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ट्रंप की 'शरण' में आसिम मुनीर...भारी विरोध के बावजूद अमेरिका उड़ान के पीछे क्या है मजबूरी? जानें पर्दे के पीछे की कहानी
17 Dec, 2025 12:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Asim Munir America Visit: पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पिछले 6 महीनों के अंदर तीसरी बार अमेरिका दौरे पर जा रहे हैं. इस दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी मुलाकात करेंगे. पाकिस्तान भले ही अमेरिका का विरोध करना चाहता हो लेकिन वह नजरअंदाज नहीं करना चाहता. क्योंकि उसे इसके परिणाम के बारे में बखूबी पता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से गाजा के लिए प्रस्तावित ‘स्टेबलाइजेशन फोर्स’ में पाकिस्तानी सेना की तैनाती को लेकर बातचीत हो सकती है, जिसमें वाशिंगटन पाकिस्तान पर लगातार दबाव बना रहा है. यह बातचीत आसिम मुनीर के करियर के लिए सबसे बड़ी परीक्षा मानी जा रही है.
दरअसल, अमेरिका चाहता है कि पाकिस्तान, गाजा के लिए प्रस्तावित ‘स्टेबलाइजेशन फोर्स’ में अपने सैनिकों की तैनाती करे. लेकिन यह फैसला आसिम मुनीर के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. क्योंकि अगर मुनीर ऐसा करते हैं तो विशेषज्ञों का मानना है कि यह पाकिस्तान के भीतर जबरदस्त राजनीतिक और धार्मिक प्रतिक्रिया को जन्म दे सकता है. इसलिए मुनीर के लिए यह फैसला किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है.
गाजा स्टेबलाइजेशन फोर्स पर बातचीत की उम्मीद
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, आसिम मुनीर अगले हफ्ते वॉशिंगटन जा सकते हैं. उनकी मुलाकात राष्ट्रपति से होना तय मानी जा रही है. आसिम मुनीर डोनाल्ड ट्रंप से गाजा स्टेबलाइजेशन फोर्स पर बातचीत कर बीच का रास्ता निकालने का प्रयास करेंगे. डोनॉल्ड ट्रंप ने गाजा प्लान के तहत मुस्लिम देशों की एक संयुक्त सेना को गाजा में तैनात करने की बात कही थी. जिसमें ट्रंप का मकसद था कि युद्ध के बाद संक्रमण काल में वहां पर फिर से निर्माण, आर्थिक बहाली और स्थिरता को बनाए रखने के लिए प्रयास करना है. क्योंकि बीते 2 सालों में इजरायली हमले से गाजा बुरी तरह से तबाह हो चुका है.
परमाणु हथियार वाला इकलौता मुस्लिम देश
पाकिस्तान दुनिया का इकलौता मुस्लिम ऐसा देश है, जिसके पास परमाणु हथियार है. इसी के दम पर वह बीच-बीच में उछल कूद करता रहता है. भारत के साथ भी पाक ने 3 बार युद्ध लड़ा. इसके अलावा वह अफगानिस्तान के इस्लामिस्ट आतंकियों के खिलाफ भी संघर्ष कर रहा है. रक्षा विशेषज्ञ आयशा सिद्दीकी के अनुसार, पाकिस्तान की सैन्य ताकतों की वजह से डोनाल्ड ट्रंप की दिलचस्पी रहती है. उन्हें लगता है कि पाक सेना लड़ने में सक्षम है. हालांकि आसिम मुनीर के अमेरिका जाने को लेकर पाकिस्तान की सेना, विदेश मंत्रालय और सूचना मंत्रालय की ओर से इस पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है.
इतना बड़ा घर होगा, तभी पाल सकेंगे पिटबुल-रोटवीलर और… देहरादून में नए बायलॉज लागू
17 Dec, 2025 11:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देहरादून: उत्तराखंड (Uttarakhand) की राजधानी देहरादून (Dehradun) में लगातार कुत्तों का हमला (Dog Attack) के केस (Case) बढ़ रहे हैं. इसे देखते हुए नगर निगम (Municipal Council) देहरादून ने पालतू और आवारा कुत्तों को लेकर नए सख्त बायलॉज लागू कर दिए हैं. ये नियम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में बनाए गए हैं, जिनका उद्देश्य शहर में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और कुत्तों के प्रति जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा देना है.
नए नियमों के तहत अब देहरादून में कुत्ता पालने के लिए नगर निगम से लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा. तीन महीने या उससे अधिक आयु के प्रत्येक पालतू कुत्ते का पंजीकरण जरूरी किया गया है, जिसकी वैधता एक वर्ष तक होगी. बिना रजिस्ट्रेशन कुत्ता पालने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी. यदि लाइसेंस अवधि के दौरान एंटी-रेबीज टीकाकरण की वैधता समाप्त हो जाती है, तो लाइसेंस स्वतः निरस्त माना जाएगा.
देहरादून नगर निगम ने खूंखार और आक्रामक नस्लों को लेकर विशेष सख्ती बरती है. पिटबुल, रोटवीलर, डोगो अर्जेंटीनो, अमेरिकन बुलडॉग समेत अन्य अति आक्रामक नस्लों के लिए 2000 रुपये वार्षिक लाइसेंस शुल्क तय किया गया है. ऐसे कुत्तों को पालने के लिए न्यूनतम 300 वर्ग गज क्षेत्रफल वाले घर की अनिवार्यता रखी गई है.
इसके अलावा, एक वर्ष की आयु पूरी होने के बाद इन कुत्तों की नसबंदी अनिवार्य होगी और उसका प्रमाण पत्र नगर निगम में जमा करना होगा. इन नस्लों की ब्रीडिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है. पहले से मौजूद कुत्तों के स्वामियों को तीन माह के भीतर खरीद और नसबंदी प्रमाण पत्र जमा करना होगा.
नए बायलॉज के अनुसार, पालतू कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों पर बिना पट्टा, मुंहबंद और निगरानी के ले जाना प्रतिबंधित रहेगा. खुले में शौच कराने पर चालानी कार्रवाई की जाएगी. कुत्ते के काटने की स्थिति में घायल की गंभीरता के अनुसार जुर्माना लगाया जाएगा, जबकि गंभीर मामलों में कुत्ते के स्वामी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कुत्ते की जब्ती भी की जा सकती है. अत्यधिक भौंकने की शिकायत पर नोटिस और चालान का प्रावधान भी किया गया है.
पांच या उससे अधिक कुत्ते पालने वालों के लिए निजी श्वान पशु शेल्टर अनिवार्य कर दिया गया है. इसके लिए उत्तराखंड पशु कल्याण बोर्ड की अनुमति, नगर निगम को सूचना और 1000 रुपये वार्षिक लाइसेंस शुल्क देना होगा। यदि शेल्टर आवासीय क्षेत्र के पास है, तो पड़ोसियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र भी जरूरी होगा।
आवारा कुत्तों के लिए नगर निगम कॉलोनियों और रेजिडेंट वेलफेयर सोसायटी में निर्धारित फीडिंग प्वाइंट बनाएगा. स्कूलों, धार्मिक स्थलों, भीड़भाड़ वाले इलाकों और कॉलोनियों के प्रवेश-निकास बिंदुओं पर कुत्तों को खाना खिलाने पर कार्रवाई की जाएगी. इन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नगर निगम जल्द ही जागरूकता अभियान भी चलाएगा.
सिडनी हमला: हैदराबाद का रहने वाला था शूटर साजिद अकरम, तेलंगाना पुलिस ने की पुष्टि
17 Dec, 2025 10:19 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हैदराबाद: ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में बॉन्डी बीच पर फायरिंग करने वाला शूटर साजिद अकरम मूल रूप से तेलंगाना के हैदराबाद का रहने वाला था. तेलंगाना पुलिस ने मंगलवार को इसकी पुष्टि की. पुलिस ने एक बयान में कहा कि साजिद अकरम 1998 में ऑस्ट्रेलिया चला गया था.
तेलंगाना के DGP की तरफ से एक प्रेस नोट में कहा गया कि साजिद और उसका बेटा नवीद अकरम के कट्टरपंथी बनने के पीछे जो कारण थे, उनका भारत या तेलंगाना में किसी स्थानीय प्रभाव से कोई लेना-देना नहीं लगता है. पुलिस ने कहा कि 1998 में ऑस्ट्रेलिया जाने से पहले भारत में रहने के दौरान साजिद अकरम के खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था. पुलिस ने बताया कि वह 27 वर्षों में सिर्फ छह बार भारत आया था.
तेलंगाना पुलिस का बयान
रविवार, 14 दिसंबर, 2025 को सिडनी के बॉन्डी बीच पर, दो हमलावरों द्वारा हनुक्का उत्सव के दौरान की गई गोलीबारी में कथित तौर पर 15 पीड़ितों और दो हमलावरों में से एक की मौत हो गई. ऑस्ट्रेलियाई पुलिस/सरकार इस घटना को आतंकवादी हमला मान रही है. हमलावरों की पहचान साजिद अकरम (50 साल) और उसके बेटे नवीद अकरम (24 साल) के रूप में हुई है. रिपोर्टों से पता चलता है कि दोनों ISIS की विचारधारा से प्रेरित थे. इस संबंध में ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी आगे की जांच कर रहे हैं.
साजिद अकरम मूल रूप से भारत के हैदराबाद के रहने वाला था. उसने हैदराबाद से B.Com की डिग्री पूरी की और लगभग 27 साल पहले, नवंबर 1998 में रोजगार की तलाश में ऑस्ट्रेलिया चला गया. बाद में उसने ऑस्ट्रेलिया में स्थायी रूप से बसने से पहले यूरोपीय मूल की महिला वेनेरा ग्रोसो से शादी कर ली. उनका एक बेटा नवीद (दो हमलावरों में से एक) और एक बेटी है. साजिद अकरम के पास आज भी भारतीय पासपोर्ट है और उसके बेटे नवीद अकरम और बेटी का जन्म ऑस्ट्रेलिया में हुआ था और वे ऑस्ट्रेलियाई नागरिक हैं.
भारत में उनके रिश्तेदारों से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले 27 सालों में साजिद अकरम का हैदराबाद में अपने परिवार से बहुत कम संपर्क था. ऑस्ट्रेलिया जाने के बाद वह छह बार भारत आया, मुख्य रूप से पारिवारिक कारणों से जैसे संपत्ति के मामले और अपने बुजुर्ग माता-पिता से मिलने. ऐसा समझा जाता है कि वह अपने पिता की मृत्यु के समय भी भारत नहीं आया था.
परिवार के सदस्यों ने उसकी कट्टरपंथी सोच या गतिविधियों, या उन परिस्थितियों के बारे में कोई जानकारी होने से इनकार किया है जिनके कारण वह कट्टरपंथी बना.
साजिद अकरम और उसके बेटे नवीद के कट्टरपंथी बनने के कारणों का भारत या तेलंगाना में किसी स्थानीय प्रभाव से कोई संबंध नहीं लगता है.
साल 1998 में भारत छोड़ने से पहले भारत में रहने के दौरान साजिद अकरम के खिलाफ तेलंगाना पुलिस के पास कोई गलत रिकॉर्ड नहीं है.
बयान में कहा गया है कि तेलंगाना पुलिस केंद्रीय एजेंसियों और अन्य समकक्षों के साथ, जब भी जरूरत होगी, सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही जनता और मीडिया से सत्यापित तथ्यों के बिना अटकलें लगाने या आरोप लगाने से बचने का आग्रह करती है.
साजिद अकरम ने अपने बेटे नवीद के साथ 14 दिसंबर को सिडनी के बॉन्डी बीच पर निर्दोष लोगों पर फायरिंग की थी, जब यहूदी समुदाय के लोग त्योहार मनाने के जमा हुए थे. इस आतंकवादी कृत्य में 15 लोग मारे गए. पुलिस की क्रॉसफायरिंग में साजिद मारा गया. गोली लगने से घायल नवीद अस्पताल में भर्ती है. साजिद के पास भारतीय पासपोर्ट था, जबकि उसका बेटा ऑस्ट्रेलियाई नागरिक है.
ऑस्ट्रेलिया में स्थाई रूप से बसने से पहले साजिद ने यूरोपीय मूल की एक ईसाई महिला वेनेरा ग्रोसो से शादी की थी. नवीद के अलावा, उसकी एक बेटी भी है. बेटा और बेटी ऑस्ट्रेलियन नागरिक हैं.
साजिद अकरम के परिवार वालों ने मीडिया को बताया कि उन्होंने वर्षों पहले उससे रिश्ते तोड़ लिए थे "क्योंकि उसने एक ईसाई महिला से शादी की थी". साजिद पुराने हैदराबाद शहर का रहने वाला था. परिवारिक सूत्रों ने मीडिया को बताया कि साजिद पिछले 27 वर्षों में कम से कम तीन बार भारत आया था, आखिरी बार वह 2022 में आया था.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, साजिद ने बॉन्डी बीच पर आतंकी हमले से कुछ हफ्ते पहले फिलीपींस जाने के लिए भारतीय पासपोर्ट का इस्तेमाल किया था. उसके नवीद ने विदेश यात्रा के ऑस्ट्रेलियाई यात्रा दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था.
यूपी के कौशांबी से शौर्य मिश्रा गिरफ्तार, फेक पोस्ट शेयर करने पर गुरुग्राम पुलिस ने पकड़ा, भाजपा युवा मोर्चे का जिला उपाध्यक्ष होने का दावा
17 Dec, 2025 09:14 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुरुग्राम : हरियाणा की गुरुग्राम पुलिस ने सोशल मीडिया पर फर्जी और भड़काऊ पोस्ट डालकर सामाजिक और धार्मिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वाले एक वकील को गिरफ्तार किया है. आरोपी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर झूठी पोस्ट शेयर की थी, जिसमें एक लड़की के साथ दुष्कर्म और हत्या का मनगढ़ंत दावा किया गया था.
फर्जी पोस्ट करने पर शौर्य मिश्रा अरेस्ट : आरोपी शौर्य मिश्रा ने पोस्ट को अधिक प्रभावी बनाने के लिए युवक और युवती की फर्जी तस्वीरों का भी इस्तेमाल किया था. गुरुग्राम पुलिस के पीआरओ संदीप ने बताया कि "तकनीकी विश्लेषण के आधार पर आरोपी की पहचान कर उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले से उसे गिरफ्तार कर लिया गया. गिरफ्तार आरोपी की पहचान 25 वर्षीय हरिओम मिश्रा उर्फ शौर्य मिश्रा के रूप में हुई है, जो कौशांबी जिले के चरवा गांव का निवासी है और एलएलबी की पढ़ाई कर चुका है".
भाजपा युवा मोर्चा का जिला उपाध्यक्ष होने का दावा : वहीं आरोपी शौर्य मिश्रा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म(X) अकाउंट पर खुद को भाजपा युवा मोर्चा का जिला उपाध्यक्ष होने का दावा कर रखा है. शौर्य मिश्रा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म(X) अकाउंट पर करीब 1 लाख फॉलोअर्स हैं. गुरुग्राम पुलिस के पीआरओ संदीप ने बताया कि "पुलिस पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने सोशल मीडिया पर देखी गई एक आपत्तिजनक पोस्ट को उठाकर अपने अकाउंट से साझा किया था. पुलिस ने आरोपी के कब्जे से उसका मोबाइल भी बरामद कर लिया है. उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा. फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है."
तेंदुए की समस्याओं को क्षेत्रीय नजरिए से सुलझाने की जरूरत, इंसान और जंगली जानवरों का टकराव चरम पर
17 Dec, 2025 08:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमरावती (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र में आजकल हर जगह तेंदुआ चर्चा का विषय बना हुआ है.चाहे ग्रामीण इलाके हों या शहरी इस जंगली जानवर को लेकर चर्चा हो रही है. देखा जाए तो तेंदुओं का डर हर जगह है. वहीं कुछ इलाकों में इंसान-जंगली जानवरों का टकराव अपने चरम पर पहुंच गया है. हालांकि, पूरे राज्य में हालात एक जैसे नहीं हैं.
तेंदुओं का मुद्दा सिर्फ संख्या का नहीं है, बल्कि उनके रहने की जगह, फूड चेन, इंसानी दखल और वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट जैसे कई फैक्टर तेंदुओं के डर से जुड़े हैं. महाराष्ट्र स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड के पूर्व सदस्य और वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट यादव तराटे पाटिल ने तेंदुओं की पूरी स्थिति, उनके रहने की जगह और इंसान-वाइल्डलाइफ संघर्ष के बारे में ईटीवी भारत के साथ जरूरी जानकारी शेयर की.
तेंदुए की आबादी में महाराष्ट्र दूसरे नंबर पर है. 1997 में, केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया था जिसमें कहा गया था कि भारत में 45,000 तेंदुए हैं. 2017 में, यह पता चला कि भारत में केवल 9,710 तेंदुए बचे हैं. इसके बाद, वन विभाग ने तेंदुए की आबादी बढ़ाने के लिए प्रयास किए, और 2024-25 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में लगभग 14,000 तेंदुए हैं.
इनमें से सबसे अधिक, लगभग 2,500 से 3,000, मध्य प्रदेश में हैं, जबकि महाराष्ट्र में लगभग 1900 से 2000 तेंदुए हैं. यादव तराटे ने कहा कि इन नंबरों की तुलना करने पर यह साफ है कि तेंदुओं की आबादी में काफी कमी आई है. वैसे देखा जाए तो महाराष्ट्र के तीन जिलों में हालात गंभीर हैं. हालांकि, यह कहना गलत होगा कि तेंदुओं की वजह से पूरे महाराष्ट्र में हालात खराब हैं.
अमरावती शहर के पास पोहरा मालखेड जंगल में 35 से 40 तेंदुए हैं. हालांकि यह इलाका शहर के बहुत पास है, लेकिन अब तक इस जंगल से तेंदुओं के इंसानों पर हमला करने की एक भी घटना नहीं हुई है. हालांकि, पुणे, नासिक और अहमदनगर (अहिल्यानगर) इन तीन जिलों में इंसान-तेंदुए का टकराव ज्यादा देखा गया है. इन तीनों जिलों में गन्ने के खेत तेंदुओं के लिए बहुत सुरक्षित जगह माने जाते हैं.
गन्ने के इन खेतों में तेंदुओं को जंगली सूअर और कुत्तों जैसे शिकार आसानी से मिल जाते हैं. अक्सर, अगर कोई तेंदुआ और इंसान अचानक आमने-सामने आ जाते हैं, तो डरा हुआ तेंदुआ इंसान पर हमला कर देता है. पुणे जिले के जुन्नार तालुका में ऐसी घटनाएं हुई हैं. उन्होंने कहा कि, इंसानों को परेशान करने वाले तेंदुओं से निपटना चाहिए. हालांकि, यादव तराटे पाटिल ने कहा कि यह सोचना कि राज्य में हर जगह तेंदुए इंसानों के लिए खतरा हैं, एक बड़ी गलतफहमी है. तेंदुए खुद को ढालने वाले जानवर होते हैं . तेंदुआ एक ऐसा जानवर है जो किसी भी स्थिति में खुद को ढाल लेता है.
यह न सिर्फ घने जंगलों में रहता है, बल्कि घास के मैदानों, खेती वाले इलाकों, गांवों के पास के इलाकों और अक्सर शहरों के पास भी रहता है. क्योंकि यह हिरण, जंगली सूअर, बंदर, खरगोश, कुत्ते, बकरी, पक्षी और छोटे जानवरों का शिकार करता है. इसलिए यह अक्सर इंसानी बस्तियों की तरफ खिंचा चला आता है. यह अक्सर ऐसे इलाकों में अपना घर बनाता है. तेंदुआ जहां भी खाना और पानी पाता है, वहां बेखौफ रहता है. यादव तराटे पाटिल ने कहा कि ऐसे तेंदुओं को पकड़ना या भगाना कोई हल नहीं है. लेकिन, परेशान करने वाले तेंदुओं के खिलाफ सही कार्रवाई की जानी चाहिए.
अफवाहों से डर का माहौल
कुछ इलाकों में सिर्फ अफवाहों की वजह से डर का माहौल बन जाता है. हाल ही में अमरावती जिले के एक गांव में अफवाह फैली कि एक तेंदुआ आ गया है. गांव वाले डर गए थे. किसान अपने खेतों में जाने से बचने लगे थे. फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की टीम के साथ, हम और कुछ वाइल्डलाइफ के शौकीन लोग लगातार आठ दिनों तक गांव में गश्त करते रहे, पैरों के निशान ढूंढते रहे, लेकिन इलाके में तेंदुए की मौजूदगी का एक भी सबूत नहीं मिला. उन्होंने कहा कि, लोगों को अफवाहों पर यकीन नहीं करना चाहिए. अगर सच में कहीं तेंदुआ दिखे, तो उन्हें हेल्पलाइन 1926 या फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से संपर्क करना चाहिए. यादव तराटे पाटिल ने लोगों से अपील की है कि वे अपने इलाके के वाइल्डलाइफ में दिलचस्पी रखने वालों को भी इसके बारे में बताएं.
मध्य प्रदेश की तरह संरक्षण की जरूरत
तेंदुआ अपना नेचुरल हैबिटैट छोड़कर इंसानी बस्तियों में तभी आता है जब उसके हैबिटैट में खाने की कमी हो जाती है। यह पक्का करने के लिए कि तेंदुआ अपने नेचुरल हैबिटैट में रहे, मध्य प्रदेश में इस बात का ध्यान रखा गया है कि उसके नेचुरल हैबिटैट में इंसानी दखल ज़्यादा न हो. यह पक्का करने के लिए कि हिरण, खरगोश, नीलगाय और जंगली सूअर, जो उसके पसंदीदा शिकार हैं, उसके हैबिटैट में बड़ी संख्या में मौजूद रहें, उस इलाके में जंगलों की कटाई रोक दी गई है. घास के मैदान बनाने पर ज़ोर दिया गया है. यादव तराटे पाटिल ने कहा कि अगर हमारे इलाके में भी मध्य प्रदेश की तरह तेंदुओं की देखभाल की जाए, तो तेंदुओं से होने वाली दिक्कतों पर बात ही नहीं होगी.
तेंदुआ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में कैसे मदद करता है
यह हिरण, जंगली सूअर, खरगोश और बंदर जैसे जानवरों की आबादी को कंट्रोल में रखता है, जो फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं. तेंदुआ अप्रत्यक्ष रूप से खेती की रक्षा करता है और शाकाहारी जानवरों की आबादी को कंट्रोल करके, यह जंगल को बचाने में मदद करता है. बीमार, बूढ़े, कमजोर जानवरों और चूहों का शिकार करके, तेंदुआ रेबीज और प्लेग जैसी बीमारियों के खतरे को रोकता है. तेंदुए की वजह से जंगल सुरक्षित रहता है और जंगल का बैलेंस बना रहता है.
तेंदुआ 'शेड्यूल वन' में लिस्टेड जानवर है. भारत में वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 को वाइल्डलाइफ की सुरक्षा के लिए लागू किया गया था. इस कानून के अनुसार, अलग-अलग जानवरों को कैटेगरी में बांटा गया है और उनकी जरूरतों के आधार पर उनका शेड्यूल तय किया गया है. कुल छह शेड्यूल हैं, और बाघ, शेर, तेंदुआ, हाथी और गैंडे जैसे जानवर पहले शेड्यूल में आते हैं.
शेड्यूल वन वह कैटेगरी है जो सबसे ज्यादा सुरक्षा देती है. शेड्यूल वन में शामिल जानवरों को कानून सबसे ज्यादा सुरक्षा देता है. यादव तराटे पाटिल ने कहा कि तेंदुए की वजह से हिरण, जंगली सूअर, बंदर और नीलगाय जैसे जानवरों की आबादी कंट्रोल होती है. यह भी कहा गया कि तेंदुआ इकोसिस्टम का रक्षक है और नेचुरल बैलेंस बनाए रखने में बायोडायवर्सिटी का एक बहुत जरूरी हिस्सा है.
शेड्यूल एक के नतीजे
तराटे पाटिल ने ये बातें साफ की है कि, तेंदुए का शिकार करना, पकड़ना या उसे घायल करना एक जुर्म है, जिसके लिए तीन से सात साल की सजा और जुर्माना हो सकता है. हालांकि तेंदुए हर जगह दिखते हैं, लेकिन उनकी आबादी कम हो गई है. सरकार उनके बचने को पक्का करने की कोशिश कर रही है. इंसानों के लिए खतरा बने तेंदुओं को मारने के बजाय, उन्हें पकड़कर उनके कुदरती ठिकाने पर छोड़ने पर ध्यान दिया जा रहा है. फॉरेस्ट डिपार्टमेंट तेंदुओं की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है.
नेपाल द्वारा भारतीय नोटों पर बैन हटाने का फैसला
16 Dec, 2025 09:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू। नेपाल सरकार ने 100 से ऊपर के उच्च मूल्य वर्ग के भारतीय करेंसी नोटों (जैसे 200 और 500 के नोट) पर लगा बैन हटाने की तैयारी कर ली है। भारत में नोटबंदी (500 और 1000 के नोट बंद) के तुरंत बाद, नेपाल ने सुरक्षा कारणों (नकली करेंसी की तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा) का हवाला देकर 100 से ऊपर के भारतीय नोटों पर बैन लगा दिया था। नेपाल ने अब समझ लिया है कि भारत से दूरी अर्थव्यवस्था के लिए महंगी है और व्यावहारिक नीति लौटी है। नेपाल की पर्यटन अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर भारतीय यात्रियों पर टिकी हुई है (होटल, कैसीनो, तीर्थ यात्रा)। बैन से पर्यटन क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ था, क्योंकि भारतीय पर्यटक खुलकर खर्च नहीं कर पाते थे। प्रवासी कामगारों को अपनी कमाई को कम मूल्य वर्ग के नोटों में घर लाने के लिए मजबूर होना पड़ता था, जिससे चोरी का खतरा बढ़ जाता था। मुद्रा नियमों की जानकारी न होने के कारण कई भारतीय पर्यटकों को गिरफ्तारी और जुर्माने का सामना करना पड़ता था। नए नियम के बाद 200 और 500 जैसे बड़े मूल्य वर्ग के भारतीय नोट नेपाल में कानूनी तौर पर फिर से सर्कुलेशन में आ गए है। यह संशोधन भारतीय, नेपाली और भूटानी नागरिकों को भारत आने-जाने के दौरान उच्च मूल्यवर्ग के भारतीय नोट ले जाने की अनुमति देता है। इससे दोनों देशों के पर्यटकों और व्यापारियों को यात्रा करने या व्यापार करने में अत्यधिक सुविधा होगी। नेपाल राष्ट्र बैंक (एनआरबी) इस संबंध में एक परिपत्र जारी करेगा, जब सरकार द्वारा यह निर्णय नेपाल राजपत्र में प्रकाशित हो जाएगा। इस फैसले को सिर्फ करेंसी का नहीं, बल्कि सत्ता, सियासत और भारत की बढ़ती ताकत का संकेत माना जा रहा है। नेपाल ने यह बात देर से सही, लेकिन समझ ली है कि पड़ोसी से लड़कर नहीं, पड़ोसी के साथ चलकर देश आगे बढ़ता है। यह कदम नेपाल की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा संकेत है।
भारत-जॉर्डन के द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा और मजबूती मिली, साझेदारी से होगा विस्तार
16 Dec, 2025 08:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पीएम मोदी ने जॉर्डन यात्रा में तय सभी परिणामों की जानकारी की साझा
नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी की जॉर्डन यात्रा के दौरान भारत और जॉर्डन के द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा और मजबूती मिली है। इस यात्रा में दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते हुए, जो ऊर्जा, जल प्रबंधन, संस्कृति, विरासत संरक्षण और डिजिटल सहयोग जैसे अहम क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाएंगी। पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट में लिखा- ये नतीजे भारत-जॉर्डन पार्टनरशिप का एक अहम विस्तार दिखाते हैं। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में हमारा सहयोग स्वच्छ विकास, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु के प्रति जिम्मेदारी के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को दिखाता है।
उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम का नवीनीकरण (2025–2029) दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी जुड़ाव को और गहरा करेगा। हमारे डिजिटल इनोवेशन को साझा करने से जॉर्डन के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को सपोर्ट मिलेगा और समावेशी शासन को बढ़ावा मिलेगा। इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पीएम मोदी की जॉर्डन यात्रा के दौरान तय हुए सभी परिणामों की जानकारी साझा करते हुए बताया था कि कुल पांच प्रमुख समझौते और सहमतियां अंतिम रूप दी गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। भारत अपनी जनसंख्या स्तर पर लागू की गई सफल डिजिटल पहलों और समाधानों को जॉर्डन के साथ साझा करेगा। इससे जॉर्डन की डिजिटल परिवर्तन प्रक्रिया को समर्थन मिलेगा और समावेशी शासन को बढ़ावा मिलेगा।
मानव तस्करी मामले में तीन एजेंटों की 5.41 करोड़ की चल-अचल संपत्तियां जब्त
16 Dec, 2025 07:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। ईडी जालंधर जोन ने कुख्यात डंकी मार्ग से अमेरिका जाने वाले एक बड़े अवैध आव्रजन और मानव तस्करी रैकेट के संबंध में तीन एजेंटों की 5.41 करोड़ की चल और अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त की हैं। ईडी के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि जब्त की गई संपत्तियों में कृषि भूमि, आवासीय और व्यावसायिक परिसर और आरोपी एजेंटों और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर बैंक खाते शामिल हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारी ने बताया कि यह कार्रवाई शुभम शर्मा, जगजीत सिंह और सुरमुख सिंह नामक एजेंटों द्वारा अपराध से अर्जित आय से प्राप्त या उसके समकक्ष संपत्तियों के खिलाफ की गई है, जो लोगों को कानूनी प्रवास के झूठे वादे करके गुमराह करते हुए अवैध रूप से अमेरिका भेज रहे थे। तीनों हरियाणा के रहने वाले हैं और लंबे समय से डंकी रूट नेटवर्क में अलग-अलग भूमिकाएं निभा रहे थे।
फरवरी 2025 में अमेरिकी सरकार द्वारा अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश करने वाले 330 भारतीय नागरिकों को निर्वासित किए जाने के बाद पंजाब और हरियाणा पुलिस ने दर्ज कई एफआईआर के आधार पर ईडी ने अवैध आव्रजन और मानव तस्करी रैकेट की जांच शुरू की। ईडी की जांच में पता चला कि आरोपी एजेंट और उनके सहयोगी लोगों को अमेरिका में कानूनी रूप से प्रवेश दिलाने का लालच देकर उन्हें निशाना बनाते थे और उनसे मोटी रकम वसूलते थे। हालांकि, कानूनी प्रवास के बजाय, उन्हें खतरनाक और अवैध रास्तों से ले जाया जाता था और अंत में उन्हें जबरन अमेरिका-मेक्सिको सीमा को गैरकानूनी रूप से पार कराया जाता था।
ईडी ने कहा कि यात्रा में पीड़ितों को यातना, जबरन वसूली, दबाव और यहां तक कि अवैध कार्य करने के लिए मजबूर किया जाता था। इस तरह की धोखाधड़ी वाली गतिविधियों के जरिए एकत्र की गई बड़ी रकम मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम के तहत अपराध की आय मानी जाती है। जांच के तहत, ईडी ने पीएमएलए के प्रावधानों के तहत 9 और 11 जुलाई को पंजाब और हरियाणा में 19 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरू आरोपियों के खिलाफ मामला और मजबूत हुआ। ईडी ने कहा कि इस मामले में आगे की जांच जारी है और जैसे-जैसे अधिक सबूतों का विश्लेषण किया जा रहा है और वित्तीय लेन-देन का पता लगाया जा रहा है, वैसे-वैसे अतिरिक्त कार्रवाई भी की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: दहेज एक सामाजिक अभिशाप...........हिंदू और इस्लाम दोनों में मौजूद
16 Dec, 2025 06:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने दहेज की कुप्रथा को समाज का गंभीर अभिशाप करार देकर कहा कि यह कानूनी प्रतिबंध के बावजूद उपहार और सामाजिक अपेक्षाओं के रूप में छिपकर फल-फूल रही है, जिससे महिलाओं के साथ उत्पीड़न, क्रूरता और मौतें जुड़ी हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए, इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2003 के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें दहेज मौत के एक मामले में आरोपी पति अजमल बेग और उसकी मां जमीला बेग को बरी किया गया था। यह मामला 20 वर्षीय नसरीन की जलकर हुई मौत से जुड़ा था, जिनकी शादी के एक साल बाद मृत्यु हो गई थी। ट्रायल कोर्ट ने ससुराल वालों की कलर टीवी, बाइक और 15,000 नकद की मांग को साबित माना था। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की सजा को बहाल कर दिया, जिसमें दोनों आरोपियों को आईपीसी की धारा 304बी (दहेज मौत), 498ए (क्रूरता) और दहेज निषेध अधिनियम की धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की उस दलील को खारिज कर दिया कि गरीबी के कारण दहेज की मांग अविश्वसनीय है, इस तर्कसंगत नहीं बताया।
वहीं मामले में दोषी पति अजमल बेग को चार सप्ताह के अंदर आत्मसमर्पण कर ट्रायल कोर्ट की सजा भुगतने का निर्देश दिया गया। 94 वर्षीय मां जमीला बेग को मानवीय आधार पर जेल नहीं भेजने का फैसला किया गया, क्योंकि उनकी उम्र को देखते हुए कारावास का कोई उद्देश्य पूरा नहीं होता।
सुप्रीम कोर्ट की गंभीर टिप्पणियाँ
यह प्रथा संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों, खासकर अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता) के विपरीत है। दहेज महिलाओं को वित्तीय शोषण का साधन बनाता है और संरचनात्मक भेदभाव को बढ़ावा देता है। स्वैच्छिक उपहार की प्रथा अब दूल्हे की कीमत तय करने का माध्यम बन गई है, जिससे समाज में महिलाओं का अवमूल्यन होता है।
इस्लाम में भी दहेज: मेहर का खोखला होना
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दहेज केवल हिंदू समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी धर्मों और समुदायों में फैला हुआ है। इस्लामी कानून में मेहर (दूल्हे से दुल्हन को अनिवार्य उपहार) की व्यवस्था होने के बावजूद, सामाजिक प्रथाओं के कारण नाममात्र का मेहर रखकर दहेज लिया जाता है, जिससे मेहर का सुरक्षा उद्देश्य खोखला हो जाता है। इससे भी महिलाओं में उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और दहेज मौतें जुड़ी हैं। दहेज संबंधी उत्पीड़न और मौतों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकारों, अदालतों और अधिकारियों को निम्नलिखित व्यापक निर्देश जारी किए है। सुप्रीम कोर्ट ने दहेज की समस्या से निपटने के लिए शिक्षा पाठयक्रम में समानता के संवैधानिक मूल्यों को शामिल करने पर विचार किया जाए। इतना ही नहीं डीपीओ की उचित नियुक्ति, सशक्तिकरण और सार्वजनिक दृश्यता सुनिश्चित की जाए। पुलिस और न्यायिक अधिकारियों को दहेज मामलों के सामाजिक-मनोवैज्ञानिक आयामों की समझ और वास्तविक मामलों को दुरुपयोग से अलग करने के लिए नियमित प्रशिक्षण दिया जाए। हाईकोर्ट्स धारा 304बी और 498ए के लंबित मामलों का जायजा लें और उनका शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करें। जिला प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण औपचारिक शिक्षा से बाहर की आबादी के लिए नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करें।
हीटर से आग लगने के कारण नानी और नाती की मौत
16 Dec, 2025 05:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रांची । झारखंड के धनबाद के सरायढेला अंतर्गत विकास नगर में एक घर में देर रात हीटर से आग लगने के कारण नानी और उनके 18 वर्षीय नाती की मौत हो गई। घटना विकास नगर, सरायढेला थाना क्षेत्र, धनबाद में सोमवार-मंगलवार की देर रात को हुई। मृतक में 62 वर्षीय चिंता मणि देवी (नानी) और 18 वर्षीय गोलू (नाती) शामिल है। तीन अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए, जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है।
ठंड से बचाव के लिए जलाए गए हीटर पर कंबल गिर गया, जिससे आग भड़की और पूरे कमरे में धुआं व आग फैल गई। घटना में चिंता मणि देवी की मौके पर ही मौत हो गई। उन्हें बचाने के प्रयास में नाती गोलू भी गंभीर रूप से झुलस गया और उसकी भी मौत हो गई। मोहल्ला संकरा होने के कारण बड़ी दमकल गाड़ी अंदर प्रवेश नहीं कर सकी। छोटी गाड़ी मंगाई गई। घर का निचला हिस्सा अंदर से बंद होने के कारण भी कर्मियों को भीतर जाने में परेशानी हुई। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। यह घटना दिखाती हैं कि ठंड से बचने के लिए उपयोग किए जाने वाले हीटर के उपयोग में सुरक्षा मानकों का ध्यान रखना कितना महत्वपूर्ण है।
बांके बिहारी मंदिर में दर्शन व्यवस्था को लेकर प्रतिवादियों को नोटिस जारी
16 Dec, 2025 04:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार और न्यायालय द्वारा नियुक्त उच्चाधिकार समिति से मथुरा के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में दर्शन के समय में परिवर्तन और देहरी पूजा बंद किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब मांगा। सीजेआई सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और विपुल पंचोली की पीठ ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उन्हें 7 जनवरी तक जवाब दाखिल करने को कहा है। यह याचिका मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा गोपेश गोस्वामी और रजत गोस्वामी के जरिए दायर की गई थी।
याचिका में समिति द्वारा लिए गए उन फैसलों को चुनौती दी गई है, जिनमें मंदिर के दर्शन के समय में बदलाव किया गया है और पारंपरिक देहरी पूजा को बंद कर दिया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ये बदलाव सुप्रीम कोर्ट के 8 अगस्त के पूर्व आदेश के विरुद्ध है, जिसमें साफ कहा गया था कि समिति को मंदिर की आंतरिक धार्मिक प्रथाओं, जिनमें पूजा, सेवा और प्रसाद शामिल हैं, उनमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
याचिका के मुताबिक देहरी पूजा एक पवित्र अनुष्ठान है जो मंदिर के आम जनता के लिए बंद रहने के दौरान किया जाता है। भक्तों का मानना है कि देहरी देवता के चरणों का प्रतीक है, और इस दौरान सुगंध, फूल और प्रार्थना जैसी वस्तुएं अर्पित की जाती हैं। याचिका में कहा गया है कि इस अनुष्ठान को रोकना अन्यायपूर्ण है और संविधान के तहत गोस्वामी समुदाय के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
मंदिर समिति की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कोर्ट को बताया कि एचपीसी ने सदियों से चले आ रहे मंदिर के खुलने के समय में बदलाव किया है। उन्होंने कहा कि नए कार्यक्रम से देवता के सोने और आराम करने का समय प्रभावित होता है, जिसे पारंपरिक रूप से धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा माना जाता है। इन बदलावों से अहम आंतरिक अनुष्ठानों के समय में भी परिवर्तन आया है, जिसमें देवता के जागने और सोने का समय भी शामिल है। सीजेआई ने टिप्पणी करते हुए कहा कि देवता को एक मिनट के लिए भी आराम नहीं करने देते। इसी वक्त देवता का सबसे ज्यादा शोषण होता है। जो लोग मोटी रकम चुका सकते हैं, उन्हीं को विशेष पूजा की अनुमति दी जाती है।
नीतीश कुमार पर भड़कीं जायरा वसीम: हिजाब खींचने वाली हरकत को बताया 'शर्मनाक', सरेआम माफी की मांग
16 Dec, 2025 02:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
CM Nitish Kumar Hijab Removing controversy: पूर्व बॉलीवुड एक्ट्रेस जायरा वसीम ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए CM नीतीश कुमार से माफी की मांग की है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह स्टेज पर एक महिला को नियुक्ति पत्र देते नजर आ रहे हैं. इस दौरान उन्होंने महिला का हिजाब खींच दिया.
पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग का बड़ा धमाका: 58 लाख वोटर्स लिस्ट से हटे, जानें आखिर क्यों लिया गया इतना बड़ा फैसला
16 Dec, 2025 01:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Bengal Draft Voter List: पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने मंगलवार सुबह एक अहम कदम उठाते हुए 2026 की ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल जारी कर दी है. इसके साथ ही आयोग ने उन मतदाताओं की सूची भी अपनी वेबसाइट पर अपलोड की है, जिनके नाम इस ड्राफ्ट सूची से हटा दिए गए हैं. ये सभी नाम 2025 की मतदाता सूची में शामिल थे, लेकिन अब सत्यापन प्रक्रिया के बाद इन्हें बाहर कर दिया गया है.
एसआईआर 2026 के तहत की गई कार्रवाई
चुनाव आयोग ने यह कार्रवाई स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) 2026 के तहत की है. आयोग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, करीब 58 लाख से अधिक SIR फॉर्म ‘अनकलेक्टेबल’ पाए गए, यानी या तो ये फॉर्म जमा नहीं हो सके या फिर संबंधित मतदाताओं का सत्यापन नहीं किया जा सका. इसी आधार पर बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट रोल से हटाए गए हैं.
नाम हटाने के पीछे चुनाव आयोग ने बताया कारण
आयोग का कहना है कि हटाए गए नामों के पीछे कई कारण सामने आए हैं. कई मतदाता अपने दर्ज पते पर नहीं मिले, कुछ लोग स्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं, जबकि कुछ मामलों में मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है. इसके अलावा, कई नाम एक से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में डुप्लीकेट पाए गए. मतदाता सूची को सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए यह प्रक्रिया जरूरी बताई जा रही है.
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में जांचे अपना नाम
चूंकि लाखों नाम हटाए गए हैं, ऐसे में हर मतदाता के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह अपना नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में जरूर जांचे. यह प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों तरीकों से की जा सकती है. ऑनलाइन जांच के लिए चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट eci.gov.in या पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट ceowestbengal.nic.in पर जाकर ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल देखी जा सकती है.
इसके अलावा voters.eci.gov.in पोर्टल पर जाकर ‘Search Your Name in Voter List’ विकल्प के जरिए EPIC नंबर या नाम, जिला और विधानसभा क्षेत्र की जानकारी डालकर नाम खोजा जा सकता है. ceowestbengal.nic.in वेबसाइट पर विधानसभा क्षेत्र के अनुसार पीडीएफ डाउनलोड कर भी नाम की पुष्टि की जा सकती है. वहीं हटाए गए नामों की अलग सूची ceowestbengal.wb.gov.in/asd_sir पर उपलब्ध है, जहां EPIC नंबर या विधानसभा विवरण डालकर यह देखा जा सकता है कि नाम सूची से हटाया गया है या नहीं.
स्मार्टफोन में ऐप भी एक आसान विकल्प
स्मार्टफोन यूजर्स के लिए ECINET मोबाइल ऐप भी एक आसान विकल्प है. गूगल प्ले स्टोर से ऐप डाउनलोड कर ‘Search Your Name in Voter List’ विकल्प के जरिए कुछ ही सेकंड में जानकारी प्राप्त की जा सकती है. अगर किसी कारणवश ऑनलाइन जांच संभव न हो, तो संबंधित इलाके के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) या राजनीतिक दलों के बूथ लेवल असिस्टेंट (BLA) से संपर्क कर भी ड्राफ्ट रोल में नाम की स्थिति पता की जा सकती है.
16 दिसंबर से वोटर को आपत्ति दर्ज करने का मौका
अगर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम नहीं मिलता है या गलती से हटा दिया गया है, तो मतदाताओं को परेशान होने की जरूरत नहीं है. चुनाव आयोग ने 16 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक दावा और आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया है. इसके लिए फॉर्म 6 भरना होगा और उसके साथ Annexure-IV डिक्लेरेशन फॉर्म तथा जरूरी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र या पुराने चुनावी दस्तावेज जमा करने होंगे. यह आवेदन BLO के पास या ऑनलाइन voters.eci.gov.in और E-NET ऐप के जरिए किया जा सकता है. इसके बाद आयोग सुनवाई करेगा और सही पाए जाने पर नाम दोबारा जोड़ दिया जाएगा.
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की 294 सीटों वाली विधानसभा का कार्यकाल मई 2026 में समाप्त हो रहा है. ऐसे में मार्च या अप्रैल 2026 में विधानसभा चुनाव कराए जाने की संभावना है. मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर की गई इस सफाई को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है, क्योंकि इसका सीधा असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है. चुनाव आयोग का कहना है कि यह कदम फर्जी और गैर-मौजूद मतदाताओं को हटाकर निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है.
नेशनल हेराल्ड केस में राहुल-सोनिया गांधी को बड़ी राहत, कोर्ट का अहम फैसला
16 Dec, 2025 01:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
National Herald Case : में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इस स्तर पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की चार्जशीट पर संज्ञान नहीं लिया जा सकता। अदालत के मुताबिक, ईडी का पूरा मामला सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर निजी शिकायत और मजिस्ट्रेट के समन आदेशों पर आधारित है, न कि किसी एफआईआर पर। इसी आधार पर कोर्ट ने चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार किया।
हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि ईडी इस मामले में आगे की जांच जारी रख सकती है। साथ ही अदालत ने कहा कि राहुल गांधी, सोनिया गांधी और अन्य आरोपी एफआईआर की प्रतिलिपि पाने के हकदार नहीं हैं। यह टिप्पणी दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज नई एफआईआर से जुड़ी कार्यवाही के दौरान की गई।
National Herald Case में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों को लेकर अपनी चार्जशीट में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा समेत कुल पांच व्यक्तियों और दो कंपनियों को आरोपी बनाया था। कांग्रेस पार्टी ने इस पूरी कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया था। वहीं, ईडी का कहना है कि मनी लॉन्ड्रिंग और फर्जीवाड़ा गंभीर अपराध हैं और जांच में अहम सबूत सामने आए हैं।
अदालत के फैसले को लेकर कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे महत्वपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि यह मामला शुरू से ही निराधार था, जिसमें न तो धन का हस्तांतरण हुआ और न ही किसी संपत्ति का लेन-देन। ऐसे में मनी लॉन्ड्रिंग का सवाल ही नहीं उठता। सिंघवी के मुताबिक, कोर्ट का यह फैसला साबित करता है कि National Herald Case को बेवजह उच्च स्तर तक ले जाया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने इंडिगो से जुड़ी याचिका पर सुनवाई से इंकार, पहले दिल्ली हाईकोर्ट जाएं.....फिर स्वागत
16 Dec, 2025 11:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इंडिगो की हजारों फ्लाइट कैंसिल होने के मामले में दखल देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इंकार कर दिया। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पमचोली की बेंच ने याचिकाकर्ता से दिल्ली हाईकोर्ट जाने को कह दिया।
कोर्ट ने कहा कि सभी मुद्दे दिल्ली हाईकोर्ट के सामने विचाराधीन हैं। वे भी संवैधानिक कोर्ट हैं। अगर आपकी शिकायत का वहां समाधान नहीं होता है, तब आपका यहां स्वागत है। इंडिगो के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि डीजीसीए ने फ्लाइट कैंसिल होने और यात्रियों को होने वाली समस्याओं की जांच के लिए एक जानकारों की कमेटी बनाई है।
वहीं डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) की ओर से एविएशन नियमों में बदलाव चलते दिसंबर के पहले हफ्ते में इंडिगो में क्रू मेंबर्स की भारी कमी हो गई थी। इसके कारण 1 से 10 दिसंबर के बीच इंडिगो की 5000 से ज्यादा फ्लाइट कैंसिल हुईं थीं। इंडिगो ने मामले की आंतरिक जांच को पूरी तरह इंटरनेशनल एक्सपर्ट के हवाले करने का फैसला किया है। सीईओ पीटर एल्बर्स डीजीसीए की समिति के सामने पेश हुए थे। इतना ही नहीं कंपनी ने इसके पहले ही स्वतंत्र जांच का जिम्मा विश्व प्रसिद्ध एविएशन जानकार कैप्टन जॉन इल्सन को सौंप दिया। यह कदम संकेत देता है कि एयरलाइन ऑपरेशनल मॉडल और प्रबंधन प्रक्रियाओं की गहराई से समीक्षा करवाने के दबाव में है। इल्सन चार दशक के दौरान शीर्ष वैश्विक संस्थानों का नेतृत्व कर चुके हैं। नियुक्ति इंडिगो बोर्ड के क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की सिफारिश पर की गई है।
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