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ऑक्सफोर्ड की रिपोर्ट: 2050 तक गर्मी से उबलने लगेगी धरती, 4 अरब लोगों का मिट जाएगा अस्तित्व!
1 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। सूरज की तपिश आने वाले दशकों में इस कदर कहर बरपाएगी कि इंसानी बस्तियां भट्टी में तब्दील हो जाएंगी। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक ताजा और बेहद चिंताजनक रिसर्च के अनुसार, वर्ष 2050 तक दुनिया की लगभग 40 प्रतिशत आबादी, यानी करीब 4 अरब लोग ऐसी जानलेवा गर्मी का सामना करेंगे, जिसे सह पाना मानव शरीर के लिए नामुमकिन होगा और उनका अस्तित्व पर संकट आ जाएगा। वैज्ञानिकों ने इस रिपोर्ट को 2026 की सबसे खौफनाक चेतावनी बताते हुए स्पष्ट किया है कि हम एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं जहां धरती पानी की तरह उबलने लगेगी।
ऑक्सफोर्ड के वैज्ञानिकों ने विशेष रूप से भारत, नाइजीरिया और इंडोनेशिया के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन देशों में गर्मी का सबसे वीभत्स रूप देखने को मिलेगा। जब पारा 45 से 50 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाएगा, तब मानव शरीर के अंदरूनी अंग खुद को ठंडा रख पाने में विफल होने लगेंगे, जिससे बड़े पैमाने पर ऑर्गन फेलियर का खतरा बढ़ जाएगा। भारत के संदर्भ में यह स्थिति और भी भयावह है क्योंकि यहां की एक विशाल आबादी के पास एयर कंडीशनिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में गर्मी से होने वाली मौतों का आंकड़ा किसी बड़ी सुनामी की तरह विनाशकारी होगा।
आंकड़े बताते हैं कि साल 2010 में जहां केवल 1.5 अरब लोग इस खतरे के दायरे में थे, वहीं 2050 तक यह संख्या दोगुनी से भी अधिक होकर 3.8 अरब तक पहुंच जाएगी। यह संकट केवल गर्म देशों तक सीमित नहीं रहेगा। रूस, कनाडा और फिनलैंड जैसे ठंडे देशों के लिए भी यह गैस चैंबर जैसी स्थिति पैदा करेगा। इन देशों के घर और बुनियादी ढांचा सर्दी से बचाव के लिए बने हैं, जो भीषण गर्मी को सोखकर घरों के अंदर का तापमान और अधिक बढ़ा देंगे। ऑक्सफोर्ड की प्रमुख शोधकर्ता राधिका खोसला ने चेतावनी दी है कि यदि वैश्विक तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि की सीमा पार होती है, तो शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी। फसलें जलकर राख हो जाएंगी, जिससे वैश्विक स्तर पर भुखमरी और खाद्य संकट पैदा होगा। रिपोर्ट के अनुसार, रहने लायक सुरक्षित ठिकानों की तलाश में करोड़ों लोग पलायन करने को मजबूर होंगे, जिससे दुनिया भर में सामाजिक और आर्थिक अस्थिरता पैदा होगी। यह रिपोर्ट स्पष्ट संदेश देती है कि यदि अभी कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाला समय केवल आग और धुएं की पहचान बनकर रह जाएगा।
एपस्टीन फाइल्स में अमेरिकी राष्ट्रपति को लेकर किया दावा, इजराइल के दबाव में थे ट्रंप
1 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेज के नए बैच में कई गंभीर और सनसनीखेज आरोप सामने आए हैं। एफबीआई की रिपोर्ट में एक विश्वसनीय गोपनीय सूत्र के हवाले से दावा किया गया है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर इजराइल का दबाव था। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर का ट्रंप के कारोबारी समूह और राष्ट्रपति पद के कामकाज में दोनों पर जरूरत से ज्यादा दखल था। यह भी कहा गया है कि कुशनर के परिवार के कथित तौर पर भ्रष्टाचार, रूसी पैसों के लेनदेन और कट्टर यहूदी चबाड नेटवर्क से संबंध रहे हैं।
रिपोर्ट में यह आरोप भी लगाया गया है कि जेफरी एपस्टीन के वकील को इजराइली की मोसाद ने प्रभावशाली छात्रों को प्रभावित करने के लिए अपने पक्ष में कर लिया था। रिपोर्ट में कुशनर के पारिवारिक इतिहास का भी जिक्र है। इसमें कहा गया है कि उनके पिता को पहले वित्तीय मामलों में दोषी ठहराया गया था, लेकिन बाद में डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें राष्ट्रपति क्षमा दे दी थी।
अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी दस्तावेजों में सामने आया कि टेस्ला के मालिक एलन मस्क और जेफरी एपस्टीन के बीच ईमेल पर हुई बातचीत पहले मानी जा रही जानकारी से कहीं ज्यादा विस्तृत थी। इन ईमेल में एपस्टीन ने मस्क को अमेरिकी वर्जिन आइलैंड्स स्थित अपने निजी द्वीप पर आने का न्योता दिया था और संभावित तारीखों, यात्रा की व्यवस्था और मुलाकातों पर चर्चा की थी। हालांकि यह साफ नहीं है कि मस्क कभी वहां गए या नहीं।
दस्तावेज में माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दस्तावेजों में दावा किया गया है कि रूसी महिलाओं के साथ संबंध बनाने के बाद गेट्स को यौन रोग हो गया था। इनमें यह भी दावा किया गया है कि उन्होंने चुपचाप अपनी उस समय की पत्नी मेलिंडा गेट्स को देने के लिए एंटीबायोटिक दवाएं मांगी थीं। ये दावे एपस्टीन की ओर से 2013 में खुद को लिखे गए ईमेल में दर्ज बताए गए हैं और शुक्रवार को अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी किए गए लाखों दस्तावेजों का हिस्सा हैं। हालांकि इन सभी आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिका ने जारी कीं नई फाइलें, भारतीय फिल्म निर्देशक मीरा नायर और मस्क के नामों का खुलासा
31 Jan, 2026 05:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी न्याय विभाग (जस्टिस डिपार्टमेंट) द्वारा शुक्रवार देर रात जेफ्री एपस्टीन सेक्स स्कैंडल से संबंधित नई गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मच गया है। इन फाइलों में लाखों पन्ने, हजारों तस्वीरें शामिल हैं, जो दुनिया के कई प्रभावशाली व्यक्तियों के एपस्टीन और उसकी सहयोगी गिस्लीन मैक्सवेल के साथ संबंधों पर नई रोशनी डालते हैं। इस ताजा खुलासे में प्रसिद्ध भारतीय फिल्म निर्देशक मीरा नायर और टेस्ला के सीईओ इलॉन मस्क का नाम भी सामने आया है।
दस्तावेजों के अनुसार, अमेरिकी फिल्म पब्लिसिस्ट पेगी सीगल ने 21 अक्टूबर 2009 को जेफ्री एपस्टीन को एक ईमेल भेजा था। इस ईमेल में पेगी ने गिस्लीन मैक्सवेल के मैनहट्टन स्थित टाउनहाउस में आयोजित एक आफ्टर-पार्टी का जिक्र किया है। यह पार्टी मीरा नायर की 2009 में रिलीज हुई फिल्म एमेलिया की स्क्रीनिंग के उपलक्ष्य में रखी गई थी। इस फिल्म में हिलेरी स्वैंक और रिचर्ड गियर जैसे बड़े सितारों ने काम किया था। ईमेल में बताया गया है कि इस पार्टी में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस और खुद मीरा नायर समेत कई हाई-प्रोफाइल हस्तियां मौजूद थीं। गौरतलब है कि मीरा नायर न्यूयॉर्क के राजनेता जोहरान ममदानी की मां हैं और सिनेमा जगत का एक प्रतिष्ठित चेहरा हैं।
इन नई फाइलों में कुल 30 लाख पेज, 1 लाख 80 हजार तस्वीरें और 2 हजार से ज्यादा वीडियो शामिल हैं, जो इस स्कैंडल की व्यापकता को दर्शाते हैं। इसके अलावा, दस्तावेजों में इलॉन मस्क और एपस्टीन के बीच 2012 और 2013 के दौरान हुए ईमेल संवादों का भी विवरण है। इन ईमेल से पता चलता है कि एपस्टीन ने मस्क को अपने निजी द्वीप पर आने के लिए कई बार आमंत्रित किया था। एपस्टीन ने मस्क के साथ यात्रा की तारीखों, हेलीकॉप्टर व्यवस्था और वहां होने वाली पार्टियों के बारे में विस्तृत चर्चा की थी। ईमेल संवाद के अनुसार, नवंबर 2012 में एपस्टीन ने मस्क से पूछा था कि द्वीप पर आने के लिए हेलीकॉप्टर में कितने लोग होंगे, जिस पर मस्क ने जवाब दिया था कि शायद केवल वे और उनकी तत्कालीन पत्नी तलुला रिले आएंगे। इसी बातचीत के दौरान मस्क ने उत्सुकतापूर्वक पूछा था, आपके द्वीप पर सबसे जंगली (वाइल्डेस्ट) पार्टी किस दिन होगी? इसके बाद 2013 में भी दोनों के बीच यात्रा के समय को लेकर ईमेल का आदान-प्रदान हुआ था।
हालांकि, जारी किए गए इन दस्तावेजों में इस बात की कोई पुख्ता पुष्टि नहीं हुई है कि इलॉन मस्क वास्तव में कभी उस द्वीप पर गए थे। मस्क पहले भी सार्वजनिक रूप से इन दावों का खंडन कर चुके हैं। पिछले वर्ष जब उनका नाम प्रारंभिक फाइलों में आया था, तब उन्होंने स्पष्ट किया था कि एपस्टीन ने उन्हें बुलाने की कोशिश जरूर की थी, लेकिन उन्होंने कभी उसका निमंत्रण स्वीकार नहीं किया। एपस्टीन केस से जुड़ी ये नई फाइलें आने वाले दिनों में कई और रसूखदार लोगों की मुश्किलों को बढ़ा सकती हैं।
पाक पीएम ने बयां किया दर्द कहा- आपको पता है कर्ज के लिए कितना गिड़गिड़ाना पड़ता है?
31 Jan, 2026 04:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान की बदहाल आर्थिक स्थिति और विदेशी कर्ज के बोझ तले दबी उसकी साख की हकीकत अब खुद देश के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दुनिया के सामने रख दी है। दशकों से चली आ रही कर्ज की इस प्रेम कहानी पर कटाक्ष करते हुए प्रधानमंत्री शरीफ ने स्वीकार किया कि कैसे उन्हें और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को दूसरे देशों के सामने कर्ज के लिए गिड़गिड़ाना पड़ता है। सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने एक हालिया संबोधन में शरीफ ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से बेलआउट पैकेज हासिल करने के लिए उन्हें किस हद तक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा।
इस्लामाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने देश की जनता के साथ अपनी बेबसी साझा की। उन्होंने कहा कि भले ही पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति में थोड़ा सुधार दिख रहा हो, लेकिन इसके पीछे की सच्चाई बहुत कड़वी है। शरीफ के मुताबिक, मैं उन देशों का आभारी हूं जिन्होंने संकट में हमारा साथ दिया, लेकिन कर्ज लेने की अपनी मर्यादाएं और जिम्मेदारियां होती हैं। मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता कि हमने दोस्त देशों से कर्ज मांगने के लिए कितनी मशक्कत की। मैं और सेना प्रमुख ने मिलकर चुपचाप कई देशों का दौरा किया, उन्हें पाकिस्तान के हालात और आईएमएफ प्रोग्राम की अहमियत समझाई और फिर कई अरब डॉलर की मांग की।
प्रधानमंत्री ने आत्मग्लानी के भाव के साथ स्वीकार किया कि जब कोई व्यक्ति या देश कर्ज लेने जाता है, तो उसका सिर हमेशा झुका होता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कर्ज मुफ्त में नहीं मिलता; मदद करने वाले देशों की अपनी शर्तें और मांगें होती हैं, जिन्हें अपनी इज्जत दांव पर लगाकर भी मानना पड़ता है। शरीफ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब चर्चाएं हैं कि पाकिस्तान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पीस बोर्ड का हिस्सा बनने के लिए हामी भर चुका है, जिसमें शामिल होने की अपनी भारी-भरकम वित्तीय शर्तें हैं।संकट के समय मददगार रहे देशों का आभार जताते हुए शहबाज शरीफ ने विशेष रूप से चीन का नाम लिया। उन्होंने कहा कि चीन ने सबसे कठिन दौर में पाकिस्तान का हाथ थामा। इसके अलावा सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर के वित्तीय सहयोग के बिना आईएमएफ का कार्यक्रम तैयार करना मुमकिन नहीं था।
आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीएवा के साथ अपनी मुलाकात को याद करते हुए शरीफ ने बताया कि पिछली गलतियों के कारण आईएमएफ पाकिस्तान को और रियायत देने के मूड में नहीं था। उन्होंने कहा, जॉर्जीएवा ने साफ कह दिया था कि अब समय खत्म हो चुका है। तब मैंने उन्हें अपनी इज्जत की कसम दी और भरोसा दिलाया कि हम समझौते की हर शर्त का अक्षरशः पालन करेंगे। इसी भावनात्मक अपील और कड़े वादों के बाद ही पाकिस्तान को वह कर्ज मिल सका, जिसने उसे दिवालिया (डिफॉल्ट) होने की कगार से वापस खींचा।
एपस्टीन की नई फाइल: रशियन लड़कियों से संबंध बनाने पर बिल गेट्स को हुआ था गुप्त रोग
31 Jan, 2026 03:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा कुख्यात यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़ी लाखों पन्नों की नई फाइलें, हजारों तस्वीरें जारी किए जाने के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इन दस्तावेजों में माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स पर बेहद गंभीर और व्यक्तिगत आरोप लगाए गए हैं। एपस्टीन द्वारा साल 2013 में खुद को लिखे गए कुछ ड्राफ्ट ईमेल में यह दावा किया गया है कि बिल गेट्स रूसी महिलाओं के साथ संबंधों के कारण यौन संचारित रोग (एसटीडी) की चपेट में आ गए थे।
इन ईमेल के मुताबिक, एपस्टीन का आरोप है कि गेट्स ने उससे गुप्त रूप से एंटीबायोटिक्स दवाएं मांगी थीं ताकि वे उन्हें अपनी तत्कालीन पत्नी मेलिंडा गेट्स को चुपके से दे सकें और संक्रमण के बारे में उन्हें पता न चले। एक अन्य ड्राफ्ट ईमेल में, जो गेट्स के सलाहकार बोरिस निकोलिक के इस्तीफे के रूप में लिखा गया था, एपस्टीन ने दावा किया कि उसने गेट्स को इन अवैध मुलाकातों के परिणामों से निपटने में मदद की थी। एपस्टीन ने इन नोट्स में गेट्स पर ईमेल डिलीट करने की कोशिश करने और उनके संबंधों के टूटने पर अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी। हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि ये सभी दावे पूरी तरह से एपस्टीन के निजी नोट्स पर आधारित हैं और इनकी पुष्टि के लिए कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है।
इन गंभीर आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए बिल गेट्स के प्रवक्ता ने इन्हें सिरे से खारिज कर दिया है। प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि ये दावे पूरी तरह निराधार और झूठे हैं। यह केवल एपस्टीन की हताशा और गेट्स द्वारा रिश्ता खत्म किए जाने के बाद उन्हें बदनाम करने की एक कोशिश मात्र है। बिल गेट्स पहले भी कई बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर चुके हैं कि एपस्टीन से मिलना और उनसे किसी भी तरह का जुड़ाव रखना उनके जीवन की एक बड़ी गलती थी।ज्ञात हो कि बिल और मेलिंडा गेट्स का साल 2021 में तलाक हो चुका है। मेलिंडा ने उस समय तलाक के कारणों में गेट्स के बाहरी संबंधों और एपस्टीन से उनकी नजदीकियों का जिक्र किया था, हालांकि उन्होंने कभी भी विस्तार से विवरण नहीं दिया। ताजा फाइलों में गेट्स और एपस्टीन की कुछ पुरानी तस्वीरें भी शामिल हैं, लेकिन जांच अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि केवल तस्वीरों का होना किसी गलत गतिविधि का प्रमाण नहीं है। जेफरी एपस्टीन ने साल 2019 में जेल में आत्महत्या कर ली थी, जब वह सेक्स ट्रैफिकिंग के संगीन आरोपों का सामना कर रहा था। यह नया खुलासा उसी व्यापक जांच का हिस्सा है जिसमें दुनिया की कई नामचीन हस्तियों के नाम उछल रहे हैं।
भिखमंगे पाकिस्तान की निकल गई हेकड़ी! शहबाज शरीफ ने कबूला- कर्ज के लिए हाथ फैलाया, सिर झुकाया और शर्मसार हुआ
31 Jan, 2026 01:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Pakistan News: पाकिस्तान की हालत बद से बदतर होती जा रही है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद इसे स्वीकार्य किया है कि बदहाल स्थिति की वजह से उन्हें और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को ‘दोस्त देशों के सामने भीख मांगनी पड़ी’. इतना ही पीएम ने कहा कि कई बार तो कर्ज लेने की शर्तें काफी अनुचित होती हैं लेकिन क्या करें मजबूरी में पाकिस्तान को अपनी प्रतिष्ठा से समझौता करना पड़ता है, कई बार ऐसा किया गया. हालांकि पीएम शहबाज इससे पहले भी कई बार बोल चुके हैं कि वे दुनिया में भीख का कटोरा लेकर घूमना नहीं चाहते हैं. पाकिस्तान का दिनों-दिन कर्ज बढ़ता ही जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के ऊपर दिसंबर 2025 तक कुल विदेश कर्ज लगभग 52.366 बिलियन अमेरिकी डॉलर है.
क्या बोले पीएम शहबाज?
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद में पाकिस्तान के टॉप एक्सपोर्टर्स को संबोधित करते हुए देश की आर्थिक बदहाली को लेकर बड़ा खुलासा किया है. शहबाज यह बताते हुए भावुक हो गए और बोले कि मैं आपको कैसे बताऊं समझ नहीं आ रहा है.
हमने कई दोस्त मुल्कों के दर पर जाकर कर्ज के लिए गिड़गिड़ाया. हालांकि उन्होंने हमें मायूस तो नहीं किया लेकिन जो कर्ज लेने जाता है, अक्सर उसका सिर नीचे की ओर झुका रहता है. उनकी यह बयानबाजी पाकिस्तान की बदहाली हालत को दिखाती है.
कर्ज के लिए हाथ फैलाया, सिर झुकाया
शहबाज ने कहा कि कई बार कर्ज लेने के लिए चुपचाप कई देशों के पास झुके सिर के साथ मदद की गुहार लगाई. वित्तीय संकट इतना गहरा था कि बार-बार विदेशी दौरों पर जाकर कर्ज मांगना पड़ा. कर्ज लेने के कई बार नियम कुछ अनुचित भी होते हैं इस दौरान पाकिस्तान को अपनी प्रतिष्ठा से समझौता करना पड़ता है. कई दफा ऐसे किया गया. कई बार तो शर्तें इतनी ज्यादा रख दी जाती हैं कि उनका बोझ उठाना नामुमकिन होता है. इसके बावजूद भी समझौता करना पड़ता है.
पीएम शहबाज ने खुद किया कबूलनामा
पाकिस्तानी पीएम शहबाज ने यह कबूलनामा उस दौरान किया है, जब कोई सहयोगी देश मदद की नहीं बल्कि व्यापार और निवेश की उम्मीद कर रहे हैं. शहबाज का बयान देश को असहज करने वाला है. हालांकि पाकिस्तान लगातार अपनी क्षमता से ज्यादा कर्ज लेता ही जा रहा है. उस पर कर्ज चुकाने का बोझ इतना बढ़ गया है कि आए दिन कई देशों के सामने मदद की गुहार लगाता रहता है.
पुतिन ने जेलेंस्की को दिया मॉस्को आने का न्योता, एक बार फिर जगी शांति की उम्मीद
31 Jan, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को। पिछले चार वर्षों से जारी रूस और यूक्रेन के भीषण युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक ऐसा कदम उठाया गया है, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। अब तक जेलेंस्की और पुतिन के बीच जिस नफरत और तल्खी की बातें की जा रही थीं, उन्हें किनारे रखते हुए रूस ने पहली बार बातचीत के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आधिकारिक तौर पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को शांति वार्ता के लिए मॉस्को आमंत्रित किया है। इस कदम का अर्थ यह है कि अब दोनों देश किसी तीसरे पक्ष के दखल के बिना आमने-सामने बैठकर इस खूनी संघर्ष को सुलझाने की कोशिश कर सकते हैं।
गुरुवार को क्रेमलिन से आई इस खबर ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा गलियारों में हलचल तेज कर दी है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने पुष्टि की है कि न्योता भेज दिया गया है, हालांकि जेलेंस्की प्रशासन की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या पुष्टि नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मुलाकात सफल होती है, तो यह सदी की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत साबित हो सकती है। इस बड़ी हलचल के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सक्रियता दिखाई है। ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से फोन पर लंबी बातचीत की है। वॉशिंगटन में कैबिनेट मीटिंग के दौरान ट्रंप ने खुलासा किया कि उन्होंने पुतिन से मानवीय आधार पर कीव और अन्य यूक्रेनी शहरों पर हमले रोकने की व्यक्तिगत गुजारिश की थी। ट्रंप के अनुसार, उन्होंने पुतिन से कहा था कि यूक्रेन में पड़ रही हाड़ कंपा देने वाली भीषण ठंड को देखते हुए सैन्य कार्रवाइयों पर लगाम लगाई जाए। ट्रंप ने दावा किया कि पुतिन ने उनकी बात मानते हुए वादा किया है कि वे कम से कम एक हफ्ते तक कीव पर कोई हमला नहीं करेंगे। ट्रंप ने इसे पुतिन का बड़प्पन करार देते हुए कहा कि जो लोग फोन कॉल को बेकार बता रहे थे, वे गलत साबित हुए हैं। वर्तमान में यूक्रेन अभूतपूर्व ऊर्जा संकट और भीषण ठंड का सामना कर रहा है। रूस के हालिया हमलों के कारण यूक्रेन का पावर ग्रिड बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे लाखों लोग बिना बिजली और हीटिंग के रहने को मजबूर हैं। ऐसी स्थितियों में जहां हड्डियां गला देने वाली ठंड मौत का सबब बन रही है, वहां एक हफ्ते का संघर्ष विराम और मॉस्को में सीधी वार्ता का प्रस्ताव शांति की एक नई किरण लेकर आया है। अब पूरी दुनिया की नजरें जेलेंस्की के जवाब पर टिकी हैं कि क्या वे इस न्योते को स्वीकार कर युद्ध के खात्मे की ओर कदम बढ़ाते हैं या नहीं।
वैश्विक समस्याएं किसी एक शक्ति के हुक्म चलाने से हल नहीं होंगी: यूएन महासचिव
31 Jan, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयार्क। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गुरुवार को अमेरिका और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधा है। गुटेरेस ने साफ कहा कि किसी एक देश के हुक्म चलाने से दुनिया नहीं चलती और इससे किसी भी समस्या का निपटारा नहीं किया जा सकता है। गुटेरेस ने चीन पर भी निशाना साधा। वहीं यूएन चीफ ने बहुध्रुवीयता की जरूरत पर जोर देते हुए हालिया भारत-ईयू ट्रेड डील का भी जिक्र किया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गुटेरेस अपने कार्यकाल के 10वें और आखिरी साल की शुरुआत के मौके पर यह बात कही।
बता दें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद इस साल के अंत में उनके उत्तराधिकारी का चुनाव करेगी। अपने कार्यकाल में कई युद्धों की शुरूआत देखने वाले गुटेरेस बदलते वैश्विक परिदृश्य को लेकर चिंता जताई। इस दौरान गुटेरेस ने कहा कि वैश्विक समस्याएं किसी एक शक्ति के हुक्म चलाने से हल नहीं होंगी और दो शक्तियों द्वारा दुनिया को 2 भाग में बांट देने से कुछ होगा। उन्होंने अमेरिका और चीन का नाम भी लिया। गुटेरेस ने कहा कि यह विचार है कि दो पोल्स हैं, एक अमेरिका में केंद्रित है और दूसरा चीन में… लेकिन अगर हम एक स्थिर दुनिया चाहते हैं, अगर हम एक ऐसी दुनिया चाहते हैं जिसमें शांति बनी रहे, जिसका विकास हो सके और समानता आए, तो हमें बहुध्रुवीयता का समर्थन करने की जरुरत है। मैं बहुत सारी पॉजिटिव उम्मीदों के साथ हाल के ट्रेड एग्रीमेंट देख रहे हैं। जैसे भारत और ईयू के बीच हाल ही में हुआ समझौता।
बता दें हाल के दिनों में कई देशों ने अमेरिकी प्रभुत्व के खिलाफ बयान दिए हैं। वहीं गुटेरेस की ये टिप्पणी ट्रंप द्वारा बोर्ड ऑफ पीस के गठन के एक हफ्ते बाद आई हैं। ट्रंप ने इसे संयुक्त राष्ट्र का विकल्प तक बता दिया है। हालांकि गुटेरेस ने ट्रंप को संदेश देते हुए कहा कि मेरी राय में अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की मूल जिम्मेदारी संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद की है। गुटेरेस ने कहा कि आज के समय में अंतर्राष्ट्रीय कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। अंतर्राष्ट्रीय कानून को कुचला जा रहा है। सहयोग कम हो रहा है और बहुपक्षीय संस्थाओं पर कई मोर्चों पर हमला हो रहा है। आज जंग शुरू करने वालों को सजा नहीं मिल रही जिससे तनाव बढ़ रहा है, अविश्वास बढ़ रहा है और बुरे लोगों के लिए मौके बढ़ रहे हैं। गुटेरेस ने कहा है कि इतनी बाधाओं के बावजूद संयुक्त राष्ट्र हार नहीं मानेगा और शांति की स्थापना करने की पूरी कोशिश करेगा।
रूस की जगह अब वेनेजुएला बनेगा भारत का ऑयल पार्टनर, ट्रंप ने दिया ये बड़ा ऑफर
31 Jan, 2026 10:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन. अमेरिका (US) ने भारत (India) से कहा है कि वह जल्द ही वेनेजुएला (Venezuela) से कच्चा तेल (Crude oil) खरीदना दोबारा शुरू कर सकता है. रॉयटर्स से बात करने वाले मामले से जुड़े तीन सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका इस सप्लाई को रूसी तेल के विकल्प के तौर पर पेश कर रहा है, क्योंकि भारत रूसी तेल का आयात तेजी से घटाने जा रहा है.
यह पहल ऐसे समय पर हुई है, जब वॉशिंगटन की ओर से रूसी तेल आयात से जुड़े टैरिफ बढ़ाने के बाद भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद में बड़ी कटौती का वादा किया है. सूत्रों के अनुसार, आने वाले महीनों में भारत रूसी तेल का आयात कई लाख बैरल प्रतिदिन तक घटाने की तैयारी में है.
वेनेजुएला से तेल खरीदने वालों पर लगा दिया था टैरिफ
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मार्च 2025 में वेनेजुएला का तेल खरीदने वाले देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था. इसके साथ ही उनकी सरकार ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ अभियान तेज किया था, जिन्हें 3 जनवरी को अमेरिकी बलों ने पकड़ लिया था.
लेकिन कौन बेचेगा वेनेजुएला का तेल?
इसके बाद अमेरिका के रुख में बदलाव के संकेत मिले. वॉशिंगटन ने नई दिल्ली से कहा कि वह रूसी सप्लाई में कमी की भरपाई के लिए वेनेजुएला से तेल खरीद फिर शुरू कर सकता है. यह कदम रूस के तेल निर्यात से होने वाली आय को सीमित करने की अमेरिकी रणनीति का हिस्सा है, जिससे यूक्रेन युद्ध को फंडिंग मिल रही है. सूत्रों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वेनेजुएला का तेल किसी निजी ट्रेडिंग कंपनियों के जरिए बेचा जाएगा या सीधे वहां की सरकारी तेल कंपनी के माध्यम से.
‘कच्चे तेल के स्रोतों में लाएंगे विविधता’
यूक्रेन पर 2022 में रूस के हमले के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों और भारी छूट के चलते भारत रूस का बड़ा तेल खरीदार बन गया था. हालांकि बाद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ा दिए. रूसी तेल खरीद से जुड़े अतिरिक्त टैरिफ जोड़ने के बाद अगस्त तक ये टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गए. पिछले हफ्ते तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि रूसी तेल का आयात घटाने के साथ भारत अपने कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता ला रहा है. उन्होंने वेनेजुएला को लेकर सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा.
5 से 6 लाख बैरल प्रतिदिन तक गिर सकता है आयातरॉयटर्स के दो सूत्रों के मुताबिक, भारत जल्द ही रूसी तेल आयात को 10 लाख बैरल प्रतिदिन से नीचे लाने की तैयारी में है. जनवरी में यह करीब 12 लाख बैरल प्रतिदिन था. फरवरी में इसके 10 लाख बैरल और मार्च में करीब 8 लाख बैरल प्रतिदिन तक गिरने का अनुमान है. एक अन्य सूत्र ने कहा कि आगे चलकर यह मात्रा 5 से 6 लाख बैरल प्रतिदिन तक भी आ सकती है. ऐसा होने से भारत को अमेरिका के साथ व्यापक व्यापार समझौता करने में मदद मिल सकती है.
व्यापार से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में भारत का रूसी तेल आयात पिछले दो साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया. इससे भारत के आयात में ओपेक देशों के तेल की हिस्सेदारी 11 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई. भारतीय रिफाइनरियों ने कमी पूरी करने के लिए मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका से तेल की खरीद बढ़ा दी है.
पूरे यूरोपीय यूनियन को एक न्यूक्लियर अंब्रेला के नीचे लाना होगा: फ्रेडरिक मर्ज
31 Jan, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि जब तक अमेरिका है, तभी तक यूरोप सुरक्षित है, लेकिन अब इस ब्लैकमेल का जवाब जर्मनी ने देने की ठान ली है। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने संकेत दिए हैं, जिसमें कहा जा रहा कि जर्मनी अब यूरोपीय देशों को न्यूक्लियर अंब्रेला मुहैया कराएगा। जर्मनी इसके जिए फ्रांस के साथ जुगलबंदी करने की योजना बना रहा है और न्यूक्लियर सिक्यूरिटी डेवलप करने की तैयारी है।
यूरोपीय देश लंबे समय से अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका और उसके न्यूक्लियर वेपन पर निर्भर रहे हैं, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने जिए तरह उन्हें दोयम दर्जे का बताने की कोशिश की है, उससे यूरोपीय देश काफी गुस्से में हैं। ट्रंप की इस हरकत से उनका भरोसा टूट गया है क्योंकि ट्रंप कह चुके हैं कि अमेरिका उन देशों की रक्षा नहीं करेगा जो अपनी सुरक्षा पर पर्याप्त खर्च नहीं कर रहे हैं। ग्रीनलैंड खरीदने और उस पर कब्जा करने की बात कहकर ट्रंप ने आग में घी डाल दी है। इन घटनाओं ने जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि उन्हें अमेरिका के भरोसे रहने के बजाय अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि अमेरिका के साथ मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था का एक विकल्प बनाना होगा। पूरे यूरोपीय यूनियन को एक न्यूक्लियर अंब्रेला के नीचे लाना होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ये बातचीत अभी शुरुआती चरण में है और कोई भी फैसला तत्काल नहीं लिया जाने वाला है। गुरुवार को मर्ज ने कहा कि हम जानते हैं कि हमें कई रणनीतिक और सैन्य नीतिगत फैसलों पर पहुंचना है, लेकिन फिलहाल अभी वह समय नहीं आया है। मर्ज ने यह भी साफ किया कि यह बातचीत अमेरिका के साथ न्यूक्लियर-शेयरिंग के विरोध में नहीं है, बल्कि यह उसे और मजबूत करने की एक कोशिश है।
मर्ज की पार्टी के सहयोगी और संसदीय रक्षा समिति के प्रमुख ने इस योजना को और बल दिया है। उन्होंने दावा किया कि जर्मनी के पास वह तकनीकी क्षमता है जिसका उपयोग यूरोपीय परमाणु हथियार विकसित करने में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमारे पास मिसाइलें या वारहेड्स नहीं हैं, लेकिन हमारे पास एक अहम तकनीकी है जिसे हम एक संयुक्त यूरोपीय पहल में योगदान दे सकते हैं।
बता दें फ्रेडरिक मर्ज का यह बयान बताता है कि यूरोप अब सुरक्षा के मामले में ‘आत्मनिर्भर’ होने की दिशा में गंभीर है। ट्रंप की अनिश्चित नीतियों ने जर्मनी को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अगर अमेरिका पीछे हटता है, तो यूरोप के पास अपनी सुरक्षा के लिए क्या विकल्प बचेगा? खुद का परमाणु बम न सही, लेकिन ब्रिटेन और फ्रांस के साथ मिलकर एक ‘ज्वाइंट न्यूक्लियर अंब्रेला’ तैयार करना ट्रंप के ‘सिक्योरिटी दांव’ को बेदम करने का नया प्लान हो सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट है कि बर्लिन अब वाशिंगटन की धमकियों के आगे झुकने के बजाय विकल्प तलाश रहा है।
अमेरिकी हमले के चलते ईरान मेट्रो स्टेशनों को बना रहा बंकर, कभी भी हो सकती है जंग?
31 Jan, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच टेंशन बढ़ती जा रही है। ट्रंप ने पहले समुंदर में अपना आर्माडा तैनात किया, फिर खामेनेई से परमाणु पर समझौता करने का प्रेशर डाला। ईरान ने भी ‘हाथ ट्रिगर पर रखा है’। इन हालातों के बीच किसी भी वक्त अमेरिका-ईरान के बीच जंग शुरू होने का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में तेहरान से दो ऐसी खबरें आई हैं, जिसकी वजह से मिडिल ईस्ट में सन्नाटा छा गया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ईरान और रूस से आ रही ये दो खबरें संकेत दे रही हैं कि मध्य पूर्व में किसी भी वक्त एक बड़ा धमाका या महायुद्ध छिड़ सकता है। तेहरान के मेयर ने ऐलान किया है। अमेरिका और इजराइल के बढ़ते खतरों को देखते हुए तेहरान के मेट्रो स्टेशनों और अंडरग्राउंड पार्किंग लॉट्स को ‘इमरजेंसी वॉर शेल्टर’ में बदला जा रहा है। ईरान को डर है कि अमेरिका किसी भी पल उसके सैन्य ठिकानों या परमाणु केंद्रों पर हवाई हमले कर सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई पहले ही सुरक्षित अंडरग्राउंड बंकर में शिफ्ट हो चुके हैं। ईरान ने जवाबी कार्रवाई के लिए अपनी सेना को 1000 नए घातक ड्रोन सौंपे हैं, ताकि किसी भी हमले को ‘कुचलने वाला’ जवाब दिया जा सके।
इसके अलावा रूस ने भी एक बड़ा फैसला लिया है। रूसी परमाणु ऊर्जा निगम के प्रमुख ने बताया कि रूस बुशहर परमाणु संयंत्र से अपने कर्मचारियों को निकालने के लिए पूरी तरह तैयार है। दावा किया जा रहा है कि वहां करीब 400 रूसी विशेषज्ञ और उनके परिवार मौजूद हैं। रूस ने उन्हें अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्ते निकालने का प्लान तैयार किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को ‘परमाणु डील’ साइन करने या फिर ‘अब तक के सबसे भयानक हमले’ का सामना करने की चेतावनी दी है।
इस मुस्लिम देश के पूर्व राष्ट्रपति ने किया भगवान तिरुपति बालाजी का पूजन…हाथ जोड़कर पैदल ही पहुंचे मंदिर
31 Jan, 2026 08:26 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु। इंडोनेशिया के पूर्व राष्ट्रपति जोको विडोडो (Former Indonesian President Joko Widodo) ने गुरुवार को तिरुमला स्थित भगवान वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर (Lord Venkateswara Swamy Temple at Tirumala) में पूजा-अर्चना करने पहुंचे थे। सोशल मीडिया पर उनका वीडियो भी वायरल हो रहा है। वह मंदिर परिसर में हाथ जोड़कर पैदल ही दर्शन के लिए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के अधिकारियों ने विडोडो का स्वागत किया और बाद में उन्हें मंदिर में दर्शन के लिए ले गए।
एक अधिकारी ने बताया, ‘‘इंडोनेशिया के सातवें राष्ट्रपति (विडोडो) ने भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन किए और उनका स्वागत टीटीडी के अधिकारियों ने किया।’’ दर्शन के बाद टीटीडी के अधिकारियों ने उन्हें रेशमी वस्त्र और प्रसाद भेंट किया तथा रंगनायकुला मंडपम में भगवान वेंकटेश्वर की एक तस्वीर प्रदान की।
कभी बौद्ध और हिंदू राजाओं का था शासन
बता दें कि इंडोनेशिया सबसे बड़ा मुस्लिम राष्ट्र है, इसके बावजूद यहां हिंदू संस्कृति की झलक साफ दिखाई देती है। इसे मुनियों का देश कहा जाता है। यहां की आबादी करीब 27 करोड़ है जिनमें से 90 करोड़ मुस्लिम हैं। यहां कभी हिंदू और बौद्ध राजाओं का राज हुआ करता था। ऐसे में आज भी इंडोनेशिया में कई प्रसिद्ध हिंदू मंदिर हैं। इसके अलावा यहां रामायण की भी मान्यता है।
यहां 8वीं सदी में मुस्लिम व्यापारी पहुंचे थे। इसके बाद धीरे-धीरे यहां इस्लाम का प्रचार होने लगा। कछ शासकों ने इस्लाम अपनाया तो घराने ही इस्लामिक हो गए। जो मुस्लिम व्यापारी यहां आते थे वे यहां की स्थानीय महिलाओं से शादी करते थे। ऐसे में धर्मांतरण का एक बड़ा दौर यहां चला। इसी वजह से हिंदू और बौद्ध राजाओं वाला देश एक मुस्लिम राष्ट्र बन गया।
मिंग माफिया परिवार के 11 लोगों को चीन ने दी फांसी, सरगना की ब्रिटेन में थी हवेली
31 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। चीन ने म्यांमार के कुख्यात मिंग माफिया परिवार के 11 लोगों को फांसी दे दी। यह वही गैंग है जो इंटरनेट पर फर्जी रोमांस, क्रिप्टोकरेंसी ठगी, ऑनलाइन स्कैम और इंसानी गुलामी जैसे संगीन अपराधों के लिए बदनाम था। इस गिरोह के सदस्य लोगों को पहले ऑनलाइन प्रेम जाल में फंसाते थे, फिर उन्हें धोखाधड़ी, वेश्यावृत्ति और जबरन मजदूरी जैसे अवैध कामों में धकेल देते थे। चीन की कोर्ट ने इन सभी को सितंबर में मौत की सजा सुनाई थी और गुरुवार को सजा को अमलीजामा पहनाया गया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मिंग परिवार के सदस्यों को ‘हत्या, मारपीट, गैरकानूनी हिरासत, धोखाधड़ी और अवैध कैसीनो संचालन’ जैसे अपराधों के लिए दोषी पाया गया था। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यह गैंग अब तक कम से कम 14 चीनी नागरिकों की हत्या कर चुका था और कई लोगों को अपाहिज बना दिया था। म्यांमार के लाउकैंग क्षेत्र में इनका नेटवर्क अत्यंत क्रूर तरीके से चलता था, जहां पीड़ितों को जबरन बंदी बनाकर उनसे ठगी करवाई जाती थी। मिंग माफिया का तरीका बेहद खतरनाक था। यह लोग ‘लव स्कैम’ के जरिए लोगों को प्रेमजाल में फंसाते, फिर उन्हें क्रिप्टो निवेश के नाम पर लूटते थे। यदि कोई उनके लिए काम करने से इंकार करता, तो उन्हें कैद कर बिजली के झटकों और बर्बर यातनाओं से तोड़ा जाता था।
इस गैंग का सरगना चेन झी ब्रिटेन में आलीशान जिंदगी जी रहा था। लंदन के पॉश इलाके एवेन्यू रोड पर उसकी करोड़ों की हवेली थी, साथ ही कई महंगी कमर्शियल बिल्डिंग्स और फ्लैट्स भी उसके नाम थे। ब्रिटिश सरकार ने उसके सभी ठिकानों को जब्त कर लिया है ताकि आपराधिक कमाई को खत्म किया जा सके। इस प्रकार के माफिया नेटवर्क भारत तक भी पहुंच चुका है। म्यांमार और कंबोडिया में चल रहे कई ‘डिजिटल गुलामी’ केंद्रों में अब तक 70 से ज्यादा भारतीय फंस चुके हैं। हाल ही में भारत सरकार ने बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया है। 6 नवंबर 2025 को भारतीय वायुसेना के विशेष विमानों ने 270 भारतीयों को थाईलैंड के रास्ते बचाया था। इससे पहले मार्च 2025 में भी 549 भारतीयों को म्यांमार-थाईलैंड सीमा से सुरक्षित निकाला था।
रिपोर्ट के मुताबिक अक्सर युवाओं को ‘आईटी जॉब’ का झांसा देकर थाईलैंड बुलाया जाता है और फिर किडनैप कर म्यांमार ले जाया जाता है। वहां उनके पासपोर्ट छीन लिए जाते हैं और उन्हें ‘पिग बुचरिंग’ जैसे ऑनलाइन स्कैम करवाने के लिए मजबूर किया जाता है। मिंग जैसे गैंग अब भारतीयों को भी निशाना बना रहे हैं, क्योंकि वे अंग्रेजी और हिंदी बोलने वालों को भारतीय बाजार में ठगी के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं।
यूनुस के सपने हुए खाक, भारतीय उद्योग बांग्लादेश में आने की थी भविष्यवाणी, अब मिलें बंद होने की कगार पर
30 Jan, 2026 03:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । भारत (India) को लेकर बांग्लादेश (Bangladesh) में हुईं हाल की घटनाओं ने काफी चर्चा बटोरी है। खासकर अंतरिम नेता और नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री मुहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) की एक पुरानी भविष्यवाणी खूब वायरल हो रही है। पिछले साल यानी 2025 में यूनुस भारत (India) पर ट्रंप के भारी भरकम टैरिफ से बेहद खुश नजर आ रहे थे। इतना ही नहीं, उन्होंने यहां तक दावा कर दिया था कि भारतीय इंडस्ट्रीज (विशेष रूप से टेक्सटाइल सेक्टर) बांग्लादेश में फैक्टरियां लगाएंगी, क्योंकि वहां उत्पादन लागत बहुत कम है।
अमेरिकी पत्रकार मेहदी हसन के साथ इंटरव्यू में यूनुस ने दावा किया था कि- ‘अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ के कारण भारतीय उद्योग भारत छोड़कर बांग्लादेश का रुख करेंगे। भारत पर अमेरिका के टैरिफ ज्यादा हैं, जबकि बांग्लादेश को कम टैरिफ मिला है जिससे भारतीय कंपनियां बांग्लादेश में अपनी फैक्ट्रियां लगाएंगी।’ लेकिन आज की हकीकत ये है कि बांग्लादेश की खुद की कपड़े मिलें बंद होने की कगार पर हैं।
घरेलू कपड़ा उद्योग बंद होने की कगार
जनवरी 2026 के अंत में बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग एक बड़े संकट के मुहाने पर खड़ा है। एक ओर अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस भारत पर अमेरिकी टैरिफ के बहाने तंज कस रहे थे, तो दूसरी ओर देश का अपना घरेलू कपड़ा उद्योग बंद होने की कगार पर है। बांग्लादेश का जमीनी हकीकत काफी चिंताजनक है। बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (BTMA) ने घोषणा की है कि 1 फरवरी 2026 से देश की सभी टेक्सटाइल मिलें अनिश्चित काल के लिए बंद कर दी जाएंगी।
BTMA के अध्यक्ष शौकत अजीज रसेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मिल मालिकों के पास बैंक लोन चुकाने की क्षमता नहीं बची है। उनकी पूंजी 50% से ज्यादा घट चुकी है, और कई मिलें पहले ही बंद हो चुकी हैं। बांग्लादेशी मिलों का आरोप है कि भारत से आने वाले सस्ते सूत ने घरेलू बाजार को तबाह कर दिया है। लगभग 12,000 करोड़ टका का स्थानीय स्टॉक बिना बिका पड़ा है। गैस की भारी किल्लत और बढ़ती कीमतों के कारण उत्पादन क्षमता 50% तक गिर गई है। BTMA की मांग है कि सरकार 10-30 काउंट के सूत के आयात पर ड्यूटी-फ्री सुविधा वापस ले और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करे।
भारत-ईयू (EU) डील: बांग्लादेश के लिए खतरे की घंटी
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को मदर ऑफ ऑल डील्स कहा जा रहा है। यह बांग्लादेश के गारमेंट एक्सपोर्ट के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होने वाला है। वर्तमान में बांग्लादेश LDC (अल्प विकसित देश) होने के नाते EU में ड्यूटी-फ्री एक्सेस पाता है, जबकि भारत को 12% टैक्स देना पड़ता है।
इस डील के बाद भारत को भी 0% टैरिफ मिलेगा। भारत के पास खुद का कच्चा माल (कपास और सूत) है। ड्यूटी हटते ही भारतीय कपड़े बांग्लादेशी कपड़ों की तुलना में सस्ते और बेहतर गुणवत्ता वाले हो जाएंगे। बांग्लादेश 2026-27 तक LDC श्रेणी से बाहर हो जाएगा, जिससे उसका खुद का ड्यूटी-फ्री कोटा खत्म हो जाएगा। ऐसे में भारत के साथ मुकाबला करना लगभग असंभव होगा। यूरोपीय संघ में हर तीसरा व्यक्ति बांग्लादेशी डेनिम पहनता है। डील के बाद भारत इस बाजार का एक बड़ा हिस्सा कब्जा सकता है।
मोहम्मद यूनुस जहां एक तरफ भारतीय कंपनियों के बांग्लादेश आने की उम्मीद जता रहे थे, वहीं हकीकत यह है कि बांग्लादेश का अपना ‘बैकवर्ड लिंकेज’ (सूत और कपड़ा बनाने वाली मिलें) बंद हो रहा है।
युद्ध के बीच में रूस का बड़ा कदम, जेलेंस्की को शांति वार्ता के लिए मॉस्को आने का दिया न्योता
30 Jan, 2026 02:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को. रूस (Russia) ने अमेरिका (US) की मध्यस्थता में यूक्रेन युद्ध (Ukraine war) समाप्त करने के प्रयास के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) को शांति वार्ता के लिए मॉस्को आने का निमंत्रण दिया है। क्रेमलिन ने एक बयान में इसकी जानकारी दी। दोनों देशों के बीच यह संघर्ष लगभग चार वर्षों से जारी है। क्रेमलिन की ओर से यह भी बताया गया कि रूस और यूक्रेन ने युद्ध में मारे गए सैनिकों की अदला-बदली का एक और चरण पूरा किया है। हालांकि, दोनों देशों के बीच ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकने को लेकर किसी सहमति की अटकलों पर रूस ने टिप्पणी करने से इन्कार किया।
बातचीत को गति मिलने के संकेत
पिछले सप्ताहांत अबूधाबी में अमेरिका की मध्यस्थता में हुई बातचीत से शांति प्रयासों को कुछ गति मिली है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच मतभेद अब भी बने हुए हैं। मोर्चे पर लड़ाई जारी है और हालिया मिसाइल हमलों से यूक्रेन को बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है।
एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, जेलेंस्की और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बैठक की संभावना बढ़ी है। रविवार को अबूधाबी में दोनों देशों के वार्ताकारों की अगली बैठक प्रस्तावित है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि शांति प्रक्रिया में सकारात्मक प्रगति हो रही है। हालांकि, क्षेत्रीय नियंत्रण और युद्ध के बाद की व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सहमति अभी दूर है।
अस्थायी संघर्ष विराम की बढ़ी उम्मीद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को दावा किया कि उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से एक हफ्ते के लिए यूक्रेन की राजधानी कीव पर हमले ने करने को कहा है क्योंकि यूक्रेन में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है। रूसी हमले के चलते यूक्रेन के कई शहरों के अहम ढांचे को भारी नुकसान हुआ है और देशभर में लोग बिना बिजली और गर्मी के रहने को मजबूर हैं। ट्रंप ने दावा किया है कि पुतिन इसके लिए तैयार हो गए हैं। हालांकि अभी तक रूस की तरफ से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
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