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मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने 18 महीनों का रिकॉर्ड तोड़ा, इकोनॉमी को लग सकता है बड़ा झटका
3 Mar, 2025 04:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इकोनॉमी के मोर्चे पर सरकार और देश को बड़ा झटका लगा है. इसका कारण है मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का डूबना. सेक्टर के जो आंकड़े सामने आए हैं, वो बेहद हैरान और परेशान करने वाले हैं. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के आंकड़े 14 महीनों के लोअर लेवल पर पहुंच गए हैं. जानकारी के अनुसार प्रोडक्शन में कमी की वजह से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में गिरावट देखने को मिली है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर आंकड़े किस तरह के देखने को मिले हैं.
14 महीनों के लोअर लेवल पर
नए ठेके और प्रोडक्शन ग्रोथ में कमी के बीच फरवरी में भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि दर 14 महीने के निचले स्तर पर आ गई. मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी भारत विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) फरवरी में 56.3 अंक पर रहा, जो जनवरी के 57.7 अंक से कम है. हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई ‘विस्तारकारी’ क्षेत्र में बना हुआ है. पीएमआई की भाषा में 50 से ऊपर अंक विस्तार को दर्शाता है, जबकि 50 से नीचे का अंक गतिविधियों में संकुचन का संकेत है.
फरवरी में पॉजिटिव रहा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर
हालांकि, दिसंबर 2023 के बाद से उत्पादन वृद्धि सबसे कमजोर स्तर पर आ गई है, लेकिन भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कुल मिलाकर गति फरवरी में व्यापक रूप से सकारात्मक रही. सर्वेक्षण में कहा गया कि जनवरी के 14 साल के उच्चतम स्तर से कम होने के बावजूद विस्तार की गति तेज थी. सर्वेक्षण में यह भी कहा गया कि फरवरी में नए निर्यात ऑर्डर में जोरदार वृद्धि हुई, क्योंकि निर्माताओं ने अपने माल की मजबूत वैश्विक मांग का लाभ उठाना जारी रखा. नौकरी के मोर्चे पर, विनिर्माताओं ने फरवरी में अपने कर्मचारियों की संख्या में विस्तार करना जारी रखा.
जनवरी में भी गिरा था सेक्टर
फरवरी के आंकड़ों से पता चला है कि नए बिजनेस इंटेक में लगातार 44वीं वृद्धि हुई है, जिसे पैनल के सदस्यों ने मजबूत ग्राहक मांग और अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में बेहतर कीमत देने के प्रयासों से जोड़ा है. गिरावट के बावजूद, क्षेत्र ने मजबूत घरेलू और वैश्विक मांग के समर्थन से विस्तारवादी गति बनाए रखी. जनवरी में, मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 57.7 पर रहा, जो पिछले महीने के 12 महीने के निचले स्तर 56.4 से तेजी से सुधार हुआ. यह वृद्धि लगभग 14 वर्षों में निर्यात में सबसे तेज उछाल और पिछले जुलाई के बाद से सबसे तेज गति से बढ़े नए ऑर्डरों के कारण हुई.
जीडीपी में उछाल
वित्त वर्ष 2024-25 (Q3 FY25) की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 6.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो पिछली तिमाही की 5.6 प्रतिशत की वृद्धि से अधिक है. यह वृद्धि वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट के सात-तिमाही के निचले स्तर 5.4 प्रतिशत पर गिरने के बाद आई है, जो अनुमान से काफी कम है. यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से बढ़े हुए सरकारी और उपभोक्ता खर्च, मजबूत खरीफ फसल उत्पादन और ग्रामीण मांग में पुनरुद्धार से प्रेरित थी.
रुपए का जबरदस्त पलटवार, डॉलर के गिरावट का नया दौर शुरू!
3 Mar, 2025 03:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पिछले हफ्ते आई गिरावट को पीछे छोड़ते हुए रुपए ने सोमवार को जबरदस्त वापसी करते हुए डॉलर की दीवार को गिरा दिया. रुपए में आज अच्छी तेजी देखने को मिल रही है. रिपोर्ट के अनुसार डॉलर इंडेक्स में गिरावट का माहौल देखने को मिल रहा है. वहीं दूसरी ओर भारत की तीसरी तिमाही के जीडीपी के आंकड़े काफी बेहतर देखने को मिले हैं. जिसकी वजह से रुपए में डॉलर के मुकाबले तेजी देखने को मिल रही है. ताज्जुब की बात तो ये है कि करीब तीन हफ्ते पहले जब रुपए ने अपना लाइफ टाइम लो का लेवल बनाया था, वो उसके बाद दोहराया नहीं है. वो भी तब जब पिछले हफ्ते रुपए में पांचों दिन गिरावट देखने को मिली थी. आइए आंकड़ों से समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर रुपए में किस तरह की और कितनी तेजी देखने को मिल रही है.
रुपए में तेजी
सोमवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 9 पैसे बढ़कर 87.28 पर पहुंच गया क्योंकि अमेरिकी डॉलर इंडेक्स हाई लेवल से नीचे आ गया है और घरेलू इक्विटी बाजारों ने मजबूत व्यापक आर्थिक आंकड़ों के बाद कुछ सुधार का संकेत दिया. विदेशी मुद्रा व्यापारियों के अनुसार, विदेशी पूंजी की निकासी रुकने की उम्मीद है क्योंकि शुक्रवार को जारी नवीनतम सरकारी आंकड़ों से पता चला है कि अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में देश की अर्थव्यवस्था में 6.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो क्रमिक रूप से सात-तिमाही के निचले स्तर से उबर रही है. हालांकि, अमेरिकी टैरिफ से उत्पन्न अस्थिरता जारी रही, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई और घरेलू मुद्रा में तेज वृद्धि हुई, उन्होंने कहा. इंटरबैंक फॉरेन करेंसी एक्सचेंज मार्केट में रुपया 87.36 पर खुला और अमेरिकी करेंसी के मुकाबले 9 पैसे बढ़कर 87.28 पर पहुंच गया. शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 19 पैसे गिरकर 87.37 पर बंद हुआ.
गिरते बाजार में 39 रुपए का स्टॉक बना करोड़पति, 1 लाख हो गए 2.22 करोड़!
3 Mar, 2025 03:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अगर आप शेयर बाजार से कमाई करते हैं तो ये खबर आपके लिए किसी जैकपॉट से कम नहीं है. शेयर बाजार में वैसे तो निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है लेकिन कई बार इसमें कई स्टॉक्स ऐसे निकल जाते हैं जो आपको मालामाल कर देते हैं. आज हम जिस स्टॉक के बारे में बात करने जा रहे हैं उसने निवेशकों को करोड़पति बना दिया है. ये ऐसा स्टॉक्स है कि अगर किसी ने इसमें 1 लाख का निवेश किया हो तो इसकी रकम आज करोड़ों में है.
सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड ने पिछले 16 वर्षों में अपने निवेशकों को मल्टीबैगर रिटर्न दिया है. अगर किसी निवेशक ने 16 साल पहले इस कंपनी के शेयरों में ₹1 लाख का निवेश किया होता, तो आज उसकी वैल्यू ₹2.22 करोड़ होती.
8774 के पार पहुंचा 39 रुपए वाला स्टॉक
साल 2009 में केवल 39 रुपये वाले स्टॉक की कीमत आज 8710 रुपये हो चुकी है. 16 साल पहले अगर इस स्टॉक में किसी ने एक लाख रुपये लगाए होते तो वो करोड़पति हो चुका है. दिग्गज ब्रोकरेज फर्म ICICI सिक्योरिटीज ने इस स्टॉक को BUY रेटिंग दी है. सोलर इंडस्ट्रीज के स्टॉक ने पिछले 10 साल में 4800 फ़ीसदी का रिटर्न दिया है. वहीं पिछले 5 साल में सोलर इंडस्ट्रीज के शेयरों ने निवेशकों को 650 फ़ीसदी का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है.
क्या काम करती है कंपनी
सोलर इंडस्ट्रीज कंपनी के काम की बात करें तो कंपनी प्रमुख तौर पर डिफेंस सेक्टर से जुडी हुई है. यह कंपनी डिफेंस सेक्टर के लिए हाई एनर्जी विस्फोटक, गोला बारूद और पाइरोस फ्यूज बनाती है. इसके अलावा कंपनी विस्फोटक से जुड़े हुए प्रोडक्ट विस्फोटक, डेटोनेटर, और डेटोनेटिंग कॉर्ड भी बनाती है.
तिमाही नतीजों में सोलर इंडस्ट्रीज का 55.2% बढ़कर मुनाफा 315 करोड़ हो गया है, जबकि पिछले साल कंपनी का मुनाफा 203 करोड़ था. इसी दौरान कंपनी की कमाई 38% बढ़कर ₹1,973 करोड़ पार हो गई है.
Disclaimer: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. यहां हमने आपको सिर्फ स्टॉक की जानकारी दी है. किसी भी स्टॉक में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर ले लें.
हाईकोर्ट का अहम फैसला: SEBI की पूर्व प्रमुख माधवी पुरी बुच के खिलाफ FIR पर लगाई रोक
3 Mar, 2025 03:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को एसीबी से कहा कि सेबी की पूर्व चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच और पांच अन्य अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश पर चार मार्च तक कोई कार्रवाई न की जाए. बुच, बीएसई के प्रबंध निदेशक सुंदररमन राममूर्ति और चार अन्य अधिकारियों ने उन पर दर्ज प्राथमिकी के आदेश के खिलाफ सोमवार को बंबई उच्च न्यायालय का रुख किया था.
मुंबई स्थित भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की विशेष अदालत ने शनिवार को शेयर बाजार में कथित धोखाधड़ी और विनियामकीय उल्लंघन के संबंध में बुच और पांच अन्य अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया था. बुच और अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति एस जी डिगे की एकल पीठ ने कहा कि याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई होगी और तब तक एसीबी की विशेष अदालत के आदेश पर कार्रवाई नहीं होगी.
ACB कोर्ट के आदेश को रद्द करने की मांग
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता बुच और सेबी के तीन मौजूदा पूर्णकालिक निदेशकों – अश्विनी भाटिया, अनंत नारायण जी और कमलेश चंद्र वार्ष्णेय की ओर से पेश हुए. वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुंदररमन राममूर्ति और इसके पूर्व चेयरमैन और जनहित निदेशक प्रमोद अग्रवाल की ओर से पेश हुए. याचिकाओं में विशेष अदालत के आदेश को अवैध और मनमाना बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की गई.
क्या था मामला, जिसमें दर्ज होगी FIR
अमेरिकी रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग ने 2024 के आखिर में तत्कालीन SEBI प्रमुख माधवी पुरी बुच के खिलाफ एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें दावा किया गया था कि, अडानी ग्रुप के विदेशी फंड में सेबी चीफ माधवी पुरी बुच और उनके पति की हिस्सेदारी है. साथ ही इस रिपोर्ट में अडानी ग्रुप और सेबी के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया गया था.
आरोपों का किया खंडन
हिंडनबर्ग के इन आरोपों पर माधवी पुरी बुच और उनके पति ने प्रतिक्रिया देते हुए कहां कि ये सभी आरोप बेबुनियाद हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हमने कोई भी जानकारी छुपाई नहीं है और हिंडनबर्ग के आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है.
अडानी ग्रुप ने दी थी ये प्रतिक्रिया
हिंडनबर्ग द्वारा तत्कालीन सेबी प्रमुख माधवी पुरी बुच और अडानी ग्रुप के बीच मिलीभगत के आरोपों पर अडानी ग्रुप ने प्रतिक्रिया देते हुए इन सभी आरोपों को आधारहीन बताया था. साथ ही अडानी ग्रुप की ओर से कहा गया था कि ये मुनाफा कमाने और बदनाम करने की साजिश है.
प्राइवेट कंपनियों में अब इस काम के लिए इस्तेमाल होगा आधार, सरकार से मिली मंजूरी
2 Mar, 2025 07:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत सरकार ने प्राइवेट ऑर्गेनाइजेशन के मोबाइल ऐप्स में आधार-इनेबल फेस ऑथेंटिकेशन को शामिल करने की अनुमति दे दी है। इससे यूजर्स के लिए आईडेटिटी वेरिफिकेशन को आसान, सिक्योर और आसान बनाया जा सकेगा। यह कदम डिजिटल लेनदेन को सुगम बनाने, सेवाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने और इजी आफ लाइफ बढ़ाने में मदद करेगा। इससे हॉस्पिटैलिटी, हेल्थकेयर, क्रेडिट रेटिंग ब्यूरो, ई-कॉमर्स, एजुकेशनल इंस्टीट्यूट और एग्रीगेटर सेवा प्रोवाइडर्स जैसे कई क्षेत्रों को लाभ मिलेगा। इस अपडेट के बाद, प्राइवेट कंपनियां आधार फेस ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल अब कस्टमर ऑनबोर्डिंग, ई-केवाईसी वेरिफिकेशन, एग्जाम रजिस्ट्रेशन और इंप्लॉई अंटेंडेंस मार्क सकते है। यह बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन यूजर्स को तेज, सिक्योर और झंझट मुक्त सेवा प्रदान करेगा, जिससे ओटीपी (ओटीपी) या दस्तावेजों पर डिपेंडेंसी कम होगी। मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (मेरिटी) के अनुसार, यह फैसला आधार ऑथेंटिकेशन फॉर गुड गवर्नेंस संशोधन नियम, 2025 के तहत लिया गया है।
इसका उद्देश्य सुशासन और सेवा वितरण में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना है। मेरिटी ने आधार गुड गवर्नेंस पोर्टल भी लॉन्च किया है, जहां ऑथेंटिकेशन सेवाओं के लिए एप्लीकेशन और ऑनबोर्डिंग प्रोसेस से जुड़ी गाइडलाइन उपलब्ध कराई गई हैं। इस पोर्टल को मेरिटी के सेक्रेटरी एस. कृष्णन द्वारा लॉन्च किया गया। इस मौके पर यूआईडीएआई के सीईओ भुवनेश कुमार, एनआईसी के डायरेक्टर जनरल इंदर पाल सिंह सेठी, यूआईडीएआई के डीडीजी मनीष भारद्वाज और अमोद कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मेरिटी सेक्रेटरी एस. कृष्णन ने कहा कि इस पोर्टल के लॉन्च और अन्य प्रोसेस को सुगम बनाने में काम करता है। आधार की मदद से भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी मदद मिल रही है। आधार कार्ड की मदद से गुड गवर्नेंस पोर्टल को दुरुस्त किया जा रहा है।
आधार करेक्शन एक जरूरी प्रोसेस है। अगर आप भी आधार कार्ड करेक्शन करना चाहते हैं तो हम इसके बारे में बताने जा रहे हैं। आधार कार्ड करेक्शन की लिमिट भी तय की गई है। अगर आप मोबाइल नंबर अपडेट करना चाहते हैं तो इसके लिए कोई लिमिट नहीं रखी गई है। यानी आप अनलिमिटेड टाइम इसे करेक्ट कर सकते हैं। नाम को भी आधार कार्ड में अपडेट किया जा सकता है। लेकिन ये करेक्शन महज 2 बार हो सकती है। लेकिन इसके लिए आपको सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट देना होगा। डेट ऑफ बर्थ चेंज करने की बात करें तो आप इसे सिर्फ 1 बार बदल सकते हैं। एड्रेस को लेकर कोई डेडलाइन तय नहीं की गई है। इसे आप कितनी भी बार बदल सकते हैं। इसके लिए आपको सिंपल करेक्शन प्रोसेस फॉलो करना होगा।
बैंकों ने ग्राहकों से हिडेन चार्जेज से वसूले 11 हजार करोड़: क्रेड सीईओ
2 Mar, 2025 06:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । भारतीय फिनटेक ऐप क्रेड ने खुलास किया है कि बैंकों ने ग्राहकों से हिडेन चार्जेज लगाकर 11 हजार करोड़ रुपये वसूल लिए हैं। क्रेड के सीईओ कुणाल शाह ने बताया कि उनका फिनटेक प्लेटफॉर्म ने पिछले साल ही 11,000 करोड़ रुपये के हिडेन शुल्क और लेट फीस प्रस्तुत की। फिर भी उन्होंने एक नया टूल्स का उद्घाटन किया है जिसका मकसद क्रेडिट कार्ड के उपभोक्ताओं के लिए क्रेडिट की प्रबंधन प्रक्रिया को सुधारना है। इस नए फीचर में क्रेड प्रोटेक्ट भी शामिल है, जो हिडेन चार्जेज और बिलिंग त्रुटियों को संबोधित करता है। यह विसंगति पहचान प्रणाली अनधिकृत शुल्क, गलत ब्याज शुल्क और अप्रत्याशित शर्तों का पता लगाने में मदद करती है। क्रेड का मिशन है लोगों के लिए क्रेडिट के प्रयोग को सरल और अधिक सहज बनाना, जो उन्हें वित्तीय स्वतंत्रता और संबंधितता प्रदान करता है। कुणाल शाह ने व्यवसाय की इस दिशा को दर्शाने में सवालबार्ड के साथ उनके सहयोग का भी जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्रेड नहीं सिर्फ क्रेडिट को सरल बना रहा है, बल्कि लोगों की वित्तीय स्वतंत्रता को बढ़ावा दे रहा है।
जीएसटी कलेक्शन फरवरी में बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रहा
2 Mar, 2025 05:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । भारत का गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) कलेक्शन फरवरी में सालाना आधार पर 9.1 प्रतिशत बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपये हो गया है। हाल ही में जारी हुए सरकारी डेटा से यह जानकारी मिली। यह लगातार 12वां महीना है, जब जीएसटी कलेक्शन 1.7 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है। कलेक्शन में वृद्धि की वजह घरेलू स्तर पर जीएसटी राजस्व 10.2 प्रतिशत बढ़ना है, जो कि फरवरी में 1.42 लाख करोड़ रुपये रहा है। हालांकि, आयात पर लगने वाले से आय 5.4 प्रतिशत बढ़कर 41,702 करोड़ रुपये रही है। फरवरी में सेंट्रल जीएसटी कलेक्शन 35,204 करोड़ रुपये, स्टेट जीएसटी कलेक्शन 43,704 करोड़ रुपये और इंटीग्रेटेड जीएसटी कलेक्शन 90,870 करोड़ रुपये रहा है। वहीं बीते महीने 13,868 करोड़ रुपये का सेस एकत्रित किया गया है। रिफंड को निकाल दिया जाए तो फरवरी 2025 में शुद्ध जीएसटी कलेक्शन 8.1 प्रतिशत बढ़कर 1.63 लाख करोड़ रुपये रहा है। बीते महीने 20,889 करोड़ रुपये का रिफंड जारी किया गया है, जो कि पिछले साल की समान अवधि से 17.3 प्रतिशत अधिक था। कलेक्शन में कमी की वजह फरवरी में 28 दिनों का होना था। भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी देखने को मिल रही है। देश की रियल जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही में बढ़कर 6.2 प्रतिशत हो गई है, जो कि इससे पहले की तिमाही में 5.6 प्रतिशत (संशोधित अनुमान) थी। सरकार द्वारा जारी किए गए अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इस दौरान चालू वित्त वर्ष के लिए नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 9.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
भारत में कोयला उत्पादन में 5.73 फीसदी की वृद्धि
2 Mar, 2025 04:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । भारत में कोयला उत्पादन अप्रैल से फरवरी अवधि में 5.73 फीसदी की वृद्धि दर्शाता है। इसके अनुसार, प्रतिवर्ष कोयला सेक्टर में मजबूत वृद्धि को दर्ज किया गया है। मंत्रालय ने बताया कि सालाना आधार पर कोयले का समुदायिक उत्पादन 929.41 मिलियन टन पर पहुंच गया है, जो पिछले साल के 880.92 मिलियन टन की तुलना में है। मंत्रालय के अनुसार यह सुनिश्चित करता है कि देश बढ़ती मांग को संतुलित रूप से पूरा करता है। सरकार इस सकारात्मक गति को बनाए रखने के लिए बुनियादी ढांचे के विकास और परिचालन दक्षता को बढ़ा रही है। केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने बताया कि सरकार कोयला परियोजनाओं की मंजूरी में सुधार के लिए कदम उठा रही है। इसके अतिरिक्त कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) ने एक गृहणियों के लिए प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। यह पहल गृहणियों को प्राथमिक देखभाल के बारे में जागरूक करने का उद्देश्य रखती है। इस बाबत, एनसीएल की योजना है कि जून तक 8,000 गृहणियों को प्राथमिक देखभाल करेगा।
भारत आने से पहले अमेरिका में एलन मस्क के खिलाफ 50 से ज्यादा विरोध प्रदर्शन
2 Mar, 2025 02:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टेस्ला: अभी एलन मस्क और उनकी कंपनी टेस्ला की एंट्री भारत में हुई भी नहीं है और अमेरिका में एलन मस्क के खिलाफ विरोध शुरू हो गया है. ताज्जुब की बात तो ये है कि एलन मस्क के खिलाफ एक ही दिन में अमेरिका में 50 से ज्यादा विरोध प्रदर्शन हुए हैं. अमेरिका में टेस्ला स्टोर्स के बाहर प्रदर्शन होना कोई छोटी घटना नहीं है. सोमवार को कंपनी के शेयरों में गिरावट देखने को मिल सकती है. लेकिन एलन मस्क का ये विरोध उनके या उनकी कंपनी के भारत में आने का नहीं है. फिर से ऐसी कौन सी वजह है, जिसकी वजह से एलन मस्क को अमेरिकी जनता का विरोध झेलना पड़ रहा है. आइए आपको भी बताते हैं.
एलन मस्क का इसलिए हुआ विरोध
प्रदर्शनकारियों ने संघीय खर्च में कटौती के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रयासों के तहत अरबपति कारोबारी एलन मस्क द्वारा उठाए गए कदमों के खिलाफ देशभर में टेस्ला के स्टोर के बाहर प्रदर्शन किए. उदारवादी समूह कई सप्ताह से टेस्ला के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं ताकि कार कंपनी की सेल्स पर नकारात्मक प्रभाव डाला जा सके और मस्क के सरकारी कार्यदक्षता विभाग का विरोध तेज किया जा सके तथा राष्ट्रपति पद के चुनाव में ट्रंप की नवंबर की जीत से अब भी हतोत्साहित डेमोक्रेटिक पार्टी में ऊर्जा भरी जा सके.
अभी और होगा विरोध
शनिवार को बोस्टन में विरोध करने वाले मैसाचुसेट्स के 58 वर्षीय पारिस्थितिकी विज्ञानी नाथन फिलिप्स ने कहा कि हम एलन से बदला ले सकते हैं. हम हर जगह शोरूम में जाकर, टेस्ला का बहिष्कार करके कंपनी को सीधे आर्थिक नुकसान पहुंचा सकते हैं. मस्क ट्रंप के निर्देश पर संघीय खर्च और वर्कफोर्स में भारी कटौती करने के लिए कदम उठा रहे हैं और उनका तर्क है कि ट्रंप की जीत ने राष्ट्रपति एवं उन्हें अमेरिकी सरकार के पुनर्गठन का जनादेश दिया है. टेस्ला टेकडाउन वेबसाइट पर शनिवार को 50 से अधिक प्रदर्शनों की सूची दी गई तथा मार्च में और भी प्रदर्शन किए जाने की योजना है.
शेयरों में कितनी आई गिरावट
अगर बात मौजूदा साल की करें तो दुनिया की सबसे बड़ी ईवी कंपनियों में से एक टेस्ला के शेयरों में की गिरावट देखने को मिल सकता है. आंकड़ों के अनुसार टेस्ला के शेयरों में मौजूदा साल में 86.23 डॉलर यानी करीब 23 फीसदी की गिरावट देखने को मिल चुकी है. जिसकी वजह से कंपनी के मार्केट कैप को भी नुकसान हो चुका है. जानकारों की मानें तो टेस्ला की सेल्स में कमी आने की वजह से टेस्ला के शेयरों में गिरावट देखने को मिल रही है. अब देखना दिलचस्प होगा कि ये विरोध टेस्ला की सेल्स में कितना असर डाल सकता है.
बाजार में सुस्ती का माहौल, अगले हफ्ते आईपीओ और लिस्टिंग से क्या होगा असर?
2 Mar, 2025 09:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अगले हफ्ते शेयर बाजार में सुस्ती के संकेत मिलने अभी से शुरू हो गए हैं. आपको इसका अंदाजा इस बात से लग जाएगा कि प्राइमरी मार्केट में एक भी आईपीओ लाइन में नहीं है. जबकि एसएमई सेगमेंट में सिर्फ एक आईपीओ ही ओपन होगा. वहीं दूसरी ओर 4 कंपनियों की लिस्टिंग जरूर देखी जाएगी. बीते 5 महीनों से शेयर बाजार में गिरावट का माहौल देखने को मिल रहा है सेंसेक्स और निफ्टी दोनों 13 फीसदी से ज्याटा टूट चुके हैं. लाइफ टाइम हाई से बाजार 16 फीसदी से ज्यादा नीचे आ चुका है. यही वजह है कि कंपनियां शेयर बाजार में अपना आईपीओ लाने में हिचकिचा रही हैं. आइए आपको भी बताते प्राइमरी और सेकंडरी मार्केट में किन कंपनियों का जलवा देखने को मिल सकता है.
इस कंपनी का आएगा आईपीओ
NAPS ग्लोबल इंडिया अपना IPO 11.88 करोड़ रुपए फिक्स्ड प्राइस इश्यू के रूप में लॉन्च करेगा. ऑफर में 13.20 लाख शेयर शामिल हैं और यह एक फ्रेश इश्यू है. यह 4 से 6 मार्च तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहेगा. आवंटन को 7 मार्च को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है, और बीएसई एसएमई पर लिस्टिंग अस्थायी रूप से 11 मार्च, 2025 के लिए निर्धारित है. इस बीच, चार अन्य एसएमई – बालाजी फॉस्फेट्स लिमिटेड, बीजासन एक्सप्लोटेक लिमिटेड, न्यूक्लियस ऑफिस सॉल्यूशंस लिमिटेड और श्रीनाथ पेपर प्रोडक्ट्स लिमिटेड – इस सप्ताह मार्केट में अपना डेब्यू करेंगे.
इन कंपनियों का भी शेयर बाजार में होगा डेब्यू
बालाजी फॉस्फेट्स आईपीओ 50.11 करोड़ रुपये का बुक-बिल्ट इश्यू है. इसमें 41.58 करोड़ रुपये मूल्य के 59.40 लाख शेयरों का ताजा अंक और 8.53 करोड़ रुपये मूल्य के 12.18 लाख शेयरों का ओएफएस शामिल है. आईपीओ 28 फरवरी को खुला था और 4 मार्च को बंद होगा. कंपनी काा डेब्यू 7 मार्च को . आईपीओ के लिए मूल्य दायरा 66 रुपए से 70 रुपये प्रति शेयर निर्धारित किया गया है.
न्यूक्लियस ऑफिस सॉल्यूशंस ने 31.7 करोड़ रुपए का आईपीओ लॉन्च किया, जिसमें 13.55 लाख शेयरों का ताजा इश्यू शामिल है. बोली प्रक्रिया 24 फरवरी से 27 फरवरी तक चली. शेयरों के आवंटन को 28 फरवरी को अंतिम रूप दिया गया और आईपीओ 4 मार्च को बीएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होने वाला है.
श्रीनाथ पेपर प्रोडक्ट्स का आईपीओ 23.36 करोड़ रुपए का है और इसमें 53.1 लाख शेयरों का फ्रेश इश्यू शामिल है. बोली प्रक्रिया 25 फरवरी से 28 फरवरी तक चली. शेयरों के आवंटन को 3 मार्च को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है, और बीएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग 5 मार्च को होने की उम्मीद है.
टेस्ला का पहला शोरूम दिल्ली में नहीं, इस शहर में खुलने जा रहा है – जानें किराया!
2 Mar, 2025 09:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टेस्ला: दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलन मस्क भारत में आने को पूरी तरह से तैयार हैं. उन्होंने ये भी डिसाइड कर लिया है कि उनका पहला शोरूम कहां होगा? अगर आप सोच रहे हैं कि टेस्ला अपना पहला शोरूम दिल्ली में खोलने जा रहे हैं, तो आप गलत हैं. टेस्ला अपना पहला स्टोर या यूं कहें कि शोरूम मुंबई में खोलने जा रहा है. टेस्ला के अधिकारियों ने जगह की तलाश कर ली है और जल्द ही ओपन भी हो जाएगा. इससे पहले टेस्ला ने दिल्ली, मुंबई और बाकी इलाकों के लिए 13 पदों पर जॉब निकाली थी. उसके बाद से तय हो गया था कि टेस्ला अब भारत में आने को तैयार है. उसके बाद शोरूम खोलने और बाकी अपडेट आना शुरू हुए थे. आइए आपको भी इस बारे में पूरी जानकारी देते हैं.
कहां होगा पहला शोरूम
एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बाजार में अपनी बहुप्रतीक्षित एंट्री की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, अमेरिकी इलेक्ट्रिक वाहन दिग्गज टेस्ला ने मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) में अपना पहला शोरूम स्थापित करने की बड़ी डील की है. कथित तौर पर यह लीज एग्रीमेंट समझौता देश में किसी कमर्शियल स्थान के लिए सबसे बडा लीज एग्रीमेंट में से एक होगा.
रिपोर्ट में कहा गया है कि टेस्ला बीकेसी में एक कमर्शियल टॉवर के बेसमेंट पर 4,000 वर्ग फुट की जगह लेगी, जहां वह अपने कार मॉडल प्रदर्शित करेगी. मासिक लीज किराया लगभग 900 रुपए प्रति वर्ग फुट है, जो लगभग 35 लाख रुपए प्रति माह है. लीज पांच साल की अवधि के लिए तय की गई है.
टेस्ला दिल्ली के एयरोसिटी में एक और शोरूम खोलने की भी योजना बना रही है. टेस्ला के सीईओ एलोन मस्क की वाशिंगटन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के कुछ ही हफ्तों बाद इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया, जिसके बाद कंपनी ने भारत में 13 नौकरियों की रिक्तियां पोस्ट कीं, जो भारतीय बाजार में प्रवेश करने की अपनी नई योजनाओं का दृढ़ता से संकेत देती हैं.
भारत कर रहा टेस्ला को मजबूर
फरवरी में हाल के घटनाक्रम से पता चलता है कि टेस्ला आने वाले महीनों में भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर चल रही चर्चाओं के अनुरूप लॉन्च के लिए तैयार हो सकता है, जिसकी घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ मोदी की बैठक के बाद की गई थी. भारत वर्तमान में वाहनों पर 110 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी लगाता है, ट्रम्प द्वारा उठाए गए विवाद का एक मुद्दा, जिन्होंने तर्क दिया कि इतने हाई टैरिफ टेस्ला को देश में एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने के लिए मजबूर किया जा रहा है.
भारत में कार बेचना मुश्किल : ट्रंप
हाल ही में एक साक्षात्कार में, ट्रम्प ने कहा कि अगर टेस्ला इन टैरिफ को दरकिनार करने के लिए भारत में एक कारखाना स्थापित करता है, तो यह अमेरिका के लिए “अनुचित” होगा. उन्होंने कहा था कि दुनिया का हर देश हमारा फायदा उठाता है और वे टैरिफ लगाकर ऐसा करते हैं… व्यावहारिक रूप से, उदाहरण के तौर पर, भारत में कार बेचना असंभव है. इस बीच, मस्क कम टैरिफ की वकालत कर रहे हैं, जिससे भारत सरकार को उनकी प्रतिक्रिया के आधार पर एक नई नीति का मसौदा तैयार करने पर विचार करना पड़ा.
टेस्ला इंडिया ने निकाली रिक्तियां
टेस्ला ने भारत में नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी है. इलेक्ट्रिक वाहन कंपनी ने कस्टमर सर्विस, ऑपरेशन और सेल्स भूमिकाओं को कवर करते हुए लिंक्डइन पर 13 नौकरी के अवसर सूचीबद्ध किए हैं. इनमें से पांच पद मुंबई और दिल्ली दोनों में उपलब्ध हैं, जबकि बाकी मुंबई में स्थित हैं. टेस्ला ने भारत में सेल्स, ऑपरेशन, टेक्नीकल सपोर्ट और कस्टमस सर्विस सहित डिफ्रेंट डिपार्टमेंट में 13 पदों का विज्ञापन दिया है. जिसमें इनसाइड सेल्स एडवाइजर, टेस्ला एडवाइजर, सर्विस एडवाइजर, ऑर्डर ऑपरेशंस स्पेशलिस्ट, सर्विस मैनेजर, स्टोर मैनेजर, पार्ट एडवाइजर, बिजनेस ऑपरेशंस एनालिस्ट, सर्विस टेकनीशियन, कंज्यमर एंगेजमेंट मैनेजर, कस्टमर सपोर्ट एडवाइजर, डिलिवरी ऑपरेशंस स्पेशलिस्ट शामिल हैं.
भारत में टेस्ला की कीमत
एक रिपोर्ट के अनुसार, टेस्ला बर्लिन से कारों को इंपोर्ट करने और शुरुआत में उन्हें भारत में बेचने पर विचार कर रही है. टेस्ला की शुरुआती योजना भारत में 25,000 डॉलर से कम कीमत में ईवी लाने की है. अमेरिका में टेस्ला कारों की कीमत फैक्ट्री लेवल पर 35,000 डॉलर (लगभग 30.4 लाख रुपए) से शुरू होती है. टेस्ला मॉडल 3 अमेरिका में कंपनी की सबसे सस्ती कार है. रिपोर्ट में कहा गया था कि मस्क ने अभी तक भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने की प्रतिबद्धता नहीं जताई है, लेकिन कहा जा रहा है कि टेस्ला भारत से एक अरब डॉलर से अधिक के कंपोनेंट की सोर्सिंग कर रही है और आने वाले महीनों में यह आंकड़ा काफी बढ़ने की उम्मीद है.
RBI ने दो हजार रुपए के नोट पर दिया चौंकाने वाला बयान, जनता के लिए क्या है खास?
2 Mar, 2025 08:49 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आरबीआई: दो हजार रुपए के नोटों को बैन हुए करीब दो साल होने को हैं. उसके बाद भी आरबीआई या यूं कहें कि सरकार के पास अभी भी पूरे नोट नहीं पहुंचे हैं. दो फीसदी से कम 2000 रुपए के नोट अभी भी मार्केट में तैर रहे हैं. ताज्जुब की बात तो ये है कि इन दो हजार रुपए के नोटों की कोई वैल्यू नहीं रह गई है. मई 2023 में सरकार ने इन नोटों को पूरी तरह से सिस्टम से बाहर कर दिया था. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर आरबीआई की रिपोर्ट में किस तरह की बातें सामने निकलकर आई हैं.
दो हजार रुपए पर अपडेट
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शनिवार को कहा कि 2000 रुपए के 98.18 प्रतिशत नोट बैंकिंग प्रणाली में वापस आ गए हैं. अब सिर्फ 6,471 करोड़ रुपए मूल्य के ऐसे नोट जनता के पास हैं. रिजर्व बैंक ने 19 मई, 2023 को 2000 रुपए मूल्य के बैंक नोटों को प्रचलन से वापस लेने की घोषणा की थी. आरबीआई ने कहा कि 19 मई, 2023 को कारोबार बंद होने पर प्रचलन में मौजूद 2000 रुपए के बैंक नोटों का कुल मूल्य 3.56 लाख करोड़ रुपए था, जो 28 फरवरी, 2025 को कारोबार बंद होने पर घटकर 6,471 करोड़ रुपए रह गया. केंद्रीय बैंक ने बयान में कहा कि इस प्रकार 19 मई, 2023 तक प्रचलन में मौजूद 2000 रुपए के बैंक नोटों में से 98.18 प्रतिशत वापस आ चुके हैं.
यहां डिपोजिट करा सकते हैं नोट
दो हजार रुपए के नोट जमा करने और/या बदलने की सुविधा सात अक्टूबर, 2023 तक सभी बैंक शाखाओं में उपलब्ध थी. हालांकि, यह सुविधा अब भी रिजर्व बैंक के 19 निर्गम कार्यालयों में उपलब्ध है. आरबीआई के निर्गम कार्यालय नौ अक्टूबर, 2023 से व्यक्तियों और संस्थाओं से उनके बैंक खातों में जमा करने के लिए 2000 रुपए के बैंक नोट स्वीकार कर रहे हैं. इसके अलावा, आम लोग देश के किसी भी डाकघर से भारतीय डाक के माध्यम से 2000 रुपए के नोट को अपने बैंक खाते में जमा कराने के लिए आरबीआई के किसी भी कार्यालय में भेज सकते हैं. दो हजार रुपए के नोट वैध मुद्रा बने रहेंगे.
Paytm ने ED के नोटिस पर दिया जवाब, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन में नहीं आएगी दिक्कत
1 Mar, 2025 09:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत की अग्रणी डिजिटल भुगतान और वित्तीय सेवा कंपनी पेटीएम को 28 फरवरी 2025 को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (फेमा) के कथित उल्लंघन को लेकर कारण बताओ नोटिस (SCN) प्राप्त हुआ. ये आरोप पेटीएम की मूल इकाई वन97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड (OCL) द्वारा अधिग्रहीत दो सहायक कंपनियों—लिटिल इंटरनेट प्राइवेट लिमिटेड (LIPL) और नियरबाय इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (NIPL)—से जुड़े हैं. कंपनी के अनुसार, ये कथित उल्लंघन मुख्य रूप से 2015 और 2019 के बीच उन लेन-देन से संबंधित हैं, जो पेटीएम के इन कंपनियों में निवेश करने से पहले हुए थे.
पेटीएम की प्रतिक्रिया
पेटीएम ने स्पष्ट किया कि वह कानूनी सलाह ले रही है और इस मामले को हल करने के लिए नियामक प्रक्रियाओं के अनुसार आवश्यक कदम उठा रही है. कंपनी ने अपने उपयोगकर्ताओं, व्यापारी भागीदारों और निवेशकों को आश्वस्त किया कि इस जांच का उसके दैनिक संचालन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. पेटीएम ऐप पर सभी सेवाएं पूरी तरह से चालू और सुरक्षित बनी रहेंगी.
पेटीएम ने यह भी कहा कि वह नियामक आवश्यकताओं के अनुरूप मामले को सुलझाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है. कंपनी का यह रुख भारत के वित्तीय और डिजिटल भुगतान क्षेत्र में उसकी जिम्मेदारी और पारदर्शिता को दर्शाता है.
बाजार पर संभावित प्रभाव
इस घटनाक्रम का पेटीएम के शेयर बाजार प्रदर्शन पर क्या असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा. हालांकि, पेटीएम का कहना है कि वह अपने मुख्य भुगतान और वित्तीय सेवाओं के व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित करते हुए अपनी कार्यक्षमता को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है.
पेटीएम द्वारा अधिग्रहित कंपनियों से जुड़े फेमा उल्लंघन के आरोपों का समाधान नियामक प्रक्रियाओं के तहत किया जाएगा. कंपनी की प्राथमिकता अपने उपभोक्ताओं और भागीदारों के लिए निर्बाध सेवाएं सुनिश्चित करना है. यह मामला डिजिटल भुगतान क्षेत्र में विनियामक अनुपालन के महत्व को भी उजागर करता है, जिससे भविष्य में कंपनियां अपने निवेश और अधिग्रहण से पहले अतिरिक्त सतर्कता बरत सकती हैं.
जीएसटी से सरकार को हुई छप्परफाड़ कमाई, हर मिनट कमाए 4.56 करोड़
1 Mar, 2025 09:43 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सरकार को फरवरी के महीने में जीएसटी से छप्परफाड़ कमाई हुई है. आंकड़ों को देखें तो मौजूदा वित्त वर्ष में 6वीं बार 1.80 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का जीएसटी कलेक्शन किया है. खास बात तो ये है कि फरवरी के महीने में हर रोज 4.56 करोड़ करोड़ रुपए की जीएसटी से कमाई की है. मौजूदा वित्त वर्ष के 11 महीनों में सरकार की जीएटी से कमाई 20 लाख करोड़ रुपए के पार चली गई है. आइए आपको भी बताते हैं आखिर फरवरी के महीने में सरकार ने जीएसटी से कुल कितनी कमाई की और मौजूदा वित्त वर्ष के हर महीने कितना पैसा जीएसटी से कमाया है.
सरकार को फरवरी के महीने में जीएसटी से छप्परफाड़ कमाई हुई है. आंकड़ों को देखें तो मौजूदा वित्त वर्ष में 6वीं बार 1.80 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का जीएसटी कलेक्शन किया है. खास बात तो ये है कि फरवरी के महीने में हर रोज 4.56 करोड़ करोड़ रुपए की जीएसटी से कमाई की है. मौजूदा वित्त वर्ष के 11 महीनों में सरकार की जीएटी से कमाई 20 लाख करोड़ रुपए के पार चली गई है. आइए आपको भी बताते हैं आखिर फरवरी के महीने में सरकार ने जीएसटी से कुल कितनी कमाई की और मौजूदा वित्त वर्ष के हर महीने कितना पैसा जीएसटी से कमाया है.
20 लाख करोड़ रुपए के पार
वहीं अगर बात वित्त वर्ष के 11 महीनों के कुल जीएसटी कलेक्शन की करें तो 20.13 लाख करोड़ रुपए हो चुका है. जानकारों की जाने तो मार्च के महीने के अनुमानित आंकड़े को जोड़ दिया जाए तो ये 22 लाख करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर सकता है. खास बात तो ये है कि वित्त वर्ष 2026 के बजट में जीएसटी कलेक्शन का टारगेट 22.6 लाख करोड़ रुपए रखा है, जिसपर सरकार आंकड़ा एक वित्त वर्ष पहले ही पहुंच चुका है. जानकारों की माने तो वित्त वर्ष 2026 में जीएसटी कलेक्शन आंकड़ा 25 से 27 लाख करोड़ रुपए के आंकड़े को छू सकता है.
रुपया पहुंचा 87 पार, देश या विदेश कहां मिलेगा एजुकेशन लोन में फायदा
1 Mar, 2025 09:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देश में शेयर बाजार में कोहराम मचा हुआ है. सभी कंपनियां हाय-तौबा, हाय तौबा कर रही हैं. बड़े से बड़े शेयर लाल हो गए हैं, इसके पीछे कई कारण हैं, लेकिन उन सब में रुपये का लगातार नीचे जाना एक प्रमुख कारक है. रुपया गिर रहा है, इससे मार्केट तो प्रभावित ही हो रहा है. इसके साथ ही विदेशों में पढ़ने वाले बच्चों पर भी असर पड़ रहा है. उनके लोन पर असर पड़ रहा है और उनके खर्च भी बढ़ रहे हैं. आइए विदेश में पढ़ने वाले बच्चों के आसरे आपको बताते हैं कि विदेश में पढ़ाई के लिए भारतीय रुपये में लोन लेना बेहतर होता है या फिर यूएसडी में लोन लेना सस्ता पड़ता है.
तीन साल पहले 27 फरवरी 2022 को एक अमेरिकी डॉलर 75.07 रुपये के बराबर था आज डॉलर के मजबूत होने से विनिमय दर बढ़कर 87 रुपये हो गई है. बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, रुपये के कमजोर होने से अमेरिका में पढ़ने वालों बच्चों का खर्च बढ़ गया है. रिपोर्ट के मुताबिक जिन बच्चों का खर्च 2022 में जो 52,54,900 रुपये हुआ करता था. वह साल 2025 में बढ़कर 60,90,000 रुपये सालाना हो गया है. आंकड़ों में साफ देखा जा सकता है कि 3 साल में खर्च में 8,35,100 रुपये की वृद्धि हुई है.
कौन सा लोन है बेहतर
जिन लोगों ने INR में लोन लिया है और अब अमेरिका में काम कर रहे हैं, उनके लिए रुपये में गिरावट उनकी क्रय शक्ति को बढ़ाती है, जिससे लोन चुकाना आसान हो जाता है. हालांकि, अभी भी पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए, INR के मामले में उच्च लागत वित्तीय तनाव बढ़ा सकती है. एक्सपर्ट आदिल शेट्टी ने कहा कि यदि कोई छात्र USD में ऋण लेता है, तो उसे डॉलर में ही चुकाना होगा. इसका मतलब यह है कि यदि INR का मूल्य कम होता है, तो INR में लोन चुकाने की राशि समय के साथ बढ़ती रहती है. उदाहरण के लिए, यदि विनिमय दर आज 80 रुपये प्रति USD है, लेकिन कुछ वर्षों बाद बढ़कर 90 रुपये प्रति USD हो जाती है, तो उसी डॉलर की राशि को चुकाने के लिए अधिक रुपये की आवश्यकता होगी. इसके विपरीत, भारतीय बैंक से INR ऋण स्थिर रहता है क्योंकि ऋण और पुनर्भुगतान दोनों एक ही मुद्रा में होते हैं.वहीं, कुहू एडु फिनटेक के संस्थापक और सीईओ प्रशांत ए भोंसले ने कहा कि मुद्रा में उतार-चढ़ाव के कारण कई लोगों के लिए अपनी शिक्षा के खर्चों का सटीक अनुमान लगाना और योजना बनाना मुश्किल हो जाता है, जिससे अक्सर लागत में अप्रत्याशित वृद्धि हो जाती है. जैसे-जैसे रुपये का मूल्य घटता है, भारतीय मुद्रा में ऋण की राशि बढ़ जाती है, जिसके परिणामस्वरूप ईएमआई बढ़ जाती है और लंबे समय में पैसे का बोझ बढ़ जाता है.
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
