ढोंगी बाबा के जाल में फंसे भाई, नाशिक में ठगी का खुलासा
महाराष्ट्र। महाराष्ट्र के नाशिक में अंधविश्वास और ढोंगी तांत्रिकों के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच एक बेहद चौंकाने वाली धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। यहाँ आश्रम और मठ की आड़ में लोगों की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करने वाले कथित बाबा कमलेश शिवकुमार अधिकारी और उसकी पत्नी के खिलाफ इंदिरानगर पुलिस स्टेशन में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। दोनों पर संकट में घिरे दो सगे भाइयों को डराकर लाखों रुपये ऐंठने और उनका मानसिक व शारीरिक शोषण करने का आरोप है।
दुख और मानसिक तनाव का उठाया फायदा, डराकर की ठगी
पीड़ित दोनों भाई सोलापुर जिले के रहने वाले हैं। साल 2021 में महज एक महीने के भीतर उनके माता-पिता का निधन हो गया था, जिससे वे गहरे मानसिक तनाव और डर में जी रहे थे। इसी दौरान उन्होंने यूट्यूब (YouTube) पर नाशिक के पाथर्डी फाटा क्षेत्र के रहने वाले कथित बाबा कमलेश अधिकारी का वीडियो देखा और मदद के लिए उसके पास पहुंचे। आरोप है कि बाबा ने उनकी इस कमजोरी का फायदा उठाकर उनके दिमाग को पूरी तरह वश में कर लिया। उसने दावा किया कि परिवार पर "पिछले जन्म का पाप" और "दैवीय दोष" है, जिसके कारण उनके माता-पिता की जान गई और अब उन दोनों भाइयों पर भी मौत का साया मंडरा रहा है।
श्मशान में अघोरी पूजा, पशु बलि और प्रसाद में दी शराब
तांत्रिक ने पीड़ितों को झांसा दिया कि उनकी पैतृक जमीन पर भारी गुप्त धन छिपा है, जिसे अतृप्त आत्माओं ने घेर रखा है। इसके बाद उसने दोनों भाइयों को मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित श्मशान घाट बुलाया, जहाँ डरा-धमकाकर अघोरी पूजा करवाई गई। इस कथित अनुष्ठान के दौरान पशुओं की बलि दी गई और पूजा के नाम पर डेढ़ लाख रुपये ऐंठे गए। इसके बाद नांदगांव तालुका के पिंपलखेड आश्रम में भी इसी तरह का अंधविश्वास का खेल खेला गया, जहाँ दोनों भाइयों को जबरन प्रसाद के रूप में शराब पिलाई गई।
जमीन हड़पी, त्र्यंबकेश्वर आश्रम में बंधक बनाकर कराया घरेलू काम
जुर्म और ठगी का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। पीड़ितों का आरोप है कि कमलेश अधिकारी ने उन्हें त्र्यंबकेश्वर स्थित अपने आश्रम में जबरन कैद (बंधक) कर लिया और उनसे नौकरों की तरह घरेलू काम करवाए। यही नहीं, बाबा ने संस्था का मठ बनाने के बहाने झांसा देकर दोनों भाइयों की बेशकीमती दो एकड़ जमीन भी चालाकी से अपने नाम ट्रांसफर करवा ली।
अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की मदद से पुलिस तक पहुंचा मामला
इस लगातार हो रहे अत्याचार और शोषण से तंग आकर दोनों भाइयों ने किसी तरह नाशिक की 'अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति' से संपर्क किया और अपनी आपबीती सुनाई। समिति के पदाधिकारियों की सक्रियता के बाद मामला पुलिस के पास पहुंचा। इंदिरानगर थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी कमलेश अधिकारी और उसकी पत्नी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और इस रैकेट से जुड़े अन्य पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है।
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