तमिलनाडु में सियासी ड्रामा: बहुमत साबित करने की शर्त पर अड़े राज्यपाल राजेंद्र
चेन्नई: तमिलनाडु की सत्ता की चाबी किसके हाथ लगेगी, इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में बेचैनी बढ़ती जा रही है। टीवीके के अध्यक्ष विजय ने एक बार फिर राजभवन का रुख किया, जहाँ उनकी मुलाकात राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से हुई। हालांकि, राजभवन की ओर से फिलहाल कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है क्योंकि राज्यपाल ने स्पष्ट कर दिया है कि सत्ता के शिखर तक पहुँचने के लिए केवल सबसे बड़ा दल होना काफी नहीं है। राज्य की स्थिरता को सर्वोपरि रखते हुए प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि सरकार बनाने की अनुमति तभी मिलेगी जब विधानसभा में संख्या बल का ठोस प्रमाण प्रस्तुत किया जाएगा।
बहुमत के गणित में उलझा सत्ता का समीकरण
तमिलनाडु की 234 सीटों वाली विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 के जादुई आंकड़े की जरूरत है, जिसके करीब पहुँचने के लिए टीवीके को अभी कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। अप्रैल में हुए चुनावों में विजय की पार्टी 108 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी, लेकिन विजय के दो सीटों से चुनाव जीतने और नियमानुसार एक सीट छोड़ने के फैसले के बाद उनकी प्रभावी संख्या घटकर 107 रह गई है। इस स्थिति में राजभवन किसी भी प्रकार की जल्दबाजी के मूड में नहीं है और वह चाहता है कि कोई भी दावा पेश करने से पहले विधायकों का समर्थन पूरी तरह स्पष्ट हो।
कांग्रेस के समर्थन के बाद भी बढ़ी मुश्किलें
टीवीके के लिए राहत की बात यह रही कि कांग्रेस ने डीएमके का साथ छोड़कर विजय को अपना समर्थन देने का एलान किया, जिससे गठबंधन की ताकत में थोड़ा इजाफा हुआ है। कांग्रेस के पांच विधायकों के जुड़ने के बाद भी विजय का कुल आंकड़ा 112 तक ही पहुँच पाया है, जो अभी भी बहुमत की निर्धारित सीमा से छह कदम दूर है। राज्यपाल ने स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि वह महज मौखिक दावों या अधूरे समर्थन पत्रों के आधार पर शपथ ग्रहण की अनुमति नहीं देंगे, क्योंकि उनका मुख्य उद्देश्य राज्य को एक स्थिर और टिकाऊ सरकार देना है।
राजभवन की सख़्ती और भविष्य की रणनीति
राजभवन के इस कड़े रुख के बीच टीवीके के नेता वीएस बाबू ने सकारात्मक संकेत देते हुए कहा है कि सरकार बनाने की प्रक्रिया जल्द ही गति पकड़ेगी। हालांकि, जब उनसे केंद्र सरकार के संभावित हस्तक्षेप या राजनीतिक दबाव के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इस पर चुप्पी साधना ही बेहतर समझा। फिलहाल सभी की निगाहें विजय के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह उन बचे हुए छह विधायकों का समर्थन कहाँ से और कैसे जुटाते हैं, ताकि तमिलनाडु में जारी इस राजनीतिक गतिरोध को समाप्त किया जा सके और नई सरकार का गठन हो सके।
राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति भारत की तत्परता का प्रतीक है ऑपरेशन सिंदूर: रक्षामंत्री
तमिलनाडु में सियासी ड्रामा: बहुमत साबित करने की शर्त पर अड़े राज्यपाल राजेंद्र
हाईटेंशन टावर पर चढ़े युवक को बचाने चला घंटों रेस्क्यू ऑपरेशन
केरल में CM रेस तेज, खड़गे के फैसले पर टिकी सबकी नजरें
नई रणनीति, नया जोश… पंजाब चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं को बड़ा संदेश
ट्रंप बोले- युद्ध समाप्त करने को लेकर ईरान के साथ अच्छी बातचीत हुई है
यमुना नदी में नाव पलटने से 6 लोग लापता, तीन के शव बरामद
सरकार गठन से पहले तमिलनाडु में रिसॉर्ट पॉलिटिक्स तेज, MLA टूटने की आशंका
नकली नोट मामले में बड़ा खुलासा, पुलिस कर रही गहन जांच
