च तक जमा करना है.
कितना होता है टैक्स डिफरेंस?
अगर सीकेडी इंपोर्ट और ऑटो पार्ट इंपोर्ट पर लगने वाले कस्टम ड्यूटी के अंतर को देखें, तो सीकेडी यूनिट पर 30 से 35 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी लगती है, जबकि ऑटो पार्ट्स के आयात पर 5 से 15 प्रतिशत की इंपोर्ट ड्यूटी लगती है.
कोर्ट कर चुकी है टैक्स ऑफिशियल की तारीफ
मामले की पिछली सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बी. पी. कोलाबावाला और न्यायूमूर्ति फिरदौस पूनीवाला की खंडपीठ ने कंपनी को नोटिस जारी करने से पहले टैक्स ऑफिशियल के गंभीर रिसर्च को लेकर तारीफ भी की थी. अदालत ने कहा कि कस्टम ड्यूटी ऑफिसर की तारीफ की जानी चाहिए, क्योंकि उन्होंने प्रत्येक हिस्से के नंबर को बहुत सावधानी से देखा है. प्रत्येक हिस्से का एक विशिष्ट नंबर होता है. अधिकारी ने प्रत्येक नंबर और इंपोर्ट की जांच की है. कारण बताओ नोटिस जारी करने से पहले उन्होंने डीप रिसर्च किया है.
कैफे कॉफी डे के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू, 2,228 करोड़ रुपये का डिफॉल्ट
26 Feb, 2025 09:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देश की बड़ी कॉफी चेन कंपनी बुरे दौर से गुजर रही है. इस कंपनी की दिवालिया प्रक्रिया एक बार फिर से शुरू हो गई है. यह कॉफी लवर्स के लिए एक बड़ा झटका है. कैफे कॉफी डे की पेरेंट कंपनी CDEL लंबे टाइम से परेशानी में चल रही है. नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने सुप्रीम कोर्ट की 21 फरवरी की समयसीमा के अंदर अपना आदेश जारी करने में विफल रहने के बाद यह फैसला लिया है.
सबसे पहले कंपनी के डिफॉल्ट की बात कर लेते हैं. कंपनी पर 2,228 करोड़ के डिफॉल्ट का आरोप है. नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में मामला जाने के बाद से ही कंपनी पर दबाव बना हुआ है. हालांकि, NCLT के अंतिम फैसले ना लेने के बावजूद भी कंपनी पर दिवालियापन की प्रक्रिया फिर से शुरू हो गई है. अब निवेशकों और कॉरपोरेट सेक्टर की नजरें नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के आगे अगले आदेश पर टिकी हुई है.
NCLT ने उठाया ये बड़ा कदम
इससे पहले NCLT की चेन्नई पीठ ने कैफे कॉफी डे की पेरेंट कंपनी CDEL के निलंबित बोर्ड के डायरेक्टर द्वारा दायर अपील पर सुनवाई पूरी होने के बावजूद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर निर्देश देते हुए इसे 21 फरवरी 2025 तक निपटाने का आदेश जारी किया था. लेकिन ऐसा नहीं हो पाया.
फैसला सुनाने में देरी होने की वजह से NCLT की ओर से पारित पूर्व आदेश को निरस्त माना गया. 22 फरवरी 2025 से कॉरपोरेट दिवाला जो समाधान प्रक्रिया है. उसको दोबारा शुरू कर दिया गया. इसकी जानकारी खुद कंपनी ने शेयर बाजार को दी. CDEL ने शेयरों को जानकारी देते हुए बताया कि NCLT का अंतिम आदेश आना भी बाकी है.
28.4 करोड़ के डिफॉल्ट का किया दावा
CDL के खिलाफ दिवाला कार्रवाई 8 अगस्त 2024 को शुरू हुई थी, जब नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल यानी एनसीएलटी की बेंगलुरु बेंच ने आईडीबीआई ट्रस्टीशिप सर्विसेज लिमिटेड की याचिका को स्वीकार किया था. इसमें 28.4 करोड़ के डिफॉल्ट का दावा किया गया था. कर्ज में डूबी कंपनी के संचालन की देखरेख के लिए एक आईआरपी को नियुक्त किया गया था. निलंबित बोर्ड ने इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी. इसके कारण एनसीएलटी ने 14 अगस्त 2024 को कारवाई पर रोक लगा दी थी.
कोर्ट ने सुनाया ये फैसला
इसके बाद आईडीबीआई टीएसएल इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले गई. फिर सुप्रीम कोर्ट ने 31 जनवरी 2025 को एनसीएलटी की चेन्नई बेंच को 21 फरवरी तक अपील का निपटारा करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने यह फैसला सुनाया कि अगर अपील का निपटारा समय सीमा के अंदर नहीं किया गया तो सीडीईएल की जो दिवालिया प्रक्रिया है. उस पर रोक अपने आप खत्म हो जाएगी. यही कारण है कि 22 फरवरी 2025 को दी गई समय सीमा बीत जाने के बाद कंपनी पर सीआई आरपी प्रक्रिया फिर से बहाल मानी गई.
आपको बता दें कि कॉफी डे ग्रुप की पेरेंट कंपनी CDEL कैफे कॉफी डे आउटलेट चेन के अलावा एक रिजॉर्ट कंसल्टेंसी सर्विसेज और कॉफी बीन ट्रेडिंग ऑपरेट करती है. जुलाई 2019 में अपने फाउंडर बीजी सिद्धार्थ के निधन के बाद से ही कंपनी को फाइनेंशियल स्ट्रगल का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि कंपनी अपनी एसेट्स की बिक्री और रिस्ट्रक्चरिंग के माध्यम से अपने लोन को कम करने का प्रयास कर रही है.
Home Loan की है जरूरत पर नौकरी नहीं? फिकर नॉट..... ये 5 चीजें चेक करेगा बैंक, आसान हो जाएगी लोन अप्रूवल!
26 Feb, 2025 07:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर किसी का सपना होता है कि उसका अपना घर हो। लेकिन घर खरीदना या बनवाना आसान नहीं होता। ज़्यादातर लोग होम लोन लेकर ही अपना घर बना पाते हैं। अगर कोई नौकरीपेशा व्यक्ति होम लोन के लिए आवेदन करता है, तो बैंक उसकी सैलरी, बैंक स्टेटमेंट और दूसरे दस्तावेज़ चेक करता है। लेकिन अगर कोई स्व-रोज़गार करने वाला व्यक्ति होम लोन लेना चाहता है, तो बैंक किन बातों का ध्यान रखता है?
1- उम्र बहुत मायने रखती है
बैंक किसी को भी होम लोन देने से पहले उसकी उम्र ज़रूर चेक करते हैं। अगर कोई स्व-रोज़गार करने वाला व्यक्ति युवा है, तो उसे ज़्यादा लोन मिलने की संभावना होती है। साथ ही, उसे लंबी अवधि के लिए लोन भी मिल सकता है, जिससे EMI कम हो सकती है। इससे लोन चुकाना भी आसान हो जाता है।
2- दस्तावेज़ चेक किए जाते हैं
होम लोन देने से पहले बैंक कई ज़रूरी दस्तावेज़ चेक करता है। इसमें इनकम टैक्स रिटर्न (ITR), प्रॉफ़िट-लॉस स्टेटमेंट, बैलेंस शीट और बैंक स्टेटमेंट शामिल हैं। इन दस्तावेज़ों से बैंक यह पता लगाता है कि आवेदक की आर्थिक स्थिति कैसी है और उसका व्यवसाय कितना स्थिर है। इससे बैंक को उसके लोन डूबने के जोखिम का अंदाजा हो जाता है।
3- नेट इनकम की गणना
बैंक स्वरोजगार करने वाले व्यक्ति की मासिक आय को भी देखता है। इसके लिए बैंक कई दस्तावेजों की मदद से पता लगाता है कि हर महीने कितनी कमाई हो रही है। अगर बैंक को लगता है कि आवेदक हर महीने EMI भरने में सक्षम है तो लोन मिलना आसान हो जाता है।
4- क्रेडिट स्कोर बहुत जरूरी है
लोन अप्रूवल से पहले क्रेडिट स्कोर भी चेक किया जाता है। यह स्कोर 300 से 900 के बीच होता है। अगर स्कोर 750 या इससे ज्यादा है तो लोन आसानी से मिल सकता है। अगर स्कोर कम है तो लोन मिलने में दिक्कत हो सकती है। क्रेडिट स्कोर से पता चलता है कि आवेदक ने पहले लिए गए लोन और क्रेडिट कार्ड का भुगतान समय पर किया है या नहीं।
5- बिजनेस के अलावा अन्य आय स्रोत
बैंक यह भी चेक करता है कि आवेदक के पास आय के अन्य स्रोत हैं या नहीं। इसमें बैंक रेंटल इनकम, शेयर या अन्य निवेश से होने वाली आय और रियल एस्टेट से होने वाली आय की जांच करता है। अगर स्वरोजगार करने वाले व्यक्ति के पास व्यवसाय के अलावा कोई और आय स्रोत है, तो होम लोन मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इससे बैंक को यह भरोसा होता है कि वह समय पर लोन चुका पाएगा।
ठग सुकेश चंद्रशेखर का जेल से मस्क को भेजा गया निवेश प्रस्ताव
26 Feb, 2025 11:23 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
धोखाधड़ी के आरोपों में जेल में बंद ठग सुकेश चंद्रशेखर एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है. इस बार सुकेश ने एलन मस्क को चिट्ठी लिखकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स में 2 बिलियन डॉलर (1,74,22,07,00,000 रुपये) का निवेश करने की इच्छा जताई है. मौजूदा समय में दिल्ली की मंडोली जेल में बंद सुकेश चंद्रशेखर ने मस्क को 'मॉय मैन' के रूप में संबोधित किया और उन्हें अमेरिकी सरकार के नए विभाग डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) का नेतृत्व करने के लिए बधाई दी.
सुकेश ने चिट्टी में लिखा, 'हे एलन, मैं आज गर्व से कहना चाहता हूं कि मैं आपकी कंपनी एक्स में तुरंत 1 बिलियन डॉलर और अगले साल 1 बिलियन डॉलर यानी कुल दो बिलियन डॉलर (करीब 17,400 करोड़) का निवेश करना चाहता हूं.' उन्होंने यह भी लिखा कि 'X' मेरी पसंदीदा सोशल मीडिया साइट है और मेरी 'लेडी लव' जैकलीन फर्नांडिस भी इसे पसंद करती हैं. सुकेश ने यह भी दावा किया कि उनकी कंपनी एलएस होल्डिंग पहले से ही टेस्ला के शेयर में इनवेस्टमेंट कर चुकी है और उन्हें इससे अच्छा प्रॉफिट हुआ है.
'मुझे आपकी लीडरशिप में पूरा यकीन'
सुकेश ने अपनी चिट्ठी में लिखा, 'यह निवेश 'X' की किसी वैल्यूएशन पर बेस्ड नहीं है, बल्कि यह इस बात पर है कि आपकी लीडरशिप में कंपनी कितनी ऊंचाई तक पहुंचेगी. मेरा दांव हमेशा आप पर है और मुझे पूरा यकीन है कि 'X' की वैल्यू अप्रत्याशित ऊंचाई तक जाएगी.' चिट्ठी में सुकेश ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना 'बिग ब्रदर' कहा. उन्होंने मस्क को DOGE के नेतृत्व के लिए बधाई देते हुए सरकारी टेक्नोलॉजी को मॉडर्न बनाने के प्लान की तारीफ की.
मेरे लिये पैसा और सफलता बोरिंग हो गई
सुकेश ने लिखा, मेरे लिये अब पैसा और सफलता बोरिंग हो चुकी है. लेकिन असफलता से उभरना उन्हें रोमांचित करता है. 'एलन, मुझे यकीन है कि आप मुझसे सहमत होंगे कि पैसा और सफलता बहुत आसान हैं, लेकिन असफलता से उठकर और मजबूत बनना असली रोमांच है.' उन्होंने अपने बिजनेस साम्राज्य का जिक्र करते हुए दावा किया कि उनकी कंपनी स्पीड गेमिंग कॉर्प और उसकी सहयोगी कंपनियां दुनिया की टॉप 25 ऑनलाइन गेमिंग, कैसीनो और स्पोर्ट्स बेटिंग कंपनियों में शामिल है. उनकी कंपनियां देश के बाहर पूरी तरह कानूनी रूप से संचालित होती हैं और उनका निवेश प्रस्ताव पूरी तरह से अमेरिका, यूके और हांगकांग के कानूनों के हिसाब से है.
सभी आरोप झूठे और राजनीतिक साजिश के तहत लगाए गए
सुकेश ने दावा किया कि उनके खिलाफ लगे सभी आरोप झूठे और राजनीतिक साजिश के तहत लगाए गए हैं. 'मैं इस समय न्यायिक हिरासत में हूं, लेकिन मुझ पर जो वित्तीय अपराध का आरोप है, वह मेरे एक साल के शॉपिंग बजट से भी कम का हैं. मुझ पर लगे सभी आरोप अभी तक साबित नहीं हुए हैं, और मेरे खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है.' अगर वह ) 'X' में निवेश करते हैं तो यह उन्हें एक 'गर्वित भारतीय' बनाएगा और इससे भारतीय युवाओं को बड़ा सपना देखने की प्रेरणा मिलेगी.
आपको बता दें यह पहला मौका नहीं है जब सुकेश चंद्रशेखर ने इस तरह का पब्लिकली ऑफर दिया है. इससे पहले उन्होंने बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को चिट्ठी लिखकर सुर्खियां बटोरी थीं.
यूनिवर्सल पेंशन स्कीम: अब नौकरी की जरूरत नहीं, हर किसी के लिए खुली है सरकार की नई योजना
25 Feb, 2025 04:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Universal Pension Scheme: केंद्र सरकार कथित तौर पर एक नई यूनिवर्सल पेंशन स्कीम पर काम कर रही है, जो पारंपरिक नौकरी-आधारित योजनाओं से परे लोगों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान कर सकेगी. रिपोर्ट के अनुसार, श्रम मंत्रालय ने एक स्वैच्छिक और अंशदायी योजना पर एक चर्चा शुरू कर दी है, जो सभी क्षेत्रों के व्यक्तियों को उनकी रोजगार स्थिति की परवाह किए बिना अपने रिटायरमेंट में निवेश करने की अनुमति देगी.
रिपोर्ट के अनुसार, ऐसी योजना शुरू करने के पीछे का विचार यही है कि मौजूदा पेंशन योजनाओं को एक छतरी के नीचे लेकर आना है, जिससे उसे काफी आसान बनाया जा सके, व्यापारियों और 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के स्वरोजगार वाले व्यक्तियों के लिए.
अंशदायी पेंशन योजना सभी के लिए खुली होगी
स्वैच्छिक और अंशदायी पेंशन योजना सभी के लिए खुली होगी और किसी नौकरी या व्यवसाय क्षेत्र तक सीमित नहीं होगी.यह योजना समाज के सभी वर्गों तक कवरेज बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा चल रही मौजूदा पेंशन योजनाओं को भी समाहित कर सकती है. इसमें कहा गया है कि 18 से 60 साल के आयु वर्ग के सभी लोग इस योजना के तहत 60 वर्ष की आयु के बाद पेंशन लाभ प्राप्त करने के लिए पात्र होंगे।
भारत में प्रमुख सरकारी पेंशन योजनाएं
इस समय भारत में सरकार समाज के कई वर्गों से आने वाले लोगों के लिए कई पेंशन योजनाएं चलाती है. इन योजनाओं का काम हर व्यक्ति के वित्तीय सुरक्षा को सुनिश्चित करना है.
अटल पेंशन योजना
अगर आप असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं और अपने रिटायरमेंट को लेकर चिंतित हैं तो यह योजना आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। 60 साल की उम्र के बाद इसमें 1,000 रुपये से 5,000 रुपये तक मासिक पेंशन मिलती है.
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली
यह एक स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना है, जो सरकारी, निजी क्षेत्र के कर्मचारियों और आम नागरिकों के लिए खुली है. इसमें निवेश करके आप रिटायरमेंट के समय एकमुश्त राशि और पेंशन दोनों पा सकते हैं.
कर्मचारी पेंशन योजना
यह योजना आपके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए बनाई गई है. बता दें, EPFO द्वारा चल रही है इस योजना में नियोक्ता अपने वेतन का 8.33% पेंशन फंड में जमा करता है, जिससे आपको रिटायरमेंट के बाद पेंशन मिलती है.
सेंसेक्स में तेजी, निफ्टी में सुस्ती: क्या दिखा आज का मार्केट ट्रेंड?
25 Feb, 2025 04:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
घरेलू शेयर बाजार मंगलवार को मिले-जुले रुख के साथ बंद हुआ। बीएसई सेंसेक्स 147.71 अंक की उछाल के साथ कारोबार के आखिर में 74,602.12 के लेवल पर बंद हुआ। इसी तरह एनएसई का निफ्टी 5.8 अंक की मामूली गिरावट के साथ कारोबार के अंत में 22,547.55 के लेवल पर बंद हुआ। निफ्टी पर एमएंडएम, भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, मारुति सुजुकी और नेस्ले प्रमुख लाभ में रहे, जबकि हिंडाल्को, डॉ रेड्डीज लैब्स, सन फार्मा, हीरो मोटोकॉर्प, ट्रेंट नुकसान में रहे। मंगलवार को भारतीय रुपया 50 पैसे गिरकर 87.20 प्रति डॉलर पर बंद हुआ तथा सोमवार को 86.70 पर बंद हुआ।
खबरों में रहे ये शेयर
ब्रोकरेज कंपनियों के तेजी भरे आह्वान के बाद एमएंडएम के शेयरों में 3% की तेजी दिखी। कारोबार में दूसरे दिन भी बढ़त जारी रही। इस सप्ताह निवेशक मीटिंग से पहले ग्लैंड फार्मा के शेयरों में 16 सप्ताह में सबसे अधिक उछाल देखा गया। आज के कारोबार में आईटी, धातु, तेल एवं गैस, ऊर्जा, पूंजीगत सामान, पीएसयू बैंक, रियल्टी में 0.5-1 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि ऑटो, उपभोक्ता टिकाऊ सामान, एफएमसीजी, दूरसंचार में 0.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
एशियाई मार्केट में आज का रुझान
एशिया में मंगलवार को शेयर बाजार में गिरावट देखी गई, क्योंकि अमेरिका-चीन व्यापार तनाव की चिंताओं ने इस क्षेत्र के लिए संभावनाओं को प्रभावित किया। जापान में सोमवार को छुट्टी के बाद बाजार खुलने के बाद टोक्यो का निक्केई 225 1.4% गिरकर 38,237.79 पर आ गया। हांगकांग में, हैंग सेंग 1.5% गिरकर 22,999.44 पर आ गया, जबकि शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 0.8% गिरकर 3,346.04 पर आ गया। ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 0.7% गिरकर 8,251.90 पर आ गया।
खबर के मुताबिक, बैंक ऑफ कोरिया द्वारा अपनी बेंचमार्क ब्याज दर को 3% से घटाकर 2.75% करने के बाद दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.7% गिरकर 2,630.29 पर आ गया, यह धीमी अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए चार बैठकों में तीसरी कटौती है। ताइवान का टेक्स 1.2% गिरा।
बाजार की गिरावट ने बिटकॉइन को भी नहीं छोड़ा, 19 लाख करोड़ रुपये का घाटा
25 Feb, 2025 04:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिकी में उठापटक ने डिजिटल करेंसी बिटकॉइन की मुश्किल बढ़ा दी है, दरअसल बीते कुछ दिनों में बिटकॉइन में गिरावट देखने को मिल रही है, जिसमें ये डिजिटल करेंसी 90 हजार डॉलर से नीचे आ गई है. वहीं दूसरी और इथेरियम और सोलाना जैसी दूसरी डिजिटल करेंसी में भी 15 प्रतिशत की गिरावट आई है.
जानकारों के अनुसार डिजिटल करेंसी में ये गिरावट चीन पर अमेरिकी निवेश प्रतिबंधों की वजह से आई है. इन्हीं सब वजहों के चलते बिटकॉइन, इथीरियम, एक्सआरपी और सोलाना में गिरावट देखने को मिली है. अगर आपको भी डिजिटल करेंसी में इंटरेस्ट है तो इसके बारे में हम आपको यहां विस्तार से बता रहे हैं.
डिजिटल करेंसी आज इतनी गिरी
चीन पर अमेरिकी निवेश प्रतिबंधों की वजह से मंगलवार यानी 25 फरवरी 2025 को बिटकॉइन, इथेरियम, एक्सआरपी और सोलाना सहित ब्लू चिप क्रिप्टोकरेंसी में बड़ी गिरावट देखने को मिली है. जहां बिटकॉइन में 5.4% गिरकर 89,626 डॉलर पर आ गया, इथेरियम 7.7% गिरकर 2,498 डॉलर पर आ गया और पिछले 24 घंटों में वैश्विक क्रिप्टो मार्केट कैप 4.7% गिरकर 2.98 ट्रिलियन डॉलर पर आ गया. बिटकॉइन का मार्केट कैप गिरकर $1.825 ट्रिलियन पर आ गया.
असम में 'एडवांटेज असम' निवेश सम्मेलन, अंबानी और अडाणी का 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश
25 Feb, 2025 03:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Advantage Assam 2.0: पूर्वोत्तर राज्य असम तरक्की की दिशा में लगातार तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इसी सिलसिले में आज असम में 'एडवांटेज असम 2.0 इंवेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर समिट 2025' की शुरुआत हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस मौके पर असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य और मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा भी मौजूद रहे। इस बिजनेस समिट में रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुकेश अंबानी, अडाणी ग्रुप के गौतम अदाणी, जेएसडब्ल्यू ग्रुप के सज्जन जिंदल, एस्सार के प्रशांत रुइया, वेदांता के अनिल अग्रवाल जैसे बड़े और दिग्गज उद्योगपति शामिल हुए।
असम में 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेंगे अंबानी-अडाणी
असम के गुवाहाटी में आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी राज्य में भारी-भरकम निवेश करने जा रहे हैं। देश के दो दिग्गज उद्योगपति मुकेश अंबानी और गौतम अडाणी मिलकर असम में कुल 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेंगे।
मुकेश अंबानी ने मां कामाख्या से देश के लिए मांगा आशीर्वाद
मुकेश अंबानी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि रिलायंस इंडस्ट्रीज अगले 5 सालों में असम में 50,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगा। उन्होंने कहा, ''एडवांटेज असम समिट में एक बार फिर शामिल होना सम्मान की बात है। अपना संबोधन शुरू करने से पहले, मैं ऊर्जा और सृजन की देवी मां कामाख्या से प्रार्थना करना चाहता हूं कि वे न केवल असम में बल्कि पूरे भारत को आशीर्वाद दें।'' अंबानी ने कहा कि आने वाले समय में असम टेक्नोलॉजी का स्वर्ग बनेगा। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया असम को विकास के मौकों की धरती के रूप में देखेगी। रिलायंस के चेयरमैन ने कहा कि असम के तकनीक प्रेमी युवा AI को नया अर्थ देंगे- Assam Intelligence.
एयरपोर्ट, सीमेंट और रोड प्रोजेक्ट पर निवेश करेगा अडाणी ग्रुप
वहीं दूसरी ओर, अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी ने भी असम में 50,000 करोड़ रुपये का निवेश करने का ऐलान किया। उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ''अडाणी ग्रुप असम में एयरपोर्ट, एयरोसिटी, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन, ट्रांसमिशन, सीमेंट और रोड प्रोजेक्ट्स में निवेश करेगा। बताते चलें कि इस कार्यक्रम में 61 देशों के राजदूतों के साथ-साथ भूटान, थाईलैंड, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, इंडोनेशिया और जापान जैसे साझेदार देशों के उच्च स्तरीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रतिनिधि भी मौजूद हैं।
गौतम अडाणी ने की पीएम मोदी की तारीफ
गौतम अडाणी ने अपने संबोधन में मां कामाख्या की धरती असम और पीएम मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, ''एडवांटेज असम 2.0 में आज आपके सामने खड़ा होना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। जब भी मैं मां कामाख्या की इस पवित्र भूमि पर कदम रखता हूं, तो मैं इसकी प्राकृतिक और असीम सुंदरता से मंत्रमुग्ध हो जाता हूं। जिस तरह विशाल नदी ब्रह्मपुत्र इस राज्य के परिदृश्य को नया आकार देती है और अपना रास्ता खुद बनाती है, मैं ये जरूर कहूंगा कि ये हमारे माननीय प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने असम के लिए संभावनाओं के परिदृश्य को नया आकार दिया है।''
एसबीआई की गोल्ड डिपॉजिट स्कीम: सोने की रखवाली के साथ मिलेगा ब्याज भी
25 Feb, 2025 03:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आमतौर पर लोग सोने को बैंकों में रखना पसंद करते हैं क्योंकि वहां पर उसकी हिफाजत हो सके. घरों में सोना रखना कई बार असुरक्षित होता है. सोने के गुम हो जाने और इसकी चोरी की भी कई आशंकाएं होती है.सोने और जेवरात को बैंक लॉकर में रखने पर आपको बैंकों को चार्ज देना होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं एसबीआई की एक ऐसी स्कीम है जिसमें बैंक के द्वारा आपके सोने की सुरक्षा भी की जाएगी और आपको ब्याज भी दिया जाएगा.
एसबीआई की गोल्ड डिपॉजिट स्कीम
स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की Revamped Gold Deposit Scheme ग्राहकों को उनके सोने को रखने के बदले में उन्हें ब्याज का भुगतान करती है. इसमें ग्राहकों को तीन विकल्प दिए जाते हैं.
· पहली कैटेगरी 1 से 3 साल की अवधि की है. जिसे एसबीआई की शॉर्ट टर्म बैंक डिपॉजिट स्कीम कहा जाता है. यानी 1 से 3 साल के लिए बैंक के ग्राहक सोना डिपॉजिट कर सकते हैं.
· दूसरी कैटेगरी की अवधि 5 से 7 साल की होती है जिसे मीडियम टर्म गवर्नमेंट डिपॉजिट कहते हैं.
· तीसरी कैटेगरी 12 से 15 साल की अवधि की होती है. जिसे लॉन्ग टर्म गवर्नमेंट डिपॉजिट कहते हैं.
तीनों अलग-अलग कैटेगरी के आधार पर अलग-अलग ब्याज दिया जाता है.
गोल्ड डिपॉजिट स्कीम के अंतर्गत कितना मिलेगा ब्याज
· एक साल की अवधि के लिए गोल्ड डिपॉजिट करने पर 0.55 % वार्षिक ब्याज मिलता है.
· 2 साल या इससे ज्यादा की अवधि के लिए गोल्ड डिपॉजिट करने पर 0.60 % वार्षिक ब्याज मिलता है.
· 5 से 7 साल की अवधि के लिए गोल्ड डिपॉजिट करने पर 2.25% वार्षिक ब्याज मिलता है.
· 12 से 15 साल की अवधि के लिए गोल्ड डिपॉजिट करने पर 2.50% वार्षिक ब्याज मिलता है.
कब हुई थी गोल्ड डिपॉजिट स्कीम की शुरुआत
साल 2015 में सरकार ने इस स्कीम की शुरुआत की थी ताकि घरों और संस्थानों में पड़े सोने का सार्थक इस्तेमाल किया जा सके और साथ ही सोने के मालिकों को उसे पर ब्याज दिया जा सके.
मैच्योरिटी पर मिलते हैं दो विकल्प
इस स्कीम में गोल्ड डिपॉजिट करने वालों को मैच्योरिटी पर दो विकल्प मिलते हैं. पहले डिपॉजिट की अवधि समाप्त होने पर आप अपना सोना वापस ले सकते हैं.
असम चाय उद्योग का 200 साल पुराना इतिहास, अल्फाबेट में अब A फॉर Assam पढ़ने का वक्त: पीएम मोदी
25 Feb, 2025 03:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को उद्योग जगत के दिग्गजों और विदेशी देशों के व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों की मौजूदगी में एडवांटेज असम 2.0 निवेश और बुनियादी ढांचा शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा भी मौजूद रहें। प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा शासन के दौरान असम की अर्थव्यवस्था का साइज दोगुना होकर छह लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह ‘डबल इंजन’ सरकार का असर है। उन्होंने कहा कि 2013 में चुनाव प्रचार के दौरान उनके मन में आया था कि अल्फाबेट में A फॉर Assam भी हो सकता है। अब उसका वक्त आ गया है। असम भारत की समृद्धि में बड़ा योगदान दे रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि 'असम टी' भारत ही दुनिया का बहुत बड़ा ब्रांड है। यह 200 साल पुरान ब्रांड बन चुका है। असम की स्ट्रैटेजिक लोकेशन इसे खास महत्व दिलाता है। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है। भारत इस बदलाव में अपनी भागीदारी बढ़ाने के लिए मेक इन इंडिया पहल को शुरू किया है। असम भी इस मैन्युफैक्चरिंग क्रांति में असम बहुत बड़ी भूमिका निभा रहा है। बीते कुछ सालों में डबल इंजन की सरकार के चलते राज्य में विकास की रफ्तार तेज हुई है। यह राज्य अब रिफाइनरी कैपेसिटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी जैसे सेक्टर में तेजी से उभर रहा है। सरकार के प्रयास से यह स्टार्टअप का भी हब बन रहा है। असम जल्द ही पूर्वी भारत का मैन्युफैक्चरिंग हब बनेगा। 21वीं सदी भारत का है। हम हर सेक्टर में अपनी ताकत को बढ़ाने के लिए तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं। बीते 10 साल में हमने कई नए सेक्टर में बड़ी छलांग लगाई है। चिप मैन्युफैक्चरिंग में भी हमारा यही लक्ष्य है।
हमारा नॉर्थ ईस्ट सामर्थ्य दिखाने को तैयार
गुवाहाटी में एडवांटेज असम 2.0 निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "आज पूर्वी भारत और नॉर्थ ईस्ट की धरती एक नए भविष्य की शुरुआत करने जा रही है। एडवांटेज असम, असम के सामर्थ्य और प्रगति से पूरी दुनिया को जोड़ने का एक बहुत बड़ा अभियान है। इतिहास गवाह है कि पहले भी पूर्वी भारत देश की समृद्धि में बहुत बड़ी भूमिका निभाता था। आज जब भारत विकास की ओर बढ़ रहा है, तो एक बार फिर पूर्वी भारत सबसे आगे है। हमारा नॉर्थ ईस्ट अपना सामर्थ्य दिखाने जा रहा है। मैं एडवांटेज असम को इसी भावना का प्रतिनिधित्व मानता हूं। मैं इस भव्य आयोजन के लिए असम सरकार और हिमंत जी की पूरी टीम को बधाई देता हूं। मुझे याद है कि 2013 में मैं चुनाव प्रचार के लिए असम का दौरा कर रहा था। एक मीटिंग में मेरे मन में एक वाक्य आया और मैंने कहा कि वो दिन दूर नहीं है जब मैं वर्णमाला पढ़ते हुए A बोलूंगा तो असम होगा।"
दुनिया भारत के तेज विकास को लेकर आश्वस्त
उन्होंने आगे कहा, "इस वैश्विक अनिश्चितता के बीच भी, दुनिया के कई विशेषज्ञ एक बात को लेकर निश्चिंत हैं और वो है भारत का तेज़ विकास। भारत पर इस भरोसे की एक बहुत ठोस वजह है। आज का भारत, आने वाले 25 सालों की 21वीं सदी के दीर्घकालिक विजन को ध्यान में रखते हुए, एक के बाद एक कदम उठा रहा है, बड़े पैमाने पर काम कर रहा है। आज दुनिया को भारत की युवा आबादी पर भरोसा है जो बहुत तेजी से हुनरमंद हो रही है। आज दुनिया को भारत के नव मध्यम वर्ग पर भरोसा है जो गरीबी से बाहर निकलकर नई आकांक्षाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। आज दुनिया को भारत के 140 करोड़ लोगों पर भरोसा है जो राजनीतिक स्थिरता और नीतिगत निरंतरता का समर्थन करते हैं। आज दुनिया को भारत की गवर्नेंस पर भरोसा है जो लगातार सुधार कर रही है। आज भारत अपनी लोकल सप्लाई चेन को मजबूत कर रहा है।"
विकास में असम का योगदान बढ़ रहा
पीएम मोदी ने कहा, "आज भारत दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों के साथ मुक्त व्यापार समझौते कर रहा है, जिससे पूर्वी एशिया के साथ हमारा संपर्क मजबूत हो रहा है और नवगठित भारत मध्य पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारा भी अनेक नई संभावनाएं लेकर आ रहा है। भारत पर मजबूत होते वैश्विक विश्वास के बीच आज हम सभी यहां मां कामाख्या की धरती असम में हैं। भारत के विकास में असम का योगदान लगातार बढ़ रहा है। एडवांटेज असम शिखर सम्मेलन का पहला संस्करण 2018 में आयोजित किया गया था। उस समय असम की अर्थव्यवस्था 3 लाख करोड़ रुपये की थी। आज असम लगभग 6 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था वाला राज्य बन गया है। यानी भाजपा सरकार के सिर्फ छह साल में असम की अर्थव्यवस्था का मूल्य दोगुना हो गया है। ये डबल इंजन सरकार का दोहरा असर है।"
हर युवा दिन-रात काम कर रहा
मोदी ने कहा, "पिछले एक दशक में कई शांति समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं और लंबे समय से लंबित सीमा संबंधी मुद्दों को सुलझाया गया है। असम का हर क्षेत्र, हर नागरिक, हर युवा असम के विकास के लिए दिन-रात काम कर रहा है। हमने व्यापार करने में आसानी के लिए लगातार काम किया है, हमने उद्योग और नवाचार संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एक पूरा इकोसिस्टम बनाया है। सरकार देश के बुनियादी ढांचे में भी भारी निवेश कर रही है। संस्थागत सुधार, उद्योग, बुनियादी ढांचे और नवाचार का यह संयोजन भारत की प्रगति का आधार है... असम ने 2030 तक अपनी अर्थव्यवस्था को 150 बिलियन तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। मुझे विश्वास है कि असम निश्चित रूप से इस लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। मेरे विश्वास का कारण असम के सक्षम और प्रतिभाशाली लोग हैं। यह यहां की भाजपा सरकार की प्रतिबद्धता है।"
भाजपा सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर काफी काम किया
मोदी ने कहा, "बीते कुछ सालों में भाजपा सरकार ने एयर कनेक्टिविटी से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर काफी काम किया है। 2014 से पहले ब्रह्मपुत्र नदी पर सिर्फ 3 पुल थे, लेकिन पिछले 10 सालों में हमने 4 नए पुल बनाए हैं, जिनमें से एक का नाम हमने भारत रत्न भूपेन हजारिका जी के नाम पर रखा है। 2009 से 2014 के बीच असम को रेलवे बजट में औसतन 2100 करोड़ रुपये मिले थे। हमारी सरकार ने असम के रेलवे बजट को चार गुना से ज्यादा बढ़ाकर 10,000 करोड़ रुपये कर दिया है..."
असम की अर्थव्यवस्था 143 अरब डॉलर की होगी: हिमंत
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने मंगलवार को कहा कि 2030 तक असम की अर्थव्यवस्था 143 अरब डॉलर की हो जाएगी। उन्होंने निवेशकों से राज्य की विकास यात्रा हिस्सा बनने का आग्रह भी किया। यहां दो दिवसीय ‘एडवांटेज’ असम 2.0 निवेश और अवसंरचना शिखर सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में शर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य अब ‘‘सबसे अशांत’’ से ‘‘सबसे शांत’’ राज्य बन गया है। उन्होंने दावा किया, ‘‘ इस साल राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि 15.2 प्रतिशत होगी। यह 2030 तक 143 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा।’’ शर्मा ने 60 से अधिक देशों के मिशन प्रमुखों और राजदूतों, विदेशी व्यापार प्रतिनिधिमंडलों और देश के उद्योग जगत के नेताओं की मौजूदगी में कहा, मैं आज आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि हम असम में उद्योगों की स्थापना के लिए सबसे अच्छा काम और अनुकूल माहौल सुनिश्चित करेंगे। कृपया यहां आएं और निवेश करें।’’
असम निवेश पर ध्यान दे रहा है: मार्गेरिटा
केंद्रीय मंत्री पवित्र कुमार मार्गेरिटा ने मंगलवार को कहा कि असम व्यापार शिखर सम्मेलन में पूर्वोत्तर राज्य में घरेलू और विदेशी निवेश आकर्षित करने पर समान रूप से ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ प्रमुख क्षेत्र, जिनमें निवेशकों ने रुचि दिखाई है वे आतिथ्य तथा स्वास्थ्य सेवा हैं। मार्गेरिटा ने यहां दो दिवसीय ‘एडवांटेज असम 2.0 निवेश एवं अवसंरचना शिखर सम्मेलन’ में कहा, ‘‘ देश के उद्योग जगत के दिग्गजों के साथ-साथ 60 से अधिक देशों के प्रतिनिधि इस सम्मेलन में शामिल हुए हैं। मिशन प्रमुख और व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल यहां मौजूद हैं।
भारत के लिए कठिन समय: ट्रंप के टैरिफ और चीन का दबाव, क्या होगा भविष्य?
24 Feb, 2025 04:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शेयर बाजार: घरेलू शेयर बाजार में आज फिर गिरावट दिख रही है। इससे निफ्टी-50 एक अनचाहा रेकॉर्ड बनाने के करीब पहुंच गया है। अगर फरवरी में भी निफ्टी में गिरावट रहती है तो यह इंडेक्स की लगातार पांचवें महीने गिरावट होगी। साल 1996 के बाद यह पहला मौका है जब निफ्टी में लगातार पांच महीने गिरावट रहेगी। दलाल स्ट्रीट में पिछले 34 साल में केवल दो बार ऐसा हुआ है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण शेयर मार्केट में गिरावट आ रही है। पिछले साल अक्टूबर 2024 से वे अब तक 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेच चुके हैं। साथ ही रुपये के कमजोर होने से उभरते बाजारों में निवेश कम आकर्षक हो गया है। इस कारण विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। निफ्टी के इतिहास को देखें तो 1990 के बाद इसमें केवल दो बार लगातार पांच महीने या उससे ज्यादा समय तक गिरावट देखी गई है। सबसे लंबी गिरावट सितंबर 1994 से अप्रैल 1995 तक रही, जब सूचकांक 8 महीनों में 31.4% गिर गया था। आखिरी बार 5 महीनों की गिरावट 1996 में हुई थी, जब जुलाई से नवंबर तक निफ्टी में 26% गिरावट आई थी। हालांकि इस बार भी निफ्टी में काफी गिरावट आई है लेकिन पिछली गिरावटों के मुकाबले कम है। अक्टूबर से अब तक निफ्टी में 11.7% की गिरावट आई है। इस महीने निफ्टी 3% नीचे आ चुका है।
कब तक रहेगा यह हाल
तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी जल्द ही 22,500-22,400 के स्तर तक गिर सकता है। जब तक निफ्टी 22,850 के नीचे रहता है, तब तक इसमें बिकवाली का दबाव बना रहेगा। मतलब, जैसे ही निफ्टी थोड़ा ऊपर जाएगा, लोग शेयर बेचने लगेंगे। पिछले साल सितंबर के अंत से सूचकांक गिर रहा है। डेली चार्ट पर एक लोअर टॉप-लोअर बॉटम पैटर्न बना रहा है। इस प्रकार का पैटर्न तब बनता है जब मार्केट तेजी पर बिक्री की रणनीति का पक्षधर होता है क्योंकि सेलर्स कमजोर मार्केट आउटलुक के बीच कम कीमतों पर भी बेचने को तैयार होते हैं।
अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध भी निवेशकों को परेशान कर रहा है। साथ ही चीन के शेयर बाजार में तेजी से भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ रहा है। विदेशी निवेशक अपना पैसा भारत से निकालकर चीन में लगा रहे हैं। अक्टूबर 2024 से भारत का मार्केट कैप 1 ट्रिलियन डॉलर घट गया है, जबकि चीन का 2 ट्रिलियन डॉलर बढ़ गया है। हैंग सेंग इंडेक्स सिर्फ एक महीने में 18.7% चढ़ गया है, जबकि Nifty में 1.55% की गिरावट आई है।चीन में निवेश पिछले महीने तेजी से गिरने के बाद फिर से बढ़ गया है। वहीं, भारत में निवेश लगातार घट रहा है।
क्या करें निवेशक?
विश्लेषकों का मानना है कि 'भारत में बेचो, चीन में खरीदो' का यह रुझान जारी रह सकता है, क्योंकि चीनी शेयर अभी भी सस्ते हैं। चीन ने इकॉनमी को बूस्ट देने के लिए सितंबर 2024 के आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की थी। इस कारण वहां के शेयर बाजारों में तेजी दिख रही है। इस पैकेज में नीतिगत समर्थन, नियामक ढील और FII भावना को बढ़ावा देने के उपाय शामिल हैं। सवाल है ऐसे माहौल में निवेशकों को क्या करना चाहिए? निवेशकों को सोच-समझकर अच्छे शेयरों में निवेश करना चाहिए। उन्हें ऐसे छोटे शेयरों में निवेश करने से बचना चाहिए जिनका सालाना मुनाफा 100 करोड़ रुपये से कम है। साथ ही, उन्हें अगले पांच हफ्तों में टैक्स हार्वेस्टिंग रणनीतियों पर भी ध्यान देना चाहिए। टैक्स हार्वेस्टिंग का मतलब है कि आप अपने निवेश पोर्टफोलियो में घाटे वाले शेयर बेचकर टैक्स में छूट का फायदा उठा सकते हैं।
(डिस्क्लेमर: इस विश्लेषण में दिए गए सुझाव व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि किसी भी निवेश का निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से परामर्श कर लें। क्योंकि शेयर बाजार की परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं।)
शेयर बाजार में गिरावट का संकट: लगातार पांचवें सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी की कमजोरी
24 Feb, 2025 04:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: घरेलू शेयर बाजार सोमवार को लगातार पांचवें दिन गिरावट के साथ बंद हुआ। भारतीय बाजार में सभी सेक्टरों में बिकवाली देखी गई। बीएसई सेंसेक्स में कारोबार के दौरान 900 अंक से अधिक गिरावट आई है जबकि निफ्टी 250 अंक से अधिक गिर गया। आखिरकार सेंसेक्स 856 अंक यानी 1.14% की गिरावट के साथ 74,454 अंक पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 242 अंक यानी 1.06% की गिरावट के साथ 22,553 अंक पर रहा। इस गिरावट से बीएसई लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4.35 लाख करोड़ रुपये की गिरावट के साथ 397.85 लाख करोड़ रुपये रह गया।
Zomato, HCL Tech, TCS, Tech Mahindra, HDFC Bank और IndusInd Bank के शेयर गिरकर खुले। वहीं, Sun Pharma, Maruti, M&M, Bajaj Finserv और Nestle India के शेयरों में शुरुआती बढ़त देखी गई। सेक्टरों की बात करें तो Nifty IT इंडेक्स 1.8% गिर गया। LTTS, Persistent Systems और Coforge के शेयरों में गिरावट का असर दिखा। Nifty Financial Services, Media, Metal, PSU Bank, Realty और Consumer Durables के इंडेक्स भी 1% से ज्यादा नीचे खुले।
अमेरिकी बाजार का हाल
अमेरिका में फरवरी में उपभोक्ता विश्वास 15 महीने के निचले स्तर पर आ गया। महंगाई की चिंता बढ़ी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ योजनाओं को लेकर चिंता है। ये आंकड़े ताजा रिपोर्ट में सामने आए हैं। एशिया के ज्यादातर बाजारों में गिरावट रही। अमेरिकी बाजार में शुक्रवार को गिरावट का असर दिखा। विकास को लेकर चिंता बनी हुई है।
PM Kisan: पीएम मोदी ने 19वीं किस्त के तहत किसानों के खाते में भेजे 19,000 करोड़ रुपये
24 Feb, 2025 04:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
PM Kisan: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को बिहार के भागलपुर से पीएम किसान सम्मान निधि योजना (पीएम किसान) के तहत 19वीं किस्त जारी कर दी। देश के 9.8 करोड़ से भी ज्यादा किसानों को 2000-2000 रुपये उनके खाते में सीधे ट्रांसफर कर दिया गया है। बता दें, पीएम-किसान योजना के तहत हर लाभार्थी किसान को हर चार महीने में 2,000 रुपये की तीन बराबर किस्तों में कुल 6,000 रुपये का सालाना लाभ दिया जाता है। पीएम मोदी ने आज 22,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की रकम ट्रांसफर किया। साथ ही विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन एवं राष्ट्र को समर्पित किया। इससे पहले इस खास मौके पर मौजूद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा- यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 19वीं किस्त जारी कर रहे हैं।
ट्रंप के बयान पर भारत का रुख: टकराव या कूटनीति का रास्ता?
24 Feb, 2025 03:43 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर जवाबी शुल्क यानी रेसिप्रोकल टैक्स लगाने की चेतावनी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो दिवसीय अमेरिकी दौरे के वक्त भी ट्रंप ने साफ कह दिया था कि वह इसमें किसी तरह की छूट नहीं देंगे। भारत इस मामले में बहुत फूंकफूंककर आगे बढ़ना चाहता है। आक्रामकता के बजाय भारत इस पूरे मामले का हल बहुत समझदारी से निकालने के मूड में है। इसके संकेत मिलने लगे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ट्रंप की ओर से प्रस्तावित जवाबी शुल्कों का मुकाबला करने के लिए इम्पोर्ट टैक्स में और कमी करने की योजना बना रहा है। यह जानकारी वित्त अधिकारियों ने दी है। पिछले हफ्ते वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुंबई में एक कार्यक्रम में कहा था कि ड्यूटी में कटौती और युक्तिकरण यानी रेशनलाइजेशन सतत प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका मकसद वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति को मजबूत करना है।
सीतारमण ने दिए थे संकेत
सीतारमण ने कहा था, हम एक निवेशक-अनुकूल देश बनने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसके चलते घोषित की गई शुल्क कटौती और युक्तिकरण एक सतत प्रक्रिया है और हम इसे करते रहेंगे। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ट्रेड पार्टनर्स पर प्रस्तावित रेसिप्रोकल टैरिट की प्रतिक्रिया के रूप में आया है। भारत की अपेक्षाकृत ऊंची टैरिफ दरें और अमेरिका के साथ 41 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष इसे ऐसे उपायों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील बनाता है।
आयात शुल्क कम करने पर विचार
वहीं,रिपोर्ट के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत शुरू हो गई है। इसके तहत, भारत कुछ खास अमेरिकी उत्पादों पर आयात शुल्क कम करने पर विचार कर रहा है। यह छूट उन उत्पादों पर दी जाएगी जिनका भारत में आयात बहुत कम मात्रा में होता है। इससे भारतीय उद्योगों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। इस कदम का मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना है। भारत सरकार ने इस बारे में ऑटो और ऑटो कलपुर्जों जैसे क्षेत्रों के हितधारकों से बातचीत शुरू कर दी है। इन क्षेत्रों में अमेरिकी आयात से घरेलू उद्योगों को कोई खतरा नहीं है।
भारत ने पहले ही बर्बन व्हिस्की पर शुल्क 150% से घटाकर 100% कर दिया है। इसके अलावा, 1 फरवरी के बजट में मछली हाइड्रोलाइसेट, विशिष्ट अपशिष्ट और स्क्रैप वस्तुओं, सैटेलाइट्स के लिए ग्राउंड इंस्टॉलेशन, ईथरनेट स्विच और मोटरसाइकिलों के आयात पर शुल्क में कटौती की घोषणा की गई थी। इन उपायों से अमेरिकी निर्यात को फायदा होगा। ये कदम इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को टैरिफ का दुरुपयोग करने वाला देश बताया था। साथ जवाबी शुल्क लगाने की धमकी दी थी।
किसे हो सकता है सबसे ज्यादा नुकसान?
अगर अमेरिका एक समान टैरिफ लगाता है तो भारतीय निर्यात को मौजूदा 2.8% के मुकाबले 4.9% का अतिरिक्त शुल्क झेलना पड़ सकता है। भारतीय कृषि निर्यात सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। झींगा, डेयरी और प्रोसेस्ड फूड आइटम पर 38.2% तक का शुल्क लग सकता है। अमेरिका और भारत के आयात शुल्क के बीच का अंतर रसायनों और फार्मास्यूटिकल्स के लिए 8.6% और ऑटोमोबाइल और ऑटो कलपुर्जों के लिए 23.1% है। जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, 'टैरिफ का अंतर जितना अधिक होगा, एक क्षेत्र उतना ही अधिक प्रभावित होगा।'
जीटीआरआई ने सुझाव दिया कि सरकार अमेरिका को 'शून्य-के-बदले-शून्य' टैरिफ रणनीति का प्रस्ताव दे ताकि वाशिंगटन के प्रस्तावित रेसिप्रोकल टैरिफ बढ़ोतरी को संबोधित किया जा सके। इसके तहत, भारत उन उत्पाद श्रेणियों की पहचान करेगा जहां वह घरेलू उद्योगों और कृषि को नुकसान पहुंचाए बिना अमेरिकी आयात के लिए शुल्क को समाप्त कर सकता है।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
