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हिसार में तापमान 2.3 डिग्री तक पहुंचा, हरियाणा में शीतलहर के साथ बारिश की संभावना
3 Jan, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिसार/पानीपत। पहाड़ों पर हो रही लगातार बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों पर ज्यादा दिख रहा है। सुबह के समय कोहरा छाने और ठंडी हवाएं चलने से रात का तापमान तेजी से नीचे आया है। प्रदेश में हिसार के बालसमंद का न्यूनतम तापमान 2.3 डिग्री तक पहुंच गया। यह प्रदेश में सबसे ठंडा क्षेत्र रहा।
अब आने वाले दिनों में सुबह और शाम को कोहरा छाने के साथ ही नया पश्चिमी विक्षोभ एक्टिव होगा। इससे वर्षा होने की संभावना रहेगी। मौसम में परिवर्तन के चलते मौसम विज्ञानियों की तरफ से रात के तापमान में गिरावट की संभावना व्यक्त की हुई है। उत्तर व उत्तर पश्चिमी हवाओं से तापमान नीचे भी गिरा है।
उसी के चलते हिसार का बालसमंद सबसे ठंडा रहा। इसके अलावा हिसार शहर का न्यूनतम तापमान 5.8 डिग्री तक पहुंच गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में प्रदेश में हल्की वर्षा के आसार बने हुए है।
वहीं एचएयू के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के आंशिक प्रभाव से 3 जनवरी से हवाओं में बदलाव जिससे उत्तर पूर्वी हवाएं चलने की संभावना से राज्य में 3 से 6 जनवरी के दौरान मौसम आमतौर पर परिवर्तनशील रहने तथा बीच बीच में आंशिक बादलवाई रहने की संभावना है।
मैदानी इलाकों में पाला जमने लगा है। सर्दी चरम पर है। इस कड़ाके की ठंड में हिसार के साउथ बाईपास रोड पर सड़क किनारे कंटीली तारों पर जमी ओस की बूंदे जैसे चमकते मोती। l गुलशन बजाज
ठंड से जनजीवन पर असर
पहाड़ों में लगातार बर्फबारी हो रही है, जिससे उत्तर पश्चिमी हवाएं चलने से मैदानी क्षेत्र ठिठुर रहे हैं। वीरवार को सिरसा का न्यूनतम तापमान 3.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। नारनौल में भी 4.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
पहाड़ों की ठंड हवा के जरिये मैदानों में उतरने से जनजीवन पर असर पड़ना शुरू हो गया है। बीते पांच दिन से धूप नहीं निकली है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 8-10 दिनों में उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ तेजी से एक के बाद एक सक्रिय होंगे।
जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के ऊंचे पहाड़ सफेद चादर में ढक गए हैं, उत्तर-पश्चिमी हवा मैदानी क्षेत्र में ठंड लेकर पहुंचेगी।वर्तमान में एक पश्चिमी विक्षोभ जम्मू-कश्मीर पर बने चक्रवाती परिसंचरण के रूप में सक्रिय है। हालांकि, इसका असर ज्यादातर पहाड़ी क्षेत्रों तक ही सीमित रहेगा।
मैदानी क्षेत्रों में बदलेगी हवा
पहाड़ों पर मौसम गतिविधि बढ़ने के कारण मैदानी क्षेत्रों में हवा का पैटर्न बदल जाएगा। पहाड़ों की ढलानों पर ठंड की स्थिति कुछ समय के लिए थम जाएगी और पूर्व से आने वाली हवाएं प्रभावी होंगी।
इससे उत्तरी मैदानी क्षेत्रों में रात का तापमान बढ़ जाएगा। फिर भी, तापमान सिंगल डिजिट के आसपास रहेगा और कभी-कभी दो अंकों को छू भी सकता है।
आधार कार्ड के बिना CET में रजिस्ट्रेशन पर 1000 रुपये की फीस, विपक्ष ने किया विरोध
3 Jan, 2025 01:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी भर्तियों के लिए सामान्य पात्रता परीक्षा (सीईटी) के संशोधित नियमों पर भी विवाद खड़ा हो गया है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि आधार और परिवार पहचान पत्र वाले सामान्य वर्ग के युवाओं के लिए रजिस्ट्रेशन शुल्क 500 रुपये और आधार-पीपीपी नहीं होने पर शुल्क एक हजार रुपये रखा गया है, जो तर्कसंगत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट आधार कार्ड की अनिवार्यता को समाप्त कर चुका है तो प्रदेश सरकार किस आधार पर अलग-अलग फीस निर्धारित कर रही है।
सुरजेवाला ने कहा कि संशोधित पॉलिसी में अभ्यर्थियों की कोई तर्कपूर्ण बात नहीं मानी गई। सीईटी पास करने वाले सभी युवाओं को ग्रुप सी व ग्रुप डी की नौकरियों में भर्ती होने का मौका मिलना चाहिए। पदों की संख्या से केवल 10 गुणा उम्मीदवारों को बुलाने का नियम गलत है।
अगर किसी युवा ने कड़ी मेहनत व सालों के इंतजार के बाद सीईटी पास कर लिया तो उसे चयन प्रक्रिया में हिस्सा लेने से क्यों रोका जा रहा है। सरकार ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि जो 10 गुना युवा चयन प्रक्रिया में बुलाए जाएंगे, वे पदों से 10 गुना होंगे या कैटेगरी की कुल पोस्ट के 10 गुना होंगे।
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि तकनीकी और मेडिकल पदों को सीईटी में शामिल नहीं किया जा सकता क्योंकि इन भर्तियों का सिलेबस व मापदंड दूसरी भर्तियों से बिल्कुल अलग होता है। टेक्निकल व नॉन-टेक्निकल भर्तियों को समान दृष्टि से नहीं आंका जा सकता। फिर भी सीईटी में टेक्निकल भर्तियों को शामिल कर दिया गया है। पॉलिसी में खामियों के चलते भर्तियां फिर अदालती पचड़ों में फंस सकती हैं।
पीएम मोदी करेंगे परीक्षा पर चर्चा
वार्षिक परीक्षाओं में विद्यार्थियों को सफलता का मंत्र देने के लिए हर वर्ष प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम का आयोजन करते हैं। शैक्षणिक सत्र 2024-25 में भी प्रधानमंत्री परीक्षा पर चर्चा के दौरान विद्यार्थियों से सीधा संवाद करेंगे और उनके सवालों का जवाब देंगे।
इसी कड़ी में शिक्षा विभाग की ओर से प्रदेशभर से विद्यार्थी व उनके अभिभावकों के साथ अध्यापकों को आनलाइन प्रतियोगिता में पंजीकरण करने की मुहिम शुरू की थी।
मगर अध्यापक परीक्षा पर चर्चा के दौरान आनलाइन प्रतियोगिता में पंजीकरण के लिए दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। अध्यापकों की उदासीनता पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने नाराजगी जाहिर की है।
दक्षिण अमेरिकी देश चिली में महसूस किए भूकंप के झटके
3 Jan, 2025 01:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। दक्षिण अमेरिकी देश चिली में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, चिली के स्थानीय समय के मुताबिक यहां 6.1 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि भूकंप के कारण चिली के प्रभावित क्षेत्र में कितना नुकसान हुआ है।
यूरोपीय-भूमध्यसागरीय भूकंप विज्ञान केंद्र (EMSC) के मुताबिक एंटोफगास्टा, चिली में 6.1 तीव्रता का भूकंप आया। ईएमएससी ने बताया कि भूकंप का केंद्र 104 किलोमीटर (64.62 मील) की गहराई पर था।
बता दें कि इतिहास में अब तक सबसे ज्यादा तीव्रता का भूकंप चिली में ही दर्ज किया गया है।
चिली भूकंप-प्रवण देशों में से एक है, जहां प्लेट टेक्टॉनिक्स के कारण अक्सर भूकंप आते रहते हैं। इतिहास में यहां कई भीषण भूकंप दर्ज किए गए हैं। 1960 में वल्डिविया में आया 9.5 तीव्रता का भूकंप अब तक का सबसे बड़ा भूकंप माना जाता है। इसी प्रकार, 2010 में कोंसेप्सियन में आए 8.8 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी।
चिली सरकार और आपदा प्रबंधन एजेंसियां स्थिति पर कड़ी नजर रख रही हैं। स्थानीय स्तर पर राहत और बचाव दलों को तैनात कर दिया गया है। नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर बने रहने, अनावश्यक यात्रा न करने और सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
दक्षिणी कैलिफोर्निया में बड़ा हादसा, व्यावसायिक इमारत पर गिरा विमान
3 Jan, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। दक्षिणी कैलिफोर्निया में एक छोटा विमान एक व्यावसायिक इमारत की छत से टकरा गया। इस हादसे में 2 लोगों की मौत हो गई और 18 लोग घायल हुए हैं। इस घटना की जानकारी पुलिस ने दी है।
फुलर्टन पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि पुलिस को गुरुवार को दोपहर 2.09 बजे ऑरेंज काउंटी के फुलर्टन शहर में हुए विमान हादसे की सूचना मिली।
दमकलकर्मियों और पुलिस ने तुरंत घटनास्थल पर पहुंचकर आग पर काबू पाया और आस-पास के व्यवसायों को खाली कराया। आग ने एक गोदाम को नुकसान पहुंचाया जिसमें सिलाई मशीनें और कपड़ा स्टॉक रखा हुआ था।
विमान हादसे में हुई दो लोगों की मौत
प्रवक्ता ने बताया कि अभी यह पता नहीं चल पाया है कि यह किस प्रकार का विमान था और जो लोग घायल हुए हैं वो विमान में थे या जमीन पर।
बता दें कि फुलर्टन लॉस एंजिल्स से लगभग 40 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में लगभग 1,40,000 लोगों का शहर है।
रिपोर्ट के अनुसार, नौ लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि शेष पीड़ितों का मौके पर ही इलाज किया गया और उन्हें छुट्टी दे दी गई। यह दुर्घटना कैलिफोर्निया के फुलर्टन में रेमर एवेन्यू के 2300 ब्लॉक में हुई।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
संघीय उड्डयन प्रशासन ने विमान की पहचान सिंगल-इंजन वैन के आरवी-10 के रूप में की है। ऑरेंज काउंटी के कुछ हिस्सों का प्रतिनिधित्व करने वाले अमेरिकी प्रतिनिधि लू कोरेया ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया कि विमान एक फर्नीचर निर्माण इमारत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।
बता दें कि दुर्घटना फुलर्टन म्यूनिसिपल एयरपोर्ट के पास हुई, जो डिज्नीलैंड से लगभग 6 मील की दूरी पर स्थित है। सामान्य विमानन सेवा प्रदान करने वाले इस एयरपोर्ट में एक ही रनवे और हेलीपोर्ट है। यह आवासीय पड़ोस, वाणिज्यिक गोदामों और पास की मेट्रोलिंक ट्रेन लाइन से घिरा हुआ है।
उड़ान भरने के तुरंत बाद क्रैश हुआ प्लेन
पास के व्हील निर्माता रुची फोर्ज के कैमरे के फुटेज में एक भयंकर विस्फोट और काले धुएं का एक बड़ा गुबार कैद हुआ है।
इससे पहले नवंबर में, एक और चार सीटों वाला विमान उड़ान भरने के तुरंत बाद आपातकालीन लैंडिंग का प्रयास करते हुए हवाई अड्डे से आधा मील दूर एक पेड़ से टकरा गया था। ऑरेंज काउंटी रजिस्टर के अनुसार, विमान में सवार दोनों व्यक्तियों को मामूली चोटें आईं।
राष्ट्रपति यून सुक येओल को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस, घर के बाहर समर्थकों का प्रदर्शन
3 Jan, 2025 12:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दक्षिण कोरिया के निलंबित राष्ट्रपति यून सुक येओल को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस अधिकारी शुक्रवार को उनके आवास पर पहुंचे। अधिकारियों ने यून से गिरफ्तारी वारंट को निष्पादित करने की मांग की। राष्ट्रपति यून सुक येओल के घर के बाहर प्रदर्शनकारियों की भीड़ जमा हो गई है और यून सुक येओल के समर्थन में नारेबाजी कर रही है। यून के समर्थक उनकी गिरफ्तारी को रोकने का प्रयास कर रहे हैं।
यून सुक को सत्ता से निलंबित कर दिया गया था
दक्षिण कोरिया, एशिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। राष्ट्रपति यून सुक येओल पर तीन दिसंबर को मार्शल लॉ लागू करने के फैसले पर महाभियोग लगाया गया था और सत्ता से निलंबित कर दिया गया। वहीं, संयुक्त जांच मुख्यालय की तरफ से निलंबित किए गए राष्ट्रपति यून सुक योल के लिए गिरफ्तारी वारंट और तलाशी वारंट जारी किया गया था।
दक्षिण कोरिया के मौजूदा राष्ट्रपति की यह पहली गिरफ्तारी होगी
स्थानीय मीडिया के अनुसार, दक्षिण कोरिया में किसी मौजूदा राष्ट्रपति के लिए जारी किया गया यह पहला गिरफ्तारी वारंट है। रॉयटर्स के अनुसार, उच्च रैंकिंग अधिकारियों के साथ ही भ्रष्टाचार जांच कार्यालय (सीआईओ) के अधिकारी भी जांचकर्ताओं की एक टीम में शामिल हैं। स्थानीयसमयानुसार सुबह सात बजे ही अधिकारी यून के परिसर के गेट पर पहुंच गए थे।
यून ने देश से माफी मांगी
यून ने मार्शल लॉ लगाने के अपने कदम पर देश से माफी मांगी थी और कहा था कि अपने राजनीतिक भविष्य के बारे में फैसला करने का अधिकार वह अपनी पार्टी पर छोड़ रहे हैं। विदित हो कि यून का राष्ट्रपति के रूप में कार्यकाल मई 2027 तक है। राष्ट्रपति यून द्वारा देश में मार्शल लॉ लगाकर पूरे विश्व को स्तब्ध कर दिया था। इसके बाद संसद और मंत्रिमंडल ने उसके खिलाफ प्रस्ताव पारित कर महज छह घंटे में मार्शल ला को निष्प्रभावी कर दिया था। लेकिन उसका देश और दुनिया में गलत संदेश गया था।
6 घंटे में वापस लेना पड़ा था फैसला
दक्षिण कोरिया में मार्शल लॉ का फैसला एक नाटकीय घटनाक्रम की तरह था।उन्होंने हमेशा की तरह विपक्ष पर सरकार को पंगु बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश का विपक्ष उत्तर कोरिया के एजेंडे पर काम कर रहा है। इसके बाद योल ने देश में मार्शल लॉ लगाने की घोषणा कर दी। उन्होने इसे देश की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया। वहीं, उन्होंने मार्शल लॉ का फैसला छह घंटे बाद वापस ले लिया।
पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद को जहर देकर मारने की कोशिश, अचानक बिगड़ तबीयत
2 Jan, 2025 04:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सीरिया से जान बचाकर परिवार समेत रूस भागने वाले पूर्व राष्ट्रपति बशर अल असद को जान से मारने की कोशिश की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, मास्को में बशर अल असद को ज़हर देकर उनकी हत्या का प्रयास किया गया है.
सीरिया में तख्तापलट के बाद से ही असद अपने परिवार के साथ मास्को में हैं. रूस जो कि मिडिल ईस्ट में लंबे समय से उनका अहम सहयोगी रहा है, लिहाज़ा राष्ट्रपति पुतिन ने असद परिवार को मॉस्को में संरक्षण दिया है और एक अपार्टमेंट में उनके रहने की व्यवस्था की गई है.
रिपोर्ट के मुताबिक, असद को उनके ही घर में मारने की कोशिश हुई, इसके सबूत जब सामने आए तो हड़कंप मच गया. सवाल उठ रहे हैं कि असद के खिलाफ साजिश रचने वाला आखिर कौन है? क्या सीरिया की नई सरकार असद को रास्ते से हटाना चाहती है या फिर इसके पीछे कोई और वजह है?
रूस के पूर्व जासूस का बड़ा दावा
असद पिछले साल 8 दिसंबर से मॉस्को में व्लादिमीर पुतिन के संरक्षण में है. लेकिन रूस के एक पूर्व शीर्ष जासूस की ओर से चलाए जा रहे ऑनलाइन अकाउंट जनरल SVR का कहना है कि बशर अल असद रविवार को बीमार हो गए थे.
इसमें दावा किया गया है कि 59 वर्षीय असद असद का दम घुट रहा था, बार बार खांसी आ रही थी. सूत्रों को मुताबिक टेस्ट के बाद असद के शरीर से जहरीले तत्व मिलने की खबर है, रिपोर्ट के अनुसार, अपार्टमेंट में ही इलाज के बाद सोमवार को असद की हालत स्थिर हो गई. हालांकि रूसी अधिकारियों की ओर से इसकी कोई पुष्टि नहीं की गई.
असद को जहर देने की ये है वजह?
बशर अल-असद को जहर किसने दिया इसका खुलासा फिलहाल नहीं हो सका है लेकिन पिछले महीने यह जानकारी सामने आई थी कि उनकी पत्नी अस्मा ब्रिटेन लौटना चाहती हैं लेकिन पासपोर्ट की वैधता खत्म होने के कारण वह लंदन वापस नहीं लौट पाएंगी.
इसके अलावा असद और उनकी पत्नी अस्मा के बीच वैवाहिक तनाव की बात भी कही जा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अस्मा गंभीर बीमारी से जूझ रहीं हैं और वह असद से तलाक लेना चाहती हैं. ऐसा माना जा रहा है कि असद को ज़हर देने और पत्नी के साथ वैवाहिक तनाव के बीच कोई कनेक्शन हो सकता है.
यूक्रेन ने रूस की गैस सप्लाई पर लगा दिया ब्रेक, जाने किसे होगा नुकसान?
2 Jan, 2025 04:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच कीव ने गैस सप्लाई से जुड़े ट्रांजिट समझौते पर फिर से बातचीत करने से इनकार कर दिया है. जिससे 1 जनवरी 2025 से यूरोपीय देशों में यूक्रेन के जरिए होने वाली रूसी गैस की सप्लाई पूरी तरह से रोक दी गई है.
कीव के इस फैसले से एक ओर यूरोपीय यूनियन के ऊर्जा बाजार में रूस का प्रभुत्व समाप्त हो गया है, वहीं कई यूरोपीय देशों में ऊर्जा संकट पैदा होने की आशंका है, खास तौर पर ऑस्ट्रिया, स्लोवाकिया और मोल्दोवा में, जो अपनी बिजली आपूर्ति के लिए इस ट्रांजिट रूट पर ही निर्भर थे.
रूसी ऊर्जा दिग्गज गैज़प्रोम ने बुधवार को कहा कि, ‘यूक्रेन की सरकारी तेल और गैस कंपनी Naftogaz की ओर से 5 साल के ट्रांजिट समझौते को रिन्यू करने से इनकार करने के बाद स्थानीय समयानुसार सुबह 8 बजे यूरोप को गैस सप्लाई रोक दी गई थी.
वहीं यूक्रेन के ऊर्जा मंत्री जर्मन गलुशेंको ने एक बयान में कहा कि, ‘हमने यूक्रेन के रास्ते से रूसी गैस की सप्लाई को रोक दिया है, यह एक ऐतिहासिक घटना है. उन्होंने कहा कि रूस अपना बाजार खो रहा है, उसे भारी नुकसान उठाना पड़ेगा. यूरोप ने पहले ही रूसी गैस को छोड़ने का फैसला कर लिया है.
गैस सप्लाई रुकने से किसे ज्यादा नुकसान?
जेलेंस्की ने 2019 में यूरोपीय देशों को गैस सप्लाई के लिए रूस-यूक्रेन के बीच हुई ट्रांजिट डील को रिन्यू करने से इनकार कर दिया है, यूक्रेनी राष्ट्रपति का मानना है कि ऐसा कर वह रूस से राजस्व छीन सकते हैं जिसका इस्तेमाल मॉस्को उनके देश के खिलाफ युद्ध को फंडिंग करने के लिए कर सकता है. कीव के इस कदम से जहां यूरोपीय यूनियन के ऊर्जा बाजार पर रूस का वर्चस्व खत्म हो जाएगा, तो वहीं पूर्वी यूरोप में ऊर्जा संकट पैदा होने की आशंका है.
यूरोपीय देश जैसे- ऑस्ट्रिया, स्लोवाकिया और मोल्दोवा अपनी बिजली आपूर्ति के लिए इस ट्रांजिट रूट पर ही निर्भर थे. ऑस्ट्रिया को यूक्रेन के जरिए रूस से अपनी अधिकांश गैस प्राप्त हो रही थी, जबकि स्लोवाकिया को सालाना लगभग 3 BCM गैस इस रूट से मिल रही थी, जो इसकी मांग का लगभग दो-तिहाई है.
यूरोप को कितनी गैस निर्यात कर रहा था रूस?
फरवरी 2022 में यूक्रेन पर मास्को के आक्रमण के बाद कई यूरोपीय देशों ने रूसी गैस पर अपनी निर्भरता कम करना शुरू कर दिया. 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण से पहले, रूस ने यूरोप के पाइपलाइन प्राकृतिक गैस निर्यात का करीब 35 फीसदी आपूर्ति की थी. लेकिन अब यह गिरकर करीब 8 फीसदी ही रह गया है.
1 दिसंबर तक यूरोपीय संघ को यूक्रेन के जरिए रूस से 14 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) से भी कम गैस प्राप्त हुई, जो 2020 में अनुबंध शुरू होने के समय सालाना 65 BCM से कम थी.
यूक्रेनी मीडिया ने यूक्रेनी बताया गया है कि ट्रांजिट डील के जरिए यूक्रेन की तुलना में रूस ने काफी अधिक कमाई की है. माकोहोन ने अनुमान लगाया कि रूस सालाना 5 बिलियन डॉलर कमा रहा था. हालांकि ब्लूमबर्ग के मुताबिक, इस सौदे से रूस की कमाई और भी अधिक यानी सालाना करीब 6.5 बिलियन डॉलर रही होगी.
यूक्रेनी प्रमुख मुताबिक यूरोप को गैस सप्लाई के लिए इस ट्रांजिट डील से यूक्रेन को सालाना 800 मिलियन डॉलर मिल रहे थे, लेकिन इस पैसे का अधिकांश हिस्सा ट्रांजिट पर ही खर्च किया जाता है. उन्होंने अनुमान लगाया कि इसके जरिए यूक्रेन के राजस्व में महज़ 100-200 मिलियन डॉलर ही मिलते हैं.
छात्रा की आत्महत्या के मामले में बड़ी कार्रवाई, कॉलेज संरक्षक का बेटा गिरफ्तार; फोन पर करता था परेशान
2 Jan, 2025 03:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भिवानी। छात्रा की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने गांव सिंघानी स्थित शारदा महिला कॉलेज के संरक्षक के बेटे राहुल को गिरफ्तार किया है। यह कॉलेज कांग्रेस विधायक राजबीर फरटिया का है और उनके साले हनुमान सिंह संरक्षक व शारदा शिक्षा समिति के सदस्य हैं।
डीएसपी ने कहा कि एसआईटी मामले की जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि राहुल छात्रा को परेशान करता था। बार-बार फोन करता था। छात्रा के आत्महत्या से पहले भी राहुल ने उसे फोन किए थे। उसका मोबाइल फोन कब्जे में ले लिया है। जांच के लिए लैब भेजा जाएगा और डिलीट डाटा रिकवर किया जाएगा।
राहुल पर साइबर क्राइम के तीन केस हैदराबाद, बहरोड़ में दर्ज हैं और जेल में भी जा चुका है। उसे आज को अदालत में पेश किया जाएगा। एसआईटी ने कॉलेज जाकर रिकॉर्ड कब्जे में ले लिया है। छात्रा के पिता ने आरोप लगाया था कि फीस नहीं भरने के कारण प्रिंसिपल ने बेटी को परीक्षा नहीं देने दी और कॉलेज से निकाल दिया।
संरक्षक का बेटा उसकी बेटी को गलत काम करने के लिए दबाव बना रहा था। हनुमान के भी संज्ञान में यह था और उसकी बेटी भी इसमें शामिल है। पुलिस ने हनुमान, राहुल, बेटी और प्रिंसिपल के खिलाफ मामला दर्ज किया था। महिला आयोग की चेयरपर्सन ने भी पुलिस अधीक्षक को कड़ी कार्रवाई के लिए पत्र लिखा था।
इस मामले में अभी तक मंत्रियों व भाजपा तथा कांग्रेस नेताओं के बीच बयानबाजी चल रही थी। कुमारी सैलजा और रणदीप सिंह सुरजेवाला ने छात्रा के आत्महत्या करने के मामले में राज्य सरकार पर सवाल उठाए थे। जिसके बाद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण बेदी ने पलटवार किया था।
वहीं, अब विपक्षी नेताओं के आरोपों पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जवाब दिया है। बुधवार को सीएम सैनी ने जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं को सोचना चाहिए कि उन्हीं की पार्टी के एक विधायक के इस कॉलेज में ऐसी स्थिति क्यों बनी। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टेटस रिपोर्ट प्राप्त की है। आरोपितों को बिना किसी देरी के गिरफ्तार करने के निर्देश दिए हैं।
एक व्यक्ति का गला दबाकर उतार मौत के घाट, जांच में जुटी पुलिस
2 Jan, 2025 03:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पलवल। हरियाणा में पलवल के चांदहट थाना क्षेत्र के चांट गांव में एक व्यक्ति की गला दबाकर हत्या कर दी गई। दयाचंद नाम के व्यक्ति की हत्या हुई है।
बताया गया कि मृतक की उम्र करीब 50 वर्ष थी। अभी हत्यारोपितों का पता नहीं लग पाया है। आरोपियों ने बुधवार देर रात में इस वारदात को अंजाम दिया। उधर, वारदात की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस सभी बिंदुओं पर गहनता से जांच कर रही है।
मोंटेनेग्रो के पश्चिमी शहर में व्यक्तिगत विवाद बना मौत का कारण, 10 की गई जान
2 Jan, 2025 12:57 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूरोपीय देश मोंटेनेग्रो के पश्चिमी शहर सेटिनजे में बुधवार को एक भयानक गोलीबारी की घटना में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई, जिसमें दो बच्चे भी शामिल हैं. वहीं चार अन्य घायल हो गए, जिनको अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस ने शूटर की पहचान 45 साल के एको मार्टिनोविच के रूप में की है, फिलहाल ये आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर है.
पुलिस ने बताया कि एको मार्टिनोविच ने सेटिनजे में गोलीबारी की. जिसमें बार मालिक, उनके बच्चे और आरोपी के कुछ परिजन मारे गए है. गोलीबारी के बाद मार्टिनोविच घटनास्थल से फरार हो गया. पुलिस ने राजधानी पाडगोरिका से लगभग 30 किलोमीटर दूर सेटिनजे में आरोपी को पकड़ने के लिए स्पेशल फोर्स तैनात किए हैं.
मोंटेनेग्रो के प्रधानमंत्री मिलोज्को स्पाजिक ने घायलों का हाल जानने के लिए अस्पताल का दौरा किया. इस दुखद घटना के मद्देनजर तीन दिन के शोक की घोषणा की. उन्होंने इसे एक भयानक त्रासदी बताते हुए कहा कि इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. वहीं देश के राष्ट्रपति जाकोव मिलाटोविच ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया.
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस घटना में 10 लोगों की मौत हुई है, हालांकि कुछ प्रारंभिक रिपोर्ट्स में सात मौतों का दावा किया गया था. टेलीविजन और अन्य मीडिया ने बताया कि गोलीबारी एक बार में हुए विवाद के कारण हुई. पुलिस ने बताया कि ये कोई गैंगवॉर की घटना नही है. बल्कि व्यक्तिगत विवाद का नतीजा है.
मामले में आगे की कार्रवाई
इस घटना ने सेटिनजे और पूरे मोंटेनेग्रो में गहरी चिंता पैदा कर दी है. पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी हुई है और घटना की जांच के लिए विशेष टीम का गठन किया गया है. आरोपी अभी तक पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया है. गोलीबारी की घटना के बाद से वो मौके से फरार हो गया था.
अमेरिका के न्यू ऑर्लियंस में आईएसआईएस के आतंकी ने किया हमला
2 Jan, 2025 12:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका के न्यू ऑर्लियंस में नए साल के पहले दिन हुए आतंकी हमले ने अमेरिका को हिला कर रख दिया. टेक्सास के रहने वाले 42 साल के शम्सुद्दीन जब्बार ने एक तेज़ स्पीड वाले पिकअप ट्रक से भीड़ को कुचल दिया. ये एक आईएसआईएस (ISIS) समर्थक था. इस हमले में 15 लोग मारे गए और 35 से ज्यादा लोग बुरी तरह से घायल हो गए. घटना के बाद पुलिस ने जब्बार को मार गिराया. एफबीआई ने उसकी कार से आईएसआईएस का झंडा और विस्फोटक बरामद किया.
इस हमले के ठीक बाद, लास वेगास में ट्रंप होटल के सामने एक टेस्ला साइबरट्रक में विस्फोट हुआ. राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि दोनों घटनाओं के बीच संभावित कनेक्शन की जांच की जा रही है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में अभी कुछ भी ठोस जानकारी नहीं है. डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति पद के शपथ लेने से ठीक पहले ट्रम्प टावर के सामने ट्रम्प के सहयोगी एलोन मस्क की टेस्ला कार में विस्फोटक से हमले ने आने वाले समय को लेकर आम अमेरिकियों को डरा दिया है.
जब्बार ह्यूस्टन की मस्जिद बिलाल में जाया करता था. इस मस्जिद ने अपने सदस्यों को निर्देश दिया है कि वे एफबीआई या मीडिया से बात न करें. इसके बजाय, उन्हें सीएआईआर और इस्लामिक सोसाइटी ऑफ ग्रेटर ह्यूस्टन (ISGH) से संपर्क करने को कहा गया है. मस्जिद प्रबंधन ने अपने बयान में कहा कि यह समय एकजुट रहने और इस तरह के गंदे कामों की निंदा करने का है. इस घटना के बाद अमेरिका में रहने वाले मुस्लिमों को भी यह चिंता सता रही है कि 9/11 हमले के बाद जैसा माहौल फिर ना शुरू हो जाए और निर्दोष लोगों को उसका शिकार होना पड़े. ट्रम्प समर्थकों ने न्यू ऑर्लियंस की घटना को राजनैतिक रंग देना शुरू भी कर दिया है.
एफबीआई की आगे की जांच की दिशा
एफबीआई को शक है कि जब्बार इस हमले के लिए अकेला जिम्मेदार नहीं था. उसके चार और सहयोगियों की तलाश की जा रही है. न्यू ऑर्लियंस के इस हमले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आईएसआईएस ने अमेरिका में नई रणनीति के तहत हमला किया है.
आईएसआईएस और अमेरिका के रिश्तों पर सवाल
एक और चिंताजनक पहलू यह है कि सीरिया में आईएसआईएस से जुड़े संगठन एचटीएस (HTS) को सत्ता दिलाने में अमेरिका ने मदद की है. अब आईएसआईएस के विचारधारा से प्रभावित लोग अमेरिकी जमीन पर आतंकी हमलों को अंजाम दे रहे हैं. अगर ISIS की अमेरिका में पैठ मजबूत हुई तो अमेरिका को आने वाले समय में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
संत चिन्मय कृष्ण दास की रिहाई पर कोर्ट ने सुनवाई के बाद दिया फैसला
2 Jan, 2025 12:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका (बांग्लादेश)। चटगाँव की एक अदालत ने आज कड़ी सुरक्षा के बीच हुई सुनवाई के बाद पूर्व इस्कॉन नेता चिन्मय कृष्ण दास को जमानत देने से इनकार कर दिया। इसकी जानकारी रिपोर्ट में दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के लगभग 30 मिनट बाद चटगाँव मेट्रोपॉलिटन सेशन जज मोहम्मद सैफुल इस्लाम ने जमानत याचिका खारिज कर दी।
अधिवक्ता अपूर्व कुमार भट्टाचार्य के नेतृत्व में कानूनी टीम बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने के आरोप से उत्पन्न राजद्रोह के मामले में चिन्मय का बचाव करेगी।
बात करते हुए वकील अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने कहा, हम ऐनजीबी ओइक्या परिषद के बैनर तले चटगाँव आए हैं और हम चिन्मय की जमानत के लिए अदालत में पैरवी करेंगे। मुझे चिन्मय से वकालतनामा पहले ही मिल चुका है। मैं सुप्रीम कोर्ट और चटगाँव बार एसोसिएशन दोनों का सदस्य हूँ, इसलिए मुझे केस चलाने के लिए किसी स्थानीय वकील की अनुमति की जरूरत नहीं है।
इससे पहले 3 दिसंबर 2024 को चटगांव अदालत ने जमानत पर सुनवाई के लिए 2 जनवरी की तारीख तय की थी क्योंकि अभियोजन पक्ष ने समय याचिका प्रस्तुत की थी और चिन्मय का प्रतिनिधित्व करने के लिए कोई वकील नहीं था।
बांग्लादेश में अशांति की शुरुआत चिन्मॉय कृष्ण दास के खिलाफ दर्ज किए गए राजद्रोह के आरोपों से हुई है, जिन पर 25 अक्टूबर को चटगांव में बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज के ऊपर भगवा झंडा फहराने का आरोप है।
25 नवंबर को उनकी गिरफ्तारी से विरोध प्रदर्शन भड़क उठे, जिसके कारण 27 नवंबर को चटगाँव न्यायालय भवन के बाहर उनके अनुयायियों और कानून प्रवर्तन अधिकारियों के बीच हिंसक झड़पों के रूप में हुई, जिसके परिणामस्वरूप एक वकील की मौत हो गई।
अतिरिक्त गिरफ़्तारियों के बाद स्थिति और भी खराब हो गई। इस्कॉन कोलकाता के अनुसार, दो साधुओं, आदिपुरुष श्याम दास और रंगनाथ दास ब्रह्मचारी को 29 नवंबर को हिरासत में लिया गया, जब वे हिरासत में चिन्मय कृष्ण दास से मिलने गए थे। संगठन के उपाध्यक्ष राधा रमन ने यह भी दावा किया कि दंगाइयों ने अशांति के दौरान बांग्लादेश में इस्कॉन केंद्र में तोड़फोड़ की।
विदेश मंत्रालय ने भी बांग्लादेश में बढ़ती हिंसा और चरमपंथी बयानबाजी पर चिंता व्यक्त की थी और इस बात पर जोर दिया था कि उसने ढाका के साथ अल्पसंख्यकों पर लक्षित हमलों के मुद्दे को लगातार उठाया है।
दिसंबर 2024 में बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीना सीकरी ने चिन्मय कृष्ण दास के बारे में एक खुला पत्र लिखा था। पत्र में कहा गया था, पूर्व में विश्व प्रसिद्ध इस्कॉन के साथ जुड़े चिन्मय कृष्ण दास ने सनातनी जागरण जोत में अपने सहयोगियों के साथ बांग्लादेश के धार्मिक अल्पसंख्यकों की ओर से 8 सूत्री मांग रखी थी, जिसमें बांग्लादेश में अल्पसंख्यक संरक्षण कानून बनाने, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए एक मंत्रालय, अल्पसंख्यक उत्पीड़न के मामलों की सुनवाई के लिए एक विशेष न्यायाधिकरण, जिसमें पीड़ितों के लिए मुआवजा और पुनर्वास शामिल है, मंदिरों को पुनः प्राप्त करने और उनकी सुरक्षा के लिए एक कानून (देबोत्तर), निहित संपत्ति वापसी अधिनियम का उचित प्रवर्तन और मौजूदा (अलग) हिंदू, बौद्ध और ईसाई कल्याण ट्रस्टों को फाउंडेशन में अपग्रेड करने की मांग की गई थी।
हमास-इजरायल युद्ध का असर: गाजा की आबादी में छह फीसदी की गिरावट
2 Jan, 2025 12:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अक्टूबर 2023 से हमास-इजरायल के बीच युद्ध चल रहा है। इसका खामियाजा आम लोगों को उठाना पड़ा है। वहीं, रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में गाजा की आबादी में छह फीसदी की गिरावट आई और लगभग 160,000 लोग कम हुए। हमास के खिलाफ इजरायल के युद्ध ने फिलिस्तीनी एन्क्लेव की जनसांख्यिकी पर भारी असर डाला है।
गाजा पट्टी में इजरायली हमलों में 45,553 लोग मारे गए
फलस्तीनी केंद्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (पीसीबीएस) ने मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा कि सात अक्टूबर, 2023 को युद्ध की शुरुआत के बाद से लगभग 100,000 फिलिस्तीनियों ने गाजा छोड़ दिया, इसके अलावा गाजा पट्टी में इजरायली हमलों में कम से कम 45,553 लोग मारे गए थे।
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि पर्याप्त स्वास्थ्य देखभाल की कमी के कारण गाजा में 60,000 गर्भवती महिलाएं खतरे में रहीं और 96 फीसदी आबादी उच्च स्तर की खाद्य असुरक्षा का सामना कर रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गाजा की आबादी अब 2.1 मिलियन है, जिसमें 18 वर्ष से कम उम्र के दस लाख से अधिक बच्चे शामिल हैं, जो आबादी का 47 फीसदी है।
इस बीच, इजरायल के केंद्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (सीबीएस) की एक अलग रिपोर्ट में पाया गया कि इजरायल की जनसंख्या अभी भी बढ़ रही है लेकिन पहले की तुलना में अधिक धीरे-धीरे, यह इसलिए हो रहा है क्योंकि बड़ी संख्या में इजरायलियों ने देश छोड़ दिया। मंगलवार को प्रकाशित रिपोर्ट में, जनगणना कार्यालय ने कहा कि 2024 में इजरायल की जनसंख्या 1.1 फीसदी बढ़ी, जबकि 2023 में 1.6 फीसदी बढ़ी।
साल के पहले दिन गाजा पर हमला
गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, उत्तरी गाजा के जबालिया इलाके में एक घर पर हवाई हमले में एक महिला और चार बच्चों समेत सात लोग मारे गए। एक दर्जन के करीब घायल हुए हैं। मध्य गाजा में रात के दौरान बुरेइज शरणार्थी शिविर में किए गए हमले में एक महिला और एक बच्चे की जान गई। जबकि बुधवार तड़के दक्षिणी शहर खान यूनुस में किए गए हवाई हमले में तीन लोग मारे गए।
बता दें कि सात अक्टूबर, 2023 को हमास ने इजरायल में बड़े पैमाने पर हमला किया था, जिसमें करीब 1200 लोग मारे गए थे। इसके बाद से ही इजरायल ने हमास के सफाए के लिए सैन्य अभियान चला रखा है। इसमें अब तक 45 हजार से ज्यादा फलस्तीनी मारे गए हैं।
इस यूरोपीय देश में बढ़ सकती हैं मुस्लिम महिलाओं की मुश्किलें, नए साल पर लागू हुआ बुर्का बैन
1 Jan, 2025 07:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
स्विट्जरलैंड: स्विट्जरलैंड में बुधवार यानी 1 जनवरी 2025 से बुर्का बैन लागू हो गया है। इस नए कानून के तहत सार्वजनिक जगहों पर चेहरा ढकना प्रतिबंधित होगा, वहीं इस नियम का उल्लंघन करने पर एक हजार स्विस फ्रैंक (करीब 96 हजार रुपये) तक का जुर्माना लग सकता है। स्विट्जरलैंड में 2021 में हुए जनमत संग्रह में पारित इस प्रतिबंध की मुस्लिम संगठनों ने आलोचना की थी। खास बात यह है कि बुर्का पर प्रतिबंध का प्रावधान उसी समूह ने पेश किया था जिसने 2009 में देश में नई मीनारों के निर्माण पर रोक लगाई थी।
बुर्का बैन को लेकर हुआ था जनमत संग्रह
2021 में हुए जनमत संग्रह के दौरान स्विट्जरलैंड की 51.21 फीसदी जनता ने इस प्रतिबंध के समर्थन में वोट दिया था। दक्षिणपंथी स्विस पीपुल्स पार्टी ने देश में बुर्का बैन का प्रस्ताव रखते हुए तर्क दिया था कि इससे देश के सांस्कृतिक मूल्यों और सार्वजनिक सुरक्षा की रक्षा होगी। इसके बाद साल 2022 में देश की नेशनल काउंसिल ने इस कानून को मंजूरी दे दी। जिसके अनुसार, सार्वजनिक स्थानों, कार्यालयों, दुकानों और रेस्तरां में महिलाओं के चेहरे को पूरी तरह से ढकने पर प्रतिबंध रहेगा।
बुर्का बैन को लेकर जनमत संग्रह हुआ था
2021 में हुए जनमत संग्रह के दौरान स्विट्जरलैंड के 51.21 प्रतिशत लोगों ने इस प्रतिबंध के समर्थन में मतदान किया था। दक्षिणपंथी स्विस पीपुल्स पार्टी ने देश में बुर्का प्रतिबंध का प्रस्ताव रखा था, जिसमें तर्क दिया गया था कि इससे देश के सांस्कृतिक मूल्यों और सार्वजनिक सुरक्षा की रक्षा होगी। इसके बाद साल 2022 में देश की राष्ट्रीय परिषद ने इस कानून को मंजूरी दे दी। जिसके अनुसार, सार्वजनिक स्थानों, कार्यालयों, दुकानों और रेस्तरां में महिलाओं के चेहरे को पूरी तरह से ढकने पर प्रतिबंध रहेगा।
किस-किस जगह बुर्का बैन में छूट है?
रॉयटर्स के अनुसार, स्विस सरकार ने बुर्का प्रतिबंध को लेकर स्पष्ट किया है कि चेहरा ढकने पर प्रतिबंध हवाई जहाज या राजनयिक और वाणिज्य दूतावास परिसर में लागू नहीं होगा। इसके अलावा धार्मिक स्थलों और अन्य पवित्र स्थानों पर भी व्यक्ति को चेहरा ढकने की अनुमति होगी।
सरकार ने यह भी कहा है कि स्वास्थ्य और सुरक्षा कारणों, पारंपरिक रीति-रिवाजों या मौसम की स्थिति के कारण चेहरा ढंकने की अनुमति दी जाएगी। उन्हें कलात्मक या मनोरंजन के साथ-साथ विज्ञापन उद्देश्यों के लिए भी यह मंजूरी दी जाएगी। बेल्जियम और फ्रांस में भी बुर्का प्रतिबंध लागू: सितंबर 2022 में स्विट्जरलैंड की संसद के निचले सदन ने कुछ मुस्लिम महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले बुर्का जैसे चेहरा ढंकने वाले कपड़ों पर प्रतिबंध लगाने के लिए मतदान किया था। राष्ट्रीय परिषद ने 29 मतों के मुकाबले 151 मतों से इस कानून को मंजूरी दी थी।
कई मुस्लिम संगठनों की आपत्तियों के बावजूद दक्षिणपंथी स्विस पीपुल्स पार्टी ने इस कानून को आगे बढ़ाया था। स्विट्जरलैंड ऐसा करने वाला पहला देश नहीं है, बल्कि यूरोप के बेल्जियम, डेनमार्क और फ्रांस जैसे देशों ने भी इसी तरह के प्रतिबंध लागू किए हैं। हालांकि, इन यूरोपीय देशों में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर कई बार सवाल उठ चुके हैं। आलोचकों का कहना है कि सार्वजनिक सुरक्षा के नाम पर बनाए गए इन कानूनों के जरिए मुस्लिम महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा है।
पाकिस्तान में आतंकी हमला, नए साल के पहले दिन दहला, 3 की मौत; 11 घायल
1 Jan, 2025 06:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पेशावर। पाकिस्तान के अशांत उत्तर-पश्चिम में बुधवार को तीन अलग-अलग आतंकी घटनाओं में एक बच्चे समेत कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और 11 अन्य घायल हो गए। पुलिस ने बताया कि रात करीब एक बजे खैबर पख्तूनख्वा के डेरा इस्माइल खान जिले के दरबन इलाके में आतंकियों ने एक पुलिस चौकी पर हमला किया, जिसमें एक पुलिस कांस्टेबल और एक मजदूर की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए।
यहां भी हुए आतंकी हमले
पुलिस ने बताया कि दूसरी घटना दक्षिण वजीरिस्तान जिले के आजम वारसाक इलाके में हुई, जहां मोटरसाइकिल में रखे बम के फटने से एक बच्चे की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए। पुलिस के मुताबिक एक और घटना बन्नू जिले के मामाखेल इलाके में हुई, जहां सड़क किनारे बम फटने से कम से कम पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए।
क्या कहते हैं आंकड़े
इससे पहले सोमवार को जारी एक आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा बलों ने 2024 में 270 आतंकियों को मार गिराया, जिनमें इनाम वाले बड़े आतंकी भी शामिल हैं। प्रांतीय सूचना निदेशालय द्वारा जारी पुलिस विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, प्रांतीय पुलिस ने ऑपरेशन के दौरान 802 संदिग्धों को गिरफ्तार किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल ड्यूटी के दौरान 149 पुलिस अधिकारी मारे गए और 232 घायल हुए।
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