राजनीति
पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला का बयान, लोकल सपोर्ट के बगैर हमला नहीं हो सकता
4 May, 2025 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
श्रीनगर। पहलगाम आतंकी हमले को लेकर जम्मू-कश्मीर में लगातार बयानबाजी जारी है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने आतंकी हमले में लोकल सपोर्ट की बात कहकर नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा, मैं नहीं समझता कि ये चीजें हो सकती है, जब तक कोई इनका साथ न दें। उधर अब्दुल्ला के बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कड़ी आपत्ति जाहिर की है। महबूबा ने पोस्ट किया, फारूक जैसे वरिष्ठ कश्मीरी नेता का ऐसा बयान देश के बाकी हिस्सों में रह रहे कश्मीरी छात्रों, व्यापारियों और मजदूरों के लिए खतरा बन सकता है। इतना ही नहीं इस बयान से कुछ मीडिया चैनलों को कश्मीरियों और मुस्लिमों को बदनाम करने का मौका मिलेगा। दरअसल, पहलगाम की बैसरन घाटी में 22 अप्रैल को आतंकी हमला हुआ था। इसमें 26 पर्यटकों की जान गई थी। फारूक पहलगाम हमले के मारे गए सैयद आदिल हुसैन शाह के घर पहुंचे। फारूक ने पहलगाम हमले को सुरक्षा में चूक का मामला बताया। उन्होंने कहा, जब भारत ने मौलाना मसूद अजहर को छोड़ा (1999) था, तब मैंने कहा था, मत छोड़िए, लेकिन किसी ने मेरी बात मानी नहीं। अजहर कश्मीर को जानता है। अजहर ने अपने रास्ते बना रखे हैं और क्या पता पहलगाम हमले में उसका हाथ भी होगा।
जातिगत गणना का राजनैतिक लाभ उठाने के द्रुमक के प्रयासों की निर्मला ने की आलोचना
4 May, 2025 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सरकार के दावे को खारिज किया। साथ ही सीतारमण ने इस कदम का ‘‘राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास के लिए डीएमके की आलोचना की। सीतारमण ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जातिगत गणना को मंजूरी दे दी है। इस जाति जनगणना से जुटाए आंकड़ों से मोदी सरकार समाज के गरीब और हाशिए पर पड़े वर्गों की बेहतर मदद कर सकेगी।
वित्त मंत्री सीतारमण ने द्रमुक शासन में राज्य के एक गांव में हुई घटना का भी हवाला दिया, जहां कथित तौर पर पेयजल में मानव मल-मूत्र मिला हुआ था। सीतारमण ने कहा, ‘‘उनका (द्रमुक) कहना है कि उत्तर भारत के कुछ राज्य पिछड़े हुए हैं लेकिन इसतरह के राज्यों में भी इस तरह की घटनाएं नहीं हुई हैं। इसलिए, द्रमुक के इस तर्क में कोई दम नहीं है कि आगामी जनगणना में जातिगत गणना को शामिल करने का केंद्र का फैसले उनकी जीत है। दरअसल दिसंबर 2022 में वेंगाइवायल गांव में अनुसूचित जाति के आवासीय इलाके में एक पानी की टंकी में कथित तौर पर मानव मल-मूत्र मिला था। स्टालिन ने कहा था कि आगामी जनगणना अभ्यास में जातिगत गणना को शामिल करने का केंद्र का फैसला उनकी पार्टी और द्रमुक सरकार के लिए ‘‘कड़े परिश्रम से हासिल जीत है। द्रमुक पर हमला कर सीतारमण ने कहा कि आज भी तमिलनाडु में दुकानों के बोर्ड पर मालिकों के समुदाय के नाम लिखे होते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘इस पर कोई राजनीतिक टिप्पणी करने के बजाय मैं ईमानदारी से चाहती हूं कि हमें इस बात पर चर्चा करनी चाहिए कि हम उन लोगों की कैसे मदद कर सकते हैं जो गरीब और दलित हैं। उन्होंने कहा, केंद्र किसी भी कॉर्पोरेट का पक्ष नहीं ले रहा है। दूसरी बात प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) ने विड़िण्गम बंदरगाह का उद्घाटन किया। लेकिन, इस ओमन चांडी (दिवंगत) नीत पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने औपचारिक रूप से अदाणी समूह को सौंप दिया था। द्रमुक के दावे कि केंद्र राज्य को धन नहीं दे रहा है, सीतारमण ने कहा, ‘‘मैं जब भी यहां आती हूं, तब तमिलनाडु को कितना धन आवंटित किया गया है इसका आंकड़ा साझा करती हूं। लेकिन वे (तमिलनाडु सरकार) इस तरह की टिप्पणी (कि केंद्र ने कोई धन जारी नहीं किया) करते रहे हैं।
कांग्रेस नेता चन्नी ने फिर मांगे पाकिस्तानी सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत
4 May, 2025 08:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पंजाब के पूर्व सीएम और कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने मोदी सरकार की पूर्व में की गई सर्जिकल स्ट्राइक पर एक बार फिर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सुरक्षाबलों द्वारा पाकिस्तानी क्षेत्र में की गई कार्रवाई के सबूत मांगे हैं। उन्होंने हमलों पर शक जताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा इसका सबूत मांगा है।
चन्नी ने कहा कि आज तक मुझे पता नहीं चल पाया कि सर्जिकल स्ट्राइक कहां हुई, उस समय कहां लोग मारे गए और पाकिस्तान में यह कहां हुआ। क्या हमें पता नहीं चलेगा कि हमारे देश में बम गिरा है? वे कहते हैं कि उन्होंने पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक की। कुछ नहीं हुआ कहीं भी सर्जिकल स्ट्राइक नहीं देखी गई। किसी को पता नहीं चला। मैंने हमेशा सबूत मांगे हैं, लेकिन आज लोगों के जख्मों पर मरहम लगाने की जरूरत है।
हम मांग करते हैं कि केंद्र की मोदी सरकार कुछ करे। लोगों को बताएं कि वे पहलगाम आतंकवादी हमले के अपराधी कौन हैं और उन्हें सजा दें। वहीं, जब सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर दिए गए बयान पर उनसे पूछा गया तो उन्होंने यूटर्न ले लिया। उन्होंने कहा कि आज सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में कुछ नहीं है। इसका सबूत नहीं मांगा जाता है और मैं भी नहीं मांग रहा हूं। मैं जो कह रहा हूं वो ये है कि इसे पहलगाम आतंकी घटना को भटकाने की कोशिश मत करो। ये बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है। इधर-उधर की बात मत कर, बता की काफिला क्यों लूटा...जिन निर्दोष पर्यटकों मार दिया गया, वो परिवार आज न्याय चाहते हैं। सरकार को उन्हें न्याय दिलाना चाहिए। हम हर तरह से सरकार के साथ हैं।
वहीं चन्नी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह ने कहा कि कांग्रेस नेता की टिप्पणी गांधी परिवार की गंदी मानसिकता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने फिर भारतीय वायुसेना पर सवाल उठाए हैं। चन्नी ने एक बार फिर कहा है कि उन्हें सर्जिकल स्ट्राइक पर भरोसा नहीं है और उन्हें सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत चाहिए। कांग्रेस पार्टी, गांधी परिवार, राहुल गांधी की यह कैसी मानसिकता है कि वे सेना, भारतीय वायुसेना पर सवाल उठाते रहते हैं? उन्होंने कहा कि पाकिस्तान खुद कह रहा है कि भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक करके बहुत नुकसान पहुंचाया है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पाकिस्तान परस्त पार्टी बन गई है। इससे पहले कांग्रेस ने अपनी सीडब्ल्यूसी बैठक में सरकार से पहलगाम हमले में आतंक फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का आह्वान करते हुए कहा कि पार्टी देश की एकता और अखंडता के लिए प्रतिबद्ध है।
पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर कर्नाटक के कांग्रेस मंत्री जमीर खान ने कही ये बात
3 May, 2025 07:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव जारी है। इस बीच कर्नाटक के मंत्री ज़मीर अहमद खान का एक बयान चर्चा का विषय बना हुआ है। कर्नाटक के आवास और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ज़मीर अहमद खान ने कहा कि वह आत्मघाती बम पहनकर पाकिस्तान जाने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि अगर भारत को पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ने की जरूरत पड़ी तो वह लड़ने के लिए तैयार हैं।
'हमारे और पाकिस्तान के बीच कोई रिश्ता नहीं'
मंत्री ज़मीर अहमद खान ने कहा कि हम भारतीय हैं, हम हिंदुस्तानी हैं, हमारे और पाकिस्तान के बीच कोई रिश्ता नहीं है। अगर हमें उनके खिलाफ युद्ध छेड़ने की जरूरत पड़ी तो मैं लड़ने के लिए तैयार हूं। उन्होंने पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह से अपील की कि उन्हें एक आत्मघाती बम दिया जाए, जिसे वह अपने शरीर से बांधकर पाकिस्तान जाकर उन पर हमला करेंगे।
'हर भारतीय को एकजुट होना चाहिए'
मंत्री ज़मीर अहमद खान ने कहा कि मैं यह मजाक या मज़ाक में नहीं कह रहा हूं, मैं इस बारे में बहुत गंभीर हूं। उन्होंने कहा कि हर भारतीय को आतंकवाद का सामना करने के लिए एकजुट होना चाहिए।
कर्नाटक सीएम के बयान की हुई थी आलोचना
आपको बता दें कि इससे पहले कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव पर प्रतिक्रिया दी थी। सीएम ने कहा था कि वह पाकिस्तान के साथ युद्ध के पक्ष में नहीं हैं। इसके बाद सीएम की इस प्रतिक्रिया की काफी आलोचना हुई थी। इसे लेकर बीजेपी ने सीएम सिद्धारमैया पर निशाना साधा था।
26 लोगों की मौत
आपको बता दें कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने पर्यटकों को निशाना बनाया था। इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। सेना की वर्दी में आए आतंकियों ने पहले पर्यटकों से उनका धर्म पूछा और फिर उन्हें गोली मार दी थी। इस हमले को पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े समूह द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने अंजाम दिया था। पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई सख्त कदम उठाए हैं।
RJD प्रमुख तेजस्वी यादव ने जातिगत जनगणना को लेकर पीएम मोदी को लिखा पत्र
3 May, 2025 02:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना: बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और राज्य के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने जाति जनगणना कराने के फैसले का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय की दिशा में पहला कदम बताते हुए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने लिखा, "आपकी सरकार द्वारा हाल ही में पूरे देश में जाति जनगणना कराने की घोषणा के बाद, मैं आज आपको बहुत उम्मीदों के साथ पत्र लिख रहा हूं। वर्षों से आपकी सरकार और एनडीए गठबंधन जाति जनगणना के आह्वान को विभाजनकारी और अनावश्यक बताकर खारिज करते रहे हैं। जब बिहार ने अपना जाति सर्वेक्षण कराने की पहल की, तो आपकी पार्टी के शीर्ष विधि अधिकारी सहित सरकार और केंद्रीय अधिकारियों ने हर कदम पर बाधाएं खड़ी कीं। आपकी पार्टी के सहयोगियों ने इस तरह के डेटा संग्रह की आवश्यकता पर ही सवाल उठाए। आपके विलंबित निर्णय से उन नागरिकों की मांगों की व्यापकता को स्वीकार किया गया है, जिन्हें लंबे समय से हमारे समाज के हाशिए पर धकेल दिया गया है।"
तेजस्वी ने कहा कि इस सर्वेक्षण ने कई मिथकों को तोड़ा है। सर्वेक्षण से पता चला है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) बिहार की आबादी का लगभग 63 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। उन्होंने अनुमान लगाया कि राष्ट्रीय स्तर पर भी ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हो सकती है। मुझे यकीन है कि वंचित समुदाय हमारी आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा हैं, जबकि सत्ता के पदों पर उनका प्रतिनिधित्व कम है, इससे राजनीतिक सीमाओं से परे लोकतांत्रिक जागृति आएगी। हालांकि, जाति जनगणना कराना सामाजिक न्याय की दिशा में एक लंबी यात्रा का पहला कदम मात्र है।
जनगणना के आंकड़ों से सामाजिक सुरक्षा और आरक्षण नीतियों की व्यापक समीक्षा होनी चाहिए। आरक्षण पर मनमाने ढंग से लगाई गई सीमाओं पर भी पुनर्विचार करना होगा। एक देश के रूप में, हमारे पास आगामी परिसीमन अभ्यास में स्थायी अन्याय को ठीक करने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है। निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण जनगणना के आंकड़ों के प्रति संवेदनशील और प्रतिबिंबित होना चाहिए। ओबीसी और ईबीसी के पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए विशेष प्रावधान किए जाने चाहिए, जिन्हें व्यवस्थित रूप से निर्णय लेने वाले मंचों से बाहर रखा गया है। इसलिए, उन्हें आनुपातिक प्रतिनिधित्व सिद्धांत के आधार पर राज्य विधानसभाओं और भारत की संसद तक विस्तारित करने की आवश्यकता होगी। उन्होंने आगे कहा कि हमारा संविधान अपने नीति निर्देशक सिद्धांतों के माध्यम से राज्य को आर्थिक असमानताओं को कम करने और संसाधनों का समान वितरण सुनिश्चित करने का आदेश देता है। एक बार जब हम जान जाते हैं कि हमारे कितने नागरिक वंचित समूहों से संबंधित हैं और उनकी आर्थिक स्थिति क्या है, तो लक्षित हस्तक्षेपों को अधिक सटीकता के साथ डिजाइन किया जाना चाहिए।
तेजस्वी ने आगे कहा कि निजी क्षेत्र जो सार्वजनिक संसाधनों का प्रमुख लाभार्थी रहा है, वह सामाजिक न्याय की अनिवार्यताओं से अछूता नहीं रह सकता। कंपनियों को काफी लाभ मिला है, रियायती दरों पर भूमि, बिजली सब्सिडी, कर छूट, बुनियादी ढांचे का समर्थन और विभिन्न वित्तीय प्रोत्साहन सभी करदाताओं के पैसे से वित्त पोषित हैं। बदले में उनसे हमारे देश की सामाजिक संरचना को प्रतिबिंबित करने की उम्मीद करना पूरी तरह से उचित है। जाति जनगणना द्वारा बनाए गए संदर्भ का उपयोग संगठनात्मक पदानुक्रमों में निजी क्षेत्र में समावेशिता और विविधता के बारे में खुली बातचीत करने के लिए किया जाना चाहिए।
उन्होंने पत्र में आगे लिखा, "प्रधानमंत्री जी, आपकी सरकार अब एक ऐतिहासिक चौराहे पर खड़ी है। जाति जनगणना कराने का निर्णय हमारे देश की समानता की यात्रा में एक परिवर्तनकारी क्षण हो सकता है। सवाल यह है कि क्या डेटा का उपयोग प्रणालीगत सुधारों के लिए उत्प्रेरक के रूप में किया जाएगा, या यह पिछली कई आयोग रिपोर्टों की तरह धूल भरे अभिलेखागार तक ही सीमित रहेगा? बिहार के प्रतिनिधि के रूप में, जहाँ जाति सर्वेक्षण ने जमीनी हकीकत से कई लोगों की आँखें खोली हैं, मैं आपको वास्तविक सामाजिक परिवर्तन के लिए जनगणना के निष्कर्षों का उपयोग करने में रचनात्मक सहयोग का आश्वासन देता हूँ। इस जनगणना के लिए लड़ने वाले लाखों लोग न केवल डेटा बल्कि सम्मान, न केवल गणना बल्कि सशक्तिकरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं।"
जाति जनगणना कराने को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी
3 May, 2025 12:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने जाति जनगणना कराने को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि देश में जाति जनगणना कब होगी और इसकी प्रक्रिया कब तक पूरी होगी? ओवैसी ने पसमांदा और गैर-पसमांदा मुसलमानों की अलग-अलग जनगणना की भी मांग की। उन्होंने कहा कि हम देश भर में जाति जनगणना की मांग उठाते रहे हैं। आखिरी जाति जनगणना 1931 में हुई थी, ऐसे में अगर जाति सर्वेक्षण कराया जाए तो पता चल जाएगा कि किसे कितना लाभ मिल रहा है और किसे नहीं, इसलिए यह जरूरी है।
'बीजेपी-एनडीए बताए समय सीमा'
जाति जनगणना पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, "मेरी पार्टी ने 2021 से मांग की थी कि देशभर में जाति सर्वेक्षण कराया जाए। आखिरी जाति सर्वेक्षण 1931 में हुआ था, अगर जाति सर्वेक्षण होगा तो पता चलेगा कि किसे कितना लाभ मिल रहा है और किसे नहीं, किसकी आय कितनी है और किस जाति ने ज्यादा तरक्की की है, कौन पीछे रह गया, इसीलिए यह जरूरी है। हम बीजेपी और एनडीए से सिर्फ एक बात कहना चाहेंगे कि हमें समय सीमा बताएं, यह कब शुरू होगा, कब खत्म होगा और कब लागू होगा? क्या यह 2029 के संसदीय चुनाव से पहले होगा या नहीं?"
पसमांदा मुसलमानों की जमीनी हकीकत सामने आएगी
दूसरी ओर, पसमांदा मुसलमानों के जातिगत सर्वेक्षण को लेकर ओवैसी ने आगे कहा, "पसमांदा मुसलमानों की स्थिति की जमीनी हकीकत सभी को पता चल जाएगी, उन्हें पता चल जाएगा कि गैर-पसमांदा मुसलमानों की स्थिति कितनी खराब है, यह सब जरूरी है। ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इसका लाभ हाशिए पर पड़े लोगों को मिले। जब अमेरिका ने सकारात्मक कार्रवाई की बात की, तो अफ्रीकी-अमेरिकी, यहूदी और चीनी इससे लाभान्वित हुए। अमेरिका शक्तिशाली हो गया। इसलिए भारत के लिए ऐसी जनगणना होना जरूरी है। इसके बाद उन्हें जरूरी कदम उठाने होंगे।" एक अन्य बयान में उन्होंने कहा कि जातिगत आंकड़ों की कमी के कारण निष्पक्ष नीतिगत फैसले नहीं हो पा रहे हैं, जिसके कारण देश को 1931 की पुरानी जातिगत जनगणना पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
चन्नी के बयान भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने किया पलटवार, बोले- 'अपमान करना इनकी आदत'
3 May, 2025 11:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने सर्जिकल स्ट्राइक पर सबूत मांगकर एक बार फिर विवाद खड़ा कर दिया है। चन्नी के बयान के बाद भाजपा उन पर आक्रामक हो गई है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि लगातार सेना का अपमान करना कांग्रेस की आदत बन गई है। शनिवार को मीडिया से बात करते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि आज कांग्रेस पार्टी का नाम बदलकर एंटी नेशनल कांग्रेस कर देना चाहिए।
कांग्रेस की आज एक ही पहचान है कि वह लगातार सेना का अपमान कर रही है और पाकिस्तान के समर्थन में बयान दे रही है। कांग्रेस को पाकिस्तान को अपना भाईजान कहना अच्छा लगता है। भाजपा प्रवक्ता ने आगे कहा कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुई आतंकी घटना के बाद कांग्रेस सर्वदलीय बैठक में दावा करती है कि वह देश और सेना के साथ मजबूती से खड़ी है और सख्त कार्रवाई की मांग की जाती है। लेकिन जैसे ही कांग्रेस के नेता बैठक से बाहर आते हैं, वे वोट बैंक की राजनीति को राष्ट्रहित से ऊपर उठा देते हैं।
पहलगाम की घटना के बाद कांग्रेस नेताओं के बयानों से पता चलता है कि उनके नेता सेना पर सवाल उठाकर पाकिस्तान को क्लीन चिट दे रहे हैं। उनके नेता कहते हैं कि पाकिस्तान से बातचीत होनी चाहिए। कांग्रेस इस्लामिक जिहाद का समर्थन करके अप्रत्यक्ष रूप से हमारे सशस्त्र बलों का मनोबल कमजोर कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी के करीबी नेताओं में से एक पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी सर्जिकल स्ट्राइक पर सबूत मांगते हैं। उनके बयान से साबित होता है कि कांग्रेस की मानसिकता क्या है। वे आतंकवादी देशों पर भरोसा करते हैं।
उनके नेता पाकिस्तान के पक्ष में बयान देते हैं, उन्हें अपनी सेना पर भरोसा नहीं है। कांग्रेस ने मोदी के खिलाफ देश विरोधी बयान देना शुरू कर दिया है। कांग्रेस को जवाब देना चाहिए कि वह चन्नी के खिलाफ क्या कार्रवाई कर रही है। आपको बता दें कि सर्जिकल स्ट्राइक पर बयान के बाद चन्नी ने सफाई दी थी कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया।
विझिनजाम अंतर्राष्ट्रीय बंदरगाह के उद्घाटन समारोह में शशि थरूर की मौजूदगी से मची हलचल
2 May, 2025 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तिरुवनंतपुरम की एक सुहावनी सुबह में केरल के विझिनजाम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह के उद्घाटन समारोह ने न केवल एक नए युग की शुरुआत की, बल्कि राजनीतिक मंच पर एक दिलचस्प नजारा भी पेश किया। मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उद्योगपति गौतम अडानी, केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और कांग्रेस के दिग्गज नेता शशि थरूर की मौजूदगी ने इस कार्यक्रम को सुर्खियों में ला दिया। लेकिन, असली रंग तब दिखा जब पीएम मोदी ने अपने चिरपरिचित अंदाज में विपक्ष पर कटाक्ष कर माहौल को हल्का और गरम दोनों बना दिया।
शशि थरूर की मौजूदगी ने मचाई हलचल
भारत के समुद्री व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का वादा करने वाला विझिनजाम बंदरगाह दिन के केंद्र में रहा। लेकिन मंच पर बैठे शशि थरूर की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। पीएम मोदी ने इस मौके का पूरा फायदा उठाया और कहा, "मैं मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से कहना चाहता हूं कि आप इंडिया ब्लॉक के मजबूत स्तंभ हैं। लेकिन शशि थरूर भी यहां बैठे हैं। आज का कार्यक्रम कई लोगों की रातों की नींद हराम कर देगा।" उनकी यह टिप्पणी मंच पर मौजूद सभी लोगों के लिए एक सूक्ष्म व्यंग्य थी, जिसे सुनकर दर्शकों में हंसी और तालियों की गड़गड़ाहट शुरू हो गई। मोदी ने अपने अंदाज में कहा, "शशि थरूर को यहां देखकर मुझे यकीन है कि खबर वहां पहुंच गई होगी जहां पहुंचनी थी।" यह विपक्षी नेताओं की ओर इशारा था, जो शायद थरूर और अडानी की एक साथ इस मंच पर मौजूदगी से असहज हो सकते थे। मंच पर मौजूद तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर ने इस टिप्पणी का जवाब मुस्कुराते हुए दिया।
वेणुगोपाल ने कहा- उनके लिए सोना मुश्किल हो जाएगा
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल कहते हैं, "मुझे नहीं पता कि प्रधानमंत्री ऐसा क्यों कह रहे हैं... प्रधानमंत्री ही वह व्यक्ति होंगे जिनकी रातों की नींद उड़ जाएगी, न कि भारत गठबंधन, राहुल गांधी या कांग्रेस। हम जाति जनगणना के मुद्दे पर उन पर अधिकतम दबाव बनाने जा रहे हैं। उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक की तरह इसकी घोषणा की है... हम चैन की नींद सो लेंगे, लेकिन प्रधानमंत्री के लिए सोना मुश्किल होने वाला है।"
शशि थरूर ने पोस्ट किया
इससे पहले, शशि थरूर ने केरल पहुंचने पर पीएम मोदी का एयरपोर्ट पर स्वागत किया। थरूर ने अपने ट्वीट में लिखा, "दिल्ली में उड़ान में देरी के बावजूद, मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र में पीएम का स्वागत करने के लिए समय पर तिरुवनंतपुरम पहुंच गया।" यह छोटा सा क्षण इस बात का भी प्रतीक था कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद लोकतांत्रिक मर्यादा और औपचारिकताएं बरकरार हैं। विझिनजाम बंदरगाह का उद्घाटन केरल के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था। यह बंदरगाह न केवल भारत के समुद्री व्यापार को गति देगा बल्कि केरल को वैश्विक शिपिंग मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान भी दिलाएगा। अडानी समूह द्वारा विकसित इस परियोजना के बारे में पीएम मोदी ने कहा, "यह बंदरगाह भारत के विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है।" इस आयोजन ने न केवल बंदरगाह के महत्व को रेखांकित किया बल्कि भारतीय राजनीति के रंगीन पहलुओं को भी उजागर किया। एक तरफ विकास की गूंज थी, तो दूसरी तरफ राजनीतिक ताने और हल्के-फुल्के व्यंग्य ने माहौल में उत्साह भर दिया। यह दिन निश्चित रूप से केरल के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो जाएगा और शायद कुछ लोगों की रातों की नींद भी उड़ा देगा, जैसा कि पीएम मोदी ने मजाकिया अंदाज में कहा।
मायावती का हमला: कांग्रेस-भाजपा की ओबीसी नीति पर उठाए सवाल
2 May, 2025 05:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ । बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सीएम मायावती जातीय जनगणना को लेकर हमलावर हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एवं भाजपा की नीयत व नीति बहुजन समाज के प्रति सही होती तब ओबीसी समाज देश के विकास में उचित भागीदार बना होगा। बसपा प्रमुख मायावती ने लिखा कि काफी लंबे समय तक ना-ना करने के बाद अब केंद्र द्वारा जातीय जनगणना कराने के निर्णय का भाजपा व कांग्रेस आदि द्वारा श्रेय लेकर खुद को ओबीसी हितैषी सिद्ध करने की होड़, जबकि इनके बहुजन-विरोधी चरित्र के कारण ये समाज अभी भी पिछड़ा, शोषित व वंचित रहा है।
उन्होंने लिखा कि कांग्रेस एवं भाजपा की नीयत व नीति बहुजन समाज के प्रति पाक-साफ होती, तब ओबीसी समाज देश के विकास में उचित भागीदार बन गया होता, जिससे इनके मसीहा बाबासाहेब डा. भीमराव अंबेडकर का आत्म-सम्मान व स्वाभिमान का मिशन सफल होता हुआ जरूर दिखता। मायावती ने लिखा कि बाबासाहेब एवं बीएसपी के लगातार संघर्ष के कारण ओबीसी समाज आज जब काफी हद तक जागरूक है, तब दलितों की तरह ओबीसी वोटों के लिए लालायित इन पार्टियों में इनका हितैषी दिखने का स्वार्थ व मजबूरी है, अर्थात् स्पष्ट है कि ओबीसी का हित बीएसपी में ही निहित है, अन्यत्र नहीं। उन्होंने कहा कि वोट हमारा राज तुम्हारा-नहीं चलेगा के मानवतावादी संघर्ष को सही व सार्थक बनाकर अपने पैरों पर खड़े होने का समय करीब है, जिसके लिए कोताही व लापरवाही घातक तथा भाजपा व कांग्रेस आदि पार्टियों पर दलित, ओबीसी समेत बहुजन-हित, कल्याण व उत्थान हेतु भरोसा करना ठीक नहीं है।
इसके पहले मायावती ने कहा कि देश में मूल जनगणना के साथ ही जातीय जनगणना करने का केंद्र द्वारा आज लिया गया फैसला काफी देर से उठाया गया सही दिशा में कदम है। इसका स्वागत है। बीएसपी इसकी मांग काफी लंबे समय से करती रही है।
राहुल गांधी के संदेश का ही असर है कि भाजपा भी जाति जनगणना कराना चाहती है- कमल नाथ
2 May, 2025 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
2024 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने जाति जनगणना को मुद्दा बनाया था, लेकिन कांग्रेस सत्ता में नहीं आ सकी। अब केंद्र की मोदी सरकार ने जाति जनगणना कराने का फैसला किया है। इसको लेकर कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने शुक्रवार को एक बार फिर ट्विटर पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि पहले भाजपा जाति जनगणना का विरोध कर रही थी, लेकिन राहुल गांधी पर हमले भी हो रहे थे। राहुल गांधी के संदेश का ही असर है कि भाजपा भी जाति जनगणना कराने के पक्ष में आ गई है।
दो साल से उठ रही मांग
कमल नाथ ने आगे लिखा कि जाति जनगणना भारत में सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पिछले दो साल से इस मांग को जोरदार तरीके से उठा रहे हैं।
पूर्व सीएम ने लिखा है कि राहुल गांधी ने जाति जनगणना के महत्व और समाज के नए ढांचे में इसके उपयोग को लोगों तक पहुंचाया है। उनके संदेश का ही असर है कि अब भाजपा भी जाति जनगणना कराने के पक्ष में आ गई है।
पहले विरोध, फिर पक्ष में
कमलनाथ ने कहा कि यह सर्वविदित है कि भाजपा न केवल जाति जनगणना का विरोध कर रही थी, बल्कि इस मांग को उठाने पर राहुल गांधी पर राजनीतिक हमले भी किए जा रहे थे।
समय सीमा का भी खुलासा करें
कमलनाथ ने कहा कि अब जरूरत है कि सरकार बताए कि वह किस समय सीमा के भीतर जाति जनगणना पूरी करेगी, ताकि देश में सामाजिक न्याय की प्रक्रिया का अगला चरण शुरू हो सके। कमल नाथ ने कहा कि सामाजिक न्याय की इस लड़ाई का नेतृत्व करने के लिए देश की जनता राहुल गांधी के आभारी हैं और हमें उनकी दूरदर्शिता पर गर्व है।
राहुल गांधी के आगे झुकी सरकार
इससे दो दिन पहले बुधवार को कमल नाथ ने कहा था कि देश में जाति जनगणना की मांग सबसे पहले राहुल गांधी ने उठाई थी और आखिरकार भाजपा की केंद्र सरकार को राहुल गांधी की मांग के आगे झुकना पड़ा और जाति जनगणना पर सहमति जतानी पड़ी। नाथ ने कहा था कि राहुल गांधी ने सदन में कहा था कि हम इसी सदन में जाति जनगणना कराएंगे और आज उनकी बात सच साबित हुई है। कमल नाथ ने राहुल गांधी को सामाजिक न्याय का सबसे बड़ा योद्धा भी बताया था।
जाति जनगणना को लेकर विपक्षी दलों में श्रेय लेने की जंग शुरू
2 May, 2025 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मोदी सरकार द्वारा जाति जनगणना कराने की अचानक मंजूरी दिए जाने से देश में नई बहस छिड़ गई है और सरकार और विपक्ष के बीच श्रेय लेने की जंग शुरू हो गई है। भाजपा समेत एनडीए के सहयोगी दल इस फैसले को ऐतिहासिक बता रहे हैं। उनका तर्क है कि इस जनगणना को कराने के पीछे का लक्ष्य हर समुदाय को आंकड़ों से सशक्त बनाना है। लक्षित विकास और सच्चे सामाजिक न्याय के लिए यह ऐतिहासिक कदम है। पिछले 11 सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का मुख्य एजेंडा सामाजिक न्याय रहा है। कांग्रेस शुरू से ही जाति जनगणना और यहां तक कि आरक्षण के पक्ष में नहीं रही है। वहीं, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी, राजद और भारत ब्लॉक में उसके सहयोगी दल इसे अपनी जीत बता रहे हैं और कह रहे हैं कि सरकार का फैसला उनके दबाव के कारण हुआ है। भारत ब्लॉक की पार्टियां अब आरक्षण की सीमा को 50 फीसदी से आगे ले जाने की मांग कर रही हैं।
भाजपा: 11 साल से चल रहा काम, अचानक नहीं
1 जाति जनगणना का फैसला अचानक नहीं लिया गया है, पिछले 11 साल से इस पर काम चल रहा है।
2 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वंचितों को उनका हक दिलाने की प्रतिबद्धता। इससे हर वर्ग को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य हासिल होगा।
3 राजनीतिक रूप से कुछ राज्यों के सर्वेक्षण से समाज में भ्रम की स्थिति पैदा हुई है, जिसे इससे दूर किया जाएगा।
4 सामाजिक न्याय हमेशा नीति का केंद्र रहा है, इसलिए ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया गया।
कांग्रेस: राहुल के मिशन की जीत
1 राहुल गांधी के मिशन के कारण सरकार को जाति जनगणना की घोषणा करनी पड़ी।
2 भाजपा इसका श्रेय लेने की कोशिश कर रही है, लेकिन जनगणना के लिए समय सीमा नहीं बताई।
2 जाति जनगणना तभी फायदेमंद होगी, जब 50 प्रतिशत आरक्षण की दीवार हटेगी।
3 दिसंबर 2019 में मोदी सरकार ने बताया था कि जनगणना पर 8,254 करोड़ रुपये खर्च हुए, फिर इस साल के बजट में 575 करोड़ रुपये ही क्यों?
अब अचानक वे 'अर्बन नक्सल' कैसे हो गए: जयराम रमेश
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि एक साल पहले प्रधानमंत्री मोदी टीवी इंटरव्यू में जाति जनगणना की बात करने वालों को अर्बन नक्सल कहते थे। रमेश ने सवाल उठाया कि क्या पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह अचानक अर्बन नक्सल हो गए। अब भाजपा के सभी नेता, मंत्री और प्रवक्ता जाति जनगणना का जश्न धूमधाम से मना रहे हैं। कांग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों ने जाति जनगणना की मांग की, लेकिन मोदी ने 11 साल तक इस पर अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी। जब मैं खुद मंत्री था, तब 2011 में ग्रामीण भारत में सामाजिक, आर्थिक और जाति आधारित जनगणना हुई थी, लेकिन उसके आंकड़े आज तक सामने नहीं आए। जब हमने मांग की, तो हमारी और हमारे नेताओं की आलोचना की गई। जयराम ने कहा कि 1951 से हर 10 साल में होने वाली जनगणना में एससी-एसटी की आबादी तो गिनी जाती थी, लेकिन ओबीसी की आबादी सामने नहीं आती थी, जो अब कांग्रेस के दबाव में हो रही जनगणना में सामने आएगी।
राहुल को सर्वे और जनगणना में फर्क नहीं पता- प्रधान
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि आजादी के बाद यह पहला मौका है जब केंद्र सरकार ने जाति जनगणना को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। 50 फीसदी आरक्षण की सीमा खत्म करने के सवाल पर प्रधान ने कहा कि राहुल गांधी की बातों को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। उन्हें सर्वे और जनगणना में फर्क भी नहीं पता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को नेहरू और राजीव गांधी के पत्र और बयानों को पढ़कर देश से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नेहरू जी जाति आरक्षण के खिलाफ थे, जिसके चलते उन्होंने राज्यों को पत्र भी लिखा था। मंडल कमीशन लागू करने के समय भाजपा सरकार का हिस्सा थी। कांग्रेस ने इसे रोक दिया। मंडल कमीशन पर राजीव गांधी का क्या स्टैंड था, यह सभी जानते हैं। उन्होंने जाति जनगणना को कुछ दलों के लिए राजनीतिक एटीएम करार दिया। प्रधान ने कहा कि जब बिहार में जाति सर्वे हुआ था, तब भाजपा ने उसका समर्थन किया था।
आतंकी हमले में मारे गए नागरिकों और सुरक्षा कर्मियों को शहीद का दर्जा दिया जाए :राहुल गांधी
2 May, 2025 10:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से देशभर में आक्रोश का माहौल है। इसी बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों को शहीद का दर्जा दिया जाए। उन्होंने कहा कि वे पीडि़त परिवारों के दुख में साथ हैं और उनकी इस मांग का पूरा समर्थन करते हैं।
राहुल गांधी ने पीएम मोदी से की अपील
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि मैं पहलगाम हमले में मारे गए लोगों के परिवारों के दुख और उन्हें शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग के साथ खड़ा हूं। उन्होंने कहा कि मैं प्रधानमंत्री से अनुरोध है कि इस त्रासदी में जान गंवाने वालों के परिवारों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उन्हें यह सम्मान दें।
राहुल गांधी ने शुभम द्विवेदी से की मुलाकात
बता दें कि इससे पहले बीते बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कानपुर में हमले के एक पीडि़त शुभम द्विवेदी के परिवार से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि परिवार ने उनसे कहा कि उनके बेटे को शहीद का दर्जा मिलना चाहिए। इसके बाद राहुल गांधी ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि मैं कानपुर में एक पीडि़त परिवार से मिला। राहुल गांधी ने कहा कि पीडि़त परिवार ने मुझसे कहा कि प्रधानमंत्री तक उनका संदेश पहुंचाएं, कि हमारे बच्चे शहीद हुए हैं और उन्हें सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष इस मामले को लेकर गंभीर है और पीडि़तों को न्याय दिलाने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग कर रहा है।
पहलगाम आतंकी हमला, एक नजर
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में बीते मंगलवार 22 अप्रैल को आतंकियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसा कर 26 लोगों की नृशंस हत्या कर दी थी। सेना की वर्दी में आए दहशतगर्दों ने पहलगाम की बायसरन घाटी में पर्यटकों से पहले उनका धर्म पूछा, परिचय पत्र देखे और फिर हिंदू हो कहकर गोली मार दी।
टीआरएफ ने ली हमले की जिम्मेदारी
तीन जुलाई से शुरू होने जा रही श्रीअमरनाथ यात्रा से पहले इस कायराना हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा से जुड़े गुट द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली है। फरवरी, 2019 में पुलवामा में हुए हमले के बाद से जम्मू-कश्मीर में यह सबसे बड़ा आतंकी हमला है। उस हमले में सीआरपीएफ के 47 जवान मारे गए थे।
आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का ऐलान: अमित शाह
2 May, 2025 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमने हर चीज का कड़ा जवाब दिया है, चाहे वह उत्तर पूर्व हो, वामपंथी उग्रवाद के क्षेत्र हो या कश्मीर में आतंकवाद का साया हो। अगर कोई सोचता है कि कायरतापूर्ण हमला करके उसने अपनी बड़ी जीत हासिल कर ली है, तो समझ लीजिए कि यह नरेंद्र मोदी सरकार है, किसी को बख्शा नहीं जाएगा। इस देश के हर इंच से आतंकवाद को उखाड़ फेंकना हमारा संकल्प है और यह पूरा होगा।
अमित शाह ने आगे कहा कि इस लड़ाई में न केवल 140 करोड़ भारतीय बल्कि पूरी दुनिया भारत के साथ खड़ी है, दुनिया के सभी देश एक साथ आए हैं और आतंकवाद के खिलाफ इस लड़ाई में भारत के लोगों के साथ खड़े हैं।
अमित शाह ने आगे कहा कि मैं यह संकल्प दोहराना चाहता हूं कि जब तक आतंकवाद का सफाया नहीं हो जाता, हमारी लड़ाई जारी रहेगी और जिन्होंने इसे अंजाम दिया है, उन्हें उचित सजा जरूर मिलेगी। गुरुवार को दिल्ली के कैलाश कॉलोनी में बोडो नेता उपेंद्रनाथ ब्रह्मा के सम्मान में सड़क और प्रतिमा का इनॉगरेशन करते हुए अमित शाह ने आतंकवाद पर सीधी ललकार दी।
बोडो नेता उपेंद्रनाथ ब्रह्मा के सम्मान में बने सड़क और प्रतिमा के उद्घाटन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, यह मेरा सौभाग्य है कि आज मुझे कैलाश कॉलोनी में बोडोफा के सम्मान में प्रतिमा का अनावरण और सड़क का उद्घाटन करने का अवसर मिला है। यह प्रतिमा न केवल बोडो समुदाय के लिए बल्कि उन सभी छोटी जनजातियों के लिए भी महत्वपूर्ण है जिन्होंने अपनी भाषा, संस्कृति और विकास के लिए संघर्ष किया। बोडोफा की मूर्ति न केवल बोडो समुदाय बल्कि ऐसी सभी छोटी जनजातियों का सम्मान बढ़ाती है।
प्रधानमंत्री मोदी तिरुवनंतपुरम में करेंगे 'विझिंजम सीपोर्ट' का उद्घाटन, नई ऊर्जा का संचार
2 May, 2025 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 मई को सुबह 11 बजे केरल के तिरुवनंतपुरम में 8,900 करोड़ रुपये की लागत से बने ‘विझिंजम इंटरनेशनल डीपवाटर मल्टीपर्पज सीपोर्ट’ का उद्घाटन करेंगे। यह भारत का पहला समर्पित कंटेनर ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह है, जो भारत की वैश्विक व्यापार की भूमिका को मजबूत करेगा, लॉजिस्टिक क्षमता बढ़ाएगा और कार्गो ट्रांसशिपमेंट के लिए विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता को कम करेगा। लगभग 20 मीटर की प्राकृतिक गहराई और विश्व के व्यस्ततम समुद्री व्यापार मार्गों के पास स्थित यह पोर्ट रणनीतिक रूप से बेहद अहम है।
केरल के पोर्ट मंत्री वीएन वसावन ने बीते बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ कार्यक्रम में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, केंद्रीय पोत परिवहन मंत्री सरबानंद सोनोवाल, केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी और जॉर्ज कुरियन, राज्य मंत्री साजी चेरियन, वी शिवनकुट्टी, जीआर अनिल, विपक्ष के नेता वीडी सतीशन, सांसद शशि थरूर और एए रहीम, तिरुवनंतपुरम की मेयर आर्या राजेन्द्रन और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर भी शामिल होंगे। मंत्री वसावन ने बताया कि बंदरगाह का ट्रायल रन जुलाई 2024 में शुरू हुआ था और दिसंबर 2024 में इसे कमीशनिंग सर्टिफिकेट मिला। तब से अब तक यहां 285 जहाज आ चुके हैं और 5.93 लाख टीईयू कंटेनर का संचालन हो चुका है, जो उम्मीद से कहीं अधिक है। यहां तक कि एमएससी जैसे जहाज जो दुबई और कोलंबो नहीं जाते थे, वे विझिंजम पहुंच चुके हैं।
उन्होंने कहा कि बंदरगाह की सालाना क्षमता 30 लाख टीईयू है, लेकिन वर्तमान प्रदर्शन के आधार पर यह 45 लाख टीईयू तक संभव है। निर्माण कार्य तय समय से पहले पूरा हो जाएगा और राजस्व कमाने की प्रक्रिया जल्दी शुरू होगी। राजनीतिक टकराव की अटकलों पर उन्होंने कहा कि “केंद्र और राज्य के बीच कोई संघर्ष नहीं है। दोनों की तरफ से विज्ञापन अलग-अलग होंगे। यह कोई भाजपा या वाम मोर्चा की परियोजना नहीं है, बल्कि दोनों की साझी कोशिश है।”
जब कांग्रेस की सरकार थी तो जाति-जनगणना क्यों नहीं कराई गई? पिछड़ों का विरोध करना ही उनका काम- बोले शिवराज
1 May, 2025 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
केंद्र सरकार द्वारा देश में जाति-जनगणना कराने के फैसले के बाद इंडी अलांयस अपनी पीठ थपथपा रहा है। क्रेडिट लेने की होड़ के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर जोरदार निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस के डीएनए में पिछड़ों का विरोध करना ही रहा है। गुरुवार को न्यूज एजेंसी से बातचीत के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी को पहले इस बारे में जनता को जवाब देना चाहिए कि जब कांग्रेस की सरकार थी तो जाति-जनगणना क्यों नहीं कराई गई। पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर डॉ. मनमोहन सिंह तक इनकी सरकार रही। लेकिन, जाति-जनगणना क्यों नहीं कराई गई। पूर्व पीएम पंडित नेहरू ने तो जाति के आधार पर आरक्षण को ही गलत बताया था। पिछड़ों का विरोध करना कांग्रेस के डीएनए में है।
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि पहले कांग्रेस जवाब दें कि जब उनकी सरकार थी तो उन्होंने जाति-जनगणना क्यों नहीं की? सत्ता में थे तो जाति-जनगणना नहीं कराएंगे, लेकिन जब विपक्ष में हैं तो इसकी मांग करेंगे। कांग्रेस पर तो यह मुहावरा सटीक बैठता है- हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और।
जाति-जनगणना पर राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी जो दावा कर रहे हैं, पहले वह यह बताएं कि उनकी सरकार थी तो उन्होंने जाति-जनगणना क्यों नहीं करवाई। केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि जाति-जनगणना कराने के लिए मैं पीएम मोदी का अभिनंदन करता हूं। उन्होंने सही समय पर देशहित में सभी जातियों के विकास और कल्याण के लिए पारदर्शी तरीके से जातिगत जनगणना का फैसला लिया है। कुछ राज्यों में इसे लेकर सर्वे हुआ था और कहीं-कहीं भ्रम भी फैलाया गया। इसे लेकर बवंडर भी मचा। समाज के हर वर्ग के कल्याण की योजनाओं को बनाने के लिए सही डेटा की जरूरत है। वैज्ञानिक ढंग से तैयार की जातिगत जनगणना के आंकड़े सटीक योजनाओं को बनाने में मदद करेंगे। जातिगत जनगणना सामाजिक न्याय का आधार बनेगा।
जाति-जनगणना के प्रारूप के बारे में उन्होंने कहा कि जल्द ही इसका प्रारूप भी आएगा। वहीं, पहलगाम आतंकी घटना के बाद केंद्र सरकार की ओर से लिए गए फैसले पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जो राष्ट्रहित में होगा वही निर्णय लिया जाएगा।
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