शपथ ग्रहण के बाद PM मोदी का शिवराज को संदेश, राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान इन दिनों अपनी आने वाली किताब ‘अपनापन’ को लेकर सियासी गलियारों में काफी चर्चा बटोर रहे हैं। इस पुस्तक में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने साढ़े तीन दशकों के प्रगाढ़ संबंधों, उतार-चढ़ाव भरे राजनीतिक सफर और कई ऐसे गुप्त अनुभवों व ऐतिहासिक फैसलों का जिक्र किया है, जो अब तक आम जनता के सामने नहीं आए थे। शिवराज सिंह ने राजनीति के पर्दे के पीछे की कई दिलचस्प कहानियां बयां की हैं। किताब का एक पूरा अध्याय मध्य प्रदेश में हुए सत्ता परिवर्तन और डॉ. मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाए जाने के घटनाक्रम पर आधारित है, जिसके तुरंत बाद पीएम मोदी ने शिवराज को दिल्ली बुलाने का मन बना लिया था।
दिसंबर 2023 के शपथ ग्रहण समारोह का वो अनसुना किस्सा
शिवराज सिंह चौहान की इस किताब में सबसे ज्यादा सुर्खियां उस वाकये को मिल रही हैं, जब दिसंबर 2023 में भोपाल में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह चल रहा था। उस मंच पर एक तरफ डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री पद का दायित्व संभाल रहे थे, तो दूसरी तरफ सूबे की कमान छोड़ चुके शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद थे। किताब के अनुसार, मुख्य कार्यक्रम के संपन्न होने के बाद खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, शिवराज के पास पहुँचे और बेहद धीमे स्वर में उनसे कहा, "शिवराज, थोड़ा वक्त निकालिए और दिल्ली आइए, आपसे कुछ जरूरी चर्चा करनी है।"
6 महीने पहले ही तय हो गई थी केंद्र में बड़ी भूमिका
शिवराज ने अपनी किताब में लिखा है कि उस वक्त उन्हें बिल्कुल भी भनक नहीं थी कि शीर्ष नेतृत्व उनके भविष्य को लेकर क्या खाका तैयार कर चुका है। लेकिन जब करीब छह महीने बाद, 9 जून 2024 को उन्हें केंद्रीय कैबिनेट में शामिल कर कृषि और ग्रामीण विकास जैसे भारी-भरकम मंत्रालयों का जिम्मा सौंपा गया, तब उन्हें समझ आया कि प्रधानमंत्री ने उसी दिन उनका अगला पड़ाव तय कर दिया था। साफ है कि मध्य प्रदेश में लगातार 18 वर्षों तक नेतृत्व करने वाले शिवराज सिंह चौहान की अगली भूमिका क्या होगी, इसका निर्णय भाजपा और पीएम मोदी बहुत पहले ही ले चुके थे, जिसके लिए सिर्फ लोकसभा चुनावों का इंतजार किया जा रहा था। बाद में शिवराज को उनकी पारंपरिक सीट विदिशा से चुनावी मैदान में उतारा गया और वहाँ से बंपर जीत के बाद वे दिल्ली की सक्रिय राजनीति का हिस्सा बने।
1991 की 'एकता यात्रा' से शुरू हुआ था दोनों नेताओं का सफर
इस किताब में केवल राजनीतिक पैंतरेबाज़ी नहीं है, बल्कि दोनों नेताओं के मध्य अटूट विश्वास और व्यक्तिगत रिश्तों की गहराई को भी दर्शाया गया है। शिवराज बताते हैं कि नरेंद्र मोदी से उनकी पहली मुलाकात साल 1991-92 में आयोजित हुई 'एकता यात्रा' के दौरान हुई थी। उसी दौर में दोनों के बीच सांगठनिक जुड़ाव मजबूत हुआ, जो आगे चलकर संगठन से सरकार तक के सफर में और गहराता चला गया। उन्होंने प्रधानमंत्री की कार्यप्रणाली, सख्त अनुशासन और विपरीत परिस्थितियों में निर्णय लेने की अद्भुत क्षमता की सराहना करते हुए लिखा है कि मोदी की असली ताकत केवल उनकी योजनाएं नहीं, बल्कि जनता का उन पर अटूट विश्वास है।
पहलगाम हमले की घटना के बाद आया किताब लिखने का विचार
सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, शिवराज सिंह चौहान ने इस बात का भी उल्लेख किया है कि हाल ही में हुए पहलगाम हमले के बाद उनके मन में इस संस्मरण को पुस्तक का रूप देने का विचार आया। उस वक्त पीएम मोदी एक विदेशी दौरे पर थे, लेकिन देश में हुए इस आतंकी हमले की खबर मिलते ही उन्होंने अपने तय कार्यक्रमों को बीच में ही विराम दिया और तुरंत भारत लौटने का फैसला किया। प्रधानमंत्री के इस त्वरित और संवेदनशील कदम ने शिवराज सिंह को गहराई से प्रभावित किया, जिसके बाद उन्होंने इस किताब को कलमबद्ध करने का निर्णय लिया।
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