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उत्साह, उमंग और उल्लास से मना मुख्यमंत्री डॉ. यादव का जन्म दिवस गौ सेवा कर की अपने जन्मदिन की शुरूआत
25 Mar, 2026 09:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का जन्म दिवस मुख्यमंत्री निवास सहित सार्वजनिक स्थलों पर भी उत्साह, उमंग और उल्लास से मनाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास स्थित मंदिर में प्रभु दर्शन के बाद गौशाला में गौमाता को दुलार कर उन्हें गौ-ग्रास देकर दिन की शुरूआत की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के जन्म दिवस पर मंत्रीगण सहित जनप्रतिनिधियों, धार्मिक, सामाजिक, शैक्षणिक, औद्योगिक, राजनैतिक संगठनों सहित वरिष्ठ नागरिकों ने और आमजन ने बड़ी संख्या में भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मुख्यमंत्री निवास में मनाये गये जन्म दिवस पर सांगीतिक प्रस्तुति हुई।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव को उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल, जनजातीय कार्य मंत्री श्री विजय शाह, पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, खेल एवं युवा कल्याण, सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग, ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्य मंत्री (स्वंतत्र प्रभार) श्री लखन पटेल, नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, प्रदेशाध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने जन्म दिवस की शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव को जन्म दिवस के अवसर पर पूर्व मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी, पूर्व मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता, पूर्व मंत्री श्री रामखेलावन पटेल, पूर्व मंत्री श्री रामनिवास रावत, विधायक श्री संजय पाठक, विधायक श्री मधु वर्मा, विधायक श्री के.पी. त्रिपाठी, श्री आशीष अग्रवाल, श्री रघुनंदन शर्मा, श्री रविंद्र यति, सुश्री नेहा बग्गा सहित वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर बधाई दी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव से ब्रह्माकुमारी संस्था की बहनों, संत-वृंद, लोकतंत्र सेनानी संघ, कर्मचारी संगठनों, वरिष्ठ पत्रकारों, भोपाल जैन समाज, भोपाल चैम्बर ऑफ कॉमर्स और ओरियंटल ग्रुप ऑफ कॉलेजेस के प्रतिनिधियों, चिकित्सा प्रकोष्ठ, विधि प्रकोष्ठ, सेंट्रल प्रेस क्लब सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए नागरिकों, युवा मोर्चा, समाजसेवी, किसान संगठनों आदि ने भेंट कर उनका स्वागत कर जन्म दिवस की शुभकामनाएं दीं।
सार्वजनिक स्थलों पर भी हुआ स्वागत
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का सीहोर के किसानों ने श्यामला हिल्स पर हल और अंगवस्त्रम भेंट कर उनका स्वागत किया। राजाभोज सेतु पर देशभक्ति गीतों के बीच पुष्प वर्षा कर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्वागत अभिनंदन किया गया। लालघाटी क्षेत्र में भी संत-वृंद ने वाद्य यंत्रों की धुनों के बीच पुष्प वर्षा कर मुख्यमंत्री डॉ. यादव को यश-कीर्ति सहित उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु होने का आशीर्वाद प्रदान किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'क्वीन्स ऑन द व्हील' को दिखाई हरी झंडी; महिला सशक्तिकरण का दिया संदेश
7 Mar, 2026 02:57 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल | मुख्यमंत्री निवास आज एक विशेष उत्साह और साहस का गवाह बना, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 25 महिला सुपर बाइकर्स के दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 'क्वीन्स ऑन द व्हील' (Queens on the Wheel) नाम के इस अभियान के माध्यम से महिला सशक्तिकरण और पर्यटन का एक अनूठा संगम देखने को मिला।
साहस और आत्मविश्वास की नई उड़ान
बाइकर्स को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज की महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। उन्होंने कहा, "यह सिर्फ एक बाइक रैली नहीं है, बल्कि यह हमारे प्रदेश की नारी शक्ति के आत्मविश्वास और साहस का प्रतीक है। आप प्रदेश के विभिन्न अंचलों में जाकर यह संदेश देंगी कि महिलाएं हर चुनौती को पार करने में सक्षम हैं।"
मुख्यमंत्री ने सभी 25 महिला बाइकर्स को उनके इस साहसिक सफर के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं और उनकी सुरक्षा के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता दोहराई।
अभियान के मुख्य बिंदु:
प्रतिभागी: प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों से आईं 25 अनुभवी महिला सुपर बाइकर्स।
उद्देश्य: महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना, सुरक्षित पर्यटन का संदेश और मध्य प्रदेश के पर्यटन स्थलों का प्रचार-प्रसार।
मार्ग: यह दल प्रदेश के विभिन्न पर्यटन और ऐतिहासिक स्थलों से होते हुए गुजरेगा, जहाँ वे स्थानीय महिलाओं से संवाद भी करेंगी।
"जब महिलाएं ऐसे साहसिक कार्यों के लिए आगे आती हैं, तो वे समाज की रूढ़ियों को तोड़ती हैं। 'क्वीन्स ऑन द व्हील' की ये जांबाज बेटियां मध्य प्रदेश की नई पहचान बनेंगी।" — डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री
पर्यटन और सुरक्षा पर जोर
मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि मध्य प्रदेश पर्यटन की दृष्टि से न केवल समृद्ध है, बल्कि महिलाओं के लिए पूरी तरह सुरक्षित भी है। इस रैली के माध्यम से देश भर में यह संदेश जाएगा कि महिला सैलानी बेखौफ होकर मध्य प्रदेश के सौंदर्य का आनंद ले सकती हैं।
हरी झंडी दिखाने से पहले मुख्यमंत्री ने महिला बाइकर्स से आत्मीय चर्चा की और उनकी भारी-भरकम सुपर बाइक्स के बारे में जानकारी भी ली। इस दौरान पूरे निवास परिसर में 'नारी शक्ति' के जयकारे गूंजते रहे।
MP Board 2026: परीक्षाओं के बीच कॉपियों की जांच शुरू, 3 मार्च से मूल्यांकन का दूसरा चरण; जानें कब तक आएगा रिजल्ट
27 Feb, 2026 04:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश बोर्ड (MPBSE) की 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं के बीच ही माध्यमिक शिक्षा मंडल ने मूल्यांकन प्रक्रिया को गति दे दी है। इस साल करीब 30 लाख से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं की जांच की जानी है, जिसके लिए प्रदेश भर में मूल्यांकन केंद्र बनाए गए हैं। मंडल की कोशिश है कि इस साल सत्र को नियमित रखने के लिए अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत तक नतीजे घोषित कर दिए जाएं।
मूल्यांकन का दूसरा चरण 3 मार्च से
बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, कॉपियों की जांच का पहला चरण पहले ही शुरू हो चुका है, जिसमें उन विषयों की कॉपियां जांची जा रही हैं जिनकी परीक्षाएं हो चुकी हैं। मूल्यांकन का दूसरा चरण 3 मार्च से शुरू होगा। इस चरण में मुख्य विषयों की कॉपियों की जांच में तेजी लाई जाएगी। बोर्ड ने इसके लिए 35,000 से अधिक अनुभवी शिक्षकों की ड्यूटी लगाई है।
निगरानी के लिए 'मोबाइल ऐप' का इस्तेमाल
इस बार मूल्यांकन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और हाई-टेक बनाने के लिए बोर्ड एक विशेष मोबाइल ऐप का उपयोग कर रहा है।
डिजिटल ट्रैकिंग: इस ऐप के जरिए हर केंद्र पर प्रतिदिन जांची गई कॉपियों का डेटा सीधे बोर्ड के मुख्यालय पहुंचेगा।
शिक्षकों की जवाबदेही: कौन सा शिक्षक कितनी कॉपियां चेक कर रहा है और किस विषय में कितनी प्रगति हुई है, इसकी पल-पल की निगरानी बोर्ड अधिकारी कर सकेंगे।
कब तक जारी हो सकते हैं नतीजे?
छात्रों के मन में सबसे बड़ा सवाल रिजल्ट की तारीख को लेकर है। पिछले साल (2025) बोर्ड ने 6 मई को नतीजे घोषित किए थे। इस साल जिस तेजी से मूल्यांकन कार्य शुरू हुआ है, उसे देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि:
संभावित तिथि: अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह या मई 2026 के प्रथम सप्ताह में रिजल्ट जारी हो सकता है।
समय पर सत्र: बोर्ड का लक्ष्य है कि मई के पहले पखवाड़े तक परिणाम देकर नए शैक्षणिक सत्र की प्रक्रिया समय पर शुरू की जाए।
छात्रों के लिए जरूरी सूचना
बोर्ड परीक्षाएं 10वीं के लिए 6 मार्च और 12वीं के लिए 7 मार्च 2026 को समाप्त हो रही हैं। परीक्षा समाप्त होने के तुरंत बाद सभी शिक्षक पूर्णकालिक रूप से मूल्यांकन कार्य में जुट जाएंगे। छात्र अपना रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट mpbse.nic.in और mpresults.nic.in पर देख सकेंगे।
हर्बल गुलाल और शाही भस्म आरती: जानिए मध्य प्रदेश में कहां और क्यों की जाती है सबसे पहली होलिका पूजा?
27 Feb, 2026 04:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जहां पूरे देश में होली का उत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, वहीं मध्य प्रदेश में एक ऐसी जगह है जहां की परंपरा सबसे निराली है। उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध भगवान महाकालेश्वर मंदिर में देश की सबसे पहली होलिका जलाई जाती है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसके पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प और आस्था से जुड़ी है।
धार्मिक नगरी उज्जैन, जिसे 'बाबा महाकाल की नगरी' कहा जाता है, वहां हर त्योहार की शुरुआत सबसे पहले भगवान महाकालेश्वर के दरबार से होती है। होली के पावन पर्व पर भी यही परंपरा निभाई जाती है। जब पूरा देश अगले दिन की तैयारी कर रहा होता है, तब फाल्गुन पूर्णिमा की संध्या को महाकाल मंदिर के प्रांगण में सबसे पहले होलिका दहन किया जाता है।
भस्म आरती और हर्बल गुलाल से शुरुआत
महाकाल मंदिर में होलिका दहन का नजारा अद्भुत होता है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि संध्या आरती के बाद मंदिर परिसर में मंत्रोच्चार के साथ होलिका प्रज्वलित की जाती है। खास बात यह है कि यहां होलिका दहन के बाद भगवान महाकाल को हर्बल गुलाल अर्पित किया जाता है। अगले दिन सुबह होने वाली 'भस्म आरती' में बाबा महाकाल भक्तों के साथ फूलों और अबीर की होली खेलते हैं, जिसे देखने के लिए दुनिया भर से श्रद्धालु उमड़ते हैं।
इसके पीछे की रहस्यमयी कहानी और मान्यता
उज्जैन में सबसे पहले होली मनाने के पीछे कई पौराणिक और आध्यात्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं:
अवंतिका का राजा: उज्जैन को 'अवंतिका' कहा जाता है और मान्यता है कि महाकाल इस नगरी के राजा हैं। हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार, किसी भी नगर में उत्सव की शुरुआत वहां के राजा के घर से होनी चाहिए। इसीलिए उज्जैन वासी अपने घरों में होली जलाने से पहले अपने राजा 'महाकाल' के दरबार की अग्नि का इंतजार करते हैं।
प्रह्लाद और होलिका की कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने जो लीला रची थी, उसमें बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश छिपा है। उज्जैन को शक्तिपीठों और ज्योतिर्लिंगों का केंद्र माना जाता है, इसलिए यहां की ऊर्जा को शुद्ध करने के लिए सबसे पहले होलिका दहन यहीं किया जाता है।
काल गणना का केंद्र: उज्जैन प्राचीन काल से ही काल गणना (Time Calculation) का केंद्र रहा है। पंचांग और तिथियों का निर्धारण यहीं से सटीक माना जाता है, इसलिए फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि लगते ही सबसे पहले शास्त्रोक्त विधि से यहां होलिका पूजन संपन्न होता है।
भक्तों के लिए क्या है खास?
महाकाल की इस पहली होली में शामिल होने वाले भक्तों का मानना है कि यहां की होली की भस्म को माथे पर लगाने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। होलिका दहन के बाद पूरे उज्जैन शहर में होली की आग फैलाई जाती है, जिसे 'ठाकुर जी की होली' कहा जाता है।
एमपी विधानसभा: 'शीर्षासन सत्याग्रह' पर बैठे कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल, खुद पर दर्ज FIR को बताया राजनीतिक षड्यंत्र
27 Feb, 2026 04:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का दसवां दिन उस वक्त हंगामेदार हो गया जब श्योपुर से कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने एक बेहद अनोखे ढंग से अपना विरोध प्रदर्शन किया। विधायक जंडेल विधानसभा परिसर में स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने जमीन पर सिर के बल खड़े होकर 'शीर्षासन' करने लगे। उन्हें इस अवस्था में देखकर वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी और अन्य विधायक दंग रह गए।
विवाद का केंद्र: शिव बारात में 'हर्ष फायरिंग' का मामला
विधायक बाबू जंडेल के इस कड़े विरोध के पीछे हाल ही में उनके खिलाफ दर्ज हुई एक एफआईआर है। दरअसल, महाशिवरात्रि के अवसर पर श्योपुर के ग्राम मुंडला में आयोजित शिव बारात के दौरान विधायक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। आरोप है कि वे घोड़ी पर सवार होकर हवा में गोलियां चला रहे थे। इस 'हर्ष फायरिंग' के मामले में पुलिस ने उन पर केस दर्ज किया है।
'मैं उग्रवादी नहीं, यज्ञ का यजमान हूँ'
शीर्षासन कर रहे विधायक जंडेल ने सरकार और प्रशासन पर तीखे आरोप लगाते हुए कहा कि यह पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित कार्रवाई है। उन्होंने अपनी सफाई में कहा:
"मैं कोई उग्रवादी नहीं हूँ, मैं तो उस धार्मिक अनुष्ठान का यजमान था। मैंने गोली नहीं चलाई, बल्कि केवल पटाखे फोड़े थे। लेकिन सरकार के दबाव में मुझ पर झूठा मुकदमा दर्ज किया गया है।"
लगातार मुकदमों से नाराजगी
विधायक ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि पिछले एक महीने के भीतर उन पर तीन नई एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी वे किसानों या आम जनता की समस्याओं को लेकर आवाज उठाते हैं, सरकार उन्हें चुप कराने के लिए झूठे केस लाद देती है। जंडेल के मुताबिक, उनके खिलाफ अब तक कुल 15 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें से 7 मामलों में वे पहले ही हाई कोर्ट से बरी हो चुके हैं।
सत्तापक्ष पर दोहरे मापदंड का आरोप
बाबू जंडेल ने भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ताधारी पार्टी के नेता अक्सर कार्यक्रमों में फायरिंग और डांस करते नजर आते हैं, लेकिन प्रशासन उन पर कोई कार्रवाई नहीं करता। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनके खिलाफ दर्ज ये "झूठे" मामले वापस नहीं लिए गए, तो वे गांधी आश्रम जाकर अपना आंदोलन और उग्र करेंगे।
विधानसभा सत्र के दौरान हुआ यह 'शीर्षासन सत्याग्रह' अब प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है, और विपक्ष इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बता रहा है।
छिंदवाड़ा की सड़कों पर गूंज रहे सुरक्षा के सुर: 'सिंगिंग पुलिस' अशोक कुमार का अनोखा अंदाज
19 Feb, 2026 03:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता फैलाने का एक बेहद दिलचस्प और संगीतमय तरीका सामने आया है। यहाँ तैनात एएसआई (ASI) अशोक कुमार अपनी सुरीली आवाज और गायकी के हुनर से न केवल लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं, बल्कि उन्हें सड़क सुरक्षा का पाठ भी पढ़ा रहे हैं। 'सिंगिंग पुलिस' के नाम से मशहूर अशोक कुमार अब शहर के चौराहों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का विषय बन गए हैं।
अशोक कुमार का काम करने का तरीका अन्य पुलिसकर्मियों से काफी अलग है। वे केवल चालान काटकर जुर्माना वसूलने में विश्वास नहीं रखते, बल्कि बीच सड़क पर खड़े होकर बॉलीवुड के लोकप्रिय गानों की पैरोडी बनाकर लोगों को समझाते हैं। वे फिल्मी धुनों पर आधारित गानों के जरिए हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने और तेज रफ्तार के खतरों के बारे में बेहद भावुक और प्रभावी संदेश देते हैं। उनके गीतों के बोल कुछ इस तरह पिरोए गए होते हैं कि राहगीर अनायास ही रुककर उन्हें सुनने लगते हैं और सुरक्षा के महत्व को गहराई से समझते हैं।
उनके वीडियो में अक्सर देखा जाता है कि वे हाथ में माइक थामे चौराहे पर खड़े होते हैं और जैसे ही रेड लाइट होती है, वे गाना शुरू कर देते हैं। उनके आसपास लोग रुककर न केवल उनके गाने सुनते हैं, बल्कि कई बार उनके साथ तालियां बजाते हुए नियमों का पालन करने की शपथ भी लेते हैं। सोशल मीडिया पर उनके वीडियो लाखों बार देखे जा चुके हैं, जहाँ लोग कमेंट्स में कह रहे हैं कि "काश हर शहर में एक अशोक कुमार जैसा पुलिसवाला हो।"
पुलिस का यह मानवीय और कलात्मक चेहरा जनता के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि जब कोई अधिकारी डांटने या डराने के बजाय संगीत के माध्यम से समझाता है, तो लोग नियमों का पालन अपनी जिम्मेदारी समझकर करने लगते हैं। अशोक कुमार का कहना है कि संगीत एक ऐसा माध्यम है जो सीधा दिल तक पहुँचता है, और उनका एकमात्र उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं को कम कर परिवारों की खुशियां बचाना है। छिंदवाड़ा पुलिस प्रशासन ने भी उनके इस रचनात्मक प्रयास की सराहना की है, क्योंकि इससे पुलिस और जनता के बीच के संबंधों में भी सुधार आ रहा है।
मध्य प्रदेश बजट 2026-27: 'विकसित एमपी' के संकल्प के साथ 4.38 लाख करोड़ का भव्य बजट पेश
18 Feb, 2026 03:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने आज विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का बजट पेश किया, जिसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'विकसित मध्य प्रदेश' की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। कुल 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रुपये का यह बजट पूरी तरह से डिजिटल माध्यम से पेश किया गया, जिसमें सरकार ने समाज के हर वर्ग, विशेषकर किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए हैं। इस बजट की सबसे बड़ी राहत आम जनता के लिए यह रही कि सरकार ने किसी भी तरह का नया टैक्स नहीं लगाया है और न ही पुराने करों में कोई बढ़ोतरी की है।
महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता
महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए बजट में 'लाड़ली बहना योजना' के लिए 23,882 करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रावधान किया गया है, जबकि समग्र महिला कल्याण की विभिन्न योजनाओं के लिए कुल 1,27,555 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसी तरह, वर्ष 2026-27 को 'किसान कल्याण वर्ष' घोषित करते हुए कृषि और ग्रामीण विकास के लिए 1.15 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि रखी गई है। किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए 3000 करोड़ रुपये की लागत से 1 लाख सोलर पंप उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए 412 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
शिक्षा और स्वास्थ्य
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी सरकार ने अपनी तिजोरी खोली है। बजट में 15 हजार नए शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की गई है और कक्षा 8वीं तक के बच्चों को टेट्रा पैक में दूध उपलब्ध कराने के लिए 'यशोदा दुग्ध प्रदाय योजना' शुरू की जा रही है, जिसके लिए शुरुआती तौर पर 700 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। स्वास्थ्य बजट में पिछले साल के मुकाबले 15 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जिससे बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किया जाएगा।
'द्वारका योजना' की शुरुआत
इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी विकास के मोर्चे पर सरकार ने 'द्वारका योजना' की शुरुआत की है, जिसके तहत अगले तीन वर्षों में शहरी विकास के लिए 5,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके साथ ही उज्जैन में एलिवेटेड कॉरिडोर, इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर और जबलपुर में नए फ्लाईओवर जैसे प्रोजेक्ट्स के लिए भी पर्याप्त धन आवंटित किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों के मजरे-टोलों को सड़कों से जोड़ने के लिए 21,630 करोड़ रुपये की बड़ी राशि स्वीकृत की गई है।
सांस्कृतिक संरक्षण और धार्मिक पर्यटन
सांस्कृतिक संरक्षण और धार्मिक पर्यटन पर जोर देते हुए बजट में संस्कृति विभाग के आवंटन में 63 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी की गई है, जिसके तहत धार्मिक केंद्रों के विकास और सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों के लिए 3,060 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। साथ ही, वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नए टाइगर रिजर्व बनाने और चीता संरक्षण परियोजना को आगे बढ़ाने का संकल्प भी दोहराया गया है। कुल मिलाकर, 'GYANII' मॉडल (गरीब, युवा, अन्नदाता, नारी, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्री) पर आधारित यह बजट मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई पर ले जाने का वादा करता है।
परंपरागत बीज संरक्षण के लिये बीज सखी का हुआ राज्य स्तरीय प्रशिक्षण
17 Feb, 2026 07:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा अभिनव पहल करते हुए 27 जिलों की बीज सखियों को परंपरागत बीज संरक्षण एवं बीज बैंक स्थापना के सम्बन्ध में दो दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण का आयोजन क्षेत्रीय ग्रामीण विकास संस्थान भोपाल में 9 एवं 10 फरवरी को आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण में पद्मश्री, श्री बाबूलाल दहिया जिला सतना द्वारा बीज संरक्षण के अनुभव साझा किए गए एवं बीज बैंक स्थापना पर व्याख्यान भी दिया गया। कर्नाटक राज्य की बी.बी. जान जो विगत 9 वर्षों से परंपरागत बीज संरक्षण का कार्य कर रही है, उनके द्वारा भी प्रतिभागियों को बीज संरक्षण के लिये प्रशिक्षण दिया। विगत 16 वर्षों से देशी बीजों का संरक्षण कर रहीं जिला डिंडोरी की सुश्री फुलझरिया बाई द्वारा भी प्रशिक्षण में अपने अनुभव साझा किए एवं बीज संरक्षण के तरीके भी बताए। इसके अलावा कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के प्रतिनिधियों ने भी जानकारी दी।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी आजीविका मिशन श्रीमती हर्षिका सिंह की पहल पर प्रदेश में महिला समूहों की सदस्यों को प्राकृतिक खेती को बढावा देने के उद्देश्य से परंपरागत बीज संरक्षण के लिये जिलों में बीज बैंक की स्थापना के लिये काम शुरू किया गया है। इसके अंतर्गत प्रारंभिक चरण में हितग्राहियों का चयन, प्रशिक्षण आदि किया जाना है। इसी क्रम में क्षेत्रीय ग्रामीण विकास संस्थान भोपाल में प्रशिक्षणों का आयोजन किया जा रहा है।
प्रशिक्षण में देशी बीजों को महत्व देते हुये उनके फायदे के संबंध में प्रतिभागियों को बताया गया। देशी बीज स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुसार ढले होने के कारण कम पानी, खाद व कीटनाशकों में भी बेहतर पैदावार देते हैं। इनकी अन्य विशेषतायें भी हैं जैसे यह अन्य की तुलना में अत्यधिक पौष्टिक होते हैं, सूखा-रोग प्रतिरोधी होते हैं जो किसानों को आत्मनिर्भर और खेती को किफायती व टिकाऊ बनाते हैं।
उद्यानिकी विभाग से श्री दीनानाथ धोटे द्वारा देशी सब्जी बीज संरक्षण पर तकनीकी प्रशिक्षण प्रदाय किया गया। कृषि विभाग से श्री जितेंद्र सिंह परिहार द्वारा भी प्राकृतिक खेती एवं परंपरागत बीज संरक्षण के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। आजीविका मिशन के राज्य परियोजना प्रबंधक कृषि, श्री मनीष सिंह एवं युवा सलाहकार सुश्री पायल कुमारी द्वारा बीज बैंक की कार्ययोजना एवं आगामी 6 माह की कार्ययोजना तैयार करने के संबंध में जानकारी दी गई। आगामी समय में जिला स्तर पर बीज सखी के प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे और बीज बैंक की स्थापना की जावेगी।
परंपरागत बीज की विशेषताएँ
आत्मनिर्भरता: किसान हर साल बीज खरीदकर खर्च करने के बजाय अपनी पिछली फसल से ही बीज सुरक्षित कर सकते हैं, जिससे उत्पादन लागत बहुत कम हो जाती है। जलवायु-प्रतिरोधी - ये स्थानीय पर्यावरण के अनुकूल होते हैं, इसलिए सूखे, अत्यधिक बारिश या कीटों का सामना करने की इनमें बेहतर क्षमता होती है। उच्च पौष्टिकता - देसी फसलों में संकर बीजों की तुलना में प्राकृतिक रूप से अधिक विटामिन, खनिज और पोषक तत्व होते हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छे हैं। पर्यावरण संरक्षण - इन बीजों में कम रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता होती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और जल स्रोत भी सुरक्षित रहते हैं। जैव विविधता का संरक्षण: विभिन्न प्रकार की देसी किस्में पारंपरिक ज्ञान को अगली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखती हैं।
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों पर विधानसभा में भारी हंगामा, कांग्रेस का बोतलों के साथ प्रदर्शन
17 Feb, 2026 05:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल के विधानसभा परिसर में आज उस समय भारी गहमागहमी देखने को मिली जब कांग्रेस विधायक दल ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के विरोध में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक हाथों में दूषित पानी की बोतलें लेकर विधानसभा पहुंचे और गांधी प्रतिमा के सामने धरने पर बैठ गए। विधायकों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की लापरवाही के कारण क्षेत्र की जनता जहरीला पानी पीने को मजबूर है और मौतों का असली आंकड़ा सरकार द्वारा छुपाया जा रहा है।
प्रदर्शन के दौरान विपक्ष ने इसे 'सरकारी हत्या' करार देते हुए नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग की। विधायकों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि सीवर और पेयजल लाइनों के मिल जाने की शिकायतों पर नगर निगम ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, जिसका खामियाजा मासूम जनता को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा। कांग्रेस ने मांग रखी कि मृतकों के परिजनों को तत्काल 25-25 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए और इस मामले के दोषी अधिकारियों पर कड़ी आपराधिक कार्यवाही की जाए।
सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही इस विरोध प्रदर्शन ने माहौल को गरमा दिया था। विपक्ष का कहना था कि जब तक इंदौर की जनता को न्याय नहीं मिलता और पूरे प्रदेश में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। इस दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली, जहां सरकार ने इसे विपक्ष का राजनीतिक स्टंट बताया, वहीं कांग्रेस ने इसे जनता के जीवन से जुड़ा गंभीर मुद्दा करार दिया।
मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का शंखनाद: राज्यपाल ने पेश किया सरकार की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड
16 Feb, 2026 06:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का आज भव्य आगाज़ हुआ। परंपरा के अनुसार, सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण के साथ हुई। राज्यपाल ने अपने संबोधन में प्रदेश सरकार की पिछले एक साल की उपलब्धियों का ब्यौरा दिया और आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए सरकार के दृष्टिकोण को सदन के सामने रखा।
अभिभाषण के प्रमुख बिंदु
राज्यपाल ने अपने भाषण में 'विकसित मध्य प्रदेश' के संकल्प पर जोर देते हुए कहा कि राज्य सरकार समाज के हर वर्ग, विशेषकर महिलाओं, किसानों और युवाओं के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने "लाड़ली बहना योजना" जैसी प्रमुख योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे इन कदमों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण को नई गति मिली है। साथ ही, उन्होंने प्रदेश में बढ़ते औद्योगिक निवेश, सड़कों के जाल और सिंचाई क्षमता में हुई वृद्धि की सराहना की।
किसानों के हित में सरकार प्रतिबद्ध
राज्यपाल ने कहा कि सरकार वर्ष 2026 को समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश की थीम पर मना रही है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि क्षेत्र में सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। फसल विविधीकरण, सिंचाई विस्तार और समर्थन मूल्य व्यवस्था को मजबूत करने पर सरकार का विशेष ध्यान है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए नेशनल मिशन ऑफ नेचरल फॉर्मिग को प्रभावी तरीके से लागू किया है। राज्यपाल ने कहा कि मेरी सरकार ने विरासत के साथ विकास के मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए मध्य प्रदेश को देश के अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित किया है। हमारा अन्नदाता समृद्ध होगा, हमारी मातृशक्ति स्वावलंबी बनेगी और प्रदेश का युवा मात्र जॉब सीकर तक सीमित न रहकर वैश्विक स्तर का जॉब क्रिएटर बनकर उभरेगा।
विपक्ष का हंगामा और तेवर
जैसे ही राज्यपाल ने अपना अभिभाषण शुरू किया, सदन में विपक्ष की ओर से टोका-टोकी और नारेबाजी भी देखने को मिली। कांग्रेस विधायकों ने हाथ में तख्तियां लेकर कानून व्यवस्था, बेरोजगारी और किसानों को धान एवं गेहूं पर बोनस देने के वादे को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। विपक्ष का आरोप था कि सरकार केवल कागजों पर विकास दिखा रही है, जबकि धरातल पर स्थिति इसके उलट है। हंगामे के बीच राज्यपाल ने अपना संबोधन जारी रखा और अंत में सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।
बजट से उम्मीदें
राज्यपाल के अभिभाषण के बाद अब राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि आगामी बजट में वित्त मंत्री किन बड़ी योजनाओं के लिए खजाना खोलेंगे। माना जा रहा है कि इस बजट में अधोसंरचना (Infrastructure) और कृषि क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बजट सत्र के आने वाले दिनों में राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव लाया जाएगा, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के आसार हैं।
सुरक्षा और व्यवस्था
सत्र को देखते हुए विधानसभा परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने सभी सदस्यों से आग्रह किया है कि वे जनहित के मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा करें और सदन के समय का सदुपयोग करें। यह सत्र कई मायनों में महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें प्रदेश के भविष्य की आर्थिक रूपरेखा तय की जाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया सायबर पंजीयन कार्यालय का शुभारंभ
16 Feb, 2026 06:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को पंजीयन भवन में सायबर पंजीयन कार्यालय का शुभारंभ किया।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य सरकार विकास के साथ प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, शुचिता, तत्परता, नवाचार और जनकल्याण को प्रोत्साहन दे रही है। पंजीयन विभाग के सायबर पंजीयन कार्यालय का शुभारंभ इसी संकल्प की सिद्धि का प्रमाण है। संपदा-1.0 और संपदा 2.0 के बाद प्रदेश में सायबर पंजीयन की प्रक्रिया का आरंभ होना तकनीक आधारित सुशासन की नई शुरुआत है। मध्यप्रदेश तेजी से बदल रहा है। मध्यप्रदेश भारत का पहला राज्य है, जिसने डिजिटल क्रांति के माध्यम से लोन, मुख्तयारनामा, माइनिंग लीज, हलफनामा, पावर आफ अटार्नी, पार्टनरशिप डीड जैसी 75 से अधिक सेवाओं के लिए सायबर पंजीयन प्रारंभ किया है। राज्य सरकार के इस नवाचार से पेपरलेस और कैशलेस प्रक्रिया को प्रोत्साहन मिल रहा है। यह नई पीढ़ी के लिए पर्यावरण और पारदर्शिता के मामले में महत्वपूर्ण होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब शासन और उसके उपक्रमों के अंतरण दस्तावेज भी पेपरलेस रजिस्ट्रेशन के माध्यम से पूरे होंगे। हाउसिंग बोर्ड और विकास प्राधिकरण के अंतरण के लिए जनता को पंजीयन कार्यालय नहीं आना पड़ेगा। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से वीडियो केवायसी सहित सभी कार्य होंगे, इससे धन और समय दोनों की बचत होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि संपदा 2.0 के नवाचार को वर्ष 2025 का राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार मिला है। अब तक 14 लाख 95 हजार से अधिक दस्तावेजों का पंजीयन हो चुका है। राज्य सरकार ने 55 जिलों में सायबर तहसील परियोजना को लागू किया है, जिसमें राजस्व बंटवारा, नामांतरण की प्रक्रिया भी संपदा 2.0 से हो सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विभागीय अधिकारी सायबर पंजीयन सुविधा के माध्यम से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के साथ मौजूदा वित्त वर्ष में अपने लक्ष्य पूरे करें।
उप मुख्यमंत्री एवं वाणिज्यिक कर मंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि वर्ष 2024-25 में दस्तावेजों के पंजीयन और ई-स्टाम्पिंग के लिए एडवांस सॉफ्टवेयर संपदा 2.0 लागू किया। इससे चल और अचल संपत्ति के दस्तावेज डिजिटल और पेपरलेस तरीके से पंजीकृत हो रहे हैं। कई दस्तावेज तो ऐसे हैं जिनके लिए उप-पंजीयक कार्यालय भी नहीं आना पड़ता है। सबसे पहले गुना,हरदा, रतलाम और डिण्डौरी जिलों में नए ई-पंजीयन और ई- स्थम्पिंग सॉफ्टवेयर संपदा 2.0 का सफल पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था। प्रदेश के नवाचारों को देशभर में सराहा गया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में जारी इन नवाचारों का लाभ प्रदेश के नागरिकों को मिल रहा हैं। पंजीयन से जुड़े कार्यों को त्रूटि रहित पूरा करने के लिए प्रदेशभर के 14 लाख कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्री अमित राठौर, प्रमुख सचिव श्री राघवेंद्र सिंह, महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक श्री अमित तोमर उपस्थित रहे। कार्यक्रम से जिलों के अधिकारी, बैंककर्मी और लाभार्थी वर्चुअली जुड़े।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंजीनियर्स की एक दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का किया शुभारंभ
12 Feb, 2026 07:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को रवीन्द्र भवन में लोक निर्माण विभाग अन्तर्गत मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा आयोजित एक दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हुए ।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि निर्माण सिर्फ ईंट–पत्थर का संयोजन नहीं, एक अभिनव कला है। इसमें उत्कृष्ट दृष्टिकोण के साथ दीर्घकालिक कार्य योजना को अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप अब हर निर्माण कार्य में कन्सेप्चुअल और क्वालिटेटिव एप्रोच अनिवार्य रूप से दिखाई देना चाहिए। गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाना चाहिए। प्रदेश के विकास के लिए हम सभी को पूरी क्षमता दक्षता से काम करना होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। लोक निर्माण विभाग के तकनीकी अधिकारियों, वरिष्ठ एवं कनिष्ठ अभियंताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैचारिक प्रतिबद्धता और कार्यशैली में जड़ता से बचने और बदलती तकनीकों के अनुरूप स्वयं को अद्यतन रखने के लिए कौशल संवर्धन अत्यंत आवश्यक है। ऐसी कार्यशालाएं अभियंताओं की स्किल्स को रिफ्रेश करती हैं और उन्हें नई ऊर्जा प्रदान करती हैं। उन्होंने निर्माण कार्यों में दीर्घकालिक दृष्टि, नवाचार और पारदर्शिता को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में पीएम गतिशक्ति योजना के माध्यम से लोक निर्माण विभाग नवाचारों को धरातल पर उतार रहा है। वर्तमान समय में हमारे इंजीनियर्स साक्षात् भगवान विश्वकर्मा के अवतार हैं। लोक निर्माण विभाग ने पिछले 2 वर्षों के कार्यों के आधार पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। इस अवधि में सराहनीय कार्य हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गीता के अंतिम अध्याय में ज्ञान और विज्ञान की बात कही गई है, जिसमें मन, बुद्धि और अहंकार के साथ पंच तत्वों की व्याख्या की गई है। लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर्स की यह कार्यशाला आधुनिक संरचनाओं के निर्माण को गति प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण पहल है। हमारे इंजीनियर्स ने सांदीपनि विद्यालय सहित बड़े-बड़े अधोसंरचनात्मक विकास के निर्माण कार्य किए हैं। सड़क, पुल, स्टेडियम और भवन जैसे निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग के माध्यम से ही किये जाते हैं। विभागीय इंजीनियर्स की क्षमता संवर्धन के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण की आवश्यकता भी है। उन्होंने कहा कि इंजीनियर्स को अपना काम करने में अनेक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है। आज की कार्यशाला में एमपीआईडीसी सहित देश की विभिन्न संस्थाओं के साथ समझौते हुए हैं। प्रदेश में ग्रीन बिल्डिंग के विकास को लेकर सहमति बनी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी कार्यों और नवाचारों के लिए लोक निर्माण मंत्री एवं विभाग को बधाई दीं।
तकनीक, पारदर्शिता और गुणवत्ता से बदलेगा निर्माण तंत्र : लोक निर्माण मंत्री श्री सिंह
लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने क्षमता संवर्धन कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि यह केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि विभाग की उस निरंतर सुधार यात्रा का प्रतीक है जिसमें नई सोच, नई प्रणाली और उच्च गुणवत्ता के साथ लोक निर्माण विभाग आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब सोच बदलती है तभी व्यवस्था बदलती है, और यह कार्यशाला विभाग के नवाचारों की श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश में अधोसंरचना विकास को केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उसे सुशासन, पारदर्शिता, तकनीक और नागरिक सुविधा से जोड़ा गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान, डिजिटल इंडिया, ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस, हरित विकास और आत्मनिर्भर भारत जैसे कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब विकास समन्वित सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के दूरदर्शी नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने अधोसंरचनात्मक विकास को नई गति और दिशा दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्पष्ट संदेश है कि निर्माण केवल संरचना नहीं, बल्कि भविष्य की नींव है। समयबद्धता, गुणवत्ता, पारदर्शिता और पर्यावरणीय संवेदनशीलता अब विभाग की कार्य संस्कृति का अभिन्न अंग बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक निर्माण विभाग के लिए 293 इंजीनियर्स के पद भरने की स्वीकृति प्रदान की है। इसके लिए विभागीय स्तर पर कार्य जारी है। मंत्री श्री सिंह ने बताया कि प्रोजेक्ट मैनेजमेंट मैन्युअल 2.0 विभाग की महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो सरकारी भवन निर्माण परियोजनाओं के लिए एक समग्र मार्गदर्शिका का कार्य करेगा। मंत्री श्री सिंह ने पीएम गति शक्ति पोर्टल आधारित रोड नेटवर्क मास्टर प्लान के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
मंत्री श्री सिंह ने कहा कि सड़कों, पुलों और भवनों का वास्तविक आधार प्रशिक्षित एवं सक्षम मानव संसाधन होता है। इसी उद्देश्य से विभाग ने राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ मिलकर एक वर्ष का प्रशिक्षण कैलेंडर तैयार किया है, जिसमें प्रत्येक त्रैमास के लिए सड़क, पुल, भवन, पर्यावरण और नवीन तकनीकों जैसी थीम निर्धारित की गई हैं। उन्होंने बताया कि विभाग ने 10 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले भवनों को ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुरूप निर्मित करने के निर्देशों के पालन में त्वरित कार्रवाई करते हुए अभियंताओं को इस विषय पर प्रशिक्षण देना प्रारंभ कर दिया है, जो विभाग की सकारात्मक कार्य संस्कृति का उदाहरण है। मंत्री श्री सिंह ने बताया कि लोक निर्माण विभाग के कार्यों के लिए ट्री शिफ्टिंग की एक कार्यशाला भी बहुत जल्द आयोजित की जाएगी। भास्कराचार्य संस्थान ने लोक निर्माण विभाग के 500 से अधिक लोक कल्याण सरोवरों की कार्य योजना तैयार कर ली है। लोक निर्माण विभाग ने कार्यों का औचक निरीक्षण की शुरुआत की है, जिसे ओडिशा और राजस्थान जैसे राज्यों ने अपनाया है। लोक निर्माण तकनीक, पारदर्शिता और मानवीय संवेदनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है।
कार्यशाला में प्रशिक्षण कैलेंडर एवं प्रोजेक्ट मैनेजमेंट मैन्युअल का विमोचन किया गया तथा पी.एम.एस. पोर्टल-2.0 डिजिटल प्रबंधन प्रणाली को प्रेजेंटेशन के साथ लाँच किया गया। साथ ही, म.प्र. सड़क विकास निगम एवं म.प्र. भवन विकास निगम द्वारा सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआई) नई दिल्ली, इंडियन एकेडमी ऑफ हाईवे इंजीनियर्स (आईएएचई) नई दिल्ली,इंजीनियरिंग स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया (ईएससीआई), हैदराबाद, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) मुंबई तथा म.प्र. भवन विकास निगम द्वारा योजना तथा वास्तुकला विद्यालय भोपाल (एस.पी.ए.) के साथ एमओयू किये गये।
प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग श्री सुखबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में लोक निर्माण विभाग निरंतर अपनी योजनाओं को मूर्तरूप दे रहा है। लोक निर्माण मंत्री श्री सिंह ने अभियंताओं के प्रशिक्षण का नवाचार किया है। आज भवन निर्माण में बेहतर प्रबंधन के लिए कार्यशाला आयोजित की गई है। प्रदेश की अधोसंरचना में सड़क अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करती है। विकसित भारत@2047 के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी के निर्देशों के अनुसार मध्यप्रदेश में गांव-गांव तक सड़क और अधोसंरचनात्मक विकास के कार्य तेजी से पूर्ण किए जा रहे हैं। प्रशिक्षण अब हमारी गतिविधियों का अंग बन चुका है।
कार्यशाला में डॉ. विक्रांत सिंह तोमर ने “कैपेसिटी बिल्डिंग थ्रू इंस्पायर्ड लिविंग पर प्रेजेंटेशन दिया। राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट, आधुनिक भवन निर्माण तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण तथा निर्माण क्षेत्र में नवाचार जैसे विषयों पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
कार्यशाला में प्रशिक्षण कैलेंडर और परियोजना प्रबंधन पुस्तिका का विमोचन किया गया। साथ ही परियोजना प्रबंधन प्रणाली–2.0 (डिजिटल प्रबंधन प्रणाली) का प्रदर्शन कर उसका औपचारिक शुभारंभ किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक निर्माण विभाग के प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम पीएमएस 2.0 की लाँचिंग की। मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम एवं मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान, भारतीय राजमार्ग अभियंता अकादमी, इंजीनियरिंग स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया, आईआईटी मुंबई तथा स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर भोपाल जैसी राष्ट्रीय प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए गए। कार्यशाला में राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों ने क्षमता निर्माण, हरित भवन अवधारणा, आधुनिक निर्माण तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण और नवाचार जैसे विषयों पर मार्गदर्शन दिया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय शोधार्थी समागम (नेशनल रिसर्चर्स मीट) में की सहभागिता
12 Feb, 2026 07:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् के विज्ञान भवन में श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय शोधार्थी समागम (नेशनल रिसर्चर्स मीट) 2026 में शामिल हुए ।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि शोध अकादमिक गतिविधि मात्र नहीं, यह समाज और राष्ट्र की दिशा बदलने वाली शक्ति है। कोई भी शोध इतना उच्च कोटि का होना चाहिए जो हम सबकी सोच को एक नई दृष्टि, नई दिशा भी दे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे देश के विकास के लिए अपनी जिज्ञासा और रुचि के अनुसंधान क्षेत्रों में निर्भीक होकर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि जैसे आवश्यकता आविष्कार की जननी है, वैसे ही शोध विज्ञान और सभी वैज्ञानिक पद्धतियों का जनक है। मानवीय प्रज्ञा में जब वैज्ञानिक ज्ञान का समावेश हो जाता है, तब वह ‘प्रज्ञान’ का रूप ले लेती है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विज्ञान के विकास में ही देश का समग्र विकास निहित है। मध्यप्रदेश को शोध और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शोध समाज के विकास का आधार है और इसे आधुनिक, परिष्कृत तथा परिमार्जित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे परंपरागत धारणाओं तक सीमित न रहें, बल्कि नवीन विचारों और वैज्ञानिक दृष्टि के साथ ऐसे शोध प्रस्तुत करें, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकें।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शोध सिर्फ़ एक शैक्षणिक आवश्यकता नहीं, सामाजिक परिवर्तन और विकास का सशक्त माध्यम भी है। दुनिया के ज्ञान पर पश्चिम का प्रभाव पड़ा है। भारतीय संस्कृति भी इससे प्रभावित हुई। हमारी संस्कृति में एकल शोध की परंपरा कभी नहीं रही। शोध समाज आधारित होना चाहिए, जिसमें राष्ट्र के कल्याण की बात कही जाए। दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान राष्ट्रीय शोधार्थी समागम के माध्यम से देश के शोधार्थियों को नई दिशा प्रदान कर रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने "Mahakal: The master of time" वेबसाइट का शुभारंभ, महाकाल ब्रोशर सहित मैपकास्ट द्वारा आयोजित होने वाले "41वें मध्यप्रदेश युवा वैज्ञानिक सम्मेलन एवं विज्ञान उत्सव" के पोस्टर का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान द्वारा अनुसंधान परक लेखन पर आधारित सात पुस्तकों का भी विमोचन भी किया। राष्ट्रीय शोधार्थी समागम में देशभर से आए शोधार्थियों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों की सहभागिता रही। आगामी 14 फरवरी तक चलने वाले इस समागम में शोध, विज्ञान और नवाचार के विविध आयामों पर विमर्श होगा।
पूज्य आचार्य श्री मिथलेशनन्दिनीशरण महाराज ने कहा कि मध्यप्रदेश ने महाकाल की प्रतिष्ठा से विश्व को अवगत कराया है। हम दुनिया को सर्वस्व दे रहे हैं, क्योंकि हमारे पास महाकाल हैं। शोधार्थी एक प्रकार से बोधार्थी भी हैं, जो शोध हमें बोध तक न ले जाए, वो व्यर्थ है। मनुष्य का ज्ञान चिंतन आधारित है, न कि डाटा आधारित। डाटा का विश्लेषण करना तो मशीनों का काम है। हम पश्चिमी देशों से क्यों डरते हैं। पश्चिम की केवल आलोचना करने से कुछ नहीं होने वाला। हमें समग्र रूप से सभी दिशाओं में सोचते हुए शोध करना है। हमारे शोध को भारतीय संस्कृति और चरित्र मूलक होना चाहिए, प्रतिक्रिया पराणय न हो। कोई भी नया विचार नवाचार नहीं होता है। परंपराओं को अंगीकार करते हुए नया काम करना ही नवाचार है।
वरिष्ठ लेखक एवं चिंतक श्री सुरेश सोनी ने बीज वक्तव्य में कहा कि भारत के भौगोलिक स्वरूप में वेद आधारित सांस्कृतिक परिदृश्य नजर आता है। भारत के पुनरोत्थान के लिए पं. दीनदयाल उपाध्याय ने कहा था कि इसमें विदेशी मूल्यों का प्रकटीकरण नहीं होना चाहिए। भारत में पिछले 150 से 200 सालों में यूरोप आधारित अकादमिक शिक्षा व्यवस्थाएं लागू की गईं। अब हमारे शोधार्थी कला, संस्कृति, न्याय, अर्थव्यवस्था जैसे अन्य विषयों पर भारतीय शिक्षा पद्धति आधारित शोध पर कार्य करें। इसमें भारतीय समग्रता को भी ध्यान में रखा जाए। अभी हमारी चिकित्सा पद्धति भौतिक है। आयुर्वेद शास्त्र में महर्षि चरक कहते हैं कि किसी पदार्थ के 5 स्तर- स्थूल, स्वरूप, सूक्ष्म, अवयव और अर्थत्व होते हैं। भारतीय दृष्टि के आधार पर हमें अध्ययन करना है और पूर्व की व्यवस्थाओं को वर्तमान मे कैसे नवाचारों के साथ उसे उपयोग करें। शोध करते समय इसी पर ध्यान देना है।
भारतीय समाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष और भगवान बिरसा मुंडा जनजातीय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. मधुकर एस पड़वी ने कहा कि भारत के पुनरोत्थान के लिए हमारी सभ्यता और ज्ञान की पुन: प्रतिष्ठा करने की आवश्यकता है। हम अपने शोध कार्यों में किसी दूसरे देश की दृष्टि का अनुसरण न करें और स्वदेशी दृष्टि को अपनाएंगे। अनुसंधान व्यक्तिगत न होकर सहयोगात्मक होना चाहिए।
उच्च शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान ने इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय शोधार्थी समागम में देशभर के शोधार्थी शामिल हुए हैं। यह आयोजन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भारत केंद्रित परंपरा, संस्कृति और विरासत के शोध को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत @2047 का संकल्प लिया गया है। भारत केंद्रित शोध और शिक्षा के माध्यम से हम पुन: विश्व गुरू बनेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वानिकी सम्मेलन एवं आई.एफ.एस. मीट का किया शुभारंभ, वन विभाग का आई.एफ.एस. थीम सॉन्ग किया लॉन्च
31 Jan, 2026 05:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को आरसीव्हीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी में वानिकी सम्मेलन एवं आई.एफ.एस. मीट-2026 का शुभारंभ किया । मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन विभाग के आई.एफ.एस. थीम सॉन्ग तथा उसके वीडियो प्रसारण का लोकार्पण भी किया।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के वन विभाग की गतिविधियों और प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों की पुनर्स्थापना वन विभाग की दक्षता से ही संभव हो पाया है। चंबल में घड़ियाल और नर्मदा जी में मगरमच्छ स्वछंद विचरण के लिये छोड़ने का अनुभव अद्भुत रहा। वन वन्य जीव और क्षेत्रीय रहवासियों के बीच सह अस्तित्व की भावना का विकास वन विभाग की सेवाओं से ही संभव हो पाया। राज्य सरकार असम से वन्य जीवों को लाने के लिए प्रयास कर रही है। वन्य जीवों के संरक्षण में प्रदेश की जल संरचनाओं की भी बड़ी भूमिका है। वन विभाग की गतिविधियों का विस्तार नभ, थल, जल सभी ओर है। आईएफएस मीट प्रोफेशनल संवाद के साथ ही पारिवारिक आतमीयता और सहयोगी संबंधों को मजबूत करने का भी अवसर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्ति अधिकारी और प्रदेश के पूर्व पीसीसीएफ श्रद्धेय डॉ. पी.बी. गंगोपाध्याय को प्रदेश के वनों की सुरक्षा और बेहतरी में उनके योगदान के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड-2026 प्रदान किया। यह अवार्ड डॉ. गंगोपाध्याय की पत्नी श्रीमती गौरी गंगोपाध्याय ने प्राप्त किया। कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री श्री दिलीप सिंह अहिरवार, अपर मुख्य सचिव श्री अशोक बर्णवाल एवं वन अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रदेश में आईएएस, आईपीएस एवं अब आईएफएस मीट का आयोजन एक सराहनीय प्रयास है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से विभाग के वर्तमान अधिकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों से बहुत कुछ सीखते हैं। भारतीय संस्कृति में वनों के साथ हमारा विशेष संबंध है। सनातन संस्कृति के 4 आश्रमों की व्यवस्था में गृहस्थ के बाद हम वानप्रस्थ आश्रम में वनों की महत्ता को समझते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे वन अधिकारी-कर्मचारी जंगलों के आसपास रहने वाले ग्रामीण परिवारों के लिए एक प्रकार से सहयोगी और मार्गदर्शन के रूप में भी काम करते हैं। वन विभाग के अधिकारी वनग्रामों के लिए सभी जरूरी सुविधाओं का ध्यान रखते हैं। प्रदेश में वन्य जीवों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय अभयारण्य के कोर एरिया और बफर जोन के बीच तार फेंसिंग की शुरुआत सराहनीय है। इससे वन्य जीवों के साथ रहवासियों को भी सुरक्षित वातावरण मिलेगा। प्रदेश सरकार वन विभाग के अधिकारियों के कल्याण के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री वी.एन. अंबाडे ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा शुरू की गई अविरल नर्मदा योजना के अंतर्गत नर्मदा बेसिन में 5000 हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में नदी पुनर्भरण एवं पौध-रोपण के कार्य किए जा रहे हैं। पिछला वर्ष मध्यप्रदेश वन विभाग के लिए सामुदायिक सहभागिता की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है। विभाग द्वारा प्रति वर्ष 5 करोड़ से अधिक पौधों का रोपण किया जाता है। रातापानी अभयारण्य को डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर के नाम पर टाइगर रिजर्व घोषित किया गया है। आने वाले वर्षों में वन संरक्षण एवं पौधारोपण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। वन विभाग के फॉरेस्ट गार्ड श्री जगदीश अहिरवार के प्रयास को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में सराहा है। उन्होंने 125 दुर्लभ वन औषधियों का संकलन करने का कार्य किया है। पर्यावरण संरक्षण को समाज के प्रयासों के साथ भी जोड़ा जा रहा है। मध्यप्रदेश के वन हमारी राष्ट्रीय धरोहर है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कृषक कल्याण वर्ष के लिए सभी कमिश्नर्स-कलेक्टर्स को दिए निर्देश, किसानों के कल्याण के लिए मिशन मोड में करें काम
31 Jan, 2026 05:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से प्रदेश के सभी कमिश्नर्स-कलेक्टर्स को संबोधित किया । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जो हम सबके अन्नदाता हैं, उनके दुख-दर्द की चिंता करना हमारा कर्तव्य है। किसानों का समग्र कल्याण राज्य सरकार की प्राथमिकता है। यह सरकार के लिए एक मिशन है। सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया है। किसानों का जीवन संवारने और इनकी बेहतरी के लिए पूर्ण समर्पित भाव से मिशन मोड में कृषक कल्याण वर्ष का बेहद प्रभावकारी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष के दौरान किसानों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। किसान रथ चलाये जाएं। इनका शुभारंभ स्थानीय सांसद/विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधियों से ही कराएं। उन्होंने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में किसानों से विभिन्न स्थानों पर को निरंतर संवाद करें। उन्हें ग्रीष्मकालीन मूंग के स्थान पर अधिकाधिक रकबे/मात्रा में मूंगफली और उड़द की फसल लेने के लिए प्रोत्साहित करें। प्राकृतिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहित करें। जलवायु, ऊर्जा एवं सतत् कृषि को बढ़ावा देने के लिए ई-विकास पोर्टल एवं किसानों को संतुलित मात्रा में भी उर्वरकों का उपयोग के लिए जागरूक किया जाए। आकांक्षी जिलों में चल रही प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना से अधिकाधिक किसानों को लाभान्वित किया जाए। दलहनी और तिलहनी फसलों का उत्पादन क्षेत्र बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करें।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में कृषि आधारित उद्योगों के विकास के लिए हर जरूरी प्रयास किए जाएं। कृषि से जुड़े विभागों और इस क्षेत्र में प्रगतिशील स्वयं सेवी संगठनों एवं संस्थाओं के साथ मिलकर किसानों के कल्याण के लिए सरकार हर जरूरी कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष मनाने में किसान कल्याण एवं कृषि विकास के नेतृत्व में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन एवं डेयरी, मत्स्य पालन, जल संसाधन, सहकारिता, ऊर्जा, राजस्व, वन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, कुटीर एवं ग्रामोद्योग सहित 15 से अधिक विभाग सक्रिय भूमिका निभायेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी कलेक्टर्स अपने-अपने जिले में पराली/नरवाई जलाने की घटनाओं पर सख्ती से अकुंश लगाएं। अपने-अपने जिले का नरवाई प्रबंधन प्लान बनाएं। खेतों से निकलने वाली पराली/भूसे का समुचित उपयोग होना चाहिए। फसलों के अवशेष से गोबर से कंपोजिट बायोगैस संयंत्रों की स्थापना की जाए। सभी कलेक्टर्स यह तय करें कि किसानों द्वारा खेत से निकली पराली और भूसा निकटतम छोटी-बड़ी गौशालाओं में ही पहुंचाया जाए। इससे गौवंश को लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने सभी कलेक्टर्स से कहा कि वे अपने जिले में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए समन्वित प्रयास करें। पशुपालकों को नस्ल सुधार, पशु पोषण एवं पशु स्वास्थ्य पर ध्यान देने से होने वाले आर्थिक लाभों के बारे में जागरूक करें। मत्स्य बीज उत्पादन के लिए जिला स्तर पर अधिकाधिक मत्स्य प्रक्षेत्र विकसित किए जाएं। हर नगरीय निकाय क्षेत्र में फिश पार्लर स्थापित किए जाएं और यह सुनिश्चित करें कि मछली विक्रेता तय फिश पार्लर/मार्केट में ही मछली बेंचे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के नगरीय निकायों में फिश पार्लर बनाये जायेंगे। इसके लिए पृथक से राशि दी जाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कलेक्टर्स किसानों से लगातार संवाद करते रहें। कृषक कल्याण वर्ष की तय गतिविधियों की नियमित रूप से मॉनिटरिंग करें। रोस्टर तैयार कर कृषि उपज मंडियों का सतत् निरीक्षण करें और कृषि उत्पादों पर विपणन पर विशेष ध्यान देकर इनके मूल्य संवर्धन के लिए पूरी कमर्शियल चेन का निर्माण करें।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि के लिए विभाग को नवाचार अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पशुपालकों को दुग्धोत्पादन बढ़ाने के सभी नए-नए तरीके और उपाय बताएं जाएं। प्रमुख सचिव पशुपालन ने बताया कि पशुपालकों के ज्ञान संवर्धन के लिए एक ऐप तैयार किया जा रहा है। यह ऐप पशुपालकों को बताएगा कि दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए किस प्रकार की गाय/भैंस को कैसा आहार खिलाना चाहिए। इससे पशुपालक सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर्स को निर्देशित करते हुए कहा कि कृषक कल्याण वर्ष के लिये तय की गई कार्य योजना का फील्ड में बेहतर तरीके से अमल किया जाए। इस अवधि में विशेष अभियान चलाया जाए। छोटे-बड़े कार्यक्रम भी किए जाएं। निचले स्तर पर किसानों से सघन सम्पर्क स्थापित किया जाए। सभी हितग्राहियों का सत्यापन एवं सहयोग भी लिया जाए। नए हितग्राहियों का चयन भी इस दौरान किया जाए। प्रचलित सभी योजनाओं, नीति-नियम एवं निर्देशों का सरलीकरण एवं सुधार की कार्यवाही की जाए। विभाग या संस्था की जरूरत के अनुसार नई योजना या कार्यक्रम भी इस दौरान प्रारंभ किए जाएं। विभिन्न प्रकार की नवाचारी गतिविधियां भी की जाएं। कृषि सेक्टर के विकास के लिए नए वित्तीय स्त्रोतों जैसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी), पुनर्घत्वीकरण एवं कार्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर फंड) का उपयोग भी किया जाए। केन्द्र सरकार की किसान हितैषी योजनाओं से अनुदान या मंजूरी पाने के लिए भी कृषक कल्याण वर्ष में विशेष प्रयास किए जाएं।
मुख्यमंत्री ने कृषक कल्याण वर्ष में होने वाली मासिक गतिविधियों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि फरवरी के पहले सप्ताह में डिंडोरी जिले में कोदो-कुटकी का बोनस वितरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। प्रदेश के 16 से अधिक जिलों में कोदो-कुटकी उत्पादन होता है। वर्ष 2025 में 2800 टन कोदो-कुटकी की शासकीय खरीदी की गई है। दूसरे सप्ताह में गुलाब महोत्सव आयोजित होगा। तीसरे सप्ताह में शत-प्रतिशत किसानों के आईडी पंजीयन तथा किसान उन्मुखी योजनाओं के एग्रीस्टैक से एकीकरण के लिए निमाड़ क्षेत्र के किसी जिले में राज्यस्तरीय एग्रीस्टैक एवं डिजिटल कृषि प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। इसी तरह इस माह के अंतिम सप्ताह में कृषि मंथन के नाम से अलग-अलग जिलों में दो बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मार्च में राज्यस्तरीय सहकारिता सम्मेलन के जरिए किसानों को नये कृषि ऋण देने के अलावा कृषक न्याय मित्र योजना के अंतर्गत लाभान्वित किया जाएगा। इस सम्मेलन से जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों के जरिए किसानों को डोर स्टेप बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने की शुरुआत भी की जाएगी।
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