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अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर, ट्रंप ने राजनयिकों और सैन्य परिवारों को बुलाया वापस
12 Jun, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका और ईरान के बीच संबंध लगातार बिगड़ रहे हैं। परमाणु समझौते पर बातचीत ठप होने के कारण अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्य पूर्व और पश्चिम एशिया से राजनयिकों, सैन्य परिवारों और कुछ कर्मचारियों को वापस बुला लिया है।
ट्रंप ने बढ़ते तनाव का हवाला देते हुए मध्य पूर्व को खतरनाक जगह बताया।
अपने कर्मियों को वापस बुलाया
जब ट्रंप से कर्मियों को वापस बुलाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अमेरिकी कर्मियों को (मध्य पूर्व के कुछ देशों से बाहर निकाला जा रहा है, क्योंकि यह आगे चलकर एक खतरनाक जगह साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि हम इस पर नजर बनाए हुए हैं और हमने नोटिस जारी कर दिया है।
ईरान को परमाणु हथियार नहीं रखने देंगेः ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति से जब पूछा गया कि क्या मध्यपूर्व में तनाव कम करने के लिए कुछ किया जा सकता है, तो ट्रंप ने कहा कि उनके पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते और न हम इसकी अनुमति देंगे। यहां वो ईरान का जिक्र कर रहे थे।
दूतावास को खाली करने की तैयारी
राष्ट्रपति ट्रंप ने राजनायिकों और कर्मियों को वापस बुलाने की पुष्टि रायटर की रिपोर्ट आने के बाद की है, जिसमें कहा गया कि अमेरिका इरान में अपने दूतावास को आंशिक रूप से खाली करने की तैयारी कर रहा है और अन्य सैन्य कर्मियों को भी सुरक्षा जोखिमों के कारण मध्य-पूर्व में स्थानों को छोड़ने की अनुमति दे रहा है।
ये आदेश ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने संकेत दिया है कि इजरायल, जो अभी गाजा के साथ युद्ध लड़ रहा है, ईरान में परमाणु सुविधाओं पर हमला करने की तैयारी कर रहा है।
ईरान परमाणु हथियार बनाने के करीब?
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने पुष्टि की है कि ईरान रुके हुए परमाणु समझौते के बीच परमाणु हथियार बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
4.7 तीव्रता के भूकंप से पाकिस्तान में दहशत, लोग घरों से बाहर निकले
12 Jun, 2025 10:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पेशावर। पाकिस्तान के पेशावर में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। पेशावर के निवासियों को हल्के भूकंप के झटके महसूस हुए, भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.7 मापी गई। जियो न्यूज ने भूकंप विज्ञान केंद्र के हवाले से बताया कि बुधवार को पेशावर के निवासियों को हल्के भूकंप से झटका लगा, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.7 मापी गई।
भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान के हिंदू कुश पर्वत में 211 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। भूकंप के बाद तत्काल किसी नुकसान या हताहत की कोई जानकारी नहीं मिली है।
एक महीने बाद आया भूकंप
यह भूकंप इस्लामाबाद और मर्दन, स्वात, नौशेरा, स्वाबी और उत्तरी वजीरिस्तान सहित खैबर पख्तूनख्वा के कुछ हिस्सों में आए 5.3 तीव्रता के भूकंप के लगभग एक महीने बाद आया है। जियो न्यूज ने बताया कि उस भूकंप का केंद्र भी हिंदू कुश क्षेत्र में 230 किलोमीटर की गहराई पर था, जिसका निर्देशांक 36.63 एन और देशांतर 71.13 ई दर्ज किया गया था। इससे पहले अप्रैल में, पाकिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों में दो और भूकंप आए थे।
क्यों आता है बार-बार भूकंप?
भारतीय प्लेट के यूरेशियन प्लेट में उत्तर की ओर धकेलने से इस क्षेत्र में अक्सर भूकंप आते हैं। यूरेशियन प्लेट में भारतीय प्लेट के उत्तर की ओर धकेले जाने के कारण इस क्षेत्र में अक्सर भूकंप आते हैं।
इस बीच, जियो न्यूज ने इस बात पर भी जोर दिया कि कराची के बंदरगाह शहर में हाल के दिनों में लगभग 30 हल्के भूकंप आए हैं। मुख्य मौसम विज्ञानी आमिर हैदर ने बताया कि लांधी फॉल्ट लाइन दशकों के बाद एक्टिव हुई है और वर्तमान में सामान्यीकरण के फेस से गुजर रही है।
कनाडा में 50 मिलियन डॉलर की ड्रग्स जब्त, भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले दबोचे गए
12 Jun, 2025 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कनाडा में नार्को-आतंकवादी नेटवर्क और खालिस्तानी समर्थक व्यक्तियों का भंडाफोड़ किया गया है। कनाडा की पील पुलिस ने प्रोजेक्ट पेलिकन के तहत कार्रवाई करते हुए अब तक की सबसे बड़ी ड्रग जब्ती की है।
पुलिस ने 479 किलोग्राम कोकीन बरामद की है, जिसकी कीमत 47.9 मिलियन डॉलर है। पील पुलिस ने कनाडा में बसे सात भारतीय मूल के लोगों सहित 9 लोगों को गिरफ्तार किया है।
आरोपी कैसे करते थे अपना धंधा?
पील पुलिस ने बताया कि जांच में पता चला है कि नेटवर्क ने अमेरिका से कनाडा तक के वाणिज्यिक ट्रकिंग मार्गों को फायदा उठाया और उसके संबंध मैक्सिकन कार्टेलों और अमेरिका स्थित डिस्ट्रीब्यूटरों से थे।
पील पुलिस ने बताया कि कुल 479 किलोग्राम ब्रिक्ड कोकेन जिसकी कीमत लगभग 47.9 मिलियन डॉलर है, जब्त की गई। साथ ही दो अवैध लोडेड सेमी-ऑटोमैटिक हैंडगन भी जब्त की गई। ब्रैम्पटन में ओंटारियो कोर्ट ऑफ जस्टिस में जमानत की सुनवाई के लिए आरोपियों को पेश किया गया था।
प्रोजेक्ट पेलिकन की प्रशंसा
ओंटारियो के सॉलिसिटर जनरल माइकल एस केर्ज़नर ने ऑपरेशन की प्रशंसा करते हुए कहा, "प्रोजेक्ट पेलिकन इस बात का सबूत है कि जब पुलिस के पास हमारे लोगों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक उपकरण और संसाधन हों, तो वह क्या हासिल कर सकती है।"
सूत्रों के अनुसार, मादक पदार्थ की तस्करों से होने वाली कमाई का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था, जिसमें विरोध प्रदर्शन और लोगों को इकट्ठा करने के अलावा हथियाओं के लिए पैसे मुहैया कराना शामिल था।
खुफिया सूत्रों ने समर्थित एक योजना की ओर इशारा किया है, जिसके तहत कनाडा में खालिस्तानी समूहों को उच्च मूल्य वाली मैक्सिकन कोकीन की तस्करी के लिए धन मुहैया कराया जा रहा है।
कौन-कौन हुआ गिरफ्तार?
टोरंटो निवासी 31 वर्षीय साजिथ योगेंद्रराजा, बैम्पटन निवासी 44 वर्षीय मनप्रीत सिंह, हैमिल्टन निवासी 39 वर्षीय फिलिप टेप, ब्रैम्पटन निवासी 29 वर्षीय अरविंदर पोवार, कैलेडन निवासी 36 वर्षीय गुरतेज सिंह, कैम्ब्रिज निवासी 27 वर्षीय सरताज सिंह, जॉर्जटाउननिवासी , 31 वर्षीय शिव ओंकार, मिसिसॉगा निवासी 27 वर्षीय हाओ टॉमी हुइन्ह
पिछले साल भी हुई थी गिरफ्तारी
पिछले दिसंबर में, भारतीय मूल के दो कनाडाई नागरिकों को तब गिरफ्तार किया गया था जब अमेरिका की इलिनोइस पुलिस ने उनके वोल्वो ट्रक से 1 हजार पाउंड से अधिक की कोकीन बरामद की थी।
इससे जांचकर्ताओं को ISI से जुड़े तस्करी के बारे में पता चला, जो अफगानिस्तान में अवैध अफीम की खेती को संरक्षण दे रहा था, ताकि तालिबान को अमेरिकी और अफगान सैनिकों से लड़ने में मदद मिल सके।
शादी के 21 साल बाद शक ने ली जान: पिता ने चार बच्चों संग ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या की
11 Jun, 2025 06:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिल्ली से सटे फरीदाबाद में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है जहां पर एक चार बच्चों के पिता ने अपने बच्चों के साथ ट्रेन के आगे कूद कर आत्महत्या कर ली. पति अपनी पत्नी के चरित्र पर शक करता था जिसके चलते उसने अपने चार मासूम बच्चों के साथ यह खौफनाक कदम उठाया है. घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने पांचों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है और आगे की कार्रवाई की जा रही है.
फरीदाबाद के बल्लभगढ़ से होकर गुजर रहे रेलवे ट्रैक पर बिहार के रहने वाले पिता मनोज महतो ने अपने चारों बच्चों के साथ खुदकुशी कर ली है. घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर जीआरपी थाना फरीदाबाद के SHO राजपाल, एसीपी राजेश चेची के साथ अन्य पुलिस बल पहुंचा. जहां से पांचों के शवों को कब्जे में लेकर पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए फरीदाबाद की बादशाह खान सिविल अस्पताल भिजवा दिया.
मृतक मनोज महतो की पत्नी ने बताया कि वह अपने एक रिश्ते में लगने वाले भाई से फोन पर बात कर रही थी लेकिन उसके पति ने गलत समझा उसे लगा कि वह किसी और से बात करती है. बस इसी को लेकर उसने बच्चों समेत इतना बड़ा कदम उठा लिया.
चरित्र पर करता था शक
जीआरपी थाना एसएचओ राजपाल ने बताया कि जैसे ही उन्हें घटना की जानकारी मिली वह तुरंत अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गईं. जानकारी मिलने के बाद एसीपी राजेश चेची भी मौके पर पहुंचे थे. मृतक की जेब से एक फोन नंबर बरामद हुआ जो मृतक की पत्नी का था. जिसके चलते मृतक की पत्नी से संपर्क हो पाया और उसकी पत्नी कुछ ही देर में घटनास्थल पर पहुंच गई. उन्होंने बताया कि मृतक मनोज अपनी पत्नी के चरित्र पर शक करता था.
पार्क में घुमाने के बहाने बच्चों को लाया
अपने बच्चों को पार्क में घुमाने के बहाने लेकर आया था और गोल्डन टेंपल ट्रेन के सामने आत्महत्या कर ली. फिलहाल मृतक के परिजनों को इसकी सूचना दे दी गई है. मृतक के परिजनों के आने के बाद पोस्टमार्टम करवाया जाएगा.
X पर एलन मस्क की सफाई, ट्रंप से जुड़ी टिप्पणी पर जताया खेद
11 Jun, 2025 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
स्पेसएक्स और टेस्ला के CEO एलन मस्क और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया है। एलन मस्क ने पिछले हफ्ते X पर लिखी अपनी पोस्ट पर खेद जताया है। यह पोस्ट डोनाल्ड ट्रंप पर लिखी गई थी। एलन मस्क ने अपने X हैंडल पर एक नई पोस्ट लिखी है, जिसमें मस्क ने लिखा कि मैं पिछले सप्ताह लिखी गई अपनी कुछ पोस्ट को लेकर खेद प्रकट करता हूं। विवाद कुछ ज्यादा ही दूर चला गया था।
क्यों हुआ दोनों के बीच विवाद?
बता दें कि एलन मस्क ने डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) के चीफ के पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे के बाद ही दोनों के बीच जुबानी जंग छिड़ी। एलन मस्क ने डोनाल्ड ट्रंप के खर्च और टैक्स कटौती वाले विधेयक पर सवाल उठाया। विधेयक को ट्रंप ‘One Big Beautiful Bill’ कह रहे हैं, लेकिन इस विधेयक की मस्क ने कड़ी आलोचना की। ट्रंप ने भी मस्क की आलोचना का कड़ा जवाब दिया। ट्रंप ने एक पोस्ट लिखकर आलोचना का जवाब देते हुए मस्क को बिल के बारे में बताया।
उन्होंने एलन को बताया कि बिल में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की सब्सिडी में कटौती का प्रावधान है, लेकिन मस्क ने X पर पोस्ट लिखकर पलटवार किया। मस्क ने ट्रंप से कहा कि बिल का ड्राफ्ट उन्हें कभी दिखाया नहीं गया। मस्क ने X पर पोस्ट लिखकर ट्रंप के इंपीचमेंट (महाभियोग) का समर्थन भी किया। हालांकि इस पोस्ट को बाद में उन्होंने डिलीट कर दिया था, लेकिन विवाद इतना बढ़ गया था कि मस्क ने ट्रंप के जेफरी एपस्टीन से संबंधों का जिक्र कर डाला, जिसे ट्रंप ने पुराना और झूठा मुद्दा बताया।
ट्रंप की मस्क को खुली धमकी
विवाद बढ़ा तो डोनाल्ड ट्रंप ने एलन मस्क को खुली धमकी दे दी। उन्होंने कहा कि वे एलन मस्क की कंपनियों खासकर SpaceX के साथ सरकारी ठेकों और सब्सिडी खत्म करने का फैसला ले सकते हैं। NBC न्यूज को दिए एक टेलीफोनिक इंटरव्यू डोनाल्ड ट्रंप ने दिया था, जिसमें उन्होंने का दिया था कि मस्क के साथ उनका रिश्ता खत्म हो चुका है। अगर मस्क ने डेमोक्रेटिक के उम्मीदवारों को फंडिंग की तो रिपब्लिकन पार्टी के टैक्स बिल का विरोध करने वालों को गंभीर परिणाम झेलने होंगे।
ISI समर्थित खालिस्तानी संगठनों की कनाडा में मौजूदगी से भारत-कनाडा रिश्तों में दरार
11 Jun, 2025 03:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कनाडा में कई खालिस्तानी संगठन सक्रिय हैं, जो भारत के खिलाफ अलगाववादी और आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं. सिख फॉर जस्टिस (SFJ), खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (KLF), खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (KZF), खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) और खालिस्तान कमांडो फोर्स (KCF) जैसे संगठन विदेशों से भारत में अशांति फैलाने का प्रयास करते हैं. ये ग्रुप पाकिस्तान की ISI से समर्थन प्राप्त करते हैं और कनाडा, यूके, जर्मनी जैसे देशों में अपना नेटवर्क फैलाए हुए हैं.
भारत सरकार ने इन सभी को UAPA के तहत प्रतिबंधित किया है, लेकिन ये संगठन विदेशी धरती से भारत-विरोधी प्रचार और हिंसक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं. हाल ही में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद भारत-कनाडा संबंधों में तनाव भी बढ़ा है.
सिख फॉर जस्टिस
सिख फॉर जस्टिस (SFJ) एक अमेरिकी आधारित अलगाववादी संगठन है जिसकी स्थापना 2007 में वकील गुरपतवंत सिंह पन्नू ने की थी. यह समूह भारत के पंजाब क्षेत्र से अलग होकर एक स्वतंत्र सिख राष्ट्र खालिस्तान के निर्माण की वकालत करता है. SFJ ने खालिस्तान आंदोलन के लिए सिख प्रवासियों के बीच समर्थन जुटाने के उद्देश्य से “रेफ़रेंडम 2020” नाम अपने नापाक कृत्यों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करता रहा है.
भारत सरकार ने जुलाई 2019 में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत SFJ पर प्रतिबंध लगा दिया. सरकार ने इसमें राष्ट्र-विरोधी और अलगाववादी गतिविधियों में इसकी संलिप्तता का हवाला दिया गया. साल 2020 में, एक न्यायाधिकरण ने प्रतिबंध को बरकरार रखा और 2024 में भारत सरकार ने इसे और 5 साल के लिए बढ़ा दिया है. इस ग्रुप के सरपस्त गुरपतवंत सिंह पन्नून को भी भारत ने आतंकवादी घोषित किया है.
SFJ को फर्ज़ी जनमत संग्रह करवाना, भारतीय दूतावासों पर विरोध प्रदर्शन करने और डिजिटल प्रचार में करके भारत और पूरी दुनिया में रह रहे सिक्खों को भड़कान के लिए जाना जाता है. हालांकि इस संगठन पर कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में प्रतिबंध नहीं है. भारत समय-समय पर कूटनीतिक दबाव बनाता रहता है. हालांकि SFJ कानूनी और राजनीतिक सक्रियता के माध्यम से अहिंसक मार्ग पर चलने का दावा करता है, लेकिन भारत में कई अपराधों में उसका नाम आता रहता है. भारत में कई कानूनी कार्रवाइयों और सोशल मीडिया पर प्रतिबंधित है, लेकिन SFJ विदेशों में सिख समुदायों के लोगों में भारत विरोध प्रचार करता रहता, खासकर उत्तरी अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में.
खालिस्तान लिबरेशन फोर्स
SFJ की तरह खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (KLF) भी प्रतिबंधित सिख उग्रवादी संगठन है, जो भारत से अलग होकर सिखों के लिए एक अलग देश की मांग करता है. 1980 के दशक में केएलएफ पंजाब में उग्रवाद काल के दौरान सबसे सक्रिय विद्रोही समूहों में से एक के रूप में उभरा था.
केएलएफ को भारत में राजनीतिक और धार्मिक नेताओं के खिलाफ हत्या, बम विस्फोट और हमलों सहित कई आतंकवादी कृत्यों संलिप्त पाया गया है. इनके गुर्गों के कई हाई-प्रोफाइल हत्याओं में भी हाथ थे. इसे पंजाब में अलगाववादी हिंसा को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदारों में से माना जाता था.
पिछले कुछ वर्षों में इस संगठन को अलग-अलग लोगों ने चलाया है, इनमें हरमिंदर सिंह मिंटू भी शामिल है, मिंटू को 2014 में गिरफ्तार किया गया था और बाद में जेल में उसकी मृत्यु हो गई थी. एक अन्य केएलएफ का सरगना हरमीत सिंह उर्फ पीएचडी है, जिसकी साल 2020 में रहस्यमय परिस्थितियों में पाकिस्तान में मारा गया था.
भारत सरकार ने केएलएफ को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत प्रतिबंधित कर दिया है. भारत सरकार ने इस समूह को आतंकवादी गतिविधियों में इसकी शामिल और विदेश में भारत विरोधी नेटवर्क के साथ संबंधों में संलिप्त पाया गया है. सुरक्षा एजेंसियों ने इसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी (ISI) से समर्थन प्राप्त करने के आरोप लगे हैं. इसपर सोशल मीडिया प्रचार और भर्ती अभियानों से पंजाब में उग्रवाद को पुनर्जीवित करने का प्रयास करने के का काम करने की कोशिशें की हैं.
आधिकारिक प्रतिबंध के बावजूद केएलएफ गुप्त रूप से अपने देश विरोधी गतिविधियों को जारी रखता है. इसके प्रवासी-आधारित समर्थक और वित्तीय नेटवर्क कथित तौर पर कनाडा, यूके और जर्मनी जैसे देशों में सक्रिय हैं.
खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स
खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स भारत में प्रतिबंधित सिख उग्रवादी संगठन है जो खालिस्तान की स्थापना के मनसूबे पाले रखता है. 1980 के दशक में अस्तित्व में आए इस संगठन के चलते पंजाब में अलगाववादी को बढ़ावा मिला था. यह संगठन भारत और विदेशों में हिंसक गतिविधियों में शामिल रहा है.
KZF की स्थापना जम्मू के एक उग्रवादी रंजीत सिंह नीटा ने की थी, जो बाद में पाकिस्तान भाग गया. आरोप यह भी है कि पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) से समर्थन मिला. वह भारत के वांडेट आतंकवादियों में से एक है. यह संगठन बम विस्फोट, लक्षित हत्याएँ, सीमा पार से हथियारों की तस्करी, स्लीपर सेल और विदेशी फंडिंग का उपयोग करके पंजाब में उग्रवाद को फिर से पुनर्जीवित करने के प्रयास करता रहता है.
पिछले कुछ वर्षों में, KZF ने भारत के बाहर अपने अपने पांव पसारे हैं. इस संगठन का नेटवर्क जर्मनी, कनाडा, यूके और मलेशिया में सक्रिय हैं. हाल के कुछ वर्षों में समूह ने पाकिस्तान से भारतीय क्षेत्र में हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करता रहता है. साल 2019 में, पंजाब में KZF के जुड़े बड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया था और हथियारों और विस्फोटकों के जखीरे के साथ कई गुर्गों को गिरफ्तार किया गया था. जांच से पता चला कि मॉड्यूल को जर्मनी और पाकिस्तान से समर्थन मिल रहा था. भारत सरकार ने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत KZF पर प्रतिबंध लगा दिया है. राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खुफिया सहयोग के माध्यम से इसकी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रख रही है.
खालिस्तान टाइगर फोर्स
खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) हिंसक और चरमपंथी तरीकों से खालिस्तान के निर्माण की वकालत करता है. इसलिए भारत में प्रतिबंधित किया गया है. पंजाब में अलगाववाद के दौरान हत्याओं, युवाओं की भर्ती और हथियारों और विस्फोटकों की सीमा पार तस्करी समेत कई आतंकवादी गतिविधियों में शामिल रहा है. इस संगठन को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी (ISI) का करीबी समर्थन प्राप्त है.
KTF के सबसे प्रसिद्ध नेताओं में से एक भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक हरदीप सिंह निज्जर था. निज्जर पर भारतीय अधिकारियों ने कई हिंसक वारदातों में शामिल होने और सिख युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का आरोप लगाया था. निज्जर को जून 2023 में कनाडा में गोली मार दी गई थी जिसके बाद भारत और कनाडा के बीच एक बड़ी कूटनीतिक दरार पैदा हो गई थी.
KTF कनाडा, यूके, जर्मनी और मलेशिया में सक्रिय है और विदेशों में स्थित खालिस्तानी संगठनों के एक नेटवर्क का बड़ा हिस्सा है. ये संगठन डिजिटल प्रचार, सोशल मीडिया अभियान और प्रवासी समुदायों के बीच धन उगाही का उपयोग करके अलगाववादी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करते हैं. भारत सरकार ने केटीएफ को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत एक आतंकवादी संगठन के रूप में चिन्हित किया है. और वैश्विक स्तर पर इसकी गतिविधियों की निगरानी जारी रखी है.
खालिस्तान कमांडो फोर्स
खालिस्तान कमांडो फोर्स भी उन संगठनों में है जिसका उदय और विस्तार 1980 के दशक के हुआ था. पंजाब में अलगाववादी आंदोलन फायदा उठाते हुए ये सिख समुदाय में जड़े जमाने में कामयाब रहा था. यह संगठन पिछले 45 सालों से खालिस्तान का राग अलाप रहा है. इसकी स्थापना मनबीर सिंह चहेरू ने की थी और बाद में इसकी कमान परमजीत सिंह पंजवार ने पास आ गई. मई 2023 में पाकिस्तान के लाहौर में मारे जाने वही उसे चला रहा था. इस समूह ने कई हाई-प्रोफाइल हत्याओं, बम विस्फोटों, जबरन वसूली और सुरक्षा बलों पर हमलों जैसी कुख्याति वारदातों को अजाम दिया है.
यह संगठन पंजाब में अलगाववाद के दौरान सबसे घातक संगठनों में से एक था. इसने 1980 और 1990 के दशक में राज्य में फैली हिंसा में सक्रिता दिखाई थी. KCF सरकारी अधिकारियों और नागरिकों, विशेष रूप से खालिस्तान आंदोलन का विरोध करने वालों को निशाना बनाने के लिए जिम्मेदार था.
1990 के दशक के बाद से देश में इसकी कार्रवाई पर नकेल कसी गई है, लेकिन यह संगठन विदेशों में सक्रिय है. इसका नेटवर्क पाकिस्तान, कनाडा, जर्मनी और यूके में सक्रिय है. भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि इस संगठन को पाकिस्तान की आईएसआई से समर्थन प्राप्त है. भारत सरकार ने केसीएफ को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्रतिबंधित किया गया है. इसके कई नेताओं को आतंकवादी तक घोषित किया गया है
स्पेन का पुरातात्विक चमत्कार: 3,000 साल पुरानी जूलरी ने बदला इतिहास का नजरिया
11 Jun, 2025 12:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Spain Villena Treasure: स्पेन के एलिकांटे में स्थित विलेना के खजाने में अब तक की सबसे रहस्यमयी खोजों में से एक सामने आई है. इस खजाने से दो लोहे जैसी वस्तुएं एक कंगन और एक छोटी गोल आकार की ज्वेलरी मिली है. ये लोहा नहीं बल्कि उल्कापिंड से मिली धातु से बनी है. यह खोज न केवल तकनीकी दृष्टिकोण से बल्कि सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक महत्व की दृष्टि से भी बेहद जरूरी माना गया है.
यह धातु धरती पर मौजूद सामान्य खनिजों से अलग है. इसमें निकेल की मात्रा ज्यादा पाई गई, जो अंतरिक्ष से गिरे उल्कापिंडों की विशेषता होती है. इससे यह प्रमाणित होता है कि यह धातु स्वाभाविक रूप से पृथ्वी पर नहीं पाई जाती. विलेना के खजाने की ये कलाकृतियां लगभग 1400 से 1200 ईसा पूर्व के बीच की मानी जाती हैं. यह उस समय की हैं, जब इबेरियन लौह युग की शुरुआत हुई थी, जो कि 850 ईसा पूर्व के आसपास करीब 500 वर्ष पहले का है.
प्राचीन आइबेरियन लोगों की खासियत
इस खोज से यह संकेत मिलता है कि प्राचीन आइबेरियन लोग उल्कापिंड से परिचित हो चुके थे. उन्होंने उस धातु को पहचाना और उसे धार्मिक या प्रतीकात्मक महत्व प्रदान किया. उन्होंने इतनी शुरुआती अवस्था में धातु को आकार देने की तकनीक विकसित कर ली थी. यह प्राचीन Metallurgy के इतिहास को दोबारा परिभाषित करता है और दर्शाता है कि वे लोग केवल धरती पर मौजूद संसाधनों तक सीमित नहीं थे.
उल्कापिंड लोहे का प्रयोग
इतिहास में अन्य स्थानों पर भी उल्कापिंड से बनी वस्तुएं मिली हैं, जैसे कि मिस्र के तूतनखामेन का खंजर प्राचीन चीन और मेसोपोटामिया में उल्का पिंड लोहे से बने शस्त्र. इस तरह से देखा जाए तो विलेना की यह खोज दर्शाती है कि स्पेन के प्राचीन समाजों में भी उल्कापिंड की धातु को धार्मिक, अनुष्ठानिक और सामाजिक दृष्टिकोण से विशेष माना गया होगा. यह संभव है कि इन वस्तुओं का इस्तेमाल समाज के कुलीन वर्ग की तरफ से किया जाता रहा हो.
वैज्ञानिक विश्लेषण की पुष्टि
इस खोज को सही तरीके से जांच करने के लिए मास स्पेक्ट्रोमेट्री (Mass Spectrometry) जैसे मॉर्डन वैज्ञानिक टेस्ट का इस्तेमाल किया गया. स्पेन के राष्ट्रीय पुरातत्व संग्रहालय के विशेषज्ञ साल्वाडोर रोविरा-लोरेंस के नेतृत्व में किए गए विश्लेषणों ने इन वस्तुओं की उत्पत्ति को स्पष्ट किया कि जिसमें निकेल की अत्यधिक मात्रा थी साथ में कोबाल्ट भी पाया है. यह खोज Trabajos de Prehistoria में प्रकाशित की गई है और इसे भविष्य के लिए एक मार्गदर्शक माना जा रहा है, जिससे अन्य धात्विक वस्तुओं पर भी बिना हानि पहुंचाए परीक्षण किए जा सकें.
बांग्लादेश में ईद-उल-अजहा पर रिकॉर्ड तोड़ कुर्बानी, बकरों से आगे निकलीं गायें
11 Jun, 2025 10:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पूरी दुनिया में 6 से 7 जून को ईद-उल-अजहा के मौके पर करोड़ों पशुओं की कुर्बानी की गई. बांग्लादेश के मत्स्य पालन और पशुधन मंत्रालय के डेटा के मुताबिक देश में इस ईद पर 91 लाख से ज्यादा पशुओं की कुर्बानी की गई है. इसमें हैरान करने वाली बात ये है कि बांग्लादेश में बकरों या किसी ओर जानवर से ज्यादा गायों की कुर्बानी की गई है.
पूरी दुनिया में 6 से 7 जून को ईद-उल-अजहा के मौके पर करोड़ों पशुओं की कुर्बानी की गई. बांग्लादेश के मत्स्य पालन और पशुधन मंत्रालय के डेटा के मुताबिक देश में इस ईद पर 91 लाख से ज्यादा पशुओं की कुर्बानी की गई है. इसमें हैरान करने वाली बात ये है कि बांग्लादेश में बकरों या किसी ओर जानवर से ज्यादा गायों की कुर्बानी की गई है.
कहां कितनी हुई कुर्बानी?
बांग्लादेश में सबसे ज्यादा कुर्बानी राजशाही डिवीजन में हुई, जहां 23.24 लाख पशुओं की बलि दी गई, जबकि दूसरे स्थान पर ढाका में 21.85 लाख पशुओं की बलि दी गई. इसके अलावा चटगांव में 17.53 लाख, रंगपुर डिवीजन में 9.64 लाख और खुलना में 8.04 लाख पशुओं को कुर्बान किया गया. देश के कम कुर्बानी वाले इलाकों में बारिसाल डिवीजन 4.7 लाख, वहीं सबसे कम संख्या मयमनसिंह डिवीजन में 3.83 लाख और सिलहट डिवीजन में 3.19 लाख के साथ शामिल हैं.
ईद उल अजहा पर कुर्बानी
ईद उल अजहा के मौके पर 3 दिन तक ‘संपन्न’ मुसलमानों द्वारा पशुओं की बलि दी जाती है. इस दिन मुसलमान अल्लाह के लिए पैगम्बर इब्राहिम की कुर्बानी को याद करते हुए जानवरों की कुर्बानी करते हैं. कुर्बान किए जाने वाले जानवरों में भेड़, बकरी, भैंस, गाय, ऊट आदि जानवर आते हैं. ईद के पहले दिन की शुरुआत सुबह में ईद की नमाज से होती है, फिर अगले तीन तक जानवरों की कुर्बानी की जाती है और उसका गोश्त गरीबों रिश्तेदारों में बांटा जाता है.
लॉस एंजिल्स में उग्र विरोध, एक्टिव ड्यूटी मरीन की तैनाती, कर्फ्यू घोषित
11 Jun, 2025 10:23 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका के लॉस एंजिल्स में हालात बिगड़ते ही जा रहे हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आव्रजन आदेशों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है, जिनकों काबू करने के लिए एक्टिव ड्यूटी मरीन को तैनात किया गया है. इस समय लॉस एंजिल्स का सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. जिसमें कुछ लोग एक एप्पल के स्टोर को लूटते हुए दिखाई दे रहे हैं.
खबरों के मुताबिक सोमवार रात को कई नकाबपोश लोगों ने शहर में एक एप्पल स्टोर को लूट लिया. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें कई नकाबपोश लोगों को एप्पल स्टोर में घुसते और गैजेट लूटते हुए देखा जा सकता है. पुलिस के आते ही कई लोग स्टोर से भागते हुए दिखाई दिए.
तस्वीरों में हुडी और नकाब पहने दंगाइयों को स्टोर में तोड़फोड़ करते हुए देखा जा सकता है. इमारत में दर्जनों लोगों को देखा जा सकता है, इससे पहले कि कम से कम एक आदमी इमारत की तरफ से भागने के लिए खिड़की तोड़ता दिख रहा है.
क्यों हो रहे प्रदर्शन?
लॉस एंजिल्स में पिछले एक हफ्ते से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, प्रदर्शनकारी राज्य में निर्वासन अभियान चलाने से ICE अधिकारियों को रोकने की कोशिश कर रहे हैं. ट्रंप प्रशासन इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए शहर में कर्फ्यू लगाया है और नेशनल गार्ड मरीन तैनात किए हैं, जिसका राज्य के गवर्नर ने विरोध किया है.
युद्ध लड़ने वाले सैनिकों की प्रदर्शनकारियों के सामने तैनाती
तैनात किए गए मरीन वो सैनिक हैं जिन्हें गोरिल्ला हमलों, बम धमाकों और सीधी गोलीबारी का मुकाबला करने की ट्रेनिंग दी जाती है. इन्हें भीड़ से बात करने, समझाने या रोकने की ट्रेनिंग नहीं दी जाती. अब ऐसे लड़ाकों को घरेलू सड़कों पर उतारना, सैनिकों और जनता दोनों की जिंदगी खतरे में डालना बाला बताया जा रहा है.
कंटेनर जहाज में लगी नहीं हो रही शांत...कोच्चि या मुंबई के पास होता तब क्या होता
10 Jun, 2025 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोच्चि । अरब सागर में सिंगापुर का कंटेनर जहाज अचानक आग की लपटों में घिर गया। कोलंबो से मुंबई जा रहे जहाज में जबरदस्त विस्फोट हुआ और देखते ही देखते आग फैल गई। जहाज पर सवार 18 में से 14 क्रू मेंबर्स को बचा लिया गया, लेकिन 4 अब भी लापता हैं। इंडियन कोस्ट गार्ड और एयरफोर्स ने तुरंत एक्शन लेकर बड़ा हादसा होने से बचा लिया। लेकिन सवाल यही है कि आखिर इस जहाज में ऐसा क्या था जो आग शांत नहीं हो रही? अगर यह ब्लास्ट कोच्चि या मुंबई शहर के पास होता तब क्या होता?
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कार्गों शिप 503 पर करीब 650 कंटेनर थे, जिसमें से 20-50 कंटेनर समुद्र में गिर चुके हैं। जहाज के मालिकों से कंटेनरों की विस्तृत जानकारी मांगी गई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इसमें ज्वलनशील और जहरीले रसायन हो सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस जहाज में भी इसतरह तेजी से जलने वाले पदार्थ मौजूद हो सकते हैं, जो थर्मल रनअवे (तेज गर्मी से खुद ब खुद विस्फोट) का कारण बन रहे हैं।
अगर यह विस्फोट कोच्चि या बेपोर जैसे शहर के पास होता तब परिणाम विनाशकारी हो सकते थे। समुद्री विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर की आग और विस्फोट अगर जमीन के पास होता तक एक किलोमीटर तक झटके महसूस हो सकते थे। सैकड़ों लोगों की जान जा सकती थी। पोर्ट तहस-नहस हो सकते थे।
विशेषज्ञों की चेतावनी
जानकार का मानना है कि अगर जहाज में जेट फ्यूल या बंकर ऑयल है, तब यह समुद्र में फैल सकता है और केरल तट की मछली पालन व्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है। अगर जहाज में लिथियम बैटरियां हैं, तब यह आग हफ्तों तक सुलग सकती है और कोई सामान्य पानी या फोम बुझा नहीं सकता। जहाज से समुद्र में गिरे कंटेनर सिर्फ एक जली हुई लाश नहीं, बल्कि बहता हुआ जहर हैं। इसमें से कुछ कंटेनर अगर फूट गए तब प्लास्टिक, रसायन, और भारी धातुएं समुद्री जीवों को नष्ट कर सकती हैं। केरल जैसे राज्य, जहां हजारों मछुआरे और तटीय परिवार समुद्र पर निर्भर हैं, उनके लिए यह हादसा रोजी-रोटी का संकट बन सकता है।
MV Wan Hai 503 पर लगी आग: भारतीय नौसेना-कोस्ट गार्ड का जांबाज रेस्क्यू, चीन ने जताया आभार
10 Jun, 2025 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
केरल के अजीक्कल तट से लगभग 44 नॉटिकल मील दूर समुद्र में सिंगापुर-ध्वज वाले कंटेनर जहाज MV Wan Hai 503 में एक बड़ा धमाका हुआ. धमाके और आग की घटना के बाद भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल की तत्परता ने कई जानें बचा लीं. चीन ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए भारत का आभार जताया है.
9 जून को MV Wan Hai 503, जो कोलंबो से न्हावा शेवा (मुंबई पोर्ट) जा रहा था, में अचानक डेक के नीचे विस्फोट हुआ. इसके बाद जहाज में आग लग गई. जहाज पर कुल 22 क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें 14 चीनी नागरिक थे, इनमें 6 ताइवानी भी शामिल हैं. इस हादसे में 4 लोग लापता हैं और 5 घायल बताए जा रहे हैं.
कैसे दी गई मदद?
भारतीय तटरक्षक बल ने घटना के तुरंत बाद ICGS राजदूत (न्यू मैंगलोर से), ICGS अर्नवेश (कोच्चि से), और ICGS सचेत (अगत्ती से) को मौके पर रवाना किया. इसके अलावा ICGS समुद्र प्रहरि और ICGS समरथ को भी अग्निशमन और बॉउंड्री कूलिंग के लिए भेजा गया. तटरक्षक बल ने बताया कि एक ICG विमान ने घटनास्थल का हवाई सर्वे किया और हवा से गिराई जाने वाली आपात सामग्री भी भेजी गई.
जहाज़ की स्थिति कैसी है?
जहाज के मध्य भाग और एकोमोडेशन ब्लॉक के पास आग और छोटे धमाके हुए. सामने वाला कंटेनर बे क्षेत्र अब काबू में है, लेकिन जहाज से अभी भी काले धुएं के गुबार उठ रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक जहाज करीब 10 से 15 डिग्री तक बाईं ओर झुक गया है और कुछ कंटेनर समुद्र में गिर चुके हैं.
भारतीय तटरक्षक बल और नौसेना की टीमें लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं. इस हादसे के कारण समुद्र में प्रदूषण फैलने का भी खतरा बना हुआ है, जिसकी निगरानी की जा रही है.
चीन ने भारत को कहा शुक्रिया
भारत की मदद के बाद चीन ने आधिकारिक रूप से आभार व्यक्त किया. भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि हम भारतीय नौसेना और मुंबई कोस्ट गार्ड के तत्पर और पेशेवर रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए आभारी हैं। हम उम्मीद करते हैं कि सर्च ऑपरेशन सफल हो और घायल क्रू मेंबर जल्द ठीक हों.
कपड़े उतारे- बेरहमी से पीटा डिलीवरी बॉय के साथ बदमाशों ने की हैवानियत
10 Jun, 2025 06:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा के फरीदाबाद के सेहतपुर में कुछ बदमाशों ने फूड कंपनी के एक डिलीवरी बॉय के साथ बुरी तरह से मारपीट की. बदमाशों ने पहले डिलीवरी बॉय की 2 घंटे तक खूब पिटाई की. इससे डिलीवरी बॉय बुरी तरह से घायल हो गया. उसे खूब चोटें आईं. इसके बाद बदमाशों ने लड़के के मुंह और पूरे शरीर पर पेशाब कर दिया. उन्होंने डिलीवरी बॉय को पूरी तरह से नग्न कर उसकी पिटाई की.
दरअसल ये घटना रविवार रात का घटी, जब सेक्टर-37 स्थित फूड कंपनी में डिलीवरी बॉय का काम करने वाले सत्यम दुबे के साथ बदमाशों ने मारपीट की. सत्यम सूर्या विहार पार्ट 2 का रहने वाला है. रविवार रात को कंपनी के पास सेहतपुर नया पुल के पास स्थित मानवी प्लेस से एक ऑर्डर आया. इस ऑर्डर को सत्यम डिलीवर करने पहुंचा. वहां सत्यम का दोस्त विक्रांत भी ऑर्डर देने गया था. फिर दोनों वापस लौट रहे थे. तभी सेहतपुर नया पुल पर दोनों को बदमाशों ने घेर लिया.
चेहरे और पूरे शरीर पर पेशाब किया
पुल पर ही बदमाशों ने सत्यम के साथ मारपीट शुरू कर दी. जब विक्रांत ने सत्यम को बचाने की कोशिश की तो 15-20 लोग और आ गए. उन्होंने विक्रांत के साथ भी मारपीट की. हालांकि विक्रांत अपनी जान बचाकर उनके चंगुल से भाग निकला. इसके बाद आरोपी सत्यम को एक स्कूल के पास खाली पड़े प्लॉट में गए और वहां भी उसकी पिटाई की. जब सत्यम बेहोश हो गया तो बदमाशों ने उसे होश में लाने के लिए उसके चेहरे और पूरे शरीर पर पेशाब किया.
पैसे छिनकर भाग गए बदमाश
पीड़ित ने बताया कि जब वह होश में आ गया तो फिर से आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की. विक्रांत ने सत्यम के साथ हो रही मारपीट की जानकारी फोन कर उसके पिता को दे दी थी. पिता ने पुलिस में केस दर्ज कराया. इसके बाद जब विक्रांत ने शोर मचाया कि पुलिस आ रही है. मैंने पुलिस को फोन कर दिया तो सभी आरोपी भाग निकले.लेकिन पैसे छिनकर भाग गए. पीड़ित सत्यम ने बताया कि आरोपी आपस में अपने नाम लक्की, सुक्खी, हिमांशु, सन्नी, बॉबी, रोहन, दीपक, ऋषि और सल्लू कहकर पुकार कर रहे थे.
तीन आरोपियों को पुलिस ने पकड़ा
पुलिस ने मामले में तुरंत कार्रवाई की और तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. पीड़ित का कहना है कि वह आरोपियों को नहीं जानता. पकड़े गए आरोपियों में दीपक, बॉबी और धीरज शामिल हैं. बाकी आरोपियों की तलाश की जा रही है. उन्हें भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा. सत्यम को घटनास्थल से अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है.
बांग्लादेश में आर्थिक बदहाली: भीख मांगने को मजबूर लाखों लोग, सरकार पर सवाल!
10 Jun, 2025 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश में यूनुस सरकार के शासन में भिखारियों की बाढ़ आ गई है. इन दिनों राजधानी ढाका में सबसे ज्यादा भिखारी देखने को मिल रहे हैं. ढाका के सभी सार्वजनिक स्थलों पर गैंग बनाकर लोग भीख मांग रहे हैं. बांग्लादेश में भिखारियों की बढ़ती संख्या ने वहां के प्रशासन और आम लोगों की टेंशन बढ़ा दी है.
बांग्लादेश में यूनुस सरकार के शासन में भिखारियों की बाढ़ आ गई है. इन दिनों राजधानी ढाका में सबसे ज्यादा भिखारी देखने को मिल रहे हैं. ढाका के सभी सार्वजनिक स्थलों पर गैंग बनाकर लोग भीख मांग रहे हैं. बांग्लादेश में भिखारियों की बढ़ती संख्या ने वहां के प्रशासन और आम लोगों की टेंशन बढ़ा दी है.
पाकिस्तान से दोस्ती का असर?
बांग्लादेश में भिखारियों के बढ़ने की संख्या ऐसे वक्त में सामने आई है, जब यूनुस की सरकार पाकिस्तान से दोस्ती बढ़ा रही है. पूरी दुनिया में भीख मांगने के मामले में पाकिस्तानियों का अपना ट्रैक रिकॉर्ड है.
पाकिस्तान में कम से कम 2 करोड़ भिखारी हैं, जो दुनिया कई देशों में जाकर भीख मांगते हैं. पाकिस्तान के भिखारी यूएई, कतर और सऊदी जैसे देशों में जाकर भीख मांगते हैं.
बांग्लादेश में कितने भिखारी?
2023 में बांग्लादेश में भिखारियों को लेकर एक आंकड़ा जारी किया गया था. इसमें कहा गया था कि पूरे देश में करीब 7 लाख भिखारी हैं. अकेले ढाका में 40 हजार भिखारियों के होने की बात कही गई थी. उस वक्त शेख हसीना की सरकार ने भिखारियों को मुख्यधारा में लाने का वादा किया था.
हालांकि, शेख हसीना की सरकार के जाने के बाद यूनुस इस पर साइलेंट हो गए. कहा जा रहा है कि ढाका में अब भिखारियों की संख्या पहले की तुलना में काफी ज्यादा बढ़ गई है.
भिखारियों का क्या कहना है?
2 महिला भिखारियों से बात की है. एक रशेदा (बदला नाम) ने कहा कि मैं बीमार हूं और काम नहीं कर सकती, इसलिए मैं भीख मांगने के लिए ढाका आ गई हूं. रशेदा के मुताबिक बच्चों को पालने के लिए भीख मांगना जरूरी है. बांग्लादेश में महिलाओं के लिए कोई सुविधाजनक काम नहीं है.
वहीं 16 साल की तंजेला ने अखबार से बात करते हुए कहा कि मेरी मां गृहिणी हैं. मेरा भाई बीमार है. रोजी-रोजगार न होने की वजह से मैं उसके इलाज के लिए पैसा नहीं जुटा पा रहा था. मैं भीख मांगकर उसका अब इलाज करा रहा हूं.
हालिया आंकड़ों की मानें तो बांग्लादेश में बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी हुई है. वहीं यूनुस की सरकार महंगाई पर भी अब तक कंट्रोल नहीं कर पाई है.
कर्ज के बोझ तले डूबता पाकिस्तान, आर्थिक संकट ने तोड़ी कमर
10 Jun, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। कर्ज के बोझ तले दबे पाकिस्तान की हालत दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। पाकिस्तान दुनियाभर से कर्ज लेकर अपने लोगों और देश का विकास करने के बजाय आतंकवाद पर खर्च करता है, जिसे पूरी दुनिया ने देखा है। पाकिस्तान की ओर से जारी आर्थिक सर्वे से पता चला है कि कर्ज अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इससे पाकिस्तान की वित्तीय स्थिति पर संकट गहरा गया है।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था जून 2025 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में 2.7 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है, जबकि पिछले वर्ष के दौरान इसमें 2.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। सरकार ने शुरू में 3.6 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का लक्ष्य रखा था, लेकिन पिछले महीने इसे घटाकर 2.7 प्रतिशत कर दिया।
2025 में 4.2 प्रतिशत जीडीपी हासिल करना पाक सरकार का लक्ष्य
आइएमएफ को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2025 में वास्तविक जीडीपी 2.6 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2026 में अर्थव्यवस्था 3.6 प्रतिशत बढ़ेगी। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार का लक्ष्य 4.2 प्रतिशत जीडीपी है। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने सोमवार को अपने देश का आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 जारी किया है।
पाकिस्तान की ओर कहा गया है कि 31 मार्च 2025 तक उसका कुल कर्ज 76,00700 करोड़ पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गया है, जो उसके इतिहास में अब तक का सबसे अधिक कर्ज है। पाकिस्तान का यह कर्ज पिछले चार सालों में लगभग दोगुना हो गया है, क्योंकि 2020-21 में यह कर्ज 39,86000 करोड़ पाकिस्तानी रुपये था, जबकि पिछले 10 साल में यह कर्ज करीब पांच गुना बढ़ चुका है।
जीडीपी ग्रोथ में फिसड्डी साबित हो रहा पाकिस्तान
पाकिस्तान सरकार की ओर से जारी आर्थिक सर्वे में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2025 की पहली तिमाही के लिए पाकिस्तान की जीडीपी ग्रोथ 1.37 प्रतिशत, दूसरी तिमाही 1.53 प्रतिशत और तीसरी तिमाही में 2.4 प्रतिशत रहेगी। लगातार तीसरे साल ऐसा हो रहा है जब पाकिस्तान की जीडीपी ग्रोथ बहुत कम होगी। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ-साथ मित्र देशों के सामने भी राहत पैकेज मांगने के लिए हाथ फैला देता है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने तो यहां तक कह दिया कि जब हम किसी मित्र देश के पास जाते हैं या फोन करते हैं तो उन्हें लगता है कि हम उनके पास पैसे मांगने आए हैं। भारत आइएमएफ और विश्व बैंक के सामने यह मुद्दा उठाता रहा है कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवाद के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए दुनिया भर मिलने वाली सहायता का दुरुपयोग कर रहा है।
विश्व बैंक के अनुसार भारत ने रिकार्ड संख्या में अपने लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। वहीं पाकिस्तान की करीब 45 प्रतिशत आबादी गरीबी में अपनी जीवन गुजार रही है, जबकि 16.5 प्रतिशत लोग अत्यधिक गरीबी में रहते हैं।
'स्पाइडरवेब' का बदला: रूस ने यूक्रेन पर बरसाए ड्रोन, रातभर गूंजते रहे धमाके
10 Jun, 2025 10:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूक्रेन के 1 जून को किए गए हमले के बाद रूस अब बदला लेने के लिए उतारू हो गया है. रात के अंधेरे में रूस ने यूक्रेन पर ड्रोन बरसाए. यूक्रेनी सेना ने दावा किया है कि रूस ने उस पर सोमवार की रात को 500 से ज्यादा ड्रोन लॉन्च किए हैं. यूक्रेनी वायु सेना ने सोमवार को कहा कि रूस ने तीन साल के युद्ध की सबसे बड़ी रातोंरात ड्रोन बमबारी की है. जिसमें उसने यूक्रेन पर लगभग ड्रोन बरसाए और मिसाइल भी दागीं. रूस ने यह पलटवार ऑपरेशन स्पाइडरवेब का बदला लेने के लिए किया है.
दोनों देशों के बीच युद्धविराम का रास्ता नहीं निकल रहा है. युद्धविराम करने की मुश्किलों के बीच भी सोमवार को दोनों ने एक दूसरे के युद्धबंदियों के एक और बैच की अदला-बदली की, लेकिन इसी के बाद रूस ने एक बार फिर यूक्रेन पर हमला कर दिया और ड्रोन बरसा दिए.
ऑपरेशन स्पाइडरवेब का बदला?
रूस इस समय यू्क्रेन से बदला लेने पर उतारू है. दरअसल, यूक्रेन ने हाल ही में रूस पर एक ऐसा अटैक किया है जिसमें उसने रूस की शक्ति को भारी नुकसान पहुंचाया है. यूक्रेन ने 1 जून को 100 से ज्यादा यूक्रेनी ड्रोन रूस पर दागे. इस हमले में यूक्रेन ने रूस के परमाणु-सक्षम लंबी दूरी के बमवर्षकों को निशाना बनाया. इस अटैक को यूक्रेन ने स्पाइडरवेब नाम दिया था.
रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि हमले रूस के पांच क्षेत्रों – मरमंस्क, इरकुत्स्क, इवानोवो, रियाज़ान और अमूर पर किए गए थे – लेकिन कहा गया कि विमान केवल मरमंस्क और इरकुत्स्क में क्षतिग्रस्त हुए थे, जबकि अन्य स्थानों पर हमलों को विफल कर दिया गया था. अब रूस इस हमले का ही बदला ले रहा है.
रूस ने बरसाए ड्रोन
वायु सेना के अनुसार, 479 ड्रोन के अलावा, रविवार से सोमवार तक यूक्रेन के कई हिस्सों में रूस ने 20 मिसाइलें दागी, जिसमें कहा गया कि बैराज ने मुख्य रूप से सेंट्रल और पश्चिमी क्षेत्रों को निशाना बनाया. रात में हुए सबसे बड़े अटैक के बाद यूक्रेन ने कहा कि उसने रूस के इस हमले का बराबरी से सामना किया और कई ड्रोन को रोका. यूक्रेन की वायु सेना ने कहा कि उसकी एयर फोर्स ने 277 ड्रोन और 19 मिसाइलों को रोका और नष्ट कर दिया. यूक्रेन ने दावा किया कि सिर्फ 10 ड्रोन या मिसाइलों ने उनके टारगेट को मारा. अधिकारियों ने बताया कि रूस के इस हमले में यूक्रेन का एक व्यक्ति घायल हो गया.
यूक्रेन भी कर रहा पलटवार
यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने रविवार देर रात को कहा कि कुछ क्षेत्रों में, “हालात बहुत मुश्किल बने हुए हैं”. रूस के हमले से पहले यूक्रेन ने रूस के सैन्य ठिकानों पर 6 जून को हमला किया था. रात को यूक्रेन की सेना ने रूस के एंगेल्स और ड्यागिलेवो हवाई अड्डों को निशाना बनाया था, जहां रूस के बमवर्षक विमान तैनात हैं. यूक्रेन ने इसे पहले से रक्षा वाला हमला बताया था. इस हमले में रूस का एक MI-8 हेलिकॉप्टर पूरी तरह नष्ट हो गया और एक MI-35 हेलिकॉप्टर को नुकसान पहुंचा था. इसके अलावा, यूक्रेन ने रूस के सरातोव और रियाजान इलाकों में ईंधन डिपो और सैन्य ठिकानों पर भी अटैक किए थे.
इस अटैक को लेकर यूक्रेन का दावा है कि उसने रूस के सैन्य संसाधनों को कमजोर करने के लिए ये हमले किए ताकि रूस के हवाई हमले रोके जा सकें.
रूसी अधिकारियों ने कहा है कि हालिया हमले उन हवाई अड्डों पर यूक्रेन के ड्रोन हमले के जवाबी हमलों पर पलटवार है.
लगातार हो रही दोनों देशों के बीच शांति वार्ता
पिछले तीन साल से दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध को शांत कराने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं. इस्तांबुल में रूसी और यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडलों के बीच हाल के दो दौर की सीधी शांति वार्ता हुई. इस वार्ता के बाद दोनों देशों ने कैदियों के साथ-साथ उनके हजारों मृत और गंभीर रूप से घायल सैनिकों की अदला-बदली पर राजी हुए. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने संकेत दिया है कि वह तब तक लड़ते रहेंगे जब तक उनकी शर्तें पूरी नहीं हो जातीं.
दिन में कैदियों की अदला-बदला, रात को अटैक
जेलेंस्की और रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सोमवार को दोनों देशों के बीच अधिक कैदियों की अदला-बदली की गई, हालांकि, किसी भी पक्ष ने यह नहीं बताया कि कितने कैदी हैं. कितने कैदियों की अदला-बदली हुई. जेलेंस्की ने कहा कि जिन लोगों की अदला-बदली की गई उनमें घायल सैनिकों के साथ-साथ 25 साल से कम उम्र के लोग भी शामिल थे. लेकिन जहां दिन में दोनों देशों के बीच कैदियों की अदला-बदली हो रही है. वहीं, रात के समय में रूस ने फिर हमला कर दिया.
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