राजनीति
पलटफोर्म X पर जानकारी साझा करते अमित शाह ने दी ख़ुशख़बरी! हुर्रियत से जुड़े दो और समूहों ने त्यागा अलगाववाद
27 Mar, 2025 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद से जम्मू-कश्मीर लगातार बदलाव की राह पर है। इसी कड़ी में आज कश्मीर से एक बड़ी खबर आई है। हुर्रियत से जुड़े दो समूहों ने अलगाववाद छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया है। गृह मंत्री अमित शाह ने खुद सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी है। हुर्रियत से जुड़े दो और समूहों जम्मू-कश्मीर तहरीक-ए-इस्तिकलाल और जम्मू-कश्मीर तहरीक-ए-इस्तिकमत ने अलगाववाद छोड़ दिया है।
JKPM और JKDPM ने भी छोड़ा अलगाववाद
बता दें कि इससे पहले हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के दो घटक दलों जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट (JKPM) और J&K डेमोक्रेटिक पॉलिटिकल मूवमेंट (JKDPM) ने अलगाववाद से अपने सभी नाता तोड़ने का ऐलान किया था। इसका ऐलान भी गृह मंत्री अमित शाह ने किया था। उन्होंने कहा था कि इससे भारत की एकता मजबूत होगी। बता दें कि JKPM का नेतृत्व शाहिद सलीम करते हैं, जबकि JKDPM का नेतृत्व वकील शफी रेशी करते हैं।
संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ ली
सलीम ने एक बयान में कहा कि उन्होंने खुद को और अपने संगठन को अलगाववादी विचारधारा से अलग कर लिया है और भारत और संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ ली है। सलीम ने यहां एक बयान में कहा, "मैं भारत का एक वफादार नागरिक हूं और मैं और मेरा संगठन दोनों भारत के संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ लेते हैं।" सलीम और रेशी के फैसलों का स्वागत करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा कि यह कदम भारत की एकता को मजबूत करेगा और मोदी सरकार की एकीकरण नीतियों ने जम्मू-कश्मीर से अलगाववाद को 'खत्म' कर दिया है।
अलगाववादी समूहों पर प्रतिबंध
ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (एपीएचसी) जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों का एक समूह है। इसके अधिकांश घटकों पर सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है। सलीम ने अपने संदेश में कहा कि उन्हें और उनके संगठन को 'ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस' की विचारधारा से कोई सहानुभूति नहीं है, जो जम्मू-कश्मीर के लोगों की वैध आकांक्षाओं और शिकायतों को दूर करने में सक्षम नहीं है। सलीम ने कहा, "मैं भारत का एक वफादार नागरिक हूं। मेरा संगठन और मैं किसी ऐसे संगठन या एसोसिएशन से जुड़े नहीं हैं, जिसका एजेंडा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भारत और उसके हितों के खिलाफ हो। मेरा संगठन और मैं दोनों ही भारत के संविधान के प्रति वफादार हैं।"
तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन ने योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोला
27 Mar, 2025 01:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में तमिलनाडु की डीएमके सरकार को भाषा नीति और परिसीमन विवाद के मुद्दे पर घेरा। जिस पर तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन ने योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोला और कहा कि योगी आदित्यनाथ कॉमेडी कर रहे हैं। अब इस पर तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष के अन्नामलाई ने तमिलनाडु सीएम स्टालिन पर पलटवार किया है। अन्नामलाई ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि 'थिरु एमके स्टालिन, आप हमारे संविधान के और संघीय ढांचे के रक्षक के रूप में एक ठग कलाकार हैं। आमतौर पर ठग अमीरों को लूटते हैं, लेकिन डीएमके इस मामले में कोई भेदभाव नहीं करती और वे अमीर और गरीब दोनों को लूटते हैं। अब पूरा देश जानता है कि तमिलनाडु के सीएम के परिवार के कई निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं, जिनमें तीन भाषाएं पढ़ाई जाती हैं, लेकिन इसे सरकारी स्कूलों में सभी छात्रों के लिए लागू करने का विरोध किया जा रहा है। लोग आपको पाखंडी कह रहे हैं।'
अन्नामलाई ने कहा कि 'तमिलनाडु के सीएम को लगता है कि उनके पार्टी के लोगों द्वारा यहा-वहां किए गए नाटक पूरे तमिलनाडु की आवाज को दर्शाते हैं। यह भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि आपको अभी तक अहसास नहीं हुआ है कि लोगों का ध्यान महत्वहीन मामलों पर भटकाने के आपके प्रयासों का पर्दाफाश हो चुका है। अपनी अज्ञानता की दुनिया में जीते रहिए। हम आपको परेशान नहीं करेंगे।'
संसद में बोलने की इजाजत न दिए जाने के राहुल गांधी के दावे के सियासी गलियारे में जुबानी जंग तेज
27 Mar, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने गुरुवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी को संसद में बोलने की कथित अनुमति न देने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की आलोचना की। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक समय करार दिया। एएनआई से बात करते हुए संजय राउत ने कहा, 'राहुल गांधी लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष हैं। अगर ऐसे नेता को स्पीकर संसद के अंदर बोलने की अनुमति नहीं देते हैं, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक समय नहीं तो और क्या है। अगर आपको विपक्ष को चुप कराना है तो आप संसद क्यों चला रहे हैं?'
उन्होंने लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका पर जोर देते हुए कहा, 'विपक्ष लोकतंत्र की आवाज है। अगर आप उस आवाज को ही चुप करा देंगे, तो एक दिन आप संसद भी बंद कर सकते हैं।' यह बयान उस समय आया है, जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया था कि उन्हें सदन में बोलने की अनुमति नहीं दी गई।
क्या है मामला?
दरअसल, बीते दिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी को सख्त हिदायत दी थी। उन्होंने कांग्रेस नेता से सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए नियमों का पालन करने को कहा था। इस पर राहुल की ओर से कहा गया कि मैंने तो कुछ भी नहीं बोला, मैं तो चुपचाप बैठा था। विपक्ष को बोलने ही कहा दिया जाता है।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
इतना कहकर सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। इस दौरान सदन से बाहर आए लोकसभा नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, 'एक कन्वेंशन है कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने दिया जाता है। मैं जब भी खड़ा होता हूं तो मुझे बोलने नहीं दिया जाता। मैं नहीं जानता कि सदन किस प्रकार चल रहा है। यहां हम जो कहना चाहते हैं, हमें कहने नहीं दिया जाता है। मैंने कुछ नहीं किया, मैं बिल्कुल शांति से बैठा था। लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष की जगह होती है, लेकिन यहां विपक्ष की कोई जगह नहीं है। यहां केवल सरकार की जगह है। उस दिन प्रधानमंत्री मोदी ने कुंभ मेले के बारे में बोला, जिसमें मैं अपनी बात जोड़ना चाहता था। मैं बेरोजगारी के बारे में कुछ कहना चाहता था लेकिन मुझे नहीं बोलने दिया गया...।'
लोकसभा अलोकतांत्रिक तरीके से चल रही: राहुल
विपक्ष के नेता ने दावा किया कि उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा है और सदन को अलोकतांत्रिक तरीके से चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष ने उनके बारे में टिप्पणी की और फिर उन्हें बोलने का मौका दिए बिना सदन को स्थगित कर दिया। पिछले सप्ताह उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी गई थी।
संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण जारी
27 Mar, 2025 11:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण जारी है। संसद सत्र के दौरान काफी हंगामा देखने को मिला है। आज भी हंगामे के आसार हैं। बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी को संसद में सही आचरण करने की नसीहत दी तो राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उन्हें संसद में बोलने नहीं दिया जा रहा। साथ ही जज के घर से नकदी मिलने का मामला भी खूब गरमाया हुआ है।
सड़कों पर नमाज वाली प्रथा किसने शुरू की?
भाजपा सांसद रवि किशन ने संभल SDM के बयान पर कहा, 'जनमानस को तकलीफ न देते हुए, अपने त्योहारों को मनाएं। जितने भी आलिम और मौलाना हैं, वे सभी कहते हैं कि नमाज़ मस्जिद में कबूल होती है। सड़को वाली प्रथा किसने शुरू की है?'
संसद की कार्यवाही शुरू
संसद की कार्यवाही शुरू हो गई है। लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सवालों के जवाब दे रहे हैं।
'राहुल गांधी को जवाब देने का अधिकार'
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान पर शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, 'यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और भाजपा की ओर से लगभग दोहराया जाने वाला कथन बन गया है, जब भी वे नहीं चाहते कि सदन चले, वे सबसे हास्यास्पद आरोप लगाते हैं। पिछली बार भी जब दोनों सदन स्थगित हो गए थे, तो किसी को नहीं पता था। वे (राहुल गांधी) विपक्ष के नेता हैं। उन्हें जवाब देने का अधिकार है।' लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान पर शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा, 'राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं... अगर ऐसे नेता को स्पीकर संसद के अंदर बोलने की अनुमति नहीं देते हैं, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक समय है... फिर आप संसद क्यों चला रहे हैं, अगर आपको विपक्ष को चुप कराना है... विपक्ष लोकतंत्र की आवाज है... अगर आप उस आवाज को चुप कराएंगे तो एक दिन आप संसद को बंद कर देंगे।'
सैलरी बढ़ने पर जब सवाल उठने पर मोदी सरकार की तरफ से मामले में सफाई आई
26 Mar, 2025 09:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सांसदों की सैलरी बढ़ने पर जब सवाल उठने पर मोदी सरकार की तरफ से मामले में सफाई आ गई है। मोदी सरकार ने कहा है कि वेतन वृद्धि महंगाई के कारण हुई है। यह 2018 की नीति के मुताबिक हुई है। इस नीति में सैलरी को महंगाई के साथ जोड़ने का नियम है। सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार का कहना है कि 2018 में बनाया गया नियम सही और पूरी तरह पारदर्शी है। इस नियम के कारण मनमाने तरीके से सैलरी नहीं बढ़ सकती और आर्थिक मामलों में सावधानी बरती होती है। दरअसल, वित्त अधिनियम 2018 में सांसदों के वेतन, भत्ते और पेंशन अधिनियम 1954 में बदलाव किया। बदलाव के बाद सांसदों की सैलरी महंगाई के साथ जोड़ दी गई।
साल 2018 में हुई बदलावों के बाद इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत प्रकाशित कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (सीआईआई) का इस्तेमाल होता है। सूत्रों के मुताबिक इस बदलाव से पहले, वेतन वृद्धि अचानक होती थी। हर बार संसद से मंजूरी लेनी पड़ती थी। तब बदलाव के पीछे प्रक्रिया को गैर राजनीतिक बनाने और वेतन समायोजन के लिए तंत्र बनाने का तर्क दिया गया था। साल 2018 से पहले आखिरी बार सैलरी में बदलाव 2010 में हुआ था। तब संसद ने सांसदों का मासिक वेतन 16 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये करने का बिल पास किया था। इस फैसले की लोगों ने बहुत आलोचना की थी। तब लोगों ने कहा था कि सांसद खुद को 3 गुना वेतन दे रहे हैं।
हालांकि, कुछ नेताओं ने सैलरी 5 गुना तक बढ़ाने की मांग की थी। इसमें मुलायम सिंह यादव और लालू प्रसाद यादव शामिल थे। मुलायम और लालू सहित कई नेताओं का कहना था कि महंगाई बहुत बढ़ गई है इसलिए वेतन भी बढ़ना चाहिए। अब सरकार का मानना है कि 2018 में जो नियम बनाया गया है, वह सबसे अच्छा है। इससे सैलरी में बढ़ोतरी अपने आप हो जाती है।
बिरला ने राहुल गांधी को सदन में मर्यादा में रहने की हिदायत दी
26 Mar, 2025 08:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जब भी मैं सांसद में बोलेने के लिए खड़ा होता हूं, मुझे बोलने नहीं दिया जाता। दरअसल राहुल गांधी ने ये टिप्पणी तब की जब सदन में बोलने के लिए खड़े होने के बाद भी उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया। जैसे ही वे बोलने के लिए खड़े हुए, सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। साथ ही लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने उन्हें सदन के नियमों का पालन करने की नसीहत दी। वहीं इस पर राहुल गांधी अपनी बात रख पाते अध्यक्ष ने कार्यवाही को स्थगित कर दिया।
इसके पहले लोकसभा स्पीकर ने राहुल गांधी से कहा कि सदन के आचरण और मर्यादा का पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ घटनाएं ऐसी आई हैं, जो सदन के लिहाज से ठीक नहीं थीं, और इसलिए उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में राहुल सदन की गरिमा का पालन करे।
राहुल गांधी के आचरण को लेकर यह टिप्पणी दी गई थी, विशेष रूप से तब जब उन्होंने सदन में बीच-बीच में प्रदर्शन कर कुछ टिप्पणियां कीं। बिरला ने यह सुनिश्चित करने की अपील की कि सदन में सभी सदस्य उचित आचरण का पालन करें।
सोनिया गांधी ने राज्यसभा में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत कम बजट मिलने का आरोप लगाया
26 Mar, 2025 04:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने बुधवार को राज्यसभा में सरकार पर प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत बहुत कम बजट आवंटित करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इसके तहत गर्भवती महिलाओं को दिए जाने वाले वित्तीय लाभ की पूरी राशि प्रदान की जानी चाहिए। शून्यकाल में इस मुद्दे को उठाते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत महिलाओं को मातृत्व लाभ प्रदान नहीं किया जा रहा है।
'केवल 5000 रुपये देने का प्रावधान किया गया'
सोनिया ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में संसद ने सितंबर 2013 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम पारित किया था। कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का आधार यही था। उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत अनौपचारिक क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को 6000 रुपये दिए जाने थे। उन्होंने कहा कि 2017 में शुरू की गई प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में यह अधिकार प्रदान किया जाना था, लेकिन इसके तहत ऐसी महिलाओं को केवल 5000 रुपये देने का प्रावधान किया गया। इसमें दूसरे बच्चे के जन्म पर भी ऐसी सहायता देने की बात कही गई, बशर्ते वह बच्चा लड़की हो।
'12000 करोड़ रुपये के बजट की जरूरत'
सोनिया ने कहा कि 2022-23 में किए गए विश्लेषण के अनुसार, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत 68 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को पहले बच्चे के जन्म के अवसर पर पहली किस्त प्रदान की गई। उन्होंने कहा कि लेकिन अगले ही वर्ष इसमें भारी गिरावट आई और यह केवल 12 प्रतिशत रह गई। उन्होंने सरकार से जानना चाहा कि ऐसा क्यों होने दिया गया? उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत मातृत्व लाभ को पूरी तरह से लागू करने के लिए सालाना 12,000 करोड़ रुपये के बजट की जरूरत होगी।
कांग्रेस नेता ने इस पर आश्चर्य व्यक्त किया
सोनिया ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि बजट दस्तावेजों में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत किए गए आवंटन का अलग से उल्लेख नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत इसके लिए एक कार्यक्रम ‘समर्थ’ है, जिसके लिए वर्ष 2025-26 में कुल बजटीय आवंटन 2521 करोड़ रुपये है। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए बहुत कम बजट उपलब्ध कराया जा रहा है।
लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष के लिए जगह होती है लेकिन यहां विपक्ष के लिए कोई जगह नहीं', लोकसभा पर आरोप लगते राहुल
26 Mar, 2025 03:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लोकसभा में बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि उन्हें लोकसभा में बोलने नहीं दिया जा रहा है. राहुल गांधी ने कहा, 'एक परंपरा है कि विपक्ष के नेता को बोलने दिया जाता है. जब भी मैं खड़ा होता हूं, मुझे बोलने नहीं दिया जाता. मुझे नहीं पता कि सदन कैसे चल रहा है।
राहुल ने और क्या कहा?
राहुल ने कहा, 'यहां हमें वो नहीं कहने दिया जाता जो हम कहना चाहते हैं. मैंने कुछ नहीं किया, मैं बहुत शांति से बैठा था. लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष के लिए जगह होती है लेकिन यहां विपक्ष के लिए कोई जगह नहीं है. यहां सिर्फ सरकार के लिए जगह है. उस दिन प्रधानमंत्री मोदी ने कुंभ मेले के बारे में बात की, जिसमें मैं अपनी बात जोड़ना चाहता था. मैं बेरोजगारी के बारे में कुछ कहना चाहता था लेकिन मुझे बोलने नहीं दिया गया।
लोकसभा में सांसदों के आचरण को लेकर स्पीकर ने दी नसीहत
खबर यह भी है कि लोकसभा में सांसदों के आचरण को लेकर स्पीकर ने नसीहत दी है. दरअसल, दो दिन पहले राहुल गांधी ने अपनी बहन प्रियंका गांधी से अजीबोगरीब अभिवादन किया था. इस पर स्पीकर की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई. इसके बाद कांग्रेस सांसदों ने भी सदन में कहा कि जब पीएम सदन में आते हैं तो बीजेपी के सभी सांसद खड़े हो जाते हैं, यह सदन का अपमान है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का बयान सामने आया
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा, 'आपसे सदन की मर्यादा और शालीनता के उच्च मानदंडों को बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है. मेरी जानकारी में ऐसे कई मामले हैं, जब सांसदों का आचरण सदन की मर्यादा और परंपराओं के उच्च मानदंडों को बनाए रखने के अनुरूप नहीं था. पिता, बेटी, मां, पत्नी और पति इस सदन के सदस्य रहे हैं. इसलिए, इस संदर्भ में मैं विपक्ष के नेता से नियमों के अनुसार आचरण करने की अपेक्षा करता हूं. विपक्ष के नेता से विशेष रूप से अपने आचरण को बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है।
आज तक महात्मा गांधी के सपने को पूरा क्यों नहीं किया गया? राहुल गांधी को तंज कसते हुए बोले सीएम योगी
26 Mar, 2025 02:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लोकसभा में विपक्ष के नेता, राहुल गांधी को एक 'नमूना' के रूप में वर्णित करते हुए, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि पार्टी अयोध्या में 'विवाद' को जीवित रखना चाहती है। एएनआई को एक साक्षात्कार में, मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने पिछले दस दशकों में कांग्रेस द्वारा किए गए काम पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, 'एक भारत को श्रेष्ठ भारत नहीं होना चाहिए? तो आपको उनसे पूछना चाहिए कि वे छह से दस दशकों से क्या कर रहे थे? उन्हें अपने दादा, दादी और पिता से पूछना चाहिए था। उस समय उसने ऐसा क्यों नहीं किया? पूरे भारत को मोदी जी का समर्थन मिल रहा है। कांग्रेस ने ऐसा क्यों नहीं किया? वह हमेशा अयोध्या विवाद को विवाद बने रहना चाहता था। "
'मोदी जी ने गांधी के सपनों को पूरा किया'
सीएम योगी ने कहा, "काशी की संकीर्ण सड़क में, वह गांधीजी के नाम पर अपना सारा जीवन राजनीति कर रहे हैं। लेकिन 1916 में, गांधी ने काशी की संकीर्ण सड़क पर एक मजबूत टिप्पणी की। अयोध्या, राम मंदिर भी बनाया गया है।
भारत की यात्रा पर सीएम योगी का ताना
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी के 'भारत जयर यात्रा' को 'भारत कोषो अभियान' बताया और कहा कि सभी को उनके इरादों से अवगत कराया गया है। उन्होंने कहा, "भरत जीनो यात्रा भारत ब्रेको अभियान का हिस्सा है। वह भारत के बाहर भारत की आलोचना करता है। देश ने अपने स्वभाव और इरादों को समझा है। भारत की राजनीति में, भरतिया जनता पार्टी के लिए राहुल जैसे कुछ नाम होने चाहिए, जिसमें एक रास्ता साफ और अच्छा है।" आइए हम आपको बताते हैं कि राहुल गांधी की भारत जीटो यात्रा 130 दिनों में 3,970 किमी की यात्रा की और 12 राज्यों और दो केंद्र क्षेत्रों को कवर किया।
सीएम योगी ने एसपी पर हमला किया
उत्तर प्रदेश के सीएम ने कांग्रेस के सहयोगी और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर भी हमला किया और कहा कि जिन्ना की प्रशंसा करने वालों को इतिहास नहीं पढ़ाना चाहिए। सीएम योगी ने कहा, "यह हमारी संस्कृति में कहा गया है कि जो कुछ भी पूजा जाता है, हम राम, कृष्ण, शिव का सम्मान करते हैं, उनकी पूजा करते हैं। इसलिए एक तरह से उनकी अच्छाई भी हमारे साथ है। सीएम योगी ने आगे कहा, "हम जिन्ना की महिमा करने वालों के इतिहास को जानते हैं। हमें याद है कि इस उत्तर प्रदेश में, हम जनायक वल्लभभाई पटेल की एकता के लिए अभियान कार्यक्रम में शामिल हो रहे थे। हमने इसके लिए देश के सभी लोगों को आमंत्रित किया था। हम बजेड और सभी पार्टियों को आमंत्रित करते थे। औरंगज़ेब और जिन्ना "तो देश के प्रति उनकी भावनाएं क्या होंगी? भारत की विरासत के प्रति उनकी भावनाएं क्या होंगी? भारत के महापुरुषों के प्रति उनकी भावनाएं क्या होंगी? इसे से देखा जा सकता है। और ये लोग अवसरवादी हैं। "
जिन्ना पर अखिलेश यादव का बयान
नवंबर 2021 में, समाजवादी पार्टी के प्रमुख ने कहा, "राष्ट्र महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और (मुहम्मद अली) के पिता सरदार पटेल ने एक ही संस्थान में अध्ययन किया और एक बैरिस्टर बन गए। उन्होंने (भारत) ने स्वतंत्रता लाने में मदद की और कभी भी किसी भी संघर्ष से पीछे हटने में मदद की।"
कुणाल कामरा विवाद पर सीएम योगी ने क्या कहा?
स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने महाराष्ट्र के उप -मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से विवाद उठाया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पर तेजी से प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब किसी पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किया जाना नहीं है। उन्होंने कहा कि कानून को ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए जो देश में मतभेद पैदा कर रहे हैं।
'कानून को ऐसे लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए'
एएनआई को एक साक्षात्कार में, सीएम योगी ने कहा, "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कानून के दायरे में है। यह संवैधानिक मूल्यों के दायरे में होना चाहिए। और उस दायरे के भीतर, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता। आपके व्यक्तित्व की स्वतंत्रता का उपयोग किसी और पर हमला करने के लिए नहीं किया जा सकता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोगों ने देश को विभाजित करने और विस्तार करने के लिए इस व्यक्ति की स्वतंत्रता पर विचार किया है।"
‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ : मानसून सत्र तक बढ़ा जेपीसी का कार्यकाल
26 Mar, 2025 11:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के प्रावधान वाले दो विधेयकों पर विचार हेतु गठित संसद की संयुक्त समिति की रिपोर्ट सौंपने के लिए कार्यकाल मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक के लिए बढ़ाया गया। इस संयुक्त समिति के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद पीपी चौधरी ने समिति का कार्यकाल बढ़ाने का प्रस्ताव लोकसभा में रखा, इस सदन ने ध्वनमति से मंजूरी दे दी गई।
लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ करने के प्रावधान वाले ‘संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024’ और उससे जुड़े ‘संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2024’ पर संसद की 39 सदस्यीय संयुक्त समिति विचार कर रही है। समिति को बजट सत्र के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक रिपोर्ट देने को कहा गया था। इन विधेयकों को पिछले साल 17 दिसंबर को लोकसभा में पेश किया गया था।
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में नरेन्द्र मोदी सरकार ने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था और समिति ने अपनी रिपोर्ट में इस अवधारणा का जोरदार समर्थन किया था। इसके बाद, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया और मोदी सरकार ने लोकसभा में दो विधेयक पेश किए, जिनमें से एक संविधान संशोधन विधेयक भी है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भाजपा सांसद एवं पूर्व कानून राज्य मंत्री पी पी चौधरी की अध्यक्षता में 39 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति गठित की थी।
बता दें कि 1951 से 1967 तक लोकसभा और विधानसभा के चुनाव साथ होते थे। 1999 में विधि आयोग की रिपोर्ट में भी इसकी सिफारिश हुई थी। 2015 में संसदीय समिति की 79वीं रिपोर्ट में एक साथ चुनाव कराने के तरीके बताए गए। मोदी सरकार का कहना है कि एक साथ चुनाव कराने से खर्च और समय दोनों ही बचेगा।
बंगाल में हिंदू और हिंदी बोलने वालों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे, शुभेंदु अधिकारी का दावा
26 Mar, 2025 08:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता । भारतीय जनता पार्टी के सीनियर नेता शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने सोमवार को कहा कि टीएमसी मतदाता सूची से फर्जी मतदाताओं के नाम हटाने की आड़ में हिंदू और हिंदी भाषी मतदाताओं के नाम हटा रही है। संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए अधिकारी ने दावा किया कि 27 फरवरी के बाद से कई मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता अधिकारी ने कहा, 'हिंदू मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। मैं निर्वाचन आयोग से कृष्णानगर के बीडीओ को बर्खास्त करने का आग्रह करता हूं।'
राजद को लगा बड़ा झटका! लालू यादव की इफ्तार पार्टी में नहीं पहुंचा कोई कांग्रेस नेता
26 Mar, 2025 12:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार की राजनीति में इस समय सबसे बड़ी खबर है की लालू प्रसाद यादव की इफ्तार पार्टी में कांग्रेस के दिग्गज नदारद दिख रहे हैं. लालू प्रसाद यादव की इफ्तार पार्टी में कांग्रेस के बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. आपको बता दें की कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार और बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु इस इफ्तार में नहीं पहुंचे, जिससे सियासी गलियारों में राजद-कांग्रेस के रिश्तों में तनाव की अटकलें तेज हो गई हैं.
कांग्रेस नेताओं की गैरमौजूदगी पर राजद की चुप्पी
राजद के ओर से इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट जवाब फिलहाल नहीं आया है. वहीं जब इसके बारे में विधायक भाई वीरेंद्र से सवाल किया गया तो उन्होंने इस सवाल को टालते हुए कहा कि आप यह सवाल अब्दुल बारी सिद्दीकी से पूछें. वहीं, जब अब्दुल बारी सिद्दीकी से सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे रमजान के अंतिम दिनों में कांग्रेस नेताओं की व्यस्तता बताकर टाल दिया. हालांकि, कांग्रेस की विधायक प्रतिमा दास इफ्तार में शामिल हुईं, लेकिन बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी से चर्चा तेज हो गई.
वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी भी रहे नदारद
इस सियासी ड्रामे के बीच एक और बड़ा नाम विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख मुकेश सहनी भी इफ्तार में नहीं पहुंचे. इससे सियासी गलियारों में और हलचल मच गई. हालांकि, वीआईपी पार्टी की ओर से सफाई दी गई कि मुजफ्फरपुर में पहले से इफ्तार पार्टी आयोजित थी, इसलिए मुकेश सहनी वहां मौजूद रहे.
चिराग पासवान की इफ्तार में भी दिखी खास रणनीति
इधर, चिराग पासवान की इफ्तार पार्टी में भी मुस्लिम संगठनों की कम भागीदारी देखने को मिली, लेकिन बड़ी संख्या में आम लोग पहुंचे. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं चिराग की इफ्तार में पहुंचे, लेकिन लालू यादव की इफ्तार में कांग्रेस के दिग्गजों की अनुपस्थिति की चर्चा सबसे ज्यादा होती रही.
क्या कांग्रेस बना रही नई रणनीति?
बिहार कांग्रेस का प्रभारी बनाए जाने के बाद से कृष्णा अल्लावरु और अन्य कांग्रेस नेताओं ने लालू यादव से मुलाकात नहीं की है. यहां तक कि कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार ने भी पदभार संभालने के बाद लालू से मिलने की जरूरत नहीं समझी. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस अपनी रणनीति बदल रही है? क्या यह राजद पर दबाव बनाने की कोशिश है, या फिर कांग्रेस खुद को अलग राह पर ले जाने की तैयारी कर रही है?
चुनाव को लेकर पटना निर्वाचन कार्यालय में अहम बैठक
25 Mar, 2025 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। इस साल बिहार विधानसभा चुनाव होने हैं। अक्टूबर-नवंबर में चुनाव की संभावना है। इससे पहले चुनाव आयोग तैयारियों में जुट गया है। चुनाव को लेकर पटना निर्वाचन कार्यालय में अहम बैठक होगी। बैठक मुख्य निर्वाचन अधिकारी एचआर श्रीनिवास की अध्यक्षता में होगी, जिसमें जिलास्तरीय स्वीप नोडल अधिकारी भी शामिल होंगे। चुनाव में मतदाता सहभागिता बढ़ाने और जागरूकता अभियान तेज करने को लेकर रणनीति बनाई जाएगी।
निर्वाचन विभाग चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए विशेष रणनीति पर काम कर रहा है। इस संबंध में अवर सचिव प्रमोद कुमार पहले ही सभी जिलों के डीएम को पत्र भेज चुके हैं। बैठक में उन बूथों को तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा, जहां मतदान प्रतिशत में अंतर देखा गया है। कम मतदान वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देते हुए वहां मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। विभाग का प्रयास है कि वोटरों को ज्यादा से ज्यादा मतदान के लिए प्रेरित करें ताकि बिहार में वोटिंग प्रतिशत को राष्ट्रीय औसत तक लाया जा सके या उससे ऊपर बढ़ाया जा सके।
चुनाव आयोग के आंकड़े
2020 बिहार विधानसभा चुनाव- 57.34 फीसदी वोटिंग
2024 लोकसभा चुनाव- 56.28 फीसदी (मतदान में गिरावट)
2019 लोकसभा चुनाव (राष्ट्रीय औसत) – 67.40 अफीसदी
2024 लोकसभा चुनाव (राष्ट्रीय औसत) - 66.10 फीसदी
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और हास्य कलाकार कुणाल कामरा के बीच शुरू हुआ विवाद गहराता जा रहा
25 Mar, 2025 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और हास्य कलाकार कुणाल कामरा के बीच शुरू हुआ विवाद गहराता ही जा रहा है। इसको लेकर शिंदे ने कहा है कि हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है वहीं कुणाल कामरा ने अपनी विवादित टिप्पणी के लिए माफी मांगने से इनकार करते हुए फिर कई कटाक्ष किए हैं। इस बीच मुंबई पुलिस ने कामरा को उनके खिलाफ दर्ज प्रकरण के सिलसिले में खार पुलिस के सामने पेश होने को कहा है।
पुलिस ने कहा है कि कामरा को नोटिस जारी किया है। उनके खिलाफ मामले की जांच शुरू हो गई है। बता दें कि इस पूरे प्रकरण में एकनाथ शिंदे के साथ जिस तरह महाराष्ट्र के सीएम समेत गठबंधन के तमाम नेता मजबूती से खड़े हैं उससे उनके राजनीतिक कद में इजाफा हुआ है। वहीं एकनाथ शिंदे की ओर से कुणाल कामरा की विवादित टिप्पणी पर पहली प्रतिक्रिया आइई है। बता दें कि उन्होंने उन पर किए गए कटाक्ष की तुलना ‘‘सुपारी लेकर किसी के खिलाफ बोलने’’ से की है। उन्होंने कहा है कि कटाक्ष करते समय मर्यादा बनाए रखनी चाहिए, अन्यथा क्रिया की प्रतिक्रिया होती है।
बता दें सोमवार को शिंदे ने महाराष्ट्र विधानसभा में भाषण देते हुए कहा था कि उन्होंने अपने कॅरियर में शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के 80 फीसदी सामाजिक कार्य और 20 फीसदी राजनीति के सिद्धांत का पालन किया है। शिंदे की यह टिप्पणी राज्य विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद आई है, जिसमें उन्हें इस महीने की शुरुआत में वारकरी समुदाय के प्रतिष्ठित पुरस्कार आद्य जगतगुरु श्री संत तुकाराम महाराज पुरस्कार प्राप्त करने पर बधाई दी गई थी। यह प्रस्ताव स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा द्वारा शिवसेना नेता शिंदे के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी को लेकर उठे विवाद के बीच आया है।
संत तुकाराम के नाम पर पुरस्कार प्राप्त करने के लिए उन्हें बधाई देने वाले प्रस्ताव पर अपने जवाब में शिंदे ने कहा कि यह पुरस्कार राज्य की जनता का है और वह इसे जनता को समर्पित करते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के तौर पर मैंने जो काम किया, उसकी वजह से बीजेपी, शिवसेना और राकांपा वाली महायुति को भारी जीत मिली। हम लोगों के लिए काम करना जारी रखेंगे। हमारी जिम्मेदारी बढ़ गई है।
आपदा प्रबंधन संशोधन बिल से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए अमित शाह बोले- मैनुअल से मॉनिटरिंग एआई आधिरित होंगे अपग्रेड
25 Mar, 2025 08:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को राज्यसभा में आपदा प्रबंधन संशोधन विधेयक 2024 से जुड़े सवालों के जवाब दिए. उन्होंने इस विधेयक के अहम बिंदुओं का जिक्र किया. उन्होंने यह भी बताया कि यह संशोधन क्यों जरूरी है. अपने जवाब में अमित शाह ने विपक्ष पर भी कटाक्ष किया और कहा कि अगले 15-20 साल तक किसी की बारी नहीं आने वाली है. अमित शाह ने कहा कि आपदा प्रबंधन संशोधन विधेयक के जरिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए), जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की जिम्मेदारियों को नए सिरे से परिभाषित किया गया है. चिंता है कि सत्ता का केंद्रीकरण होगा. लेकिन अगर आप इस पूरे विधेयक को पढ़ेंगे तो आपको पता चलेगा कि डीडीएमए के पास सबसे ज्यादा ताकत होगी. ऐसे में कहीं से भी केंद्र बढ़ाने की बात नहीं है. अमित शाह ने कहा, "आपदा प्रबंधन अधिनियम सबसे पहले 2005 में लागू किया गया था। इसके तहत एनडीएमए, एसडीएमए और डीडीएमए का गठन किया गया... अब चिंता जताई जा रही है कि सत्ता का केंद्रीकरण हो जाएगा। अगर आप पूरे विधेयक को ध्यान से पढ़ेंगे तो क्रियान्वयन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जिला आपदा प्रबंधन की है, जो राज्य सरकार के अधीन है, इसलिए संघीय ढांचे को कहीं भी नुकसान पहुंचाने की संभावना नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि कुछ सदस्यों ने सवाल उठाया कि संशोधन की क्या जरूरत है। मैं उनसे कहना चाहता हूं कि अगर समय रहते किसी इमारत की मरम्मत नहीं की जाती है तो वह गिर जाती है... उन्हें लगता है कि शायद वे आकर इसे बदल देंगे लेकिन अगले 15-20 साल तक किसी की बारी नहीं आएगी। जो भी करना है, हमें खुद ही करना है..."
आपदा प्रबंधन में संशोधन की क्या जरूरत है
नई तरह की आपदाएं आती रहती हैं, दुनिया की बेहतरीन प्रथाओं को शामिल करके बदलाव किए जा रहे हैं, तो इसमें गलत क्या है। अगर उनकी मंशा हमारे सत्ता में आने पर बदलाव करने की है, तो बहुत देर हो चुकी है। 15-20 साल तक कोई नहीं आने वाला है। उन्होंने यह भी कहा कि इस संशोधन के जरिए हम मैनुअल मॉनिटरिंग से एआई आधारित मॉनिटरिंग की ओर बढ़ने जा रहे हैं। अमित शाह ने कहा कि इस संशोधन से पहले हमने अंतरराष्ट्रीय संगठनों से भी सुझाव लिए हैं। हमने घरेलू और विदेशी एनजीओ से भी सुझाव लिए हैं। जिसके बाद हम यह संशोधन विधेयक लेकर आए हैं। उन्होंने कहा कि इस संशोधन के जरिए भारत के गांवों से राजधानी दिल्ली तक आने वाली किसी भी आपदा का बेहतर तरीके से प्रबंधन किया जा सकेगा।
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