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उत्तराखंड: रामनगर के कोसी 'लट्ठा' को 100 साल पूरे, 1926 से आज तक खड़ी है ये ब्रिटिश कालीन सुरक्षा दीवार
28 Jan, 2026 09:49 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रामनगर (नैनीताल): उत्तराखंड के रामनगर में स्थित कोसी तटबंध ने अपने निर्माण के 100 वर्ष पूरे कर लिए हैं. वर्ष 1926 में ब्रिटिश शासन के दौरान निर्मित यह विशाल तटबंध आज भी कोसी नदी की बाढ़ से रामनगर और आसपास के क्षेत्रों को सुरक्षा प्रदान कर रहा है. एक सदी का यह सफर केवल ईंट-पत्थर की कहानी नहीं, बल्कि उस दूरदर्शी सोच का प्रतीक है, जिसने रामनगर की बसावट, खेती, सिंचाई और सामाजिक जीवन को नई दिशा दी.
माना जाता है कि रामनगर की स्थापना कुमाऊं के तत्कालीन कमिश्नर सर हेनरी रैमजे द्वारा की गई थी. पानी, घने जंगल और ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता के कारण यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण था. रामनगर को कुमाऊं और गढ़वाल का प्रवेश द्वार माना जाता है. यही नहीं, यह विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट नेशनल पार्क का मुख्य प्रवेश बिंदु भी है, जो दुनिया में बाघों की सर्वाधिक घनत्व वाली आबादी में से एक के लिए जाना जाता है.
बाढ़ की त्रासदी से जन्मी योजना: 20वीं सदी के शुरुआती वर्षों में कोसी नदी रामनगर क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी. जानकारों के अनुसार, वर्ष 1910 और 1913 में यहां भीषण बारिश हुई, जिससे कोसी नदी उफान पर आ गई. हजारों एकड़ कृषि भूमि बह गई. गांव-बस्तियां उजड़ गईं और भारी तबाही मची. उस समय की इन विनाशकारी बाढ़ों ने ब्रिटिश सरकार को एक स्थायी समाधान पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया.
इसी के परिणामस्वरूप वर्ष 1926 में कोसी नदी के किनारे एक मजबूत तटबंध का निर्माण किया गया, जिसे स्थानीय लोग 'लट्ठा' या 'बंदा' के नाम से जानते हैं. यह तटबंध पत्थर, चूना और सुर्खी से तैयार किया गया था, जिसकी बुनियाद इतनी मजबूत रखी गई कि यह एक सदी बाद भी अपनी जगह मजबूती से खड़ा है.
क्या है कोसी 'लट्ठा': कोसी 'लट्ठा', एक विशाल सुरक्षा दीवार है, जिसका उद्देश्य कोसी नदी की बाढ़ को नियंत्रित करना और रामनगर शहर, खेत-खलिहानों और बस्तियों को सुरक्षित रखना था. दरअसल, बरसात के मौसम में कोसी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है और उसके साथ भारी मलबा और तेज बहाव आता है. लट्ठा इस उफनते पानी को नियंत्रित कर शहर की ओर बढ़ने से रोकता है.
स्थानीय जानकार विनोद पपने बताते हैं कि जब भी बाढ़ आती थी, लोग इस लट्ठे पर चढ़कर कोसी नदी का विकराल रूप देखने आते थे. हजारों की संख्या में रामनगर शहर और आसपास के लोग यहां इकट्ठा होते थे. कोसी के पानी की गड़गड़ाहट सुनकर लोग समझ जाते थे कि नदी उफान पर है. यह लट्ठा उस समय न सिर्फ सुरक्षा का साधन था, बल्कि लोगों के लिए एक तरह का देखने-समझने का केंद्र भी बन गया था.
कोसी 'लट्ठा' को उसकी असाधारण मजबूती के कारण 'चाइना वॉल' के नाम से भी जाना जाता है. लगभग पौने एक किलोमीटर लंबा यह तटबंध उस समय की इंजीनियरिंग क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण है. इसकी दीवारें बड़े-बड़े पत्थरों से बनाई गईं, जिन्हें चूना और सुर्खी से जोड़ा गया. यही वजह है कि 100 साल बीत जाने के बाद भी यह संरचना आज तक खड़ी है. कोसी 'लट्ठा' के साथ-साथ तीन महत्वपूर्ण नहरों का निर्माण भी किया गया.
- विनोद पपने, स्थानीय जानकार -
विनोद पपने कहते हैं कि, रामनगर की बेलगढ़ नहर, रामनगर नहर और चिलकिया नहर आज भी संचालित हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई का अहम साधन बनी हुई हैं. इससे साफ है कि यह परियोजना केवल बाढ़ नियंत्रण तक सीमित नहीं थी, बल्कि कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की भी एक दूरदर्शी योजना थी.
कोसी 'लट्ठा' केवल एक तटबंध नहीं, बल्कि रामनगर की ऐतिहासिक धरोहर है. इसे औपचारिक रूप से हेरिटेज घोषित किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां इसके इतिहास और महत्व को जान सके. रामनगर एक ऐतिहासिक शहर रहा है और यहां कई हेरिटेज इमारतें मौजूद हैं. अंग्रेजों द्वारा बनाया गया कोसी लट्ठा भी उसी विरासत का हिस्सा है.
- संजय छिम्वाल, स्थानीय जानकार -
संजय बताते हैं कि, उस समय रामनगर की बसावट इसी तटबंध के आसपास विकसित हुई. कुमाऊं के कमिश्नर रहे सर हेनरी रैमजे के नाम पर ही रामनगर को कभी-कभी 'रैमजे सिटी' भी कहा जाता था, जो बाद में रामनगर के नाम से प्रसिद्ध हुआ.
बाढ़ से सुरक्षा की दृष्टि से यह दीवार आज भी बेहद महत्वपूर्ण है. कोई भी मानव-निर्मित संरचना अगर 100 वर्ष पूरे कर लेती है तो वह हेरिटेज की श्रेणी में आती है. कोसी 'लट्ठा' रामनगर के लिए एक मिसाल है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बढ़ते भूमि कटाव के कारण इसके कुछ हिस्से कमजोर हुए हैं.
- संजय छिम्वाल, स्थानीय जानकार -
आज भी रामनगर की जीवनरेखा: जानकार नरेंद्र शर्मा का कहना है कि रामनगर शहर की स्थापना हेनरी रैमजे द्वारा की गई थी और यह कुमाऊं-गढ़वाल का प्रवेश द्वार रहा है. कोसी 'लट्ठा' वर्ष 1926 में बनाया गया और आज इसके 100 वर्ष पूरे हो चुके हैं. एक समय इस लट्ठे के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई का व्यापक उपयोग किया जाता था.
गुणवत्ता और मजबूत निर्माण के कारण यह लट्ठा आज भी खड़ा है और मौजूदा परिस्थितियों में भी रामनगर को बाढ़ से बचाने में जीवनरेखा की तरह काम कर रहा है. यह साफ दर्शाता है कि इसके निर्माण के पीछे कितनी बड़ी और दूरदर्शी सोच रही होगी.
- नरेंद्र शर्मा, स्थानीय जानकार -
वहीं इस ऐतिहासिक सुरक्षा दीवार की सुरक्षा को लेकर किए गए सवाल पर सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता राजीव खनुलिया कहते हैं कि, कोसी लट्ठे का रखरखाव सिंचाई विभाग द्वारा लगातार किया जाता है. जहां कहीं भी क्षति होती है, वहां मरम्मत और दुरुस्ती का कार्य कराया जाता है. उन्होंने मांग की है कि इस धरोहर को हेरिटेज घोषित करना चाहिए, क्योंकि इस तरह के स्ट्रक्चर काफी दुर्लभ हो गए हैं, जो आज के समय में मिलते नहीं हैं. विभाग की कोशिश है कि इस ऐतिहासिक तटबंध को सुरक्षित रखा जाए, ताकि यह आगे भी रामनगर को बाढ़ से बचाता रहे.
बारामती में लैंडिंग के वक्त अजित पवार का विमान दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना, जांच जारी
28 Jan, 2026 09:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाराष्ट्र के बारामती के आसपास एनसीपी नेता अजित पवार का निजी विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया है. बताया जा रहा है कि लैंडिंग की कोशिश करते समय प्लेन क्रैश हो गया. वह किसी कार्यक्रम के लिए यहां पहुंच रहे थे. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि विमान ने क्रैश लैंडिंग की या कोई तकनीकी खराबी चलते ये हादसा हुआ है.
मौके से सामने आई तस्वीरों में देखा जा सकता है कि विमान में आग लगी है. तेज धुआं उठ रहा है. वीडियो में देखा जा सकता है कि अजित पवार का विमान कहीं खेत में क्रैश हुआ है. पूरा विमान जलकर राख हो चुका है. वीडियो में क्रैश साइट्स की तस्वीर में विमान के चीथरे उड़ गए हैं. तस्वीरों में देखा जा सकता है कि क्रैश साइट पर भारी संख्या में लोग मौजूद हैं.
स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंच रही हैं. एंबुलेंस और अन्य मेडिकल सपोर्ट मौके पर डिसपैच किया गया है.
लावारिस मिला नवजात शिशु हाथी ट्रीटमेंट के बाद हुआ खड़ा, वजन भी बढ़ा, अब झुंड से मिलाने की तैयारी
28 Jan, 2026 08:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरिद्वार: जनपद के जंगल में एक भावुक करने वाला दृश्य हरिद्वार में देखने को मिला. हरिद्वार वन विभाग नन्हे हाथी के लिए देवदूत बन गया और नवजात हाथी की जान बचाई गई. इस मानवीय और संवेदनशील कार्य के बाद पूरे हरिद्वार वन प्रभाग की जमकर सराहना हो रही है.
दरअसल बीती 18 जनवरी को एक शिशु हाथी गश्त के दौरान वन प्रभाग की टीम को जंगल में लावारिस अवस्था में मिला था. नन्हे हाथी की जान बचाने के लिए पूरा अमला जुट गया. तत्काल उच्च अधिकारियों की अनुमति लेकर शिशु हाथी को चीला स्थित एलिफेंट रेस्क्यू सेंटर भेजा गया. वहां डॉक्टरों की देखरेख में इसका इलाज चल रहा है. नन्हा हाथी अब न सिर्फ दूध पीने ही लगा है, बल्कि खुद अपने पैरों पर चलने भी लगा है.
लावारिस हालत में नवजात हाथी जंगल में मिला था: मामला बीती 18 जनवरी का है, जब हरिद्वार वन प्रभाग के श्यामपुर रेंज स्थित खारा बीट में टीम अपनी नियमित गश्त पर थी. इसी दौरान जंगल क्षेत्र में उन्हें एक नवजात हाथी का बच्चा दिखाई दिया. हाथी का बच्चा पूरी तरह अस्वस्थ था. वो आंखें तक नहीं खोल पा रहा था. वन प्रभाग की टीम ने तुरंत उसकी जांच की.
डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध और एसडीओ पूनम कैंथोला तुरंत मौके पर पहुंचीं. राहत की बात यह रही कि नन्हे गजराज की सांसें चल रही थीं. इसके बाद बिना देर किए पूरी रेस्क्यू टीम को मौके पर बुलाया गया और तुरंत उपचार शुरू किया गया. इतना ही नहीं टीम ने पूरा दिन हाथियों के झुंड का जंगल में इंतजार किया गया. काफी इंतजार के बाद भी कोई हाथी इसके पास नहीं आया. हालांकि एक झुंड इसके पास से गुजरा था, लेकिन किसी भी हाथी ने नवजात की तरफ देखा तक नहीं.
उपचार के बाद लौटी उम्मीद: वन प्रभाग की टीम ने सबसे पहले नवजात हाथी को अच्छी तरह नहलाया और पानी पिलाया. इसके बाद उसकी आंखों में हलचल दिखी और उसने धीरे-धीरे आंखें खोलनी शुरू कीं. इसके बाद उसे ग्लूकोज सहित जरूरी दवाएं दी गईं. शुरुआती समय में नवजात हाथी चलने में भी असमर्थ था, लेकिन टीम ने पूरी सावधानी और संवेदनशीलता के साथ उसे चीला रेंज स्थित एलिफेंट रेस्क्यू सेंटर पहुंचाया. वहां उसे प्राथमिक उपचार दिया गया. इसके बाद डॉक्टरों की देखरेख में नन्हे हाथी का इलाज जारी है.
अब पूरी तरह स्वस्थ, झुंड से मिलाने की तैयारी: अधिकारियों के अनुसार अब नन्हा गजराज सही से चल-फिर पा रहा है. उसका वजन भी पहले की तुलना में बढ़ गया है. दूध के साथ ही उसके खान-पान में भी लगातार सुधार हो रहा है. अब वन प्रभाग की टीम उसे दोबारा उसके झुंड से मिलाने की कोशिशों में जुट गई है, ताकि वह भी अन्य हाथियों की तरह सामान्य जीवन जी सके. वन प्रभाग की टीम के जो प्रयास रहे, उस पर एक डॉक्यूमेंट्री भी बनाई गई है, जिसकी सराहना की जा रही है.
क्या बोले डीएफओ: हरिद्वार के डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि-
बीती 18 जनवरी को रूटीन गश्त के दौरान टीम को एक नवजात हाथी का बच्चा गंभीर अवस्था में मिला था. टीम ने तत्काल प्राथमिक उपचार दिया और हरसंभव प्रयास किया कि इस बच्चे की जान बचाई जा सके. उसकी हालत में काफी सुधार है. उसका वजन बढ़ रहा है और खान पान भी ठीक हो गया है. प्रयास है कि उसे सुरक्षित रूप से उसके झुंड से मिलाया जाए. फिलहाल उसे 15 दिन के ऑब्जर्वेशन में रखा गया है.
सुप्रीम कोर्ट में महाकाल मंदिर की वीआईपी दर्शन याचिका खारिज,
27 Jan, 2026 07:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा,गर्भगृह में किसे प्रवेश मिलेगा कलेक्टर ही तय करेंगे
महाकाल के सामने कोई वीआईपी नहीं
उज्जैन। उज्जैन के ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में नेताओं और वीआईपी को प्रवेश देने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। इससे पहले इस मामले पर हाईकोर्ट में सुनवाई हो चुकी थी। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही इंदौर हाईकोर्ट का फैसला महाकाल मंदिर समिति पर लागू रहेगा, जिसमें उज्जैन कलेक्टर को यह अधिकार दिया गया था कि वे तय करें कि कौन वीआईपी है और कौन नहीं।
दरअसल, महाकाल मंदिर में आम श्रद्धालुओं के गर्भगृह में प्रवेश पर रोक लगाए जाने के बाद इंदौर के अधिवक्ता चर्चित शास्त्री और दर्पण अवस्थी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि देशभर से लाखों श्रद्धालु महाकाल दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें गर्भगृह के बाहर से ही दर्शन करने पड़ते हैं, जबकि नेता और प्रभावशाली लोग आसानी से गर्भगृह में प्रवेश कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मंगलवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा और याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने को कहा।
गर्भगृह में प्रवेश का फैसला फिलहाल कलेक्टर करेंगे
करीब छह महीने पहले इंदौर हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया था कि गर्भगृह में किसे प्रवेश मिलेगा, यह तय करने का अधिकार उज्जैन कलेक्टर के पास है। अदालत ने कहा कि यदि कलेक्टर किसी विशेष दिन किसी व्यक्ति को अनुमति देते हैं, तो उसे वीआईपी माना जाएगा।
ढाई साल से बंद है गर्भगृह
दरअसल, 4 जुलाई 2023 को सावन महीने में आने वाली भारी भीड़ को देखते हुए महाकालेश्वर मंदिर का गर्भगृह 11 सितंबर 2023 तक बंद कर दिया गया था। उस समय मंदिर समिति ने कहा था कि सावन माह के समाप्त होते ही गर्भगृह आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। लेकिन इसके बाद गर्भगृह खुला नहीं है। महाकाल लोक बनने से पहले मंदिर में रोजाना 20 से 30 हजार श्रद्धालु आते थे। अक्टूबर 2022 में महाकाल लोक बनने के बाद भक्तों की संख्या चार गुना बढक़र डेढ़ से दो लाख तक पहुंच गई।
पांच साल की रिकॉर्डतोड़ ठंड में मना गणतंत्र दिवस, अब बारिश और ओलावृष्टि का बरसेगा कहर
27 Jan, 2026 06:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली ने इस साल पिछले पांच वर्षों का सबसे ठंडा गणतंत्र दिवस महसूस किया। सोमवार को दिल्ली का न्यूनतम तापमान गिरकर 3.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसने कड़ाके की ठंड और शीतलहर के साथ पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए। इससे पहले साल 2021 में 26 जनवरी को तापमान 2.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। कड़ाके की इस ठंड और ठिठुरन के बीच अब मौसम एक बार फिर करवट ले रहा है, जिसके चलते मंगलवार को दिल्ली-एनसीआर में मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, तापमान में इस अचानक गिरावट का मुख्य कारण आसमान का साफ होना और उत्तर-पश्चिम दिशा से आने वाली बर्फीली हवाएं थीं। हालांकि, सोमवार दोपहर के बाद हवाओं की रफ्तार में कुछ कमी आई, क्योंकि एक नया पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) सक्रिय होकर दिल्ली की ओर बढ़ रहा है। इस मौसमी बदलाव के कारण मंगलवार को न्यूनतम तापमान में तो वृद्धि होगी, लेकिन दिन के समय हल्की से मध्यम बारिश और 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं दिल्लीवासियों की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। मौसम विभाग ने मंगलवार के लिए दिल्ली और आसपास के इलाकों में येलो अलर्ट जारी किया है। अनुमान है कि पहाड़ी इलाकों में हो रही ताजी बर्फबारी का सीधा असर मैदानी क्षेत्रों पर पड़ेगा, जिससे बारिश के बाद एक बार फिर शीतलहर चलने की संभावना है। आंकड़ों पर नजर डालें तो सोमवार को दिल्ली के सफदरजंग केंद्र पर न्यूनतम तापमान 4.2 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 4 डिग्री कम था। वहीं, अधिकतम तापमान 23.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी विक्षोभ के असर से रात के तापमान में बढ़ोतरी होगी, लेकिन दिन का तापमान गिरकर 18 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।
ठंड के साथ-साथ दिल्ली की हवा की गुणवत्ता में भी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 241 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है। इससे एक दिन पहले तक यह 153 के साथ मध्यम श्रेणी में था। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मंगलवार को होने वाली बारिश और तेज हवाओं के कारण वायु प्रदूषण में कमी आएगी और 27 व 28 जनवरी को एक्यूआई में सुधार होने की उम्मीद है। आने वाले दिनों के लिए पूर्वानुमान है कि 27 और 28 जनवरी को पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी और ओलावृष्टि हो सकती है। इसका सीधा असर दिल्ली-एनसीआर के तापमान पर पड़ेगा और 29 जनवरी के बाद एक बार फिर पारे में गिरावट दर्ज की जाएगी। प्रशासन ने लोगों को बदलती ठंड और बारिश के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि ओलावृष्टि और तेज हवाओं से सामान्य जनजीवन प्रभावित हो सकता है।
हिमाचल में जमकर हुई बर्फबारी, मनाली में सैकड़ों पर्यटक फंसे, रास्तों पर लग गया लंबा जाम
27 Jan, 2026 02:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मनाली। हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में 23 जनवरी से जारी भारी बर्फबारी ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। मनाली और इसके आसपास के क्षेत्रों में कुदरत के सफेद कहर की वजह से सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे सैकड़ों पर्यटक बीच रास्ते में फंस गए हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक, मंगलवार सुबह मनाली के सोलंगनाला में एक बार फिर बर्फबारी शुरू हो गई है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी है। सड़कों पर जमी बर्फ की मोटी चादर के कारण नेशनल हाईवे-3 पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हालांकि, अधिकारियों ने सोमवार को सोलंगनाला तक सड़क साफ करने का काम किया, लेकिन वर्तमान में वहां केवल छोटे और हल्के वाहनों को ही आवाजाही की अनुमति दी गई है। बसों का संचालन अभी भी बाधित है और वे मनाली से करीब 16 किलोमीटर दूर पतलीकुहल तक ही जा पा रही हैं। रविवार की तुलना में स्थिति में मामूली सुधार जरूर हुआ है, लेकिन पर्यटकों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। पिछले दिनों मनाली में 15 किलोमीटर लंबा भारी ट्रैफिक जाम देखा गया, जहां पर्यटकों को कड़कड़ाती ठंड में अपना सामान उठाकर पैदल चलते हुए देखा गया।
जिला प्रशासन लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मुख्य सड़कें बंद होने के कारण पर्यटक अपने होटलों तक ही सीमित हैं। सड़कों से बर्फ हटाने का काम युद्धस्तर पर जारी है, लेकिन ट्रैफिक व्यवस्था को पूरी तरह बहाल करने में अभी कुछ समय और लग सकता है। फिसलन भरी सड़कों को देखते हुए पतलीकुहल से मनाली की ओर केवल चार पहिया वाहनों को ही जाने दिया जा रहा है। मौसम विभाग ने 27 जनवरी के लिए भारी बर्फबारी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिससे पतलीकुहल-मनाली और मणिकरण-भुंतर मार्ग के पूरी तरह बंद होने का खतरा बढ़ गया है। पुलिस और प्रशासन ने पर्यटकों एवं स्थानीय निवासियों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे मौसम साफ होने तक ऊंचे इलाकों, नदियों, नालों और हिमस्खलन की संभावना वाले क्षेत्रों की ओर न जाएं। कुल्लू पुलिस के अनुसार, यदि मौसम और बिगड़ता है तो केवल 4गुणा4 वाहनों को ही आगे बढ़ने की अनुमति होगी। यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों, जैसे राइट बैंक मार्ग, का उपयोग करने का सुझाव दिया गया है। खराब मौसम और तूफान की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने सभी से सतर्क रहने और आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने का आग्रह किया है।
उत्तराखंड: UCC का संशोधित अध्यादेश लागू, लिव-इन केस में किया बदलाव, एक क्लिक में जानिए सब कुछ
27 Jan, 2026 01:55 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने समान नागरिक संहिता उत्तराखंड 2024 में आवश्यक संशोधनों हेतु समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश 2026 को राज्यपाल की स्वीकृति के उपरांत लागू कर दिया गया है. यह अध्यादेश संविधान के अनुच्छेद 213 के अंतर्गत राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) द्वारा जारी किया गया है. यह तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है.
बता दें कि 27 जनवरी 2025 को उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता उत्तराखंड 2024 लागू किया था. कल 27 जनवरी 2026 को उत्तराखंड में यूसीसी लागू हुए पूरा एक साल हो जाएगा. इस दिन को उत्तराखंड सरकार भी यूसीसी दिवस के रुप में मना रही है. इस मौके पर प्रदेश भर में कई कार्यक्रम किए जाएंगे. इस कानून के लागू होने के बाद समय-समय पर परिस्थितियों और कानून के मौजूद कुछ खामियों को दूर करने के लिए संशोधन किया गया.
बीते साल अगस्त 2025 में यूसीसी में कुछ संशोधन किए गए थे, जिन्हें मंजूरी के लिए लोकभवन (राजभवन) को भेजा गया था, लेकिन प्रस्ताव में कुछ तकनीकी खामियां थी, जिसके चलते लोकभवन ने यूसीसी संशोधन प्रस्ताव को 18 दिसंबर 2025 को वापस लौटा दिया था. इसके बाद उन कमियों को दूर करते हुए यूसीसी संशोधन प्रस्ताव को 15 जनवरी को हुई मंत्रिमंडल के सम्मुख रखा गया, जिस पर मंत्रिमंडल ने अध्यादेश के जरिए आवश्यक संशोधन की मंजूरी दे दी थी. इस संशोधन प्रस्ताव को धर्मस्व एवं संस्कृति विभाग की ओर से राज्यपाल की मंजूरी के लिए लोक भवन भेजा गया था. आज 26 जनवरी को यूसीसी के संशोधन प्रस्ताव पर राज्यपाल ने मोहर लगा दी है.
संशोधन के बाद ये प्रमुख बिंद लागू
आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 के स्थान पर अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 तथा दंडात्मक प्रावधानों के लिए भारतीय न्याय संहिता, 2023 को लागू किया गया है.
धारा 12 के अंतर्गत 'सचिव' के स्थान पर 'अपर सचिव' को सक्षम प्राधिकारी नामित किया गया है.
उप-पंजीयक द्वारा निर्धारित समय-सीमा में कार्रवाई न किए जाने की स्थिति में प्रकरण स्वतः पंजीयक एवं पंजीयक जनरल को अग्रेषित किए जाने का प्रावधान किया गया है.
उप-पंजीयक पर लगाए गए दंड के विरुद्ध अपील का अधिकार प्रदान किया गया है और दंड की वसूली भू-राजस्व की भांति किए जाने का प्रावधान जोड़ा गया है.
विवाह के समय पहचान से संबंधित गलत प्रस्तुति को विवाह निरस्तीकरण का आधार बनाया गया है.
विवाह एवं लिव-इन संबंधों में बल, दबाव, धोखाधड़ी अथवा विधि-विरुद्ध कृत्यों के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं.
लिव-इन संबंध की समाप्ति पर पंजीयक द्वारा समाप्ति प्रमाण पत्र जारी किए जाने का प्रावधान किया गया है.
अनुसूची-2 में ‘‘विधवा’’ शब्द के स्थान पर 'जीवनसाथी' शब्द का प्रतिस्थापन किया गया है.
विवाह, तलाक, लिव-इन संबंध एवं उत्तराधिकार से संबंधित पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति पंजीयक जनरल को प्रदान की गई है.
दौसा में एक्सप्रेसवे पर दर्दनाक हादसा, 4 लोगों की मौत, कार को कई किलोमीटर तक घसीटता ले गया ट्रक
27 Jan, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दौसा : जिले के पापड़दा थाना क्षेत्र में स्थित आलूदा गांव के समीप बीती रात दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के पिलर नंबर 194 पर भीषण सड़क हादसा हो गया. एक कार और ट्रक में जोरदार टक्कर हो गई. जिस कारण हादसे में कार सवार पांच लोगों में से चार की मौत हो गई. जबकि, पांचवा शख्स घायल हुआ है. इस दर्दनाक हादसे में हरियाणा नंबर की अर्टिगा कार और एक अज्ञात भारी वाहन (ट्रक) के बीच जबरदस्त भिड़ंत हुई. टक्कर इतनी भयावह थी कि कार पूरी तरह चकनाचूर हो गई और उसमें सवार लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला.
नांगल राजावतान डीएसपी दीपक मीना ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त अर्टिगा कार में शव बुरी तरह फंस गए, जिन्हें बाहर निकालने के लिए क्रेन और रेस्क्यू टीम तुरंत मदद के लिए मौके पर बुलाया गया. ऐसे में काफी मशक्कत के बाद कार में फंसे शवों को बाहर निकाला जा सका. वहीं शवों को जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है. हादसे के समय कार में कुल पांच लोग सवार थे. टक्कर के बाद चार लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया. घायल युवक को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है.
हादसे के बाद कार को कई किलोमीटर तक घसीटा : घायल युवक ने पुलिस को जो बयान दिया, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है. युवक के अनुसार, ट्रक चालक टक्कर के बाद कार को कई किलोमीटर तक घसीटता हुआ ले गया. इस दौरान कार में फंसे लोग मदद के लिए तड़पते रहे, लेकिन तेज रफ्तार और अंधेरे में किसी को कुछ समझने का मौका नहीं मिला. सूचना मिलते ही पापड़दा और नांगल राजावतान थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची. एक्सप्रेसवे पर बिखरे मलबे और क्षतिग्रस्त कार को देखकर हर कोई सन्न रह गया. हादसे के बाद दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे पर लंबा जाम लग गया और यातायात कुछ समय के लिए बाधित रहा. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर ट्रैफिक को नियंत्रित किया और पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी है.
सभी मृतक ग्रेटर नोएडा निवासी : प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे का शिकार सभी लोग ग्रेटर नोएडा के रहने वाले थे. यह सभी उज्जैन महाकाल के दर्शन के बाद वापस लौट रहे थे, तभी मंगलवार अल सुबह उनकी गाड़ी किसी अज्ञात वाहन से टकरा गई और यह दुर्घटना हो गई .पापड़दा थाना क्षेत्र में पिलर संख्या 193 के समीप की घटना बताई गई है. फ़िलहाल पुलिस अज्ञात वाहन की तलाश में जुट गई है. साथ ही सीसीटीवी कैमरा की मदद से दुर्घटना के कारण का भी पता लगाने की कोशिश हो रही है. फिलहाल दुर्घटना में घायल शख्स ज्यादा जानकारी देने की स्थिति में नहीं है, लेकिन मौके की हालत बता रहे हैं कि कार किसी बड़े वाहन से पीछे से टकरा गई थी, इसके बाद यह वाहन के साथ फंसकर लंबी दूरी तक सड़क पर घसीटती रही. दुर्घटना के बाद शव कार में बुरी तरह से फंस गए थे.
गणतंत्र दिवस के जश्न में मातम, झांकी में आग लगने से 5 बच्चे झुलसे
27 Jan, 2026 11:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नवादा। 26 जनवरी को पूरा देश गणतंत्र दिवस (Republic Day) के जश्न में सराबोर रहा। लेकिन इस बीच बिहार के नवादा (Nawada in Bihar) जिले में एक बड़ा हादसा हो गया। नवादा में एक स्कूल की झांकी में भीषण आग (Massive fire in the tableau) लग गई। इस आग में पांच बच्चे झुलस गए हैं। एक बच्चे की हालत नाजुक बताई जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, झांकी के प्रदर्शन के दौरान पेट्रोल से यह आग लगी है। घटना के बाद बच्चों के परिजनों में नाराजगी है। बताया जा रहा है कि वारिसलीगंज नगर परिषद क्षेत्र के सब्जी बाजार के पास हुई इस अगलगी से अफरातफरी मच गई। यहां एक निजी स्कूल द्वारा झांकी निकाली गई थी। इस झांकी में पेट्रोल का खतरनाक ढंग से इस्तेमाल किया गया था।
लापरवाही की वजह से यहां आग लग गई। आग लगने की वजह से कुछ बच्चे इस अगलगी की चपेट में आ गए। पांच बच्चे इस अगलगी में झुलस गए और इनमें से एक बच्ची की हालत नाजुक बताई जा रही है। झांकी में लगी आग में झुलसी बच्ची को उचित इलाज के लिए पावापुरी स्थित वीआईएमएस में रेफर किया गया है।
इधर इस दुखद हादसे के बाद बच्चों के आक्रोशित परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों का आरोप है कि आग लगने के बाद स्कूल प्रबंधन ने संवेदनहीनता दिखाई। स्कूल प्रबंधन मौके से भाग गया था। जिसके बाद वहां मौजूद स्थानीय लोगों ने जख्मी बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया है। परिजनों ने अब इस मामले में जिलाधिकारी से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
वायुसेना की कार्रवाई से पस्त हो गया था पाकिस्तान, लगाई थी संघर्षविराम की गुहार…रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
27 Jan, 2026 10:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के पहलगाम (Pahalgam) में हुए हमले में पाकिस्तानी आतंकियों (Pakistani terrorists) ने 26 बेकसूर नागरिकों की हत्या की थी, जिसके जवाब में भारतीय सेनाओं (थलसेना, वायुसेना, नौसेना) ने संयुक्त रूप से पाकिस्तान के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया। जिस पर अब विदेशी थिंक टैंक ने अपनी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट में बताया गया कि कैसे सैन्य कार्रवाई के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान की हवाई रक्षा प्रणाली को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। जिससे चलते 4 दिनों के संघर्ष के बाद ही पाकिस्तान ने युद्धविराम की गुहार लगाई।
सीएचपीएम की रिपोर्ट में क्या बताया?
स्विट्जरलैंड स्थित सेंटर फॉर मिलिट्री हिस्ट्री एंड पर्सपेक्टिव स्टडीज (सीएचपीएम) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 10 मई, 2025 की सुबह तक भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र के अहम हिस्सों पर हवाई श्रेष्ठता यानी अपना वर्चस्व हासिल कर लिया था। जिससे दुश्मन के ठिकानों के खिलाफ लंबी दूरी के सटीक हमले करने की अनुमति मिल गई थी। जिसके चलते पाकिस्तान घुटना पर आ गया और दुश्मन के हौंसले पलभर में ही पस्त हो गए।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर सबसे विस्तृत स्वतंत्र विश्लेषण
सीएचपीएम की नई रिपोर्ट में सैन्य इतिहासकार एड्रियन फोंटानेलाज ने 7 से 10 मई 2025 के बीच भारत-पाकिस्तान हवाई युद्ध का अब तक का सबसे विस्तृत स्वतंत्र विश्लेषण किया है।फोंटानेलाज द्वारा लिखित रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत की दूरस्थ हमलों को जारी रखने की क्षमता काफी हद तक ब्रह्मोस और स्कैल्प-ईजी क्रूज मिसाइलों जैसे उन्नत गोला-बारूद की उपलब्धता पर निर्भर करती है।
पाकिस्तानी वायु सेना घुटनों पर आई
इसके विपरीत 7 मई को सफलतापूर्वक अंजाम दिए गए जटिल हवाई अभियानों को दोहराने की पाकिस्तानी वायु सेना (पीएएफ) की क्षमता धीरे-धीरे कम होती गई। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि अग्रिम हवाई निगरानी रडार नष्ट हो गए थे और भारत की एस-400 वायु रक्षा प्रणालियों से पाकिस्तानी वायु सेना के एयरवेज सिस्टम (एडब्ल्यूएसी) और स्टैंडऑफ स्ट्राइक प्लेटफॉर्म को खतरा बढ़ता जा रहा था। क्योंकि 7 से 10 मई के बीच किए गए पाकिस्तानी हमलों को भारतीय रक्षा प्रणालियों ने काफी हद तक नाकाम कर दिया था।
सटीक निशाना और सबकुछ तबाह
सीएचपीएम की रिपोर्ट में बताया गया है कि 7 मई को राफेल या मिराज 2000I लड़ाकू विमानों से युक्त दो भारतीय आक्रमण इकाइयों में से एक ने बेहद कम ऊंचाई पर पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में प्रवेश किया और फिर अचानक ऊपर उठकर सटीक बम गिराए। विमानों ने बमों से तब तक हमला करना जारी रखा, जब तक कि वे लक्ष्य पर नहीं गिरे। इधर 7 मई की सुबह ही पाकिस्तानी तोपखाने ने नियंत्रण रेखा के पास गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके जवाब में भारत ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की। उसी रात, पाकिस्तानी वायु सेना ने 300 से अधिक ड्रोन, जेएफ-17 लड़ाकू विमानों और सीएम-400एकेजी मिसाइलों का इस्तेमाल करते हुए एक व्यापक आक्रमण शुरू किया।
सैन्य एवं नागरिक ठिकानों को बनाया निशाना
ड्रोन हमलों में भारतीय सेना की अग्रिम चौकियों, कमान मुख्यालयों, रसद केंद्रों और हवाई अड्डों को निशाना बनाया गया, साथ ही इलेक्ट्रॉनिक खुफिया जानकारी जुटाने के लिए भारतीय वायु रक्षा रडारों को सक्रिय करने का भी प्रयास किया गया। पाकिस्तानी सेना ने सोंगर सशस्त्र ड्रोन, यिहा-III (तुर्की निर्मित) आत्मघाती ड्रोन का इस्तेमाल किया और सैन्य एवं नागरिक ठिकानों पर हमले किए।
भारतीय हवाई सुरक्षा को भेदने में फेल रहा PAK
हमले की व्यापकता के बावजूद रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान भारतीय हवाई सुरक्षा को भेदने में विफल रहा। अधिकांश आने वाले गोला-बारूद को रोक दिया गया। 9 मई को एक और पाकिस्तानी हमले की तैयारियों का पता चलने पर भारत ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की। 10 मई को सुबह 2:00 बजे से 5:00 बजे के बीच भारतीय वायु सेना ने Su-30MKI, जगुआर और राफेल विमानों का इस्तेमाल करते हुए भारतीय हवाई क्षेत्र के भीतर से ब्रह्मोस, SCALP-EG और रैम्पेज मिसाइलें दागीं।
पाकिस्तान के हवाई अड्डों को बनाया निशाना
पाकिस्तान के भीतर 200 किलोमीटर तक की दूरी पर स्थित सात ठिकानों पर हमले किए गए, जिनमें सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल बैटरी और पांच हवाई अड्डे शामिल थे। इस्लामाबाद के पास स्थित नूर खान हवाई अड्डे के कमान एवं नियंत्रण केंद्र को नुकसान पहुंचा, जबकि पाकिस्तान के MALE ड्रोन बेड़े का केंद्र मुरीद हवाई अड्डे पर ड्रोन हैंगर और नियंत्रण सुविधाओं को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि रहीम यार खान, रफीकी और सुक्कुर हवाई अड्डों को भी निशाना बनाया गया।
'मदर ऑफ ऑल डील्स' पर थोड़ी देर में लगेगी मुहर, इकॉनमी को मिलेगा काफी बढ़ावा
27 Jan, 2026 09:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारत और यूरोपियन यूनियन मंगलवार को लंबी बातचीत के बाद 'मदर ऑफ ऑल डील्स' की घोषणा करेंगे. भारत और यूरोपियन यूनियन मिलकर विश्व व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा और दुनिया की आबादी का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा हैं, जो इस पार्टनरशिप के बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक महत्व को दर्शाता है.
यूरोपियन यूनियन और भारत करीबी पार्टनर हैं जो आर्थिक खुशहाली, नियमों पर आधारित इंटरनेशनल ऑर्डर और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं. ट्रेड और इन्वेस्टमेंट इस रिश्ते के मुख्य आधार बने हुए हैं. मंगलवार को होने वाले यूरोपियन यूनियन -भारत समिट में दोनों तरफ के नेताओं से एक संयुक्त व्यापक रणनीतिक एजेंडा अपनाने और चल रही मुक्त व्यापार समझौता वार्ता के संदर्भ में व्यापार पर चर्चा करने की उम्मीद है. इसे पहली बार 2007 में लॉन्च किया गया था और 2022 में फिर से लॉन्च किया गया और सोमवार को खत्म हुआ.
आने वाली डील पर बात करते हुए यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा, 'भारत और यूरोप ने एक स्पष्ट चुनाव कर लिया है.' रणनीतिक साझेदारी, बातचीत और खुलेपन का चुनाव. अपनी एक-दूसरे को पूरा करने वाली ताकतों का फायदा उठाना और आपसी मजबूती बनाना. हम खंडित दुनिया को दिखा रहे हैं कि एक और रास्ता भी मुमकिन है.'
यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा ने भी यही बात दोहराते हुए कहा, 'भारत-यूरोपियन यूनियन के लिए एक जरूरी पार्टनर है. हम सब मिलकर नियमों पर आधारित इंटरनेशनल ऑर्डर को बचाने की क्षमता और जिम्मेदारी शेयर करते हैं. सामान के व्यापार में यूरोपियन यूनियन भारत का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है, जो चीन के ठीक बाद और अमेरिका से आगे है, और भारत के कुल सामान व्यापार का 11.5 प्रतिशत हिस्सा है.
आधिकारिक डेटा के मुताबिक 2024 में यूरोपियन यूनियन-भारत के बीच सामान का ट्रेड 120 बिलियन यूरो से ज्यादा का था. इसमें भारत से यूरोपियन यूनियन का 71.4 बिलियन यूरो का इंपोर्ट और भारत को यूरोपियन यूनियन का 48.8 बिलियन यूरो का एक्सपोर्ट शामिल था.
पिछले दस सालों में सामान का दोनों देशों के बीच ट्रेड दोगुना हो गया है. इस दौरान, भारत से यूरोपियन यूनियन का इंपोर्ट 140 फीसदी बढ़ा, जबकि भारत को यूरोपियन यूनियन का एक्सपोर्ट 58 फीसदी बढ़ा, जिससे कमर्शियल रिश्तों में लगातार बढ़ोतरी दिख रही है.
यूरोपियन यूनियन से भारत को एक्सपोर्ट होने वाले मुख्य सामान में मशीनरी और अप्लायंसेज, ट्रांसपोर्ट इक्विपमेंट और केमिकल्स शामिल हैं. दूसरी ओर यूरोपियन यूनियन मुख्य रूप से भारत से मशीनरी और अप्लायंसेज, केमिकल्स और फ्यूल इम्पोर्ट करता है.
सर्विसेज के ट्रेड में भी अच्छी ग्रोथ देखी गई है. 2024 में यूरोपियन यूनियन-भारत के बीच सर्विसेज का ट्रेड 66 बिलियन यूरो से ज्यादा का था, जिसमें यूरोपियन यूनियन इम्पोर्ट 37 बिलियन यूरो से ज्यादा और यूरोपियन यूनियन एक्सपोर्ट लगभग 29 बिलियन यूरो था.
पिछले दस सालों में दोनों देशों के बीच सर्विसेज का ट्रेड दोगुने से ज्यादा हो गया है, जिसमें 243 फीसजी की वृद्ध हुई है. भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच ट्रेड होने वाली मुख्य सर्विसेज में टेलीकम्युनिकेशन, कंप्यूटर और इन्फॉर्मेशन सर्विसेज, प्रोफेशनल और मैनेजमेंट कंसल्टिंग जैसी दूसरी बिजनेस सर्विसेज, और ट्रांसपोर्ट सर्विसेज शामिल हैं.
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) इस रिश्ते की गहराई को और दिखाता है. 2024 में भारत में यूरोपियन यूनियन के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की वैल्यू 132 बिलियन यूरो से ज्यादा थी, जिससे यूरोपियन यूनियन देश में सबसे बड़ा निवेशक बन गया.
पॉलिसी के मामले में यूरोपियन यूनियन और भारत ने जून 2022 में एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के लिए बातचीत फिर से शुरू की. उसी समय, इन्वेस्टमेंट प्रोटेक्शन और जियोग्राफिकल इंडिकेशन पर अलग से बातचीत शुरू की गई. ट्रेड बातचीत का मकसद रुकावटों को दूर करना है और इससे एक्सपोर्ट को और बढ़ाने, सर्विसेज को खोलने में मदद मिलेगी.
हिमाचल प्रदेश : बर्फबारी से हिमाचल में 1200 सड़कें ब्लॉक, कोल्ड वेव का अलर्ट…
27 Jan, 2026 09:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शिमला. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में सोमवार को भारी बर्फबारी (Heavy snowfall) और बारिश (Rain) की वजह से राज्य भर में 1,250 से अधिक सड़कें बंद हो गईं. देश के अलग-अलग इलाकों से टूरिस्ट शिमला पहुंचे थे बर्फ देखने लेकिन अब मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. हिमाचल की वादियों में मौज लेने गए लोग सड़क जाम होने की वजह से फंस गए हैं. लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने सड़कों को बहाल करने के लिए करीब 3,500 मशीनें और जेसीबी तैनात की हैं. लाहुल और स्पीति के ताबो गांव में तापमान शून्य से 10.2 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया.
मौसम विभाग ने मंगलवार के लिए कुल्लू, किन्नौर, चंबा और लाहुल-स्पीति में भारी बर्फबारी का ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है. शिमला, सोलन और कांगड़ा सहित अन्य जिलों में बिजली और तेज हवाओं के साथ ‘येलो अलर्ट’ प्रभावी है. पर्यटकों को भारी ट्रैफिक जाम और पानी की किल्लत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.
हालांकि, सरकार इस बर्फबारी को फसलों और जल स्रोतों के पुनर्भरण के लिए फायदेमंद मान रही है. प्रशासन ने पर्यटकों से जिम्मेदारी से यात्रा करने और मौसम की चेतावनियों का पालन करने की अपील की है.
काम पर लगी कई हजार मशीनें…
PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह के मुताबिक, सरकार सड़कों को खोलने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है. सूबे राज्य के कई हिस्सों में स्नो ब्लोअर और जेसीबी मशीनें तैनात हैं. उन्होंने बताया कि हिमाचल में कुल 3,500 मशीनें काम पर लगी हैं और जरूरत पड़ने पर इनकी तादाद बढ़ाई जाएगी. मंत्री ने किसानों और बागवानों को बधाई देते हुए कहा कि यह बर्फबारी आगामी फसलों, विशेषकर पहाड़ी इलाकों के बगीचों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.
पर्यटकों में उत्साह लेकिन मुश्किल सफर…
सड़कों के बंद होने और कड़ाके की ठंड के बावजूद पर्यटकों का तांता लगा हुआ है. दिल्ली से आए सैलानी दानियाल ने बताया कि ट्रैफिक और बर्फ की वजह से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, लेकिन वे बर्फबारी का आनंद ले रहे हैं.
वहीं, तैयबा नाम की पर्यटक ने साझा किया कि सुबह के वक्त पीने का पानी और चाय मिलना भी मुश्किल हो गया था. सड़कें फिसलन भरी हैं और ट्रैफिक जाम की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जिससे पर्यटक काफी असमंजस में हैं.
मौसम विभाग की चेतावनी!
शिमला स्थित मौसम केंद्र ने मंगलवार को भारी हिमपात की भविष्यवाणी की है. कुल्लू, किन्नौर, चंबा और लाहुल-स्पीति के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है, जहां भारी बर्फबारी के साथ बारिश की संभावना है.
वहीं, शिमला, सोलन, कांगड़ा, मंडी, सिरमौर, बिलासपुर, हमीरपुर और ऊना के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया गया है. इन इलाकों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, बिजली चमकने और शीत लहर चलने का अनुमान है.
बैंक हड़ताल आज: कामकाज ठप, जानें निजी बैंकों का हाल और जरूरी बातें
27 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली. अगर आपको आज बैंक (Bank ) से जुड़ा कोई जरूरी काम है, तो फिर ये खबर पढ़कर ही घर से ब्रांच के लिए निकलें, कहीं ऐसा न हो कि आप वहां पहुंचे और ताला लगा हुआ नजर आए. दरअसल, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने 27 जनवरी को देशव्यापी हड़ताल (Nationwide strike) का ऐलान किया है और इसकी सीधा असर बैंकिंग कामकाज पर देखने को मिल सकता है. इस हड़ताल के चलते बैंक जमा-निकासी से लेकर ब्रांचों में कस्टमर सर्विस जैसे सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं. इस परेशानी के बीच आप घर बैठे भी आसानी से अपने कुछ जरूरी बैंकिंग काम आसानी से निपटा सकते हैं. आइए जानते हैं कैसे?
बैंक यूनियनों की हड़ताल क्यों?
मंगलवार को देशभर में बैंकिंग कामकाज पर असर देखने को मिल सकता है, क्योंकि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने 27 जनवरी को देश भर में हड़ताल करने का फैसला किया है. उनकी डिमांड है कि सप्ताह में 5 दिन (5 Days Work Week Demand) के काम का नियम तुरंत लागू किया जाना चाहिए, जिससे बैंक कर्मचारियों को दो दिन अवकाश मिल सके.
बैंक यूनियनों के मुताबिक, केंद्र सरकार और इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) से लंबे समय से इस मुद्दे पर कई दौर की चर्चाएं हो चुकी हैं, लेकिन अब तक हमारी मांगों को लेकर कोई ठोस फैसला नहीं लिया जा सका है. यूनियनों का कहना है कि दूसरे सरकारी विभागों की तरह ही बैंकों में भी वर्क-लाइफ बैलेंस जरूरी है और 5 Days Work Week सिस्टम लागू किया जाना चाहिए.
23 जनवरी को ऐलान, ये काम प्रभावित
गौरतलब है कि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस 9 यूनियनों की मेन बॉडी है. बीते 23 जनवरी को अपनी पांच दिन के वर्क वीक की मांग को लेकर यूनियन ने चीफ लेबर कमिश्नर के साथ एक बैठक की थी, लेकिन कोई हल न निकलने के बाद देशव्यापी हड़ताल का ऐलान कर दिया था.
अगर इस हड़ताल से प्रभावित होने वाले कामकाजों की बात करें, तो बैंक ब्रांच में जाकर नकदी जमा कराने से लेकर पैसों की निकासी तक के काम में रुकावट आ सकती है. इसके अलावा ब्रांचों में ग्राहकों की सहायता के लिए मौजूद कस्टमर सर्विस से लेकर बैंक लोन और अन्य डॉक्यूमेंटेशन से जुड़े काम पर असर देखने को मिल सकता है.
ऐसे घर बैठे निपटा सकते हैं बैंकिंग काम
आमतौर पर किसी पर्व या आयोजन या फिर साप्ताहिक अवकाश के दौरान जब बैंक क्लोज रहते हैं, तो तमाम जरूरी बैंकिंग कामों को घर बैठे ऑनलाइन बैंकिंग (Online Banking) के जरिए निपटाया जाता है और मंगलवार की हड़ताल के बाद भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. ऑनलाइन सर्विस 24X7 चालू रहती हैं और बेहद आसानी से ऑनलाइन ट्रांजैक्शंस जैसे काम निपटाए जा सकते हैं. सभी सरकारी और प्राइवेट बैंक ग्राहकों को ये सुविधा मुहैया कराते हैं. इसके अलावा इस हड़ताल का बैंक एटीएम (Bank ATM) या यूपीआई सिस्टम पर असर पड़ने की संभावना नहीं है.
इसके अलावा HDFC Bank, ICICI Bank या Axix Bank समेत अन्य प्राइवेट बैंकों का कामकाज भी प्रभावित होने की आशंका नहीं है, क्योंकि बैंक यूनियंस की हड़ताल में इन निजी बैंकों के कर्मचारी शामिल नहीं हैं.
काशी विश्वनाथ धाम में ध्वजारोहण समारोह, आरती श्रृंगार में राष्ट्रीय पर्व की झलक दिखी
27 Jan, 2026 07:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाराणसी। भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर काशी विश्वनाथ धाम में तिरंगा फहराया गया। यह कार्यक्रम सुबह 8:30 बजे काशी विश्वनाथ धाम स्थित प्रशासनिक कार्यालय, नीलकंठ भवन में संपन्न हुआ। इस ध्वजारोहण समारोह में काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण, उप जिलाधिकारी पवन प्रकाश, डिप्टी कलेक्टर शम्भू शरण, नायब तहसीलदार मिनी एल शेखर समेत मंदिर न्यास के सभी अधिकारीगण एवं कार्मिकगण मौजूद थे। ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान गाकर मातृभूमि को नमन किया गया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ध्वजारोहण समारोह के उपरांत, पिछले दो सालों में शुरु किए गए नवाचार की निरंतरता में काशी विश्वनाथ धाम स्थित भारत माता की प्रतिमा पर श्रद्धा एवं राष्ट्रभक्ति के भाव के साथ भारत माता आराधना संपन्न की गई। इस अवसर पर डमरू वादन एवं शास्त्रीगणों द्वारा स्वस्तिवाचन के साथ तिरंगा ध्वज पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम में मंदिर न्यास के सभी अधिकारीगण, कार्मिकगण एवं जनसामान्य की सहभागिता रही, जिन्होंने भारत माता के चरणों में नमन कर देश की समृद्धि एवं शांति की कामना की। सभी उपस्थित व्यक्तियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। इस अवसर पर सभी ने राष्ट्र की एकता, अखंडता, संप्रभुता, शांति, प्रगति एवं विश्व कल्याण की कामना की। सभी ने यह संकल्प लिया कि वे अपने-अपने दायित्वों का पूर्ण निष्ठा एवं ईमानदारी से निर्वहन करते हुए देश की सेवा में सदैव तत्पर रहेंगे।
गणतंत्र दिवस कार्यक्रमों एवं आरती श्रृंगार में राष्ट्रीय पर्व की स्पष्ट झलक देखने को मिली। सोमवारीय रुद्राभिषेक में अविमुक्तेश्वर महादेव के अर्घ्य को राष्ट्रीय ध्वज के साथ अभिषेक किया गया। समस्त आरती श्रृंगार में भी तिरंगा थीम आधारित श्रृंगार किया गया। काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की ओर से गणतंत्र दिवस के इस पावन अवसर पर समस्त श्रद्धालुओं, नागरिकों एवं देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी गई। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि हम सभी के जीवन में सत्य और धर्म के मार्ग चलना सदैव बना रहे और हमारा राष्ट्र निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर हो।
गणतंत्र दिवस परेड में ऑपरेशन सिंदूर की गूंज, प्रहार फॉर्मेशन और ध्वज ने भरा जोश
26 Jan, 2026 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सैन्य परेड की सलामी ली। कर्तव्य पथ पर हो रही सैन्य परेड में ऑपरेशन सिंदूर की गूंज साफ नजर आई। परेड के दौरान ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) पर भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर का ध्वज दिखा।
कर्तव्य पथ पर परेड की शुरुआत में कैप्टन विजय प्रताप के नेतृत्व में प्रहार फॉर्मेशन में फ्लाईपास्ट किया गया। इसमें लेफ्टिनेंट कर्नल अहमद पाशा की ओर से उड़ाए जा रहे ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) पर भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर का ध्वज दिखा। इस फ्लाईपास्ट में भारतीय सेना के ALH डब्ल्यूएचआई और भारतीय वायुसेना के एएलएच मार्क-4 हेलीकॉप्टर ने भी भाग लिया।
कर्तव्य पथ पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेनाओं की ओर से इस्तेमाल किए गए हथियारों का भी प्रदर्शन किया गया। सैन्य परेड के दौरान भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने ऑपरेशन सिंदूर फॉर्मेशन बनाया।
दिव्यास्त्र भारतीय सेना का स्वदेशी रूप से विकसित एक उन्नत मिसाइल सिस्टम है, जिसे आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह अत्याधुनिक तकनीक, उच्च सटीकता और तेज प्रतिक्रिया क्षमता से लैस है। दिव्यास्त्र को विशेष रूप से दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों को कम समय में नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें आधुनिक मार्गदर्शन प्रणाली और बेहतर लक्ष्य भेदन क्षमता शामिल है, जिससे यह हर मौसम और हर परिस्थिति में प्रभावी रहता है। यह हथियार प्रणाली भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को मजबूत करती है और सेना की सामरिक ताकत को नई ऊंचाई देती है।
शक्तिबाण भारतीय रक्षा अनुसंधान की एक आधुनिक और स्वदेशी हथियार प्रणाली है, जिसे तेज, सटीक और प्रभावी हमले के लिए विकसित किया गया है। यह उन्नत गाइडेंस टेक्नोलॉजी से लैस है, जिससे लक्ष्य पर अत्यधिक सटीकता के साथ प्रहार किया जा सकता है। शक्तिबाण को दुश्मन की रणनीतिक और सामरिक क्षमताओं को निष्क्रिय करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी खासियत कम समय में तैनाती और विभिन्न परिस्थितियों में संचालन की क्षमता है। यह प्रणाली भारतीय सेना की मारक शक्ति बढ़ाने के साथ-साथ देश की आत्मनिर्भर रक्षा नीति को भी मजबूती प्रदान करती है।
प्रधानमंत्री आवास योजना से स्वयं के पक्के मकान का सपना हुआ साकार
केदारनाथ मंदिर में नए नियम लागू, मोबाइल इस्तेमाल पर पूरी तरह बैन
मनरेगा की ‘डबरी’ और ‘बिहान’ के सहयोग से सविता बनीं आत्मनिर्भर
दिलीप घोष बोले- बंगाल में खिलेगा कमल, BJP की जीत का भरोसा
लेमरू में दौड़ी जिंदगी की नई रफ्तार, संजीवनी 108 सेवा से ग्रामीणों को मिल रहा त्वरित उपचार
छत के नेट से टीम इंडिया की कैप तक का सफर
केदारनाथ धाम में उत्सव का माहौल, कल सुबह खुलेंगे कपाट
सुपर सकर मशीन द्वारा लगातार चौथे दिन तानसेन नगर में सीवर सफाई कार्य जारी
रायपुर प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन में सूरजपुर बना प्रदेश में प्रथम स्थान पर
